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अपोलो का महाराष्ट्र में तीसरा अस्पताल पुणे में शुरू

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400 बेड वाला अस्पताल क्वाटर्नरी देखभाल सुविधाएं प्रदान करेगा

पुणे। एशिया का अग्रणी एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता संसथान, अपोलो हॉस्पिटल्स ने आज पुणे के स्वारगेट में अपने नए हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस अस्पताल की शुरूआत चरणबद्ध रूप से होगी, पहले 250 बेड शुरू होंगे। राज्य के इस क्षेत्र भर में बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को मद्देनज़र रखते हुए, उन्हें पूरा करने के लिए स्वास्थ्य सेवा क्षमता को और बढ़ाना अपोलो हॉस्पिटल्स की योजना है।

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के चेयरमैन डॉ. प्रताप सी रेड्डी ने कहा,”अपोलो में, हमारा मिशन है, भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए स्वास्थ्य सेवा में बदलाव लाना। ‘हील इन इंडिया-हील बाय इंडिया’ विज़न से प्रेरित होकर, हम एक ऐसा स्थान बना रहे हैं जहां दुनिया भर के लोगों को करुणा और सामर्थ्य के साथ क्लिनिकल उत्कृष्टता मिल रही है। हम चाहते हैं कि, पुणे और भारत के हर घर में उत्तम स्वास्थ्य और खुशियां बसती रहें।”

अपोलो हॉस्पिटल्स ने अपने अगले विस्तार के लिए पुणे को चुना क्योंकि उन्होंने जाना कि इस क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें बदल रही हैं। उन्होंने अपनी विस्तार योजना को इस तरह बनाया है कि वे नई, उन्नत तकनीक का उपयोग करके शहर के अलग-अलग लोगों, समुदायों और संबंधित हितधारकों की बेहतर सेवा कर सकें।

अपोलो हॉस्पिटल्स की कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. प्रीता रेड्डी ने कहा,”अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे में, हम क्लिनिकल उत्कृष्टता, करुणामयी देखभाल और अथक नवाचार पर निर्मित चार दशकों से अधिक समय से चली आ रही विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। यह नया अस्पताल स्वास्थ्य सेवा पहुंच और गुणवत्ता को आगे बढ़ाने की हमारी स्थायी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो पीढ़ियों से मरीज़ों द्वारा हम पर रखे गए भरोसे का सम्मान करती है।”

अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड की प्रबंध निदेशक, सुनीता रेड्डी ने कहा,”हमारा पुणे अस्पताल अपोलो के बढ़ते राष्ट्रीय विस्तार में एक रणनीतिक जुड़ाव है, जो भारत के एक सबसे तेज़ी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा बाज़ारों में एक महत्वपूर्ण कदम है। ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को उच्च-स्तरीय क्वाटर्नरी देखभाल के लाभ दिलाने के लिए अपने एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र (इंटीग्रेटेड हेल्थ इकोसिस्टम) को शहर में लाते हुए बहुत खुश हैं। महाराष्ट्र के लिए देखभाल का एक मज़बूत, भविष्य के लिए तैयार नेटवर्क बनाने के लिए पुणे के क्लीनिकल टैलेंट के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं।”

अपोलो हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीईओ और प्रेसिडेंट डॉ. मधु ससिधर ने बताया,”हमारा पुणे हॉस्पिटल सुरक्षा विज्ञान, सबूतों पर आधारित प्रैक्टिस और एक ऐसी संस्कृति की नींव पर बनाई गई है, जिसका हर निर्णय मरीज़ को मद्देनज़र रखते हुए लिया जाता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, मरीज़ों की देखभाल के प्रति हमारी प्रतिबद्धता मज़बूत होती जाएगी, जो कि सुसंगत गुणवत्ता, पारदर्शी परिणामों, करुणा और क्लिनिकल दृढ़ता के माध्यम से प्रदान की जाएगी।”

अपोलो हॉस्पिटल्स को गर्व है कि पुणे जैसे आईटी इनोवेशन और व्यापक शहर निर्माण के एक जीवंत केंद्र का, यहां की गतिशील इकोसिस्टम का वह हिस्सा बन रहे हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे की सीईओ डॉ. मनीषा कर्माकर ने कहा,”पुणे शहर में हमारा नया हॉस्पिटल न केवल क्लिनिकल उत्कृष्टता के प्रति अपोलो की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि एक ऐसे शहर के विकास और भलाई में सहयोग कर रहा है, जो प्रौद्योगिकी और इनोवेशन के केंद्र के रूप में भारत के भविष्य को आकार दे रहा है।”

अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे, पश्चिमी भारत में उच्च-स्तरीय, तकनीकी-सक्षम देखभाल के सोच-समझकर किए जा रहे विस्तार में अग्रणी है। यह परिसर उन्नत सर्जिकल रोबोटिक्स, सटीक ऑन्कोलॉजी, व्यापक क्रिटिकल केयर और कार्डियक साइंस, ट्रांसप्लांट, ऑर्थोपेडिक्स, साथ ही मां और बच्चे के स्वास्थ्य में विशेषज्ञ कार्यक्रमों को एक एकीकृत डिजिटल आधार पर एक साथ लाता है। इस अस्पताल को क्षेत्र में देखभाल क्षमता को ऊपर ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहां के मॉड्यूलर ओटी (ऑपरेशन थिएटर) मानकीकृत गुणवत्ता के अनुरूप हैं।

पीडीयूएनएएसएस के निदेशक ने ईपीएफओ के नव पदोन्नत सहायक आयुक्तों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्घाटन किया

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पीडीयूएनएएसएस के निदेशक ने ईपीएफओ के नव पदोन्नत सहायक आयुक्तों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्घाटन किया

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) के निदेशक, श्री कुमार रोहित ने सोमवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के नव पदोन्नत सहायक भविष्य निधि आयुक्तों (एपीएफसी) के लिए तीन सप्ताह के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

श्री कुमार रोहित ने उद्घाटन सत्र के दौरान प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए एक संवादात्मक बातचीत को प्रोत्साहित किया और प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम से अपनी अपेक्षाएं साझा करने के लिए प्रेरित किया। दिल्ली सेंट्रल की एपीएफसी सुश्री प्रतिभा ठुकराल ने समय एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित एक प्रश्न पुछा जिसके उत्तर में, निदेशक ने अधिकारियों को अपनी नई ज़िम्मेदारियों के प्रति एक नियमित, नियोजित एवं व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।

एपीएफसी श्री बिगी वर्गीस द्वारा अनुपालन पर किए गए प्रश्न के जवाब में, श्री रोहित ने अनुपालन एवं सेवा गुणवत्ता के बीच महत्वपूर्ण संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में, जहां व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म सूचनाओं का तुरंत आदान-प्रदान कर देतें है, संगठनों को ग्राहकों की अपेक्षाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे अपनी सोच को इस सेवा उन्मुख सच्चाई के अनुरूप तैयार करें और टीम वर्क, समन्वय एवं निरंतर कौशल विकास के माध्यम से व्यक्तिगत विकास पर अपना ध्यान केंद्रीत करें। उन्होंने अनुभवी अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान अपने शिक्षण को अधिकतम बनाए रखने के लिए छात्र मानसिकता को अपनाने की भी सलाह दी।

इससे पहले, सत्र में आरपीएफसी-I एवं मुख्य शिक्षण अधिकारी, श्री रिजवान उद्दीन ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और उन्हें आगामी टीम निर्माण अभ्यासों में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। आरपीएफसी-II, श्री मनीष कुमार नैय्यर ने पाठ्यक्रम संरचना पर एक रूपरेखा प्रस्तुत की।

हालांकि प्रतिभागियों की औसत आयु 55 वर्ष थी इसके बावजूद, उन्होंने उल्लेखनीय रूप से उत्साह एवं जिज्ञासा का प्रदर्शन करते हुए निदेशक के साथ खुलकर बातचीत की।

पाठ्यक्रम के भाग में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षु अगले सप्ताह उत्तराखंड के रामनगर जाएंगे। यह मॉड्यूल विशेष रूप से नेतृत्व कौशलों पर केंद्रित होगा, जिनमें समय प्रबंधन, टीम निर्माण, समस्या-समाधान, नवाचार, स्वयंसेवा, अनुकूलनशीलता एवं प्रभावी संचार शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र में श्री ओतोजित क्षेत्रिमयूम (फेलो, वीवीजीएनएलआई), श्री अंकुर गुप्ता (आरपीएफसी-I), श्री राम आनंद (आरपीएफसी-I), श्री हरीश यादव (आरपीएफसी-I) और अकादमी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए।

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अभिनेता धर्मेंद्र का निधन, 89 की उम्र में ली अंतिम सांस

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Actor Dharmendra dies at age 89:  बॉलीवुड के वेटरन और लीजेंड्री एक्टर, जिन्हें ‘ही-मैन’ के नाम से जाना जाता था, धर्मेंद्र का आज लंबी बीमारी के बाद 89 साल की उम्र में निधन हो गया. न्यूज ऐजेंसी IANS ने उनके निधन की खबर की पुष्टि की है. जिसके बाग पूरे फिल्म जगत और उनके फैंस में शोक की लहर दौड़ गई है. धर्मेंद्र ने मुंबई स्थित अपने जुहू आवास पर अंतिम सांस ली. उनके अंतिम दर्शन के लिए बेटी ईशा देओल सहित परिवार के सभी सदस्य घर पर इकट्ठा हो गए हैं.

