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किशोरी को अगवा कर किया सामूहिक दुष्कर्म

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मुरादनगर में किशोरी को अगवा कर किया सामूहिक दुष्कर्म

मुरादनगर में घर से दूध लेने निकली किशोरी को अगवा कर दो ई रिक्शा चालकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों ने दुष्कर्म के बाद किशोरी को दिल्ली की बस में बैठा दिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से नाजिम व जाहिद निवासी कस्बा मुरादनगर को गिरफ्तार कर लिया है।

डीसीपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि गाजियाबाद एएलटी सेंटर के पास मंगलवार रात करीब 12:30 बजे एक किशोरी घूम रही थी। पुलिस पिकेट ने किशोरी को अकेला देखा तो उससे बात की इस पर वह रोने लगी।

पुलिस पूछताछ में किशोरी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब चार बजे परिजनों ने किसी बात पर डांट दिया था, जिसके कारण वह परिजनों से नाराज थी। उन्होंने दुकान से दूध लेने भेजा था लेकिन वह वापस घर नहीं लौटी। बीच रास्ते में ई रिक्शा चालक अगवा कर ले गये।

करीब चार घंटे तक वह किशोरी को घुमाते रहे। रात होने पर जलालपुर रोड पर एक खाली प्लाट में ले गये और दोनों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर आरोपियों ने उसकी पिटाई भी की।

आरोपियों ने बैठाया दिल्ली की बस में

हैवानियत के बाद आरोपियों ने किशोरी को दिल्ली जाने वाली बस में बैठा दिया। किशोरी गाजियाबाद बस से उतर गई। बताया गया है कि किराया न होने के कारण परिचालक ने किशोरी को बस से नीचे उतार दिया था। किशोरी पैदल ही एएलटी सेंटर के पास पहुंच गई थी।

सीसीटीवी फुटेज की मदद से पकड़े गए दोनों आरोपी
डीसीपी डॉ. ईरज राजा ने बताया कि पुलिस ने ईदगाह रोड, जलालपुर रोड, मेन कस्बा रोड, मेन बाजार के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। किशोरी ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की। 

गैस जलाने से हुए धमाके से महिला और गाय झुलसी

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सुबह गैस जलाते ही हुआ धमाका, महिला और गाय झुलसे, ढह गया मकान

गुरुग्राम से सटे पटौदी खंड के गांव गुढाना में सुबह एक वृद्ध महिला ने जैसे ही गैस जलाई वहां तेज धमाका हो गया। धमाके के बाद लगी आग में महिला बुरी तरह झुलस गई साथ ही उसकी गाय भी झुलस गई।

महिला की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं गाय को झज्जर गोशाला में उपचार के लिए भेजा गया है। धमाका इतना तेज था कि महिला का मकान भी ढह गया। बताया जा रहा है कि यह हादसा गैस लीकेज के चलते हुआ।

आतंकवाद को सीमापार समर्थन : सेनाध्यक्ष

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आतंकवाद को सीमापार से मिल रहा समर्थन, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हम तैयार : सेनाध्यक्ष

सेनाध्यक्ष ने कहा, उत्तरी सीमाओं पर स्थिति स्थिर है लेकिन अप्रत्याशित है। हम सात मुद्दों में से पांच को हल करने में सफल रहे हैं। हमने सैन्य और राजनयिक दोनों स्तरों पर बात करना जारी रखा हुआ है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास पर्याप्त भंडार है।

सेना दिवस से पहले सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने कहा कि इस बार का आयोजन खास है। क्योंकि, यह आजादी का 75वां साल है। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए। सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में कहा, फरवरी 2021 में हुआ संघर्ष विराम वहां पर अच्छी तरह से जारी है, लेकिन आतंकवाद और आतंकी ढांचे को सीमा पार से समर्थन अभी भी बना हुआ है। उन्होंने कहा, उत्तरी सीमाओं पर स्थिति स्थिर है लेकिन अप्रत्याशित है। हम सात मुद्दों में से पांच को हल करने में सफल रहे हैं। हमने सैन्य और राजनयिक दोनों स्तरों पर बात करना जारी रखा हुआ है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास पर्याप्त भंडार है। वहीं उन्होंने पूर्वोत्तर की स्थिति के बारे में कहा कि पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों में शांति है। आर्थिक गतिविधियों और विकास की पहल के अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने सेना दिवस के बारे में कहा, यह सेना दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यह आजादी का 75वां साल है।

चीनी सीमा पर दुश्मन के बराबर तैनानी
सेना प्रमुख ने कहा, उत्तरी सीमा पर विरोधी पक्ष की ओर से तैनाती जारी है। हमारे पास बराबर संख्या में सैनिक हैं। हमारी पूर्वी कमान के विपरीत चीन द्वारा सैनिकों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है लेकिन हम कड़ी नजर रख रहे हैं।

