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अंबरनाथ की फार्मा कंपनी में लगी भीषण आग

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ इलाके में भीषण आग लग गई। आनंदनगर एमआईडीसी क्षेत्र स्थित रसिनो फार्मा नामक रासायनिक कंपनी में रविवार रात सवा नौ बजे के करीब भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। आग इतनी भयानक थी कि दूर से ही धुएं के बड़े-बड़े गुबार दिखाई दे रहे थे।

मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम

आग की सूचना मिलते ही अंबरनाथ, बदलापुर, उल्हासनगर सहित आसपास क्षेत्र से दमकल की पांच गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। आग की तीव्रता को देखते हुए और गाड़ियां बुलाने की तैयारी की जा रही है।

भारी नुकसान होने की संभावना

आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इस घटना में कंपनी के भीतर कोई कामगार फंसा है या नहीं, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। दमकल विभाग आग बुझाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आग में भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना है।

आसपास की तीन कंपनियां जलकर खाक

घटना के दौरान कंपनी से स्फोट की आवाजें भी सुनाई दी हैं। आग आसपास की अन्य कंपनियों तक न पहुंचे, इसे रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मौके पर पुलिस बल तैनात है और क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई है। इस फार्मा कंपनी के इलाके के अगल-बगल की तीन कंपनी भी जल कर खाक हो चुकी हैं।

