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जैन धर्म के संस्थापक और प्रथम तीर्थंकर थे भगवान ऋषभदेव

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अतिवीर जैन पराग – विनायक फीचर्स
जिस अयोध्या नगरी में 22 जनवरी 2024 को श्री राम जी के मंदिर की 496 वर्षों के बाद पुनस्र्थापना हुई है। उस अयोध्या नगरी को साकेतपुरी, सुकौशल तथा विनीता भी कहते थे। उसी अयोध्या नगरी में करोडों वर्ष पूर्व महाराजा नाभिराय का शासन था। उनकी धर्मपत्नी महारानी मरुदेवी थी। महारानी मरुदेवी के गर्भ से चैत्र कृष्ण पक्ष नवमी को सुबह एक बालक ऋषभनाथ का जन्म हुआ। बालक ऋषभ के युवा होने पर उनका विवाह कच्छ और महाकच्छ की दो बहनों यशस्वती (नंदा) और सुनंदा के साथ कर दिया गया। रानी यशस्वती से भरत आदि सौ पुत्र और एक पुत्री ब्राह्मी हुई। तो रानी सुनंदा से एक पुत्र बाहुबली और एक पुत्री सुंदरी हुई। ऋषभदेव ने अपनी पुत्री ब्राह्मी को अक्षर ज्ञान दिया तो सुंदरी को अंक विद्या का ज्ञान दिया। ब्राह्मी लिपि आज भी प्राचीनतम है। सभी पुत्रों को शस्त्र और शास्त्रों का ज्ञान दिया और प्रजा पालन करना सिखाया।
यह वह समय था जब भोगभूमि का काल पूर्ण होकर कर्मभूमि का काल प्रारंभ हो गया था। भोगभूमि में दस   कल्पवृक्ष होते थे जो मनुष्य की सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करते थे। मनुष्य को कोई काम नहीं करना पड़ता था। धीरे-धीरे काल के प्रभाव से यह कल्पवृक्ष लुप्त होते गए। और मनुष्य के सामने भूख प्यास, गर्मी सर्दी और बीमारियों की समस्याएं आने लगी। प्रजा अपने राजा नाभिराय के पास गई और उपाय पूछा तो राजा ने प्रजा को युवराज ऋषभदेव के पास भेज दिया।
   भगवान ऋषभदेव या भगवान आदिनाथ ने संसारी रहते हुए प्रजाजनों को शस्त्र, लेखनी, विद्या, व्यापार, खेती एवं शिल्प इन छह कार्यों को करना सिखलाया। उन्होंने जनता को इन छह कार्य के द्वारा आजीविका पैदा करने के उपदेश दिए। इसीलिए वे युगकर्ता और सृष्टि के ब्रह्मा कहलाए। इस रचना के द्वारा ऋषभदेव ने प्रजा का पालन किया। इसलिए उन्हें प्रजापति भी कहा गया।
उस समय ऋषभदेव ने प्रजा को असी , मसी, कृषि, विद्या, वाणिज्य, शिल्प, छह उपाय बताएं। इन्हें  षटकर्म कहा गया।
राजा नाभि राय ने कुछ समय पश्चात राज सिंहासन ऋषभदेव को सौंप दिया और खुद तपस्या करने के लिए वन में चले गए। राजा ऋषभदेव ने प्रजा को योग एवं क्षेम  (नवीन वस्तु की प्राप्ति तथा प्राप्त वस्तु की रक्षा) के नियम बताएं। गन्ने के रस का उपयोग करना बताया। खेती के लिए बैल का प्रयोग करना सिखाया।  इसीलिए ऋषभनाथ को वृषभनाथ भी कहा जाता है।
एक बार जब महाराज ऋषभदेव के जन्मदिन के दिन उत्सव मनाया जा रहा था। स्वर्ग की अप्सराएँ नृत्य कर रही थी। उनमें एक मुख्य अप्सरा नीलांजना नृत्य करते-करते मृत्यु को प्राप्त हो गई। क्योंकि उसकी आयु पूर्ण हो गई थी। यह देखकर राजा ऋषभदेव को वैराग्य हो गया। और उन्होंने अपने सबसे बड़े पुत्र भरत का राज्याभिषेक कर दीक्षा ले ली। अयोध्या से दूर सिद्धार्थ नामक वन में पवित्रशिला पर विराजकर छह माह का मोन लेकर उपवास और तपस्या की। जब छह माह का ध्यान योग समाप्त हुआ तो वे आहार के लिए निकल पड़े। चलते-चलते छह माह बाद  हस्तिनापुर में पहुंचे। वहां के राजा सोमप्रभ और भाई श्रेयांश कुमार ने महाराज को प्रथम आहारदान गन्ने के रस का दिया। भगवान ने दोनों हाथों की अंजलि बनाकर खड़े रहकर उसमें इक्षारस का आहार  लिया। और तभी से आज तक जैन मुनियों द्वारा खड़े होकर अपनी अंजलि में लेकर आहार करने की परंपरा चली आ रही है। वैशाख शुक्ल तृतीया के इसी दिन को अक्षय तृतीया कहते हैं। इस समय से  ही आर्यखंड में दान की प्रथा प्रारंभ हुई।
