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मध्य प्रदेश के आदिवासियों को मिलेगी गाय-भैंस

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भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार अब आदिवासियों को गाय-भैंस पालने की ट्रेनिंग देगी. इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय कार्यक्रम’ की गाइडलाइन में शासन ने बदलाव किया है. इसके तहत प्रदेश के आदिवासी समुदाय को गाय-भैंस दी जाएगी, लेकिन इसके पहले उन्हें गाय-भैंस पालने, दूध दुहने जैसे कामकाज का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके लिए 660 आदिवासियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा. उधर, मुख्यमंत्री डेरी प्लस योजना में भी लक्ष्य पूरा करने के लिए जिलों से हितग्राहियों के नाम बुलाए जा रहे हैं.

इसलिए दिया जा रहा प्रशिक्षण

राज्य सरकार ने साल 2023 से प्रदेश में मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय कार्यक्रम शुरू किया था. यह कार्यक्रम प्रदेश के अनूपपुर, उमरिया, मंडला, डिंडोरी, शिवपुरी, गुना, छिंदवाड़ा, बालाघाट, झाबुआ, धार, बडवानी सहित 14 जिलों में शुरू किया गया. पशुपालन विभाग द्वारा इन जिलों की विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया को 90 फीसदी अनुदान पर एक गाय और भैंस दे दी गई थी, लेकिन जब विभाग की टीम बाद में निरीक्षण करने पहुंची, तो उन्हें कई आदिवासियों के घर पर गाय-भैंस मिली ही नहीं.अधिकारियों के मुताबिक आदिवासियों ने या तो इन गाय-भैंसों को औने-पौने दामों पर बेच दिया या फिर किसी दूसरे को दे दी. कुछ मामलों में गैर आदिवासियों ने आदिवासियों के नाम पर गाय-भैंस ले लिए. ऐसे मामले सामने आने के बाद राज्य शासन द्वारा कुछ जिलों के अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई थी.

ऐसे मामले सामने आने के बाद मध्य प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ने योजना को हिट बनाने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की है. निगम के प्रबंध संचालक डॉ. सत्यनिधि शुक्ल ने बताया कि “अब हितग्राहियों को गाय-भैंस दिए जाने के पहले असली हितग्राही की पहचान की जाएगी.

इसके बाद उनका प्रशिक्षण कराया जाएगा. इसमें उन्हें गाय-भैंस पालने के बारे में बताया जाएगा. इसके अलावा तय किया गया है कि अब पहले हितग्राही को एक ही पशु दिया जाएगा, जब वह उसे ठीक से पालने लगेगा उसके बाद ही दूसरा पशु दिया जाएगा. ताकि योजना में किसी तरह की गड़बडी न हो.”

मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत 660 हितग्राहियों का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत एक हितग्राही को 1.90 लाख रुपए दिया जाता है. इसमें से हितग्राही को सिर्फ 10 फीसदी राशि यानी 19 हजार रुपए ही देने होते हैं. उधर, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना में भी हितग्राही को 2 भैंस दी जाती है. यह योजना पूरे प्रदेश में चल रही है.

इस योजना के लिए 2028 हितग्राहियों का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक 700 हितग्राहियों का ही चयन किया जा सका है. अगले साल अप्रैल माह के पहले बाकी हितग्राहियों का चयन करने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना में अनुसूचित जाति और जनजाति के हितग्राहियों को 75 फीसदी और सामान्य-ओबीसी वर्ग को 25 फीसदी का अनुदान दिया जाता है.

बांदा म गौशाला के पास मिले 20 मृत गौवंश

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बांदा के कमासिन विकासखंड स्थित बीरा ग्राम पंचायत में एक गौशाला के पास 15 से 20 मृत गौवंश के कंकाल मिले हैं। विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने गौशाला का निरीक्षण करने के बाद यह जानकारी दी।

निरीक्षण के दौरान, विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक संतोष त्रिपाठी और कमासिन ब्लॉक के शत्रुघ्न सिंह मौजूद थे। टीम ने पाया कि गौशाला के चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ था।

ग्रामीणों ने बताया कि ये मृत गौवंश बीरा गौशाला के ही थे। गौशाला के बगल में मुसीवा-बीरा गांव के मुख्य मार्ग किनारे 15 से 20 गौवंश के कंकाल पड़े मिले। इसके अतिरिक्त, गौशाला से लगभग 1000 मीटर की दूरी पर एक मृत गाय मिली, जिसके दोनों कान कटे हुए थे और कुत्ते उसे नोच रहे थे।

