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Covid Cases: मुंबई में मास्क की वापसी, BMC के अस्पतालों में हुआ जरूरी

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मुंबई: मुंबई में कोरोना की चौथी लहर आने की आशंका को देखते हुए बीएमसी प्रशासन एलर्ट मोड पर आ गया है। बीएमसी ने मुंबई में 60 साल से अधिक उम्र के नागरिकों से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने को कहा है, साथ ही अपने अस्पतालों में काम करनेवाले डॉक्टरों, मेडिकल टीम, कर्मचारियों, मरीजों और विजिटर्स के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया है।
बीएमसी कर्मचारियों को कोरोना से सुरक्षा के लिए मास्क पहनने को कहा गया है। बीएमसी कमिश्नर आई. एस. चहल ने कहा कि कोरोना से निपटने के लिए बीएमसी के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों में भी बेड रिजर्व रखने का निर्देश दिया गया है।
ज्यादातर कोरोना मरीज घर पर ही रह कर इलाज करवा रहे हैं, इसको देखते हुए बीएमसी जल्द ही होम क्वारंटीन के लिए नई गाइडलाइन जारी करेगी। बीएमसी स्वास्थ्य विभाग ने मई में तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की चेतावनी दी है। सोमवार को कमिश्नर चहल की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल बैठक में कोरोना से निपटने के लिए सभी उपायों पर विचार किया गया।

‘ बीएमसी कमिश्नर चहल ने आदेश दिया कि मुंबई में फिर से टेस्टिंग बढ़ाई जाए, अस्पतालों में दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, बेड की उपलब्धता, ऑक्सिजन और वेंटिलेटर की सुविधा तैयार रखी जाए। ”

60 की उम्र पार कर चुके लोगों से मास्क पहनने की अपील
वॉर्ड वार रूम्स को एक्टिव रहने का निर्देश दिया गया है, जिससे मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्थिति से निपटने में आसानी हो। चहल ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सबसे ज्यादा खतरा 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को है। इसीलिए मुंबई में रहने वाले 60 की उम्र पार कर चुके व्यक्तियों, खासकर जिन्हें कोई बीमारी है, उन्हें मास्क का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। सीनियर सिटीजन के लिए अभी मास्क अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, भीड़भाव वाले क्षेत्रों में जाते समय मास्क का इस्तेमाल उन्हें कोरोना के खतरे से बचाएगा।
कोरोना से निपटने बीएमसी की तैयारियां
– बीएमसी अस्पतालों में ग्लव्स, मास्क, पीपीई किट के साथ दवाइयों के स्टॉक की समीक्षा की जाएगी। यदि जरूरत हुई, तो उनकी तुरंत खरीदी की जाएगी।
– कोरोना के प्रसार को रोकने में टेस्टिंग सबसे असरदार है, इसलिए मुंबई में टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी।
– सीरियस मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए सभी अस्पतालों में ऑक्सिजन प्लांट काम कर रहे हैं या नहीं, ऑक्सिजन की सही आपूर्ति हो रही है या नहीं, इसका ऑडिट होगा।
– वॉर्ड वार रूम्स को पूरी तरह से एक्टिव किया जाएगा। कोरोना को रोकने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
– प्राइवेट और बीएमसी अस्पतालों में सर्जरी के लिए एडमिट मरीजों का कोरोना टेस्ट किया जाएगा। पॉजिटिव पाए जाने पर बहुत जरूरी न हो, तो सर्जरी टाली जाएगी।

