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अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर एक अक्टूबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (यूएनआईडीओपी) के अवसर पर चरिस्ता फाउंडेशन की ओर से 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कॉन्सीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में दोपहर 2.30 बजे से शाम 7.00 बजे तक बुजुर्गों की  देखभाल पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित और जाने-माने व्यक्ति मंच पर आएंगे और बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य और बुजुर्गों के लिए संबंधित मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करेंगे, जो हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि होंगे भारत के पूर्व राजदूत और प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ दीपक वोहरा, अन्य प्रख्यात अतिथियों में फाउंडर और चेयरमैन ट्रस्ट ग्रेडल पूर्व आईपीएस डॉ. विपिन बी चौधरी, भाजपा के प्रवक्ता और मेंबर ऑफ गवर्निंग काउसिंल विनित गोयनका अपना वक्तव्य देंगे। अन्य वक्ताओं में लाईफ कोच मनीषा शर्मा, रत्न ज्योति दत्ता- वरिष्ठ पत्रकार और चरिस्ता  फाउंडेशन के वरिष्ठ सलाहकार, डॉ आभा मयार्दा बनर्जी- भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित महिला प्रेरक, वक्ता, डॉ. केएम बहरूल इस्लाम- प्रोफेसर और चेयरपर्सन, सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस, आईआईएम काशीपुर,डॉ शिवानी खेतान -चर्चित कोच, डॉ अमन खेरा, को-फाउंडर और डायरेक्टर, केयर 4 पेरेंट्स, डॉ अंजलि गोगिया- फाउंडर पार्टनर, टॉक टू बिग इयर्स एंटरप्रेन्योर फॉर इम्पेथेटिक लिसनर, डॉ. पतांजलि देव नय्यर- पूर्व क्षेत्रीय सलाहकार डब्लू एच ओ.और लेडी सिंधम किरण सेठी भी अपना विचार प्रकट करेंगी। इस संगोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ नागरिकों के विषय को समाज के अन्य सभी प्रबुद्ध वर्गो से जोड़ना एवं इस विषय को केन्द्र में रखना है। यह संगोष्ठी सरकार, समाज, मीडिया, कॉरपोरेट्स, सामाजिक प्रभावितों और बुजुर्गों को एक मंच पर लाकर बुजुर्गों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के मुद्दे को सुर्खियों में लाने का एक प्रयास है।

विधानसभा में चर्चा – 25 सांसद जीते, गौ माता के लिए एक फूटी कौड़ी नही- विधायक संयम लोढा

