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लंपी रोग कहर – वायरल मैसेज ने सरकार की और पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है

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जयपुर:  गोवंश की हो रही लगातार मौत के बीच सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, मगर इस बीच एक वायरल मैसेज ने सरकार की और पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. एक बार फिर राजस्थान बंद का आह्वान हुआ है, लेकिन इसके पीछे किसी सामाजिक संगठन या राजनीतिक दल का नाम नहीं है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज में लिखा है कि 15 सितंबर 2022 को राजस्थान बंद किया जाए. गौ माता के लिए लंपी रोग का इलाज नहीं होने के कारण सभी भाइयों से विनती है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में यह स्टेटस लगाएं, जिससे गौ माता के इलाज के लिए सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम बढ़ाया जाए. एक स्टेटस  गौ माता के नाम जरूरी है.
राजस्थान में पिछले दो महीने से गायों में लंपी रोग कहर बरपा रहा है. इसके कहर से अब तक हजारों गायों की मौत हो चुकी है. गायों के लिए यह बीमारी सरकार से लेकर पशुपालक तक को चिंता में डाल दिया है. फिलहाल इस बीमारी से राजस्थान में 29 लाख 24 हजार 157 गायें संक्रमित हुईं हैं. अब तक इस बीमारी से देश में 50 हजार 366 गायों की मौत हो चुकी है.

नेशनल ज्वेलरी अवार्ड 2021-22 जूरी राउंड का समापन, 23 सितंबर को ग्रैंड फिनाले के लिए मंच तैयार

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मुम्बई। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) नेशनल ज्वैलरी अवार्ड्स (एनजेए) 2021-22 के 11वें संस्करण के विजेताओं की घोषणा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसका ताज होटल, मुंबई में जूरी राउंड का सफलतापूर्वक समापन सम्पन्न हुआ। जूरी सदस्यों में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल थे जिनमें जयकुमार मखीजा (फैशन डिजाइनर), विद्या मजूमदार (वैश्विक अनुपालन निदेशक – एचआरडी एंटवर्प), गौतम शाह (उद्यमी), आनंद शाह (आनंद शाह ज्वेल्स), गौतम बनर्जी (गौतम बनर्जी ज्वैलरी), कामाक्षी कुमार (सौराष्ट्र के राजघराने से), दीपाल पात्रावाला (उद्यमी), पूनम नरूला (टेलीविजन अभिनेत्री) का नाम प्रमुख है।
एनजेए के 11वें संस्करण के विजेताओं की घोषणा 23 सितंबर 2022 को की जाएगी।
ब्राइड्स प्राइड (गोल्ड, डायमंड, जडाऊ, ब्राइडल ज्वैलरी) जैसी कुल 17 श्रेणियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
एनजेए उत्कृष्टता पुरस्कार, स्टोर पुरस्कार, डिजाइनर पुरस्कार, कारीगर पुरस्कार, वर्ष का छात्र पुरस्कार, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पुरस्कार, महिला उद्यमी पुरस्कार और विशेष पुरस्कार (अनमोल रत्न पुरस्कार, युवा रत्न पुरस्कार और उत्तर, पूर्व के लिए वर्ष का रत्न) भी प्रदान करता है।
एनजेए के जूरी राउंड के समापन के बारे में आशीष पेठे (अध्यक्ष, जीजेसी) ने कहा, “जीजेसी का एनजेए पुरस्कार सबसे बड़ा मंच है जो भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के सभी क्षेत्रों को मान्यता देता है और उनकी सराहना करता है। हमारे उत्कृष्ट डिजाइन उद्योग के छिपे हुए रत्न हैं और एनजेए पुरस्कार इस राष्ट्रीय खजाने को केंद्र-स्तर पर ले जाने के लिए ऊंचा करते हैं। प्रतिभागियों द्वारा किए गए प्रयासों को देखकर खुशी होती है जो भारतीय ज्वैलर्स की प्रतिस्पर्धी भावना को दर्शाता है। एनजेए उद्योग द्वारा उद्योग के लिए पुरस्कार है और मैं सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देता हूं।
नीलेश शोभावत (संयोजक-एनजेए, जीजेसी) ने कहा, ”हमें इस वर्ष राष्ट्रीय आभूषण पुरस्कारों के लिए व्यापक प्रतिक्रिया मिली है। लोगों ने अपने ज्वैलरी पीस बनाने के लिए बहुत प्रयास किए हैं और हमें 850 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। पूरे देश को उनकी अथक भावना, ऊर्जा और उत्साह की सराहना करनी चाहिए क्योंकि वे कारोबारी माहौल में कई चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ रहे हैं। एनजेए साबित करता है कि भारत में कारीगरों और शिल्पकारों के साथ-साथ युवा छात्रों की प्रतिभा का एक विशाल पूल है जो इस पेशे को अपना रहे हैं। ग्रैंड जूरी राउंड का समापन हो गया है और उद्योग एनजेए के 11वें संस्करण के विजेताओं के पथप्रदर्शक डिजाइनों को देखने के लिए उत्साहित है।
एनजेए सदस्यों को आभूषण उद्योग में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। यह उद्योग के साथ-साथ बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष ग्राहकों के साथ एक स्थायी इमेजरी बनाने में मदद करता है। एनजेए उद्योग के नवीनतम रुझानों और फैशन के साथ व्यक्तियों के ज्ञान को बढ़ाने में योगदान देता है। एनजेए परोक्ष रूप से उद्योग के डिजाइन और रुझानों के संदर्भ में किसी की क्षमता को प्रोत्साहित करने में मदद करता है। यह सदस्यों को उद्योग में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है। एनजेए अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है और उद्योग में प्रतिभागियों के लिए एक अप्रयुक्त व्यावसायिक अवसर खोलता है।
जीजेसी के बारे में बता दें कि अखिल भारतीय रत्न और आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) घरेलू रत्न और आभूषण उद्योग के निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, वितरकों, प्रयोगशालाओं, जेमोलॉजिस्ट, डिजाइनरों और संबद्ध सेवाओं सहित लाखों व्यापार घटकों का प्रतिनिधित्व करती है। उद्योग के हितों की रक्षा करते हुए, परिषद अपने विकास को बढ़ावा देने और प्रगति करने के लिए 360° दृष्टिकोण के साथ उद्योग, उसके कामकाज और उसके कारण को संबोधित करने के उद्देश्य से कार्य करती है। GJC, पिछले 15 वर्षों से, उद्योग की ओर से और उद्योग के लिए विभिन्न पहल करके सरकार और व्यापार के बीच एक सेतु का काम कर रहा है।

