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भारतीय सिनेमा के आठ दिग्गज कलाकार एक साथ नज़र आएंगे ‘ऊंचाई’ में

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राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित फिल्म ‘ऊंचाई’ में भारतीय सिनेमा के आठ दिग्गज कलाकार एक साथ नज़र आएंगे। अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, बोमन ईरानी, नीना गुप्ता, सारिका और परिणीति चोपड़ा अभिनीत इस फिल्म में, डैनी डेंगज़ोम्पा और नफ़ीसा अली सोढ़ी भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। राजश्री प्रोडक्शन की ये 60वीं फिल्म सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी है। इस फिल्म से निर्देशक सूरज बड़जात्या 7 सालों बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। उनकी पिछली रिलीज फिल्म थी ‘प्रेम रतन धन पायो’ जिसमें सलमान खान और सोनम कपूर ने काम किया था। फिल्म ‘ऊंचाई’ का सेकंड लुक(पोस्टर) भी जारी कर दिया गया है। पोस्टर ऐसा जो दोस्ती की गाथा बयां कर रहा है कि चट्टानों की मजबूती से भी कट्टर है, हम तीन यारों की दोस्ती।
 ‘ऊंचाई’ के इस नए पोस्टर में अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर और बोमन ईरानी एक चुनौतीपूर्ण ट्रैक से ब्रेक लेते हुए हिमालय में नक्काशीदार चट्टान पर बैठे नजर आ रहे हैं।  पोस्टर में बैकग्राउंड में माउंट एवरेस्ट अपनी खूबसूरती दर्ज करा रहा है। यहाँ तीनों दोस्तों को घर का खाना खाते हुए देखा जा सकता है, जो इस बात का इशारा करता है कि राजश्री की फिल्में ,दोस्ती, प्यार और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती पर आधारित होती हैं, जो फैंस हमेशा राजश्री की फिल्मों से उम्मीद करते हैं।  इस फिल्म की टैगलाइन है- ‘दोस्ती ही उनकी प्रेरणा थी’। यह पोस्टर बर्फीली पृष्ठभूमि में दोस्ती की गर्माहट को साफ तौर पर दिखाता है।
राजश्री प्रोडक्शन पिछले 75 सालों से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में है और उनके 75वें साल के मौके पर फिल्म ‘ऊंचाई’ रिलीज हो रही है। कमल कुमार बड़जात्या, स्वर्गीय राजकुमार बड़जात्या और राजश्री के अजित कुमार बड़जात्या द्वारा निर्मित, ‘ऊंचाई’ राजश्री प्रोडक्शन की 60वीं फिल्म है।  राजश्री प्रोडक्शन ने महावीर जैन फिल्म्स के महावीर जैन और बाउंडलेस मीडिया की नताशा मालपानी ओसवाल के साथ फिल्म का निर्माण किया है।  यह राजश्री प्रोडक्शन, महावीर जैन फिल्म्स और बाउंडलेस मीडिया की पहली संयुक्त महत्वाकांक्षी फ़िल्म है। इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग दिल्ली, आगरा, मुम्बई, लखनऊ, नेपाल और कानपुर में हुई है। यह फिल्म 11 नवंबर को देशभर में रिलीज होने वाली है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

अभातेयुप द्वारा ऐतिहासिक रक्तदान शिविर का आयोजन सम्पन्न

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केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के अलावा कलेक्टर निधि चौधरी इस महा अभियान की बनीं साक्षी

मुम्बई। ‘रक्तदान महादान’ कहा जाता है और इसी महादान के लिए लोगों को प्रेरित करने और उनसे इस महादान का हिस्सा बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस, भगवान विश्वकर्मा जयंती और अभातेयुप के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) द्वारा मेगा ब्लड डोनेशन कैम्प का आयोजन किया गया। अभातेयुप द्वारा आयोजित इस लोक हितार्थ कार्यक्रम मेगा ब्लड डोनेशन कैम्प (MBDD) ने एक बार फिर इतिहास रचा। रक्तदान के इस महा अभियान को सफल बनाने में जहां एक तरफ मुम्बई सहित आस पास के उपनगरों के युवक परिषदों ने जी जान लगा दिया वहीं आम जनता ने भी इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। अभातेयुप के इस आयोजन में लोगों को उत्साह बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर एवं मुम्बई सबर्बन की जिला कलेक्टर निधि चौधरी के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के तमाम राजनेताओं, प्रशासन के अधिकारियों ने अपने विशेष रूप से उपस्थिति दर्ज कराई।


उल्लेखनीय है कि एमबीडीडी को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, कृपाशंकर सिंह का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। इनके अलावा कई अन्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों ने अपना समर्थन एवं शुभकामनायें भेजा था।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 2500 कैम्प आयोजित हुए जबकि सिर्फ मुम्बई एवं आसपास के युवक परिषदों द्वारा कुल 125 शिविर आयोजित किया गया जिसमें कुल 11153 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया।