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जयपुर/सिरोही | लम्पी बिमारी पर बहस के दौरान राजस्थान विधानसभा में विधायक संयम लोढा ने सभी गौ भक्तों का धन्यवाद दिया जिन्होंने इस गम्भीर बिमारी में गौ माता की सेवा की। लम्पी बिमारी को लेकर हुई चर्चा में विधायक संयम लोढा ने कहां कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने गौवंश का अनुदान बढाया। सरकार ने गौवंश का अनुदान 32 से बढाकर 40, 16 से बढाकर 20 रूपये किया। आंकडे सामने है, 5 साल भाजपा की सरकार रही है लेकिन गौवंश का अनुदान नही बढाया गया।भाजपा सरकार बनते ही 2014-15 में 1 हजार 475 हजार मैट्रीक टन गायो के मांस का निर्यात हुआ। 33 में से 32 जिलो में गौ माता कहर है। राजस्थान में कुछ विधायको ने इस बिमारी में अपने मद से रूपया दिया लेकिन राजस्थान की मुख्यमंत्री रही वसुंधरा राजे के नाम के आगे शून्य लगा हुआ है, 10 साल राज्य की मुख्यमंत्री रहने के बाद भी राजे ने विधायक कोष से एक रूपया भी गौ माताओं के ईलाज के लिए नही दिया है। यह बहुत शर्म की बात है।
विधायक लोढा ने कहां कि गायो के प्रति हम सबकी संवेदना कम हो रही है, गायो के प्रति प्रेम से दूर जा रहे है, कत्ल खाने दिन प्रतिदिन बढ रहे है। हजारो की तादाद में गाय लम्बी बिमारी से मर रही है। गुजरात में गायो की लाशों के ढेर लगे हुए है लेकिन देश के प्रधानमंत्री व देश की सरकार ने किसी भी राज्य में लम्पी बिमारी से जुझ रही है गायो के लिए कोई मदद नही की। लोढा ने कहां कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री कोष में लम्पी के लिए अलग खाता खोला और सदस्यों की सूची विधायक मद रियायत दी उसके बाद हमने लम्पी की बिमारी के लिए पैसे दिये। विधायक मद से कुछ विधायकों ने गौ माता के साथ खडे रहे लेकिन सांसद मद में एक भी सांसद ने पैसे नही दिया।
भारत सरकार सांसद स्थानीय विकास योजना में दवाईयां खरीदना अनुमत करे 
विधायक संयम लोढा ने विधानसभा में कहां कि भारत सरकार से विनती करना चाहता हूं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना में लम्पी से पीडित गौ माता की सेवा के लिए दवाईयां इंजेक्शन खरीदना अनुमत किया है उसी तरह भारत सरकार भी सांसद स्थानीय विकास योजना में लम्पी बिमारी से जुझ रही गौवंश के उपचार के लिए दवाईयां इंजेक्शन खरीदना अनुमत करे।
25 सांसद जीते, गौ माता के लिए एक फूटी कोडी नही- विधायक संयम लोढा ने कहां कि अनुमत नही होने के बाद भी जालोर सिरोही सांसद ने 25 लाख, भीलवाडा सांसद ने 10 लाख, अलवर सांसद ने 15 लाख, राजसमंद सांसद ने 16 लाख, अजमेर सांसद ने 14 लाख सहित 80 लाख की अनुशंसा में एक रूपया भी राजस्थान के पशुपालन विभाग को प्राप्त नही हुआ है। लोढा ने कहां कि चार दिन पहले उन्होंने टवीट् भी किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजस्थान के गौवंश पर कृपा करो, गौ माता की सेवा के लिए सांसद कोष को अनुमत करे। 25 सांसद जीताने के बाद भी गौ माता के लिए एक फूट कोडी नही देना बहुत शर्म का विषय है।उन्होंने कहां कि यह राजस्थान के लिए कलंकित, कांलिक कभी नही मिटेगी।
चीत्ता देखने गये है…
विधायक संयम लोढा से विधानसभा में एक सदस्य ने पूछा कि प्रतिपक्ष के नेता, उप नेता, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया सदन में नही दिख रहे है, कहां चले गये तो लोढा ने जवाब दिया कि चीता देखने गये है, यहां गौ मातायें मर रही है और नेता चीता देखने में लगे हुए है।
लोढा ने कहां कि लम्पी स्कीन डिजीज 3 साल से लगातार है लेकिन पहले मृत्यु दर बहुत कम थी। अगस्त 2022 में राजस्थान 29 जिलो से 125 गांवो से सेम्पल राजस्थान की रेफरल लैब में भेजे गये। लम्पी स्कीन डीएनए वायरस रोग है। सैम्पल के बाद यह पता चला कि लम्पी स्कीन का वैरिंयंट बदल गया है। नये वेरियंट से गौ माता पर कहर टूटा है, हमे हजारो गौ माताओं को खोना पडा। हम सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। पीसीआर टेस्ट की व्यवस्था हो, ताकि पूरे राजस्थान, पूरे भारत में इस तरह की परिस्थितियां बनती है तो जांच व टीकाकरण किया जा सके। पीसीआईसीडीए एक्ट में केन्द्र सरकार प्रावधान कर नियंत्रण ऐरिया घोषित करे ताकि उस पर काबू पाया जा सकता है। लोढा ने कहां कि गौ ऋषि दंतशरणानंद जी महाराज ने गौ संरक्षण का काम किया है, सिक्किम, बांगलादेश तक गौवंश जाता है, सीमा पर जाक दत्तशरणानंद जी महाराज ने गौशाला की स्थापना की। रघुनाथ सिंह राजपुरोहित पथमेडा पाली स्टेडियम में गायो की स्थिति पर पाली कलक्टर से बातचीत की तारबंदी कराकर, लाईट लगवायी, अनेक जिलो में रथ भेजे है, गौ संरक्षण का काम कर रहे है।
आइसोलेशन सेंटर में सभी व्यवस्था की जाए
लोढा ने पशुपालन मंत्री से आग्रह किया कि जिन गौशालाओं में आईसोलेशन सेंटर चल रहा है, वहां श्रमिको की मजदूरी, दवाईयां, इंजेक्शन, डॉक्टर, कम्पाउंडर की व्यवस्था करे और जहां आईसोलेशन नही चल रहा है वहां पंचायत के माध्यम से आईसोलेशन सेंटर खोले। पंचायत एसएफसी में खर्चा कर सकती है। चिकित्सालय मोबाईल यूनिट प्रत्येक तहसील स्तर पर चालू करे ताकि गौ माताओं का ईलाज कर सके। कमजोर गौ माताओं के लिए पशु आहार की व्यवस्था गौ शालाओं में की जाएगा। सरकार से आग्रह किया मृतक का गौवंश का सर्वे करावाया जाए, गायो की मौत जहां हुई है उन पशुपालकों को मुआवजा दिलावे।

Cow Economy – गोमूत्र व गोबर का होगा विभिन्न कार्यों में उपयोग

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आगर-मालवा. जिले के सुसनेर सालरिया में स्थित एशिया के सबसे बड़े गौ-अभयारण्य की बागडोर अब निजी हाथों में रहेगी। इसके लिए बकायदा राज्य सरकार ने राजस्थान के पथमेड़ा गौशाला ट्रस्ट से एमओयू करते हुए तमाम व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी उसे सौंप दी है। एनजीओ ने बागडोर भी संभाल ली है। इसकी पुष्टि आगर प्रवास पर आए गौसंवर्धन बोर्ड अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज ने की है।