Cow Economy -गौ आधारित खेती कर बंजर जमीन में फूंक दी जान

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Cow Based Natural Farming: भारत में रसायनिक खेती के दुषपरिणामों (Harms of Chemical farming) को देखते हुये ज्यादातर राज्यों में गाय आधारित प्राकृतिक खेती (Natural Farming in India) का चलन बढ़ता जा रहा है. प्राकृतिक खेती अपनाने के लिये किसान ट्रेनिंग (Natural Farming Training) ले रहे हैं और कम खर्च में गौ आधारित खेती (Cow Based Farming) करके हजारों का खर्चा बचा रहे हैं. खासकर बात करें गुजरात राज्य की तो यहां अब ज्यादातर किसानों ने पूरी तरह रसायनों मुक्त खेती (Natural Farming in Gujarat) करके फसलें उगाना शुरू कर दिया है. इससे कीटनाशक और उर्वरक का खर्चा कम और मुनाफा बढ़ रहा है. दुनिया के सामने प्रकृतिक खेती पर इसी तरह का उदाहरण प्रस्तुत किया है, गुजरात के मोरबी जिले में माथक गांव में खेतीहर किसान दाजी गोहिल ने, जिन्होंने 10 एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती (Chemical Free Farming) करके दूसरे किसानों के सामने मिसाल पेश की है.
80,000 की लागत में कमाये 4.5 लाख रुपये
किसान दाजी गोहिल भी साधारण किसानों की तरह ही रसायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों का इस्तेमाल करके खेती किया करते थे, लेकिन खेती की  लागत दिन पर दिन बढ़ती और मुनाफा कम होता जा रहा है. वो हर साल फसलों से बेहतर उत्पादन  के लिये 1.5 लाख रुपये तक खर्च करते थे, जिसके बाद सिर्फ 4 लाख रुपये की आमदनी होती थी. किसान दाजी गोहिल बताते हैं कि उन्होंने गौ आधारित प्राकृतिक खेती के बारे सुना तो था, लेकिन सही तरीका ना पता होने के कारण प्राकृतिक खेती शुरू नहीं कर पाये. इसके बाद साल 2019 में राजकोट के ढोलरा गांव में सुभाष पालेकर की 7 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें ट्रेनिंग लेकर दाजी गोहिल ने प्राकृतिक खेती के गुर सीखे. उन्होंने बताया कि गाय आधारित खेती करने पर शुरुआत में 80,000 तक की लागत आई और आमदनी बढ़कर 4.5 लाख रुपये तक पहुंच गई.
एक घटना ने बदल दी जिंदगी
हर इंसान के जीवन में किसी बड़ी घटना के बाद ही बड़ा बदलाव आता है. ऐसा ही दाजी गोहिल के साथ भी हुआ. प्रगतिशील किसान दाजी गोहिल ने प्राकृतिक खेती से जुड़े कई सेमिनार और शिविरों में जाकर जीवामृत से खेती करने के नुस्खे सीखे, लेकिन प्राकृतिक खेती शुरू करने में काफी झिझक हो रही थी. एक दिन किसी रिश्तेदार की ब्लड़ कैंसर के कारण मौत हो गई, जबकि वो शुद्ध शाकाहारी भोजन और स्वस्थ दिनचर्या का पालन किया करते थे. बस इसी घटना से दाजी गोहिल की जिंदगी को बदल दिया और उन्होंने जहरमुक्त प्राकृतिक खेती करने का मन बनाया. गौ आधारित खेती करने पर शुरूआत में खेती का लागत काफी हद तक कम और आमदनी में बढ़त दर्ज होने लगी.
बंजर जमीन में फूंकी जान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रसायनिक खेती के दौरान दाजी गोहिल को आर्थिक और खेती से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था. कभी-कभी कम उत्पादन के कारण फसल में रसायनिक दवा, खाद, खरपतवारनाशी का प्रयोग करने लगे, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो गई और धीरे-धीरे जमीन बंजर होने लगी. खेती में लगातार बढ़ते कैमिकल के प्रयोग से खेती का मुनाफा कम हो गया, जिसके कारण कर्ज के जाल फंसते चले गये. खेती में रोजाना बढ़ते इस खर्च को बोझ को कम करने के लिये काफी समय तक गेहूं, मूंगफली, बाजरा, जीरा,आजवाइन, धनिया, हल्दी, सौंफ, मूंग, तिल, अरहर, सहजन, सब्जियां, गन्ना और पशुओं के चारे के लिये शुद्ध और गाय आधारित प्राकृतिक खेती की. इससे कुछ महीनों में ही खेती की लागत कम होने लगी और मुनाफा भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा.
जैव विविधता को भी फायदा
खेती में रसायनों के इस्तेमाल के चलते दाजी गोहिल (Farmer Daaji Gohil) की जमीन लगभग बीमार और बंजर हो गई थी, लेकिन प्राकृतिक खेती के जरिये किछ समय बाद ही मिट्टी की उपजाऊ शक्ति वापस लौट आई. जमीन में भूजल स्तर (Ground Water) बढ़ने लगा और खेत-खलिहानों में हरियाली फैल गई. इसके बाद खेत में केंचुआ, मधुमक्खी, तितली और खेती के मित्र कीट नजर आने लगे. बता दें कि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) से उपजे उत्पादों से इंसान के साथ-साथ पशुओं का भी काफी फायदा होता है. साफ-शुद्ध चारा मिलने पर गाय-भैंसों की सेहत अच्छी रहती है, जिससे दूध उत्पादन (Milk Production Tips) बढ़ने लगता है. इससे मिट्टी में जीवांशों की संख्या बढ़ती ही है, साथ ही  किसानों को भी धीरे-धीरे अच्छी आमदनी मिलने लगती है.

