इस बार गणतंत्र दिवस पर भी वह अपनी पशु मित्रों को नहीं भूली है। ये रही गणतंत्र दिवस की परेड के लिए जाते समय अपने पशु मित्रों के साथ अदा की ये प्यारी तस्वीरें।
बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश में जल्द लागू होगी यूसीसी
ब्वै, ब्वारी, नौनी कौथिग में मुख्यमंत्री धामी ने किया ₹467 करोड़ 78 लाख की योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास
बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश में जल्द लागू होगी यूसीसी
29 जनवरी 2024,रविवार, देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश
देहरादून /रुद्रप्रयाग,28 जनवरी आज रविवार को जनपद रुद्रप्रयाग में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ब्वै, ब्वारी, नौनी कौथिग में किया प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ₹467 करोड़ 78 लाख की 27140 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के स्टॉल का अवलोकन कर महिलाओं के साथ संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग पर्यटन विभाग की ओर से तैयार कॉफ़ी टेबल बुक का विमोचन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दुग्ध विभाग एवं सीएसआर के माध्यम से संचालित अत्याधुनिक एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जनपद के विकास के लिए विभिन्न घोषणाएं भी की।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि
पंचप्रयागों में से एक प्रयाग होने के कारण इस भूमि का स्थान उत्तराखण्ड में ही नहीं बल्कि भारत में भी अति विशिष्ट है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसी सिद्ध भूमि पर आने और यहां मातृशक्ति को समर्पित ब्वै, ब्वारी, नौनी कौथिग कार्यक्रम के तहत जन कल्याण की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार द्वारा पूरे उत्तराखंड का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि रुद्रप्रयाग जिले का सर्वांगीण विकास हो और यह क्षेत्र उन्नति के नए शिखर छुए।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी मातृशक्ति सही अर्थों में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल’’ के मंत्र को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही हैं।
आज प्रदेश के दुर्गम गांव-गांव में महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर कुटीर उद्योगों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्वकाल में आज देशभर में करीब 23 करोड़ महिलाओं को जन धन खातों के जरिए बैंकों से जोड़ा जा चुका है।
इसी प्रकार प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ ही मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना,मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना,लखपति दीदी योजना,मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी योजना, नंदा गौरा मातृवंदना योजना और महिला पोषण अभियान जैसी योजनाएं प्रारंभ की हैं।
उन्होंने कहा कि बतौर मुख्यसेवक “मेरा ये प्रयास रहा है कि प्रदेश की जनता के हितों के लिए जो भी आवश्यक कदम हों, बिना देरी के उठाएं जाएं।” उन्होंने कहा एक ओर जहां उत्तराखण्ड में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया, वहीं धर्मांतरण रोकने के लिए भी कानून बनाया, प्रदेश में पहली बार लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई की गई, वहीं भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी पहली बार कार्रवाई करने से हम पीछे नहीं हटे.. !
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को समान नागरिक संहिता का जल्द ड्राफ्ट मिल जाएगा, जिसके पश्चात समान नागरिक संहिता को लागू करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा ने बीते वर्ष रिकॉर्ड पार किए इस वर्ष सरकार यात्रा को और बेहतर तरीक़े से सुविधाओं को विकसित करने जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल में प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जिसके तहत 50 देशों के निवेशकों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में वेडिंग डेस्टिनेशन को विकसित करने के लिए भी मिशन मोड में काम कर रही है।