एक रिपोर्ट के अनुसार अध्यक्ष ने समाचारपत्र पत्रिका से चर्चा में बताया कि विधिवत तरीके से राज्य सरकार ने राजस्थान के पथमेड़ा गौशाला ट्रस्ट को गौ-अभयारण्य की तमाम व्यवस्थागत जवाबदारी निर्धारित शर्तों के आधार पर सौंपी दी है। एनजीओ ने कामकाज आरंभ कर दिया गया है। प्रति गौवंश 50 रुपए के मान से सरकार द्वारा प्राथमिक रूप से एनजीओ को राशि दी जाएगी। अब तमाम व्यवस्था एनजीओ के माध्यम से ही संचालित होगी लेकिन नियंत्रण सरकार का रहेगा। यह अनुबंध कुछ वर्षों के लिए है। यदि शर्तों के अनुसार उचित कार्य हुआ तो आगे अनुबंध बढ़ाया जाएगा अन्यथा निरस्त करने के अधिकार सरकार के पास है। 1400 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फेले अभयारण्य की क्षमता 8 हजार गौवंश की है पर 3200 गौवंश निवासरत हैं।

प्राकृतिक संसाधनों को विकसित करना लक्ष्य
अध्यक्ष ने बताया अभयारण्य में अभी कोई जंगल नहीं है। इस वजह से गौवंश प्राकृतिक रूप से विचरण नहीं कर पा रहे है। यहां प्राकृतिक वातावरण की उपलब्धता बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें समय लगना स्वाभाविक है। जब जंगल विकसित हो जाएगा तो यहां बहुत सारी गायों का प्रवेश हो सकता है इसलिए जंगल लगाने का कार्य किया जा रहा है। पौधारोपण कार्य जारी है विशेष प्रजाति के पौधे रोपे जा रहे हैं। आने वाले समय में यहां गौवंश को प्राकृतिक वातावरण मिलेगा।

गोमूत्र व गोबर का होगा विभिन्न कार्यों में उपयोग

अध्यक्ष ने योजना बताते हुए कहा कि अभयारण्य से कई उत्पाद तैयार किए जाएंगे। बायो गैस, गोबर गैस सहित अन्य ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे जिनसे आय के अवसर उपलब्ध होंगे और राशि को यहीं लगाया जाएगा। क्षेत्र के किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा, औषधियां तैयार की जाएंगी। गाय का भोजन जंगल में और जंगल का भोजन गाय के पास होगा। इस प्राकृतिक समीकरण को आकार देने का कार्य करने की एक शुरुआत हो गई है।

गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर गौशालाओं के लिए करें आरक्षित
गाय करुणा, दया का प्रतीक है। गौशालाओं में गायों की अच्छे से सेवा करें। जिले की गौशालाएं अनुसंधान पर आत्मनिर्भर बनेंं यह बात मप्र गौ संवर्धन बोर्ड अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने मंगलवार को कलेक्टोरेट में जिले के गौशाला संचालकों की बैठक में कही। अध्यक्ष ने संचालकों की समस्या सुनते हुए समस्याओं का निराकरण एवं समाधान करने का आश्वासन दिया।
अध्यक्ष ने बताया गोचर एवं चरनोई भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर गोवंश के चारागाह के रूप में उपयोग करने के लिए समिति गठन का प्रस्ताव किया है। जिले में शासकीय गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाकर उन्हें गोशालाओं के गोवंशों के लिए चारागाह विकसित करने हेतु आरक्षित की जाए। लंपी के संबंध में सभी संचालकों को जल्द से जल्द गायों का टीकाकरण करवाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि बीमार गायों को अलग रखा जाकर उपचार किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाकर गोशालाओं के लिए आरक्षित करने हेतु पशु चिकित्सक डॉ. जीमल खान को नोडल बनाया है।

लंपी स्किन डिजीज – भाजपा का हल्ला बोल , पूनियां को धक्का मार पुलिस ने नीचे गिराया

