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मानव कल्याण में सहभागिता निभाती है ब्रह्माकुमारी

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माउंट आबू। ब्रह्मकुमारी संस्‍था की स्‍थापना सन 1930 में लेखराज कृपलानी ने की, जिन्हें यह संस्था प्रजापिता ब्रह्मा मानती है।
दादा लेखराज अविभाजित भारत में हीरों के व्‍यापारी थे। वे बाल्‍यकाल से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। 60 वर्ष की आयु में उन्‍हें परमात्‍मा के सत्‍यस्‍वरूप को पहचानने की दिव्‍य अनुभूति हुई। उन्‍हें ईश्‍वर की सर्वोच्‍च सत्‍ता के प्रति खिंचाव महसूस हुआ। इसी काल में उन्‍हें ज्‍योति स्‍वरूप निराकार परमपिता शिव का साक्षात्‍कार हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे उनका मन मानव कल्‍याण की ओर प्रवृत्‍त होने लगा।
उन्‍हें सांसारिक बंधनों से मुक्‍त होने और परमात्‍मा का मानवरूपी माध्‍यम बनने का निर्देश प्राप्‍त हुआ। उसी की प्रेरणा के फलस्‍वरूप सन् 1937 में उन्‍होंने इस विराट संगठन की छोटी-सी बुनियाद रखी। सन् 1937 में आध्‍यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा अनेकों तक पहुँचाने के लिए इसने एक संस्‍था का रूप धारण किया।
इस संस्‍था की स्‍थापना के लिए दादा लेखराज ने अपना विशाल कारोबार कलकत्‍ता में अपने साझेदार को सौंप दिया। फिर वे अपने जन्‍मस्‍थान हैदराबाद सिंध (वर्तमान पाकिस्‍तान) लौट आए। यहाँ पर उन्‍होंने अपनी सारी चल-अचल संपत्ति इस संस्‍था के नाम कर दी। सन 1950 में लेखराज जी राजस्थान स्थित आबू पर्वत पहुंचे और योग साधना करते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था का मुख्यालय स्थापित किये। प्रारंभ में इस संस्‍था में केवल महिलाएँ ही थी। माउंट आबू में ब्रह्मकुमारी की मुख्य प्रशासिका जगदम्बा सरस्वती, दादी मनमोहिनी, दादी प्रकाशमणि, दादी जानकी, दादी हृदयमोहिनी, दादी रत्नमोहिनी रहीं। दादा लेखराज को ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ नाम दिया गया। सभी ब्रह्माकुमारी द्वारा उन्हें शिव बाबा भी कहा जाता है। जो लोग आध्‍या‍त्मिक शांति को पाने के लिए ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ द्वारा उच्‍चारित सिद्धांतो पर चले, वे ब्रह्मकुमार और ब्रह्मकुमारी कहलाए तथा इस शैक्षणिक संस्‍था को ‘प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय’ नाम दिया गया।
इस विश्‍वविद्यालय की शिक्षाओं (उपाधियों) को वैश्विक स्‍वीकृति और अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त हुई है।
ओम शांति

माउंट आबू से संवाददाता संतोष साहू

फिल्म निर्माता अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ को बेस्ट आईटी सर्विसेज के लिए इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा मिला प्रतिष्ठित अवार्ड

