Home Blog Page 53

पंजाब में कुत्तों के आतंक से जनता परेशान*

0
*
(सुभाष आनंद-विनायक फीचर्स)
 पंजाब में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो जनता की परेशानी का सबसे बड़ा कारण बन रही है। रोजाना आवारा कुत्ते लोगों को काट रहे हैं । प्रदेश भर में रोज गली-गली मोहल्ले-मोहल्ले में घूम रहे कुत्तों के झुंड रोजाना लोगों को काट रहे हैं, इसी के कारण खासकर छोटे बच्चों में ही नहीं बड़ों में भी कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है।
 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार  अस्पतालों  में रोज  रेबीज टीका लगवाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। शहरों के अतिरिक्त गांवों में भी कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है । फिरोजपुर के सीनियर मेडिकल अफसर का कहना है कि हमारे पास आवारा कुत्तों के काटने के इलाज के लिए रेबीज इंजेक्शन भारी मात्रा में हैं ,लेकिन पिछले 5 वर्ष से कुत्तों की नसबंदी नहीं की गई ,जिसके कारण कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2025 के पहले तीन महीनों  में अकेले फिरोजपुर में ही  85 लोगों  को कुत्तों ने काटा है। उधर नगर पालिका ने पिछले दो दशक से कुत्तों को पकडऩे का कोई अभियान नहीं चलाया, ना ही कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस बनाए गए हैं। प्रतिदिन कहीं ना कहीं कुत्तों का हमला होता है । लोगों के पास हमलावर कुत्तों से निपटने के लिए कोई आसान रास्ता दिखाई नहीं देता।  कुत्तों के नियंत्रण के लिए प्रभावी प्रणाली नहीं होने से कुत्तों के काटने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।    पशु विशेषज्ञों का कहना है कि दिसम्बर से अप्रैल तक जगह जगह गली मोहल्ले में छोटे-छोटे कुत्ते के बच्चे देखने को मिलते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है की सबसे ज्यादा मौतें कुत्तों के काटने के कारण भारत में होती है। यह खतरा कम होने की बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है ।  कुत्तों के बढ़ते कहर की चुनौतियों पर गहरी नजर रखने वाली संस्थाओं का कहना है कि यदि यह समस्या इसी ढंग से बढ़ती गई तो नजदीक भविष्य में कुत्तों और इंसानों के बीच संघर्ष बढऩे का भी खतरा पैदा हो सकता है।  कुत्ते के काटने पर चार इंजेक्शन लगवाने जरूरी होते हैं ,यदि कुत्ता प्यार से भी चाटता है तो भी सावधान रहिए, यदि पालतू कुत्ते में रेबीज का इंफेक्शन है तो शरीर में भी रेबीज के वायरस आने की संभावना बनी रहती है। कुत्ते के काटने के बाद स्किन पर उसके दांतों के निशान दिखे तो सावधानी बरतना जरूरी है। कुत्ते के काटने की अनदेखी कभी-कभी घातक हो सकती है। रेबीज का वायरस एक बार शरीर में जाकर सालों तक रह सकता है। कई बार कुत्ता हाथ पैर या फिर चेहरे पर काटता है, हाथ पैर पर काटने से भी गहरा निशान बन जाता है यह भी काफी खतरनाक है।
 डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने से 24 घंटे के भीतर रेबीज का इंजेक्शन जरूरी है। 15 दिनों के भीतर चार इंजेक्शन लगवाने होते हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में वैक्सीन का 1400 से 1500 खर्च आता है जबकि सरकारी अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन मुफ्त में मिलते हैं।
डॉक्टर एकांत आनंद का कहना है कि रेबीज एक वायरस है ,अगर यह किसी जानवर में हो जाए और वह जानवर हमें काट ले खासकर बिल्ली,कुत्ता, बंदर और कभी कभी इंसान भी,तो यह वायरस मानव के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को फेल कर देता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति सामान्य नहीं रहता, कभी-कभी तो उसकी मौत हो सकती है।
आवारा कुत्तों की समस्या देश में कितनी भयानक हो चुकी है कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है  कि केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुत्तों के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी से दुनिया में होने वाली कुल मौतों में 1/3 प्रतिशत भारत में होती है। अकेले फिरोजपुर शहर छावनी में ही कुत्तों की संख्या 3000 से ज्यादा हो चुकी है ।  कुत्तों की नसबंदी के लिए कई बार बाहर से टीके मंगवाए जा चुके है। शहर में कुत्तों को रखने के लिए कोई भी शेल्टर हाउस नहीं है। ऐसा लगता है कि  कुत्तों की समस्या पर काबू पाने के लिए जिला प्रशासन बेबस बना हुआ है और समस्या पहले से ज्यादा गंभीर होती जा रही है।
 आयोग सख्त, स्टरलाइजेशन का आदेश: सड़क के कुत्तों द्वारा छोटे बच्चों को काटने की बढ़ती घटनाओं को लेकर पंजाब राज्य बाल अधिकार आयोग ने गंभीर नोटिस लिया है, आयोग  के चेयरमैन ने पंजाब के स्थानीय निकाय और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि राज्य के सभी शहरों में आवारा कुत्तों की गिनती करवाई जाए और जल्दी से जल्दी उनकी स्टरलाइजेशन कराई जाए, बच्चों पर कुत्तों द्वारा किए जा रहे हमले चिंता का विषय है, आयोग ने कहा है कि बच्चों को नोचने की घटनाएं लुधियाना ,जगराओं, माछीवाड़ा ,नाभा, जीरकपुर, मोहाली ,अमृतसर में हो चुकी है। चेयरमैन ने स्थानीय निकाय और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों को पत्र जारी करके कहा है कि भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विकास विभाग द्वारा 4 अप्रैल 2025 तक एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 के अधीन आवारा कुत्तों की संख्या को कंट्रोल में लाएं। (विनायक फीचर्स)