इस अवसर पर विधायक रुद्रप्रयाग भरत सिंह चौधरी ने मुख्यमंत्री का जनपद आगमन पर स्वागत करते हुए जनपद के विकास के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी।
विधायक केदारनाथ शैला रानी रावत ने श्री केदारनाथ धाम यात्रा में नया कीर्तिमान स्थापित होने पर मुख्यमंत्री धामी को शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि धामी जी के नेतृत्व में करीब 20 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए हैं।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती अमरदेई शाह, दर्जा धारी राज्यमंत्री अजेन्द्र अजय, चण्डी प्रसाद भट्ट, प्रदेश गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय,अध्यक्ष महिला मोर्चा श्रीमती आशा नौटियाल, भाजपा ज़िलाध्यक्ष महावीर पवार, ज़िलाधिकारी एवं पुलिस कप्तान मौजूद रहे।
मुजफ्फरनगर पुलिस से मुठभेड़ में गौ तस्कर हुए घायल, एक फरार
मुज़फ्फरनगर। रतनपुरी थाना क्षेत्र में भनवाड़ा गांव के समीप पुलिस की गो तस्करों से मुठभेड़ हो गई, जिसमें पुलिस की गोली लगने से एक गोतस्कर घायल हो गया, जबकि दूसरा मौके से फरार हो गया। घायल गो-तस्कर पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
घायल गो-तस्कर की निशानदेही पर पुलिस ने बिना नंबर की स्कूटी, जिंदा गोवंश, तमंचा, खोखे, गोवंश कटान के उपकरण भी बरामद किए हैं। गोतस्कर पर अलग-अलग थाना क्षेत्रों में करीब 14 मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। घायल गो-तस्कर का उपचार बुढ़ाना के सरकारी अस्पताल में कराया गया है। पूछताछ के बाद गो-तस्कर का चालान कर दिया गया। बताया गया कि फरार हुए दूसरे गो- तस्कर की तलाश में काफी देर तक पुलिस ने काम्बिग की लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया है।
२६ जनवरी गणतंत्र दिवस पर मिला डॉ. मुस्तफ़ा युसूफ अली गोम को ” राष्ट्रीय रत्न सम्मान ” सुप्रसिद्ध गायक कुमार शानू के हाथों मिला उन्हें यह सम्मान
२६ जनवरी गणतंत्र दिवस पर मिला डॉ. मुस्तफ़ा युसूफ अली गोम को ” राष्ट्रीय रत्न सम्मान ”
सुप्रसिद्ध गायक कुमार शानू के हाथों मिला उन्हें यह सम्मान
अँधेरी(पश्चिम),मुंबई स्थित मेयर हाल में २६ जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर कृष्णा चौहान फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘ राष्ट्रीय रत्न सम्मान ” कार्यक्रम मे
मुंबई के जाने माने उद्योगपति और समाजसेवी तथा केयर टेकर्स एक्सटीरियर एंड इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. मुस्तफ़ा युसूफ अली गोम को उनके द्वारा किए गए समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सुप्रसिद्ध गायक कुमार शानू के हाथों ” राष्ट्रीय रत्न सम्मान ” दिया गया।
डॉ गोम को पिछले ही दिनों महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस द्वारा दूसरी बार ‘वाग्धारा सम्मान’ से सम्मानित किया गया था।
गणतंत्र दिवस – ग्रामीण विकास से ही राष्ट्र का विकास सम्भव
गणतंत्र दिवस
ग्रामीण विकास से ही राष्ट्र का विकास सम्भव
रवीन्द्रनाथ शुक्ल – विभूति फीचर्स
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित होने के कारण गांवों में
निवास करती है। इस कारण भारतीय सभ्यता और संस्कृति के सच्चे दर्शन हमें गांवों में ही प्राप्त होते हैं। स्वतंत्र
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था कि 'भारत की आत्मा गांवों में निवास करती है।‘
इस प्रकार ग्राम हमारे राष्ट्रीय जीवन के आधारभूत स्तम्भ हैं। भोजन के लिए अन्न तथा कारखानों के लिए कच्चा
माल हमें ग्रामों से ही प्राप्त होता है। भारतीय कृषकों के खेतों पर ही हमारी सम्पूर्ण अर्थ-व्यवस्था का निर्माण हुआ है
