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अग्निपथ पर भड़की आग

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देशभर में अग्निपथ योजना का विरोध देखने को मिल रहा है। जहां गुरुवार को बिहार, दिल्ली, एमपी, राजस्थान और हरियाणा समेत कई राज्यों में इस योजना के खिलाफ छात्रों ने दिनभर प्रदर्शन किया। वहीं अब यह शुक्रवार को भी जारी है। हालांकि छात्रों के रुख को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुरुवार को अग्निपथ योजना में अभ्यर्थियों की उम्र सीमा को 21 से बढ़ाकर 23 कर दिया है।

बता दें कि पिछले दो सालों के दौरान कोई भर्ती नहीं हुई थी। ऐसे में सरकार ने उम्र सीमा बढ़ाने के फैसला लिया है। हालांकि उम्र सीमा बढ़ाने के फैसले के बाद भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार की सुबह यूपी, बिहार में छात्रों का उग्र प्रदर्शन जारी है। कुछ टीवी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (17 जून, 2022) साढ़े छह बजे बक्सर के डुमरांव स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने रेल ट्रैक को निशाना बनाते हुए पटरियों के बीच में टायर जलाए और अपना गुबार निकाला। वे इसके अलावा सड़क से लेकर सोशल मीडिया पर भी मुहिम चला रहे हैं।

राकेश टिकैत ने विरोध का समर्थन कर किया राष्ट्रवापी आंदोलन का ऐलान: केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती की नई योजना ‘अग्निपथ’ का विरोधर करते हुए गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यह योजना युवाओं खासकर किसान के बच्चों के लिए हितकारी नहीं है। टिकैत ने कहा कि इस योजना का विरोध किया जाएगा और इसके खिलाफ राष्ट्रवापी आंदोलन किया जाएगा।

टिकैत ने कहा कि सेना में अभी तक युवाओं को 15 साल की नौकरी और पेंशन मिल रही थी। लेकिन नई योजना के तहत जब चार साल की नौकरी के बाद युवा बिना पेंशन घर जायेगा तों उसका आगे भविष्य क्या होगा।

नई सेना भर्ती से जुड़ी व्यवस्था का सर्वाधिक विरोध बिहार में हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान पैसेंजर ट्रेनें रोकीं और वे ऐसा कर नरेंद्र मोदी सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, एक रोज पहले यानी गुरुवार को उपद्रवियों ने बिहार में हल्ला बोला था और इस दौरान एक बीजेपी दफ्तर पर भी हमला बोला गया था।

गोबर के इस्तेमाल से बढ़ा खजूर का उत्पादन

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खाड़ी देश कुवैत (Kuwait) ने पैगंबर मोहम्मद विवाद (Prophet Mohammad Row) के बीच अब गेहूं (Wheat) के बाद भारत को गाय के गोबर (Cow Dung) का बड़ा ऑर्डर दिया है. कुवैत में वैज्ञानिकों ने खजूर की खेती में गाय के गोबर का इस्तेमाल किया और पाया कि इससे उपज बढ़ जाती है. इसके बाद कुवैत ने भारत से गाय का गोबर मंगाने का फैसला किया. भारत को अब तक गोबर के लिए मिले सबसे बड़े विदेशी ऑर्डर की खेप राजस्थान (Rajasthan) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से भेजी जा रही है.

राधा मोहन सिंह ने कहा कि कुवैत से मिले ऑर्डर के बाद गाय के गोबर के निर्यात की संभावनाएं बढ़ गई हैं. भारत गोबर का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. अब सरकार भी गोबर के निर्यात पर फोकस करने की रणनीति तैयार कर रही है. अभी मिले ऑर्डर के लिए राजस्थान और उत्तर प्रदेश से गोबर भेजा जा रहा है. आने वाले समय में गोबर के निर्यात में सभी राज्यों को शामिल करने की योजना है.

उन्होंने बताया कि कुवैत को गाय के गोबर की पहली खेप आज 15 जून को भेजी जा रही है. इसे राजस्थान के कनकपुरा रेलवे स्टेशन से मुंबई भेजा जा रहा है. वहां से गोबर को जहाज के जरिए कुवैत ले जाया जाएगा. इस खेप को कस्टम विभाग की निगरानी में जयपुर के टोंक रोड स्थित श्री पिंजरापोल गोशाला में सनराइज ऑर्गेनिक पार्क में पैक किया गया है. इस पहली खेप में कुवैत को 192 मीट्रिक टन गोबर की आपूर्ति की जा रही है. पहली बार भारत को किसी देश से गोबर के लिए इतना बड़ा ऑर्डर मिला है.

