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सुर झंकार द्वारा मुंबई सिनेमा पुरस्कार 2022 का आयोजन सम्पन्न

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डॉ राजन हांडा, ममता श्रीवास्तव, दिलीप सेन, अगम कुमार निगम और कमल कुमार हंसराज सहित अन्य हस्तियों की रही उपस्थिति

मुम्बई। सुर झंकार कल्चरल सोसाइटी द्वारा मुम्बई सिनेमा अवार्ड 2022 का भव्य आयोजन मुम्बई के रंगशारदा में किया गया जहां मुख्य अतिथि डॉ राजन हांडा थे। ममता श्रीवास्तव द्वारा आयोजित इस पुरस्कार समारोह में दिलीप सेन, अली खान, आरती राज़दान, अगम कुमार निगम और कमल कुमार हंसराज (सोनोटेक कंपनी) सहित कई मेहमान मौजूद रहे, जिन्हें सम्मानित किया गया।
गणेश वंदना से इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सिंगर सुभाष कश्यप ने गीत “तू गंगा की मौज” सुनाया तो महेंद्र शर्मा ने “है दुनिया उसी की” गीत गाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। संजीव सूरी ने “इश्क में हम तुम्हे क्या बताएं” और ओम चतुर्वेदी ने “जो तुमको हो पसन्द वही बात कहेंगे” गाया।
सुरीली और वर्षा ने गीत ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’ पर डांस किया। सुरीली इस कार्यक्रम के आर्गेनाइजर ममता की बेटी भी हैं।
सोनू निगम के पिता अगम कुमार निगम ने “रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ” गाया।


सिंगर उषा तिमोथी ने एक गीत ‘जब जब चांद निकला, मुझे तुम याद आए गाया’ जो तकदीर फ़िल्म के लिए उन्होंने राजश्री प्रोडक्शन के लिए गाया था। उषा ने कहा कि मोहम्मद रफी ने मेरा नाम इस गीत के लिए सुझाया था। अगम कुमार निगम के साथ उषा ने ‘बेखुदी में सनम उठ गए जो कदम’ गाया।
उषा ने ‘दिल ने पुकारा और हम चले आए’ गीत भी गाया। वहीं कत्थक नृत्य में पीएचडी डॉ साक्षी मदान ने डांस पेश किया।
ऑर्गनाइजर ममता श्रीवास्तव ने रफी और लता को ट्रीब्यूट पेश किया। ममता की एक खूबी यह भी यह है कि वह दिव्यांगों को संगीत सिखाती हैं। ममता श्रीवास्तव ने गीत गाया “चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गए।”
इस प्रोग्राम में करण राज़दान की आने वाली फिल्म हिंदुत्व का भी प्रोमोशन हुआ और फ़िल्म का टाइटल सांग दिखाया गया। करण राज़दान का अवार्ड आरती राज़दान ने लिया।
सुर झंकार संस्था द्वारा रंग शारदा सभागार में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में कमल रहेजा ने जबरदस्त एंकरिंग करते हुए दर्शकों को बांध कर रखा। कमल ने करण राज़दान की आने वाली फिल्म हिंदुत्व में एक किरदार भी निभाया है।
मुम्बई सिनेमा अवार्ड 2022 से वाइस ओवर आर्टिस्ट संजय केनी को भी सम्मानित किया गया उन्होंने स्टेज मुन्ना और सर्किट की आवाज़ में मिमिक्री भी की। मिस विनी राणा को उनकी अपकमिंग वेब सीरीज हनीमून डायरी के लिए बेस्ट प्रोमिसिंग न्यूकमर ऎक्ट्रेस के रूप में सम्मानित किया गया।
सिंगर उषा भी मुम्बई सिनेमा अवार्ड 2022 से सम्मानित हुईं। डॉ शैलेन्द्र श्रीवास्तव, राजश्री प्रोडक्शन से पीके गुप्ता, विजय उपाध्याय, अली खान को भी पुरुस्कार प्रदान किया।
संगीतकार दिलीप सेन ने अवार्ड लेने के बाद कहा कि मुम्बई सिनेमा अवार्ड की ऑर्गनाइजर ममता श्रीवास्तव का यह बेहतरीन प्रयास है।
संजय केनी, ऎक्ट्रेस तृप्ति राजपूत, अगस्त्य आनंद, संजीव सूरी, सुभाष कश्यप, महेंद्र शर्मा, वसंत भंडारी, ऎक्ट्रेस मिनी बंसल को भी इस अवार्ड से सम्मानित किया गया तो वहीं सुधीर गायकवाड़ ने करीना का अवार्ड लिया। मधु भारती, प्रदीप जैन और अभिलाषा शर्मा को भी पुरुस्कार मिला। खास बात यह रही कि दिव्यांग कलाकारों की सहायता के लिए इस प्रोग्राम का आयोजन किया गया। अमरीका में रहने वाली भारतीय मूल की सिंगर अल्का भटनागर का अवार्ड रमाकांत मुंडे ने लिया। एक दिव्यांग कलाकार ने डांस परफॉर्म करके सबका दिल जीत लिया।
पुरस्कार समारोह के प्रचार की जिम्मेदारी रमाकांत मुंडे (मुंडे मीडिया) ने बखूबी निभाई।

