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मनोवांछित फलदायी है शिव की उपासना

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विजय शंकर दीक्षित – विभूति फीचर्स

               भगवान शिव की उपासना की प्राचीनता-प्रचुरता सर्वमान्य है। शिव देव देवेश्वर महेश्वर हैं। कल्याणकर्ता होने से उन्हें शंकर कहा जाता है।  आशुतोष अवढरदानी परमप्रभु शिव के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता, वे   उपासकों के अभाव दूर कर देते हैं, कामना पूर्ण कर देते हैं। भगवान शंकर भारतीय संस्कृति धर्म एवं जीवन में विराट समन्वय के देवता हैं। वे अपने आप में विषमता की संपूर्ण एकता हैं।

अंग में लगाते हैं सदा से चिता की भस्म,

फिर भी शिव परम पवित्र कहलाते हैं।

गोद में बिठाये गिरिजा को रहते हैं सदा,

फिर भी शिव अखंड योगिराज कहलाते हैं।

घर नहीं, धन नहीं, अन्न और भूषण नहीं,

फिर भी शिव महादानी कहलाते हैं।

देखत भयंकर पर नाम शिव शंकर,

नाश करते हैं तो भी नाथ कहलाते हैं।

आश्चर्य होता है कि शिवजी देवताओं-मानवों के उपास्य तो हैं ही किन्तु राक्षसों के भी उपास्य हैं।  शिवोपासना देवराज इन्द्र, विष्णु जी, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण तथा ऋषि मुनियों द्वारा की गई है, यहां तक कि दैवीय संस्कृति के कटï्टर शत्रु आसुरी प्रकृति वाले भौतिकता के साधक रावण, हिरण्याक्ष, हिरण्यकश्यप, लवणासुर, भस्मासुर, गजासुर, बाणासुर आदि राक्षसों-दानवों ने भी शिवजी की आराधना कर वरदानों से अपना अभ्युदय किया। देवों में सर्वोत्कृष्टï महादेव जी माने गए हैं। शिवोपासना से व्यक्ति को अभीष्टï फल प्राप्त हो ही जाता है।

भाल में जाके कलाधर है,

सोई साहब ताप हमारो हरैगो।

अंग में जाके विभूति लगी रहे,

भौन में संपत्ति भूरे भरेगो।

घातक है जो मनो भव को,

मन पातक वाही के जारे जरैगो।

दास जू शीश पै गंग धरै रहे,

बा की कृपा कहु कौन करेगो।

ब्रह्माजी भवानी पार्वती से व्यंग्य करते हुए कहते हैं आपके बावरे पति उन  कंगालों को धन- संपत्ति ऐश्वर्य सुख दे देते हैं, जिनके मस्तक में सुख संपत्ति का नामों निशान तक हमने नहीं लिखा है। रंको को भी वह इंद्र पद दे देते हैं, जिससे मुझे अनेक स्वर्गों की रचना कर उन्हें इंद्र पद पर प्रतिष्ठिïत करना पड़ता है। सृष्टïा की विनोद युक्त वाणी सुनकर जगतजननी भवानी मुस्कुराने लगीं। यह उद्गार विनय पत्रिका में तुलसीदास रचित इस पदावली में दृष्टïव्य है-

बाबरो रावरो नाह भवानी

परमोपास्य महादेव की परमोदारता कृपालुता के विषय में कवि की सदुक्ति देखिए-

दिगम्बर है स्वयं दीनों को पीताम्बर दिया करते।

भिखारी हो के घर औरों का धन से भर दिया करते ॥

यहां दुर्भाग्य भी सौभाग्य है।

ढांचे में ढल जाये॥

चरण पर भाल रखते

भाल की रेखा बदल जाये॥

धन्य हैं परम प्रभु शिवजी धन्य हैं उनकी दानशीलता भक्तवत्सलता परमोदारता जिससे प्रभावित हो विधाता चतुरानन, भवानी पार्वती से विनोदयुक्त वाणी से कहते हैं  कि मुझसे थोड़ा नहीं मांगना अधिक से अधिक इच्छित वस्तु मांग लो।  महाकवि तुलसीदास रचित कवितावली की पदावली देखिए। ब्रह्मïाजी कहते हैं-

नागौ फिरै कहे मागतो देखि,

ना खागो कछु जनि  मांगिये थोरि।

राकनि नाकप रीझि करै

तुलसी जग जौ जरै जावक जोरो॥

नाक संवारत आयो हो नाकहि नाहि

पिनाकिहि नेक निहोरो।

ब्रह्मा कहे गिरिजा सिखवो पति रावरो दानि है बावरो भोरो॥

वेदों से लेकर रामायण महाभारत तथा पुराणों में शिवार्चना का उल्लेख है।  शिव भक्तों में आदि शैवाचार्य, विष्णुनारायण हैं। सर्वप्रथम लक्ष्मी नारायण ने शिवोपासना की। विष्णु जी प्रथम शैव हैं सदुक्ति हंै।

”शैवानम् यथा हरि:। सेवहु शिवचरण रेणु कल्याण अखिलप्रद कामधेनु- तुलसी,

शिव एक हैं लीला भेद से वह लीला परमेश्वर अनेक भी हैं।  उनके अनेक रूप दिव्य नाम हैं, अद्र्धनारीश्वर, मायापति, गंगाधर, लिंगस्वरूप और अलिंग भी। भगवान शंकर का कपूरवतï् गौरवर्ण, नीलमणि प्रवालसदृश्य, मनोहर नील लोहित शरीर है। तीन नेत्र चारों हाथों में पाश, लाल कमल, कपाल, त्रिशूल हैं। आधे अंग में अंबिका सुशोभित है। मुखमण्डल सहस्त्रों सूर्य सदृश ज्योतिर्मय तेजस्वी है। सिर के दक्षिण भाग में धूमिता जटाजूट वाम भाग की अलकावली सुचिक्कण श्यामला लम्बी लटकें  लटक रही हैं। माथे पर अद्र्ध वैदी मनोहर है। एक नेत्र कटाक्ष के लिए चंचल, दूसरा शांत अर्धोन्मीलित। नासिका के छिद्र में सुनहली नथनी शोभा दे रही है। मस्तक पर चंद्रमा और सिर पर गंगा लहरा रही है अद्र्धांग में बाघम्बर भुजगावनद्ध हैं। कंठ में मन्दार पुष्पों की माला तथा मुण्डमाला लटक रही है। एक पैर में रेशमी साड़ी तो दूसरे पैर में गज की खाल एवं व्याघ्रम्बर धारण किए हैं। ऐसे परम् प्रभु सर्व शक्तिमान भगवान अद्र्धनारीश्वर को नमस्कार है। प्रणाम है। उन महेश्वर चंद्रमौलि की वन्दना करते हुए उनकी उपासना के संबंध में उनका प्रमुख मंत्र आराधना हेतु वर्णन कर रहा हूं।

