कौशल किशोर चतुर्वेदी –
मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा में वह भारी भरकम चेहरे शामिल हैं, जिनकी उपस्थिति माहौल को गरिमामय बनाएगी तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच संतुलन भी बनाकर रखेगी। भाव कुछ ऐसा ही रहेगा कि हम मुख्यमंत्री नहीं तो मुख्यमंत्री से कम भी नहीं। इनमें पहला नाम तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का है ही, जो चार बार मुख्यमंत्री रहकर कम से कम भाजपा में तो सीएम बतौर द बिगेस्ट अचीवर साबित हो चुके हैं। और शिवराज ने टाइगर अभी जिंदा है कहकर टाइगर की पदवी भी हासिल कर ली है। और जब वह मार्च 2020 में चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया भी टाइगर की तरह ही स्थापित हुए थे। सोलहवीं विधानसभा में शिवराज सहित ऐसे पांच दिग्गज नेता हैं जो किसी भी भूमिका में रहें, पर टाइगर नहीं तो टाइगर से कम भी नहीं नजर आने वाले हैं। शिवराज सिंह चौहान (5 मार्च 1959) पहले पायदान पर हैं।
नरेंद्र सिंह तोमर (जन्म 12 जून 1957) 17वीं लोकसभा के सदस्य थे। पर अब दिमनी से विधायक हैं। वह पहले और दूसरे मोदी काल में भारत सरकार में कृषि मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, खान मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। वह 2009 से 2014 तक मुरैना से पंद्रहवीं लोकसभा और 2014 से 2019 तक ग्वालियर से सोलहवीं लोकसभा के सदस्य भी रहे।2019 में, उन्होंने अपना निर्वाचन क्षेत्र बदल दिया और मुरैना से लोकसभा के लिए फिर से चुने गए। 2023 के मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में, तोमर ने दिमनी से चुनाव लड़ते हुए बहुजन समाज पार्टी के बलवीर सिंह दंडोतिया को करीब 24,000 मतों के अंतर से हराया। उन्हें मुन्ना भैया उपनाम से भी जाना जाता है। राजनीति की शुरुआत में वे युवा मोर्चा में विभिन्न पदों पर रहते हुए 1996 में युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। तोमर पहली बार 1998 में ग्वालियर से विधायक निर्वाचित हुए और इसी क्षेत्र से वर्ष 2003 में दूसरी बार चुनाव जीता। इस दौरान वे सुश्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे। तोमर वर्ष 2008 में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए और उसके बाद वे 15 जनवरी 2009 में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। बाद में वे पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री पद पर रहे। तोमर एक बार फिर 16 दिसम्बर 2012 को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। बीजेपी पार्टी के लिए संकट मोचन कहे जाने वाले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एक बार फिर पार्टी के भरोसे पर खरे उतरे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश चुनाव समिति का संयोजक बनाया और उसके बाद प्रदेश के चुनाव की कमान उन्हें सौंपी।
प्रह्लाद सिंह पटेल (जन्म 28 जून 1960) 7 जुलाई 2021 से भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और जल शक्ति राज्य मंत्री रहे। वह मध्य प्रदेश के दमोह लोकसभा क्षेत्र से सांसद थे। वह तीसरे वाजपेयी मंत्रिमंडल में कोयला राज्य मंत्री थे। वह पहली बार 1989 में 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए और फिर 1996 में 11वीं लोकसभा (दूसरा कार्यकाल), 1999 में बालाघाट से 13वीं लोकसभा (तीसरा कार्यकाल) , 2014 में 16वीं लोकसभा (चौथा कार्यकाल) और 17वीं लोकसभा के लिए 2019 में दमोह से (पांचवां कार्यकाल) फिर से चुने गए।  मई 2019 में,पटेल संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने थे। उन्होंने दो बार पवित्र नदी नर्मदा की परिक्रमा पूरी की, पहली बार 1994-96 में और दूसरी 2004-05 के दौरान। अब वह पहली बार नरसिंहपुर से विधायक चुने गए हैं।
कैलाश विजयवर्गीय (जन्म 13 मई 1956) भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन इंदौर भारतीय जनता पार्टी से शुरू किया और इंदौर के मेयर रहे, छह बार विधायक रहे, जो कभी विधानसभा चुनाव नहीं हारे, और पद पर पदोन्नत होने से पहले 12 साल से अधिक समय तक राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे। वह 2014 में भाजपा के हरियाणा राज्य विधानसभा चुनाव अभियान के प्रभारी थे, जब पार्टी ने हरियाणा राज्य विधानसभा चुनाव में अपनी पहली जीत दर्ज की, जिसमें भाजपा की सीटें 4 से 47 हो गईं। उन्हें 2015 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी नेता नामित किया गया था । उन्हें वर्ष 2021 के लिए भारत के शीर्ष 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया था। उन्हें पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए गेम चेंजर माना जाता है। अब एक बार फिर वह इंदौर क्रमांक-1 से विधायक चुने गए हैं।
और गोपाल भार्गव (जन्म 1 जुलाई 1952) मध्य प्रदेश सरकार में सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। उन्होंने अपने छठे कार्यकाल के लिए 2 जुलाई 2020 को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। यह सरकार में किसी भी मंत्री द्वारा पूरा किए जाने वाले कार्यकाल की सबसे अधिक संख्या है। वह 15वीं मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। वह एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में लगातार 15 वर्षों तक कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया है। वह 1985 से रहली विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार नौ बार विधानसभा के सदस्य रहे हैं। वह मध्य प्रदेश के इतिहास में एक ही निर्वाचन क्षेत्र से लगातार 9 चुनाव जीतने वाले एकमात्र विधायक हैं। अपने चार दशकों के राजनीतिक करियर में अपराजित भार्गव ने 2023 में 72000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से लगातार 9वीं बार जीत हासिल की है।
तो यह सभी चेहरे मध्यप्रदेश विधानसभा में पहली पंक्ति में नजर आने वाले हैं। और यह तय है कि कोई किसी से कम नहीं है। एक से बढ़कर एक की कहावत इन पर चरितार्थ होती है। इनके अनुभवों का अनंत संसार है। इनमें से शिवराज के अलावा अभी तक किसी ने मुख्यमंत्री पद को सुशोभित नहीं किया है। प्रहलाद पटेल पहली बार विधायक बने हैं, पर उनके अलावा सभी ने शिवराज के मंत्रिमंडल में काम किया है।  (विभूति फीचर्स)
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