भाजपा के हिंदुत्व  पर भारी पड़ा झारखंड मुक्ति मोर्चा का आदिवासी कार्ड* 

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(कुमार कृष्णन -विनायक फीचर्स)
वनाच्छादित, खनिज संपदा से भरपूर और आदिवासी बहुल झारखंड के अब तक के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है, जब जनता ने लगातार दूसरी बार किसी दल को सत्तासीन होने का जनादेश दिया है। यहां इंडिया गठबंधन   ने 81 सीटों में से 56 सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  24 सीटों पर सिमट गया । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सबसे अधिक सीटें (34) हासिल कीं, जबकि कांग्रेस ने 16, राष्ट्रीय जनता दल ने 4 और सीपीआई (एमएल) ने 2 सीटें जीतीं। वहीं, दूसरी तरफ तीन सीट के नुकसान के साथ भाजपा ने 21, दो के नुकसान के साथ एजेएसयू ने एक सीट हासिल की। पहली बार एक सीट जेडीयू के खाते में गई। इनके अन्य सहयोगियों को भी दो सीटों  का नुकसान हुआ, उन्हें केवल एक सीट मिली।वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2019 में झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा को 30, भाजपा को 25, कांग्रेस को 16, जेवीएम को तीन तथा एजेएसयू को दो और आरजेडी को एक सीट मिली थी।
 झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार  से मुलाकात के बाद हेमंत सोरेन  सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैंं। 28 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा। इस चुनाव में हाल के वर्षों में  राजनीति व पूंजीपतियों के नये उभरे समीकरण के चलते इस क्षेत्र पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी।  इस बार भाजपा पूरे जोश के साथ झारखंड का चुनाव जीतने के लिये वैसी ही आमादा दिखी,जैसी वह छत्तीसगढ़ और ओडिशा में थी जहां उसने जीत दर्ज करने के लिये सारे पैंतरे लगाये और सफलता पायी थी। झारखंड में आदिवासी वोट निर्णायक होते हैं।  झारखंड में एक तिहाई से ज्यादा (28)  अनुसूचित जनजाति सीटें हैं। आबादी का 26% हिस्सा आदिवासी है। 21सीटों  में आदिवासियों की आबादी कम से कम एक लाख है। इन सीटों पर झामुमो की अच्छी पकड़ है। भाजपा इसे तोड़ने में सफल नहीं रही। इस बार झारखंड में चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह, अमित शाह ने 16, योगी आदित्यनाथ ने 14 सभाएं कीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तो झारखंड में ही डेरा  डाल रखा था।
भाजपा के कई धुरंधर नेताओं ने झारखंड में धुआंधार प्रचार किया। संथाल परगना क्षेत्र में घुसपैठ को लेकर भाजपा काफी आक्रामक रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तो यहां तक कहा कि झारखंड में भाजपा  की सरकार बनाइए, घुसपैठियों को उल्टा लटका देंगे। उन्होंने घुसपैठियों को ही झारखंड मुक्ति मोर्चा , राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस का वोट बैंक बताया। जमशेदपुर में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वोट और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले घुसपैठियों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने चंपई सोरेन और सीता सोरेन के अपमान को आदिवासियों का अपमान बताया।
भाजपा ने “बंटोगे तो कटोगे” का नारा देकर घुसपैठ की चर्चा करते हुए हिंदुत्व कार्ड खेला। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए नारे बंटोगे तो कटोगे को भाजपा के नेताओं ने इस चुनाव में खूब उछाला। यह नारा बीजेपी के लिए नुकसानदेह ही साबित हुआ।
वहीं, इंडिया गठबंधन की तरफ से राहुल गांधी की छह सभाओं के अलावा लगभग पूरा जोर हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने ही लगाया।
पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने स्टार प्रचारक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, उन्होंनें पचीस दिनों तक यहां कैंप कर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में धुआँधार प्रचार किया,तो हेमंत सोरेन ने पूरी ईमानदारी से गठबंधन धर्म का पालन किया ।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी योजनाओं की चर्चा के साथ आदिवासी कार्ड खेला। झारखंड मुक्ति मोर्चा का आदिवासी कार्ड भाजपा के हिंदुत्व कार्ड पर भारी पड़ गया। आदिवासियों का भरोसा गुरुजी शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन पर ही रहा। झारखंड में हेमंत सोरेन के पक्ष में सहानुभूति  भी काफी प्रभावी रहा। हेमंत सोरेन अपने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश करते रहे कि आदिवासी चेहरे को कुचलने के लिए किस तरह उन्हें गलत तरीके से जेल में डाला गया। इसमें वे कामयाब भी रहे। कई विधानसभा सीट पर 40 प्रतिशत से अधिक आदिवासी मतदाता हैं। वे एकजुट होकर उनके पक्ष में खड़े हो गए।
हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी कल्पना सोरेन सामने आईं और जहां-जहां गईं, वहां उन्होंने पति के साथ ज्यादती की बात समझाने की कोशिश की। चुनाव प्रचार के दौरान मंईयां सम्मान योजना की राशि दो हजार से बढ़ाकर प्रतिमाह 2,500 रुपये करने की चर्चा भी उन्होंने खूब की। कल्पना ने सरना धर्म कोड की भी बात की और यह भी कहा कि बीजेपी ने नेता बाहर के हैं, वे हमारी भाषा-संस्कृति तक नहीं जानते। ये भला हमारे लिए क्या नीतियां बनाएंगे। अपने सहज व सरल अंदाज से खासकर महिलाओं से संवाद करने में वे सफल रहीं। वे गांडेय सीट से चुनी गई हैं। महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं का भी असर झारखंड मुक्ति मोर्चा के पक्ष में गया। बेरोजगार महिलाओं के लिए मासिक सहायता, स्कूली लड़कियों को मुफ्त साइकिल, अकेली महिलाओं को नकद सहायता जैसी योजनाओं ने आदिवासी और कमजोर वर्ग की महिलाओं को झारखंड मुक्ति मोर्चा के पाले में लाने का काम तो किया ही, इसके साथ मंईयां सम्मान योजना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महिलाओं को सालाना 12,000 रुपये देने वाली इस योजना तथा सर्वजन पेंशन योजना ने हेमंत के पक्ष में संजीवनी का काम किया। फिलहाल झारखंड की करीब पचास लाख से अधिक महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना के तहत 2,000 रुपये प्रतिमाह की मदद दी जा रही है। चुनाव के पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस राशि को बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया था।जबकि, गोगो दीदी योजना के तहत भाजपा ने 2,100 रुपये प्रतिमाह देने का वायदा किया था। बिजली बिल माफ करना भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए फायदेमंद साबित हुआ। सरकार बनने पर आरक्षण का दायरा बढ़ाने का भी वादा किया गया।
