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मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी चंबा का बड़ा फैसला, गौ हत्या करने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

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Chamba News: मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी चंबा की बैठक सनवाल के गांव लांगेंड में हुई। बैठक में पिछले दिनों सनवाल के धार मल्हाड में सामने आए गोवंश हत्या मामले पर चिंता जताई गई।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने निर्णय लिया कि भविष्य में जो भी इस तरह के कृत्य करेगा या इसमें सम्मिलित पाया जाएगा, मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी उनको खुद पुलिस और प्रशासन के हवाले करेगी, साथ ही उन लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग

सोसायटी सदस्यों का कहना है कि सनावाल के धार मल्हड़ में सामने आए गोवंश हत्या मामले में पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि इस तरह के कार्यों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी जिला अध्यक्ष एडवोकेट लतीफ मुहम्मद ने बताया कि वह जल्द उन लोगों के खिलाफ मुहिम छेड़ेंगे जो गलत काम करने वाले लोगों का साथ दे रहे हैं।

गणमान्य लोग रहे मौजूद

बैठक में मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी चुराह के अध्यक्ष हाशु शेख, अंजुमन इस्लामिया चुराह के अध्यक्ष मौलवी हसन दीन, सलूणी मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष याकूब मगरा, मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी चुराह के अध्यक्ष हाजी अब्दुल मजीद, ग्राम पंचायत भलोडी के प्रधान अयूब खान , ग्राम पंचायत आयल के प्रधान शुक्रदीन, शलेला बाड़ी के पूर्व प्रधान दीन मोहम्मद, ग्राम पंचायत नेरा के प्रधान गुलाम रसूल समेत अन्य मौजूद रहे।

गुरुग्राम में गौ तस्करों का आतंक, गौ रक्षकों ने रोका तो चलाई गोली, फरार

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नई दिल्ली:  गुरुग्राम में गौ तस्करी का एक और मामला सामने आया है.मामला केएमपी एक्सप्रेसवे का बताया जा रहा है. गौ रक्षक दल को सूचना मिली थी कि एमपी से फरुखनगर जाने वाले रास्ते से गौ तस्कर जाने वाले हैं. मिल रही जानकारी के अनुसार आरोपी गौ तस्कर अपनी स्कॉर्पियो कार गायों को लेकर जा रहे थे. तभी वहां गौ रक्षक दल पहुंचा. गौ रक्षकों ने जैसे ही आरोपियों को कार रोकने के लिए कहा तो उन्होंने फायरिंग कर दी.गौ तस्करी की इस घटना को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दिख रहा है कि कैसे गौ तस्कर अपनी कार को भगा रहे हैं . गौ रक्षक जब उन्हें रुकने के लिए कहते हैं तो वो उनपर फायरिंग शुरू कर देते हैं. इसके बाद गौ रक्षकों की तरफ से भी बचाव में फायरिंग की जाती है. आपस में हो रही फायरिंग के बीच तस्करों की कार का टायर फट जाता है. इसके बावजूद वो अपनी कार को नहीं रोकते हैं. काफी देर कार का पीछा करने के बाद आखिरकार गौ तस्कर अपनी कार रोकते हैं. उससे निकलते हैं और फिर हाईवे पर बनी रेलिंग को पार करके भाग जाते हैं. इसके बाद गौ रक्षक मोनू मानेसर की टीम गौ तस्करों की कार से गायों को बाहर निकालते हैं.

