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National Doctor’s Day 2023: क्या है CPR? जिससे डॉक्टर बचाते हैं लोगों का जीवन

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इन दिनों हार्ट संबंधित बीमारियां अधिक सुनाई देती हैं. कब किस को किस स्थिती में हार्ट अटैक आ जाए कुछ पता नहीं चलता. हार्ट अटैक के चलते अब तक हजारों लोग अपनी जान गवां चुके हैं. अक्सर ऐसा होता है कि जब हमारे सामने अचानक किसी को हार्ट अटैक आता है तो हम घबरा जाते हैं और समझ नहीं आता है कि ऐसे में क्या करें. ऐसे में सीपीआर (CPR) के जरिए इंसान की जान बचाई जा सकती है. सीपीआर (CPR) से डॉक्टर हजारों लोगों की जान बचाते हैं. आइए आज डॉक्टर्स डे के दिन जानते हैं कि आखिर सीपीआर (CPR) क्या होता है.

क्या होता है सीपीआर? (What is CPR?)

सीपीआर का फुल फॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (Cardiopulmonary Resuscitation [CPR]) है. सीपीआर एक इमरजेंसी लाइफ सेवर प्रक्रिया है. अक्सर इसे हार्ट अटैक के दौरान दिया जाता है. यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो गया हो और उसकी धड़कन नहीं चल रही हो ल्स नहीं चल रहा हो, तो ऐसी स्थिति में सीपीआर दिया जाता है. हार्ट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, कार्डिएक अरेस्ट के बाद तत्काल सीपीआर देने से बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो जाती है. डॉक्टर भी अक्सर इसका इस्तेमाल करते हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, शोध से पता चलता है कि प्रत्येक मिनट सीपीआर में देरी होने से जीवित रहने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत कम हो जाती है.

क्यों दिया जाता है CPR-

CPR अधिकतर हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट के केसेस में दिया जाता है. इस दौरान हृदय मस्तिष्क और फेफड़ों सहित शरीर के बाकी हिस्सों में खून पंप नहीं होता है, जिससे व्यक्ति अपनी जान तक गवां सकता है. सीपीआर में मरीज की छाती पर दबाव बनाया जाता है जिससे ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.

सीपीआर कैसे दिया जाता है? (Methods for giving CPR)

सीपीआर देने के 2 अलग-अलग तरीके होते हैं.

पहला-

जब पेशेंट को ये कोई आम व्यक्ति देता है. इसे कोई भी किसी भी जगह पर दे सकता है.

दूसरा-

यह मेडिकल इक्विपमेंट की मदद से पेशेंट को दिया जाता है. ये हॉस्पिटल या एंबुलेंस में दिया जाता है.

बच्चों और बड़ों को CPR देने का अलग अलग तरीका-

बच्चों को ऐसे दिया जाता है CPR-

स्टेप 1- सर्व प्रथम बच्चे के पास बैठेंय

स्टेप 2- यदि आपको लगता है कि बच्चे को CPR की जरूरत है तो हाथों की हथेलियों की बजाए उंगलियों का इस्तेमाल करें.

स्टेप 3- चेस्ट पर दवाब डालने के दौरान 1/2 से 2 इंच तक ही प्रेशर डालें. जितनी जल्दी हो सके बच्चे को अस्पताल ले जाएं और डॉक्टर को जानकारी दें की आपने बच्चे को सीपीआर दिया है

बड़ों को CPR देने का तरीका-

स्टेप 1- व्यक्ति को सबसे पहले सीधा लिटा दें. ध्यान रहे कोई भी अंग दबा या मुड़ा न हो.

स्टेप 2- अब हाथों की हथेलियों को एक दूसरे के ऊपर रखते हुए सीने को दबाएं. चेस्ट पर प्रेशर डालने के दौरान ध्यान रखें कि दो या ढ़ाई इंच से ज्यादा दवाब ना डालें. 100 से 120 प्रति मिनट की दर से जोर से छाती पर धक्का दें.

गुजरात में आफत बनी मूसलाधार बारिश, अगले 5 दिन यूपी-बिहार समेत 18 राज्यों में बरसेंगे बदरा, पढ़ें IMD का ताजा अपडेट

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दिल्‍ली-एनसीआर के कई इलाकों में बारिश का दौर लगातार जारी है. शनिवार तड़के भी झमाझम बारिश हुई. मानसून की बारिश ने शुक्रवार को दिल्ली को तरबतर कर दिया, जिसके चलते राजधानी में जगह जगह पानी भर गया और कई हिस्सों से पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आयीं.मौसम विभाग कार्यालय ने दिल्ली में शनिवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने और हल्की बारिश का अनुमान जताया है जबकि अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 34 और 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.आईएमडी ने 2 जुलाई तक कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है.

मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर पश्चिम भारत में अगले दो दिन के दौरान हल्की लेकर भारी वर्षा जारी रहने की संभावना है. आईएमडी की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, उत्तराखंड में 3 और 4 जुलाई को; पश्चिमी राजस्‍थान और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में शनिवार, पूर्वी राजस्‍थान और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में 1 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों के दौरान मध्य भारत में हल्की/मध्यम से लेकर व्यापक वर्षा हो सकती है और मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है.

पश्चिमी भारत में अगले पांच दिनों में कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों और अगले दो दिनों के दौरान गुजरात में हल्की/मध्यम से व्यापक वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है. आईएमडी ने पूर्व और आसपास के पूर्वोत्तर भारत के लिए कहा कि अगले पांच दिन उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार, असम और मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ व्यापक रूप से हल्की/मध्यम वर्षा होने की संभावना है.गंगीय पश्चिम बंगाल में भी 3 जुलाई को; 3 जुलाई को झारखंड और 3 और 4 जुलाई को ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है.

आईएमडी ने दक्षिण भारत के लिए भविष्यवाणी की है कि अगले पांच दिन के दौरान केरल और माहे तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में हल्की/मध्यम छिटपुट से लेकर व्यापक वर्षा होने की संभावना है. उसने कहा, “अगले पांच दिन के दौरान तटीय कर्नाटक और केरल में अलग-अलग इलाकों में भारी वर्षा होने की भी संभावना है; 2 से 4 जुलाई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु; 3 और 4 जुलाई को तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा; 4 जुलाई को तेलंगाना; 3 और 4 जुलाई को तटीय कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भी बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है.

वहीं, महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से झमाझम बारिश हो रही है. मुंबई महानगर और उसके उपनगरों में मध्यम से भारी बारिश जारी रहने के कारण शुक्रवार को सुबह जगह-जगह जलजमाव होने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ और स्थानीय ट्रेन सेवाएं कुछ हद तक धीमी हो गईं. हालांकि शहर को पानी की आपूर्ति करने वाली झीलों का जलस्तर लगातार बारिश के कारण बढ़ गया है.अगले 24 घंटे के लिए, आईएमडी मुंबई ने शहर और उसके उपनगरों में मध्यम बारिश का अनुमान जताया है और अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है.

गुजरात में आफत बनी मूसलाधार बारिश

गुजरात में पिछले 30 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश आफत बनी हुई है और वर्षा जनित घटनाओं में पिछले दो दिन में राज्य में नौ लोगों की मौत हुई है. एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में पिछले 30 घंटों में 200 मिमी से ज्यादा वर्षा हुई है. अधिकारी ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि विभिन्न जिलों में शनिवार को मूसलाधार बारिश हो सकती है और रविवार तथा सोमवार को भी भारी बारिश का दौर जारी रहेगा.शुक्रवार की सुबह हुई मूसलाधार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों की सड़कें बंद हो गई हैं. मौसम विभाग की तरफ से जारी पूर्वानुमान के अनुसार, गांधीनगर, खेड़ा, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरुच, सूरत, नवसारी और वलसाड जिलों में शनिवार को मूसलाधार बारिश होने की संभावना है जबकि रविवार और सोमवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है.

बिहार में लगातार भारी बारिश और जलजमाव के कारण शुक्रवार को कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए.भारी बारिश के कारण अररिया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, जमुई, कटिहार और बांका जिलों में कई जगहों पर जलजमाव हो गया. मौसम कार्यालय ने अरवल, भोजपुर, बक्सर, गया, जमुई, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पटना, रोहतास, सारण और वैशाली जैसे जिलों में हल्की से तेज हवाएं चलने तथा गरज के साथ बारिश होने की चेतावनी जारी की है.

महाराष्ट्रः बुलढाणा में समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से बड़ा हादसा

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Maharashtra Bus Accident: महाराष्ट्र के बुलढाणा में समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेसवे (Samruddhi Mahamarg Expressway) पर शनिवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या 26 हो गई है. वहीं, आठ लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. दरअसल, बुलढाणा में यवतमाल से पुणे जा रही एक बस में अचानक से आग की लपटें उठने लगी जिससे 26 लोगों की मौत हो गई. वहीं, कई लोग घायल हो गए. यह हादसा समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार रात करीब दो बजे हुआ.

बुलढाणा पुलिस के डिप्टी एसपी बाबूराव महामुनि ने इसके बारे में जानकारी देते बताया कि बस में कुल 33 लोग सवार थे, जिसमें से 25 शव लोगों की मौत हो गई और छह से आठ लोग घायल हो गए. मृतकों के शव को बस से निकाल कर पोस्टमार्टम के भेज दिया है वहीं, घायलों को इलाज के बुलढाणा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है.

