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प्राचीन काल से ही भारत में गोधन को मुख्य धन मानते आए हैं

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हिंदू धर्म में गाय को बहुत ही पूजनीय पशु माना जाता है। गाय को मां का दर्जा प्राप्त है तभी तो इस गाय माता कह कर बुलाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय में देवी-देवताओं का वास होता है। गाय की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो लोग नियमित रूप से गाय की पूजा-अर्चना और सेवा करते हैं उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कोई कमी नहीं होती है। शास्त्रों के अनुसार गाय से जुड़े कुछ उपाय करने से व्यक्ति के जीवन सफलता, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वासा माना जाता है। हिंदू धर्म में गाय का विशेष महत्व होता है। गाय के दूध को अमृत माना गया है। इसके अलावा गाय के मूत्र और गोबर का भी विशेष महत्व होत है। आइए जानते हैं गाय से जुड़े कुछ उपाय..

गाय से जुड़े कुछ उपाय

    1. जिस प्रकार से प्रतिदिन स्नान करने के बाद भगवान के दर्शन और पूजा पाठ का महत्व होता है उसी प्रकार से स्नान करने के बाद गाय की पूजा अवश्य करनी चाहिए। गाय की रोज पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
    1. घर में प्रतिदिन खाना बनाने के बाद पहली रोटी के गाय के लिए निकालें और रोटी खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
    2. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग रोज गाय माता की सेवा करते हैं उन पर मां लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और धन-दौलत की वर्षा करती हैं।
    3. गाय के रोजा हरा चारा खिलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। बुधवार के दिन विशेष रूप से हरा चारा खिलाने से सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है। 
    4. गाय के गले और पीठ को सहलाने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और सेहत अच्छी रहती है। 
    5. ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि विवाह जैसे मंगल कार्यों के लिए गोधूलि बेला सर्वोत्तम मुहूर्त होता है, संध्या काल में जब गाय जंगल से घास आदि खाकर आती है तब गाय के खुरों से उड़ने वाली धूल समस्त पापों का नाश करती है।
  1. नवग्रहों की शांति के लिए भी गाय कि विशेष भूमिका होती है। मंगल के अरिष्ट होने पर लाल रंग की गाय की सेवा और गरीब ब्राह्मण को गोदान ख़राब मंगल के प्रभाव को क्षीण कर देता है। इसी तरह शनि की दशा, अन्तर्दशा और साढ़ेसाती के समय काली गाय का दान मनुष्यों को कष्टों से मुक्ति दिलाता है। 
  2. बुध ग्रह की अशुभता के निवारण हेतु गायों को हरा चारा खिलाने से राहत मिलती है।
  3. पितृदोष होने पर गाय को प्रतिदिन या अमावस्या को रोटी, गुड़, चारा आदि खिलाना चाहिए। गाय की सेवा पूजा से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर भक्तों को मानसिक शांति और सुखमय जीवन होने का वरदान देती है।

गाय का धार्मिक महत्व 
प्राचीन काल से ही भारत में गोधन को मुख्य धन मानते आए हैं और हर प्रकार से गौरक्षा, गौसेवा एवं गौपालन पर ज़ोर दिया जाता रहा है। हमारे हिन्दू शास्त्रों, वेदों में गौरक्षा, गौ महिमा, गौ पालन आदि के प्रसंग भी अधिकाधिक मिलते हैं। रामायण, महाभारत, भगवद्गीता में भी गाय का किसी न किसी रूप में उल्लेख मिलता है। गाय, भगवान श्री कृष्ण को अतिप्रिय है। गौ पृथ्वी का प्रतीक है। गौमाता में सभी देवी-देवता विद्यमान रहते हैं। सभी वेद भी गौमाता में प्रतिष्ठित हैं। 

2027 तक अरहर में आत्मनिर्भरता की कवायद जारी

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17 फरवरी 2024, नई दिल्ली: 2027 तक अरहर में आत्मनिर्भरता की कवायद जारी, 1 लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण दालों का बीजोत्पादन: श्री मुंडा – केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) व ग्लोबल पल्स कन्फेडरेशन (जीपीसी) द्वारा आयोजित चार दिवसीय पल्सेस कन्वेंशन का आज (15 फरवरी 2024) शुभारंभ किया। इस समारोह में उपभोक्ता और खाद्य-सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

 

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि भारत, दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक व सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। खेती-किसानी की बेहतरी व किसानों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए भारत सरकार, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में बहुत जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है। केंद्र सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त होने में सहायता मिल रही हैं।

2027 तक अरहर में आत्मनिर्भरता की कवायद जारी

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार दलहन क्षेत्र में सतत कार्य करते हुए आयात पर निर्भरता कम करने व आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के संबंध में लगातार प्रयास कर रही हैं। 2014 से, यानी एक दशक में दलहनी फसलों के विकास में केंद्र के अथक प्रयासों से काफी प्रगति हुई है। भारत चने व कई अन्य दलहनी फ़सलों में आत्मनिर्भर बन चुका है, थोड़ी कमी तूर व उरद में बाकी है, जिसे 2027 तक पूरा करने की कवायद जारी है। इस दिशा में, नई किस्मों के बीजों की आपूर्ति बढ़ाई जा रही हैं, वहीं तूर-उड़द का रकबा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस रबी सीजन में मसूर का रकबा करीब 1 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। तूर की खरीद हेतु पोर्टल लांच किया गया है। इस पर पंजीयन करके किसान संपूर्ण बिक्री एमएसपी पर नेफेड या एनसीसीएफ को कर सकेंगे।

