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महेश भट्ट द्वारा प्रशंसित सतीश पंचारिया और विक्रम भट्ट की दूरदर्शिता ‘स्टूडियो वर्चुअल वर्ल्ड’

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के सेरा सेरा व विक्रम भट्ट ने दहिसर में 50,000 स्क्वायर फुट में फैला भारत का पहला वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो खोला जहाँ ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर बेस्ड फिल्म ‘खिलौने’ और ‘1920 हॉरर ऑफ द हार्ट’ का होगा निर्माण

मुम्बई। पूरी तरह से वर्चुअल प्रोडक्शन में बनी दुनिया की पहली फिल्म ‘जुदा होके भी’ की सफलता का उत्सव मुम्बई के फाइव स्टार होटल जे डब्ल्यू मैरियट में मनाया गया जहां महेश भट्ट, विक्रम भट्ट और के सेरा सेरा के चेयरमैन सतीश पंचारिया उपस्थित थे।
इस अवसर पर वर्चुअल वर्ल्ड द्वारा बनाई जा रही दो और फिल्मों की भी घोषणा की गई। उनमें से एक फिल्म ‘खिलौने’ होगी जो हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी बनाई जा रही है जिसे विक्रम भट्ट निर्देशित करने जा रहे हैं। वहीं 1920 की फ्रेंचाइजी ‘1920 हॉरर ऑफ द हार्ट’ की घोषणा भी की गई जिसे विक्रम भट्ट की पुत्री कृष्णा भट्ट डायरेक्ट करेंगी। 1920 की अगली कड़ी में जहां अविका गौर मुख्य भूमिका में होंगी वहीं फिल्म ‘खिलौने’ में अनुप्रिया गोयंका सेंट्रल किरदार प्ले करेंगी।
इस अवसर पर विक्रम भट्ट ने देश के पहले और सबसे बड़े वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो के बारे में भी बात की जिसे उन्होंने सतीश पंचारिया के साथ मिलकर खोला है।
महेश भट्ट ने कहा कि फिल्म ‘खिलौने’ ह्यूमन ट्रैफिकिंग की कहानी है। ‘जब इंसान की औकात एक खिलौने की तरह हो जाती है’ इसी सिचुएशन की स्टोरी है इसलिए इसका टाइटल खिलौने है। एक लड़की की दिल को छू लेने वाली कहानी है। जैसा कि सतीश जी ने कहा कि हम सिर्फ 9000 सिनेमाघरों को टारगेट नहीं कर रहे हैं बल्कि दुनिया भर के डेढ़ लाख सिनेमाघरों तक फिल्म को पहुंचाने का टारगेट रखते हैं। हमें थोड़ी हिम्मत और जुर्रत करके बड़े सपने देखने चाहिए। सपने भी अगर छोटे देखें तो फिर क्या बात हुई। लेकिन सिर्फ सपने देखने से काम नहीं चलेगा आपको विज़नरी भी होना होगा, विक्रम भट्ट और सतीश पंचारिया ने एक ख्वाब देखा और उसे पूरा किया। और वो भी ऐसे समय मे किया जब कोविड का बुरा दौर चल रहा था।
महेश भट्ट ने आगे कहा कि जैसा कि विक्रम ने बताया कि इसने कभी ऐसा सोचा ही नहीं था कि कभी ऐसा समय भी आएगा जब वह एक कमरे में कम्प्यूटर से घिरा होगा, और सिर्फ एक स्टूडियो में पूरी फिल्म बना देगा। ‘जुदा होके भी’ में हर तरह के सीन हैं, रेलवे स्टेशन है, ट्रेन है, बर्फ के पहाड़ हैं, महल हैं सब कुछ है। लेकिन यह सब वर्चुअल शूट किया गया है और यह सब लेटेस्ट तकनीक का कमाल है जिसे विक्रम भट्ट ने डिस्कवर किया है। विक्रम भट्ट 14-18 घन्टे तक काम करते थे।
‘जुदा होके भी’ फिल्म एक मिसाल बन गई है जिसे हिंदुस्तान की अवाम ने सराहा है। किसी को भी फ़िल्म, टेलीविजन, ओटीटी के लिए कोई कंटेन्ट बनाना है तो इस स्टूडियो में हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है।
विक्रम भट्ट ने बताया कि मेरी बेटी कृष्णा ने जब फिल्मों में अपनी रुचि दिखाई तो सबसे पहले वह फिल्म 1920 के सेट पर आई थी जिसे मैं डायरेक्ट कर रहा था। उस वक्त वह हॉरर सीन में बहुत डरती थी और आज वह ‘1920 हॉरर ऑफ द हार्ट’ डायरेक्ट कर रही है। इस फिल्म को भी हम वरचुअल वर्ल्ड में शूट कर रहे हैं। मैं फिल्म ‘खिलौने’ खुद डायरेक्ट कर रहा हूँ। यह बहुत बड़ी एक्शन फिल्म होगी और यह दुनिया की सबसे बड़ी एक्शन फिल्मों का मुकाबला करेगी। इसलिए हम इसे अंग्रेजी में भी बना रहे हैं।
आपको बता दें कि के सेरा सेरा और विक्रम भट्ट की वर्चुअल प्रोडक्शन तकनीक फिल्म निर्माण के ढंग को बदलने के लिए तैयार है। के सेरा सेरा और विक्रम भट्ट ने मुंबई में स्थित दहिसर हाईवे पर भारत का पहला वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो खोला है जो 50,000 स्क्वायर फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें एक समय में 4 फिल्मों की शूटिंग के लिए 4 फ्लोर हैं।
के सेरा सेरा और विक्रम भट्ट के स्टूडियो वर्चुअल वर्ल्ड के द्वारा खर्च पर काफी कंट्रोल किया जा सकता। यह बहुत ही भव्य और हॉलीवुड सिनेमा के बराबर है। अब बॉलीवुड फिल्म निर्माता हमसे जुड़कर ग्लोबल बन सकते हैं और क्षेत्रीय फिल्म निर्माता इसे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बना सकेंगे। सरल शब्दों में कहें तो कम से कम निवेश के साथ हम ज़्यादा विज़ुअलाइज़ेशन प्रदान करते हैं। अगर आप किसी प्रोजेक्ट में 5 करोड़ का निवेश करते हैं, तो हमारा स्टूडियो वर्चुअल वर्ल्ड इसे 30 करोड़ के प्रोजेक्ट जैसा बना देगा।
सतीश पंचारिया ने कहा कि इस तकनीक से हमारी पूरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री दुनिया को अपनी ताकत दिखा सकती है। हम हमेशा एक खास तरह की फिल्म एक निश्चित बजट में बनाते रहे हैं। हमारे पास ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’, ‘स्टार वार्स’ और एवेंजर्स जैसी बड़ी फिल्में बनाने के लिए बजट नहीं था। लेकिन इस नई तकनीक के साथ यह सम्भव हो गया है।