घटना को लेकर बुलढाणा एसपी सुनील कडासने ने बताया कि शुक्रवार रात 1:35 पर नागपुर से पुणे जा रही एक बस का नियंत्रण बिगड़ने के कारण ये हादसा हो गया. उन्होनें बताया कि बस चालक का कहना है कि बस का टायर फट गया जिसकी वजह से गाड़ी का नियंत्रण बिगड़ा और डीजल टैंक फूटा जिससे बाद में आग लग गई. हालांकि घटना के पीछे सही कारण क्या है इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है. एसपी सुनील ने बताया इस हादसे में मरने वालों में 3 बच्चे और अन्य वयस्क हैं. हम शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों को सौंपने की कार्रवाई कर रहे हैं

बॉलीवुड में राजस्थानी सिंगर, एक्टर, डांसर रानी रंगीली की दस्तक

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मुम्बई। हाल ही में राजस्थान की लोकप्रिय सिंगर, एक्टर, डांसर रानी रंगीली ने मुम्बई के अंधेरी स्थित द कंट्री क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। उसी अवसर पर पत्रकारों से हुई बातचीत में रानी ने अपने बारे में बताया कि वह निम्नवर्गीय परिवार में पैदा हुई। प्रारंभ में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। रानी के अंदर जन्मजात अभिनय, नृत्य और गायन का कौशल है और उन्होंने ठान रखा था कि वह अपने परिवार के भलाई के लिए कार्य करेंगी और उन्होंने यह करके भी दिखा दिया। रानी ने बेहद कम उम्र में ही गायन के क्षेत्र में कदम रखा और वह कामयाब भी हुई। पिछले दस बारह साल से वह गायन, अभिनय और नृत्य कर रही है। लेकिन अश्लीलता को परे रखकर वह मर्यादा में रहते हुए स्टेज शो करती हैं। देश भर में उनके कार्यक्रम होते रहते हैं। जिसकी वजह से वह आज प्रसिद्ध है और राजस्थान का नाम रौशन कर रही हैं। आज राजस्थान में उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक है कि राजस्थान की भूमि में कहीं भी गायन शो होता है और वहाँ रानी के आगमन का संदेह होने मात्र से लोगों की भीड़ उमड़ जाती है। रानी रंगीली निर्देशक गोपाल गुर्जर को अपना गुरु और मार्गदर्शक मानती है। उन्होंने बताया कि वह अजमेर में अपना शो कर रही थी तब इस शो में उनकी प्रतिभा देखकर निर्देशक गोपाल गुर्जर ने उन्हें एलबम ‘बन्नी म्हारी नाचणी होती’ में काम करने का मौका दिया और अभिनय कौशल को निखारा जिससे आज रानी को राजस्थान का हर घर पहचानता है। रानी को रंगीली नाम भी इन्होंने ही दिया। वह बताती हैं कि उनके कपड़े, गायन और नृत्य बेहद अतरंगी और अलग था इसलिए उन्हें रंगीली नाम दिया गया। यह नाम उनके लिए बेहद लकी साबित भी हुआ। रानी से प्रभावित हो कर आज लगभाग कई राजस्थानी गायक रंगीली उपनाम का उपयोग कर रहे हैं। रानी रंगीली का डांस और गायन कौशल बेहद अलग था जिसे तराशने का काम उनके गुरु ने किया। यह एलबम बेहद कामयाब रहा और रानी ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। रानी अपने गीत स्वयं लिखती है और गाती है। अपने एलबम में अभिनय और नृत्य भी करती है। राजस्थान की लोक कला को भारत के कोने कोने में पहुंचाने का काम रानी कर रही है। उनकी एलबम ‘नाग लपेटा’ दक्षिण भारत और विदेशों में भी मशहूर है। ‘लीलण सिंगारे’ एलबम के भजन गीत को लोग आज भी शादियों में सुनते हैं। रानी का हर एलबम नई ऊंचाइयों को छूता है। वह काफी व्यस्त रहती है पर जब भी समय मिलता है वह अपनी कला को निखारने के लिए रियाज करती है। हाल ही में कुमार शानू के साथ ‘दीये जले’ अलबम में उन्हें गाने का मौका मिला जिससे प्रेरित होकर रानी भी बॉलीवुड में काम करना चाहती हैं।
रानी ने अभिनेता कुँवर महेंद्र सिंह के साथ कई म्यूजिक वीडियो में अभिनय किया है।

