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इंडो हॉलीवुड म्यूज़िकल फिल्म “मिलेनेयर्स ऑफ लव” की मुंबई में घोषणा, मिथुन, रिक्की केज, अनूप सोनी, मो. फैज़, निर्माता मुकेश पारिख की उपस्थिति

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मुंबई। हाल ही में पहली इंडो हॉलीवुड म्यूज़िकल फ़िल्म “मिलेनेयर्स ऑफ लव” की घोषणा पीवीआर सिनेमा, जुहू, मुंबई में की गई। अमेरिका के लेखक निर्माता मुकेश पारिख की इस फिल्म के सह निर्माता सोमेंद्र हर्ष हैं। दो बार फिल्मफेयर अवार्ड विनर संगीतकार मिथुन ने इसका संगीत दिया है और तीन बार ग्रामी विनर रिक्की केज गेस्ट कम्पोज़र हैं। इस ऑफिशियल घोषणा के अवसर पर निर्माता मुकेश पारिख, सह निर्माता सोमेंद्र हर्ष, मिथुन, रिक्की केज, गीतकार सईद कादरी, सिंगर मो. फैज और अतिथि के रूप में एक्टर अनूप सोनी उपस्थित थे। इस फिल्म के लिए सईद कादरी ने गीत लिखे हैं और मोहम्मद फैज़ ने एक गीत गाया है। कार्यक्रम में सभी को परंपरागत पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया।

फिल्म इस बारे में है कि सपने देखना कभी मत छोड़ें। सत्य घटना पर आधारित इस फिल्म में राजस्थान की कहानी है।
प्रोड्यूसर मुकेश पारिख की एक शॉर्ट फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई जिसे कई पुरुस्कार भी मिले हैं। इस इंडो हॉलीवुड प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट शक्तियों का मेला है। मैंने काफी रिसर्च करके यह स्टोरी लिखी है। सच्चे इवेंट्स पर आधारित फ़िल्म में ब्यूटीफुल लव स्टोरी है। कुछ दिन पहले मैं भारत आया और यशराज स्टूडियो में गाने की रिकॉर्डिंग की। सईद कादरी को मैं अल्फ़ाज़ का बादशाह कहता हूं और मिथुन का म्युज़िक तो कमाल का रहता है। यह एक बहुत ही प्यारी लव स्टोरी है। राजस्थान मेरा पसंदीदा राज्य रहा है, वहां की सच्ची कहानी को प्रस्तुत करना मुझे पसन्द आया। म्युज़िक की कोई भाषा नहीं होती। राजस्थान के लोकगीत और वेस्टर्न म्युज़िक की सिम्फोनी कमाल की होगी।
फिल्म के को प्रोड्यूसर सौमेन्द्र हर्ष ने सभी टीम का आभार जताते हुए हुए कहा कि हम सभी राजस्थान से जुड़े हुए हैं। हमने काफी रिसर्च किया, यह पहला राजस्थान का प्रोजेक्ट है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहा है। मुझे गर्व है कि यूएस और राजस्थान मिलकर यह प्रोजेक्ट बना रहे हैं। इससे रीजनल सिनेमा को बढ़ावा मिलेगा।
आशिकी 2 और कबीर सिंह जैसी फिल्मों के संगीतकार मिथुन ने बताया कि संगीत भारतीय सिनेमा में जरूरी रहा है। मैं अपने देश की मिट्टी के लिए, संगीत के लिए कुछ करना चाहता हूं। यह कहानी संगीत के माध्यम से कही जाने वाली है। संगीत के प्रति मुकेश जी का हौसला देखने लायक है। संगीत के माध्यम से वह स्टोरी बताना चाहते हैं। राजस्थान की उस कम्युनिटी का संगीत मैंने खूब सुना, जिससे इंस्पायर होकर यह कहानी बन रही है। मुझे मुकेश जी का दर्शन पसन्द आया। मुझे लगा कि यह सही समय है इस फ़िल्म से जुड़ने के लिए और इसके लिए संगीत कंपोज करके बहुत खुश हूं।
रिक्की केज ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में काम करना मेरे लिए गर्व की बात रही। मिथुन भारत के प्रतिभाशाली संगीतकार हैं। लगान जैसी फिल्मों का संगीत इस धरती की जड़ों से जुड़ा हुआ था इसलिए उन्हें विश्व भर में पहचान मिली। इस फिल्म का संगीत भी भारतीय जड़ों से जुड़ा हुआ है।
शब्दो के बादशाह सईद कादरी ने बताया कि मुझे इस फिल्म के जरिए अपनी मिट्टी के कर्ज को चुकाने का अवसर मिला है। मैं राजस्थान में जन्मा हूँ, मैं उसी प्यासी ज़मीन से आया हूँ इसलिए मेरे दिल मे एक हूक है जहां मैं अपनी मिट्टी की बात कह सकता हूँ।
अनूप सोनी ने कहा कि मैं जयपुर का रहने वाला हूँ, स्कूल कॉलेज की पढ़ाई से लेकर रंगमंच की शुरुआत जयपुर में हुई। राजस्थान का कल्चर बहुत पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। जहां के आप होते हैं वहां से एक गहरा नाता रहता है। मैं जयपुर में एक साल पहले मुकेश जी से मिला, कहानी और म्युज़िक के बारे में सुना और मेरे पास उनका मेल आया तो मैंने पूरी स्क्रिप्ट पढ़ी और हां कर दिया। मुकेश ने जो किरदार क्रिएट किए हैं वो बहुत रियल हैं वे सभी आसपास के किरदार लगेंगे। अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि इस फिल्म का हिस्सा हूँ।
गायक मोहम्मद फ़ैज़ ने कहा कि मैं जब रियल्टी शो में था तब से मुकेश जी से जुड़ा हूँ। मैं लक्की हूँ कि रिक्की जी के साथ एक गाना गाने का मुझे मौका मिला।
इस म्यूज़िकल ड्रामा फिल्म की 60 प्रतिशत शूटिंग राजस्थान में होगी और फिल्म में 4 गाने रखे गये हैं। इस फिल्म का निर्माण मिलेनेयर्स ऑफ लव फिल्मस एल एल पी के बैनर पर किया जा रहा है।