शिवपंचाक्षर मंत्र नम: शिवाय। इस नम: शिवाय मंत्र के वासुदेव ऋषि हैं। पंक्ति छंद है और ईशान देवता हैं। सबके पहले ओंकार लगने पर यह षड़क्षरमंत्र हो जाता है। जैसे ऊँ नम: शिवाय।  शिवजी की षोडशोपचार पूजा कर शास्त्रोक्त विधि से स्नान ध्यान कर अनुष्ठïान करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लौकिक-परलौकिक सुख, इच्छित फल एवं पुरुषार्थ चतुष्टï्य की भी प्राप्ति साधक को हो सकती है। साधक भस्म रुद्राक्ष धारण कर दासोअस्मि कहकर विधिवत शिवार्चन करे जप स्त्रोतादि पाठ करे। रुद्राक्ष की माला एक सौ आठ दाने की अथवा 54 दानों की या 29 गुरिया की हो तो अच्छा है। कामना के अनुसार जप आदि उपासना करे, अनुष्ठान करे। साधक को विद्या प्राप्ति हेतु नम: शिवाय का जप स्फटिक माला से उत्तम है। सिद्धि प्राप्तत्यार्थ मोती की माला से जप करना उत्तम माना गया है या मूंगा की माला हो, हीरा की माला सिद्धप्रद है ही, रुद्राक्ष की माला भी उत्तम होती है, गुरु से दीक्षा लें। श्रद्धा-विश्वास से जप करना चाहिए। शिव नाम ही कल्याण वाचक है। अत: येन-केन प्रकारेण शिव का स्मरण  अथवा नाम जप करें। ‘शम् करोति शंकर ‘नाम जप का बड़ा महत्व है तभी महाकवि महात्मा तुलसीदास ने कहा है-

भाग्य कुभाय अनख आलस हू।

नाम जपन मंगल दिसि दसहू।

इष्टï देवता के नाम जप से साधक का कल्याण होता है चाहे श्रीराम अथवा श्रीकृष्ण, विष्णु, शिव, हनुमान आदि किसी देवता की आराधना, अर्चना साधना की जाए इनमें से कोई भी देवोपासना करें उसे सब कुछ मिल सकता है। लोक-परलोक सुधर जाएगा, पुरुषार्थ चतुष्टï्य धर्म अर्थ काम मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।  मार्कण्डेय ने शिवोपासना से अमरत्व प्राप्त कर लिया।  भगवद्ïदर्शन प्राप्त कर लिया। यह चमत्कारिक रोचक कथा शिवपुराण में वर्णित है। शिव के पार्थिव पूजन की बड़ी महिमा है प्रतीकोपासना भी है। शिव के गुणानुवाद करते हुए पदïï्माकर कहते हैं-

देव नर किन्नर कितेक गुण गावत तै,

पावत न पार जा अनन्त गुन पूरे को।

कहां पदमाकर सुगाल के बजावत ही

काज करि देति जन जापक जरूरे को॥

चंद्र की छटा न जुत पन्नगभटान जुत

मुकुट विराजै जट जूटन के जूरे

को।

देखो त्रिपुरारि की उदारता अपार कहां

पैये फल चारि फूल एक एक है धतूरे को॥

पद््माकर जी का उक्त छंद सुनाते हुए हमारे पिता श्री कालीचरण दीक्षित कवीश ने बतलाया कि रुद्रार्चन में अक्षत बेलपत्र, गंगाजल, कमल का फूल शिव को अर्पण करें। शिवालय में शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है।

वैश्वानर की रोमांचकारी घटना का वर्णन पुराण में है। वैश्वानर पर वज्र विद्युत्पात हुआ।  इंद्र ने उन पर ज्यों ही वज्र चलाया तो वैश्वानर ने शिवजी का स्मरण किया। वज्र लगने से क्षणभर के लिए मूर्छित हो गए पुन: चेतना आई आंखें खोलीं तो देखा कि भगवान गौरा पति शंकर उन्हें गोद में लिए हुए हैं। भवानी सहित शंकर को देख साश्रुनयन हो श्रद्धाजंलि से (करबद्ध हो) नतमस्तक होकर गदगद हो पुलकित हो गए। आशुतोष चंद्रमौलि ने कहा- भक्तवर तुमने हमें पुकारा बस हम आ गए क्या डर गए हो, अब निर्भय हो जाओ यह कह प्रभु ने वैश्वानर को आग्नेय कोण का अधिपति बना दिया, लोकोक्ति है-

शंकर सहाय तो भयंकर कहा करें।

सारांश में कहना है कि शिवोपासना के महामृत्युंजय अनुष्ठान का चमत्कार ऋषिवर मार्कण्डेय के जीवन में दृष्टिïगोचर होता है। शिवार्चन से ऋषिवर मार्कण्डेय ने मृत्यु विजयनि शक्ति प्राप्त कर ली मृत्युंजय स्त्रोत प्रसिद्ध है, जिसकी पंक्तियां प्रस्तुत हंै-

रत्नसानु शरासन रजताद्रि श्रृंग निकेतन।

शिंजिनी कृतपन्नगे श्वरमच्युतानल शायकं॥

क्षिप्रदग्धुरत्रय त्रिदशालयै रभिवन्दितं।

चंद्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

व्यक्ति को, साधक को सुख शांति एवं मनोवांछित फल प्राप्ति हेतु शिवोपासना करना चाहिए। (विभूति फीचर्स)

अंबानी बम कांड पर आधारित किताब CIU के लेखक को साहित्य अकादमी पुरस्कार

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‘CIU- क्रिमिनल्स इन यूनिफॉर्म’ के लेखक को साहित्य अकादमी पुरस्कार

मुंबई: एक तरफ जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों गुजरात के जामनगर में मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की प्री वेडिंग की तस्वीरें वायरल हैं और पूरा देश जहां रिकॉर्ड तोड़ खर्च वाली शादी की चर्चा कर रहा है, वहीं महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने मुकेश अंबानी के निवास स्थान एंटीलिया के बाहर मिली विस्फोटक से लदी कार और मामले के एकमात्र गवाह मनसुख हीरेन की हत्याकांड पर आधारित किताब ‘CIU- क्रिमिनल्स इन यूनिफॉर्म’ के लेखकों की जोड़ी में एक राकेश त्रिवेदी को साहित्य अकादमी अवॉर्ड 2023-24 की घोषणा की.


पत्रकार संजय सिंह और राकेश त्रिवेदी की जोड़ी ने लिखी इस सनसनीखेज कहानी को महाराष्ट्र सरकार की ओर से 11 मार्च को मुंबई में आयोजित एक भव्य रंगारंग कार्यक्रम में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा. शोध पत्रकारिता में परचम लहरा चुके पत्रकार लेखकों की इस जोड़ी द्वारा लिखित एंटीलिया विस्फोटक कांड की परतें खोलने वाली ये किताब पिछले साल काफी सुर्खियों में रही. किताब में किए गए खुलासों की पुलिस महकमे और राजनैतिक गलियारों में खूब चर्चा रही. बताया जाता है कि ‘CIU- क्रिमिनल्स इन यूनिफॉर्म’ इस किताब को सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, न्यूजीलैंड, केन्या और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के 11 बड़े शहरों में भी अच्छा प्रतिसाद मिला.
इससे पहले लेखक द्विय की बेस्ट सेलर रही किताब ‘तेलगी: रिपोर्टर की डायरी’ पर आधारित हाल ही में सोनी लिव ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘स्कैम 2003 – तेलगी स्टोरी’ ने काफी धूम मचाई और अब अंबानी केस पर आधारित ‘CIU- क्रिमिनल्स इन यूनिफॉर्म’ इस कहानी पर भी एक प्रतिष्ठित प्रोडक्शन कंपनी दिलचस्प वेब सीरीज बना रही है जो इस साल के आखिर तक रिलीज हो सकती है.