गौ माता के लिए हर विधानसभा में बनाया जाएगा रामाधाम, जगद्‌गुरू शंकराचार्य

0

मुरैना….देश में लगातार हो रही गौ हत्या एवं दयनीय हालत में विचरण कर रही गायों की दशा सुधारने के लिए जगद्‌गुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने देश की प्रत्येक विधानसभा में रामाधाम बनाने की तैयारी की है। अल्प प्रवास पर मुरैना पधारे ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने मुरैना रेस्ट हाउस पर गौसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस रामाधाम में गाय माता के शिष्टाचार के तहत सुखपूर्वक निवास करने के लिए उनकी सेवा करने के लिए हम लोगों ने संकल्प लिया है उसके अंतर्गत पहले चरण में इस साल के अंत तक भारत की सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक एक रामा धाम जिसमें 100 गाय सुखपूर्वक निवास करेगी प्रतिष्ठा पूर्वक निवास करेगी उनको निर्मित कर देने का वहां पर विराजमान कर देने हम लोगों ने लक्ष्य लिया है और आपके मुरैना संसदीय क्षेत्र है इसकी 8 विधानसभाए है उन विधानसभाओं में 8 रामाधाम पायलट प्रोजेक्ट के तहत निर्मित करने के लिए कार्य प्रारंभ कर दिया है हमारे गौ सांसद और विधायक आपके मुरैना के गौसांसद रुद्रदेव बजरंगी है जो गौसेवा और इस कार्य में लगातार लगे हुए है हमें अवगत कराते रहते हैं इनके नेतृत्व में मुरैना की सभी 8 विधानसभाओं में गौ विधायकों की नियुक्ति की जा रही है यहां कुछ गौ विधायक आए हुए भी है और 8 विधानसभाओं में 8 रामाधाम इस वर्ष के अंत तक बनाकरके और उसको संचालित करके उसमें जो कमी पेशी होगी उसको दूर करके हम लोग आगे बढ़ना चाहेंगे और यह कार्य हो जाता है तो अगले वर्ष और भी रामाधाम की स्थापना करते हुए जितनी भी हमारे देश में शुद्ध देशी नस्ल की हमारी वेद वर्णित गाय है उनका संरक्षण हम कर लेंगे क्योंकि ये किसी नेता के द्वारा कहा गया था बहुत चर्चित हुआ था हा कसाई गाय काटते जरूर हैं लेकिन उनको कसाई के हाथों में देता कौन है ऐसा कहकर नेताओं ने हम हिंदु आम हिन्दूओं के ऊपर जिम्मेदारी डाल दी थी कि तुम्ही दोषी हो
ठीक है तो हम गौमाता का संरक्षण करने के लिए भी व्यवस्था कर रहे है तो ये पायलट प्रोजेक्ट के तहत मुरैना संसदीय क्षेत्र के सभी 8 विधानसभा क्षेत्र में एक एक रामा धाम का निर्माण थोड़े दिनों में आरम्भ होगा। सभी गौ विधायक अपने अपने क्षेत्र में भूमि की प्राप्ति करेंगे भूमि चिन्हित करेंगे और उसके बाद जो उसका एस्टीमेट जो आएगा उसको निकालकर के जन सहयोग से रामाधाम की स्थापना करेंगे।

पहलगांव – किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे आतंकवादी

0

किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे आतंकवादी

(कुमार कृष्णन-विनायक फीचर्स)

पहलगांव हमले के जख्मों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बिहार दौरा सारे देश में चर्चित हो रहा है। जब पूरे देश से आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठ रही है,तब प्रधानमंत्री पर इस दौरे से राजनीतिक लाभ लेने के आरोप भी लगने लगे हैं। बिहार के मधुबनी के झंझारपुर की लोहना पंचायत में ‘पंचायती राज दिवस’ पर आयोजित आम सभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आतंकियों को यह कहकर ‘मिट्टी में मिलाने’ की धमकी दी कि ‘उन्होंने सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं वरन भारत पर हमला किया है।’ प्रधानमंत्री ने कहा – “22 अप्रैल को, जम्मू कश्मीर के पहलगाम में, आतंकियों ने मासूम देशवासियों को जिस बेरहमी से मारा है, उससे पूरा देश व्यथित है, कोटि-कोटि देशवासी दुखी है। सभी पीड़ित परिवारों के इस दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। जिन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है, वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है। इस आतंकी हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने अपना जीवन-साथी खोया है। उनमें से कोई बांग्ला बोलता था, कोई कन्नड़ा बोलता था, कोई मराठी था, कोई ओड़िया था, कोई गुजराती था, कोई यहां बिहार का लाल था। आज उन सभी की मृत्यु पर करगिल से कन्याकुमारी तक हमारा दुख एक जैसा है, हमारा आक्रोश एक जैसा है। ये हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है, देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं, जिन्होंने ये हमला किया है, उन आतंकियों को, और इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी, सजा मिल करके रहेगी। अब आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छा-शक्ति अब आतंक के आकाओं की कमर तोड़कर रहेगी।”
इस राज्य में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसलिये मोदी की इस सभा को चुनाव प्रचार का आगाज़ भी माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सभा से बिहार की 13,480 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को मान्यता प्रदान करते हुए राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार भी प्रदान किए। वहीं प्रधानमंत्री ने बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ में लगभग 340 करोड़ रुपये की लागत से रेल अनलोडिंग सुविधा वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी। इससे आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने और थोक एलपीजी परिवहन की दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी। क्षेत्र में बिजली की आधारभूत संरचना को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने 1,170 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी और पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत बिहार में बिजली क्षेत्र में 5,030 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। देश भर में रेल संपर्क बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रधानमंत्री ने सहरसा और मुंबई के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस, जयनगर और पटना के बीच नमो भारत रैपिड रेल और पिपरा और सहरसा तथा सहरसा और समस्तीपुर के बीच ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने सुपौल पिपरा रेल लाइन, हसनपुर बिथान रेल लाइन और छपरा और बगहा में 2-लेन वाले दो रेल ओवर ब्रिज का भी उद्घाटन किया। उन्होंने खगड़िया-अलौली रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित किया। दावा है कि इन परियोजनाओं से संपर्क में सुधार होगा और क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास होगा। प्रधानमंत्री ने दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत बिहार के 2 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सामुदायिक निवेश निधि के अंतर्गत लगभग 930 करोड़ रुपये का लाभ वितरित किया।

