हादसे में गायों के चिथड़े उड़ गए
हर कोई गायों को बचाने में जुट गया
भिवानी और चरखी दादरी गो रक्षा दल की टीम मौके पर पहुंची
जगतगुरु श्री रामकृष्ण’ प्रदर्शन के लिए तैयार
विवेकानंद एजुकेशन सेल फिल्म्स की नवीनतम प्रस्तुति ‘जगतगुरु श्री रामकृष्ण’ का पोस्ट प्रोडक्शन इन दिनों मुम्बई में तेजगति से जारी है। अब बहुत जल्द ही यह फिल्म सिनेदर्शकों तक पहुँचने वाली है। झारखंड की धरती से जुड़ी इस फिल्म के निर्माता व निर्देशक क्रमशः गजानंद पाठक एवं डा. बिमल कुमार मिश्र हैं। इस आध्यात्मिक एजुकेशनल फिल्म में शामिल गानों को संगीतकार अजय मिश्रा के संगीत निर्देशन में स्वर दिया है अनूप जलोटा, सुरेश वाडेकर और महालक्ष्मी अय्यर ने। डीओपी राहुल पाठक के कलात्मक सिनेमेटोग्राफी से सजी इस फिल्म में हजारीबाग (झारखंड) के नवोदित प्रतिभाशाली कलाकार स्क्रीन पर फिल्म के सभी पात्रों को जीवंत करते नज़र आएंगे। इस फिल्म में रामकृष्ण परमहंस की जीवनी एवं शिक्षाओं को उसके वास्तविक स्वरूप में दिखाया गया है। स्वामी विवेकानन्द के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस जगतगुरु है, उन्होंने पूरे जगत के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिया है और दुनिया को राह दिखाने का काम किया है। उन्होंने अपने तपस्या के बल पर अध्यात्म की सबसे ऊंची अवस्था को प्राप्त किया है। मूलरूप से आध्यात्मिक गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस की जीवन गाथा को ही इस फिल्म की कथावस्तु का आधार बनाया गया है। यूँ तो हजारीबाग (झारखण्ड) की धरती फिल्मी गतिविधियों के मामले में काफी उर्वरक रही है। 70 व् 80 के दशक में सुभाष घई, ऋषिकेश मुख़र्जी, प्रदीप कुमार, अभिभट्टाचार्य, उत्तम कुमार व् तनूजा जैसी शख्सियतों का इस धरती पे आगमन हजारीबाग के इतिहास में दर्ज है।
50 व 60 के दशक को भी भुलाया नहीं जा सकता है क्योंकि आई जी हमीद और ज़रीना बेगम की दास्तान के साथ गुजरे ज़माने की चर्चित अदाकारा नरगिस की माँ जहद्दन बाई और मशहूर अभिनेत्री विजया चौधरी की कई यादें हजारीबाग शहर (झारखंड) के आग़ोश में दफ़न है। शायद यही वजह है कि यहाँ के स्थानीय प्रतिभाओं के द्वारा आम लीक से हट कर कुछ नया कर दिखाने का प्रयास किया जाता रहा है और यहाँ की फिल्मी गतिविधियों की गूंज निरंतर बॉलीवुड तक पहुँचती रही है। हजारीबाग की धरती से जुड़े कई लोग फ़िल्मविधा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए झारखण्ड का परचम लहराने में कामयाबी हासिल कर चुके हैं। 21वीं सदी में फ़िल्म मेकिंग प्रयोगात्मक दौर में प्रवेश कर गया है और इस दौर में फिल्म निर्माता गजानंद पाठक के द्वारा जनहित में आध्यात्मिक एजुकेशनल फिल्म ‘जगतगुरु श्री रामकृष्ण’ का निर्माण किया जाना प्रयोगात्मक सुखद संकेत है। उम्मीद की जारही है कि उनके द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम के बाद अन्य फिल्म निर्माताओं के सोच को एक नई दिशा मिलेगी।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय
आदिपुरुष फिल्म के संवाद में हुआ बदलाव, पढ़ें अब नया डायलॉग!