उल्लेखनीय है कि अभातेयुप के सह मंत्री भूपेश कोठारी के नेतृत्व में काफी पहले से इसकी तैयारियां की गई जिसमें अभातेयुप की टीम सहित मुम्बई की तमाम युवक परिषदों के कार्यकर्ता इसे सफल एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए श्रम कर रहे थे। टीम के लोग पिछले दो महीनों से कई नामी गिरामी समाजसेवियों, राजनीतिज्ञों, खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों, डॉक्टर्स आदि से मुलाकात करके उन्हें अभियान की जानकारी देते हुए समर्थन की अपील कर रहे थे। इस महाअभियान को भव्य बनाने हेतु चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मदनजी तातेड़, श्री तुलसी महाप्रज्ञ फॉउंडेशन के अध्यक्ष विनोद बोहरा, अभातेयुप के पूर्व अध्यक्ष बीसी जैन, संदीप कोठारी सहित समाज के अन्य संघीय संस्थाओं के अलावा सभी युवक परिषदों के अध्यक्ष, मंत्री, कन्वीनर सहित तमाम पदाधिकारियों का साथ मिला। जबकि इसे सफल बनाने के लिए भूपेश कोठारी के नेतृत्व में एमबीडीडी ज़ोनल संयोजक दीपक जी समदरिया, मुंबई संयोजक कमलेश भंसाली, राजेश कोठारी, जितेंद्र परमार, मयंक धाकड़, विकास कोठारी, अमित रांका, अभातेयुप टीम के दिनेश सिंघवी, नरेश चपलोत, नरेश सोनी, नवीन लोढ़ा, प्रसन्न पामेचा, अविनाश इंटोदिया, रवि डोशी, गौतम भंडारी, धीरज मेहता, राजू मेहता, पारस कोठारी, नीतेश धाकड़, हेमंत धाकड़, सुनिल कोठारी, शैलेश डुगर, अशोक कोठारी, देवेंद्र डागलिया, गौतम डांगी सहित मुंबई युवक परिषदों के तमाम पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के अलावा ब्राइट आउटडोर के योगेश लखानी, ऑन एयर मीडिया की उर्वशी मेहता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए इस ऐतिहासिक कार्य को सफल बनाया।


इस कार्यक्रम में अभातेयुप के सभी सदस्यों ने कड़ी मेहनत और लगन से काम किया और लोगों के मध्य जाकर रक्तदान के महत्व को बताया। इस कार्य में विशेष सावधानी रखी गई साथ में रक्तदाताओं को आभतेयुप की ओर से प्रशस्ति पत्र और भेंट दी गयी।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पहले अभातेयुप ने मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव करके एक रिकार्ड बनाया था, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था।

लखनऊ- अखिल भारतीय स्तर पर रे.सु.ब. स्थापना दिवस परेड-2022 का आयोजन

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लखनऊ – जगजीवन राम रेलवे सुरक्षा बल, अकादमी लखनऊ में कल दिनांक 20.09.2022 को रेलवे सुरक्षा बल स्थापना दिवस परेड का भव्य आयोजन किया जा रहा है। बल के महानिदेशक श्री संजय चन्दर, IPS, परेड की सलामी लेंगे। तत्पश्चात मुख्य अतिथि सुश्री दर्शना विक्रम जरदोश, माननीया रेल राज्य मंत्री एवं वस्त्र,  भारत सरकार परेड की सलामी लेंगी व निरीक्षण करेंगी।
उल्लेखनीय है कि 20 सितम्बर 1985 को ही रेलवे सुरक्षा बल को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा दिया गया था। तब से ही रेलवे सुरक्षा बल स्थापना दिवस का आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर किया जाता रहा है। 22 मई 2006 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भव्य परेड व समारोह में रेलवे सुरक्षा बल को ध्वज प्रदान किया।
 समारोह में महानिरीक्षक अतुल श्रीवास्तव को राष्ट्रपति पुलिस पदक एवं दो सहायक सुरक्षा आयुक्त व 13 अधीनस्थ अधिकारियों व जवानों को विशिष्ट सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया जा रहा है। इनके अतिरिक्त 2 जवानों को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक एवं 4 जवानों को उत्तम जीवन रक्षक पदक एवं एक जवान को जीवन रक्षा पदक से अलंकृत किया जाएगा।
प्रथम बार जगजीवन राम रेलवे सुरक्षा बल, अकादमी लखनऊ के प्रांगण में  अखिल भारतीय स्तर पर रे.सु.ब. स्थापना दिवस परेड-2022 का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें रेलवे सुरक्षा बल महानिदेशालय के उच्चाधिकारी गण, सभी  क्षेत्रीय रेलों व उत्पादन इकाईयों के महानिरीक्षक व उपमहानिरीक्षक गण एवं बल के अधिकारी व जवान भाग ले रहें हैं। परेड का मुख्य आकर्षण रेलवे सुरक्षा बल कमाण्डो प्लाटून व महिला प्लाटून रहेगी।

उत्तरप्रदेश में 16,500 मदरसे हैं , अब होंगे आधे से ज्यादा बंद , योगी सरकार का फरमान , होने जा रहा है सर्वेक्षण

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कुछ आतंकी वारदाताओं का कनेक्शन भी मदरसों से जुड़ चुका है। आरोप लगते हैं कि मदरसों में मजहबी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कट्टरता सिखाई जाती है। इन सब के बीच सरकार ने पूरे प्रदेश में चल रहे मदरसों का रिकॉर्ड बनाना शुरू किया है। जांच में अगर कोई मदरसा गलत मिलता है तो उसे बंद कर दिया जाएगा और बाकी मदरसों पर भी सरकार की निगरानी बढ़ जाएगी।