स्कूटी शो रूम में भीषण आग, 8 जिंदा जले, कई अस्पताल में भर्ती

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इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की खबरों के बाद अब इसके एक शोरूम में ही आग लगने की घटना सामने आई है। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई घायल हो गए हैं। सिकंदराबाद के मोंडा मार्केट इलाके में सोमवार रात इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में भीषण आग लग गई। पुलिस ने पुष्टि की है कि आग में दो महिलाओं सहित अब तक 8 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। घायल लोगों को इलाज के लिए पास के गांधी और यशोदा अस्पतालों में भर्ती कर दिया गया है। इस घटना से जुड़ी कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वहीं, हैदराबाद के नॉर्थ जोन के डीसीपी ने जानकारी दी है कि इस आग की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है।

वहीं, अधिकारियों को अंदेशा है कि ये आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है। पार्किंग एरिया, शोरूम और बेसमेंट में खड़े वाहनों में आग लग गई। देखते ही देखते चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया। होटल के कर्मचारियों और मेहमानों ने आग और धुएं को निकलते देखा और दमकल विभाग को सूचित किया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इमारत की खिड़कियों से ही बाहर निकलने लगे तो कुछ कूदने लगे। कई लोग अंदर घुटन से भी मरे हैं।

इस इमारत में केवल एक ही प्रवेश द्वार होने के कारण कुछ लोग इसमें फंस गए और उनकी मौत हो गई। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची और बचाव कार्य जारी है। दमकलकर्मियों ने सीढ़ी का इस्तेमाल कर ऊपरी मंजिलों में फंसे लोगों को बचाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास की इमारतों से लोगों को बाहर निकाला।

पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान पद्मश्री दिलीप वेंगसरकर ने स्कूली क्रिकेटरों के लिए बनी,’इंडियनस्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ की विदिवत घोषणा की है

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पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान पद्मश्री दिलीप वेंगसरकर ने स्कूली क्रिकेटरों के लिए बनी,’इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट’ की विदिवत घोषणा की है

हैदराबाद: एक नए नेशनल क्रिकेट बोर्ड ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट'(आईएसबीसी)(ISBC )की शुरुआत की गई।आईएसबीसी एक गैर-लाभकारी संगठन है,जोकि पूरे भारत में युवा क्रिकेट प्रतिभाओं की तलाश और प्रशिक्षित करेगी,खास करके ग्रामीण इलाकों में छुपी और होनहार प्रतिभाओं को नया भविष्य और मौका देगी। जिसकी घोषणा के लिए हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में सोमवार १२ सितंबर २०२२ को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। जिसकी घोषणा और बोर्ड की जानकारी भारतीय क्रिकेट के दिग्गज, पूर्व कप्तान,मुख्य चयनकर्ता तथा इस बोर्ड के मुख्य सलाहकार पदमश्री दिलीप वेंगसरकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका,अध्यक्ष अंकेश राठौर, सेक्रेटरी पदम राज पारख तथा बोर्ड के सभी पदाधिकारी व सदस्यों ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और कार्यक्रम को सफल बनाया।
             इस अवसर पर बोर्ड के फाउंडर व सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका ने कहा,” आईएसबीसी ने स्कूली क्रिकेटरों को तैयार करने में प्रवेश किया है।2011 में तेलंगाना के ग्रामीण क्रिकेटरों के लिए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ तेलंगाना (CAT) द्वारा ‘तेलंगाना स्कूल प्रीमियर लीग'(TSPL) 5120 स्कूली क्रिकेटरों के साथ एक बड़ी सफलता थी ,जिसके तहत तेलंगाना राज्य के 31 जिलों ने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और 550 मैच हुए। जिसमें ग्रामीण कुछ असाधारण क्रिकेट प्रतिभाओं को देखा और उनको विकसित करने के लिए ‘इंडियन स्कूल्स बोर्ड फॉर क्रिकेट” का आज शुरुवात की है। “