मुम्बई। फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) के मेकर्स ने फिल्म के डायलॉग में बदलाव कर दिए है। अब आपको भगवान हनुमान के मुंह से “जलेगी भी तेरे बाप की…” जैसे डायलॉग सुनने को नहीं मिलेंगे।
बता दें कि रिलीज के बाद अपने डायलॉग को लेकर यह फिल्म काफी विवादों में रही।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, मेकर्स ने मंगलवार को फिल्म में ये बदलाव कर दिए हैं। “जलेगी भी तेरे बाप की…” के आलावा मेकर से कई संवादों को बदला है। हालांकि, इस भाषा में ज्यादा बदलाव नहीं किये गए है, सिर्फ कुछ शब्दों के फेरबदल किया गया हैं। जैसे जिस जिस डायलॉग में हनुमान को तू कहकर बोला गया, उसे बदलकर तुम कर दिया गया है।
फिल्म आदिपुरुष एक सबसे विवादित डायलॉग “कपड़ा तेरे बाप का, तेल तेरे बाप का, आग तेरे बाप की तो जलेगी भी तेरे बाप की” की जगह अब भगवान हनुमान यह कहते दिखाई देंगे- “कपड़ा तेरी लंका का, तेल तेरी लंका का, आग तेरी लंका की तो जलेगी भी तेरी लंका ही।”
फिल्म में जो डायलॉग बदल दिए गए है, वो इस प्रकार है…
पहले यह डायलॉग था: कपड़ा तेरे बाप का.. तो जलेगी भी तेरे बाप की।
अब यह बदलाव किया गया: कपड़ा तेरी लंका का… तो जलेगी भी तेरी लंका
पहले यह डायलॉग था: जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे.. हम उनकी लंका लगा देंगे।
अब यह बदलाव किया गया: जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे.. हम उनकी लंका में आग लगा देंगे।
पहले: मेरे एक सपोले ने तुम्हारे इस शेषनाग को लंबा कर दिया है।
अब: मेरे एक सपोले ने तुम्हारे इस शेषनाग को समाप्त कर दिया है।
पहले: तू अंदर कैसे घुसा… तू जानता भी है कौन हूं मैं
अब: तुम अंदर कैसे घुसे… तुम जानते भी हो कौन हूं मैं
महाराष्ट्र में मॉनसून का इंतजार – 25 जून के बाद हर जगह अच्छी बारिश की संभावना
मुंबई: महाराष्ट्र में मॉनसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि महाराष्ट्र में रुका मॉनसून जल्द ही रफ्तार पकड़ेगा। मॉनसूनी हवाओं के आगे बढ़ने के लिए वर्तमान में अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। जैसे-जैसे चक्रवात आगे बढ़ा है, मॉनसून का रास्ता साफ हो गया है। इसके चलते मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों में मॉनसून प्रदेश में प्रवेश करेगा। मौसम विभाग के मुंबई और नागपुर केंद्रों ने इस संबंध में जानकारी दी है।
25 जून के बाद हर जगह अच्छी बारिश की संभावना
इस बीच मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मराठवाड़ा और विदर्भ में 22 से 23 जून के बाद बारिश शुरू होने की प्रबल संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि 25 जून के बाद हर जगह अच्छी बारिश की संभावना है। दरअसल, बारिश के देर से आने से बुवाई में दिक्कत आई है। लेकिन अब जून के आखिरी सप्ताह तक हर जगह मॉनसून प्रवेश कर जाएगा।
इन जगहों पर गर्मी का येलो अलर्ट जारी
इसके अलावा मौसम विभाग ने आज नासिक, अहमदनगर, सतारा, सांगली, बीड, सोलापुर, लातूर, नांदेड़, जालना, बुलढाणा जिलों में बारिश की संभावना जताई है जबकि गढ़चिरौली, यवतमाल, अमरावती, वाशिम और चंद्रपुर के शहरवासियों को गर्मी झेलनी पड़ेगी। इन जगहों पर मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट जारी किया गया है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में गौ तस्कर ने की गोरक्षक एक की हत्या चार लोग गंभीर रूप से घायल