संजय लीला भंसाली ने अपना म्यूजिक लेबल ‘भंसाली म्यूजिक’ किया लॉन्च

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मुंबई। संजय लीला भंसाली, जो अपनी सिनेमेटिक मास्टरपीस के रूप में फिल्मों को बनाने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने अब अपने खुद के म्यूजिक लेबल भंसाली म्यूजिक को लॉन्च किया है।

भारतीय सिनेमा में, संजय लीला भंसाली का नाम एक आकर्षक कहानी और सुंदर संगीत के साथ जुड़ चुका है। अब उनके नाम से भंसाली म्यूजिक लेबल भी है, जहां वे संगीत की दुनिया में अपनी रचनात्मक शक्ति को बढ़ावा देंगे, और कई काबिल संगीतकार और कलाकारों के साथ मिलकर अपनी फिल्मों को और यादगार बनाने के लिए अलग – अलग एल्बम्स के लिए दिल जीतने वाला संगीत बनाएंगे।

संजय लीला भंसाली की फिल्में कभी असफल नहीं होती हैं और उसके पीछे की वज़ह कहानी को मजबूती देने वाला संगीत है। चाहे हम बात करें दीवानी मस्तानी की शानदारत की या ब्लैक की भावनात्मक धुन की। भंसाली के गाने इमोशंस से भरपूर होते हैं, जो उनकी फिल्मों के हर एक पहलू में खुलकर सामने आते हैं।

बता दें कि इस्माइल दरबार, मोंटी शर्मा और यहां तक ​​कि खुद जैसे टैलेंटेड संगीतकारों के साथ उनकी साझेदारी ने हिंदी सिनेमा में कुछ सबसे बेस्ट और खूबसूरत ट्रैक दिए हैं। चाहे वह “बाजीराव मस्तानी” से “दीवानी मस्तानी” की भव्यता हो या “लाल इश्क” की सुंदरता या “पद्मावत” से “घूमर” के रंग हों, भंसाली का संगीत गहराई और जुनून के साथ गूंजता है। हर नोट, हर लिरिक को प्यार, तड़प, बलिदान और जीत की कहानी को सुनने के लिए ध्यान से चुना जाता है। भंसाली का आर्टिस्टिक विजन और क्राफ्ट हमेशा किसी भी लिमिट को पर करती है और दुनिया भर ने जादूई लहर पैदा करती है। सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि फिल्म मेकर की इंटरनेशनल लेवल पर भी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।

भंसाली म्यूजिक के लॉन्च पर बात करते हुए, संजय लीला भंसाली कहते हैं, “संगीत मुझे बहुत खुशी और शांति देता है। यह मेरे अस्तित्व का एक अभिन्न अंग है। मैं अब अपना खुद का म्यूजिक लेबल “भंसाली म्यूजिक” लॉन्च कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि दर्शक भी ऐसा ही अनुभव करें। आनंद और आध्यात्मिक जुड़ाव जो मुझे तब महसूस होता है जब मैं संगीत सुनता हूं या बनाता हूं”।

भंसाली को बेहद खूबसूरती से क्लासिक और मॉडर्न म्यूजिक के कॉम्बिनेशन को बनाने के लिए जाना जाता है। भंसाली द्वारा बनाए गए गानों का असर हर उमर के लिस्टनर पर देखने मिलता है। चाहे वह प्राचीन महाकाव्यों की सुंदरता को दिखाना हो, या फिर मॉडर्न रोमांस की भावना को दिखाना हो।

भंसाली म्यूजिक के जरिए, संजय लीला भंसाली कला की व्यक्तिगत व्याख्या की सीमाएं नए रूप में स्थापित करते हुए, जनता को एक यात्रा पर बुलाते हैं, जहां संगीत सिर्फ एक अक्सेसरी नहीं बल्कि एक रूह-जगाने वाली शक्ति है।

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एक्टर रणदीप हुड्डा की राजनीति में एंट्री, हरियाणा की इस सीट से लड़ सकते हैं चुनाव

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बीजेपी में शामिल होने वालों की संख्या रोजाना बढ़ रही है। इस बीच खबर है कि बॉलीवुड स्टार रणदीप हुड्डा जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। एक्टर रणदीप हुड्डा बीजेपी के टिकट पर हरियाणा से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि रणदीप हुड्डा रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। रणदीप मूल रूप से हरियाणा के रोहतक के ही रहने वाले हैं।

रोहतक लोकसभा सीट इस समय बीजेपी के खाते में है। यहां से मौजूदा समय में अरविंद शर्मा सांसद हैं। उन्होंने साल 2019 में कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा को हराकर पहली बार बीजेपी का परचम लहराया था। बीजेपी को यहां पर 47 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे। अरविंद शर्मा को कुल 573,845 मत प्राप्त हुए थे।

भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ है रोहतक

हरियाणा का रोहतक जिला पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ है। यह सीट जाट बहुल मानी जाती है। साल 2019 से पहले रोहतक सीट कांग्रेस के खाते में रही है। दीपेंद्र हुड्डा और भूपेंद्र हुड्डा इस सीट से लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं। इस बार भी कांग्रेस दीपेंद्र हुड्डा का उम्मीदवार बना सकती है। रोहतक से कांग्रेस को काफी उम्मीदें हैं।

हरियाणा की सभी 10 सीटों पर बीजेपी का कब्जा

मौजूदा समय में हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी की गठबंधन सरकार है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी हरियाणा की सभी 10 सीटें जीतने में कामयाब हो गई थी। साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस रोहतक सीट जीत गई थी लेकिन 2019 में अपनी सीट बचाने में नाकाम हुई। इस सीट पर बीजेपी हर हाल में इस बार भी कब्जा करना चाहेगी क्योंकि इसका असर विधानसभा चुनाव में भी दिखाई देगा। यह सीट जीतकर बीजेपी जनता को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि हुड्डा अपना ही गढ़ नहीं बचा पाए।