ऋषभदेव ने एक हजार वर्षो तक कठोर तपस्या की। इसके बाद इन्हें फाल्गुन कृष्ण एकादशी को कैवल्यज्ञान प्राप्त हुआ। इन्होंने अपनी इंद्रियों और इच्छाओं पर विजय पाई। जिससे यह जिन कहलाए। इन्होंने जो मार्ग बताया उसे जैन धर्म कहा जाने लगा। और तभी से जैन धर्म का प्रारंभ हुआ। इंद्र ने भगवान का उपदेश सुनने के लिए समोसरण की धर्म सभा की व्यवस्था की। भगवान के इस सभा मंडप में देव, मनुष्य, पशु ,पक्षी सभी प्राणी आए। भगवान ने सभी को सच्चे सुख का मार्ग बताया। भरत के लघु भ्राता वृषभसेन ने समोसरण में वैराग्य होने पर मुनि दीक्षा धारण की और भगवान के प्रथम गणधर  हुए। ऋषभदेव की पुत्री ब्राह्मी देवी दीक्षित होकर प्रथम अर्जिका और अर्जिका संघ की गणिनी प्रमुख बनी। दूसरी पुत्री सुंदरी भी दीक्षा लेकर अर्जिका बन गयी। सम्राट भारत ने अपने परिवार सहित भगवान की वंदना की। जब भरत ने उनसे उपदेश देने को कहा तो आपने बताया। जीव आत्मस्वरूप है। वह संसारी है और संसार को छोड़कर मुक्ति भी प्राप्त कर सकता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए उसे रत्नत्रय का मार्ग अपनाना होगा। रतनत्रय से आशय है सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र। सम्यक दर्शन का अर्थ देव, शास्त्र, गुरु का ज्ञान प्राप्त करना है और यह मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी है। पदार्थों के यथार्थ स्वरूप को प्रकाशित करने वाला और अज्ञान को नाश करने वाला सम्यक ज्ञान कहलाता है। समता भाव धारण कर निज रूप में विचरण ऐसे लक्षण को सम्यक चारित्र कहा जाता है। सम्यक दर्शन के बिना सम्यक ज्ञान और चरित्र को प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार सम्यक दर्शन के बिना सम्यक दर्शन , सम्यक ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। इन तीनों को मिलाकर ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
जब भगवान ऋषभदेव या भगवान आदिनाथ के मोक्ष गमन में चौदह दिन शेष रह गए तब पौष शुक्ल पूर्णिमा के दिन आप कैलाश पर्वत पर जाकर योग निरोध में लीन हो गए। भगवान की दिव्य ध्वनि नजदीक आ गई। भगवान के मोक्ष का समय नजदीक जान महाराजा भरत अपने अन्य भाइयों और प्रजाजनों के साथ कैलाश पर्वत पर भगवान की शरण में आ पहुंचे और 14 दिन की महामह नाम की पूजा प्रारंभ की। माघ कृष्णा चतुर्दशी के दिन सूर्योदय के समय भगवान ऋषभदेव पूर्वमुख से अनेक मुनियों सहित विराजमान हुए और तीसरे शुक्ल ध्यान में तीनों योगों का निरोध करते हुए अयोगि हो गए। इस प्रकार भगवान ऋषभदेव ने कैलाशगिरी से अशरीरी सिद्ध पद प्राप्त किया। आत्म सुख में तल्लीन रूप में भगवान वहां आज भी विराजमान है ऐसी मान्यता है। भगवान का मोक्ष जानकर इंद्रगणों ने और चक्रवर्ती भरत आदि ने भगवान के मोक्ष निर्वाण कल्याणक का उत्सव मनाया।
जनसाधारण में यह भ्रांति है कि जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर थे। जबकि जैन धर्म में कुल मिलाकर 24 तीर्थंकर हुए हैं। जिनमे प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव थे। जिन्होंने जैन धर्म का प्रारंभ किया। और भगवान महावीर अंतिम 24वें तीर्थंकर थे। इतिहास की कुछ पुस्तकों में यहां तक कि सरकारी पाठ्यक्रम की किताबों में भी भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक बताया गया है। जिसका सरकार को सुधार करना चाहिए। भगवान ऋषभदेव के मोक्ष/निर्वाण कल्याणक के अवसर पर माघ कृष्ण चतुर्दशी के दिन सारे देश में जैन समाज के लोग मंदिरों मे  भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा का नवन करते हैं। पूजा पाठ के साथ दीप जलाकर भगवान का मोक्ष निर्वाण कल्याणक धूमधाम से मनाते हैं। (विनायक फीचर्स)

इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान के उदयपुर की  रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी हुए शामिल

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इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान के उदयपुर की  रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी हुए शामिल
                     मुंबई में आयोजित चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान की संस्कृति, विरासत और प्रकृति से प्रेरित एक उभरती हुई युवा कलाकार रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रिया वैष्णव एक समर्पित कलाकार हैं, जिन्होंने 2 साल की उम्र से ही ड्राइंग शीट पर ब्रश करना शुरू कर दिया था, 16 साल की उम्र में उन्हें पेंटिंग के क्षेत्र में एक दर्जन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने एफएजी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित “स्पेक्ट्रम 2023” गोवा प्रदर्शनी जैसी अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लिया, जहां उन्हें माननीय गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, इंडिया आर्ट फेस्टिवल मुंबई आर्ट फेयर और इंडिया आर्ट फेस्टिवल दिल्ली, इंडिया आर्ट फेस्टिवल बेंगलुरु द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें इतनी कम उम्र में ही रंगों, कला और रंगों के सामंजस्य का अद्भुत ज्ञान है। वो ऐसी कलाकार हैं जो कला की अपनी नई दृष्टि के साथ कलाकारों की नई पीढ़ी का नैतृत्व करती हैं। कला के प्रति उनका युवा उत्साह और समर्पण प्रकृति और विरासत से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करता है। रंग, विषय और कहानी  से भरी उनकी कला प्रभावशाली ज्ञान को दर्शाती है जिसमें अनुशासन के साथ हमारी पुरातन कला को बचाने और विकसित करने की झलक मिलती है।यह रिया और उसके परिवार की निरंतर दृढ़ता का ही परिणाम है कि वह विभिन्न कला मंचों पर स्थापित, कुशल और वरिष्ठ कलाकारों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। रिया को यथार्थवादी, विरासत और प्रकृति पेंटिंग बनाना पसंद है। हाल ही में उन्हें असम के माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी द्वारा सम्मानित किया गया क्योंकि उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा आयोजित 10वीं बर्ड फेस्टिवल उदयपुर पेंटिंग प्रतियोगिता जीती थी। पिचवाई
एक नई दृष्टि के साथ दशकों पुरानी संस्कृति की अद्भुत कलात्मक पिचवाई पेंटिंग के लिए प्रतिबद्ध है। वह कला प्रेमियों को नई रचनात्मकता और अनुभवी विशिष्ट कला का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं। पिछवाई कला मनोरम और सांस्कृतिक भारतीय कला रूप है अर्थात मेवाड़ राजस्थान की रचना है। इसकी उत्पत्ति 400 शताब्दी पूर्व पुष्टिमार्ग हवेली में सम्राट महाराणा राज सिंह के समय हुई थी। पिचवाईवाला परिवार के सदस्यों ने लघु पिछवाई पेंटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाए। परिवार हवेली (महल) पर काम कर रहा था। पिचवाई कला अपने जीवंत रंगों और सख्त विवरण के लिए प्रसिद्ध है। पिछवाई कला मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की दैनिक दिनचर्या का वर्णन करती है। पिचवाईवाला परिवार पिछले 7 से 8 दशकों से इस कला के लिए समर्पित है और वे दादाजी जय किशन जी, पिता नरेंद्र सिंह जी, स्वयं करण सिंह और परिवार के सदस्यों महेंद्र सिंह, चंदर सिंह, राहुल कुमार सोनी और कैलाश के साथ इसे लगातार निखार रहे हैं। राहुल कुमार सोनी ने अपनी अनूठी कला तकनीक में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उनके पास दर्जन भर से अधिक मान्यता प्राप्त पुरस्कार हैं।
उनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने उत्कृष्टता के लिए एक नया मानक स्थापित किया है और हम सभी को महानता तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया है। राहुल सोनी को अपनी मां से प्रेरणा मिली, जो मिनिएचर आर्टिस्ट थीं और वह कम उम्र से ही अपनी मां का अनुसरण करते थे, लेकिन 14 साल की उम्र से उन्होंने पेशेवर कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद वह पिचवाईवाला श्री करण सिंह से मिले और पिचवाई कला शुरू की। करण सिंह और राहुल सोनी ने पिछवाई कला के बारे में रोचक बातें साझा करते हुए बताया कि यह केवल पत्थर के रंगों के साथ प्राकृतिक रोशनी में ब्रश की मदद से तैयार की जाती है, जिसमें केवल एक बाल होते हैं। राहुल सोनी ने अपने रचनात्मक कौशल से पिछवाई कला में एक नया मानक स्थापित किया।
राहुल सोनी ने राई के दाने पर अनूठी अतिसूक्ष्म-लघु कला बनाई, उन्होंने किंगफिशर की चोंच बनाई, फिर चोंच में एक मछली बनाई जिसमें मछली की आंख तक देखी जा सकती है। राहुल सोनी ने माइक्रो-पिछवाई और माइक्रो-मिनिएचर का एक नया युग बनाया। 8 फरवरी से 11फरवरी तक चलने वाले इस चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेस्टिवल में रिया वैष्णव और पिचवाईवाला, काका – भतीजी की जोड़ी की नवीनतम कला कृतियों के साथ
जिस अतुल्य ‘पिछवाई कला’ का अवलोकन करने का मौका कलाप्रेमियों को मिल रहा है उसका एक महान इतिहास, सदियों की स्वर्णिम ऐतिहासिक यात्रा के साथ पीढ़ियों की कड़ी मेहनत है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