332 मिलियन टन कृषि उत्पादन का लक्ष्य

श्री मुंडा ने कहा कि देश में कृषि उत्पादन 332 मिलियन टन का लक्ष्य है, जिसमें अकेले 29.25 मिलियन टन दाल उत्पादन लक्ष्य है। गरीबों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में कवर किए करीब 81.4 करोड़ लाभार्थियों को 5 साल के लिए मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। यह हमारे कृषि क्षेत्र की प्रगति का प्रमाण है, जो खाद्यान्न के रिकॉर्ड उत्पादन के बल पर मुफ्त वितरण को संभव बना रहा है।

मंत्री ने बताया कि कृषि मंत्रालय के लिए बजट में दलहन क्षेत्र के, स्वास्थ्य व पर्यावरण के महत्व को समझते हुए महत्वपूर्ण वित्तीय परिव्यय की रिपोर्ट दी गई है।

एनएफएसएम-दलहन किसानों के लिए हैं मददगार

कृषि मंत्रालय घरेलू दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी जिलों में क्षेत्र विस्तार व उत्पादकता वृद्धि के जरिये उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एनएफएसएम-दलहन को लागू कर रहा है। इसके अंतर्गत राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से किसानों को मदद दी जाती है।

लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण दालों का बीजोत्पादन

दाल उत्पादन-उत्पादकता बढ़ाने के लिए, नई किस्मों के बीज मिनी किट वितरण, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, केवीके द्वारा तकनीकी प्रदर्शन जैसी पहल भी एनएफएसएम में शामिल की है। दालों के गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता बढ़ाने हेतु 2016-17 से एनएफएसएम के तहत दालों के 150 केंद्र खोले हैं, जिन्होंने 1 लाख क्विंटल से अधिक गुणवत्ता वाली दालों के बीज का उत्पादन किया है।

दालों की 343 उच्च उपज वाली किस्में

केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि दलहन फसल की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के लिए, आईसीएआर स्थान विशिष्ट उच्च उपज वाली किस्म के मिलान वाले उत्पादन पैकेज विकसित करने के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से बुनियादी व रणनीतिक अनुसंधान कर रहा है। सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप व्यावसायिक खेती के लिए दालों की 343 उच्च उपज वाली किस्मों की शुरूआत भी हुई है।

तकनीक से बढ़ाए दलहनी फसलों का उत्पादन 

श्री मुंडा ने बताया कि आने वाले खरीफ सीजन में क्लस्टर फ्रंड लाइन डिमांस्ट्रेशन द्वारा बहुत बड़े क्षेत्र में किस्मों व तकनीकों के प्रदर्शन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसान नई किस्मों एवं तकनीकों से परिचित हो, उन्हें अपनाकर दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाएं। जरूरत इस बात की भी है कि उच्च गुणवत्ता जैसे ज्यादा प्रोटीन वाली चने की किस्म, जलवायु अनुकूल किस्में व ऐसी ही अन्य लाभप्रद तकनीकों का प्रसार तेजी से हो एवं बीज से उत्पाद तक वैल्यू श्रृंखला बने, इसलिए सरकार के प्रयासों के साथ ही निजी क्षेत्र की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए रोडमैप

श्री मुंडा ने कहा कि दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए रोडमैप बनाया गया है, जिसमें बीज विकास अनुसंधान व उपज का आकलन करने सैटेलाइट इमेज जैसी अत्याधुनिक तकनीक प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य, उपयुक्त समय सहित अनुकूलित सलाह प्रदान करने, सिंचाई, निराई-गुड़ाई के लिए प्रौद्योगिकी के साथ हरेक किसान के खेत की मैपिंग शामिल है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से किसानों हेतु बहुत मजबूत, प्रतिस्पर्धी व पारदर्शी बाजार प्रदान किया जा रहा है, जो उपज का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त करने के लिए निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से लेनदेन करने हेतु व्यापक पहुंच प्रदान कर रहा है। यदि किसान खुले बाजार से लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, तो सरकार पीएम-आशा योजना लागू करती हैं, जिसके तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता है। श्री मुंडा ने कहा कि विशेषज्ञों व नीति-निर्माताओं के समर्थन से उम्मीद हैं कि यह आयोजन भारत के छोटे दलहन किसानों के विशाल नेटवर्क के साथ जानकारी साझा करने के माध्यम के रूप में काम करेगा। साथ ही लक्ष्य अनुरूप घरेलू उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

बाजार के लगभग 25हिस्से पर भारत दाल

केंद्रीय मंत्री श्री गोयल ने कहा कि दलहन उत्पादन 2014 में 17 मिलियन टन से बढ़कर अब 26 मिलियन टन से ज्यादा हो गया। यह किसानों की क्षमता-प्रतिबद्धता दर्शाता है। किसानों के उज्जवल भविष्य के लिए केंद्र सरकार हरसंभव उपाय कर रही है। सभी मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को समर्थन देने व उपभोक्ताओं को उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए भारत दाल लांच की गई है। चार महीने की अल्पावधि में ही बाजार के लगभग 25 फीसदी हिस्से पर भारत दाल का कब्जा हो गया है।