कुवैत में कृषि वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में पाया कि गाय के गोबर को पाउडर के रूप में प्रयोग करने से खजूर की फसल बढ़ रही है. इसके इस्तेमाल से फल के आकार और उत्पादन  की मात्रा दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई. इसके बाद कुवैत की कंपनी लैमोर ने गाय के गोबर का एक बड़ा ऑर्डर भारत को दिया.

आपको बता दें कि भारत में करीब 30 करोड़ मवेशी हैं. इनसे हर रोज करीब 30 लाख टन गोबर का उत्पादन होता है. भारत में गोबर का मुख्य इस्तेमाल उपला बनाकर ईंधन के रूप में किया जाता है. हालांकि ब्रिटेन और चीन समेत कई देशों में गोबर से बिजली व गोबर गैस का उत्पादन किया जाता है.

 

 

चीन ने बदली रणनीति, अब तिब्‍बत के युवाओं को सेना में कर रहा भर्ती;

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चीन ने बदली रणनीति, अब तिब्‍बत के युवाओं को सेना में कर रहा भर्ती;

गलवान में भारत की सेना से हुई हिंसक झड़प के दो साल बाद चीन एलएसी के नजदीक इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के साथ अब तिब्बतियों की रिकॉर्ड संख्या में सेना में भर्ती कर रहा है। चीन की सरकारी मीडिया की माने तो तिब्बत के लोग भी खुशी से पीएलए में भरती के लिए आवेदन कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ल्हासा में पिछले साल की अपैक्षा इस साल 15.7 फीसदी ज्यादा तिब्बतियों को पीएलए में शामिल किया है। पीएलए ने साल के पहले हिस्से में 472 तिब्बती युवाओं को भर्ती किया है। इनमें से 240 कॉलेज में पढ़ रहे छात्र हैं।

चीन में 6 से 9 साल के तिब्बती बच्चों को शुरू से ही सेना से जुड़ी शिक्षा देने के लिए खास स्कूल खोले जा रहे हैं। एलएसी के आसपास मॉडल गांव में इन तिब्बतियों के लिए कई ऐसी योजनाएं भी लागू की जा रही है जिससे वह ना सिर्फ यहां बस जाएं बल्कि पीएलए में शामिल होकर चीन की सेना की ताकत बने। चीन को लगता है कि तिब्बतियों को अपनी फौज में भर्ती करने से उसे तिब्बत के एकीकरण में मदद मिलेगी। एलएसी के नजदीक यह सैनिक बेहतर ढंग से डटे रह सकते हैं।

चीनी सेना को लंबे वक्त के लिए लद्दाख में टिकना पड़ा। ठंड की वजह से चीन की रेगुलर सेना के कई जवान कमजोर दिखाई दिए, जबकि तिब्बत के युवा इन परिस्थितियों में ज्यादा मजबूत साबित हुए।

भारत से टकराव के बाद चीन ने तिब्बती सैनिकों को पीएलए में ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल करने की रणनीति बनाई है। इसके लिए एलएसी के करीब नइनचि में स्कूली बच्चों के लिए समर कैंप के बहाने सेना से रूबरू कराया गया है। इन कैंप में 8 से 16 साल के बीच की उम्र के बच्चों को मिलिट्री स्टाइल ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वह आसानी से पीएलए में शामिल किया जा सके।

चीन सिक्किम के दूसरी ओर तिब्बत के यादोंग और इसके पास के गांव के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर अपना मिलिशिया ग्रुप तैयार कर रहा है। इनकी तैनाती उन बॉर्डर इलाकों में की जा रही है जहां से व्यापार होता है। चीन ने बाकायदा स्पेशल तिब्बत आर्मी यूनिट तैयार की है। इसका नाम रखा गया है मिमांग चेटोन।

तिब्बती भाषा में इसका मतलब है पब्लिक के लिए। उन्हें जासूसी कर भारतीय सेना की मूवमेंट पर नजर रखने और चेक पोस्ट पर निगरानी का काम दिया जा रहा है। इन्हें कोई न तो रैंक दी गई है और न ही कोई वर्दी दी गई है। हालांकि चीन के तिब्बत पर कब्जा करने के 70 साल बाद भी तिब्बतियों की नाराजगी खत्म नहीं हुई है।