आदिवासियों की भाजपा से नाराज़गी की कई वजहें रहीं। पहली यह कि वे जानते हैं कि भाजपा की नज़रें यहां की खनिज-सम्पन्न ज़मीनों और जंगलों पर हैं जिन्हें वह अपने कारोबारी मित्रों को देना चाहती है। फिर, जब यहां भाजपा शासन था और रघुबर दास मुख्यमंत्री थे, उस दौरान 2016 में छोटा नागपुर किरायेदारी अधिनियम और संथाल परगना अधिनियम में बदलाव की कोशिशें की गयीं जिनका सीधा नुकसान आदिवासियों को होने वाला था। सितंबर 2012 में बनी झारखंड सरकार की ऊर्जा नीति अक्टूबर 2016 में बदल दी गई।
इसके प्रावधानों में मामूली संशोधन किए गए और रघुवर दास की कैबिनेट ने उस पर मुहर लगा दी। इससे पहले झारखंड की भाजपा सरकार ने कोई सर्वे नहीं कराया और न किसी विशेषज्ञ कमेटी ने उसे ऐसा करने की सलाह दी। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति एक समूह को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बदल दी।”सरकार ने कई स्तरों पर गड़बड़ी की,न केवल ऊर्जा नीति बदली बल्कि जमीन की कीमत के निर्धारण, जनसुनवाई और पर्यावरण सुनवाई में भी फर्जीवाड़ा किया गया। एनटीपीसी, डीवीसी (दामोदर घाटी निगम) और नेशनल ग्रिड से तो सरकार बिजली खरीदती ही है। अदाणी समूह के झारखंड से बाहर स्थित प्लांट से 400 मेगावॉट बिजली खरीदने से भी सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। ये भाजपा के नकारात्मक पक्ष थे।
 चुनाव में आदिवासियों के वोट लेने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह समेत सारी भाजपा उन्हें यह कहकर डराती रही कि कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा  की सरकार आई तो उनकी जमीनें ‘घुसपैठिये’ हड़प लेंगे। यह डर झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल के आदिवासियों को भी दिखाया जाता रहा । भाजपा के अनुसार ये बांग्लादेशी घुसपैठिये होंगे। उसका दावा है कि भाजपा की सरकार बनी तो आदिवासियों की ज़मीनों को हड़पने से रोकने के लिये कानून लाया जायेगा; जबकि आदिवासी जानते हैं कि उपरोक्त उल्लिखित दोनों अधिनियम इस मामले में पर्याप्त सक्षम है इसलिये इन इलाकों में भाजपा की सभाएं भी फीकी रहीं।
घुसपैठ का डर दिखाकर भाजपा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का पुराना खेला कर रही थी ताकि हिन्दू-मुस्लिम कार्ड खेला जा सके, तो वहीं वह आदिवासियों को हिन्दू बतलाकर उसे वैमनस्य के खेल में एक पार्टी बना रही है। अमित शाह ने सरायकेला विधानसभा के आदित्यपुर की सभा में कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा -कांग्रेस की सरकार आदिवासियों का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने जा रही है।’ उनके अनुसार भाजपा ऐसा नहीं होने देगी। चंपई सोरेन के प्रति सम्मान दिखाकर आदिवासियों के वोट पाने का भी प्रयास भाजपा ने किया तभी तो शाह कह रहे थे कि ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चंपई सोरेन का अपमान किया है।
यहां धुव्रीकरण की कोशिशों के साथ साथ अब केन्द्रीय जांच एजेंसियों की छापेमारी भी हुई। झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता गणेश चौधरी पर आयकर का जो छापा पड़ा  बकौल कल्पना सोरेन ‘चंपई सोरेन के इशारे पर हो रहा है।’ रांची, जमशेदपुर, गिरिडीह में ये छापे मारे गये जिसका मकसद झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े लोगों को डराना था। सोरेन सरकार में मंत्री मिथिलेश ठाकुर, उनके भाई विनय और सचिव हरेन्द्र सिंह के ठिकानों पर अक्टूबर के मध्य में ही ईडी द्वारा छापेमारी हुई थी। इसके बावजूद हेमंत सोरेन के पक्ष में सहानुभूति लहर रही जिन्हें जेल में डालना यहां के लोगों के लिये ‘झारखंडी अस्मिता पर हमला’ था। स्पष्टतः भाजपा एक तरफ़ आदिवासियों को मुस्लिमों का डर दिखाकर वोट लेना चाहती थी, तो वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा  नेताओं को छापों से डराकर चुनाव जीतने के हथकंडे अपनाए, जो नाकाम रहे।
जिस संथाल परगना क्षेत्र के लिए बंटोगे तो कटोगे का नारा गढ़ा गया, वहां की 18 सीट में से केवल एक जरमुंडी सीट बीजेपी जीत पाई। हिंदू वोटरों को एकजुट करने के लिए दिए गए इस नारे ने मुस्लिमों का ध्रुवीकरण कर दिया और उन्होंने एकजुट होकर इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान कर दिया।
 ‘माटी पुत्रों की पार्टी’ वाली छवि के कारण झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का इस पर बोलबाला है। वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर बने इस प्रदेश का प्रारम्भिक इतिहास राजनैतिक अस्थिरता तथा व्यापक भ्रष्टाचार का रहा लेकिन पिछले 5 वर्षों के दौरान हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में न केवल स्थिरता दी बल्कि जमीनी स्तर पर भी जमकर काम किया। आदिवासियों के उत्थान हेतु वे बतौर मुख्यमंत्री बेहद सक्रिय रहे। राज्य के सर्वांगीण विकास के अलावा वे जल, जंगल व जमीन पर स्थानीयों के हकों की लड़ाई लड़ते रहे। इसलिये वे भाजपा की आंखों में खटकते रहे। उन्होंने इस राज्य में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ नाकाम कर दिया। कथित जमीन घोटाले में जब उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से छापे डलवाकर कई माह तक जेलों की सलाखों के पीछे डाल दिया गया था, तब उनकी जगह पर बिठाये गये चंपई सोरेन के जरिये भाजपा ने सरकार गिराने की कोशिश की। जेल से बाहर आने पर जब उन्होंने अपना पद वापस सम्हाला तो चंपई सोरेन ने अपने कथित अपमान से नाराज़ होकर दल छोड़ दिया। फिर वे भाजपा में चले गये जहां हेमंत की भाभी सीता सोरेन पहले से आ चुकी थीं।
इनके जरिये सरकार गिराने की भाजपायी कोशिशें भी नाकाम रहीं।हेमंत सोरेन की यह जीत आदिवासीयत की एक बहुत बड़ी जीत है। उनके खिलाफ इडी, सीबीआई, मोदी, शाह, शिवराज, हेमंता, योगी सहित न जाने कितने दिग्गज नेता लगे थे। अब इस बड़ी जीत को हेमंत सोरेन को भरपूर सम्मान देना होगा, जनता की आकांक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना होगा और भाजपा को इस हार को विनम्रता से स्वीकार करना होगा।(विनायक फीचर्स)

