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महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन ? शिंदे , पवार या फिर फडणवीस ?

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Assembly Election Results 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के आए नतीजों में महायुति की महाजीत हुई. इसमें बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) तीनों ही पार्टियों को उम्मीद से ज्यादा सीटें मिलीं. बीजेपी को 132, शिवसेना (शिंदे) को 57 और एनसीपी (अजित) को 41 सीटें मिली हैं. इस तरह से महायुति ने महाराष्ट्र में 230 सीटें जीतकर इतिहास रचा है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल ये कि राज्य का मुख्यमंत्री कौन बनेगा?

हालांकि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस दोनों ने ही कहा है कि गठबंधन की तीनों पार्टियां आपस में बैठकर इस विचार करेंगी लेकिन मीडिया में चर्चा इस बात पर हो रही है कि बीजेपी ने अपने दम पर 132 सीटें जीती हैं और चुनाव के दौरान कहा गया था कि अगर बीजेपी 100 सीटें जीतती है तो मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा. ऐसे में इस सवाल के मायने बढ़ जाते हैं कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा. वहीं, आज शनिवार (23 नवंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ इशारा किया.

क्या बोले पीएम मोदी?

बीजेपी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, “मैं देशभर के बीजेपी एनडीए के कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं और अभिनंदन करता हूं. मैं एकनाथ शिंदे, मेरे परम मित्र देवेंद्र फडणवीस और भाई अजित पवार की प्रशंसा करता हूं.” इसमें पीएम मोदी ने देवेंद्र फडणवीस को परम मित्र तो अजित पवार को भाई कहा लेकिन एकनाथ शिंदे का सिर्फ नाम लिया. ऐसे में इन बातों को और बल मिलने लग गया है कि इस बार महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बीजेपी का ही होगा.

कब होगी विधायक दल की बैठक

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और उसके सहयोगी दलों शिवसेना और एनसीपी की विधायक दल की बैठक रविवार (24 नवंबर) को होने की उम्मीद है. शपथ ग्रहण समारोह सोमवार या मंगलवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम या शिवाजी पार्क में होने की उम्मीद है.

हालांकि, फडणवीस ने कहा कि इसके लिए एक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “तीनों दलों के नेता मिलेंगे और सीएम तय करेंगे. विधायक दल की बैठकें अलग-अलग होंगी. इसके बाद तीनों दलों के नेता मिलेंगे. बीजेपी के लिए यह संसदीय बोर्ड है और शिवसेना के लिए यह शिंदे साहब हैं और एनसीपी के लिए यह अजित दादा हैं.”

‘कांग्रेस अपने साथियों की भी नाव डुबो देती है’- पीएम मोदी

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Assembly Election Results 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत और यूपी उपचुनावों में भाजपा की धमाकेदार सफलता ने विपक्ष को बैकफुट पर ला दिया है. इन चुनावी नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार निशाना साधते हुए इसे भारतीय राजनीति में “परजीवी पार्टी” करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न केवल अपनी हार का कारण बन रही है, बल्कि अपने सहयोगियों को भी नीचे खींच रही है.

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने चुनाव में वीर सावरकर के मुद्दे को अस्थायी रूप से छोड़ा, लेकिन इससे जनता का विश्वास नहीं जीत सकी. कांग्रेस और उसके गठबंधन ने राज्य में हर पांच में से चार सीटों पर हार का सामना किया और उनका स्ट्राइक रेट 20% से भी कम रहा.

“तुष्टिकरण की राजनीति और वक्फ बोर्ड विवाद”

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और वोट बैंक के लिए संविधान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2014 में सत्ता से जाते-जाते दिल्ली और उसके आसपास की कई संपत्तियां वक्फ बोर्ड को सौंप दीं. उन्होंने इसे बाबा साहेब अंबेडकर और संविधान निर्माताओं के साथ विश्वासघात बताया. पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने “झूठे सेक्युलरिज्म” के नाम पर देश की पंथनिरपेक्ष परंपरा को नुकसान पहुंचाया है.

“जाति का जहर और कांग्रेस की सत्ताभूख”
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सामाजिक न्याय की भावना को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी जाति के खिलाफ लड़ने के बजाय अब जाति का जहर फैलाने में लगी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का “शाही परिवार” अपनी सत्ताभूख को शांत करने के लिए देश और समाज के हितों की अनदेखी कर रहा है. ये पार्टी न केवल अपनी विचारधारा से भटक गई है, बल्कि अपने पुराने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भी निराश कर रही है.

