इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान के उदयपुर की रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी हुए शामिल
इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान के उदयपुर की रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी हुए शामिल
मुंबई में आयोजित चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान की संस्कृति, विरासत और प्रकृति से प्रेरित एक उभरती हुई युवा कलाकार रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रिया वैष्णव एक समर्पित कलाकार हैं, जिन्होंने 2 साल की उम्र से ही ड्राइंग शीट पर ब्रश करना शुरू कर दिया था, 16 साल की उम्र में उन्हें पेंटिंग के क्षेत्र में एक दर्जन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने एफएजी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित “स्पेक्ट्रम 2023” गोवा प्रदर्शनी जैसी अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लिया, जहां उन्हें माननीय गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, इंडिया आर्ट फेस्टिवल मुंबई आर्ट फेयर और इंडिया आर्ट फेस्टिवल दिल्ली, इंडिया आर्ट फेस्टिवल बेंगलुरु द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें इतनी कम उम्र में ही रंगों, कला और रंगों के सामंजस्य का अद्भुत ज्ञान है। वो ऐसी कलाकार हैं जो कला की अपनी नई दृष्टि के साथ कलाकारों की नई पीढ़ी का नैतृत्व करती हैं। कला के प्रति उनका युवा उत्साह और समर्पण प्रकृति और विरासत से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करता है। रंग, विषय और कहानी से भरी उनकी कला प्रभावशाली ज्ञान को दर्शाती है जिसमें अनुशासन के साथ हमारी पुरातन कला को बचाने और विकसित करने की झलक मिलती है।यह रिया और उसके परिवार की निरंतर दृढ़ता का ही परिणाम है कि वह विभिन्न कला मंचों पर स्थापित, कुशल और वरिष्ठ कलाकारों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। रिया को यथार्थवादी, विरासत और प्रकृति पेंटिंग बनाना पसंद है। हाल ही में उन्हें असम के माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी द्वारा सम्मानित किया गया क्योंकि उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा आयोजित 10वीं बर्ड फेस्टिवल उदयपुर पेंटिंग प्रतियोगिता जीती थी। पिचवाई
एक नई दृष्टि के साथ दशकों पुरानी संस्कृति की अद्भुत कलात्मक पिचवाई पेंटिंग के लिए प्रतिबद्ध है। वह कला प्रेमियों को नई रचनात्मकता और अनुभवी विशिष्ट कला का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं। पिछवाई कला मनोरम और सांस्कृतिक भारतीय कला रूप है अर्थात मेवाड़ राजस्थान की रचना है। इसकी उत्पत्ति 400 शताब्दी पूर्व पुष्टिमार्ग हवेली में सम्राट महाराणा राज सिंह के समय हुई थी। पिचवाईवाला परिवार के सदस्यों ने लघु पिछवाई पेंटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाए। परिवार हवेली (महल) पर काम कर रहा था। पिचवाई कला अपने जीवंत रंगों और सख्त विवरण के लिए प्रसिद्ध है। पिछवाई कला मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की दैनिक दिनचर्या का वर्णन करती है। पिचवाईवाला परिवार पिछले 7 से 8 दशकों से इस कला के लिए समर्पित है और वे दादाजी जय किशन जी, पिता नरेंद्र सिंह जी, स्वयं करण सिंह और परिवार के सदस्यों महेंद्र सिंह, चंदर सिंह, राहुल कुमार सोनी और कैलाश के साथ इसे लगातार निखार रहे हैं। राहुल कुमार सोनी ने अपनी अनूठी कला तकनीक में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उनके पास दर्जन भर से अधिक मान्यता प्राप्त पुरस्कार हैं।
उनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने उत्कृष्टता के लिए एक नया मानक स्थापित किया है और हम सभी को महानता तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया है। राहुल सोनी को अपनी मां से प्रेरणा मिली, जो मिनिएचर आर्टिस्ट थीं और वह कम उम्र से ही अपनी मां का अनुसरण करते थे, लेकिन 14 साल की उम्र से उन्होंने पेशेवर कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद वह पिचवाईवाला श्री करण सिंह से मिले और पिचवाई कला शुरू की। करण सिंह और राहुल सोनी ने पिछवाई कला के बारे में रोचक बातें साझा करते हुए बताया कि यह केवल पत्थर के रंगों के साथ प्राकृतिक रोशनी में ब्रश की मदद से तैयार की जाती है, जिसमें केवल एक बाल होते हैं। राहुल सोनी ने अपने रचनात्मक कौशल से पिछवाई कला में एक नया मानक स्थापित किया।
राहुल सोनी ने राई के दाने पर अनूठी अतिसूक्ष्म-लघु कला बनाई, उन्होंने किंगफिशर की चोंच बनाई, फिर चोंच में एक मछली बनाई जिसमें मछली की आंख तक देखी जा सकती है। राहुल सोनी ने माइक्रो-पिछवाई और माइक्रो-मिनिएचर का एक नया युग बनाया। 8 फरवरी से 11फरवरी तक चलने वाले इस चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेस्टिवल में रिया वैष्णव और पिचवाईवाला, काका – भतीजी की जोड़ी की नवीनतम कला कृतियों के साथ
जिस अतुल्य ‘पिछवाई कला’ का अवलोकन करने का मौका कलाप्रेमियों को मिल रहा है उसका एक महान इतिहास, सदियों की स्वर्णिम ऐतिहासिक यात्रा के साथ पीढ़ियों की कड़ी मेहनत है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय
सी.बी.एस.ई. दसवीं एवं बारहवीं के पेपर कैसे साल्व करें जानें पुनीत सर से
सी.बी.एस.ई. दसवीं एवं बारहवीं के पेपर कैसे साल्व करें जानें पुनीत सर से
अर्चित सक्सेना – विनायक फीचर्स
सी.बी.एस.ई. की दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षाएं शीघ्र ही शुरु होने वाली है। विद्यार्थियों को परीक्षाओं को लेकर काफी तनाव होता है। कई बार उनके पास सही मार्गदर्शन भी नहीं होता जिससे वे कुछ छोटी-छोटी गलतियां भी करते हैं। इसी कारण कुछ प्रश्नों के हल वे आते हुए भी गलत कर जाते हैं। सीबीएसई की परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों की परेशानियों और तनाव को दूर करने के लिए हमने युवा शिक्षाविद् एवं यूट्यूूब चैनल ”पुनीत सर की पाठशालाÓÓ के संचालक पुनीत दुबे से चर्चा की, उन्होंने बच्चों को बेहद आसान से टिप्स दिए जिससे बच्चे सरलता से बिना किसी तनाव के अपने प्रश्न पत्र हल कर सकें।
पेपर साल्व करने से पहले यह ध्यान रखें कि आप परीक्षा कक्ष में समय पर पहुंचे और जो आपको 15 मिनिट का समय पेपर पढऩे के लिए मिला है उसमें एकाग्रता के साथ पेपर पढ़ें। तभी यह तय कर लें कि कौन सा प्रश्न आपको सबसे अच्छी तरह से करना है। उसे सबसे पहले करें। पन्द्रह मिनिट के इस रीडिंग सेशन को बिल्कुल भी वेस्ट न करें।
किस सेक्शन को कितना समय दें?
पेपर में आपको एक, दो, तीन और पांच नंबर के प्रश्न हल करना है। इसमें आप एक नंबर के प्रश्न के लिए दो से तीन मिनिट, दो नंबर के प्रश्न के लिए 4 से 5 मिनिट, तीन नंबर के प्रश्न के लिए 5 से 6 मिनिट, 5 नंबर के प्रश्न के लिए कुल 10 मिनिट का समय बांट दें। समय बांटकर प्रश्न करने से आप हर सेक्शन को बराबर समय दे पाएंगे और पूरे प्रश्नों को समय सीमा में पूरा कर पाएंगे। यदि किसी प्रश्न में इससे ज्यादा समय लगता है तो उसे छोड़ दें बाद में समय मिलने पर उस प्रश्न को करने की कोशिश करें।
क्या सावधानियां रखें?