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर इथियोपिया के व्यापार व उद्योग तथा क्षेत्रीय एकता मंत्री कासाहु गोफे बलामी, उपभोक्ता मामलों के सचिव श्री रोहित कुमार सिंह, जीपीसी के प्रेसीडेंट श्री विजय अयंगर, नेफेड अध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह, एमडी श्री रितेश चौहान, अतिरिक्त सचिव (कृषि) श्रीमती शुभा ठाकुर सहित केंद्र-राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सहकारी संघों के अध्यक्ष-एमडी, किसानों-व्यापारियों के राष्ट्रीय संघों के पदाधिकारी, मिलर्स, निर्यातक-आयातक व आपूर्ति श्रृंखला प्रतिनिधि मौजूद थे।

3% की ब्याज छूट, दूध उत्पादकों को होगा फायदा; एचआईडीएफ को 2025-26 तक के लिए मिली मंजूरी

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नई दिल्ली: 3% की ब्याज छूट, दूध उत्पादकों को होगा फायदा; एचआईडीएफ को 2025-26 तक के लिए मिली मंजूरी – केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने बुधवार को नई दिल्ली में पुनर्गठित पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) योजना का शुभांरभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उद्योग, एफपीओ, डेयरी सहकारी समितियों को इस योजना का लाभ उठाना के लिए कहा। इसके साथ ही मंत्री परषोत्तम रूपाला ने एएचआईडीएफ से संबंधित एक ‘रेडियो जिंगल’ भी जारी किया। समारोह में श्री रूपाला ने कहा कि यह योजना कोविड काल के दौरान शुरू की गई थी जो पूरे देश के लिए कठिन समय था। उन्होंने कहा कि इस योजना को नया स्वरूप दिया गया है और इसे अगले 3 वर्षों (31 मार्च 2023 से 2025-26 तक) के लिए लागू किया जाएगा।

3% की ब्याज छूट

केंद्रीय ने बताया कि कैबिनेट ने हाल ही में  (1 फरवरी 2024) को अपनी बैठक में 29,610 करोड़ रुपये की लागत के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत एएचआईडीएफ के पुनर्गठन को मंजूरी दी। अब डेयरी सहकारी समितियों को डीआईडीएफ में मिलने वाली 2.5% की बजाय एएचआईडीएफ के तहत 3% की ब्याज छूट का लाभ मिलेगा।

दूध उत्पादकों का होगा फायदा 

डेयरी सहकारी को एएचआईडीएफ के क्रेडिट गारंटी फंड के तहत क्रेडिट गारंटी सहायता भी मिलेगी। यह योजना डेयरी सहकारी समितियों को नवीनतम प्रोसेसिंग टेक्नॉलजी के साथ अपने प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करने में मदद करेगी। इससे देश में बड़ी संख्या में दूध उत्पादकों को फायदा होगा।

योजना की मुख्य बाते

1. 8 वर्ष तक देय 3% की ब्याज छूट

2. व्यक्ति, एफपीओ, डेयरी सहकारी समितियां, निजी कंपनियां, सेक्शन 8 कंपनियां, एमएसएमई

3. क्रेडिट गारंटी अवधि ऋण के 25% तक कवर करती है

4. ऋण राशि पर कोई सीमा नहीं है

5. अनुमानित/वास्तविक परियोजना लागत का 90% तक ऋण की सुविधा

6. अन्य मंत्रालयों या राज्य स्तरीय योजनाओं की पूंजीगत सब्सिडी योजनाओं के साथ तालमेल बिठाना भी शामिल

7. ऑनलाइन पोर्टल www.ahidf.udaymitra.in के माध्यम से आसान आवेदन प्रक्रिया

मध्यप्रदेश में डेयरी प्रसंस्करण व मूल्य सवंर्धन परियोजना 

उद्घाटन समारोह में दिशाला लाइवलीहुड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, एफपीओ ने कहा कि उन्होंने मंथन संगठन के सहयोग से एएचआईडीएफ के तहत प्रति दिन 10,000 लीटर की क्षमता के साथ सीहोर, मध्य प्रदेश में एक डेयरी प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन परियोजना स्थापित की है। उन्होंने विभाग से 1.2 लाख ब्याज अनुदान प्राप्त किया है। अंबा फीड ने बताया कि उन्होंने एएचआईडीएफ के तहत कोयंबटूर में 1,20,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष का एनिमल फीड प्लांट स्थापित किया है।

इस दौरान एबीआईएस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने  पशुधन क्षेत्र में बुनियादी ढांचा बनाने में योजना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे बुनियादी ढांचे के निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।

वैश्विक स्तर पर मोटे अनाजों की पहुंच से किसानों को होगा फायदा 

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17 फरवरी 2024, नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर मोटे अनाजों की पहुंच से किसानों को होगा फायदा – भारत सरकार के प्रयास से वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया गया। मोटे अनाजों को लोकप्रिय बनाने और इन्हें जन आंदोलन बनाने के लिए वर्ष के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए हैं ताकि भारतीय मोटे अनाज, व्यंजनों, मूल्य वर्धित उत्पादों को विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके। भारत ने जी-20 समूह की अध्यक्षता के दौरान समूह के देशों के प्रतिनिधियों की मोटे अनाजों के व्यंजनों से आवभगत कर इसे वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने की कोशिश की और इसकी सभी सदस्य देशों ने सराहना भी की। इसके अलावा मिलेट कलिनरी कार्निवाल, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम, शेफ सम्मेलन, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की प्रदर्शनी, रोड शो, किसान मेले, अर्धसैनिक बलों के लिए शेफ का प्रशिक्षण, इंडोनेशिया और दिल्ली में आसियान भारत पोषक अनाज महोत्सव के दौरान मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया गया।