और भारत की अविरल धन-सम्पदा का सबसे बड़ा साधन कृषि’ ही है। इसलिए देश की सुख और समृद्धि गांवों की
उन्नति पर निर्भर करती है। गांव यदि सुखी होंगे तथा उन्नत अवस्था को प्राप्त होंगे तो राष्ट्र भी प्रगति कर सकेगा
अन्यथा ग्रामों की उपेक्षा करते हुए राष्ट्र का आर्थिक विकास सम्भव नहीं। यह बड़े खेद का विषय है कि जिन ग्रामों पर
हमारे राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक उन्नति निर्भर करती है, उनकी दशा अत्यंत दयनीय है। गांवों को हमने सर्वथा
भुला दिया है। शिक्षा की दृष्टि से, सभ्यता की दृष्टिï से तथा औद्योगिक विकास की दृष्टि से वे बहुत पिछड़े हुए हैं।
सामाजिक कुरीतियों ने ग्रामों को अपना केंद्र बना लिया है। इस देश में गांवों की संख्या लगभग 7 लाख है। अत:
भारतवर्ष की उन्नति के लिए ;ग्रामीण विकास की समस्या सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या के समाधान पर ही
भारतवर्ष जैसे विकासशील विकास सम्भव है।
प्राचीनकाल में ग्राम्य जीवन सुन्दरता से परिपूर्ण था। प्राकृतिक दृश्यों की सुषमा, स्वास्थ्यप्रद वातावरण, सात्विक
प्रेम, त्यागमय जीवन और निष्कपट व्यवहार की दृष्टि से ग्राम्य जीवन एक आदर्श था। जैसा कि एक कवि ने इस
भाव को अपनी इन पंक्तियों में व्यक्त किया है:
अहा! ग्राम्य जीवन भी क्या है।
क्यों न इसे सबका मन चाहे।
भारतीय ग्राम आधुनिक जीवन की नींव है। भारतीय किसान स्वयं आधा पेट भोजन कर करोड़ों मनुष्यों के लिए अन्न
उत्पन्न करता है। इस प्रकार भारतीय कृषक की महत्ता को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने इन पंक्तियों में व्यक्त
किया है:-
बरस रहा है रवि अनल,
भू-तल तवा-सा जल रहा।
है चल रहा सन-सन पवन,
तन से पसीना ढल रहा॥
देखो कृषक शोणित सुखाकर,
हल तथापि चला रहे।
किस लोभ में इस आंच में,
वे निज शरीर जला रहे॥
परंतु इतना सब कुछ होते हुए भी भारतीय कृषक का जीवन दरिद्रता तथा दैन्यता का जीवन है। आपत्तियों तथा संकटों
में उसका जीवन पलता है। उसकी सारी कमाई ऋण चुकाने में व्यय हो जाती है। सच तो यह है कि उसका जन्म ऋण
में होता है, ऋण में ही उसका पालन होता है और ऋण में ही उसकी जीवन लीला समाप्त हो जाती है। उसके जीवन में
आमोद-प्रमोद और अमन-चैन के सुख साधनों का सर्वथा अभाव रहा है। यही कारण है कि 'पंतजी’ को आधुनिक ग्राम
मानव लोक’ से भी नहीं लगते हैं:
यह तो मानव लोक नहीं रे,
यह है नरक अपरिचित।
यह भारत की ग्राम सभ्यता,
संस्कृति से निर्वासित॥
अकथनीय क्षुद्रता विवशता,
भरी यहां के जग में।
गृह-गृह में कलह, खेत में
कलह, कलह है मग में॥
भारतीय कृषक की कुछ समस्याएं ऐसी हैं, जिनका निराकरण किए बिना उनका जीवन उन्नतिशील नहीं हो सकता।
भारतीय किसानों की दयनीय अवस्था का मूल कारण अशिक्षा है। शिक्षा के अभाव में भारतीय कृषक कृषि के
आधुनिक तथा वैज्ञानिक तरीकों से अपरिचित रहते हैं। पुरानी परिपाटी की अवैज्ञानिक ढंग की खेती आज के भारत के
लिए उपयुक्त नहीं है। अशिक्षा के कारण ही ग्रामीणों में सामाजिक कुरीतियां बहुत देखी जाती हैं। अंधविश्वास उनमें
कूट-कूटकर भरे होते है। अधिकांश ग्रामीण तिथि-नक्षत्र आदि देखकर ही बीज बोते तथा फसल काटते हैं। विवाह, मृत्यु
भोज आदि में वे अपना धन पानी की तरह बहाते है और कर्ज को निमंत्रण देते हैं। वे मुकदमेबाजी में अपना धन तथा
समय का अपव्यय करते है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण कृषक देश-विदेश की परिस्थिति से अनभिज्ञ रहते हैं। उनके
लिए गांव ही सम्पूर्ण विश्व है। इस प्रकार मुख्य रूप से अशिक्षा के कारण ही हमारे ग्राम पिछड़े हुए हैं। अत: यदि शिक्षा
का प्रचार और प्रसार किया जाए तो निश्चित ही भारतीय ग्राम उन्नत अवस्था को प्राप्त होंगे।
अशिक्षा को दूर करने तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए गांवों में दो प्रकार के स्कूल खोले जाने चाहिए। एक प्रकार के