औरंगाबाद, पीटीआई। महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में मवेशियों की तस्करी के संदेह में एक वाहन को रोकने का प्रयास करने पर एक गोरक्षक की हत्या कर दी गई। यह घटना किनवट तहसील के शिवनी गांव के पास सोमवार रात करीब 11.30 बजे हुई। पुलिस अधीक्षक श्रीकृष्ण कोकाटे ने बताया कि सात लोग पड़ोसी तेलंगाना में एक कार्यक्रम में शामिल होकर एक कार से लौट रहे थे। इस दौरान अवैध रूप से मवेशियों को ले जा रहे एक वाहन को देखने के बाद उन्हें संदेह हुआ।
लाठी और धारदार हथियारों से किया हमला
पुलिस अधिकारी ने कहा कि जब उन्होंने इसे रोकने की कोशिश की तो लगभग 10 से 15 लोगों ने वाहन से उतरकर लाठी और धारदार हथियारों से उन पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल शेखर रापेली की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
संगठनों ने घटना के विरोध में किया बंद का आह्वान
अधिकारी ने कहा कि पुलिस मामला दर्ज कर आरोपितों की तलाश कर रही है। उन्होंने कहा कि नांदेड़ में कुछ संगठनों ने घटना के विरोध में बुधवार को बंद का आह्वान किया था, लेकिन पुलिस के कहने पर उन्होंने इसे स्थगित कर दिया। हमने उनसे आरोपितों की धर-पकड़ के लिए समय मांगा है।
कुमार शानू, इस्माइल दरबार को कृष्णा चौहान ने बॉलीवुड आइकॉनिक अवार्ड 2023 से किया सम्मानित
संगीतकार दिलीप सेन, सिंगर ऋतु पाठक, सुनील पाल, एसीपी संजय पाटिल, बी एन तिवारी, गीतकार सुधाकर शर्मा, भुज के निर्देशक अभिषेक दुधैया, अमिताभ बच्चन के मेकअपमैन दीपक सावंत, ब्राइट आउटडोर मीडिया को भी मिला सम्मान
मुम्बई। कृष्णा चौहान फाउंडेशन के संस्थापक कृष्णा चौहान ने 18 जून 2023 को मेयर हॉल अंधेरी पश्चिम मुम्बई में बॉलीवुड आइकॉनिक अवार्ड 2023 के 4थे संस्करण का शानदार आयोजन किया।
इस पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगर कुमार शानू, फ़िल्म भुज के डायरेक्टर अभिषेक दुधैया, संगीतकार इस्माइल दरबार, बीएन तिवारी, गीतकार सुधाकर शर्मा, एसीपी संजय पाटिल, संगीतकार दिलीप सेन, सिंगर ऋतु पाठक मौजूद थे। जिनके हाथों से फिल्म जगत से जुड़े व सामाजिक कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया गया। साथ ही इन हस्तियों को भी कृष्णा ने अवार्ड से सम्मानित किया।


कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन के मेकअप मैन दीपक सावंत, बिज़नेसमैन खालिद खान, श्रद्धा रानी शर्मा (बिग बॉस फेम), शाहिद, सिंगर प्रिया पुरोहित, एक्ट्रेस शालिनी गौड़, डॉ अंजली दमनगांवकर, कबीना महाजन, कुलदीप शर्मा, गायक अनिकेत, सूरज जाधव, एम प्रकाश (औरंगाबाद), एंकर आरजे कोमल, रैपर हितेश्वर, सिंगर अरमान खान, राजू टांक, डिज़ाइनर आर राजपाल, ऎक्टर नाफ़े खान, विशाल विशु, पूनम गिरी, संतोष सुरेश कड़ू, सरोजा सेठई, निहार सिंह, आरती शर्मा, फरहा अंजार खान, शीरीं फरीद, सुनील पाल, दीपक सावंत, एंकर पत्रकार कवि संजय अमान, मंगेश, राजकुमार कनौजिया के साथ साथ कई पत्रकारों को भी अवार्ड मिला। वहीं शीरीं फरीद ने स्टेज पर डांस परफॉर्म किया।