राम मंदिर किसी की जागीर नहीं – हम भी जाएंगे अयोध्या – पटोले

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ठाणे: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अयोध्या दौरे पर के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा है कि कांग्रेस के लोग जल्द ही अयोध्या जाएंगे। उन्हें भी वहां के महंतों ने बुलाया है। नाना ने दावा किया कि अयोध्या के रामलला मंदिर पर कांग्रेस ज्यादा अधिकार है, क्योंकि मंदिर का ताला दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खुलवाया था और भूमिपूजन भी उन्होंने ही किया था। सोमवार को ठाणे के गडकरी रंगायतन सभागार में महाराष्ट्र कांग्रेस कमिटी की विस्तारित कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटोले ने शिंदे-फडणवीस सरकार की खिंचाई की। पटोले ने कहा कि राज्य में एक तरफ किसान बेमौसम बारिश से परेशान है, तो दूसरी तरफ शिंदे-फडणवीस गाजे-बाजे के साथ अयोध्या जाते हैं, जैसे पाकिस्तान पर हमला करने गए हों। राज्य सरकार जनता को लूट रही है। अनाप-शनाप खर्च कर रही है। इससे वह राज्य को भिखारी बना देगी।

पटोले ने शिंदे के गृह क्षेत्र ठाणे शहर में हो रहे सौंदर्यीकरण पर कहा कि जिस काम पर 50 से 60 करोड़ खर्च होने हैं, वहां साढ़े 400 करोड़ खर्च किए गए हैं। यह जनता के पैसे की लूट नहीं तो और क्या है? उन्होंने आउटसोर्सिंग को असंवैधानिक करार दिया।

‘मुंगेरीलाल के सपने देख रही बीजेपी’
महाविकास आघाडी के कुछ विधायकों के बीजेपी में जाने की संभावना पर पटोले ने कहा कि कर्नाटक की तरह महाराष्ट्र में भी हाल होने वाला है। आज बीजेपी की कर्नाटक में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं है। बीजेपी मुंगेरीलाल के सपने देख रही है। आघाडी के विधायक एकजुट हैं।

‘अब बहकावे में नहीं आएंगे किसान’
पटोले ने राज्य में किसानों की आत्महत्या के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि पिछले 8 से 9 साल में 21 हजार किसानों ने आत्महत्या की। सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। किसान बुरी तरह परेशान हैं। अब किसान बीजेपी के झांसे में नहीं आएंगे।
‘सरकार का प्रशासन पर अंकुश नहीं’
पटोले ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। सरकार का प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है। ठाणे जिला अध्यक्ष विक्रांत चव्हाण को धमकी मिली। कांग्रेस कार्यकर्ता को मारा-पीटा गया। रोशनी शिंदे पर जान लेवा हमला हुआ। पुलिस ने शिकायत तक नहीं ली। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र ठाणे में तो कानून व्यवस्था की धज्जी उड़ गई है।
असली चेहरा आ गया है सामने’
पटोले ने केंद्र की मोदी सरकार पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई बढ़ गई है। दवाएं महंगी होने के कारण गरीब इलाज का खर्च वहन नहीं कर पाएंगे। उन्होंने आलोचना की कि सरकार का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है।
‘ठाणे में फिर खड़ी होगी कांग्रेस’
राज्य की राजनीति में ठाणे के बढ़ते राजनीतिक महत्व को देखते शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी के बाद कांग्रेस ने ठाणे जिले पर ध्यान केंद्रित किया है। शहरभर में बैठक के पोस्टर और बैनर लगाए गए थे। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद महाविकास आघाडी के घटक दल जिस तरह से आक्रामक हैं, ऐसे में यह बैठक कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की दिशा में संजीवनी साबित हो सकती है। पटोले ने कहा कि ठाणे जिला कांग्रेस का गढ़ था। कांग्रेस यहां फिर से मजबूती से खड़ी होगी।
कांग्रेस की बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव
– राहुल गांधी के खिलाफ हुई कार्रवाई तथा मोदी-अडानी की दोस्ती को जनता के सामने लाने के लिए जय भारत सत्याग्रह।
– केंद्र में पुन: कांग्रेस सरकार आने पर ओबीसी के लिए एक अलग मंत्रालय शुरू करने का निर्णय।
– राज्य में चुनाव के समय धार्मिक उन्माद फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश को नाकाम करने पर जोर।
– कृषि उपज का उचित मूल्य और पीड़ित किसानों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दिलाने का संकल्प।

बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी ने ढहाई थी बाबरी मस्जिद – बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल

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मुंबई: महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल (Chandrakant Patil) ने सोमवार को दावा किया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद को जब छह दिसंबर 1992 को बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी ने ढहाया था। उस समय उस जगह के पास शिवसेना का एक भी कार्यकर्ता मौजूद नहीं था। पाटिल ने एक क्षेत्रीय समाचार चैनल से कहा, ‘अयोध्या में कारसेवकों की सुविधा के लिए मुझे बजरंग दल (Bajrang Dal) ( ने तीन-चार महीने के लिए वहां रखा था। इसमें भाग लेने वाले लोग या तो बजरंग दल, विहिप (विश्व हिंदू परिषद) या दुर्गा वाहिनी (Durga Vahini) से थे।’ उन्होंने कहा, ‘आरएसएस (RSS) की ताकत हमारे पीछे थी लेकिन उसने खुलकर हिस्सा नहीं लिया। उसने अपने काम को समान विचारधारा वाले संगठनों में वितरित किया था।’

पाटिल ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत बाबरी मस्जिद विध्वंस के बारे में बात करते रहते हैं, लेकिन उनके मन में सवाल पैदा होता है कि क्या वह उस समय अयोध्या में थे भी।

क्या बोले पाटिल
बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान यह बड़ा बयान दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय वह खुद अयोध्या में मौजूद थे। पाटिल ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना द्वारा किया जाने वाला दावा पूरी तरह से गलत है। बाबरी मस्जिद विध्वंस की साजिश रचने या इस घटना को शिवसेना द्वारा अंजाम देने का दावा गलत था क्योंकि यह केवल विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में किया गया था।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत मेंः सीतारमण

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वाशिंगटन  डीसी, एजेंसी। Nirmala Sitharaman on Muslims भारत के खिलाफ ‘नकारात्मक पश्चिमी धारणा’ पर आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जमकर वार किया। वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने भारत के मुसलमानों की स्थिति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों का रोना रोने वाले पाक से भी बेहतर भारत में मुस्लिम खुश और सुरक्षित हैं।

पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) के कार्यक्रम में बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में हैं और यह आबादी तेजी से संख्या में बढ़ रही है।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत मेंः सीतारमण
सीतारमण ने कहा कि पश्चिमी मीडिया में कहा जाता है कि भारत में शासन के समर्थन से मुस्लिमों का जीवन कठिन बनाया जाता है, लेकिन ये सब निराधार है। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर ऐसा होता तो भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी कैसे होती।
भारत का मुसलमान कर रहा तरक्की
पीआईआईई के अध्यक्ष एडम एस पोसेन ने जब पश्चिमी मीडिया में भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से हिंसा के बारे में रिपोर्टिंग होने के बारे में पूछा, तो सीतारमण ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया।
वित्त मंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद से पाक के विपरीत भारत में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसा केवल इसलिए है, क्योंकि भारत में हर तरह का मुसलमान अपना व्यवसाय कर रहा है, उनके बच्चों को शिक्षा दी जा रही है, फेलोशिप दी जा रही है।
PAK में मुस्लिम भी सुरक्षित नहीं
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि पाकिस्तान में हर अल्पसंख्यक अपनी संख्या में घट रहा है या कम हो रहा है। यहां तक कि कुछ खुद को एक इस्लामिक देश घोषित करने के बावजूद वहां के कुछ मुस्लिम संप्रदायों पर भी हमला कर सफाया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क में हर किसी के मन में असुरक्षा का भाव है।
बता दें कि सीतारमण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों में भाग लेने वाशिंगटन पहुंचीं हैं। वे दूसरी G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक की अध्यक्षता भी करेंगी।

बहुजन हिताय सर्वजन हिताय समाज के लोग अपने जीवन को सुखी बना पा रहे हैं, तो इसका बहुत बड़ा श्रेय महात्मा ज्योतिबा फुले को जाता है