सी.बी.एस.ई. दसवीं एवं बारहवीं के पेपर कैसे साल्व करें जानें पुनीत सर से

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सी.बी.एस.ई. दसवीं एवं बारहवीं के पेपर कैसे साल्व करें जानें पुनीत सर से
अर्चित सक्सेना – विनायक फीचर्स
सी.बी.एस.ई. की दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षाएं शीघ्र ही शुरु होने वाली है। विद्यार्थियों को परीक्षाओं को लेकर काफी तनाव होता है। कई बार उनके पास सही मार्गदर्शन भी नहीं होता जिससे वे कुछ छोटी-छोटी गलतियां भी करते हैं। इसी कारण कुछ प्रश्नों के हल वे आते हुए भी गलत कर जाते हैं। सीबीएसई की परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों की परेशानियों और तनाव को दूर करने के लिए हमने युवा शिक्षाविद् एवं यूट्यूूब चैनल ”पुनीत सर की पाठशालाÓÓ के संचालक पुनीत दुबे से चर्चा की, उन्होंने बच्चों को बेहद आसान से टिप्स दिए जिससे बच्चे सरलता से बिना किसी तनाव के अपने प्रश्न पत्र हल कर सकें।
पेपर साल्व करने से पहले यह ध्यान रखें कि आप परीक्षा कक्ष में समय पर पहुंचे और जो आपको 15 मिनिट का समय पेपर पढऩे के लिए मिला है उसमें एकाग्रता के साथ पेपर पढ़ें। तभी यह तय कर लें कि कौन सा प्रश्न आपको सबसे अच्छी तरह से करना है। उसे सबसे पहले करें। पन्द्रह मिनिट के इस रीडिंग सेशन को बिल्कुल भी वेस्ट न करें।
किस सेक्शन को कितना समय दें?
पेपर में आपको एक, दो, तीन और पांच नंबर के प्रश्न हल करना है। इसमें आप एक नंबर के प्रश्न के लिए दो से तीन मिनिट, दो नंबर के प्रश्न के लिए 4 से 5 मिनिट, तीन नंबर के प्रश्न के लिए 5 से 6 मिनिट, 5 नंबर के प्रश्न के लिए कुल 10 मिनिट का समय बांट दें। समय बांटकर प्रश्न करने से आप हर सेक्शन को बराबर समय दे पाएंगे और पूरे प्रश्नों को समय सीमा में पूरा कर पाएंगे। यदि किसी प्रश्न में इससे ज्यादा समय लगता है तो उसे छोड़ दें बाद में समय मिलने पर उस प्रश्न को करने की कोशिश करें।
क्या सावधानियां रखें?
सबसे पहले हैंडराइटिंग का ध्यान रखें। साफ-सुथरी लिखावट में लिखें। डिजिट्स का खास ध्यान रखें। लिखने में ओवर राइटिंग न करें। साफ-सुथरी लिखावट से जहां कापी परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है वहीं आपकी डिजिट्स सही लिखे होने से आखिरी आंसर में गलती होने की संभावना भी नहीं रहती।
जो प्रश्न सबसे अच्छा आता हो उसे सबसे पहले करें।
उत्तर पुस्तिका में प्रश्नों के उत्तर अस्त-व्यस्त तरीके से न करें। बड़े उत्तरों को अलग लिखें तो एक-एक नंबर वाले सभी प्रश्नों को एक जगह एक साथ करें। यही क्रम दो नंबर वाले प्रश्नों के साथ भी रखें।
जो प्रश्न अधिक नंबरों वाले हैं उन्हें पूरी क्रमबद्धता के साथ स्टेप वाइज करें। किसी भी स्टेप को छोड़े नहीं हर एक स्टेप कापी में लिखें। यदि आप कोई स्टेप छोड़ देंगे तो आपके नंबर भी कट जाएंगे।
पर यदि दो नंबर वाले सवाल हैं तो उनमें आप अपनी सुविधानुसार स्टेप लिख सकते हैं। कम नंबर के प्रश्नों में ज्यादा स्टेप्स लिखने से ज्यादा नंबर नहीं मिलेंगे। लेकिन ज्यादा नंबर के प्रश्नों में कम स्टेप लिखने से नंबर कट जाएंगे। वस्तुनिष्ठ प्रश्न (एमसीक्यू) के उत्तर लिखते समय सही विकल्प के साथ उत्तर भी लिखें। अर्थात् यदि आपका उत्तर ए है तो  ए लिखकर कोष्ठक में उसका सही उत्तर भी लिखें।
गणित में किन बातों का ध्यान रखें
जहां आवश्यक हो वहां चित्र भी बनाएं।
अंतिम उत्तर यूनिट के साथ पूरा लिखें उसे अंडर लाइन भी करें।
जिस फार्मूले का सवाल में उपयोग कर रहे हैं उसे भी पूरी तरह स्पष्ट लिखें।
यदि किसी थ्योरम का उपयोग कर रहे हैं तो प्रश्न में उसका भी उल्लेख करें।
साइंस
साइंस में जीव विज्ञान का सेक्शन हल करते समय लिखने से ज्यादा चित्रों और उनकी लेबलिंग पर ध्यान दें। चित्र को साफ-सुथरा बनाकर पर्याप्त लेबलिंग करें फिर प्रश्न का पर्याप्त उत्तर दें। फिजिक्स में भी जहां आवश्यक हो वहां अपने उदाहरण चित्रों के माध्यम से समझाएं। चित्रों पर लेबलिंग एनसीईआरटी की पुस्तकों के अनुरूप करें तो नंबर नहीं कटेंगे। (विनायक फीचर्स)

रीवा में गाय के साथ बर्बरता:गौ संगठनों ने की कार्यवाही की मांग

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रीवा के मनगंवा थाना अंतर्गत गोदरी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है की किस तरह से एक व्यक्ति गाय के साथ बर्बरता कर रहा है और साथ ही मारपीट कर रहा है। जबकि पास में खड़ी एक वृद्ध महिला उसे रोकने का प्रयास भी कर रही है। जिसकी बात को अनसुना कर वो गाय के साथ लगातार क्रूरता कर रहा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठनों और विंध्य गौ सेवा समिति के अध्यक्ष अंकित सिंह ने पूरे मामले में नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की है। साथ ही उन्होंने थाना प्रभारी से मांग की है कि ऐसा कृत्य करने वाले के खिलाफ़ एफ आई आर दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी की जाए। मामला संज्ञान में आने के बाद मनगवां थाना प्रभारी ने जांच के बाद पूरे मामले में कार्यवाही की बात की है। गाय के साथ बर्बरता करने वाले युवक का नाम राकेश उपाध्याय बताया जा रहा है।

