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रायबरेली से नेहरू-गांधी परिवार की विरासत प्रियंका को सौंपने की तैयारी

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(पंकज कुमार श्रीवास्तव-विभूति फीचर्स)
हालांकि,सत्रहवीं लोकसभा की अंतिम बैठक हो चुकी है।लेकिन सत्रहवीं लोकसभा को आधिकारिक रूप से भंग किया जाना अभी शेष है।इस बीच 14 फरवरी,2024 को रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने राज्यसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल कर दिया है।अब,यह बात स्पष्ट ही थी कि वह 18वीं लोकसभा के लिए रायबरेली सीट से आमचुनाव नहीं लड़ेंगी।तथापि,15 फरवरी,2024 को सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों के नाम भावुक कर देने वाला पत्र लिखा है।जिससे यह भी ध्वनित होता है कि वे रायबरेली की राजनीतिक विरासत प्रियंका को सौंपने की तैयारी कर चुकी हैं।सबसे पहले तो सोनिया ने रायबरेली के लोगों को ‘स्नेही परिवारजन’कहकर संबोधित किया है।
पत्र  की शुरुआत में वह कहती हैं-‘मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है।यह रायबरेली आकर-आप लोगों से मिलकर पूरा होता है।’इन शब्दों से वह अपने परिवार में रायबरेली के तमाम लोगों को जोड़ लेती हैं या यों कहें कि रायबरेली के तमाम लोगों के साथ अपने परिवार को एकाकार कर लेती हैं।इसके आगे वह कहतीं हैं-‘यह नेह-नाता बहुत पुराना है और अपने ससुराल से मुझे सौभाग्य की तरह मिला है।’रायबरेली के लोगों के स्नेहिल रिश्तों का श्रेय वह अपने ससुराल के लोगों यानि कि सास-ससुर(पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी)को देती हैं,जिन्होंने  संसद में भी रायबरेली का प्रतिनिधित्व किया था और खुद को सास-ससुर की विरासत को आगे बढ़ाने वाली बताया है।
आगे वह याद दिलाती हैं कि उनके श्वसुर फिरोज गांधी और सास इंदिरा गांधी ने भी रायबरेली का प्रतिनिधित्व किया था,तब से अब तक यह सिलसिला जिंदगी के उतार-चढ़ाव और मुश्किल भरी राह पर प्यार और जोश के साथ आगे बढ़ता गया और इस पर हमारी आस्था मजबूत होती गई।
इस पत्र के तीसरे पैराग्राफ के पहले वाक्य में सोनिया गांधी कहती हैं-‘इसी रोशन रास्ते पर आपने मुझे भी चलने की जगह दी।’कहने का अभिप्राय यह कि इन शब्दों से सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों के साथ अपने आत्मीय रिश्तों का श्रेय खुद को नहीं रायबरेली के लोगों को दे रही हैं।अगले वाक्य में वह कहती हैं-‘सास और जीवनसाथी को हमेशा के लिए खोकर मैं आपके पास आई और आपने अपना आंचल मेरे लिए फैला दिया।’यह किसी भी महिला द्वारा दिया जाने वाला ऐसा वक्तव्य है,जो किसी को भी भावुक कर देगा।साथ ही,वह उस ऐतिहासिकता को भी दुहराता है कि महज 7साल के अंतराल पर इस देश के अतिविशिष्ट परिवार की दो पीढ़ियों-इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने अपने सार्वजनिक मूल्यों के लिए अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं।इस तीसरे पैराग्राफ में ही सोनिया गांधी आगे कहतीं हैं-‘पिछले दो चुनावों में विषम परिस्थितियों में भी आप एक चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े रहे,मैं यह कभी भूल नहीं सकती।यह कहते हुए मुझे गर्व है कि आज मैं जो कुछ भी हूं,आपकी बदौलत हूं और मैंने इस भरोसे को हरदम निभाने की कोशिश की है।’यह किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अपनी जनता के प्रति एक श्रेष्ठ आभार संदेश है।
इस पत्र  में आगे सोनिया गांधी उन मजबूरियों का जिक्र करती हैं,जिसके चलते वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय लेने को बाध्य हुईं।वह कहती हैं-‘अब स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते मैं अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी।’वह आगे कहतीं हैं-इस निर्णय के बाद मुझे आपकी सीधी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन यह तय है कि मेरा मन-प्राण हमेशा आपके पास रहेगा।मुझे पता है कि आप भी हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को वैसे ही संभाल लेंगे,जैसे अब तक संभालते आए हैं।
किसी पारिवारिक आत्मीय स्वजन की तरह सोनिया गांधी ने पत्र के अंतिम पैराग्राफ में’बड़ों को प्रणाम,छोटों को स्नेह’ प्रेषित किया है।साथ ही जल्द मिलने का वादा करना नहीं भूलीं।
भारत का संसदीय इतिहास कोई 72 वर्ष का हो चला है।इन 72 वर्षों में रायबरेली ने 17 आमचुनाव और 3 उपचुनाव देखें हैं।इसमें सिर्फ 4 जनप्रतिनिधि ऐसे रहे,जिन्होंने कुल 12 वर्षों के लिए रायबरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और जो या तो नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के थे अथवा उन्हें नेहरू गांधी परिवार की व्यक्तिगत पारिवारिक शुभकामनाएं अप्राप्त थीं।
नेहरू-गांधी परिवार और रायबरेली के आम मतदाताओं के बीच आत्मीय और भावुक रिश्ते की शुरुआत भारत में संसदीय इतिहास के शुरूआत से ही हो गई थी।1952के पहले आमचुनाव में इस संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के इकलौते दामाद फिरोज गांधी ने चुनाव लड़ा और जीता।फिरोज गांधी नेहरू के इकलौते दामाद तो थे ही,स्वयं भी स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार के रूप में उनकी स्वतंत्र पहचान थी।निजी बीमा कंपनियों द्वारा गड़बड़ झाले को उन्होंने सार्वजनिक पटल पर रखा और अगर 1956में बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना की गई,तो उसके पीछे फिरोज गांधी जैसे लोगों का सद्प्रयास था।1957में भी वही जीते।भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी नैसर्गिकता के कारण मूंदड़ा कांड को भी उन्होंने उजागर किया और जिसके कारण टीटी कृष्णमाचारी जैसे केंद्रीय मंत्री को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।1959में केरल में इ एम एस नंबूदरीपाद की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के फैसले से भी फिरोज गांधी इत्तफाक नहीं रखते थे।8 सितम्बर,1960 को फिरोज गांधी के असामयिक निधन से यह सीट खाली हो गई और उपचुनाव में नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के आरपी सिंह सांसद चुने गए।