राजस्थानी गायिका साँवरी बाई के गायन से वह प्रभावित हैं। बॉलीवुड में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को वह अपना आईडल मानती है। माधुरी की फिल्म कोयला से प्रभावित होकर उन्होंने माधुरी दीक्षित के नृत्य कौशल का अनुसरण किया। प्रतिवर्ष पुष्कर मेले में वह अपना कार्यक्रम करती है। उनकी प्रसिद्धि इतनी ज्यादा है कि उन्हें एमएलए के टिकिट का प्रस्ताव मिला था मगर उन्होंने यह अस्वीकृत कर दिया। वह जमीन से जुड़ी सख्सियत है। लोगों की वह निःस्वार्थ भाव से यथा योग्य सेवा करती है। कारोना महामारी के समय में भी वह लोकहित में काम कर रही थी। वह किसी पद विशेष की चाह नहीं रखती शांत रूप से जनहित करना उन्हें पसंद है। रानी रंगीली का कहना है कि प्रसिद्धि पाने के लिए कभी भी अश्लीलता का सहारा नहीं लेना चाहिए अगर आपमें प्रतिभा है तो एक दिन वह सबके सामने आएगी और आप सफल जरूर होंगे बस खुद पर विश्वास रखें।

जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड का प्रतिशोध है फिल्म ”1922 प्रतिकार चौरी चौरा”

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फिल्म समीक्षा – 1922 प्रतिकार चौरी चौरा
कलाकार – रवि किशन, अनिल नागरथ, पवन पांडेय, अशोक बनथिए, पार्थ मिश्रा, विकल्प श्रीवास
लेखक निर्माता निर्देशक – अभिक भानु
रिलीज़ डेट – 30 जून 2023
रेटिंग – 3/5

भारतीय सिनेमा में आज़ादी से लेकर अब तक सैकड़ों फिल्में बनी जिनमें आज़ादी की लड़ाई को विभिन्न प्रकार से दिखाया गया। वैसे ही एक घटना भारतीय आज़ादी की लड़ाई के लिए 1922 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के चौरी चौरा में लड़ी गई। उसी घटना को केंद्र में रखकर फ़िल्म बनी है 1922 प्रतिकार चौरी चौरा। यह फ़िल्म एक सत्य घटना पर आधारित है और उस घटना ने देश के आज़ादी की लड़ाई को एक अलग ही रुख प्रदान कर दिया था। आज यह फ़िल्म रिलीज़ हुई है और रिलीज़ के साथ ही इस फ़िल्म ने इतिहास के कुछ उन पलों से हमें रूबरू कराया है जिन्हें आजतक के इतिहासकारों ने भुला दिया था। फ़िल्म की भव्यता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर एक किरदार ने अपने आप को उस पल के हालात में ढालने के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया है। फ़िल्म की कहानी के केंद्रबिंदु में जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड का प्रतिशोध है। उस जघन्य नरसंहार के प्रतिकार के रूप में भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों ने जो तत्काल उचित समझा उसे ही अपना लक्ष्य बनाकर उसे अंजाम तक कैसे पहुँचाया उसे ही यह फ़िल्म 1922 प्रतिकार चौरी चौरा दर्शाती है। इसीलिए यह आजकल कहा भी जा रहा है कि जब तक अखण्ड भारत का सम्पूर्ण व सत्य इतिहास फिल्मों के माध्यम से आधुनिक समाज के युवापीढ़ी को नहीं दिखाया जायेगा तब तक देश के स्वतंत्रता सेनानियों का वास्तविक संघर्ष आज की युवा पीढ़ी को समझ में नहीं आयेगा। निर्देशक अभिक भानु ने आज़ादी के पूर्व के संघर्षशील इतिहास को बड़े ही संजीदगी और जीवंत तरीके से सिल्वर स्क्रीन पर उतारा है। फिल्म प्रारम्भ से लेकर अंत तक आपको एकसूत्र में बांधे हुए रखती है। फ़िल्म के सम्वाद में आपको पुर्वांचल की झलक मिलती हुई प्रतीत होगी। इस फ़िल्म के माध्यम से आप अपनेआप को गोरखपुर व आसपास के इलाके से जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ब्रिटिश शासनकाल में आम आदमी का जीवन कितना संघर्षशील और चुनौतीभरा था यह फिल्म आसानी से बताने में कामयाब रहती है, साथ ही आज़ादी की क़ुर्बानी कितनी बड़ी और गहरी है इसका अंदाजा लगाने पर आपको विवश करती है।

