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गौ हत्या का प्रयास करते तस्करों की पुलिस से मुठभेड़

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खरखौदा। रविवार देर रात मेरठ बुलंदशहर हाईवे पर कस्बे  के डीएवी डिग्री कॉलेज के पास जंगल में गौ तस्करों व पुलिस में मुठभेड़ हो गई, जिसमें पुलिस की गोली से दो तस्कर घायल हो गए। वहीं एक आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल के लिए रेफर किया गया है।खरखौदा इंस्पेक्टर अशोक कुमार ने बताया कि रविवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि मेरठ बुलंदशहर हाईवे किनारे डीएवी  कॉलेज के पास  एक खेत में कुछ गो तस्कर गोवंशी को बंधक बनाकर उसकी हत्या की तैयारी कर रहे हैं।

पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी कर आरोपियों को दबोचने का प्रयास किया, जिस पर तस्करों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग कर दी, जिसमें पुलिस की जवाबी फायरिंग में पैर में गोली लगने से दो आरोपी घायल हो गए। पुलिस को मौके से नशे की हालत में एक गोवंश और काटने के औजार मिले हैं।

घायल आरोपियों ने पूछताछ में अपना नाम अनस पुत्र महराज निवासी मुस्तफाबाद लोनी गाजियाबाद, हाल पता लिसाड़ी गेट व दूसरे ने आकिल पुत्र यूनुस निवासी 60 फूटा, मदीना मस्जिद लिसाड़ी गेट बताया।

वहीं, अंधेरे का फायदा उठाकर एक आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने दोनों घायलों को  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर आरोपियों को मेडिकल के लिए रेफर किया गया है। पुलिस ने मौके से दो तमंचे व कारतूस, धारदार औजार, एक स्कूटी व एक बाइक भी बरामद की है।

Lok Sabha Election 2024 – पवन सिंह , पार्टी कार्यकर्ताओं ने किया विरोध – महिला उम्मीदवार को टिकट

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Lok Sabha Election 2024: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2 मार्च को लोकसभा चुनाव के लिए 195 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी. इसमें पार्टी ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह को पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, बाद में पवन सिंह ने बीजेपी नेतृत्व का आभार जताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुनाव नहीं लड़ने की जानकारी दी.

सूत्रों के मुताबिक अगर पवन सिंह आसनसोल से चुनाव लड़ते तो उनके जीतने की पूरी संभावना थी. पार्टी के सर्वे में इस बात की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब पता चला है कि अगर वह चुनाव लड़ते तो बीजेपी को एक सीट की वजह से पांच सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता था. इसकी सबसे बड़ी वजह है पवन सिंह के गाए गाने.

पवन सिंह के गाने बने अड़चन
दरअसल, पवन सिंह ने जो गाने गाए हैं, उसमें महिलाओं और बंगाल को लेकर कई आपत्तिजनक गाने शामिल हैं. ऐसे में विरोधी दल इसे बंगाल की अस्मिता और बंगाली महिलाओं के अपमान से जोड़ रहे थे और इस पर पार्टी को जवाब देना भारी पड़ जाता.

पार्टी कार्यकर्ताओं ने किया विरोध
इसके अलावा जैसे ही पवन सिंह को टिकट मिला तो इसका सबसे ज्यादा विरोध पार्टी के अंदर ही हुआ और कई नेताओं ने पवन सिंह को हटाने के लिए अमित शाह और जे पी नड्डा को लेटर लिख दिया. जानकारी के मुताबिक उनके टिकट मिलने से पार्टी कार्यकर्ता नाराज थे.

महिलाओं के खिलाफ अत्याचार पर स्टैंड होता कमजोर
पवन सिंह को टिकट मिलने से महिलाओं के खिलाफ अत्याचार पर स्टैंड भी कमजोर पड़ जाता. वो भी ऐसे समय में जब बीजेपी संदेश खाली में महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचार के लिए मोर्चा खोले हुए है. ऐसे में एक ऐसे व्यक्ति को टिकट देना जिसने बंगाल की महिलाओं को लेकर अभद्र गाने बनाए हो, पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता था.