बहुजन हिताय सर्वजन हिताय समाज के लोग अपने जीवन को सुखी बना पा रहे हैं, तो इसका बहुत बड़ा श्रेय महात्मा ज्योतिबा फुले को जाता है

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एक महान समाज सुधारक, भारत की सामाजिक क्रांति के पथ प्रदर्शक, महान विचारक, महान दार्शनिक, लेखक और महान क्रन्तिकारी महात्मा ज्योतिबा गोविंदराव फुले का जन्म ब्रिटिश भारत में पुणे के खानबाड़ी नामक स्थान पर 11 अप्रैल 1827 को हुआ था। इनका जन्म एक ‘माली’ जाति में हुआ था, जिसे सामाजिक व्यवस्था के अनुसार पिछड़ी जाति (शुद्र) माना जाता था। इनका परिवार कई पीढ़ियों से फूलों के गज़रे बनाने का काम करता था इसलिए उन्हें “फुले” कहा जाता था। बचपन में ही इनकी माता का देहांत हो गया था, इसलिए इनका पालन- पोषण एक बाई ने किया था। बाद में इनके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया था। ज्योतिबा फुले ने कुछ समय तक मराठी में अध्ययन किया, परन्तु सामाजिक भेदभाव के कारण इनको पढाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। बाद में, 21 वर्ष की आयु में उन्होंने अंग्रेजी विषय के साथ सातवीं कक्षा पास की।