(हालांकि,वह कांग्रेसी ही थे।) 1962के आम चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई,सो एक अन्य कांग्रेसी बैजनाथ कुरील ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वह 1967तक सांसद रहे।इस प्रकार,1960-67के 7 वर्षों में नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के दो कांग्रेसियों ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने और इंदिराजी को उन्होंने अपने कैबिनेट में जगह दी।उन्हें राज्यसभा का सदस्य भी बनाया गया।जनवरी,1966 में लाल बहादुर शास्त्री के असामयिक निधन के बाद इंदिराजी प्रधानमंत्री बनीं। इंदिराजी के कार्यकाल में पहले आमचुनाव 1967में हुए थे।1967में रायबरेली सीट अनारक्षित हो गई।इंदिराजी ने अपने संसदीय क्षेत्र के रूप में पति फिरोज गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली को ही चुना।1971में भी इंदिराजी रायबरेली से ही चुनी गईं।1971के आम चुनाव में इंदिराजी की तरफ से कुछ तकनीकी वैधानिक भूलें हो गईं।पराजित उम्मीदवार राजनारायणजी ने उन तकनीकी वैधानिक भूलों को आधार बनाकर इंदिराजी के चुनाव को न्यायालय में चुनौती दी।12 जून,1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने अपने फैसले से इंदिराजी के चुनाव को रद्द कर दिया। इंदिराजी ने इमरजेंसी लगाकर आम चुनाव एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिए।1971के बाद आम चुनाव 1976में नहीं 1977में हुए थे।इंदिरा विरोधी अभियान का नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया।प.बंगाल,उड़ीसा, अविभाजित बिहार,अविभाजित उत्तर प्रदेश,अविभाजित मध्यप्रदेश,राजस्थान,दिल्ली,हरियाणा,पंजाब,चंडीगढ़,हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पांव पूरी तरह उखड़ गए,इन राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।इंदिराजी भी रायबरेली सीट पर राजनारायण के हाथों पराजित हुईं।अगले आम चुनाव 1980तक राजनारायणजी ही रायबरेली के सांसद बने रहे।इस प्रकार,राजनारायण नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के तीसरे सांसद रहे,जिन्होंने रायबरेली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
1980के आम चुनाव में इंदिराजी ने रायबरेली से चुनाव तो लड़ा ही,लेकिन एहतियातन आंध्रप्रदेश आंध्रप्रदेश के मेदक से भी चुनाव लड़ा और जीता।वह दोनों जगहों से निर्वाचित हुईं।जब एक सीट छोड़ने की बात आई, तो उन्होंने रायबरेली सीट छोड़ दी और मेदक सीट अपने पास रखी।
ऐसी परिस्थिति में,रायबरेली में दूसरा उपचुनाव हुआ।रायबरेली सीट के लिए इस उपचुनाव के लिए इंदिराजी ने अपने भतीजे अरूण नेहरू को तैयार किया।अरूण नेहरू तब तक एक अराजनीतिक शख्सियत थे और वह एक कंपनी जॉनसन एंड निकल्सन के चीफ एक्जीक्यूटिव थे। चुनाव हुए और अरूण नेहरू जीत गए।रायबरेली के लिए इंदिराजी  नेहरू-गांधी परिवार से ही एक अराजनीतिक शख्सियत अरूण नेहरू को राजनीति में खींच लाईं थी। अरूण नेहरू 1984के चुनाव में भी रायबरेली से निर्वाचित हुए।31अक्तूबर, 1984 को इंदिराजी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने,लेकिन अरूण नेहरू के साथ उनकी व्यापक सैद्धांतिक असहमतियां थीं।अरूण नेहरू वीपी सिंह कैंप में चले गये।इसलिए,1989में अरूण नेहरू के विकल्प की तलाश हुई और इंदिराजी की मामी शीला कौल के रूप में यह खोज पूरी हुई।शीला कौल  सिर्फ 1989में ही नहीं बल्कि 1991में भी रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुईं।अगले
आमचुनाव,1996 के पहले शीला कौल को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया।
1996 और 1998 के आम चुनावों में नेहरू-गांधी परिवार का कोई आदमी रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ा और भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता अरूण सिंह रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए।अरूण सिंह आरपी सिंह,बैजनाथ कुरील, राजनारायण के बाद चौथी शख्सियत थे,जो रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए,लेकिन वह नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे।इतिहास के इस दौर में सोनिया राजनीति में आने को लेकर उत्सुक नहीं थीं और राहुल-प्रियंका पर्याप्त परिपक्व नहीं थे।
1991में राजीव गांधी की हत्या के बाद अमेठी में उनकी विरासत उनके परम मित्र कैप्टन सतीश शर्मा संभाल रहे थे।वह 1991और 1996में अमेठी से सांसद निर्वाचित भी हुए थे।लेकिन,1998में वह संजय सिंह के हाथों अमेठी में पराजित भी हो चुके थे।1999के आमचुनाव में कैप्टन सतीश शर्मा रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए। कैप्टन सतीश शर्मा अरूण सिंह के बाद वह पांचवीं शख्सियत थे,जो रायबरेली से सांसद निर्वाचित हुए,लेकिन वह नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे।पर आरपी सिंह,बैजनाथ कुरील, राजनारायण और अरूण सिंह से इन संदर्भों में अलग थे कि उनको नेहरू-गांधी परिवार का पूर्ण समर्थन हासिल था।यहां तक कि उनके चुनाव प्रचार में कम से कम प्रियंका गांधी ने खुलकर भाग लिया था।
14 मार्च,1998को सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाल ली थी।जब उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश का मन बनाया,तो कैप्टन सतीश शर्मा ने रायबरेली सीट उनके लिए छोड़ दी थी।2004से 2024तक सोनिया गांधी लगातार रायबरेली की सांसद बनी हुई हैं।
15फरवरी,2024 को रायबरेली के लोगों को भावुक कर देने वाला मार्मिक और आत्मीय पत्र लिखकर सोनिया गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि बढ़ती उम्र और गिरते स्वास्थ के कारण रायबरेली का प्रतिनिधित्व उनके लिए कठिन अवश्य है, लेकिन रायबरेली के लोगों से मिली आत्मीयता यह परिवार भूल नहीं पाएगा।ऐसे में,राजनीतिक हलकों में यह सहज अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी आमचुनाव में शायद प्रियंका गांधी  रायबरेली से चुनाव लड़ेगीं और रायबरेली की राजनीतिक विरासत नेहरू-गांधी परिवार के पास ही बनी रहेगी।(विभूति फीचर्स)