पीएम मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करती टीएमसी
इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जल्द ही बंगाल के दौरे पर जाने वाले हैं, जहां वह संदेशखाली के पीड़ित महिलाओं से मिलेंगे. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस (TMC) पवन सिंह को लेकर उस दिन पूरे प्रदेश में प्रोटेस्ट करने की तैयारी में थी. इस पीएम मोदी के प्रोग्राम को नुकसान हो सकता था.

महिला उम्मीदवार को टिकट
वहीं, खबर है कि पार्टी ने सब चीजों का आकलन करने के बाद इस सीट पर महिला को टिकट देने का मन बना लिया है, ताकि नारी शक्ति वंदन के अभियान को बल दिया जा सके. सूत्रों के मुताबिक पवन सिंह को कहा गया कि वो ट्वीट कर चुनाव लड़ने से मना करें, ताकि बीजेपी सेल्फ गोल से बच सके.

जल्द होगी “एक्सीडेंट ऑर कांस्पिरेसी गोधरा” ट्रेलर और रिलीज़ की घोषणा 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : बहुप्रतीक्षित फिल्म गोधरा फिलहाल सेंसर प्रक्रिया से गुजर रही है। फ़िल्म के मेंबर्स के लिए स्क्रीनिंग होने के बाद कैंसर से जुड़े औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सेंसर मिलने के बाद निर्माता ट्रेलर  के अनावरण के साथ एक नई रिलीज़ तारीख की घोषणा करने की योजना बना रहे हैं।
“एक्सीडेंट ऑर  कांस्पिरेसी   गोधरा” 1 मार्च को रिलीज होने वाली इस फिल्म की रिलीज अब सेंसर सर्टिफिकेट मिलने तक टाल दी गई है। यह महत्वपूर्ण कदम यह सुनिश्चित करता है कि फिल्म बड़े पर्दे पर आने से पहले सभी नियामक आवश्यकताओं को पूरा करती है।
गोधरा का पहला टीज़र ने इंटरनेट पर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया  है, जिसकी शुरुआत आग की लपटों में घिरी साबरमती एक्सप्रेस की एक शक्तिशाली इमेज  के साथ होती है। यह फिल्म महज मनोरंजन से परे है, जो इतिहास के एक काले अध्याय की खोज की बताती  है जो दो दशकों से अधिक समय बाद भी दर्द पैदा करती है और एक सवाल उठाती है। 27 फरवरी, 2002 की दुखद घटनाओं के ठीक 22 साल बाद – फिल्म की रिलीज का समय इस साजिश को और बढ़ा रहा है। गोधरा लंबे समय से चली आ रही कहानियों और धारणाओं को चुनौती देते हुए, घटना के पीछे की सच्चाई को उजागर करने का वादा करता है। ओम त्रिनेत्र फिल्म्स द्वारा निर्मित इस फिल्म में रणवीर शौरी, मनोज जोशी, हितू कनोडिया और राजीव सुरती जैसे कई शानदार कलाकार हैं।
“एक्सीडेंट ऑर  कांस्पिरेसी   गोधरा” नानावती शाह मेहता आयोग के रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे घटना की जांच का काम सौंपा गया था। फिल्म का उद्देश्य स्पष्ट है – सच्चाई पर प्रकाश डालना, यह पता लगाना कि क्या ट्रेन में आग लगना एक दुखद दुर्घटना थी या साजिश थी ।
निर्देशक एम.के.शिवाक्ष ने कहा कि गोधरा के निर्देशक के रूप में मेरा लक्ष्य हमेशा घटना के पीछे की सच्चाई पर प्रकाश डालना रहा है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए सेंसर प्रमाणपत्र का इंतजार कर रहे हैं कि हमारा संदेश यथासंभव व्यापक दर्शकों तक पहुंचे। यह गोधरा से जुड़ी जटिलताओं को उजागर करने का प्रयास करता है – घटना से लेकर उस लहर के प्रभाव तक जिसके कारण गुजरात दंगे हुए। टीज़र में मार्मिक प्रश्न उठाए गए हैं: गोधरा कांड के मूल में क्या है? पीड़ितों की आवाज़ घटनाओं और सहज झड़पों की कहानियों पर क्यों हावी हो गई है?
इस पर निर्माता बी.जे. पुरोहित ने कहा कि हम गोधरा की नई रिलीज डेट को अंतिम रूप देने के लिए लगन से काम कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि फिल्म सही समय पर और सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचे।