11 मवेशी बचाए, एक तस्कर गिरफ्तार

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सांबा। जिला पुलिस ने मंगलवार रात गोवंश तस्करी के तीन प्रयासों को विफल किया। एक तस्कर को धारदार हथियार के साथ गिरफ्तार किया है, जबकि 11 गोवंश को बचाया गया। एक स्कॉर्पियो सहित तीन वाहनों को जब्त किया है।
जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी घगवाल के नेतृत्व में एक पुलिस पार्टी ने टपयाल हाईवे पर नाका लगाया था। इस दौरान एक स्कॉर्पियो (डीएलसी4सीएनबी 5060) को रुकने का संकेत दिया। वाहन कठुआ की ओर से आ रहा था। चालक ने अन्य अज्ञात आरोपियों के साथ मिलकर गाड़ी की गति तेज कर दी और बैरिकेड को टक्कर मार दी। इसके बाद भाग गए। पुलिस ने वाहन का पीछा किया और उसे पकड़ लिया। जांच के दौरान स्कॉर्पियो से दो गोवंश मिले। इन्हें बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। आरोपी तस्कर की पहचान जमात अली उर्फ कालू निवासी मरालियन, मीरां साहिब तहसील आरएस पुरा जिला जम्मू के रूप में हुई है। उसके कब्जे से एक टोका भी बरामद किया है। पुलिस ने मामला दायर कर जांच शुरू कर दी है।
इसके अलावा राजपुरा बॉर्डर पुलिस पोस्ट बब्बर नाला और बॉर्डर पुलिस पोस्ट मावा के एक अन्य संयुक्त अभियान में गोवंश तस्करी की दो और कोशिशों को नाकाम कर दिया गया। वाहन पीबी13बीएम-8857 में से पांच गोवंश और पीबी07बीएक्स-3253 नंबर वाले वाहन से चार गोवंश बरामद किए गए। इन वाहनों को गांव मदून व मदवाल के पास रोका गया और सभी नौ गोवंशों को बचा लिया गया। हालांकि दोनों वाहनों के चालक अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। पुलिस थाना घगवाल में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

लगभग 50% भारतीय अपने डेडिकेटेड स्टडी स्पेस के लिए ग्रोथ, आकांक्षा और प्रोडक्टिविटी पर देते हैं जोर

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मुंबई, 8 फरवरी 2024 — भारत मेंघर की साजसज्जा पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र से परे हैजो सांस्कृतिक मूल्योंभावनात्मक संबंधों और लिविंग स्पेस यानी रहने की जगहों के डायनेमिक इवोल्यूशन (गतिशील विकासके दर्पण के रूप में कार्य करती है। इसका खुलासा गोदरेज एंड बॉयसगोदरेज समूह की प्रमुख कंपनी गोदरेज इंटरियो के एक हालिया अध्ययन ‘होमस्केप्स‘ से हुआ है। यह अध्ययन कन्ज्यूमर्स एक्सप्रेशन को घर और सजावट में उनकी पसंद के माध्यम से बखूबी प्रतिबिंबित करता है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के व्यक्तित्व और मूल्यों की अनूठी अभिव्यक्ति और घरों व व्यक्तिगत विकास के बीच के आंतरिक संबंध को भी रेखांकित करता है।

 

अध्ययन के अनुसार, 25% उत्तरदाता अपने प्रारंभिक घर की खरीद पर विचार करते समय एक व्यक्तिगत कोने या स्थान की कल्पना को प्राथमिकता देते हैंइसे एकान्त गतिविधियों और शांति के लिए एक पवित्र स्थान के रूप में देखते हैं। अध्ययन के सबसे दिलचस्प निष्कर्षों में से एक के अनुसार, 54% से अधिक उत्तरदाताओं ने अपने व्यक्तिगत विकासआकांक्षाओं और उत्पादकता के लिए स्टडी टेबल (अध्ययन मेजऔर कुर्सी के बीच सीधे संबंध पर जोर दिया है। उनके लिए कहीं और ध्यान केंद्रित करना और कुशलता से काम करना एक बड़ी चुनौती है।

 

 

इसके अतिरिक्तलगभग 62% लोगों ने अपने बच्चों के कमरे के लिए स्टडी टेबल (अध्ययन मेजऔर कुर्सियों का चयन करते समय अपने बच्चों की पसंद को भी शामिल करते हैं। गोदरेज इंटेरियो के ‘होमस्केप्स‘ अध्ययन से कई दिलचस्प अंतर्दृष्टि का भी पता चलता हैमसलन लॉजिक एंड रैशनैलिटी यानी तार्किक व विवेकवर्सस क्रिएटिविटी एंड इनोवेशन को लेकर जारी बहस। यह उपभोक्ताओं के सबसे अंदरूनी और महत्वपूर्ण जोन यानी उनके घर में उनके इस तमाम दृष्टिकोणों की गहराई से पड़ताल करता है। यह अध्ययन इसके साथ ही कार्यक्षमता और संगठनात्मक कौशल पर अधिक जोर देने की ओर ध्यान आकर्षित करता है। लगभग 28% उत्तरदाताओं को ‘ऑर्डर ऑब्सेसिव‘ के रूप में पहचान की गई है। इनके अनुसारसफाई के दौरान नौकरों द्वारा अनजाने में भी अगर उनके सामान को थोड़ा भी रीअरेंज्ड ( पुनर्व्यवस्थितकिया जाता हैतो वे काफी असुविधाजनक महसूस करते हैं।

 