क्रूरता की रानी – ममता बनर्जी के राज में महिलाओं के साथ हुई क्रूरता ने सारे देश को चौंका दिया है

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(राकेश अचल-विनायक फीचर्स)
बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी के राज में महिलाओं के साथ हुई क्रूरता ने सारे देश को चौंका दिया है। अभी तक ऐसे आरोप केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ही लगाती थी लेकिन अब कल तक ममता बनर्जी की मित्र कही जाने वाली कांग्रेस भी ऐसे ही आरोप लगा रही है ।  बंगाल के कांग्रेस नेता अधीर  रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को ‘ क्रूरता की रानी ‘ तक कह दिया है।लेकिन क्या सचमुच ममता बनर्जी क्रूरता की रानी हैं या उन्हें क्रूरता का प्रतीक बनाने की कोशिश की जा रही है।   
ताजा मामला संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न का है। बंगाल में आठ दशक बाद भी साम्प्रदायिक जहर समाप्त नहीं हुआ है।  बंगाल में नोआखाली से चलकर संदेशखाली तक हिंसा में ही झुलस रहा है। संदेशखली का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज तक आ पहुंचा है ?
क्या है संदेशखली का मामला ?
आपको बता दें कि बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है संदेशखाली। संदेशखाली उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट उपखंड में आता है। ये बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ इलाका है। इस इलाके में अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं।
संदेशखाली   उस वक्त सुर्खियों में आया, जब तृण मूल कांग्रेस के  नेता शाहजहां शेख के घर पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा । आरोप है कि शेख और उनके समर्थकों ने प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी  की टीम पर ही हमला कर दिया। आरोपी फरार है। शाहजहां को पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक का करीबी माना जाता है। शुरुआत में ऐसा लगा कि ये घटना सिर्फ ‘एक हमले’ तक ही सीमित है, लेकिन शेख के फरार होते ही इलाके की महिलाएं अचानक बाहर निकल आई। महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर अत्याचार करने, यौन उत्पीड़न करने और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप लगा डाले। महिलाओं का आरोप है कि तृमूकां   के लोग गांव में घर-घर जाकर चेक करते हैं और इस दौरान अगर घर में कोई सुंदर महिला या लड़की दिखती है तो टीएमसी नेता शाहजहां शेख के लोग उसे अगवा कर ले जाते थे और फिर उसे पूरी रात अपने साथ पार्टी दफ्तर या अन्य जगह पर रखा जाता था। अगले दिन यौन उत्पीड़न करने के बाद उसे उसके घर या घर के सामने छोड़ जाते थे।’
संदेशखाली  का ये भयानक सन्देश जब बंगाल के बाहर  पहुंचा तो मामला राज्यपाल तक पहुंच गया। जांच जारी है। राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। राजनीति भी जम कर की जा रही है। सबसे पहले  भाजपा के एक प्रतिनिधि मंडल ने संदेशखाली  जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उसे रास्ते में ही रोक दिया।  इसके बाद तृण मूल कांग्रेस से नाराज बैठी कांग्रेस भी मैदान में आ गयी। कांग्रेस सांसद और बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को भीसंदेशखाली  जाने से रोका गया है। इस पर पुलिस और अधीर रंजन चौधरी के बीच नोकझोंक भी हुई । नारेबाजी करते कांग्रेस नेता और कांग्रेस प्रतिनिधि जब आगे बढ़ रहे थे, पुलिस ने उन्हें रोका और रामपुर में बैरिकेडिंग कर दी।
कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच अनबन की वजह इंडिया गठबंधन में ममता द्वारा डाली गयी दरार है ।  पहले ममता ने गठबंधन के नेता के लिए कांग्रेस के मल्लिकार्जुनखड़गे का नाम प्रस्तावित किया,इसका नतीजा ये हुआ कि जेडीयू गठबंधन से बाहर हो गयी। बाद में ममता ने बंगाल में कांग्रेस को अपेक्षित सीटें न देकर रार बढ़ा दी।  कांग्रेस और ममता के रिश्ते तब और बिगड़े जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ भी ममता सरकार ने बदसलूकी की। अब संदेशखाली के लिए आगे बढ़ने से कांग्रेस सांसद ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि, ममता क्रूरता की रानी है वह आग से खेल रही हैं।  अधीर रंजन ने कहा कि हम सब कुछ राजनीतिक तौर पर करेंगे।  हम बम या बंदूकें नहीं ले जा रहे हैं।  यहां ममता ने भाजपा को भी रोका , लेकिन वो कुछ और हैं, हम कुछ और हैं।
संदेशखाली का मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने अंदाज में जवाब दे रही हैं।  उनका कहना है कि मुझे इस पर कार्रवाई करने के लिए मामले को जानना होगा।  वहां आरएसएस का आधार है।  7-8 साल पहले दंगे हुए, वो संवेदनशील इलाकों में से एक है।  हमने सरस्वती पूजा के दौरान स्थिति को मजबूती से संभाला अन्यथा वहां योजनाएं कुछ और ही थी। संदेशखाली हिंसा पर बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी का कहना है कि जिन्होंने यह अत्याचार किया है उन्हें सामने आना होगा, एनआईए जांच होनी चाहिए।  उन्हें मौत की सजा दी जानी चाहिए।हम सुकांत मजूमदार पर हमले की निंदा करते हैं।
 राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि संदेशखाली में स्थानीय अधिकारियों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।  हम इस मामले की गहराई तक जाना चाहते है।  संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ सबूत मिटाने और डराने-धमकाने की रणनीति अस्वीकार्य है।  महिला आयोग पूरी जांच और अपराधियों पर मुकदमा चलाने की मांग करता है। यानि महिला आयोग और भाजपा के सुर एक जैसे हैं। अब यदि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर की गयी याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया तो ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ सकतीं हैं।
संदर्भ के लिए आपको बता दें कि अविभाजित भारत में बंगाल के नोआखली जिले में 1946  में हुए साम्प्रदायिक दंगे में पांच हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे, नोआखाली अब बांग्लादेश का हिस्सा है। बंगाल की राजनीति तभी से रक्तवर्णी होती चली आ रही है। पश्चिम बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी सातवीं मुख्यमंत्री हैं। 1972  तक पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का राज था ।  उसके बाद 25  साल वामपंथियों ने यहां एकछत्र राज किया और बीते 9  साल से यहां तृणमूल कांग्रेस का राज है ।  भाजपा पिछले 44  साल से पश्चिम बंगाल पर शासन करने का ख्वाब देख रही है लेकिन अभी तक उसे मौक़ा नहीं मिला है।  संदेशखाली में महिलाओं का उत्पीड़न उसके लिए इसी वजह से महत्वपूर्ण है। भाजपा भी येन-केन बंगाल की रक्तवर्णी सत्ता का सुख लेना चाहती है।(विनायक फीचर्स)