मिस वर्ल्ड प्रतियोगियों ने ‘ताडोबा महोत्सव’ का दौरा किया 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : पिछले दिनों मिस वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन की संस्थापक जूलिया मॉर्ले ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली युवा प्रतियोगियों के साथ ‘ताडोबा महोत्सव’ का दौरा करते हुए बाघ संरक्षण का संदेश दिया। महाराष्ट्र सरकार में वन, सांस्कृतिक मामलों और मत्स्य पालन के कैबिनेट मंत्री, माननीय श्री सुधीर मुनगंटीवार द्वारा वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय ताडोबा महोत्सव का आयोजन किया गया है। 71वीं मिस वर्ल्ड टीम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘सेव द टाइगर’ अभियान को अपना समर्थन दिया है।

महिला दिवस विशेष -सोशल मीडिया पर नकारात्मकता और बॉडी शेमिंग को झेलती हैं महिलाएं-अरुशी निशंक

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 प्रोड्यूसर और एक्ट्रेस अरुशी निशंक हमेशा से ही ऐसी शख्स रही हैं जिन्हें आदर्श प्रतिनिधित्व के रूप में पहचाना और जाना जाता है। एक अभिनेत्री के रूप में हों या एक निर्माता के रूप में वह अपनी आंतरिक भावना के अनुसार चलती है और इस प्रक्रिया में अक्सर वह जबरदस्त सफलता हासिल करती है।
 पहले भी, उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर बात की है और इस बार, महिला दिवस से पहले, अरुशी मानसिक स्वास्थ्य और बॉडी-शेमिंग के बहुत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विषय पर बात करती हैं।  इस बारे में और अधिक बोलने के लिए पूछे जाने पर, अरुशी ने अपनी जानकारियाँ साझा कीं।
 “सोशल मीडिया की दुनिया के अपने फायदे और नुकसान हैं। जहां तक महिलाओं का सवाल है, एक चीज जिससे महिलाएं रोजाना गुजरती हैं, वह है बॉडी शेमिंग और अपनी पसंद के आउटफिट के लिए स्लट-शेम्ड होना। अगर किसी का वजन कम है और  दुबले-पतले होते हैं, तो उन्हें शर्म आती है और अगर कोई मोटा है, तो उन्हें भी शर्मिंदा होना पड़ता है। हालांकि हम किसी के बारे में और वे कैसे दिखते हैं, इसके बारे में निर्णय लेने में बहुत तेज होते हैं, लेकिन ये लोग यह नहीं समझते हैं कि कभी-कभी यह एक मजबूरी की चीज होती है और उनकी पसंद से नहीं होती है।  एक दुबला-पतला व्यक्ति शायद वजन बढ़ाना चाहता है, लेकिन कुछ अन्य चिकित्सीय जटिलताएँ भी जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण वह सफल नहीं हो पा रहा है। मोटे लोगों के साथ भी ऐसा ही है। और अपनी पसंद के परिधानों के कारण शर्मिंदा होने वाली महिलाओं की संख्या अनगिनत है। इन महिलाओं में आत्म-संदेह की भावना पैदा हो जाती है और वे सोचने लगती हैं कि उनके साथ कुछ गलत है। जैसे-जैसे महिला दिवस नजदीक आ रहा है, मेरा संदेश इन महिलाओं के लिए स्पष्ट है। मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि इस दुनिया में किसी को भी यह निर्णय लेने का अधिकार या शक्ति नहीं है कि आपको अपने बारे में कैसा महसूस करना चाहिए।  मेरे अनुसार महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ स्वतंत्र रूप से नौकरी करना या अपनी पसंद के कपड़े पहनना नहीं है।  सच्चा महिला सशक्तिकरण तब होता है जब आप समाज के इन सभी तुच्छ लोगों को अपनी कीमत खुद तय करने नहीं देते हैं और आप अपनी त्वचा के प्रति आश्वस्त महसूस करते हैं।  अपने बारे में चीज़ें तभी बदलें जब आपको लगे कि आपको ऐसा करना चाहिए, न कि तब जब दूसरे आपको ऐसा करने के लिए कहें।  मेरे अनुसार यह सच्चा महिला सशक्तिकरण है और इसलिए, कृपया ऐसी तुच्छ चीजों को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव न डालने दें। आप सभी बहुत बेहतर के लिए बने हैं। चमकें और उड़ें और हमेशा फीनिक्स बनें जैसे आप हैं।”
 जहां तक आगामी काम का सवाल है, प्रतिभाशाली कलाकार अपने आगामी प्रोजेक्ट ‘तारिणी’ से दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार है।
 खैर, जहां तक तारिणी का सवाल है, यह एक ऐतिहासिक घटना है जो 2015 में हुई थी। हम इस परियोजना पर कुछ वर्षों से काम कर रहे हैं और इस फिल्म को बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय से विशेष अधिकार ले लिए हैं।  यह पहली बार था जब छह महिला नौसेना अधिकारियों ने 254 दिनों में अकेले एक छोटी मेड इन इंडिया नाव में जलयात्रा पूरी की। कहानी रोमांच, भावना और हास्य से भरपूर है।  इसके लिए बहुत मेहनत और प्रयास किए गए हैं और मैं वास्तव में इसका इंतजार कर रहा हूं।

मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती फिल्म ‘लोरी’ प्रदर्शन के लिए तैयार

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                           श्रीराम ए क्रिएशन वर्ल्ड के बैनर तले फिल्म निर्माता अविनाश कवथनकर द्वारा निर्मित मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती फिल्म ‘लोरी’ अब बहुत जल्द ही सिनेदर्शकों तक पहुंचने वाली है। राजीव कृष्णा रेवंद्कर् के निर्देशन में बनी इस फिल्म का ट्रेलर महेंद्रा एंड  महेन्द्रा कंपनी के  वरिष्ठ अधिकारी व बॉलीवुड के नामचीन शख्शियतों की उपस्थिति में इम्पा हाउस (मुंबई) के प्रीव्यू थिएटर में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान जारी किया जा चुका है। इस फिल्म के निर्माता अविनाश कवथनकर मुंबई स्थित ‘महेन्द्र एंड  महेन्द्रा लिमिटेड कंपनी में 1991 से कार्यरत हैं। उन्होंने फिल्म ‘लोरी’ के मेकिंग की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि फिल्म निर्माण करना व अभिनय करना उनका बचपन का सपना रहा है, जो इस फिल्म ‘लोरी ‘के ज़रिये पूरा  होने जा रहा है, आगे भी वे फिल्म निर्माण जारी रखेंगे। उन्होंने आगे बताया कि ‘लोरी’ एक ऐसी युवा लड़की की कहानी है, जो शहर में  रहकर पढ़ाई कर रही है। वह जब अपनी माँ से मिलने गांव आती है तो उसे माँ नहीं मिलती, फिर वह अपनी माँ  की खोज कैसे करती है, उसे किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, यही इसका मुख्य विषय है। फिल्म निर्माता अविनाश कवथनकर ने इस फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है।
कुमार डोंगरे के कलात्मक सिनेमेटोग्राफी से सजी इस फिल्म के एक्शन डायरेक्टर मा.राजू दास, आर्ट डायरेक्टर राजू माली और कोरियोग्राफर विशाल पटेल व शशि दक्शन हैं। इस फिल्म के लिए गीतकार अल्ताफ शेख के द्वारा लिखे गए गीतों को संगीत से सजाया है संगीतकार अल्ताफ शेख और सुधीर ने और स्वर दिया है बॉलीवुड के चर्चित सिंगर सुरेश वाड़कर,उर्मिला धांगर, स्वप्निल बांधोकर प्रियंका बर्वे और अंजली गायकवाड ने। इस फिल्म के मुख्य कलाकार  पंक्ति पटेल , अविनाश कवथंकर अभिलाष गैरा, प्रतिभा शिम्पी, राजकुमार ढेरंगे, रंजीत दास, शान कक़्कर, आरती शिंदे आदि हैं।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