                   पूर्व क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर ने इस अवसर बोर्ड के लोगो का धन्यवाद किया और कहा,” यह एक अच्छी पहल है।इससे हमारे युवा पीढ़ी के बच्चों को एक अच्छा अवसर व प्लेटफार्म मिलेगा। अच्छे व टैलेंट लोगों को सही दिशा मिलेगी,खासकर के जो ग्रामीण इलाकों में छुपी और वंचित प्रतिभाएं है,उनको सुनहरा मौका मिलेगा।”
         अध्यक्ष अंकेश राठौर ने कहा,”भारत को स्कूली क्रिकेटरों को तैयार करने के लिए एक संगठित ढांचे की जरूरत थी,जो कि आईएसबीसी पूरा करेगा।”
         सेक्रेटरी पदम राज पारख ने कहा,” हमें 19 देशों का एक स्कूली समूह बनाकर खुशी हो रही है, जिसके तहत हम 2023 के अंततक में “स्कूल वर्ल्ड कप” आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।”
          आईएसबीसी 2023/24 के लिए जुलाई/अगस्त के महीने से क्रिकेट गतिविधियां शुरू करेगा।के बाद दिसंबर 2022 में अनुसूची और भागीदारी की घोषणा की जाएगी। आईएसटीएल (ISTL )के तहत शैक्षिक छात्रवृत्तियां होंगी,भारत और विदेश में आईसीसी स्तर की अकादमियों में विशेषज्ञ क्रिकेट प्रशिक्षण शुरू करेगा।इन सदस्यों को सर्वसम्मति से आईएसबीसी के लिए चुना गया,जोकि 3 साल की अवधि के लिए है।अध्यक्ष अंकेश राठौर (राजस्थान), उपाध्यक्ष संध्या अग्रवाल (मध्य प्रदेश),वाई सुदर्शन बाबू (आंध्र प्रदेश),संग्राम लोंकर (महाराष्ट्र),सचिव पदम राज पारख (राजस्थान),संयुक्त सचिव मोहम्मद युसूफ (तमिलनाडु),डॉ. एस सेंथिल कुमार (तमिलनाडु),कोषाध्यक्ष डी. श्रीनिवास रेड्डी (आंध्र प्रदेश),कार्यकारी समिति जयेश गांधी (महाराष्ट्र),वर्षा शर्मा (मध्य प्रदेश),टी श्रीनिवास रेड्डी (आंध्र प्रदेश), सीएच विजय कुमार (आंध्र प्रदेश),अमित बोकाडिया (राजस्थान),अध्यक्ष :- अभिषेक आवला (तेलंगाना),,संस्थापक-सीईओ सुनील बाबू कोलनपाका (तेलंगाना), प्रमुख संरक्षक भाजपा राज्यसभा सांसद डॉ के लक्ष्मण, संरक्षक जैतारण से भाजपा विधायक श्री अविनाश जी गेहलोत इत्यादि है।

गौशालाओं में सहारा न मिलने से अधितांश गौ-वंश सड़कों पर रहते हैं – हर साल सड़कों पर मारी जा रहीं 500 से ज्यादा गाय