कमासिन ब्लॉक गौ रक्षा समिति के ब्लॉक अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने तत्काल कमासिन खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ओमप्रकाश द्विवेदी को घटना की सूचना दी। बीडीओ द्विवेदी ने 10 मिनट के भीतर जेसीबी मंगवाकर सभी मृत गौवंश का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करवाया।

प्रधान प्रतिनिधि सुनील बीरा ने बताया कि गौवंश को दोनों समय बाजरे की नरई मशीन से काटकर डाली जाती है।

कोरबा: गौठान में तड़प रहे मवेशी

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प्रदेश सरकार ने गौ वंश के संरक्षण संवर्धन हेतु गौ सेवा धाम संचालित कर घुमंतू और निराश्रित गौ वंश को रखने की योजना बनाई है सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग का विस्तार करते हुए प्रत्येक जिले में तथा विकासखंड स्तर पर  गौ सेवा समिति में प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं जिला स्तर समिति में माननीय कलेक्टर नगर निगम आयुक्त जिला पंचायत सीईओ एसडीएम सदस्य बनाए गए हैं ताकि गौ वंश के संरक्षण हेतु समिति सक्षम रहे।

इसी कड़ी में शिकायत प्राप्त होने पर जिला अध्यक्ष श्री विनय सिंह जी अपने सदस्यों सहित नगर निगम के पशु आश्रय स्थल के औचक निरीक्षण में गए जहां अव्यवस्था और विसंगति देखकर खासे नाराज हुए और भड़के।गोकुल नगर स्थित आश्रय स्थल में  लगभग 150 से अधिक गौ वंश को रखा गया है चारा पानी के नाम पर महज खाना पूर्ति की जा रही है एक दिन में लगभग एक गौ वंश को एक किलो से भी कम औसत में चारा दिया जा रहा इतने गौ वंश के चारा पानी और अन्य व्यवस्था हेतु मात्र एक वर्कर मौके पर कार्यरत मिला दो तीन गौ वंश मरणासन्न अवस्था में पड़े थे जिनके देखभाल हेतु कोई पहल नजर नही आया।

संचालन कर्ता से फोन पर बात करने से गोलमोल जवाब दिया गया इन सब पर समिति सदस्य भी खासे नाराज हुए पशु क्रूरता अधिनियम का यहां खुला उलंघन नजर आ रहा था।आश्रय स्थल आने जाने वाले पशुओं हेतु रजिस्टर संधारण भी व्यवस्थित नही पाया गया। समिति अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा निगम आयुक्त और महापौर से मिलकर इस विसंगति को दूर करने की बात कही गई।

बताया जा रहा है कि इससे पहले यहां कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। मामला संज्ञान में आने के बाद मवेशियों का पशु चिकित्सा के द्वारा जांच भी किया गया लेकिन उसके बावजूद भी अभी भी व्यवस्था बरकरार है और मवेशी कई तड़प रहे हैं और कई मरने की स्थिति है।कहीं ना कहीं संबंधित विभाग और संबंधित अधिकारी की एक बड़ी लापरवाही है जिसके चलते यह स्थिति निर्मित हुई है। गोकुल नगर स्थित गौठान में 48 गाय,28 बैल,49 बछिया,77 बछवा है समिति ने सभी का प्रतिवेदन तैयार कर इसकी शिकायत करने की बात कही गई।

कर्ज में डूबे सिकंदर की गायों ने बदल दी किस्मत

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पंजाब के रहने वाले सिकंदर के सिर पर कभी लाखों रुपये का कर्ज था। ऐसे में हताश-परेशान सिकंदर कोई नई नौकरी की तलाश में डूबे हुए थे। तभी उन्हें गौ पालन का आइडिया आया। इसके बाद सिकंदर गौ पालन का बिजनेस शुरू कर दिया है। गौ पालन के बिजनेस से सिकंदर की ऐसी किस्मत पलटी की आज वो करोड़पति बन गए हैं। सिकंदर गिनती पंजाब के सफल डेयरी उद्यमियों में गिनती होती है।

