ओमप्रकाश पांडेय लिखित ‘आँचल’ कविता संग्रह को मिली अलका पांडेय और पवन तिवारी की सराहना
मुम्बई। कवि ओमप्रकाश पांडेय के प्रथम कविता संग्रह ‘आँचल’ का विमोचन मुम्बई भाषा परिषद के तत्त्वावधान में 10 सितम्बर 2022 की शाम गरिमामय परिवेश में अनेकानेक कवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका अलका पांडेय ने की। मुख्य अतिथि थे
मुम्बई हिन्दी अकादमी के अध्यक्ष एवं एवं युवा साहित्यकार पवन तिवारी, विशेष अतिथि के रूप में समाजसेवी राम कुमार पाल, वरिष्ठ लेखक सेवासदन प्रसाद तथा आर के पब्लिकेशन के निदेशक रामकुमार के अपनी भूमिका का निर्वहन किया।
कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती वंदना के साथ वरिष्ठ गीतकार रामस्वरूप साहू ने किया।
लोकार्पण के बाद काव्य पाठ का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कविता पाठ करने वाले कवियों में नंदलाल क्षितिज, अरुण प्रकाश अनुरागी, पारमिता षड़ंगी, डॉ. पूनम पटवा, चन्द्रिका व्यास, काविश समर, रामपुरी, पवन तिवारी, डॉ वर्षा सिंह, रमाकान्त ओझा, लहरी, विश्वम्भर दयाल तिवारी, त्रिलोचन सिंह अरोरा, उदय नारायण सिंह निर्झर, सूर्यकांत शुक्ल आदि प्रमुख थे।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार संतोष साहू, मुम्बई अमरदीप के सम्पादक उपेंद्र पंडित, कलाकार संदीप कुमार का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम का शानदार संचालन डॉ वर्षा सिंह ने किया। कार्यक्रम का संयोजन आर के पब्लिकेशन के स्वामी राम कुमार ने किया।
भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ
गाय देश में हमेशा से ही एक संवेनदशील मुद्दा रहा है और इस पर राजनीति होती रही है। मगर जिस समाज में गाय को पूजा जाता है, उसके लिए आस्था अगर कहने भर की हो, दिल से नहीं और वहां इसके लिए कोई कानून नहीं, मन में सच्चा दर्द नहीं हो तो वह कैसा समाज ? हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय को गौ माता भी कहा जाता है। गौ माता के पूजन के बारे में वेदशास्त्रों, धर्मग्रंथों में क्या कहा गया है। इसलिए अगर किसी के हाथों गाय की हत्या हो जाती है तो यह घोर पाप माना जाता है। फिर आज गाय की इतनी दुर्दशा हो रही है। जिसकी हम कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। गाय को रखने वाले लोग स्वार्थी हो गए हैं जब तक गाय दूध देती है। तब तक तो लोग उसे अपने पास रखते हैं और उसके बाद उसका दूध निकाल कर सड़कों पर आवारा रूप से छोड़ देते हैं।
लेकिन देश में कहीं भी उन गायों के लिए कोई प्रवाधान नहीं है, जिन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। नतीजन वे अक्सर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाती हैं। कई बार वे पोलिथीन खा जाती हैं, जिससे गंभीर रूप से बीमार हो जाती हैं। गोशालाओं की दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। अक्सर ही गोशालाओं में भूख से गायों के मरने की खबरें आती रहती हैं। गायों की देखभाल करने के लिए बनाई गई गोशालाओं की दुर्दशा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके चारे और स्वास्थ्य का का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। जो गाय दूध देने के काबिल नहीं रहतीं, उन्हें कुछ लोग सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी सजा का प्रावधान होना चाहिए। गाय को लावारिस सड़क पर छोड़ देना भी सही नहीं है। अगर लावारिस गाय दुर्घटना का शिकार होकर मर जाए तो उसे भी गोवध ही माना जाना चाहिए। गाय महज एक जानवर नहीं है। यह भारतीय समाज के लिए आस्था भी है। कुछ लोग गोवध करके इस आस्था पर चोट करते हैं, जो नहीं होनी चाहिए। गाय के प्रति ये दोहरी नीति समझ से परे है। बहरहाल, गोवंश बचाया ही जाना चाहिए।
भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं। क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज तथाकथित गौभगत और गाय के नाम पर लूटकर खाने वाले चाहे वो कोई भी हो लगभग गायब है। (इक्का-दुक्का को छोड़कर) मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए। क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियां फेल रही है। एक शाम गायों के नाम पर करोड़ों रुपए लेने वाले और गायो के ठेकेदार बागङबिल्ले सब कहा छुप गए? गायों की हो रही है दुर्दशा गाय रो-रो कर पूछ रही है, कहां गए वह गौ सेवक? कहां गई वह राजनीतिक पार्टियां जो मेरे नाम पर सरकार बना ली। कहां गए हो चंदा इकट्ठा करने वाले जो मेरे नाम पर करोड़ों रुपए कमा गए? कहां आज किसान की दुर्दशा हो रही है, उसका पालतू पशु गाय मर रही है लेकिन उसके बस की बात नहीं है।
चुनावी वादों से जितना नुकसान किसान के इस पशुधन गाय का हुआ है शायद ही किसी अन्य पशु का हुआ हो। करोड़ों रुपयों के बजट भी गाय के अच्छे दिन नहीं ला सके। गौमाता की दुर्दशा का अंदाजा गौशालाओ व सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाओं में गाय की अकाल मृत्यु से लगाया जा सकता है। आज हालात ये है कि इस मूक पशु के संरक्षण की ज़िम्मेदारी लेने को कोई सरकार कोई संगठन तैयार नही, गाय सिर्फ राजनीति के नारों मे जरूर ज़िंदा है। सरकार चाहे तो सड़को, राजमार्गो व गली मोहल्लों में भूख-प्यास व बीमारियों से मरती गायों का ज़िला स्तर पर चारागाह व सरकारी भूमि मे संरक्षण कर सकती है, जँहा गोबर व गौमूत्र से जैविक खाद व जैविक कीटनाशक बनाए जा सकते हैं। सरकार गौमूत्र, वर्मी कम्पोस्ट व वर्मीवाश का उत्पादन कर सस्ती दरों पर किसानों को उपलब्ध करा सकती है।
गोबर व गौमूत्र मे सभी प्रकार के 16 पोषक तत्व, एमिनो एसिड्स, कार्बनिक पदार्थ, ह्यूमस व पर्याप्त नाईट्रोजन पाई जाती है जो कि फसलों के उत्पादन के लिए किसी वरदान से कम नही है। जीवामृत, घन जीवामृत, व अन्य जैविक तरल खाद भी गोबर और गौमूत्र से ही तैयार होती है। अगर सरकार इस व्यवस्था पर ध्यान दे और कार्य करे तो ये उत्पाद लघु व सीमांत किसानों को सस्ती दर पर सरकारी किसान केंद्रों व केवीके से उपलब्ध कराया जा सकता है। इस व्यवस्था से जैविक खेती के रकबे को भी बढ़ाया जा सकता है जिसके लिए राज्य व केंद्र सरकार वर्षो से प्रयासरत है । इससे रासायनिक दवा, कीटनाशक ओर रासायनिक खाद के खर्चे को भी कम किया जा सकता है और किसानो को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के साथ साथ आत्महत्या से भी बचाया जा सकता है ।
सरकारों ने सिर्फ कागजों में लीपापोती की धरातल पर कुछ नहीं किया। सब कुछ भगवान भरोसे है। गाय के नाम पर राजनीति चलती रहती है मगर जमीनी हकीकत यह है कि अक्सर मुद्दे उठाए जाते हैं लेकिन उसकी समस्याओं का निराकरण कभी नहीं होता। अगर देश में जिसने भी आज तक गाय नाम से कुछ न कुछ कमाया है, वो एक-एक गाय बचाने का जिम्मा ले तो गाय इस दुर्दशा से बच सकती है।