गोदरेज इंटेरियो के बिजनेस हेड और वरिष्ठ उपाध्यक्ष स्वप्निल नागरकर के अनुसार, ‘होमस्केप्स‘ स्टडी से व्यक्तियोंउनके परिवारों और उनके घरों के बीच एक गहरे भावनात्मक संबंध का पता चलता है। हमारा शोध उपभोक्ताओं के जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू के बारे में उनकी भावनाओं का पता लगाता है – उनका घरउनके अस्तित्व के दर्पण के रूप में सामने आता है। यह सर्वे डेटा प्रमुख तौर पर बदलाव का सुझाव देता हैक्योंकि लोग तेजी से कार्यक्षमता और सौंदर्यशास्त्र दोनों को प्राथमिकता देने लगे हैंजिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनका घर सुव्यवस्थित और स्वागत योग्य तरीके से तैयार रहे। गोदरेज इंटेरियो मेंहम आरामदेह और सौंदर्यशास्त्र को प्राथमिकता देते हैंसाथ ही आपके लिविंग स्पेस (रहने की जगहको बेहतर बनाने के लिए शानदार तरीके डिज़ाइन किया गया और फंक्शनल फर्नीचर को उपलब्ध करते हैं।

 

गोदरेज इंटेरियो अध्ययन कक्षों के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स में चैंपियन हैजो कलात्मकता के साथ ही आरामदायक भी हैं और जिसके उपयोग से प्रोडक्टिविटी (उत्पादकताबढ़ती है। इनमें ईज़ीफ्लेक्स सिस्टम की विशेषता वाला मोशन चेयर भी शामिल हैजिसे एक्टिव सीटिंग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें बैठने की विभिन्न मुद्राओं (पास्चरके दौरान पीठ को ऑप्टिमल सपोर्ट (इष्टतम समर्थनभी सुनिश्चित होता है।

 

एक अन्य नोटवर्दी प्रोडक्ट (उल्लेखनीय उत्पादथ्रिल चेयर भी हैजो फंक्शनलिटी (कार्यात्मकताओं), पर्सनलॉजेशन (वैयक्तिकरणसेटिंग्स और कई मॉडर्न टेक्चर (आधुनिक बनावटऔर रंगों का विकल्प प्रदान करता हैजो इसे कन्टेम्परेरी स्पेस (समकालीन स्थानोंके लिए आदर्श बनाता है। उनके क्यूरेटेड सेट में चॉकलेट वीस्टडी टेबल और एड्रिया वर्कडेस्क जैसी स्टडी टेबल शामिल हैंजो शयनकक्ष के भीतर एक फंक्शनल और प्रोडक्टिव स्पेस (कार्यात्मक और उत्पादक स्थानबनाने में सक्षम बनाती हैं। इन स्टडी टेबल्स को शयनकक्ष या बैठक कक्ष में सहजता से इंटीग्रेट (एकीकृतकिया जा सकता है और ये किसी भी इंटीरियर के साथ अच्छी तरह मेल खा सकते हैं।

 

इस सर्वेक्षण में बेंगलुरुचेन्नईदिल्लीहैदराबादकोलकातामुंबई और लखनऊ जैसे सात शहरों में रहने वाले 2,822 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया है।

लता मंगेशकर की दूसरी वर्षगांठ पर रिदम और रचना ने दी श्रद्धांजलि

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मुंबई (अनिल बेदाग )लता मंगेशकर के निधन की दूसरी वर्षगांठ उन्हें रिदम वाघोलिकर और रचना शाह की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। रचना शाह एक भतीजी के रूप में लता दीदी के साथ एक मजबूत बंधन साझा करते थे। रिदम वाघोलिकर, जो अभी भी लताजी की धुनों को अपने दिल में रखते हैं, उन्होंने कहा की, “लताजी एक वैश्विक आइकन से भी कहीं अधिक थीं। वह हमारे लिए एक दोस्त की तरह थी जिस पर हम भरोसा करते थे।” लता मंगेशकर की दूसरी सालगिरह पर, रिदम और रचना ने उनके न होने से हुई क्षति की भावना को व्यक्त किया। रिदम अपनी कलात्मक यात्रा को आकार देने के लिए लताजी को धन्यवाद करते है और उनके गहन प्रभाव को स्वीकार करते है।
उनका रिश्ता दोस्ती से भी आगे बढ़ गया था, जिसे लताजी ने एक सार्वजनिक ट्वीट में स्वीकार किया था और रिदम को एक करीबी पारिवारिक मित्र बताया। रिदम, रचना शाह के साथ भी अपना अनोखा रिश्ता साझा करते हैं, जिन्हें रच्चू दीदी के नाम से जाना जाता है, जो स्वयं लताजी की ओर से एक उपहार है। लताजी की भतीजी रचना, दीदी की अनुपस्थिति पर शोक व्यक्त करती है, क्योंकि वह उनके लिए सबकुछ थी।
एक हालिया ट्वीट में, रचना और रिदम ने इन भावनाओं को साझा किया और दूसरों से लताजी के आदर्शों के अनुसार जीने का आग्रह किया। वे हर किसी को अधिक मुस्कुराने, अधिक महसूस करने, अधिक देने, अधिक प्यार करने, जाने देने और नफरत न करने के लिए प्रोत्साहित करते थे – वास्तव में लताजी को उनके मूल्यों के अनुसार जीकर हम सम्मान देते हैं।
रचना ने दीदी की यादें साझा करते हुए उन्होंने ने बताया की लता दीदी की हंसी को उनकी यादों में अब भी जीवंत है। दीदी की अनुपस्थिति की तुलना उन्होंने एक राग से की, जिसमें उसका मुख्य स्वर गायब है, जो उनके जाने से छोड़े गए खालीपन की लगातार उनको याद दिलाता है।
लताजी द्वारा रचना को अपनी सबसे अच्छी दोस्त के रूप में सार्वजनिक स्वीकारोक्ति उनके संबंधों की गहराई को दर्शाती है। रचना ‘दीदी’ की अनुपस्थिति से हुई अथाह क्षति को व्यक्त करती है, उनकी उपस्थिति को एक अभयारण्य और उनकी अनुपस्थिति को एक स्थायी पीड़ा कहती है। गतिशील जोड़ी, रिदम और रचना ने, दीदी के साथ अपने संबंधों से प्रेरित होकर एक रचनात्मक यात्रा शुरू की, किंवदंतियों पर किताबें लिखीं और प्रेरक टॉक शो की मेजबानी की।
जैसा कि दुनिया एक संगीत दिग्गज लता मंगेशकर की अनुपस्थिति पर शोक मना रही है, तब रिदम वाघोलिकर और रचना शाह स्मृति और प्रेम के चौराहे पर खड़े हैं, दोनों अपने सामूहिक दुख और क़ीमती यादों को साझा कर रहे हैं।