 ‘राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2022’ का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न

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अभिजीत राणे, डॉ सुनील बालीराम गायकवाड़, एसीपी बाजीराव महाजन, डॉ परीन सोमानी, आरती नागपाल, एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा, अनिल नागरथ, डिज़ाइनर डॉ भारती छाबड़िया, दिलीप सेन, सुजाता मेहता, कॉमेडियन वीआईपी और एहसान कुरैशी सहित कई हस्तियों की रही उपस्थिति

मुम्बई। 20 जुलाई 2022 को भव्य रूप से “राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2022” का आयोजन कृष्णा चौहान ने मुम्बई के अंधेरी स्थित मेयर हॉल में किया। केसीएफ प्रस्तुत इस पुरस्कार समारोह में उन लोगों का सम्मान किया गया जिन्होंने समाज सेवा और मानव सेवा का उल्लेखनीय कार्य किया है। डॉ कृष्णा चौहान द्वारा आयोजित अवार्ड समारोह में अभिजीत राणे, डॉ सुनील बालीराम गायकवाड़, एसीपी बाजीराव महाजन, डॉ परीन सोमानी, आरती नागपाल, एक्शन डायरेक्टर और एक्टर टीनू वर्मा, अनिल नागरथ, डिज़ाइनर डॉ भारती छाबड़िया, दिलीप सेन, सुजाता मेहता, कॉमेडियन वीआईपी और एहसान कुरैशी सहित कई हस्तियों की उपस्थिति रही। इस अवार्ड शो में सिमरन आहूजा ने शानदार एंकरिंग की।
इस अवसर पर अभिजीत राणे ने कहा कि कृष्णा चौहान को हम सब मोटिवेट करने आए हैं। पिछले 4 साल से वह लोगों को सम्मान दे रहे हैं। वह निर्माता निर्देशक भी हैं उनके नए प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत बहुत बधाई।
डॉ सुनील बालीराम गायकवाड़ ने कहा कि मैं कृष्णा चौहान को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने हमें इस बेहतरीन कार्यक्रम में बुलाया। वह 20 साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। कोविड काल के दौरान उन्होंने न सिर्फ जरूरतमंदों को राशन किट बांटा बल्कि सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने भगवतगीता भी लोगों को दिया।
आयुर्वेदाचार्य प्रकाशजी टाटा, जो मध्यप्रदेश से अवार्ड लेने पहुंचे, उन्होंने कृष्णा चौहान को धन्यवाद देते हुए कहा कि इन्होंने हर अवार्ड शो की तरह राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2022 का सफल आयोजन किया।
युवा बिज़नेसमैन योगेश ने डॉ कृष्णा चौहान का शुक्रिया अदा किया।
शो में शिरीन फरीद ने अपना डांस पेश किया जो सभी को पसन्द आया।
राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2022 से जिन हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें डॉ सुनील साठे, आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रकाश टाटा, डॉ सुनील बालीराम गायकवाड़, दिव्यांशु चौधरी, राजकुमार शर्मा, अजय मिश्रा, रूपा बावेश दोषी, ऋषभ पवार, सागर विश्वडिया, दीनदयाल मुरारका का नाम उल्लेखनीय है। डांसर सिया द्वारा डांस परफॉर्मेंस पेश किया गया।
डांसर सिया और शिरीन फरीद को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। सुंदरी ठाकुर, डॉ भारती छाबड़िया, सोशल वर्कर आराधना सोलंकी को भी राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2022 से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आराधना सोलंकी ने डॉ परीन सोमानी व दिलीप सेन का विशेष सम्मान किया।