गौ हत्या करते हुए एक परिवार रंगे हाथों पकड़ा गया

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रायपुर। नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में गौ हत्या करते हुए एक परिवार रंगेहाथों पकड़ा गया है। आरोपियों के नाम खुर्शीद अनवर (60 वर्ष), उसकी बेटी शहाना, बहू रिजवाना और बेटा अशरफ है। पुलिस ने 3 आरोपियों खुर्शीद, शहाना और रिजवाना को हिरासत में ले लिया है, वहीं बेटा अशरफ फरार हो गया है, जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के पास से गाय का सिर, चारों पैर और दूसरे अंगों को जब्त कर लिया है।
मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी सचिन सिंह ने बताया कि मुस्लिम कब्रिस्तान मोहल्ले के वार्ड नंबर 4 का रहने वाला परिवार जिस हथियार से गाय को काट रहा था, उसे जब्त कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रही है।
इधर गौ रक्षा वाहिनी और सर्व हिंदू संगठन ने घटना के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। आरोपी परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का रहने वाला है। ये परिवार पिछले 2-3 सालों से यहां रह रहा है। पड़ोसियों ने बताया कि ये लोग हमेशा कहीं-न-कहीं से गाय लेकर आते थे। उसे घर के बाहर 2-3 दिनों तक बांधकर रखते थे, लेकिन उसके बाद गाय का कुछ पता नहीं चलता था। अभी 2 दिन पहले भी एक गाय ये लोग लेकर आए थे, लेकिन आज सुबह से ही वो दिखाई नहीं दे रही थी।

 

2019 में ही लंपी वायरस की जानकारी मिल चुकी थी , इन तीन सालों में सरकारों ने क्या किया?