लखनऊ – उत्तर प्रदेश सरकार इस वक्त प्रदेशभर के निजी मदरसों का सर्वेक्षण करा रही है। इस सर्वेक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। विपक्षी दल इस सर्वेक्षण को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे हैं। यहां तक कि मदरसों पर बुलडोजर चलने का भी डर दिखाया जा रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि ये सर्वेक्षण मदरसों को मुख्यधारा में लाने के लिए किया जा रहा है।
आखिर ये सर्वेक्षण कब से कब तक होना है? सर्वेक्षण कैसे होना है? सर्वेक्षण में कितने मदसरों की जांच होगी? सर्वेक्षण के दौरान कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? सर्वेक्षण के बाद क्या मदरसों को बंद भी किया जा सकता है? आइए जानते हैं ऐसे ही दस सवालों के जवाब…
1. कितने मदरसों की हो रही जांच?
यूपी में कुल 16,500 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। इनमें 558 अनुदानित और 7,442 आधुनिक मदरसे हैं। इन मदरसों में 19 लाख से ज्यादा बच्चे हैं। मदरसों के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह बताते हैं कि अनुदानित के साथ-साथ गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की भी जांच चल रही है। इसके लिए सभी जिलों में अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।

2. कब तक पूरा होगा सर्वेक्षण, कब तैयार होगी रिपोर्ट?

प्रदेश सरकार ने 15 अक्तूबर तक सभी मदरसों का सर्वे पूरा करने का आदेश दिया है। इसके बाद सर्वे टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। सर्वे टीम अपने यहां जिलाधिकारी को रिपोर्ट देगी, जिसे 25 अक्तूबर तक शासन को सौंपा जाना है।

3. सर्वे में क्या-क्या सवाल पूछ रहे?
गैर मान्यता प्राप्त मदरसे का नाम?
गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन करने वाली संस्था कौन है?
मदरसे की स्थापना की तारीख क्या है?
उसका स्टेटस यानी निजी घर में चल रहा है या किराए के
मदरसे में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा कैसी है?
भवन, पानी, फर्नीचर, बिजली, शौचालय के क्या इंतजाम हैं?
छात्र-छात्राओं की कुल संख्या, शिक्षकों की संख्या कितनी है?
वहां पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम क्या है?
मदरसे की आय का स्रोत क्या है?
अगर छात्र अन्य जगह भी नामांकित हैं, तो उसकी जानकारी दी जा रही है
अगर सरकारी समूह या संस्था से मदरसों की संबद्धता है, तो उसका विवरण।

4. जांच में किस चीज का ध्यान रखा जा रहा है?
सर्वे के दौरान टीम मदरसे के आर्थिक दस्तावेजों पर खास ध्यान दे रही है। इस सर्वे के जरिए पता किया जा रहा है कि मदरसों को संचालित करने के लिए फंडिंग कहां-कहां से होती है? कहीं कोई गलत तरीके से तो पैसे नहीं आ रहे? दुश्मन देश या विदेशी फंडिंग तो नहीं मिल रही? अगर हां, तो इसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है? ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब इस सर्वे के जरिए तलाशने की कोशिश हो रही है।

5. क्या खुद से जवाब दे सकते हैं मदरसा संचालक?
हां, सरकार ने एक प्रारूप बनाया है। इसमें 11 बिंदुओं में सवाल पूछे गए हैं। इसे भरकर मदरसा संचालक खुद जिलाधिकारी को सौंप सकता है। संचालकों के जवाब के आधार पर बाद में सरकार की टीम उसका भौतिक सत्यापन करेगी। इसमें मालूम किया जाएगा कि जो जानकारियां मदरसा संचालकों ने दी हैं, वो सही हैं या नहीं?

6. सर्वे के बाद क्या बंद किए जा सकते हैं मदरसे?

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी का बयान का कहना है कि ये एक मौका है जिसमें मदरसा संचालक पूरी सूचनाएं दें। यदि वे शर्तें पूरी करेंगे तो उन्हें सरकार की तरफ से मान्यता दी जाएगी। अगर कुछ भी गड़बड़ मिलता है तो जरूर संवैधानिक कार्रवाई होगी।
7. क्यों हो रहा मदरसों का सर्वे?
दरअसल बार-बार मदरसों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कुछ आतंकी वारदाताओं का कनेक्शन भी मदरसों से जुड़ चुका है। आरोप लगते हैं कि मदरसों में मजहबी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कट्टरता सिखाई जाती है। इन सब के बीच सरकार ने पूरे प्रदेश में चल रहे मदरसों का रिकॉर्ड बनाना शुरू किया है। जांच में अगर कोई मदरसा गलत मिलता है तो उसे बंद कर दिया जाएगा और बाकी मदरसों पर भी सरकार की निगरानी बढ़ जाएगी।

8. बाल आयोग क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी का कहना है कि मदरसों में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का तो हाल काफी बुरा है। कुछ अनुदानित मदरसों की भी स्थिति सही नहीं है। डॉ. सुचिता कहती हैं कि उन्होंने कई जिलों के मदरसों का औचक निरीक्षण किया। सरकारी मदरसों में अध्यापकों का शैक्षिक स्तर निम्न है। दसवीं पास शिक्षक दसवीं को और इंटर पास इंटरमीडिएट को पढ़ा रहा है। आधुनिकीरण मदरसों में तनख्वाह विषय विशेषज्ञ की लेते हैं पर पढ़ाते केवल दीनी तालीम (धार्मिक) हैं। गणित पढ़ाने वाले अध्यापक मुझे सात का पहाड़ा तक नहीं सुना पाए। लखनऊ के गोसाईगंज स्थित सुफ्फामदीनतुल उलमा मदरसे में बच्चे को बेड़ियों में रखने का मामला सामने आया ही था। इस पर हमने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पत्र भी लिखा। इन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सर्वे और सही नीतियों का बनना बेहद जरूरी है।

9. विपक्ष का क्या कहना है?

