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CM Mohan Yadav : कामधेनु गौ अभ्यारण्य में गोवर्धन पूजन

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CM Mohan Yadav : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज (1 नवंबर) गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में शामिल होने आगर मालवा जिले के सुसनेर स्थित कामधेनु गौ-अभ्यारण्य सालरिया पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ गोवर्धन पूजा एवं गौमाता की पूजा कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली के लिए मंगल कामना की। इस अवसर पर विभिन्न विकास कार्यों का वर्चुअल भूमि पूजन एवं लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। साथ ही गो अभ्यारण्य संचालन समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का स्वागत कर हो स्मृति चिन्ह के रूप में गाय की मूर्ति भेट की।

49 करोड़ से अधिक के कार्यों का किया भूमि पूजन

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सालरिया स्थित कामधेनु गो अभ्यारण्य में से ही आगर जिले में होने वाले 49 करोड़ से अधिक के कार्यों का भूमिपूजन किया। जिसमें उनके सड़को का निर्माण आगर मालवा में विधि महाविद्यालय के भवन का निर्माण आदि आने कार्यों का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गो अभ्यारण्य में शासकीय विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

मंच पर दिखी भारतीय परिधान की झलक

सलारिया स्थित गो अभ्यारण्य में आयोजित गोवर्धन पूजन कार्यक्रम में मंच पर भारतीय परिधान की झलक देखने को मिली। साधु संतों के अलावा अधिकारी कर्मचारी सुरक्षा कर्मी और उपस्थित अतिथि और राजनेता सभी भारतीय परिधान धोती पहने हुए दिखे।

Cow Gohari Festival: धार में धूमधाम से मना गाय गोहरी पर्व

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Dhar News: धार में गाय गोहरी पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान मन्नतधारियों के ऊपर से सैकड़ों सजी-धजी गायें गुजारी गईं, जिन्हें देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देखें श्रद्धालुओं के उत्साह से भरी तस्वीरें…।

धार जिले के सरदारपुर स्थित गवलीपुरा में दीपावली के दूसरे दिन पारंपरिक ‘गाय गोहरी’ पर्व बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस आयोजन में जिले भर के यादव समाज के लोग अपने पशुधन को सजा-धजाकर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, मन्नतधारी श्रद्धालु इस पर्व पर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भूमि पर लेटते हैं और उनके ऊपर से सैकड़ों गायों को गुजारा जाता है।

इस वर्ष भी गवलीपुरा में विशेष आयोजन हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने अपने पशुधन को मोरपंख, फूल-मालाओं और अन्य सजावटी सामग्रियों से सजाया। इस दौरान मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना की गई और ढोल-नगाड़ों के साथ लोग गायों को लेकर उत्सव स्थल पर पहुंचे। जैसे ही मन्नतधारी श्रद्धालु भूमि पर लेट गए, गांव की सैकड़ों गायों को उनके ऊपर से निकाला गया, जो सभी श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत और रोमांचक अनुभव था। इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए गांव के लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोग भी बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।

गाय गोहरी पर्व की परंपरा को यादव समाज के लोग अपनी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के तहत सालों से निभा रहे हैं। इस पर्व का उद्देश्य गोवंश के प्रति आस्था को प्रकट करना और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करना होता है। इस दौरान उपस्थित लोगों और जन प्रतिनिधियों ने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी।

गाय गोहरी का यह पारंपरिक पर्व न केवल धार्मिक मान्यताओं को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण समाज में गोवंश के महत्व और श्रद्धा को भी बल देता है। जिले के अन्य गांवों में भी यह पर्व मनाया जा रहा है, जिसमें लोग पूरे उत्साह के साथ अपने पशुधन की पूजा कर अपनी परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं।

म.प्र. स्थापना दिवस 1 नवंबर- मोदी और मोहन के नेतृत्व में खुशहाली के पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश* 

