महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों का हो सकता है ऐलान
मुंबईः महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के सिलसिले में केंद्रीय चुनाव आयोग की टीम 26 सितंबर को मुंबई आ रही है। टीम 28 सितंबर तक मुंबई में रहेगी और राजनीतिक व प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर विधानसभा चुनावों के संदर्भ में चर्चा करेगी। केंद्रीय चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक, टीम गुरुवार 26 सितंबर की रात दिल्ली से मुंबई आएगी। इसके बाद अगले दिन 27 सितंबर को सुबह 10 बजे सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक करेगी। उसी दिन दोपहर 1 बजे सीईओ, नोडल अधिकारियों के साथ चर्चा होगी। इसके बाद दोपहर 3 बजे अर्धसैनिक बल, आयकर विभाग, खुफिया एजेंसी, सीबीआई, ईडी के अधिकारियों के साथ बैठक होगी।
शुक्रवार की शाम को ही पांच बजे से राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक समेत प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ अहम बैठक होगी। इन सभी बैठकों में राज्य की मौजूदा स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर हालात की समीक्षा की जाएगी।
देसी गाय पालिए, मिलेंगे 80 हजार रुपये
गाजीपुर। जिले में उन्नत नस्ल की देसी गायों के पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पशु पालकों को प्रोत्साहित करने की योजना है। पशु पालन विभाग नंद बाबा दूध मिशन के तहत मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना को संचालित कर रहा है। योजना के तहत देसी गाय का पालन करने वाले पशु पालकों को 80 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। देसी गाय को लेकर जिले के पशु पालक उदासीन हैं। अधिकांश पशु पालक अधिक दूध उत्पादन के लिए संकर नस्ल की गायों का पालन करते हैं। प्रतिदिन सामान्य नस्ल की देसी गाय की औसत दूध उत्पादक क्षमता 3.94 लीटर है। जबकि संकर नस्ल ( जर्सी ) गायों की क्षमता प्रतिदिन 12 से 15 लीटर की होती है। वहीं साहिवाल नस्ल की देसी गाय की प्रतिदिन दूध देने की औसत क्षमता 10 से 15 लीटर है। इसके बावजूद जिले में किसानों का अधिक रुझान संकर नस्ल की तरफ है। ऐसे में पशु पालकों की आय भी अच्छी हो और देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा दिया जा सके, इसके लिए विभाग की ओर से मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना लांच की गई है।
ये है मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना
योजना का लाभ पाने के लिए पशु पालकों को दो गाय प्रदेश के बाहर से खरीदनी होगी। गाय गिर, साहिवाल, थरपारकर व हरियाणा नस्ल की होनी चाहिए। इसके लिए उन्हें पहले अपना पैसा खर्च करना होगा। गाय की खरीदारी, परिवहन, ट्रांजिट बीमा, चारा मशीन व शेड निर्माण पर आवेदक को दो लाख रुपये खर्च करना होगा। रसीद संग आवेदक को पशु पालन विभाग में आवेदन करना होगा। जांच के बाद आवेदक को 80 हजार रुपये यानि कुल 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना का लाभ पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर दिया जाएगा। पशु पालन विभाग की ओर से कुल 24 लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य मिला है। इसमें 50 प्रतिशत महिला पशु पालकों को लाभान्वित करने की योजना है।
ऐसे कर सकते हैं आवेदन
आवेदक उप्र का निवासी होना चाहिए। उम्र 18 वर्ष हो। पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो। वहीं योजना का उद्देश्य जिले को दूध उत्पादन में अग्रणी बनाना है। इसीलिए देसी नस्ल की गिर, साहिवाल, हरियाणा व थारपारकर नस्ल की गायों को पालन का शर्त रखा गया है, इन नस्लों की गाय की दूध उत्पादन की क्षमता अधिक होती है।
देसी नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना शुरू की गई है। पूरी योजना दो लाख रुपये की है। योजना में चयनित पशु पालक को 80 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। -डॉ. एके शाही, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
प्रधानमंत्री द्वारा न्यूयॉर्क, अमेरिका में भारतीय समुदाय को दिए गए संबोधन का मूल पाठ
साथियों,
आप यहां इतनी दूर-दूर से आए हैं, कुछ पुराने चेहरे हैं, कुछ नए चेहरे हैं. आपका ये प्यार, ये मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है। मुझे वो दिन याद आते हैं। जब मैं पीएम भी नहीं था, सीएम भी नहीं था, नेता भी नहीं था। उस समय एक जिज्ञासू के तौर पर यहां आप सब के बीच आया करता था। इस धरती को देखना, इसे समझना, मन में कितने ही सवाल लेकर के आता था। जब मैं किसी पद पर नहीं था। उससे पहले भी मैं अमेरिका के करीब-करीब 29 स्टेट्स में दौरा कर चुका था। उसके बाद जब मैं CM बना तो टेक्नोलॉजी के माध्यम से आपके साथ जुड़ने का सिलसिला जारी रहा। PM रहते हुए भी मैंने आपसे अपार स्नेह पाया है, अपनत्व पाया है। 2014 में मेडिसन स्क्वायर, 2015 में सैन होसे, 2019 में ह्यूस्टन, 2023 में वॉशिंगटन औऱ अब 2024 में न्यू यॉर्क, और आप लोग हर बार पिछला रिकॉर्ड तोड़ देते हैं।
साथियों,
मैं हमेशा से आपके सामर्थ्य को, भारतीय डायस्पोरा के सामर्थ्य को समझता रहा हूं। जब मेरे पास कोई सरकारी पद नहीं था, तब भी समझता था और आज भी समझता हूं। आप सब मेरे लिए हमेशा से भारत के सबसे मजबूत ब्रैंड एंबेसेडर रहे हैं। और इसलिए मैं आप सबको राष्ट्रदूत कहता हूं। आपने अमेरिका को भारत से, और भारत को अमेरिका से कनेक्ट किया है। आपका स्किल, आपका टैलेंट, आपका कमिटमेंट, इसका कोई मुकाबला नहीं है। आप सात समंदर पार भले आ गए हैं। लेकिन कोई समंदर इतना गहरा नहीं, जो दिल की गहराइयों में बसे हिंदुस्तान को आपसे दूर कर सके। मां भारती ने जो हमें सिखाया है, वो हम कभी भी भूल नहीं सकते। हम जहां भी जाते हैं, सबको परिवार मानकर उनसे घुल मिल जाते हैं। डायवर्सिटी को समझना, डायवर्सिटी को जीना, उसे अपने जीवन में उतारना, ये हमारे संस्कारों में है, हमारी रगों में है। हम उस देश के वासी हैं हमारे यहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं। दुनिया के सारे मत हैं, पंथ हैं। फिर भी हम एक बनकर, नेक बनकर आगे बढ़ रहे हैं। यहां इस हॉल में ही देखिए, कोई तमिल बोलता है, कोई तेलुगु, कोई मलयालम, तो कोई कन्नड़ा, कोई पंजाबी, तो कोई मराठी, और तो कोई गुजराती, भाषा अनेक हैं, लेकिन भाव एक है। और वो भाव है- भारत माता की जय। वो भाव है – भारतीयता। दुनिया के साथ जुड़ने के लिए ये हमारी सबसे बड़ी strength है, सबसे बड़ी ताकत है। यही वैल्यूज़, हमें सहज रूप से ही विश्व-बंधु बनाती हैं। हमारे यहां कहा जाता है- तेन त्यक्तेन भुंजीथा:। यानि जो त्याग करते हैं, वे ही भोग पाते हैं। हम दूसरों का भला करके, त्याग करके सुख पाते हैं। और हम किसी भी देश में रहें, ये भावना नहीं बदलती है। हम जिस सोसायटी में रहते हैं, वहां ज्यादा से ज्यादा योगदान करते हैं। यहां अमेरिका में आपने डॉक्टर्स के रूप में, रिसरचर्स के रूप में, Tech (टेक) Professionals के रूप में, Scientists के रूप में या दूसरे प्रोफेशन्स में जो परचम लहराया हुआ है, वो इसी का प्रतीक है। अभी कुछ समय पहले ही तो यहां T-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप हुआ था और USA की टीम क्या गजब खेली, और उस टीम में यहां रह रहे भारतीयों का जो योगदान था वो भी दुनिया ने देखा है।
साथियों,
दुनिया के लिए AI का मतलब है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस। लेकिन मैं मानता हूं कि AI का मतलब अमेरिका-इंडिया। अमेरिका-इंडिया ये स्पिरिट है और वही तो नई दुनिया का एआई पावर है। यही AI स्पिरिट, भारत-अमेरिका रिश्तों को नई ऊंचाई दे रहा है। मैं आप सभी को, इंडियन डायस्पोरा को सैल्यूट करता हूं। I Salute(सेल्यूट) you All.