ग्लोबल स्टार राम चरण और मेगास्टार सलमान खान “ऑपरेशन वेलेंटाइन” का ट्रेलर लॉन्च करेंगे

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मुंबई (अनिल बेदाग) : यह सभी प्रशंसकों के लिए खुशी मनाने का समय है। वरुण तेज और मानुषी छिल्लर स्टारर सोनी पिक्चर्स इंटरनेशनल प्रोडक्शंस का ऑपरेशन वेलेंटाइन कल अपना बहुप्रतीक्षित ट्रेलर लॉन्च करेगा। तेलुगु ट्रेलर ग्लोबल स्टार राम चरण द्वारा लॉन्च किया जाएगा और हिंदी ट्रेलर मेगास्टार सलमान खान द्वारा डिजिटल रूप से लॉन्च किया जाएगा।
पहले कभी नहीं देखे गए हवाई एक्शन दृश्यों के साथ एक देशभक्ति-थ्रिलर फिल्म मानी जाने वाली यह फिल्म विशेष रूप से अपने ‘फर्स्ट स्ट्राइक’ यानी टीज़र के लॉन्च के बाद से शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
‘ऑपरेशन वैलेंटाइन’ सोनी पिक्चर्स इंटरनेशनल प्रोडक्शंस, संदीप मुड्डा की रेनेसां पिक्चर्स द्वारा निर्मित और गॉड ब्लेस एंटरटेनमेंट (वकील खान) और नंदकुमार अब्बिनेनी द्वारा सह-निर्मित है। अनुभवी विज्ञापन-फिल्म निर्माता और वीएफएक्स प्रशंसक शक्ति प्रताप सिंह हाड़ा इस फिल्म के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत करेंगे। शक्ति प्रताप सिंह हाड़ा, आमिर खान और सिद्धार्थ राज कुमार द्वारा लिखित यह फिल्म 1 मार्च 2024 को तेलुगु और हिंदी में रिलीज़ होगी।

ISIS स्टाइल में काट दिया गोसेवक का गला

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आपइण्डिया रिपोर्ट के अनुसार  गोसेवक साधराम यादव की हत्या के मामले में आरोपितों पर छत्तीसगढ़ में गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कश्मीर से लौटने के बाद अयाज खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के स्टाइल में गोसेवक का गला रेत दिया था। ऐसा अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले दहशत फैलाने के इरादे से किया गया था।
20 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के कवर्धा में लालपुर गाँव में अयाज, इदरीश, मेहताब और शेख रफीक समेत 6 ने मिलकर गोसेवक साधराम यादव (50) की ISIS आतंकियो की तरह गला रेत कर हत्या कर दी थी। राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हुई थी।
पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों पर UAPA की धारा 16 लगाई है। अयाज और इदरीश का आतंकी कनेक्शन भी सामने आया है। अयाज के कश्मीर जाने और इदरीश के संदिग्ध के लोगों से मिलने की जानकारी भी मिली है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है राज्य में नक्सलियों के अलावा किसी मामले में पहली बार UAPA का उपयोग किया गया है।
आरोपितों ने साधराम यादव से पहले भी जान-बूझकर विवाद किया था और ‘सर तन से जुदा’ करके हत्या कर दी। उनकी हत्या के बाद कवर्धा में लोगों का गुस्सा भड़क उठा था। प्रशासन ने आरोपितों को पकड़ने के साथ ही इनके घरों पर बुलडोजर भी चलाया था।
पुलिस ने जाँच के बाद आरोपितों के खिलाफ UAPA की धारा भी जोड़ी है। कवर्धा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया है हत्या करने वाले आरोपितों में से अयाज का कश्मीर आना-जाना लगा रहता था, वहीं इदरीश के संदिग्ध लोगों से बात करने के सबूत मिले हैं।
उन्होंने बताया है कि अयाज खान को गिरफ्तार कर उसके मोबाइल की जाँच की गई तो उसके लगातार कई बार जम्मू-कश्मीर जाने की जानकारी सामने आई। जब छत्तीसगढ़ से टीम जम्मू-कश्मीर भेजी गई तो आतंकवादियों से कनेक्शन सामने आए। एक अन्य आरोपित इदरीश खान के संदिग्धों से बात करने सम्बंधित जानकारी मिली है।
उधर हिन्दू संगठन लगातार इस मामले में जल्दी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। गोसेवक साधराम यादव की पत्नी ने हाल ही में सरकार से मिले ₹5 लाख का चेक भी लौटा दिया था। साधराम यादव की पत्नी ने कहा था कि उन्हें सहायता राशि नहीं, बल्कि हत्यारों पर कड़ी कार्रवाई चाहिए।

वर्तमान के वर्धमान आचार्य विद्यासागरजी अनंत यात्रा पर

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                                          ( विष्णुदत्त शर्मा-विनायक फीचर्स)

 छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरी तीर्थ से आध्यात्मिक चेतना के तेजस्वी सूर्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपनी अनंत यात्रा के लिए प्रस्थान कर लिया है। संत के रूप में पूज्यश्री का संपूर्ण जीवन ही दर्शन का सुदर्शन संदर्भ है। जिनके आचरण में ही जीवों के लिए करूणा पल्लवित होती हो, जिनके विचारों में प्राणी मात्र के कल्याण का शुभ संकल्प हो, जिनकी देशना में जन-मन के अंतःकरण की जागृति का संदेश हो, ऐसी दिव्यात्मा की भू-लोक से अनुपस्थिति अनंतकाल तक अंधेरे की उपस्थिति का अनुभव करवाएगी। महाराजश्री के विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से भी ओतप्रोत रहे। इसीलिए, अनंत अवसरों पर अखंड रूप से इस विचार की आवृत्ति होती रही कि आचार्यश्री के विचारों को संकलित करना छोटी-सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास है।