5 मार्च जयंती – राष्ट्रीयता के कवि सोहनलाल द्विवेदी

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डॉ. हरिप्रसाद दुबे – विनायक फीचर्स

राष्ट्रकवि पं. सोहनलाल द्विवेदी का जन्म 5 मार्च 1906 ई. को फतेहपुर जनपद के बिन्दकी गांव में हुआ था। उनके पिता पण्डित बिन्दाप्रसाद दुबे धार्मिक और सरल स्वभाव के थे। ग्राम परिवेश में प्राथमिक शिक्षा पूर्ण होने के बाद माध्यमिक और स्नातक परीक्षाएं उत्तीर्ण करके उन्होंने स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। कविता के माध्यम से सोहन लाल द्विवेदी ने राष्टï्रभारती की अनन्य आराधना की। इन्होंने बाल साहित्य की अनेक कृतियों का सृजन किया, जिनमें शिशु भारती, बॉंसुरी, बाल भारती, झरना और बच्चों के बापू प्रमुख हैं। काव्य के इतिहास पुरुष और स्वाधीनता आन्दोलन के मेरूदण्ड सोहन लाल द्विवेदी की रचनाओं ने जनमानस को विदेशी शक्तियों के विरुद्ध जूझने की शक्ति दी। उनकी सच्ची कविता ने प्रसुप्त हृदयों को जगाकर पथ प्रदर्शित कर ऊर्जावान होने के लिए प्रवृत्त किया। द्विवेदी जी कवियों की मणिमाला के जगमगाते रत्न थे। मातृभूमि के अनन्य उपासक सोहनलाल द्विवेदी की वन्दना की कामना भी अनूठी है। वे स्वातंत्र्य के महासंग्राम में प्राण प्रण समर्पित रहे। राष्टï्र के प्रति उच्च भावना थी।

हिन्दी और संस्कृत के पारंगत विद्वान द्विवेदी जी निष्काम भाव से साहित्य सर्जना में आजीवन संम्पृक्त रहे। वे गांधीवादी विचार धारा के प्रतिनिधि कवि थे। राष्टï्रीय रचनाओं के साथ-साथ उनकी पौराणिक रचनाओं को भी आदर मिला। पूजा गीत, भैरवी, विषपान, वासवदत्ता और जय गांधी कृतियां हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। ‘युगावतार गांधीÓ रचना के राग, लय ने सोहनलाल जी के कृतित्व को उच्चता प्रदान की। युग पुरुष महात्मा गांधी के व्यक्तित्व को जितनी जीवन्तता उन्होंने दी वह अप्रतिम ही है। स्वाधीनता प्राप्ति के बाद की परिस्थितियों पर राष्टï्रनिष्ठï पं. द्विवेदी को पीड़ा हुई, जिसे उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यक्त किया है।

सोहनलाल द्विवेदी की अन्य कृतियों में हम बालवीर, गीत भारती, युगाधार, चित्रा, बासन्ती, प्रभाती, चेतना, कुणाल और संजीवनी आदि हैं। उनकी रचनाओं में अलग-अलग अनेक रंग हैं। इनकी काव्य-निर्झरिणी में अवगाहन करके जीवन पथ पर नये आयाम मिलते हैं। पं. द्विवेदी का कुणाल काव्य इतना श्रेष्ठï है कि यह उन्हें राष्टï्रीयता का अनन्य प्रेमी ही नहीं वीरोपासक कवि के रूप में स्थापित करता है। यह हिन्दी में राष्टï्रीय महाकाव्य की कमी पूर्ण करने में समर्थ है। अपने कवि कर्म के प्रति सजग रहे सोहनलाल द्विवेदी ने 1965 में देश पर आए अन्न संकट के समय कृषकों को जाग्रत करने वाली सर्जना की। बाल साहित्य की विशिष्टï सेवा के उत्तरप्रदेश शासन ने उन्हें पुरस्कृत किया। इसके पश्चात्ï दीर्घकालीन विशिष्टï उत्कृष्टï सारस्वत साधना पर उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान ने पन्द्रह हजार रुपए की धनराशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान करके सम्मानित किया।