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेता मदरसों के सर्वे पर सवाल उठा चुके हैं। सभी यही आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार इस्लामिक शिक्षा को बंद करवाना चाहती है। सर्वे करवाकर मदरसों पर सरकार बुलडोजर चलवा सकती है।

10. सरकार का क्या कहना है?

विपक्ष के आरोपों पर प्रदेश के मंत्री धर्मपाल सिंह का कहना है कि हम मुस्लिम बच्चों के विरोधी नहीं हैं। सरकार की मंशा यह कतई नहीं है कि ये बच्चे अरबी, फारसी, उर्दू न पढ़ें लेकिन यह जरूरी है कि उनके साथ ऐसे विषय भी पढ़ें जिनमें वे अपना करिअर बना सकें। यही कारण है कि सरकार मदरसों की शिक्षा पद्धति का ढांचा पूरी तरह से बदलने जा रही है। तैयारी है कि मदरसे में दीनी तालीम का बस एक ही शिक्षक रहे। बाकी सभी शिक्षक बच्चों को अन्य महत्वपूर्ण विषयों की शिक्षा दें।

तेज बारिश में पोती जनाई के साथ जैपनिस खाने का स्वाद लेने निकली आशा भोंसले

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मुम्बई। सदाबहार आवाज की मल्लिका आशा भोंसले अपनी लाडली पोती जनाई भोंसले के साथ वक़्त बिताने का कोई भी मौका हाथ से जाने नही देती। जनाई भोंसले की हर बात पर दादी आशा भोंसले सौ-बार कुर्बान हैं। लाडली पोती जनाई अगर एक फरमाइश करे तो आशा ताई सबसे पहले उसे पूरा करने की कोशिश करती हैं और जनाई भी अपनी दादी पर जान छिड़कती है और यही वजह है कि दादी आशा भोंसले को अक्सर जनाई उनके पसंदीदा जैपनिस होटल में डिनर के लिए ले जाती हैं।
हाल ही में तेज बारिश में भी इन दोनों को मुंबई के बांद्रा में एक जैपनिस होटल में डिनर करते हुए देखा गया। जहाँ दादी आशा ताई का हाथ थामे उनकी ढाल बनकर हमेशा उनके साये की तरह पोती जनाई और आशा ताई मीडिया के कैमरों पर अपनी मुस्कुराहट बिखेर रहे थे और नमश्कार बोलकर मीडिया का अभिनंदन भी किया। जनाई जानती हैं कि उनकी दादी को अलग -अलग तरह के व्यंजन पकाना और खाना बेहद पसंद है खासकर आशा ताई जैपनिस खाना काफी पसंद करती हैं तो ऐसे में दादी के साथ डिनर डेट पर पोती जनाई का साथ मे निकलना तो सहज होगा ही।
आपको बता दें कि दोनों एक दूसरे के साथ काफी वक्त बिताती हैं और दोनों को खाना बनाने का काफी शौक भी है। आशा ताई, रेस्तरां की एक सफल श्रृंखला चलाने के बावजूद, दावा करती है कि उनके व्यंजनों को दुनिया भर में पसंद किया जाता है, पर उनको अपनी बहन लता मंगेशकर के हाथों का बना हुआ मटन धनिया सबसे लज़ीज़ लगता है।
वैसे डाइट नियत्रंण करने की बात हो तो आशा भोसले सुबह हल्का नाश्ता करने की सलाह देती हैं। और दोपहर के खाने में दो तले हुए अंडे चपाती और सब्जियों के साथ उचित भोजन ही उनकी सिफारिश है। हालांकि कभी-कभी अपने स्वाद की कलियों को छोड़कर वो बांद्रा के मिज़ू रेस्टोरेंट में पोती जनाई भोसले के साथ रात के खाने के लिए जाती हैं अपनी पसंदीदा जापानी व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए।

गोरखपुर : मुठभेड़ में गौ-तस्कर के पैर में लगी गोली, गिरफ्तार

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शातिर गौ तस्कर और हिस्ट्रीशीटर है जुल्फिकार
– गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया में जुल्फिकार पर दर्ज है 14 केस
गोरखपुर, 18 सितम्बर (हि.स.)। शनिवार की देर रात पशु तस्करों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में बदमाश जुल्फिकार के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। जबकि उसके दो अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए।
जुल्फिकार, कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान का रहने वाला है। इलाज के लिए इसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फरार हुए बदमाशों की तलाश में दबिश जारी है। पकड़ा गया बदमाश जुल्फीकार शातिर गौ तस्कर और हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस के मुताबिक उस पर गोरखपुर के अलावा कुशीनगर और देवरिया में कुल 14 केस दर्ज है।
शनिवार की देर रात में पुलिस को शहर से पशु तस्करों द्वारा शहर से कुछ जानवरों की चोरी की सूचना मिली। सूचना के मुताबिक वे चिलुआताल इलाके से सोनौली रोड की तरफ जा रहे थे। फिर, चिलुआताल पुलिस और स्वाट टीम ने मोहरीपुर तिराहे पर चेकिंग शुरू की। इसी दौरान एक बाईक पर सवार तीन संदिग्ध पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिस ने इनका पीछा किया। थोड़ी दूर भागने के बाद उनमें से एक बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इधर, खुद के बचाव में पुलिस ने भी फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एक बदमाश के पैर में गोली लग गई और उसके दो साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
पुलिस ने घायल बदमाश को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया। उसके पास से तमंचा, कारतूस, खोखा और एक बाइक बरामद हुई। फरार बदमाशों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। पुलिस का दावा है कि जल्दी ही फरार बदमाशों को भी पकड़ लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में यूक्रेन में संघर्ष को जल्द समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है