द आर्टिसन अवार्ड्स 2023 सम्पन्न

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जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल द्वारा मुम्बई में आयोजित ‘द आर्टिसन अवार्ड्स 2023’ समारोह विशिष्ट अतिथि, सुश्री मीरा कपूर, कंटेंट क्रिएटर और ज्वैलरी कनॉइजर के साथ-साथ श्री निखिल मेहरा, शांतनु एंड निखिल श्री विपुल शाह चेयरमैन जीजेईपीसी, श्री मिलन चोकसी, संयोजक, प्रोमोशन एवं मार्केटिंग – जीजेईपीसी, और श्री सब्यसाची रे कार्यकारी निदेशक (जीजेईपीसी) की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित  देश की प्रतिष्ठित ज्वैलरी डिजाइन प्रतियोगिता ‘आर्टिसन अवॉर्ड्स’ केबहुप्रतीक्षित 6वें संस्करण में देश और दुनिया भर के आभूषण डिजाइनरों की असाधारण प्रतिभा और रचनात्मकता देखने को मिली। ‘आर्टिसन अवार्ड्स’ एक प्रयास है जिसका उद्देश्य रचनात्मक आभूषण डिजाइनरों और उद्योग के पेशेवरों को आभूषण डिजाइन में उनके व्यक्तिगत और रचनात्मक विचारों को अधिकतम प्रोत्साहन देने के लिए एक मंच प्रदान करना है। आर्टिसन अवॉर्ड्स 2023, जेमोलॉजी में विश्व की अग्रणी प्राधिकरण, जीआईए – जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका द्वारा संचालित है।
स्थापना के बाद से, आर्टिसन अवॉर्ड्स को विभिन्न जेनर्स और स्टाइल्स के कलाकारों से कुल 4200 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं। इन प्रविष्टियों की ध्यानपूर्वक समीक्षा और मूल्यांकन किया गया और 178 उत्कृष्ट फाइनलिस्ट का अंतिम रूप से चयन किया गया। फाइनलिस्टों में, 55  उल्लेखनीय व्यक्ति विजेता के रूप में उभरे, जिन्होंने अपने असाधारण कलात्मक कौशल के लिए अच्छी तरह से योग्य पहचान प्राप्त की। चालू वर्ष के लिए, आर्टिसन अवॉर्ड्स में भारत भर के 26 शहरों के साथ-साथ मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका और यूरोप सहित विदेशों के क्षेत्रों से 600 से अधिक प्रविष्टियाँ आईं।
‘द आर्टिसन अवार्ड्स 2023’ की थीम इंडियामॉडर्न – द वर्ल्ड ऑफ आर्ट्स मीट्स मॉडर्न ज्वेलरी थी। थीम को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया था, जिनमें से प्रत्येक में अलग-अलग शैली पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जैसे कि अमूर्त कला, मूर्तिकला और प्रिंट कला। ‘आर्टिसन अवार्ड्स 2023’ के सम्मानित ज्यूरी सदस्यों में मीरा कपूर कंटेंट क्रिएटर व ज्वेलरी कनॉइजर, अपराजिता जैन निदेशक व को-ओनर नेचर मोर्टे गैलरी, प्रियंका खन्ना लेखक, निखिल मेहरा, फैशन डिजाइनर, शांतनु एंड निखिल, सजिल शाह आभूषण कलाकार व संस्थापक, सज्जांते पर्निया कुरैशी, सह-संस्थापक सरिटोरिया और श्रीराम नटराजन प्रबंध निदेशक (जीआईए इंडिया) शामिल रहे। संस्था द्वारा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले वाले विजेताओं को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विपुल शाह ‘द आर्टिसन अवार्ड्स 2023’ की विस्तृत चर्चा करते हुए कहते हैं — “आर्टिसन अवार्ड्स उन पहलों में से एक है जो प्रतिभा का पोषण करता है, प्रेरणा देता है और आभूषण डिजाइनरों की अगली पीढ़ी को उनकी कल्पना की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है। तेजी से विकसित हो रहे रत्न और आभूषण उद्योग में जहां नवाचार और नए दृष्टिकोण सर्वोच्च हैं, आर्टिसन अवार्ड्स उभरते डिजाइनरों के लिए अपनी पहचान बनाने के लिए एक लॉन्चिंग पैड के रूप में कार्य करता है।”

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

डॉ. वर्षा रामचंद्र चौरे को धनगर रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया

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नवी मुंबई के जाने-माने दंत चिकित्सक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. वर्षा रामचंद्र चौरे को कल ठाणे में “धनगर रत्न (स्वास्थ्य क्षेत्र) पुरस्कार 2023” से सम्मानित किया गया। विश्व संविधान और संसद परिषद अमेरिका की सदस्य के साथ-साथ डॉ. वर्षा यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल टैलेंट पूल की सदस्य भी हैं। 2021 में, उन्हें संगठन के महासचिव सर रफाल मार्सिन द्वारा प्राग, चेक गणराज्य में मानवाधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग के विशेष निगरानी मिशन के सदस्य के रूप में घोषित किया गया था। इससे पहले 8 मार्च, 2019 को भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से My Stamp Se Tenant सीरीज के तहत, डॉ वर्षा चौरे जी का डाक टिकट जारी किया गया है।
उनके प्रेरक व्यक्तित्व स्तम्भलेख अनेक समाचार पत्रों में लोकप्रिय हैं। डॉ. वर्षा पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर मेडिकल एसोसिएशन मुंबई के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में अपना योगदान दे रही हैं और वे अपनी अन्य संस्थाओं के माध्यम से अन्य सामाजिक कार्य करती हैं। महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त उस्मानाबाद जिले के इरला नामक एक छोटे से गाँव से, मुंबई में चिकित्सा शिक्षा की पढाई करना और स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना निस्संदेह सराहनीय है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे डॉ. वर्षाजी ने कोरोना महामारी के दौरान नवी मुंबई नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में योगदान देना अपना राष्ट्रीय कर्तव्य समझा। बचपन से ही संघर्षरत डाॅ. वर्षा चौरे ने अपनी सफलता का श्रेय हमेशा माता-पिता सुनीता-रामचंद्र, मेंटर डॉ. सुधीर तारे और गुरुजन को दिया हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति का दूसरा नाम भारत की बेटी डॉ. वर्षा रामचंद्र चौरे पर सिर्फ उनके गांव, स्कूल, शिक्षकों को ही नहीं बल्कि पूरे देशवासियों को गर्व है। महज 30 साल की उम्र में इन सभी उपलब्धियों को देखते हुए, डॉ. वर्षाजी को साप्ताहिक जीरो माइल द्वारा “जीरो माइल आइकॉन अवार्ड 2022” के लिए चुना गया, जो हर साल पूरे देश में केवल 20 लोगों को दिया जाता है। धनगर प्रतिष्ठान ठाणे के अध्यक्ष दीपक कुरकुंडे के अनुसार दिनांक 28/05/2023 को धनगर प्रतिष्ठान, ठाणे जिला एवं धनगर प्रतिष्ठान महिला मंडल, ठाणे ने धनगर रत्न पुरस्कार समारोह 2023 पुरस्कार समारोह का आयोजन ठाणे नगरपालिका मुख्यालय, नरेंद्र बल्लाल सभागृह में किया था l इस समय विधायक निरंजन डावखरे, विधायक श्री. संजय केलकर, माननीय नरेश मस्के, माननीय नानासाहेब मोटे, माननीय बाबासाहेब दगड़े, माननीय सुनील कुराडे, मान. सुहास होनमाने, माननीय अभिमन पाटिल और धनगर फाउंडेशन के दीपक कुरकुंडे, तुषार धायगुडे उपस्थित थे।

वीर सावरकर जयंती के अवसर पर रणदीप हुड्डा ने बतौर निर्देशक लांच किया अपनी पहली फ़िल्म का टीज़र