 

“अगर कश्मीरी पंडितों का पलायन धार्मिक टकराव का नतीजा है तो…” : अभिनेत्री साई पल्लवी

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“अगर कश्मीरी पंडितों का पलायन धार्मिक टकराव का नतीजा है तो…” : अभिनेत्री साई पल्लवी

धर्म के नाम पर हो रही हिंसा की निंदा करते हुए अभिनेत्री साई पल्लवी  ने कश्मीरी पंडितों के पलायन की तुलना गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा से की. यूट्यूब चैनल ग्रेट आंध्र को दिए एक इंटरव्यू में साई पल्लवी ने कहा, “कश्मीर फाइल्स में दिखाया गया है कि उस समय कैसे कश्मीरी पंडितों को मार दिया गया था. यदि आप इस मुद्दे को एक धार्मिक संघर्ष के रूप में ले रहे हैं, तो हाल ही में एक घटना हुई जहां एक मुस्लिम ड्राइवर, जो गायों को ले जा रहा था, उसे पीटा गया और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया. तो, इन दो घटनाओं के बीच अंतर कहां है.”

अपने राजनीतिक झुकाव के बारे में पूछे जाने पर, अभिनेत्री ने कहा कि वह एक तटस्थ परिवार में पली-बढ़ीं और उन्हें एक अच्छा इंसान बनना सिखाया गया.उन्होंने कहा कि “मुझे सिखाया गया था कि मुझे उन लोगों की रक्षा करनी चाहिए जो संकट में हैं. उत्पीड़ितों की रक्षा की जानी चाहिए.”

साई पल्लवी इन दिनों अपनी अपकमिंग तेलुगू फिल्म ‘विरता पर्वम’ का प्रमोशन कर रही हैं. फिल्म, जिसमें राणा दग्गुबाती भी हैं, 1990 के दशक की सच्ची घटनाओं से प्रेरित है. यह तेलंगाना क्षेत्र में नक्सली आंदोलन की पृष्ठभूमि के खिलाफ एक प्रेम कहानी का वर्णन करता है.

साई पल्लवी के बयान पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं हैं. जहां कुछ ट्विटर यूजर्स ने उनके साहस की सराहना की, वहीं कुछ ने उन्हें ट्रोल किया.

छत्रपति शिवाजी की शासन व्यवस्था

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शिवाजी का नाम आते ही शौर्य और साहस की प्रतिमूर्ति का एहसास होता है। अपने सपनों को सच करके उन्होंने खुद को न्यायपूर्ण प्रशासक रूप में स्थापित किया। इतिहासकार भी मानते हैं कि उनकी राज करने की शैली परंपरागत राजाओं और मुगल शासकों से अलग थी। वे सुशासन, समरसता और न्याय को अपने शासन का मुख्य विषय बनाने में सफल रहे। बिखरे हुए मराठों को एक सूत्र में पिरोकर उन्होंने जिस तरह अपने सपनों को साकार किया वह प्रेरित करने वाली कथा है। एक अप्रतिम सैनिक, कूटनीतिज्ञ, योद्धा के साथ ही वे कुशल रणनीतिकार के रूप में भी सामने आते हैं। वे अपनी मां जीजाबाई और गुरु के प्रति बहुत श्रद्धाभाव रखते थे। शायद इन्हीं समन्वित मानवीय गुणों से वे ऐसे शासक बने जिनका कोई पर्याय नहीं है।

‘लोकमंगल’ रहा शिवाजी का शासन सूत्र: इतिहासकार ईश्वरी प्रसाद कहते हैं- “प्रशासन की उनकी प्रणाली कई क्षेत्रों में मुगलों से बेहतर थी।” शिवाजी एक ऐसे शासक हैं जिनके प्रति उनकी प्रजा में श्रद्धाभाव साफ दिखता है, क्योंकि लोकमंगल ही उनके शासन का मूलमंत्र था। उनकी राज्य और प्रशासन प्रणाली में आम आदमी के लिए, स्त्रियों के लिए, कमजोर वर्गों के लिए ममता और समरसता का भाव साफ दिखता है। वे न्यायपूर्ण व्यवस्था के हामी हैं। प्रख्यात इतिहासकार डा. आरसी मजूमदार की मानें तो “शिवाजी न केवल एक साहसी सैनिक और सफल सैन्य विजेता थे, बल्कि अपने लोगों के प्रबुद्ध शासक भी थे।” बाद के इतिहासकारों ने तमाम अन्य भारतीय नायकों की तरह शिवाजी के प्रशासक स्वरूप की बहुत चर्चा नहीं की है।