गाय की उन्नत नस्ल और दूध व घी पर किया जाए कार्य : श्याम बिहारी

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मेरठ। उप्र गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि अच्छी नस्ल की गाय के साथ अन्य प्रोडेक्ट दूध, छाछ, घी आदि पर भी काम करने की जरूरत है। अब किसान गाय पालन के लिए आगे आ रहा है। कई स्थानों पर किसान पशुपालक गोपालन करके अच्छे रोजगार स्थापित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिकों की और जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
मेरठ केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों से सरकार और जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। यह प्रयास करेंगे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गोवंश संस्थान में आकर सभी वैज्ञानिकों के साथ वार्ता करें। उन्होंने बताया कि गोवंश को गांवों में घर-घर तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के साथ अनुबंध करेगी।
शुक्रवार को छावनी क्षेत्र स्थित मेरठ केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वैज्ञानिकों के साथ बैठक करते उन्होंने कहा कि किसानों के घर में बायो गैस प्लांट लगें। गाय पालन को प्राथमिकता हो। इससे किसान की आय दोगुनी होगी। उन्होंने अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को आश्वासन दिया कि वह गोवंश हित में जो भी परियोजना तैयार करेंगे। उसके लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। वैज्ञानिकों ने कहा कि पहले गोवंश की कई परियोजनाओं के लिए बजट मिलता था जो अब बंद हो गया। गाय के मूत्र और गोबर से विभिन्न प्रोडेक्ट बनाए जा सकते हैं।
गोवंश अनुसंधान संस्थान में 100 गोवंश हैं। इनके गोबर से 40 दिन में वर्मी कंपोस्ट तैयार हो रहा है, जबकि नई विधि से यह वर्मी कंपोस्ट चार से पांच दिन में भी तैयार हो सकता है। इस अवसर पर संस्थान के डायरेक्टर डॉ. अशोक कुमार मोहंती,डॉ. अभिषेक विश्वास, डॉ. नरेश, डॉ. सुशील, डॉ. सुरेश डबास, आदि मुख्य रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष डाक टिकट किया जारी

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हिंदुस्तान टाइम्स के शताब्दी वर्ष को चिह्नित करने के लिए विशेष डाक टिकट जारी

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान टाइम्स के शताब्दी वर्ष को चिह्नित करने के लिए एक विशेष डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “100 साल का सफर पूरा करना एक ऐतिहासिक घटना है। मैं इस संगठन से जुड़े उन सभी लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने विभिन्न चुनौतियों का सामना किया और मिशन के प्रति वफादार रहे।”

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए और डाक टिकट जारी करने का जिक्र करते हुए एचटी मीडिया लिमिटेड की अध्यक्ष और हिंदुस्तान टाइम्स की संपादकीय निदेशक शोभना भरतीया ने कहा, “शताब्दी स्मारक डाक टिकट जारी करने के लिए मैं प्रधानमंत्री को हृदय से धन्यवाद देती हूं। यह हमारी लंबी यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है। हम जानते हैं कि हमारा मिशन अभी भी पूरा होना बाकी है।”

हिंदुस्तान टाइम्स की शुरुआत 15 सितंबर 1924 को महात्मा गांधी ने की थी। इस दैनिक ने स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज के रूप में कार्य किया। प्रारंभ में अकालियों ने संयुक्त रूप से धन जुटाया और इसे चलाया। बाद में लाला लाजपतराय और मदन मोहन मालवीय ने इसका संचालन किया। गांधीजी के अनुरोध पर आगे जी. डी. बिड़ला ने दैनिक का कार्यभार संभाला।

एक शताब्दी से भी अधिक समय से ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ देश की ऐतिहासिक घटनाओं का ईमानदार गवाह रहा है। देश ने लोकतंत्र की स्थापना के लिए सभी बाधाओं को पार किया, लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और विश्व मंच पर अपनी उपस्थिति स्थापित की। ये सभी घटनाक्रम दैनिक समाचार पत्रों के पन्नों के माध्यम से दुनिया के सामने आए हैं। एक समाचार पत्र के रूप में शुरू हुई यात्रा समय के साथ एक वैश्विक मीडिया समूह में विस्तारित हुई। देश भर में विभिन्न संस्करण लॉन्च किए गए। डिजिटल मीडिया के माध्यम से यह कई लोगों के घरों तक पहुंचा।

विशेष डाक टिकट जारी करने से पहले प्रधानमंत्री ने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष प्रदर्शनी ‘एचटी@100’ का दौरा किया। इस प्रदर्शनी में देश की अब तक की प्रगति के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया। मोदी ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस अवसर पर मैंने एक अद्भुत एवं अभूतपूर्व प्रदर्शनी देखी। यह सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि एक अनोखा अनुभव था। इस प्रदर्शनी को देखकर मेरी आंखों के सामने हिंदुस्तान टाइम्स की सौ साल की यात्रा जैसे जीवंत हो उठी। मैंने भारत के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस का अंक भी देखा। इनमें मार्टिन लूथर किंग (जूनियर), सुभाष चंद्र बोस, श्याम प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी और एम. एस. स्वामीनाथन द्वारा लिखित प्रविष्टियाँ मिलीं। इन दिग्गजों की बातों ने आपके अखबार को रोशन कर दिया है।

वोटिंग से पहले महाराष्ट्र में कैशकांड , आरोपों पर BJP की भी सफाई

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महाराष्ट्र में वोटिंग शुरू होने को केवल 15 घंटे बचे हैं। वोटिंग से पहले ही एक बड़ा सियासी खेल सामने आया है। बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े पर आरोप लगा है कि वह विरार के होटल में लोगों को 5 करोड़ कैश बांट रहे थे। इसी बीच बहुजन विकास अघाड़ी के नेता हितेंद्र ठाकुर होटल पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच पुलिस होटल पहुंची और विनोद तावड़े को मुश्किल से होटल के बाहर निकाला।

बैग में रखा था कैश

इस दौरान बहुजन अघाड़ी नेताओं ने तावड़े के साथ धक्का-मुक्की भी की। बहुजन अघाड़ी नेताओं ने कई डायरी, एक बैग दिखाया और कहा कि ये सब तावड़े का है। आरोप लगाया कि इसी बैग में रखा कैश तावड़े बांट रहे थे। अपनी डायरी में कैश का हिसाब भी नोट किया।