पूज्यश्री की सहज और प्रवाहमयी उपमाएं जन सामान्य को भी दुर्लभ विषय समझने में सरलता प्रदान करती हैं। सत्संग और सानिध्य के कालखंड में आचार्य श्री ने अनेक अवसरों पर स्पष्ट किया कि जैन धर्म दो शब्दों से बना है – जैन और धर्म। जैन से अभिप्राय ‘जिन’ के उपासक से है। “कर्मारातीन जयतीति जिनः” अर्थात जिसने काम, क्रोध, मोह आदि अपने विकारी भावों को जीत लिया है, वह ‘‘जिन” कहलाता है। “जिनस्य उपासकः जैनः” अर्थात् ‘जिन’ के उपासक को जैन कहते हैं। जो व्यक्ति ‘जिन’ के द्वारा बताए मार्ग पर चलते हैं और उनकी आज्ञा को मानते हैं, वे जैन कहलाते हैं। ऐसे जैन के धर्म को जैन धर्म कहते हैं। यही जैन धर्म का भी शाब्दिक अर्थ है।

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री और दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी से भी आचार्यश्री का गहरा जुड़ाव रहा है। वर्ष 2016 में भोपाल की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री जी ने उनसे भेंट भी की थी। राष्ट्र धर्म और जन सेवा के पवित्र उद्देश्य की व्याख्या करने के लिए 28 जुलाई 2016 को पूज्यश्री ने मध्यप्रदेश विधानसभा में अपना प्रवचन भी दिया और गत वर्ष चंद्रगिरि तीर्थ पर ही आचार्यश्री का आशीर्वाद मा. प्रधानमंत्री जी को प्राप्त हुआ।

संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगाम जिले में हुआ। उनका बचपन का नाम विद्याधर था। इसके बाद उन्होंने दीक्षा राजस्थान में ली थी। उल्लेखनीय यह भी है कि महाराजश्री के शिष्य मुनि क्षेमसागर ने उनके ऊपर जीवनी भी लिखी। इसका अंग्रेजी अनुवाद “इन द क्वेस्ट ऑफ सेल्फ” के रूप में किया गया है। महाराजश्री शास्त्रीय (संस्कृत और प्राकृत) और कई आधुनिक भाषाओं, हिंदी, मराठी और कन्नड़ के विशेषज्ञ थे। वे हिंदी और संस्कृत के एक विपुल लेखक भी रहे हैं। कई शोधकर्ताओं ने स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट डिग्री के लिए उनके कार्यों का अध्ययन किया है।

विद्यासागर महाराज को आचार्य पद की दीक्षा आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को अजमेर राजस्थान के नसीराबाद में दी थी। इसके बाद आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने आचार्य श्री के मार्गदर्शन में ही 1 जून 1973 को समाधि ली थी। ऐसा पहली बार हुआ था, जब एक गुरु ने पहले शिष्य को दीक्षित किया और फिर उन्हीं के मार्गदर्शन में समाधि ली। दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज देश के ऐसे अकेले आचार्य थे, जिन्होंने अब तक 505 मुनियों को दीक्षा दी।

जिन उपासना की और उन्मुख आचार्यश्री तो सांसारिक आडंबरो से विरक्त रहे । इस युग के तपस्वियों की परंपरा में आचार्यश्री अग्रगण्य थे। परमात्मा के उपदेशों पर चलने वाले इस पथिक का प्रत्येक क्षण जागरूक व आध्यात्मिकता से भरपूर रहा।

उनके विशाल व विराट व्यक्तित्व के अनेक पक्ष थे, तथा सम्पूर्ण भारतवर्ष उनकी कर्मस्थली थी।

ज्ञान, करुणा व सद्भावना से परिपूर्ण उनकी शिक्षाएं सदैव समाज और संस्कृति के उत्कर्ष के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती रहेंगी। समाधिस्थ आचार्य श्री के चरणों में मेरा कोटिशः नमन।(विनायक फीचर्स)

(लेखक- मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं खजुराहो से लोकसभा सांसद हैं।)

यूसीसी लागू करने पर नवी मुंबई में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का प्रवासियों ने व्यक्त किया आभार