कई करीबी हस्तियों के पहुंचने उम्मीद 

इस दुखद घड़ी में परिवार को सांत्वना देने के लिए कई करीबी हस्तियों उनके घर पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है.  अभनेता अमिताभ बच्चन. आमिर खान, सहत कई एक्टर श्मशान घाट पहुंचे है. अभिनेता परिवार की प्राइवेसी बनाए रखने के लिए उनके जुहू स्थित घर के बाहर सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है.

इलाज के लिए हुए थे डिस्चार्ज

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, 12 नवंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद धर्मेंद्र को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि, बाद में परिवार के कहने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था . जिसके बाद उनका इलाज घर पर ही जारी था, जहां आज उनका निधन हो गया.धर्मेंद्र ने अपने 6 दशक से अधिक के करियर में भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दी हैं.

अलवर के वेंकटेश बालाजी मंदिर में पहुँची दुर्लभ पुंगनूर गाय

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अलवर शहर स्थित वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम मंदिर में आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पुंगनूर गाय लाई गई है. यह नस्ल देशभर में अपनी दुर्लभता और खूबसूरत छोटे आकार के लिए जानी जाती है. मंदिर प्रशासन ने बताया कि इन गायों को विशेष रूप से यहाँ लाया गया है, जिसके बाद मंदिर आने वाले लोग लगातार इनको देखने पहुंच रहे हैं. इन गायों का आगमन मंदिर परिसर में एक नया और दिव्य आकर्षण बन गया है.
मंदिर समिति के अनुसार पुंगनूर नस्ल के एक बछड़े और एक बछड़ी को लाया गया है. इनका नाम क्रमशः राधा और कृष्ण रखा गया है. इनका छोटा आकार और आकर्षक रूप इन्हें देखने वालों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. ये गायें भारतीय देसी नस्लों में सबसे छोटी मानी जाती हैं.
दूध में 8% फैट, औषधीय गुणों से भरपूर
हालांकि यह गाय प्रतिदिन केवल 2 से 2.5 लीटर दूध देती है, लेकिन इसका दूध सामान्य गायों के मुकाबले अधिक पौष्टिक माना जाता है. जहां सामान्य दूध में 3–5% फैट होता है, वहीं पुंगनूर नस्ल के दूध में 8% तक फैट पाया जाता है, जिसे अत्यधिक पौष्टिक और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है. यह दूध शारीरिक विकास और प्रतिरक्षा के लिए बेहद उत्तम माना जाता है.
कम जगह और कम भोजन में भी रह सकती है
इस गाय की सबसे बड़ी विशेषता इसका छोटा आकार है. आमतौर पर इनकी ऊंचाई 24 से 27 इंच और वजन 125 से 150 किलो तक होता है. इस कारण यह कम जगह में भी आसानी से पालने योग्य है और शहरी क्षेत्रों में गोपालन के लिए एक उत्तम विकल्प है.
महंत सुदर्शनाचार्य का बयान
मंदिर के महंत सुदर्शनाचार्य ने बताया कि पुंगनूर गाय छोटी जगह में भी आराम से रह सकती है. मंदिर में दोनों बछड़ा–बछड़ी फिलहाल एक कमरे में रखे गए हैं. ये कम भोजन लेती हैं और स्वास्थ्यवर्धक दूध देती हैं. लोगों के लिए यह आकर्षण का बड़ा कारण बनी हुई है.
उन्होंने कहा –“ये गाय घर में भी आराम से घूम-खेल सकती है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.”
पीएम मोदी के आवास पर भी मौजूद है पुंगनूर गाय
यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास पर भी पुंगनूर नस्ल की गायें हैं, जिनके साथ उनके कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिससे इस नस्ल की प्रसिद्धि और बढ़ी है.
मूत्र में एंटीबैक्टीरियल गुण, किसान करते उपयोग
पुंगनूर गाय के मूत्र में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. किसान इसका उपयोग फसल पर छिड़काव के रूप में करते हैं, जिससे फसल को कीटों से सुरक्षा मिलती है और यह जैविक खेती को बढ़ावा देता है.

