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Agneepath Yojana 2022: भारतीय सेना में चार साल के लिए भर्ती होंगे युवा,

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रक्षा मंत्रालय ने सेना भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। सेना भर्ती के लिए सरकार की ओर से ‘अग्निपथ भर्ती योजना’ को लॉन्च किया गया है। इस मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया, इसके तहत सेना में चार साल के लिए अग्निवीरों यानी युवाओं की भर्ती की जाएगी। सरकार की ओर से यह कदम सेना की औसत उम्र कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि इस समय सेना की औसत उम्र 32 साल है, जिसे अगले कुछ सालों में 26 साल करने का प्रयास किया जाएगा। यह योजना रक्षा बलों के खर्च और आयु प्रोफाइल को कम करने की दिशा में सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा मानी जा रही है।

अग्निपथ भर्ती योजना’ के तहत युवा चार साल की अवधि के लिए सेना में शामिल होंगे और देश की सेवा करेंगे।

चार साल के अंत में लगभग 75 फीसदी सैनिकों को ड्यूटी से मुक्त कर दिया जाएगा और उन्हें आगे के रोजगार के अवसरों के लिए सशस्त्र बलों से सहायता मिलेगी।

केवल 25 फीसदी जवानों को चार साल बाद भी मौका मिलेगा। हालांकि यह तभी संभव होगा जब उस समय सेना की भर्तियां निकली हों।

कई निगम ऐसे प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं के लिए नौकरी आरक्षित करने में भी रुचि लेंगे जिन्होंने देश की सेवा की है।

योजना के तहत सशस्त्र बलों का युवा प्रोफाइल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। युवाओं को नई तकनीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा।

चार साल की नौकरी छोड़ने के बाद युवाओं को सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। जो 11.71 लाख रुपए होगा।

योजना के तहत इस साल 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी।

राष्ट्र की सेवा की इस अवधि के दौरान, अग्निवीरों को विभिन्न सैन्य कौशल और अनुभव, अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व गुण, साहस और देशप्रेम की ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी. चार साल के इस कार्यकाल के बाद, अग्निवीरों को नागरिक समाज में शामिल किया जाएगा जहां वे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान दे सकते हैं. प्रत्येक अग्निवीर द्वारा प्राप्त कौशल को उसके यूनीक बायोडाटा का हिस्सा बनने के लिए एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा.

आज महाराष्ट्र दौरे पर PM मोदी: पुणे के देहू में संत तुकाराम शिला मंदिर का करेंगे लोकार्पण,

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मंदिरों का शहर देहू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी के लिए पूरी तरह तैयार है, जो मौजूदा संत तुकाराम महाराज मंदिर में आज एक शिला (चट्टान) मंदिर का उद्घाटन करेंगे. प्रधानमंत्री के आज दोपहर करीब 1 बजे देहू पहुंचने की उम्मीद है. वह मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद वह मुंबई स्थित राजभवन में जल भूषण भवन और क्रांतिकारी गैलरी का उद्घाटन करेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी मौजूद रहेंगे. वह मुंबई समाचार के द्विशताब्दी समारोह में शामिल होंगे.

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी विद्यासागर राव के कार्यकाल में राजभवन में एक भूमिगत तहखाना मिला था. इस तहखाने में क्रांतिकारी गैलरी स्थापित की गई है. इस गैलरी में चापेकर बंधुओं सहित सावरकर के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं. केंद्र और राज्य सरकार में जारी तनाव के बीच लंबे समय बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करेंगे. गत अप्रैल माह में लता मंगेशकर फाउंडेशन के कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई आए थे. उस दौरान कार्यक्रम की आमंत्रण पत्रिका में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नाम नहीं होने की वजह से वह इस कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए थे.