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नवी मुंबई, (वाशी) 17 फरवरी 2024, मुंबई स्थित प्रवासी उत्तराखंडियों की प्रसिद्ध संस्था “कौथिग महोत्सव” व “देवभूमि स्पोर्ट्स फाउंडेशन” के संयुक्त तत्वाधान में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सम्मान में आभार समारोह आयोजित किया गया!
आभार आयोजन का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री धामी द्वारा हाल ही में पारित किया गया बहुत चर्चित, महत्वपूर्ण व नागरिक हितैषी विधेयक समान नागरिक संहिता(UCC) का उत्तराखंड विधानसभा में पारित करना था !
इस अवसर पर कौथिग व स्पोर्ट्स फॉउंडेशन के मुख्य पदाधिकारियों सहित प्रवासी गणमान्य बंधुओं द्वारा ससम्मान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेतु आभार पत्र मुंबई में उपस्थित उनके प्रतिनिधि(अनो) व मीडिया समन्वयक संजय बलोदी प्रखर को प्रदान किया गया।
इस अवसर पर नवी मुंबई स्थित अन्य संस्था “देवभूमि जय माँ नंदादेवी चैरिटेबल ट्रस्ट” पदाधिकारियों द्वारा भी मुख्यमंत्री का आभार प्रकट एवं पत्र प्रेषित किया गया. !
स्पोर्ट्स फॉउंडेशन के मुख्य संयोजक मनोज भट्ट व अध्यक्ष सुरेश राणा द्वारा यह कार्यक्रम विशेष रूप से आयोजित किया गया था। इस अवसर पर संजय बलोदी प्रखर द्वारा उत्तराखंड में यूसीसी ड्राफ्ट निर्माण से लेकर विधानसभा पटल तक रखे जाने की प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण दिया गया !
कार्यक्रम में कौथिक फाउंडेशन के अध्यक्ष हीरा सिंह भाकुनी, स्पोर्ट्स फॉउंडेशन के संयोजक मनोज भट्ट व नवी मुंबई पार्षद व सलाहकार बहादुर सिंह बिष्ट सहित अन्य प्रवासी गणमान्यों ने न केवल मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त किया बल्कि उनके निर्णय व महत्वपूर्ण फैसलों की सराहना भी की। इस विशेष महत्वपूर्ण आयोजन में गणमान्य उत्तराखंडी प्रवासियों में महावीर पैन्यूली,, ज्योति राठौर, के.एस वोरा, गिरवीर नेगी, प्रवीण ठाकुर, अमन बर्त्वाल,राकेश खंकरियाल सहित काफी संख्या में प्रवासी बंधु-बांधव विशेष रूप में उपस्थित थे !

डॉ निकेश जैन माधानी को रामायण की सीता दीपिका चिखलिया ने दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड से किया सम्मानित

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मुंबई। रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली ख्याति प्राप्त अभिनेत्री दीपिका चिखलिया के हाथों बिजनेसमैन डॉ. निकेश ताराचंद जैन दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए।

फिल्मोरा मीडिया नेटवर्क द्वारा प्रस्तुत यह पुरस्कार समारोह 18 फरवरी 2024 को सहारा स्टार होटल, मुंबई में सम्पन्न हुआ जिसका आयोजन अखिलेश सिंह ने किया।
17 फरवरी को ही गायक उदित नारायण के हाथों बिजनेसमैन डॉ. निकेश ताराचंद जैन माधानी अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
विदित हो कि पिछले दिनों डॉ निकेश जैन माधानी को एक्टर सोनू सूद ने एसियन एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया था और गोल्डन जुबली फिल्म फेस्टिवल में भी सम्मानित हुए। इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल, यूनियन लीडर अभिजीत राणे के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
आपको बता दें कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा इस वर्ष कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हुए हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि मधानी फाइनेंस, मधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, मधानी ट्रेडिंग कंपनी, मधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।

– संतोष साहू

उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड से सम्मानित हुए डॉ निकेश जैन माधानी 

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मुंबई। फिल्म जगत के प्रसिद्ध पार्श्व गायक उदित नारायण के हाथों बिजनेसमैन डॉ. निकेश ताराचंद जैन माधानी अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए। यह पुरस्कार समारोह 17 फरवरी 2024 को मुक्ति ऑडिटोरियम अंधेरी, मुंबई में सम्पन्न हुआ जिसका आयोजन राजकुमार तिवारी और पुनीत खरे ने किया। इस अवार्ड शो में उदित नारायण सहित ब्राइट आउटडोर के योगेश लखानी की विशेष उपस्थिति रही।

विदित हो कि पिछले दिनों डॉ निकेश जैन माधानी को एक्टर सोनू सूद ने एसियन एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया था और गोल्डन जुबली फिल्म फेस्टिवल में भी सम्मानित हुए। इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल, यूनियन लीडर अभिजीत राणे के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
आपको बता दें कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा इस वर्ष कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हुए हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि मधानी फाइनेंस, मधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, मधानी ट्रेडिंग कंपनी, मधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।

– संतोष साहू

मुंबई के फोर्टिस हॉस्पिटल ने सफलतापूर्वक 100 बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट्स किये