सरकार ने भारत को ‘श्रीअन्न’ के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए हैदराबाद स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च (आईआईएमआर) को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया है। यह संस्थान किसानों, महिला किसानों, गृह निर्माताओं, विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को मूल्यवर्धित मोटे अनाज खाद्य उत्पादों, दैनिक व्यंजनों आदि के निर्माण पर प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है और उन्हें स्व-उद्यम स्थापित करने में भी सहायता दे रहा है। संस्थान ने मोटे अनाज खाद्य पदार्थों के लिए ‘रेडी टू ईट’ और ‘रेडी टू कुक’ सहित मूल्य वर्धित तकनीक भी विकसित की है।

इस संबंध में उठाए गए अन्य कदमों में ‘ईट्राइट’ टैग के अंतर्गत मोटे अनाज खाद्य पदार्थों की ब्रांडिंग, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना और कृषि व्यवसाय इनक्यूबेटर और प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर आदि को बढ़ावा देना शामिल है। मोटे अनाजों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों को जारी रखते हुए इनके बारे में जागरूकता बढ़ाने और आम जनता के बीच इसे लोकप्रिय बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिल्ली हाट, नई दिल्ली में एक ‘मिलेट्स एक्सपीरिएंस सेंटर’ खोला गया है। सरकारी कर्मचारियों के बीच श्रीअन्न की खपत को प्रोत्साहित करने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों को विभागीय प्रशिक्षणों/बैठकों में श्रीअन्न के नाश्ता और विभागीय कैंटिनों में श्रीअन्न से बनने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा वैश्विक बाजारों में भारतीय मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों, भारतीय मिशनों, प्रसंस्करण, खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ साझेदारी का लाभ उठाने के लिए काम कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक निर्यात संवर्धन मंच (ईपीएफ) की स्थापना की गई है। एक अलग मोटा अनाज-विशिष्ट वेब पोर्टल विकसित किया गया है जिसमें मोटे अनाज के स्वास्थ्य लाभ, उत्पादन और निर्यात आंकड़े, मोटा अनाज निर्यातक निर्देशिका आदि के बारे में जानकारी शामिल है। एपीडा ने भारत की क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए एक व्यापक वैश्विक विपणन अभियान भी आयोजित किया है और इसी के अनुसार 30 आयातक देशों तथा 21 मोटे अनाज उत्पादक राज्यों के ई-कैटलॉग को जारी किया गया है। मोटे अनाजों के लिए एक वर्चुअल व्यापार मेला (वीटीएफ) विकसित किया गया है और इसे विश्व भर के निर्यातकों और आयातकों के लिए उपलब्ध कराया गया है, जो व्यापार सौदों पर बातचीत के लिए एक ही मंच प्रदान करता है।

मोटे अनाजों को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिये सरकार स्तर पर किये जा रहे प्रयासों के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। मोटे अनाजों के निर्यात में साल-दर-साल वृद्धि हो रही है। अब आवश्यकता इस बात की है कि सदियों से भारत के लोगों का मुख्य आहार रहा मोटा अनाज वर्तमान में अधिकांश भारतीयों की थाली से दूर हो गया है। स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद लाभकारी मोटे अनाजों की अधिक कीमतें इसका एक मुख्य कारण हो सकता है। यही वजह है कि भारत के घरेलू बाजार में भी इनकी उपलब्धता अन्य खाद्यान्नों की तुलना में काफी कम है। मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ेगा तो निश्चित ही कीमतें भी कम होंगी लेकिन किसानों को अच्छी कीमत भी मिलनी चाहिये इसलिये सभी मोटे अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बाजार भाव के आसपास रखना होगा। यदि ऐसा कर सकेंगे तो निश्चित ही देश के भीतर मोटे अनाजों की खपत बढ़ेगी और निर्यात से किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जाने के लिए तैयार हैं उर्वशी रौतेला

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मुंबई (अनिल बेदाग)अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जिस तरह की वैश्विक लोकप्रियता और स्टारडम है, उसे देखते हुए यह स्वाभाविक है कि उर्वशी रौतेला को दुनिया भर से विभिन्न सम्मानजनक फिल्म समारोहों में उन्हे आमंत्रित किया जाता है। हालाँकि उनका व्यस्त कार्यक्रम उन्हें यात्रा करने के लिए ज्यादा समय नहीं देता है, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने प्रतिष्ठित बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आखिरकार कुछ समय निकाल ही लिया है।
उर्वशी रौतेला एक सम्मानित अतिथि के रूप में बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इसमे कोई आश्चर्य नहीं है कि बर्लिन का हर कोई बेहद उत्साहित है। उनकी फिल्म ‘दिल है ग्रे’ का प्रीमियर पहले टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हो चुका है और अब वह बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के लिए तैयार है।
काम के मोर्चे पर, इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री के पास अक्षय कुमार के साथ ‘वेलकम 3’, बॉबी देओल, दुलकीर सलमान, नंदमुरी बालकृष्ण के साथ ‘एनबीके109’, सनी देओल और संजय दत्त के साथ ‘बाप’ (हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर एक्सपेंडेबल्स का रीमेक), रणदीप हुडा, ब्लैक रोज़ के साथ ‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’, जैसे प्रोजेक्ट्स हैं। इसके अलावा उर्वशी रौतेला ‘जेएनयू’ नामक एक आगामी फिल्म में भी दिखाई देंगी, जो एक बायोपिक है, जहां वह कॉलेज राजनेता की भूमिका निभा रही हैं और इस में वह एक म्यूजिक वीडियो में ‘जलेबी’ फेम जेसन डेरुलो के साथ भी नजर आएगी।