दृष्टिकोण विरोध एस.आइ.आर.का या चुनाव सुधार की कवायद का

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(डॉ. सुधाकर आशावादी-विनायक फीचर्स)

लम्बे समय से देश में फर्जी मतदान का ढिंढोरा पीटकर अनेक राजनीतिक दल कभी अपनी हार का कारण ई.वी.एम. को बताते रहे, कभी कार्यपालिका के प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को मतदान में गड़बड़ी का आरोपी प्रचारित करते रहे। मतदाता सूची में गड़बड़ के आरोपों पर ध्यान देते हुए भारत में चुनाव सुधार की प्रक्रिया हेतु विशेष गहन पुनरीक्षण हेतु चुनाव आयोग ने कमर कसी, जिसके उपरांत बिहार में चुनाव हुए। उसके बाद देश के अनेक राज्यों में एस.आइ.आर. के माध्यम से मतदाता सूची को अद्यतन करने की कवायद चल रही है।
एक व्यक्ति एक मतदान अधिकार की स्पष्ट नीति के तहत एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में नाम होना या मृतक अथवा पलायन कर गए मतदाता का नाम संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची से हटाकर मतदाता सूची में प्रामाणिक परिवर्तन करना विशेष गहन पुनरीक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।
विडंबना यह है कि जो लोग मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी का आरोप लगाकर चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहे थे, वहीं मतदाता सूची को अद्यतन करने हेतु की जा रही एस.आइ.आर. का विरोध करके चुनाव आयोग के विरुद्ध अराजक प्रदर्शन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रथम दृष्टया यही प्रतीत होता है, कि देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के निर्देशन में चल रही एस.आइ.आर. में जुटे कर्मचारियों की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता को संकीर्ण सियासत अपमानित करके देश में अराजकता का वातावरण बनाना चाहती है तथा आम आदमी को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। वह ईमानदारी से चुनाव सुधार प्रक्रिया के पक्ष में नहीं है। यदि चुनाव सुधार के पक्ष में होती, तो अनेक क्षेत्रीय राजनीतिक दल पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों में एस.आइ.आर. का विरोध न करते, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाताओं की पहचान में सहयोग करते।
इतिहास साक्षी है, कि देश के दूरदराज के क्षेत्रों में बरसों तक देश में मतपत्रों के माध्यम से चुनाव कराए जाने वाली दीर्घ प्रक्रिया में आम आदमी की मतदान स्थल तक पहुँच नहीं हो पाती थी। गांवों के दबंग जातीय क्षत्रप अपनी मनमानी किया करते थे। बूथ कैप्चरिंग, मतपत्र छीनने और मतपेटियां चोरी करके चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जाता था। मतगणना स्थल पर थकाऊ प्रक्रिया में दिन रात मतपत्रों की गिनती करके चुनाव परिणाम जारी होते थे, जिनमें गड़बड़ी की आशंका रहती थी।
अब मतदान पर्यवेक्षकों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में चुनाव कर्मियों को मतदान और मतगणना के लिए विशेष प्रशिक्षण देकर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई जाती है। इस प्रक्रिया में जुड़े कर्मियों के अथक प्रयासों से सटीक चुनाव परिणाम आते हैं, किन्तु मतदाताओं द्वारा नकारे जाने से आहत अराजक तत्व अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़कर अपनी रातों की नींद और दिन का चैन गंवाकर चुनाव में ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा करने में पीछे नहीं रहते। मतदाता सूचियों में यदि गड़बड़ है तथा एक व्यक्ति का एक से अधिक मतदाता सूची में नाम है, तो इसके लिए वह मतदाता दोषी क्यों नहीं है, जो एक मत के स्थान पर अधिक मत देने का दुस्साहस करता है। आम मतदाता तो ऐसा कर नहीं कर सकता। समझा जा सकता है, कि किसी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति ही ऐसा दुस्साहस करने की हिम्मत जुटा सकता है। बहरहाल ऐसा प्रतीत होता है, कि एस.आइ.आर. का विरोध वही कर रहे हैं, जो निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के पक्षधर नहीं हैं। यहाँ यह भी समझना आवश्यक है कि मतदाता सूचियों का परीक्षण कर रहे बी.एल.ओ. को भी संकीर्ण मनोवृत्ति धारी संदेह के घेरे में खड़ा करने का प्रयास करने से परहेज नहीं कर रहे हैं। उनके आरोपों के अनुसार बी.एल.ओ. विपक्षी दलों के मतदाताओं के वोट काटता है। समझ नहीं आता कि इस प्रकार की सोच सियासी तत्व कैसे रख सकते हैं ? चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्राथमिक कर्मचारी से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम बिना किसी जांच पड़ताल के कैसे काट सकते हैं ? क्या प्राथमिक कर्मचारी मतदाता सूची का परीक्षण करने से पहले हर मतदाता से यह पूछता है, कि वह किसी राजनीतिक दल का समर्थक है ? क्या मतदान के दिन कोई मतदान कर्मी किसी खास दल के समर्थक मतदाताओं से पूछता है, कि वे किस राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने आए हैं।
यदि नहीं तो वोट चोरी करने और मतदाता सूचियों के परीक्षण हेतु की जाने वाली एस.आइ.आर. प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने का औचित्य क्या है ? लगता है कि अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके राजनीतिक दल अपनी नैतिक हार स्वीकार कर चुके हैं तथा जनता के बीच में अपना अस्तित्व सुरक्षित न पाने के कारण देश में अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि ऐसा न होता, तो वे चुनाव सुधार की प्रक्रिया में विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एस.आइ.आर. का विरोध करने की जगह चुनाव प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने हेतु चुनाव सुधारों का समर्थन करते। (विनायक फीचर्स)