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New Delhi – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में यूक्रेन में संघर्ष को जल्द समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’’ प्रधानमंत्री ने वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा संकट के समाधान के लिए मार्ग तलाशने का भी आह्वान किया। समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर एक द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने यूक्रेन में अस्थिरता को जल्द से जल्द समाप्त करने का आह्वान करते हुए ‘‘लोकतंत्र, संवाद और कूटनीति’’ के महत्व को रेखांकित किया।
मोदी ने कहा, ‘‘आज दुनिया, खासकर विकासशील देशों के सामने सबसे बड़ी चिंता, खाद्य सुरक्षा, ईंधन सुरक्षा, उर्वरक की है। हमें इन समस्याओं के उपाय खोजने चाहिए और आपको भी इस पर विचार करना होगा। हमें इन मुद्दों पर बात करने का मौका मिलेगा।’’ फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि आज का युग युद्ध का नहीं है। हमने इस मुद्दे पर आपके साथ कई बार फोन पर चर्चा की है कि लोकतंत्र, कूटनीति और संवाद पूरी दुनिया को छूते हैं।
हमें आज बात करने का अवसर मिलेगा कि हम आने वाले दिनों में किस तरह शांति के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।’’ विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूदा संघर्ष के संदर्भ में अस्थिरता को जल्द समाप्त करने और बातचीत तथा कूटनीति की आवश्यकता के लिए अपने आह्वान को दोहराया। पुतिन ने मोदी से कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष पर भारत की चिंताओं से अवगत हैं और रूस इसे जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। पुतिन ने अपनी शुरुआती टिप्पणियों में कहा, ‘‘मैं यूक्रेन में संघर्ष पर आपकी स्थिति के बारे में जानता हूं। मैं आपकी चिंताओं के बारे में समझता हूं।
मुझे पता है कि आप इन चिंताओं को साझा करते हैं और हम सभी जल्द से जल्द इन सभी का अंत चाहते हैं।’’ रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन ने वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया है और वह ‘‘सैन्य रूप से युद्ध के मैदान पर अपने उद्देश्यों’’ को प्राप्त करना चाहता है। पुतिन ने मोदी से कहा, ‘‘हम आपको वहां होने वाली हर चीज से अवगत कराएंगे।’’ बैठक के बाद मोदी ने बातचीत को ‘शानदार’ बताया। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रपति पुतिन के साथ शानदार बैठक हुई। हमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने का अवसर मिला। हमने अन्य द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।’’
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रपति पुतिन के साथ शानदार मुलाकात हुई। हमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने का अवसर मिला। हमने अन्य द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर गति की सराहना की, जिसमें विभिन्न स्तरों पर संपर्क शामिल हैं। साथ ही कहा कि उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। मंत्रालय ने कहा, ‘‘वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति से उत्पन्न चुनौतियों के संदर्भ में वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई।’’
शुरुआती टिप्पणियों में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच लगातार अच्छे संबंध बने हुए हैं और दोनों पक्ष प्रमुख मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हम लगातार तालमेल बनाए रखें।’’ पुतिन ने द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी का भी संदर्भ दिया। पुतिन ने कहा, ‘‘विशेष रूप से आपूर्ति के कारण व्यापार बढ़ रहा है, जैसा कि आपने भारतीय बाजार में रूसी उर्वरकों की अतिरिक्त आपूर्ति के लिए कहा था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रूस से भारत में उर्वरकों की आपूर्ति में आठ गुणा से अधिक की वृद्धि हुई है।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह संघर्ष के शुरुआती चरण में यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों से भारतीय छात्रों को बचाने में मदद करने के लिए रूस और यूक्रेन के आभारी हैं। मोदी ने कहा, ‘‘मैं यूक्रेन और आपको धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि इस संकट के शुरुआती दिनों में, हमारे हजारों छात्र यूक्रेन में फंस गए थे। हम आपके और यूक्रेन की मदद से अपने छात्रों को यूक्रेन से सुरक्षित निकालने में कामयाब रहे। मैं दोनों देशों का शुक्रगुजार हूं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध कई गुणा मजबूत हुए हैं और नयी दिल्ली मास्को के साथ अपने संबंधों को महत्व देती है। मोदी ने कहा, ‘‘भारत और रूस के बीच संबंध कई गुणा बढ़ गए हैं। हम रिश्ते को महत्व देते हैं क्योंकि हम ऐसे दोस्त हैं जो कई दशकों से साथ रहे हैं। दुनिया जानती है कि भारत और रूस के किस तरह के संबंध हैं। दुनिया जानती है कि यह एक अटूट दोस्ती है।’’ पुतिन ने पिछले साल दिसंबर में भारत यात्रा की ‘यादों’ के बारे में भी बात की और मोदी को रूस की यात्रा के लिए आमंत्रित किया।
पुतिन ने मोदी को जन्मदिन की बधाई भी दी। मोदी का शनिवार को जन्मदिन है। पुतिन ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि कल मेरे प्यारे दोस्त, आप अपना जन्मदिन मनाने वाले हैं। रूसी परंपरा के तहत हम कभी भी अग्रिम बधाई नहीं देते हैं। इसलिए मैं अभी ऐसा नहीं कर सकता…हम मित्र राष्ट्र भारत को शुभकामनाएं देते हैं और हम आपके नेतृत्व में भारत की समृद्धि की कामना करते हैं।’’ एक ट्वीट में, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने वार्ता को ‘सार्थक’ बताया। पीएमओ ने ट्वीट किया, ‘‘दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से व्यापक विषयों पर सार्थक चर्चा की।