एक्टर श्यामलाल (भय्या जी स्माइल फेम), सोमस क्रिएशन, योगेश भान, नाफ़े खान, सुजाता मेहता, एसीपी बाजीराव महाजन, पुनीत वोरा, असमा कपाड़िया (सोशल एक्टिविस्ट), डॉ अर्चना देशमुख को भी सम्मानित किया गया। डॉ एस के टांक की ट्रॉफी राजू टांक को प्रदान की गई। पंकज भट्ट, राजकुमार शर्मा, प्रभु मंगलदास, टीनू वर्मा, आरती नागपाल, अनिल नागरथ, ऋषभ पवार, कॉमेडियन वीआईपी, एहसान कुरैशी, ज़ीनत एहसान कुरैशी, जय कुमार को भी राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2022 मिला।
इस अवसर पर कृष्णा चौहान ने कई पत्रकारों, फोटोग्राफर को भी ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
गौरतलब बात है कि कृष्णा चौहान 2 अक्टूबर 2022 को महात्मा गांधी रत्न अवार्ड का आयोजन भी करने जा रहे हैं।
आपको बता दें कि कृष्णा चौहान अपनी अगली हॉरर थ्रिलर फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग भी जल्द शुरू करने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कृष्णा चौहान न सिर्फ एक बॉलीवुड डायरेक्टर हैं, एक्टिव सोशल वर्कर हैं बल्कि अवार्ड फंक्शन करने के मामले में आगे रहते हैं।
आपको बता दें कि कृष्णा चौहान का हिंदी अल्बम ‘ज़िक्र तेरा’ हाल ही में रिलीज हुआ है और उनकी हिंदी फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ नेक्स्ट माह फ्लोर पर जाने वाली है, इसके संगीतकार दिलीप सेन हैं।

महिला दरोगा की हत्या, गौ तस्करों ने वाहन से कुचला

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झारखंड की राजधानी रांची में पशु तस्करों द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान महिला दरोगा को को वैन से कुचलने की शर्मनाक घटना सामने आई। खबर के अनुसार झारखण्ड की राजधानी रांची में एक महिला दरोगा को एक पिकअप वैन ने कुचल (Lady Cop Murder In Jharkhand) दिया। मौके पर ही दरोगा की मौत हो गई। इस बेहद शर्मनाक घटना की  बीजीपी ने कड़ी निंदा की है और कहा ‘राज्य की क्या दुर्दशा हो गई है।

 

हरियाणा के नूंह के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी वारदात की  घटना सामने आई है। झारखंड में अपराधियों के हौसले काफी बुलंद हो गए अपराधी आए दिन पुलिस कर्मियों को अपना निशाना बना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आजा एक महिला दरोगा को एक बहन द्वारा कुचल दिया गया जिसके बाद मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट की मानें तो कहा जा रहा है कि महिला एसआई सुबह करीब 3 बजे वाहन चेकिंग अभियान पर थी। उसी दौरान उसे सूचना मिली थी एक वैन में गोवंश पशु लेकर आ रहे हैं जिसे रोकने के लिए इशारा किया गया लेकिन पशु तस्कर एसआई को कुचलते हुए फरार हो गया।

 

घटना में मृत पाई गई महिला दरोगा की पहचान संध्या टोपनो के रूप  हुई है। वह इस समय मामला तुपुदाना थाना क्षेत्र एसआई पद पर पदस्थापित थी। वह 2018 बैच की एसआई ऑफिसर थी, जिसका बड़ी बेरहमी से ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई।

 

 

आजादी का अमृत महोत्सव – भारत की कहानी मीनाक्षी लेखी की जुबानी

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New Delhi – संस्कृति और विदेश राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने आज “भारत की कहानी, मीनाक्षी लेखी की जुबानी” नामक पॉडकास्ट सीरीज़ का 50वां एपिसोड पूरा कर लिया है।

श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत “भारत की कहानी, मीनाक्षी लेखी की जुबानी” नामक पॉडकास्ट सीरीज़ की शुरुआत की थी, जिसमें भारत के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कहानियां 75 दिनों की अवधि में सुनाई जा रही हैं, जो 75वें स्वतंत्रता दिवस पर पूरी होंगी।