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मुंबई (अनिल बेदाग): फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड ने 100 बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट्स (बीएमटी) सफलतापूर्वक पूरा करके चिकित्‍सा के इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि खून की बीमारियों के मरीजों की आशा, मजबूती और बदलाव लाने वाली देखभाल का एक शानदार सफर दिखाती है।
बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट्स (बीएमटी) भारत में लगातार बढ़ रहे हैं और हर साल लगभग 2500 ट्रांसप्‍लांट्स किये जा रहे हैं। लेकिन यह देश की असल जरूरत के 10% से भी कम है। इसके कई कारण हैं, जैसे कि उपचार विकल्‍पों पर जागरूकता का अभाव, सीमित पहुँच, खर्च और सही समय पर रोग-निदान न होना। इन चुनौतियों को दूर करने और उपचार तक पहुँचने की कमियों को ठीक करने के‍ लिये फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड में इंस्टिट्यूट ऑफ ब्‍लड डिसऑर्डर्स की स्‍थापना हुई थी।
फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड में हीमैटोलॉजी, हीमैटो-ओन्‍कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट (बीएमटी) के डायरेक्‍टर डॉ. सुभाप्रकाश सान्‍याल ने अपनी सक्षम टीम के साथ मिलकर खून की विभिन्‍न बीमारियों के मरीजों के लिये सफल बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट्स की एक श्रृंखला चलाई। उनकी टीम में हीमैटोलॉजी एवं बीएमटी के कंसल्‍टेन्‍ट डॉ. हम्‍जा दलाल, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की असोसिएट कंसल्‍टेन्‍ट डॉ. अलीशा केरकर, इंफेक्शियस डिसीजेस की कंसल्‍टेन्‍ट डॉ. कीर्ति सबनीस, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के हेड डॉ. ललित धानतोले, आदि जैसे विशेषज्ञ थे। उन्‍होंने खून की जिन बीमारियों के लिये बीएमटी किये, उनमें मल्‍टीपल मायलोमा, लिम्‍फोमा, ल्‍युकेमिया, मीलोडिस्‍प्‍लास्टिक सिंड्रोम, मीलोफाइब्रोसिस, एप्‍लास्टिक एनीमिया, आदि शामिल थीं।
फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड में हीमैटोलॉजी, हीमैटो-ओन्‍कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट (बीएमटी) के डायरेक्‍टर डॉ. सुभाप्रकाश सान्‍याल ने बताया कि हॉस्पिटल ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि केन्‍या, तंजानिया और बांग्‍लादेश से आने वाले मरीजों का भी इलाज किया। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि बीएमटी की जरूरत पर जागरूकता की कमी के कारण चुनौती होती है और इस कारण विशेषज्ञों से परामर्श लेने में अक्‍सर विलंब होता है। खून की बीमारियों पर जागरूकता कार्यक्रमों समेत डॉ. सान्‍याल की कोशिशों ने उपचार की कमी को दूर करने और खून की बीमारियों के ज्‍यादा मरीजों तक पहुँचने में योगदान दिया है।
बीएमटी की विधियों में हालिया प्रगति से इलाज में काफी बदलाव आया है, परिणामों में सुधार आया है और दुष्‍प्रभाव कम किये हैं। डॉ. सान्‍याल ने सीएआर टी-सेल थेरैपी के महत्‍व पर रोशनी डाली। यह अत्‍याधुनिक इम्‍युनोथेरैपी है, जो कैंसर का मुकाबला करने के लिये इम्‍युन सिस्‍टम को आनुवांशिक तरीके से रिप्रोग्राम करती है। इस प्रकार एग्रेसिव लिम्‍फोमा, ल्‍युकेमिया और मल्‍टीपल मीलोमा के मरीजों को निजीकृत एवं लक्षित समाधान मिलते हैं।
फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड के फैसिलिटी डायरेक्‍टर डॉ. विशाल बेरी ने कहा कि ब्‍लड कैंसर और सही समय पर होने वाले इलाज के महत्‍व पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि ब्‍लड कैंसर का जल्‍दी पता लगने से जीवित रहने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। उन्‍होंने दोहराया कि उपचार के दूसरे विकल्‍पों से थक चुके मरीजों को उम्‍मीद देने में बीएमटी का प्रभाव काफी बदलाव कर सकता है।  टी-सेल थेरैपी को मानक उपचार बताते हुए डॉ. बेरी ने एग्रेसिव लिम्‍फोमाज से मुकाबला करने में चिकित्‍सा के आधुनिक तरीकों को शामिल करने पर जोर दिया। यह आधुनिक औषधि-विज्ञान में एक महत्‍वपूर्ण प्रगति है।