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जयपुर, । लंपी स्किन डिजीज, बढ़ते अपराध समेत कई मुद्दों को लेकर भारतीय जनता पार्टी मंगलवार को सड़क पर उतर गई। भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन करते हुए विधानसभा की तरफ कूच किया। प्रदेश भाजपा मुख्यालय से प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में कार्यकर्ता और नेता पैदल ही विधानसभा की ओर रवाना हुए, लेकिन 22 गोदाम सर्किल से पहले पुलिस ने उन्हें रोक दिया। यहां सांसदों के साथ प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां व अन्य नेता धरने पर बैठ गए और पुलिस को गिरफ्तारियां दीं। इस दौरान उनकी पुलिस से तीखी झड़प भी हुई।
सहकार मार्ग पर कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बैरिकेडिंग भी तोड़ दी। इस बीच बैरिकेडिंग पर चढ़े बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां को पुलिसवालों ने धक्का मार दिया। जिससे वे नीचे गिर गए। कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इससे पहले सुबह 11 बजे सी-स्कीम स्थित बीजेपी ऑफिस से सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूनिया के नेतृत्व में भाजपा कार्यालय से विधानसभा घेराव के लिए कूच किया, लेकिन सहकार मार्ग पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। यहां पार्टी नेताओं की ओर से नेताओं व कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गिरफ्तारी दी। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते कार्यकर्ता सतीश पूनिया के रथ के साथ आगे बढ़ रहे थे। पहले पुलिस अधिकारियों की ओर से उनकी समझाइश की, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक पीछे धकेलने का प्रयास किया।
प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां के नेतृत्व में निकाले जाने वाले इस जुलूस में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, जयपुर संभाग और टोंक-सवाई माधोपुर से बीजेपी नेता, पार्टी के सभी 7 माेर्चा- बीजेपी किसान मोर्चा, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, एससी मोर्चा, एसटी मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। सांसद घनश्याम तिवाड़ी, रामचरण बोहरा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, पूर्व विधायक सुरेंद्र पारीक, मोहनलाल गुप्ता, अशोक परनामी समेत पार्टी के मंडलों का कार्यकर्ता और जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज से पार्षद भी मौजूद रहे।
विधानसभा कूच से पहले प्रदेश भाजपा मुख्यालय के बाहर एक बड़ी जनसभा हुई, जिसे पार्टी से जुड़े नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां सहित अन्य वक्ताओं ने मौजूदा गहलोत सरकार को गौ हत्यारी सरकार करार दिया। पूनिया ने यह तक कह दिया कि अभी श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं और जल्द ही प्रदेश की कांग्रेस सरकार का श्राद्ध हो जाएगा। पूनियां ने कहा कि राजस्थान में जिस प्रकार लंपी के बीच गहलोत सरकार की संवेदनहीनता देखने को मिली है, उससे आम जनता आक्रोशित हैं। हम विपक्ष के नाते सदन में और सड़क पर भी इस मामले को उठा रहे हैं। सरकार से मांग करते हैं कि इस बीमारी से जिस पशुपालक के गोवंश की मौत हुई है उसे 50000 का मुआवजा दें।
पूनियां ने कहा गहलोत सरकार केंद्र सरकार से इस बीमारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग करती है, लेकिन मुख्यमंत्री जनता को केवल गुमराह कर रहे हैं। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा में स्थानीय प्रदेश सरकारों ने इस रोग से बचाव के लिए बेहतरीन उपाय किए। राजस्थान की सरकार इसमें नाकाम रही, क्योंकि प्रदेश की सरकार की गौ माता के प्रति संवेदनाएं मर चुकी हैं, यह सरकार गौ हत्यारी सरकार है। भाजपा मुख्यालय से पैदल मार्च के रूप में रवाना हुए बीजेपी प्रदर्शनकारियों को 22 गोदाम सर्किल पर पुलिस ने रोक लिया। इस दौरान सतीश पूनिया और भाजपा नेताओं ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर विधानसभा की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस बल ने उन्हें वहीं रोक दिया। इसके बाद नेता यहां धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद भाजपा प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को गिरफ्तारियां दीं। पुलिस बल ने बसों में बिठाकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और तमाम नेताओं को हिरासत में लिया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान पूनियां की पुलिस से झड़प भी हुई। वे बेरिकेडिंग पर चढ़ गए। पूनियां कुछ देर तक बैरिकेडिंग पर ही रहे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ अरुण चतुर्वेदी को भी हल्की चोट आई, उन्हें उपचार के लिए एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में ले जाया गया। कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक मरा हुआ बछड़ा भी सड़क के बीच में रखकर प्रदर्शन किया। इस दौरान यह कार्यकर्ता कहते रहे कि पहले नगर निगम वाले इस मरे हुए बछड़े को यहां से लेकर जाएं उसके बाद ही वह यहां से रवाना होंगे।

लंपी बीमारी – धौलपुर नगर परिषद में एक महत्वपूर्ण बैठक

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धौलपुर, । प्रदेश के साथ साथ जिले में भी लंपी बीमारी से गोवंश को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से कवायद की जा रही है। इसी क्रम में धौलपुर नगर परिषद सभापति खुशबू सिंह ने मंगलवार को धौलपुर नगर परिषद में एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक के बाद में सभापति सिंह तीर्थराज मचकुंड सरोवर क्षेत्र में बनाए गए आइसोशेलश सेंटर का दौरा भी किया।
नगर परिषद में आयोजित बैठक में सभापति खुशबू सिंह ने लंपी बीमारी के संबंध में अब तक किए गए उपायों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन और सरकार की मंशा लंपी बीमारी से गौ वंश को बचाने की है। इसके लिए राज्य सरकार तथा प्रशासन के स्तर के साथ साथ नगर परिषद द्वारा भी कई उपाय किए गए हैं। सभी अधिकारी और कर्मचारी मिलकर गौ वंश को लंपी बीमारी से बचाने के लिए शासन और सरकार के प्रयासों में अपनी भागीदारी निभाएं। बैठक के बाद में सभापति खुशबू सिंह मचकुंड सरोवर क्षेत्र पंहुचीं तथा यहां पर आइसोलेशन सेंटर की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह ने बताया कि लंपी बीमारी से गौ वंश को बचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की कडी में मचकुंड सरोवर क्षेत्र में आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। इससे एक से दूसरे गौ वंश को बीमारी ना फैले। इस सेंटर पर बीमार गौ वंश को आइसोलेट करके उनके उपचार की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान नगर परिषद के बृजमोहन सिंघल तथा मोहन सिंह थनवार सहित अन्य अधिकारी तथा कार्मिक मौजूद रहे।