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छतरपुर। गौशालाओं में सहारा न मिलने से अधितांश गौ-वंश सड़कों पर रहते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। दुर्घटनाएं रोज हो रही हैं, जिससे इंसान घायल हो रहे हैं, कई बार जान भी जा रही है। गौ-वंश या तो घायल होकर जिंदगीभर के लिए अपाहिज हो जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनकी मौत हो जाती है, या दुर्घटना के दिन ही मारे जाते हैं। छतरपुर जिले में ही हर साल तमाम छोटे-बड़े हादसों के कारण 500 से ज्यादा गौवंश की मृत्यु की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि हादसों के आंकड़ों का कोई सरकारी संग्रहण नहीं किया जा रहा है लेकिन गौसेवा के लिए काम करने वाले गौ चिकित्सक बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हादसों के कारण बड़ी संख्या में गौवंश मारा जा रहा है। छतरपुर में गौ चिकित्सालय संचालित करने वाले रविराज सिंह ने बताया कि हर साल लगभग 500 से 700 गायों का वे उपचार कर रहे हैं जिनमें 500 से ज्यादा गाय मारी जा रही हैं।
सड़क पर बैठने से हो रहे हादसे
गायों के मरने के आंकड़े बरसात के सीजन में तेजी से बढ़ जाते हैं। आवारा गौवंश खेतों की जगह सूखी हुई सड़कों पर बैठता है जहां तेज रफ्तार वाहनों के कारण इनकी जान चली जाती है। कई बार हादसों के कारण वाहन चालक भी मारे जाते हैं। इनके भी वर्गीकृत आंकड़े यातायात पुलिस के द्वारा एकत्रित नहीं किए जा रहे। कुल मिलाकर सड़कों पर होने वाले हादसों का यह सिलसिला तब तक नहीं थम सकता जब तक इस गौवंश के पुर्नस्थापन के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाएं।
100 गौशालाएं, लेकिन नहीं मिल रहा सहारा
जिले के गौवंश के पालन के लिए गोशालओं का निर्माण किया गया है। पूरे जिले में 170 गोशालाएं स्वीकृति हुई, जिसमें से 100 बन चुकीं हैं, लेकिन जो गोशालाएं बनकर तैयार हो गई है। उनमें गोवंश को सहारा नहीं मिल पा रहा है। कुछ गोशालाएं तो शुरु होने के बाद बंद हो गई। ऐसे में लाखों रुपए खर्च के बाद भी गोवंश सड़कों में मारे-मारे फिर रहे हैं। गोवंश हर रोड़ सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। इन घटना में गौवंश के साथ-साथ वाहन चालकों को भी छति हो रहे हैं।
2019 से हर साल बन रही गोशालाएं
छतरपुर जिले में वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायतों में लगभग 29 गौशालाएं 28 लाख की लागत से बनाई गई थीं। इनमें बकस्वाहा में 4, बड़ामलहरा में 3, बिजावर में 5, राजनगर में 4, छतरपुर में 3, नौगांव में 6, गौरिहार में एक, लवकुशनगर में 3 गौशालाएं बनाई गई हैैं। वहीं वर्ष 2020-21 में करीब 70 से अधिक गौ-शालाएं मनरेगा से बनाई गई हैं। फिर भी गौ-वंश को आसरा नहीं मिल पा रहा है।
अनुदान वाली 12 गोशालाएं
छतरपुर जिले में लगभग साढ़े 5 लाख गोवंश हैं, जिसमें ज्यादातर आवारा है। जिले में 12 गौशालाएं अनुदान से संचालित हैं जिन्हें 20 रूपए प्रति जानवर प्रति दिन के हिसाब से सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। हालांकि इनमें से सिर्फ 8 गौशालाएं ही ऐसी हैं जो सही तरीके से संचालित हो रही हैं। ये 8 गौशालाएं जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम राधेपुर, महोबा रोड पर स्थित दयोदय गौशाला, बारीगढ़ क्षेत्र में धंधागिरी गौशाला, सिजई में परमानंद गौशाला, लवकुशनगर क्षेत्र में कन्हैया गौशाला, नौगांव क्षेत्र में बुन्देलखण्ड गौशाला, बक्स्वाहा में पड़रिया गौशाला एवं बिजावर के ग्राम गुलाट में नंदिनी गौशाला शामिल है। इनमें से दो बुन्देलखण्ड गौशाला एवं सिजई की परमानंद गौशाला में साढ़े चार सौ से अधिक मवेशी रहते हैं।
गौवंश की सेवा कर रहे संस्थान, सरकारी मदद से दूर
छतरपुर जिले में अनेक संस्थान ऐसे भी हैं जो बगैर सरकारी मदद के गौवंश की सेवा कर रहे हैं। छतरपुर के साईं मंदिर के समीप गौसेवक रविराज सिंह और उनकी 15 सदस्यीय टीम एक गौ चिकित्सालय चला रही है। यह टीम सड़कों पर हादसों के शिकार गौवंश की सूचना मिलने पर अपने वाहन से उसका रेस्क्यू करते हैं और फिर उसे उपचारित करते हैं। रविराज सिंह बताते हैं कि 15 सदस्य आपस में सेवा का समय निर्धारित कर लेते हैं एवं पशु चिकित्सक डॉ. दिनेश गुप्ता के मार्गदर्शन में गायों का उपचार करते हैं।