सबसे पहले हैंडराइटिंग का ध्यान रखें। साफ-सुथरी लिखावट में लिखें। डिजिट्स का खास ध्यान रखें। लिखने में ओवर राइटिंग न करें। साफ-सुथरी लिखावट से जहां कापी परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है वहीं आपकी डिजिट्स सही लिखे होने से आखिरी आंसर में गलती होने की संभावना भी नहीं रहती।
जो प्रश्न सबसे अच्छा आता हो उसे सबसे पहले करें।
उत्तर पुस्तिका में प्रश्नों के उत्तर अस्त-व्यस्त तरीके से न करें। बड़े उत्तरों को अलग लिखें तो एक-एक नंबर वाले सभी प्रश्नों को एक जगह एक साथ करें। यही क्रम दो नंबर वाले प्रश्नों के साथ भी रखें।
जो प्रश्न अधिक नंबरों वाले हैं उन्हें पूरी क्रमबद्धता के साथ स्टेप वाइज करें। किसी भी स्टेप को छोड़े नहीं हर एक स्टेप कापी में लिखें। यदि आप कोई स्टेप छोड़ देंगे तो आपके नंबर भी कट जाएंगे।
पर यदि दो नंबर वाले सवाल हैं तो उनमें आप अपनी सुविधानुसार स्टेप लिख सकते हैं। कम नंबर के प्रश्नों में ज्यादा स्टेप्स लिखने से ज्यादा नंबर नहीं मिलेंगे। लेकिन ज्यादा नंबर के प्रश्नों में कम स्टेप लिखने से नंबर कट जाएंगे। वस्तुनिष्ठ प्रश्न (एमसीक्यू) के उत्तर लिखते समय सही विकल्प के साथ उत्तर भी लिखें। अर्थात् यदि आपका उत्तर ए है तो ए लिखकर कोष्ठक में उसका सही उत्तर भी लिखें।
गणित में किन बातों का ध्यान रखें
जहां आवश्यक हो वहां चित्र भी बनाएं।
अंतिम उत्तर यूनिट के साथ पूरा लिखें उसे अंडर लाइन भी करें।
जिस फार्मूले का सवाल में उपयोग कर रहे हैं उसे भी पूरी तरह स्पष्ट लिखें।
यदि किसी थ्योरम का उपयोग कर रहे हैं तो प्रश्न में उसका भी उल्लेख करें।
साइंस
साइंस में जीव विज्ञान का सेक्शन हल करते समय लिखने से ज्यादा चित्रों और उनकी लेबलिंग पर ध्यान दें। चित्र को साफ-सुथरा बनाकर पर्याप्त लेबलिंग करें फिर प्रश्न का पर्याप्त उत्तर दें। फिजिक्स में भी जहां आवश्यक हो वहां अपने उदाहरण चित्रों के माध्यम से समझाएं। चित्रों पर लेबलिंग एनसीईआरटी की पुस्तकों के अनुरूप करें तो नंबर नहीं कटेंगे। (विनायक फीचर्स)
रीवा में गाय के साथ बर्बरता:गौ संगठनों ने की कार्यवाही की मांग
रीवा के मनगंवा थाना अंतर्गत गोदरी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है की किस तरह से एक व्यक्ति गाय के साथ बर्बरता कर रहा है और साथ ही मारपीट कर रहा है। जबकि पास में खड़ी एक वृद्ध महिला उसे रोकने का प्रयास भी कर रही है। जिसकी बात को अनसुना कर वो गाय के साथ लगातार क्रूरता कर रहा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठनों और विंध्य गौ सेवा समिति के अध्यक्ष अंकित सिंह ने पूरे मामले में नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की है। साथ ही उन्होंने थाना प्रभारी से मांग की है कि ऐसा कृत्य करने वाले के खिलाफ़ एफ आई आर दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी की जाए। मामला संज्ञान में आने के बाद मनगवां थाना प्रभारी ने जांच के बाद पूरे मामले में कार्यवाही की बात की है। गाय के साथ बर्बरता करने वाले युवक का नाम राकेश उपाध्याय बताया जा रहा है।
11 मवेशी बचाए, एक तस्कर गिरफ्तार