सेना में होंगे कई बदलाव 
सेनाध्यक्ष ने कहा, महिला अधिकारियों को भारतीय सेना की कोर ऑफ आर्टिलरी में कमीशन दिया जाएगा। इसके लिए हमने सरकार को प्रस्ताव भेजा है और हमें उम्मीद है कि इसे स्वीकार कर लिया जाएगा। हमारे पास आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (AMAR) भी है, जो युद्ध की स्थितियों से निपटने में मदद करेगा। यह देश में विभिन्न मार्शल आर्ट का एक समामेलन है। सेना प्रमुख ने कहा, हमने भारतीय सेना में कई बदलाव करने का फैसला किया है और यह अनिवार्य रूप से बल पुनर्गठन और अनुकूलन, आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन प्रबंधन से शुरू होने वाले पांच प्रमुख डोमेन में फैला हुआ है।

जोशीमठ में इमारतें बनाने में तोड़े गए कानून

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इमारतें बनाने में तोड़े गए कानून, जोशीमठ ने बेपर्दा कर दिया पहाड़ में बेतरतीब निर्माण का सच

जोशीमठ की दरकती इमारतों ने पहाड़ में बेतरतीब निर्माण की हकीकत को बेपर्दा कर दिया। जहां 12 मीटर से ऊपर की इमारत बनाने पर रोक हो। भूस्खलन क्षेत्र, 30 डिग्री स्लोप पर निर्माण प्रतिबंधित हो, वहां न कोई नियम चला और न कायदा। नगर पालिका से सेटिंग-गेटिंग कर अनुमति जारी होती रही और जोशीमठ की धरती पर बोझ बढ़ता चला गया।
आज तक विनियमित नहीं हुआ जोशीमठ
इतिहास के पन्नों को खंगालें तो जोशीमठ जैसे महत्वपूर्ण शहर को लेकर यूपी से लेकर उत्तराखंड तक की सरकारों की बेपरवाही नजर आती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों को विनियमित किया था लेकिन इसमें जोशीमठ नहीं था। राज्य बनने के बाद 2011 में भवन निर्माण एवं विकास विनियम आया। इसके बाद राज्य ने 2013 में अपने बायलॉज जारी किए। लेकिन आज तक जोशीमठ विनियमित नहीं हो पाया। हालात यह हैं कि यहां कैसे निर्माण हो, इसे समझने, देखने और लागू करने वाला कोई नहीं।
सात मंजिला भवनों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब
केंद्रीय बिल्डिंग बायलॉज और उत्तराखंड के 2011 व 2013 में जारी हुए बायलॉज को देखें तो पर्वतीय क्षेत्रों में 12 मीटर यानी चार मंजिल से अधिक ऊंचाई के भवन का निर्माण नहीं किया जा सकता। इतनी ऊंचाई भी तभी संभव है जबकि निर्माण वाले क्षेत्र का अध्ययन हुआ हो। जोशीमठ में इन कायदों को दरकिनार कर सात-सात मंजिला भवन बनाने के लिए संबंधित निकाय ने अनुमति जारी कर दी। सवाल यह है कि इतने बेतहाशा और बेतरतीब निर्माण का जिम्मेदार कौन है।
मास्टर प्लान होता तो हालात ऐसे न होते
जोशीमठ का मास्टर प्लान अब तैयार हो रहा है। अगर इससे पहले मास्टर प्लान बना होता तो शायद हालात ये न होते। दरअसल, किसी भी शहर का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए उसकी भौगोलिक, भूगर्भीय, जल स्त्रोत, सड़क, वनस्पतियों का ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा उस शहर की मिट्टी की जांच वैज्ञानिकों से कराके यह देखा जाता है कि वह कितना भार वहन कर सकती है। यह भी देखा जाता है कि जनसंख्या घनत्व के हिसाब से आने वाले 10 या 20 वर्षों में शहर पर कितना बोझ बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित रखने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं। मास्टर प्लान से इतर निर्माण करने वालों पर प्राधिकरण कार्रवाई भी कर सकते हैं।
इन नियमों का भी खुला उल्लंघन
केंद्र व राज्य के नियमों के हिसाब से जो भी इलाका भू-स्खलन प्रभावित हो, वहां निर्माण करने पर रोक है। 1976 में मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट में इस क्षेत्र को भूस्खलन से प्रभावित करार दिया गया था। इसके बावजूद निर्माण जारी रहे। दूसरा नियम यह है कि 30 डिग्री से अधिक स्लोप वाली जगह पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। जोशीमठ में इस नियम की भी धज्जियां उड़ाई गईं। जहां मौका मिला, बड़ी इमारतें खड़ी होती चली गईं।
जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण आया और गया
त्रिवेंद्र सरकार ने 2017 में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण का गठन करते हुए जोशीमठ जैसे क्षेत्रों को विनियमित करने का प्रयास किया लेकिन विरोध के चलते सरकार को इसे वर्ष 2021 में स्थगित करना पड़ा। चार साल तक इन प्राधिकरणों में डीएम को उपाध्यक्ष और एडीएम को सचिव की जिम्मेदारी देकर जिंदा रखा गया लेकिन इन्हें चलाने के लिए इंजीनियर व अन्य विभाग मजबूती से तैयार ही नहीं हो पाए। लिहाजा, जोशीमठ के विकास का कोई रोडमैप तैयार नहीं हो पाया।
पहाड़ी शहरों को बचाने के लिए यह हो सकती है कवायद
-प्रदेश के सभी संवेदनशील शहरों का चिन्हिकरण किया जाए।
-फिलहाल तत्काल इन शहरों में किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगाई जाए।
-आवास विभाग को तत्काल मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए जाएं।
-बिल्डिंग बायलॉज को लागू करने के लिए प्राधिकरण या समकक्षीय व्यवस्था हो।
-अगर प्राधिकरण हों तो वहां मैन पावर आदि की पूरी व्यवस्था की जाए।