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हम भारतीय गाय को ‘माता’ मानते रहे हैं और उसकी पूजा भी करते हैं। उसमें देवत्व की छाया देखते हैं। उसके मूत्र और गोबर तक का ‘औषधि’ की तरह इस्तेमाल करते हैं, लेकिन भयावह सच यह है कि देश के 16 राज्यों में लंपी वायरस से न केवल 75,000 से अधिक गायें मर चुकी हैं, बल्कि 15 लाख से ज्यादा संक्रमित हैं। यह कोई सामान्य आंकड़ा नहीं है। राजस्थान का एक वीडियो सार्वजनिक हुआ था, जिसमें लंबे-चौड़े मैदान में सैंकड़ों गायों के शव लावारिस और बिखरे हुए पड़े थे। चील, कौए, गिद्ध उन शवों को नोंच-नोंच कर खा रहे थे।
इन पक्षी-जानवरों का यही प्राकृतिक भोजन है, लेकिन गाय हमारी माता है। हमारी मांएं मर रही हैं। क्या उनके स्वास्थ्य, पालन-पोषण के प्रति हम इतना बेपरवाह और संवेदनहीन हो सकते हैं? राजस्थान में ही 50,000 से ज्यादा गायें मर चुकी हैं, जो सर्वाधिक आंकड़ा है।
हमें तो ‘गौ माता’ वाले कथन आडंबर और स्वार्थी लगते हैं। लंपी वायरस धीरे-धीरे देश भर में फैल सकता है, लिहाजा पशुधन विशेषज्ञों ने इसे कोरोना वायरस की तर्ज पर ‘महामारी’ घोषित करने के आग्रह सरकार से किए हैं। गौ माता मर रही है अथवा संक्रमण की पीड़ा झेल रही है या उसके प्रजनन की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, यह सब कुछ अचानक नहीं हुआ है। 2015 में तुर्की और यूनान में लंपी वायरस के मामले सामने आए थे, तो वे आपदा और त्रासदी साबित होते गए।
भारत में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इस संक्रमण ने गौवंश को चपेट में लेकर बीमार करना शुरू किया, तो 2019 में ही लंपी वायरस की जानकारी मिल चुकी थी। इन तीन सालों में सरकारों ने क्या किया? अब यह प्रकरण त्रासदी में तबदील हो चुका है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 तक सभी पशुओं के टीकाकरण की बात कही है।
क्या अजीब संयोग है कि एक तरफ हमारी गौ माता मर रही है, तो दूसरी ओर ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री हुलहुलाते रहे कि दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व में ‘नंबर वन’ देश है। यह उद्योग 8.5 लाख करोड़ रुपए का है, जो गेहूं और धान से भी बेहतर है। करीब 8 करोड़ छोटे किसानों, ग्रामीण महिलाओं और अन्य लोगों को रोजग़ार प्राप्त है। प्रधानमंत्री ने भारतीय मवेशियों की तगड़ी नस्लों का भी जिक़्र किया, जो मौसम और माहौल के अनुकूल खुद को ढालने में सक्षम हैं, लेकिन लंपी वायरस पर नींद अब खुली है कि टीकाकरण के बयान की शुरुआत हुई है।
दरअसल जो हाहाकार कोरोना वैश्विक महामारी को लेकर मचा था, वह चीत्कार गौवंश नहीं मचा सकता, क्योंकि कुदरत ने मनुष्य की तरह शब्द, भाषा और बोलने की क्षमता पशुओं को नहीं दी है। लंपी से संक्रमित गाय को 105 डिग्री तक बुखार हो जाता है, शरीर पर चकत्ते फूट पड़ते हैं, आंख-नाक बहने लगती हैं, दुबली हो जाती है, लार टपकने लगती है, बदबू आने लगती है, दूध देना बंद कर देती है और अंतत: वह मर जाती है।
कितनी पीड़ा और तकलीफ उसे झेलनी पड़ती है, उसके पालक ही कुछ समझ पाते होंगे! इतना कुछ होने और महामारी के आसार बनने के बावजूद केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला यही कह सकते हैं कि समन्वय बनाया जा रहा है। क्या उनके पास कोई ब्लूप्रिंट नहीं है कि ऐसी बीमारी से कैसे निपटा जाए? गाय गांवों की तो अर्थव्यवस्था का प्रतीक है। औसतन गाय 50,000 रुपए से 1,00,000 रुपए तक में खरीदी जा सकती है।
यदि गाय दूध दे रही है और वह लंपी से संक्रमित होकर मर जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। औसत ग्रामीण इस नुकसान को नहीं झेल सकता। यदि गौवंश इसी तरह समाप्त होता गया, तो दूध-उत्पादन के उद्योग का क्या होगा? हमने गाय माता को आवारा घूमते हुए और प्लास्टिक पन्नी खाते हुए भी देखा है।
क्या माता की देखभाल इस तरह की जाती है? कमोबेश स्वास्थ्य के संदर्भ में भारत सरकार और राज्य सरकारों को बहुत सचेत रहना पड़ेगा, क्योंकि बीते दिनों कोरोना संक्रमण के आंकड़े एक बार फिर बढऩे लगे थे, तो प्रधानमंत्री को सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलानी पड़ी। सरकारों के पसीने छूटने लगे थे। हम कोरोना वायरस से नई लड़ाई लडऩे की मन:स्थिति में नहीं हैं, लिहाजा गौ माता की भी चिंता करनी चाहिए।

इस महामारी के कारण तेज गति से पशुओं की मौतें हो रही हैं। पशुओं को मरने से बचाना होगा। अगर पशु इसी तरह मरते रहे, तो पशुपालन का व्यवसाय ठप पड़ जाएगा और करोड़ों लोगों के सामने रोजी-रोटी का प्रश्न खड़ा हो जाएगा। सरकार को ठोस कार्ययोजना बनानी होगी।

 