सांबा। जिला पुलिस ने मंगलवार रात गोवंश तस्करी के तीन प्रयासों को विफल किया। एक तस्कर को धारदार हथियार के साथ गिरफ्तार किया है, जबकि 11 गोवंश को बचाया गया। एक स्कॉर्पियो सहित तीन वाहनों को जब्त किया है।
जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी घगवाल के नेतृत्व में एक पुलिस पार्टी ने टपयाल हाईवे पर नाका लगाया था। इस दौरान एक स्कॉर्पियो (डीएलसी4सीएनबी 5060) को रुकने का संकेत दिया। वाहन कठुआ की ओर से आ रहा था। चालक ने अन्य अज्ञात आरोपियों के साथ मिलकर गाड़ी की गति तेज कर दी और बैरिकेड को टक्कर मार दी। इसके बाद भाग गए। पुलिस ने वाहन का पीछा किया और उसे पकड़ लिया। जांच के दौरान स्कॉर्पियो से दो गोवंश मिले। इन्हें बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। आरोपी तस्कर की पहचान जमात अली उर्फ कालू निवासी मरालियन, मीरां साहिब तहसील आरएस पुरा जिला जम्मू के रूप में हुई है। उसके कब्जे से एक टोका भी बरामद किया है। पुलिस ने मामला दायर कर जांच शुरू कर दी है।
इसके अलावा राजपुरा बॉर्डर पुलिस पोस्ट बब्बर नाला और बॉर्डर पुलिस पोस्ट मावा के एक अन्य संयुक्त अभियान में गोवंश तस्करी की दो और कोशिशों को नाकाम कर दिया गया। वाहन पीबी13बीएम-8857 में से पांच गोवंश और पीबी07बीएक्स-3253 नंबर वाले वाहन से चार गोवंश बरामद किए गए। इन वाहनों को गांव मदून व मदवाल के पास रोका गया और सभी नौ गोवंशों को बचा लिया गया। हालांकि दोनों वाहनों के चालक अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। पुलिस थाना घगवाल में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लगभग 50% भारतीय अपने डेडिकेटेड स्टडी स्पेस के लिए ग्रोथ, आकांक्षा और प्रोडक्टिविटी पर देते हैं जोर
मुंबई, 8 फरवरी 2024 — भारत में, घर की साज–सज्जा पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र से परे है, जो सांस्कृतिक मूल्यों, भावनात्मक संबंधों और लिविंग स्पेस यानी रहने की जगहों के डायनेमिक इवोल्यूशन (गतिशील विकास) के दर्पण के रूप में कार्य करती है। इसका खुलासा गोदरेज एंड बॉयस, गोदरेज समूह की प्रमुख कंपनी गोदरेज इंटरियो के एक हालिया अध्ययन ‘होमस्केप्स‘ से हुआ है। यह अध्ययन कन्ज्यूमर्स एक्सप्रेशन को घर और सजावट में उनकी पसंद के माध्यम से बखूबी प्रतिबिंबित करता है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के व्यक्तित्व और मूल्यों की अनूठी अभिव्यक्ति और घरों व व्यक्तिगत विकास के बीच के आंतरिक संबंध को भी रेखांकित करता है।
अध्ययन के अनुसार, 25% उत्तरदाता अपने प्रारंभिक घर की खरीद पर विचार करते समय एक व्यक्तिगत कोने या स्थान की कल्पना को प्राथमिकता देते हैं, इसे एकान्त गतिविधियों और शांति के लिए एक पवित्र स्थान के रूप में देखते हैं। अध्ययन के सबसे दिलचस्प निष्कर्षों में से एक के अनुसार, 54% से अधिक उत्तरदाताओं ने अपने व्यक्तिगत विकास, आकांक्षाओं और उत्पादकता के लिए स्टडी टेबल (अध्ययन मेज) और कुर्सी के बीच सीधे संबंध पर जोर दिया है। उनके लिए कहीं और ध्यान केंद्रित करना और कुशलता से काम करना एक बड़ी चुनौती है।