प्राचीन काल से ही भारत में गोधन को मुख्य धन मानते आए हैं

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हिंदू धर्म में गाय को बहुत ही पूजनीय पशु माना जाता है। गाय को मां का दर्जा प्राप्त है तभी तो इस गाय माता कह कर बुलाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय में देवी-देवताओं का वास होता है। गाय की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो लोग नियमित रूप से गाय की पूजा-अर्चना और सेवा करते हैं उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कोई कमी नहीं होती है। शास्त्रों के अनुसार गाय से जुड़े कुछ उपाय करने से व्यक्ति के जीवन सफलता, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वासा माना जाता है। हिंदू धर्म में गाय का विशेष महत्व होता है। गाय के दूध को अमृत माना गया है। इसके अलावा गाय के मूत्र और गोबर का भी विशेष महत्व होत है। आइए जानते हैं गाय से जुड़े कुछ उपाय..

गाय से जुड़े कुछ उपाय

    1. जिस प्रकार से प्रतिदिन स्नान करने के बाद भगवान के दर्शन और पूजा पाठ का महत्व होता है उसी प्रकार से स्नान करने के बाद गाय की पूजा अवश्य करनी चाहिए। गाय की रोज पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
    1. घर में प्रतिदिन खाना बनाने के बाद पहली रोटी के गाय के लिए निकालें और रोटी खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
    2. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग रोज गाय माता की सेवा करते हैं उन पर मां लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और धन-दौलत की वर्षा करती हैं।
    3. गाय के रोजा हरा चारा खिलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। बुधवार के दिन विशेष रूप से हरा चारा खिलाने से सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है। 
    4. गाय के गले और पीठ को सहलाने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और सेहत अच्छी रहती है। 
    5. ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि विवाह जैसे मंगल कार्यों के लिए गोधूलि बेला सर्वोत्तम मुहूर्त होता है, संध्या काल में जब गाय जंगल से घास आदि खाकर आती है तब गाय के खुरों से उड़ने वाली धूल समस्त पापों का नाश करती है।
  1. नवग्रहों की शांति के लिए भी गाय कि विशेष भूमिका होती है। मंगल के अरिष्ट होने पर लाल रंग की गाय की सेवा और गरीब ब्राह्मण को गोदान ख़राब मंगल के प्रभाव को क्षीण कर देता है। इसी तरह शनि की दशा, अन्तर्दशा और साढ़ेसाती के समय काली गाय का दान मनुष्यों को कष्टों से मुक्ति दिलाता है। 
  2. बुध ग्रह की अशुभता के निवारण हेतु गायों को हरा चारा खिलाने से राहत मिलती है।
  3. पितृदोष होने पर गाय को प्रतिदिन या अमावस्या को रोटी, गुड़, चारा आदि खिलाना चाहिए। गाय की सेवा पूजा से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर भक्तों को मानसिक शांति और सुखमय जीवन होने का वरदान देती है।

गाय का धार्मिक महत्व 
प्राचीन काल से ही भारत में गोधन को मुख्य धन मानते आए हैं और हर प्रकार से गौरक्षा, गौसेवा एवं गौपालन पर ज़ोर दिया जाता रहा है। हमारे हिन्दू शास्त्रों, वेदों में गौरक्षा, गौ महिमा, गौ पालन आदि के प्रसंग भी अधिकाधिक मिलते हैं। रामायण, महाभारत, भगवद्गीता में भी गाय का किसी न किसी रूप में उल्लेख मिलता है। गाय, भगवान श्री कृष्ण को अतिप्रिय है। गौ पृथ्वी का प्रतीक है। गौमाता में सभी देवी-देवता विद्यमान रहते हैं। सभी वेद भी गौमाता में प्रतिष्ठित हैं। 

2027 तक अरहर में आत्मनिर्भरता की कवायद जारी

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17 फरवरी 2024, नई दिल्ली: 2027 तक अरहर में आत्मनिर्भरता की कवायद जारी, 1 लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण दालों का बीजोत्पादन: श्री मुंडा – केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) व ग्लोबल पल्स कन्फेडरेशन (जीपीसी) द्वारा आयोजित चार दिवसीय पल्सेस कन्वेंशन का आज (15 फरवरी 2024) शुभारंभ किया। इस समारोह में उपभोक्ता और खाद्य-सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

 

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि भारत, दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक व सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। खेती-किसानी की बेहतरी व किसानों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए भारत सरकार, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में बहुत जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है। केंद्र सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही हैं, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त होने में सहायता मिल रही हैं।