समान नागरिक संहिता विधेयक पर बृहद चर्चा पश्चात मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में पास हुआ यूसीसी बिल

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समान नागरिक संहिता विधेयक पर बृहद चर्चा पश्चात मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में पास हुआ यूसीसी बिल*
8 फरवरी 2024, बुद्धवार, देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश
देहरादून,8 फरवरी, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक उत्तराखंड 2024 बुधवार को विधानसभा में पारित कर दिया गया। विधेयक पर दो दिनों तक लंबी चर्चा हुई। सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर अपने-अपने सुझाव दिए। इस प्रकार उत्तराखंड विधानसभा आजाद भारत के इतिहास में समान नागरिक संहिता का विधेयक पारित करने वाली पहली विधानसभा बन गई है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता विधेयक उत्तराखंड 2024 को विधानसभा में पेश किया था। जिसे बुधवार को सदन में विधेयक पर चर्चा के बाद सदन ने इसे पास कर दिया। अब अन्य सभी विधिक प्रक्रिया और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनेगा। विधेयक में सभी धर्म-समुदायों में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक कानून का प्रावधान है। महिला-पुरुषों को समान अधिकारों की सिफारिश की गई है।अनुसूचित जनजातियों को इस कानून की परिधि से बाहर रखा गया है।
विदित हो कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से किए गए वायदे के अनुसार पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी का ड्रॉफ्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। समिति ने व्यापक जन संवाद और हर पहलू का गहन अध्ययन करने के बाद यूसीसी के ड्रॉफ्ट को अंतिम रूप दिया है। इसके लिए प्रदेश भर में 43 जनसंवाद कार्यक्रम और 72 बैठकों के साथ ही प्रवासी उत्तराखण्डियों से भी समिति ने संवाद किया।
कुप्रथाओं पर लगेगी रोक—
समान नागरिक संहिता विधेयक के कानून बनने पर समाज में बाल विवाह, बहु विवाह, तलाक जैसी सामाजिक कुरीतियों और कुप्रथाओं पर रोक लगेगी, लेकिन किसी भी धर्म की संस्कृति, मान्यता और रीति-रिवाज इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे। बाल और महिला अधिकारों की यह कानून सुरक्षा करेगा।
यूसीसी के अन्य जरूरी प्रावधान—
-विवाह का पंजीकरण अनिवार्य। पंजीकरण नहीं होने पर सरकारी सुविधाओं से होना पड़ सकता है वंचित।
-पति-पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह पूर्णतः प्रतिबंधित।
-सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष निर्धारित।
-वैवाहिक दंपत्ति में यदि कोई एक व्यक्ति बिना दूसरे व्यक्ति की सहमति के अपना धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का पूरा अधिकार होगा।
-पति पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय 5 वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास ही रहेगी।
-सभी धर्मों में पति-पत्नी को तलाक लेने का समान अधिकार।
-सभी धर्म-समुदायों में सभी वर्गों के लिए बेटी-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार।
-मुस्लिम समुदाय में प्रचलित हलाला और इद्दत की प्रथा पर रोक।
-संपत्ति में अधिकार के लिए जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं किया गया है। नाजायज बच्चों को भी उस दंपति की जैविक संतान माना गया है।
-किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी संपत्ति में उसकी पत्नी व बच्चों को समान अधिकार दिया गया है। उसके माता-पिता का भी उसकी संपत्ति में समान अधिकार होगा। किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार को संरक्षित किया गया ।
-लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी।
-लिव-इन के दौरान पैदा हुए बच्चों को उस युगल का जायज बच्चा ही माना जाएगा और उस बच्चे को जैविक संतान के समस्त अधिकार प्राप्त होंगे।
“हमारे देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रऋषि नरेन्द्र मोदी जी विकसित भारत का स्वप्न देख रहे हैं। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है। उनके नेतृत्व में यह देश तीन तलाक और धारा-370 जैसी ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने के पथ पर है”
“समान नागरिक संहिता का विधेयक प्रधानमंत्री द्वारा देश को विकसित, संगठित, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महान यज्ञ में हमारे प्रदेश द्वारा अर्पित की गई एक आहुति मात्र है”
“UCC के इस विधेयक में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जाति, धर्म, क्षेत्र व लिंग के आधार पर भेद करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है ”