सुर झंकार द्वारा मुंबई सिनेमा पुरस्कार 2022 का आयोजन सम्पन्न

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डॉ राजन हांडा, ममता श्रीवास्तव, दिलीप सेन, अगम कुमार निगम और कमल कुमार हंसराज सहित अन्य हस्तियों की रही उपस्थिति

मुम्बई। सुर झंकार कल्चरल सोसाइटी द्वारा मुम्बई सिनेमा अवार्ड 2022 का भव्य आयोजन मुम्बई के रंगशारदा में किया गया जहां मुख्य अतिथि डॉ राजन हांडा थे। ममता श्रीवास्तव द्वारा आयोजित इस पुरस्कार समारोह में दिलीप सेन, अली खान, आरती राज़दान, अगम कुमार निगम और कमल कुमार हंसराज (सोनोटेक कंपनी) सहित कई मेहमान मौजूद रहे, जिन्हें सम्मानित किया गया।
गणेश वंदना से इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सिंगर सुभाष कश्यप ने गीत “तू गंगा की मौज” सुनाया तो महेंद्र शर्मा ने “है दुनिया उसी की” गीत गाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। संजीव सूरी ने “इश्क में हम तुम्हे क्या बताएं” और ओम चतुर्वेदी ने “जो तुमको हो पसन्द वही बात कहेंगे” गाया।
सुरीली और वर्षा ने गीत ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’ पर डांस किया। सुरीली इस कार्यक्रम के आर्गेनाइजर ममता की बेटी भी हैं।
सोनू निगम के पिता अगम कुमार निगम ने “रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ” गाया।


सिंगर उषा तिमोथी ने एक गीत ‘जब जब चांद निकला, मुझे तुम याद आए गाया’ जो तकदीर फ़िल्म के लिए उन्होंने राजश्री प्रोडक्शन के लिए गाया था। उषा ने कहा कि मोहम्मद रफी ने मेरा नाम इस गीत के लिए सुझाया था। अगम कुमार निगम के साथ उषा ने ‘बेखुदी में सनम उठ गए जो कदम’ गाया।
उषा ने ‘दिल ने पुकारा और हम चले आए’ गीत भी गाया। वहीं कत्थक नृत्य में पीएचडी डॉ साक्षी मदान ने डांस पेश किया।
ऑर्गनाइजर ममता श्रीवास्तव ने रफी और लता को ट्रीब्यूट पेश किया। ममता की एक खूबी यह भी यह है कि वह दिव्यांगों को संगीत सिखाती हैं। ममता श्रीवास्तव ने गीत गाया “चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गए।”
इस प्रोग्राम में करण राज़दान की आने वाली फिल्म हिंदुत्व का भी प्रोमोशन हुआ और फ़िल्म का टाइटल सांग दिखाया गया। करण राज़दान का अवार्ड आरती राज़दान ने लिया।
सुर झंकार संस्था द्वारा रंग शारदा सभागार में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में कमल रहेजा ने जबरदस्त एंकरिंग करते हुए दर्शकों को बांध कर रखा। कमल ने करण राज़दान की आने वाली फिल्म हिंदुत्व में एक किरदार भी निभाया है।
मुम्बई सिनेमा अवार्ड 2022 से वाइस ओवर आर्टिस्ट संजय केनी को भी सम्मानित किया गया उन्होंने स्टेज मुन्ना और सर्किट की आवाज़ में मिमिक्री भी की। मिस विनी राणा को उनकी अपकमिंग वेब सीरीज हनीमून डायरी के लिए बेस्ट प्रोमिसिंग न्यूकमर ऎक्ट्रेस के रूप में सम्मानित किया गया।
सिंगर उषा भी मुम्बई सिनेमा अवार्ड 2022 से सम्मानित हुईं। डॉ शैलेन्द्र श्रीवास्तव, राजश्री प्रोडक्शन से पीके गुप्ता, विजय उपाध्याय, अली खान को भी पुरुस्कार प्रदान किया।
संगीतकार दिलीप सेन ने अवार्ड लेने के बाद कहा कि मुम्बई सिनेमा अवार्ड की ऑर्गनाइजर ममता श्रीवास्तव का यह बेहतरीन प्रयास है।
संजय केनी, ऎक्ट्रेस तृप्ति राजपूत, अगस्त्य आनंद, संजीव सूरी, सुभाष कश्यप, महेंद्र शर्मा, वसंत भंडारी, ऎक्ट्रेस मिनी बंसल को भी इस अवार्ड से सम्मानित किया गया तो वहीं सुधीर गायकवाड़ ने करीना का अवार्ड लिया। मधु भारती, प्रदीप जैन और अभिलाषा शर्मा को भी पुरुस्कार मिला। खास बात यह रही कि दिव्यांग कलाकारों की सहायता के लिए इस प्रोग्राम का आयोजन किया गया। अमरीका में रहने वाली भारतीय मूल की सिंगर अल्का भटनागर का अवार्ड रमाकांत मुंडे ने लिया। एक दिव्यांग कलाकार ने डांस परफॉर्म करके सबका दिल जीत लिया।
पुरस्कार समारोह के प्रचार की जिम्मेदारी रमाकांत मुंडे (मुंडे मीडिया) ने बखूबी निभाई।