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इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा बेस्ट आईटी सर्विसेज 2022 के लिए आईटी प्रोफेशनल अशोक प्रसाद अभिषेक को प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किया गया। ह्यूमन राइट्स काउंसिल के एंटरटेनमेंट क्षेत्र के अध्यक्ष सोनू कुंतल के हाथों अशोक प्रसाद अभिषेक को यह ट्रॉफी मिली। कोलकाता के मूल निवासी अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ ने लंदन से उच्च शिक्षा हासिल की। अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ को आइटी बिजनेस और इवेंट मैनेजमेंट का कमाल का अनुभव है और अपने कार्यों में वह उन सभी एक्सपीरियंस का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा अशोक प्रसाद अभिषेक को बेस्ट आईटी सर्विसेज 2022 के लिए प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किया गया है। वह इस सम्मान को पाकर बेहद उत्साहित हैं।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ ने सन 2000 में आईई एरा आईटी से अपनी जर्नी स्टार्ट की, आईई एरा ट्रेंडिंग कंपनी का निर्माण कर के उन्होंने अपनी व्यवसायिक यात्रा को और अधिक विस्तार दिया।
फिलवक्त अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में क्रियाशील हैं। वो अपने बैनर आईईव एरा फिल्म्स के बैनर तले हिंदी सहित कई रीजनल भाषाओं की फिल्मे भी प्रोड्यूस कर रहे हैं। उन्होंने रवि किशन, दिनेश लाल यादव निरहुआ और मनोज तिवारी सहित कई चोटी के कलाकारों के साथ काम किया है। वह कई बेहतरीन शार्ट फिल्मों के जाने-माने निर्माता और निर्देशक भी हैं। हाल ही में उन्होंने भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित सिंगर व अभिनेता दिनेशलाल यादव निरहुआ के जीवन वृत पर आधारित भोजपुरी की पहली बायोपिक फिल्म ‘ अभिनेता से राजनेता’ के निर्माण की घोषणा की है। यह फ़िल्म बहुत जल्द ही फ्लोर पर जाने वाली है।
संतोष मिश्रा इसके लेखक और निर्देशक हैं। इस फिल्म में दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ रवि किशन और मनोज तिवारी भी विशेष भूमिका में होंगे। वहीं पाखी हेगड़े और आम्रपाली दुबे भी इस फिल्म का विशेष आकर्षण होंगी।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं को लेकर फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड अलाइड मजदूर यूनियन की राज्यपाल से भेंट

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मुम्बई। फिल्म निर्माण क्षेत्र में कार्यरत दिहाड़ी मजदूरों की विभिन्न समस्याओं के संबंध में फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड अलाइड मजदूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वर लाल श्रीवास्तव ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। गंगेश्वर लाल ने इस अवसर पर राज्यपाल का ध्यान दिलाते हुए कहा कि फिल्म निर्माण में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी प्रवासी मजदूरों की स्थिति बहुत कठिन है। गरीब दिहाड़ी मजदूरों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हमारे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता है और वे पीएफ, ग्रेच्युटी, ईएसआईसी जैसी सभी योजनाओं से वंचित हैं। यह बड़े खेद की बात है कि ये मजदूर दिन-रात मेहनत कर राज्य के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान दे रहे हैं लेकिन खुद सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। हाल ही में, फिल्म निर्माता तानाशाहों की तरह व्यवहार कर रहे हैं और श्रमिकों को दो-तीन महीने के लिए अपनी मेहनत की कमाई दिए बिना 20-24 घंटे काम कर रहे हैं। कई निर्माता साल-दर-साल पैसे का भुगतान करने में चूक करते हैं।गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि फिल्म निर्माता करोड़ों रुपये कमाते हैं लेकिन दिहाड़ी मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं करते हैं। ऐसे निर्माताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले मजदूरों को या तो नौकरी से निकाल दिया जाता है या उनके खिलाफ झूठी शिकायत कर पुलिस कार्रवाई की जाती है। मज़दूरों का यह उत्पीड़न जारी है और पुलिस अधिकारियों की मनमानी के कारण निर्माता मज़दूरों को भुगतान किए बिना आसानी से भाग जाते हैं। कई निर्माता हैं जो हमारे कामगारों का कई तरह से शोषण कर रहे हैं। श्रमिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सेट पर काम करते समय उन्हें अच्छा खाना नहीं दिया जाता है, साथ ही इन श्रमिकों को अक्सर दुर्घटनाएं और गंभीर चोटें आती हैं क्योंकि वे बहुत ऊंचाई पर काम करते हैं। ऐसे में न तो सेट पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है और न ही सेट पर एम्बुलेंस की व्यवस्था। कई बार समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण श्रमिकों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। बीएमसी, फायर ब्रिगेड या अन्य सरकारी विभागों द्वारा सेट का नियमित ऑडिट समय-समय पर सेट पर किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, कोई भी निर्माता नियम का पालन नहीं कर रहा है और सेट पर कोई नियमित ऑडिट नहीं किया जाता है। यहां निर्माता केवल धनबल का उपयोग करके बिना किसी प्रतिबंध के श्रमिकों के जीवन से खेल रहे हैं। हाल के दिनों में कई आग दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें इन दिहाड़ी मजदूरों की जान चली गई है।
इन श्रमिकों और उनके परिवारों को किसी भी प्रकार की सरकारी सुरक्षा नहीं मिलती है। ये मजदूर आजीविका कमाने के लिए पलायन कर जाते हैं और उनके परिवार दूर-दराज के गांवों में रहते हैं। उक्त दिहाड़ी मजदूर यहां होने वाली आय से अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है। यदि श्रमिकों को उनका दैनिक वेतन मिलता है, तो वे इसमें से कुछ अपने परिवारों को खिलाने के लिए भेज सकते हैं। मजदूरों को साल-दर-साल मेहनत का भुगतान नहीं मिलेगा तो वे अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर सकते हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है और किसी भी सरकार ने इन मुद्दों पर कभी विचार नहीं किया और इसके लिए कोई ठोस समाधान नहीं दिया।
फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड अलाइड मजदूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वर लाल श्रीवास्तव ने इस पत्र के माध्यम से राज्यपाल से अनुरोध किया है कि कृपया इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें और हमारे श्रमिकों को नियमित वेतन दिलाने में हमारी सहायता करें। यह विनम्र अनुरोध है कि संबंधित अधिकारियों और श्रम कार्यालय को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को दैनिक आधार पर मजदूरी का भुगतान करने के निर्देश दिए जाएं।