दूसरे राज्यों से मंगाई गीर-साहीवाल नस्ल की गाय, 140 किसानों को मिलेगा अनुदान

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Bihar News: गो पालन से समृद्ध होंगे किसान, दूसरे राज्यों से मंगाई गीर-साहीवाल नस्ल की गाय, 140 किसानों को मिलेगा अनुदान
Banka News जिले के किसान गोपालन कर समृद्ध होंगे। इसके लिए किसानों को सरकार गाय से लेकर शेड तैयार करने के लिए मदद दे रही है। इस बार देसी गोपालन और समग्र गव्य विकास योजना के लिए 140 किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों को दो गाय से लेकर 20 गाय की खरीदारी के लिए अनुदान दिया गया जाएगा।
जिले के किसान गोपालन कर समृद्ध होंगे। इसके लिए किसानों को सरकार गाय से लेकर शेड तैयार करने के लिए मदद दे रही है। इस बार देसी गोपालन और समग्र गव्य विकास योजना के लिए 140 किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों को दो गाय से लेकर 20 गाय की खरीदारी के लिए अनुदान दिया गया जाएगा। ये गायें उन्हें स्थानीय बाजार से नहीं खरीदनी होगी। इस बार दूसरे राज्यों से गाय मंगाई जा रही है।
देसी गोपालन योजना के तहत किसानों को गीर और साहीवाल नस्ल की गायें उपलब्ध कराई जाएंगी। जबकि समग्र गव्य विकास योजना के तहत जरसी व अन्य नस्ल की गायों की खरीदारी कर सकेंगे। किसानों को एजेंसी के माध्यम से गाय उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है।
देसी गव्य विकास योजना के तहत 45 किसानों का चयन किया गया है। इसमें से दो गाय के लिए 30 किसानों का, चार गाय के लिए 11 किसानों का, 15 गाय के लिए तीन किसानों का और 20 गायों वाले डेयरी के संचालन के लिए एक किसान का चयन किया गया है।
जल्द किसानों को मिलेंगी गायें
जिला गव्य विकास पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि देसी गव्य विकास योजना के तहत कुछ किसानों को जल्द गायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें गीर और साहीवाल नस्ल की गायें होंगी। जबकि समग्र गव्य विकास योजना के तहत इस बार 95 किसानों का चयन किया गया है।इसमें से दो गाय के लिए 55 किसानों का, चार गाय के लिए 16 किसानों का, 15 गाय के लिए पांच किसानों का और 20 गायों वाले डेयरी के संचालन के लिए एक किसान का चयन किया गया है।
बैंक दे रही किसानों को ऋण
गव्य विकास योजना के तहत किसानों को गाय खरीदने के लिए बैंक किसानों को ऋण भी दे रही है। कुछ किसानों ने स्वलागत से अनुदान के लिए आवेदन किया है। ऐसे किसानों को अनुदान के अलावा शेष राशि बैंक खाते में जमा करानी होगी। जबकि कुछ किसानों ने ऋण के लिए आवेदन किया है। अनुदान के अलावा जो राशि शेष बच जाती है, वह बैंक ऋण के रूप में किसानों को देगी। गव्य विकास कार्यालय से किसानों को ऋण उपलबध कराने के लिए सूची भेज दी गई है।
देसी गोपालन योजना और समग्र गव्य विकास योजना के तहत किसानों को गाय के लिए अनुदान दिया जाएगा। किसानों का चयन कर लिया गया है। एजेंसी के माध्यम से दूसरे राज्यों से गायें मंगाई जा रही है। -अजीत कुमार, जिला गव्य विकास पदाधिकारी।

हरिकेश सिंह, आज गौ रक्षा के साथ कर रहे हैं लाखों की कमाई

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भारत में गाय को माता कहा जाता है और उसकी पूजा की जाती है. मगर अब सड़कों पर विचरण करती बेसहारा गौमाता अपनी भूख मिटाने के लिए कचरा और प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं. इससे वो बीमार और मरणासन्न स्थिति में पहुंच जाती हैं. इसे देखकर अमेठी के रहने वाले किसान हरिकेश सिंह का मन व्याकुल हो जाता है. ये सब देखते हुए उन्होंने न सिर्फ गौरक्षा का संकल्प लिया, बल्कि इसे अपने व्यवसाय के रूप में विकसित करते हुए लाखों रुपये की कमाई का जरिया भी बनाया है. साथ ही उन्होंने अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है.
हरिकेश सिंह अमेठी जिले के धनापुरगांव के रहने वाले हैं. हरिकेश सिंह ने 150 से अधिक गीर गाय पाल रखी हैं. इनका कहना है कि गाय हमारी माता है हमने गाय को नहीं पाला बल्कि गाय ने हमें पाला है. आज जिस तरीके से गाय की दुर्दशा हो रही है, वो सब बंद होना चाहिए. इसलिए उन्होंने गौ रक्षा की मुहिम उठाई है. उन्हें यह प्रेरणा 1970 में उनके बाबा से मिली है.इसके बाद उन्होंने ऐसा व्यवसाय शुरू किया, जिससे गौरक्षा के साथ कमाई भी हो रही है. उनका कहना है कि हमने गौ सेवा का संकल्प लिया और आज हम गाय पालने का संदेश पूरे समाज को देना चाहते हैं कि गाय हमारी माता है और हम सबको उनका पूरा ख्याल अपने परिवार के सदस्य की तरह रखना चाहिए.
न्यूज़ १८ से साभार आदित्य कृष्ण की रिपोर्ट