प्रधानमंत्री ने पीएमएवाई-ग्रामीण के 15 लाख नए लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र सौंपे और देश भर के 10 लाख पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को किस्तें जारी कीं। उन्होंने बिहार में 1 लाख पीएमएवाई-जी और 54,000 पीएमएवाई-यू घरों में गृह प्रवेश के अवसर पर कुछ लाभार्थियों को चाबियां भी सौंपीं।

बेशक यह सभा विकास कार्यों के शिलान्यास-उद्घाटन के लिये आयोजित की गयी थी और पहले से तय थी परन्तु पहलगाम हादसे के बाद भी इसे रद्द न करने से बात साफ़ हो गयी थी कि प्रधानमंत्री इस मंच से जनता के सामने अपनी बात रखेगें। सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर लौटे प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली हवाईअड्डे पर ही बैठक की और पाकिस्तान के खिलाफ़ कई फ़ैसले लिये लेकिन इसे लेकर न तो कोई अधिकृत बयान दिया, न ही कोई जनता को संदेश। सोशल मीडिया में बुधवार से ही यह बात घूमने लगी थी कि ‘प्रधानमंत्री पाकिस्तान को कड़ा संदेश बिहार की धरती से देंगे।’ यह सचमुच आश्चर्यजनक था कि अंतरराष्ट्रीय महत्व की इस बड़ी घटना के बारे में कुछ कहने के लिये उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली को नहीं चुना, न ही संसद में या सर्वदलीय बैठक में चेतावनी देना पसंद किया। जबकि रेडियो- टीवी पर वे देशवासियों को सम्बोधित कर सकते थे।

इन अनुमानों को मोदीजी ने गलत साबित नहीं होने दिया। सभा में उन्होंने आतंकियों के हाथों मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये सभी से दो मिनट का मौन धारण कराया तथा उनके परिजनों को यह कहकर सांत्वना दी कि ‘देश उनके साथ है।’ फिर इस घटना का ज़िक्र करते हुए आतंकियों को चेतावनी दी कि ‘उनकी बची-खुची ज़मीन भी ख़त्म कर दी जायेगी।’ उन्होंने ऐलान किया कि ‘अब उन्हें मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। जिन आतंकियों ने देश की आत्मा को चोट पहुंचाई है उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा।’

देश भर से इस घटना को लेकर समर्थन मांगने की कोशिश में मोदीजी ने इस बात को रेखांकित किया कि ‘हमले में किसी ने बेटा खोया, तो किसी ने भाई। किसी ने अपना जीवन साथी खोया है। उनमें कोई बांग्ला बोलता था, कोई कन्नड़ बोलता था, कोई मराठी था, कोई ओड़िया था, कोई गुजराती था तो कोई यहां बिहार का लाल था।’ भावुकता की रौ में बहे मोदीजी दुख और गुस्सा दोनों का इज़हार करते नज़र आये। उन्होंने कहा कि ‘पहलगाम में आतंकियों ने मासूम लोगों को जिस बेरहमी से मारा है उससे करोड़ों देशवासी दुखी हैं। सभी पीड़ित परिवारों के इस दुख में पूरा देश उनके साथ है। उन्होंने कहा-‘मैं बिहार की धरती से पूरी दुनिया को कहना चाहता हूं कि भारत सभी आतंकियों की पहचान कर उन्हें सजा देगी। इस तरह के हमले से आतंकी देश के मनोबल को नहीं तोड़ सकेंगे। आतंकी हमले के बाद अब न्याय दिलाने के लिए भारत सब कुछ करेगा। जो लोग मानवता में विश्वास करते हैं वे हमारे साथ हैं।’

