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मां शैलपुत्री व्रत में लगाएं गाय के घी का भोग

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मां शैलपुत्री व्रत से नवरात्रि शुरू, लगाएं गाय के घी का भोग

मुंबई। मां शैलपुत्री के व्रत से नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। मां शैलपुत्री को सफेद रंग का पुष्प, श्वेत वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद गाय के घी से मां को भोग लगाएं। भोग लगाने से मां की भक्तों पर विशेष कृपा बरसेगी। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर कलश स्थापना करें। इसके बाद मां दुर्गा की स्वरूप मां शैलपुत्री का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
पंडित विजय भारद्वाज ने बताया कि मां दुर्गा के नौ रूपों का नौ दिन विशेष महत्व है। पहले व्रत के दिन ही कलश स्थापना की जाती है। स्नान करने के बाद कलश में कलावा बांधकर कलश में सुपारी, फूल, अक्षत, सिक्का डालकर जल से भरें। इसके बाद स्वास्तिक बनाकर, आम की डाली, नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर चावल का अष्टदल बनाकर उस पर कलश स्थापना करें। लाल रंग के आसन पर माता की प्रतिमा को विराजमान कर देसी घी का दीपक जलाएं। इसके बाद मां की कथा और मंत्रों के साथ पूजा शुरू करें। प्रथम दिवस में मां शैलपुत्री को सफेद रंग का पुष्प व श्वेत वस्त्र अर्पित कर गाय के घी का भोग लगाएं। द्वितीय दिवस में मां ब्रह्मचारिणी को पीले रंग का वस्त्र, गुड़हल का पुष्प व पंचामृत का भोग लगाएं। तृतीय दिवस में मां चंद्रघंटा को सुनहरे या पीले वस्त्र, सफेद कमल का पुष्प व दूध या खीर का भोग लगाएं। चतुर्थ दिवस में मां कुष्मांडा को नीले रंग के वस्त्र, पीले रंग का कमल का पुष्प व दही का भोग लगाएं। पंचम दिवस में मां स्कंदमाता को हरे रंग का वस्त्र, लाल गुलाब का पुष्प व केले के फल का भोग लगाएं। षष्टम दिवस में मां कात्यायनी को पीले वस्त्र, लाल गुलाब का पुष्प व शहद का भोग लगाएं। सप्तम दिवस में मां कालरात्रि को लाल वस्त्र, सोलह सिंगार, गुड़हल का पुष्प, गुड़ से बने नैवेद्य का भोग लगाएं। अष्टम दिवस में मां महागौरी को सफेद वस्त्र, मोगरा का पुष्प व नारियल का भोग लगाएं। नवम दिवस में मां सिद्धिदात्री को लाल वस्त्र, चंपा का पुष्प, अनार और तिल का भोग लगाएं।

दिल्ली, उत्तर भारत में फिर से भूकंप के झटके

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दिल्ली में एक बार फिर महसूस किए गए भूकंप के झटके

रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 2.7 मापी गई। इसका केंद्र नई दिल्ली में जमीन से पांच किलोमीटर गहराई में था। आसपास के कुछ इलाकों में भी झटके महसूस किए गए।

दिल्ली में बुधवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 2.7 मापी गई। इसका केंद्र नई दिल्ली में जमीन से पांच किलोमीटर गहराई में था। आसपास के कुछ इलाकों में भी झटके महसूस किए गए।इससे पहले कल यानी मंगलवार रात रात 10 बजकर 19 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से 156 किलोमीटर गहराई में अफगानिस्तान का फायजाबाद था। मंगलवार को आए भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग घबराकर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप के झटके दिल्ली के अलावा उत्तराखंड, पंजाब में भी महसूस किए गए थे। हर जगह अफरा-तफरी का माहौल रहा था। लोगों ने दो से तीन बार झटके महसूस हुए थे।

कैसे आता है भूकंप?

भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकरना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है और सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं।

भूकंप की तीव्रता 

रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं। इसी तरह 2.0 से 2.9 तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं इसे भी सामान्य तौर पर हम महसूस नहीं करते। वेरी लाइट कैटेगरी के भूकंप 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इन्हें महसूस तो किया जाता है लेकिन शायद ही इनसे कोई नुकसान पहुंचता है। लाइट कैटेगरी के भूकंप 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। हालांकि इनसे न के बराबर ही नुकसान होता है।

24 मार्च को मास्क ओटीटी पर रिलीज होगी फिल्म ‘लीच’