एलोपैथी के साथ आयुर्वेद और होम्योपैथी में भी है लंपी का इलाज

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भोपाल, 12 सितंबर । मध्यप्रदेश गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन कार्य परिषद के अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने प्रदेश की गौ-शालाओं में कार्यरत गौ-सेवकों से कहा कि वे लंपी पीड़ित बीमार गाय की सेवा करने के बाद अच्छी तरह साबुन से हाथ धोएँ, उसके बाद ही कोई अन्य कार्य करें। उन्होंने कहा कि लंपी चर्मरोग मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन यदि गौ-सेवक बीमार गाय की सेवा वाले हाथों से ही दूसरी गाय को स्पर्श करते हैं तो उस गाय को यह संक्रमण फैल सकता है।
स्वामी जी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि लंपी के लक्षण मिलते ही तुरंत निकट के पशु चिकित्सालय या औषधालय में सम्पर्क करें। एलोपैथी सहित आयुर्वेद और होम्योपैथी में भी इसका इलाज है। संक्रमित पशु 10 से 12 दिन में ठीक हो जाता है। प्रभावित गाय को गौमूत्र, गोबर और मट्ठा इन तीनों पदार्थों को पानी में मिला कर गाय को स्नान कराने से भी लाभ मिलता है। पानी पीने की नाँद में चूने की पुताई करें और पानी में सेंधा नमक मिलाएं। पानी में नीम की पत्तियाँ और थोड़ी पिसी हल्दी मिला कर उबालें और गुनगुना होने पर गाय को स्नान कराने से भी राहत मिलती है।
उन्होंने कहा कि पंचगव्य डॉक्टर एसोसिएशन चेन्नई के अनुसार 100 मिलीलीटर नीम तेल, 100 ग्राम पिसी हल्दी, 10 मि.ली. तुलसी पत्ता रस और 20 मि.ली. एलोवीरा का रस मिला कर बनाये गये पेस्ट को घाव पर लगाने से एक हफ्ते में रोगी गाय ठीक हो जाती है। पेस्ट के साथ एक मुठ्ठी तुलसी के पत्ते भी गाय को खिलाने चाहिये। होम्योपैथी चिकित्सक के अनुसार छोटी बछिया को दवा बेलाडोना-200 और बड़ी गाय को बेलाडोना-1000 जीभ पर 7-7 बूँदें दिन में 3 बार दी जा सकती है। यह दवा केले में डाल कर भी खिलाई जा सकती है। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने पशुपालकों से कहा है कि चिकित्सा के पूर्व संबंधित चिकित्सक या वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

लंपी से हो रही गायों की मौत को लेकर पुलिस शहीद स्मारक पर धरना

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जयपुर, 12 सितंबर । सोमवार को जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष नारायण राम चौधरी ने लंपी से हो रही गायों की मौत को लेकर पुलिस शहीद स्मारक पर धरना दिया।
उन्होंने कहा कि आज राजस्थान प्रदेश में लंपी बीमारी ने भयंकर रूप ले लिया। लाखों गोवंश इस बीमारी से पीड़ित हैं एवं लाखों गोवंश काल के मुंह में समा गए हैं। अकेले बीकानेर जिले में 50 हजार से अधिक गोवंश मरने की सूचना है। इस बीमारी से ग्रस्त गौमाता तड़प तड़प कर मर रही है। सरकार संवेदनहीन हो गई हैं गहरी नींद में सो रही है और गायों को बचाने में नाकामयाब रही है। अगर सरकार गायों को नहीं बचा सकती तो नैतिकता के आधार पर उन को इस्तीफा दे देना चाहिए। सभी नेता फेसबुक पर पोस्ट डालकर गो सेवा कर रहे हैं अगर गायों को बचाना है तो हमारी नाौ मांगे हैं जिस पर सरकार को तुरंत गौर करके कार्यवाही करनी चाहिए। जस तरह से गाय तड़प तड़प के मर रही है ऐसी गायों की हाय सरकार को लगेगी अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया।
शहीद स्मारक से रैली के रूप में सिविल लाइन फाटक की तरफ बड़ी रहे थे कि पुलिस ने रोक लिया और गतिरोध हो गया प्रदेश अध्यक्ष चौधरी मुख्यमंत्री से वार्ता करने के लिए उड़ गए। उसके बाद प्रशासन ने संपर्क किया उसके बाद मुख्यमंत्री से बजाएं मुख्य सचिव से वार्ता करने पर सहमत हो गई । मुख्य सचिव से वार्ता होने के बाद सभी मांगों पर सहमति जताई गई। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया।