साथियों,
मैं दुनिया में जहां भी जाता हूं, हर लीडर के मुंह से भारतीय डायस्पोरा की तारीफ ही सुनता हूं। कल ही, प्रेसिडेंट बाइडेन, मुझे डेलावेयर में अपने घर ले गए थे। उनकी आत्मीयता, उनकी गर्मजोशी, मेरे लिए दिल छू लेने वाला मोमेंट रहा। ये सम्मान 140 करोड़ भारतीयों का है, ये सम्मान आपका है, आपके पुरुषार्थ का है, ये सम्मान यहां रहने वाले लाखों भारतीयों का है। मैं प्रेसिडेंट बाइडेन का आभार करूंगा और साथ ही आपका भी आभार व्यक्त करूंगा।
साथियों,
2024 का ये साल पूरी दुनिया के लिए बहुत अहम है। एक तरफ दुनिया के कई देशों के बीच संघर्ष है, तनाव है तो दूसरी तरफ कई देशों में डेमोक्रेसी का जश्न चल रहा है। भारत और अमेरिका, डेमोक्रेसी के इस जश्न में भी एक साथ हैं। यहां अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और भारत में चुनाव हो चुके हैं। भारत में हुए ये इलेक्शन, ह्यूमन हिस्ट्री के अब तक के सबसे बड़े चुनाव थे, आप कल्पना कर सकते हैं, अमेरिका की कुल आबादी से भी करीब दोगुने वोटर्स, इतना ही नहीं पूरे यूरोप की कुल आबादी से ज्यादा वोटर्स, इतने सारे लोगों ने भारत में अपने वोट डाले। जब हम भारत की डेमोक्रेसी का उसका स्केल देखते हैं, तो और भी गर्व होता है। तीन महीने का पोलिंग प्रोसेस, 15 मिलियन यानि डेढ़ करोड़ लोगों का पोलिंग स्टाफ, एक मिलियन यानि 10 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टेशन, ढाई हजार से ज्यादा पॉलिटिकल पार्टीज़, 8 हज़ार से ज्यादा कैंडिडेट्स, अलग-अलग भाषाओं के हजारों न्यूजपेपर्स, सैकड़ों रेडियो स्टेशन, सैकड़ों टीवी न्यूज चैनल, करोड़ों सोशल मीडिया अकाउंट्स, लाखों सोशल मीडिया चैनल्स, ये सब भारत की डेमोक्रेसी को वाइब्रेंट बनाते हैं। ये फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के विस्तार का दौर है। इस लेवल की स्क्रूटनी से होकर हमारे देश की चुनावी प्रक्रिया गुज़रती है।
और साथियों,
इस लंबी चुनावी प्रक्रिया से गुजरकर इस बार भारत में कुछ अभूतपूर्व हुआ है। क्या हुआ है? क्या हुआ है? क्या हुआ है? क्या हुआ है? अबकी बार – अबकी बार – अबकी बार ।
साथियों,
तीसरी बार, हमारी सरकार की वापसी हुई है। और ऐसा पिछले 60 सालों में भारत में नहीं हुआ था। भारत की जनता ने ये जो नया मैंडेट दिया है, उसके मायने बहुत हैं और बहुत बड़े भी हैं। ये तीसरे टर्म में हमें बहुत बड़े लक्ष्य साधने हैं। हमें तीन गुना ताकत, और तीन गुना गति के साथ आगे बढ़ना है, आपको एक शब्द याद रहेगा पुष्प। हां कमल मान लीजिए मुझे ऐतराज नहीं है। पुष्प और मैं इस पुष्प को डिफाइन करता हूं। पी फोर Progressive भारत, यू फोर Unstoppable भारत! एस फोर Spiritual (स्पिरिचुअल) भारत! एच फोर Humanity First को समर्पित भारत! पी फोरProsperous भारत। यानि PUSHP- पुष्प की पांच पंखुड़ियां को मिलकर ही विकसित भारत बनाएंगे।
साथियों,
मैं भारत का पहला प्रधानमंत्री हूं, जिसका जन्म आज़ादी के बाद हुआ। आजादी के आंदोलन में करोड़ों भारतीयों ने स्वराज के लिए जीवन खपा दिया था, उन्होंने अपना हित नहीं देखा, अपने कंफर्ट जोन की चिंता नहीं की, वो तो बस देश की आजादी के लिए सब कुछ भूलकर अंग्रेजों से लड़ने चल पड़े थे। उस सफर में किसी को फांसी का फंदा मिला, किसी के शरीर को गोलियों से भून दिया गया, कोई यातनाएं सहते हुए जेल में ही गुजर गया, कईयों की जवानी जिंदगी जेल में खप गई।
साथियों,
हम देश के लिए मर नहीं पाए, लेकिन हम देश के लिए जरूर जी सकते हैं। मरना हमारे नसीब नहीं था, जीना हमारे नसीब है। पहले दिन से मेरा मन और मेरा मिशन एकदम क्लीयर रहा है। मैं स्वराज्य के लिए जीवन नहीं दे पाया, लेकिन मैंने तय किया सुराज और समृद्ध भारत के लिए जीवन समर्पित करूंगा। मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा रहा जिसमें मैं सालों-साल तक पूरे देश में घूमता रहा, भटकता रहा, जहां खाना मिला वहां खा लिया, जहां सोने को मिला, वहां सो लिया, समंदर के किनारे से लेकर पहाड़ों तक, रेगिस्तान से लेकर बर्फीली चोटियों तक, मैं हर क्षेत्र के लोगों से मिला, उनको जाना-समझा। मैंने अपने देश के जीवन, अपने देश की संस्कृति, अपने देश की चुनौतियों का फर्स्ट हैंड एक्सपीरियन्स लिया। वो भी एक वक्त था जब मैंने अपनी दिशा कुछ और तय की थी, लेकिन नियति ने मुझे राजनीति में पहुंचा दिया। कभी नहीं सोचा था कि एक दिन चीफ मिनिस्टर बनूंगा, और बना तो गुजरात का longest serving Chief Minister बन गया। 13 साल तक गुजरात का चीफ मिनिस्टर रहा, इसके बाद लोगों ने प्रमोशन देकर मुझे प्राइम मिनिस्टर बना दिया। लेकिन दशकों तक देश के कोने-कोने में जाकर मैंने जो सीखा है., उसी ने चाहे राज्य हो या केंद्र, मेरे सेवा के मॉडल को, मेरे गवर्नेंस के मॉडल को इतना सफल बनाया है। पिछले 10 साल में इस गवर्नेंस मॉडल की सफलता आपने देखी है, पूरी दुनिया ने देखी है, और अब देश के लोगों ने बहुत बड़े भरोसे के साथ मुझे ये तीसरा टर्म सौंपा है। इस थर्ड टर्म में, मैं तीन गुना ज्यादा दायित्व बोध के साथ आगे बढ़ रहा हूं।
साथियों,