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ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपने रोमांचक और मनोरंजक कंटेंट को लेकर फेमस मास्क ओटीटी पर बहुचर्चित फिल्म रिलीज को तैयार है। यह फिल्म 24 मार्च को रिलीज होगी जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। लीच एक बेहद अलहदा कहानी वाली फिल्म है।

आपको बता दें कि फिल्म ‘लीच’ एक ऐसे लेखक की कहानी है, जो अपने और दूसरों के व्यवहार और प्रतिक्रियाओं को देखकर अपनी कहानियों के लिए प्रेरणा देता है। काफी समय तक इस आदत का पालन करने से यह धीरे-धीरे उसे सिजोफ्रेनिया की ओर ले जाता है। साइकेडेलिक नशीली दवाओं के दुरुपयोग का उनका इतिहास उनके स्किज़ोफ्रेनिक के साथ है। व्यवहार आगे चलकर उसे एलिक्सथेमिया (भावना खोने का डर) की ओर ले जाता है। अपने जीवन में भावनाओं को वापस महसूस करना शुरू करने के प्रयास में वह अपने आसपास के लोगों के साथ सृजन के प्रयोग के रूप में हर तरह की बेतुकी चीजों में लिप्त हो जाता है लेकिन वह भी उसे ठीक होने में मदद नहीं करता है। इस अराजकता के बीच कुछ घटनाएँ घटती हैं: उसकी नौकरानी की मृत्यु और उसके बेटे की हानि जो उसे परेशान करती है जिससे उसकी पत्नी सादिया पर सारा दोष आ जाता है।
वहां वह अपनी मनोचिकित्सक डॉ. अमिता से मिलती है जो एक निजी जासूस वेलिंगटन से जुड़ती है और घटनाओं से सुराग खोजने में उसकी मदद करती है। वेलिंगटन, एक निजी जासूस इस मामले को पकड़ लेता है और इसे बड़े प्रयासों से हल करने की कोशिश करता है लेकिन सफलता के करीब नहीं पहुंच पाता। फिल्म में मानव मनोविज्ञान के एक मार्ग को दर्शाया गया है और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज किए जाने के कारण इससे कैसे निपटा जाना चाहिए, जिसे पहली बार में ही नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह उसी तरह है जैसे हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हैं, हमें अपनी मानसिक समस्याओं से निपटने की आवश्यकता है, अन्यथा यह आपदा में बदल सकती है।

टैग प्रोडक्शंस द्वारा प्रस्तुत Collosal Films और Benazir Productions के सहयोग से बनी फिल्म ‘लीच’ के निर्माता अंजू भट्ट और चिरंजीवी भट्ट, सह निर्मित – योगी आर्यन और रूबी रानी और निर्देशक अनिल रामचंद्र शर्मा और पबित्रा दास हैं। यूनिट निर्देशक विनीत मिश्रा, लेखक अभीक बेनज़ीर, पटकथा और संवाद अभीक बेनज़ीर, विशाल सिंह और अनिल रामचंद्र शर्मा हैं। फिल्म के क्रिएटिव डायरेक्टर – स्प्रीहा सिंह, कार्यकारी निर्माता – विनीत मिश्रा, प्रोडक्शन मैनेजर – प्रवीण शर्मा, क्रिएटिव प्रोड्यूसर – गौतम पासवान छायाकार – अशोक पांडा हैं। फिल्म में सनम जीया, अभीक बेनज़ीर, विशाल सिंह, वेद प्रकाश, संजू धीरहे, ऋतिक लांबा, अलका अमीन, अतुल श्रीवास्तव, मीर सरवर, कुलजीत चावला, श्रृष्टि गौतम, मुकुल मिश्रा, पुष्पराज, कृशा सिंह, अमित श्रीवास्तव, राधिका, सुनिधि, नंदिनी आदि प्रमुख भूमिका में हैं। फिल्म के पीआरओ संजय भूषण पटियाला हैं।

सनातन धर्म और संस्कृति को जन जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है एस के तिवारी का चैनल भार्गव भक्ति