नक्सल प्रभावित गोंदिया जिले के आदिवासी छात्रों ने फिल्मांकन का आनंद लिया

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मुंबई 11: नक्सल प्रभावित गोंदिया जिले के आदिवासी छात्रों के एक समूह ने बुधवार को गोरेगांव में दादासाहेब फाल्के चित्रगरी में चल रहे फिल्मांकन का आनंद लिया। सभी छात्र हर शूट, सीरीज सेट और कलाकारों से मिलकर अभिभूत थे। इस बीच, महाराष्ट्र फिल्म, रंगमंच और सांस्कृतिक विकास महामनाल के प्रबंध निदेशक डॉ. अविनाश ढाकने ने छात्र का स्वागत किया और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।

नक्सल प्रभावित जिलों में किशोर लड़के और लड़कियों के उत्थान के लिए राज्य सरकार द्वारा “आपला महाराष्ट्र सुवर्ण जयंती योजना” लागू की जाती है। इस योजना के तहत गोंदिया जिले के 14 से 18 वर्ष की आयु के लड़के और लड़कियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए और उनके मन में नक्सलियों के प्रभाव को कम करने के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य की औद्योगिक, आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक प्रगति के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। गोंदिया पुलिस विभाग के माध्यम से।

इस बीच, छात्रों को चित्रनगरी से तारक मेहता का उल्टा चश्मा और द कपिल शर्मा शो के सेट दिखाए गए। साथ ही मुझे सीरीज के कलाकारों से मिलने और उनके साथ तस्वीरें लेने का मौका मिला। ऐसे में सभी छात्र-छात्राओं के होश उड़ गए। इस अवसर पर प्रबंध निदेशक विजय भालेराव, उप प्रबंध निदेशक मोहन शर्मा व गोंदिया पुलिस विभाग का अमला मौजूद रहा.

अब ईवीएम ही नहीं आरवीएम से भी पड़ेंगे वोट

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अब दूर-दराज बैठे लोग भी अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट दे सकेंगे। यहां तक कि विदेश में रहने वाले भारतीय भी अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे। ये सबकुछ संभव हो पाएगा आरवीएम के जरिए।

क्या है RVM और कैसे काम करेगा?
RVM का मतलब रिमोट वोटिंग मशीन है। 29 दिसंबर 2022 को चुनाव आयोग ने इसके बारे में मीडिया को बताया था। ये ऐसी मशीन है, जिसकी मदद से प्रवासी नागरिक बिना गृह राज्य आए अपना वोट डाल सकते हैं। आसान शब्दों में समझें तो अगर आप उत्तर प्रदेश के कानपुर में पैदा हुए और आपको किसी कारण केरल या देश के किसी दूसरे राज्य या फिर विदेश में रहना पड़ रहा है। ऐसे में वोटिंग के समय आमतौर पर आप अपने गृहराज्य नहीं जा पाते हैं। इसके चलते आप वोट भी नहीं डाल पाते। अब RVM ऐसे लोगों को अपने मताधिकार के प्रयोग का मौका देगा।

आरवीएम स्टेशन पर निवार्चन क्षेत्रों की जानकारी होगी। जैसे ही निर्वाचन क्षेत्र को चुनेंगे सभी उम्मीदवारों की सूची सामने आ जाएगी। इसके जरिए आप जहां हैं, वहीं से अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे। चुनाव आयोग ने देश की सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को रिमोट वोटिंग सिस्टम की लीगल, प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं की जानकारी देने के लिए दिसंबर में ही पत्र लिखा था। आयोग ने 31 जनवरी तक पार्टियों से इस पर फीडबैक भी मांगा है। जल्द ही इसका ट्रायल भी होगा।