फेसबुक को पक्षाघात,फेसबुकियों में बैचेनी

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(राकेश अचल-विभूति फीचर्स)
‘फेसबुक ‘ को बीती रात अल्प पक्षाघात हुआ तो पूरी दुनिया में फेसबुक के भक्त(फेसबुकिये) विचलित हो गए। लगा कि जैसे किसी ने उनकी जान ही छीन ली हो। मैं भी इस भक्तमंडली का सदस्य था लेकिन फेसबुक  के शांत होने के बाद मैंने भी चैन की सांस ली। मैंने बहुत कम अवसरों पर देखा है, जब लोग किसी चीज के लिए इतने परेशान और फिक्रमंद होते हैं। फेसबुक तो कोई चीज भी नहीं है। एक सेवा है किन्तु अपनी उपयोगिता की वजह से आज दुनिया के एक बड़े हिस्से के लिए प्राणवायु बन गयी है।
दुनिया में जिंदगी के लिए जैसे भोजन -पानी और आक्सीजन आवश्यक है वैसे ही अब सोशल मीडिया एक आवश्यक अवयव बन गया है ।  अकेले फेसबुक दुनिया के 1560  मिलियन लोग फेसबुक की सेवाओं से जुड़े हैं ,और ऐसे जुड़े हैं कि  कुछ समय के लिए ही फेसबुक के बंद होने से सदमे की स्थिति में पहुँच गए। फेसबुक के हितग्राहियों की दशा ऐसी हो गयी जैसे किसी सांप के मुंह से उसकी मणि छीन ली गयी हो ,या किसी मछली को पानी से निकाल कर गर्म रेत पर फेंक दिया हो। जाहिर है कि  फेसबुक ने बीस साल में ही  जनमानस पर अपना इतना प्रभुत्व बना लिया है कि लोग उसके आदी हो गए हैं और एक पल भी ‘ फेसबुकाये ‘ बिना नहीं रह सकते।
फेसबुक  ‘अनंग  ‘ है। फेसबुक को शैव सम्प्रदाय का कोई ‘ हैकर ‘ ही अपनी तीसरी आँख से भस्म कर सकता है लेकिन हमेशा  के लिए नहीं। फेसबुक की मारक क्षमता से समाज ही नहीं बल्कि सियासत भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है ,बावजूद इसके फेसबुक अपनी जगह है ,उसे मिटाने की,’ हैक ‘ करने की तमाम कोशिशें बार-बार नाकाम हो जाती है।  5  मार्च 2024  को भी ऐसी ही कोशिशें नाकाम हुईं और लोगों ने चैन की सांस ली। सवाल ये है कि  गुण-दोषों से भरी फेसबुक आम आदमी की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन कैसे गयी  ? इसके लिए हम खुद जिम्मेदार है।  हमने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न की कि हम आपस में ही एकदूसरे से कटते चले गये। संवाद की सूरत लगातार कम होती चली गयी।
आज फेसबुक है तो तमाम दूसरी बुक्स बेकार है।  फेसबुक आज का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा लोकप्रिय महाग्रंथ बन चुका है। फेसबुक किसी से भेदभाव नहीं करता। फेसबुक की  अपनी दुनिया है।अपने कानून हैं। अपने तौर-तरीके हैं। फेसबुक की अपनी कोई भाषा नहीं है। फेसबुक अपने उपयोगकर्ताओं को अपनी पसंद की भाषा चुनने का अवसर देती है। फेसबुक का अपना लोकतंत्र है,अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है,हालाँकि इसके अपने मापदंड हैं,सीमाएं है ।  फेसबुक भी अभिव्यक्ति की आजादी को एक सीमा के बाद पाबंद करती है किन्तु उस तरीके से नहीं जिस तरीके से आज दुनिया में तमाम  धार्मिक और लोकतांत्रिक सरकारें कर रही हैं। फेसबुक दुनिया के तमाम सत्ता प्रतिष्ठानों के लिए खतरा है। इसीलिए जब तब दुनिया के तमाम देशों की सरकारें फेसबुक   को प्रतिबंधित करने के लिए इंटरनेट को ही बंद करा देती हैं।
कहते हैं कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है ,सो इसी तरह अमेरिका के एक कालेज छात्र मार्क जुकरबर्ग की मित्रों से जुड़े रहने की जरूरत ने 2004  में फेसबुक को जन्म दिया था जो आज दुनिया के एक बड़े हिस्से की जरूरत बन चुकी है। दुनिया के तमाम लोग जुकरबर्ग के शुक्रगुजार हैं फेसबुक बनाने के लिए। फेसबुक दुनिया का ऐसा मेला है जहाँ दशकों से गुम हुए लोग आपस में मिल जाते हैं। ये काम आसान काम नहीं है। फेसबुक ने मनुष्य के एकांत में दखल किया है ।  मनुष्य को अवसाद से बचाया भी है और सामाजिक सुरक्षा भी  दी है ,साथ ही  अश्लीलता ,घृणा भी परोसी है। फेसबुक   गोपनीयता के लिए खतरा भी है और समाज को पारदर्शिता की ओर भी ले जाती है। यानि फेसबुक  एक दोधारी तलवार है। ये ऐसा उस्तरा भी है जो यदि बंदर के हाथ लग जाये तो हजामत बनने के बजाय गर्दन काटने  का भी काम कर सकती है।
फेसबुक के अनेक रूप है।  फेसबुक दवा भी है और जहर भी ।  फेसबुक मनोरंजन भी देती है और विकृति भी ।  फेसबुक के पास दोस्ती  और दुश्मनी के लिए पर्याप्त समय है ।  फेसबुक राजनीतिक हस्तक्षेप भी करती है और निजता पर भी डाका डालती है। फेसबुक नशा भी है और नशामुक्ति भी। फेसबुक के समर्थक भी हैं और विरोधी भी ।  फेसबुक अबाल-वृद्ध सबकी मित्र है। सबकी अभिभावक भी है ।  सबकी हमराह,हम जुल्फ,हमदर्द, हमजोली यानि सब कुछ है। फेसबुक किसी के लिए गीता है तो किसी के लिए कुरआन । किसी के लिए बाइबल है तो किसी के लिए कुछ और। इतना रूतबा और व्यापकता शायद किसी दूसरे माध्यम के पास नहीं हैं।
फेसबुक से आप मनोरंजन,ज्ञानार्जन ,व्यवसाय  ,महिमा मण्डन और मान मर्दन जो चाहे सो कर सकते है।  ये आपके ऊपर है कि  आप फेसबुक का कैसे इस्तेमाल करना चाहते है।  दुनिया में जैसे विभिन्न प्रकार के नशा से मुक्ति के लिए अभियान चलाये जाते हैं उसी तरह फेसबुक से मुक्ति के लिए भी अभियान चलाये जाते हैं। कुछ लोग 31  मई को फेसबुक छोडो दिवस के रूप में भी मानते हैं। कुल मिलाकर फेसबुक आज मनुष्य जीवन  की प्राणवायु है। इस पर जब-जब खतरा मंडराता है दुनिया  बेचैन हो जाती है । इसलिए जरूरी है कि  आप फेसबुक से मुहब्बत करते हुए भी इसका कोई न कोई विकल्प खोजकर रखिये अन्यथा खुदा न खास्ता किसी दिन फेसबुक समाप्त हुई उस दिन आपकी दुनिया भी आपको समाप्त होती सी नजर आएगी। वैसे मै फेसबुक को कलियुग का असली अवतार मानता हूँ । आइये हम सब फेसबुक की सलामती के लिए समवेत होकर ईश्वर से ,हैकरों से प्रार्थना करें कि वे इस पाकीजा उपक्रम से छेड़छाड़ न करें और ईश्वर इसे लम्बी उम्र दे । (विभूति फीचर्स

आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों का कम लागत पर इलाज करते हैं डॉक्टर एम डी पुजारी

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अब तक 5000 हजार से अधिक सफल सर्जरी कर चुके हैं स्पाइनल व न्यूरो सर्जन डॉक्टर एम डी पुजारी

मुम्बई। डॉक्टर एम. डी. पुजारी ब्रेन और स्पाइन सर्जन और कंसलटेंट है। डॉक्टर पुजारी पिछले 15 वर्षों से जरूरतमंद पेशेंट की स्पाइन सर्जरी और न्यूरो सर्जरी कर इलाज करते हैं।
डॉ पुजारी कहते हैं कि मुख्य रूप से ट्रस्ट हॉस्पिटल की सहायता से वह आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों का कम लागत पर इलाज करते हैं। क्योंकि ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी सर्जरी में इलाज का खर्च लगभग 8 से 10 लाख आता है जिसे कुछ मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार वहन नहीं कर पाते तो कुछ इलाज के आभाव में विकट परिस्थिति में चले जाते हैं। ऐसे ब्रेन और स्पाइन से बीमार व्यक्ति जिनको सर्जरी की आवश्यकता है किंतु उनका परिवार खर्च वहन नहीं कर पाता तो असहाय लोगों का न्यूनतम लागत या कभी निःशुल्क इलाज ट्रस्ट हॉस्पिटल की सहायता से डॉक्टर एम डी पुजारी कर देते हैं।