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एस के तिवारी द्वारा संचालित यूट्यूब चैनल भार्गव भक्ति सनातन धर्म और संस्कृति को सरल माध्यम में जन जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। चैनल में वीडियो, गीत, संगीत, भजन और मंत्र उच्चरण के माध्यम से सनातन धर्म से जुड़ी बातों को दिखाया जाएगा। एस के तिवारी ने इससे संबंधित शिक्षा और पारंपरिक ज्ञान प्राप्त किया है। एस के तिवारी का कहना है कि सनातन धर्म अत्यंत प्राचीन और विस्तृत है। एक ही जीवन में इसका सम्पूर्ण अध्ययन या ज्ञान पाना कठिन है। इनका मूल उद्देश्य सनातन धर्म में चार वेद, अट्ठारह पुराण, छह शास्त्र, उप शास्त्र, रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवत गीता, षद्दर्शन तुलसीदास रचित रामचरित मानस, अरण्यक, उपनिषद, वेदांग, श्रीमद्‌भागवत आदि धार्मिक ग्रन्थो को सरल भाषा में ऑडियो और वीडियो के माध्यम से धरती के समस्त हिन्दू जनमानस तक पहुँचाना है।
भार्गव भक्ति चैनल नवरात्र में माताओं के नव रूपों का विस्तृत वर्णन, नव भजन और आराधना, गणपति के इक्कीस दिनों में भगवान गणेश को समर्पित इक्कीस गीत, श्रवण मास के तीस दिनों तक भगवान शंकर के भजन, महिमा मंडन और आरती, इसीप्रकार प्रत्येक हिन्दू पर्व और उत्सवों के साथ साथ में उनसे संबंधित गीतों को आडियो और वीडियो के माध्यम से जनता तक पहुंचने का कार्य कर रहा है।
बाईस वर्षों से अधिक समय हो चुका है और आज तक और आगे भी एस के तिवारी निःस्वार्थ भाव से सनातन धर्म के प्रचार प्रसार और उसे सम्पूर्ण विश्व की जनता तक पहुंचाने के कार्य में अपना जीवन समर्पित कर चुके हैं।

उनका कहना है कि सनातन धर्मग्रन्थ में लिखित बातों को किसी सत्यता या प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। जिसे लोगों ने अनदेखा कर दिया उस सनातन धर्म की बातों को आज विज्ञान स्वयं खोज कर उसे प्रमाणित कर रहा है। नासा आज भी इन धार्मिक ग्रन्थों का शोध कर नवीन जानकारियां हासिल कर रहा है। समस्त सनातन धर्मियों के लिए ये सभी पुस्तकें उनके पूर्वजों की सौगात है जिनका अनुसरण कर वे अपना दैहिक, दैविक, भौतिक, आर्थिक जीवन सरलता से सफल बना सकते हैं।
सनातन धर्म की सत्यता के लिए विज्ञान के द्वारा प्रमाणिकता या सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है।
सनातन ही धर्म है सनातन ही शाश्वत है,बाकी सम्प्रदाय और पंथ है। श्रीमद्भागवत, वेद और पुराण सबसे ऊपर है और परम सत्य है।
एस के तिवारी अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन धर्म और संस्कृति को समर्पित करते हैं। वे अपने यूट्यूब के माध्यम से जनता तक सरल माध्यम से सनातन से जुड़ी जानकारियां, गीत और भजन, ऋचा, मंत्र, तैतीस कोटि देवी देवताओं की पूजा विधि का ऑडियो विडिओ पहुंचाएंगे। इसमें किसी प्रकार का आधुनिकरण, व्यवसायीकरण या ग्लैमर नहीं होगा। एस के तिवारी कहते हैं कि आज भी लोग सनातन धर्म से अनजान हैं या फिर उन तक जानकारी नहीं पहुंच पाती या सारे ग्रंथों को पढ़ कर उनका भावार्थ ज्ञात कर पाना या फिर सारे ग्रन्थों का संग्रह कर पाना सभी के लिए संभव नहीं। कुछ अज्ञानता वश रूचि नहीं रखते या अत्यधिक व्यस्तता या बच्चों तक उनके परिवार द्वारा सनातन धर्म से जुड़ी जानकारी नहीं दे पाते।
भार्गव भक्ति सभी तक भावार्थ सहित कर्णप्रिय संगीत के माध्यम से सनातन धर्म से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी सरलतापूर्वक पहुंचाने का काम कर रही है।
भार्गव का अर्थ भृगु वंसज और भगवान परशुराम को भार्गव परशुराम कहा जाता है। भार्गव भक्ति चैनल भगवान परशुराम जी को ही समर्पित है। भार्गव परशुराम अमर हैं, आज भी जीवित हैं और धरती में पहाड़ पर विचरते हैं। सतयुग त्रेतायुग के जैसा अभी भी उनकी पूजा पाठ की जाती है।
एस के तिवारी इस नवरात्रि में नौ माताओं के नौ भजन को नौ दिन तक रिलीज करेंगे। इसी प्रकार गणपति उत्सव में भी 21 गणेश जी के गीत रिलीज करेंगे। उसके बाद सावन महीने में एक महीने प्रतिदिन महादेव के गीत भी रिलीज करेंगे।