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मुम्बई। हमारे इतिहास के एक ऐसे अध्याय जिसे हमने अतीत में छोड़ दिया है, उस कहानी के साथ रणदीप हुड्डा निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं और वह कहानी है भारत के क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की. उनकी जयंती के अवसर पर रणदीप हुड्डा ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म का टीज़र लॉन्च किया है. इस फिल्म का निर्माण आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स तथा रणदीप हुड्डा फिल्म्स द्वारा किया गया है और इसे इसी वर्ष रिलीज़ भी किया जाएगा.
आज हमारा देश, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे विवादास्पद तथा प्रभावशाली क्रांतिकारी नेताओं में से एक वीर सावरकर की जयंती का उत्सव मना रहा है. इस महत्वपूर्ण तारीख को और महत्वपूर्ण बनाते हुए फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के निर्माताओं ने एक ऐसा टीजर लॉन्च किया है, जो दर्शकों के मस्तिष्क को झकझोरते हुए उन्हें दिलचस्प सवालों के साथ छोड़ देगा. हममें से कईयों ने उस दौर के कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियाँ सुनी होंगी लेकिन यह अफ़सोस की बात है कि भारतीय इतिहास की किताबों में कभी सावरकर की विचारधाराओं और उनके योगदानों को उजागर नहीं किया गया.
सावरकर एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्होंने भारत की सशस्त्र क्रान्ति को प्रभावशाली बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसका भारत को स्वतंत्रता दिलाने में बहुत बड़ा योगदान रहा. यही वजह है कि उन्हें उस दौर में ‘अंग्रेजों द्वारा मोस्ट वांटेड’ का खिताब मिला था.
उन्होंने ही वीर भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, मदनलाल धींगरा जैसे कई अन्य लोगों के जीवन को प्रेरित किया. इस भुला दिए गए इतिहास पर अपनी बात रखते हुए टीज़र दर्शाता है कि कैसे हिंसा के ज़रिये भारत को आज़ादी मिल गयी होती, यदि देश, सावरकर के नक़्श-ए-कदम पर चलता. यह ऐतिहासिक फिल्म रणदीप हुड्डा के निर्देशन में बनने वाली पहली फिल्म है. निर्देशन के अलावा फिल्म के शीर्षक ‘सावरकर’ की भूमिका में भी मंझे हुए कलाकार रणदीप हुड्डा ही नजर आएँगे.
फिल्म के टीज़र लॉन्च के अवसर पर फिल्म के निर्माता आनंद पंडित ने कहा, ”सावरकर हमारे लिए काफी गौरवपूर्ण प्रोजेक्ट है क्योंकि हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम पर वीर सावरकर जी का अविश्वसनीय प्रभाव रहा है. यह दुर्भाग्य की बात है कि इस देश में उनकी कहानी को कभी नहीं बताया गया, और हमें यकीन है कि हमारी यह फिल्म उस कमी को अवश्य पूरा करेगी. फिलहाल हम इस फिल्म का पहला लुक प्रस्तुत कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि दर्शकों को यह बहुत पसंद आएगा और वह इस फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार करेंगे.”
फिल्म का टीज़र लॉन्च करते हुए रणदीप ने कहा, ”सावरकर जी ने एक अविश्वसनीय जीवन जिया और इस फिल्म के लिए उनकी कहानी पर शोध करते हुए मैंने उनके बारे में काफी कुछ जाना. तब से मैं उनका ज़बरदस्त प्रशंसक बन गया हूँ. अत: उनकी 140वीं जयंती पर मुझे हमारी फिल्म की एक छोटी सी झलक प्रस्तुत करने में बेहद ख़ुशी हो रही है.
अपने सहयोगी उत्कर्ष नैथानी के साथ इस कहानी को रचने तथा निर्देशन करने जा रहे रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘स्वातंत्रय वीर सावरकर’ का निर्माण आनंद मोशन पिक्चर्स तथा रणदीप हुड्डा फिल्म्स द्वारा लीजेंड स्टूडियो और अवाक फिल्म्स के बैनर तले किया गया है. फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और यह फिल्म इसी वर्ष सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है.

कृष्णा कुमार की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म “पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई” का ट्रेलर 29 मई को होगा लॉन्च 

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फ़िल्म अभिनेता, निर्माता व वितरक कृष्ण कुमार ने अपने बैनर मयूरी पायल इंटरटेनमेंट द्वारा अब तक कन्टेन्ट प्रधान फिल्मों का ही निर्माण किया है। इसी कड़ी में एक और मील का पत्थर गाड़ते हुए कृष्ण कुमार की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म ‘पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई’ का भव्य ट्रेलर आगामी 29 मई को रिलीज़ होने वाला है। फ़िल्म की शूटिंग पूरी हो गई है और अब फ़िल्म के पोस्ट प्रोडक्शन का काम भी अपने आख़िरी चरण में है। फ़िल्म के पोस्टर रिलीज़ के समय इस फ़िल्म ने काफी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था, और तभी से लेकर अब तक ट्रेडपण्डित इस फ़िल्म के रिलीज़ की बाट देख रहे हैं। क्योंकि इस फ़िल्म के सभी राइट्स को SRK म्यूज़िक ने काफी महंगे दाम देकर ख़रीद लिया है। फ़िल्म का कन्टेन्ट आजकल की डिमांड के अनुसार पूरी तरीके से पारिवारिक पृष्ठभूमि पर आधारित ही है। इसमें एक बेटी के संघर्ष की कहानी को दर्शकों के सामने रखा गया है।
मयूरी पायल इंटरटेनमेंट व ओम प्रोडक्शन हाउस प्रस्तुत भोजपुरी फ़िल्म ‘पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई’ के निर्देशक हैं सम्राट सिंह। इस फ़िल्म के सह निर्माता हैं विक्रम सिंह। फ़िल्म का संगीत दिया है अमन श्लोक व अशोक राव ने जबकि गीत लिखे हैंअरविंद तिवारी, नागेंद्र उजाला व अशोक राव ने। कथा पटकथा व संवाद कृष्ण कुमार ने लिखे हैं। नृत्य निर्देशक हैं विवेक थापा व संदीप पांडे।