फ़िल्म में अभिनय कौशल की बात की जाए तो फ़िल्म के केंद्रबिंदु में रवि किशन समेत सभी कलाकारों का अभिनय बेहद प्रभावशाली है। रवि किशन ने अपने इस रूप से यह दिखाया कि पीरियड सिनेमा में भी उनकी उतनी ही पकड़ है जितनी कि आजकल के नए कमर्शियल सिनेमा के चरित्रों पर। रवि किशन फ़िल्म के हर फ्रेम में सटीक बैठते हैं । उनके साथ काम कर रहे बाकी कलाकारों ने भी अपनी अपनी भूमिका को बखूबी निर्वाह किया है। यह फिल्म अपने उद्देश्यों में सफल रहती है। हालाँकि आधुनिक फिल्मों पर यह फिल्म तभी भारी दिखेगी जब दर्शक उसी संजीदगी से फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय को देखे और समझे जैसे इतिहास ने संघर्ष किया था। इस फिल्म 1922 प्रतिकार चौरी चौरा के बारें मे यह कहा जा सकता है कि फिल्म सभी के उद्देश्यों को पूर्ण करते हुए इतिहास के संघर्ष और आजादी के लिए किये गए बलिदान को दिखाने में कामयाब रही है। और आप जब भी इसे देखने के लिए जाएंगे तो उस पल में आप अपनेआप को इस फ़िल्म से जोड़ लेंगे और किसी किरदार में अपने आपको देखकर लगेगा की आप भी इसके एक किरदार हैं।
सरजू विजन के बैनर तले बनी फ़िल्म 1922 प्रतिकार चौरी चौरा के निर्माता-निर्देशक व लेखक हैं अभिक भानु। फ़िल्म 1922 प्रतिकार चौरी चौरा में मुख्य भूमिक में रवि किशन के साथ ममता जेठवानी, अनिल नागरथ, अशोक वोटिया, अनुराधा सिंह आदि अन्य कलाकार भी हैं।

फ़िल्म में तकनीकी पक्ष की बात की जाए तो आज से 100 साल पहले की घटना को सहज रूप में आज दिखाना कोई साधारण बात तो है नहीं, फिर भी निर्देशक अभिक भानु ने एक बेहतरीन फ़िल्म बनाई है । फ़िल्म की साज सज्जा, सेटअप, ड्रेस डिजाइनिंग, उस समय का परिवेश और उसके हिंसाब से लाइटिंग इफेक्ट देखकर आपको वो दौर याद आने ही लगेगा। पुरानी विरासत को नए कलेवर में दिखाने की भरसक बढ़ियां कोशिश किया है अभिक भानु ने।
फ़िल्म में गीत संगीत की बात की जाए तो उस दौर के संगीत में और आज के संगीत में अंतर तो है,  इसलिए संगीत के मामले में आपको थोड़ी सी निराशा हो सकती है, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर ठीक ठाक बन पड़ा है। फ़िल्म का साउंड इफ़ेक्ट औसत से कुछ बढ़ियां है। कुल मिलाकर इस वीकेंड पर आपको आज़ादी के पहले के उस दौर को देखने और समझने के लिए एक बेहतरीन सिनेमा मिली है। इसे परिवार और दोस्तों के साथ देख सकते हैं।