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(सुरेश पचौरी- विनायक फीचर्स)
            हम मध्यप्रदेश का 69 वां स्थापना दिवस मना रहे हैं। भारत का हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश एक नवम्बर 1956 को अस्तित्व में आया, जिसका गठन तत्कालीन मध्यभारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल रियासत तथा महाकौशल के कुछ हिस्से को एकीकृत कर किया गया था। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर तथा झीलों की नगरी कहे जाने वाले भोपाल को प्रदेश की राजधानी बनाया गया। 44 वर्षों के बाद प्रदेश का विभाजन हुआ और जनता की मांग पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा नए राज्य छत्तीसगढ़ का गठन किया गया। अतीत पर नजर डाली जाए तो मध्यप्रदेश ने अपने गठन और विभाजन के दौर में अनेक उतार- चढ़ाव देखे हैं लेकिन अब यह राज्य प्रगति के नये सोपान नाप रहा है।
डबल इंजन की सरकार इस राज्य की तस्वीर और तकदीर बदलने की दिशा में शिद्दत से लगी हुई है। प्रदेश की जनता की खुशहाली और समरस विकास के लिए तमाम जनहितैषी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो इस बात की गवाह हैं कि मध्यप्रदेश आने वाले दिनों में सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहेगा। इस विकासोन्मुखी अभियान में जहां एक ओर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सुस्पष्ट व दूरगामी सोच है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार की प्रदेशवासियों की सेवा करने की प्रतिबद्धता है।
मध्यप्रदेश के इतिहास, भूगोल और संस्कृति पर दृष्टिपात करें तो यह राज्य अनेक विविधताओं को अपने में समेटे हुए है। प्रचुर वन संपदा, अथाह जलराशि वाली नदियां, विपुल खनिज भंडार, खूबसूरत पर्यटन स्थल, पुरातात्विक धरोहर आदि सब कुछ तो उपलब्ध है इस प्रदेश में। नर्मदा घाटी में मिले साक्ष्यों से स्पष्ट है कि इस अंचल में अनेक सभ्यताएं पुष्पित एवं पल्लवित हुई हैं। धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है तो ओरछा में राम राजा विराजमान हैं। चित्रकूट की महिमा तो अवर्णनीय हैं। यहीं गोस्वामी  तुलसीदास जी ने भगवान श्री राम के दर्शन किए थे। क्षिप्रा के तट पर संदीपनी आश्रम में श्रीकृष्ण और उनके सखा सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी। राजा विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास, राजा भोज एवं संत सिंगाजी की जन्मभूमि तथा कर्मभूमि होने का सौभाग्य मध्यप्रदेश को ही प्राप्त है। सॉंची में विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप हैं तो सोनागिरी में प्रसिद्ध जैन मंदिर। खजुराहो में तो पूरी दुनिया से पर्यटक आते हैं।
  दरअसल, मध्यप्रदेश जितना विस्तृत है, उतना ही ऐतिहासिक भी है। चंद्रशेखर आजाद के शौर्य, रानी दुर्गावती के बलिदान, टंट्या मामा की शहादत, छत्रसाल बुंदेला के पराक्रम, देवी अहिल्या के सुशासन को मध्यप्रदेश की विरासत के रूप में रेखांकित किया जाता है। संगीत सम्राट तानसेन तथा उस्ताद अलाउद्दीन खां तो संगीत के क्षेत्र की अनमोल धरोहर हैं। न जानें कितने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कुर्बानी प्रदेश के कोने-कोने में आज भी जीवंत है।
      नर्मदा, सोन, चंबल, बेतवा, केन, ताप्ती, पेंच, पार्वती, बेनगंगा, रेवा तथा माही आदि नदियों के उद्गम स्थल यहीं पर हैं। ये नदियां प्रदेश की चारों दिशाओं में प्रवाहित होती हैं। नर्मदा को तो मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी माना जाता है। प्रदेश के एक तिहाई भूभाग के निवासियों को नर्मदा आर्थिक रूप से संपन्न बनाती है। नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर, इंदिरासागर और ओंकारेश्वर परियोजनाओं से प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के द्वार खुल गये हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के शासन काल में नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ा जा चुका है। केन को बेतवा से जोड़ने की पहल जारी है।
 *केन्द्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सबसे आगे मध्यप्रदेश* 
    यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशा- निर्देशन में म.प्र. तेजी से विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। केन्द्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन और उनका लाभ पात्र हितग्राहियों को दिलाने में म.प्र. देश में लगातार अग्रणी बना हुआ है। पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम आवास योजना, कृषि अवसंरचना निधि, प्रधानमंत्री मातृ-वंदना योजना, पीएम स्वामित्व योजना, नशामुक्त भारत अभियान, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और स्वच्छ भारत मिशन आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में म.प्र. देश में सबसे आगे है।