देहू संस्थान प्रशासन को प्रधानमंत्री की यात्रा के प्रोटोकॉल के बारे में पता नहीं था. भाजपा नेता महेश लांडगे ने कहा कि मंदिर का उद्घाटन करने के बाद, प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित करेंगे. लांडगे ने कहा, ‘यह राजनीतिक संबोधन नहीं होगा. यह वारकरियों के बारे में अधिक होगा, क्योंकि ‘वारी’ 20 जून को देहू से शुरू होने वाली है. प्रधानमंत्री कार्यक्रम में, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस के साथ मंच साझा करेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी शामिल नहीं होंगे’

श्री संत तुकाराम महाराज संस्थान, देहु के प्रमुख नितिन मोरे ने कहा कि 1 करोड़ रुपये की लागत से ‘शिला’ मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसे भक्तों ने दान किया था. उन्होंने कहा, ‘हमने राज्य सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं ली है. मंदिर को बनने में छह साल लगे.’ नितिन मोरे ने बताया कि मंदिर में एक शिला या चट्टान होगी जिसे वारकरी संप्रदाय द्वारा वार्षिक तीर्थयात्रा के शुरुआती बिंदु के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिसे वारी के नाम से जाना जाता है. वारी पंढरपुर में समाप्त होती है.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री को एक विशेष टोपी भी भेंट की जाएगी. मोरे ने कहा, ‘यह एक डिजाइनर तुकाराम पगड़ी होगी, जिसे पहनाकर पीएम को सम्मानित करेंगे.’पीएम की यात्रा के दौरान मंदिर भक्तों के लिए बंद रहेगा. इस बीच, पुलिस ने प्रधानमंत्री के देहू दौरे के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. तैयारियों के तहत, महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को मंदिर का दौरा किया. अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के परामर्श से एक बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली स्थापित की गई है.

 

दूध देना बंद करने पर गायों को छोड़ देते हैं बेसहारा, ऐसे लोगों पर यूपी में दर्ज होगी FIR:

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Adityanath) ने बेघर पशुओं को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत योगी सरकार ने उन किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, जो दूध देना बंद करने पर गायों को बेसहारा छोड़ देते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने सोमवार (30 मई 2022) को कहा कि ऐसे किसानों के खिलाफ पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के विधायक अवधेश प्रसाद की ओर से विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “कसाई और किसान में अंतर है। हम किसानों का ध्यान रखेंगे, कसाइयों का नहीं। अपने पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाएगा।”

प्रसाद ने सरकार से आवारा पशुओं की समस्या को लेकर उनकी क्या योजना है और इनकी वजह से मारे गए लोगों को मुआवजे से संबंधित सवाल पूछा था। इसके जवाब में मंत्री ने कहा, “ये आवारा मवेशी नहीं हैं, बल्कि उन्हें छोड़ा गया है। हर कोई जानता है कि उन्हें किसने छोड़ा है। जब एक गाय दूध देती है तो उसे रखा जाता है और जब दूध देना बंद करती है तो छोड़ दिया जाता है।”

अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के एक महीने बाद ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बेघर पशुओं के आश्रय की दिशा में काम शुरू कर दिया है। बेघर पशुओं की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार एक योजना लाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सरकार बनने पर इस समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया था।

बता दें कि यूपी सरकार अगले 6 महीने के अंदर बेघर पशुओं के लिए बने शेल्टर होम्स की संख्या एक लाख तक पहुँचाने की योजना पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना में 50000 बेघर पशुओं के लिए 100 दिनों के भीतर शेल्‍टर की व्यवस्था कारण शामिल है। आने छह महीने में इसे 1 लाख तक बढ़ाया जाएगा।

सरकार के एजेंडे में अगला कदम बायोगैस संयंत्र स्थापित करना है। गाय के गोबर का इस्तेमाल करके सीएनजी बनाना, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की दिशा में काम करना होगा। इसके लिए किसानों से गाय का गोबर खरीदा जाएगा। पीएम मोदी ने किसानों से यह भी वादा किया था, जब उनकी गायें दूध देना बंद कर देंगी तो किसान उनके गोबर से भी आय अर्जित कर सकेंगे।