आज भारतीय पुर्नजागरण का समय है और हमें अपने ऐसे नायकों की तलाश है, जो हमारे आत्मविश्वास को बढ़ा सकें। ऐसे समय में शिवाजी की शासन प्रणाली में वे सूत्र खोजे जा सकते हैं, जिससे देश में एकता और समरसता की धारा को मजबूत करते हुए समाज को न्याय भी दिलाया जा सकता है। शिवाजी अपने समय के बहुत लोकप्रिय शासक थे। उन पर जनता की अगाध आस्था दिखती थी। साथ ही उनके राजतंत्र में बहुत गहरी लोकतांत्रिकता भी दिखती है। वे अपने विचारों को थोपने के बजाए या ‘राजा की बात भगवान की बात है’ ऐसी सोच के बजाए अपने मंत्रियों से सलाहें लेते रहते थे। विचार-विमर्श उनके शासन का गुण हैं। जिससे वे शासन की लोकतांत्रिक चेतना को सम्यक भाव से रख पाते हैं।

सत्ता का विकेंद्रीकरण और सामाजिक संतुलन: शिवाजी ऐसे शासक हैं जो सत्ता के विकेंद्रीकरण की वैज्ञानिक विधि पर काम करते हुए दिखते हैं। समाज के सभी वर्गों,जातियों, सामाजिक समूहों की अपनी सत्ता में वे भागीदारी सुनिश्चित करते हैं, जिनमें मुसलमान भी शामिल हैं। उन्होंने मंत्रियों को अलग-अलग काम सौंपे और उनकी जिम्मेदारियां तय कीं, ताकि अनूकूल परिणाम पाए जा सकें। वे परंपरा से अलग हैं इसलिए वे अपने नागरिकों या सैन्य अधिकारियों को कोई जागीर नहीं सौंपते। किलों (दुर्ग) की रक्षा के लिए उन्होंने व्यवस्थित संरचनाएं खड़ी की ताकि संकट से जूझने में सफल हों। रक्षा और प्रशासन के मामलों को उन्होंने सजगता से अलग-अलग रखा और सैन्य अधिकारियों के बजाए प्रशासनिक अधिकारियों को ज्यादा अधिकार दिए। उनकी यह सोच बताती है नागरिक प्रशासन उनकी चिंता के केंद्र में था।

समग्रता में शिवाजी ऐसे भारतीय शासक के रूप में सामने आते हैं, जिसने अपनी बाल्यावस्था में जो सपना देखा, उसे पूरा किया। भारतीय समाज में आत्मविश्वास का मंत्र फूंका और भारतीय लोकचेतना के मानकों के आधार पर राज्य संचालन किया। मूल्यों और अपने धर्म पर आस्था रखते हुए उन्होंने जो मानक बनाए वे आज भी प्रेरित करते हैं। ऐसे महापुरुष सदियों में आते हैं,जिनका व्यक्तित्व और कृतित्व लंबे समय तक लोगों के लिए आदर्श बन जाता है।

राजधानी एक्‍सप्रेस से कई गुना बेहतर होगी वंदे भारत ट्रेन,

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भारतीय रेलवे यात्रा बेहतर ओर यात्रियों के लिए सुपीरियर बनाने के लिए वंदे भारत ट्रेन (Vande Bharat Express Trains) की शुरूआत कर दी है। यह राजधानी और शताब्‍दी ट्रेनों (Rajdhani Express and Shatabdi Express Trains) से कई ज्‍यादा बेहतर होगी, जो यात्रियों कम समय में ज्‍यादा दूरी तय कराएगी। साथ ही इस ट्रेन में शताब्‍दी और राजधानी ट्रेनों से कई बेहतर सुविधाएं होंगी।