एक प्रसंग है, जिसने ज्योतिबा फुले के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था। एक बार वे अपने एक परिचित की शादी में जातिगत भेदभाव के कारण बुरी तरह अपमानित हुए थे। उन्हें धक्के देकर मंडप से बाहर कर दिया गया था। घर आकर उन्होंने अपने पिता जी से इसका कारण पूछा। पिता जी ने बताया कि,” सदियों से यही सामाजिक व्यवस्था है कि हमें उनकी बराबरी नहीं करनी चाहिए। वे भूदेव यानि भूमि के देवता है, ऊँची जाति के लोग हैं और हम नीची जाति के लोग हैं। अतः हम उनकी बराबरी नहीं कर सकते हैं।” ज्योतिबा फुले ने अपने पिताजी से बहस की और कहा “मैं उनसे ज्यादा साफ़ सुथरा था, मेरे कपड़े अच्छे और साफ़ थे, मैं पढ़ा-लिखा और होशियार हूँ, फिर मैं उनसे नीच कैसे हो गया?” पिताजी गुस्से में आकर बोले, “मुझे यह नहीं पता परन्तु सदियों से ऐसा होता आ रहा है। हमारे सभी धर्म-ग्रंथों और शास्त्रों में यही लिखा है। हमें भी यही मानना पड़ेगा, क्योंकि यही परम्परा है और यही सत्य है।” ज्योतिबा फुले सोचने लगे कि धर्म तो जीवन का आधार है फिर भी धर्म को बताने वाले ग्रंथों में ऐसा क्यों लिखा है जिसके कारण समाज में इतनी गैर बराबरी और छुआछूत है। यह परम सत्य कैसे हो सकता है। यह असत्य है। यदि यह असत्य है तो मुझे सत्य की खोज करनी पड़ेगी। इसी विचार के साथ कार्य करते हुए उन्होंने 1873 में “सत्य शोधक समाज” की स्थापना की। सत्य शोधक का अर्थ है सत्य का शोधन वाला अर्थात् सत्य को जानने वाला।
महामना ज्योतिबा फुले के जीवन का मूल उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल-विवाह का विरोध, विधवा-विवाह का समर्थन, कुप्रथाओं और अन्धविश्वास का अंत करना था। इनका विवाह 1840 में माता “सावित्री बाई” से हुआ जो बाद में स्वयं एक महान समाज सुधारक बनी। डिप्रेस्ड क्लास और महिला शिक्षा के लिए दोनों ने मिलकर काम किया।
19 वीं सदी में महिलाओं को शिक्षा नहीं दी जाती थी। उन्हें इस भेदभाव से मुक्ति दिलाने के लिए ज्योतिबा फुले ने स्वयं अपनी पत्नी को पढ़ाने का निश्चय किया। अपनी पत्नी ‘सावित्री बाई फुले’ को पढ़ाकर उन्हें देश की पहली महिला शिक्षक बनाया। महिलाओं की शिक्षा व उत्थान के लिए ज्योतिबा फुले ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला। जब उच्चवर्णीय समाज को इस बात की जानकारी हुई तो उनका घोर विरोध किया और समाज में महिला की शिक्षा को अधर्म और समाज का अपमान बताया। समाज के लोगों ने इनके पिता गोविंदराव फुले पर इसे रोकने का दबाव बनाया। अपने पिता के कहने पर भी ज्योतिराव जब नहीं माने तो उन्हें घर छोड़ने की धमकी दी गई। ज्योतिबा फुले ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और पत्नी के साथ घर छोड़ कर चले गए।
ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी जब पाठशाला जाते थे तो लोग उन पर पत्थर, गोबर और कीचड़ फेंकते थे, मगर वे जरा भी विचलित नहीं होते थे और हिम्मत के साथ समाज सुधार और शिक्षा के काम में लगे रहते थे। अछूतों के साथ जातिगत भेदभाव के चलते उन्हें सार्वजानिक तालाबों से पानी लेने पर पाबंदी थी। सार्वजानिक रास्तों का प्रयोग करने, तालाबों या कुओं के पास चले जाने पर उन्हें कठोर दंड दिया जाता था। ज्योतिबा फुले इस अमानवीय व्यवहार से बहुत दुखी होते थे। उन्होंने अछूतों के लिए अपना निजी कुआं खोल दिया और सभी को वहां से पानी भरने का आवाह्न किया। उनका मानना था कि,
“विद्या बिन मति गई,
मति बिन गति गई,
गति बिन नीति गई,
नीति बिन धन गया,
धन बिन शूद्र पतित हुए।”
विद्या हासिल न होने के कारण इतना घोर अनर्थ हुआ। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए ज्योतिबा फुले पैदल गाँव – गाँव जाकर लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित करते थे। सामाजिक भेदभाव, जाति प्रथा, अशिक्षा,अज्ञान, कुप्रथा, अन्धविश्वास के विरुद्ध संघर्ष करते हुए ज्योतिबा फुले ने समाज को एक नई दिशा प्रदान की। उनके कार्यों से प्रभावित होकर सन 1888 में बम्बई की एक विशाल जनसभा में उन्हें “महात्मा” की उपाधि दी गई। उन्होंने किसानों की भलाई के लिए बहुत काम किये। इनके कार्यों से प्रभावित होकर अंग्रेजों ने ‘कृषि एक्ट’ बनाया। अंग्रेज़ उन्हें महिला शिक्षा का पुरोधा मानते थे। महात्मा ज्योतिबा फुले ने अपने ज्ञान और अनुभव से साहित्य के क्षेत्र में भी योगदान दिया। “गुलामगिरी”, “तृतीय रत्न छत्रपति शिवाजी महाराज”, “राजा भोंसले का पखड़ा”, “किसान का कोड़ा”, “अछूतों की कैफियत” आदि इनकी प्रमुख साहित्यिक रचनाएं हैं।
28 नवम्बर 1890 को पुणे में उनकी मृत्यु हो गई। बाबा साहेब डॉ० भीमराव अंबेडकर महात्मा फुले के जीवन संघर्ष, उनके विचारों और कार्यों से बहुत प्रभावित हुए थे। इनके द्वारा शुरू किये गए महान कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फुले की नीतियों को संविधान में कानूनन रूप प्रदान किया और पिछड़ों, अछूतों और महिलाओं की तरक्की का मार्ग प्रशस्त किया।
आज भारत का पिछड़ा वर्ग और महिलाएं ,सम्मानजनक जीवन जी रही हैं, और राष्ट्र-निर्माण में अपना सहयोग कर पा रही हैं , तथा बहुजन हिताय सर्वजन हिताय समाज के लोग अपने जीवन को सुखी बना पा रहे हैं, तो इसका बहुत बड़ा श्रेय महात्मा ज्योतिबा फुले को जाता है।
आज 11 अप्रैल के दिन उनके जन्मदिन के सुअवसर पर हम उन्हें शत-शत नमन करते हैं, और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके द्वारा किये गए समाज-सुधार के कार्यों के लिए उन्हें सदैव याद किया जायेगा। उन जैसा समाज सुधारक पाकर भारत भूमि धन्य हो गई।