2027 तक अरहर में आत्मनिर्भरता की कवायद जारी

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार दलहन क्षेत्र में सतत कार्य करते हुए आयात पर निर्भरता कम करने व आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के संबंध में लगातार प्रयास कर रही हैं। 2014 से, यानी एक दशक में दलहनी फसलों के विकास में केंद्र के अथक प्रयासों से काफी प्रगति हुई है। भारत चने व कई अन्य दलहनी फ़सलों में आत्मनिर्भर बन चुका है, थोड़ी कमी तूर व उरद में बाकी है, जिसे 2027 तक पूरा करने की कवायद जारी है। इस दिशा में, नई किस्मों के बीजों की आपूर्ति बढ़ाई जा रही हैं, वहीं तूर-उड़द का रकबा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस रबी सीजन में मसूर का रकबा करीब 1 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। तूर की खरीद हेतु पोर्टल लांच किया गया है। इस पर पंजीयन करके किसान संपूर्ण बिक्री एमएसपी पर नेफेड या एनसीसीएफ को कर सकेंगे।

332 मिलियन टन कृषि उत्पादन का लक्ष्य

श्री मुंडा ने कहा कि देश में कृषि उत्पादन 332 मिलियन टन का लक्ष्य है, जिसमें अकेले 29.25 मिलियन टन दाल उत्पादन लक्ष्य है। गरीबों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में कवर किए करीब 81.4 करोड़ लाभार्थियों को 5 साल के लिए मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। यह हमारे कृषि क्षेत्र की प्रगति का प्रमाण है, जो खाद्यान्न के रिकॉर्ड उत्पादन के बल पर मुफ्त वितरण को संभव बना रहा है।

मंत्री ने बताया कि कृषि मंत्रालय के लिए बजट में दलहन क्षेत्र के, स्वास्थ्य व पर्यावरण के महत्व को समझते हुए महत्वपूर्ण वित्तीय परिव्यय की रिपोर्ट दी गई है।

एनएफएसएम-दलहन किसानों के लिए हैं मददगार

कृषि मंत्रालय घरेलू दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी जिलों में क्षेत्र विस्तार व उत्पादकता वृद्धि के जरिये उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एनएफएसएम-दलहन को लागू कर रहा है। इसके अंतर्गत राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से किसानों को मदद दी जाती है।

लाख से अधिक गुणवत्तापूर्ण दालों का बीजोत्पादन

दाल उत्पादन-उत्पादकता बढ़ाने के लिए, नई किस्मों के बीज मिनी किट वितरण, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, केवीके द्वारा तकनीकी प्रदर्शन जैसी पहल भी एनएफएसएम में शामिल की है। दालों के गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता बढ़ाने हेतु 2016-17 से एनएफएसएम के तहत दालों के 150 केंद्र खोले हैं, जिन्होंने 1 लाख क्विंटल से अधिक गुणवत्ता वाली दालों के बीज का उत्पादन किया है।

दालों की 343 उच्च उपज वाली किस्में

केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि दलहन फसल की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के लिए, आईसीएआर स्थान विशिष्ट उच्च उपज वाली किस्म के मिलान वाले उत्पादन पैकेज विकसित करने के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से बुनियादी व रणनीतिक अनुसंधान कर रहा है। सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप व्यावसायिक खेती के लिए दालों की 343 उच्च उपज वाली किस्मों की शुरूआत भी हुई है।

तकनीक से बढ़ाए दलहनी फसलों का उत्पादन 

श्री मुंडा ने बताया कि आने वाले खरीफ सीजन में क्लस्टर फ्रंड लाइन डिमांस्ट्रेशन द्वारा बहुत बड़े क्षेत्र में किस्मों व तकनीकों के प्रदर्शन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसान नई किस्मों एवं तकनीकों से परिचित हो, उन्हें अपनाकर दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाएं। जरूरत इस बात की भी है कि उच्च गुणवत्ता जैसे ज्यादा प्रोटीन वाली चने की किस्म, जलवायु अनुकूल किस्में व ऐसी ही अन्य लाभप्रद तकनीकों का प्रसार तेजी से हो एवं बीज से उत्पाद तक वैल्यू श्रृंखला बने, इसलिए सरकार के प्रयासों के साथ ही निजी क्षेत्र की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए रोडमैप

श्री मुंडा ने कहा कि दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए रोडमैप बनाया गया है, जिसमें बीज विकास अनुसंधान व उपज का आकलन करने सैटेलाइट इमेज जैसी अत्याधुनिक तकनीक प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य, उपयुक्त समय सहित अनुकूलित सलाह प्रदान करने, सिंचाई, निराई-गुड़ाई के लिए प्रौद्योगिकी के साथ हरेक किसान के खेत की मैपिंग शामिल है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से किसानों हेतु बहुत मजबूत, प्रतिस्पर्धी व पारदर्शी बाजार प्रदान किया जा रहा है, जो उपज का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त करने के लिए निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से लेनदेन करने हेतु व्यापक पहुंच प्रदान कर रहा है। यदि किसान खुले बाजार से लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, तो सरकार पीएम-आशा योजना लागू करती हैं, जिसके तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता है। श्री मुंडा ने कहा कि विशेषज्ञों व नीति-निर्माताओं के समर्थन से उम्मीद हैं कि यह आयोजन भारत के छोटे दलहन किसानों के विशाल नेटवर्क के साथ जानकारी साझा करने के माध्यम के रूप में काम करेगा। साथ ही लक्ष्य अनुरूप घरेलू उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

बाजार के लगभग 25हिस्से पर भारत दाल

केंद्रीय मंत्री श्री गोयल ने कहा कि दलहन उत्पादन 2014 में 17 मिलियन टन से बढ़कर अब 26 मिलियन टन से ज्यादा हो गया। यह किसानों की क्षमता-प्रतिबद्धता दर्शाता है। किसानों के उज्जवल भविष्य के लिए केंद्र सरकार हरसंभव उपाय कर रही है। सभी मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को समर्थन देने व उपभोक्ताओं को उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए भारत दाल लांच की गई है। चार महीने की अल्पावधि में ही बाजार के लगभग 25 फीसदी हिस्से पर भारत दाल का कब्जा हो गया है।