भाजपा विधायक की गाय भागी,डोटासरा ने ली चुटकी

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के सातवें चरण का दूसरा सत्र सोमवार से शुरू हुआ। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के कारण दो बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। वहीं विधानसभा के बाहर भी एक रोचक वाकया हुआ। भाजपा इस सत्र में सरकार को गायों में फैल रही लम्पी बीमारी पर घेरने की तैयारी में थी।

पुष्कर से भाजपा विधायक सुरेश रावत एक गाय लेकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन विधानसभा के बाहर से ही गाय रस्सी छुड़ाकर भाग गई। गाय के अचानक भागने से वहां मौजूद मीडियाकर्मी और गाड़ियों से गुजर रहे लोगों में घबराहट फैल गई। इस पर विधायक रावत ने कहा कि पुलिस और सरकार से नाराज होकर गाय भागी है। गाय की नाराजगी मेरे से नहीं है क्योंकि मैंने तो 10 लाख रुपए दिए हैं।
डोटासरा ने ली चुटकी
वहीं इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा भी भाजपा पर हमला करने से नहीं चूके। उन्होंने घटनाक्रम का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा: ‘अब तो गौ माता को भी भाजपा की “नौटंकी” समझ आ गई, आज राजस्थान विधानसभा के सामने भाजपा की झूठी गौभक्ति की पोल खुद गौ माता ने खोली।’

लंपी वायरस को लेकर घांची समाज की मुहिम, चंदा इकट्ठा कर गौ सेवा में जुटे

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सिरोही: गौवंश में लगातार फैल रही लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) को लेकर घांची समाज के 3 परगना द्वारा आगे आकर एक मुहिम चलाकर गायों को बचाने का कार्य किया जा रहा है. समाज के लोग पिछले कई दिनों से अहम भूमिका निभा कर गायों को बचाने में जुट गए हैं. घांची समाज के 3 परगना सिरोही, जावाल और रामसीन परगना के युवा समाज के लोगों से चंदा इकट्ठा कर तन मन धन से गायों की सेवा में जुटे हुए हैं.
घांची समाज द्वारा सिरोही (Sirohi) के सरकारी अर्बुदा गौशाला, आम्बेश्वर गौशाला, पीएफए में बीमार गायों को आयुर्वेदिक लड्डू खिलाया गया. साथ ही बाल गोपाल गौशाला में भी लड्डुओं का वितरण किया गया. वहीं समाज के लोगों द्वारा प्रत्येक गौशाला में दवाइयों का किट भी पहुंचाया जा रहा है. समाज के युवाओं ने बताया कि हम लोग गायों को तड़प-तड़प कर मरने नहीं देंगे. हम लोग पूरी तरह से गायों की सेवा में जुटे हुए हैं. सिरोही तहसील क्षेत्र के करीब 40 गांव में भी आयुर्वेदिक लड्डुओं का वितरण किया जा रहा है.
हमारा लक्ष्य है करीब एक लाख आयुर्वेदिक लड्डू बनाकर सभी गौशालाओं में वितरण करने का है ताकि गायों की बीमारी जल्द से जल्द समाप्त हो सके. पशुपालकों को दवाइयां और इंजेक्शन वितरित: वहीं इलाज के अलावा भी दवाइयां और इंजेक्शन समाज के द्वारा जरूरतमंद पशुपालकों को दिया जा रहा है ताकि गाय काल का ग्रास ना बन सके. वहीं सराहनीय महिम को लेकर माली समाज के समाज सेवी रघुनाथ माली और अन्य समाज के लोगों ने घांची के लोगों का माला पहनाकर स्वागत किया।

ईडी ने गौ तस्करी के मामले में दो आईपीएस अधिकारियों को तलब किया

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कोलकाता, 20 सितंबर । ईडी ने गौ तस्करी के मामले में दो आईपीएस अधिकारियों को तलब किया है। डीसी (दक्षिण) आकाश मघरिया को 26 सितंबर को तलब किया गया है। 28 सितंबर को ज्ञाननाथ सिंह को तलब किया गया है।
इससे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोयला तस्करी मामले में आठ आईपीएस अधिकारियों को तलब किया था। 15 अगस्त के बाद उन आठ आईपीएस अधिकारियों को दिल्ली तलब किया गया। ईडी सूत्रों के मुताबिक जिन आठ आईपीएस अधिकारियों को समन किया गया है उनमें ज्ञानवंत सिंह, सुकेश जैन, राजीव मिश्रा, कोटेश्वर राव, श्याम सिंह, तथागत बसु, सेल्वा मुरुगन, भास्कर मुखर्जी हैं। इससे पहले इस मामले में सात आईपीएस अधिकारियों को तलब किया गया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने ज्ञानवंत सिंह और राजीव मिश्रा से पूछताछ की। ईडी उनसे फिर पूछताछ करना चाहती है।