Mumbai में दर्दनाक घटना मोबाइल फोन ने ले ली 15 साल की किशोरी की जान

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मुंबई, एजेंसी। मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने दिए जाने से पर परेशान 15 साल की एक लड़की ने उपनगर मलाड में एक सात मंजिला इमारत से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना शुक्रवार शाम को पश्चिमी उपनगर के मालवानी इलाके में हुई। किशोरी का शव बरामद होने के बाद पुलिस ने उसके माता-पिता का पता लगाया है। अधिकारी ने बताया कि हालांकि आत्महत्या के पीछे की सही वजह का पता नहीं चला है, लेकिन पुलिस को संदेह है कि लड़की परेशान थी क्योंकि उसके परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर उसका मोबाइल फोन छीन लिया था।
Edited By: Babli Kumari

 

गृहमंत्री अरुणाचल गए, चीन को आपत्ति:शाह बोले- हमारी जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता

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गृहमंत्री अरुणाचल गए, चीन को आपत्ति:शाह बोले- हमारी जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता .

New Delhi –  गृह मंत्री अमित शाह ने चीन की सीमा से लगे अरुणाचल के किबिथू गांव में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ की शुरुआत की। यहां उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘अब वो जमाना चला गया जब भारत की जमीन पर कोई भी कब्जा कर सकता था। आज सुई की नोक बराबर भी जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता।’ दरअसल, शाह के अरुणाचल दौरे को चीन ने अपनी क्षेत्रीय सम्प्रभुता का उल्लंघन बताया था।
इससे पहले चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि भारतीय गृह मंत्री अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश की यात्रा का हम विरोध करते हैं। चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता आया है। पिछले हफ्ते ही चीन ने अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नाम बदले थे। चीन के इस दावे को भारत ने खारिज कर दिया था।
अमित शाह ने कहा- अरुणाचल प्रदेश की एक बहुत खास और अच्छी बात है, जब आप यहां के लोगों से मिलोगे तो वे नमस्ते नहीं करते हैं। यहां के लोग जय हिंद बोलते हैं। यहां कोई भी अतिक्रमण नहीं कर सकता, इसकी वजह यहां के लोगों की देशभक्ति है।
शाह ने 1962 की जंग में शहीद हुए किबिथू के जवानों को याद करते हुए कहा- संख्या कम होने के बाद भी हमारे जवान बहादुरी से लड़े। 1965 में टाइम मैगजीन ने भी इस लड़ाई में भारतीय सेना के शौर्य की तारीफ की थी। भारत में सूर्य की पहली किरण इस भूमि पर पड़ती है। भगवान परशुराम ने इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा था। यह भारत माता के मुकुट का एक उज्ज्वल गहना है।
उन्होंने कहा कि ITBP और सेना के जवानों के शौर्य के कारण कोई भी आंख उठाकर हमारे देश की सीमा को नहीं देख सकता। अब वो जमाना चला गया जब भारत की जमीन पर कोई भी कब्जा कर सकता था। आज सूई की नोक बराबर भी जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता।
किबिथू गांव में ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ लॉन्च करते हुए शाह बोले- PM मोदी ने सीमावर्ती गांवों में रोजगार देने और विकास करने के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम शुरू करने का फैसला किया है। आने वाले सालों में सीमा से सटे हर घर में पानी, बिजली, गैस-सिलेंडर और लोगों को रोजगार मिलेगा। इन गांवों को देश के अन्य हिस्सों और अरुणाचल के अन्य हिस्सों से जोड़ा जाएगा।