ज्ञान के सागर में ले जाएंगे “भार्गव भक्ति” पर प्रसारित चार वेदों के विवरण गीत

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मुंबई (अनिल बेदाग) भार्गव भक्ति यूट्यूब चैनल वर्तमान समय में भक्ति से ओतप्रोत गीत-संगीतों के माध्यम से सनातन धर्म की अलख जगा रहा है। जितनी चीजें भार्गव भक्ति के माध्यम से रिलीज हो रही है और हुई है,उसे अभी तक ना ही किसी फिल्म में या ना ही म्युजिक के माध्यम से दिखाया गया है। न ही किसी ने सोचा होगा कि इतनी ज्ञानवर्धक जानकारियां प्राप्त करना इस चैनल पर आसानी से उपलब्ध हो सकता है। एस के तिवारी इसके लिए पिछले कई सालों से मेहनत और लगन से कार्य कर रहे हैं।
भार्गव भक्ति यूट्यूब चैनल पर 52 शक्तिपीठ देवियों और बारह ज्योर्तिलिंग के विवरण गीत रिलीज किया जा चुका है। साथ ही 33 कोटि देवताओं (11 रुद्र, 12 आदित्य, 8 वशु 2 अश्वनी कुमार) के विवरण गीत निरंतर भार्गव भक्ति चैनल सभी सनातनी हिन्दू भाईयों-बहनों तक पहुंचा रहा है।
भार्गव भक्ति यू-ट्यूब चैनल का कॉमर्शियल बिंदु से कोई लेना देना नहीं है। इस चैनल पर प्रसारित होने वाले धार्मिक गीत-संगीत जिसे पसंद आते हैं वह लाइक, शेयर करते हुए सब्सक्राइब कर सकते हैं और कमेंट्स के माध्यम से अपनी सलाह भी दे सकते हैं। यह चैनल सनातनियों के लिए है, यह आय प्राप्त करने का साधन नहीं है।
तिवारी प्रोडक्शन के सीईओ और फाउंडर एस के तिवारी गीतों के एक-एक शब्दों पर विशेष ध्यान देकर अपने चैनल के माध्यम से प्रसारित करते हैं। तिवारी प्रोडक्शन अभी तक सनातन धर्म से जुड़ी कई अहम जानकारियों को प्रदान कर चुके हैं तथा अपने बेहतरीन रिसर्च द्वारा और शब्दों की बारीकी पर ध्यान देते हुए सनातन धर्म से जुड़े रोचक तथ्यों और जानकारियों को गीत के माध्यम से सभी सनातनियों तक पहुंचा चुके हैं और यह प्रक्रिया अनवरत जारी है।
तिवारी प्रोडक्शन के बैनर तले बने चारों वेदों के विवरण गीत का एक ऐसा धार्मिक और अनोखा गीत है जिसको जितना जानने की कोशिश करेंगे उतना ही ज्ञान के अथाह सागर में समाते जाएंगे। वेद ज्ञान की ऐसी सिद्धि है जहाँ पर यह ज्ञात होता है कि यह नश्वर संसार सनातन धर्म के अटूट स्तंभ पर टिका हुआ है। सनातन धर्म के अलावा कोई और दिखाई नहीं देता। सर्वत्र केवल सनातन धर्म ही दृष्टिगोचर होता है।
 इन्हीं सभी बातों को तिवारी प्रोडक्शन के एस के तिवारी अपने गीतों के माध्यम से सम्पूर्ण
सनातन धर्म में चार वेद होते हैं और चारों वेदों से संदर्भित विवरण गीतों को एस के तिवारी अपने भार्गव भक्ति म्यूजिक चैनल के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने जा रहे हैं। इनके इस कार्य के पीछे एक बड़ी सोच, विश्वास और सकारात्मक निर्णय करने की उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से दिखलाई दे रही है।
अभी तक भार्गव भक्ति चैनल जो जानकारियाँ और ज्ञान लोगों तक पहुंचा रहा है ऐसा अभी तक किसी ने  ना ही सोचा होगा और ना ही इस तरह विस्तृत तरीके से लोगों तक पहुंचाया होगा। सनातन धर्म से जुड़े प्रत्येक पहलु, पवित्र स्थल और तीर्थों से जुड़ी ज्ञानवर्धक जानकारियाँ इस चैनल पर उपलब्ध है। इस चैनल से अनेक भक्ति गीत रिलीज हो चुके हैं और आगे भी सनातन धर्म से जुड़ी जानकारियां और ज्ञान की धारा यूं ही अनवरत भार्गव भक्ति चैनल के माध्यम से लोगों तक पहुंचती रहेगी।