इस साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) ने कहा था कि 3 सालों में 400 वंदे भारत एक्‍सप्रेस ट्रेन बनाने की योजना है। भारतीय रेलवे ने हाल ही में 200 स्‍लीपर वंदे भारत एक्‍सप्रेस के लिए टेंडर जार‍ी किया है तो वहीं 100 से अधिक चेयर वाले ट्रेन को जारी करने पर काम कर रहा है।

नई वंदे भारत ट्रेनों की सर्विस प्रीमियम राजधानी एक्‍सप्रेस से बड़ा अपग्रेड होने की उम्‍मीद है। भारतीय रेलवे ने कहा है कि नई ट्रेनों में आराम, कार्यक्षमता और लुक के मामले में विश्व स्तर पर “सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास” ट्रेनों की तरह यात्री सुविधाएं होंगी।

इस धातु से बनेंगी ट्रेनें
पूरी तरह से वातानुकूलित ट्रेनों को 35 साल के जीवन के लिए लंबी और मध्यम दूरी की सेवाओं के लिए उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा। दस्तावेजों के अनुसार, स्लीपर ट्रेनें स्टेनलेस स्टील या एल्यूमीनियम से बनी होंगी, बाद वाली रेलवे के लिए पहली ट्रेन होगी। मौजूदा वंदे भारत ट्रेनों की तरह, इनमें दोनों सिरों पर ड्राइविंग कैब होंगी, जिससे वे बिना लोकोमोटिव के किसी भी दिशा में चल सकेंगी।

चेयर यान ट्रेनों में कोच
16 चेयर ट्रेनों में 3 टियर कोच होंगे, 20 चेयर ट्रनों में 15 और 24 में 19 कोच होंगे। सभी में चार, 2-टियर कोच और 1 प्रथम श्रेणी कोच होंगे।

भारतीय रेलवे ने कहा है कि नई वंदे भारत ट्रेनों के ड्राइविंग कैब के अंत में एक मजबूत पशु रक्षक होगा। यह 600 किलोग्राम तक वजन वाले जानवरों के साथ अधिकतम गति से टकराव का सामना करने में मदद करेगा।

नवोदित सिने अभिनेता प्रत्युष मिश्रा को मिला ” यंग अचीवर्स अवार्ड ”

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मुंबई – महानगर मुंबई से संचालित बहुचर्चित प्रकाशन समुह ” गऊ भारत भारती ‘ द्वारा आयोजित यंग एचीवर अवार्डस समारोह का समापन समारोह अँधेरी के रहेजा क्लासिक क्लब में संपन्न हुआ। संजय अमान के आयोजन में आयोजित इस समारोह में बहुत से युवा प्रतिभाओ को यौन अचीवर्स अवार्डस दे कर सम्मानित किया गया , प्रकाशन समूह विभिन्न क्षेत्र में कर कर रही प्रतिभाओ को प्रतिवर्ष यह सम्मान दे कर उन्हें प्रोत्साहित करता है।

इसी क्रम में सिनेमा जगत और संगीत से जुडी प्रतिभा नवोदित सिने अभिनेता प्रत्युष मिश्रा को वर्ष २०२२ का ” गऊ भारत भारती ” यंग एचीवर अवार्डस दे कर सम्मानित किया उन्हें यह सम्मान प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान के कार्यकारी अध्यक्ष रामकुमार पाल के हाथो प्रदान किया गया। इस अवसर पर भाजपा सचिव आर यू सिंह , ज्ञानमूर्ति शर्मा , डॉ खालिद शेख , राजश्री तुडेयेकर , आदि लोग मंच पर मौजूद रहे।

नवोदित सिने अभिनेता प्रत्युष मिश्रा को ” यंग अचीवर्स अवार्ड ” उनकी आने वाली फिल्म ” प्रेम हिंदुस्तानी ” के लिए दिया गया इस फिल्म की निर्मात्री समिता पांडेय उर्फ़ रिशिता है। उनकी दूसरी फिल्म ” भाभी माँ ” है जो अभी से भोजपुरी सिने जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। अन्य फिल्मे ” कृष्णा की मेहँदी ” है। प्रत्युष मिश्रा कुछ फिल्मो में लीड रोल में है तो कुछ में निर्माता के तौर पर भी जुड़े है।

उत्तर प्रदेश की माटी से जुड़े प्रत्युष मिश्रा प्रयागराज के रहने वाले है , मुम्बई नगर की मायानगरी में बहुत ही कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद आज वह किसी परिचय के मोहताज़ नहीं है।