26 जनवरी 2024 को मुम्बई में डॉ पुजारी को सिंगर कुमार शानू और अवार्ड शो आयोजक व फिल्ममेकर डॉ कृष्णा चौहान ने राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2024 की ट्रॉफी देकर सम्मानित किया है। डॉक्टर पुजारी ने अपनी एमबीबीएस की शिक्षा बीएलडीई मेडिकल कॉलेज बीजापुर कर्नाटक से की है। उन्होंने एमएस की डिग्री ग्रैंड मेडिकल कॉलेज जेजे हॉस्पिटल से प्राप्त की है और न्यूरो सर्जरी की डिग्री कोलकाता से प्राप्त की है। डॉ. पुजारी मुम्बई में कूपर हॉस्पिटल, जेजे हॉस्पिटल, होली फैमिली हॉस्पिटल जैसे कई ट्रस्टी हॉस्पिटलों में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वह होलीफैमिली हॉस्पिटल बांद्रा में कार्यरत हैं। डॉक्टर पुजारी बताते हैं कि उन्होंने अब तक लगभग 5000 से अधिक ब्रेन और स्पाइनल सर्जरी सफलतापूर्वक की है। उनका कहना है कि मरीज की आधी समस्या तो आपकी मोटिवेशनल बातों और हौसला दिलाने से ही ठीक हो जाती है बाकी दवाइयां ठीक करती है। डॉ पुजारी ने बताया कि उनके इलाज द्वारा 90 से 95% लोग आज भी स्वस्थ और अपने कार्यों में व्यस्त हैं। डॉक्टर बताते हैं कि बड़े हॉस्पिटलों पर ब्रेन सर्जरी और स्पाइन सर्जरी का खर्च बहुत अधिक आता है ऐसी स्थिति में मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार खर्च वहन करने में अयोग्य रहते हैं। डॉक्टर पुजारी न्यूनतम खर्च पर और कभी-कभी निशुल्क ब्रेन और स्पाइन से पीड़ित ऐसे व्यक्तियों की सर्जरी कर देते हैं। डॉक्टर पुजारी अपने परिवार में पहले डॉक्टर हैं और उनकी पत्नी भी डॉक्टर हैं। डॉक्टर ने बताया कि हर मरीज अपने डॉक्टर को भगवान समझता है लेकिन मेरा भगवान तो मेरे मरीज है, अगर मरीज मेरे इलाज से संतुष्ट है तो इससे बड़ी संतुष्टि और खुशी मेरे जीवन की कुछ और हो ही नहीं सकती।

डॉ पुजारी ने बताया कि लोग ब्रेन और स्पाइन सर्जरी करवाने से डरते हैं लेकिन ब्रेन, स्पाइन, हार्ट, स्ट्रोक और ब्लीडिंग जैसी समस्या आने पर हमें तुरंत नजदीकी अस्पताल पर संपर्क करना चाहिए। अच्छे अस्पताल की खोज में समय बर्बाद ना करते हुए पहले नजदीकी अस्पताल में जाये और प्रारंभिक इलाज करवायें अन्यथा स्थिति बिगड़ सकती है, फिर समस्या से जुड़े डॉक्टर से संपर्क करें यदि अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध ना हो तो स्थिति संभालने के बाद स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास जाएं। यदि कभी ब्रेन या स्पाइनल से जुड़ी समस्या है तो किसी न्यूरो सर्जन से तुरंत संपर्क करना चाहिए तथा अतिशीघ्र जाकर इलाज प्रारंभ कर देना चाहिए। लोग ब्रेन और स्पाइन से जुड़ी समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से डरते हैं कभी गिर गए या सिर पर चोट लग गई ऐसे समय में इलाज को नज़रअंदाज़ नहीं करनी चाहिए वरना समस्या गंभीर हो सकती है।
डॉक्टर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि 95 साल के एक मरीज का उन्होंने सफल स्पाइन का सर्जरी किया है और आज वो 99 वर्ष की उम्र में स्वस्थ है, चल फिर रहा है। लोगों को स्पाइन की समस्या आती है तो यथाशीघ्र यदि इसका इलाज कर लिया जाए तो वह दूसरे के भरोसे नहीं रहेंगे और चल फिर सकेंगे और अपना कार्य कर सकेंगे। आपका साथ दूसरा कोई कुछ समय तक ही निभाएंगे। किसी पर आश्रित होकर रहना जीवन को अधिक कष्टकारी बना देता है इसीलिए अपनी बीमाती का शीघ्र इलाज कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और आपको सहारे की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। खासकर बुजुर्ग व्यक्ति जो स्पाइन की समस्या से जूझ रहे हैं उन्हें इलाज जल्द करवा लेनी चाहिए।
ब्रेन और स्पाइनल का इलाज करना काफी जोखिम भरा होता है लेकिन अब तक इन्होंने सफल सर्जरी किया है। जिसके लिए वह विज्ञान और भगवान दोनों का आभार मानते हैं।
एक तरफ सभी डॉक्टर को भगवान का दर्जा देते हैं, मगर डॉक्टर पुजारी कहते हैं कि मेरे मरीज ही मेरे भगवान है यदि वे स्वस्थ और प्रसन्न हैं तो इससे ज्यादा सुखद अनुभूति और कुछ नहीं। यही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है। मैं पैसों के लिए काम नहीं करता बल्कि ऐसे लोगों का उपचार करता हूं जिन्हें आर्थिक रूप से असक्षम होते हैं। क्योंकि सेवा ही परमधर्म है।
डॉक्टर ने आगे बताया कि अपने 15 साल के करियर पर उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखें हैं। कई मरीज जब स्वस्थ होकर तीन-चार महीने बाद उनके पास आते हैं तो वह उनको पहचान भी नहीं पाते क्योंकि ऑपरेशन के समय को उनके सिर का मुंडन कर दिया जाता है और जब तीन-चार महीने बाद उनके घने बाल आते हैं तो मैं पहचान भी नहीं पता। कुछ मरीज केवल मुझसे मिलने और बात करने आते हैं तो यह देखकर एक सुखद अनुभूति होती है और मैं सदैव भगवान का स्मरण कर प्रार्थना करता हूँ कि प्रभु आपके आशीर्वाद से लोग स्वस्थ हो पाये।