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर इथियोपिया के व्यापार व उद्योग तथा क्षेत्रीय एकता मंत्री कासाहु गोफे बलामी, उपभोक्ता मामलों के सचिव श्री रोहित कुमार सिंह, जीपीसी के प्रेसीडेंट श्री विजय अयंगर, नेफेड अध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह, एमडी श्री रितेश चौहान, अतिरिक्त सचिव (कृषि) श्रीमती शुभा ठाकुर सहित केंद्र-राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सहकारी संघों के अध्यक्ष-एमडी, किसानों-व्यापारियों के राष्ट्रीय संघों के पदाधिकारी, मिलर्स, निर्यातक-आयातक व आपूर्ति श्रृंखला प्रतिनिधि मौजूद थे।

3% की ब्याज छूट, दूध उत्पादकों को होगा फायदा; एचआईडीएफ को 2025-26 तक के लिए मिली मंजूरी

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नई दिल्ली: 3% की ब्याज छूट, दूध उत्पादकों को होगा फायदा; एचआईडीएफ को 2025-26 तक के लिए मिली मंजूरी – केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने बुधवार को नई दिल्ली में पुनर्गठित पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) योजना का शुभांरभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उद्योग, एफपीओ, डेयरी सहकारी समितियों को इस योजना का लाभ उठाना के लिए कहा। इसके साथ ही मंत्री परषोत्तम रूपाला ने एएचआईडीएफ से संबंधित एक ‘रेडियो जिंगल’ भी जारी किया। समारोह में श्री रूपाला ने कहा कि यह योजना कोविड काल के दौरान शुरू की गई थी जो पूरे देश के लिए कठिन समय था। उन्होंने कहा कि इस योजना को नया स्वरूप दिया गया है और इसे अगले 3 वर्षों (31 मार्च 2023 से 2025-26 तक) के लिए लागू किया जाएगा।

3% की ब्याज छूट

केंद्रीय ने बताया कि कैबिनेट ने हाल ही में  (1 फरवरी 2024) को अपनी बैठक में 29,610 करोड़ रुपये की लागत के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत एएचआईडीएफ के पुनर्गठन को मंजूरी दी। अब डेयरी सहकारी समितियों को डीआईडीएफ में मिलने वाली 2.5% की बजाय एएचआईडीएफ के तहत 3% की ब्याज छूट का लाभ मिलेगा।

दूध उत्पादकों का होगा फायदा 

डेयरी सहकारी को एएचआईडीएफ के क्रेडिट गारंटी फंड के तहत क्रेडिट गारंटी सहायता भी मिलेगी। यह योजना डेयरी सहकारी समितियों को नवीनतम प्रोसेसिंग टेक्नॉलजी के साथ अपने प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करने में मदद करेगी। इससे देश में बड़ी संख्या में दूध उत्पादकों को फायदा होगा।

योजना की मुख्य बाते

1. 8 वर्ष तक देय 3% की ब्याज छूट

2. व्यक्ति, एफपीओ, डेयरी सहकारी समितियां, निजी कंपनियां, सेक्शन 8 कंपनियां, एमएसएमई

3. क्रेडिट गारंटी अवधि ऋण के 25% तक कवर करती है

4. ऋण राशि पर कोई सीमा नहीं है

5. अनुमानित/वास्तविक परियोजना लागत का 90% तक ऋण की सुविधा

6. अन्य मंत्रालयों या राज्य स्तरीय योजनाओं की पूंजीगत सब्सिडी योजनाओं के साथ तालमेल बिठाना भी शामिल

7. ऑनलाइन पोर्टल www.ahidf.udaymitra.in के माध्यम से आसान आवेदन प्रक्रिया

मध्यप्रदेश में डेयरी प्रसंस्करण व मूल्य सवंर्धन परियोजना 

उद्घाटन समारोह में दिशाला लाइवलीहुड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, एफपीओ ने कहा कि उन्होंने मंथन संगठन के सहयोग से एएचआईडीएफ के तहत प्रति दिन 10,000 लीटर की क्षमता के साथ सीहोर, मध्य प्रदेश में एक डेयरी प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन परियोजना स्थापित की है। उन्होंने विभाग से 1.2 लाख ब्याज अनुदान प्राप्त किया है। अंबा फीड ने बताया कि उन्होंने एएचआईडीएफ के तहत कोयंबटूर में 1,20,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष का एनिमल फीड प्लांट स्थापित किया है।

इस दौरान एबीआईएस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने  पशुधन क्षेत्र में बुनियादी ढांचा बनाने में योजना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे बुनियादी ढांचे के निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।

वैश्विक स्तर पर मोटे अनाजों की पहुंच से किसानों को होगा फायदा 

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17 फरवरी 2024, नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर मोटे अनाजों की पहुंच से किसानों को होगा फायदा – भारत सरकार के प्रयास से वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया गया। मोटे अनाजों को लोकप्रिय बनाने और इन्हें जन आंदोलन बनाने के लिए वर्ष के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए हैं ताकि भारतीय मोटे अनाज, व्यंजनों, मूल्य वर्धित उत्पादों को विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके। भारत ने जी-20 समूह की अध्यक्षता के दौरान समूह के देशों के प्रतिनिधियों की मोटे अनाजों के व्यंजनों से आवभगत कर इसे वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने की कोशिश की और इसकी सभी सदस्य देशों ने सराहना भी की। इसके अलावा मिलेट कलिनरी कार्निवाल, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम, शेफ सम्मेलन, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की प्रदर्शनी, रोड शो, किसान मेले, अर्धसैनिक बलों के लिए शेफ का प्रशिक्षण, इंडोनेशिया और दिल्ली में आसियान भारत पोषक अनाज महोत्सव के दौरान मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया गया।

सरकार ने भारत को ‘श्रीअन्न’ के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए हैदराबाद स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च (आईआईएमआर) को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया है। यह संस्थान किसानों, महिला किसानों, गृह निर्माताओं, विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को मूल्यवर्धित मोटे अनाज खाद्य उत्पादों, दैनिक व्यंजनों आदि के निर्माण पर प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है और उन्हें स्व-उद्यम स्थापित करने में भी सहायता दे रहा है। संस्थान ने मोटे अनाज खाद्य पदार्थों के लिए ‘रेडी टू ईट’ और ‘रेडी टू कुक’ सहित मूल्य वर्धित तकनीक भी विकसित की है।