ओमप्रकाश पांडेय लिखित ‘आँचल’ कविता संग्रह को मिली अलका पांडेय और पवन तिवारी की सराहना

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मुम्बई। कवि ओमप्रकाश पांडेय के प्रथम कविता संग्रह ‘आँचल’ का विमोचन मुम्बई भाषा परिषद के तत्त्वावधान में 10 सितम्बर 2022 की शाम गरिमामय परिवेश में अनेकानेक कवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका अलका पांडेय ने की। मुख्य अतिथि थे
मुम्बई हिन्दी अकादमी के अध्यक्ष एवं एवं युवा साहित्यकार पवन तिवारी, विशेष अतिथि के रूप में समाजसेवी राम कुमार पाल, वरिष्ठ लेखक सेवासदन प्रसाद तथा आर के पब्लिकेशन के निदेशक रामकुमार के अपनी भूमिका का निर्वहन किया।
कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती वंदना के साथ वरिष्ठ गीतकार रामस्वरूप साहू ने किया।
लोकार्पण के बाद काव्य पाठ का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कविता पाठ करने वाले कवियों में नंदलाल क्षितिज, अरुण प्रकाश अनुरागी, पारमिता षड़ंगी, डॉ. पूनम पटवा, चन्द्रिका व्यास, काविश समर, रामपुरी, पवन तिवारी, डॉ वर्षा सिंह, रमाकान्त ओझा, लहरी, विश्वम्भर दयाल तिवारी, त्रिलोचन सिंह अरोरा, उदय नारायण सिंह निर्झर, सूर्यकांत शुक्ल आदि प्रमुख थे।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार संतोष साहू, मुम्बई अमरदीप के सम्पादक उपेंद्र पंडित, कलाकार संदीप कुमार का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम का शानदार संचालन डॉ वर्षा सिंह ने किया। कार्यक्रम का संयोजन आर के पब्लिकेशन के स्वामी राम कुमार ने किया।

भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ

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गाय देश में हमेशा से ही एक संवेनदशील मुद्दा रहा है और इस पर राजनीति होती रही है। मगर जिस समाज में गाय को पूजा जाता है, उसके लिए आस्था अगर कहने भर की हो, दिल से नहीं और वहां इसके लिए कोई कानून नहीं, मन में सच्चा दर्द नहीं हो तो वह कैसा समाज ?  हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय को गौ माता भी कहा जाता है। गौ माता के पूजन के बारे में वेदशास्त्रों, धर्मग्रंथों में क्या कहा गया है। इसलिए अगर किसी के हाथों गाय की हत्या हो जाती है तो यह घोर पाप माना जाता है।  फिर आज गाय की इतनी दुर्दशा हो रही है। जिसकी हम कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। गाय को रखने वाले लोग स्वार्थी हो गए हैं जब तक गाय दूध देती है। तब तक तो लोग उसे अपने पास रखते हैं और उसके बाद उसका दूध निकाल कर सड़कों पर आवारा रूप से छोड़ देते हैं।

लेकिन देश में कहीं भी उन गायों के लिए कोई प्रवाधान नहीं है, जिन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। नतीजन वे अक्सर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाती हैं। कई बार वे पोलिथीन खा जाती हैं, जिससे गंभीर रूप से बीमार हो जाती हैं। गोशालाओं की दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। अक्सर ही गोशालाओं में भूख से गायों के मरने की खबरें आती रहती हैं। गायों की देखभाल करने के लिए बनाई गई  गोशालाओं की दुर्दशा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके चारे और स्वास्थ्य का का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। जो गाय दूध देने के काबिल नहीं रहतीं, उन्हें कुछ लोग सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी सजा का प्रावधान होना चाहिए। गाय को लावारिस सड़क पर छोड़ देना भी सही नहीं है। अगर लावारिस गाय दुर्घटना का शिकार होकर मर जाए तो उसे भी गोवध ही माना जाना चाहिए। गाय महज एक जानवर नहीं है। यह भारतीय समाज के लिए आस्था भी है। कुछ लोग गोवध करके इस आस्था पर चोट करते हैं, जो नहीं होनी चाहिए। गाय के प्रति ये दोहरी नीति समझ से परे है। बहरहाल, गोवंश बचाया ही जाना चाहिए।

भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं। क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज तथाकथित गौभगत और गाय के नाम पर लूटकर खाने वाले चाहे वो कोई भी हो लगभग गायब है। (इक्का-दुक्का को छोड़कर)  मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए। क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियां फेल रही है। एक शाम गायों के नाम पर करोड़ों रुपए लेने वाले और गायो के ठेकेदार बागङबिल्ले सब कहा छुप गए? गायों की हो रही है दुर्दशा गाय रो-रो कर पूछ रही है, कहां गए वह गौ सेवक? कहां गई वह राजनीतिक पार्टियां जो मेरे नाम पर सरकार बना ली। कहां गए हो चंदा इकट्ठा करने वाले जो मेरे नाम पर करोड़ों रुपए कमा गए? कहां आज किसान की दुर्दशा हो रही है, उसका पालतू पशु गाय मर रही है लेकिन उसके बस की बात नहीं है।

चुनावी वादों से जितना नुकसान किसान के इस पशुधन गाय का हुआ है शायद ही किसी अन्य पशु का हुआ हो। करोड़ों रुपयों के बजट भी गाय के अच्छे दिन नहीं ला सके।  गौमाता की दुर्दशा का अंदाजा गौशालाओ व सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाओं में गाय की अकाल मृत्यु से लगाया जा सकता है। आज हालात ये है कि इस मूक पशु के संरक्षण की ज़िम्मेदारी लेने को कोई सरकार कोई संगठन तैयार नही, गाय सिर्फ राजनीति के नारों मे जरूर ज़िंदा है। सरकार चाहे तो सड़को, राजमार्गो व गली मोहल्लों में भूख-प्यास व बीमारियों से मरती गायों का ज़िला स्तर पर चारागाह व सरकारी भूमि मे संरक्षण कर सकती है, जँहा गोबर व गौमूत्र से जैविक खाद व जैविक कीटनाशक बनाए जा सकते हैं। सरकार गौमूत्र, वर्मी कम्पोस्ट व वर्मीवाश का उत्पादन कर सस्ती दरों पर किसानों को उपलब्ध करा सकती है।

गोबर व गौमूत्र मे सभी प्रकार के 16 पोषक तत्व, एमिनो एसिड्स, कार्बनिक पदार्थ, ह्यूमस व पर्याप्त नाईट्रोजन पाई जाती है जो कि फसलों के उत्पादन के लिए किसी वरदान से कम नही है। जीवामृत, घन जीवामृत, व अन्य जैविक तरल खाद भी गोबर और गौमूत्र से ही तैयार होती है। अगर सरकार इस व्यवस्था पर ध्यान दे और कार्य करे तो ये उत्पाद लघु व सीमांत किसानों को सस्ती दर पर सरकारी किसान केंद्रों व केवीके से उपलब्ध कराया जा सकता है। इस व्यवस्था से जैविक खेती के रकबे को भी बढ़ाया जा सकता है जिसके लिए राज्य व केंद्र सरकार वर्षो से प्रयासरत है । इससे रासायनिक दवा, कीटनाशक ओर रासायनिक खाद के खर्चे को भी कम किया जा सकता है और किसानो को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के साथ साथ आत्महत्या से भी बचाया जा सकता है ।

सरकारों ने सिर्फ कागजों में लीपापोती की धरातल पर कुछ नहीं किया। सब कुछ भगवान भरोसे है। गाय के नाम पर राजनीति चलती रहती है मगर जमीनी हकीकत यह है कि अक्सर मुद्दे उठाए जाते हैं लेकिन उसकी समस्याओं का निराकरण कभी नहीं होता। अगर देश में जिसने भी आज तक गाय नाम से कुछ न कुछ कमाया है, वो एक-एक गाय बचाने का जिम्मा ले तो गाय इस दुर्दशा से बच सकती है।

‘पहली बारिश में’ भीगे आसिम रियाज़ और निशा गुरगैन, आत्मा म्यूजिक से रिलीज हुआ वीडियो 

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मुम्बई। बिग बॉस फेम आसिम रियाज़ और सोशल मीडिया स्टार निशा गुरगैन की जोड़ी वाला नया गाना ‘पहली बारिश में’ आत्मा म्युज़िक द्वारा रिलीज कर दिया गया है जिसे श्रोताओं और दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह दिलों में हलचल मचा देने वाला सांग है और सभी युवाओं को यह गाना आकर्षित कर रहा है।
इस खूबसूरत गीत के निर्माता वसीम कुरैशी ने आसिम और निशा की तारीफ करते हुए बताया कि आसिम रियाज आज लाखों दिलों की धड़कन हैं और निशा सोशल मीडिया स्टार का दर्जा रखती हैं। मगर काम के प्रति दोनों बेहद संजीदा और काफी प्रोफेशनल हैं। इनकी बहुत ही प्यारी सी बॉन्डिंग सच्चे प्यार और इसकी आत्मा को पेश करती है। गाना बेशक आपको रोमांस के गहरे समंदर में डुबो देगा।
आत्मा म्युज़िक का वीडियो “पहली बारिश में” को एक स्टोरी और नरेशन के अनुसार शूट किया गया है।