मोदीजी ने आतंकी घटना के लिये सीधे-सीधे पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह ज़रूर कहा कि ‘140 करोड़ भारतीयों की इच्छा शक्ति ‘आतंक के आकाओं’ की कमर तोड़ देगी।’ फिर भी, उनकी रैली में ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए जो इस बात का इशारा है कि हमलावरों का मददगार कौन है या कम से कम किसे समझा जा रहा है।
मधुबनी की सभा से यह संकेत निकला है कि भारतीय जनता पार्टी को बिहार चुनाव के लिये एक मुद्दा मिल गया है।
भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, “प्रधानमंत्री ने आज बिहार से एक कड़ा संदेश दिया है। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने पाकिस्तान की पानी तक पहुंच बंद कर दी है। पाकिस्तान अब प्यासा रहेगा और परेशान रहेगा, जिस तरह से उन्होंने हमारे लोगों के साथ खूनी खेल खेला है। उसी तरह हम पाकिस्तानियों को पानी न देकर उन्हें तड़पाएंगे। सीमा सील कर दी गई है और पाकिस्तानियों को भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। आज बिहार से जो बात निकली है, वो दूर तक जाएगी।” शहनवाज ने आगे कहा कि, “प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि ऐसी सजा देंगे, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। साथ ही आतंकवादियों को नेस्तनाबूद किया जाएगा और प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान से इस बात को साफ कर दिया है। कश्मीर आतंकी हमले को भारतीय मुसलमानों से जोड़ना एक गंभीर साजिश है। पहलगाम में जिन्होंने ये हमला किया है, वो पाकिस्तानी थे और भारत के अंदर 140 करोड़ देशवासी इस हमले के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं। पाकिस्तान ने संदेश दिया कि वो हमें धर्म के नाम पर बांट देगा, लेकिन मैं बता देना चाहता हूं कि हम धर्म के नाम पर न बंटे हैं और न बंटेंगे।”शहनवाज हुसैन ने कहा, “हमारी पूजा पद्धति भले ही अलग-अलग हो, लेकिन हम सभी एक साथ खड़े हैं।

वहीं बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पहलगाम आतंकी हमले में इंटेलिजेंस को असफल बताया। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि पहलगाम हाई सिक्योरिटी जोन में है और अगर हाई सिक्योरिटी जोन में आतंकवादी 20 म‍िनट रहते हैं तो पर्यटकों की सुरक्षा का इंतजाम क्यों नहीं क‍िए गए? वह हाई सिक्योरिटी जोन है। अब तक कई आतंकी घटनाएं हुई हैं, कई लोगों की जानें गई हैं, इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की सभी विपक्षी पार्टियों के खिलाफ जांच एजेंसियां लगाई जाती हैं, इन आतंकियों के खिलाफ कोई एजेंसी क्यों नहीं लगती? इंटेलिजेंस फेल है। इस बड़ी लापरवाही की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरहद पार से आतंकी आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने बिहार के श्रमिकों की हत्या की,उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सरहद पार से आतंकी देश में आ रहे हैं, यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है और बहुत बड़ा सिक्योरिटी लैप्स है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पहलगाम की घटना को लेकर भाजपा और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश, लोकतंत्र और मानवता के लिए घातक है, जिसकी महागठबंधन निंदा करता है।

कुल मिलाकर बिहार में पहलगाम चुनावी मुद्दा तो बनाया जा रहा है लेकिन प्रश्न यही है कि क्या यह मुद्दा बिहार में छह महीने तक जीवित रहेगा और इससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि क्या पहलगाम के पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा और क्रूरतम आतंकवाद की ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति अब नहीं होगी?(विनायक फीचर्स)

पाकिस्तान का पूरा नामो-निशान मिटा दो -विश्व हिंदू परिषद

0

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार यानी 22 अप्रैल को जो घटना हुई उसके बाद से लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। पहगाम के एक पर्यटन स्थल पर कुछ आतंकी पहुंचे और वहां पर घूमने आए लोगों पर गोलियां चला दी। उन्होंने वहां घूमने पहुंचे लोगों से पहले उनका धर्म पूछा और उसके बाद उन पर गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी। इस घटना में 26 लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद से लोगों की मांग सिर्फ यही है कि हिंदुस्तान पाकिस्तान से इस घटना का बदला ले। इसके लिए विश्व हिंदू परिषद और उनके सहयोगी संगठनों ने नागपुर में उग्र पदर्शन किया।

आतंकी हमले के विरोध में प्रदर्शन

पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों पर जो कायराना हमला किया उसके बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। नागपुर के बडकस चौक पर विश्व हिंदू परिषद, RSS और बजरंग दल जैसे तमाम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एक उग्र पदर्शन किया। सभी लोगों की सिर्फ एक ही मांग है कि इस भारत इस हमले का बदला पाकिस्तान से ले और उसे ऐसा सबक सिखाए कि पाकिस्तान दोबारा ऐसा कुछ करने की हिम्मत न करे।

अमोल ठाकरे ने क्या कहा?

उग्र प्रदर्शन करते हुए विश्व हिंदू परिषद के नागपुर महानगर के प्रमुख अमोल ठाकरे ने कहा, ‘ये जो घटना हुई है उसका किन शब्दों में हम विरोध करें, वो शब्द हमारे पास नहीं हैं। कश्मीर की घाटियों में इससे पहले भी घटनाएं हुई हैं, अमरनाथ की यात्रियों पर भी इन्होंने गोलियां चलाई थी मगर इन्होंने कल धर्म पूछकर गोलियां मारी है। अगर ये धर्म पूछकर गोलियां चलाते हैं तो हिंदू शांत नहीं बैठेगा, ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए हम तैयार हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और आदरणीय राष्ट्रपति से यह मांग करते हैं कि आप पाकिस्तान के साथ एक बार कुछ ऐसा करो कि पाकिस्तान की 70 पीढ़ियां याद करें और भारत में कहीं पर भी ऐसी आतंकी घटना करने से पहले 100 बार सोचें। जैसे 2 बार सर्जिटल स्ट्राइक की थी, अब तीसरी बार में उनका पूरा नक्शा नाबूद कर दो। विश्व के पटल से पाकिस्तान का पूरा नामों निशान मिटा दो।’