MVA अपनी हार को भांपकर लगा रही ये आरोप-BJP

इस पूरे मामले पर बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ठाकुर का दावा प्रचार का हथकंडा मात्र है। महा विकास आघाडी (MVA) हार को भांपकर ये आरोप लगा रही है। तावड़े और बीवीए नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के बीच टकराव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

‘पब्लिसिटी स्टंट’ से ज्यादा कुछ नहीं- BJP

आरोपों का खंडन करते हुए बीजेपी नेता एवं विधान परिषद सदस्य (MLC) प्रवीण दरेकर ने कहा, ‘एमवीए पहले ही हार चुका है। इस चुनाव में उनकी हार तय है, यही वजह है कि वे हमारे खिलाफ इस तरह के बेतुके आरोप लगा रहे हैं। ठाकुर जो कर रहे हैं वह एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ से ज्यादा कुछ नहीं है।’

तावड़े ने बताया क्यों आए थे होटल?

मामला सामने आने के बाद विनोद तावड़े ने दावा किया कि चुनाव में वोटिंग कैसे होगी? इसका मार्गदर्शन करने के लिए वो आए थे। इस बीच ये सारी घटनाएं हो गईं। विनोद तावड़े के मुताबिक, चुनाव आयोग की टीम ने उनकी गाड़ी, रूम और बैग की जांच भी की है। तावड़े ने कहा पुलिस चाहे तो CCTV फुटेज की जांच कर ले मैं पैसे नहीं बांट रहा था।

होटल में इस मुद्दे पर हो रही थी बैठक

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा, ‘नालासोपारा के विधायकों की बैठक चल रही थी। मतदान के दिन के लिए आदर्श आचार संहिता, वोटिंग मशीन को कैसे सील किया जाएगा और अगर कोई आपत्ति दर्ज करानी है तो क्या करना है। मैं उन्हें इसके बारे में बताने गया था। बहुजन विकास अघाड़ी के कार्यकर्ता अप्पा ठाकुर और क्षितिज को लगा कि हम पैसे बांट रहे हैं।’

निकाली जाए CCTV फुटेज

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग और पुलिस को जांच करनी चाहिए, सीसीटीवी फुटेज निकालनी चाहिए। मैं 40 साल से पार्टी में हूं। अप्पा ठाकुर और क्षितिज मुझे जानते हैं। पूरी पार्टी मुझे जानती है…फिर भी, मेरा मानना ​​है कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।’

चुनाव आयोग से एक्शन लेने की मांग

बता दें कि हितेंद्र ठाकुर ने दावा किया, ‘बीजेपी के कुछ नेताओं ने मुझे सूचित किया कि भाजपा महासचिव विनोद तावड़े मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए 5 करोड़ रुपये बांटने विरार आ रहे हैं। मुझे लगा कि उनके जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता इतना नीचे नहीं गिरेंगे, लेकिन मैंने उन्हें यहां देखा। मैं निर्वाचन आयोग से उनके और बीजेपी के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।’

भाषा इनपुट के साथ

नोएडा आ रही गौमांस की बड़ी खेप बरामद

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देशभर में जहां लगातार गौ हत्या जैसे जघन्य अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसे में नोएडा के दादरी थाना क्षेत्र में गौ मांस का एक बहुत बड़ा खेप पकड़ा गया, जो कि पश्चिम बंगाल से आ रहा था। जब इस बात कि जानकारी गौ रक्षक देव नागर को पता चली तो बिना देर किये दादरी थाना क्षेत्र के टोल नाके के पास सभी गौरक्षक और नोएडा पुलिस के साथ मिलकर गौ मांस से भरी ट्रक को पकड़ लिया।

पूछताछ के बाद पता चला कि यह ट्रक पश्चिम बंगाल से नोएडा के दादरी थाना क्षेत्र स्थित SPJ कोल्ड स्टोरेज में जा रहा था। जिसके बाद नोएडा पुलिस और गौ रक्षा दल कि टीम SPJ कोल्ड स्टोर पहुंची तो वहां पर भारी मात्रा में गौ मांस रखे हुए थे। इसकी देख-रेख जिहादी खुर्शीदून करता था।

गौ रक्षा दल का कहना है कि कोल्ड स्टोर का मालिक पुरन जोशी जो कि अपने आपको हिन्दू बताता है वह सिर्फ नाम से हिन्दू है, बाकी वह इस्लाम कबूल कर चुका है। गौ रक्षकों के मुताबिक पूरा गौ मांस लगभग 300 से 400 टन था, जिसकी कीमत लगभग आधा अरब रुपये था। वहीं नोएडा पुलिस का कहना है कि, गौ मांस कि मात्रा लगभग पौने दो सौ टन था, जिसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये के आसपास थी, जिसको मिट्टी में गाड़ दिया गया है। इसको लेकर नोएडा पुलिस और गौ रक्षकों के बीच मतभेद है।

वहीं नोएडा पुलिस निदेशक खुर्शीदुन, कोल्ड स्टोर के मालिक पुरन जोशी समेत अन्य को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन गौ रक्षा दल ने कोल्ड स्टोर को भी ‘मिट्टी में मिलाने’ के लिए नोएडा पुलिस को 72 घंटे का समय दिया है, यदि 72 घंटे में कोल्ड स्टोरेज पर बुलडोजर नहीं चला तो गौ रक्षक एक महापंचायत करेंगे उसी कोल्ड स्टोर पर और खुद मिट्टी में मिलाने का काम करेंगे।