कुवैत जाएगा 192 मीट्रिक टन गाय का गोबर

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संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि यह गौ संरक्षण अभियान का ही नतीजा है। पहली खेप में 15 जून को कनकपुरा रेलवे स्टेशन से कंटेनर रवाना होंगे। गुप्ता ने कहा कि कुवैत के कृषि वैज्ञानिकों के अध्ययन के बाद फसलों के लिए गोबर बेहद उपयोगी माना गया। 
जयपुर. देशभर में गौ संरक्षण को लेकर पहल की जा रही है। खास बात ये है कि अब सात समंदर पार भी देशी गाय के गोबर को तवज्जो मिलेगी। पहली बार देश से कुवैत में 192 मीट्रिक टन गाय का गोबर भेजा जाएगा। गोबर को पैक कर कंटेनर के जरिए 15 जून से भेजा जाएगा। सांगानेर स्थित पिंजरापोल गोशाला के सनराज इज आर्गेनिक पार्क में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। भारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ के देश में चलाए जा रहे जैविक खेती मिशन की पहल पर कुवैत में खेती के लिए गोबर भिजवाया जाएगा।
संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि यह गौ संरक्षण अभियान का ही नतीजा है। पहली खेप में 15 जून को कनकपुरा रेलवे स्टेशन से कंटेनर रवाना होंगे। गुप्ता ने कहा कि कुवैत के कृषि वैज्ञानिकों के अध्ययन के बाद फसलों के लिए गोबर बेहद उपयोगी माना गया। इससे न केवल फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई, बल्कि जैविक उत्पादों के उपयोग से स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर देखने को मिला। गोबर का पाउडर के रूप में खजूर की फसल में इस्तेमाल करने से फल के आकार में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादन में भी आशानुरूप बढ़ोतरी देखी गई। सनराइज एग्रीलैंड डवलपमेंट को यह जिम्मेदारी मिलना देश के लिए बड़े गर्व की बात है। राज्य सरकारें भी इस ओर ध्यान दें।
खास बात
—देश में मवेशियों की संख्या तीस करोड़ से अधिक।
—रोजाना 30 लाख टन गोबर का आगमन होता है।
—गोबर का सही इस्तेमाल होने पर सालाना छह करोड़ टन लकड़ी व साढ़े तीन करोड़ टन कोयला की बचत होगी।
इसलिए खास है गोबर

कृषि एक्सपर्ट संगीता गौड़ ने बताया कि प्राचीन युग से ही खाद का पौधों, फसल उत्पादन में महत्वपूर्ण है। गोबर में एन्टिडियोएक्टिव एवं एन्टिथर्मल गुण होने के साथ ही 16 प्रकार के उपयोगी खनिज तत्व पाए जाते हैं। खाद में 50% नाइट्रोजन, 20% फास्फोरस व पोटेशियम पौधों को शीघ्र मिलता है। प्रशांत चतुर्वेदी ने कहा कि गोबर मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह मल नहीं, मलशोधक है। विदेशियों ने इसकी प्रमाणिकता सिद्ध की है। गोशाला के महामंत्री शिवरतन चितलांगिया ने बताया कि देश में तीस फीसदी गोबर को उपला बनाकर जला दिया जाता है। जबकि ब्रिटेन में गोबर गैस से हर साल सोलह लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होता है, तो चीन में डेढ़ करोड़ परिवारों को घरेलू ऊर्जा के लिए गोबर गैस की आपूर्ति की जाती है। अमेरिका, नेपाल, फिलिपिंस, दक्षिणी कोरिया ने भारत जैविक खाद मंगवाना शुरू किया।