फिल्म ‘पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई’ में अभिनय करने वाले कलाकार हैं कृष्ण कुमार, सोनम तिवारी, समर्थ चतुर्वेदी, संजू सोलंकी, विनोद मिश्रा, सी पी भट्ट, बालेश्वर सिंह, जे नीलम, शकीला मजीद, अभय कुमार और नागेंद्र उजाला।

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के लिए विधायक सुनील राणे ने 100 लड़कियों के बैंक खाते खोलने की योजना का किया शुभारम्भ

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मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 9 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश में कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। बोरिवली के विधायक सुनील राणे के द्वारा 9 वर्ष पूरे होने पर छोटी बच्चियों के नाम से बैंक खाता खोलने की अभिनव योजना का मुंबई में शुभारम्भ किया गया। केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री के द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत योजना यह क्रियान्वित की गई है।
बोरीवली के विधायक सुनील राणे द्वारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत, रविवार को मधुरम बैंक्वेट में आयोजित एक कार्यक्रम में पांचवीं कक्षा तक की 100 बालिकाओं को बैंक बचत खाता पासबुक का वितरण किया गया। सुनील राणे के द्वारा खोले गए प्रत्येक खाते में 1000 रुपये जमा किए गए हैं।
ग़ौरतलब है कि विधायक सुनील राणे द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा के लिए कंप्यूटर/ टैब, साइकिल वितरण, देशभर शहीद सैनिकों की बेटियों को निशुल्क लैपटॉप वितरित समय समय पर किया जाता रहा है।

नया भवन भारत के विकास से विश्व के विकास का आह्वान करेगा, जानें मोदी के भाषण की बड़ी बातें

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नया भवन भारत के विकास से विश्व के विकास का आह्वान करेगा, जानें मोदी के भाषण की बड़ी बातें

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को नई संसद भवन की इमारत का उद्घाटन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा कक्ष में ‘सेंगोल’ (राजदंड) स्थापित किया। इसके बाद पीएम मोदी पहली बार नई संसद इमारत के लोकसभा सदन में पहुंचे। प्रधानमंत्री के प्रवेश करते ही सांसदों ने मोदी-मोदी के नारे लगाए। राज्सभा के उपसभापति हरिवंश ने उपराष्ट्रपति ओम प्रकाश धनखड़ का संदेश पढ़ा।
नए रास्तों पर चल कर ही नए प्रतिमान

पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि नए रास्तों पर चल कर ही नए प्रतिमान गढ़े जाते हैं। आज नया भारत नया लक्ष्य तय कर रहा है। नए रास्ते गढ़ रहा है। नया जोश है, नई उमंग, नई सोच है। दिशा नई है। विश्वास नया है। पीएम मोदी ने कहा कि आज फिर एक बार पूरा विश्व भारत को भारत के संकल्प के दृढ़ता को भारतवासियों की प्रखरता, भारतीय जनशक्ति की जीजिविषा को आदर और उम्मीद के भाव से देख रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है तो विश्व आगे बढ़ता है। संसद का यह नया भवन भारत के विकास से विश्व के विकास का भी आह्वान करेगा। पीएम ने कहा कि आज इस ऐतिहासिक अवसर पर कुछ देर पहले संसद की नई इमारत में पवित्र सेंगोल की भी स्थापना हुई है। नए संसद भवन के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि यह प्रतिष्ठित इमारत सशक्तीकरण, सपनों को हकीकत में बदलने का उद्गम स्थल बने।