रायबरेली से नेहरू-गांधी परिवार की विरासत प्रियंका को सौंपने की तैयारी

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(पंकज कुमार श्रीवास्तव-विभूति फीचर्स)
हालांकि,सत्रहवीं लोकसभा की अंतिम बैठक हो चुकी है।लेकिन सत्रहवीं लोकसभा को आधिकारिक रूप से भंग किया जाना अभी शेष है।इस बीच 14 फरवरी,2024 को रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने राज्यसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल कर दिया है।अब,यह बात स्पष्ट ही थी कि वह 18वीं लोकसभा के लिए रायबरेली सीट से आमचुनाव नहीं लड़ेंगी।तथापि,15 फरवरी,2024 को सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों के नाम भावुक कर देने वाला पत्र लिखा है।जिससे यह भी ध्वनित होता है कि वे रायबरेली की राजनीतिक विरासत प्रियंका को सौंपने की तैयारी कर चुकी हैं।सबसे पहले तो सोनिया ने रायबरेली के लोगों को ‘स्नेही परिवारजन’कहकर संबोधित किया है।
पत्र  की शुरुआत में वह कहती हैं-‘मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है।यह रायबरेली आकर-आप लोगों से मिलकर पूरा होता है।’इन शब्दों से वह अपने परिवार में रायबरेली के तमाम लोगों को जोड़ लेती हैं या यों कहें कि रायबरेली के तमाम लोगों के साथ अपने परिवार को एकाकार कर लेती हैं।इसके आगे वह कहतीं हैं-‘यह नेह-नाता बहुत पुराना है और अपने ससुराल से मुझे सौभाग्य की तरह मिला है।’रायबरेली के लोगों के स्नेहिल रिश्तों का श्रेय वह अपने ससुराल के लोगों यानि कि सास-ससुर(पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी)को देती हैं,जिन्होंने  संसद में भी रायबरेली का प्रतिनिधित्व किया था और खुद को सास-ससुर की विरासत को आगे बढ़ाने वाली बताया है।
आगे वह याद दिलाती हैं कि उनके श्वसुर फिरोज गांधी और सास इंदिरा गांधी ने भी रायबरेली का प्रतिनिधित्व किया था,तब से अब तक यह सिलसिला जिंदगी के उतार-चढ़ाव और मुश्किल भरी राह पर प्यार और जोश के साथ आगे बढ़ता गया और इस पर हमारी आस्था मजबूत होती गई।
इस पत्र के तीसरे पैराग्राफ के पहले वाक्य में सोनिया गांधी कहती हैं-‘इसी रोशन रास्ते पर आपने मुझे भी चलने की जगह दी।’कहने का अभिप्राय यह कि इन शब्दों से सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों के साथ अपने आत्मीय रिश्तों का श्रेय खुद को नहीं रायबरेली के लोगों को दे रही हैं।अगले वाक्य में वह कहती हैं-‘सास और जीवनसाथी को हमेशा के लिए खोकर मैं आपके पास आई और आपने अपना आंचल मेरे लिए फैला दिया।’यह किसी भी महिला द्वारा दिया जाने वाला ऐसा वक्तव्य है,जो किसी को भी भावुक कर देगा।साथ ही,वह उस ऐतिहासिकता को भी दुहराता है कि महज 7साल के अंतराल पर इस देश के अतिविशिष्ट परिवार की दो पीढ़ियों-इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने अपने सार्वजनिक मूल्यों के लिए अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं।इस तीसरे पैराग्राफ में ही सोनिया गांधी आगे कहतीं हैं-‘पिछले दो चुनावों में विषम परिस्थितियों में भी आप एक चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े रहे,मैं यह कभी भूल नहीं सकती।यह कहते हुए मुझे गर्व है कि आज मैं जो कुछ भी हूं,आपकी बदौलत हूं और मैंने इस भरोसे को हरदम निभाने की कोशिश की है।’यह किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अपनी जनता के प्रति एक श्रेष्ठ आभार संदेश है।
इस पत्र  में आगे सोनिया गांधी उन मजबूरियों का जिक्र करती हैं,जिसके चलते वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय लेने को बाध्य हुईं।वह कहती हैं-‘अब स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते मैं अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी।’वह आगे कहतीं हैं-इस निर्णय के बाद मुझे आपकी सीधी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन यह तय है कि मेरा मन-प्राण हमेशा आपके पास रहेगा।मुझे पता है कि आप भी हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को वैसे ही संभाल लेंगे,जैसे अब तक संभालते आए हैं।
किसी पारिवारिक आत्मीय स्वजन की तरह सोनिया गांधी ने पत्र के अंतिम पैराग्राफ में’बड़ों को प्रणाम,छोटों को स्नेह’ प्रेषित किया है।साथ ही जल्द मिलने का वादा करना नहीं भूलीं।
भारत का संसदीय इतिहास कोई 72 वर्ष का हो चला है।इन 72 वर्षों में रायबरेली ने 17 आमचुनाव और 3 उपचुनाव देखें हैं।इसमें सिर्फ 4 जनप्रतिनिधि ऐसे रहे,जिन्होंने कुल 12 वर्षों के लिए रायबरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और जो या तो नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के थे अथवा उन्हें नेहरू गांधी परिवार की व्यक्तिगत पारिवारिक शुभकामनाएं अप्राप्त थीं।
नेहरू-गांधी परिवार और रायबरेली के आम मतदाताओं के बीच आत्मीय और भावुक रिश्ते की शुरुआत भारत में संसदीय इतिहास के शुरूआत से ही हो गई थी।1952के पहले आमचुनाव में इस संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के इकलौते दामाद फिरोज गांधी ने चुनाव लड़ा और जीता।फिरोज गांधी नेहरू के इकलौते दामाद तो थे ही,स्वयं भी स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार के रूप में उनकी स्वतंत्र पहचान थी।निजी बीमा कंपनियों द्वारा गड़बड़ झाले को उन्होंने सार्वजनिक पटल पर रखा और अगर 1956में बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना की गई,तो उसके पीछे फिरोज गांधी जैसे लोगों का सद्प्रयास था।1957में भी वही जीते।भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी नैसर्गिकता के कारण मूंदड़ा कांड को भी उन्होंने उजागर किया और जिसके कारण टीटी कृष्णमाचारी जैसे केंद्रीय मंत्री को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।1959में केरल में इ एम एस नंबूदरीपाद की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के फैसले से भी फिरोज गांधी इत्तफाक नहीं रखते थे।8 सितम्बर,1960 को फिरोज गांधी के असामयिक निधन से यह सीट खाली हो गई और उपचुनाव में नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के आरपी सिंह सांसद चुने गए।