ये पॉडकास्ट 01 जून, 2022 को शुरू किया गया था और केंद्रीय मंत्री इसमें रोज़ भारत के अलग अलग कोने के अलग-अलग गुमनाम नायकों की एक नई कहानी सुनाती हैं।

इन 75 कहानियों को अमृत महोत्सव की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ स्पॉटिफाई, गूगल पॉडकास्ट, साउंडक्लाउड और खबरी जैसे प्लेटफॉर्म पर उनके आधिकारिक हैंडल पर उपलब्ध करवाया जा रहा है।

अब तक जो कड़ियां आई हैं उनमें नीरा आर्य जैसे गुमनाम नायकों की कहानियां हैं जो भारत की पहली महिला जासूस थीं। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की रक्षा के लिए पूरा दम लगा दिया था। उनके अलावा झलकारी बाई, रानी अब्बक्का, अहिल्या बाई होल्कर और खुदीराम बोस जैसे नायकों की कहानियां शामिल हैं।

ये पहल बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इतने दशकों से ये माना जाता रहा है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सिर्फ कुछ ही लोगों का योगदान रहा है।

ये पॉडकास्ट सीरीज़ इन्हीं गुमनाम नायकों के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालने की एक पहल है जो भारत के लिए जिए और मर गए।

जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि 21वीं सदी का भारत आजादी का अमृत महोत्सव के माध्यम से 20वीं सदी में की गई भूलों को सुधार रहा है। ये पहल इस आजादी का अमृत महोत्सव में उन अनसुने और अज्ञात नायकों के जीवन को सेलिब्रेट करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप ही है।

इस सीरीज़ के माध्यम से केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी इन गुमनाम नायकों के योगदान और कहानियों को सामने लाना चाहती हैं ताकि आने वाली पीढ़ी उनके नाम और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को न भूलें।

ये पॉडकास्ट सीरीज़ ऐसी अनूठी कहानियों का एक डिजिटल भंडार निर्मित करती है जो हमेशा हमारे तमाम नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शन करने वाला प्रकाश साबित होगी, खासकर उन छात्रों के लिए जो इन बहादुरों के जीवन से प्रेरणा ले सकते हैं।

साल 2022 का अत्यधिक महत्व है क्योंकि इस साल भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर रहा है। ये देश आजादी का अमृत महोत्सव को राष्ट्र और उसके लोगों की उपलब्धियों के उत्सव के रूप में मना रहा है।

गौ आधारित खेती से लागत हुई आधी

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20 जुलाई 2022, बड़वानी । गौ आधारित खेती से लागत हुई आधी – अंग्रेजी दवाइयों के सेवन से मनुष्य की प्रवृत्ति उसके अधीन हो गई जबकि देसी आयुर्वेदिक दवाइयों के उपयोग से मनुष्य को कम बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही स्थिति आज खेती की हो गई, यह कहना है ग्राम मंडवाड़ के प्रगतिशील कृषक श्री बाबूलाल काग का। वह अपनी 40 एकड़ भूमि पर गौ आधारित खेती (पशुओं से प्राप्त गोमूत्र गोबर का उपयोग) करते हैं। 60 वर्षीय सातवीं तक शिक्षित श्री काग 15 वर्ष की आयु से खेती कर रहे हैं।

आपने पिछले 3 वर्षों से गौ आधारित खेती अपनाई। श्री काग कहते हैं कि जब तक रसायनिक उर्वरकों का उपयोग करते थे खेती घाटे का सौदा रही,जब से पशुओं के साथ खेती करना प्रारंभ की, तब से खेती हमारे लिए फायदे का सौदा बन गई है। इनके खेतों पर अधिकतर अंतरवर्तीय फसल देखी जा सकती है। जिसमें गन्ने के साथ हल्दी, पपीता, गेहूं अन्य फसलें लगाते हैं। 4 एकड़ में अमरूद के 1500 वृक्ष 1 साल में चार लाख की आमदनी देते हैं इन वृक्षों के बीच भी फसल लगाई जाती है। हल्दी, मेथी दाना, गन्ना फसलों की अच्छी गुणवत्ता होने से गांव से ही आसानी से विक्रय हो जाती है। 35 पशुओं की गौशाला के साथ गौ आधारित खेती करने में उपज की गुणवत्ता बढ़ी साथ ही खर्चों में कटौती भी हुई है। अन्य जानकारी कृषक श्री काग के मो.: 9893988639 पर ले सकते हैं।

छत्तीसगढ़- 4 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा गौमूत्र

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गोधन न्याय योजना से पशुपालक ग्रामीणों से करीब दो सालों में 150 करोड़ से अधिक की गोबर खरीदी की गई, वहीं 143 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है