बता दें कि कृष्णा चौहान बॉलीवुड में एक निर्देशक की हैसियत से कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह सामाजिक कार्यों में भी हमेशा आगे रहते हैं। कोविड काल के दौरान उन्होंने जरूरतमंदों को राशन वितरित किया और भगवतगीता भी लोगों को भेंट किया। कृष्णा चौहान अपनी हॉरर थ्रिलर फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग भी जल्द शुरू करने जा रहे हैं। इस फिल्म में प्रसिद्ध संगीतकार दिलीप सेन का संगीत है।
कृष्णा महात्मा गांधी रत्न अवार्ड 2023 गांधी जी के जन्मदिन 2 अक्टूबर को आयोजित करेंगे। इस अवार्ड का यह तीसरा सीज़न होगा।
– संतोष साहू
शिव भक्तों की टोली सावन में लेकर आएंगे ‘सत्य शिवाय’
सावन के महीने में शिव भक्तों के लिए निर्माता निर्देश त्यागी, संगीतकार द्रोण, गीतकार तरुण बिष्ट, कोरियोग्राफर एंडी भाकुनी का सुरीला भेंट
मुम्बई। हाल ही में मुम्बई के चार बंगला स्थित रेड रिबन एंड रे एन रागा स्टूडियो में बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक अमन त्रिखा की आवाज़ में एक भक्ति गीत ‘सत्य शिवाय’ की रिकॉर्डिंग सम्पन्न हुई। आरटीएम मोशन पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बन रहे इस म्युज़िक वीडियो के निर्माता निर्देश त्यागी, संगीतकार द्रोण, गीतकार तरुण बिष्ट, कोरियोग्राफर एंडी भाकुनी और कार्यकारी निर्माता अजय सिंह मल्ल हैं। इस गीत में प्रतिभाशाली गायक अनिल विश्वकर्मा भी आवाज दे रहे हैं।
अमन त्रिखा ने बताया कि यह गीत भोलेनाथ की वंदना है और उनके बारह ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है। मैं भी शिव भक्त हूँ और जब इस गीत को सुना तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। गायक के रूप में भक्ति गीत गाकर स्वयं को धन्य मानता हूँ। इससे पहले मैंने नसीरुद्दीन शाह और परेश रावल अभिनीत ‘धर्मसंकट’ फिल्म में शिवभक्ति गीत गाया था।
संगीतकार द्रोण ने बताया कि इस गाने के लिए हमने लाइव इंस्ट्रूमेंट का प्रयोग किया। यह एक उम्दा गाना है जिसमें तांडव और शिव मंत्र को संजोया गया है। भगवान शिव जी और उनके भक्तों को प्रसन्न करने के लिए हमारा एक छोटा सा प्रयास है। सावन के महीने में निश्चित रूप से यह गीत हंगामा मचाएगा।
निर्माता निर्देश त्यागी ने बताया कि मैंने बॉलीवुड में एक नये निर्माता के रूप अपने इष्ट देव भोलेशंकर के गीत से प्रारम्भ करना उचित समझा। मैं श्रोताओं एवं दर्शकों को एक ऐसा गीत दूँ जो उन्हें पसंद आये और झूम उठे। गीतकार तरुण बिष्ट और संगीतकार द्रोण ने इसे बेहतरीन बना दिया है। सावन के महीने में जब यह रिलीज होगा तो लोगों की जुबान पर होगा। सिंगर अमन त्रिखा ने इसे गाया है तो इसके वीडियो में भी एक स्टार को प्रस्तुत किया जाएगा। यह अन्य भक्ति गीतों के बीच अपनी छाप छोड़ पायेगा।
‘सत्य शिवाय’ गीत की रिकॉर्डिंग के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नोएडा के अजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त जेलर) की भी विशेष उपस्थिति रही। वह भोलेनाथ के बहुत बड़े भक्त हैं वह सभी को इस भजन के माध्यम से शुभकामनाएं देने के लिए मुंबई के स्टूडियो में पहुंचे।
– संतोष साहू
जसवंत सिंह खालरा बायोपिक के मेकर्स ने किया हाईकोर्ट का रुख
6 महीने से सेंसर की मंजूरी के इंतजार में ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट की सच्ची कहानी, 4 जुलाई को होगी मामले की सुनवाई