क्या होगी रिमोट वोटिंग की प्रक्रिया? 
रिमोट मतदाताओं को एक तय समय में रिमोट वोटिंग के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद चुनाव आयोग की टीम रिमोट मतदाताओं द्वारा दी गई जानकारी को उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र में वेरिफाई करवाएगी। इसके बाद रिमोट वोटर्स के लिए मतदान के समय रिमोट वोटिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। मतदान केंद्र पर वोट डालने वाले के वोटर आईडीकार्ड को आरवीएम पर मतपत्र प्रदर्शित करने के लिए स्कैन किया जाएगा। इसके बाद मतदाता को आरवीएम पर अपनी पसंद के प्रत्याशी के लिए वोट करने का मौका मिल जाएगा।

वोटिंग के बाद वोट रिमोट कंट्रोल यूनिट में राज्य कोड, निर्वाचन क्षेत्र संख्या और उम्मीदवार संख्या के साथ दर्ज किया जाएगा। वीवीपीएटी राज्य और निर्वाचन क्षेत्र कोड के अलावा उम्मीदवार का नाम, प्रतीक और क्रम संख्या जैसे विवरण के साथ पर्ची प्रिंट करेगा। मतगणना के दौरान आरवीएम की रिमोट कंट्रोल यूनिट उम्मीदवारों के क्रम में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के कुल मतों को पेश करेगी। मतगणना के लिए नतीजे गृह राज्य में रिटर्निंग अधिकारियों के साथ शेयर किए जाएंगे।

कैसे चुनाव आयोग ने इसके लिए तैयारी की?  
कुछ साल पहले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक स्टडी रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें प्रवासन का मतदान पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया गया था। इस स्टडी में सरकारी मंत्रालय, संगठनों और एक्सपर्ट्स के साथ चर्चा करके एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। 29 अगस्त 2016 को चुनाव आयोग के पैनल ने इस रिपोर्ट को लेकर सबसे पहले राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की।

इस दौरान इंटरनेट वोटिंग, प्रॉक्सी वोटिंग, तय तारीख से पहले मतदान और पोस्टल बैलेट से प्रवासियों के लिए वोटिंग कराने पर विचार किया गया। हालांकि, इसपर कुछ भी तय नहीं हो पाया। बाद में चुनाव आयोग ने आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर समेत कुछ अन्य संस्थानों के एक्सपर्ट से बात की। इस दौरान रिमोट वोटिंग पर एक रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया।  इस प्रोजेक्ट में मतदाताओं को उनके निवास स्थान से दूर मतदान केंद्रों पर टू-वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके बायोमेट्रिक डिवाइस और वेब कैमरे की मदद से वोट डालने की अनुमति दी।

तो क्या लागू हो पाएगा आरवीएम? 
चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारी डॉ. बृजलाल से हमने यही सवाल किया। उन्होंने कहा, ‘भारत में राजनीतिक विरोध और आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा है। अभी ईवीएम मशीन को ही पूरी तरह से राजनीतिक पार्टियों ने स्वीकार नहीं किया है, ऐसे में अगर आरवीएम की शुरुआत होती है तो संभव है कि इसका विरोध शुरू हो जाए। इसलिए सबसे पहले राजनीतिक पार्टियों को पूरी तरह से संतुष्ट करना होगा कि ये सिस्टम मजबूत है। तब जाकर आरवीएम अच्छे से लागू हो पाएगा।’

दिल्ली में ऑटो और टैक्सी की सवारी हुई महंगी

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दिल्ली में ऑटोरिक्शा की सवारी अब आपकी जेब और ढीली करेगी, क्योंकि दिल्ली सरकार ने नए किराए के स्लैब को मंजूरी दी है। मीटर वाले ऑटो के लिए अब 25 रुपये के बजाय 30 रुपये और उसके बाद प्रति किमी के लिए 9.5 रुपये के बजाय 11 रुपये चुकाने होंगे।

यात्रियों को अब नॉन एसी टैक्सी के लिए 17 रुपये प्रति किलोमीटर देना होगा। पहले यह शुल्क 14 रुपये प्रति किलोमीटर था। जबकि एसी टैक्सी का किराया 16 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है।