स्कूलों में बालकों व बालिकाओं को शिक्षा दी जानी चाहिए तथा दूसरे प्रकार के स्कूलों में रात्रि में युवाओं तथा वृद्धों
को शिक्षा दी जानी चाहिए, क्योंकि वे दिनभर कृषि कार्यों में लगे रहते है। बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए भी नारी-
शिक्षा का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए। यद्यपि यह हर्ष का विषय है कि हमारी सरकार इस ओर खूब ध्यान दे रही
है, तथापि हमारे पिछड़े हुए ग्रामों के लिए शिक्षा प्रसार की दर अत्यंत मंद है। इसे और तेजी से लागू किया जाना
चाहिए।
भारतीय कृषकों की दूसरी प्रमुख समस्या स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की है। अधिकांश कृषकों के परिवार गंदे घरों में
निवास करते हैं। कृषकों के बालक अनेक रोगों से पीडि़त रहते हैं और चिकित्सा के अभाव में अकाल मृत्यु को प्राप्त
होते हैं। वर्षा ऋतु में तो गांव की गंदगी बहुत बढ़ जाती है। जगह-जगह कीचड़ हो जाता है और गंदे जल से छोटे-छोटे
गड्ïढे भर जाते है।
गोबर और कूड़े के ढेरों से भी वातावरण प्रदूषित होता है। सचमुच वर्षाकाल में गांव गंदगी की मूर्ति हो जाते हैं। इस
समय असंख्य मक्खियां और मच्छर पैदा होकर गंदगी को चारों ओर फैलाते है। प्रतिवर्ष गांवों में वर्षा ऋतु के बाद
मलेरिया जोर पकड़ लेता है। ग्रीष्म ऋतु में हैजा का प्रकोप रहता है। इस प्रकार पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण गांवों में
अनेक प्रकार की बीमारियां फैलती रहती हैं। अतएव प्रदूषण के निदान के लिए यह आवश्यक है कि गांवों में कूड़ादानों
की व्यवस्था की जानी चाहिए, वृक्षों के कटाव पर प्रतिबंध लगाने, गोबर गैस प्लान्ट को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
औषधालयों एवं पशु चिकित्सालयों आदि की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
शिक्षा एवं पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या के समाधान पर ही गांवों का विकास नहीं हो सकता। ग्रामीण विकास के
लिए कुटीर एवं लघु धंधों का पुनरुत्थान आवश्यक है। भारतीय कृषक वर्ष में लगभग चार माह तक खाली रहते हैं। इस
लम्बे समय को वे व्यर्थ नष्टï कर डालते हैं। यदि वे इस समय में किसी लघु या कुटीर धंधे को अपना लें तो उनकी
आय में काफी वृद्धि हो सकती है और वे अपने ऋण भार को काफी हल्का कर सकते हैं। मत्स्य पालन, मुर्गी पालन,
मधुमक्खी पालन, रेशम के कीड़े पालना, रस्सियां बांटना, चटाईयां बनाना आदि अनेक ऐसे व्यवसाय हैं, जिनको
अपनाकर किसान अच्छी खासी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार कुटीर एवं लघु उद्योग धंधों के माध्यम से
उनका जीवन सुखमय एवं शांतिमय बन जाता है।
आज के कृषक जरा-जरा सी बातों पर एक-दूसरे से झगड़ा कर न्यायालयों की शरण लेते हैं, जिसके परिणामस्वरूप
उनकी पसीने की कमाई व्यर्थ में जाती है। उनके बीच वैमनस्यता फैलती है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला करती है। अत:
ग्राम पंचायतों एवं ब्लॉक प्रमुखों आदि को न्याय करने का विशेषाधिकार दिया जाना चाहिए ताकि ग्रामों की छोटी-
छोटी समस्याओं तथा आपसी मनमुटाव का अन्त करके ग्रामीणों में मानवता का संचार किया जा सके। इन सब
व्यवस्थाओं के अतिरिक्त ग्रामीण विकासार्थ हरितक्रांति, गहन कृषि, लघु एवं कुटीर उद्योग धंधों का पुनरुत्थान,
अच्छे बीज की व्यवस्था, पशु चिकित्सालयों की स्थापना, उर्वरक विक्रय केंद्रों की स्थापना, सहकारी संगठनों का
निर्माण, पशुओं की नस्ल सुधार, प्रौढ़ शिक्षा एवं नारी शिक्षा को और भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए तथा अन्य
सुविधाएं ग्रामीण निवासियों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन प्राप्त
कर सकें। ग्राम हमारे राष्टï्रीय जीवन की आत्मा हैं। अत: बिना ग्रामीण विकास के राष्टï्र का विकास संभव नहीं है।
इस प्रकार हमें भारतीय गांवों के विकास में तन,मन,धन से यथाशक्ति आगे आना चाहिए। गांवों की उन्नति ही