मुम्बई। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक, सोनचिड़िया, द स्काई इज पिंक, रश्मि रॉकेट और ए थर्सडे जैसी राष्ट्रीय और मानव हित की कहानियों को पर्दे पर लाने के बाद, आरएसवीपी मूवीज एक और रियल लाइफ ड्रामा दिखाने के लिए इंतजार कर रहा है। ये प्रमुख ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट, जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक है जिसे रॉनी स्क्रूवाला, अभिषेक चौबे और हनी त्रेहान द्वारा निर्मित किया गया हैं। वहीं फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया हैं और एक्टर-सिंगर दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं। जबकि अब तक इस फिल्म का टाइटल फाइनल नही हुआ है, रिलीज के लिए रेडी इस फिल्म के सामने एक बड़ी मुश्किल आ खड़ी हुई है।
इंडस्ट्री के एक सूत्र ने बताया कि मेकर्स पिछले 6 महीनों से फिल्म की रिलीज के लिए सेंसर की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। उसके अनुसार, “आरएसवीपी ने दिसंबर 2022 में सेंसर सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया था, और इसे रिव्यू कमीटी के पास भेजा गया था। टीम ने अनुरोध किए गए सभी जरूरी पेपर वर्क को साझा किया और पूरी लगन के साथ प्रक्रिया के बारे में जाना, लेकिन सीबीएफसी से कोई समाधान नहीं मिलने पर, उन्होंने आखिरकार बुधवार (14 जून) को बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया।
जसवंत सिंह खालरा पंजाब में उग्रवाद काल के दौरान अमृतसर में एक बैंक के डायरेक्टर थे, जिन्होंने पुलिस द्वारा हजारों अज्ञात शवों के अपहरण, एलिमिनेशन और क्रिमेशन के सबूत पाए थे। उन्होंने कथित तौर पर अपने खुद के 2000 अधिकारियों को भी मार डाला, जिन्होंने इन अतिरिक्त न्यायिक कार्यों में सहयोग करने से इनकार कर दिया था। जसवंत सिंह खालरा की जांच से दुनिया भर में विरोध शुरू हो गया और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने निष्कर्ष निकाला कि पंजाब पुलिस ने अकेले पंजाब के तरनतारन जिले में 2097 लोगों का अवैध रूप से अंतिम संस्कार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन ने उसके डेटा की वैधता को प्रमाणित किया है।
6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालरा खुद गायब हो गए थे। उनकी पत्नी परमजीत कौर की शिकायत में हत्या, अपहरण और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। तरनतारन और अमृतसर जिलों में न्यायेतर हत्याओं को रोशनी में लाने में सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा को “खत्म” करने में चार पुलिस अधिकारियों द्वारा किए गए “जघन्य अपराध” का कड़ा संज्ञान लेते हुए, पंजाब और हरियाणा की अदालत ने 16 अक्टूबर, 2007 को चारों आरोपियों, पूर्व हेड कांस्टेबल पृथ्वीपाल सिंह और पूर्व उप-निरीक्षक सतनाम सिंह, सुरिंदर पाल सिंह और जसबीर सिंह की सजा को सात साल से बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दिया।

सूत्र ने आगे बताया, “जसवंत सिंह खालरा केस अब वापस अदालत में है लेकिन इस बार सेंसर सर्टिफिकेट के लिए। इस पर 4 जुलाई को सुनवाई होगी और अमित नाइक, वो खालरा बायोपिक लीगल टीम को भी लीड कर रहे हैं।