राजस्थान की आयुक्त पूजा मीणा का पवन अरोड़ा पर सैक्स रैकेट चलाने का आरोप

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राजस्थान के चर्चित आईएएस अधिकारी पवन अरोड़ा पर आयुक्त पूजा मीणा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पूजा मीणा का आरोप है कि अरोड़ा सेक्स रैकेट चलाते हैं और उन्हें प्रताड़ित भी करते हैं। राजस्थान की पूरी अफसरशाही इन गंभीर आरोपों से हिल गई है। पूजा मीणा ने शहरी निकाय मंत्री शांति धारीवाल पर भी आईएएस अफसर पवन अरोड़ा को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, आईएएस अरोड़ा ने इन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। पूजा मीणा राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी RAS अधिकारी हैं। वे झालावाड़ जिले की नगर परिषद आयुक्त थीं। वहां से उनका तबादला किया जा चुका है। अभी वे अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर (एपीओ) हैं यानी नई पदस्थापना के आदेशों की प्रतीक्षा में हैं। वहीं, पवन अरोड़ा शहरी निकाय विभाग (डीएलबी) के निदेशक रह चुके हैं। वर्तमान में वे राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त हैं। दरअसल, नौ जनवरी को नगर परिषद झालावाड़ में आयुक्त पद से पूजा मीणा का तबादला नागौर नगर परिषद में आयुक्त के पद पर कर दिया गया। फिर उसी दिन आदेश में संशोधन कर उन्हें नई पदस्थापना के आदेशों की प्रतीक्षा में रखते हुए निदेशालय में भेज दिया गया। एक ही दिन में दो तबादला आदेश जारी होने के बाद पूजा मीणा ने ये आरोप लगाए हैं। हालांकि, 10 जनवरी को एक और नया तबादला आदेश निकाल कर उन्हें जयपुर हैरिटेज नगर निगम में उपायुक्त पद पर पोस्टिंग दे दी गई।

क्या हैं महिला आयुक्त के आरोप?

पूजा मीणा ने बताया, ”आईएएस पवन अरोड़ा बहुत गंदे आदमी हैं। वे राजस्थान सरकार के सबसे बदमाश आदमी हैं। पवन अरोड़ा मुझे प्रताड़ित करते हैं। जब वे डीएलबी डिपार्टमेंट में थे, तभी से महिलाओं का ग्रुप बना रखा था और डिपार्टमेंट में सेक्स रैकेट चला रखा था।”

आयुक्त ने एक और अफसर हृदेश शर्मा और मंत्री धारीवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए

16 दिन पहले ही पूजा मीणा को झालावाड़ नगर परिषद के आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन 9 जनवरी 2023 को अचानक दो बार हुए तबादलों के ताबड़तोड़ क्रम के बाद पूजा मीडिया ने वर्तमान डीएलबी डायरेक्टर ह्रदयेश शर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। दरअसल, पूजा मीणा के तबादले का आदेश हृदेश शर्मा ने ही निकाला है। पूजा मीणा ने रोते हुए राजस्थान सरकार के यूडीएच मंत्री और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी शांति धारीवाल के लिए कहा कि वे पवन अरोड़ा को संरक्षण देते हैं।

आरोपों के बाद क्या हुआ?

पवन अरोड़ा, हृदेश कुमार शर्मा और मंत्री शांति धारीवाल पर गंभीर आरोप लगने की सूचना मिलने के बाद पूरे विभाग में खलबली मच गई। बताया जा रहा है कि आयुक्त पूजा मीणा को 10 जनवरी की तारीख में फिर से तबादला कर जयपुर नगर निगम हैरिटेज में उपायुक्त नियुक्त कर दिया गया। राजधानी जयपुर में इसे प्राइम पोस्टिंग वाली जगह माना जाता है।

क्या कहते हैं IAS पवन अरोड़ा?

पूजा मीणा के आरोपों पर अमर उजाला ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त पवन अरोड़ा से बात की। अरोड़ा ने कहा, ”डीएलबी से इस महिला का नागौर ट्रांसफर किया गया, फिर एपीओ किया गया। यह विभागीय मसला है। इसमें मैं कहां बीच में आता हूं? उनके आरोप असत्य और बेबुनियाद हैं। जब डीएलबी में मेरी पोस्टिंग थी, तब यह महिला मेरे चैम्बर में कागजात लेकर एक या दो बार आईं थीं। उसके अलावा ना मैं उन्हें जानता हूं, न मैंने उन्हें कभी फोन किया, न ही मैंने कभी एक भी मैसेज किया। अब उनके मन में ग्रंथी है कि मैं पोस्टिंग चेंज करवाता हूं, तो इसका तो मैं क्या जवाब दूं? यह तो बिल्कुल झूठी और बेबुनियाद बात है। जबरदस्ती आप किसी को यह कहो कि आप मेरी पोस्टिंग करवा रहे हो। अभी पिछले दिनों यह टोंक में सस्पेंड हुई थी। मेरा इससे संबंध नहीं है।”

स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग

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-प्रियंका सौरभ

वर्तमान समय में मनुवाद (मनुवाद) शब्द को नकारात्मक अर्थ में लिया जा रहा है। मनुवाद के पर्याय के रूप में भी ब्राह्मणवाद का प्रयोग किया जाता है। असल में मनुवाद के खिलाफ बोलने वाले लोगों को मनु या मनुस्मृति के बारे में पता ही नहीं है। या वे अपने निहित स्वार्थों के लिए मनुवाद का नारा लगाते हैं। वस्तुतः जिस जाति व्यवस्था के लिए मनुस्मृति और महर्षि मनु को दोषी ठहराया गया है, उसमें जाति शब्द का उल्लेख तक नहीं है। जब हम मनुवाद शब्द को बार-बार सुनते हैं तो हमारे मन में यह प्रश्न भी उठता है कि आखिर यह मनुवाद क्या है?