फिल्म समीक्षा -1922 प्रतिकार चौरी चौरा

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*बैनर : सरजू विजन 
*निर्माता निर्देशक व लेखक : अभिक भानु
*कलाकार – रवि किशन, अनिल नागरथ ,पवन        पांडेय,अशोक बनथिए, पार्थ मिश्रा, विकल्प श्रीवास।
*रिलीज़ डेट  -30 जून 2023
*रेटिंग    – 3/5
एक शानदार पीरियड ड्रामा फ़िल्म है ‘1922 प्रतिकार चौरी चौरा’……!
                             भारतीय सिनेमा में आज़ादी से लेकर अब तक सैकड़ों फिल्में बनी जिनमें आज़ादी की लड़ाई को विभिन्न प्रकार से दिखाया गया । वैसे ही एक घटना भारतीय आज़ादी की लड़ाई के लिए 1922 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के चौरी चौरा में लड़ी गई । उसी घटना को केंद्र में रखकर फ़िल्म बनी है ‘1922 प्रतिकार चौरी चौरा’ । यह फ़िल्म एक सत्य घटना पर आधारित है और उस घटना ने देश के आज़ादी की लड़ाई को एक अलग ही रुख प्रदान कर दिया था ।
यह फ़िल्म रिलीज़ हुई है और रिलीज़ के साथ ही इस फ़िल्म ने इतिहास के कुछ उन पलों से हमें रूबरू कराया है जिन्हें आजतक के इतिहासकारों ने भुला दिया था । फ़िल्म की भव्यता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर एक किरदार ने अपने आप को उस पल के हालात में ढालने के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया है । फ़िल्म की कहानी के केंद्रबिंदु में जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड का प्रतिशोध है। निर्देशक अभिक भानु ने आज़ादी के पूर्व के संघर्षशील इतिहास को बड़े ही संजीदगी और जीवंत तरीके से सिल्वर स्क्रीन पर उतारा है फिल्म प्रारम्भ से लेकर अंत तक आपको एकसूत्र में बांधे हुए रखती है | फ़िल्म के संवाद में  आपको पुर्वांचल की झलक मिलती हुई प्रतीत होगी । फ़िल्म में अभिनय कौशल की बात की जाए तो फ़िल्म के केंद्रबिंदु में रवि किशन समेत सभी कलाकारों का अभिनय बेहद प्रभावशाली है। रवि किशन ने अपने इस रूप से यह दिखाया कि पीरियड सिनेमा में भी उनकी उतनी ही पकड़ है जितनी कि आजकल के नए कमर्शियल सिनेमा के चरित्रों पर ।
सरजू विजन के बैनर तले बनी फ़िल्म 1922 प्रतिकार चौरी चौरा के निर्माता-निर्देशक व लेखक हैं अभिक भानु । फ़िल्म ‘1922 प्रतिकार चौरी चौरा’ में मुख्य भूमिक में रवि किशन के साथ ममता जेठवानी ,अनिल नागरथ,अशोक वोटिया,अनुराधा  सिंह आदि अन्य कलाकार भी हैं। प्रचारक हैं संजय भूषण पटियाला। फिल्म की तकनीकी पक्ष की बात की जाए तो आज से 100 साल पहले की घटना को सहज रूप में आज दिखाना कोई साधारण बात तो है नहीं, फिर भी निर्देशक अभिक भानु ने एक बेहतरीन फ़िल्म बनाई है।
फ़िल्म की साज सज्जा , सेटअप , ड्रेस डिजाइनिंग , उस समय का परिवेश और उसके हिंसाब से लाइटिंग इफेक्ट देखकर आपको वो दौर याद आने ही लगेगा । फ़िल्म में गीत संगीत की बात की जाए तो उस दौर के संगीत में और आज के संगीत में अंतर तो है , इसलिए संगीत के मामले में आपको थोड़ी सी निराशा हो सकती है, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर ठीक ठाक बन पड़ा है । फ़िल्म का साउंड इफ़ेक्ट औसत से कुछ उम्दा है ।
जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड का प्रतिशोध है फिल्म ‘1922 प्रतिकार चौरी चौरा’। कुल मिलाकर इस वीकेंड पर आपको आज़ादी के पहले के उस दौर को देखनेऔर समझने के लिए एक बेहतरीन सिनेमा मिली है। इसे परिवार और दोस्तों के साथ देख सकते हैं।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

शाहिद माल्या ने जुल्फुकार टाइगर के लिए गाया एक रोमांटिक गाना

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मुम्बई। सुपरस्टार शाहिद कपूर के लिए फिल्म ‘मौसम’ में ‘कोई दिल बेकाबू कर गया’ गाना गाकर सिंगर शाहिद माल्या ने खूब चर्चा बटोरी है। यह खूबसूरत रोमांटिक गाना युवा दिलों की धड़कन बन चुका है। वैसे तो शाहिद माल्या ने कई बड़े कलाकारों के लिए गाना गाया है लेकिन इस बार वह एक उभरते अभिनेता जुल्फुकार टाइगर के लिए आवाज़ दिया है जो निश्चित रूप से संगीतप्रेमियों को पसंद आएगा।