आरआरएस मिटा रहा है दलितों के साथ हाेने वाले भेदभाव को

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दलित दूसरों की तरह चढ़ें घोड़ी, शिव मंदिरों में करें जलाभिषेक, उनके साथ चाय पीएं – मोहन भागवत

लखनऊ। आरएसएस सामाजिक समरसता के जरिये दलित और मलिन बस्तियों में पैठ बढ़ाने में जुटा है। संघ ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे गांव में किसी भी दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने से न रोका जाए। उसकी बरात सामान्य वर्ग के परिवार के दूल्हे की तरह ही धूमधाम से निकले।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) सामाजिक समरसता कार्यक्रमों के जरिए दलित और मलिन बस्तियों में अपनी पैठ बढ़ा रहा है। इसी क्रम में संघ गांवों और शहरों में सामूहिक पूजन व शिव मंदिरों में जलाभिषेक, सफाईकर्मियों का सम्मान और उनके बीच जलपान जैसे आयोजन करने जा रहा है।

इससे दलित समाज में संघ के प्रति विश्वास बढ़ेगा तो इनके बीच संघ भी अपना दायरा बढ़ाएगा। संघ ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे गांव में किसी भी दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने से न रोका जाए। उसकी बरात सामान्य वर्ग के परिवार के दूल्हे की तरह ही धूमधाम से निकले।

दलित वर्ग को सार्वजनिक कुएं से पानी भरने से रोकने की कुरीति भी खत्म की जाए। इसके लिए संघ के स्वयंसेवक लोगों को जागरूक करेंगे। जहां भी दिक्कत होगी, वहां समस्या का समाधान किया जाएगा।
संघ वाल्मीकि, डॉ. भीमराव आंबेडकर और संत रविदास जयंती पर गांवों में कार्यक्रम कर समाज को जोड़ने का काम करेगा। आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मिले एजेंडे के तहत संघ अब पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र के सभी प्रांतों में इसे धरातल पर उतारने में जुट गया है।

…ताकि हिन्दुओं की सभी जातियां एकजुट रहे

संघ के समरसता कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि सामाजिक समरसता का मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं की सभी जातियों को जोड़ना है। यदि हिन्दू धर्म की जातियां आपस में लड़ती रहेंगी, तो हिन्दू धर्म कमजोर होगा।

….तो चाय क्यों नहीं पी सकते

संघ का मानना है कि जब घर में काम करने आने वाली महिला से चाय बनवा सकते हैं, तो उसके साथ बैठकर चाय क्यों नहीं पी सकते हैं। इस विचार को लेकर संघ लोगों के बीच जाएगा। लोगों से आग्रह करेगा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन घर में काम करने वाले नौकर, नौकरानी के साथ बैठकर चाय-जलपान करें। उनके दुख तकलीफ की बात सुनें और उनका यथासंभव समाधान का प्रयास करें।

सावन में होंगे जलाभिषेक कार्यक्रम

संघ आगामी सावन महीने में गांवों और शहरों के शिव मंदिरों में दलितों के साथ जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन करेगा। गांव में अगड़े, पिछड़े और दलित वर्ग के लोग एक साथ मिलकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करेंगे। हालांकि अभी मंदिरों में दलितों के साथ हवन पूजन का आयोजन किया जाता रहा है। बहराइच में बीते वर्ष दलित बस्तियों में लोगों ने एक समुदाय विशेष के प्रभाव में आने के बाद घर में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखना बंद कर दिया था। इसकी सूचना पर संघ ने वहां दलितों के बीच जाकर अभियान चलाया, जिससे वह फिर से पूजा पाठ करने लगे।

पर्यावरण और पक्षियों भी पर भी काम

संघ के स्वयंसेवक अपने घरों या घर के आसपास पेड़ लगाकर उसका संरक्षण करने के साथ लोगों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे। पक्षी संरक्षण के लिए लोगों को घर के बाहर चिड़िया, कबूतर व अन्य पक्षियों के लिए दाना-पानी का प्रबंध करने के लिए जागरूक करेंगे।

इनका कहना है

संघ का प्रयास है कि सामाजिक सौहार्द बना रहे। जब तक लोगों के स्वभाव में यह नहीं आएगा तब तक समरसता संभव नहीं है। इसके लिए संघ सामूहिक हवन और पूजन जैसे कार्यक्रमों के जरिये लोगों के स्वभाव में लाने का प्रयास कर रहा है। -डॉ. अशोक दुबे, अवध प्रांत प्रचार प्रमुख, आरएसएस

तेंदुआ के गाय पर हमले के बाद गांव में दहशत

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तेंदुआ का जोड़ा देख सहमे ग्रामीण, गाय पर हमले के बाद गांव में दहशत