आज भारत, दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। भारत, Energy से भरा हुआ है, सपनों से भरा हुआ है। रोज़ नये कीर्तिमान, हर रोज़ नई ख़बर, आज ही एक औऱ बहुत अच्छी खबर मिली है। चेस ओलंपियाड में, मेन्स और वुमेन्स, दोनों में भारत को गोल्ड मिला है। लेकिन एक और बात बताऊं जब ज्यादा तालियां बजानी पड़ेगी। यह लगभग सौ साल के इतिहास में पहली बार हुआ है। पूरे देश को, हर हिंदुस्तानी को हमारे चेस प्लेयर्स पर बहुत गर्व है। एक और AI है, जो भारत को ड्राइव कर रही है, और वो कौन सा और है? वो है- ए फोर Aspirational (एस्पिरेशनल), आई फोर India, Aspirational India. ये नया फोर्स है, नई ऊर्जा है। आज करोड़ों भारतीयों की aspirations (एस्पिरेशन), भारत की ग्रोथ को ड्राइव कर रही हैं। हर एस्पीरेशन, नए अचीवमेंट को जन्म देती है। औऱ हर अचीवमेंट, नई एस्पिरेशन के लिए खाद पानी बन रही है। एक दशक में भारत, 10वें नंबर से 5वें नंबर की इकॉनॉमी बन गया। अब हर भारतीय चाहता है कि भारत जल्दी से Third largest economy बने। आज देश के एक बहुत बड़े वर्ग की बेसिक नीड्स पूरी हो रही हैं। पिछले 10 साल में, करोड़ों लोगों को क्लीन कुकिंग गैस की सुविधा मिली है, उनके घर तक पाइप से साफ पानी पहुंचने लगा है, उनके घर में बिजली कनेक्शन पहुंचा है, उनके लिए करोड़ों टॉयलेट्स बने हैं। ऐसे करोड़ों लोग अब क्वालिटी लाइफ चाहते हैं।
साथियों,
अब भारत के लोगों को सिर्फ रोड नहीं, उन्हें शानदार एक्सप्रेसवे चाहिए। अब भारत के लोगों को सिर्फ रेल कनेक्टिविटी नहीं, उन्हें हाईस्पीड ट्रेन चाहिए। भारत के हर शहर की अपेक्षा है, उसके यहां मेट्रो चले, भारत के हर शहर की अपेक्षा है, उसका अपना एयरपोर्ट हो। देश का हर नागरिक, हर गांव-शहर चाहता है कि उसके यहां दुनिया की बेस्ट सुविधाएं हों। औऱ इसका नतीजा हम देख रहे हैं। 2014 में भारत के सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो थी, आज 23 शहरों में मेट्रो है। आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क भारत में है। और इसका हर दिन विस्तार हो रहा है।
साथियों,
2014 में भारत के सिर्फ 70 शहरों में एयरपोर्ट्स थे, आज 140 से ज्यादा शहरों में एयरपोर्ट्स हैं। 2014 में 100 से भी कम ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी थी, 100 से भी कम, आज 2 लाख से भी ज्यादा पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी है। 2014 में भारत में 140 मिलियन यानि 14 करोड़ के आसपास LPG कंज्यूमर थे। आज भारत में 310 मिलियन यानि 31 करोड़ से ज्यादा LPG कंज्यूमर हैं। जिस काम में पहले सालों लग जाते थे, वो काम अब महीनों में खत्म हो रहा है। आज भारत के लोगों में एक आत्मविश्वास है, एक संकल्प है, मंजिल तक पहुंचने का इरादा है, भारत में डवलपमेंट, एक पीपल्स मूवमेंट बन रहा है। और हर भारतीय विकास के इस मूवमेंट में बराबर का पार्टनर बन गया है। उसे भरोसा हैभारत की सफलता पर, भारत की उपलब्धियों पर।
साथियों,
भारत आज, land of opportunities है, अवसरों की धरती है। अब भारत, अवसरों का इंतज़ार नहीं करता, अब भारत अवसरों का निर्माण करता है। बीते 10 साल में भारत ने हर सेक्टर में opportunities का एक नया launching pad तैयार किया है। आप देखिए सिर्फ एक दशक में ही, और ये बात आप सबको गर्व देगी, सिर्फ एक दशक में ही 25 करोड़ लोग, एक दशक में ही 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। ये कैसे हुआ? ये इसलिए हुआ, हमने पुरानी सोच बदली, अप्रोच बदली। हमने गरीब को Empower करने पर फोकस किया। 50 करोड़ यानि 500 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा, 55 करोड़ यानि 550 मिलियन, से ज्यादा लोगों को 5 लाख रुपए तक का फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट देना, 4 करोड़ यानि 40 मिलियन से ज्यादा फैमिलीज को पक्के घर देना, Collateral (कोलैटरल) free loans का सिस्टम बनाकर करोड़ों लोगों को ease of credit से जोड़ना, ऐसे अनेकों काम हुए, तब इतने लोगों ने, खुद ने गरीबी को हराया। और वो गरीबी से निकलकर के आज यही निओ-मिडिल क्लास, भारत के डवलपमेंट को तेज गति दे रहा है।
साथियों,
हमने women welfare के साथ ही women led (लेड) development पर फोकस किया है। सरकार ने जो करोड़ों घर बनवाए, उनकी रजिस्ट्री महिलाओं के नाम हुई। जो करोड़ों बैंक खाते खुले, उसमें से आधे से ज्यादा खाते महिलाओं के खुले। 10 साल में भारत की 10 करोड़ महिलाएं माइक्रो Entrepreneurship Scheme से जुड़ी हैं। मैं आपको एक और Example देता हूं। हम भारत में एग्रीकल्चर को टेक्नॉलॉजी के साथ जोड़ने में अनेक प्रयास कर रहे हैं। उसमें आज खेती में, किसानी मे भरपूर मात्रामें ड्रोन का उपयोग आज भारत में नजर आता है। शायद ड्रोन आपके लिए नई बात नहीं है। लेकिन नई बात ये है, इसकी जिम्मेदारी कौन समझता है पता है? ये Rural women के पास है। हम हजारों महिलाओं को ड्रोन पायलट्स बना रहे हैं। एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी का ये बहुत बड़ा रेवॉल्यूशन गांव की महिलाएं लेकर आ रही हैं।
साथियों,
जो Areas पहले Neglected थे, वो आज देश की प्रायॉरिटी हैं। आज भारत जितना कनेक्टेड है, उतना पहले कभी नहीं रहा। आप हैरान होंगे, आज भारत का 5G मार्केट, बताऊं, बुरा नहीं लगेगा ना? आज भारत का 5G मार्केट अमेरीका से भी बड़ा हो चुका है। और ये 2 साल के भीतर-भीतर हुआ है। अब तो भारत, मेड इन इंडिया, 6G पर काम कर रहा है। ये कैसे हुआ? ये इसलिए हुआ, क्योंकि हमने इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए policies बनाईं। हमने मेड इन इंडिया टेक्नॉलॉजी पर काम किया। हमने सस्ते डेटा पर, मोबाइल फोन मैन्युफेक्चरिंग पर फोकस किया। आज दुनिया का करीब-करीब हर बड़ा मोबाइल ब्रांड, मेड इन इंडिया है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैनुफैक्चरर है। एक जमाना था मेरे आने से पहले जब हम Mobile Importer थे, आज हम Mobile Exporter बन गए हैं।