– गायत्री साहू

संदेशखाली के संदेशों को सुना जाना आवश्यक

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डॉ वंदना गाँधी –
माँ,माटी और मानुष के नारे के साथ पश्चिम बंगाल में स्थापित हुई सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस के ‘राज’ में माँ, माटी और मानुष तीनों बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। माँ काली को प्रथम देवी के रूप में पूजने वाली इस संस्कृति में महिलाओं की स्थिति संदेशख़ाली की घटनाओं से ही उजागर हुई है। राज्य सरकार संरक्षित नेताओं द्वारा किए जा रहे श्रृंखलाबद्ध अत्याचारों के बारे में इससे पहले देश दुनिया को पता भी न था कि कालिंदी नदी के इस तटीय क्षेत्र में महिलाएँ योजनाबद्ध षडयंत्र के तहत किए जा रहे हैं दैहिक शोषण का शिकार हो रही थीं।
किसानों और महिलाओं के साथ जो अत्याचार पूर्ववर्ती लेफ़्ट सरकार के लोग पश्चिम बंगाल में करते रहे उसे तृणमूल कांग्रेस ने और आगे ही बढ़ाया है। तृणमूल जो ‘सर्वभारतीय’ शब्द को छोड़ बैठी है और तुष्टीकरण की नीति के साथ माफ़िया समूह के साथ ‘राज’ कर रही है इसीलिए महिलाओं के शोषण की आवाज़ को दबाया जाता रहा। माफ़िया और गुंडों को सरकारी संरक्षण कितना अधिक है इसका पता इसी बात से लगता है कि हज़ारों करोड़ के घोटाले और महिलाओं के साथ जघन्य अत्याचार के आरोपी अपने जिला स्तर के एक कार्यकर्ता को पकड़ने में ही राज्य की पुलिस 55 दिन लगा देती है। बहरहाल  संदेशख़ाली की घटना समाज को कई संदेश दे रही है जिन्हें सुनना और अमल में लाया जाना आवश्यक है।
पश्चिम बंगाल के संदेशख़ाली क़स्बे का सच तब दुनिया के सामने आया जब आठ फ़रवरी को क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ा प्रदर्शन किया। झाड़ू और लाठी हाथ में लेकर ये महिलाएँ इस ‘भद्रदेश’ में अपने साथ लंबे समय से किए जा रहे जघन्य दैहिक शोषण के विरुद्ध प्रदर्शन करने सड़क पर उतरी थीं। यह प्रतिरोध भी शायद सामने न आ पाता यदि पाँच जनवरी के ईडी पर हमले के घटनाक्रम के बाद मामले का मुख्य आरोपी शाहजहाँ शेख यहाँ से फ़रार न हुआ होता। तृणमूल कांग्रेस का नेता शाहजहाँ शेख़ लगभग 10,000 करोड़ रुपए के मनरेगा और राशन वितरण घोटाले का आरोपी है। इसी आर्थिक अपराध की जाँच करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने पाँच जनवरी को संदेशखाली में शाहजहाँ शेख़ के आवास पर छापा मारा था। तब सत्ता संरक्षित इस माफ़िया के गुंडों ने ईडी की टीम पर हमला कर उसके अधिकारियों को घायल कर मार भगाया था।
शाहजहाँ तृणमूल में कितनी हैसियत रखता है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि ईडी पर हमले के बाद भी तृणमूल शाहजहाँ शेख का बचाव ही कर रही थी। शाहजहाँ का आतंक इतना ज़्यादा था कि उसके फ़रार होने के लगभग एक महीने बाद पीड़ित महिलाएँ अपनी आपबीती बताने का साहस जुटा सकीं। इन महिलाओं का दर्द है कि संदेशख़ाली क्षेत्र में ऐसी कौन महिला है जिसकी इज़्ज़त को शाहजहाँ शेख और उसके गुंडों शिवप्रसाद हज़ारा व उत्तम सरदार के हाथों तार-तार न किया गया हो। कभी बांग्लादेश से अवैध रूप से घुसपैठ करके आया शाहजहाँ एक मज़दूर हुआ करता था लेकिन तत्कालीन सत्ताधारी लेफ़्ट पार्टी का कार्यकर्ता बनने के बाद उसने उन्हीं किसानों की ज़मीनों पर क़ब्ज़े शुरू कर दिए लेफ़्ट पार्टी जिनके दम पर बंगाल में शासन करती थी और ख़ुद को उनकी सबसे बड़ा हमदर्द बताती थी। वह किसानों से ज़मीन बटाई पर लेता और उसमें खारा पानी भर के झींगा मछली का उत्पादन करता। इससे मोटी कमाई होती लेकिन किसान के खेत खारे पानी से बंजर हो जाते थे। तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद 2012 में शाहजहाँ शेख़ ने तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ली। इसके बाद ‘ऊपर तक पहुँच का फ़ायदा उठाकर’ उसने अपने आतंक और ज़मीन क़ब्ज़ाने के काम को और ज़्यादा तेज कर दिया। किसानों को दबाए रखने के लिए उसने संदेशख़ाली की स्त्रियों पर अपनी बुरी नज़र डालनी शुरू कर दी।
कभी पीठापुली (बंगाल का एक ख़ास पकवान जो चावल के आटे में खोया भरकर बनाया जाता है) बनाने के नाम पर महिलाओं को ज़बरन उनके घरों से उठाकर शाहजहाँ के यहाँ ले जाया जाता। इसके बाद पार्टी मीटिंग के नाम पर उन्हें बुलाया जाने लगा। महिलाओं और उनके परिवारजनों के पास न कह पाने का कोई विकल्प नहीं रहता क्योंकि ऐसा करने पर शाहजहाँ के गुंडे आकर महिलाओं और परिवार के लोगों से बर्बरता के साथ मारपीट करते। महिलाओं ने जो व्यथा बतायी है उसके मुताबिक़ सुन्दर स्त्रियों को छाँट-छाँट कर जबरन उठवा लिया जाता। रात में पार्टी मीटिंग के नाम पर गाँव वालों को पार्टी ऑफ़िस में बुलाया जाता और वहीं कुछ महिलाओं को छांटकर अंदर ले जाया जाता फिर दरवाज़े बंद करके जो किया जाता अब भी कोई महिला उसे बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। संदेशख़ाली और उसके आस पास के क्षेत्र की महिलाएं सालों से शाहजहाँ और उसके गुंडों की इस बर्बरता के दर्द से गुज़र रही थीं। पुलिस में शिकायत करने पर पुलिस कार्रवाई करने की बजाय उलटे कहती कि जाकर शाहजहाँ से समझौता कर लो। इस प्रकार राज्य संरक्षित गुंडों के आतंक को ये महिलाएँ और उनके परिजन अपने भीतर ही ज़ब्त किए रहे।
संदेशख़ाली में महिलाओं और किसानों के साथ हुए अत्याचारों के इस घटनाक्रम में महत्वपूर्ण संदेश छिपे हुए हैं। इससे पश्चिम बंगाल में राज्य संरक्षित गुंडों के सालों से चले आ रहे आतंक की ख़बर तो मिलती ही है साथ ही पता चलता है कि यह राज्य कितनी अराजकता का शिकार है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शासन, पुलिस और विशेष रूप से महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का दायित्व है कि वे यह पता करें कि कहीं ऐसे और संदेशख़ाली तो नहीं जहाँ शाहजहाँ शेख़ और उसके गुंडों जैसे बर्बर नरपिशाच तो नहीं पनप रहे। इस घटनाक्रम से यह भी संदेश लिया जा सकता है कि स्त्री सम्मान किसी एक राजनीतिक संगठन का ही दायित्व नहीं है बल्कि यह सभी की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। यह प्रश्न इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि संदेशख़ाली मामले में केवल भारतीय जनता पार्टी और सामाजिक सांस्कृतिक राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रतिरोध ही सामने आया है, माँ,माटी और मानुष की बात करने वाली तृणमूल कांग्रेस तो इस अतिसंवेदनशील मामले को दबाने में ही लगी रही। आरोपी शाहजहाँ को हिरासत में लेने में पश्चिम बंगाल पुलिस को 55 दिन लग गए। कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसे हिरासत में लिया जा सका। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में यहाँ तक कहा कि हिरासत में लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि कोई अपराधी साबित हो गया है। इस मामले में अन्य राजनीतिक दलों की चुप्पी भी ख़तरनाक है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का चुप भी यह बताता है कि वे कितने सिलेक्टिव हैं। जबकि इस घटनाक्रम का सीधा संदेश है कि ऐसे बर्बर स्त्री विरोधी आतंकी मानसिकता वाले लोगों के साथ निपटने में सब को एक साथ खड़े होना चाहिए।
संदेशख़ाली का एक संदेश यह भी है कि पुलिस, प्रशासन और राज्य का जनता के प्रति क्या दायित्व होना चाहिए। क्या ये संस्थाएं किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं का बचाव करने के लिए हैं या जनता के अधिकारों की रक्षा करने के लिए हैं? इसकी पड़ताल कौन कर रहा है कि हमारे समाज में ऐसे शाहजहाँ शेख तो नहीं पल रहे हैं। यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो अब दलगत राजनीति, भेदभाव और व्यक्तिगत लाभ-हानि छोड़कर पूरे समाज को साथ आने की आवश्यकता है जिससे ऐसा तीव्र प्रतिरोध खड़ा किया जा सके कि देश में कहीं दूसरा संदेश ख़ाली न बन सके और कोई शाहजहाँ किसानों और स्त्रियों के साथ ऐसी बर्बर हरकत करने के बारे में सोच भी न सके।(विनायक फीचर्स)