      प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्यप्रदेश में 8 लाख 20 हजार 575 आवास बनाए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में प्रदेश में 36 लाख 25 हजार 20 आवासों का निर्माण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत म.प्र. में 72 हजार 965 किलोमीटर लंबी  सड़कें बन चुकी हैं। किसान क्रेडिट कार्ड योजना में 65 लाख 83 हजार 726 किसानों के क्रेडिट कार्ड तैयार हो गए हैं। अटल पेंशन योजना में 26 लाख 15 हजार (शत प्रतिशत) हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में म.प्र. देश में पहले नम्बर पर है।
      यह एक सुखद पक्ष है कि मध्यप्रदेश सरकार की दूरगामी सोच के चलते कृषि क्षेत्र में उन्नति, औद्योगिक विकास, आईटी एवं पर्यटन में बढ़ते सेवा-क्षेत्रों से राज्य के आर्थिक विकास को मजबूती मिल रही है। वर्ष 2023-24 का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) 13,63,327 करोड़ है, जो पिछले वर्ष (2022-23) की तुलना में 9.37 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रदेश में प्रति व्यक्ति की आय 1,42,562 रुपये हो गयी है, जो आधार वर्ष (2011-12) की तुलना में चार गुना अधिक है। म.प्र. की कृषि विकास दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। म.प्र. से पिछले वर्ष 21 लाख टन गेहूं निर्यात हुआ, जो पूरे देश के गेहूं निर्यात का 45 प्रतिशत है।  म.प्र. गेहूं निर्यात के मामले में देश में नम्बर एक पर है। इसी प्रकार 2023-24 में प्रदेश में 201.22 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ, जिससे मध्यप्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में तीसरे नम्बर पर है।यशस्वी प्रधानमंत्री द्वारा मुख्य मंत्री किसान योजना के तहत प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों के खाते में 1624 करोड़ रुपए की सहायता राशि का अंतरण किया ।
          मध्यप्रदेश में बिजली की बात की जाए तो विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता 28774 मेगावाट है, जिसमें 22328 मेगावाट बिजली पारंपरिक स्रोत से तथा 5638 मेगावाट नवकरणीय ऊर्जा स्रोत से उत्पादित हो रही है। प्रदेश में कृषि और उद्योगों को जरूरत के हिसाब से पर्याप्त बिजली मिल रही है।
       मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार विस्तार कर रही है। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना में 4 करोड़ 2 लाख 22 हजार 893 हितग्रहियों को डिजिटल आयुष्मान कार्ड जारी किये जा चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना में सरकार प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक अस्पताल में भर्ती व्यय प्रदान करती है। आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में म.प्र. देश का प्रथम राज्य बन चुका है।
 *म.प्र. में बेटी बोझ नहीं, वरदान* 
    मध्यप्रदेश में बेटी अब बोझ न होकर वरदान बन गयी है। प्रदेश की महिलाओं के कल्याणार्थ राज्य सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान योजनाओं द्वारा महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है। इन लाभकारी योजनाओं का अनुसरण देश के कई राज्यों ने किया है। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से महिलाओं के स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार आया है। म.प्र में लाड़ली बहना योजना के तहत 1.29 करोड़ महिलाओं को प्रतिमाह 1250 रुपए दिये जा रहे हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना में बालिका के जन्म के समय 1.43 लाख रुपयों का आश्वासन प्रमाण पत्र दिया जाता है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से प्रदेश में सामूहिक विवाह प्रथा आरंभ हुई है। इस योजना में प्रदेश सरकार नवविवाहितों को आर्थिक सहायता देती है। ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ‘ योजना के तहत बेटियों को हायर सेकण्डरी तक निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान है।
*अपार संभावनाएं हैं मध्यप्रदेश में* 
    इसमें कोई दो राय नहीं है कि म.प्र. अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। इसमें समृद्ध राज्य बनने की क्षमता तथा संसाधन दोनों मौजूद हैं। प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लेने की जरूरत है। मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मध्यप्रदेश से आत्मीय लगाव है। उम्मीद की जानी चाहिए कि यशस्वी प्रधानमंत्री जी के दिशा निर्देशन में मध्यप्रदेश विकास की तीव्र उड़ान भरेगा। मध्यप्रदेश की विकास यात्रा में हमें भी अपनी जिम्मेदारी एवं सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। यही वक्त
का तकाजा है। *(विनायक फीचर्स)
(लेखक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं)।*