साथियों,
अब भारत पीछे नहीं चलता, अब भारत नई व्यवस्थाएं बनाता है, अब भारत नेतृत्व करता है। भारत ने digital public infrastructure-DPI का नया कॉन्सेप्ट दुनिया को दिया है। DPI ने Equality को प्रमोट किया है, ये करप्शन को कम करने का भी बहुत बड़ा माध्यम बना है। भारत का UPI आज, पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है। आपकी जेब में वॉलेट है, लेकिन भारत में लोगों की जेब के साथ ही फोन में वॉलेट है, ई-वॉलेट है। अनेक भारतीय अब अपने डॉक्यूमेंट्स, फिज़िकल फोल्डर्स में नहीं रखते, उनके पास डिजी लॉकर है। वो एयरपोर्ट में जाते हैं, तो डिजी यात्रा से सीमलेस ट्रैवल करते हैं। ये डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर,जॉब्स, इनोवेशन और इससे जुड़ी हर टेक्नॉलॉजी का लॉन्चिंग पैड बन गया है।
साथियों,
भारत, भारत अब रुकने वाला नहीं है, भारत अब थमने वाला नहीं है। भारत चाहता है, दुनिया में ज्यादा से ज्यादा डिवाइस मेड इन इंडिया चिप पर चलें। हमने सेमीकंडक्टर सेक्टर को भी भारत की तेज ग्रोथ का आधार बनाया है। पिछले साल जून में भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए इंसेंटिव्स घोषित किए थे। इसके कुछ ही महीनों बाद माइक्रोन की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का शिलान्यास भी हो गया। अब तक भारत में ऐसी 5 यूनिट्स स्वीकृत हो चुकी है। वो दिन दूर नहीं जब आप मेड इन इंडिया चिप यहां अमेरिका में भी देखेंगे। ये छोटी सी चिप – विकसित भारत की उड़ान को नई ऊंचाई पर ले जाएगी, और ये मोदी की गारंटी है।
साथियों,
आज भारत में रिफॉर्म्स के लिए जो Conviction (कन्विक्शन), जो कमिटमेंट है, वो अभूतपूर्व है। हमारा ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन प्रोग्राम, इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। दुनिया की 17 परसेंट पॉपुलेशन होने के बावजूद, ग्लोबल कार्बन एमिशन में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 4 परसेंट है। दुनिया को बर्बाद करने में हमारा कोई रोल नहीं है। पूरी दुनिया की तुलना में एक तरह से यानि कह सकते हैं ना के बराबर है। हम भी सिर्फ कार्बन फ्यूएल जलाकर अपनी ग्रोथ को सपोर्ट कर सकते थे। लेकिन हमने ग्रीन ट्रांजिशन का रास्ता चुना। प्रकृति प्रेम के हमारे संस्कारों ने हमें गाइड किया। इसलिए, हम सोलर, विंड, हाइड्रो, ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर एनर्जी पर इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं। आप देखिए, भारत G20 का ऐसा देश है, जिसने Paris climate goals को सबसे पहले पूरा कर दिया। 2014 के बाद से भारत ने अपनी Solar Energy Installed Capacity को 30 गुना से ज्यादा बढ़ाया है। हम देश के हर घर को सोलर पावर होम बनाने में जुटे हैं। इसके लिए रूफटॉप सोलर का बहुत बड़ा मिशन हमने शुरु किया है। आज हमारे रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट Solarise (सोलराइस) हो रहे हैं। भारत, घरों से लेकर सड़कों तक Energy Efficient Lighting के रास्ते पर चल पड़ा है। इन सारे प्रयासों से भारत में बहुत बड़ी संख्या में Green Jobs पैदा हो रही हैं।
साथियों,
21वीं सदी का भारत, एजुकेशन, स्किल, रिसर्च और इनोवेशन के दम पर आगे बढ़ रहा है। आप सभी नालंदा यूनिवर्सिटी के नाम से परिचित हैं। कुछ समय पहले ही भारत की प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी, नए अवतार में सामने आई है। आज सिर्फ यूनिवर्सिटी को ही नहीं बल्कि नालंदा स्पिरिट को भी रिवाइव कर रहा है। पूरी दुनिया के स्टूडेंट्स भारत आकर पढ़ें, हम इस तरह का आधुनिक इकोसिस्टम बना रहे हैं। बीते 10 साल में भारत में, ये भी जरा आप लोगों को याद रखने जैसी बात बताता हूं मैं। बीते 10 साल में, भारत में हर सप्ताह एक यूनिवर्सिटी बनी है। हर दिन दो नए कॉलेज बने हैं। हर दिन एक नई ITI की स्थापना हुई है। 10 साल में ट्रिपल आईटी की संख्या 9 से बढ़कर 25 हो चुकी है। IIMs की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो चुकी है। AIIMs की संख्या, तीन गुना बढ़कर 22 हो चुकी है। 10 साल में मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी लगभग दोगुनी हो चुकी है। टॉप ग्लोबल यूनिवर्सिटीज़ भी आज भारत आ रही हैं, भारत का नाम है। अभी तक दुनिया ने भारत के designers का दम देखा, अब दुनिया, design in India का जलवा देखेगी।
साथियों,
आज हमारी साझेदारी, पूरी दुनिया के साथ बढ़ रही है। पहले भारत, सबसे समान दूरी की नीति पर चलता था – Equal Distance. अब भारत, सबसे समान नज़दीकी की नीति पर चल रहा है। हम ग्लोबल साउथ की भी बुलंद आवाज बन रहे हैं। आपने देखा होगा, भारत की पहल पर G-20 समिट में अफ्रीकन यूनियन को स्थायी सदस्यता मिली। आज जब भारत ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर कुछ कहता है, तो दुनिया सुनती है। कुछ समय पहले जब मैंने कहा- This is not the era (एरा) of war…तो उसकी गंभीरता सबने समझी।
साथियों,