लंदन. बोरिस जॉनसन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में शामिल भारतवंशी ऋषि सुनक को हाल में लंदन में गौ पूजा करते देखा गया

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लंदन. बोरिस जॉनसन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में शामिल भारतवंशी ऋषि सुनक को हाल में लंदन में गौ पूजा करते देखा गया था। हिंदू समुदाय का ध्यान खींचते वायरल वीडियो में पूर्व वित्त मंत्री सुनक अपनी पत्नी और इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति के साथ गौ पूजा करते दिख रहे हैं। वीडियो में सुनक गाय की आरती उतारते व पीतल के गिलास से गाय को जल अर्पित करते देखे जा रहे हैं। एक पंडित, जो अनुष्ठान कर रहा है, एक दीया हाथ में लेता है और युगल को गाय के चारों ओर आरती के लिए कहता है। यह वीडियो सनक द्वारा जन्माष्टमी मनाने के लिए लंदन के बाहरी इलाके में भक्तिवेदांत मनोर जाने के कुछ दिनों बाद आया है।

पहले मनाई थी दीवाली

श्री सनक ने नवंबर 2020 में चांसलर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, दिवाली का त्योहार मनाते हुए ब्रिटेन के भारतीय समुदाय की प्रशंसा प्राप्त की थी। उन्होंने 11 डाउनिंग स्ट्रीट में चांसलर के आधिकारिक निवास के सामने की सीढ़ी पर दीपक जलाए थे। इस दौरान उन्होंने कोरोना-नियमों का पालन करते हुए लोगों से अपने घर रहते हुए त्योहार मनाने की अपील की थी।

पांच सितंबर को मिलेगा नया पीएम
पूर्व वित्त मंत्री सुनक पीएम पद की दौड़ में अंतिम दो फाइनलिस्ट में हैं। उनकी प्रतिद्वंद्वी विदेश मंत्री लिज ट्रस हैं। पार्टी सदस्यों की वोटिंग के बाद पांच सितंबर को ब्रिटेन के नए पीएम की घोषणा होनी है। भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने 2015 में, 35 साल की उम्र में, पहली बार संसद का चुनाव जीता। आज प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में हैं। अगर वो कामयाब हुए तो ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री होंगे।

 

फिल्म ‘भारत के अग्निवीर’ की घोषणा राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने की