हरियाणा में गऊ तस्कर गिरफ्तार

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हरियाणा । कंटेनर में सवार गौ तस्करों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में जमकर पथराव हुआ और दो तीन राउंड फायरिंग हुई। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी बाल बाल बच गए। पुलिस ने घेराबंदी कर दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि तीन चार अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। पुलिस ने कैंटर में भरकर ले जायी जा रही सात गायों को मुक्त करा लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गांव आलमपुर, धौज निवासी आमीन पुत्र हकीम और साबिर पुत्र सौकत के रूप में हुई है। पुलिस अन्य तस्करों की तलाश कर रही है। धौज थाने के एसई जोगिंदर सिंह ने लिखाई एफआईआर में कहा है कि शनिवार की रात वह अपनी टीम के साथ गश्त पर थे।

भोर में करीब चार बजे मुखबिर खास ने सूचना दी कि गांव आलमपुर निवासी आमीन और साबिर आइशर कैंटर में गायों को भरकर काटने के लिए पाली धौज होते हुए मेवात जा रहे हैं। सूचना पर गांव मोहब्बताबाद पुलिया पर नाकाबन्दी शुरू की गई। वहां गौरक्षक दल के सदस्य पवन बैंसला, व नवीन तंवर भी पहुंच गए।

कुछ देर बाद ही एक आइशर कैंटर गांव पाली की तरफ से आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने जब उसे रुकने का इशारा किया तो चालक रूकने के बजाय स्पीड तेज कर दिया। पीछे गाड़ी में बैठे अन्य तस्करों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया और फायरिंग झोंक दी। गनीमत रही कि पुलिसकर्मी बच गए। पुलिस ने नाके पर लोहे का कांटा लगा रखा था।

तस्करों की गाड़ी कांटे पर चढ़ने के कारण उसके चारों टायर फट गये और गाडी में बैठे तस्कर उतरकर भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा कर चालक आमीन और हेल्पर साबिर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ करने पर आरोपियों ने बताया कि उनके साथ साकिर पुत्र कल्लू निवासी गांव धौज,नासिर पुत्र मुबीन, इरफान उर्फ गेंडा पुत्र रमजानी व आमीर पुत्र महमूदा निवासीगण गांव आलमपुर,राकेश उर्फ भोंदू, सज्जा, युसुफ, ईक्कर निवासी गांव फिरोजपुर नमक जिला मेवात भाग निकले हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है।

झाँसी के वृहद गौ संरक्षण केन्द्र

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झाँसी : अन्ना पशुओं को आश्रय देने के लिये जहाँ योगी सरकार गम्भीरता दिखा रही है, वहीं पशुपालन विभाग ने झाँसी में मॉडल गौ संरक्षण केन्द्र स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिये 4 स्थानों को चिह्नित किया गया है, जहाँ स्थायी वृहद गौ संरक्षण केन्द्र बनेंगे। इन्हें मॉडल के रूप में तैयार किया जायेगा। जिले में अन्ना पशु बहुत बड़ी समस्या है


वर्ष 2019 की पशु गणना में 37,431 गौवंश आवारा माने गये थे। इनके संरक्षण के लिये जिले में 246 गौशालाएं बनाई गयीं। इसमें नगर निगम द्वारा बिजौली में कान्हा उपवन, हँसारी व लहरगिर्द में काँजी हाउस तथा पशुपालन विभाग द्वारा सुकुवाँ व लुहरगाँव घाट में गौवंश वन विहार नाम से बड़ी गौशालाएं हैं, जबकि अन्य जगह पर छोटी गौशालाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद अन्ना पशुओं को उचित संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।