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक, 43 वर्षीय सिकंदर सिंह स्वैचके पास 215 गायों का विशाल डेयरी फार्म है। यह फार्म उन्‍होंने चासवाल गांव में बनाया है। हर दिन उनके फार्म में 3,000 लीटर दूध का उत्‍पादन होता है। इतना ही नहीं हर साल वे कम से कम 25 गायें भी बेचते हैं, जिनकी औसत कीमत 80 हजार रुपये प्रति गाय होती है। सिकंदर का डेयरी फार्म आज लगभग पूरी तरह ऑटोमेटेड है। इसी वजह से 215 गायों की देखभाल और उत्पादन प्रक्रिया के लिए सिर्फ 10 लोग काम करते हैं।

साल 2000 में शुरू किया गौ पालन का बिजनेस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिकंदर का पशुओं से पहले से ही लगाव था। हालांकि उनके घर में ऐसा कोई माहौल नहीं था। 12वीं पास करने के बाद सिकंदर ने 1999 में मिल्कफेड से डेयरी की ट्रेनिंग पूरी की। इसके अगले साल पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) से आधुनिक डेयरी तकनीक सीखी। इससे उन्‍हें डेयरी फार्मिंग के बिजनेस की क्षमता का अहसास हुआ। फिर सिकंदर ने साल 2000 में 6 लाख रुपये लोन लेकर गौ पालन का बिजनेस शुरू किया। शुरुआती दौर में सिकंदर को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। धीधे-धीरे उनका बिजनेस चलने लगा। 4 साल के भीतर सिकंदर ने अपना 6 लाख का कर्ज उतार दिया।

डेयरी फॉर्म में आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

आज सिकंदर की डेयरी फॉर्म में आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। मशीन से गाय दुही जाती हैं। उन्होंने इजरायल से आधुनिक मिल्किंग पार्लर और ऑटोमेटिक पैकिंग सिस्टम लगवाया है। इसकी लागत करोड़ों में आई है। पूरा सिस्टम मशीनों से चलता है। सिकंदर ने बताया कि उनकी डेयरी की असली ताकत उनकी गायें हैं। उनके फार्म में 140 गायें रोजाना दूध देती हैं। वहीं बा गर्भवती या नई बछड़ों वाली होती हैं।

रोजाना 3000 लीटर दूध की होती है बिक्री

आज उनके फार्म में रोजाना 3,000 लीटर दूध की बिक्री होती है। इसमें करीब 1500 लीटर दूध सीधे ग्राहकों को 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचते हैं। बाकी वेरका और अमूल को 44 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से देते हैं। सिकंदर की इस मेहनत को देखते हुए गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (GADVASU), लुधियाना ने उन्हें मुख्यमंत्री पुरस्कार 2025-26 से सम्मानित किया है। कुल मिलाकर सिकंदर ने अपनी मेहनत, समझदारी और तकनीक के इस्तेमाल से यह साबित कर दिया कि गांवों में भी करोड़ों का कारोबार खड़ा किया जा सकता है। आज सिकंदर की मेहनत युवाओं के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

क्रिअर्न प्रस्तुत राहुल पी.एस. द्वारा निर्देशित म्यूजिक वीडियो “गुड़िया” की लॉन्चिंग में पहुंचे दिग्गज

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मुंबई। रेशमी आर. नायर और निशांत कुमार अभिनीत म्यूजिक वीडियो “गुड़िया” 5 नवंबर, 2025 को मुंबई के द एलीट में एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च हुआ। यह गाना ज़ी म्यूज़िक पर रिलीज़ किया गया है। गाने के लॉन्च पर कई मशहूर हस्तियां उपस्थित हुए। यह वीडियो राहुल पी.एस. द्वारा निर्देशित है और प्रोडक्शन हेड थाजू हैं।

इस अवसर पर अभिनेत्री और केरल फिल्म सनसनी रेशमी आर. नायर, केरल के निर्देशक राहुल पी.एस. और केरल के प्रसिद्ध डीओपी अरविंद उन्नी उपस्थित थे। एल्बम में संगीत सिद्धार्थ शंकर ने दिया है।