महर्षि मनु मानव संविधान के प्रथम प्रवक्ता और आदि शासक माने जाते हैं। मनु की संतान होने के कारण ही मनुष्यों को मानव या मनुष्य कहा जाता है। अर्थात मनु की संतान ही मनुष्य है। सृष्टि के सभी प्राणियों में एकमात्र मनुष्य ही है जिसे विचारशक्ति प्राप्त है। मनु ने मनुस्मृति में समाज संचालन के लिए जो व्यवस्थाएं दी हैं, उसे ही सकारात्मक अर्थों में मनुवाद कहा जा सकता है। मनु कहते हैं कि कर्म के अनुसार ब्राह्मण शूद्रता को प्राप्त हो जाता है और शूद्र ब्राह्मणत्व को। इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य से उत्पन्न संतान भी अन्य वर्णों को प्राप्त हो जाया करती हैं। विद्या और योग्यता के अनुसार सभी वर्णों की संतानें अन्य वर्ण में जा सकती हैं- जन्मना जायते शूद्र: कर्मणा द्विज उच्यते। (अर्थात जन्म से सभी शूद्र होते हैं और कर्म से ही वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र बनते हैं।

वर्तमान दौर में ‘मनुवाद’ शब्द को नकारात्मक अर्थों में लिया जा रहा है। ब्राह्मण -वाद को भी मनुवाद के ही पर्यायवाची के रूप में उपयोग किया जाता है। वास्तविकता में तो मनुवाद की रट लगाने वाले लोग मनु अथवा मनुस्मृति के बारे में जानते ही नहीं है या फिर अपने निहित स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग अलापते रहते हैं। जिस जाति व्यवस्था के लिए मनुस्मृति को दोषी ठहराया जाता है, उसमें जातिवाद का उल्लेख तक नहीं है। सेक्युलरिज्म की तरह बिना अर्थ जाने भारतीय राजनीति विशेषकर दलित राजनीति में जिन दो शब्दों का सर्वाधिक उपयोग या दुरपयोग हुआ है वे है “मनुवाद और ब्राह्मणवाद”।

अधिकांश लोगों में भ्रम है कि मनु कोई एक व्यक्ति था जो ब्राह्मण था । तथ्य यह है कि मनु क्षत्रिय थे और एक नहीं अनेक थे। कम से कम दस मनुओं का जिक्र आया है। मनु के बारे में दूसरा भ्रम मनु सिद्धान्त को मनुवाद बना देना है। सिद्धान्त और वाद में बहुत अंतर होता है । सिद्धान्त का आधार सत्य होता है जबकि वाद का आधार परंपरा या सुविधा होता है। सही बात तो यह है कि मनु स्मृति में मनु सिद्धान्त नाम की भी कोई चीज नहीं है अपितु यह आदर्श नियमों का समूह मात्र है जो क्रमशः जुडते गए। कहना नहीं होगा कि मनु स्मृति में योग्यता को सर्वोच्च माना गया है इसलिए अकर्मणय और आलसी लोगों ने इसे अपने विरुद्ध मान लिया और वे ही लोग भ्रम फैलाने में जुट गए। मनु स्मृति की मूल भावना पवित्र है, जो योग्य के योग्य का प्रतिपादन करती है।

वेदों की विधि व्यवस्था को कर्तव्य व्यवस्था भी कहा गया है। उसी के आधार पर मनु ने सरल भाषा में मनुस्मृति की रचना की। धर्मशास्त्र वैदिक दर्शन में संविधान या कानून का नाम है। मनुस्मृति न तो दलित विरोधी है और न ही ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देती है। बल्कि यह केवल मानवता और मानवीय कर्तव्यों की बात करता है। मनु किसी को दलित नहीं मानते। दलित-संबंधी व्यवस्थाएँ अंग्रेजों और वामपंथियों की देन हैं। प्राचीन साहित्य में दलित शब्द नहीं है। मनुष्यों की चार जातियां नहीं बल्कि चार श्रेणियां हैं, जो पूरी तरह से उनकी योग्यता पर आधारित हैं। पहला ब्राह्मण, दूसरा क्षत्रिय, तीसरा वैश्य और चौथा शूद्र।