रद्द हो सकती है ‘मनसे’ की मान्यता, राज ठाकरे ने बुलाई पार्टी की बैठक

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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। 288 सीटों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के महायुति गठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की है। हालांकि, चुनाव में राज ठाकरे की पार्टी मनसे का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। अब बड़ी खबर ये सामने आ रही है कि विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राज ठाकरे की पार्टी की मान्यता भी रद्द हो सकती है।

क्या है कारण?
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की मान्यता रद्द कर सकता है। जानकारों के मुताबिक, विधानसभा चुनावों में कम से कम एक विधानसभा सीट या, मतदान का 8 प्रतिशत वोट शेयर ना मिलने पर मान्यता जा सकती है। राज ठाकरे ने अपने घर आज सुबह 10.30 बजे पार्टी के नेताओं की आत्मचिंतन बैठक बुलाई है। बैठक में चुनावों में खराब प्रदर्शन और आगे की रणनीति की हो सकती है चर्चा।

मनसे को कितने वोट मिले?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 120 से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और इनमें से एक उम्मीदवार भी चुनाव नहीं जीत सके। राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी माहिम सीट से चुनाव हार गए। चुनाव आयोग के मुताबिक, मनसे को चुनाव में महज 1.55 फीसदी वोट मिले हैं।

किसे कितनी सीटें मिली?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की भाजपा को 132, एनसीपी को 41 और शिवसेना को 57 सीटों (कुल 230) पर जीत हासिल हुई है। वहीं, महाविकास अघाड़ी की शिवसेना (यूबीटी) को 20, कांग्रेस को 16 और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) को 10 (कुल 46) सीटों पर जीत मिली है। बाकी की 12 सीटें अन्य दलों या फिर निर्दलीय ने जीती हैं।

मुस्तफा यूसुफअली गोम को भारत विभूषण पुरस्कार – 2024 मिलना एक बड़ी उपलब्धि है

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मुस्तफा यूसुफअली गोम को भारत विभूषण पुरस्कार – 2024 मिलना एक बड़ी उपलब्धि है! यह पुरस्कार उनके सामाजिक उद्यमिता में महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देता है और उन्हें एक प्रेरणादायक शख्सियत के रूप में स्थापित करता है ¹।

मुस्तफा यूसुफअली गोम की कहानी हमें याद दिलाती है कि एक व्यक्ति समाज को ऊपर उठाने में कितना गहरा प्रभाव डाल सकता है। उनके शब्दों ने कई लोगों को प्रेरित किया है, जो यह विश्वास को मजबूत करते हैं कि उद्यमिता सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली साधन हो सकती है।

यह पुरस्कार न केवल मुस्तफा यूसुफअली गोम की उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मानक भी स्थापित करता है। यह पुरस्कार मुंबई और उससे आगे के उद्यमियों को सामाजिक प्रभाव के लिए अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।

जिसके घर में गाय का कुल, वह घर गोकुल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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घर-घर बछिया उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जाएगा
गौ-शाला स्थापित करने की दिशा में सक्रियता से कार्य जारी
प्रदेश में इस वर्ष 300 गौ-शालाओं का हुआ पंजीयन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाईटेक गौ-शाला का किया भूमि-पूजन
25 एकड़ क्षेत्र में 15 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी गौ-शाला
ग्राम सूखी सेवनिया में बनेगा सीएम राइज स्कूल और बरखेड़ी डोब को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में गौ-माता से संबंधित डिग्री/डिप्लोमा कोर्स आरंभ होंगे
भोपाल जिले के ग्राम बरखेड़ी डोब में हुआ भूमि-पूजन कार्यक्रम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गौ-माता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। जो भी गोवंश का पालन करे वही गोपाल है, जिसके घर में गाय का कुल वह घर गोकुल है। अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को घर में गोपालन के लिए पहल करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिना धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र के भेदभाव के हमें गौ-पालन को प्रोत्साहित करना है। परंपरागत रूप से भी भारत में सभी धर्म और जाति के लोग गौ-पालन करते हैं और यही हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के ग्राम बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाईटेक गौ-शाला के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि भोपाल जिले के बरखेड़ी डोब ग्राम में 25 एकड़ क्षेत्र में 15 करोड़ रूपए की लागत से गौ-शाला का निर्माण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाईटेक गौ-शाला भूमि-पूजन स्थल पहुंचने पर सर्वप्रथम गौ-माता को दुलार कर नमन किया तथा उन्हें आहार सामग्री अर्पित की। इस अवसर पर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए संचालित गतिविधियों पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री आलोक शर्मा, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रामकुंवर नौरंग सिंह गुर्जर सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बदलती जीवनशैली में निरंतर बढ़ रहा है गौ-शालाओं का महत्व

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व के अधिकांश देशों में दुग्ध की आपूर्ति गौ-माता ही करती हैं। सनातन संस्कृति में गौ-माता का महत्व इससे स्पष्ट हो जाता है कि मानव जीवन की पूर्णता के लिये गौ-दान आवश्यक बताया गया है। बदलती जीवनशैली में गौ-शालाओं का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसे देखते हुए राज्य शासन द्वारा विशाला गौ-शाला स्थापित करने की दिशा में सक्रियता से कार्य किया जा रहा है, वर्तमान वर्ष में अब तक 300 गौ-शालाओं का पंजीयन हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठन भी गौ-शाला संचालन में पहल कर रहे हैं। गौ-पालन परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ परिवार को पोषक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में भी सहायक है। अत: घर-घर बछिया उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र ही दुग्ध उत्पादन पर बोनस देने की व्यवस्था कर रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश, देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 9 प्रतिशत का योगदान देता है। इसे अगले पाँच वर्ष में 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है।

