भारत ऊर्जा सप्ताह – 2024 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन संस्करण को आयोजित किया गया
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप एस पुरी ने भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख किया
भारत ऊर्जा सप्ताह (आईईडब्ल्यू)- 2024 के दौरान पीएनजीआरबी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन संस्करण को आयोजित किया गया
इस सम्मेलन में दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के ऊर्जा नियामक प्राधिकरणों ने हिस्सा लिया

इस सम्मेलन की व्यापक विषयवस्तु “प्राकृतिक गैस विकास के लिए मार्ग प्रशस्त करना” है। इसमें तीव्र गति और गहराई से उत्सर्जन में कमी लाने को लेकर प्राकृतिक गैस की भूमिका पर जोर दिया गया, जो उभरते व विकासशील देशों के जलवायु परिवर्तन संबंधित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन के तहत पांच पूर्ण सत्रों में ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, तेजी से बुनियादी ढांचे के विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और संस्थागत विकास जैसे कई विषयों पर चर्चाएं हुईं। इस सम्मेलन के तहत अंतरराष्ट्रीय नियामकों की एक विशेष गोलमेज बैठक ने नियामक ढांचे के संरक्षकों को एक साथ लाने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने व प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों, सीमा पार सहभागिता रणनीतियों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस व आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उन्होंने इस पहल के लिए पीएनजीआरबी की सराहना की। इसके अलावा मंत्री ने आने वाले समय में तेल और गैस नियामकों के अंतरराष्ट्रीय नियामक सम्मेलन को आईईडब्ल्यू की एक अभिन्न विशेषता के रूप में बनाए जाने पर जोर दिया। वहीं, पीएनजीआरबी के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जैन ने प्राकृतिक गैस क्षेत्र के विकास को लेकर प्रभावी नियामक ढांचे तैयार करने के लिए ज्ञान साझा करने के संबंध में दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
इसमें वक्ताओं के सम्मानित समूह ने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की जरूरत और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक रूपांतरणकारी ईंधन के रूप में इसकी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने विकासशील देशों में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए वैश्विक दक्षिण से एकजुट मोर्चे की जरूरत को रेखांकित किया। इस वार्ता ने भारत के प्राकृतिक गैस नियामक व बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष रूप से विश्वसनीय और सस्ती स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए समग्र बुनियादी ढांचे के विकास व शहरी गैस वितरण क्षेत्र, को रेखांकित किया।
इसमें उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों ने परस्पर जुड़े गैस और बिजली ग्रिड के माध्यम से दक्षिण व दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच एक क्षेत्रीय स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा की जरूरत होने की पैरवी की। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामकों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने विशेषज्ञता के एक समूह के रूप में कार्य किया है, जो विभिन्न हितधारकों को नेटवर्क बनाने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने और प्राकृतिक गैस क्षेत्र के विकास के भविष्य को आकार देने के लिए साझेदारी बनाने का अवसर प्रदान करता है।
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खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बुडापेस्ट को शतरंज ओलंपियाड मशाल सौंपी
शतरंज रणनीतिक गहराई और दार्शनिक ज्ञान का प्रतिबिंब है: श्री अनुराग सिंह ठाकुर
केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने शतरंज ओलंपियाड के 45वें संस्करण के आधिकारिक मेजबान बुडापेस्ट, हंगरी को आज नई दिल्ली में शतरंज ओलंपियाड मशाल सौंपी।
हैंडऑफ की रस्म मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में संपन्न हुई, जहां श्री ठाकुर ने एफआईडीई के अध्यक्ष और बुडापेस्ट को ओलंपियाड मशाल सौंपने से पहले भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद के साथ एफआईडीई अध्यक्ष, अरकडी ड्वोर्कोविच और हंगेरियन ग्रैंड मास्टर जुडिट पोल्गर के साथ शतरंज की एक दोस्ताना बाजी भी खेली।


कार्यक्रम के दौरान श्री ठाकुर ने कहा, “मुझे खुशी है कि कुछ साल पहले हमने जो फैसला किया था (शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले का) वह वास्तव में संपन्न हुआ और शतरंज ओलंपियाड के लिए मशाल के हैंडऑफ की रस्म निभाने हेतु मैं यहां मौजूद हूं।”
उन्होंने कहा, “शतरंज एक बौद्धिक विरासत है, जो संभवत: भारत ने दुनिया को प्रदान की है, और यह केवल खेल मात्र नहीं है, बल्कि रणनीतिक गहराई और दार्शनिक ज्ञान का प्रतिबिंब है। यह शानदार खेल न केवल दिमाग को तेज करता है, बल्कि धैर्य और लचीलेपन का महत्वपूर्ण सबक भी सिखाता है और व्यक्ति को रणनीतिक महारत की बौद्धिक तलाश के मार्ग पर ले जाता है।”
शतरंज ओलंपियाड का 44वां संस्करण 2022 में चेन्नई में आयोजित किया गया था। उस समय इस वैश्विक आयोजन में 2500 से अधिक खिलाड़ियों और 7000 से अधिक ने भाग लिया था। एफआईडीई शतरंज ओलंपियाड का अगला संस्करण अब इस साल हंगरी के बुडापेस्ट में होगा, जिसकी आधिकारिक घोषणा इस साल की शुरुआत में की गई थी।
दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में 19 जून, 2022 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक समारोह में प्रथम शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले की शुरुआत की गई।
काव्य जगत पर छाया बसंत
उमेश कुमार साहू – विभूति फीचर्स
ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति का सुंदर स्वरूप निखर उठता है। पतझड़ के पश्चात पेड़ पौधे नई-नई कोंपलों, फूलों से आच्छादित हो जाते हैं। धरती सरसों के फूलों की बासंती चादर ओढ़कर श्रृंगार करती है। विभिन्न प्रकार के पुष्पों की मनमोहक छटा के साथ पलाश के रंग तथा कोयल की कूक सर्वत्र छा जाती है। बसंत पुष्पों के माध्यम से प्रसन्नता व आनंद का उपहार सौंपता है। बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति सजीव, जीवंत एवं चैतन्यमय हो उठती है। बसंती बयार में प्रकृति का रूप ‘नवगति-नवलय-तालछंद नवÓ से समन्वित हो जाता है। प्रकृति कुसुम-कलिकाओं की सुगंध से गमक उठती है। आम के बौर वातावरण को सुरभित कर देते हैं। प्रकृति के इस परिवेश में मानव भी उसके साथ थिरक उठता है, तदाकार हो जाता है।
वास्तव में बसंत प्रकृति और मानव मन की उमंग का प्रतीक है। विज्ञजनों के अनुसार बसंत प्रकृति और मानव के संवेदनशील संबंधों का साकार रूप है। जब-जब बसंत आता है, कवियों में नवोन्मेष का संचार हो जाता है। अश्वघोष, कालिदास, माघ और भारवि जैसे प्रख्यात संस्कृत कवियों से लेकर वर्तमान युग के कवियों का श्रंृगार है – ‘बसंतÓ। ऋतुराज बसंत के बारे में सुमित्रानंदन पंत ने इस तरह अपने उद्गार व्यक्त किये है –
लो चित्रशलय सी पंख खोल,
उडऩे को है कुसुमित घाटी,
यह है अल्मोड़े का बसंत,
खिल पड़ी निखिल पर्वत घाटी।
महाकवि सेनापति को टेसू के फूल इतने भाये कि उस पर ही एक छंद उतर आया, उनके मानस में और यह रंग फागुन तक बरसता रहता है।
लाल-लाल टेसू फूलि रहे हैं बिसाल संग
श्याम रंग भेटि मनौ कसिकै मिलाएं हैं।
तहां मधु काज आय बैठे मधुकर पुंज
मलय पवन उपवन बन धाये हैं।
‘सेनापतिÓ माधव महीना में पलाश तरू
देखि-देखि भाव-कविता के मन आए हैं।
आधे-अन सुलगि-सुलगि रहे आधे मनौ
बिरही दहन काम क्वैला परचाए हैं।
बसंत के संदर्भ में महाकवि कालीदास ने इस ऋतु का उनके प्रसिद्घ ग्रंथ ऋतु संहार में कितना सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है देखें –