(हालांकि,वह कांग्रेसी ही थे।) 1962के आम चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई,सो एक अन्य कांग्रेसी बैजनाथ कुरील ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वह 1967तक सांसद रहे।इस प्रकार,1960-67के 7 वर्षों में नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के दो कांग्रेसियों ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने और इंदिराजी को उन्होंने अपने कैबिनेट में जगह दी।उन्हें राज्यसभा का सदस्य भी बनाया गया।जनवरी,1966 में लाल बहादुर शास्त्री के असामयिक निधन के बाद इंदिराजी प्रधानमंत्री बनीं। इंदिराजी के कार्यकाल में पहले आमचुनाव 1967में हुए थे।1967में रायबरेली सीट अनारक्षित हो गई।इंदिराजी ने अपने संसदीय क्षेत्र के रूप में पति फिरोज गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली को ही चुना।1971में भी इंदिराजी रायबरेली से ही चुनी गईं।1971के आम चुनाव में इंदिराजी की तरफ से कुछ तकनीकी वैधानिक भूलें हो गईं।पराजित उम्मीदवार राजनारायणजी ने उन तकनीकी वैधानिक भूलों को आधार बनाकर इंदिराजी के चुनाव को न्यायालय में चुनौती दी।12 जून,1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने अपने फैसले से इंदिराजी के चुनाव को रद्द कर दिया। इंदिराजी ने इमरजेंसी लगाकर आम चुनाव एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिए।1971के बाद आम चुनाव 1976में नहीं 1977में हुए थे।इंदिरा विरोधी अभियान का नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया।प.बंगाल,उड़ीसा, अविभाजित बिहार,अविभाजित उत्तर प्रदेश,अविभाजित मध्यप्रदेश,राजस्थान,दिल्ली,हरियाणा,पंजाब,चंडीगढ़,हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पांव पूरी तरह उखड़ गए,इन राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।इंदिराजी भी रायबरेली सीट पर राजनारायण के हाथों पराजित हुईं।अगले आम चुनाव 1980तक राजनारायणजी ही रायबरेली के सांसद बने रहे।इस प्रकार,राजनारायण नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के तीसरे सांसद रहे,जिन्होंने रायबरेली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
1980के आम चुनाव में इंदिराजी ने रायबरेली से चुनाव तो लड़ा ही,लेकिन एहतियातन आंध्रप्रदेश आंध्रप्रदेश के मेदक से भी चुनाव लड़ा और जीता।वह दोनों जगहों से निर्वाचित हुईं।जब एक सीट छोड़ने की बात आई, तो उन्होंने रायबरेली सीट छोड़ दी और मेदक सीट अपने पास रखी।
ऐसी परिस्थिति में,रायबरेली में दूसरा उपचुनाव हुआ।रायबरेली सीट के लिए इस उपचुनाव के लिए इंदिराजी ने अपने भतीजे अरूण नेहरू को तैयार किया।अरूण नेहरू तब तक एक अराजनीतिक शख्सियत थे और वह एक कंपनी जॉनसन एंड निकल्सन के चीफ एक्जीक्यूटिव थे। चुनाव हुए और अरूण नेहरू जीत गए।रायबरेली के लिए इंदिराजी  नेहरू-गांधी परिवार से ही एक अराजनीतिक शख्सियत अरूण नेहरू को राजनीति में खींच लाईं थी। अरूण नेहरू 1984के चुनाव में भी रायबरेली से निर्वाचित हुए।31अक्तूबर, 1984 को इंदिराजी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने,लेकिन अरूण नेहरू के साथ उनकी व्यापक सैद्धांतिक असहमतियां थीं।अरूण नेहरू वीपी सिंह कैंप में चले गये।इसलिए,1989में अरूण नेहरू के विकल्प की तलाश हुई और इंदिराजी की मामी शीला कौल के रूप में यह खोज पूरी हुई।शीला कौल  सिर्फ 1989में ही नहीं बल्कि 1991में भी रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुईं।अगले
आमचुनाव,1996 के पहले शीला कौल को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया।
1996 और 1998 के आम चुनावों में नेहरू-गांधी परिवार का कोई आदमी रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ा और भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता अरूण सिंह रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए।अरूण सिंह आरपी सिंह,बैजनाथ कुरील, राजनारायण के बाद चौथी शख्सियत थे,जो रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए,लेकिन वह नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे।इतिहास के इस दौर में सोनिया राजनीति में आने को लेकर उत्सुक नहीं थीं और राहुल-प्रियंका पर्याप्त परिपक्व नहीं थे।
1991में राजीव गांधी की हत्या के बाद अमेठी में उनकी विरासत उनके परम मित्र कैप्टन सतीश शर्मा संभाल रहे थे।वह 1991और 1996में अमेठी से सांसद निर्वाचित भी हुए थे।लेकिन,1998में वह संजय सिंह के हाथों अमेठी में पराजित भी हो चुके थे।1999के आमचुनाव में कैप्टन सतीश शर्मा रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए। कैप्टन सतीश शर्मा अरूण सिंह के बाद वह पांचवीं शख्सियत थे,जो रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए,लेकिन वह नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे।पर आरपी सिंह,बैजनाथ कुरील, राजनारायण और अरूण सिंह से इन संदर्भों में अलग थे कि उनको नेहरू-गांधी परिवार का पूर्ण समर्थन हासिल था।यहां तक कि उनके चुनाव प्रचार में कम से कम प्रियंका गांधी ने खुलकर भाग लिया था।
14 मार्च,1998को सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाल ली थी।जब उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश का मन बनाया,तो कैप्टन सतीश शर्मा ने रायबरेली सीट उनके लिए छोड़ दी थी।2004से 2024तक सोनिया गांधी लगातार रायबरेली की सांसद बनी हुई हैं।
15फरवरी,2024 को रायबरेली के लोगों को भावुक कर देने वाला मार्मिक और आत्मीय पत्र लिखकर सोनिया गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि बढ़ती उम्र और गिरते स्वास्थ के कारण रायबरेली का प्रतिनिधित्व उनके लिए कठिन अवश्य है, लेकिन रायबरेली के लोगों से मिली आत्मीयता यह परिवार भूल नहीं पाएगा।ऐसे में,राजनीतिक हलकों में यह सहज अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी आमचुनाव में शायद प्रियंका गांधी  रायबरेली से चुनाव लड़ेगीं और रायबरेली की राजनीतिक विरासत नेहरू-गांधी परिवार के पास ही बनी रहेगी।(विभूति फीचर्स)