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मुम्बई। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों फिल्म “भारत के अग्निवीर” की घोषणा हाल ही में की गयी। राज भवन में आयोजित हुये समारोह में महामहिम द्वारा फिल्म का पोस्टर लॉन्च किया गया और फिर क्लैप देकर फिल्म के निर्माण की घोषणा की गयी।
पुरुषोत्तम शर्मा के निर्देशन में बनने जा रही फिल्म की कहानी भारत सरकार द्वारा घोषित की गयी अग्निवीर स्कीम पर आधारित है। फिल्म में यह दर्शाया जाएगा कि यह योजना देश व युवाओं के लिये कितनी लाभदायक है।
फिल्म के बारे में जानकारी देते हुए निर्माता निर्देशक पुरुषोत्तम शर्मा कहते हैं कि जब भारत सरकार द्वारा अग्निवीर स्कीम की घोषणा की गयी तब अधिकतर लोगों ने इसका स्वागत किया और इसे सही करार दिया। दूसरी तरफ कुछेक ने विरोध किया और विरोध के नाम पर योजना का गलत प्रचार किया और हिंसा का मार्ग अपनाकर राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान भी पहुंचाया। युवाओं में योजना का दुष्प्रचार होता देख मुझे लगा कि फ़िल्म के माध्यम से युवाओं को इस योजना के बारे में सही ढंग मे समझाया जा सकता है और फिर फिल्म के निर्माण की योजना बनी।
फिल्म के निर्माण का स्वागत करते हुये महामहिम ने अपने भाषण में कहा, “यह बात लंबे समय से चलती आ रही है कि देश में युवाओं के लिये आर्मी की ट्रेनिंग आवश्यक हो। अब अग्निवीर योजना के तहत इस दिशा में देश ने कदम बढ़ा लिया है। अग्निवीर के तहत देश के सुरक्षा बलों को और ताकत मिलेगी और ताकत में इजाफा हुआ देख कोई भी देश हमारे देश को आंख दिखाने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। सच तो यह भी है कि राष्ट्र है तो हम हैं। ऐसे में राष्ट्र की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। अग्निवीर योजना से युवाओं में देशभक्ति का जज्बा बढ़ेगा। साथ ही अनुशासन के प्रति और जागरुकता बढ़ेगी। मैं इस योजना पर बन रही फ़िल्म के लिये सफलता की कामना करता हूँ।
महंत रविन्द्र पुरी क्रिएशन व सत्या ऑनलाइन प्रोडक्शन के बैनर के अंतर्गत निर्माण की जा रही इस फिल्म के अन्य निर्माता हैं महेश प्रताप सिंह, विनीत गर्ग व डॉ. विजय मिश्रा। फिल्म की अधिकतर शूटिंग उत्तराखंड में की जाएगी और आर्मी द्वारा भी पूरा सहयोग देने की बात कही गयी है।
इस फ़िल्म को 23 जनवरी को प्रदर्शित करने की योजना है। फिलहाल कलाकारों के चयन की प्रक्रिया जारी है और फ़िल्म से जो आय होगी उसका 40 प्रतिशत आर्मी वेलफेयर फंड में दिया जाएगा।

गुलाम नहीं रहे अब कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी से नाराज चल रहे आजाद ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।

भारी मन से लिया फैसला- आजाद

आजाद ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने सोनिया गांधी को पांच पेज की लंबी चिट्ठी लिखी है। आजाद ने चिट्ठी में लिखा कि मैंने भारी मन से कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया है। आजाद ने लिखा, ‘बहुत खेद के साथ मैंने कांग्रेस से अपना सालों पुराना रिश्ता संबंध तोड़ने का फैसला किया।’ उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने पार्टी चलाने वाली मंडली के संरक्षण में इच्छाशक्ति और क्षमता खो दी है। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने से पहले नेतृत्व को ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ करनी चाहिए थी।