स्कूटी शो रूम में भीषण आग, 8 जिंदा जले, कई अस्पताल में भर्ती

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इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की खबरों के बाद अब इसके एक शोरूम में ही आग लगने की घटना सामने आई है। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई घायल हो गए हैं। सिकंदराबाद के मोंडा मार्केट इलाके में सोमवार रात इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में भीषण आग लग गई। पुलिस ने पुष्टि की है कि आग में दो महिलाओं सहित अब तक 8 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। घायल लोगों को इलाज के लिए पास के गांधी और यशोदा अस्पतालों में भर्ती कर दिया गया है। इस घटना से जुड़ी कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वहीं, हैदराबाद के नॉर्थ जोन के डीसीपी ने जानकारी दी है कि इस आग की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है।

वहीं, अधिकारियों को अंदेशा है कि ये आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है। पार्किंग एरिया, शोरूम और बेसमेंट में खड़े वाहनों में आग लग गई। देखते ही देखते चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया। होटल के कर्मचारियों और मेहमानों ने आग और धुएं को निकलते देखा और दमकल विभाग को सूचित किया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इमारत की खिड़कियों से ही बाहर निकलने लगे तो कुछ कूदने लगे। कई लोग अंदर घुटन से भी मरे हैं।

इस इमारत में केवल एक ही प्रवेश द्वार होने के कारण कुछ लोग इसमें फंस गए और उनकी मौत हो गई। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची और बचाव कार्य जारी है। दमकलकर्मियों ने सीढ़ी का इस्तेमाल कर ऊपरी मंजिलों में फंसे लोगों को बचाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास की इमारतों से लोगों को बाहर निकाला।

पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान पद्मश्री दिलीप वेंगसरकर ने स्कूली क्रिकेटरों के लिए बनी,’इंडियनस्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ की विदिवत घोषणा की है

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पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान पद्मश्री दिलीप वेंगसरकर ने स्कूली क्रिकेटरों के लिए बनी,’इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ की विदिवत घोषणा की है

हैदराबाद: एक नए नेशनल क्रिकेट बोर्ड ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट'(आईएसबीसी)(ISBC )की शुरुआत की गई।आईएसबीसी एक गैर-लाभकारी संगठन है,जोकि पूरे भारत में युवा क्रिकेट प्रतिभाओं की तलाश और प्रशिक्षित करेगी,खास करके ग्रामीण इलाकों में छुपी और होनहार प्रतिभाओं को नया भविष्य और मौका देगी। जिसकी घोषणा के लिए हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में सोमवार १२ सितंबर २०२२ को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। जिसकी घोषणा और बोर्ड की जानकारी भारतीय क्रिकेट के दिग्गज, पूर्व कप्तान,मुख्य चयनकर्ता तथा इस बोर्ड के मुख्य सलाहकार पदमश्री दिलीप वेंगसरकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका,अध्यक्ष अंकेश राठौर, सेक्रेटरी पदम राज पारख तथा बोर्ड के सभी पदाधिकारी व सदस्यों ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और कार्यक्रम को सफल बनाया।
             इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका ने कहा,” आईएसबीसी ने स्कूली क्रिकेटरों को तैयार करने में प्रवेश किया है।2011 में तेलंगाना के ग्रामीण क्रिकेटरों के लिए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ तेलंगाना (CAT) द्वारा ‘तेलंगाना स्कूल प्रीमियर लीग'(TSPL) 5120 स्कूली क्रिकेटरों के साथ एक बड़ी सफलता थी ,जिसके तहत तेलंगाना राज्य के 31 जिलों ने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और 550 मैच हुए। जिसमें ग्रामीण कुछ असाधारण क्रिकेट प्रतिभाओं को देखा और उनको विकसित करने के लिए ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट” का आज शुरुवात की है। “