रायपुर. छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गोबर के बाद अब गौमूत्र की खरीदी की शुरुआत होने वाली है। गौमूत्र चार रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा। जानकारी के अनुसार राज्य में गौमूत्र की खरीदी की शुरुआत 28 जुलाई हरेली तिहार के मौके से होगी। प्रथम चरण में प्रत्येक जिले के दो चयनित स्वावलंबी गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी की जाएगी। गौठान प्रबंध समिति पशुपालक से गौ-मूत्र क्रय करने हेतु स्थानीय स्तर पर दर निर्धारित कर सकेगी। क्रय गौ-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह की मदद से जीवामृत एवं कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। चयनित समूहों को पशु चिकित्सा विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
गौ-मूत्र की खरीदी राज्य में जैविक खेती के प्रयासों को और आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। इसी को ध्यान में रखकर राज्य में गौ-मूत्र की खरीदी शुरू की जा रही है, इससे पशुपालकों को गौ-मूत्र बेचने से जहां एक ओर अतिरिक्त आय होगी, वहीं दूसरी ओर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जीवामृत, गौ-मूत्र की कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किए जाने से समूहों को रोजगार और आय का एक और जरिया मिलेगा। कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य में गौ-मूत्र क्रय के लिए न्यूनतम राशि चार रुपए प्रति लीटर प्रस्तावित की गई है।

गोधन न्याय योजना: राज्य में जैविक खेती को मिला बढ़ावा
आपको बताते चले दो साल पहले 20 जुलाई 2020 को राज्य में हरेली पर्व के दिन से ही गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में गोबर की खरीदी की शुरुआत की गई थी। गोबर से गौठानों में अब तक 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर प्लस कम्पोस्ट महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित किए जा चुके हैं, जिसके चलते राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। वहीं इस योजना के तहत पशुपालक ग्रामीणों से लगभग दो सालों में 150 करोड़ से अधिक की गोबर खरीदी की गई है, जिसका सीधा फायदा ग्रामीण पशुपालकों को मिला है। क्रय गोबर से वर्मी खाद का निर्माण एवं विक्रय से महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को 143 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। जीवामृत और गौ-मूत्र की कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे कृषि में लागत कम होगी। खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी।

  • कलेक्टरों को गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
    गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली ने सभी कलेक्टरों को गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि गौ-मूत्र का क्रय गौठान प्रबंधन समिति स्वयं के बैंक खातों में उपलब्ध गोधन न्याय योजना अंतर्गत प्राप्त की राशि से करेगी। उन्होंने कलेक्टरों को अपने-अपने जिले के दो स्वावलंबी गौठानों, स्व-सहायता समूह का चयन करने, गौठान प्रबंध समिति तथा स्व-सहायता समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण देने के साथ ही गौ-मूत्र परीक्षण संबंधी किट एवं उत्पाद भण्डारण हेतु आवश्यक व्यवस्था करने को कहा है।

गौमूत्र से होने वाले फायदे…

  • आयुर्वेद के अनुसार, गौमूत्र विष नाशक, जीवाणु नाशक और जल्द ही पचने वाला होता है। इसमें नाइट्रोजन, कॉपर, फॉस्‍फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम, यूरिक एसिड, क्लोराइड और सोडियम पाया जाता है।
  • गौमूत्र दर्दनिवारक, पेट के रोग, स्किन प्रॉब्लम , श्वास रोग (दमा), आंतों से जुड़ी बीमारियां, पीलिया, आंखों से संबंधित बीमारियां, अतिसार (दस्त) आदि के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में तीनों दोषों की गड़बड़ी की वजह से बीमारियां फैलती हैं, लेकिन गौमूत्र पीने से बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  • दिमागी टेंशन की वजह से नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन गौमूत्र पीने से दिमाग और दिल दोनों को ही ताकत मिलती है और उन्हें किसी भी तरह की कोई बीमारी नहीं होती।
  • शरीर में पाए जाने वाले विभिन्न विषैले पदार्थों को बाहर निकालने के लिए गौमूत्र पीना बहुत लाभदायक है
  • शारीरिक कमजोरी और मोटापा दूर करने के लिए भी गौमूत्र का सेवन लाभकारी होता है।