गौ तस्कर साथ पुलिस की मुठभेड़

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झाँसी : गोवध अधिनियम में वाँछित 25 ह़जार रुपए के इनामी बदमाश को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। बदमाश ने भी पुलिस पर गोलियाँ चलाई, मगर वह पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी वहाँ से भाग निकला।
रक्सा थाने की डोंगरी चौकी प्रभारी निर्मल सिंह पुलिस बल के साथ ग्राम डेली में पुल के पास चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान बिहारी तिराहे की ओर से एक बाइक पर सवार दो युवक आते दिखे। रुकने का इशारा किया तो युवक ग्राम बाजना को जाने वाली सड़क की ओर भाग निकले। इसकी जानकारी चौकी प्रभारी ने वायरलेस सेट पर कण्ट्रोल को दी।
सूचना मिलते ही रक्सा थाना प्रभारी जितेन्दर सिंह तक्खर व सीपरी बा़जार थाना प्रभारी निरीक्षक देवेश शुक्ला ने पुलिस बल के साथ बाजना जाने वाले मार्ग को घेर लिया। रक्सा थाना प्रभारी को देख बचने के लिए बाइक सवार एक युवक ने गोली चला दी। थानाध्यक्ष ने जवाबी फायर किया जो बाइक सवार एक युवक को गोली लग गई और वह गिर गया, जबकि उसका साथी अँधेरे का लाभ उठाते हुए वहाँ से भाग गया। पुलिस के अनुसार घायल युवक ने अपना नाम मथुरा के फराह थाना क्षेत्र स्थित व्यापारी मण्डी निवासी फारूख बताया।
उसके पास से पुलिस ने 315 बोर का एक तमंचा, दो ़िजन्दा, एक मिस व एक खोखा कारतूस, एक बाइक, पॉकेट डायरी, मोबाइल फोन, एफआइआर की कॉपी आदि बरामद की। थाना प्रभारी रक्सा के अनुसार मुठभेड़ में पकड़ा गया युवक सीपरी बा़जार थाने में गोवध निवारण अधिनियम व 7 सीएलए ऐक्ट के तहत वाँछित था।
उस पर झाँसी पुलिस ने 25 ह़जार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। फारूख ने बताया कि वह अपने ऊपर दर्ज मु़कदमे के सिलसिले में झाँसी के वकील से मिलने आया था। घायल युवक को उपचार के लिए मेडिकल कॉलिज ले जाया गया। पुलिस के अनुसार इस गोवध अधिनियम के मामले में पहले ही 4 आरोपी जेल जा चुके हैं और सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही की गई है।

बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा: युवाओं के साथ खेलती सरकार, क्यों नहीं हो रही भर्तियां?

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आज हरियाणा देशभर में बेरोजगारी में कई सालों से पहले स्थान पर है। देश और प्रदेश में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। हरियाणा बेरोजगारी में 35.1% के साथ देश में पहले स्थान पर है। प्रदेश में 18 से लेकर 40 वर्ष तक का हर दूसरा युवा बेरोजगार है। हरियाणा की इस उपलब्धि में सीधा-सा सरकार का हाथ है, कई सालों से यह छोटा-सा राज्य पहले स्थान पर काबिज है। हरियाणा में लाखों पदों की रिक्तियों के बावजूद साल 2014 से क्यों तरस रहे हैं नौकरी के लिए युवा? कौन जिम्मेदार है। क्यों विभिन्न विभागों में लाखों पदों के खाली होने के बावजूद सरकार की मंशा नहीं है कि इन पदों को भरा जाए। और न ही हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों को चिंता कि वह सरकार से इन पदों को भरने के लिए कहे।

दिल्ली से लगे हरियाणा राज्य में भर्तियों का हाल यह है कि साल 2014 से विज्ञापित बहुत से  पदों का परिणाम आज तक जारी नहीं हुआ। अगर कोई परिणाम जारी हो भी गया तो वह भर्तियां कोर्ट में लटकी हुई है। चयनित आवेदक जॉइनिंग को लेकर तरस रहे हैं। शिक्षा विभाग में पिछले 8 सालों में कोई भर्ती नहीं हुई है जबकि हरियाणा के लाखों युवा हर साल राज्य पात्रता परीक्षा पास करते हैं। इस आस में कि वो एक दिन अध्यापक बन कर देश के सुनहरे भविष्य का निर्माण करेंगे। मगर अब तो उनका खुद का भविष्य अंधकार में खो गया है।  हरियाणा में भर्ती प्रणाली और कर्मचारी चयन आयोग की कार्यशैली कि बानगी देखिए। पारदर्शिता के नाम पर यहां रोज नए- नए नियम बनाए जाते हैं तो कभी कॉमन भर्ती टेस्ट के नाम पर युवाओं को बहलाया जाता है। तरह-तरह के सब्जबाग दिखाए जाते हैं। बेरोजगार युवा उनका पीछा करते हैं मगर आखिर हाथ कुछ नहीं लगता।