आज दुनिया में कहीं भी संकट आए, भारत first responder के रूप में सामने आता है। कोरोना के समय में हमने 150 से ज्यादा देशों को वैक्सीन और दवाइयां भेजी, कहीं भूकंप आए, कहीं सायक्लोन आए, कहीं गृहयुद्ध हो, हम मदद के लिए सबसे पहले पहुंचते हैं। यही हमारे पुरखों की सीख है, यही हमारे संस्कार हैं।
साथियों,
आज का भारत दुनिया में एक नए catalytic agent की तरह उभर रहा है। और इसका प्रभाव हर सेक्टर में दिखेगा। ग्लोबल ग्रोथ के प्रोसेस को तेज़ करने के लिए भारत का रोल अहम होगा, ग्लोबल पीस के प्रोसेस को तेज करने के लिए भारत का रोल अहम होगा, ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन को स्पीड अप करने में भारत का रोल अहम होगा, ग्लोबल स्किल गैप को दूर करने में भारत का रोल अहम होगा, ग्लोबल इनोवेशन्स को नई दिशा देने में भारत का रोल अहम होगा, ग्लोबल सप्लाई चेन में स्टेबिलिटी के लिए भारत की भूमिका अहम होगी।
साथियों,
भारत के लिए शक्ति और सामर्थ्य का अर्थ है, भारत के लिए शक्ति और सामर्थ्य का अर्थ है- “ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय”। यानि Knowledge is for sharing. Wealth is for caring. Power is for protecting. इसीलिए, भारत की प्राथमिकता दुनिया में अपना दबाव बढ़ाने की नहीं, अपना प्रभाव बढ़ाने की है। हम आग की तरह जलाने वाले नहीं, हम सूरज की किरण की तरह रोशनी देने वाले लोग हैं। हम विश्व पर अपना दबदबा नहीं चाहते। हम विश्व की समृद्धि में अपना सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। योग को बढ़ावा देना हो, सुपरफूड मिलेट्स को बढ़ावा देना हो, मिशन लाइफ, यानि लाइफस्टाइल फॉर इनवायरन्मेंट का विजन हो, भारत, GDP सेंट्रिक ग्रोथ के साथ ही ह्यूमेन सेंट्रिक ग्रोथ को भी प्राथमिकता दे रहा है। मेरा आपसे भी आग्रह है, यहां मिशन लाइफ को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करिए। हम अपनी लाइफस्टाइल में थोड़े से बदलाव करके भी पर्यावरण की बहुत मदद कर सकते हैं। शायद आपने सुना होगा और हो सकता है आप में से कुछ लोगों ने initiative लिया भी हो, आजकल भारत, में एक पेड़ मां के नाम, अपनी मां को याद करते हुए एक पेड़ लगाना, मां जिंदा है तो साथ ले जाना, मां नहीं है तो तस्वीर ले जाना, एक पेड़ मां के नाम लगाने का अभियान आज देश के हर कोने में चल रहा है। और मैं चाहूंगा, आप सभी यहां भी ऐसा अभियान चलाएं। ये हमारी जन्मदाता मां और धरती मां, दोनों का यश बढ़ाएगा।
साथियों,
आज का भारत बड़े सपने देखता है, बड़े सपनों का पीछा करता है। अभी कुछ दिन पहले ही पेरिस ओलंपिक खत्म हुए हैं। अगले ओलंपिक्स का होस्ट, USA है। जल्द ही, आप भारत में भी ओलंपिक्स के साक्षी बनेंगे। हम 2036 के ओलंपिक्स की मेजबानी के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। स्पोर्ट्स हो, बिजनेस हो या फिर एंटरटेनमेंट, आज भारत बहुत बड़े आकर्षण का केंद्र है। आज IPL जैसी भारत की लीग्स, दुनिया की टॉप लीग्स में से एक है। भारत की फिल्में, ग्लोबली धूम मचा रही हैं। भारत आज ग्लोबल टूरिज्म में भी परचम लहरा रहा है। दुनिया के अलग-अलग देशों में भारत के त्योहार मनाने की होड़ है। मैं देख रहा हूं इन दिनों हर शहर में लोग नवरात्रि का गरबा सीख रहे हैं। ये भारत के प्रति उनका प्यार है।
साथियों,
आज हर देश भारत को ज्यादा से ज्यादा समझना चाहता है, जानना चाहता है। आपको एक और बात जानकर खुशी होगी। कल ही, अमेरिका ने हमारे करीब 300 पुराने जो शिलालेख और मूर्तियां थीं, जो कभी हिंदुस्तान से कोई चोरी कर गया होगा, कोई 1500 साल पुरानी, कोई 2000 साल पुरानी, 300 शिलालेख और मूर्तियां भारत को लौटाई हैं। अभी तक अमेरिका ऐसी लगभग 500 धरोहरें भारत को लौटा चुका है। ये कोई छोटी सी चीज लौटाने का विषय नहीं है। ये हमारी हज़ारों वर्षों की विरासत का सम्मान है। ये भारत का सम्मान है, और ये आपका भी सम्मान है। मैं अमेरिका की सरकार का इसके लिए बहुत आभारी हूं।
साथियों,
भारत और अमेरिका की पार्टनरशिप लगातार मजबूत हो रही है। हमारी पार्टनरशिप, Global Good के लिए है। हम हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं। और इसमें आपकी सहूलियत का भी ध्यान है। मैंने पिछले साल ये घोषणा की थी कि सिएटेल में हमारी सरकार एक नया Consulate (कौंसुलेट) खोलेगी। अब ये Consulate (कौंसुलेट) शुरू हो चुका है। मैंने दो और Consulates खोलने के लिए आपके सुझाव मांगे थे। मुझे आपको ये बताते हुए खुशी है कि आपके सुझावों के बाद, भारत ने बोस्टन और लॉस एंजल्स में दो नए consulates (कौंसुलेट) खोलने का निर्णय लिया है। मुझे यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन में Thiruvalluvar (थिरुवल्लुवर) Chair of Tamil studies को announce करने की भी खुशी है। इससे महान तमिल संत थिरुवल्लुवर का दर्शन, दुनिया तक पहुंचाने में और मदद मिलेगी।
साथियों,
आपका ये आयोजन वाकई शानदार रहा है। यहां जो कल्चरल प्रोग्राम हुआ, वो अद्भुत था। मुझे ये भी बताया गया है कि इस इवेंट के लिए हज़ारों लोग और भी आना चाहते थे। लेकिन वेन्यू छोटा पड़ गया। जिन साथियों से मैं यहां मिल नहीं पाया, उनसे मैं क्षमा चाहता हूं। उन सभी से अगली बार मुलाकात होगी, किसी और दिन, किसी और वेन्यू पर। लेकिन मैं जानता हूं, उत्साह ऐसा ही होगा, जोश ऐसा ही होगा, आप ऐसे ही, स्वस्थ रहें, समृद्ध रहें, भारत-अमेरिका दोस्ती को ऐसे ही मजबूत करते रहें, इसी कामना के साथ, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद! मेरे साथ बोलिये –