‘पहली बारिश में’ भीगे आसिम रियाज़ और निशा गुरगैन, आत्मा म्यूजिक से रिलीज हुआ वीडियो
मुम्बई। बिग बॉस फेम आसिम रियाज़ और सोशल मीडिया स्टार निशा गुरगैन की जोड़ी वाला नया गाना ‘पहली बारिश में’ आत्मा म्युज़िक द्वारा रिलीज कर दिया गया है जिसे श्रोताओं और दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह दिलों में हलचल मचा देने वाला सांग है और सभी युवाओं को यह गाना आकर्षित कर रहा है।
इस खूबसूरत गीत के निर्माता वसीम कुरैशी ने आसिम और निशा की तारीफ करते हुए बताया कि आसिम रियाज आज लाखों दिलों की धड़कन हैं और निशा सोशल मीडिया स्टार का दर्जा रखती हैं। मगर काम के प्रति दोनों बेहद संजीदा और काफी प्रोफेशनल हैं। इनकी बहुत ही प्यारी सी बॉन्डिंग सच्चे प्यार और इसकी आत्मा को पेश करती है। गाना बेशक आपको रोमांस के गहरे समंदर में डुबो देगा।
आत्मा म्युज़िक का वीडियो “पहली बारिश में” को एक स्टोरी और नरेशन के अनुसार शूट किया गया है।

सांग में एक प्रेमिका अपने प्रेमी की एक झलक पाने के लिए बेचैन है।
बता दें कि आत्मा म्यूजिक कुरैशी प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मुम्बई का एक पार्ट है और यह नई प्रतिभाओं को प्रोमोट करने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है। आत्मा म्युज़िक सबसे तेजी से बढ़ने वाला म्यूजिक लेबल है। इसका नया रोमांटिक म्युज़िक वीडियो ‘पहली बारिश में’ पहली बारिश के जादू और इसके साथ आने वाले प्यार और रोमांस के जादू को पेश करता है। गाने में सुंदर हिल स्टेशन और हरियाली के बैकग्राउंड में आसिम रियाज़ और निशा गुरगैन के बीच पनपते प्यार को दिखाया गया है।
काशी कश्यप ने इस गीत को कम्पोज़ किया है और भानु पंडित और मुकेश मिश्रा ने इसके बोल लिखे हैं। इस गीत का संगीत भानु पंडित ने दिया है।
गाने में आसिम रियाज़ और निशा की केमिस्ट्री का जादू दिख रहा है, जिसे नदीम अख्तर द्वारा निर्देशित किया गया है।
इस गीत को सुमित भल्ला और अनिता भट्ट ने दिल की गहराई से गाया है और इस का मेलोडियस संगीत दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
‘पहली बारिश में’ अलबम आत्मा म्युज़िक की प्रस्तुति है, और वसीम कुरैशी व गितेश चंद्राकर द्वारा निर्मित है। इसके सह-निर्माता अयूब कुरैशी, अख्तर खान, सचिन बेलदार, विकास तिवारी, डॉ. अनिल उपाध्याय, रवि प्रियांशु, अज़ान कुरैशी, मुहाफ़िज़ कुरैशी हैं। वहीं करण रमानी कंपनी के सीओओ हैं।
गौ सेवा करने वाले पर संकट, अफसरों पर बिफरे बजरंगी
इंदौर। सड़कों पर नजर आने लगे आवारा पशुओं को लेकर नगर निगम सख्त हो गया है। बाड़े तोडऩे की कार्रवाई शुरू कर दी गई, जिस पर बजरंगी तिलमिला गए हैं। चेतावनी दी है कि जो दूध का व्यवसाय कर रहा है और सड़क पर गाय छोड़ रहा है, उस पर तोडफ़ोड़ करें, हमें आपत्ति नहीं पर घर में गाय पालकर सेवा करने वालों पर कार्रवाई की तो हम सड़क पर उतर आएंगे।
कल नगर निगम ने ह्मित नगर और कंडिलपुरा पर दो बाड़ों को तोडऩे की कार्रवाई की। इसके अलावा नगर निगम आयुत प्रतिभा पाल ने कोंदवाड़ा सहित अन्य अधीनस्थों को बोल दिया है कि शहर में फिर से पशुओं के बाड़े तैयार हो रहे हैं। सड़कों पर आवारा पशु नजर आ रहे हैं। जांच कर सूची बनाएं और कार्रवाई करें। उसके बाद में निगम का अमला फिर से सक्रिय हो गया और जांच कर रहा है।