आज हरियाणा के युवाओं की स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि यहां के करोड़ों युवा पहले तो खाली पदों के लिए विज्ञापन के लिए सरकार से प्रार्थना करते है, बात नहीं बनती तो मजबूरी में आंदोलन करते हैं। सही समय पर पेपर नहीं होते तो फिर उनके एग्जाम के लिए आंदोलन कर सड़कों पर आते हैं। पहली बात तो एग्जाम होता ही नहीं, होता है तो बार-बार लीक होता है। अगर कोई एग्जाम पूर्ण हो भी जाता है तो उसके परिणाम के लिए आवेदक सालों तक इंतजार करते हैं या फिर राजनीतिज्ञों की कोठियों पर चक्कर लगाते हैं। अगर परिणाम जारी भी हो जाता है तो जॉइनिंग के लिए सालों तक इन बेरोजगार युवाओं को इंतजार में बैठा रहना पड़ता है या फिर वही भर्तियां ऐसे मोड़ पर लाकर कोर्ट में उलझा दी जाती है।

उदाहरण के लिए यहां के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में लगभग 3000 पदों की इंस्ट्रक्टर की भर्ती पिछले 9 सालों से पेंडिंग है। युवाओं के अथक प्रयासों के परिणाम स्वरुप कुछ पदों का परिणाम जारी हुआ है, मगर जॉइनिंग उनकी भी नहीं हुई । यही नहीं मुख्य ट्रेड वाली बड़ी भर्ती का परिणाम अभी भी कर्मचारी चयन विभाग ने रोका हुआ है। एक-एक, दो-दो पोस्ट वाली कैटेगरी का परिणाम जारी करके ये कह दिया जाता कि हम परिणामी लिस्ट दे रहें है।  भर्ती के नियमों में स्पष्टता के अभाव में भर्तियां कोर्ट और आयोग के बीच झूलती रहती है। आखिर क्यों आयोग विज्ञापन जारी करते हुए स्पष्ट नियम नहीं बनाता। आखिर उनकी मंशा क्या है? क्यों युवाओं को बेरोजगारी के साथ-साथ कोर्ट और आयोग के बीच पिसना पड़ रहा है ? स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि कॉमन टेस्ट के नाम पर हरियाणा के लाखों युवा एग्जाम के इंतजार में घर बैठे हैं लेकिन सरकार है कि समझती ही नहीं।

आखिर क्यों हरियाणा सरकार को अपने द्वारा की गई एक-दो छुटपुट भर्तियों की ही जांच बार-बार करनी पड़ रही है? हरियाणा सरकार की दो ऐतिहासिक भर्तियां ग्रुप डी और क्लर्क की आए दिन जांच बैठती है। ग्रुप डी को तो वोट बैंक का जरिया कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी  क्योंकि यह भर्ती पिछले चुनाव से थोड़े दिन पहले रातों-रात बिना किसी वेरिफिकेशन के आनन-फानन में की गई थी। कुछ ऐसा ही हाल क्लर्क  की 5000 पदों की भर्ती का हुआ जिसका संशोधित परिणाम अब सालों बाद भी जारी हो रहा है। परिणाम स्वरुप हज़ारों युवाओं का भविष्य अंधकार में खो गया है, गलती करें कोई, भरे कोई।

हरियाणा पुलिस में हर साल हजारों पदों की भर्ती का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार पिछले 3 साल से चल रही कॉन्स्टेबल की भर्ती को भी पूरा नहीं कर पाई है। इस भर्ती के लिए लाखों युवाओं ने मेहनत की, लेकिन यह भर्ती आज भी सरकार की मंशा के अभाव में पूर्ण नहीं हुई है। आलम यह है कि हरियाणा के हर विभाग में लाखों पद खाली है लेकिन सरकार इन पदों को भरना नहीं चाहती। तभी तो हरियाणा बेरोजगारी में नंबर वन है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो वह  दिन दूर नहीं जब हरियाणा बेरोजगारी के साथ-साथ चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं में  में नंबर वन पर होगा।

हरियाणा सरकार के एचएसआईआईडीसी में निकली 200-300 पदों की विभिन्न श्रेणियों की भर्तियां आज चयन के बावजूद जॉइनिंग के लिए तरस रही है।  आखिर क्यों वहां के विभागाध्यक्ष और सरकार इन युवाओं को जॉइनिंग नहीं दे रहे। इसमें युवाओं की क्या गलती है कि वह चयन  के बाद भी सालों तक घर बैठे जॉइनिंग का इंतजार कर रहे हैं। परिणाम यह है कि आज यहां का पढ़ा लिखा युवा नौकरी के अभाव में अपना घर बसाने को तरस रहा है क्योंकि भर्तियां नहीं होने की वजह से युवा लगातार तैयारी करते रहते हैं। उम्र बढ़ती जाती है और वह रोजगार के अभाव में शादी के लिए सही समय पर सोच नहीं पाता।