सुप्रिया सुले-नाना पटोले का बिटकॉइन घोटाला चुनाव में खपाया, पूर्व IPS अधिकारी का बड़ा आरोप

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महाराष्ट्र में चुनाव से एक दिन पहले पुणे के पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल ने एनसीपी (एसपी) नेता और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले पर बड़ा आरोप लगाया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने 2018 के क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले से बिटकॉइन की हेराफेरी की थी। इसका इस्तेमाल महाराष्ट्र में चल रहे विधानसभा चुनावों के लिए किया है। पाटिल का कहना है कि वह इस पूरी जांच के समर्थन करने के लिए तैयार हैं।

बिटकॉइन की हेराफेरी में थे शामिल

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया कि पुणे के तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ गुप्ता और साइबर अपराध जांच को संभालने वाली तत्कालीन पुलिस उपायुक्त भाग्यश्री नौटके बिटकॉइन की हेराफेरी में शामिल थे। इसका उपयोग दोनों राजनीतिक नेताओं द्वारा किया जा रहा है।

14 महीने जेल में बिताए- पूर्व आईपीएस अधिकारी

पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल ने कहा, ‘मेरी कंपनी ने मुझे 2018 में एक केस की जांच करने के लिए एक क्रिप्टोकरेंसी विशेषज्ञ के रूप में बुलाया था। मुझे 2022 में धोखाधड़ी के आरोपों के तहत उस केस में गिरफ्तार किया गया था। मैंने एक मुकदमे के बाद 14 महीने जेल में बिताए। उस दौरान मैं सोच रहा था कि क्या हुआ था? क्या मामला था?  मुझे क्यों फंसाया गया था? मेरे साथ अन्य सहकर्मी भी थे। हम सच्चाई का पता लगाने पर काम कर रहे थे।’

2018 में अमित भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया

इसके साथ ही पूर्व आईपीएस ने कहा, ‘हमारे खिलाफ एक गवाह, गौरव मेहता, जो सारथी एसोसिएट्स नामक एक ऑडिट फर्म का कर्मचारी हैं। परसों उसने मुझे 4-5 घंटे तक कई बार फोन किया, लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया। आखिरकार, जब मैंने जवाब दिया तो उसने मुझे बताया कि 2018 में जब अमित भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास एक क्रिप्टोकरेंसी हार्डवेयर वॉलेट था। उस वॉलेट को तत्कालीन कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने बदल दिया था और दूसरा वॉलेट रख लिया था। हमें गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन असली अपराधी अमिताभ गुप्ता और उनकी टीम थी।’

इन दो नेताओं का लिया गया नाम

पूर्व आईपीएस अधिकिरी ने कहा, ‘उन्होंने (गौरव मेहता) दो आईपीएस अधिकारियों, अमिताभ गुप्ता और भाग्यश्री नौटके का नाम लिया। उन्होंने दो लोगों का नाम लिया एक सुप्रिया सुले और नाना पटोले हैं । पाटिल ने आरोप लगाया कि इसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि इस विधानसभा चुनाव में बिटकॉइन का इस्तेमाल किया जा रहा है।’

महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव में की गई फंडिंग

पाटिल ने आगे आरोप लगाया कि बिटकॉइन के पैसे का इस्तेमाल महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान फंडिंग के लिए किया गया। पाटिल का दावा है कि उनके पास कथित गवाह गौरव मेहता द्वारा कथित तौर पर भेजे गए वॉयस नोट हैं।

पूर्व आईपीएस अधिकारी रवींद्रनाथ पाटिल ने कहा, ‘सुप्रिया सुले ने तीन वॉयस नोट संदेश भेजे हैं, जिसमें वह गौरव से बिटकॉइन भुनाने के लिए कहती हुई सुनाई दे रही हैं, क्योंकि चुनाव के लिए फंड की जरूरत है। वह उन्हें यह आश्वासन भी देती हुई सुनाई दे रही हैं कि वे जांच के बारे में चिंता न करें और सत्ता में आने पर वे इसे संभाल लेंगे।’

योगी आद‍ित्‍यनाथ Vs राहुल गांधी: महाराष्‍ट्र की पिच पर कौन हुआ बोल्‍ड

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महाराष्‍ट्र के चुनावी दंगल में जनता फैसला करने को तैयार है. बुधवार को वोट डाले जाएंगे. महाव‍िकास अघाड़ी हो या फ‍िर महायुत‍ि दोनों ओर से पूरी कोश‍िश की गई. आख‍िरी बॉल पर छक्‍के लगाने के प्रयास क‍िए गए. क‍िसी ने गुगली मारी तो क‍िसी ने क्‍लीनबोल्‍ड करने की कोश‍िश की. नतीजा क्‍या होगा, यह तो 23 नवंबर को पता चलेगा, लेकिन दोनों ओर के सबसे बड़े ख‍िलाड़‍ियों ने इस खेल में कैसे शॉट लगाए, वो जानना ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है.

बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे राज्य में 10 रैल‍ियां की, जबक‍ि गृहमंत्री अमित शाह ने 16 रैल‍ियां. योगी आदित्यनाथ की‍ डिमांड भी खूब रही. यूपी में उपचुनाव और झारखंड में चुनाव के बावजूद उन्‍होंने 11 रैल‍ियों को संबोध‍ित क‍िया. नितिन गडकरी ने 52 सभाएं कीं जबक‍ि देवेंद्र फडणवीस ने 54 सभा. मगर सबसे ज्‍यादा चर्चा योगी आद‍ित्‍यनाथ की थी. क्‍योंक‍ि उनके बयान सुर्खियां बने. उनपर बात हुई. आरोप लगे और श‍िकायत तक दर्ज कराई गई. उधर, महाव‍िकास अघाड़ी की ओर से राहुल गांधी ने 8 रैली और 2 प्रेस कांफ्रेंस की. कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्‍ल‍िकार्जुन खरगे ने 7 रैल‍ियां और तीन सभाएं कीं. जबक‍ि प्र‍ियंका गांधी ने दो रैल‍ियों को संबोध‍ित क‍िया.

आज हम दोनों ओर के दो बड़े ख‍िलाड़‍ियों के बारे में बात करेंगे. इस चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खटाखट-खटाखट और संव‍िधान बचाओ नारो के जर‍िये शॉट लगाने की कोश‍िश की तो यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ दनादन चौके-छक्‍के लगाते नजर आए. जात‍िधर्म, पाक‍िस्‍तान-फ‍िल‍िस्‍तीन से लेकर छत्रपत‍ि महाराज तक, हर मुद्दे उठाए और जनता को समझाने की कोश‍िश की. बंटोगे तो कटोगे काफी ह‍िट रहा, तो राहुल गांधी की त‍िजोरी की खूब चर्चा हुई. आइए जानते हैं क‍िसकी गुगली क‍ितनी धारदार रही.

पहले द‍िन संविधान पर बात
राहुल गांधी ने महाराष्‍ट्र में शुरुआत ‘संव‍िधान बचाओ सम्‍मेलन’ से की. आरएसएस के गढ़ नागपुर से उन्‍होंने हुंकार भरी और बीजेपी-संघ को संव‍िधान विरोधी करार दिया. उनसे संव‍िधान बचाने की बात कही. जा‍त‍ि आधार‍ित जनगणना कराने का वादा क‍िया. ये भी कहा, आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा तोड़ देंगे. यहीं से उन्‍होंने पिछड़ों और दल‍ितों को एक हो जाने के ल‍िए कहा.

दूसरे द‍िन फोकस में आद‍िवासी
राहुल गांधी जब 14 नवंबर को वे नांदेड़ पहुंचे तो उनके मुद्दे बदल गए. कहा कि बीजेपी आदिवासियों को वनवासी कहकर उनका हक छीनने की कोशिश में है. अनुसूचित जनजातियों से संबंधित मुद्दे उठाकर राहुल गांधी ने आद‍िवास‍ियों-दल‍ितों को संदेश देने की कोश‍िश की. इसी सभा में उन्‍होंने अपने हाथ में संविधान की लाल किताब लहराते हुए कहा कि इस किताब में आपका नाम आदिवासी लिखा है.

तीसरे द‍िन खटाखट का ज‍िक्र
16 नवंबर को अमरावती पहुंचे राहुल गांधी ने फ‍िर संव‍िधान की लाल क‍िताब दिखाई. कहा-कांग्रेस संविधान को देश का डीएनए मानती है, जबकि भाजपा और आरएसएस के लिए यह एक कोरी किताब है. गोंड‍िया की रैली में उन्‍होंने खटाखट का एक बार फ‍िर ज‍िक्र क‍िया और कहा सरकार बनते ही सबके खाते में पैसे भेजेंगे. कहा-मेरी छवि बिगाड़ने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए.

आख‍िरी द‍िन क्रोनी कैप‍िटल‍िज्‍म पर वॉर
चुनाव प्रचार के आख‍िरी द‍िन उन्‍होंने ‘सेफ शॉट’ खेला. मुंबई में प्रेस कांफ्रेंस कर धारावी पर सरकार को घेरा. कहा-सरकार सिर्फ उद्योगपत‍ियों को बचा रही है. उनका कर्ज माफ कर रही है. गरीबों और क‍िसानों का धन छीनकर उन्‍हें दे रही है. जनता इस बार चुनाव में उन्‍हें सबक सिखाने वाली है. हालांक‍ि, बीजेपी ने ये कहकर मजाक उड़ाया क‍ि वही हाल होगा, जो लोकसभा चुनाव में हुआ.