बाबा को राजनीति से क्या लेना देना – हमारी फकीरी को कोई चुनौती नहीं दे सकता – बाबा रामदेव

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भिंड (Bhind), 10 अप्रैल . योगगुरु बाबा रामदेव सोमवार (Monday) को मध्य प्रदेश के भिंड (Bhind) जिले के लहार पहुंचे. वे यहां चल रही सात दिवसीय भागवत कथा में शामिल हुए. उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कई लोग कहते हैं कि मैं भाजपा का समर्थक हूं, यह गलत है. मैं किसी दल का समर्थक नहीं हूं. मैं तो सनातन का समर्थक हूं. जो सनातन और हिंदू राष्ट्र की बात करे, आप भी उसका साथ दें. इस दौरान कथावाचक चिन्मयानंद बापू, पंडोखर धाम के महंत गुरुशरण महाराज सहित अन्य संत व लोग मंच मौजूद रहे.
बाबा रामदेव ने कहा कि बाबा को राजनीति से क्या लेना देना, कोई सांसद (Member of parliament) बने, कोई विधायक, सीएम या पीएम बने, हमारी फकीरी को कोई चुनौती नहीं दे सकता. हम फकीर आदमी हैं. हमको किसी से क्या लेना-देना, लेकिन सत्ता में भी जो सनातन धर्म के प्रति निष्ठा रखता हो उसी को सपोर्ट करो, बाकी सभी को मोक्ष करो. साधना में सिद्धियों में पंडोखर सरकार पर हनुमानजीकी बहुत बड़ी कृपा है. शक्तियों के नाम पर भी बहुत पाखंड चलता है, लेकिन भगवान की कृपा से अनेकों को असली वाली शक्ति मिली है. बुरे लोगों का हम पर शासन नहीं होना चाहिए. –
उन्होंने कहा कि सनातन सत्य ही शाश्वत है. एक ने मुझसे पूछा कि इन मुसलमानों का क्या होगा. मैं जब आया तो कुछ मुसलमान भी प्रणाम कर रह थे. मैंने कहा कि मुसलमान आज ही मुसलमान हैं. 99 फीसदी मुसलमान औरंगजेब के बाद बने हैं. 350-400 साल पहले इनके पुरखे और हमारे पुरखे एक ही थे. कोई मुसलमान ज्यादा तेजी से अकड़े तो उससे कहना कि अपने खून को याद कर ले, हमको मत गुर्रा हम-तुम एक ही हैं. वो मानें या न मानें, हम तो मुसलमानों को मानते हैं कि वे हमारे ही पूर्वजों की औलाद हैं. वक्त के साथ उनकी पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन पूर्वज अलग नहीं हो सकते.
बाबा रामदेव ने कहा कि यहां कोई ईसाई वैटिकन सिटी या यूरोप से आए हैं क्या? हमारे जैसा उनमें खून है, चमड़ी का रंग एक है. हमारे ही कुल वंश के हैं. जो ईसाई और मुसलमान भारत में रह रहे हैं, ये सब अपने ही हैं. कोई कुछ गलत करेगा तो प्रशासन अपना काम करेगा, लेकिन हम किसी से नफरत नहीं करते.
उन्होंने कहा कि बच्चों को भी धर्म ग्रंथों की शिक्षा जरूर दें. उन्हें रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद पढ़ाएं. बच्चों को अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी, विज्ञान सब पढ़ाएं. उसमें भारतीय शिक्षा जरूर पढ़ाएं. शराब, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट से दूर रहें. नशे से दूर रहें. जो भी नशा करता हो अपना नशा बाबा की झोली में डाल दे. सभी इसका संकल्प लें.
भारत की दो ही परंपरा हैं- कृषि और ऋषि
बाबा रामदेव ने मंच से भजन भी सुनाया और योग भी किया. लोगों से कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित योग करें. भारत की दो ही परंपरा हैं- कृषि और ऋषि. हमने कुछ मुद्दे उठाए थे, राजनीतिक दृष्टि से देश आजाद हो गया. अभी शिक्षा, आर्थिक, वैचारिक और चारित्रिक गुलामी से देश को आजाद कराना है. तो कुछ लोग हमारे पीछे अड़ गए. आज उनके हालात ये हैं, कोई नाम लेवाल नहीं बचा है. जो धर्म के विरुद्ध आचरण करेगा उसका विनाश निश्चित है. यही विधान है. रामदेव किसी को श्राप नहीं देता है