बुलंदशहर। गांव पिलखनी में गाय पर हमला करने के बाद ग्रामीणों ने तेंदुआ का एक जोड़ा देखने का दावा किया है। वहीं, जगह-जगह बने पंजों के निशान देखकर ग्रामीण सहमे हुए हैं।

रविवार की शाम क्षेत्र के गांव गजरौला में ग्रामीणों ने तेंदुआ देखने का दावा किया था। इसके बाद जंगली जानवर ने गांव पिलखनी में घेर में बंध रही गाय पर हमला कर दिया था। इससे पहले गांव अहार में बकरे और गांव ताहरपुर में वृद्ध किसान पर भी जंगली जानवर हमला कर जान ले चुका है।

वहीं, दूसरी ओर वन विभाग की टीम लगातार जंगली जानवर की तलाश में जुटी है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है। वन विभाग के अधिकारी अभी भी क्षेत्र में तेंदुआ न होने की बात कर रहे हैं।

70 फीसदी शादीशुदा कपल्स पार्टनर के खर्राटों से परेशान: सर्वे

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32% ने पार्टनर के खर्राटों की आवाज की तुलना चलती हुई मोटरसाइकिल की आवाज से की

मुंबई। देश के 70 फीसदी कपल्स अपने पार्टनर के खर्राटों से परेशान है और वह अपने पार्टनर के खर्राटों की आवाज से नींद में एक बार जरूर जागते हैं। जबकि 32% कपल को यह महसूस होता है कि उनके पार्टनर के खर्राटों की आवाज चलती हुई मोटरसाइकिल के जैसी ही है। इस बात का खुलासा भारत में मैट्रेसेस (गद्दों) के प्रमुख ब्रैंड सेंचुरी मैट्रेसेस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में हुआ है। वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर भारतीय अपनी नींद की गुणवत्ता को कितना महत्व देते हैं यह पता लगाने के उद्देश्य से यह सर्वेक्षण किया गया।
सर्वे से यह प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया कि 67% लोगों ने महसूस किया कि खर्राटों का संबंध दिन भर की थकान से जोड़ा जा सकता है। इसका सेहत और नींद की गुणवत्ता से काफी कम संबंध है। इसके अलावा करीब 45% लोग खर्राटों का संबंध मोटापे से जोड़ते हैं। कई अन्य कारक भी है। जैसे अधिकांश लोगों (करीब 55%) लोगों का यह विश्वास है कि खर्राटों को साधारण उपाय से काबू में किया जा सकता है। इसके लिए आसपास का माहौल बदलने की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, कई कारकों से यह पता लगा कि किस तरह भारतीय अब अपनी गहरी नींद को अहमियत देने लगे है। वह अपनी लाइफस्टाइल और सोने की आदतें बदलने के लिए आपस में बातचीत भी करते हैं। उदाहरण के लिए 36% लोगों ने यह मानी है कि गहरी नींद में सोने के लिए सही गद्दा और तकिया बहुत जरूरी है। 71% लोग अपने खर्राटों के मुद्दे पर अपने पार्टनर से बातचीत करने के लिए तैयार हुए।
सेंचुरी मैट्रेसेस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर उत्तम मालानी ने कहा, “सर्वे के नतीजे नींद के मुद्दे पर लोगों से जागरूक होने का आह्वान करते है। अगर कोई पार्टनर काफी तेज खर्राटे लेता हो तो इससे उसकी सेहत पर असर पड़ सकता है और आपसी संबंध भी खराब हो सकते हैं। गहरी नींद न आने और उसके सेहत और आपसी संबंध पर प्रभाव को नजरअंदाज करने के नतीजों का लंबे समय में काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। वर्ल्ड स्लीप डे पर किए गए इस सर्वे के साथ हमारा लक्ष्य उन मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना है, जिससे लोगों की नींद खराब होती है। हम लोगों को बेहतर नींद लेने में मदद करने के लिए अपना योगदान कर रहे हैं और उन्हें एंटीमाइक्रोबियल ट्रीटेड मैट्रेस एवं पिलोज़ के साथ अच्छी नींद देने वाले प्रोडक्ट्स मुहैया करा रहे हैं ताकि उन्हें अच्छे से नींद आ सके।
डॉ जगदीश चतुर्वेदी, नोज़ एवं साइनस सर्जन, बेंगलुरू ने कहा कि “सर्वे के नतीजों से साफ पता चलता है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी नींद से जुड़े मुद्दों, जैसे खर्राटों की समस्या के प्रति जागरूक होने लगे हैं और इसे स्वीकार भी कर रहे हैं। अब लोगों ने तरह-तरह के उपायों से इस समस्या के निपटारे की कोशिश करनी शुरू कर दी है। वे इसके लिए डॉक्टरों की सलाह ले रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से खर्राटों की समस्या है और वह अपनी इस परेशानी के लिए डॉक्टरों की सलाह नहीं लेता तो उसकी सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं।