IPS बन गया बकरियां चराने वाला का बेटा

0

कोल्हापुरः महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के कागल तहसील के यमगे गांव के एक धनगढ़ के बेटे ने कमाल कर दिया है। बिरुदेव सिद्धाप्पा ढोणे ने अपने पहले ही अटेम्ट में यूपीएससी की एक्जाम को  क्रैक कर दिया है। खंभे पर कंबल, सर पर गांधी टोपी.. हाथ में लकड़ी औऱ पैरों ये बड़ी बड़ी धनगढ़ी चप्पलें पहनकर धूप में बकरी चराने के लिए भटकने वाले धनगढ़ का बेटा यूपीएससी की परीक्षा पास हुआ और उसने 551 वी रैंक पाई है।

बिरुदेव को मिली 551वी रैंक 

अपने मामा के गांव में एक दोस्त जोर-जोर से चिल्लाते हुए आया और उसने बिरुदेव से कहा कि बिरुदेव तुम यूपीएससी की परीक्षा पास हो गए हो। अनपढ़ मां बाप वहीं पर थे। उन्हें अपना बेटा साहब बन गया है। इतना ही समझ में आया और बिरुदेव के साथ उसके मां-बाप और परिजन खुशी से झूम उठे। बिरुदेव यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाला कागल तहसील का पहला छात्र है।  बिरुदेव ने 2024 में केंद्रीय लोकसेवा आयोग की परीक्षा दी थी। उम्र की 27वीं आयु में पहले ही अटेम्ट में बिरुदेव 551 वी रैंक से यह परीक्षा क्रैक कर गया है।

इस तरह पैदा हुआ जुनून

दरअसल बिरुदेव का मोबाइल गुम हुआ था और वह पुलिस थाने में शिकायत करने के लिए गया तो पुलिस ने उसकी मदद नहीं मिली। वहीं पर बिरुदेव ने ठान लिया कि वह आईपीएस ऑफिसर बनेगा और बिरुदेव दिन रात मेहनत करते हुए रोजाना 22 घंटे पढ़ाई करता रहा। उसने यूपीएससी की पढ़ाई के लिए दिल्ली में डेरा डाला और मां बाप का नाम रोशन किया। दसवीं और बारहवीं कक्षा में कागल तहसील के मुरगुड केंद्र में बिरुदेव अव्वल नंबर से पास हुआ और पुणे के सिओईपी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने के लिए दाखिल हुआ।

गरीब है बिरुदेव का परिवार

बिरुदेव के पिता सिद्धापा ढ़ोने भी बारहवीं कक्षा तक पढ़े हैं लेकिन उसके बाद अपना बकरियों को चराने का पारंपरिक व्यवसाय करते हुए उन्होंने जिंदगी बसर कर दी। बिरुदेव को बड़ा ऑफिसर बनाने का सपना देखा। जब बिरुदेव दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी के लिए गया तो उसके पिता उसको बड़े कष्ट उठाकर 10 से 12 हजार रुपये भेजते। उतनी रकम में बिरुदेव गुजारा कर लेता। बिरुदेव ने कहा कि उसके पिता कई बार अलग नौकरी करने की सलाह देते रहे लेकिन वह जिद पर अड़ा रहा और आखिरकार वह आईपीएस ऑफिसर बन गया।

रिपोर्ट- समीर मुजावर, कोल्हापुर 

गोबर और गौमूत्र ने कर दिखाया कमाल!

0

खंडवा. खंडवा जिले के ग्राम आनंदपुर खैगांव में किसान ने कुछ ही दिनों में गौ खाद तैयार करके हजारों रुपए की बचत की हैं. कभी-कभी जैविक खाद को तैयार करने में भी कुछ महीनों का समय लगता है, लेकिन किसान ने अपने बाड़े में महज़ कुछ ही दिनों में गौ खाद तैयार करके फसलों को देना शुरू कर दिया. यह गौ खाद हर हफ़्ते तैयार हो जाती है और यह पके हुए खाद से 50 फीसदी ज्यादा असर करती है, क्योंकि इस खाद में गौ मूत्र भी मिला होता है. इस खाद को अलग से तैयार नहीं करना पड़ता है. किसान ललित शंकर ने बताया की गोशाला के बाड़े में 10 से 15 गाय बंधी रहती है. यह सभी गाय यही पर मल मूत्र करती रहती है जिससे एक ही स्थान पर गोबर की खाद इकट्ठा होती रहती है एक हफ़्ते बाद सभी इक्कठा हुए गोबर को सीधा खेत में डाल दिया जाता है. इस खाद से फसल पर तुरंत असर देखने को मिलता है.

फसलों पर किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं लगती है और साथ में खेत की मिट्टी भी उपजाऊ होती है जिसके कई सारे फायदे देखने को मिलते है. इस खाद को तैयार होने में सिर्फ़ एक हफ़्ते का समय लगता है इस गौ खाद की सबसे बड़ी खासियत यह होती है की इसमें प्रचुर मात्रा में गौ मूत्र भी मिला होता है, जिससे इस खाद की गुणवत्ता और भी बढ़ जाती है.