संयोग से, 2016 की क्राइम ड्रामा अभिषेक चौबे द्वारा लिखित और निर्देशित थी। सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने 89 कट की डिमांड की थी और पंजाब के सभी रेफरेंस हटा दिए थे। बाद में इसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने केवल एक सीन को एडिट करके और ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ मंजूरी दे दी थी।
जिंदा पशु-पक्षियों एवं मवेशियों को एक्सपोर्ट करना संविधान के प्रावधानों और भावनाओं के खिलाफ है -लाइव-स्टॉक उत्पाद ,आयात -निर्यात विधेयक- 2023
मुम्बई – महाराष्ट्र , पशुपालन विभाग द्वारा जिंदा पशुओं को भारत से निर्यात करने के लिए विधेयक पर पुरे देश में विरोध के स्वर तेज हो रहे है। मोदी सरकार के इस विधेयक पर कई सवाल खड़े हो रहे है। भारत में पशु प्रेमियों की बहुत संख्या है। अहिँसा को मानने वाला देश है , जहा यदि कानूनन जिन्दा पशुओ के निर्यात का कानून यदि बनता है तो बड़ा ही शर्मनाक होगा।
लाइव-स्टॉक और लाइव-स्टॉक उत्पाद [आयात और निर्यात] विधेयक, 2023 के विरोध में मुंबई के समस्त पशुप्रेमियों ने अपना -अपना विरोध जाता रहे है और बड़े पैमाने पर मेल और चिठ्ठी लिख कर इस विधेयक का विरोध कर रहे है।
मुंबई के समस्त महाजन के ट्रस्टी गिरीश शाह ने सरकार को लिखे पत्र में अपना विरोध जताते हुए लिखा है कि – ” जिंदा पशु-पक्षियों एवं मवेशियों को, हेरा-फेरी कर, उनके एक्सपोर्ट को इस तरह से पुश करना, संविधान के प्रावधानों एवं भावना के खिलाफ है।
वर्तमान में दुनिया भर में भी जिंदा पशुओं के एक्सपोर्ट की प्रथा की आलोचना कर, जिंदा पशुओं के एक्सपोर्ट को बंद करने की मांग की जा रही है। इस विधेयक के पारित होने से राष्ट्रीय पशु संपत्ति के हितों पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि भारत से बड़े पैमाने पर मांस निर्यात के चलते, पशु-पक्षी वर्ग तो पहले से ही सरकार और इसकी मशीनरी की घोर उपेक्षा एवं उदासीनता का शिकार है। सरकारी स्तर पर कहीं पर तो उनके शोषण को रोकने की सीमा रेखा हो।
गिरीश शाह यह भी लिखते है कि – ” हितधारकों की जागरूकता के लिए इस प्रस्तावित विधेयक को प्रिंट मीडिया के माध्यम से उचित प्रचार दिया जाना चाहिए था, जो कि आपने नहीं दिया। इसके साथ ही हितधारकों द्वारा अपने सुझाव और टिप्पणियां प्रस्तुत करने के लिए भी सामान्यतः 30 दिनों का समय दिया जाता है, पर आपने इसके लिये केवल 10 दिनों का समय दिया जो कि नाकाफी है। इस तरह के सामान्य मानदंडों को दरकिनार करने से ऐसा प्रतीत होता है कि शायद बाहरी निहित स्वार्थ के प्रभाव में, इस विधेयक को जल्दबाजी में पास कराना चाहा जा रहा है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुंबई के पशुओ की क्रूरता पर लड़ाई लड़ने वाले वकील राजीव गुप्ता ने भी अपना घोर विरोध जताते हुए कहा है कि – ” किसानों को जैविक खाद नहीं मिल रही है क्योंकि पशुधन की संख्या कम हो गई है और ऐसे में किसानों को महंगा यूरिया/गैर जैविक खाद और हानिकारक कीटनाशकों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यदि जैविक खेती करना है तो उचित मात्रा में पशुधन की जरुरत है।
एक बार पशुधन का निर्यात हो जाने के बाद हमारे पास कष्टों और पीड़ाओं पर कोई नियंत्रण नहीं होगा और वे यातनाओं के अधीन हो सकते हैं।