सांग में एक प्रेमिका अपने प्रेमी की एक झलक पाने के लिए बेचैन है।
बता दें कि आत्मा म्यूजिक कुरैशी प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मुम्बई का एक पार्ट है और यह नई प्रतिभाओं को प्रोमोट करने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है। आत्मा म्युज़िक सबसे तेजी से बढ़ने वाला म्यूजिक लेबल है। इसका नया रोमांटिक म्युज़िक वीडियो ‘पहली बारिश में’ पहली बारिश के जादू और इसके साथ आने वाले प्यार और रोमांस के जादू को पेश करता है। गाने में सुंदर हिल स्टेशन और हरियाली के बैकग्राउंड में आसिम रियाज़ और निशा गुरगैन के बीच पनपते प्यार को दिखाया गया है।
काशी कश्यप ने इस गीत को कम्पोज़ किया है और भानु पंडित और मुकेश मिश्रा ने इसके बोल लिखे हैं। इस गीत का संगीत भानु पंडित ने दिया है।
गाने में आसिम रियाज़ और निशा की केमिस्ट्री का जादू दिख रहा है, जिसे नदीम अख्तर द्वारा निर्देशित किया गया है।
इस गीत को सुमित भल्ला और अनिता भट्ट ने दिल की गहराई से गाया है और इस का मेलोडियस संगीत दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
‘पहली बारिश में’ अलबम आत्मा म्युज़िक की प्रस्तुति है, और वसीम कुरैशी व गितेश चंद्राकर द्वारा निर्मित है। इसके सह-निर्माता अयूब कुरैशी, अख्तर खान, सचिन बेलदार, विकास तिवारी, डॉ. अनिल उपाध्याय, रवि प्रियांशु, अज़ान कुरैशी, मुहाफ़िज़ कुरैशी हैं। वहीं करण रमानी कंपनी के सीओओ हैं।

गौ सेवा करने वाले पर संकट, अफसरों पर बिफरे बजरंगी

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इंदौर। सड़कों पर नजर आने लगे आवारा पशुओं को लेकर नगर निगम सख्त हो गया है। बाड़े तोडऩे की कार्रवाई शुरू कर दी गई, जिस पर बजरंगी तिलमिला गए हैं। चेतावनी दी है कि जो दूध का व्यवसाय कर रहा है और सड़क पर गाय छोड़ रहा है, उस पर तोडफ़ोड़ करें, हमें आपत्ति नहीं पर घर में गाय पालकर सेवा करने वालों पर कार्रवाई की तो हम सड़क पर उतर आएंगे।
कल नगर निगम ने ह्मित नगर और कंडिलपुरा पर दो बाड़ों को तोडऩे की कार्रवाई की। इसके अलावा नगर निगम आयु€त प्रतिभा पाल ने कोंदवाड़ा सहित अन्य अधीनस्थों को बोल दिया है कि शहर में फिर से पशुओं के बाड़े तैयार हो रहे हैं। सड़कों पर आवारा पशु नजर आ रहे हैं। जांच कर सूची बनाएं और कार्रवाई करें। उसके बाद में निगम का अमला फिर से सक्रिय हो गया और जांच कर रहा है।
ऐसे घरों में भी पहुंच गया है, जहां पर हिंदू मान्यताओं के हिसाब से गाय की सेवा करने के लिए उसे पाला गया। उनको भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। ये बात बजरंगियों तक पहुंची। इस पर बजरंग दल के विभाग संयोजक तन्नू शर्मा व राजेश ङ्क्षबजवे ने निगम को चेतावनी दी है और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से आग्रह किया है कि वे निगम कर्मचारियों पर अंकुश लगाएं, जो निगम की छवि भी खराब कर रहे हैं। दल गौ सेवकों के समर्थन में खड़ा रहेगा। गौरतलब है कि पूर्व में भी कई बार बजरंग दल के कार्यकर्ता गौ रक्षा के मामले में खुलकर सामने आ चुके है। उस दौरान विवाद की स्थिति बन गई थी।