सूखी सेवनिया रोड को फोरलेन किया जाएगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शासकीय विद्यालय सूखी सेवनिया को सीएम राइज विद्यालय बनाने और सूखी सेवनिया रोड को विभागीय मद अनुसार फोरलेन बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बरखेड़ी डोब क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के माध्यम से गौ-माता से संबंधित डिग्री-डिप्लोमा कोर्स आरंभ किया जाएगा।

स्वामी श्री अच्युतानंद जी महाराज ने गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार गठन के बाद अभी तक के अल्प समय में प्रदेश में लगभग 50 हजार गायों के पालन-पोषण की व्यवस्था की है और प्रदेश की लाखों गायों की देखभाल का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश सरकार इस वर्ष को गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मना रही है। आज यहां गोलोक धाम की स्थापना इसी कड़ी में एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस प्रयास के लिए सभी महात्मा, सभी ऋषिगण उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद और आशीर्वाद देते हैं। गौ-माता का पालन-पोषण हम सभी सनातनियों का दायित्व है। हमें इस प्रकार के प्रयास करने चाहिएं कि हर घर में एक गाय रहे। गौ-माता के बिना घर सूना होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के समग्र विकास को समर्पित

विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं, युवा, किसानों, मजदूर, वरिष्ठ जन के कल्याण के लिए समर्पित है। राज्य सरकार द्वारा गौ-वंश के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अधोसंरचना विकास, शिक्षा, चिकित्सा सहित प्रदेश के समग्र विकास के लिए सक्रिय हैं। पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने आभार व्यक्त किया।

गौ-वंश को कन्वेयर बेल्ट से मिलेगा आहार और सीसीटीवी से होगी मॉनीटरिंग

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्तमान वर्ष (चैत्र माह से फाल्गुन माह तक) गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल के बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गौ-शाला के निर्माण के लिये शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि-पूजन किया है।

  • इसमें गायों के आधुनिक तरीके से रख-रखाव के साथ उनके उपचार के लिए सभी संसाधनों से युक्त चिकित्सा वार्ड का निर्माण भी किया जाएगा।

  • गौ-शाला में सीसी टीवी के माध्यम से निरंतर मॉनीटरिंग की व्यवस्था रहेगी।

  • लगभग 15 करोड रुपए की लागत की गौ-शाला का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा कराया जाएगा। नगर निगम एवं पशुपालन विभाग नोडल एजेंसी होंगे। गौ-शाला को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जिला पंचायत द्वारा वित्त पोषण किया जाएगा। गौ-शाला का संचालन नगर निगम द्वारा किया जाएगा।

  • गौ-शाला का निर्माण 3 चरणों में होगा। प्रथम चरण में लगभग 2000 पशु क्षमता का निर्माण किया जाएगा।

  • इस अत्याधुनिक गौ-शाला में गायों को भूसा, हरा घास, पशु आहार आदि कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से पहुंचाया जाएगा।

  • गौ-शाला में गायों के गोबर एवं मूत्र आदि से विभिन्न सामग्री तैयार की जाएगी और जैविक खाद निर्माण के लिए संयंत्र भी लगाया जाएगा।

  • गौ-शाला में रहने वाले पशुओं एवं सड़कों पर घायल एवं बीमार होने वाले पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सा वार्ड भी बनाया जा रहा है।

UP- डीएम ने सभी गौशालाओं की 28 नवंबर तक मांगी रिपोर्ट

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जिले की डीएम ने कड़ाके की ठंड के मद्देनज़र गौ-आश्रय स्थलों और कान्हा गौशालाओं में ठंड से बचाव के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Gonda News: डीएम नेहा शर्मा ने अधिकारियों को सभी गौ-आश्रय स्थलों पर ठंड से बचाव के लिए अलाव जलाने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही पशुओं के लिए भूसे, तिरपाल, बोरी आदि से बिछावन तैयार करने और उन्हें ठंड से बचाने के लिए गर्म वातावरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। पशुओं के खानपान पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने हरा चारा, गुड़ और पौष्टिक आहार की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रात के समय गौ-आश्रय स्थलों की सुरक्षा को लेकर चौकीदार की तैनाती को भी अनिवार्य बताया। डीएम ने स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि गौ-आश्रय स्थलों और उनके आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और खुले में कचरा न फेंका जाए। सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि इन निर्देशों का पालन सख्ती से सुनिश्चित किया जाए। व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए।

डीएम ने स्पष्ट किया कि 28 नवंबर 2024 तक सभी व्यवस्थाओं की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपनी होगी। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने कहा कि ठंड के मौसम में पशुओं की सुरक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की चूक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

COW MAN एकनाथ शिंदे की ऐतिहासिक जीत, महाराष्ट्र में मतदाताओं ने पाप और पुण्य को समझा – शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

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वाराणसी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गोभक्त एकनाथ शिन्दे की जीत पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि मतदान से पाप-पुण्य के विचार को महाराष्ट्र की जनता ने समझा व गोभक्त श्री एकनाथ शिन्दे जी को भारी मतों से विजयी बनाया।