भारत माता की जय।
राजस्थान के शिक्षामंत्री मदन दिलावर के सत्कार समारोह में राज के पुरोहित, गोपाल शेट्टी, डॉ श्याम अग्रवाल और पुरुषोत्तम केजरीवाल की उपस्थिति
मुंबई। बोरीवली में 21 सितंबर 2024 को राजस्थानी समाज द्वारा भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें महाराष्ट्र के प्रवासी राजस्थानी समाज के लोगों सहित राजनीतिक, व्यवसायिक, प्रशासनिक अधिकारी और समाजसेवी वर्ग की उपस्थिति रही। राजस्थान में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम का आयोजन हुआ था जिसके लिए स्वयं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर राजस्थान से मुंबई पधारे हैं ताकि मुंबई में निवासरत सक्षम राजस्थानी बंधु अपना विशेष योगदान देकर अभियान को सफल बनाएं। कार्यक्रम में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का मुंबई के प्रवासी राजस्थानी भामाशाहों द्वारा गर्मजोशी से सत्कार किया गया। जिसमें विशेष अतिथि के रूप में गोपाल शेट्टी (पूर्व सांसद, उत्तर मुंबई), राज पुरोहित (पूर्व केबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र), मनिषा चौधरी (विधायक, दहिसर), डॉ. श्याम अग्रवाल (सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक) उपस्थित रहे।


स्वागत समारोह में व्यवसायी और समाजसेवक पुरुषोत्तम केजरीवाल को शॉल भेंट कर सम्मान प्रदान किया गया।
पुरुषोत्तम केजरीवाल ने कहा कि मैं शिक्षा मंत्री के सेवा भाव और सामाजिक कार्यों से बहुत प्रभावित हूं। मदन दिलावर जी राजस्थान को नई दिशा दे रहे हैं। आने वाले समय में राजस्थान मंत्री जी की अगुआई में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे रहेगा। साथ ही राज्य की गिनती सबसे स्वच्छ राज्यों में होगी क्योंकि उसे प्लास्टिक मुक्त किया जा रहा है। मदन जी ने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में सात करोड़ पेड़ लगवाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। और उनके इस नेक कार्यों से ईश्वर भी प्रसन्न हैं इसलिए इस बार राजस्थान में बहुत बारिश भी हुई। उनको मेरा पूर्ण समर्थन है और मैं हमारे समाज के भामाशाहों से भी आग्रह करूंगा कि वे सभी मदन जी के अभियान से जुड़ें और अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। ज्ञात हो कि इससे पहले भी भाईंदर मीरा स्थित पद्मश्री लता मंगेशकर हॉल में पुरुषोत्तम केजरीवाल का भव्य सम्मान किया गया था और उन्हें अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के हाथों डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की गई थी। पुरुषोत्तम केजरीवाल का परिवार दवाई निर्माण का व्यवसाय करते हैं इनके कंपनी की अधिकतर दवाइयां विदेशों में निर्यात की जाती है। इनके वंशजों से दवा निर्माण का कार्य किया जा रहा है। पुरुषोत्तम केजरीवाल एक सज्जन व्यक्ति हैं और समाज में उनकी साफ सुथरी छवि है। वह समाज सेवा में तत्पर रहते हैं। कोरोना काल में उन्होंने खुले दिल से खाद्य सामग्री, अन्न, दवा और धन प्रदान कर जरूरतमंद लोगों को सहायता प्रदान की। समय समय पर वे सामाजिक कार्यों में अपनी सहभागिता निभाते रहते हैं।
– गायत्री साहू
फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा की खोज एक्ट्रेस आराध्या देवी स्टारर थ्रिलर फिल्म “साड़ी” का सॉन्ग “आई वांट लव” हुआ जारी
प्रेजेंटर राम गोपाल वर्मा की फिल्म “साड़ी” के गीत “आई वांट लव” का लिरिकल वीडियो आज जारी कर दिया गया है जिसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। आरजीवी डेन म्युज़िक पर रिलीज हुआ यह गाना पहला ऑडियो सिंगल है। इस गाने का संगीत डीएसआर बालाजी ने कम्पोज़ किया है वहीं गीतकार नितिन रायकवार हैं जिन्होंने “आती क्या खंडाला” सॉन्ग लिखा था और रामगोपाल वर्मा की कई फिल्मों के गीतकार रहे हैं। इस मधुर गीत की गायिका कीर्तना सेश हैं।

Teaser
आरजीवी आरवी प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी फ़िल्म साड़ी की टैगलाइन है “बहुत अधिक प्यार डरावना हो सकता है।” कई सच्ची घटनाओं पर आधारित इस साइक्लोजिकल थ्रिलर फ़िल्म के निर्माता रवि वर्मा, निर्देशक गिरि कृष्ण कमल हैं। यह फ़िल्म एक लड़की के लिए एक लड़के के पागलपन भरे जुनून की कहानी है, जो डरावना हो जाता है। सत्या यादव ने उस लड़के की भूमिका निभाई है जो आराध्या देवी अभिनीत एक लड़की को देखता है और उसका पीछा करना शुरू कर देता है और उसकी भावनाएँ धीरे-धीरे खतरनाक हो जाती हैं।
Chahiye Song
फ़िल्म की हिरोइन आराध्या देवी को राम गोपाल वर्मा ने एक इंस्टा रील के ज़रिए तलाश किया है। आराध्या देवी को पहले श्रीलक्ष्मी के नाम से जाना जाता था, वह केरल से हैं और आरजीवी डेन ने उन्हें साड़ी फ़िल्म में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया और इसी तरह सत्या यादव को जुनूनी लड़के की भूमिका निभाने के लिए चुना गया।
फ़िल्म “साड़ी” के टीज़र को सोशल मीडिया पर बहुत पसन्द किया जा रहा है। इसे कुछ दिनों में 1.9 मिलियन व्यूज मिल गए हैं। टीज़र देखकर रामगोपाल वर्मा स्टाइल के सिनेमा की याद आ जाती है।
थ्रिल, डर, ट्विस्ट से भरपूर यह फ़िल्म नवंबर में 4 भाषाओं हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम में रिलीज़ होने के लिए तैयार है।
प्रसादम् पर राजनीति,आस्था से खिलवाड़ कब तक?