पानी पीने से आठ मवेशियों की मौत

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पानी पीने से आठ मवेशियों की मौत, जांच को लखनऊ भेजे गए छह मवेशियों के शवों का सैंपल

कुरारा हमीरपुर। थाना क्षेत्र के पतारा गांव में शनिवार शाम पानी पीने के बाद हुई आठ मवेशियों की मौत हो गई। इसी मामले में रविवार को छह मवेशियों के शवों का सैंपल जांच को लखनऊ भेजा गया है। पशु पालक ने थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कार्रवाई की मांग की है। पोस्टमार्टम में मवेशियों के मरने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।

पतारा गांव निवासी रज्जू प्रजापति ने थाने में दी तहरीर में बताया कि शुक्रवार को गांव के शीतल की भैंस ने गांव के बाहर स्थित राम महेश यादव के ट्यूबवेल के पास पानी पी लिया। वह घर पहुंचकर मर गई। पशुपालक ने समझा कि किसी जहरीले कीड़े के काटने से ऐसा हुआ और किसी को सूचना नहीं दी। वही शनिवार को गांव निवासी कुंवर बहादुर सिंह की एक दुधारू गाय, उसकी दो गाय, शिव नरेश की एक दुधारू गाय, संजय की दो गाय, स्वामीदीन की एक गाय व एक सांड़ मर गया है। जबकि रमेश प्रजापति की एक गाय बीमार है। शाम छह बजे के बाद मवेशियों के मरने का क्रम शुरू हुआ। पीड़ित ने उनका पोस्टमार्टम करा कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मवेशियों को जहर देकर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।

पशु चिकित्सा अधिकारी रावेंद्र सिंह ने बताया कि मृत गोवंश का पोस्टमार्टम कर लिए गए सैंपल लखनऊ भेजे गए है। जांच रिपोर्ट आने पर सही तथ्यों का पता चल सकेगा। वहीं बीमार गोवंश का उपचार किया जा रहा है। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है।

वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने किया मुफ्त नेत्र जांच शिविर का आयोजन

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फिल्म उद्योग से जुड़े फिल्मकारों, कलाकारों व कामगारों  के लिए वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन एवं लायंस क्लब ऑफ मिलेनियम के संयुक्त तत्वाधान में अंधेरी (वेस्ट), मुम्बई स्थित माहेश्वरी भवन में मुफ्त नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। अभिनेता मुकेश ऋषि, राकेश बेदी, लायन विनोद अग्रवाल, लायन आनंद अग्रवाल, लायन विनोद गर्ग, लायन पवन खेतान,
वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संग्राम शिर्के, सेक्रेटरी दिलीप दलवी, कार्यक्रम संयोजक धर्मेंद्र मेहरा, कार्यकारिणी सदस्य महावीर जैन, अंजना शर्मा, सुभाष दुर्गकर, रवि सिन्हा, दिनेश अशिवल, राजेश मित्तल, रविन्द्र अरोरा, चांदनी गुप्ता, अनुराधा मेहता, हीराचंद दंड, रामा मेहरा, राहुल सुगंध, अक्षय सिंह, अनिता नायक, प्रिया राठौड़ अमित चंद्रा और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी
की उपस्थिति में मुम्बई के मशहूर नेत्र शल्य चिकित्सक डॉ प्रेम अग्रवाल, डॉ प्रतीक अग्रवाल, डॉ पूजा अग्रवाल व उनके टीम द्वारा संचालित इस 9वें ‘मुफ्त नेत्र जांच चिकित्सा शिविर’ में कुल 600 लाभार्थियों को जांच के पश्चात चश्मा व दवाइयां भी दी गई। 22 मार्च 1960 को स्थापित वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोडयूसर्स एसोसिएशन फिल्म निर्माताओं को सरंक्षण देने में अग्रणी रही है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