भारत सरकार ने पं. सोहनलाल द्विवेदी की राष्टï्रीय एवं बाल साहित्य की सारस्वत सेवा पर उन्हें 1969 में पद्ïमश्री अलंकरण से विभूषित करके उनके अप्रतिम अवदान को प्रतिष्ठिïत किया। वे महान व्यक्ति थे।

रामायण एवं तुलसी मर्मज्ञ पं. बद्रीनारायण तिवारी उनके अनन्य प्रशंसक रहे हैं। वे लिखते हैं ‘तुलसीदलÓ में सहजता ही जिनकी प्रमुख विशेषता है। कवि, पत्रकार दोनों रूपों में यशस्वी स्थान रहा है। अपनी लेखनी से द्विवेदी जी ने देश के गौरव की चिन्ता की।

उनकी रचना ‘जवानों ने विजयश्री से मुकुट मां का संवारा है। किसानों। अन्न धन से अब तुम्हें आंचल सजाना है। हमारी अन्नपूर्णा मां न मांगे अन्न की भिक्षा। करोड़ों हाथ से मां का नया संबल सजाना है।Ó जन-जन की कंठहार बन गई। मानवीय मूल्यों में वे मनीषी कवि थे।

पं. सोहनलाल द्विवेदी अत्यन्त सहृदय और निश्छल स्वभाव के थे। पत्रों के उत्तर तुरन्त देने की अनूठी दृष्टि अन्य रचनाकारों से पृथक थी। उनमें परोपकार, दया, क्षमा और कुशाग्र दृष्टिï अन्तर्मन तक थी। जीवन उत्तराद्र्ध में जब भी अस्वस्थ हुए तो पं. बद्रीनारायण तिवारी को सूचित करने में कोई संकोच नहीं करते थे। हिन्दी युग पुरुष पं. नारायण चतुर्वेदी, श्रीपति मिश्र से भी सम्पृक्त रहे। कविवर विनोदचन्द्र पाण्डेय ‘विनोदÓ की सृजनात्मकता पर द्विवेदी जी मुग्ध थे। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का प्रभाव  द्विवेदी की तुलसीदल के प्रति साहित्यिक दृष्टिï से है- है शब्द-शब्द में भरा भाव, है छन्द-छन्द में भरा ज्ञान। है वाक्य-वाक्य में अमरवचन, वाणी में वीणा का विधान।

अपनी रचनाओं में द्विवेदी जी विनम्रता का भाव भरते हैं-

‘मैं मंदिर का दीप तुम्हारा

जैसे चाहो इसे जलाओ जैसे चाहो इसे बुझाओ

इसमें क्या अधिकार हमारा

जला करेगा ज्योति करेगा जीवनपथ का तिमिर हरेगा

होगा पथ का एक सहारा

बिना देह यह चल न सकेगा

अधिक दिवस यह जल न सकेगा

भरे रहो इसमें मधु धारा

मैं मंदिर का दीप तुम्हारा॥‘

1976 में सोहनलाल द्विवेदी ने तुलसीदल की अष्टदलीय भव्यमाला गूंथ के तुलसी की उद्भावनाएं प्रगट की हैं। कवि की उच्च दृष्टि इस प्रकार है-

‘गूंजो फिर बनकर रामनाम रणवीरों के मन से अकाम।

नवराष्ट्र जागरण के युग में तुलसी गूंजो तुम धाम-धाम॥

दो हमको भूली कर्म शक्ति, दो हमको फिर से आत्मबोध।

दो हमें राम के मानस का वह क्षत्रिय का अपमान क्रोध॥

कुलपति श्री गिरिजाप्रसाद पाण्डेय ने पं. द्विवेदी के अमृत महोत्सव अगस्त 1980 में लखनऊ वि.वि. में कहा था ‘राष्ट्रकवि पं. सोहनलाल द्विवेदी की रचनाएं आज भी उच्च सांस्कृतिक मूल्यों से जोडऩे में समर्थ हैं। द्विवेदीजी अपने युग की एक विभूति हैं।  ‘भैरवी’ की भूमिका डॉ. सम्पूर्णानन्द ने लिखी। राजस्थान विद्यापीठ ने 1973 में साहित्य चूड़ामणि कानपुर वि.वि. ने 1975 में डी.लिट्ï की मानद उपाधि प्रदान की। उनके समग्र साहित्य में मानवता की दृष्टि भरी है। राष्ट्रकवि द्विवेदी जी 1 मार्च 1988 को चल बसे। (विनायक फीचर्स)