दुर्गम क्षेत्र के गांव को गोद लेने की अपील – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

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देहरादून,5 मार्च,मंगलवार को सचिवालय में विभिन्न देशों में निवास कर रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों से वर्चुअल संवाद करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रवासियों को विदेशों में उत्तराखण्ड का ब्रांड अम्बेसडर बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों ने अपनी मेहनत, लगन एवं बौद्धिक क्षमता से उत्तराखण्ड के बाहर देश-विदेश में अपनी पहचान बनायी है। उन्होंने सभी से अपेक्षा की कि वे अपनी जन्म भूमि के किसी दुर्गम क्षेत्र के गांव को गोद लेकर उसके समग्र विकास में सहयोगी बनें। इसमें राज्य सरकार भी सहयोगी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डवासियों के सहयोग एवं सहायता के लिये पूर्व में प्रवासी सेल बनाया गया था। इसे और अधिक सुविधा युक्त बनाये जाने के लिये शीघ्र ही प्रवासी उत्तराखण्ड बोर्ड का भी गठन किया जायेगा। साथ ही प्रवासी भारतीय दिवस की भांति राज्य में देश व विदेशों में रहने वाले प्रवासियों का सम्मेलन आयोजित किया जायेगा ताकि उनके विचार एवं सुझावों पर चिन्तन एवं मनन किया जायेगा। इस मंथन से निकलने वाला अमृत निश्चित रूप से देश व प्रदेश के विकास में फलीभूत होगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चीन, अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस सहित 12 देशों में रह रहे 22 प्रवासी उत्तराखण्डियों के विचार व सुझाव जाने। मुख्यमंत्री ने सभी के सुझावों पर आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन देते हुए प्रदेश हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की। सभी प्रवासियों ने प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, सूचना तकनीकि आदि के क्षेत्र में सहयोग का भी आश्वासन मुख्यमंत्री को दिया। सभी प्रवासी लोग अपने पैतृक क्षेत्रों से जुड़ने के लिये भी उत्साहित नजर आये ताकि उनकी भावी पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ सके।

संवाद के दौरान जिन्होंने अपने सुझाव रखे उनमें आस्ट्रेलिया से सुरेन्द्र सिंह रावत, न्यूजीलैण्ड से जोत सिंह बिष्ट, चीन से श देव रतूड़ी, अमेरिका से शैलेश उप्रेती, जापान से इंदिरा भट्ट, यू.के. से मनीष जुगराण, थाईलैंड से चन्द्रशेखर सिलोड़ी, सिंगापुर से सुनील थपलियाल, फ्रांस से उत्तम रावत, ओमान से राकेश बेलवान प्रमुख रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य का युवा रिवर्स माइग्रेशन की ओर बढ़ रहा है। स्वरोजगार के प्रति ध्यान दे रहा है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनायें भी संचालित की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में आयोजित वैश्विक निवेश सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के उद्यमियों ने प्रतिभाग कर प्रदेश में उद्योग व व्यापार इच्छा जताई है। अब तक 71 हजार करोड़ की ग्राउंडिंग हो चुकी है। राज्य में भी उद्योग की स्थापना से युवां को रोजगार के और अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से अपेक्षा की कि देवभूमि उत्तराखण्ड आपके पूर्वजों की पैत्रिक भूमि है। आपकी भावी पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे इसके लिये भी प्रयासरत रहने की उन्होंने जरूरत बतायी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश व दुनिया में भारत का मान- सम्मान बढ़ा है। भारतीयों को विदेशों में आदर व सम्मान से देखा जा रहा है।
कोरोना महामारी के बावजूद देश की अर्थ व्यवस्था 11 वीं से 5वी में रही।
इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी प्रवासियों को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि सभी प्रवासी विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड में अपना योगदान दें।
इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय, नीरज खैरवाल सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

भारत सरकार के पूर्व उपसचिव बसंत कुमार मछलीशहर लोकसभा सीट से भाजपा के प्रबल दावेदार।