नवोदित सिने अभिनेता प्रत्युष मिश्रा ” यंग अचीवर्स अवार्ड ” मिलने पर कहते है -” यह मेरे माता और पिता का आशीर्वाद है , आज उन्ही की कृपा से हम जो कुछ भी है , है ! , सम्मान मिलने की बड़ी ख़ुशी होती है , सम्मान आप की ज़िम्मेदारियों का एहसास दिलवाता है , कि हमें और कड़ी मेहनत करनी है , मैं प्रत्युष मिश्रा आयोजन समिति का आभारी हूँ जिन्होंने मुझे सम्मान के लायक समझा।

Agneepath Yojana 2022: भारतीय सेना में चार साल के लिए भर्ती होंगे युवा,

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रक्षा मंत्रालय ने सेना भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। सेना भर्ती के लिए सरकार की ओर से ‘अग्निपथ भर्ती योजना’ को लॉन्च किया गया है। इस मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया, इसके तहत सेना में चार साल के लिए अग्निवीरों यानी युवाओं की भर्ती की जाएगी। सरकार की ओर से यह कदम सेना की औसत उम्र कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि इस समय सेना की औसत उम्र 32 साल है, जिसे अगले कुछ सालों में 26 साल करने का प्रयास किया जाएगा। यह योजना रक्षा बलों के खर्च और आयु प्रोफाइल को कम करने की दिशा में सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा मानी जा रही है।

अग्निपथ भर्ती योजना’ के तहत युवा चार साल की अवधि के लिए सेना में शामिल होंगे और देश की सेवा करेंगे।

चार साल के अंत में लगभग 75 फीसदी सैनिकों को ड्यूटी से मुक्त कर दिया जाएगा और उन्हें आगे के रोजगार के अवसरों के लिए सशस्त्र बलों से सहायता मिलेगी।

केवल 25 फीसदी जवानों को चार साल बाद भी मौका मिलेगा। हालांकि यह तभी संभव होगा जब उस समय सेना की भर्तियां निकली हों।

कई निगम ऐसे प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं के लिए नौकरी आरक्षित करने में भी रुचि लेंगे जिन्होंने देश की सेवा की है।

योजना के तहत सशस्त्र बलों का युवा प्रोफाइल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। युवाओं को नई तकनीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा।

चार साल की नौकरी छोड़ने के बाद युवाओं को सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। जो 11.71 लाख रुपए होगा।

योजना के तहत इस साल 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी।

राष्ट्र की सेवा की इस अवधि के दौरान, अग्निवीरों को विभिन्न सैन्य कौशल और अनुभव, अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व गुण, साहस और देशप्रेम की ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी. चार साल के इस कार्यकाल के बाद, अग्निवीरों को नागरिक समाज में शामिल किया जाएगा जहां वे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान दे सकते हैं. प्रत्येक अग्निवीर द्वारा प्राप्त कौशल को उसके यूनीक बायोडाटा का हिस्सा बनने के लिए एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा.

आज महाराष्ट्र दौरे पर PM मोदी: पुणे के देहू में संत तुकाराम शिला मंदिर का करेंगे लोकार्पण,

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मंदिरों का शहर देहू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी के लिए पूरी तरह तैयार है, जो मौजूदा संत तुकाराम महाराज मंदिर में आज एक शिला (चट्टान) मंदिर का उद्घाटन करेंगे. प्रधानमंत्री के आज दोपहर करीब 1 बजे देहू पहुंचने की उम्मीद है. वह मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद वह मुंबई स्थित राजभवन में जल भूषण भवन और क्रांतिकारी गैलरी का उद्घाटन करेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी मौजूद रहेंगे. वह मुंबई समाचार के द्विशताब्दी समारोह में शामिल होंगे.

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी विद्यासागर राव के कार्यकाल में राजभवन में एक भूमिगत तहखाना मिला था. इस तहखाने में क्रांतिकारी गैलरी स्थापित की गई है. इस गैलरी में चापेकर बंधुओं सहित सावरकर के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं. केंद्र और राज्य सरकार में जारी तनाव के बीच लंबे समय बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करेंगे. गत अप्रैल माह में लता मंगेशकर फाउंडेशन के कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई आए थे. उस दौरान कार्यक्रम की आमंत्रण पत्रिका में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नाम नहीं होने की वजह से वह इस कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए थे.