उपहार बांटकर डॉ कृष्णा चौहान ने मनाया दीपावली मिलन समारोह

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मुंबई। दीवाली के अवसर पर निर्माता, निर्देशक, समाजसेवी डॉ कृष्णा चौहान ने मुम्बई के अंधेरी स्थित मेयर हॉल में “दीपावली मिलन समारोह” का आयोजन किया। केसीएफ फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में खुशी बांटने और प्रेम का दीपक जलाने के इस महापर्व का उत्सव मनाया गया जहां मीडियाकर्मियों की उपस्थिति में उन्होंने सामाजिक और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को दीवाली का उपहार भेंट स्वरूप प्रदान किया।

डॉ कृष्णा प्रतिवर्ष दीवाली मिलन समारोह का आयोजन रखते हैं।
डॉ कृष्णा चौहान ने सभी को दीवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी के लिए खुशियां बांटना सबसे खुशी की बात है। लोगों को उपहार देना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
विदित हो कि निर्माता निर्देशक डॉ कृष्णा चौहान बॉलीवुड लीजेंड अवार्ड 2024 का आयोजन 14 दिसंबर को मेयर हॉल अंधेरी में कर रहे हैं जहां कई सेलिब्रिटी की उपस्थिति रहेगी।
2 अक्टूबर को उन्होंने 4थे ‘महात्मा गांधी रत्न अवार्ड 2024’ का आयोजन भी किया था। वह केसीएफ फाउंडेशन के अंतर्गत साल भर हर दूसरे महीने अवार्ड शो करते रहते हैं।

संतोष साहू

गाय माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए प्रदर्शन

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जम्मू, 29 अक्टूबर । मूवमेंट कल्कि का गाय माता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने और सख्त गौ रक्षा कानून की मांग को लेकर किया जा रहा प्रदर्शन आज अपने नौवें दिन भी पूरे जोश और समर्पण के साथ जारी रहा। यह ऐतिहासिक प्रदर्शन अम्फला चौक पर चल रहा है, जहां प्रतिदिन नए लोग इस आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं और समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।

मंगलवार को प्रदर्शन में संत श्री आसाराम जी बापू के अनुयायियों, गौ रक्षक अश्वनी, राम कृष्ण, और अमित आचार्य ने अपने अनुयायियों के साथ इस पवित्र आंदोलन में शामिल होकर इसे नई ऊर्जा प्रदान की। उनके साथ-साथ मूवमेंट कल्कि के सदस्य महाराज ठाकुर अर्जुन, अजय सैनी, सुरेश कुमार, पवन नारंग, और डॉ. सुदेश ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने समाज में गाय माता के महत्व को लेकर अपने विचार साझा किए।

मूवमेंट कल्कि की मांगें है कि गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा प्रदान किया जाए, गौ रक्षा हेतु सख्त और प्रभावी कानून बनाए जाएं ताकि देशभर में गौमाता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, नई गौशालाओं का निर्माण किया जाए, जिससे बेसहारा और पीड़ित गायों को आश्रय और सुरक्षा मिल सके। इस आंदोलन में जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है। मूवमेंट कल्कि के संस्थापक दीपक सिंह का कहना है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती।

Rajasthan: प्राइमरी स्कूलों में पाठ्यक्रम में शामिल होगा गौ माता का अध्याय

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जयपुर: राजस्थान में शिक्षा विभाग गौ माता के अध्याय को पाठ्यक्रम में शामिल कर सकता है. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्राइमरी स्कूलों में गौ माता का पाठ पढ़ाने की ओर इशारा किया है. हालांकि, इससे पहले विशेषज्ञों और विद्वानों से चर्चा की जाएगी, साथ ही उन्होंने स्कूलों में गोभक्तों की ओर से बनाए गए गौमाता के अच्छे वीडियो दिखाने की भी बात कही.