इस संबंध में उठाए गए अन्य कदमों में ‘ईट्राइट’ टैग के अंतर्गत मोटे अनाज खाद्य पदार्थों की ब्रांडिंग, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना और कृषि व्यवसाय इनक्यूबेटर और प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर आदि को बढ़ावा देना शामिल है। मोटे अनाजों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों को जारी रखते हुए इनके बारे में जागरूकता बढ़ाने और आम जनता के बीच इसे लोकप्रिय बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिल्ली हाट, नई दिल्ली में एक ‘मिलेट्स एक्सपीरिएंस सेंटर’ खोला गया है। सरकारी कर्मचारियों के बीच श्रीअन्न की खपत को प्रोत्साहित करने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों को विभागीय प्रशिक्षणों/बैठकों में श्रीअन्न के नाश्ता और विभागीय कैंटिनों में श्रीअन्न से बनने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा वैश्विक बाजारों में भारतीय मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों, भारतीय मिशनों, प्रसंस्करण, खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ साझेदारी का लाभ उठाने के लिए काम कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक निर्यात संवर्धन मंच (ईपीएफ) की स्थापना की गई है। एक अलग मोटा अनाज-विशिष्ट वेब पोर्टल विकसित किया गया है जिसमें मोटे अनाज के स्वास्थ्य लाभ, उत्पादन और निर्यात आंकड़े, मोटा अनाज निर्यातक निर्देशिका आदि के बारे में जानकारी शामिल है। एपीडा ने भारत की क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए एक व्यापक वैश्विक विपणन अभियान भी आयोजित किया है और इसी के अनुसार 30 आयातक देशों तथा 21 मोटे अनाज उत्पादक राज्यों के ई-कैटलॉग को जारी किया गया है। मोटे अनाजों के लिए एक वर्चुअल व्यापार मेला (वीटीएफ) विकसित किया गया है और इसे विश्व भर के निर्यातकों और आयातकों के लिए उपलब्ध कराया गया है, जो व्यापार सौदों पर बातचीत के लिए एक ही मंच प्रदान करता है।

मोटे अनाजों को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिये सरकार स्तर पर किये जा रहे प्रयासों के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। मोटे अनाजों के निर्यात में साल-दर-साल वृद्धि हो रही है। अब आवश्यकता इस बात की है कि सदियों से भारत के लोगों का मुख्य आहार रहा मोटा अनाज वर्तमान में अधिकांश भारतीयों की थाली से दूर हो गया है। स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद लाभकारी मोटे अनाजों की अधिक कीमतें इसका एक मुख्य कारण हो सकता है। यही वजह है कि भारत के घरेलू बाजार में भी इनकी उपलब्धता अन्य खाद्यान्नों की तुलना में काफी कम है। मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ेगा तो निश्चित ही कीमतें भी कम होंगी लेकिन किसानों को अच्छी कीमत भी मिलनी चाहिये इसलिये सभी मोटे अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बाजार भाव के आसपास रखना होगा। यदि ऐसा कर सकेंगे तो निश्चित ही देश के भीतर मोटे अनाजों की खपत बढ़ेगी और निर्यात से किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जाने के लिए तैयार हैं उर्वशी रौतेला

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मुंबई (अनिल बेदाग)अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जिस तरह की वैश्विक लोकप्रियता और स्टारडम है, उसे देखते हुए यह स्वाभाविक है कि उर्वशी रौतेला को दुनिया भर से विभिन्न सम्मानजनक फिल्म समारोहों में उन्हे आमंत्रित किया जाता है। हालाँकि उनका व्यस्त कार्यक्रम उन्हें यात्रा करने के लिए ज्यादा समय नहीं देता है, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने प्रतिष्ठित बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आखिरकार कुछ समय निकाल ही लिया है।
उर्वशी रौतेला एक सम्मानित अतिथि के रूप में बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इसमे कोई आश्चर्य नहीं है कि बर्लिन का हर कोई बेहद उत्साहित है। उनकी फिल्म ‘दिल है ग्रे’ का प्रीमियर पहले टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हो चुका है और अब वह बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के लिए तैयार है।
काम के मोर्चे पर, इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री के पास अक्षय कुमार के साथ ‘वेलकम 3’, बॉबी देओल, दुलकीर सलमान, नंदमुरी बालकृष्ण के साथ ‘एनबीके109’, सनी देओल और संजय दत्त के साथ ‘बाप’ (हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर एक्सपेंडेबल्स का रीमेक), रणदीप हुडा, ब्लैक रोज़ के साथ ‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’, जैसे प्रोजेक्ट्स हैं। इसके अलावा उर्वशी रौतेला ‘जेएनयू’ नामक एक आगामी फिल्म में भी दिखाई देंगी, जो एक बायोपिक है, जहां वह कॉलेज राजनेता की भूमिका निभा रही हैं और इस में वह एक म्यूजिक वीडियो में ‘जलेबी’ फेम जेसन डेरुलो के साथ भी नजर आएगी।