उपस्थित बॉलीवुड हस्तियों में दिलीप सेन (संगीत निर्देशक), सुनील पाल (हास्य अभिनेता), सुनील सेठी (एमडी आर्ट मीडिया), संगीता तिवारी, अभिनेता ज़ाहिद अली (सौदागर, भुज फेम), अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजक अनिल बोरा, राजस्थानी सुपरस्टार अरविंद वाघेला, अभिनेता कमल जी (तारक मेहता का उल्टा चश्मा), सीमा मनीष जैन, सामी सिद्दीकी, साबिर शेख, इकबाल एक्शन डायरेक्टर, अशफाक खोपेकर, इम्तियाज, प्रोडक्शन हेड ताजू, राम मिश्रा और शब्बीर शेख (एमडी फॉर्च्यून लाइफलाइन इंडस्ट्रीज) शामिल थे। सभी ने इस गाने की खूब तारीफ की।

क्रेअर्न प्रोडक्शंस के बैनर तले निर्मित “गुड़िया” गाने का लॉन्च समारोह एक भव्य आयोजन था। “गुड़िया” एक हिंदी वीडियो एल्बम है जिसकी कहानी दिल को छू लेने वाली है। निम्न-मध्यम वर्ग की लड़की मीरा, एक नौकरानी का काम करती है। एक रात, वह अकेले गोवा जाने का सपना देखती है, जहाँ उसकी मुलाकात एक लड़के से होती है, और उनका प्यार जल्द ही परवान चढ़ता है। जैसे-जैसे उनका प्यार गहराता है, मीरा खुद को आज़ाद महसूस करती है। हालाँकि, जब उसका सपना टूट जाता है, तो वह सामान्य जीवन में लौट आती है। लेकिन उस सपने ने उसका नज़रिया बदल दिया है। सपने और हक़ीक़त के बीच की रेखा अब धुंधली हो गई है। गुड़िया एक बेहद खूबसूरती से फ़िल्माया गया गीत है जिसकी कहानी बेहद मार्मिक है।

अभिनेत्री रेशमी आर. नायर एक दक्षिण भारतीय मॉडल और सोशल मीडिया सनसनी हैं। निशांत कुमार भी एक मॉडल, अभिनेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं।

मार्केटिंग, प्रमोशन और मीडिया पीआर कार्य फॉर्च्यून लाइफलाइन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के शब्बीर शेख द्वारा संभाला गया है।

पामेला मोंडल की सादगी में है स्टारडम और उनके आत्मविश्वास में है जादू जो उन्हें बाकी से बनाता है अलग

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बंगाल की मिट्टी से उठी एक प्रतिभा, जिसने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी – वह हैं पमेला मोंडल। पमेला उन कुछ कलाकारों में से हैं जिन्होंने बचपन से ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। बतौर बाल कलाकार उन्होंने कई बंगाली फिल्मों और विज्ञापनों में काम किया और अपनी मासूम अदाओं से सबका दिल जीत लिया। सुप्रसिद्ध अभिनेता प्रोसेनजीत के साथ उनके बच्चे की भूमिका में नजर आना उनके करियर की बड़ी शुरुआत थी।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बतौर मुख्य अभिनेत्री फिर से फिल्मों में वापसी की, और उनकी पहली ही फिल्म ‘मोने बोले प्रिया प्रिया’ सुपरहिट साबित हुई। इसके बाद तो पमेला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मात्र कुछ वर्षों में तीस से अधिक बंगाली फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें ‘सुपरस्टार लव स्टोरी’, ‘खेला घर’, ‘रन’ और ‘मिस बटरफ्लाई’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। साउथ की ‘टिप्पू’ और ओड़िया फिल्म ‘जग्गू ऑटोवाला’ में भी उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को प्रभावित किया।

बंगाली फिल्मों की अपार सफलता के बाद पमेला चाहती थीं कि उनकी कला को केवल क्षेत्रीय सिनेमा तक सीमित न रखा जाए। इसी उद्देश्य से उन्होंने बॉलीवुड की ओर कदम बढ़ाया। 2013 में वीनस कंपनी के म्यूजिक वीडियो ‘रश्के कमर’ में गायक अल्ताफ राजा के साथ उनका अभिनय दर्शकों के बीच खूब पसंद किया गया।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी पमेला ने अपने बोल्ड और दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई। उल्लू ऐप की ‘प्रभा की डायरी’, ऑल्ट बालाजी की ‘पिंटू की मुस्कान’ और सेमारू ऐप की थ्रिलर फिल्म ‘डिसेप्टिव दिवा’ में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। ‘डिसेप्टिव दिवा’ में उनके साथ कश्मीरा शाह और अदिति गोवित्रिकर जैसे कलाकार भी थे, लेकिन पमेला ने अपनी उपस्थिति से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आने वाले वर्ष में उनकी नई फिल्म ‘लास्ट कैंडिडेट’ रिलीज़ होगी, जिसमें वह किरण कुमार और उनके बेटे के साथ नज़र आएँगी।