‘द्रुमा सपुष्पा सलिलं सपद्यं स्त्रय: सकामा पवन: सुगंधि:।
सुखा: प्रदोषा दिवसाश्च रम्या: सर्वप्रिये चारूतरं बसंते।Ó
अर्थात् ‘हे प्रिये! बसंत ऋतु में फूलों से लदे हुए पेड़, कमलों से भरा हुआ सरोवर, कामयुक्त नारियां, सुगंधित पवन, सुरभित मंजरियों का मेला लगता है और भंवरों की मधुर गुंजार होने लगती है।Ó
बसंत का मद कवि मतिराम पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने भी उमंग में आकर पद रच डाला। देखें-
मलय समीर लगौ चलन सुगंध सौ सौरो,
पथिकन कोने परदेसन तै आवने।
‘मतिराम’ सुकवि समूहीन सुमन फूले,
कोकिल-मधुप लागे बोलन सुहावने।
आयो है बसंत, भए पल्लवित जलजात,
तुम लागे चालिबब की चरचा चलावने।
रावरी तिया को तरवर, सरवरन के,
किसलै-कमल वहै हैं बारक बिछावने।
कबीर दास ने बीजक में बसंती राग को बड़े ही सरस एवं सहज ढंग से गाया है-
‘जाके बारहमास बसंत हो,
ताके परमारथ बूझे विरला कोय,
मैं आपऊं मेस्तर मिलन तोहि,
रितु वसंत पहिरावहु मोहि।‘
हरिण केशरी नाम से विख्यात सम्राट हर्षवर्धन ने भी बसंत का गुणगान किया है। बसंत को हर कवि ने स्वीकारा है और अपनी अभिव्यक्ति दी है। इसे पुष्प समय, पुष्प मास, ऋतुराज, पिकानंद, कामसखा, फलु, मधु माधव, मधु मास के नामों से भी चित्रित किया गया है। बसंत की इसी अपूर्व महत्ता के कारण ही गीताकार श्रीकृष्ण ने स्वयं को ऋतुओं में श्रेष्ठï बसंत कहा है।
कवि किसी भी युग में हुए हों, ऋतुओं के प्रति उनका आकर्षण सनातन एवं शाश्वत ही होता है। यदि कवि ऋतुओं को न गाये, तो लगता है कि उसकी काव्य प्रतिभा अपूर्ण ही है। हिन्दी के अनेक कवियों ने बसंत को खूब ढंग से और उसके रंग में सराबोर होकर गाया और गुनगुनाया है। उनके इन ललित-पदों में बसंत की जैसे छटा ही उतर आई हो।
धन्य हैं वे कवि जिन्होंने अपनी कविता में बसंत राग का ताना-बाना बुना। इतना ही नहीं इन्होंने काव्य के संयोग व वियोग के पक्ष को भी खूब संजोया है। इन गीतों में वास्तविकता और कल्पना का बड़ा ही सजीव गुंफन किया गया है। बसंत के इन गीतों को, संगीत के ताल-लय में गाने का आनंद ही दूसरा है। सरदार नामक कवि ने तो ऋतुराज बसंत की उपमा राजा से भी बढ़कर महाराजा से की है। इस काव्य प्रतिभा को जरा निरखे तो सही-
संग की सहेली रही पूजत अकेली शिव,
तीन जमुना के बीर चमक चपाई है।
हों तो आई भागत डरत हियरा में धरैं,
तेरे सोच करी मोहिं सोचित सवाई है।
बंचि है वियोगी जोगि जानि सरदार ऐसी,
कंठ से कलित कूक कोकिल कढ़ाई है।
विविध समाज में दराज सी आवाज होति,
आज महाराज ऋतुराज की अवाई है।
क्या ऊंचे सिंहासन पर बैठाया है बसंत को। यह एक स्वीकारणीय तथ्य है कि कोई भी ऋतु हो, मनुष्य का संबंध उससे सनातन काल से चला आ रहा है। सचमुच बसंत तुम… कामदेव के पुत्र हो। बहुत ही सौंदर्यमय है तुम्हारी छवि। (विभूति फीचर्स)
PM MODI Narendra Modi – विश्व सरकार शिखर सम्मेलन 2024 में भाग लिया , “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन”
يسعدني دائمًا مقابلة @HHShkMohd. إن رؤيته لنمو دبي مرئية بوضوح لكل العالم . غطت مناقشاتنا مجموعة واسعة من المواضيع التي تتراوح بين التجارة والاتصال، وطرق تعزيز الروابط بين الناس. pic.twitter.com/yjdtT7Vmbc
— Narendra Modi (@narendramodi) February 14, 2024
New Delhi – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 14 फरवरी 2024 को दुबई में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया। वे संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और दुबई के शासक महामहिम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के निमंत्रण पर शिखर सम्मेलन में गए है। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में – “भविष्य की सरकारों को आकार देना” विषय पर मुख्य भाषण दिया। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2018 में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया था। इस बार शिखर सम्मेलन में 20 वैश्विक नेताओं की भागीदारी रही इनमें 10 राष्ट्रपति और 10 प्रधानमंत्री शामिल हैं। वैश्विक सभा में 120 से अधिक देशों की सरकारों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने शासन के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किये। उन्होंने “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के मंत्र पर आधारित भारत के परिवर्तनकारी सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय अनुभव को साझा करते हुए बताया कि देश ने कल्याण, समावेशिता और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ कैसे उठाया, उन्होंने शासन के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण का आह्वान किया। उन्होंने एक समावेशी समाज का लक्ष्य हासिल करने के लिए जन-भागीदारी, अंतिम व्यक्ति तक सुविधाओं की पंहुच और महिलाओं के नेतृत्व पर आधारित विकास पर भारत के फोकस को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि विश्व की परस्पर जुड़ाव की प्रकृति को देखते हुए, सरकारों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग करना चाहिए और एक-दूसरे से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन का समावेशी, तकनीकी-स्मार्ट, स्वच्छ, पारदर्शी और हरित पर्यावरण को अपनाना समय की मांग है। इस संदर्भ में, उन्होंने बलपूर्वक कहा कि सरकारों को सार्वजनिक सेवा के प्रति अपने दृष्टिकोण में जीवन में सरलता, न्याय में आसानी, गतिशीलता में आसानी, नवाचार में आसानी और व्यापार करने में आसानी को प्राथमिकता देनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन कार्रवाई के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता पर उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे एक टिकाऊ दुनिया के निर्माण के लिए मिशन लाईफ (पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली) में शामिल हो।
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष जी-20 की अध्यक्षता के रूप में दुनिया के समक्ष भारत की विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर निभाई गई नेतृत्वकारी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। इस संदर्भ में, उन्होंने ग्लोबल साउथ के सामने आने वाली विकास संबंधी चिंताओं को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाने के लिए भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला। बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार प्रकिया का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें निर्णय लेते समय ग्लोबल साउथ की कठिनाईयों और आवाज को उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत “विश्व बंधु” के रूप में वैश्विक प्रगति में योगदान देना जारी रखेगा।
India’s approach to climate change… pic.twitter.com/OhFO54gVzr
— Narendra Modi (@narendramodi) February 14, 2024
Cow Smuggling in : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से गाय तस्करी का बड़ा मामला
Cow Smuggling in : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से गाय तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। जिसमें बताया गया है कि रायपुर के कुम्हारी नाका पर गौ सेवकों ने गायों से भरा एक कंटेनर पकड़ा जिसमें लगभग 80 गायें रखी हुई थीं.आपको बता दें इसमें कम से कम 10 मवेशियों (गाय) की मौत हो गई थी. इसके साथ ही कई मवेशियों के पैर टूटी हुई हालत में पाए गए हैं.
सेवकों ने पकड़ा कंटेनर :
मिली जानकारी के मुताबिक कंटेनर की पहचान छुपाने के लिए आरोपियों के द्वारा फर्जी नंबर प्लेट लगाई थी. इस दौरान जैसे ही गौ सेवकों ने कंटेनर को पकड़ लिया तब उन्होंने मवेशियों को जरवाय स्थित गौठान में ले गए। इस घटना की सूचना मिलते ही वहां भारी संख्या में पुलिस और गौ सेवक मौजूद पहुंच गए.जानकारी के मुताबिक ये मामला अभी कुम्हारी पुलिस संभाल रही है .