म्यूजिक एलबम ‘पलकें’ में नायाब अली खान के संगीत का जादू

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मुम्बई। सौ से अधिक म्यूजिक एलबम, सिंगल और फिल्मों में अपनी संगीत का जादू बिखेरने के बाद म्यूजिक डायरेक्टर नायाब अली खान अपने नए सिंगल ‘पलकें’ से फिर एक नई संगीयमयी ऊर्जा श्रोताओं तक लाने वाले हैं। दिल्ली के संगीत घराने के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर गुलाम अली खान के सुपुत्र नायाब अली बचपन से ही संगीत के प्रति समर्पित रहे हैं। गुलाम अली खान के सानिध्य में कई गायकों और संगीतकारों ने गायकी और संगीत सीखी है।


म्यूजिक एलबम ‘पलकें’ में नायाब के संगीत का जादू तो दिखेगा ही साथ ही एलबम का निर्देशन इन्होंने ही किया है। एलबम में गाने के रोमांचक कहानी को बड़ी खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। ‘पलकें’ म्यूजिक एलबम के साथ नायाब अली खान निर्देशन में अपना डेब्यू कर रहे हैं। इस एल्बम के निर्माता सरगम और लिरिक्स राइटर नवीन नीर हैं। जिसे ज़ी म्यूजिक रिलीज कर रही है और इसमें साहिल अख्तर खान और श्वेता दुबे ने अभिनय किया है।
नायाब अली ने कई मशहूर संगीतकारों और गायकों के साथ काम किया है। फिल्म ‘देख भाई देख’ में मशहूर गायक राहत अली खान के गाये गीत को नायाब अली ने संगीत से सजाया है जो काफी कर्णप्रिय है। एलबम ‘हसरतें’ और सोलो गीत ‘जिक्र’ के साथ साथ गुलाम अली खान के गाये कई गीतों को नायाब अली ने ही संगीतबद्ध किया है जो जीमा अवार्ड में नॉमिनेट हुआ।
नायाब अली निर्माता निर्देशक एन चंद्र को अपना गॉडफादर मानते हैं जिनके निर्देशन में बनी सुपरहिट फिल्म ‘स्टाइल’ से इन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। उसी फिल्म के बहुचर्चित गाने ‘स्टाइल में रहने का’ और ‘एक्सक्यूज़ मी’ गाने का म्यूजिक इन्होंने ही दिया है। इस फिल्म के गाने आज भी युवा वर्ग की जुबान पर है। फिल्म ‘पीके लेले’ का मार्मिक गीत ‘जिंदा हूँ मैं’ को भी इन्होंने ही संगीतबद्ध किया है। इसके अलावा फिल्म ‘प्राण जाए पर शान न जाए’ जैसे कई फिल्मों और एलबम में अनगिनत गीतों को स्वरबद्ध करने का श्रेय इन्हें जाता है। कुणाल गांजावाला की एल्बम ‘तेरे बिना’ में इन्ही का दिया संगीत है। नायाब अली खान कुमार शानू की कमबैक एलबम ‘फ्यूज़न’ के म्यूजिक डायरेक्टर हैं जो टी सीरीज म्यूजिक कंपनी ने लांच किया। यूनिवर्सल म्यूजिक कंपनी की कुणाल गांजावाला और कैलाश खेर द्वारा गाया गया गीत का संगीत भी इनका का है। सोनू निगम, कविता कृष्णमूर्ति, अलका याग्निक, जावेद अली, सुखविंदर सिंह जैसे कई प्रसिद्ध गायकों ने इनके संगीत में अपनी आवाज दी है। वह सुखविंदर सिंह के साथ मिलकर भी कई म्यूजिक डायरेक्ट कर रहे हैं। मोहल्ला अस्सी और पिंजर जैसी बेहतरीन फिल्मों के निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म ‘जेड प्लस’ का म्यूजिक डायरेक्शन सुखविंदर सिंह और नायाब ने दिया है जिसके लिरिक्स मनोज मुन्तशिर ने लिखा है। सुखविंदर सिंह व नायाब साथ में कई प्रोजेक्ट कर रहे हैं और फिल्मों में म्यूजिक डायरेक्शन का काम कर रहे हैं जिसमें जल्द ही निर्देशक एन चन्द्रा की फिल्म ‘तेज़ाब 2’, अनिल चौधरी की ‘फाइटर 2’, रजत मुखर्जी की ‘उम्मीद’ और राजकुमार राव की फिल्म ‘रेवपार्टी’ के प्रमोशनल गाने का संगीत है और नवीन नीर द्वारा लिखित गीत ‘तेरे बाद मौसम’ है।
नायाब अली की एलबम ‘नैनों से नैना’ में इनका एक अलग अंदाज का संगीत और इनका गायन सुनने को मिलेगा। जिसमें सूफी, क्लासिकल, वेस्टर्न के फ्यूज़न का समावेश मिलेगा। नायाब अली ने हर तरह के म्यूजिक डायरेक्ट किये है। हिंदी, उर्दू के अलावा राजस्थानी, तमिल, तेलगु, पंजाबी जैसे कई भाषाओं का संगीत भी इन्होंने दिया है। लगभग हर विधा में इन्होंने म्यूजिक कंपोज किया है। रविन्द्र जैन के लिखे गानों का म्यूजिक इन्होंने दिया है जिसके गायक राहत अली खान और अलका है। गायक जावेद अली की पहली एलबम ‘गुजारिश’ और मशहूर गायक ‘पिया बसंती फेम’ सुल्तान खान के एलबम का भी संगीत इन्होंने ही तैयार किया है।
नुसरत फतेह अली खान और ए आर रहमान जैसे दिग्गज संगीतकारो का वह अनुसरण करते हैं और उन्हीं की तरह एक नई संगीत की दुनिया का आगाज़ देना चाहते हैं। वैसे इन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतकारों और निर्देशकों के साथ काम किया है और उन्होंने इनके काम को सराहा ही नहीं बल्कि उसकी प्रसंशा भी की है। महेश मांजरेकर, राम गोपाल वर्मा, नितिन गायकवाड़, विपुल शाह, अनिल शर्मा जैसे कई निर्देशकों की फिल्म को नायाब ने अपने संगीत से सजाया है। इरफान खान अभिनीत ‘अपनो से बेवफाई’ गीत जो जल्द ही दर्शकों के समक्ष होगी उसका संगीत भी इन्ही का है।
नायाब अली अपने संगीत में आधुनिक तकनीक के साथ वाद्ययंत्रों का भी प्रयोग करते हैं। बचपन से इन्होंने तबला वादन में महारत हासिल की है। संगीत के साथ गायन भी इनका शौक रहा है। कई म्यूजिक के निर्देशन के साथ उसमें गायन भी किया है। इनका मानना है कि आज आधुनिकता के दौर में म्यूजिशियन पुराने गानों को ही नए संगीत में पिरो कर पेश करते हैं और लोग पसंद भी कर रहे हैं। आज संगीत को पहले से ज्यादा प्लेटफॉर्म और सुविधाएं मिल गयी है। इसलिए एक संगीतकार का भी कर्तव्य है कि वह अपने श्रोताओं को कुछ नया और अलग गीत-संगीत दे।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस – केवल प्यार ही घृणा को दूर कर सकता है