हर हिंदू को यह समझना जरूरी –

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी ने कहा है कि हर हिन्दू को यह समझने की है आवश्यकता कि गौ-हत्या को जारी रखने वाले राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों को मतदान करने से गौहत्या का पाप मतदाता को भी लगता है।

महाराष्ट्र की जनता ने गौ-भक्त का दिया साथ –

शंकराचार्य ने यह भी कहा है महाराष्ट्र की जनता ने गौभक्त एकनाथ शिन्दे को भारी मतों से विजयी बनाकर यह साबित किया है कि वे गौहत्या के विरोधी हैं और गौरक्षा के समर्थक हैं।

यह एकनाथ शिन्दे की नही, गौरक्षा की जीत –

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा है कि “यह जीत न केवल एकनाथ शिन्दे जी की जीत है”, बल्कि “यह गौरक्षा की जीत है, यह हिन्दू समाज की जीत है।” महाराष्ट्र की जनता ने यह साबित किया है कि वे गौहत्या के विरोधी हैं और गोरक्षा के समर्थक हैं। यह एक अच्छा संकेत है और यह देश के लिए एक अच्छा दिन है।

एकनाथ शिन्दे को शंकराचार्य ने दी बधाई –

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने एकनाथ शिन्दे जी व महाराष्ट्र की जनता को बधाई दी है और कहा है कि यह जीत गौरक्षा के लिए एक अच्छा संदेश है।

शिंदे ही मुख्यमंत्री रहें तो अच्छा –

एकनाथ शिंदे जी के नेतृत्व में महायुति को एक ऐतिहासिक विजय मिली है, और देश की बहुसंख्यक जनता का भरोसा उनमें परिलक्षित हुआ हैं। यह उनकी नेतृत्व क्षमता और लोकप्रियता का प्रमाण है।

एकनाथ शिंदे जी के नेतृत्व में महायुति ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे वास्तव में प्रशंसनीय हैं। उनकी नीतियों और कार्यक्रमों ने जनता का दिल जीता है, और उनकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

एकनाथ शिंदे जी को मुख्यमंत्री बनाए रखने से न केवल महायुति को मजबूती मिलेगी, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को भी पूरा किया जा सकेगा।

बहुसंख्यक हिन्दुओं की धार्मिक भावना को समझने वाले को प्रोत्साहित करना उचित –

बहुसंख्यक हिन्दुओं की धार्मिक भावना को समझने वाले नेताओं को प्रोत्साहित करना हमारा कर्तव्य है। हमें लगता है कि जो कार्य गौमाता के संदर्भ में एकनाथ शिंदे जी ने किया है, वह देश का कोई राजनेता अब तक नहीं कर सका था।

श्री एकनाथ शिंदे जी ने गौमाता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण का परिचय दिया है, जो देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं की धार्मिक भावना को समझने और सम्मान करने का प्रतीक है।

हमें लगता है कि ऐसे नेताओं को प्रोत्साहित करना हमारा कर्तव्य है, जो देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं।

उद्योगपति व समाजसेवी हुकूम उदय प्रताप सिंह ने लड्डू बांटकर मनाई जीत की खुशी

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चुनावी नतीजों मे भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद मनाई गयी खुशियाँ

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत पर शहर में भाजपाइयों ने उत्सव मनाया और मिठाई बांटी। उद्योगपति व समाजसेवी हुकूम उदय प्रताप सिंह ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र और यूपी में भाजपा की जीत पर शहर में विभिन्न स्थानों पर भाजपाइयों ने उत्सव मनाते हुए मिठाई बांटी। हुकूम उदय प्रताप सिंह द्वारा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत पर लड्डू बांट कर खुशी का इजहार किया गया। इस मौके पर भाजपा नेताओं समेत उनके कई शुभचिंतक भी उपस्थित रहे।
श्री सिंह ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। महाराष्ट्र में भाजपा की जीत पर उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा सीट मिली है। तो वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का नारा “बंटोगे तो कटोगे” ने जीत के लिए प्रमुख भूमिका निभाया।
साथ ही उन्होंने देश की जनता का आभार व्यक्त किया। हूकूम उदय प्रताप सिंह ने आये हुए सभी लोगों के साथ मिलकर भाजपा के जीत की खुशियाँ मनाई और पार्टी से जुड़े लोगों को बधाई दी।

डीप स्टेट की अंतरराष्ट्रीय साजिश का शिकार तो नहीं बन रहे गौतम अदाणी* 

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मनोज कुमार अग्रवाल –
पिछले कुछ सालों में तेज़ी से उभरे भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी अक्सर विरोधियों के निशाने पर बने रहते हैं। देश के विपक्षी दल के नेता हो या सरकार के विरोधी आरोप हमेशा अदाणी पर लगाते हैं। हाल ही में  अमेरिकी एजेंसियों द्वारा लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोप से भारत सहित पूरी दुनिया में खलबली मचना स्वभाविक है, क्योंकि अदाणी ग्रुप का कारोबार पूरी दुनिया भर में फैला हुआ है। अमेरिकी एजेंसियों के तरफ से आरोप लगाए गए है कि अमेरिकी निवेशकों से लिए पैसों का इस्तेमाल कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए किया गया था।
अमेरिकी प्रोसिक्यूटर और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) द्वारा दायर किए गए आरोपों में अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ विनीत जैन पर सौर एनर्जी कॉन्ट्रेक्ट के लिए अपने हिसाब से शर्तों को लागू करने के लिए 2020 से 2024 तक एक योजना बनाने का आरोप लगाया गया है।