अभिनय के अलावा पमेला अपने फैशन सेंस के लिए भी जानी जाती हैं। उनकी अपनी साड़ी ब्रांड ‘Pamela’s Creations’ आज ऑनलाइन ट्रेंड में है। पमेला ने फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई की है और अपने ब्रांड की हर साड़ी का डिज़ाइन खुद तैयार करती हैं। उनके डिज़ाइन की खासियत पारंपरिकता और आधुनिकता का सुंदर मेल है। पिछले कई वर्षों से उनका साड़ी स्टॉल गायक अभिजीत भट्टाचार्य के कार्यक्रमों में लगता है, जहाँ अभिजीत स्वयं उनके ब्रांड को प्रमोट करते हैं। उनकी फिल्मों में भी Pamela’s Creations की साड़ियाँ अक्सर नज़र आती हैं — जो उनके स्टाइल और एलीगेंस की पहचान बन चुकी हैं।

सोशल मीडिया पर पमेला का जलवा लगातार बढ़ रहा है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट @pamela111 पर लाखों फॉलोअर्स हैं। उनकी पोस्ट और वीडियो पर जाह्नवी कपूर, सिद्धार्थ मल्होत्रा और नोरा फतेही जैसे सितारे भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। पमेला न केवल ग्लैमर में बल्कि फिटनेस और कुकिंग में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बंगाली स्टाइल का खाना बनाना और हेल्दी डाइट वीडियो साझा करना बेहद पसंद है, जिन्हें उनके फैंस खूब पसंद करते हैं।

कला और फैशन की दुनिया में अपनी जगह बनाने के साथ-साथ पमेला समाजसेवा में भी सक्रिय हैं। उनका एनजीओ ‘Pamela Foundation’ गरीब और दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए काम करता है। पमेला का मानना है कि हर व्यक्ति को कम से कम एक जरूरतमंद बच्चे की जिम्मेदारी जरूर लेनी चाहिए।

पमेला मोंडल एक ऐसी शख्सियत हैं जो मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से सफलता की मिसाल पेश कर रही हैं। उनकी सादगी में स्टारडम है, और उनके आत्मविश्वास में एक ऐसा जादू है जो उन्हें बाकी से अलग बनाता है। वह मानती हैं कि अभी उनका असली सफर बाकी है — वह चाहती हैं कि एक दिन उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले। संजय लीला भंसाली की फिल्मों की दीवानी पमेला का सपना है कि एक दिन वह उनकी फिल्म में अभिनय करें, चाहे भूमिका छोटी ही क्यों न हो।

उनकी मुस्कान, मेहनत और मंजिल की ओर बढ़ते कदम यह साबित करते हैं कि असली स्टार वही होता है जो खुद पर विश्वास रखे और अपने सपनों को साकार करने के लिए लगातार प्रयास करता रहे। पमेला मोंडल आज उसी आत्मविश्वास और समर्पण की जीवंत प्रतीक हैं।

प्रियंका मोरे फिटनेस को लेकर है बेहद सजग और अपनाती है हेल्दी लाइफस्टाइल

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मेहनत, लगन और आत्मविश्वास – ये तीन शब्द प्रियंका मोरे की पहचान हैं। बचपन से ही मराठी और हिंदी फिल्मों में अभिनय का अनुभव रखने वाली प्रियंका अब बतौर अभिनेत्री अपनी नई पारी शुरू करने जा रही हैं। अभिनय के प्रति उनका जुनून और समर्पण उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।

प्रियंका इस समय कई एड फिल्म्स और प्रिंट में मॉडलिंग कर रही हैं। अपने हर प्रोजेक्ट में वह एक नई ऊर्जा और स्वाभाविकता लेकर आती हैं, जो दर्शकों को उनसे जोड़ती है। उनकी पसंदीदा अभिनेत्रियाँ आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण हैं। प्रियंका चाहती हैं कि उनकी तरह वह भी वर्सटाइल भूमिकाएँ निभाएं और अपने अभिनय से एक अलग छाप छोड़ें।