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आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।” महात्मा गांधी के शब्द हैं जो 21वीं सदी में भी प्रासंगिक हैं। मनुष्य ने हमेशा शांतिपूर्ण और खुश रहने के प्रयास किए हैं – परिवार से लेकर राष्ट्र तक – शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना अनिवार्य है।
अनिवार्य रूप से शांति क्या है? यह मानव मन की एक अवस्था के अलावा और कुछ नहीं है, जो आधुनिक विज्ञान के लिए भी पूरी तरह से समझाने के लिए परिष्कृत बनी हुई है। हालाँकि, शांति / निर्वाण / खुशी की उपलब्धि – चाहे वह कोई भी नाम हो, प्राचीन काल से ही अन्वेषण का विषय रहा है। मानव जाति ने बहुत सी लड़ाइयाँ देखी हैं। मवेशियों, भूमि, संसाधनों, उपनिवेशों, क्षेत्रों आदि के लिए लड़ाई। इनमें से अधिकांश लड़ाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच गलतफहमी के कारण हुई। इस प्रकार शांति जो मानव जाति के समग्र विकास के लिए आवश्यक है, उसे मायावी बना दिया गया।

एक शांतिपूर्ण वातावरण सामंजस्यपूर्ण जीवन सुनिश्चित करता है और आपसी समझ के लिए मार्ग प्रदान करता है। यह समझ बातचीत, चर्चा, क्रॉस-सांस्कृतिक आदान-प्रदान आदि के माध्यम से शांति को और मजबूत करती है। इस प्रकार एक पुण्य चक्र बनाया जाता है। दूसरी ओर, यदि बल द्वारा शांति थोपी जाती है, तो प्रतिस्पर्धी व्यक्तियों, समूहों, राज्यों आदि के बीच अविश्वास और शत्रुता की भावनाएँ पैदा होंगी। यहाँ कोई भी छोटी-सी गलतफहमी संघर्ष में बदल सकती है, जिससे परस्पर विरोधी दलों को नुकसान हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि लंबे समय तक शांति कायम रहने के लिए दूसरे पक्ष के हितों की समझ जरूरी है।

मनुष्य के प्राचीन अभिलेखों के अनुसार, चाहे वह बाइबिल हो, कुरान हो या वेद, सभी ने सर्वसम्मति से विभिन्न तरीकों से सुझाव दिया है कि शांति केवल प्रेम, करुणा और समझ के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। ज्ञान के ये शब्द समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और हमारे अतीत के पन्नों को पलट कर देखे तो इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है।