शिल्पशास्त्र के आविष्कारक और सर्वश्रेठ ज्ञाता माने जाते हैं भगवान विश्वकर्मा

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विश्वकर्मा पूजा एक ऐसा त्योहार है जहां शिल्पकार, कारीगर, श्रमिक भगवान विश्वकर्मा का त्योहार मनाते हैं। कहा जाता है कि हिंदू भगवान ब्रह्मा के पुत्र विश्वकर्मा ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया था। विश्वकर्मा को देवताओं के महलों का वास्तुकार भी कहा जाता है। इसलिए भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। विश्वकर्मा दो शब्दों से विश्व (संसार या ब्रह्मांड) और कर्म (निर्माता) से मिलकर बना है। इसलिए विश्वकर्मा शब्द का अर्थ है। दुनिया का निर्माता यानि की दुनिया का निर्माण करने वाला। 
विश्वकर्मा शिल्पशास्त्र के आविष्कारक और सर्वश्रेठ ज्ञाता माने जाते हैं। जिन्होने विश्व के प्राचीनतम तकनीकी ग्रंथों की रचना की थी। इन ग्रंथों में न केवल भवन वास्तु विद्या, रथ आदि वाहनों के निर्माण बल्कि विभिन्न रत्नों के प्रभाव व उपयोग आदि का भी विवरण है। माना जाता है कि उन्होनें ही देवताओं के विमानों की रचना की थी। भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति ऋग्वेद में हुई है। जिसमें उन्हें ब्रह्मांड (पृथ्वी और स्वर्ग) के निर्माता के रूप में वर्णित किया गया है। भगवान विष्णु और शिव लिंगम की नाभि से उत्पन्न भगवान ब्रह्मा की अवधारणाएं विश्वकर्मण सूक्त पर आधारित हैं।
धर्मग्रंथों में विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी का वंशज माना गया है। ब्रह्माजी के पुत्र धर्म तथा धर्म के पुत्र वास्तुदेव थे। जिन्हें शिल्प शास्त्र का आदि पुरुष माना जाता है। इन्हीं वास्तुदेव की अंगिरसी नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ। अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए विश्वकर्मा भी वास्तुकला के महान आचार्य बने। मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ इनके पुत्र हैं। इन पांचों पुत्रों को वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में विशेषज्ञ माना जाता है।
विश्वकर्मा प्रकाश को वास्तु तंत्र का अपूर्व ग्रंथ माना जाता है। इसमें अनुपम वास्तु विद्या को गणितीय सूत्रों के आधार पर प्रमाणित किया गया है। ऐसा माना जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाए भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वाकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होने ही किया था।
पौराणिक साक्ष्यों के मुताबिक स्वर्गलोक की इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, असुरराज रावण की स्वर्ण नगरी लंका, भगवान श्रीकृष्ण की समुद्र नगरी द्वारिका और पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर के निर्माण का श्रेय भी विश्वकर्मा को ही जाता है। पौराणिक कथाओं में इन उत्कृष्ट नगरियों के निर्माण के रोचक विवरण मिलते हैं। उड़ीसा का विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर तो विश्वकर्मा के शिल्प कौशल का अप्रतिम उदाहरण माना जाता है। विष्णु पुराण में उल्लेख है कि जगन्नाथ मंदिर की अनुपम शिल्प रचना से खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हे शिल्पावतार के रूप में सम्मानित किया था।
माना जाता है कि विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था। इसके पीछे कहानी है कि शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करने के लिए भगवान विश्वकर्मा को कहा तो विश्वकर्मा ने सोने का महल  बना दिया। इस महल के पूजन के दौरान भगवान शिव ने राजा रावण को आंमत्रित किया। रावण महल को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया और जब भगवान शिव ने उससे दक्षिणा में कुछ देने को कहा तथा उसने महल ही मांग लिया। भगवान शिव ने उसे महल दे दिया और वापस पर्वतों पर चले गए।
भगवान विश्वकर्मा ने भव्य और सुरक्षित महलों के साथ देवताओं के उड़ने वाले रथों का निर्माण भी किया था। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने वज्र का निर्माण किया था। जो भगवान इंद्र का हथियार है। वज्र को ऋषि दधीचि और अज्ञेयस्त्र की हड्डियों से बनाया गया है। भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र उनकी शक्तिशाली रचनाओं में से एक था।
विश्वकर्मा वैदिक देवता के रूप में सर्वमान्य हैं। इनको गृहस्थ आश्रम के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माता और प्रवर्तक भी कहा गया है। अपने विशिष्ट ज्ञान-विज्ञान के कारण देव शिल्पी विश्वकर्मा मानव समुदाय ही नहीं वरन देवगणों द्वारा भी पूजित हैं। देवता, नर, असुर, यक्ष और गंधर्व सभी में उनके प्रति सम्मान का भाव है। इनकी गणना सर्वाधिक महत्वपूर्ण देवों में होती है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा के पूजन- अर्चन किये बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण विभिन्न कार्यो में प्रयुक्त होने वाले औजारों, कल-कारखानों और विभिन्न उद्योगों में लगी मशीनों का पूजन विश्वकर्मा जयंती पर किया जाता है।
इसी प्रकार विश्व कर्मा की एक कहानी और है कि महाभारत में पांडव जहां रहते थे उस स्थान को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण भी विश्ववकर्मा ने किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वणकर्मा ने ही किया था। सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेता युग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलयुग के हस्तिनापुर आदि के रचयिता विश्वकर्मा जी की पूजा अत्यन्त शुभकारी है। सृष्टि के प्रथम सूत्रधार, शिल्पकार और विश्व के पहले तकनीकी ग्रन्थ के रचयिता भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं की रक्षा के लिये अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था।
विष्णु को चक्र, शिव को त्रिशूल, इंद्र को वज्र, हनुमान को गदा और कुबेर को पुष्पक विमान विश्वकर्मा ने ही प्रदान किये थे। सीता स्वयंवर में जिस धनुष को श्रीराम ने तोड़ा था वह भी विश्वकर्मा के हाथों बना था। जिस रथ पर निर्भर रह कर श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन संसार को भस्म करने की शक्ति रखते थे उसके निर्माता विश्वकर्मा ही थे। पार्वती के विवाह के लिए जो मण्डप और वेदी बनाई गई थी वह भी विश्वकर्मा ने ही तैयार की थी।
विश्वकर्मा के यथाविधि पूजन और उनके बताये वास्तुशास्त्र के नियमों का अनुपालन कर बनवाये गये मकान और दुकान शुभ फल देने वाले माने जाते हैं। इनमें कोई वास्तु दोष नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसे भवनों में रहने वाला सुखी और सम्पन्न रहता है और ऐसी दुकानों में कारोबार फलता-फूलता है। विश्वकर्मा पूजन भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक दिन है। हर वर्ष 17 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती मनायी जाती है। यह कन्या संक्रांति पर पड़ता है। यह वह दिन है जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है। इस दिन का औद्योगिक जगत और भारतीय कलाकारों, मजदूरो, इंजीनियर्स आदि के लिए खास महत्व है। विश्वकर्मा जयन्ती भारत के जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, हरयाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में मनायी जाती है। नेपाल में भी विश्वकर्मा पूजा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
औद्योगिक श्रमिकों द्धारा इस दिन बेहतर भविष्य, सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और अपने-अपने क्षेत्र में सफलता के लिए प्रार्थना की जाती हैं। विश्वकर्मा जयन्ती के दिन देश के कई हिस्सों में काम बंद रखा जाता है और खूब पंतगबाजी की जाती है। विभिन्न प्रदेशों की सरकार विश्वकर्मा जयन्ती पर अपने कर्मचारियों को सावेतनिक अवकाश प्रदान करती है।
यह त्योहार मुख्य रूप से दुकानों, कारखानों और उद्योगों द्वारा मनाया जाता है। इस अवसर पर, कारखानों और औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिक अपने औजारों की पूजा करते हैं और भगवान विश्वकर्मा से उनकी आजीविका सुरक्षित रखने के लिए प्रार्थना करते हैं। वे मशीनों के सुचारू संचालन के लिए प्रार्थना करते हैं और विश्वकर्मा पूजा के दिन अपने उपकरणों का उपयोग करने से परहेज करते हैं।