समाज के संचालन के लिए जो व्यवस्थाएं दी हैं, उन सबका संग्रह मनुस्मृति में है। अर्थात मनुस्मृति मानव समाज का प्रथम संविधान है, न्याय व्यवस्था का शास्त्र है। यह वेदों के अनुकूल है। वेद की कानून व्यवस्था अथवा न्याय व्यवस्था को कर्तव्य व्यवस्था भी कहा गया है। उसी के आधार पर मनु ने सरल भाषा में मनुस्मृति का निर्माण किया। वैदिक दर्शन में संविधान या कानून का नाम ही धर्मशास्त्र है। महर्षि मनु कहते है- धर्मो रक्षति रक्षित:। अर्थात जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। यदि वर्तमान संदर्भ में कहें तो जो कानून की रक्षा करता है कानून उसकी रक्षा करता है। कानून सबके लिए अनिवार्य तथा समान होता है।

जिन्हें हम वर्तमान समय में धर्म कहते हैं दरअसल वे संप्रदाय हैं। धर्म का अर्थ है जिसको धारण किया जाता है और मनुष्य का धारक तत्व है मनुष्यता, मानवता। मानवता ही मनुष्य का एकमात्र धर्म है। हिन्दू मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख आदि धर्म नहीं मत हैं, संप्रदाय हैं। संस्कृत के धर्म शब्द का पर्यायवाची संसार की अन्य किसी भाषा में नहीं है। भ्रांतिवश अंग्रेजी के ‘रिलीजन’ शब्द को ही धर्म मान लिया गया है, जो कि नितांत गलत है। इसका सही अर्थ संप्रदाय है। धर्म के निकट यदि अंग्रेजी का कोई शब्द लिया जाए तो वह ‘ड्यूटी’ हो सकता है। कानून ड्‍यूटी यानी कर्तव्य की बात करता है।

मनु ने भी कर्तव्य पालन पर सर्वाधिक बल दिया है। उसी कर्तव्यशास्त्र का नाम मानव धर्मशास्त्र या मनुस्मृति है। आजकल अधिकारों की बात ज्यादा की जाती है, कर्तव्यों की बात कोई नहीं करता। इसीलिए समाज में विसंगतियां देखने को मिलती हैं। मनुस्मृति के आधार पर ही आगे चलकर महर्षि याज्ञवल्क्य ने भी धर्मशास्त्र का निर्माण किया जिसे याज्ञवल्क्य स्मृति के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी काल में भी भारत की कानून व्यवस्था का मूल आधार मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति रहा है। कानून के विद्यार्थी इसे भली-भांति भली-भांति जानते हैं। राजस्थान हाईकोर्ट में मनु की प्रतिमा भी स्थापित है।

वर्तमान सन्दर्भ में भी यदि हम शासन व्यवस्था को देखें तो प्रशासन चलाने के लिए लोगों को चार श्रेणियों – प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ में विभाजित किया गया है। महर्षि मनु की व्यवस्था के अनुसार हम प्रथम वर्ण को ब्राह्मण, दूसरे को क्षत्रिय, तीसरे को वैश्य और चौथे को शूद्र रख सकते हैं।
मनुस्मृति 10/65 में महर्षि मनु कहते हैं कि- एक ब्राह्मण अपने गुणों, कार्यों और क्षमताओं के आधार पर शूद्र बनता है और इसके विपरीत। इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य के बीच भी ऐसा आदान-प्रदान होता है। मनु के विधान के अनुसार यदि ब्राह्मण की संतान अयोग्य है तो वह अपनी योग्यता के अनुसार वर्ग चार या शूद्र बनता है। इसी प्रकार चतुर्थ श्रेणी के बच्चे या शूद्र योग्यता के आधार पर प्रथम श्रेणी या ब्राह्मण बन सकते हैं।

हमारे प्राचीन समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं जब कोई व्यक्ति शूद्र से ब्राह्मण बना। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के गुरु वशिष्ठ महाशूद्र चांडाल की संतान थे, लेकिन अपनी योग्यता के बल पर वे ऋषि बने।
विश्वामित्र अपनी योग्यता से क्षत्रिय से ब्रह्मर्षि बने। भारतीय इतिहास में ऐसे और भी कई उदाहरण हमारे सामने हैं, जो स्वतः ही मनु के दलित विरोधी होने के आरोपों का खंडन करते हैं। संक्षेप में, “मनुष्यवाद को मानने वाले स्वत: ही मनुवादी होते हैं।”

मनुस्मृति न तो दलित विरोधी है और न ही ब्राह्मणवाद को बढ़ावा देती है। यह सिर्फ मानवता की बात करती है और मानवीय कर्तव्यों की बात करती है। मनु किसी को दलित नहीं मानते। दलित संबंधी व्यवस्थाएं तो अंग्रेजों और आधुनिकवादियों की देन हैं। दलित शब्द प्राचीन संस्कृति में है ही नहीं। चार वर्ण जाति न होकर मनुष्य की चार श्रेणियां हैं, जो पूरी तरह उसकी योग्यता पर आधारित है। प्रथम ब्राह्मण, द्वितीय क्षत्रिय, तृतीय वैश्य और चतुर्थ शूद्र। वर्तमान संदर्भ में भी यदि हम देखें तो शासन-प्रशासन को संचालन के लिए लोगों को चार श्रेणियों- प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में बांटा गया है। मनु की व्यवस्था के अनुसार हम प्रथम श्रेणी को ब्राह्मण, द्वितीय को क्षत्रिय, तृतीय को वैश्य और चतुर्थ को शूद्र की श्रेणी में रख सकते हैं। जन्म के आधार पर फिर उसकी जाति कोई भी हो सकती है। मनुस्मृति एक ही मनुष्य जाति को मानती है। उस मनुष्य जाति के दो भेद हैं। वे हैं पुरुष और स्त्री।