आज नए संसद भवन को देखकर हर भारतीय गौरव से भरा हुआ है। इस भवन में विरासत भी है, वास्तु भी है। इसमें संस्कृति भी है और संविधान के स्वर भी हैं। ये संसद भवन हर भारतीय के कर्तव्य भाव को जागृत करेगा।
– पीएम मोदी, नई संसद के लोकार्पण पर

सेंगोल हम सभी को प्रेरणा देगा

पीएम मोदी ने कहा कि आज इस ऐतिहासिक अवसर पर कुछ देर पहले संसद की इस नई ईमारत में पवित्र सेंगोल की भी स्थापना हई है। पीएम मोदी ने कहा कि जब भी इस संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी, सेंगोल हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि महान चोल साम्राज्य में सेंगोल को, कर्तव्यपथ का सेवापथ का, राष्ट्रपथ का प्रतीक माना जाता था। उन्होंने कहा कि राजादी और आदीनम के संतो के मार्गदर्शन में यही सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक था।
समय की मांग थी नई संसद

पीएम ने कहा कि पिछले एक दो दशक से नई संसद की जरूरत महसूस की जा रही थी। पीएम ने कहा कि नई संसद समय की मांग थी। आने वाले समय में सांसदों की संख्या बढ़ेगी। मुझे खुशी है कि भव्य ईमारत आधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह से लैस है। इस संसद में विरासत भी है, वास्तु भी है। पीएम ने कहा कि पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक हमारी निष्ठा एक ही है। देश में 30 हजार से ज्यादा पंचायत भवन बनाए गए हैं। 9 साल में 50 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि इस संसद भवन ने करीब 60 हजार श्रमिकों को रोजगार देने का काम किया है। उन्होंने इस ईमारत के लिए अपना पसीना बहाया है। इनके श्रम को समर्पित डिजिटल गैलरी बनाई गई है। संसद के निर्माण में उनका योगदान भी अमर हो गया है।

ये नया भवन क्या-क्या करेगा

पीएम ने कहा कि ये नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगा। ये नया भवन आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा। ये नया भवन… विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धि होते हुए देखेगा। ये नया भवन… नूतन और पुरातन के सह-अस्तित्व का भी आदर्श उदाहरण है। पीएम ने कहा कि हमारा लोकतंत्र ही हमारी प्रेरणा है, हमारा संविधान ही हमारा संकल्प है। इस प्रेरणा, इस संकल्प की सबसे श्रेष्ठ प्रतिनिधि हमारी ये संसद ही है।

मयंक शेखर को नशामुक्त भारत यात्रा में सक्रियता के लिए मिला पुरस्कार

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नशामुक्त भारत से ही देश विश्वगुरू बनेगा

दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर दिल्ली में काशियाना फाउंडेशन द्वारा आयोजित नशामुक्त भारत यात्रा के धन्यवाद सत्र में संस्था का सातवां स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने नशामुक्त भारत यात्रा के यात्रियों को सम्मानित कर उनकी हौसला आफजाई की।
26 मई 2023 को दिल्ली में काशियाना फाउंडेशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुम्बई में एमएनबी होम फॉर ब्लाइंड के मैनेजर व समाजसेवक मयंक शेखर को नशा मुक्त भारत यात्रा में अहम भूमिका निभाने के लिए सम्मान प्राप्त हुआ। मयंक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू के हाथों सम्मानित हुए। इस सम्मान समारोह में भाजपा के कई पदाधिकारी तथा गणमान्य उपस्थित थे।

इनके साथ ही राष्ट्रीय महासचिव भाजपा कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व आयुक्त दिव्यांगजन भारत सरकार डॉ कमलेश कुमार, सांसद दिल्ली हंस राज हंस, खेलरत्न अवार्डी पद्मश्री डॉ दीपा मलिक, डॉ उत्तम ओझा, संस्था अध्यक्ष सुमीत अंकुर, डॉ सचिन मिश्रा, आशीष गुप्ता, प्रशांत सचान, डॉ क्रांति श्रीवास्तव उपस्थित थे।

बैल और सांड में अंतर! दोनों की जननी एक, फिर क्यों अलग-अलग हैं ये गोवंश?