सिरोही News – गाय के बछडे़ का धड़ से अलग हुआ सिर मिला, गौ सेवकों में रोष
शिवगंज (सिरोही)। शहर के गोकुलवाड़ी क्षेत्र में सड़क किनारे गाय के बछडे का धड़ से अलग हुआ सिर मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे गोसेवकों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पशु चिकित्सकों की टीम से बछडे के सिर का पोस्टमार्टम करवाया है। ताकि यह जानकारी मिल सके कि यह सिर धड़ से किसी ने अलग किया है या पशुओं ने नौंचा है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को गौसेवक महिपाल रावल को सूचना मिली कि गोकुलवाडी से आखरिया की तरफ जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे एक बछडे़ का सिर पड़ा हुआ है। सूचना मिलने पर एनिमल हैल्प रेस्क्यूअर मौके पर पहुंचे तथा इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस निरीक्षक अचलदान मय पुलिस दल मौके पर पहुंचे तथा मौका मुआयना करने के बाद पशु चिकित्सक को मौके पर बुलवा जांच करवाई गई।
तत्पश्चात पुलिस बछडे़ के सिर को कब्जे में कर पशु चिकित्सालय ले गई। जहां पशु चिकित्सक डॉ. गौतम राजपुरोहित, डॉ. कमलेश सुथार व डॉ. पाताराम चौधरी की मेडिकल टीम से पोस्टमार्टम करवाया गया। इस बीच जानकारी मिलने पर तहसीलदार पेमाराम पुनिया भी पशु चिकित्सालय पहुंचे तथा पुलिस से जानकारी लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया।
बहरहाल, बछडे़ के सिर का पोस्टमार्टम करने के बाद उसे गोसेवकों को सुपुर्द कर उसका रीति रिवाज अनुसार अंतिम संस्कार करवाया गया। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट गोसेवकों को अभी तक नहीं मिल पाई है। इस घटना से गौसेवकों में भी रोष व्याप्त है। गोसेवकों का कहना है कि यदि बछडे को श्वानों अथवा किसी जानवर ने नौंचा है तो काफी ढूंढने के बाद भी उसका धड़ क्यों नहीं मिला। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
अमीषा पटेल ने वेनियोर ज्वेल्स के पहले स्टोर का किया उद्घाटन, कैलेंडर भी हुआ लॉन्च
मुंबई। कहो ना प्यार है, ग़दर और ग़दर 2 से ग़दर मचाने वाली स्टार अभिनेत्री अमीषा पटेल ने मुम्बई में वेनियोर ज्वेल्स के पहले स्टोर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर वेनियोर ज्वेल्स के डायरेक्टर्स हार्दित गजारिया, अमिता एरेन और विनय अग्रवाल ने पुष्पगुच्छ देकर अमीषा पटेल को सम्मानित किया। पहले स्टोर के लांच के साथ ही अमीषा पटेल के हाथों वेनियोर ज्वेल्स का कैलेंडर भी लांच किया गया।अमीषा पटेल ने कहा कि वेलेंटाइन डे है और ऐसे मौके पर इस ज्वेलरी शोरूम की ओपनिंग हुई है। मैंने यहां की ज्वेलरी देखी है बहुत वेराइटी है, क्वालिटी है और सबसे अच्छी बात है कि किफायती दाम में मौजूद है। इंगेजमेंट रिंग से लेकर नेकलेस तक यहां जेवरात की काफी वेराइटी है। मैं वेनियोर ज्वेल्स को ऑल द बेस्ट कहना चाहूंगी। इनकी ज्वेलरी अनमोल है जिस तरह मैंने ग़दर मचाई है वेनियोर ज्वेल्स भी ग़दर मचाने वाले हैं। यहां की ज्वेलरी और यह स्टोर भी बहुत खूबसूरत है, मैं इसकी अपार सफलता की कामना करती हूं। अमीषा पटेल ने फीता काटकर स्टोर का उद्घाटन किया और फिर उन्होंने शोरूम को विज़िट किया। मीडिया से बात करते हुए बताया कि यहां काफी वेरायटी के हीरे के जेवर हैं और किफायती प्राइस में उपलब्ध हैं। साथ ही लोगों के लिए बहुत सारे ऑप्शन्स भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लिए भी अमिता मैडम ने खास डायमंड ज्वेलरी बनाई है।

अमीषा पटेल ने आगे कहा कि ज्वेलरी सिर्फ लड़कियों के लिए ही सीमित नहीं है बल्कि लड़को के लिए भी अब ज्वेलरी फैशन में है। ये वेलेंटाइन वीक है और वेनियोर ज्वेल्स में हर एक लिए कुछ न कुछ जरूर उपलब्ध है।