ब्राह्मणवाद मनु की देन नहीं है। इसके लिए कुछ निहित स्वार्थी तत्व ही जिम्मेदार हैं। प्राचीन काल में भी ऐसे लोग रहे होंगे जिन्होंने अपनी अयोग्य संतानों को अपने जैसा बनाए रखने अथवा उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लिए अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया होगा। हमारे संविधान में कहीं नहीं लिखा भ्रष्ट तरीके अपनाकर अपनी अयोग्य संतानों को आगे बढाएं। इसके लिए तत्कालीन समाज या फिर व्यक्ति ही दोषी हैं। उदाहरण के लिए संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान में आरक्षण की व्यवस्था 10 साल के लिए की थी, लेकिन बाद में राजनीतिक स्वार्थों के चलते इसे आगे बढ़ाया जाता रहा। ऐसे में बाबा साहेब का क्या दोष?

मनु तो सबके लिए शिक्षा की व्यवस्था अनिवार्य करते हैं। बिना पढ़े लिखे को विवाह का अधिकार भी नहीं देते, जबकि वर्तमान में आजादी के 70 साल बाद भी देश का एक वर्ग आज भी अनपढ़ है। मनुस्मृति को नहीं समझ पाने का सबसे बड़ा कारण अंग्रेजों ने उसके शब्दश: भाष्य किए। जिससे अर्थ का अनर्थ हुआ। पाश्चात्य लोगों और वामपंथियों ने धर्मग्रंथों को लेकर लोगों में भ्रांतियां भी फैलाईं। इसीलिए मनुवाद या ब्राह्मणवाद का हल्ला ज्यादा मचा। मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी।

दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान जैकालियट ने अपनी पुस्तक ‘बाइबिल इन इंडिया’ में भारतीय ज्ञान विज्ञान की खुलकर प्रशंसा की है। पंडित और पुजारी तो ब्राह्मण ही बनेगा, लेकिन उसका जन्मगत ब्राह्मण होना जरूरी नहीं है। यहां ब्राह्मण से मतलब श्रेष्ठ व्यक्ति से न कि जातिगत। आज भी सेना में धर्मगुरु पद के लिए जातिगत रूप से ब्राह्मण होना जरूरी नहीं है बल्कि योग्य होना आवश्यक है। ऋषि दयानंद की संस्था आर्यसमाज में हजारों विद्वान हैं जो जन्म से ब्राह्मण नहीं हैं। इनमें सैकड़ों पूरोहित जन्म से दलित वर्ग से आते हैं। (देश के प्रसिद्ध धर्म शास्त्र विद्वानों से बातचीत पर आधारित)

-प्रियंका सौरभ

अंडर इलेवन फुटबाल खिलाड़ियों ने फ्रांस जाने से पहले लिया राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का आशीर्वाद ।

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 अंधेरी (मुंबई ) फुटबाल अकादमी के जूनियर फुटबाल खिलाड़ियों का चयन फ्रांस में वी-फुट इंटरनेशनल कप के लिए हुआ है । राजभवन मीडिया समन्वयक के अनुसार यह मैच फ्रांस के मार्सिल सिटी में खेला जायेगा इस टूर्नामेंट में अकादमी के 10 बच्चे भाग लेंगे जिनकी उम्र वर्तमान में 11 वर्ष से कम है ।

अकादमी के संस्थापक व मुख्य कोच मॉलेय सेनगुप्ता के अनुसार यह अकादमी गत 17 वर्षों से लगातार प्रतिभावान खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देकर प्रोत्साहित करती रही है। 3 शाखाओं व 300 जूनियर खिलाड़ियों वाला यह अकादमी ISO पंजीकृत है । सेनगुप्ता ने कहा कि – यह मेरे जीवन का महत्वपूर्ण क्षण है जिसके लिए राज्य के प्रथम नागरिक राजपाल भगत सिंह कोश्यारी का आशीर्वाद सौभाग्य की बात है।

इस अवसर पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सभी जूनियर खिलाड़ियों की रुचि, अभ्यास, सुविधा आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की । इस अवसर पर सभी खिलाड़ियों को पुष्प गुच्छ से सम्मानित कर राज्यपाल ने अपनी शुभेच्छा प्रकट की ।