मॉडल एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने ब्रेस्ट इम्प्लांट हटाने के फैसले पर खुलकर बात की और युवतियों से की खास अपील

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मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस और मॉडल शर्लिन चोपड़ा एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका साहसिक फैसला—अपने 825 ग्राम वजनी सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट को हटाना। इसके लिए उन्होंने मुंबई के कंट्री क्लब में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखी।

शर्लिन ने बताया कि इम्प्लांट्स की वजह से उन्हें लंबे समय से पीठ, सीने, गर्दन और कंधों में लगातार दर्द हो रहा था। उन्होंने कहा, “825 ग्राम सिलिकॉन लेकर चलना मेरे लिए बेहद मुश्किल हो गया था। ऐसा लगता था जैसे सीने पर कोई पहाड़ रखा हो। यह कदम बोल्ड था, लेकिन ज़रूरी भी।”
कई डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद मैंने इम्प्लांट हटाने का निर्णय लिया।

शर्लिन चोपड़ा ने आगे बताया कि अब यह भारी बोझ मेरे शरीर से उतर चुका है। हर इम्प्लांट 825 ग्राम का था। उन्हें हटाने के बाद मैं खुद को बेहद हल्का और आज़ाद महसूस कर रही हूँ। सबसे राहत की बात यह है कि अब मेरे शरीर में कुछ भी कृत्रिम नहीं है—सब कुछ नैचुरल है और मेरा अपना है। मैं ईश्वर और अपने प्रशंसकों की आभारी हूँ।”

शर्लिन चोपड़ा ने खास तौर पर युवा लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि दूसरों के कहने, सोशल मीडिया या समाज के दबाव में आकर अपने शरीर के साथ छेड़छाड़ न करें। किसी भी चीज़ का निर्णय जल्दबाजी में न लें। फायदे के साथ नुकसान को भी समझें, दुष्प्रभावों के बारे में जानें और अपने परिवार, दोस्तों व मेडिकल एक्सपर्ट्स से सलाह लिए बिना कोई कदम न उठाएँ। भीड़ का हिस्सा मत बनो—अपनी वास्तविकता की रक्षा करो।”

उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ खूबसूरती का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा सर्जिकल प्रोसेस है जिसमें जोखिम शामिल होते हैं।
“मैं विज्ञान के खिलाफ नहीं हूँ, पर केवल किसी और को देखकर कुछ भी मत कर लो। सोशल मीडिया की चमक पर आँख बंद करके भरोसा न करें। आपकी नैचुरल खूबसूरती ही आपकी सच्ची ताकत है।”

यह उल्लेखनीय है कि ब्रेस्ट इम्प्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें सिलिकॉन का उपयोग कर स्तनों के आकार और शेप को बढ़ाया जाता है।

शर्लिन के फैंस भी उनके इस फैसले की सराहना कर रहे हैं और कह रहे हैं, “आखिरकार आपको एहसास हुआ कि आपको किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं थी। आप जैसी थीं, वैसी ही खूबसूरत हैं।