राकेश अचल
हमारे देश के नेता राजनीति के लिए कुछ भी कर सकते हैं । वे तिरुपति के प्रसादम् के लड्डुओं का भी राजनीतिक इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रसादम के लड्डुओं में चर्बी के इस्तेमाल का मुद्दा भाजपा की सहयोगी टीडीपी ने उठाया। टीडीपी की सरकार ने ही लड्डुओं की जाँच एक प्रयोगशाला में कराई जिससे राजनीति में उबाल आ गया। लड्डू पॉलटिक्स के मामले में फांसी और सीबीआई जांच तक की मांग हो गई है।दरअसल, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने पिछली जगनमोहन रेड्डी सरकार पर मंदिर के प्रसाद में घी की जगह मछली का तेल और जानवरों की चर्बी मिलाए जाने का आरोप लगाया है और तभी से यह विवाद जारी है। वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष और आंध्र के पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने नायडू पर पलटवार करते हुए कहा है कि अपनी सरकार के 100 दिन की नाकामी छुपाने के लिए चंद्रबाबू नायडू भगवान के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
उनके सभी आरोप निराधार हैं। अब इस मामले में देश भर के संतों में भी नाराजगी देखी जा रही है। संत कह रहे हैं कि आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकते।
आप भी जानते हैं और हम भी कि इस देश में जब इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के हत्यारों को फांसी नहीं हो पाती तो लड्डुओं में चर्बी और मछली का तेल मिलाने वालों को क्या ख़ाक फांसी होगी ? हाँ ये तय है कि इस मुद्दे पर अब पोलिटिक्स भरपूर होगी ,क्योंकि टीटीडी यानि तिरुपति देवस्थानम के पास अकूत सम्पत्ति है।आंध्रप्रदेश की हर सत्ता इस सम्पत्ति का उपभोग करना चाहती है।लड्डू तो एक बहाना भर हैं।
आंध्र प्रदेश में सत्ता बदलते ही 12 जून को तिरुपति मंदिर के प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की जांच के नमूने लिए गए थे। जांच रिपोर्ट 23 जून तक तैयार हो गई, लेकिन खुलासा सितंबर में हुआ जब नायडू सरकार के 100 दिन पूरे हुए। जो रिपोर्ट सामने आई उसमें लड्डू बनाने वाले घी में जो चीजें पाई गई थीं,वो बताती थी कि इसमें गाय के शुद्ध घी की जगह अन्य तिलहन और वस्पतियों के अलावा मछली के तेल और अन्य जानवरों की चर्बी हो सकती है। ये जांच नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी एनडीडीबी के सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड यानी सीएएलएफ लैब में कराई गई थी।
इस सबको जाने दीजिये,क्योंकि लड्डू तो एक बहाना हैं लेकिन असल बात ये है कि देश के राजनीतिक दलों के पास जितना पैसा था और है और आगे होगा उससे कई गुना पैसा तिरुपति के बालाजी भगवान के पास है।तिरुपति के बालाजी भगवान को ये अकूत दौलत देश के अमीर -गरीब भक्तों ने उन्हें स्वेच्छा से भेंट की है। साल 2023 में 773 करोड़ की कीमत का एक हजार 31 किलो सोना भगवान वेंकटेश को चढ़ाया गया।इतना ही नहीं, बालाजी मंदिर का बैंकों में 11 हजार 329 किलो सोना जमा है। मंदिर के नाम से 13 हजार 287 करोड़ रुपए फिक्स डिपॉजिट किया गया है।अप्रैल 2024 तक 18 हजार 817 करोड़ रुपए मंदिर के नाम से बैंक में जमा हो चुका है। टीटी डी ट्रस्ट बोर्ड ने 2024-2025 के लिए कुल 5 हजार 141.74 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है. ये पहली बार है, जब मंदिर का वार्षिक बजट 5,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
लड्डू पोलिटिक्स के जरिये टीडीपी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को निबटना चाहती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की और प्रसाद की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जेपी नड्डा ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। सवाल ये है कि क्या इस मामले में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार है ? हर मामले में बिना बोले न रहने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तो दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग कर दी है। वहीं,कांग्रेस ने सीएम नायडू पर सवाल खड़े किए हैं कि तीन महीने तक सीएम ने खुलासा क्यों नहीं किया। अब कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की है ।
गुजरात की अमूल कम्पनी ने इस मामले में अपना नाम आते ही सफाई दी है कि अमूल ने कभी भी टीटीडी को घी की आपूर्ति नहीं की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तिरुपति के लड्डू से जुड़े मामले पर चिंता जताई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि पूरे देश में प्रशासन को धार्मिक स्थलों की पवित्रता की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, ‘तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में प्रसाद के अपवित्र होने की खबरें परेशान करने वाली हैं। भगवान बालाजी भारत और दुनियाभर में लाखों श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय देवता हैं। यह मुद्दा हर श्रद्धालु को आहत करेगा और इस पर गहराई से विचार करने की जरूरत है।’
सवाल ये है कि इस लड्डू पॉलटिक्स का अंत क्या होगा ? क्या जगनमोहन रेड्डी जेल जायेंगे ? क्या विपक्षी गठबंधन पर इन लड्डुओं के बहाने देश में हो रहे विधानसभा चुनावों में हमले किये जायेंगे ? या सचमुच देश की जनता की आस्थाओं और जन स्वास्थ्य के प्रति खिलवाड़ को रोकने के लिए राजनीति से ऊपर उठकर कोई कार्रवाई की जाएगी ? मुमकिन है कि मामले का लाभ लेने के लिए राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जाँच के लिए अपनी सहयोगी केंद्र सरकार को खत लिख दे।मुमकिन है कि केंद्र सरकार इस मामले के दोषियों को जेल भेजने की तैयारी करे ,लेकिन कोई भी इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य में प्रसादम् के लड्डूओं में किसी चर्बी या मछली के तेल युक्त देशी घी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
टीटीडी के पास इतनी दौलत है कि वो चाहे तो अपने स्तर पर ही घी,बेसन,मेवों की जांच के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की लैब स्थापित कर ले ,लेकिन ऐसा शायद ही हो ,क्योंकि उसने भी सब कुछ भगवान व्यंकटेश के भरोसे छोड़ दिया है।होगा वही जो पॉलटिक्स तय करेगी।भगवान और भक्त इसमें कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हमारे देश में प्रसादम में चर्बी युक्त घी सप्लाई करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना कठिन है।(विनायक फीचर्स)
मुख्यमंत्री धामी ने किया पुस्तक ‘‘खाकी में स्थितप्रज्ञ’’ का विमोचन।