हर साल प्रदेश के लाखों युवाओं को अध्यापक पात्रता परीक्षा के नाम पर लूटा आ जाता है लेकिन शिक्षकों भर्तियां नहीं निकाली जाती। भर्ती नहीं तो पात्रता परीक्षा क्यों ? आज शिक्षकों के लाखों आवेदकों की राष्ट्रीय पात्रता सर्टिफिकेट की वैधता समाप्त होने के कगार पर है, बार-बार परीक्षा पास कर वो थक चुके है, टूट चुके है।  शिक्षकों के हज़ारों पद खाली होने के बावजूद न तो यहां का शिक्षा विभाग और न ही यहां की सरकार इन पदों को भरने का सोच रही है। उल्टे यहां के हजारों सरकारी स्कूलों पर बंद होने की नौबत आ गई है। आखिर क्या होगा गरीब और निचले तबके के बच्चों का और नौकरी की आस में बैठे  हरियाणा के मेधावी और शिक्षित युवाओं का।

देखे तो पिछले 8 सालों में यहां की सरकार के द्वारा स्वास्थ्य विभाग में नाममात्र के कुछ पदों को भरने के अलावा किसी भी विभाग में कोई भर्ती अच्छे से पूर्ण नहीं हुई है। जिससे युवाओं को संतोष हो।  स्वास्थ्य विभाग में हुई भर्तियों को वक्त का तकाजा कहे या सरकार की मजबूरी क्योंकि कोरोना काल की वजह से इनको पैरामेडिकल स्टाफ की भर्तियां मजबूरी में करनी ही पड़ी और यह भर्तियां भी आवेदकों के सड़कों पर उतरने के बाद पूर्ण हुई है। आखिर क्यों यहां के मुखिया ने युवाओं को सड़कों पर उतरने मजबूर कर दिया है?  युवा आज अपने हकों के लिए हरियाणा सरकार के विरोध में आ खड़ा हुआ है। सरकार को सोचना होगा, सोचना ही नहीं उनकी परेशानियों का हल ढूंढना होगा। तभी एक स्वर्णिम हरियाणा का निर्माण कर पाएंगे।

खेलेगा इंडिया एक नया और रोमांचक खेल ‘हानेटबॉल 360’ !

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मुम्बई। डीएमआईएल360, फ्लोरिडा की एक कंपनी, भारत में नए और रोमांचक खेल, हेनेटबॉल360 को लॉन्च करने के लिए अपनी कार्य योजना की घोषणा करते हुए गर्व महसूस कर रही है।
बोका रैटन, फ्लोरिडा: डीएमआईएल360 के सीईओ और संस्थापक ने हाल ही में ऑर्किड होटल मुम्बई में इसकी घोषणा की।
हानेटबॉल360, भारतीय लोगों के लिए एक अद्वितीय दृष्टिकोण के साथ एक नया खेल आ रहा है। खेल को अछूते प्रतिभाओं को विकसित करने और दिमाग को सशक्त बनाने के लिए बनाया गया है। Hanetball360 एकमात्र ऐसा खेल है जो ‘क्वांटम थिंकिंग360TM’ सिद्धांत का लाभ उठाता है, जिसमें खिलाड़ियों को लगभग हर दूसरे खेल को खेलने के रैखिक मोड के बजाय हर दिशा में स्कोर करने और बचाव करने के तरीकों के बारे में सोचने की आवश्यकता होती है। यह खेल सबसे मजेदार और रोमांचक है। बास्केटबॉल, फुटबॉल के विपरीत हेनेटबॉल को 360-डिग्री गति में खेला जाता है जहां खिलाड़ी स्कोर करने, जीतने या बचाव करने के लिए ग्रंडनेट के चारों ओर जा सकते हैं। इस दृष्टिकोण (“क्वांटमथिंकिंग360टीएम”) का उपयोग करके, खिलाड़ी अपने दिमाग का विस्तार करने और जीतने की संभावनाओं का पता लगाने में सक्षम होते हैं जो अन्य खेलों के साथ संभव नहीं होगा।