अमिता एरेन ने इस ओपनिंग पर अमीषा पटेल के आने के लिए उनका आभार जताया और कहा कि अमीषा बहुत प्योर हैं। उनके चेहरे पर हमेशा एक प्यारी सी मुस्कान रहती है। उनकी मौजूदगी हम लोगों के लिए हौसला बढ़ाने वाली बात रही।
हार्दित गजारिया ने कहा कि हमारा उद्देश्य इस स्टोर की शुरुआत करने का यह है कि अब साधारण लोग भी लैब ग्रोन डायमंड खरीद सकें क्योंकि 1 कैरट डायमंड लगभग 5,00,000 रुपये में उपलब्ध है, हम अपने ग्राहकों को समान गुणवत्ता के लैब ग्रोन डायमंड सिर्फ 50,000 रुपये में उपलब्ध कराएंगे।
विनय अग्रवाल, वेनियोर ज्वेल्स के निदेशकों में से एक, ब्रांड की ग्राहक संतुष्टि के प्रति प्रतिबद्धता को उनकी गारंटी वापसी नीति, पारदर्शी मूल्य निर्धारण, और डायमंड की मूल्य के आधार पर 100% विनिमय प्रस्तुति के माध्यम से उपेक्षित किया। उन्होंने जोर दिया कि वेनियोर ज्वेल्स में, ग्राहकों को मन की शांति, स्पष्ट मूल्य निर्धारण, और उपलब्धता के आश्वासन की उम्मीद की जा सकती है जब वे विनिमय के लिए चुनाव करते हैं।
इस अवसर पर हीरे से जुड़े कुछ सवाल भी पूछे गए और सही जवाब देने वालों को खूबसूरत उपहार से प्रदान किया गया।
जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट टर्मिनल भवन फेज-2 का मुख्यमंत्री धामी ने किया लोकार्पण
देहरादून,14 फरवरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट पर नवनिर्मित टर्मिनल भवन फेज-2 का लोकार्पण किया। इस अवसर पर केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। द्वितीय चरण में जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट के टर्मिनल का 14 हजार वर्ग मीटर विस्तार किया गया। अब एयटरपोर्ट के टर्मिनल का कुल विस्तार 42 हजार वर्ग मीटर में हो चुका है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट का टर्मिनल दो चरणों में 486 करोड़ की लागत से बना है।
मुख्यमंत्री धामी ने केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में तेजी से कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनके अनुरोध पर पिथौरागढ़-हिंडन हवाई सेवा की प्रक्रिया शुरू करने और इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के लिए हेलीकॉप्टर की उत्तराखण्ड से शुरूआत करने की बात कहे जाने पर केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय नागरिक उड्डयन उद्योग अमेरिका और चीन के बाद घरेलू यातायात में तीसरे स्थान पर है, इसके लिए उन्होंने नागर विमानन मंत्री को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हवाई सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। पिछले कुछ वर्षों से हवाई यात्रा परिवहन का सस्ता, तेज एवं विश्वसनीय साधन होने के कारण लोगों में अत्यन्त लोकप्रिय बनी है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दीर्घकालिक सोच के कारण ही संभव हो पाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा देवभूमि की देवतुल्य जनता के अतिरिक्त भारतीय संस्कृति और परम्परा के अनुसार ’अतिथि देवों भवः’ के सिद्धांत का पालन करते हुए प्रदेश के बाहर के लोगों को भी सस्ती हवाई सेवा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे एक ओर जहाँ राज्य को अधिक राजस्व प्राप्ति हो रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनमानस को सरल एवं सस्ती हवाई सेवा उपलब्ध करायी जा रही है। भारत सरकार की ’’उड़े भारत का हर नागरिक’’ योजना के अन्तर्गत प्रदेश के विभिन्न सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बेहतर हवाई सेवा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 13 हेलीपोर्ट्स का निर्माण सहस्त्रधारा, चिन्यालीसौड, गौचर, हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोड़ा, नई