हाल ही में जेड ए फिल्म्स इंटरनेशनल के बैनर तले एक रोमांटिक गीत की रिकॉर्डिंग ग्रैविटी साउंड, गोरेगांव पश्चिम, मुम्बई में पूरी की गई। इस गीत के धुन को म्यूजिक डायरेक्टर सूरज ने पिरोया है वहीं सिंगर शाहिद माल्या की आवाज़ ने मधुर रस घोल दिया है। गाने के बोल ‘आसरा बन जा’ को तरमीम अहमद ने लिखा है।
शाहिद माल्या ने रिकॉर्डिंग के अवसर पर कहा कि एक बार फिर मैंने बेहतरीन गाना है। धुन कमाल की बन पड़ी है। नामचीन संगीतकार के लिये गाने के साथ साथ जब नए प्रतिभाओं के साथ काम करता हूँ तो वह भी बेमिसाल है।
संगीतकार सूरज ने कहा कि मेलोडी संगीत सदाबहार होती है। हर वर्ग के श्रोताओं को यह पसंद आती है। रचना करते हुए कोशिश रहती है कि मेरी सभी धुन श्रोताओं के लिए कर्णप्रिय बने। अलबम के निर्माता जुल्फुकार टाइगर, प्रकाश चौधरी और मोहम्मद सैफ और सह निर्माता प्रदीप कुमार हैं। वहीं स्क्रीनप्ले राइटर एम जावेद अंसारी (जेडी), कार्यकारी निर्माता रईस खान और अमजद अली खान हैं।
प्रोडक्शन की ओर से राज शराफ, वीपी नरूला, रोहित कुमार, अरमान मलिक, ममता सैनी, नाज़िम अंसारी, तौहीद शेख, चौधरी राजीव, अमन अंसारी, अमीन, निदा रुखसार, अतिफ, फरहा नाज़, अतुल दास एडिटर को विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया है।
जल्द ही इस रोमांटिक अलबम की शूटिंग उत्तराखंड के खूबसूरत वादियों में की जाएगी। वीडियो में जुल्फुकार टाइगर के साथ एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री नज़र आएगी।
गौरतलब हो कि जुल्फुकार टाइगर उत्तरप्रदेश में बिजनौर जिले के श्यामीवाला गांव के रहने वाले हैं। लेकिन उन्होंने दिल्ली और मुम्बई में भी बहुत समय बिताया है। वह पिछले 21 साल से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बॉलीवुड एक्टिंग स्कूल ऑफ आर्ट्स के नाम से इंस्टीट्यूट चला रहे हैं।
उन्होंने सन 2002 में वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन मुम्बई में अपना बैनर जेड ए फिल्म्स इंटरनेशनल रजिस्टर्ड कराया है। अब तक टाइगर बतौर निर्माता कई म्यूजिक एलबम का निर्माण कर चुके हैं। साथ ही वह एक अभिनेता भी हैं और कोरियोग्राफी और एक्शन डायरेक्शन भी कर चुके हैं। हाल ही में वह हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में एक अलबम ‘मेरे लिए हो’ भी बना चुके हैं।

– संतोष साहू

लेखन को सामाजिक जनचेतना का अपना हथियार बनाया है – दीपक देसाई ‘ दीपक ‘

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सूरत -गुजरात – दीपक देसाई ‘दीपक ‘ पारदी तिघरा गांव के साहित्यकार जी है जिनकी हाल ही में प्रकाशित काव्य पुस्तक ”यादों के ग़ुब्बारे ‘ हिंदी और गुजरती साहित्यकारों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है।

दीपक देसाई ‘दीपक ‘ को बचपन से ही साहित्य , सिनेमा , कला के प्रति बहुत रूचि रही मगर जिंदगी की भाग दौड़ में वह अपनी साहित्यिक यात्रा को कही एक बिंदु पर विराम दे चुके थे मगर कहते है न माँ सरस्वती का लाल कभी भी हारता नहीं है। अपनी साहित्य सेवा में निरंतर लगे रहे और पहला काव्य संग्रह ”यादों के ग़ुब्बारे ‘ प्रकाशित होते ही कलमकारों , फिल्मकारों , साहित्यानुरागियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

दीपक देसाई ‘दीपक ‘ ‘ पारदी तिघरा गांव जो बलसाड गुजरात में आता है वही पर जन्मे और अपनी पढ़ाई गुजरती भाषा में पूरी की। खेती किसानी करने वाले दीपक भाई देसाई एक मृदुभाषी , कला और कलाकार प्रेमी है। सामाजिक कार्य भी वह समय समय पर करते रहते है।
दीपक भाई देसाई अपने सामाजिक कार्यो के साथ साथ लेखन को सामाजिक जनचेतना का अपना हथियार बनाया है। वह कहते है कि -” सामाजिक कार्य का अर्थ है सकारात्मक, और सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके व्यक्तियों की क्षमताओं को बेहतर करना ताकि वे अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करते हुए अपनी तकलीफ़ों को कम कर सकें।
दीपक भाई देसाई आगे कहते है है कि -” एक लेखक सामाजिक प्राणी तो होता ही है उसका यह कर्त्तव्य भी है कि वह सोए हुए समाज को जगाए उन्हें देश और समाज के प्रति अपनी जबबदारी को तय करने का मार्ग भी सुझाए।
खैर बहुत ही काम समय में दीपक देसाई ‘ दीपक ‘ को उनकी सामाजिक और साहित्यिक कार्यों के किये बहुत से सम्मान मिल चुके है। हाल ही में ” गऊ भारत भारती ” समाचारपत्र द्वारा ” गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान ” मनोनीत राज्य मंत्री तरुण राठी के हाथो मिला।
इसी के साथ ही साहित्य जगत का सम्मानित सम्मान वाग्धारा सम्मान केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के हाथो मिला। मुंबई में बॉलीवुड आइकोनिक अवार्ड, गुजराती-हिंदी कविता लेखन के लिए बॉलीवुड गायक कुमार शानू के हाथो मिला। दादा साहेब फालके अवार्ड आदि मिल चूका है।