‘कार्तिकेय 2’ के हिंदी टीजर को वृंदावन के इस्कॉन में किया गया लॉन्च

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पीपल मीडिया फैक्ट्री और अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स की नवीनतम प्रस्तुति के रूप में फिल्म ‘कार्तिकेय’ अपनी सीक्वेल के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच धमाल मचाने के लिए तैयार है। यह एक ऐसी मैग्नम ओपस है जिसकी बहुत अच्छी तरह से रिसर्च की गई है, एंटरटेंनमेंट से भरपूर कहानी है। फिल्म के विजुअल्स के साथ इसकी कहानी भी इमोशन्स से भरी हुई है।
‘कार्तिकेय’ ने इस बार पहले से कहीं ज्यादा बेहतर अंदाज में वापसी की है। इस बार यह मनुस्मृति श्लोक के साथ आ रहा है, “धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा न धर्मो हतो’वधूत” – जिसका अर्थ है “न्याय, अभिशप्त, अभिशाप; और न्याय, संरक्षित, संरक्षित; इसलिए न्याय को अभिशप्त नहीं किया जाना चाहिए, ऐसा न हो कि भयभीत न्याय हमें नष्ट कर दे।” हाल ही में ‘कार्तिकेय 2’ के टीज़र को वृंदावन के इस्कॉन टैंपल में लॉन्च किया गया था ताकि फिल्म के प्रोमोशन्स के शूरू होने से पहले भगवान श्री कृष्णा का आशीर्वाद लिया जा सके। सुपरनैचुरल मिस्ट्री थ्रिलर 2014 में आई फिल्म ‘कार्तिकेय’ के सीक्वेल को चंदू मोंडेती ने लिखा और निर्देशित किया है। वहीं फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन टीजी विश्व प्रसाद और अभिषेक अग्रवाल का है। इस फिल्म में लीड एक्टर निखिल सिद्धार्थ के साथ अनुपमा परमेश्वरन, श्रीनिवास रेड्डी, विवा हर्षा और आदित्य मेनन जैसे एक्टर्स नजर आएंगे। फिल्म की कोरियोग्राफी कार्तिक घट्टामनेनी ने की है और म्यूजिक काला भैरव ने दिया हैं। इस अपकमिंग तेलुगु फिल्म को दो भाषाओं में डब किया गया है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

बुलंदशहर: पुलिस मुठभेड़ में 25 हजार का इनामी गौ तस्कर घायल, गिरफ्तार

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बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस को 25 हजार के ईनामी गौ तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक(एसएसपी) श्लोक कुमार ने शनिवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नगर कोतवाली थानाक्षेत्र की पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में कुख्यात गौतस्कर तस्लीम गोली लगने से घायल हो गया और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

थाना पुलिस पुलिस वलीपुरा नहर के पास बैरियर लगाकर वाहनों की जांच कर रही थी उसी समय एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध वहां आए और पुलिस को देख कर वापस भागने लगे पुलिस के पीछा करने पर बाइक सवारों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली लगने से एक संदिग्ध घायल हो गया उसका दूसरा साथी फायरिंग करता हुआ मौके से भाग निकला।

एसएसपी ने बताया कि घायल की शिनाख्त तस्लीम निवासी रसूलपुर थाना गुलावठी के रूप में हुई जो इलाके का कुख्यात गौ तस्कर हैं, उसके विरुद्ध कई मुकदमे दर्ज है। गुलाबठी थाने में दर्ज हत्या की चेष्टा के एक मामले में वांछित चल रहा है और उसकी गिरफ्तारी पर 25000 रूपये का इनाम घोषित है। उसके पास से एक 315 बोर का अवैध तमंचा कारतूस और गोकशी के औजार बरामद किये गये।
पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल भी कब्जे में ली है घायल को इलाज के पुलिस अभिरक्षा में चिकित्सालय में भर्ती कराया है उसके फरार साथी की पुलिस तलाश कर रही है।

प्रधानमंत्री 18 जुलाई को एनआईआईओ सेमिनार ‘स्वावलंबन’ को संबोधित करेंगे

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New Delhi – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 18 जुलाई, 2022 को शाम 4:30 बजे डॉ अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में एनआईआईओ (नौसेना नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन) सेमिनार ‘स्वावलंबन’ को संबोधित करेंगे।

आत्मनिर्भर भारत का एक प्रमुख घटक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। इस प्रयास को आगे बढ़ाने के क्रम में प्रधानमंत्री कार्यक्रम के दौरान ‘स्प्रिंट चैलेंज’ का अनावरण करेंगे, जिसका उद्देश्य भारतीय नौसेना में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के एक भाग के रूप में, एनआईआईओ ने रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) के साथ मिलकर भारतीय नौसेना में कम से कम 75 नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों/उत्पादों को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस सहयोगी परियोजना का नाम स्प्रिंट (आईडेक्स, एनआईआईओ और टीडीएसी के माध्यम से आर एंड डी में उत्कृष्टता को समर्थन देना) है।

सेमिनार का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारतीय उद्योग और शिक्षाजगत को इस कार्यक्रम से जोड़ना है। दो दिवसीय सेमिनार (18-19 जुलाई) उद्योगजगत, शिक्षाजगत, सेना और सरकार के प्रतिनिधियों को रक्षा क्षेत्र के लिए विचार-विमर्श करने और सिफारिशों देने के लिए एक साझा प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। नवाचार, स्वदेशीकरण, आयुध और विमानन विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। सेमिनार के दूसरे दिन सरकार के सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में आउटरीच पर चर्चा की जाएगी।

अब पूरा हिन्दुस्तान यूपी के प्रति बड़े अच्छे भाव से देख रहा है, आपको आनंद हो रहा है कि नहीं हो रहा है? – पीएम मोदी

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Bundelkhand Express News: पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शनिवार को जालौन (Jaluan) में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway) का उद्घाटन किया. वह सुबह ही विशेष विमान से कानपुर (Kanpur) एयरपोर्ट पहुंचे जहां सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उनका स्वागत किया था. इसके बाद वह जालौन के लिए रवाना हो गए. बता दें कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पीएम मोदी की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है जिसका शिलान्यास उन्होंने ही दो साल पहले किया था.