साभार – प्रभा साक्षी

Vishwakarma Jayanti 2022 – भगवान विश्वकर्मा की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

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विश्वकर्मा के जन्मदिवस के रूप में विश्वकर्मा पूजा की जाती है। ऋग्वेद के अनुसार विश्वकर्मा भगवान यांत्रिकी और वास्तुकला ज्ञाता माने जाते हैं। कुछ किंवदंती की मानें, उन्होंने भगवान कृष्ण के पवित्र शहर द्वारिका का निर्माण किया था। आज हम इस लेख में भगवान विश्वकर्मा की पूजा कब और कैसे की जाती है, इस संबंध में विस्तार से जानेंगे। साथ ही उनके कुछ रोचक विवरण का भी यहां उल्लेख किया गया है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

– इस वर्ष 17 सितंबर शनिवार को चंद्रमा वृषभ राशि में होगा। जबकि शुभ रोहिणी नक्षत्र दोपहर के 12:21 तक रहेगा।

– संक्रांति का 1 : 46 तक रहेगा और राहुकाल 17 सितंबर को 9 से 10 : 30 मिनट तक रहेगा।

– विश्वकर्मा पूजा के लिए शुभ मुहूर्त चौघड़िया प्रात:काल 7 : 38 से 9 : 11 तक होगा।