गौ गोबर से हरित ऊर्जा (Green Energy): भारत का सतत भविष्य का ईंधन

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भारत में प्रतिवर्ष लगभग ५०० मिलियन टन गौ गोबर उत्पन्न होता है। इसे यदि कूड़ा मानकर फेंक दिया जाए तो यह मीथेन गैस छोड़कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, लेकिन यदि इसका वैज्ञानिक उपयोग किया जाए तो यही गोबर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सबसे बड़ा स्रोत बन सकता है।१. बायोगैस (Bio-Gas) – घरेलू हरित ईंधन

  • एक औसत देसी गाय प्रतिदिन १०-१२ किलो गोबर देती है।
  • २ किलो गोबर + २ किलो पानी से बने घोल से एक १ घन मीटर बायोगैस प्लांट में १ घन मीटर बायोगैस बनती है।
  • १ घन मीटर बायोगैस = ०.४५-०.५ किलो LPG के बराबर।
  • एक ४ जनों का परिवार ४-५ गायों के गोबर से अपना पूरा रसोई गैस मुफ्त में चला सकता है।

आज देश में ५० लाख से अधिक परिवार स्तर के बायोगैस प्लांट चल रहे हैं। नए मॉडल (जैसे फ्लेक्सी बायोगैस, SINTEC, KVIC फ्लोटिंग ड्रम) इतने आसान हो गए हैं कि छत पर भी लगाए जा सकते हैं।२. CBG (Compressed Bio-Gas) – पेट्रोल-डीज़ल का देसी विकल्प

  • बायोगैस को शुद्ध करके ९५-९८% मीथेन बनाई जाती है, इसे CBG कहते हैं।
  • १ टन गोबर से लगभग ४०-५० किलो CBG बनती है।
  • १ किलो CBG = १.२५ लीटर पेट्रोल या १.४ लीटर डीज़ल के बराबर ऊर्जा देती है।

सरकार का SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना के अंतर्गत ५००० CBG प्लांट लगाने का लक्ष्य है।

  • एक ५ टन प्रतिदिन क्षमता वाला CBG प्लांट प्रतिदिन २ टन जैविक खाद भी देता है।
  • अभी तक १०० से अधिक CBG प्लांट चालू हो चुके हैं (Reliance, Indian Oil, Adani, HPCL आदि लगा रहे हैं)।
  • २०३० तक १५ मिलियन टन CBG उत्पादन का लक्ष्य = १५% प्राकृतिक गैस की जगह ले सकता है।

३. बिजली उत्पादन (Bio-CNG से Electricity)

  • १०००% गोबर से चलने वाले बायोगैस प्लांट से बिजली भी बनाई जा सकती है।
  • १ क्यूबिक मीटर बायोगैस से २-२.५ यूनिट बिजली बनती है।
  • महाराष्ट्र के बारामती में १० मेगावाट, राजस्थान में ५ मेगावाट क्षमता के गोबर आधारित पावर प्लांट सफलतापूर्वक चल रहे हैं।

४. जैविक खाद – बोनस लाभबायोगैस प्लांट का बचा हुआ स्लरी रासायनिक खाद से ३०-४०% अधिक उपज देने वाली बेहतरीन जैविक खाद होती है। इससे किसान की खाद का खर्चा भी बच जाता है।५. पर्यावरणीय लाभ

  • १ टन गोबर से बायोगैस बनने पर ३-४ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन रोकता है।
  • पराली जलाने की समस्या भी कम होती है क्योंकि किसान पराली की जगह गोबर बेचकर कमाई करते हैं।
  • मीथेन (जो CO₂ से २५ गुना अधिक ग्लोबल वार्मिंग करती है) को नियंत्रित किया जाता है।

प्रमुख सफल उदाहरण

  1. पुणे के उरुली कांचन में पंडित साठे जी का ३५ साल पुराना बायोगैस प्लांट आज भी चल रहा है।
  2. इंदौर नगर निगम रोज़ ५५० टन गोबर-कचरे से CBG बना रहा है और पूरे शहर की सफाई गाड़ियाँ CBG से चलती हैं।
  3. गुजरात का बनासकांठा डेयरी रोज़ ४० टन गोबर से CBG बना रही है।
  4. हरियाणा के करनाल में गौसंवर्धन केंद्र १०० टन गोबर रोज़ प्रोसेस करता है।