क्रूरता की रानी – ममता बनर्जी के राज में महिलाओं के साथ हुई क्रूरता ने सारे देश को चौंका दिया है

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(राकेश अचल-विनायक फीचर्स)
बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी के राज में महिलाओं के साथ हुई क्रूरता ने सारे देश को चौंका दिया है। अभी तक ऐसे आरोप केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ही लगाती थी लेकिन अब कल तक ममता बनर्जी की मित्र कही जाने वाली कांग्रेस भी ऐसे ही आरोप लगा रही है ।  बंगाल के कांग्रेस नेता अधीर  रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को ‘ क्रूरता की रानी ‘ तक कह दिया है।लेकिन क्या सचमुच ममता बनर्जी क्रूरता की रानी हैं या उन्हें क्रूरता का प्रतीक बनाने की कोशिश की जा रही है।   
ताजा मामला संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न का है। बंगाल में आठ दशक बाद भी साम्प्रदायिक जहर समाप्त नहीं हुआ है।  बंगाल में नोआखाली से चलकर संदेशखाली तक हिंसा में ही झुलस रहा है। संदेशखली का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज तक आ पहुंचा है ?
क्या है संदेशखली का मामला ?
आपको बता दें कि बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है संदेशखाली। संदेशखाली उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट उपखंड में आता है। ये बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ इलाका है। इस इलाके में अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं।
संदेशखाली   उस वक्त सुर्खियों में आया, जब तृण मूल कांग्रेस के  नेता शाहजहां शेख के घर पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा । आरोप है कि शेख और उनके समर्थकों ने प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी  की टीम पर ही हमला कर दिया। आरोपी फरार है। शाहजहां को पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक का करीबी माना जाता है। शुरुआत में ऐसा लगा कि ये घटना सिर्फ ‘एक हमले’ तक ही सीमित है, लेकिन शेख के फरार होते ही इलाके की महिलाएं अचानक बाहर निकल आई। महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर अत्याचार करने, यौन उत्पीड़न करने और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप लगा डाले। महिलाओं का आरोप है कि तृमूकां   के लोग गांव में घर-घर जाकर चेक करते हैं और इस दौरान अगर घर में कोई सुंदर महिला या लड़की दिखती है तो टीएमसी नेता शाहजहां शेख के लोग उसे अगवा कर ले जाते थे और फिर उसे पूरी रात अपने साथ पार्टी दफ्तर या अन्य जगह पर रखा जाता था। अगले दिन यौन उत्पीड़न करने के बाद उसे उसके घर या घर के सामने छोड़ जाते थे।’
संदेशखाली  का ये भयानक सन्देश जब बंगाल के बाहर  पहुंचा तो मामला राज्यपाल तक पहुंच गया। जांच जारी है। राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। राजनीति भी जम कर की जा रही है। सबसे पहले  भाजपा के एक प्रतिनिधि मंडल ने संदेशखाली  जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उसे रास्ते में ही रोक दिया।  इसके बाद तृण मूल कांग्रेस से नाराज बैठी कांग्रेस भी मैदान में आ गयी। कांग्रेस सांसद और बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को भीसंदेशखाली  जाने से रोका गया है। इस पर पुलिस और अधीर रंजन चौधरी के बीच नोकझोंक भी हुई । नारेबाजी करते कांग्रेस नेता और कांग्रेस प्रतिनिधि जब आगे बढ़ रहे थे, पुलिस ने उन्हें रोका और रामपुर में बैरिकेडिंग कर दी।
कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच अनबन की वजह इंडिया गठबंधन में ममता द्वारा डाली गयी दरार है ।  पहले ममता ने गठबंधन के नेता के लिए कांग्रेस के मल्लिकार्जुनखड़गे का नाम प्रस्तावित किया,इसका नतीजा ये हुआ कि जेडीयू गठबंधन से बाहर हो गयी। बाद में ममता ने बंगाल में कांग्रेस को अपेक्षित सीटें न देकर रार बढ़ा दी।  कांग्रेस और ममता के रिश्ते तब और बिगड़े जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ भी ममता सरकार ने बदसलूकी की। अब संदेशखाली के लिए आगे बढ़ने से कांग्रेस सांसद ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि, ममता क्रूरता की रानी है वह आग से खेल रही हैं।  अधीर रंजन ने कहा कि हम सब कुछ राजनीतिक तौर पर करेंगे।  हम बम या बंदूकें नहीं ले जा रहे हैं।  यहां ममता ने भाजपा को भी रोका , लेकिन वो कुछ और हैं, हम कुछ और हैं।
संदेशखाली का मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने अंदाज में जवाब दे रही हैं।  उनका कहना है कि मुझे इस पर कार्रवाई करने के लिए मामले को जानना होगा।  वहां आरएसएस का आधार है।  7-8 साल पहले दंगे हुए, वो संवेदनशील इलाकों में से एक है।  हमने सरस्वती पूजा के दौरान स्थिति को मजबूती से संभाला अन्यथा वहां योजनाएं कुछ और ही थी। संदेशखाली हिंसा पर बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी का कहना है कि जिन्होंने यह अत्याचार किया है उन्हें सामने आना होगा, एनआईए जांच होनी चाहिए।  उन्हें मौत की सजा दी जानी चाहिए।हम सुकांत मजूमदार पर हमले की निंदा करते हैं।
 राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि संदेशखाली में स्थानीय अधिकारियों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।  हम इस मामले की गहराई तक जाना चाहते है।  संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ सबूत मिटाने और डराने-धमकाने की रणनीति अस्वीकार्य है।  महिला आयोग पूरी जांच और अपराधियों पर मुकदमा चलाने की मांग करता है। यानि महिला आयोग और भाजपा के सुर एक जैसे हैं। अब यदि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर की गयी याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया तो ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ सकतीं हैं।
संदर्भ के लिए आपको बता दें कि अविभाजित भारत में बंगाल के नोआखली जिले में 1946  में हुए साम्प्रदायिक दंगे में पांच हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे, नोआखाली अब बांग्लादेश का हिस्सा है। बंगाल की राजनीति तभी से रक्तवर्णी होती चली आ रही है। पश्चिम बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी सातवीं मुख्यमंत्री हैं। 1972  तक पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का राज था ।  उसके बाद 25  साल वामपंथियों ने यहां एकछत्र राज किया और बीते 9  साल से यहां तृणमूल कांग्रेस का राज है ।  भाजपा पिछले 44  साल से पश्चिम बंगाल पर शासन करने का ख्वाब देख रही है लेकिन अभी तक उसे मौक़ा नहीं मिला है।  संदेशखाली में महिलाओं का उत्पीड़न उसके लिए इसी वजह से महत्वपूर्ण है। भाजपा भी येन-केन बंगाल की रक्तवर्णी सत्ता का सुख लेना चाहती है।(विनायक फीचर्स)