योगी आद‍ित्‍यनाथ की 11 रैल‍ियां, क्‍या मुद्दे छाए रहे
1.योगी आद‍ित्‍यनाथ ने वाशिम में अपनी पहली रैली के जरिए ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का सियासी एजेंडा सेट क‍िया.
2.‘बंटेंगे तो कटेंगे’, ‘एक रहेंगे तो नेक और सेफ रहेंगे’ नारे के साथ हिंदुत्व के मुद्दे को धार देते नजर आए.
3.योगी आद‍ित्‍यनाथ ने पाकिस्तान से लेकर फिलीस्तीन तक जिक्र किया तो हनुमान चालीसा का मुद्दा उठाया.
4.छत्रपत‍ि शिवाजी के बहाने योगी ने जातियों में बिखरे हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोश‍िश करते भी नजर आए.
5.‘बंटेंगे तो कटेंगे’ पर विरोध शुरू हुआ तो उसे छत्रपत‍ि श‍िवाजी महाराज और औरंगजेब से जोड़ द‍िया.
6.कहा-भारत की चिंता की बजाय कुछ लोग पाकिस्तान और फिलीस्तीन के लिए घड़ियाली आंसू बहाते हैं.
7.अमरावती में पूर्व सांसद नवनीत राणा का जिक्र कर कहा, उन्‍हें हनुमान चाल‍िसा के ल‍िए भी संघर्ष करना पड़ा, ये कैसा द‍िन है.
8.आगरा के म्‍यूज‍ियम को श‍िवाजी महाराज से जोड़ द‍िया, कहा-हमने उसका नाम औरंगजेब से बदलकर छत्रपति शिवाजी की स्मृति में रखा.
9.अयोध्या, काशी और मथुरा तक का जिक्र किया. उद्धव पर हमला करते हुए कहा-इन्‍हें देश, धर्म, राष्ट्रवाद, समाज की परवाह नहीं.

दिलचस्प और स्टाइलिश रहा महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार* 