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समाज में कड़ी मेहनत के प्रतीक के तौर पर अक्सर बैल का उदाहरण दिया जाता है. वहीं जब आक्रामकता और ताकत का उदाहरण देना होता है तो सांड़ का जिक्र किया जाता है. सांड और बैल गाय के नर बच्चे यानी बछड़े के रूप हैं. लेकिन, समाज में दोनों की भूमिका अलग-अलग है. वैसे तो ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले हममें से अधिकतर लोग को सांड और बैल के बीच अंतर के बारे में जानकारी होगी, लेकिन ऐसा काफी हद तक संभव है कि शहरी युवा पीढ़ी इस बारे में नहीं जानती होगी. आज हम आपको इसी बारे में बताते हैं. आखिर एक ही गाय के नर संतान यानी बछड़े कैसे सांड और बैल दो अलग-अलग भूमिकाओं में आ जाते हैं.
दरअसल, यह एक रोचक सवाल है. इंसान शुरू से ही अपने स्वार्थ के लिए पशुओं का इस्तेमाल करता रहा है. वह दूध के लिए गाय और कृषि कार्यों के लिए उसके बछड़े को बैल के रूप में इस्तेमाल करता है. इंसान अपनी बुद्धि के दम पर सृष्टि से बेहद खतरनाक और ताकतवर जानवरों को भी अपनी काबू में कर लेता है. यही इंसान सैकड़ों लोगों के बराबर ताकत रखने वाले जीव हाथी की सवारी करता है. यानी इंसान अपने दिमाग से ताकतवर जीवों पर काबू पाता है. यही कहानी सांड और बैल के पीछे है. गाय के नर बच्चे बछड़े ही बाद में बैल और सांड़ दो रूपों में अपनी भूमिका निभाते हैं. बैल का इस्तेमाल आमतौर पर खेती के कार्यों के लिए किया जाता है. किसान खेत जोतने के लिए बैल पालते थे.
इस तरह बनाए जाते हैं बैल
दरअसल, इंसान अपने स्वार्थ के लिए बछड़े को बैल बना देता है. सृ्ष्टि ने इस दुनिया में हर जीव के दो रूप नर और मादा बनाए है. ऐसे में गाय का नर बच्चा या बछड़ा जब बड़ा होता है तो वह पशुपालक के लिए किसी काम का नहीं रह जाता. पहले से जमाने में किसान इन बछड़ों को खेत जोतने के लिए हल में इस्तेमाल करते थे. लेकिन, समस्या यह होती थी कि इंसान को इन बछड़ों को काबू करने में मुश्किल आती थी. फिर उन्होंने एक तरकीब निकाली. इंसानों ने बछड़ों की जवानी को कुचलने का फैसला किया. इससे बछड़े की आक्रमकता खत्म हो जाती है. इसको बधियाकरण कहा जाता है.
इस प्रक्रिया के दौरान ढाई-तीन साल के बछड़े के अंडकोष को दबाकर उसे खत्म कर दिया जाता है. आधुनिक युग में यह काम मशीनों के द्वारा किया जाता है जबकि पहले के दौर में इसे बाकायदा कुचला जाता था. इस प्रक्रिया में बछड़े को बेइंतहा दर्द होती थी. कई बार तो इस दौरान बछड़े की मौत हो जाती थी. अंडकोष कुचल दिए जाने या खत्म कर दिए जाने के बाद बछड़ा किसी गाय के साथ संभाग नहीं कर पाता है. बधियाकरण की इस प्रक्रिया को आधुनिक युग में बर्डिजो कास्टरेटर यंत्र से अंजाम दिया जाता है. इसमें अंडकोष की कोशिकाएं पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं. इस तरह बछड़े को पूरी तरह नपुंसकर बना दिया जाता है.
दूसरी तरह सांड होते हैं. वे ऐसे बछड़े होते हैं जिनका बधियाकरण नहीं किया जाता है. बधियाकरण नहीं होने के कारण बछड़ा जब बड़ा होता है तो वह ताकत से भरपूर होता है. उसमें आक्रमकता होती है. इसी कारण आक्रमकता और पावर के प्रतीक के रूप में सांड का उदाहरण दिया जाता है. बधियाकरण के वक्त ही बछड़े के नाक को छेदकर नकेल डाल दी जाती है. इस तरह वह किसान का गुलाम बन जाता है. वहीं सांड़ छुट्टा घूमता है. वह आजादी की प्रतीक है.