महाराष्ट्र सरकार की ओर से देशी गाय को राज्य माता-गौ माता का दर्जा देने के बाद राजस्थान में भी गौ माता को राज्य माता बनाने की मांग जोरों से उठ रही है. हाल ही में पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से वार्ता करने की बात कही थी, साथ ही गाय को सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा बताते हुए सार्वजनिक स्थानों पर असहाय अवस्था में घूमने वाली गायों के लिए आवारा की बजाय बेसहारा या निराश्रित कहकर संबोधित करने का फैसला लिया.

वहीं, अब प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी गौ माता के संरक्षण की बात कहते हुए गौ माता का अध्याय स्कूलों में पढ़ाए जाने की बात कही है. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गौ माता जीते जी तो हम पर उपकार करती ही है, बल्कि मरने के बाद भी उपकार करती है। गौ माता श्रेष्ठ है. इसलिए इन्हें बचाने, उनके संरक्षण के लिए और सम्मान के लिए काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि विद्वानों और विशेषज्ञ से बातचीत करेंगे और संभव हुआ तो प्राइमरी स्कूल की पुस्तकों में गौ माता के संबंध में जानकारी देने का प्रयास करेंगे. उन्होंने बताया कि कई गोभक्तों ने अच्छी-अच्छी वीडियो फिल्म भी बनाई है या बना रहे हैं. उनमें से अच्छी फिल्म लेकर के बच्चों को दिखाने की भी कोशिश रहेगी.

वहीं, जयपुर पहुंचे महामंडलेश्वर नारायण आनंद गिरि महाराज ने भी गो आधारित कृषि का सिलेबस पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने और गो उत्पादों के निर्माण कार्य में राज्य सरकारों के सहयोग की भी मांग की है.

इस दिवाली घर लाइये गौ माता के गोबर से बने दीये

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 दिवाली में मिट्टी के दीयों की मांग काफी बढ़ जाती है. हर घर पर दीयों की जगमग रोशनी देखने को मिलती है. इस दिवाली पटना के मसौढ़ी में मिट्टी के दीयों के साथ ही गाय के गोबर के दीये भी खूब बनाए जा रहे हैंपटना जिले के धनरूआ प्रखंड के सांडा पंचायत में कई कुम्हार गाय के गोबर से दीये बना रहे हैं. उनका कहना है कि यह इकोफ्रेंडली है और एकदम नेचुरल है.

पटना में बनाए जा रहे गाय के गोबर से दीये: गाय के गोबर से खाद और बायो गैस बनाये जाते जरूर है, लेकिन इस दिवाली में गोबर के बने दीये बनाए जा रहे हैं. बता दें कि गाय के गोबर से बने दिए के कई फायदे हैं. इससे वातावरण भी सुरक्षित रहता है और खुशबू भी आती है. दिवाली के बाद यह राख में तब्दील हो जाता है जिसे अपने खेत या खाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकेंगे.

इस दीये के हैं कई फायदे: दिये बना रहे रामानंद पंडित ने बताया कि गाय के गोबर से दीये बनाए जा रहे हैं, जो इकोफ्रेंडली के साथ-साथ पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने में भी मददगार साबित होगा. साथ ही गाय को गोबर के बने इन दीयों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है.

“यह हमारे लिए रोजगार है, आय का साधन है. गाय के गोबर का दीया शुद्ध माना जाता है. इसके कई फायदे होते हैं.”– रामानंद पंडित कुम्हार, सांडां,धनरूआ

दीया जलकर हो जाता है राख: वहीं इस दिवाली गाय के गोबर से बने दीयों की इतनी डिमांड है कि यह दुर्गा पूजा से ही बिकना शुरू हो गया. लोग इसको काफी पसंद भी कर रहे हैं क्योंकि यह नेचुरल है. गाय को हिन्दू रीति रिवाज में शुद्ध माना जाता है. यह भी कारण है कि लोग इसको पसंद करते हैं. इसके साथ ही रामानंद पंडित ने बताया कि सब दीये जो हमलोग जलाते हैं, उसमें कई तरह की मिलावट होती है. लेकिन गाय के गोबर से बना यह दीपक नेचुरल है. इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि जब यह दीपक जल जाता है तो इसके राख को अपने पेड़ पौधों में डाल सकते हैं.