आरोप है कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के ठेके हासिल करने के लिए उन्होंने भारतीय अधिकारियों को लगभग 2,250 करोड़ रुपये की रिश्वत खिलाई। अदाणी ग्रुप ने इन प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाया था, यही वजह है कि अमेरिकी कोर्ट में उनके खिलाफ ये मामला आया है। इन प्रोजेक्ट से समूह को 20 वर्षों में करीब 2 अरब डॉलर के मुनाफे का अनुमान था।

इस पूरे मामले में गौतम अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी, एज्योर पावर के सीईओ रहे रंजीत गुप्ता, एज्योर पावर में सलाहकार रूपेश अग्रवाल अमेरिकी इश्युअर हैं। मामले के केंद्र में अदाणी ग्रीन एनर्जी और एक अन्य रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी, एज्योर पावर द्वारा सरकारी स्वामित्व वाली सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) को 12 गीगावाट सोलर एनर्जी सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट था। देखा जाए तो इससे पहले अदाणी समूह पर हिंडनबर्ग ने आरोप लगाए थे। यथा संभव समूह ने हिंडनबर्ग के तीखे हमलों का मुकाबला बखूबी किया था, लेकिन इस बार उसे जटिल विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, कारोबारी समूह ने रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों को निराधार कहकर खारिज किया है। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जैसा कि अमेरिकी न्याय विभाग ने खुद बताया है कि अभियोग में लगाए गए आरोप जब तक साबित नहीं हो जाते, तब तक प्रतिवादियों को निर्दोष माना जाता है। सभी संभव कानूनी उपाय किए जाएंगे। अदाणी ग्रुप के तरफ से कहा कि गया है कि कंपनी हमेशा शासन, पारदर्शिता और विनियामक अनुपालन के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कंपनी अपने हितधारकों, भागीदारों और कर्मचारियों को आश्वस्त करते हैं कि ग्रुप एक कानून का पालन करने वाला संगठन हैं, जो सभी कानूनों का पूरी तरह से अनुपालन करता है। वैसे जिस प्रकार से आरोप लगे हैं तो अब अदाणी समूह के पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिये खुद को तैयार करने के अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आता।

हालांकि आर्थिक जानकारों का मानना है कि अदाणी पर आरोप अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत लगाया जा रहा है। इसके कई कारण भी सामने आ रहे हैं। भारत सरकार और कारोबारी जगत हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के समय को लेकर चिंतित हैं। रूसी मीडिया संस्थान स्युतनिक की भारतीय शाखा स्युतनिक इंडिया के मुताबिक, जानकार इसे ‘डीप स्टेट’ की साजिश मान रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ‘डीप स्टेट’ मोदी सरकार को अस्थिर करना चाहता है। बांग्लादेश में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। जानकार मानते हैं कि बाजार नियामक संस्थान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के खिलाफ अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट भी ‘डीप स्टेट’ की चालों की ही एक कड़ी है। उद्योग सूत्रों ने स्पुतनिक इंडिया को बताया है कि इसका मकसद भारतीय संस्थानों में विश्वास कमजोर करना है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में सफल मगर अमेरिका में नाकाम डीप स्टेट दोबारा अडानी के बहाने भारत पर बुरी नजर डाल रहा है।

भारतीय अधिकारियों को हिंडनबर्ग रिसर्च की इस कोशिश के बारे में बताया गया है। उनका कहना है कि ये पश्चिमी ताकतों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को अस्थिर करने के प्रयास हैं। कहा जा रहा है कि ‘डीप स्टेट’ भारत की जड़ें हिलाने के लिए मोदी सरकार को अस्थिर करना चाहता है। बाजार नियामक संस्थान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के खिलाफ अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को भी ‘डीप स्टेट’ की चालों की ही एक कड़ी बताया जा रहा था। स्पुतनिक इंडिया ने वैश्विक उद्योग सूत्रों के हवाले से बताया है कि डीप स्टेट का मकसद भारतीय संस्थानों और कारोबारियों में जनता का विश्वास कमजोर करना है। बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया के कई देशों के अलावा खुद अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान साफ तौर पर यूएस डीप स्टेट की भूमिका देखी गई थी। अमेरिका में दूसरी बार राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप ने प्रचार के दौरान जानलेवा हमले के बाद सार्वजनिक तौर पर इसको लेकर गंभीर चिंता जताई थी।