निष्कर्षगौ गोबर कोई अपशिष्ट नहीं, अपार ऊर्जा का खजाना है। यदि भारत अपने ३० करोड़ पशुओं के गोबर का केवल ५०% का भी उपयोग बायोगैस/CBG में कर ले तो:

  • ५० मिलियन टन जैविक खाद
  • २० मिलियन टन CBG (लगभग २५ अरब लीटर पेट्रोल के बराबर)
    -डाइज़ल)
  • १० करोड़ परिवारों को मुफ्त रसोई गैस
  • १०० गीगावाट बिजली क्षमता

यह केवल ऊर्जा क्रांति नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वच्छ भारत और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का त्रिवेणी संगम है।
गौ गोबर सचमुच भारत का “ग्रीन गोल्ड” है।
ॐ गौमातरूपेण संरक्षितं विश्वम्।
जय गौमाता! जय हरित ऊर्जा!

गोबर और गौमूत्र से बने उत्पाद

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गोबर और गौमूत्र से भारत में सैकड़ों पारंपरिक एवं आधुनिक उत्पाद बनाए जाते हैं। ये उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक, पर्यावरण-अनुकूल और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। नीचे कुछ प्रमुख उत्पादों की सूची दी गई है:गोबर से बने मुख्य उत्पाद

  1. गोबर की खाद (वर्मी कम्पोस्ट, सेंद्रिय खाद) – रासायनिक उर्वरक का सबसे अच्छा विकल्प
  2. गोबर गैस (बायोगैस) – खाना पकाने और बिजली बनाने के लिए
  3. धूपबत्ती, अगरबत्ती एवं हवन सामग्री
  4. गोबर के उपले – ईंधन के रूप में (ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बहुत उपयोग)
  5. गोबर से बने दीवारों का प्लास्टर – प्राकृतिक इन्सुलेशन, कीड़े-मकोड़े नहीं लगते
  6. हस्तशिल्प उत्पाद – फूलदान, गमले, खिलौने, दीये, मूर्तियां
  7. गोबर के बोर्ड – लकड़ी की जगह फर्नीचर की जगह (MDF जैसा)
  8. पेस्ट कंट्रोल स्प्रे – फसलों में कीटनाशक के रूप में
  9. फ्लोर क्लीनर (फिनाइल का विकल्प)
  10. गोबर से बनी ईंटें – मकान बनाने में उपयोग

गौमूत्र से बने मुख्य उत्पाद

  1. अर्क (डिस्टिल्ड गौमूत्र) – पंचगव्य चिकित्सा में मुख्य औषधि
  2. फिनाइल एवं टॉयलेट क्लीनर – 100% प्राकृतिक, बदबू मारने में बहुत प्रभावी
  3. साबुन, फेसवॉश, शैम्पू, बॉडी लोशन
  4. दांत का मंजन (टूथ पाउडर)
  5. कीटनाशक एवं फफूंदनाशक – नीम + गौमूत्र का स्प्रे किसान बहुत इस्तेमाल करते हैं
  6. पंचगव्य औषधियां – कैंसर, डायबिटीज़, त्वचा रोग, इम्यूनिटी आदि के लिए सैकड़ों फॉर्मूलेशन
  7. हेयर ऑयल एवं मेहंदी
  8. गौमूत्र आधारित हैंड सैनिटाइज़र

गोबर + गौमूत्र दोनों से मिलाकर बने उत्पाद (पंचगव्य)

  1. घी, दही, दूध, मट्ठा + गोबर-गौमूत्र मिलाकर पंचगव्य घृत
  2. पंचगव्य साबुन एवं बाम
  3. नाक की दवा (नस्य)
  4. त्वचा रोगों की क्रीम एवं मलहम

प्रमुख ब्रांड/संस्थान जो ये उत्पाद बनाते हैं

  • पतंजलि (पतंजलि आयुर्वेद)
  • गौक्रांति
  • गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र (देवलाना, नागपुर)
  • कामधेनु गौशाला एवं पंचगव्य चिकित्सा केंद्र
  • गोपालन (कर्नाटक सरकार)
  • श्री गौरी गौशाला (राजस्थान)
  • गौमाता उत्पाद (हरियाणा)
  • वेदवाणी, गौअंकुर, गौमय आदि कई छोटे-बड़े ब्रांड

ये उत्पाद अब ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं – Amazon, Flipkart, Jiomart के अलावा कई वेबसाइट्स जैसे gaukranti.org, gavyamart.com, panchgavya.com आदि पर मिल जाते हैं।

श्रृंगेरी जगद्गुरू ने गौ-रक्षा को बताया “शाश्वत कर्तव्य”