इस समस्या को दूर करने के लिये पशुपालन विभाग ने बामौर के गौती में 4.50 हेक्टेयर, गुरसराय के गुढ़ा में 4.50 हेक्टेयर, धवारी में 8.50 हेक्टेयर एवं बंगरा के पठगुवाँ में 2.76 हेक्टेयर स्थान चिह्नित की है। इसमें धवारी 2,500 गौवंश रखने की व्यवस्था की जायेगी, जबकि अन्य गौ संरक्षण केन्द्र इससे कम संख्या वाले होंगे। प्रत्येक गौ संरक्षण केन्द्र पर 1.20 करोड़ रुपये की लागत आँकी गयी है। इन वृहद गौ संरक्षण केन्द्रों पर भूसा गोदाम, स्टोर रूम, पेयजल के लिये बोरिग, सुरक्षा के लिये जालीदार तार वाली फेसिंग तथा चारा उत्पादन की व्यवस्था की जायेगी।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का डंका:पहली बार हिंदी में भी जारी होंगी UN की सूचनाएं,

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक उल्लेखनीय पहल करते हुए बहुभाषावाद पर भारत द्वारा पेश प्रस्ताव को पारित किया है।  इसमें संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हिंदी व अन्य भाषाओं को भी बढ़ावा देने का पहली बार जिक्र किया गया है। 

शुक्रवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र हिंदी भाषा सहित आधिकारिक और गैर-आधिकारिक भाषाओं में महत्वपूर्ण संचार और संदेशों का प्रसार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस साल पहली बार प्रस्ताव में हिंदी भाषा का उल्लेख है। इस संकल्प में पहली बार बांग्ला और उर्दू का भी उल्लेख है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बहुभाषावाद को संयुक्त राष्ट्र के मूलभूत मूल्यों के रूप में मान्यता दी गई है। तिरुमूर्ति ने बहुभाषावाद व हिंदी को प्राथमिकता देने के लिए यूएन महासचिव के प्रति आभार प्रकट किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत 2018 से यूएन के वैश्विक संचार विभाग (डीजीसी) के साथ साझेदारी कर रहा है। यूएन के समाचार  और मल्टीमीडिया सामग्री को हिंदी में प्रसारित करने व मुख्यधारा में लाने के लिए अतिरिक्त राशि दे रहा है।

‘हिंदी @ यूएन’ परियोजना 2018 में शुरू की गई:

तिरुमूर्ति ने आगे कहा कि यूएन में हिंदी को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत 2018 में ‘हिंदी @ यूएन’ परियोजना आरंभ की गई। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक सूचनाएं हिंदी में देने को बढ़ावा देना और दुनियाभर के करोड़ों हिंदी भाषी लोगों के बीच वैश्विक मुद्दों के बारे में अधिक जागरूकता लाना है। इस संदर्भ में उन्होंने एक फरवरी, 1946 को यूएन महासभा के पहले सत्र में अपनाए गए सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 13(1) का जिक्र किया।

इसमें कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र अपने उद्देश्यों को तब तक प्राप्त नहीं कर सकता जब तक कि दुनिया के लोगों को इसके उद्देश्यों और गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी न हो। संयुक्त राष्ट्र में बहुभाषावाद को सही मायने में अपनाना अनिवार्य है। भारत इस उद्देश्य को प्राप्त करने में संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करेगा।

संयुक्त राष्ट्र में अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश ये छह आधिकारिक भाषाएं हैं। जबकि, अंग्रेजी और फ्रेंच संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की कामकाजी भाषाएं हैं।

पाकिस्तान में शिया और चीन में वीगर मुसलमानों पर जब जुल्म होता है तो क्यों मौन रहते हैं ये अरब देश?

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पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा प्रवक्ताओं की कथित टिप्पणी से उपजा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ‘जुमे की नमाज’ के दिन कई राज्यों में हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की खामोशी को अर्थपूर्ण बताते हैं, एक्सीडेंटल नहीं। वे कहते हैं, ऐसे गंभीर मसले पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या विदेश मंत्री को बयान देना चाहिए था।

पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी के मुताबिक, कुछ देश ‘दुष्प्रचार’ का हिस्सा बन जाते हैं। चीन में वीगर मुसलमानों पर जुल्म होता है तो अरब देश नहीं बोलते, पाकिस्तान में शिया मुसलमान निशाने पर हैं तो भी ये देश मौन रहते हैं। विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा, आज जिहादी मुस्लिम नेतृत्व, जानबूझ कर मुस्लिम समुदाय को हिंसा और अधर्म के पथ पर ले जा रहा है। ऐसे तत्वों के साथ सख्ती से निपटना चाहिए।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक मीडिया समूह के साथ बातचीत में कहा, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विदेश मंत्री, ये ऐसे लोग हैं, जिनसे पैगंबर जैसे संजीदगी वाले मुद्दे पर बयान की उम्मीद की जाती है। इस माहौल में प्रधानमंत्री की खामोशी का क्या मतलब हुआ। यही कि वे इससे असहमत नहीं हैं, कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है। उन्होंने कहा, विदेश मंत्री का बयान अभी तक इसलिए नहीं आया, क्योंकि उन्हें भी तो कहीं से मंजूरी लेनी होती है। अंसारी ने एक सवाल के जवाब में कहा, ये बात ठीक है कि अरब देश, चीन में वीगर मुसलमानों पर किए जा रहे कथित ज़ुल्मों पर चुप रहते हैं। पाकिस्तान में शिया मुसलमानों पर जब अत्याचार की खबरें आती हैं तो इस्लामिक राष्ट्र मौन साध लेते हैं। भारत में पैगंबर पर टिप्पणी मामले में वे बोले, ये बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, इस पर वे देश चुप नहीं रह सकते थे।

चुकानी पड़ सकती है दीर्घकालिक कीमत

इस मसले पर स्वराज इंडिया के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने अपने एक लेख में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम बिरादरी से हम उम्मीदें नहीं बांध सकते। मुश्किलों के भंवर में फंसे हिंदुस्तानी मुसलमानों के हितैषी के रूप में हम इस बात की अनदेखी नहीं कर सकते कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे इस समर्थन की एक दीर्घकालिक कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। आज मोदी सरकार को अपने दो प्रवक्ताओं की वजह से वैश्विक स्तर पर किरकिरी झेलनी पड़ रही है। यादव ने लिखा है, जो देश पैगंबर विवाद में बवाल मचा रहे हैं, उनमें से ज्यादातर मुस्लिम देशों का अपने अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवहार ठीक नहीं रहा है। उन देशों में धार्मिक स्वतंत्रता का रिकार्ड खराब रहा है।

इसके बावजूद वे देश भारत से माफी मांगने की बात कर रहे हैं, तो इसमें उनका ढीठपन नजर आता है। चीन में वीगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर पाकिस्तान कितनी बार बोला है, न के बराबर। हालांकि पैगंबर विवाद के बीच कूदने में पाकिस्तान ने देर नहीं लगाई। हामिद अंसारी ने कहा, पैगंबर विवाद एकाएक नहीं हुआ। ये एक सिलसिलेवार कड़ी थी। केंद्र सरकार ने उसे समय रहते रोका नहीं, क्योंकि वह सरकार की नीति का हिस्सा हो सकता है। सरकार को कूटनीति के जरिए यह मामला हल करना चाहिए था।

सुनियोजित ‘दुष्प्रचार’ का हिस्सा बन रहे हैं कुछ देश

पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी ने बताया, इस मुद्दे को कुछ इस्लामिक देश बेवजह तूल दे रहे हैं। ऐसा नजर आता है कि वे किसी सुनियोजित ‘दुष्प्रचार’ का हिस्सा बन रहे हैं। किसी के बहकावे में आकर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास हो रहा है। विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने शनिवार को अपने बयान में कहा, आज मुसलमानों के बीच रह रहे कुछ जिहादी लोग, पूरे समुदाय को हिंसा के रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। यह न तो समाज के हित में है और न ही देश के हित में। जो तत्व देश के शांतिपूर्ण और समावेशी लोकाचार को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि भारत अपने संविधान के तहत काम करता है न कि शरिया आपराधिक कानून के तहत। जिन लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें यह ध्यान में रखना चाहिए कि वे इस मामले में जज नहीं हो सकते हैं।