भरपूर बिजली से जगमगाता मध्यप्रदेश

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आम नागरिकों के जीवन में खुशहाली बढ़ाने और आर्थिक जीवन को समृद्ध बनाने के लिये ऊर्जा सुरक्षा देने और क्षमता बढ़ाने की नई रणनीति पर मध्यप्रदेश सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। विद्युत क्षेत्र के विकास और विस्तार के लिए  सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। प्रतिदिन गैर कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल रही है। जिससेअब मध्यप्रदेश  भी जगमगाता नजर आ रहा है।मध्यप्रदेश की विद्युत उपलब्ध क्षमता 21840 मेगावाट हो गई है। 29 दिसम्बर, 2023 को प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक 17586 मेगावाट शीर्ष मांग की पूर्ति की गई। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बचे महीनों में 1007 मेगावाट तथा 2024-25 के दौरान 5008 मेगावाट विद्युत उपलब्ध क्षमता बढ़ाने की रणनीति पर भी काम शुरू हो गया है।
विद्युत कंपनियों ने विद्युत व्यवस्था एवं विद्युत प्रणाली को मजबूत बनाने के लिये कई उल्लेखनीय काम किए हैं। इनमें 184 मेगावाट विद्युत उपलब्ध क्षमता में वृ‌द्धि, 12 नवीन अति उच्चदाब उपकेन्द्रों की स्थापना, 636 सर्किट किमी अति उच्चदाब लाईन का निर्माण, 23 नवीन 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्रों की स्थापना, 606 किमी 33 केव्ही एवं 884 किमी 11 केव्ही लाइनों का निर्माण एवं 2373 वितरण ट्रांसफार्मरों की स्थापना प्रमुख हैं। अप्रैल से दिसंबर, 2023 के बीच कुल 7335 करोड़ यूनिट विद्युत प्रदाय की गयी, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 545 करोड़ यूनिट यानी 8 प्रतिशत ज्यादा है।
उपभोक्ताओं को भरपूर लाभ
उपभोक्ताओं के हित में कई योजनाएँ शुरू की गई हैं। अटल गृह ज्योति योजना में प्रदेश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है। पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिये अधिकतम 100 रूपये का बिल दिया जा रहा है। अंतर की राशि सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। योजना में 100 वाट तक के संयोजित भार के 30 यूनिट तक की मासिक खपत वाली उपभोक्ता श्रेणी एल.व्ही. 1.1 के अनुसूचित जाति/जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति माह 25 रूपये का बिल दिया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को योजना के लिये वर्ष 2022-23 में 8082 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। वर्ष 2023-24 के बजट में 4690 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। इस योजना से लगभग 103 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह लाभ मिल रहा है।
अटल कृषि ज्योति योजना में 10 हार्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रूपये प्रति हार्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्सपॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रुपये प्रति हार्सपॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से बिजली मिल रही है। साथ ही 10 हार्सपॉवर तक के मीटरयुक्त स्थाई कृषि पंप कनेक्शन एवं अस्थाई मीटर्ड एवं अनमीटर्ड कृषि पंप कनेक्शनों को भी मासिक नियत प्रभार एवं ऊर्जा प्रभार में रियायत दी गई है। इस योजना से लगभग 26 लाख कृषि उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। वितरण कंपनियों को वर्ष 2022-23 में 12995 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। वर्ष 2023-24 में 11520 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया गया है।
किसानों के हित में 1 हेक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्सपावर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को निःशुल्क बिजली दी जा रही है। इसकी प्रतिपूर्ति के लिये राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को वर्ष 2022-23 में 4997 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई एवं वर्ष 2023-24 में इसके लिये 5775 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया गया है। इससे लगभग 9.36 लाख कृषि उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है।