फिल्म इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के, प्रियंका ने अपने दम पर यह मुकाम हासिल किया है। वह मानती हैं कि अगर मन में सच्ची लगन और आत्मविश्वास हो, तो सफलता ज़रूर मिलती है। प्रियंका का कहना है – “इंडिपेंडेंट बनो, अपने काम पर फोकस करो और खुद पर विश्वास रखो। जीवन परिवर्तनशील है, समय की गति कब आपके लिए सरप्राइज लाकर दे – इसका अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता। बस धैर्य रखो, सकारात्मक सोचो, क्योंकि आपकी सोच ही आपके परिणाम तय करती है।”

अपनी फिटनेस को लेकर भी प्रियंका बेहद सजग हैं। वह घर पर ही जिम करती हैं और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाती हैं। सकारात्मक सोच और अपने बबली नेचर के कारण प्रियंका हमेशा उत्साहित रहती हैं। उन्हें रोमांटिक और इमोशनल किरदार निभाना बेहद पसंद है। साथ ही, गाने सुनना और डांस करना उनके दिल के बहुत करीब है।

प्रियंका मोरे आज की नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल हैं – जो यह साबित करती हैं कि अगर जुनून सच्चा हो, तो मंज़िल ज़रूर मिलती है। आने वाले समय में वह फिल्मों और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स पर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उनका आगामी प्रोजेक्ट एक वेबसीरीज़ है, जिसमें प्रियंका मुख्य भूमिका निभाने जा रही हैं। यह सीरीज़ उनके अभिनय सफर का नया अध्याय साबित होगी और दर्शक जल्द ही स्क्रीन पर उनके नए अंदाज़ को देखने के लिए उत्साहित हैं।

युवा शायर अरमान जोधपुरी को मिला “मारवाड़ युवा कला साधक” सम्मान

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शहर के युवा शायर अरमान जोधपुरी को यूथ हॉस्टल रातानाडा जोधपुर में संस्कार भारती की तरफ़ से आयोजित सम्मान समारोह में राजस्थान के संघ प्रचारक निम्बाराम जी और सुविख्यात लोक गायक पद्म श्री अनवर खान साहब और सुप्रसिद्ध वीणा वादक श्री महेशाराम जी के हाथों ” मारवाड़ कला साधक सम्मान” से सम्मानित किया गया।
गौरतलब है कि यह सम्मान उन प्रतिभाओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपनी कला और रचनाओं के माध्यम से समाज को प्रेरणा दी है। अरमान जोधपुरी की रचनाएँ देश-विदेश की प्रतिष्टित वैबसाइट, पत्रिकाओं और उर्दू पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है वे देश के कई हिस्सों में मंचों पर शायरी की प्रस्तुति दे चुके है और नई पीढ़ी के अग्रणी शायरों में गिने जाते है। कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री जोगेश्वर गर्ग, प्रान्त प्रचार पंकज कुमार, वरिष्ठ साहित्य कार हरिदास व्यास, कवि आकाश नौरंगी, कवि श्रवणदान शून्य, पूनमचंद सुथार, योगाचार्य श्याम भाटी, रवि चौधरी,जितेंद्र जालोरी और भरत कुराना एवं अन्य लोग उपस्थित रहे .

गऊ माता से मिलते हैं शुभ-अशुभ घटनाओं के संकेत

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 हिंदू धर्म में गाय को गौ माता का दर्जा दिया गया है, जिनकी पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गाय के शरीर में 33 कोटी देवी-देवताओं का वास होता है, जिनका आशीर्वाद पाने के लिए गौ माता की पूजा की जाती है. पूजा करने के अलावा गाय की सेवा और उन्हें रोजाना कुछ-न-कुछ खिलाना भी शुभ होता है. इससे पूर्व के पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति और पुण्य मिलता है.
शकुन शास्त्र में बताया गया है कि गौ माता कई बार व्यक्ति को भविष्य में होने वाली शुभ और अशुभ घटनाओं का संकेत भी देती हैं, जिन्हें पहचानने से व्यक्ति किसी बड़ी समस्या से बच सकता है. आज हम आपको शकुन शास्त्र में बताए गए गाय से मिलने वाले संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं.

गाय से मिलने वाले शुभ संकेत

शकुन शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य दरवाजे के पास या कहीं जाते हुए बार-बार गाय का दिखना शुभ संकेत है. ये दर्शाता है कि देवी-देवता आपसे खुश हैं और उनकी आपके ऊपर विशेष कृपा बनी हुई है. इसके अलावा सुबह-सुबह गाय की आवाज सुनना भी शुभ माना गया है. ये इशारा है कि आपका दिन अच्छा व्यतीत होगा.