देहरादून ,21 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सर्वे चौक, देहरादून स्थित आई.आर.डी.टी सभागार में उत्तराखण्ड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘खाकी में स्थितप्रज्ञ’’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अनिल रतूड़ी ने यह पुस्तक एक आईपीएस अधिकारी के रूप में अपने संस्मरण एवं अनुभव के आधार पर लिखी है।
अनिल रतूड़ी द्वारा इस पुस्तक के माध्यम से एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने सेवाकाल के संस्मरणो, अनुभवों और चुनौतियों को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता दोनों में एक समान रहना स्थितप्रज्ञ है। यह पुस्तक सेवा में आ रहे लोगों को निर्णय लेने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमें एहसास होता है कि धरा पर कोई हमारा साथ देने वाला नहीं, तब हम धरातल से ऊपर उठकर सीधे प्रभु से संबंध वाली स्थिति में आते हैं, यह भी स्थितप्रज्ञ है। ऐसा प्रभु की कृपा से ही संभव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अनिल रतूड़ी ने एक सफल और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य किया। रतूड़ी दंपति ने अपने कार्यों और व्यवहार से उत्तराखण्ड में ही नहीं बल्कि देश में अपना एक विशेष स्थान बनाया। दोनों ने साधारण रहते हुए जनहित में असाधारण कार्य कर अपनी अलग साख बनाई। अपने सेवाकाल के दौरान श्री अनिल रतूड़ी ने अनेक बार कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर समस्याओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य में कर्म करते हुए अपने मन को शांत रखते हुए लक्ष्य प्राप्त करने का गुण होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के पास शांति और कानून व्यवस्था को बनाए रखने की बड़ी चुनौती होती है। हर चुनौती का सामना करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ संयम का होना भी जरूरी होता है। यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें अनेक उतार-चढ़ाव और चुनौतियां आती हैं, इसमें विपरीत परिस्थितयों में नैतिकता और धैर्य बनाये रखना जरूरी है। आज पुलिस के पास आधुनिक तकनीक है। पहले सीमित संसाधन होते हुए भी पुलिस को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
‘‘खाकी में स्थितप्रज्ञ’’ पुस्तक के लेखक अनिल रतूड़ी ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने पुलिस अधिकारी के रूप में साढ़े तीन दशक के अनुभव के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण संस्मरणों, अनुभवों और चुनौतियों का वर्णन करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि शांति और कानून व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस को जो शक्तियां दी गई हैं, मानव कल्याण के लिए उनका सदुपयोग करना आवश्यक है। इस पुस्तक के माध्यम से यह प्रयास किया गया है कि हमारे नये अधिकारी कैसे चुनौतियों का सामना कर धैर्य से अपने कार्यपथ पर आगे बढ़े और अपनी जिम्मेदारियों का पूरी कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर कर सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य कि सफलता में केवल एक व्यक्ति की भूमिका नहीं होती है, उसमें अनेक लोगों का योगदान होता है।
कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि ऐसी धारणा होती है कि अगर वर्दी है तो स्थितप्रज्ञ नहीं हो सकता है और अगर स्थितप्रज्ञ जो है वो वर्दी नहीं पहन सकता है। श्री अनिल रतूड़ी ने इस मिथक को अपने जीवन के प्रेरणादायी यात्रा से तोड़ा है कि वर्दी में स्थितप्रज्ञ रहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्री अनिल रतूड़ी के लेखन शैली में में टी.एस. इलियट का प्रभाव दिखता है। सुख, दुःख, जोश में और अपने उतार-चढ़ाव वाले जीवन में एक तरह व्यवहार करने वाला व्यक्ति स्थितप्रज्ञ है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने बताया है कि एक पुलिस अधिकारी की जिंदगी तलवार की धार की तरह है। चक्रव्यूह के अन्दर आ गये और उसे तोड़ दिया तो भी विजित कहलायेंगे वो जरूरी नहीं है, नहीं तोड़ा तो असफल तो आप कहलायेंगे ही।
मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मांगलगीत गाया।
इस अवसर पर डीजीपी अभिनव कुमार, पूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर, साहित्यकार एवं पूर्व कुलपति डॉ. सुधा रानी पाण्डे, शासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एवं साहित्य के क्षेत्र से जुड़े महानुभाव उपस्थित थे।
पितृ पक्ष में गाय को घर की पहली रोटी देना क्यों है
नैनीताल: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत अधिक महत्व है. पितृ पक्ष शुरू हो चुका है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय हमारे पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और सभी के दुखों को दूर करते हैं. सर्व पितृ अमावस्या के साथ इस महत्वपूर्ण समय का समापन हो जाता है. इसके बाद पितर अपने धाम पितृ लोक में वापस चले जाते हैं. पितृ पक्ष में गाय को ग्रास खिलाने का बेहद महत्व है.
उत्तराखंड के नैनीताल निवासी पंडित प्रकाश जोशी ने लोकल 18 को बताया कि पितृ पक्ष में हर रोज गाय को चारा और गौ ग्रास(रोटी) खिलाना चाहिए. ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है साथ ही देवी देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है. शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ पक्ष में पूरी भावना के साथ गाय को चारा खिलाने से श्राद्ध का पूरा फल मिलता है, और पितृ भी तृप्त होते हैं. पितृ पक्ष में गाय को रोटी और हरा चारा खिलाने से पितरों का परिवार पर सदैव आशीर्वाद बना रहता है.
पितृ पक्ष में जरूर करें ये काम
पंडित प्रकाश जोशी आगे बताते हैं कि पितृ पक्ष में हर दिन तर्पण करना चाहिए. लेकिन जिनके माता पिता जीवित हैं, उनके लिए तर्पण का नियम लागू नहीं होता है. जिनके माता पिता जीवित हैं, वे हर रोज सुबह पितर और ईष्टदेवों का ध्यान करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए. साथ ही वो लोग भी सुबह गौ माता को रोटी दें सकते हैं. इससे देवता भी प्रसन्न होते हैं. और मनोकामनाओं की पूर्ति भी होती है.
क्या होता है गौ ग्रास?
पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकलना ही गौ ग्रास कहलाता है. गौ ग्रास सुबह सुबह बनने वाले भोजन से पहली रोटी निकालकर स्नान आदि करके गौ माता को खिलाना चाहिए. वहीं यदि आस पास गाय न हो तो निकटवर्ती गौशाला में जाकर गौ ग्रास के लिए उपयुक्त राशि दान के रूप में दिया जा सकता है. वहीं श्राद्ध पक्ष के दौरान गौ माता का सेवा करना भी फलदायक होता है. मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होने हैं और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है.