इसके अतिरिक्त, लगभग 62% लोगों ने अपने बच्चों के कमरे के लिए स्टडी टेबल (अध्ययन मेज) और कुर्सियों का चयन करते समय अपने बच्चों की पसंद को भी शामिल करते हैं। गोदरेज इंटेरियो के ‘होमस्केप्स‘ अध्ययन से कई दिलचस्प अंतर्दृष्टि का भी पता चलता है, मसलन लॉजिक एंड रैशनैलिटी यानी तार्किक व विवेक) वर्सस क्रिएटिविटी एंड इनोवेशन को लेकर जारी बहस। यह उपभोक्ताओं के सबसे अंदरूनी और महत्वपूर्ण जोन यानी उनके घर में उनके इस तमाम दृष्टिकोणों की गहराई से पड़ताल करता है। यह अध्ययन इसके साथ ही कार्यक्षमता और संगठनात्मक कौशल पर अधिक जोर देने की ओर ध्यान आकर्षित करता है। लगभग 28% उत्तरदाताओं को ‘ऑर्डर ऑब्सेसिव‘ के रूप में पहचान की गई है। इनके अनुसार, सफाई के दौरान नौकरों द्वारा अनजाने में भी अगर उनके सामान को थोड़ा भी रीअरेंज्ड ( पुनर्व्यवस्थित) किया जाता है, तो वे काफी असुविधाजनक महसूस करते हैं।
गोदरेज इंटेरियो के बिजनेस हेड और वरिष्ठ उपाध्यक्ष स्वप्निल नागरकर के अनुसार, ‘होमस्केप्स‘ स्टडी से व्यक्तियों, उनके परिवारों और उनके घरों के बीच एक गहरे भावनात्मक संबंध का पता चलता है। हमारा शोध उपभोक्ताओं के जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू के बारे में उनकी भावनाओं का पता लगाता है – उनका घर, उनके अस्तित्व के दर्पण के रूप में सामने आता है। यह सर्वे डेटा प्रमुख तौर पर बदलाव का सुझाव देता है, क्योंकि लोग तेजी से कार्यक्षमता और सौंदर्यशास्त्र दोनों को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनका घर सुव्यवस्थित और स्वागत योग्य तरीके से तैयार रहे। गोदरेज इंटेरियो में, हम आरामदेह और सौंदर्यशास्त्र को प्राथमिकता देते हैं, साथ ही आपके लिविंग स्पेस (रहने की जगह) को बेहतर बनाने के लिए शानदार तरीके डिज़ाइन किया गया और फंक्शनल फर्नीचर को उपलब्ध करते हैं।
गोदरेज इंटेरियो अध्ययन कक्षों के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स में चैंपियन है, जो कलात्मकता के साथ ही आरामदायक भी हैं और जिसके उपयोग से प्रोडक्टिविटी (उत्पादकता) बढ़ती है। इनमें ईज़ीफ्लेक्स सिस्टम की विशेषता वाला मोशन चेयर भी शामिल है, जिसे एक्टिव सीटिंग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें बैठने की विभिन्न मुद्राओं (पास्चर) के दौरान पीठ को ऑप्टिमल सपोर्ट (इष्टतम समर्थन) भी सुनिश्चित होता है।
एक अन्य नोटवर्दी प्रोडक्ट (उल्लेखनीय उत्पाद) थ्रिल चेयर भी है, जो फंक्शनलिटी (कार्यात्मकताओं), पर्सनलॉजेशन (वैयक्तिकरण) सेटिंग्स और कई मॉडर्न टेक्चर (आधुनिक बनावट) और रंगों का विकल्प प्रदान करता है, जो इसे कन्टेम्परेरी स्पेस (समकालीन स्थानों) के लिए आदर्श बनाता है। उनके क्यूरेटेड सेट में चॉकलेट वी2 स्टडी टेबल और एड्रिया वर्कडेस्क जैसी स्टडी टेबल शामिल हैं, जो शयनकक्ष के भीतर एक फंक्शनल और प्रोडक्टिव स्पेस (कार्यात्मक और उत्पादक स्थान) बनाने में सक्षम बनाती हैं। इन स्टडी टेबल्स को शयनकक्ष या बैठक कक्ष में सहजता से इंटीग्रेट (एकीकृत) किया जा सकता है और ये किसी भी इंटीरियर के साथ अच्छी तरह मेल खा सकते हैं।
इस सर्वेक्षण में बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और लखनऊ जैसे सात शहरों में रहने वाले 2,822 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया है।