अब जल्द ही उन्हें ” महाराष्ट्र श्री ” का सम्मान भी उन्हें मिलने जा रहा है। ६० से ६५ की उम्र में आज दीपक देसाई ‘ दीपक ” को यह यस – सम्मान उनकी लेखनी और सामाजिक कार्यो के लिए मिल रहा है।
दीपक भाई देसाई की उनकी यह सफलता देख कर यही कहा जा सकता है कि आदमी किसी भी उम्र में कभी भी अपनी मज़िल और प्रसिद्धि पा सकता है।

 

राहुल गाँधी बने मैकेनिक , दुकान पर जा कर रिपेयर करने लगे बाइक

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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को अचानक दिल्ली के करोलबाग पहुंच गए। यहां उन्होंने साइकिल व्यापारियों और साइकिल बनाने वालों से मुलाकात की। साथ ही उन्होंने बाइक के दुकान में जाकर भी लोगों से बात की। बाइक मैकेनिक की दुकान पर भी राहुल गांधी ने बाजार में आने वाली समस्याओं पर बात की। इस दौरान कांग्रेस नेता बाइक रिपेयर करने की टेक्निक भी सीखते नजर आए।

कांग्रेस ने फोटो शेयर कर लिखा- यही हाथ हिंदुस्तान बनाते हैं

राहुल ने इन लोगों साथ अपनी बातचीत की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की और लिखा, ‘‘रिंच (नट बोल्ट कसने का औजार) घुमाने वाले और भारत के पहियों को गतिमान रखने वाले हाथों से सीख रहा हूं।’’ कांग्रेस ने भी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष की तस्वीरें फेसबुक पर साझा की हैं, जिनमें वह मोटरसाइकिल ठीक करना सीखते हुए और मैकेनिक से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं।

पार्टी ने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, ‘‘यही हाथ हिंदुस्तान बनाते हैं। इन कपड़ों पर लगी कालिख हमारी खुद्दारी और शान है। ऐसे हाथों को हौसला देने का काम एक जननायक ही करता है। राहुल गांधी दिल्ली के करोल बाग में मोटरसाइकिल मैकेनिक के साथ। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जारी है।’’

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा जारी!
बता दें कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद से ही राहुल गांधी आम लोगों से मुलाकात और बातचीत करते अक्सर नजर आ जाते हैं। इससे पहले उन्होंने ट्रक ड्राइवरों से मुलाकात की थी और दिल्ली से चंडीगढ़ तक की यात्रा ट्रक से ही की थी। कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल बेंगलुरु में एक डिलीवरी बॉय के साथ स्कूटर की सवारी करते देखे गए थे, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

बकरीद से एक दिन पहले चला ‘ऑपरेशन गौ तस्कर’, करीब 9 ठिकानों पर छापेमारी

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नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में बकरीद के एक दिन पहले पुलिस ने ऑपरेशन गौ तस्कर चलाया और करीब 8 से 9 ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान 6 लोगों को हिरासत में लिया गया है और करीब 86 जानवरों को छुड़ाया गया है। पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है। दरअसल नागपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि गौ तस्करों ने अलग-अलग जगहों पर गायों को छिपा रखा है। इसके बाद पुलिस अलर्ट हुई और छापेमारी ऑपरेशन को अंजाम दिया।

नागपुर के पुलिस कमिश्नर का बयान आया सामने

नागपुर के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया, ‘नागपुर पुलिस ने पिछले 1 महीने से गौ तस्करों के खिलाफ एक मुहिम छेड़ी है, हर दिन अलग-अलग ठिकानों पर गोवंश के तस्करों पर पुलिस रेड मार रही है, पुलिस को यह सूचना मिली थी की नागपुर में गौ तस्कर एक-दो दिन से सक्रिय हैं, उस इनपुट के आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है।’

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘8 जगह पर पुलिस ने गोवंश को छुड़ाया, कहीं पर 20, कहीं पर 15, कहीं पर 3 तो कहीं पर 5 गोवंश छुपाकर रखे गए थे।’ अमितेश कुमार ने कहा कि बकरीद को देखते हुए कायदा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए पुलिस ने काफी ज्यादा बंदोबस्त करके रखे हैं।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर रूट मार्च किया जाएगा। धर्मगुरुओं के साथ कई बैठक के हो चुकी हैं। जहां तक जानवरों का सवाल है, नागपुर पुलिस की धारणा है कि किसी भी तरीके से गैरकानूनी काम होने नहीं दिया जाएगा। जहां पर भी इस तरीके की बात सामने आ रही है, वहां पर कार्रवाई की जा रही है। आज सुबह 8 से 9 जगह पर पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम दिया है।