2020 में पीएम मोदी ने किया था शिलान्यास

पीएम नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2020 में एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था जिसे फरवरी 2023 में पूरा किया जाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोरोना संकट के बावजूद इसे 8 महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है. एक्सप्रेसवे के निर्माण से सरकार और इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों में उत्साह है वहीं विपक्ष विशेषकर समाजवादी पार्टी लगातार हमलावर रही है.

दौरे से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम

उधर, पीएम मोदी के दौरे से पहले सुरक्षा चाक-चौबंद की गई. पीएसी पुलिस और अर्धसैनिक बलों को संवेदनशील इलाकों पर तैनात किया गया . शीर्ष पुलिस अधिकारी सीसीटीवी और पीटीजेड कैमरे के जरिए निगरानी रख रहे थे. उल्लेखनीय है कि जून में पीएम मोदी के कानपुर दौरे के दिन हिंसक घटनाएं हुई थीं और इसके बाद से ही ज्यादा सतर्कता बरती गई है. ऐसे में कानपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियों को अंजाम दिया और अराजक तत्व किसी तरह की अप्रिय घटना को अंजाम न दे पाएं, इसके लिए भी सभी जरूरी तैयारी की गई.

296 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की यह है खासियत

296 किलोमीटर के दायरे में फैले एक्सप्रेसवे से अब दिल्ली से चित्रकूट जाने का समय लगभग आधा हो जाएगा. पहले जहां 12 से 14 घंटे लगते थे वहीं यह दूरी अब 6 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. बताया जाता है कि इस एक्सप्रेसवे की जमीन खरीदने में 2200 करोड़ रुपये लगे थे और निर्माण 14,850 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. एक्सप्रेसवे की दूसरी खासियत यह है कि इस पर 15 से ज्यादा फ्लाईओवर, 10 से अधिक बड़े पुल, 250 से अधिक छोटे पुल, 6 टोल प्लाजा और चार रेलवे पुल मौजूद हैं.

प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

भारत, हर साल करोड़ों रुपए के खिलौने, दुनिया के दूसरे देशों से मंगाता रहा है। अब बताइए छोटे-छोटे बच्चों के लिए छोटे-छोटे खिलोने ये भी बाहर से लाए जाते थे। जबकि भारत में खिलौने बनाना तो पारिवारिक और पारंपरिक उद्योग रहा है, पारिवारिक व्यवसाय रहा है। उसे देखते हुए मैंने भारत में खिलौना उद्योग को नए सिरे से काम करने का आग्रह किया था। लोगों से भी भारतीय खिलौनों को खरीदने की अपील की थी। इतने कम समय में सरकार के स्तर पर जो काम करने जरूरी था, वो भी हमने किया। इन सबका नतीजा ये निकला कि आज और हर हिन्दुसतानी को गर्व होगा, मेरे देश के लोग सच्ची बात को कैसे दिल से ले लेते हैं इसका ये उदाहरण है। इस सबका नतीजा ये निकला कि आज विदेश से आने वाले खिलौनों की संख्या बहुत बड़ी मात्रा में कम हो आई है। मैं देशवासियों का आभार व्यक्त करता हूं। इतना ही नहीं, भारत से अब बड़ी संख्या में खिलौने, विदेश भी जाने लगे हैं। इसका लाभ किसे मिला है? खिलौने बनाने वाले हमारे ज्यादातर साथी गरीब परिवार हैं, दलित परिवार हैं, पिछड़े परिवार हैं, आदिवासी परिवार हैं। हमारी महिलाएं खिलौने बनाने के काम में जुड़ी रहती हैं। इस उद्योग से हमारे इन सब लोगों को लाभ हुआ है। झांसी, चित्रकूट, बुंदेलखंड में तो खिलौनों की बड़ी समृद्ध परंपरा रही है। इन्हें भी डबल इंजन की सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है।

एक समय था जब माना जाता था कि यातायात के आधुनिक साधनों पर पहला अधिकार सिर्फ बड़े – बड़े शहरों का ही है। मुंबई हो, चेन्नई हो, कोलकाता हो, बैंगलुरू हो, हैदराबाद हो, दिल्ली हो सबकुछ उनकों ही मिले। लेकिन अब सरकार की बदली है, मिजाज भी बदला है और ये मोदी है, ये योगी है, अब उस पुरानी सोच को छोड़कर उसे पीछे रखकर हम एक नए तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।