जानकारी के लिए आपको बता दे की गौ मूत्र को फ़सल के लिए राम बाण माना जाता है. इसमें कई सारे ऐसे तत्व होते है, जो फसल को किसी भी प्रकार के वायरस से बचाता है और उत्पादन बढ़ाने में भी काफी मदद करता है. जैविक पद्धति में भी गौ मूत्र का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ ही गाय के गोबर को भी भूमि के लिए संजीवनी की तरह माना जाता है. इसलिए इस गौ खाद का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जाता है. इस गौ खाद की काफ़ी डिमांड होती है,क्योंकि इसे यह जैविक पद्धति में काफ़ी उपयोग किया जाता है.

आखिर क्यों हुआ पहलगाम पर आतंकी हमला*

0
(मनोज कुमार अग्रवाल- विभूति फीचर्स)
       एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के सरकारी दावों को पलीता लगाते हुए पाकिस्तान समर्थित चरमपंथी आतंकियों ने 28 बेगुनाह पर्यटकों की हत्या को अंजाम देकर समूचे देश को झकझोर दिया है। लंबे समय बाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बड़ा आतंकी हमला हुआ है, 28 से ज्यादा पर्यटकों की मौत की आशंका है। इस हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया है जिनके तार टीआरपीएफ से जुड़े हुए है। इस संगठन को लश्कर का ही प्रॉक्सी बताया जाता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दहशतगर्दों ने 50 राउंड फायरिंग की थी, कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक दावा हुआ है कि लोगों से उनका मजहब पूछकर मारा गया। जाहिर है सदियां बदली,तारीखें बदली,लेकिन इक्कीसवीं सदी में भी कुछ जनूनी,चरमपंथी बर्बर मानसिकता नहीं बदली जो कभी हमास कभी तालिबान तो कभी लश्कर ए तैयबा का मुखौटा लगा कर बेगुनाहों का मजहब पूछ कर खून की होली खेलते हैं। जरूरत इस बर्बर मानसिकता के इलाज की है।
आपको बता दें कि आतंकियों ने पहलगाम जैसे टूरिस्ट स्पॉट को ही हमले के लिए क्यों चुना? इसके पीछे एक बड़ी वजह आने वाले दिनों में शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं में दहशत फैला कर यात्रा में बाधा उत्पन्न करना है। दूसरी वजह अमेरिकी उपराष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान इस तरह की खूनी वारदात कर कश्मीर के मुद्दे को विश्वमंच पर जिंदा रखने की पाकिस्तान की साजिश है। जानकार बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर का पहलगाम इलाका जंगलों से घिरा हुआ है, यह काफी ऊंचाई पर स्थित है। अब वैसे तो पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती दिखती है, लेकिन पहलगाम एक ऐसी जगह है जहां दूसरे क्षेत्रों की तुलना में कम सिक्योरिटी रहती है। इससे पहले पहलगाम में क्योंकि कभी ऐसा हमला भी नहीं हुआ, ऐसे में ज्यादा फोर्स नहीं देखी गई। पहलगाम आए पर्यटक खुद बता रहे हैं कि जब हमला हुआ, कोई फोर्स उस समय वहां नहीं थी, लोग ही एक दूसरे की भागने में मदद कर रहे थे।
जाहिर है कि सरकार कुछ भी दावा करे लेकिन सुरक्षा में भारी कोताही और सजगता में चूक ही इस आतंकी हमले के पीछे एक बड़ी वजह बनी है। दरअसल लंबे समय से आतंकवाद पर नियंत्रण के बाद कहीं न कहीं सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता में थोड़ी ढील हुई और आतंकी इसी का फायदा उठाकर हिन्दू पर्यटकों के साथ खून की होली खेलने में कामयाब हो गए।
कई रिपोर्ट्स बता रही हैं कि इस आतंकी हमले के एक घंटे बाद सुरक्षाबल वहां आने शुरू हुए, इलाके को कंट्रोल में लिया गया। लेकिन आतंकियों को इस पूरे इलाके की  जानकारी थी, उन्हें भी पता था कि यहां दूसरे क्षेत्रों की तुलना में सुरक्षा कम है। पहलगाम के जिस इलाके में हमला हुआ है, वहां पर वाहन भी नहीं जाते हैं, पर्यटक खच्चर के जरिए ही वहां तक पहुंचते हैं, इसे ट्रैक वाला इलाका माना जाता है। ये सारी जानकारी भी इन दहशतगर्दों को पहले से थी।
माना जा रहा है कि इसी वजह से टूरिस्ट सीजन में पहलगाम को निशाना बनाया गया। वहीं यह इलाका क्योंकि जंगलों से घिरा हुआ है, ऐसे में आतंकी वहां से आए और वहीं से भाग भी गए। अभी के लिए पूरे इलाके में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है, एनआईए भी वहां पहुंच चुकी है।
पहलगाम को निशाना बनाने का एक बड़ा कारण यह भी है कि अमरनाथ यात्रा के रूट में यह क्षेत्र पड़ता है। अमरनाथ जाने के दो रास्ते रहते हैं, एक रास्ता पहलगाम से होते हुए जाता है। ऐसे में आतंकी हमला कर ना सिर्फ पर्यटकों के मन में डर पैदा करने की कोशिश हुई है बल्कि सरकार को भी सीधी चुनौती दे दी गई है। समझने वाली बात यह भी है कि जम्मू-कश्मीर की सबसे ज्यादा आय पर्यटन के जरिए होती है, जितने अधिक टूरिस्ट घाटी में आते हैं, उतना ही जम्मू-कश्मीर का विकास भी होता है। लेकिन कश्मीरियों और कश्मीर का विकास इन आतंकियों की सबसे बड़ी हार है, ऐसे में उसे खत्म करने के लिए ऐसे कायराना हमले पहले भी किए जा चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों पर हुआ ये अब तक का सबसे बड़ा हमला है। इससे पहले भी घाटी में टूरिस्ट्स को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाने की कोशिश हुई है। हमले के बाद फरार हुए आतंकियों को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों ने भी बड़ा अभियान छेड़ दिया है। कश्मीर में यह हमला उस समय हुआ, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर आए हैं।
साल 2000 से अब तक जम्मू-कश्मीर में आतंकी कई बार पर्यटकों, श्रद्धालुओं और स्थानीय को अपना निशाना बना चुके हैं। आतंकवादियों ने 21 मार्च की रात को अनंतनाग जिले के छत्तीसिंहपोरा गांव में अल्पसंख्यक सिख समुदाय को निशाना बनाया, जिसमें 36 लोग मारे गए। अगस्त 2000 में नुन्वान बेस कैंप पर हुए आतंकी हमले में दो दर्जन अमरनाथ तीर्थयात्रियों सहित 32 लोग मारे गए। जुलाई 2001 में 13 लोग मारे गए। अनंतनाग के शेषनाग बेस कैंप पर हुए इस आतंकी हमले में अमरनाथ यात्रियों को फिर से निशाना बनाया गया, जिसमें 13 लोग मारे गए। एक अक्टूबर 2001 को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल परिसर पर आत्मघाती (फिदायीन) आतंकी हमला हुआ, जिसमें 36 लोग मारे गए। 2002 में चंदनवाड़ी बेस कैंप पर आतंकी हमला हुआ और 11 अमरनाथ यात्री मारे गए। 23 नवंबर, 2002 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दक्षिण कश्मीर के लोअर मुंडा में एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) विस्फोट में नौ सुरक्षा बल कर्मियों, तीन महिलाओं और दो बच्चों सहित उन्नीस लोगों की जान चली गई। 23 मार्च 2003 को आतंकवादियों ने पुलवामा जिले के नंदी मार्ग गांव में 11 महिलाओं और दो बच्चों सहित  कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी। 13 जून को पुलवामा में एक सरकारी स्कूल के सामने भीड़भाड़ वाले बाजार में विस्फोटकों से लदी एक कार में विस्फोट होने से दो स्कूली बच्चों और तीन सीआरपीएफ अधिकारियों सहित तेरह नागरिक मारे गए और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। 12 जून 2006  को कुलगाम में नौ नेपाली और बिहारी मजदूर मारे गए। 10 जुलाई 2017  को कुलगाम में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हमला हुआ ,जिसमें 8 की मौत हो गई थी।
बहरहाल इस बेहद बर्बरता व कायरता भरे आतंकी हमले में जिस तरह आंतकियों ने पर्यटकों से उनका धर्म पूछा मजहबी आयत बोलने के लिए कहा और नहीं बोलने पर गोलियों से भून दिया यह समूचे विश्व में कथित शांति का पैगाम देने वाले मजहब पर भी गहरा बदनुमा दाग लगाता है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे बर्बर क्रूर शैतानों को जल्द से जल्द उनके कृत्य का सबक सिखाया जाए और सरकार ऐसा सबक सिखाए कि आतंकियों की सात पुश्तें भी भविष्य में ऐसी घिनौनी अमानवीय हरकत को दोहराने की हिम्मत न कर सके। जरूरत इस बात की भी है कि दुनिया भर का इस्लामी नेतृत्व आतंकियों की इस बेहद शर्मनाक बर्बर और अमानवीयता भरी क्रूरता की खुले मंच पर निंदा करे।   (विभूति फीचर्स)