ऐसे घरों में भी पहुंच गया है, जहां पर हिंदू मान्यताओं के हिसाब से गाय की सेवा करने के लिए उसे पाला गया। उनको भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। ये बात बजरंगियों तक पहुंची। इस पर बजरंग दल के विभाग संयोजक तन्नू शर्मा व राजेश ङ्क्षबजवे ने निगम को चेतावनी दी है और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से आग्रह किया है कि वे निगम कर्मचारियों पर अंकुश लगाएं, जो निगम की छवि भी खराब कर रहे हैं। दल गौ सेवकों के समर्थन में खड़ा रहेगा। गौरतलब है कि पूर्व में भी कई बार बजरंग दल के कार्यकर्ता गौ रक्षा के मामले में खुलकर सामने आ चुके है। उस दौरान विवाद की स्थिति बन गई थी।
देश और समाज के लिए कृषि क्षेत्र का सशक्तिकरण अहम – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
New Delhi – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज नई दिल्ली में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) पर परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर, श्री तोमर ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि इससे दूसरे क्षेत्रों को भी मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल कृषि क्षेत्र में विकास के लिए आदर्श मॉडल हो सकता है और पीपीपी परियोजनाओं में आय बढ़ाकर किसानों को लाभान्वित करने पर जोर दिया जाना चाहिए।
श्री तोमर ने कहा कि देश और समाज के लिए कृषि क्षेत्र का सशक्तिकरण खासा अहम है। उन्होंने कहा, “यदि सरकार अकेले ही सभी कार्य करे तो यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है; बेहतर काम सिर्फ जन भागीदारी के साथ ही किए जा सकते हैं। किसी भी क्षेत्र की प्रगति के लिए, सरकार सभी को अच्छा सहयोग दे सकती है।”
श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पिछले आठ वर्षों के कार्यकाल में 1,500 से अधिक निरर्थक कानूनों को समाप्त कर व्यवस्था को सरल बनाया है, जिससे आम आदमी का जीवन आसान हो गया है। उन्होंने कहा, “आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर और पीएम मोदी के आदर्शों से प्रेरित होकर, हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि फिक्की जैसे संगठन देश के हित में और क्या कर सकते हैं? अगर सोच और नजरिया बदलेगा तो बदलाव आएगा। हर किसी का लक्ष्य सही है, लेकिन ऐसे विचारों को अमल में लाना जरूरी है। पीपीपी एक आदर्श मॉडल है जो सभी को लाभान्वित करता है, संबंधित क्षेत्र में प्रगति होती है और देश का समग्र विकास होता है।”
श्री तोमर ने कहा कि व्यापार और उद्योग क्षेत्र मजबूत और संगठित है, उनके पास हर साधन है, वे कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन दे सकते हैं। इस दिशा में सरकार एक लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड, 10,000 कृषक उत्पाद संगठनों (एफपीओ) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी विभिन्न योजनाके माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। सरकार कृषक संगठन बनाने, उन्हें सशक्त बनाने, नई तकनीक उपलब्ध कराने, लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने और वैश्विक मानकों के अनुरूप उपज की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार की पहलों के द्वारा किसानों को प्रोत्साहन दिया गया है और नतीजे अब आपके सामने हैं। यह संतोष की बात है कि पीएम की किसानों की आय दोगुनी करने की प्रतिबद्धता अब उन तक पहुंच चुकी है और फिक्की जैसे संगठन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं।”