राष्टï्र के भविष्य को उज्ज्वल और मंगलमय बना सकती है। (विभूति फीचर्स)
26 जनवरी और भारत
26 जनवरी और भारत
कृष्ण कुमार मिश्र अचूक’ – विभूति फीचर्स
* 26 जनवरी 1530 को बाबर की मृत्यु हुई।
* 26 जनवरी 1539 को शेरशाह ने हुमायूं को परास्त किया।
* 26 जनवरी 1554 को जहांगीर का जन्म हुआ।
* 26 जनवरी 1730 को नादिरशाह की सेना ने दिल्ली में प्रवेश किया।
* 26 जनवरी 1778 को टीपू सुल्तान की अंग्रेजों से जंग हुई।
* 26 जनवरी 1802 को भारत की जापान से संधि हुई।
* 26 जनवरी 1867 को स्वेज नहर बनकर तैयार हुई।
* 26 जनवरी 1869 को बम्बई के हाई कोर्ट की इमारत तैयार हुई।
* 26 जनवरी 1876 को कोलकाता से प्रथम ट्रेन बम्बई गई।
* 26 जनवरी 1881 को कोलकाता, बम्बई, मद्रास के टेलीफोन चालू
हुए तथा इसी दिन भारत में कोलकाता से बम्बई तक सुचारू रूप
से ट्रेन चालू की गई।
* 26 जनवरी 1884 को बी.बी.सी. रेडियो स्टेशन तैयार हुआ
था। (विभूति फीचर्स)
जब हमने स्वीकार किया अपना संविधान
छत्तीस जनवरी 'पचास’ का था शुभ विहान
जब हमने था स्वीकार किया अपना संविधान।
गणतंत्र दिवस अति पुनीत पर्व हमारा
जिसने दी मोड़ देश के इतिहास की धारा
यह एक है दुनिया का सही श्रेष्ठ संविधान
जिसने दी है दिशा हमें और लक्ष्य एक महान॥
गंतव्य बहुत दूर है टेढ़ा है रास्ता
उलझन भरी दुनियां से भी रखना है वास्ता॥
चलना है सदा आगे हमें खुद को बचा के
दुनिया को भाई-चारे की शुभ राह दिखा के॥
आपस के भेदभाव भुला सबका साथ दें
हर धर्म, क्षेत्र, भाषा और संस्कृति को साथ ले॥
आओ करें संकल्प कि हम जो जहां जिये
मेहनत करें, सद्भाव रखे, देश के लिये
मेहनत औ प्रेम सहित जहां ज्ञान रहेगा
सब कुछ वहां , विकास औ सम्मान रहेगा॥
कहता ये तिरंगा है जो कौमी निशान है
भारत की आन-बान शान संविधान है॥
(विभूति फीचर्स)
Mumbai Clash: मुंबई के मीरा रोड पर हुए बवाल के बाद एक्शन की तैयारी में पुलिस
Mira Road Clash: मीरा भयंदर वसई विरार पुलिस (एमबीवीवी पुलिस) ने एक नोट जारी कर सभी ग्रुप एडमिन को इस बात का ध्यान रखने को कहा है कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए झड़प से संबंधित कोई भी फॉरवर्ड, चुटकुले या वीडियो सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड नहीं किया जाना चाहिए. इस आदेश का उल्लंघन होने पर पुलिस ग्रुप एडमिन के खिलाफ कार्रवाई करेगी.
क्या है पूरा मामला?
PTI के अनुसार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला के नवीन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या (रविवार रात) पर मुंबई से सटे मीरा भायंदर इलाके में एक वाहन रैली निकालने में शामिल लोगों के समूह पर कथित हमले को लेकर 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस ने कहा कि दो समुदायों के सदस्यों के बीच झड़प तब हुई, जब रविवार रात करीब साढ़े 10 बजे तीन कारों और उतनी ही संख्या में मोटरसाइकिल पर सवार 10 से 12 लोगों का एक समूह नया नगर से रैली निकाल रहा था. रैली के दौरान यह समूह सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर भगवान राम की प्रशंसा में नारे लगा रहा था.
उस रात क्या हुआ था?
PTI ने बताया, मीरा भायंदर पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले इलाके में यह घटना हुई. एक अधिकारी ने बताया कि नारे लगाते हुए कुछ लोगों ने कथित तौर पर पटाखे फोड़े, जिसके बाद स्थानीय लोगों का एक समूह लाठी-डंडे लेकर बाहर निकल आया. उनकी रैली में शामिल लोगों से बहस हुई और उन्होंने उनके वाहनों पर हमला कर दिया. उन्होंने बताया कि वाहनों में सवार लोगों से मारपीट भी की गयी. पुलिस ने फौरन बीचबचाव किया और हमलावरों को खदेड़ दिया. अधिकारी ने बताया कि इलाके में कानून एवं व्यवस्था की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस कर्मियों के अलावा दंगा नियंत्रण पुलिस (आरसीपी) की एक टुकड़ी भी तैनात की गयी है.