“गऊ भारत भारती” के गौ माता विशेषांक का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी के करकमलों से भव्य विमोचन

0

 

मुंबई: भारत के पहले गौवंश आधारित राष्ट्रीय समाचारपत्र “गऊ भारत भारती” द्वारा प्रकाशित गौ माता विशेषांक का विमोचन महाराष्ट्र राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस जी के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।

इस विशेष अवसर पर प्रतिष्ठित लेखक मुस्तफा गोम, समाजसेवी प्रियांक शाह, वरिष्ठ पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली एवं समाचारपत्र के संपादक व प्रकाशक संजय शर्मा ‘अमान’ उपस्थित रहे।

“गऊ भारत भारती” पिछले दस वर्षों से गौवंश के संरक्षण, संवर्धन तथा गौ संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों को जनमानस तक पहुँचाने का कार्य बड़ी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ करता आ रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद यह प्रकाशन गौ माता के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जनजागरण अभियान सफलतापूर्वक संचालित कर रहा है।

गौ माता विशेषांक में देशभर के गौ सेवा से जुड़े प्रेरणादायी कार्यों, संस्थाओं की उपलब्धियों एवं विविध दृष्टिकोणों को समाहित किया गया है। यह विशेषांक गौ भक्तों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत साबित होगा।

सऊदी दौरा छोड़ दिल्ली लौटे PM मोदी, एयरपोर्ट पर ही NSA डोभाल-जयशंकर के साथ की मीटिंग

0

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें अधिकतर लोग टूरिस्ट थे। इस आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी सऊदी अरब के अपने दो दिवसीय दौरे को बीच में ही छोड़कर मंगलवार (22 अप्रैल 2025) रात जेद्दा से दिल्ली लौट आए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने उन्हें पहलगाम हमले की पूरी जानकारी दी। पीएम ने तुरंत हालात का जायजा लिया और बुधवार (23 अप्रैल 2025) को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक बुलाई।