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जौनपुर। आज हम उत्तर प्रदेश मे मछली शहर लोक सभा सीट से भाजपा के ऐसे प्रबल दावे दार की बात कर रहे है जो शिक्षित, सक्षम्, मेहनती, मृदुभाषी होने के बावजूद भाजपा से लगातार इसलिए वंचित किये जाते रहे है क्योकि वे जिस बिरादरी से संबंध रखते है उसे बसपा का पारंपरिक वोट माना जाता रहा है पर अपनी राष्ट्रवादी सोच के कारण उन्होंने बसपा की ओर से पार्टी जॉइन करने के ऑफर को ठुकरा दिया और एक दशक से अधिक समय से भाजपा मे एक कार्यकर्ता के रूप मे लगे हुए हैं। हम बात कर रहे है जनपद जौनपुर के ग्राम पिपरा के निवासी व भारत सरकार के पूर्व उपसचिव व एन डी ए 1 सरकार मे एम एस एम ई मंत्रालय में सलाहकार रहे बसंत कुमार की।
उन्होंने सरकारी सेवा से स्वैक्षिक सेवा निर्वित्ति के पश्चात् वर्ष 2011 मे सदस्यता ग्रहण की तथा भाजपा के   वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र के सानिध्य मे हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के विषय को गहराई से जाना और भाजपा के नीतियों और कार्यक्रमो के प्रचार प्रसार में कड़ी मेहनत की और 2011 मे लाल कृष्ण अडवाणी और कलराज मिश्र के नेतृत्व मे जन स्वाभिमान यात्रा मे पूरे प्रदेश का भ्रमण किया।
जब वर्ष 2014 मे कलराज मिश्र देवरिया से चुनाव लड़ रहे थे तो बसंत कुमार की कड़ी मेहनत की और पूरे क्षेत्र मे अपनी मौजूदगी का एहसास कराया और पूरे क्षेत्र में उन्हे कलराज मिश्र का करीबी कहा जाता था और जब नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल मे कलराज मिश्र एम एस एम ई मंत्री बनाये गए तो बसंत कुमार को इस मंत्रालय मे सलाहकार बनाया गया।
एक लेखक के रूप मे उन्होंने निम्न किताबे लिखी 1- राष्ट्रवादी कर्म योगी 2- हिंदुत्व एक जीवन शैली 3- युवाओ के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद 4- एकात्म वाद भाजपा का संकल्प 5- भारत में उदयमिता 6- आंबेडकर और राष्ट्रवाद इन पुस्तको का लोकार्पण भाजपा के शिखर पुरुष लाल कृष्ण अडवाणी, डा मुरली मनोहर जोशी, राज नाथ सिंह, कलराज मिश्र, डा सत्य नारायण जटिया, योगी आदित्यनाथ आदि महान व्यक्तियों द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त वे जाने माने स्तंभकार है, उनके द्वारा लिखे गए स्तंभ प्रति सप्ताह प्रमुख दैनिक अखबरो व पत्र पत्रिकाओं मे प्रकाशित होते रहते हैं जिनमे बड़ी बेबाकी से अपने विचार रखते हैं।
उनके पिता गुरु प्रसाद(बड़े बाबू) प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने अपनी कालेज शिक्षा वर्ष 1941 मे कठिन परिस्थितियों में पूरी की,क्योकि उस समय कालेज मे शिक्षा प्राप्त करना सिर्फ सवर्ण जमीदारो का एकाधिकार होता था, शिक्षा के प्राप्त 1946 मे भारत सरकार मे डाक तार विभाग मे बिना आरक्षण के नौकरी प्राप्त की। उनके देहांत के 7 वर्ष बाद भी क्षेत्र के लोग गुरु प्रसाद ( बड़े बाबू) का नाम बड़ी श्रद्धा से लेते है।अपने पिता की भाति बसंत कुमार ने भी शिक्षा मे टापर रहे और मड़ियाहु महाविधालय में वर्ष 1977-78 मे टाॅपर होने के कारण कालेज छात्र यूनियन मे प्रतिनिधि के नाम से मनोनीत किये गए। वे हमेशा इस बात के पक्ष धर रहे कि आरक्षण का लाभ वंचित समाज के निर्धन व्यक्तियों को ही मिले और जो लोग एक बार आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके है,उन्हे अपने बच्चो के लिए आरक्षण का लाभ स्वत: छोड़ देना चाहिए जिससे उसका लाभ वंचित समाज के निर्धनों को मिल सके, अपनी इसी सोच के कारण उन्होंने अपने दोनों बेटो को दिल्ली के टॉप की शिक्षण संस्थाओ मे शिक्षा दिलाई और आरक्षण का लाभ लेकर आईएएस या आईपीएस बनाने के बजाय ऐसी फील्ड चुनी जहा आरक्षण का ठप्पा न हो,उनका बड़ा बेटा अजीत रंजन दिल्ली क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद इंग्लैंड मे काउंटी क्रिकेट खेल रहा है,जबकि छोटा बेटा विनीत रंजन सर्वोच्च् न्यायालय मे एडवोकेट है।
बसंत कुमार एक पहल नामक एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव है और अपनी संस्था के माध्यम से वंचितो और निर्धनों की शिक्षा और रोजगार मे मदद करने के लिए तत्पर रहते है। वे विधायक या सांसद न होते हुए भी मछली शहर ( जौनपुर) के लोगो की मदद हर समय करते हैं चाहे वह दिल्ली मे काम हो या मछली शहर मे। बसंत कुमार की विशेषता जो उन्हे अन्य लोगो से अलग रखती हैं कि वे अपने प्रतिद्वंदियों को भी दिल्ली मे बड़े राष्ट्रीय नेताओ से मिलाने में कोताही नही करते।
ऐसे सरल स्वभाव के बहुमुखी प्रतिभा के धनी व विद्वान लेखक बसंत कुमार को भाजपा अपना प्रत्याशी बनती है,तो भाजपा की भारी मतो से जीत होगी और क्षेत्र मे चहुंमुखी विकास होगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को नया आयाम दिया है : श्री मुंडा

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NEW DELHI – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज आईएआरआई, दिरपई चापोरी, गोगामुख, असम में प्रशासनिक-सह- शैक्षणिक भवन, मानस गेस्ट हाउस, सुबनसिरी गर्ल्स हॉस्टल और ब्रह्मपुत्र बॉयज हॉस्टल का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, असम में प्रदर्शनी स्टाल का दौरा किया।

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केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर विशेष बल है।  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि के विकास की कमियों को दूर कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया है। इस क्रम में  प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है, जिसमें कृषि की भूमिका बेहद अहम है। श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि खाद्य तेल आयात का बोझ कम करने और तिलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए 11 हजार करोड़ रुपये का मिशन चलाया जा रहा है। हमें इस सोच के साथ काम करना है कि आने वाले दिनों में हम आयात नहीं बल्कि निर्यात करेंगे। उन्होंने कहा कि जब हम एक विजन के साथ काम करते हैं, तो हमें सफलता जरूर मिलती है।

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श्री अर्जुन मुंडा ने जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास पर भी बल दिया और कहा कि कृषि शिक्षा को आजीविका व रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाना चाहिए।  श्री मुंडा ने कहा कि जैव विविधता अध्ययन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एक साल में यह संस्थान शोध के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रौद्योगिकियों को जलवायु और लैंगिक स्तर पर तटस्थ होना चाहिए।

 

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राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने वैज्ञानिकों से उत्तर पूर्व क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक विविधता का दोहन करने का आग्रह किया।  उन्होंने प्रकृति के करीब प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी बल दिया और कहा कि हमें जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़ना चाहिए। उन्होंने दलहन और तिलहन से संबंधित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया, ताकि देश को दालों के निर्यात पर बहुत अधिक पैसा खर्च न करना पड़े। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान को उद्यमिता से जोड़ना होगा; और यह सब तभी संभव है जब विभिन्न संगठनों के बीच विचारों का मुक्त आदान-प्रदान हो।

 

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असम सरकार के शिक्षा, सामान्य जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने आईएआरआई, असम के प्रयासों की सराहना की।  उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आईएआरआई, असम द्वारा किया जाने वाला शोध कार्य पौधों, पशुओं और मत्स्य विविधता पर विचार करने के साथ-साथ पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायक होगा।

 

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लखीमपुर के सांसद श्री प्रदान बरुआ ने कहा कि यह हमारा स्वप्न था कि असम में इस स्तर का एक संस्थान बने। हमें आशा है कि यह संस्थान पूरे उत्तर-पूर्व भारत के युवा प्रतिभाओं की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।

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डीएआरई के सचिव और आईसीएआर नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने वर्चुअल माध्यम से उपस्थितजनों को संबोधित किया और आईएआर आई असम के उद्देश्यों व दायित्वों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उत्तर-पूर्व भारत में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अनुसंधान और विकास के माध्यम से तलाशने की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आईसीएआर यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा कि संस्थान तेजी से प्रगति करता रहे। इस संस्थान का खुलना आईसीएआर के इतिहास में एक यादगार दिन है। उन्होंने संस्थान के विकास से जुड़े लोगों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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आईएआरआई के निदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने आईएआरआई, असम की श्रमिक समिति द्वारा किए गए सभी प्रयासों की सराहना की।  इस अवसर पर डॉ. डी.के.सिंह, डॉ. अनिल सिरोही, डॉ. मनोज खन्ना, डॉ. अनुपम मिश्रा, भार्गव शर्मा, डॉ. वाई.एल.सिंह, डॉ. के.बी.पुन, श्री अंकुर भराली और धेमाजी के जिला कमिश्नर भी उपस्थित थे।