                   पूर्व क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर ने इस अवसर बोर्ड के लोगो का धन्यवाद किया और कहा,” यह एक अच्छी पहल है।इससे हमारे युवा पीढ़ी के बच्चों को एक अच्छा अवसर व प्लेटफार्म मिलेगा। अच्छे व टैलेंट लोगों को सही दिशा मिलेगी,खासकर के जो ग्रामीण इलाकों में छुपी और वंचित प्रतिभाएं है,उनको सुनहरा मौका मिलेगा।”
         अध्यक्ष अंकेश राठौर ने कहा,”भारत को स्कूली क्रिकेटरों को तैयार करने के लिए एक संगठित ढांचे की जरूरत थी,जो कि आईएसबीसी पूरा करेगा।”
         सेक्रेटरी पदम राज पारख ने कहा,” हमें 19 देशों का एक स्कूली समूह बनाकर खुशी हो रही है, जिसके तहत हम 2023 के अंततक में “स्कूल वर्ल्ड कप” आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।”
          आईएसबीसी 2023/24 के लिए जुलाई/अगस्त के महीने से क्रिकेट गतिविधियां शुरू करेगा।के बाद दिसंबर 2022 में अनुसूची और भागीदारी की घोषणा की जाएगी। आईएसटीएल (ISTL )के तहत शैक्षिक छात्रवृत्तियां होंगी,भारत और विदेश में आईसीसी स्तर की अकादमियों में विशेषज्ञ क्रिकेट प्रशिक्षण शुरू करेगा।इन सदस्यों को सर्वसम्मति से आईएसबीसी के लिए चुना गया,जोकि 3 साल की अवधि के लिए है।अध्यक्ष अंकेश राठौर (राजस्थान), उपाध्यक्ष संध्या अग्रवाल (मध्य प्रदेश),वाई सुदर्शन बाबू (आंध्र प्रदेश),संग्राम लोंकर (महाराष्ट्र),सचिव पदम राज पारख (राजस्थान),संयुक्त सचिव मोहम्मद युसूफ (तमिलनाडु),डॉ. एस सेंथिल कुमार (तमिलनाडु),कोषाध्यक्ष डी. श्रीनिवास रेड्डी (आंध्र प्रदेश),कार्यकारी समिति जयेश गांधी (महाराष्ट्र),वर्षा शर्मा (मध्य प्रदेश),टी श्रीनिवास रेड्डी (आंध्र प्रदेश), सीएच विजय कुमार (आंध्र प्रदेश),अमित बोकाडिया (राजस्थान),अध्यक्ष :- अभिषेक आवला (तेलंगाना),,संस्थापक-सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका (तेलंगाना), प्रमुख संरक्षक भाजपा राज्यसभा सांसद डॉ के लक्ष्मण, संरक्षक जैतारण से भाजपा विधायक श्री अविनाश जी गेहलोत इत्यादि है।

गौशालाओं में सहारा न मिलने से अधितांश गौ-वंश सड़कों पर रहते हैं – हर साल सड़कों पर मारी जा रहीं 500 से ज्यादा गाय

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छतरपुर। गौशालाओं में सहारा न मिलने से अधितांश गौ-वंश सड़कों पर रहते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। दुर्घटनाएं रोज हो रही हैं, जिससे इंसान घायल हो रहे हैं, कई बार जान भी जा रही है। गौ-वंश या तो घायल होकर जिंदगीभर के लिए अपाहिज हो जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनकी मौत हो जाती है, या दुर्घटना के दिन ही मारे जाते हैं। छतरपुर जिले में ही हर साल तमाम छोटे-बड़े हादसों के कारण 500 से ज्यादा गौवंश की मृत्यु की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि हादसों के आंकड़ों का कोई सरकारी संग्रहण नहीं किया जा रहा है लेकिन गौसेवा के लिए काम करने वाले गौ चिकित्सक बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हादसों के कारण बड़ी संख्या में गौवंश मारा जा रहा है। छतरपुर में गौ चिकित्सालय संचालित करने वाले रविराज सिंह ने बताया कि हर साल लगभग 500 से 700 गायों का वे उपचार कर रहे हैं जिनमें 500 से ज्यादा गाय मारी जा रही हैं।
सड़क पर बैठने से हो रहे हादसे
गायों के मरने के आंकड़े बरसात के सीजन में तेजी से बढ़ जाते हैं। आवारा गौवंश खेतों की जगह सूखी हुई सड़कों पर बैठता है जहां तेज रफ्तार वाहनों के कारण इनकी जान चली जाती है। कई बार हादसों के कारण वाहन चालक भी मारे जाते हैं। इनके भी वर्गीकृत आंकड़े यातायात पुलिस के द्वारा एकत्रित नहीं किए जा रहे। कुल मिलाकर सड़कों पर होने वाले हादसों का यह सिलसिला तब तक नहीं थम सकता जब तक इस गौवंश के पुर्नस्थापन के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाएं।
100 गौशालाएं, लेकिन नहीं मिल रहा सहारा
जिले के गौवंश के पालन के लिए गोशालओं का निर्माण किया गया है। पूरे जिले में 170 गोशालाएं स्वीकृति हुई, जिसमें से 100 बन चुकीं हैं, लेकिन जो गोशालाएं बनकर तैयार हो गई है। उनमें गोवंश को सहारा नहीं मिल पा रहा है। कुछ गोशालाएं तो शुरु होने के बाद बंद हो गई। ऐसे में लाखों रुपए खर्च के बाद भी गोवंश सड़कों में मारे-मारे फिर रहे हैं। गोवंश हर रोड़ सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। इन घटना में गौवंश के साथ-साथ वाहन चालकों को भी छति हो रहे हैं।
2019 से हर साल बन रही गोशालाएं
छतरपुर जिले में वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायतों में लगभग 29 गौशालाएं 28 लाख की लागत से बनाई गई थीं। इनमें बकस्वाहा में 4, बड़ामलहरा में 3, बिजावर में 5, राजनगर में 4, छतरपुर में 3, नौगांव में 6, गौरिहार में एक, लवकुशनगर में 3 गौशालाएं बनाई गई हैैं। वहीं वर्ष 2020-21 में करीब 70 से अधिक गौ-शालाएं मनरेगा से बनाई गई हैं। फिर भी गौ-वंश को आसरा नहीं मिल पा रहा है।
अनुदान वाली 12 गोशालाएं
छतरपुर जिले में लगभग साढ़े 5 लाख गोवंश हैं, जिसमें ज्यादातर आवारा है। जिले में 12 गौशालाएं अनुदान से संचालित हैं जिन्हें 20 रूपए प्रति जानवर प्रति दिन के हिसाब से सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। हालांकि इनमें से सिर्फ 8 गौशालाएं ही ऐसी हैं जो सही तरीके से संचालित हो रही हैं। ये 8 गौशालाएं जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम राधेपुर, महोबा रोड पर स्थित दयोदय गौशाला, बारीगढ़ क्षेत्र में धंधागिरी गौशाला, सिजई में परमानंद गौशाला, लवकुशनगर क्षेत्र में कन्हैया गौशाला, नौगांव क्षेत्र में बुन्देलखण्ड गौशाला, बक्स्वाहा में पड़रिया गौशाला एवं बिजावर के ग्राम गुलाट में नंदिनी गौशाला शामिल है। इनमें से दो बुन्देलखण्ड गौशाला एवं सिजई की परमानंद गौशाला में साढ़े चार सौ से अधिक मवेशी रहते हैं।
गौवंश की सेवा कर रहे संस्थान, सरकारी मदद से दूर
छतरपुर जिले में अनेक संस्थान ऐसे भी हैं जो बगैर सरकारी मदद के गौवंश की सेवा कर रहे हैं। छतरपुर के साईं मंदिर के समीप गौसेवक रविराज सिंह और उनकी 15 सदस्यीय टीम एक गौ चिकित्सालय चला रही है। यह टीम सड़कों पर हादसों के शिकार गौवंश की सूचना मिलने पर अपने वाहन से उसका रेस्क्यू करते हैं और फिर उसे उपचारित करते हैं। रविराज सिंह बताते हैं कि 15 सदस्य आपस में सेवा का समय निर्धारित कर लेते हैं एवं पशु चिकित्सक डॉ. दिनेश गुप्ता के मार्गदर्शन में गायों का उपचार करते हैं।