दीपावली से पहले दिल्ली के शास्त्री पार्क में गौ माता को काट कर फेंक दिया

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दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट जिले के शास्त्री पार्क में दीपावली से पहले शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है। दरसअल, गौ माता की हत्या कर उसके शव को फेंका गया। स्थानीय निवासियों ने पार्क में गौ माता का शव देखा, जिसके बाद उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। अब इस घटना की निंदा की जा रही है।

बता दें कि यह घटना शास्त्री पार्क थाना, नियर कुंदन पेट्रोल पंप के पास की है। वहीं स्थानीय लोगों के बीच गहरी नाराजगी है। घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और लोग इस कृत्य के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। कई हिंदू संगठन और गौ भक्त इस घटना को धार्मिक आस्था का अपमान मानते हैं।

दीपावली जैसे पवित्र पर्व से पहले इस तरह की घटना बेहद दुखद और निंदनीय है। इस घटना ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि समाज में सौहार्द्र और सामंजस्य को भी नुकसान पहुंचाया है। कुछ लोगों का मानना है कि यह जानबूझकर किया गया कृत्य है, जिसका उद्देश्य समुदाय में असहमति पैदा करना हो सकता है।

अमेरिकन और देसी गाय के अंश को मिलाकर बनी फ्रीजवाल

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अमेरिकन गाय भले ही दूध अधिक देती हो, लेकिन फ्रीजवाल भी अब इनसे कम नहीं है। फ्रीजवाल गाय एक दिन में 23 लीटर दूध दे सकती है। अधिक दूध देने वाली फ्रीजवाल गाय की सफलता के पीछे मेरठ के केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का बड़ा योगदान है।

केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के डॉ. एके मोहंती ने बताया कि एक गाय औसतन 300 दिन दूध देती है। फ्रीजवाल गाय का 300 दिन का औसतन दूध सात हजार लीटर पाया गया है। जो अपने आप में एक अच्छा संकेत है। बताया गया कि इसके दूध का फैट भी अच्छा होता है। भैस के दूध से अगर तुलना की जाए, यह फैट के मामले में कम नहीं है। वैज्ञानिकों का दावा है कि 2030 तक सरकार की मंशा के अनुसार देश में 350 मिलियन टन दूध उत्पादन बढ़ाने में फ्रीजवाल की बड़ी भूमिका रहेगी।
मेरठ में 1987 में केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना था। प्रारंभ में संस्थान के वैज्ञानिकों ने देशभर की छावनियों के डेयरी फार्म में पलने वाली गायों पर रिसर्च किया। जिसका परिणाम है कि फ्रीजवाल नस्ल की गाय और सांडों को पूरे देश में अलग पहचान मिली है।
केरल, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के कृषि विवि में भेजा जा रहा सीमन
केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में फ्रीजवाल नस्ल को बढ़ावा देने के लिए तैयार किए जा रहे सांड के सीमन को देश के केरल कृषि विवि, पंजाब के कृषि पशु महाविद्यालय, उत्तराखंड और महाराष्ट्र के कृषि विवि में भेजा जा रहा है। इन विवि के माध्यम से फ्रीजवाल का सीमन गांवों तक पहुंच रहा है। जिसकी संख्या बढ़कर एक लाख 50 हजार पहुंच गई है। इसके उपयोग से फ्रीजवाल नस्ल की गायों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अगर पूरे देश में फ्रीजवाल नस्ल की गायों की संख्या की बात करें तो पांच लाख से भी अधिक हो सकती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अनुसंधान संस्थान में 50 लाख से अधिक सीमन तैयार किया है, जिससे फ्रीजवाल नस्ल की गाय और दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।
चार से आठ साल में मिलती है रिसर्च पर सफलता
केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के डॉ. एके मोहंती का कहना है कि अमेरिकन और देशी साहीवाल के अंश को मिलाकर फ्रीजवाल तैयार की गई है। किसी भी रिसर्च में सफलता के लिए कम से चार साल और अधिक से अधिक आठ साल लगते हैं। आईसीएआर संस्थान में फ्रीजवाल नस्ल पर ही नहीं बल्कि अन्य पर भी रिसर्च किया गया, जिसमें सफलता मिली है। किसानों में खासकर फ्रीजवाल नस्ल की गाय पालन के प्रति काफी रुझान बढ़ा है। फ्रीजवाल के दूध में अधिक फैट है और बीमारियों से लड़ने की अधिक शक्ति होती है।