साल 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी के जो काम शुरू हुए, उनमें बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों को भी उतनी ही प्राथमिकता दी गई है। ये बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, औरैया और इटावा से होकर गुजर रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ के साथ ही बाराबंकी, अमेठी, सुलतानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से गुजर रहा है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, अंबेडकरनगर, संत कबीरनगर और आजमगढ़ को जोड़ता है। गंगा एक्सप्रेसवे- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ने का काम करेगा।

दिखता है कितनी बड़ी ताकत पैदा हो रही है। उत्तर प्रदेश का हर कोना नए सपनों को लेकर के, लए संकल्पों को लेकर के अब तेज गति से दौड़ने के लिए तैयार हो चुका है, और यही तो सबका साथ है, सबका विकास है। ना कोई पीछे छूटे, सब मिलकर आगे बढ़ें, इसी दिशा में डबल इंजन की सरकार  लगातार काम कर रही है। यूपी के छोटे-छोटे जिले हवाई सेवा से जुड़ें, इसके लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है।

बीते कुछ समय में प्रयागराज, गाजियाबाद में नए एयरपोर्ट टर्मिनल बनाए गए, कुशीनगर में नए एयरपोर्ट के साथ ही नोएडा के जेवर में एक और इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर काम चल रहा है। भविष्य में यूपी के कई और शहरों को, वहां भी हवाई रूट से जोड़ने की कोशिश हो रही है। ऐसी सुविधाओं से पर्यटन उद्योग को भी बहुत बल मिलता है। और मैं जब आज यहां मंच पर आ रहा था तो उससे पहले मैं इस बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का प्रेजेंटेशन देख रहा था एक मॉडयूल लगाया वो देख रहा था, और मैंने देखा कि इस एक्सप्रेसवे के बगल में जो-जो स्थान हैं वहां पर कई सारे किले हैं, सिर्फ झांसी का एक किला है ऐसा नहीं, कई सारे किले हैं।

आपमें से जो विदेश कि दुनिया जानते हैं उनको मालुम होगा, यूरोप के कई देश ऐसे हैं जहां पर किले देखने का एक बहुत बड़ा टूरिज्म उद्योग चलता है और दुनिया के लोग पुराने किले देखने के लिए आते हैं। आज बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने के बाद मैं योगी जी की सरकार को कहुंगा कि आप भी इन किलों को देखने के लिए एक शानदार सर्किट टूरिज्म बनाइये, दुनियाभर के टूरिस्ट यहां आए और मेरे बुंदेलखंड की इस ताकत को देखें। इतना ही नहीं मैं आज योगी जी से आग्रह एक और करुंगा, आप उत्तरप्रदेश के नौजवानों के लिए इस बार जब ठंड की सीजन शुरू हा जाए, मौसम ठंडी का शुरू हो जाए तो किले चढ़ने की स्पर्धा आयोजित किजिए और परंपरागत रास्ते से नहीं कठिन से कठिन रास्ता तय कीजिए और नौजवान को बुलाइये कौन जल्दी से जल्दी चढ़ता है, कौन किले पर सवार होता है।

आप देखने उत्तर प्रदेश के हजारों नौजवान इस स्पर्धा में जुड़ने के लिए आ जायेंगे और उसके कारण बुंदेलखंड में लोग आएंगे, रात को मुकाम करेंगे, कुछ खर्चा करेंगे, रोजी-रोटी के लिए बहुत बड़ी ताकत खड़ी हो जाएगी। साथियों, एक एक्सप्रेसवे कितने प्रकार के कामों को अवसर का जन्म दे देता है।

डबल इंजन की सरकार में आज यूपी, जिस तरह आधुनिक हो रहा है, ये वाकई अभूतपूर्व है। जिस यूपी में जरा याद रखना दोस्तों मैं जो कह रहा हूं। याद रखोगे? याद रखोगे? जरा हाथ ऊपर करके बताओ याद रखोगे? पक्का याद रखोगे? बार-बार लोगों को बताओगे? तो याद रखिये जिस यूपी में सरयू नहर परियोजना को पूरा होने में 40 साल लगे,  जिस यूपी में गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट 30 साल से बंद पड़ा था, जिस यूपी में अर्जुन डैम परियोजना को पूरा होने में 12 साल लगे, जिस यूपी में अमेठी रायफल कारखाना सिर्फ एक बोर्ड लगाकर के पड़ा हुआ था। जिस यूपी में रायबरेली रेल कोच फैक्ट्री डिब्बे नहीं बनाती थी,  सिर्फ डिब्बों का रंग-रौगन करके काम चला रही थी, उस यूपी में अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतनी गंभीरता से काम हो रहा है, कि उसने अच्छे-अच्छे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है दोस्तो। पूरे देश में अब यूपी की पहचान बदल रही है। आपको गर्व होता है कि नहीं होता है? आज यूपी का नाम रोशन हो रहा है आपको गर्व हो रहा है कि नहीं हो रहा है? अब पूरा हिन्दुस्तान यूपी के प्रति बड़े अच्छे भाव से देख रहा है, आपको आनंद हो रहा है कि नहीं हो रहा है?