टिहरी, श्रीनगर, मसूरी, जोशीमठ, धारचूला, हरिद्वार में भी किया जा रहा है। उत्तराखंड धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण राज्य है। राज्य सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को राज्य में आवागमन के लिए हर प्रकार की सुविधा मिले। इसमें हवाई सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसी के साथ-साथ पंतनगर एयरपोर्ट को अंतरराट्रीय एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा ओएलएस सर्वे भी कर लिया गया है। पिछले माह ही जौलीग्रांट से पिथौरागढ़ के मध्य हवाई सेवा का शुभारंभ किया गया। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से देहरादून-अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के मध्य हैली सेवा की शुरूआत की थी, इसको भी नियमित करने की हमारी योजना है। निकट भविष्य में चिन्यालीसौड़ व गौचर से छोटे एयर क्राफ्ट की सेवाओं को शामिल करने के संबंध में भी हम कार्य कर रहे हैं, भारत सरकार से इसके लिए अनुरोध किया जा रहा है। कुछ माह पूर्व प्रधानमंत्री ने आदि कैलाश और जागेश्वर धाम के दर्शन किये थे, उसके बाद आदि कैलाश और जागेश्वर धाम में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों को देश विदेश में नई पहचान दिला रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अंदर हवाई सेवा को बढ़ाये जाने हेतु क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना के अतिरिक्त अन्य हेलीपोर्ट का भी निर्माण राज्य सरकार द्वारा गौजियाना (घनसाली), गैरसैण (चमोली), देघाट-सियालदे(अल्मोड़ा), जखोल एवं जोशीयाड़ा (उत्तरकाशी), डीडीहाट (पिथौरागढ़) में कराया जा रहा है। इसके साथ ही हमारे द्वारा प्रदेश के विभिन्न पर्यटक केंद्रों के दर्शन हेतु जॉय राइड सेवा तथा हिमालयन दर्शन सेवा भी प्रस्तावित है। इन सेवाओं के प्रारंभ होने से राज्य में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उनके लिए यह क्षण कई पहलुओं से भावुक और महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड से उनका पहले से नाता है। उन्होंने 05 साल उत्तराखण्ड से शिक्षा ग्रहण की। उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक शक्ति सम्पूर्ण विश्व में अनूठी है। केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के साथ उन्हें केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री बनने के बाद सबसे पहले जौलीग्रांट एयरपोर्ट के टर्मिनल के प्रथम फेज के कार्यों का लोकार्पण करने का अवसर मिला था। आज देहरादून के इस एयरपोर्ट से देश के 13 शहरों के लिए हवाई सेवा चल रही है।
केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मंत्रालय द्वारा पिथौरागढ़-हिंडन हवाई सेवा के लिए कार्यवाही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के लिए हेलीकॉप्टर की देश में उत्तराखण्ड से शुरूआत की जा रही है। एम्स ऋषिकेश मंड इसके लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की जायेगी। 150 किलोमीटर के दायरे के अन्तर्गत हेलीकॉप्टर द्वारा मरीजों को लाने की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने कहा कि इस एयरपोर्ट से उत्तराखण्ड के अन्य स्थानों को मुख्यमंत्री की सहायता से और तेजी से जोड़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में तीन एयरपोर्ट देहरादून, पंतनगर और पिथौरागढ़ विकसित करने की पहल की है। उत्तराखण्ड में 2014 में मात्र एक हेलीपोर्ट था। जो अब 10 हो चुके हैं, उड़ान 5.0 योजना तक राज्य में 21 हेलीपोर्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक बृज भूषण गैरोला, वर्चुअल माध्यम से सचिव नागर उड्डयन वुमलुनमंग वुअलनाम, अध्यक्ष एएआई संजीव कुमार कार्यक्रम में सम्मिलित हुए ।