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राजधानी दिल्ली इनदिनों सनातन आस्था और भक्ति के भाव में डूबी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में चल रही ऐतिहासिक धर्म विजय यात्रा 2025 के अंतर्गत श्रृंगेरी शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखरा भारती महास्वामीजी ने संवैधानिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में जगद्गुरू ने गौ संरक्षण को मात्र परंपरा नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान का माध्यम और सनातन धर्म का अविचल हिस्सा बताया।

माँ और गौ माता का संबंध

जगद्गुरु ने आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि माता शब्द गौ के लिए इसलिए प्रयुक्त होता है क्योंकि वह पोषण का सर्वोच्च प्रतीक है। देवी देवताओं और गौ को ही माता के रूप में संबोधित किया जाता है, जो इस विशेष संबंध को दर्शाता है। जगद्गुरू ने हजारों वर्षों से कृषि और मानव जीवन में पशुधन के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि की नींव हमेशा से पशुधन पर टिकी रही है।

कृषि और मानव अस्तित्व की रीढ़
शंकराचार्य जी ने मवेशियों के ऐतिहासिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़ारों वर्षों से वे कृषि और मानव अस्तित्व की रीढ़ रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि मानवता को मिलने वाला पोषण मुख्य रूप से मवेशियों से ही आता रहा है। उन्होंने यह भी आगाह किया कि पिछले पाँच दशकों में खाद्य उत्पादन और कृषि में देखे गए बदलावों ने मानव अस्तित्व को प्रभावित किया है। आचार्य ने मनुष्यों से इन जानवरों के प्रति उनके नैतिक दायित्व की ओर लौटने का आग्रह किया।

आईसीजी ने महाराष्ट्र और गोवा के तटीय इलाकों में किया दो दिन का तटीय सुरक्षा अभ्यास

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भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) ने 19-20 नवंबर, 2025 तक महाराष्ट्र और गोवा के समुद्र तट पर बड़ी कोस्टल सिक्योरिटी एक्सरसाइज सागर कवच-02/25 को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल, मजबूत ऑपरेशनल तैयारी और समुद्री सुरक्षा की मुश्किलों से निपटने की मजबूत क्षमता दिखाई गई, जिसमें राष्ट्र-विरोधी तत्वों (एएनई) द्वारा जरूरी तटीय संपदाओं को निशाना बनाने के खतरे भी शामिल थे। दो दिन की इस एक्सरसाइज में 6,000 से ज्यादा कर्मचारियों, 115 से ज्यादा समुद्री और हवाई एसेट्स और कई तरह की केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, बंदरगाहों और कोस्टल अथॉरिटीज ने हिस्सा लिया।

इस एक्सरसाइज का मकसद तटीय सुरक्षा इमरजेंसी से निपटने, जरूरी तटीय जगहों पर हमलों को रोकने और मल्टी-लेयर्ड तटीय सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए हिस्सा लेने वाली सभी एजेंसियों की तैयारी का अंदाजा लगाना था। इसमें तटीय और सामुद्रिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केंद्रीय और राज्य हितधारकों स्टेकहोल्डर्स के बीच तालमेल बढ़ाने की भी कोशिश की गई। भारतीय नौसेना और आईसीजी शिप, आईसीजी डोर्नियर एयरक्राफ्ट, चेतक हेलीकॉप्टर और एयर कुशन व्हीकल (एसीवी) समेत कई तरह के मैरीटाइम और एरियल एसेट्स को एक जगह लाया गया। सभी ऑपरेशनल डोमेन में आसानी से समन्वय सुनिश्चित करने के लिए सामुद्रिक पुलिस बोट्स, सीमा शुल्क और सीआईएसएफ क्राफ्ट और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) के संसाधन भी तैनात किए गए, साथ ही पुलिस और फिशरीज विभाग की बोट्स भी लगाई गईं।

इस एक्सरसाइज से सुरक्षा, इंटेलिजेंस और बंदरगाह प्रबंधन एजेंसियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, कम्युनिकेशन नेटवर्क और कोऑर्डिनेशन में काफी बढ़ोतरी हुई। 19 केंद्रीय और 13 राज्य एजेंसियों के बड़े समूह के साथ-साथ एक बड़े बंदरगाह, 21 छोटे बंदरगाह और जिला स्तरीय तटीज अथॉरिटीज की भागीदारी ने समुद्र और किनारे दोनों पर रिस्पॉन्स की पूरी कवरेज सुनिश्चित की।