– विश्वकर्मा पूजा चौघड़िया दोपहर 12 : 15 से 1: 47 तक होगा और लाभ चौघड़िया दोपहर 1 : 47 से लेकर 3 : 20 तक होगा।

– ऊपरोक्त सभी समय और तिथि जानने के बाद आप घर में सुबह 7 : 38 से 9 बजे तक विश्वकर्मा की पूजा कर सकते हैं।

– जो लोग वाहनों का कारोबार करते हैं, उन्हें इस दिन 12 : 15 से 1 : 46 तक विश्वकर्मा पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त है।

– कल-कारखाने में भी विश्वकर्मा पूजा का समय दोपहर 12 से लेकर 1 : 46 तक काफी शुभ रहेगा।

पूजा का विधि-विधान

विश्वकर्मा पूजा के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि पूजा के दिन सुबह-सुबह पूजा करनी चाहिए। इसके लिए पूजा के दिन फैक्ट्री, वर्कशॉप, दुकान आदि के स्वामी को प्रात:काल स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके पूजा के शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा स्थल पर बैठ जाना चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा को अपने सामने रखें। इसके लिए बेहतर रहेगा कि जातक पूजा चौकी पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद अपने सामने पूजा की सभी सामग्री रखें। इसमें हल्दी अक्षत और रोली भी शामिल करें। इसके साथ ही भगवान विश्वकर्मा को अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि अर्पित करें और भगवान केसामने धूप-दीप जलाएं और इससे आरती करें। आपको भगवान के सामने वे सभी यंत्र या लौहे के सामान भी रखने के चाहिए जो आपके कामकाजी जीवन के लिए उपयोग में आते हैं। इसके बाद कलश को हल्दी और चावल के साथ रक्षासूत्र चढ़ाते हुए ‘ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम’, ‘ॐ अनन्तम नम:’, ‘पृथिव्यै नम:’ मंत्र का जप करें। मंत्र जाप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। अंत में विश्वकर्मा भगवन की आरती करें और पंडित को दान-दक्षिणा दें। इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि पूजा के समय आपका मन बिल्कुल साफ होना चाहिए। शुद्ध मन से की गई पूजा ही सफल होती है।

 

कहां मनाई जाती विश्वकर्मा जयंती

विश्वकर्मा पूजा के दिन सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है। इस दिन का औद्योगिक क्षेत्र, भारतीय कला, मजदूर, अभियंत्रिकी आदि का विशेष महत्व होता है। विश्वकर्मा जयंती को भारत के जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड जैसे कई राज्यों में मनाया जाता है। नेपाल में भी विश्वकर्मा पूजा को बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

ये हैं कुछ रोचक विवरण

पौराणिक कथाओं में विश्वकर्मा द्वारा कई उत्कृष्ट नगरियों के निर्माण के रोचक विवरण मिलते हैं जैसे स्वर्गलोक की इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, रावण की स्वर्ण नगरी लंका, भगवान श्रीकृष्ण की समुद्र नगरी द्वारिका। इन सब अद्भुत कीर्तियों के निर्माण का श्रेय विश्वकर्मा भगवान को ही जाता है। यही नहीं उन्होंने पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर का भी निर्माण किया है। पौराणिक कथाओं में इन मिलते हैं। इसके अलावा उड़ीसा का जगन्नाथ मंदिर भी विश्वकर्मा के कौशल का ही अप्रतिम उदाहरण है।

कैराना के जंगल में की जा रही थी गोकशी, पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गौ तस्कर को पकड़ा

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Kairana News: कैराना (Kairana) के जंगल में गोकशी की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा. जहां पर पुलिस की गौ तस्करों के साथ मुठभेड़ हो गई. जिसमें एक शातिर गौ तस्कर पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया. पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में गौमांस, अवैध हथियार और गोकशी के उपकरण बरामद किए हैं. इसी के साथ मौके से करीब आधा दर्जन आरोपी फरार हो गए. जिसके बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कैराना पुलिस को गांव इस्सोपुर खुरगान स्थित जंगल में गोकशी करने की सूचना मिली. सूचना पर कोतवाली प्रभारी अनिल कपरवा, एसएसआई राधेश्याम पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और गोकशी की घेराबंदी शुरू कर दी. जिसके बाद आरोपियों ने पुलिस पर फायर झोंक दिए. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक शातिर गौ तस्कर मोबीन पैर में गोली लगने से घायल हो गया. पुलिस ने मौके से करीब डेढ़ क्विंटल गौमांस बरामद कर डॉक्टरी परीक्षण कराने के बाद गौमांस को दबा दिया.
आरोपयों को जल्द किया जाएगा गिरफ्तार 
इसी के साथ मौके से गोकशी के उपकरण, अवशेष, एक अवैध तमंचा, 3 जिंदा कारतूस और एक 315 बोर का खोखा कारतूस बरामद किया गया. पुलिस ने घायल गौ तस्कर को कैराना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया. गौ तस्कर ने बताया कि वह पिछले दिनों लॉकडाउन के दौरान भी गोकशी करने के आरोप में जेल जा चुका हैं और काफी समय से गोकशी के कार्य को अंजाम दें रहा हैं. उसके चार-पांच साथी मौके से फरार हो गए हैं. कोतवाली प्रभारी अनिल कपरवान ने बताया कि आरोपी गोकश के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रहीं हैं. अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जायेगा. कोतवाली क्षेत्र में गोकशी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.