अभिजात वर्ग कभी भी सफल नहीं हुआ है और न ही कभी युद्ध या विद्रोह किसी समस्या का समाधान रहा है। हिटलर से लेकर सद्दाम तक सभी का कड़ा विरोध किया गया। भारतीय इतिहास पर नज़र डालें तो हम देखते हैं कि उपमहाद्वीप का अच्छा शासन उन शासकों के दिनों में था जो लोगों की समस्याओं और उनकी प्रजा के हितों को समझते थे। यह अशोक के “धम्म” से अकबर के मुगल दरबार में नियुक्तियों तक स्पष्ट है।

भारत ने हमेशा अहिंसा के अपने उपदेश के लिए दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है और उन मुद्दों की खोज करने की रणनीति जो उसके सामने हैं या जिनका सामना करना पड़ रहा है। महान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने बिना रक्तपात के प्रतिरोध की एक नई पद्धति का आविष्कार किया और तब से दुनिया ने सत्याग्रह का स्वाद चखा। गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने दुनिया को दिखाया है कि, कभी-कभी शांति को मौन के साथ बनाए रखा जा सकता है और जरूरी नहीं कि हर बार एक विशेष पक्ष लिया जाए। पंचशील समझौता अलग नहीं है।

भारत, एक राष्ट्र के रूप में, दुनिया के सामने आसानी से यह साबित कर सकता है कि उसकी अहिंसा और समझ की नीति पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश में संक्रमण, आईसीजे के लिए एक भारतीय न्यायाधीश के चुनाव जैसी घटनाओं के साथ बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। भारत ने, यहां तक कि एक विकासशील राष्ट्र होने के नाते, अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने की जिम्मेदारी ली है और इस प्रकार तथाकथित “महाशक्तियों” में से कई के लिए एक रोल मॉडल होने के नाते एक नैतिक जिम्मेदारी है क्योंकि हम सभी  धरती माता पर किरायेदार हैं। इसका सीधा सा अर्थ है कि एक देश के रूप में, एक नागरिक के रूप में और एक साथी के रूप में “सामाजिक रूप से जिम्मेदार” होना है।

एक देश के रूप में सामाजिक रूप से जिम्मेदार होने की प्रक्रिया के बीच भी, हमारा देश अन्य राष्ट्रों की तरह कई समस्याओं का सामना कर रहा था और कर रहा है।

लेकिन अधिक समझदार और जिम्मेदार सरकार और समाज के आधार पर, विभिन्न आंतरिक मुद्दों से निपटने के लिए हमेशा अथक प्रयास किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को सरकार द्वारा उनकी समस्याओं के प्रति अधिक समझदार होने से रोका जा सकता है। भारत सरकार की “पूर्व की ओर देखो नीति” ने निपटान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है पूर्वी राज्यों में अशांति व्याप्त है। बांग्लादेश के साथ एन्क्लेव समझौता दोनों सरकारों की ओर से अधिक समझदारी भरा कदम रहा है और इसने गंभीर चिंता के मुद्दे को शांति से सुलझा लिया है।

धर्म हमेशा से दंगों का कारण रहा है और इसने समाज में असहिष्णुता के लिए एक वातावरण प्रदान किया है और यह राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर एक चिंता का विषय है।

अयोध्या हो या यरुशलम, धर्म ने अपनी भूमिका निभाई है और लोगों को एक-दूसरे से अलग किया है। विडंबना यह है कि जो दुनिया को एक करने का उपदेश देता है वह अब दुनिया को अलग कर रहा है! यदि हम विभिन्न धर्मों के विभिन्न उपदेशों पर करीब से नज़र डालें, तो यह समझा जा सकता है कि वे सभी प्रेम का प्रचार करते हैं और शांति फैलाने का इरादा रखते हैं। “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखो”, बाइबल कहती है; “दयालु की पूजा करो और शांति फैलाओ”, कुरान कहता है; “वसुधैव कुटुम्बकम”, गीता कहती है और “क्रोधित विचारों से मुक्त लोगों को शांति मिलती है” बुद्ध कहते हैं।

दुनिया को रहने के लिए एक शांतिपूर्ण जगह बनाने के लिए विश्व स्तर पर प्रयास भी किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र और इसी तरह के अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे डब्ल्यूटीओ, आईसीजे और कई अन्य लोगों ने आपसी समझ और आपसी सम्मान के आधार पर दुनिया में बड़े बदलाव किए हैं।

“नोबेल शांति पुरस्कार” एक अभिनव अवधारणा थी जो वैश्विक परिदृश्य में समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के व्यक्तिगत प्रयासों को सामने लाती है और पहचानती है। आतंकवाद से लड़ने के वैश्विक प्रयास और आतंकवाद को खत्म करने के लिए बातचीत हमें एक खूबसूरत कल की तस्वीर देती है। पाकिस्तान की 14 साल की मलाला हो या आईसीएएन जैसी सामाजिक संस्था, इन सभी ने मार्टिन लूथर किंग के शब्दों को सही ढंग से प्रतिध्वनित किया, जिन्होंने एक बार कहा था-
“अंधेरा अंधकार को दूर नहीं कर सकता, केवल प्रकाश ही कर सकता है। घृणा घृणा को दूर नहीं कर सकती; केवल प्यार ही कर सकता है।”