डीप स्टेट किसी भी राज्य के राजनीतिक नेतृत्व से अलग स्वतंत्र रूप से अपने निजी एजेंडे और लक्ष्यों के लिए काम करती है। पब्लिक स्फीयर में यह शब्द काफी ज्यादा नकारात्मक अर्थ रखता है और अक्सर इसका मकसद साजिश के सिद्धांतों से जुड़ा होता है। इससे साफ हो जाता है कि अदाणी के खिलाफ यह पूरा मामला साजिश भी हो सकता है, क्योंकि पिछले दशक में  अदाणी समूह ने अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाहों से लेकर पावर सेक्टर तक में तेजी से अपना कारोबार बढ़ाया है। इससे अमेरिका के साथ संबंधों पर भी असर पड़ने की संभावना है। दरअसल भारत के रूस से गहरे होते रिश्तों व चीन से सुधरते संबंधों के बीच अमेरिका व कनाडा समेत पश्चिमी देशों में भारत को लेकर वक्र दृष्टि देखी जा रही है। अदाणी प्रकरण को भी वर्तमान अमेरिकी सरकार व भारत के बीच तल्खी के आलोक में देखा जा रहा है।

अमेरिका ने इससे पहले आरोप लगाया था कि भारत सरकार के एक कर्मचारी ने न्यूयॉर्क में एक अमेरिकी नागरिक व सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू को मारने की साजिश रची थी। बहरहाल, अब देखना होगा कि ट्रंप की ताजपोशी के बाद दोनों देशों के रिश्ते कैसे रहते हैं। लेकिन इसमें कोई दो मत नहीं है कि इस मामले की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक सच्चाई सामने आ सकें। साथ ही जिस प्रकार से विपक्ष अदाणी को घेरने में जुटा है, उसको इस प्रवृति से बाज आना चाहिए। विपक्ष को चाहिए कि वह इस मामले में अदाणी और सरकार को घेरने के बजाए वास्तविकता को समझे। यह याद रखना जरूरी है कि अभियोग में लगे आरोप सिर्फ आरोप हैं, और जब तक किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं किया जाता, तब तक उसे अपराधी नहीं माना जाता है। भारत के विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता भी पीएम मोदी और अदाणी की दोस्ती का जिक्र कर तरह तरह के आरोप लगाते रहे हैं और यह सिलसिला चुनाव के दौर में बढ़ जाता है अब अमेरिका से भी इस तरह के विवाद को जन्म दिया जाना किसी बड़ी अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा हो सकता है।

जरूरत इस बात की है कि अदाणी पर लगे आरोपों की गहराई से निष्पक्ष जांच की जाए और दूध का दूध पानी का पानी किया जाए। यह  सामने आना जरूरी है कि आखिर क्या वजह है कि अमेरिका से अदाणी को बार बार निशाने पर लिया जा रहा है ।  (विनायक फीचर्स)

गौ तस्कर से पुलिस की हुई मुठभेड़

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नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा: नोएडा में चेकिंग के दौरान थाना बीटा दो पुलिस की एक गौ तस्कर से मुठभेड़ हो गई. मुठभेड़ के दौरान बाइक सवार गौ तस्कर के पैर में गोली लगी, जिसको इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है. पुलिस इस गौ तस्कर के अन्य साथियों की जानकारी जुटा रही है. पुलिस ने आरोपी के पास से अवैध तमंचा, कारतूस और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की है.

पुलिस की बाइक सवार गौ तस्कर से मुठभेड़ : दरअसल, पुलिस कमिश्नर गौतम बुध नगर लक्ष्मी सिंह का निर्देश पर लगातार जिले में चेंकिंग अभियान चलाया जा रहा है. इसी चेंकिंग अभियान के दौरान थाना बीटा दो पुलिस शनिवार की सुबह P3 गोल चक्कर पर वाहन चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान पुलिस की एक बाइक सवार गौ तस्कर से मुठभेड़ हो गई. पुलिस की गोली लगने से गो तस्कर घायल हो गया जिसको इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है.

पुलिस ने बदमाशों को रोका तो पुलिस पर की फायरिंग : एडिशनल डीसीपी ग्रेटर नोएडा अशोक कुमार ने बताया कि पी-3 गोल चक्कर पर शनिवार सुबह बीटा दो थाना पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी. तभी पुलिस को एक संदिग्ध मोटरसाइकिल पर एक व्यक्ति आता हुआ दिखाई दिया. पुलिस ने उसे रोकने का इशारा किया लेकिन वह व्यक्ति तेजी से मोटरसाइकिल लेकर भागने का प्रयास करने लगा. पुलिस टीम द्वारा जब उसका पीछा किया गया तो बदमाश के द्वारा मोटरसाइकिल से उतारकर पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की गई. पुलिस टीम के द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में गौ तस्कर के पैर में गोली लगी है.

पुलिस ने किए गौ तस्करों के कब्जे से कई हथियार बरामद : मुठभेड़ में घायल हुए गौ तस्कर की पहचान हरियाणा के जिला फरीदाबाद के थाना दौज क्षेत्र के गांव आलमपुर निवासी आलम के रूप में हुई है. आरोपी गौ तस्कर पर गौतम बुद्ध नगर में कई मामले पशु क्रूरता अधिनियम और गोवध अधिनियम के मामले दर्ज हैं जिसमे आरोपी फरार चल रहा था. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा, दो जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस और दिल्ली के मयूर विहार से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल स्प्लेंडर प्लस बरामद की है. पुलिस ने घायल गौ तस्कर को इलाज के लिए अस्पताल भेजा है तथा इसके अन्य आपराधिक इतिहास पुलिस खंगाल रही है.