जब हेनेटबॉल 360 के आविष्कारक फ्रिट्ज वाल्देस से पूछा गया कि हानेटबॉल 360 को भारत में लाने का आपके लिए क्या उद्देश्य एवं लक्ष्य है? तो उन्होंने जवाब दिया कि भारत में हेनेटबॉल 360 का लक्ष्य बहुआयामी है, लेकिन प्राथमिक उद्देश्य में सकारात्मक बदलाव करना है। हैनेटबॉल360 का विजन वैश्विक स्तर पर खेल का आनंद लेने और शारीरिक क्षमताओं के व्यक्तियों के लिए संभावनाएं पैदा करके खेल की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव करना है। हैनेटबॉल360 संयुक्त राज्य अमेरिका, डोमिनिकन गणराज्य, हैती और क्यूबा में तेजी से बढ़ रहा है। यह खेल कनाडा और अन्य देशों में भी स्थापित होने की तैयारी कर रहा है। पहली चैम्पियनशिप लीग 16 अक्टूबर, 2022 को फ्लोरिडा के फोर्ट लॉडरडेल में स्थित नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी में खेलने के लिए निर्धारित है, जहां यह पहले से ही प्रगति कर रहा है।
ट्रांसमीडिया ग्रुप के अध्यक्ष एड्रिएन मैजोन ने कहा कि खेल की दुनिया में ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है। हेनेटबॉल 360 स्वाभाविक रूप से खिलाड़ियों की आंतरिक भावनाओं को मजबूती देता है। भविष्य में यह खेल भी अन्य खेलों की भांति प्रसिद्ध हो सकता है।

– संतोष साहू

अनूप जलोटा, शंकर महादेवन, हरिहरन और शिल्पा राव आज षणमुखानंद हॉल में करेंगे परफॉर्म

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मुम्बई। संगीतम चैरिटेबल ट्रस्ट एक ऐसा ट्रस्ट है जो म्युजिकल प्रोग्राम ‘रेहमतें’ का 7 साल से आयोजन करके म्युज़िक से जुड़े ज़रूरतमंद फ़नकारों पर रहमतों की बारिश कर रहा है। यह ट्रस्ट लगातार पिछले सात वर्षों से संगीत क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करता आ रहा है। अब 25 अगस्त 2022 को मुंबई में रहमतें म्युज़िक कॉन्सर्ट के 8 वें एडिशन का आयोजन करने जा रहा है। सौरभ दफ्तरी ने इस कार्यक्रम के विवरण की घोषणा करने के लिए पद्मश्री हरिहरन और शिल्पा राव को आमंत्रित किया। इस साल यह प्रोग्राम पहले से अधिक भव्य रूप से आयोजित किया जा रहा है जिसकी तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं।


इस साल पद्मश्री शंकर महादेवन, पद्मश्री हरिहरन,पद्मश्री अनूप जलोटा और शिल्पा राव जैसी हस्तियां इस म्युज़िक कॉन्सर्ट में परफॉर्म करेंगी। इस कॉन्सर्ट में एक नया बैंड अर्बन जोगी भी परफॉर्म करेगा, जो यहां मौजूद ऑडिएंस के लिए एक सरप्राइज पैकेज होगा।
रहमतें 8 की विशेषता यह है कि इस वर्ष जरूरतमंद, वृद्ध, योग्य संगीतकारों और बच्चों को इस संगीतमय कार्यक्रम की आय से मदद मिलेगी। यह अनोखा और शानदार संगीत समारोह 25 अगस्त को षनमुखानंद ऑडिटोरियम, किंग सर्कल, सायन में होगा। इस शानदार आयोजन की गवाह पूरी संगीत इंडस्ट्री, संगीत प्रेमी और शहर की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियां होंगी। इस समारोह में जावेद अख्तर मुख्य अतिथि होंगे और अमृता फडणवीस गेस्ट ऑफ ऑनर होंगी।
जिन लोगों को आर्थिक मदद मिलेगी उनके नाम पद्मश्री हरिहरन, पद्मश्री अनूप जलोटा और सौरभ दफ्तरी जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों के एक पैनल द्वारा तय किए जाएंगे। ई-बिज़ एंटरटेनमेंट एलएलपी, इस कॉन्सर्ट की मेजबानी कर रहा है ताकि जरूरतमंदों की मदद की जा सके।