प्रथम बुलेट ट्रेन 2026 तक गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के मध्य चलने की संभावना

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केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार (6 जून) को कहा, “सरकार 2026 तक गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के मध्य भारत की पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य बना रही है क्योंकि इस दिशा में अच्छी प्रगति देखने को मिल रही है।”

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट में अश्विनी वैष्णव के हवाले से कहा गया, “अहमदाबाद और मुंबई के मध्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में अच्छी प्रगति हुई है और कार्य तेज़ गति से किया जा रहा है।”

रेल मंत्री ने सूरत में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति का निरीक्षण करने के बाद यह बात कही।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हम 2026 में सूरत और बिलिमोरा के मध्य पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य रख रहे हैं। प्रगति बहुत अच्छी है और हमें उस समय तक ट्रेन चलने का भरोसा है।”

बिलिमोरा दक्षिण गुजरात के नवसारी जिले का एक शहर है और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग के 12 स्टेशनों में से एक है।

मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन ट्रैक के लिए 61 किलोमीटर दूर तक खंभों का निर्माण किया गया और करीब 150 किलोमीटर लंबे रूट पर एक साथ काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन का काम 2024 तक पूरा होने की संभावना है।

सूरत के अतिरिक्त तीन और स्टेशनों वापी, बिलिमोरा और भरूच का भी कार्य ज़ोरों पर है और इसके 2024 तक पूरा होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि हर माह करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए करीब 300 खंभे खड़े किए जा रहे हैं।

भाजपा ने राज्यसभा की छह में से तीन सीटें जीतीं, महा विकास अघाड़ी को लगा झटका

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महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन को बड़ा झटका देते हुए भाजपा ने शनिवार को राज्यसभा की छह में से तीन सीटें जीत लीं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन ने मतगणना में 8 घंटे की देरी पर सवाल उठाया।

भाजपा के विजेताओं में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, राज्य के पूर्व मंत्री अनिल बोंडे और धनंजय महादिक सम्मिलित हैं। उधर, शिवसेना के संजय राउत, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल और कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी भी जीते।

284 वैध मतों में से गोयल को 48, बोंडे को 48, महादिक को 41.56, राउत को 41, प्रतापगढ़ी को 44 और पटेल को 43 वोट मिले।

मुकाबला छठवीं सीट के लिए कांटे का था। इसके लिए भाजपा ने पूर्व सांसद धनंजय महादिक को उतारा था और शिवसेना के उम्मीदवार संजय पवार थे, जो हार गए थे।

भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया, “चुनाव सिर्फ लड़ाई के लिए नहीं बल्कि जीत के लिए लड़ा जाता है। जय महाराष्ट्र।”

भाजपा और शिवसेना दोनों ने क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाते हुए और वोटों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया।

पोल पैनल ने महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी को शिवसेना विधायक सुहास कांडे द्वारा डाले गए वोट को खारिज करने का निर्देश दिया। इसके बाद सुबह 1 बजे के बाद मतगणना शुरू हुई। पहला परिणाम दो घंटे में आया।

चौंकाने वाले झटके के बाद कांग्रेस नेताओं ने सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी में समन्वय में खामियाँ स्वीकार कीं। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने संवाददाताओं से कहा, “यह अध्ययन का विषय है कि क्या गलत हुआ।”

उन्होंने कहा, “भाजपा मतगणना को रोकने और एक वोट को अमान्य करने में चालाक थी। हमें विश्वास था कि हमारे चारों उम्मीदवार आराम से जीत जाएँगे।”

राउत ने चौथे उम्मीदवार की हार के लिए पोल पैनल को ज़िम्मेदार ठहराया।