केवल भारत में जानवरों के प्रति दया है और अन्य सभी देश वध और उपभोग में विश्वास करते हैं। इसलिए एक बार जब जानवर भारत से बाहर चले जाते हैं तो वे वध के लिए बाध्य होते हैं। भारत के अधिकांश राज्यों में गायों और उनकी संतानों की हत्या पर प्रतिबंध है, जबकि यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो गायों को मारने के लिए अन्य देशों को निर्यात किया जाएगा जो कानूनी हो जाएगा और उस विशेष राज्य पशु संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
वही एटा के अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला संगठन ने बैठक का आयोजन जैन नगर स्थित कार्यालय पर किया गया। इसमें पशुपालन विभाग द्वारा जिंदा पशुओं को भारत से निर्यात करने के लिए विधेयक पर विरोध जताया गया। जैन महिला संगठन की अध्यक्ष बबीता जैन प्रेरणा ने कहा कि भगवान महावीर का संदेश जियो और जीने दो का है। अहिंसा की बात करने वाले उत्कृष्ट जैन धर्म के अनुयायियों की भावनाएं इस विधेयक को लेकर काफी आहत हुई हैं। उन्होंने जीवित पशु निर्यात विधेयक को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। नेमिनाथ महिला मंडल की संगीता जैन ने कहा कि संस्था ने एक आपत्ति पत्र मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय कृषि भवन को भेजकर आपत्ति जताई।
विरोध के समर्थन में सकल दिगंबर जैन समाज, नेमिनाथ दिगंबर जैन महिला मंडल, भारतीय जैन मिलन परिवार, नसिया भक्त महिला परिवार, विश्व गोरक्षा संघ एवं जिला उद्योग व्यापार मंडल महिला प्रकोष्ठ, श्री दिगंबर जैन वीर मंडल हैं। बीना जैन, श्रुति जैन, उषा जैन, वर्षा जैन, रुचि जैन, पूनम यादव, चीना अग्रवाल, मंजू वार्ष्णेय आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
शोसल मीडिया पर बहुत से विरोध की आवाज़े उभर कर आ रही है , ट्वीटर पर जो ट्रेंड कर रहा है। ट्वीटर पर सूरज दुबे लिखते है कि –
1898 में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए लाइव स्टॉक कानून तक में जिंदा कुत्ते, बिल्ली, गाय, बैल, भैंस, आदि का आयात निर्यात नहीं।
मगर, 2023 में भारत सरकार ने इनको बिल में शामिल कर दिया।
कृषि तथा पशु आधारित भारतीय सभ्यता की ये हत्या है।
1898 में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए लाइव स्टॉक कानून तक में जिंदा कुत्ते, बिल्ली, गाय, बैल, भैंस, आदि का आयात निर्यात नहीं।
मगर, 2023 में भारत सरकार ने इनको बिल में शामिल कर दिया।
कृषि तथा पशु आधारित भारतीय सभ्यता की ये हत्या है।@Min_FAHD @PMOIndia @BBCWorld @rashtrapatibhvn https://t.co/YHkUmQH3XK
— SURAJ S DUBEY (@SurajSDubey_) June 17, 2023
आचार्य लोकेश मुनि लिखते है कि -” जीवित पशुओं के निर्यात की नीति का विरोध कीजिए
ऋषि और कृषि प्रधान देश से ?
चींटी को आटा, चिड़िया कबूतर को दाना ?
पहली रोटी गाय,आख़िरी कुत्ते की कहने वाले देश से?
जीवित पशुओं के निर्यात की नीति का विरोध कीजिए
ऋषि और कृषि प्रधान देश से ?
चींटी को आटा, चिड़िया कबूतर को दाना ?
पहली रोटी गाय,आख़िरी कुत्ते की कहने वाले देश से?इतना विरोध दर्ज कराइए कि सरकार प्रशासन न्यायालय सब जाग जाएँ @KapilMishra_IND @DrKumarVishwas #Jainism #Hindu… pic.twitter.com/jTH6iwLyAp
— Acharya Lokesh Muni (@Munilokesh) June 16, 2023