श्री तोमर ने उम्मीद व्यक्त की कि कृषि क्षेत्र में वृद्धि हासिल करने के लिए हर कोई प्रयास करेगा और किसानों के लिए इसे ज्यादा लाभकारी बनाएगा। उन्होंने कहा, “यदि कृषि मजबूत है, तो देश मुश्किल हालात में भी खड़ा रह सकता है।”
इस अवसर पर बोलते हुए, सचिव (ए एंड एफडब्ल्यू) श्री मनोज आहूजा ने कहा कि सरकार को कृषि क्षेत्र में निवेश को सुविधाजनक बनाने में एक उत्प्रेरक भूमिका निभानी चाहिए। निजी क्षेत्र और गैर सरकारी संगठनों को एक साथ आना चाहिए और कृषि क्षेत्र की परियोजनाओं में सरकार के साथ साझेदारी करनी चाहिए, जिससे उनका प्रभाव खासा बढ़ जाएगा।
फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री शुभ्रकांत पांडा ने इस बात पर भरोसा जताया कि आज शुरू हुई कृषि में पीपीपी के लिए पीएमयू पहल से निजी क्षेत्र के निवेश के दोहन और सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के उपयोग से कृषि में बड़े स्तर की पीपीपी परियोजनाओं में तेजी आएगी।

इस अवसर पर अपर सचिव (ए एंड एफडब्ल्यू) श्री अभिलक्ष लिखी और डीए एंड एफडब्ल्यू एवं फिक्की के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही राज्यों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी ऑनलाइन शामिल हुए।
कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए कृषि में निवेश और कृषि में सकल पूंजी निर्माण में बढ़ोतरी अहम है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की विभिन्न पहलों के रूप में सार्वजनिक निवेश के संयोजन के कृषि क्षेत्र में गुणक प्रभाव हो सकते हैं। सरकार पैदावार में सुधार, हानि को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में पीपीपी पहल को प्रोत्साहित करने के लिए उत्सुक है। पीपीपी पहल से कृषि में निजी पूंजी में बढ़ोतरी होगी, सार्वजनिक निवेश का लाभ मिलेगा और इस क्षेत्र में गतिशील और मूल्य वर्धित विकास की साझा दृष्टि के साथ केंद्र और राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र और किसान एक साथ आएंगे। पीपीपी पहल से किसानों को लाभ पहुंचाने और उनके प्रभाव में सुधार करने के लिए विभिन्न योजनाओं को एक साथ लाया जाएगा।
इस पीपीपी पहल का मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त मूल्य तैयार करके छोटे किसानों की आय बढ़ाना है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद जैसे इनपुट, बाजार से जोड़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और मूल्य वर्धन शामिल है। पीपीपी पहलों से कृषि प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, जलवायु अनुकूल फसलों में अनुसंधान को बढ़ावा देने, कृषि और ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और कृषि निर्यात में वृद्धि की भी उम्मीद है। इसका एक विशेष उद्देश्य राज्यों को उनके संबंधित कृषि-जलवायु क्षेत्रों की पूरी क्षमता और कृषि-उत्पादों की व्यापक विविधता का दोहन करने और उत्पादकों को घरेलू और निर्यात बाजारों के साथ बेहतर एकीकृत करने में सहायता करना है।
इस पृष्ठभूमि में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और फिक्की ने कृषि में पीपीपी पहलों के विकास की इस संयुक्त पहल का ऐलान किया है।