कृषक/कृषकों के समूहों स्थायी कृषि पंप कनेक्शन देने मांग को देखते हुए “मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना” लागू की गई है। कृषक/कृषकों के समूह के 3 एच.पी. या अधिक क्षमता के स्थायी पंप कनेक्शन के लिये वितरण कंपनी द्वारा 200 मीटर दूरी तक 11 के.व्ही. लाइन का विस्तार एवं वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किया जायेगा। अधोसंरचना विकास लागत की केवल 50 प्रतिशत राशि का वहन संबंधित कृषक/कृषकों के समूह करेंगे। यह योजना 2 वर्षों तक प्रभावशील रहेगी। प्रथम वर्ष में योजनांतर्गत 10,000 पंप कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस)
विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण विद्युत पूर्ति के उद्देश्य से परिणाम आधारित वितरण क्षेत्र योजना रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) लागू की गई है। योजना का उद्देश्य वितरण कंपनियों की समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करना तथा बिजली की प्रतियूनिट लागत तथा राजस्व के अंतर को समाप्त करना है।
योजना में केंद्र सरकार द्वारा प्रीपेड मीटर एवं सिस्टम मीटरिंग कार्य के लिये 15 प्रतिशत राशि तथा विद्युत् अधोसंरचना के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों के लिये 60 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में विद्युत वितरण कंपनियों को देने का प्रावधान है।
इस योजना को वर्ष 2025-26 तक पूरा किया जाना है। योजना में प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग एवं सिस्टम मीटरिंग वितरण हानियों में कमी के लिये प्रस्तावित कार्य एवं प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के कार्य शामिल है। राज्य सरकार ने लगभग 24,170 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को स्वीकृति दी है। लगभग 2.64 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित हो गये हैं एवं वितरण हानियों में कमी के लिए अधोसंरचना निर्माण के लिये लगभग रुपये 7794 करोड़ के कार्यादेश जारी हो गये हैं। इसमें से लगभग रूपये 875 करोड़ के कार्य किये जा चुके हैं।
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश-2023 के अंतर्गत भविष्य की विद्युत मांग की आपूर्ति करने के लिये पारेषण प्रणाली के विस्तार के लिये टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक निविदाओं के माध्यम से अति उच्चदाब उपकेन्द्रों एवं उससे संबंधित लाइनों के निर्माण कार्य को शामिल किया गया है। टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धा बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से राज्य में 1 नग 400 के.व्ही., 7 नग 220 के.व्ही. तथा 27 नग 132 के.व्ही. उपकेन्द्रों तथा संबद्ध पारेषण लाइनों का निर्माण होगा। अब तक 10 उपकेन्द्रों तथा संबंद्ध पारेषण लाइनों के कार्य पूरे किये जा चुके है।
उपभोक्ता सेवाओं में सुधार 
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिये केन्द्रीयकृत कॉल सेंटरों (1912) को क्रियाशील कर उनकी क्षमता बढ़ाई गई है। शिकायतों के निराकरण के बाद उपभोक्ता संतुष्टि के लिये फीडबैक व्यवस्था का भी प्रावधान है। असंतुष्ट उपभोक्ताओं से मैदानी अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत सम्पर्क कर, उनकी समस्या का निराकरण किया जाता है। नये कनेक्शन, संयोजित भार में वृ‌द्धि/कमी, टैरिफ श्रेणी में परिवर्तन, नाम परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं ऑनलाइन दी जा रही है। उच्च एवं निम्न दाब के नये कनेक्शन के लिये आवेदन नाम/भार और उपयोग परिवर्तन, प्रोफाईल में परिवर्तन, बिल भुगतान एवं शिकायत, सेल्फ फोटो रीडिंग, मीटर स्थान परिवर्तन एवं स्थाई विच्छेदन के लिये कंपनियों द्वारा स्मार्ट बिजली एप उपयोग में ला रहे हैं।
उद्योगों के लिए छूट
ग्रामीण फीडरों के माध्यम से आपूर्ति प्राप्त करने वाले उच्चदाब उपभोक्ता के नियत प्रभार में 5 प्रतिशत की छूट और न्यूनतम खपत में 20 प्रतिशत छूट उपलब्ध है। ओपन एक्सेस खपत में कमी कर वितरण कंपनी से बिजली क्रय करने पर बढ़ी हुई खपत पर 1 रुपये प्रति यूनिट की छूट और कैप्टिव प्लांट से खपत में कमी कर वितरण कंपनी से बिजली क्रय करने पर बढ़ी हुई खपत पर 2 रुपये प्रति यूनिट की छूट मिलेगी।(विभूति फीचर्स)