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(डॉ.मुकेश कबीर-विभूति फीचर्स)
महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है। इस बार चुनाव परिणाम को लेकर कोई भी निश्चित नहीं है। परिणाम क्या होगा यह तो तेईस तारीख को पता चल ही जाएगा लेकिन अभी चर्चा में है महाराष्ट्र का चुनाव प्रचार। महाराष्ट्र जैसा दिलचस्प चुनाव प्रचार पूरे देश में कहीं नहीं होता है,इसे निश्चित रूप से स्टाइलिश कैंपेन कहा जा सकता है। महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार की खासियत यह होती है कि यहां की जनता बहुत अनुशासित होती है और नेता बहुत सम्माननीय होते हैं,यहां नेताओं के प्रति गहरी निष्ठा होती है इसीलिए जब वो मंच पर आते हैं तो इतनी गर्मजोशी से उनका स्वागत और अभिनन्दन होता है जैसे देवराज इंद्र पधारे हों और नेताओं से जनता का एक दिली लगाव तो होता ही है साथ ही उनके रिश्ते बिल्कुल घर जैसे होते हैं इसीलिए संबोधन भी घरेलू होते हैं दादा,ताई,काका, और साहेब। नेता भी आपस में एक दूसरे का जिक्र इसी तरह के संबोधन से करते हैं फिर चाहे वो विरोधी पार्टी के नेता ही क्यों न हों।
यहां सभी पार्टियां अजीत पवार का जिक्र करती हैं तो उनके नेता उनको अजीत दादा ही बोलते हैं,फिर चाहे अजीत दादा पर कोई आरोप ही क्यों न लगाना हो। इसी तरह की छोटी छोटी बातों से यहां के चुनाव प्रचार में एक घरेलू वातावरण बन जाता है जो देश में और कहीं देखने को नहीं मिलता ।यहां का चुनावी वातावरण ऐसा होता है कि महिलाएं भी चुनावी सभा में स्वयं को सहज महसूस करती हैं। यही कारण है कि चुनावी सभाओं में जितनी संख्या में महिलाएं महाराष्ट्र में इकट्ठी होती हैं उतनी और किसी राज्य में नहीं,पूर्वोत्तर के राज्यों भी महिलाएं बहुत आती हैं लेकिन उसके कुछ अलग कारण हैं।
बात महाराष्ट्र की करें तो यहां की चुनावी सभाएं बहुत अनुशासित होती हैं और पंडाल का माहौल लगभग वैसा ही होता है जैसा उत्तर भारत में किसी सांस्कृतिक आयोजन का होता है । चुनावी भीड़ में महिलाओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होती और न ही किसी प्रकार के हुड़दंग की स्थिति निर्मित होती है ।यहां सभी मराठी मानुष होते हैं जो मराठी अस्मिता का पूरा ध्यान रखते हैं।
           अब यदि नेताओं की बात करें तो हर नेता का अपना स्टाइल होता है,अजीत पवार और राज ठाकरे का सेंस ऑफ ह्यूमर जबरजस्त होता है इनकी सभा एक कॉमेडी शो जैसी हो जाती है इसलिए इनकी सभाओं में भीड़ ज्यादा होती है और भीड़ सिर्फ इनके चुटकुले सुनने ही आती है। अजीत पवार विरोधाभासी नेता हैं उनकी निष्ठा किधर है यह क्लियर नहीं है लेकिन लोगों की नजर में वो पंवार साहेब के भतीजे हैं यही उनकी टीआरपी है और इसको कैसे भुनाया जाये यह अजीत दादा अच्छे से जानते हैं अजित दादा का दबदबा भी अच्छा है इसीलिए कोई लिबर्टी नहीं ले पाता,यहां तक कि सारे नेता उनको दादा ही कहते हैं फिर चाहे फडणवीस हों, नवाब मलिक हों या कोई और सभी अजीत दादा की पोजिशन का ध्यान रखकर बोलते हैं।
अजीत दादा के भाषण भी रोचक होते हैं और कभी कभी बिलो द बेल्ट भी होते हैं लेकिन मराठी मानुष को सब चलता है इसीलिए पिछले चुनाव में उनका दिया गया डायलॉग बहुत चर्चित हुआ था जिसे सोशल मीडिया पर भी खूब उछाला गया और उसके कार्टून भी बनाए गए थे ,अजीत दादा ने कहा था “यहां के डैम में पानी नहीं है तो मैं पेशाब से भर दूं क्या ? अजीत दादा के इस डायलॉग से जहां उनके समर्थक  बहुत रोमांचित हुए थे वहीं विरोधियों ने तीखी आलोचना की थी, और राज ठाकरे की पार्टी ने कार्टून बनाकर एक डैम का नाम ही “अजीत दादा मूत्रालय” दर्शा दिया था। अजीत दादा, भाषण के मामले में शरद पवार से अलग हैं ।
शरद पवार ज्यादातर काम की बातें ही करते हैं और जनता से घर के वरिष्ठ सदस्य की तरह बात व्यवहार करते हैं, यही उनकी ताकत भी है इसीलिए वे लोगों के पवार साहेब हैं,जिनका आधे महाराष्ट्र पर कब्जा है । उनकी राजनीति भाषण पर आधारित नहीं है बल्कि व्यक्तिगत संबंधों के दम पर वो पंवार साहेब बने हैं।महाराष्ट्र में साहेब बनना आसान नहीं है,वहां सिर्फ दो ही साहेब हुए हैं पंवार साहेब और बाला साहेब ,और इन दोनो का ही पूरे महाराष्ट्र पर कब्जा रहा है,ये दो सम्राट की तरह छाए रहे लेकिन दोनों की शैली भिन्न है।
बाला साहेब की बात सबसे अलग है क्योंकि उनमें बहुत से गुण थे,उनका व्यक्तिगत संपर्क तो मजबूत था ही उसके साथ उनके भाषण भी बहुत दमदार और रोमांचक होते थे, बाला साहेब की भाषा शैली इतनी अलग थी कि उनकी भाषा को लोगों ने अलग ही नाम दे दिया “ठाकरी भाषा” इस भाषा में असहनीय तीखेपन के साथ चुटकुले की मिठास भी होती थी और गालियों का नमक और साथ ही इतिहास,साहित्य और संस्कृति का ज्ञान भी इसलिए उनके जैसा नेता पूरे देश में कोई और नहीं था। उनकी इसी ठाकरी भाषा के सही उत्तराधिकारी बनकर उभरे हैं राज ठाकरे, जिनके भाषण में वे सभी तत्व हैं जो बाला साहेब में थे। उनका ह्यूमर भी कमाल का है इसीलिए राज के भाषण में  तीखे प्रहार के साथ मजेदार जोक्स भी होते हैं और उनकी सभा एक अच्छा खासा कॉमेडी सर्कस होती है । राज भी बाला साहेब की तरह मिमिक्री करते हैं। वे सभी नेताओं की मिमिक्री इतनी परफेक्ट करते हैं कि एक बार शरद पंवार ने कहा था कि “राज यदि नेता नहीं होता तो फिल्मी हीरो जरूर होता”।
राज पूरी तरह बाला साहेब का प्रतिबिंब लगते हैं, बहुत डायनेमिक हैं और बुलंद आवाज़ है साथ ही तेवर भी वही हैं,राज की सभा में आधी भीड़ तो इसलिए भी होती है कि लोगों को उनमें बाला साहेब स्पष्ट नज़र आते हैं। राज की सभा में महिलाएं बहुत बड़ी संख्या में आती हैं, देश में किसी भी नेता की सभा में इतनी महिलाएं नहीं आतीं इसका कारण है कि वे यहां सुरक्षित महसूस करती हैं । राज भी सभा में कोई भी बदसलूकी नहीं कर सकता खासकर महिलाओं के साथ, ऐसा ही प्रभाव बाला साहेब का हुआ करता था ।
राज में पूरे बाला साहेब उतर जाते है,किसी नेता की इतनी परफेक्ट कॉपी कहीं और देखने को नहीं मिली । किसी पिता पुत्र में भी इतनी समानता देखने को नहीं मिलती,यहां तक कि बाला साहेब के किसी भी पुत्र में उनकी ऐसी झलक दिखाई नहीं देती ,उनके खुद के द्वारा बनाए गए राजनीतिक उत्तराधिकारी उद्धव भी बाला साहेब जैसे नहीं लगते, उद्धव की शैली अलग है,हालांकि राजनीति में मौलिक शैली ही बेहतर मानी जाती है,उद्धव की शैली भी मौलिक है लेकिन लोग उनमें बाला साहेब देखना चाहते हैं इसलिए उद्धव ने अपने स्वभाव के विपरीत थोड़ा तीखापन लाने की कोशिश की है,और काफी हद तक सफल भी हुए हैं,इसका सबूत है उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़। राज के बाद किसी की सभा से सबसे ज्यादा भीड़ आ रही है तो वो उद्धव की सभा हैं। हालांकि उद्धव की सभा इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि उनकी सभा में जो भीड़ आ रही है वो इंटीरियर इलाकों में आ रही है जबकि राज मुंबई में भीड़ जुटाते हैं,मुंबई में भीड़ जुटाना इतना कठिन नहीं है जितना इंटीरियर में ।
उद्धव के भाषण अब बेहतर हो गए हैं,अब वो भी तीखी और मीठी मिक्स भाषा बोलते हैं, यही ठाकरी भाषा कहलाती है। ठाकरी भाषा के दो प्रतिनिधि और हैं एक संजय राउत जो रोज टीवी पर बोलते हैं और दूसरे आदित्य ठाकरे जो टीवी पर तो बोलते ही हैं और सभाओं में भी खूब बोलते हैं। खास बात यह है कि आदित्य ने खुद को शिवसेना का अगला   उत्तराधिकारी साबित कर भी दिया है,आदित्य भी अन्य ठाकरे की तरह इंटेलिजेंट और नॉलेजेबल हैं साथ भी उनमें बाला साहेब के तेवर और उद्धव की विनम्रता का मिश्रण है।
राजनीति में सबसे ज्यादा सफल ऐसे नेता ही होते है इसीलिए आदित्य का भविष्य उज्जवल दिखाई देता है। हालांकि शुरुआत में आदित्य को शिवसेना का पप्पू भी कहा गया था लेकिन आदित्य ने अपनी मेहनत और काबिलियत से एक मैच्योर्ड नेता की इमेज बना ली है, इसकी झलक उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी देखी जा सकती है ,आदित्य को देखकर शिवसेना का भविष्य सुरक्षित लगने लगा है लेकिन फिलहाल उनकी शिवसेना की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उनकी टक्कर सीधे सीधे केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से है और मोदी जी जैसे पॉपुलर प्रधानमंत्री के होते हुए उद्धव सेना की जीत आसान नहीं होगी इसलिए शिवसेना फिलहाल तो उतनी सशक्त नहीं होगी जितनी बाला साहेब के वक्त थी लेकिन भारत की राजनीति  के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता ।
हमारी राजनीति दलबदलू नेताओं का स्वर्ग है इसलिए भविष्य में क्या होगा यह वक्त आने पर ही पता चलेगा,ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो एक्सपर्ट जानते हैं लेकिन अभी तो चुनाव प्रचार गर्मागर्म रहा ,बिल्कुल चना जोर गरम की तरह,बस इसका मजा लीजिए, जनतंत्र में जन के हाथ में बस यही काम होता है,सभा में ताली बजाने का अधिकार तो हमारा ही है,इसे कोई सरकार नहीं छीन सकती तो तेईस तारीख तक इंतजार कीजिए तब तक जय हिंद,जय महाराष्ट्र।
(लेखक गीतकार हैं।)