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी दमन और दीव से चुनाव लड़ सकती हैं

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एजेंसी, दमन और दीव। Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। भाजपा ने शनिवार को अपनी पहली लिस्ट में 195 उम्मीदवारों के नामों का एलान भी कर दिया है। इस दौरान कांग्रेस के दमन और दीव अध्यक्ष केतन पटेल ने एक दावा कर सभी चौंका दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी दमन और दीव से चुनाव लड़ सकती हैं।

Farmers Protest Update : किसानों ने अब 6 मार्च को दिल्ली कूच करने का बड़ा ऐलान

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चंडीगढ़ /बठिंडा : कुछ दिनों के शांतिपूर्ण विरोध के बाद फिर से एक बार हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर संघर्ष देखने को मिल सकता है. दरअसल किसान संगठनों ने एक बार फिर से दिल्ली कूच करने का बड़ा ऐलान कर दिया है.

6 मार्च को किसानों का दिल्ली कूच : किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने जानकारी देते हुए बताया है कि 6 मार्च को अब किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे. खनौरी बॉर्डर पर डेड मिले पंजाब के युवा किसान शुभकरण सिंह की अंतिम अरदास के दौरान मंच से ये फैसला लिया गया है.

10 मार्च को रोकी जाएंगे ट्रेनें : वहीं किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि 10 मार्च को किसान दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक देश भर की रेल पटरियों पर बैठेंगे और ट्रेनों को रोकेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि वे पंजाब सरकार से मांग करेंगे कि आंदोलन के दौरान जख्मी लोगों के केस में अलग से एफआईआर की जाए.

सरकार ने पाकिस्तान-चीन जैसा बॉर्डर बनाया” : किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने देश भर के किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने-्अपने साधन से दिल्ली के लिए कूच करे. चाहे वे ट्रेन से आए या फिर बस से या फिर फ्लाइट से. सरवन सिंह पंढेर ने इस दौरान सरकार पर आरोप भी लगाया कि हरियाणा-पंजाब के बॉर्डर को पाकिस्तान-चीन बॉर्डर जैसा बना दिया गया है. ड्रोन का इस्तेमाल कर किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं. पंजाब-हरियाणा के बॉर्डर पर दीवारें खड़ी कर दी गई है जिससे किसानों को दिल्ली जाने से रोका जा सके.

 

 

गौ मांस के साथ ग्रामीण गिरफ्तार

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प्रतिनिधि जांजगीर – चांपा । ग्राम धरदेई के एक ग्रामीण को आधा किलो गौ मांस के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया । मामला शिवरीनारायण थाना का है।जानकारी के अनुसार ग्राम धरदेई निवासी जीवन लाल मोची शुक्रवार को गांव में घूम घूम कर गौ मांस बेच रहा था। जब इस बात की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने इसकी सूचना शिवरीनारायण पुलिस को दी। सूचना मिलने पर शिवरीनारायण थाना प्रभारी एसआई सागर पाठक पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे।

ग्रामीण जीवन लाल गमछे में बांधकर मांस को रखा था। पुलिस ने मांस को जब्त किया और उसे पकड़कर थाने लाई। थाना प्रभारी एसआई सागर पाठक ने बताया कि धरदेई में ग्रामीण जीवन लाल मोची के द्वारा गौ मांस बेचने की सूचना मिली थी। जिस पर गांव पहुंचकर आरोपित को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई जिसमें जिसमें उसने गौ मांस बेचने की बात स्वीकार किया। गौमांस को परीक्षण के लिए लैब भेजा गया है। पुलिस ने आरोपित जीवन लाल के खिलाफ भादवि धारा 429 एवं 4 – 10 छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम 2004 के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपित को न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।