एलोपैथी के साथ आयुर्वेद और होम्योपैथी में भी है लंपी का इलाज

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भोपाल, 12 सितंबर । मध्यप्रदेश गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन कार्य परिषद के अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने प्रदेश की गौ-शालाओं में कार्यरत गौ-सेवकों से कहा कि वे लंपी पीड़ित बीमार गाय की सेवा करने के बाद अच्छी तरह साबुन से हाथ धोएँ, उसके बाद ही कोई अन्य कार्य करें। उन्होंने कहा कि लंपी चर्मरोग मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन यदि गौ-सेवक बीमार गाय की सेवा वाले हाथों से ही दूसरी गाय को स्पर्श करते हैं तो उस गाय को यह संक्रमण फैल सकता है।
स्वामी जी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि लंपी के लक्षण मिलते ही तुरंत निकट के पशु चिकित्सालय या औषधालय में सम्पर्क करें। एलोपैथी सहित आयुर्वेद और होम्योपैथी में भी इसका इलाज है। संक्रमित पशु 10 से 12 दिन में ठीक हो जाता है। प्रभावित गाय को गौमूत्र, गोबर और मट्ठा इन तीनों पदार्थों को पानी में मिला कर गाय को स्नान कराने से भी लाभ मिलता है। पानी पीने की नाँद में चूने की पुताई करें और पानी में सेंधा नमक मिलाएं। पानी में नीम की पत्तियाँ और थोड़ी पिसी हल्दी मिला कर उबालें और गुनगुना होने पर गाय को स्नान कराने से भी राहत मिलती है।
उन्होंने कहा कि पंचगव्य डॉक्टर एसोसिएशन चेन्नई के अनुसार 100 मिलीलीटर नीम तेल, 100 ग्राम पिसी हल्दी, 10 मि.ली. तुलसी पत्ता रस और 20 मि.ली. एलोवीरा का रस मिला कर बनाये गये पेस्ट को घाव पर लगाने से एक हफ्ते में रोगी गाय ठीक हो जाती है। पेस्ट के साथ एक मुठ्ठी तुलसी के पत्ते भी गाय को खिलाने चाहिये। होम्योपैथी चिकित्सक के अनुसार छोटी बछिया को दवा बेलाडोना-200 और बड़ी गाय को बेलाडोना-1000 जीभ पर 7-7 बूँदें दिन में 3 बार दी जा सकती है। यह दवा केले में डाल कर भी खिलाई जा सकती है। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने पशुपालकों से कहा है कि चिकित्सा के पूर्व संबंधित चिकित्सक या वैद्य से परामर्श अवश्य लें।