विकलांग व्यक्तियों के लिए गरिमापूर्ण जीवन के हो प्रयास

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डॉ सत्यवान सौरभ

 विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, “विकलांग व्यक्ति” का अर्थ दीर्घकालिक शारीरिकमानसिकबौद्धिक या संवेदी हानि वाला व्यक्ति हैजो बाधाओं के साथ बातचीत मेंदूसरों के साथ समान रूप से समाज में उनकी पूर्ण और प्रभावी भागीदारी में बाधा डालता है। आज भारत में करोड़ों लोग विकलांग हैं। 2011 की जनगणना हमें 268 मिलियन आंकती हैजो भारत की कुल जनसंख्या का 221 प्रतिशत हैलेकिन कार्यकर्ताओंशिक्षाविदों और विश्व निकायों जैसे डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि यह 40 से 80 मिलियन के बीच होगा। राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों  के अनुच्छेद 41 में कहा गया है कि राज्य अपनी आर्थिक सीमा के भीतर कामशिक्षा और बेरोजगारीवृद्धावस्थाबीमारी और विकलांगता के मामलों में सार्वजनिक सहायता के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए प्रभावी प्रावधान करेगा। संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में विकलांगों और बेरोजगारों को राहत‘ का विषय निर्दिष्ट है।

 इस मामले को उठाना केंद्रराज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कर्तव्य बनता है। यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि सभी सरकारी बसें सुसंगत दिशानिर्देशों के अनुसार विकलांगों के अनुकूल हों। विकलांगता को एक विकसित और गतिशील अवधारणा के आधार पर परिभाषित किया गया है। विकलांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। अधिनियम में मानसिक बीमारीआत्मकेंद्रितस्पेक्ट्रम विकारसेरेब्रल पाल्सीमस्कुलर डिस्ट्रॉफीक्रोनिक न्यूरोलॉजिकल स्थितियांभाषण और भाषा विकलांगताथैलेसीमियाहीमोफिलियासिकल सेल रोगबधिर सहित कई विकलांगताएं शामिल हैं। अंधापनतेजाब हमले के पीड़ित और पार्किंसंस रोग जिन्हें पहले अधिनियम में काफी हद तक नजरअंदाज किया गया था। इसके अलावासरकार को निर्दिष्ट विकलांगता की किसी अन्य श्रेणी को अधिसूचित करने के लिए अधिकृत किया गया है।

 यह विकलांग लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में 3% से 4% और उच्च शिक्षा संस्थानों में 3% से 5% तक आरक्षण की मात्रा बढ़ाता है। 6 से 18 वर्ष की आयु के बीच बेंचमार्क विकलांगता वाले प्रत्येक बच्चे को मुफ्त शिक्षा का अधिकार होगा। सरकार द्वारा वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थानों को समावेशी शिक्षा प्रदान करनी होगी। सुलभ भारत अभियान के साथ सार्वजनिक भवनों में निर्धारित समय सीमा में पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। विकलांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्त अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए नियामक निकायों और शिकायत निवारण एजेंसियों के रूप में कार्य करेंगे। विकलांग व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक अलग राष्ट्रीय और राज्य कोष बनाया गया था।

 सुलभ भारत अभियानपीडब्ल्यूडी के लिए सुलभ वातावरण का निर्माण और सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रमुख अभियान जो विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर तक पहुंच प्राप्त करने और स्वतंत्र रूप से जीने और एक समावेशी समाज में जीवन के सभी पहलुओं में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम करेगा। अभियान का लक्ष्य निर्मित पर्यावरणपरिवहन प्रणाली और सूचना एवं संचार पारिस्थितिकी तंत्र की पहुंच को बढ़ाना है। दीन दयाल विकलांग पुनर्वास योजना के तहत विकलांग व्यक्तियों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के लिए गैर सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती हैजैसे विशेष स्कूलव्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रसमुदाय आधारित पुनर्वासपूर्व-विद्यालय और प्रारंभिक हस्तक्षेप आदि।

 सहायक उपकरण  की खरीद/फिटिंग के लिए विकलांग व्यक्तियों की सहायता: इस योजना का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को उनकी पहुंच के भीतर उपयुक्तटिकाऊवैज्ञानिक रूप से निर्मितआधुनिकमानक सहायक उपकरण और उपकरण लाकर मदद करना है। इस योजना का उद्देश्य विकलांग छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसरों को बढ़ाना है। योजना के तहतविकलांग छात्रों को प्रति वर्ष 200 फैलोशिप दी जाती है। ऑटिज़्मसेरेब्रल पाल्सीमानसिक मंदता और बहु-विकलांगता वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय ट्रस्ट की योजनाएँ हैं।