देहू संस्थान प्रशासन को प्रधानमंत्री की यात्रा के प्रोटोकॉल के बारे में पता नहीं था. भाजपा नेता महेश लांडगे ने कहा कि मंदिर का उद्घाटन करने के बाद, प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित करेंगे. लांडगे ने कहा, ‘यह राजनीतिक संबोधन नहीं होगा. यह वारकरियों के बारे में अधिक होगा, क्योंकि ‘वारी’ 20 जून को देहू से शुरू होने वाली है. प्रधानमंत्री कार्यक्रम में, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस के साथ मंच साझा करेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी शामिल नहीं होंगे’

श्री संत तुकाराम महाराज संस्थान, देहु के प्रमुख नितिन मोरे ने कहा कि 1 करोड़ रुपये की लागत से ‘शिला’ मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसे भक्तों ने दान किया था. उन्होंने कहा, ‘हमने राज्य सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं ली है. मंदिर को बनने में छह साल लगे.’ नितिन मोरे ने बताया कि मंदिर में एक शिला या चट्टान होगी जिसे वारकरी संप्रदाय द्वारा वार्षिक तीर्थयात्रा के शुरुआती बिंदु के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिसे वारी के नाम से जाना जाता है. वारी पंढरपुर में समाप्त होती है.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री को एक विशेष टोपी भी भेंट की जाएगी. मोरे ने कहा, ‘यह एक डिजाइनर तुकाराम पगड़ी होगी, जिसे पहनाकर पीएम को सम्मानित करेंगे.’पीएम की यात्रा के दौरान मंदिर भक्तों के लिए बंद रहेगा. इस बीच, पुलिस ने प्रधानमंत्री के देहू दौरे के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. तैयारियों के तहत, महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को मंदिर का दौरा किया. अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के परामर्श से एक बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली स्थापित की गई है.

 

दूध देना बंद करने पर गायों को छोड़ देते हैं बेसहारा, ऐसे लोगों पर यूपी में दर्ज होगी FIR:

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Adityanath) ने बेघर पशुओं को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत योगी सरकार ने उन किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, जो दूध देना बंद करने पर गायों को बेसहारा छोड़ देते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने सोमवार (30 मई 2022) को कहा कि ऐसे किसानों के खिलाफ पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के विधायक अवधेश प्रसाद की ओर से विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “कसाई और किसान में अंतर है। हम किसानों का ध्यान रखेंगे, कसाइयों का नहीं। अपने पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाएगा।”

प्रसाद ने सरकार से आवारा पशुओं की समस्या को लेकर उनकी क्या योजना है और इनकी वजह से मारे गए लोगों को मुआवजे से संबंधित सवाल पूछा था। इसके जवाब में मंत्री ने कहा, “ये आवारा मवेशी नहीं हैं, बल्कि उन्हें छोड़ा गया है। हर कोई जानता है कि उन्हें किसने छोड़ा है। जब एक गाय दूध देती है तो उसे रखा जाता है और जब दूध देना बंद करती है तो छोड़ दिया जाता है।”

अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के एक महीने बाद ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बेघर पशुओं के आश्रय की दिशा में काम शुरू कर दिया है। बेघर पशुओं की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार एक योजना लाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सरकार बनने पर इस समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया था।

बता दें कि यूपी सरकार अगले 6 महीने के अंदर बेघर पशुओं के लिए बने शेल्टर होम्स की संख्या एक लाख तक पहुँचाने की योजना पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना में 50000 बेघर पशुओं के लिए 100 दिनों के भीतर शेल्‍टर की व्यवस्था कारण शामिल है। आने छह महीने में इसे 1 लाख तक बढ़ाया जाएगा।

सरकार के एजेंडे में अगला कदम बायोगैस संयंत्र स्थापित करना है। गाय के गोबर का इस्तेमाल करके सीएनजी बनाना, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की दिशा में काम करना होगा। इसके लिए किसानों से गाय का गोबर खरीदा जाएगा। पीएम मोदी ने किसानों से यह भी वादा किया था, जब उनकी गायें दूध देना बंद कर देंगी तो किसान उनके गोबर से भी आय अर्जित कर सकेंगे।