अमरेली जिले के लोग पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं

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अमरेली जिले के चरवाहे, पशुपालन में अपना भविष्य देख रहे हैं और इससे लाखों रुपये कमा रहे हैं. यहां के प्रमुख पशुपालक प्रदीपभाई परमार ने गिर गायों के प्रजनन और बिक्री को व्यवसाय का रूप दिया है. वे असम, हरियाणा, पंजाब, बैंगलोर और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गायें बेचते हैं. प्रदीपभाई महीने में 20 से अधिक गायें बेचते हैं और अच्छी नस्ल की गिर गायों के प्रजनन से यह संभव हो पाया है.

युवा कर रहे हैं पशुपालन में नवाचार
अमरेली जिले के युवा पशुपालन में रुचि लेकर अच्छी नस्ल की गाय और भैंसें पाल रहे हैं. गिर गाय और भैंसों से प्राप्त दुग्ध उत्पादन इनके व्यवसाय का प्रमुख हिस्सा है. सौराष्ट्र में एक गिर गाय की कीमत लाखों रुपये होती है, जबकि एक लीटर दूध का दाम 70 से 100 रुपये के बीच रहता है. एक गाय से महीने में 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी होती है.

गुजरात की प्रसिद्ध गिर और कपिला गायें
गुजरात में गिर गाय का विशेष महत्व है, लेकिन कपिला गाय भी काफी चर्चित है. दमनगर गांव के एक चरवाहे के पास गिर गाय है, जिसकी कीमत 1.20 लाख रुपये आंकी गई है. यह गाय प्रतिदिन 14 लीटर दूध देती है. गाय के दूध से तैयार घी और अन्य उत्पादों से ग्रामीण क्षेत्रों में काफी आर्थिक प्रगति हो रही है.

हिंदू संस्कृति और गाय का महत्व
हमारी हिंदू संस्कृति में गाय का विशेष स्थान है. शोध से यह सिद्ध हुआ है कि गाय के दूध में स्वर्ण तत्व होते हैं. अमरेली जिले में काली कपिला, सफेद कपिला और गिर गाय जैसी विशेष नस्लें पाई जाती हैं. इन गायों की उच्च गुणवत्ता और दूध उत्पादन क्षमता ने पशुपालन व्यवसाय को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है.

नौकरी छोड़ अपनाया पशुपालन
प्रदीपभाई परमार ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की और कुछ समय तक पुलिस विभाग में नौकरी की. बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर पशुपालन का व्यवसाय शुरू किया. वर्तमान में वे गिर गायों की बिक्री और प्रजनन का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास एक गिर गाय है जिसकी कीमत 1.20 लाख रुपये है और यह 14 लीटर दूध देती है. इस दूध से घी बनाया जाता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है.

समृद्धि का साधन बन रहा पशुपालन
अमरेली जिले के लोग पशुपालन के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं, बल्कि इसे आधुनिक तरीके से संचालित कर रहे हैं. गिर गाय की बढ़ती मांग और उच्च दूध उत्पादन ने पशुपालन को एक लाभदायक व्यवसाय बना दिया है.