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EVM की जगह बैलेट से हो चुनाव – बसपा सुप्रीमो मायावती

EVM की जगह बैलेट से हो चुनाव – बसपा सुप्रीमो मायावती

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर नगर निकाय चुनाव एवीएम से ना कराने की अपील की. उन्होंने कहा बसपा उम्मीद करती है कि UP सरकार और नगर निकाय से संबंधित अधिकारी पूरे चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराएं. नगर निगम का भी चुनाव EVM से ना करा के इसे भी सीधे तौर पर बैलट पेपर से ही कराएं.
उन्होंने कहा, BSP ने ये चुनाव पूरी तैयारी व दमदारी के साथ लड़ने का फैसला लिया है. ताकि प्रदेश में नगर निकाय स्तर पर सही लोग चुनकर जा सके. तभी फिर वे सर्व समाज में से विशेष कर गरीबों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिमों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगों के हितों का हर मामले में प्राथमिकता के आधार पर पूरा पूरा ध्यान रख सकते हैं.
उन्होंने कहा कि BSP ही इन वर्गों के हितों के मामले में केवल एक मात्र ऐसा मंच है जो बाबासाहब भीमराव अंबेडकर की विचारधारा एवं आंदोलन से जुड़कर इन वर्गों के हितों में पूरी ईमानदारी व निष्ठा से लगा हुआ है. जिसके लिए BSP के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम ने अपनी पूरी जिंदगी समर्पित की है.
उन्होंने कहा, “UP नगर निकाय चुनाव होने की तारीख घोषित हुई है जिसके तहत प्रदेश के सभी नगर निगम पार्षद नगर पालिका नगर पंचायत व वार्ड आदि के चुनाव होने है. जिसमें लोग अपने जरूरत व सुख सुविधा आदि के हिसाब से अपने क्षेत्र के विकास पर काफी कुछ ध्यान दे सकते है तथा जिसके लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संविधान व कानून के हिसाब से धन उपलब्ध कराए जाने का भी प्रावधान है.”
उन्होंने कहा,”यहां ध्यान देने की बात ये भी है कि चुनाव में SC, ST, OBC व महिलाओं आदि के लिए जो आरक्षण की व्यवस्था की गयी है तो उससे इन वर्गों के लोग पूरे तौर से सहमत नहीं है. क्योंकि इन चुनाव में लोगों के लिए आरक्षण की जो भी सीटें आरक्षित की गयी है तो उसमें काफी नियमों को ताक पर रख दिया गया है. जिससे यह स्पष्ट है कि सत्ताधारी दल BJP इस चुनाव में हर स्तर पर अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने में लगी है.
उन्होंने बीजेपी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि, “यहां के गरीबों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं तथा बेरोजगारी के इस दौर में दैनिक मजदूरी के अपना पेट पालने की योजनाओं के धन में भी कटौती व भुगतान में देरी आदि करके जो यहां स्थानीय रोजगारों की दुर्दशा बना दी गई है. वह भी किसी से छिपा नहीं है.”