गौ तस्करी में शामिल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में : आमानाका क्षेत्र में पकड़ी गई थी गौ वंशों से भरी ट्रेलर

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आमानाका क्षेत्र में पिछले दिनों गौ तस्करी की खबर सामने आई थी । दरअसल, आमानाका क्षेत्र में गौ रक्षकों ने गौ वंशों से भरी एक ट्रेलर पकड़ी थी । ट्रेलर में गौ वंशों को ठूस ठूसकर भरा गया था, जिसके चलते 11 गौ वंशों की जान भी चली गई थी । इस मामले पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई देखने को मिली है । पुलिस की टीम ने घटना में शामिल दो अंतर्राजीय आरोपी के साथ कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है । आरोपियों के विरूद्ध थाना आमानाका में अपराध क्रमांक 83/2024 धारा 283, 420, 467, 468, 471 भा.द.वि. एवं पशु परिवाहन नियम की धारा 47 (ए), 54(1), 54(2), 54(3) तथा पषुओं के प्रति क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 के धारा 11 तथा छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिक्षण अधिनियम 2004 कि धारा 4, 6, 7, 9, 10, 11 का अपराध पंजीबद्ध किया जा चुका है ।
आरोपियों के पता तलाश के क्रम में द्वारा कृषक पशुओं के मालिकों की जानकारी एकत्र कर पशु मालिकों से पूछताछ करने पर जानकारी प्राप्त हुई की थाना आरंग क्षेत्र के कुछ पशु मालिकों द्वारा पशुओं को मंदिर हसौद ग्राम कुकरा निवासी खेमचंद साहू को बिक्री किया गया है। जिस पर टीम के सदस्यों द्वारा खेमचंद साहू की पतासाजी कर पकड़कर कड़ाई से पूछताछ करने पर उसके द्वारा धमतरी सिहावा ग्राम पाईभाठ निवासी ओंकार कुर्रे को 24 पशु बिक्री करना बताया गया। जिस पर टीम के सदस्यों को धमतरी सिहावा रवाना किया गया। टीम के सदस्यों द्वारा धमतरी सिहावा पहुंचकर ओंकर कुर्रे की पतासाजी कर पकड़ा गया।
प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर ओंकर कुर्रे से कड़ाई से पूछताछ करने पर उसके द्वारा बताया गया कि वह स्थानिय स्तर पर पशुओ को खरीद कर महासमुंद के भटूंण्डा बाजार जिला-नूआपाड़ा उड़ीसा में हैदाराबाद निवासी ईब्राहिम कुरैशी एवं उसके साथियों को बेचना बताया। जिस पर तकनिकी विश्लेषण के माध्यम से ईब्राहिम को लोकेट करने के प्रयास किये जा रहे थे इसी दौरान टीम के सदस्यों को ईब्राहिम को उड़ीसा के नवरंगपुर में लोकेट किया गया। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष टीम गठन कर टीम के सदस्यों को नवरंगपुर उड़ीसा हेतु रवाना किया गया। टीम के सदस्यों द्वारा नवरंगपुर उड़ीसा पहुंच कर ईब्राहिम कुरैशी की पतासाजी करते हुए ईब्राहिम कुरैशी एवं उसके अन्य साथी शाहनवाज को पकड़ा गया। उनसे पूछताछ तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अन्य आरोपियों सानू कुरैशी एवं आमीर रजा को भी पकड़ा गया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर ईब्राहिम कुरैशी के द्वारा खमेचंद साहू, ओंकर कुर्रे, शहबाज, सानू कुरैशी एवं आमीर रजा के साथ मिलकर उक्त घटना को अंजाम देना बताया गया। जिस पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त ट्रक वाहन एवं पायलेटिंग में प्रयुक्त चारपहिया क्रेटा वाहन सी जी/04/एम पी/6846 को जप्त करने के साथ-साथ ट्रक में सवार 83 पशुओं में से 72 जिवित पाई गई जिन्हें सुरक्षार्थ जरवाय, कबीरनगर स्थित गौशाला में रखा गया है एवं 11 मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया जाकर दफनाया गया है।
गिरफ्तार आरोपी
01. सानू कुरैशी पिता सलीम निवासी रायपुर।
02. आमीर रजा पिता शेख अमीन निवासी रायपुर।
03. ईब्राहिम कुरैशी पिता मुख्तार निवासी हैदाराबाद।
04. शाहनवाज पिता शफीक खान निवासी उत्तर प्रदेश।
05. ओंकार कुर्रे पिता राम स्वरूप कुर्रे निवासी सिहावा धमतरी।
06. खेमचंद कुर्रे पिता खिलाव निवासी मंदिर हसौद रायपुर।

गौ हत्या कर मांस बेचने वाले पिता पुत्र समेत छह आरोपित गिरफ्तार

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रायगढ़- धरमजयगढ थाना क्षेत्र अंतर्गत नेवारगांव मे गुरुवार की रात गौ हत्या कर मांस बेचने वाले लोगो को ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस धर दबोचा हैं।
धरमजयगढ़ के पोरिया नेवारगांव धुर आदिवासी क्षेत्र है। इस गांव के कुछ लोग गौ हत्या कर उसके मांस की बिक्री कर रहे थे। इसकी भनक ग्रामीणों को लगने पर उन्होंने मौके पर दबिश दी। इस पर आरोपित मौके से फरार हो गए। गौ हत्या कर मांस बिक्री की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी। इस पर तत्परता दिखाते हुए धरमजयगढ़ पुलिस ने मामले में संलिप्त लोगों की धरपकड़ शुरू की। पुलिस ने मामले में अजीत तिर्की पिता भोदरो एम तिर्की (44 ), परश्याम टोपणो पिता ड्रगू राम (50), रंजित तिग्गा पिता जगलो तिग्गी ( 45), चेतन पन्ना पिता जंगेलो पन्ना (26), निकोलम पिता अजित तिर्की (25), दिलाएम टोप्पो पिता डूगू राम टोप्पो (55) पोरिया धरमजयगढ़ गिरफ्तार किया है।

ग्वालियर में गौ हत्या की ग्लानि व डर से फांसी पर झूला बुजुर्ग

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ग्वालियर (नन्यू)। भितरवार थाना क्षेत्र के जतरथी गांव में एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने गाय के बछड़े को डंडा मार दिया। बछड़े की मौत के बाद ग्रामीणों ने शुद्धिकरण, गंगा स्नान की बात कही। गो हत्या की ग्लानि और डर से घबराकर उसने खेतों पर लगे नीम के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली।
जानकारी के अनुसार डबरा ब्लॉक एवं भितरवार पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जतरथी निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग भूप सिंह गुर्जर पुत्र राम प्रसाद गुर्जर ने गुरुवार को गांव से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित खेत में नीम के पेड़ पर गमछे का फंदा बनाकर फासी लगा ली। बताया जाता है कि बुजुर्ग के हाथों से गलती से गाय के बछड़े को डंडा लग गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।
लोगों ने बुजुर्ग से कहा कि अब शुद्धिकरण और गंगा स्नान करना पड़ेगा नहीं तो गौ हत्या का पाप सिर लग जाएगा। गलती से बछड़े की हत्या का पाप और शुद्धिकरण की बात से वह घबरा गया था। जब सांझ ढलने तक बुजुर्ग रोजाना की तरह घर नहीं पहुंचा तो स्वजन तलाश में निकले तो वह फांसी के फंदे पर झूलता हुआ मिला। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।