काली पूजा पर मंदिर में दी जाएगी 10000 पशुओं की बलि , रोक लगाने से कलकत्ता हाई कोर्ट का इनकार

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समाचार पोर्टल आप इण्डिया की रिपोर्ट के अनुसार  , कलकत्ता हाई कोर्ट की अवकाश पीठ ने काली पूजा” के अवसर पर कोलकाता के बोल्ला काली मंदिर में पशुओं की बलि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पूर्वी भारत में धार्मिक प्रथाएँ उत्तर भारत से अलग हैं। इसलिए उन प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं होगा। यह कई समुदायों के लिए ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ हो सकती हैं।

न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु और अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ अखिल भारतीय कृषि गो सेवक संघ की दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें याचिकाकर्ताओं ने शुक्रवार (1 नवंबर 2024) को होने वाली पशुओं की बलि को रोकने के लिए तत्काल राहत की माँग की थी। हालाँकि, पीठ ने इस पर पूरी सुनवाई के बिना अंतरिम आदेश देना सही नहीं। है।

हालाँकि, हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि माना कि पशु बलि एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है, साथ ही यह भी कहा कि उत्तर भारत और पूर्वी भारत में आवश्यक प्रथा क्या है, इसमें बहुत अंतर है। पीठ ने टिप्पणी की, “यह विवाद का विषय है कि पौराणिक पात्र वास्तव में शाकाहारी थे या मांसाहारी।”

संगठन ने अदालत से भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को राज्य के विभिन्न मंदिरों में ‘सबसे वीभत्स और बर्बर तरीके से की जाने वाली अवैध पशु बलि’ को रोकने के लिए तत्काल निर्देश देने की माँग की। जब उनके वकील से पूछा गया कि क्या वे सभी मंदिरों में प्रतिबंध चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि फिलहाल वे दक्षिण दिनाजपुर के एक विशेष मंदिर में प्रतिबंध चाहते हैं।

पीठ ने कहा, “एक बात तो स्पष्ट है, यदि अंततः भारत के पूर्वी भाग को शाकाहारी बनाने का लक्ष्य है तो यह नहीं हो सकता है… महाधिवक्ता हर दिन मछली के के बिना नहीं रह सकते!” इसके बाद राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने कहा कि वह पूरी तरह से मांसाहारी हैं।

इस पर जस्टिस बसु ने कहा, “आपको धारा 28 (पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960) की वैधता को चुनौती देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बलि की प्रथा काली पूजा या किसी अन्य पूजा की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है, जैसा कि भारत के पूर्वी भाग के नागरिक इसका पालन करते हैं। खान-पान की आदतें अलग-अलग होती हैं।”

दरअसल, जस्टिस बसु जिस धारा का उल्लेख कर रहे थे उसमें कहा गया है, “इस अधिनियम में निहित कोई भी बात किसी भी समुदाय के धर्म द्वारा अपेक्षित तरीके से किसी भी पशु को मारना अपराध नहीं बनाएगी।” इसके बाद हाई कोर्ट की पीठ ने राहत देने से इनकार करते हुए आगे की सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध कर दिया।

पिछले साल मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ से भी इस संगठन ने ‘बोल्ला काली पूजा’ के अवसर पर 10,000 बकरियों और भैंसों के वध पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। पीठ ने पशु बलि को रोकने के लिए अंतरिम राहत से इनकार कर दिया था। हालाँकि, पीठ पश्चिम बंगाल में पशु बलि की वैधता के बड़े सवाल पर विचार करने के लिए सहमत हुई।

बोल्ला गाँव बालुरघाट शहर से 20 किलोमीटर दूर बालुरघाट-मालदा राजमार्ग पर स्थित है। इस गाँव में एक ऐतिहासिक मंदिर है, जहाँ श्रद्धालु माँ काली की पूजा करते हैं। मुख्य काली पूजा रास पूर्णिमा के बाद शुक्रवार को होती है। दक्षिण दिनाजपुर जिले के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा के दौरान मंदिर में इकट्ठा होते हैं और प्रार्थना करते हैं। इस दौरन तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है।