 ड़ी संख्या में विकलांगता को रोका जा सकता हैजिनमें जन्म के दौरान चिकित्सा संबंधी मुद्दोंमातृ स्थितियोंकुपोषणसाथ ही दुर्घटनाओं और चोटों से उत्पन्न होने वाली विकलांगताएं शामिल हैं। हालांकिस्वास्थ्य क्षेत्र विशेष रूप से ग्रामीण भारत में विकलांगता के लिए सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया करने में विफल रहा हैइसके अलावा उचित स्वास्थ्य देखभालसहायक उपकरण और उपकरणों तक सस्ती पहुंच की कमी है और पुनर्वास केंद्रों में खराब प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता एक और चिंता का विषय है।

 हमारी शिक्षा प्रणाली समावेशी नहीं है। मामूली से मध्यम विकलांग बच्चों को नियमित स्कूलों में शामिल करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेष स्कूलों की उपलब्धतास्कूलों तक पहुंचप्रशिक्षित शिक्षकों और विकलांगों के लिए शैक्षिक सामग्री की उपलब्धता जैसे कई मुद्दे हैं। इसके अलावाउच्च शिक्षण संस्थानों में विकलांगों के लिए आरक्षण कई मामलों में पूरा नहीं किया गया हैभले ही कई विकलांग वयस्क उत्पादक कार्य करने में सक्षम हैंविकलांग वयस्कों के पास सामान्य जनसंख्या की तुलना में बहुत कम रोजगार दर है। निजी क्षेत्र में स्थिति और भी खराब हैजहां बहुत कम विकलांगों को रोजगार मिला हुआ है।

 भवनोंपरिवहनसेवाओं तक पहुंच आदि में भौतिक पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विकलांगों के परिवारोंऔर अक्सर स्वयं विकलांगों का नकारात्मक रवैया विकलांग व्यक्तियों को परिवारसमुदाय या कार्यबल में सक्रिय भाग लेने से रोकता है। विकलांग लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। मानसिक बीमारी या मानसिक मंदता से पीड़ित लोग सबसे खराब कलंक का सामना करते हैं और गंभीर सामाजिक बहिष्कार के अधीन हैं। कठोर और तुलनीय डेटा और स्टैटिक्स की कमी विकलांग व्यक्तियों को शामिल करने में और बाधा डालती है।

  डेटा संग्रह और अक्षमता को मापने के साथ प्रमुख मुद्दे हैं,विकलांगता को परिभाषित करना कठिन है। अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग विकलांगता डेटा की आवश्यकता होती है अक्षमता को अक्षमता के रूप में रिपोर्ट करने में अनिच्छा को कई स्थानों/समाजों में एक कलंक माना जाता है। नीतियों और योजनाओं का खराब कार्यान्वयन विकलांग व्यक्तियों को शामिल करने में बाधा डालता है। हालांकि विकलांगों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न अधिनियमों और योजनाओं को निर्धारित किया गया हैलेकिन उन्हें लागू करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

 निवारक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता है और सभी बच्चों की कम उम्र में जांच की जानी चाहिए। केरल ने पहले ही एक प्रारंभिक रोकथाम कार्यक्रम शुरू कर दिया है। व्यापक नवजात स्क्रीनिंग (सीएनएस) कार्यक्रम शिशुओं में कमियों की शीघ्र पहचान करने और राज्य की विकलांगता के बोझ को कम करने का प्रयास करता है। विकलांग लोगों को कलंक पर काबू पाने के द्वारा समाज में बेहतर ढंग से एकीकृत करने की आवश्यकता है विभिन्न प्रकार की विकलांगताओं के बारे में लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए लोगों में सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करने के लिए विकलांग लोगों की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित किया जा सकता है।

 विकलांग वयस्कों को रोजगार योग्य कौशल के साथ सशक्त बनाने की आवश्यकता है। निजी क्षेत्र को उन्हें रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। अक्षमता के माप में सुधार करके भारत में विकलांगता के पैमाने को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षा पर राज्यवार रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है। विकलांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने और उन्हें नियमित स्कूलों में शामिल करने की सुविधा के लिए उचित शिक्षक प्रशिक्षण होना चाहिए। इसके अलावा और अधिक विशेष स्कूल होने चाहिए और विकलांग बच्चों के लिए शैक्षिक सामग्री सुनिश्चित करनी चाहिए।

 सड़क सुरक्षाआवासीय क्षेत्रों में सुरक्षासार्वजनिक परिवहन प्रणाली आदि जैसे सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए इसके अलावाभवनों को विकलांगों के अनुकूल बनाने के लिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए विकलांगों के कल्याण के लिए अधिक बजटीय आवंटन। लिंग बजट की तर्ज पर विकलांगता बजट होना चाहिए। योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उचित निगरानी तंत्र और सार्वजनिक धन की गिनती होनी चाहिए।

—– — डॉo सत्यवान सौरभ,