मनोकामना पूर्ति का संकेत

यदि आप गाय को उसके बछड़े को दूध पिलाते हुए देखते हैं तो ये मनोकामना पूर्ति का संकेत है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आपकी कोई इच्छा पूरी होगी. इसके अलावा घर के आंगन में गाय का आकर खड़ा होना जीवन में खुशियों के आने का संकेत है. ये दर्शाता है कि आपके परिवार पर देवी-देवताओं की विशेष कृपा बनी हुई है.

धन प्राप्ति से पहले मिलने वाला संकेत

शकुन शास्त्र के अनुसार, गाय के ऊपर मक्खियों को बैठे देखना शुभ संकेत है. ये दर्शाता है कि जल्द आपको अपार धन की प्राप्ति होने वाली है.

गाय से मिलने वाले अशुभ संकेत

यदि आपको देखकर गाय हिलने लगे या आपका पीछा करे तो ये अशुभ संकेत माना गया है. ये दर्शाता है कि आपके साथ कोई अशुभ घटना घटने वाली है, जिसके लिए देवी-देवता आपको सचेत कर रहे हैं. इसके अलावा गाय को जमीन को खुरचते हुए देखना भी शुभ नहीं होता है. ये इशारा है कि जल्द ही आप बीमार होने वाले हैं.

मुश्किल समय से पहले गाय देती है अशुभ संकेत

मरी हुई गाय या गाय को मरते हुए देखना भी अशुभ होता है. ये संकेत है कि आपके जीवन में कोई बड़ी परेशानी आने वाली है. इसके अलावा आपको बीमारियों और धन की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है.

पूजा राणा ने पढ़ाई के बाद अभिनय को बनाया कैरियर

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देहरादून की रहने वाली पूजा राणा आज अपने सपनों को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पिछले कई वर्षों से वह दुबई में रह रही थीं, जहां उन्होंने बतौर मॉडल काम किया और कई रैम्प वॉक, ब्यूटी पेजेंट शो और इवेंट्स में हिस्सा लिया। अब तक वह 25 से अधिक फैशन शो कर चुकी हैं।

पूजा का सपना हमेशा से अभिनेत्री बनने का रहा है, और इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने मायानगरी मुंबई का रुख किया है। वह चाहती हैं कि एक दिन मुख्य अभिनेत्री के रूप में पर्दे पर अपनी पहचान बनाएँ। इसके लिए वह निरंतर मेहनत कर रही हैं और अपने अभिनय कौशल को निखारने में जुटी हैं।

बेहतरीन डांसर पूजा राणा की दो दक्षिण भारतीय फिल्में आगामी वर्ष तक रिलीज़ होने वाली हैं, जिनमें उनके शानदार आइटम डांस सॉन्ग्स दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर देंगे। इससे पहले वह हिंदी और पहाड़ी म्यूजिक वीडियो में भी नजर आ चुकी हैं और अपने लाजवाब एक्सप्रेशन व डांस मूव्स से दर्शकों का दिल जीत चुकी हैं।

एम.कॉम करने के बाद भी, पूजा ने अपने दिल की सुनी और मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। उनकी प्रेरणा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित हैं, जबकि उन्हें निर्देशक संजय लीला भंसाली की भव्य फिल्मों का अंदाज़ बेहद पसंद है। पूजा का सपना है कि एक दिन वह भंसाली जैसे बड़े निर्देशक के साथ काम करें।

महज 25 साल की उम्र में, पूजा राणा ने यह साबित कर दिया है कि सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती। आत्मविश्वास से भरी, चुलबुली और बिंदास पूजा का कहना है – “अपने काम पर फोकस करें, मेहनत करते रहें और आगे बढ़ते रहें। आपका काम ऐसा हो कि आपके परिवार और समाज को आप पर गर्व हो। धैर्य रखें, सफलता ज़रूर मिलेगी।”

देहरादून की इस प्रतिभाशाली डांसर और मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। पूजा राणा आने वाले समय में बॉलीवुड की नई चमकती हुई स्टार बन सकती हैं – जिनकी मुस्कान, आत्मविश्वास और प्रतिभा सबका दिल जीतने को तैयार है।