इससे पहले, सऊदी अरब में पीएम मोदी ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ पहलगाम हमले पर चर्चा की। क्राउन प्रिंस ने हमले की कड़ी निंदा की और भारत के साथ आतंकवाद के खिलाफ मजबूत साझेदारी की बात दोहराई। पीएम ने सऊदी में आधिकारिक रात्रिभोज में हिस्सा नहीं लिया और तुरंत भारत लौटने का फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक, हमले की गंभीरता को देखते हुए पीएम ने अपनी तयशुदा योजना बदली।

पहलगाम के बायसरण घाटी में हुए इस हमले को 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट ने हमले की जिम्मेदारी ली है। हमले में दो विदेशी नागरिकों (यूएई और नेपाल) और दो स्थानीय लोगों की भी मौत हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर पहुँचकर हाई-लेवल मीटिंग की और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

विशेष – *धरती को सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता हरियाली और जल संरक्षण*

0
पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल विशेष
 *धरती को सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता हरियाली और जल संरक्षण* 
(विवेक रंजन श्रीवास्तव-विनायक फीचर्स)
प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इस वर्ष की थीम “पृथ्वी बचाओ” (Planet vs. Plastics) के साथ-साथ पर्यावरण के दो मूलभूत आधार हरियाली और जल संरक्षण पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है। ये दोनों ही तत्व न केवल मानव जीवन, बल्कि समस्त जैव विविधता के अस्तित्व की कुंजी हैं।  
हरियाली, प्रकृति का हरा सोना कही जा सकती है।
वृक्ष और वनस्पतियाँ पृथ्वी के फेफड़े हैं। समुद्र पृथ्वी के सारे अपशिष्ट नैसर्गिक रूप से साफ करने का सबसे बड़ा संयत्र कहा जा सकता है। वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करने के साथ-साथ  वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, जलवायु को संतुलित करते हैं, और जीव-जंतुओं को आश्रय देते हैं।
भारत में वनों का क्षेत्रफल लगभग 21.71प्रतिशत, भारतीय वन सर्वेक्षण 2021 के अनुसार है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आवश्यक 33 प्रतिशत से  कम है। शहरीकरण, अंधाधुंध निर्माण, और औद्योगिकीकरण के कारण हरियाली का ह्रास एक गंभीर समस्या बन चुका है।
– वनों की कटाई से मरुस्थलीकरण बढ़ रहा है।
– प्रदूषण के कारण पेड़ों का जीवनकाल घटा है।
– जैव विविधता पर संकट।
                    *समाधान*
– सामुदायिक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाना।
– सरकारी योजनाओं जैसे ग्रीन इंडिया मिशन को सक्रियता से लागू करना।
– शहरी क्षेत्रों में छतों पर बगीचे (टेरेस गार्डनिंग) को बढ़ावा देना।
                  *जल संरक्षण*
जल ही जीवन है, यह वाक्य भारत जैसे देश में और भी प्रासंगिक है,नीतिआयोग, 2018 के अनुसार 60 करोड़ लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं । नदियों का प्रदूषण, भूजल स्तर का गिरना, और वर्षा जल का अपव्यय जल संकट को गहरा कर रहे हैं।
                   *चुनौतियाँ*
– कृषि और उद्योगों में जल की अत्यधिक खपत।
– वर्षा जल संचयन की पारंपरिक प्रणालियों (जैसे कुएँ, तालाब) का विलोपन।
– नदियों में प्लास्टिक और रासायनिक कचरे के निपटान को रोकना।
                      *समाधान*
– वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) को अनिवार्य बनाना।
– नदियों की सफाई के लिए नमामि गंगे जैसे अभियानों को व्यापक स्तर पर लागू करना।
– किसानों को ड्रिप सिंचाई और फसल चक्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
हरियाली और जल संरक्षण दोनों का अटूट नाता है। ये दोनों पहलू एक-दूसरे के पूरक हैं। वृक्ष भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि जल के बिना हरियाली संभव नहीं। हरियाली के बिना शुद्ध वातावरण संभव नहीं होता। उदाहरण के लिए, राजस्थान के तरुण भारत संघ ने जल संरक्षण और वनीकरण के माध्यम से अलवर क्षेत्र को हरा-भरा बनाने का वृहद कार्य किया है। इसी प्रकार, केरल की “हरित क्रांति” ने वर्षा जल प्रबंधन को प्राथमिकता देकर कृषि उत्पादन बढ़ाया।
                 *हम क्या कर सकते हैं?*
1. व्यक्तिगत स्तर पर-
   – घर में पौधे लगाएँ और पानी की बर्बादी रोकें।
   – प्लास्टिक का उपयोग कम करके मिट्टी और जल को प्रदूषण से बचाएँ।
    – वर्षा जल संग्रह प्रारंभ करें।
2. सामुदायिक स्तर पर-
   – गली-मोहल्ले में जागरूकता अभियान चलाएँ।
   – स्कूलों और कॉलेजों में “इको-क्लब” बनाएँ।
3. राष्ट्रीय स्तर पर-
   – सरकार को जल शक्ति अभियान और राष्ट्रीय हरित न्यायालय के निर्देशों को कड़ाई से लागू करना चाहिए।
पृथ्वी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी सतत प्रतिबद्धता दोहराने का प्रतीक है। हरियाली और जल संरक्षण के बिना, मानवता का भविष्य अंधकारमय है। हम सब को”थिंक ग्लोबली, एक्ट लोकली” के सिद्धांत पर चलते हुए, अपनी धरती को सुरक्षित रखने की शपथ लेने का समय है।(विनायक फीचर्स)