ज्ञान के सागर में ले जाएंगे “भार्गव भक्ति” पर प्रसारित चार वेदों के विवरण गीत

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मुंबई (अनिल बेदाग) भार्गव भक्ति यूट्यूब चैनल वर्तमान समय में भक्ति से ओतप्रोत गीत-संगीतों के माध्यम से सनातन धर्म की अलख जगा रहा है। जितनी चीजें भार्गव भक्ति के माध्यम से रिलीज हो रही है और हुई है,उसे अभी तक ना ही किसी फिल्म में या ना ही म्युजिक के माध्यम से दिखाया गया है। न ही किसी ने सोचा होगा कि इतनी ज्ञानवर्धक जानकारियां प्राप्त करना इस चैनल पर आसानी से उपलब्ध हो सकता है। एस के तिवारी इसके लिए पिछले कई सालों से मेहनत और लगन से कार्य कर रहे हैं।
भार्गव भक्ति यूट्यूब चैनल पर 52 शक्तिपीठ देवियों और बारह ज्योर्तिलिंग के विवरण गीत रिलीज किया जा चुका है। साथ ही 33 कोटि देवताओं (11 रुद्र, 12 आदित्य, 8 वशु 2 अश्वनी कुमार) के विवरण गीत निरंतर भार्गव भक्ति चैनल सभी सनातनी हिन्दू भाईयों-बहनों तक पहुंचा रहा है।
भार्गव भक्ति यू-ट्यूब चैनल का कॉमर्शियल बिंदु से कोई लेना देना नहीं है। इस चैनल पर प्रसारित होने वाले धार्मिक गीत-संगीत जिसे पसंद आते हैं वह लाइक, शेयर करते हुए सब्सक्राइब कर सकते हैं और कमेंट्स के माध्यम से अपनी सलाह भी दे सकते हैं। यह चैनल सनातनियों के लिए है, यह आय प्राप्त करने का साधन नहीं है।
तिवारी प्रोडक्शन के सीईओ और फाउंडर एस के तिवारी गीतों के एक-एक शब्दों पर विशेष ध्यान देकर अपने चैनल के माध्यम से प्रसारित करते हैं। तिवारी प्रोडक्शन अभी तक सनातन धर्म से जुड़ी कई अहम जानकारियों को प्रदान कर चुके हैं तथा अपने बेहतरीन रिसर्च द्वारा और शब्दों की बारीकी पर ध्यान देते हुए सनातन धर्म से जुड़े रोचक तथ्यों और जानकारियों को गीत के माध्यम से सभी सनातनियों तक पहुंचा चुके हैं और यह प्रक्रिया अनवरत जारी है।
तिवारी प्रोडक्शन के बैनर तले बने चारों वेदों के विवरण गीत का एक ऐसा धार्मिक और अनोखा गीत है जिसको जितना जानने की कोशिश करेंगे उतना ही ज्ञान के अथाह सागर में समाते जाएंगे। वेद ज्ञान की ऐसी सिद्धि है जहाँ पर यह ज्ञात होता है कि यह नश्वर संसार सनातन धर्म के अटूट स्तंभ पर टिका हुआ है। सनातन धर्म के अलावा कोई और दिखाई नहीं देता। सर्वत्र केवल सनातन धर्म ही दृष्टिगोचर होता है।
 इन्हीं सभी बातों को तिवारी प्रोडक्शन के एस के तिवारी अपने गीतों के माध्यम से सम्पूर्ण
सनातन धर्म में चार वेद होते हैं और चारों वेदों से संदर्भित विवरण गीतों को एस के तिवारी अपने भार्गव भक्ति म्यूजिक चैनल के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने जा रहे हैं। इनके इस कार्य के पीछे एक बड़ी सोच, विश्वास और सकारात्मक निर्णय करने की उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से दिखलाई दे रही है।
अभी तक भार्गव भक्ति चैनल जो जानकारियाँ और ज्ञान लोगों तक पहुंचा रहा है ऐसा अभी तक किसी ने  ना ही सोचा होगा और ना ही इस तरह विस्तृत तरीके से लोगों तक पहुंचाया होगा। सनातन धर्म से जुड़े प्रत्येक पहलु, पवित्र स्थल और तीर्थों से जुड़ी ज्ञानवर्धक जानकारियाँ इस चैनल पर उपलब्ध है। इस चैनल से अनेक भक्ति गीत रिलीज हो चुके हैं और आगे भी सनातन धर्म से जुड़ी जानकारियां और ज्ञान की धारा यूं ही अनवरत भार्गव भक्ति चैनल के माध्यम से लोगों तक पहुंचती रहेगी।

भरपूर बिजली से जगमगाता मध्यप्रदेश

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आम नागरिकों के जीवन में खुशहाली बढ़ाने और आर्थिक जीवन को समृद्ध बनाने के लिये ऊर्जा सुरक्षा देने और क्षमता बढ़ाने की नई रणनीति पर मध्यप्रदेश सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। विद्युत क्षेत्र के विकास और विस्तार के लिए  सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। प्रतिदिन गैर कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल रही है। जिससेअब मध्यप्रदेश  भी जगमगाता नजर आ रहा है।मध्यप्रदेश की विद्युत उपलब्ध क्षमता 21840 मेगावाट हो गई है। 29 दिसम्बर, 2023 को प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक 17586 मेगावाट शीर्ष मांग की पूर्ति की गई। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बचे महीनों में 1007 मेगावाट तथा 2024-25 के दौरान 5008 मेगावाट विद्युत उपलब्ध क्षमता बढ़ाने की रणनीति पर भी काम शुरू हो गया है।
विद्युत कंपनियों ने विद्युत व्यवस्था एवं विद्युत प्रणाली को मजबूत बनाने के लिये कई उल्लेखनीय काम किए हैं। इनमें 184 मेगावाट विद्युत उपलब्ध क्षमता में वृ‌द्धि, 12 नवीन अति उच्चदाब उपकेन्द्रों की स्थापना, 636 सर्किट किमी अति उच्चदाब लाईन का निर्माण, 23 नवीन 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्रों की स्थापना, 606 किमी 33 केव्ही एवं 884 किमी 11 केव्ही लाइनों का निर्माण एवं 2373 वितरण ट्रांसफार्मरों की स्थापना प्रमुख हैं। अप्रैल से दिसंबर, 2023 के बीच कुल 7335 करोड़ यूनिट विद्युत प्रदाय की गयी, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 545 करोड़ यूनिट यानी 8 प्रतिशत ज्यादा है।
उपभोक्ताओं को भरपूर लाभ
उपभोक्ताओं के हित में कई योजनाएँ शुरू की गई हैं। अटल गृह ज्योति योजना में प्रदेश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है। पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिये अधिकतम 100 रूपये का बिल दिया जा रहा है। अंतर की राशि सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। योजना में 100 वाट तक के संयोजित भार के 30 यूनिट तक की मासिक खपत वाली उपभोक्ता श्रेणी एल.व्ही. 1.1 के अनुसूचित जाति/जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले उपभोक्ताओं को प्रति माह 25 रूपये का बिल दिया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को योजना के लिये वर्ष 2022-23 में 8082 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। वर्ष 2023-24 के बजट में 4690 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। इस योजना से लगभग 103 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह लाभ मिल रहा है।
अटल कृषि ज्योति योजना में 10 हार्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रूपये प्रति हार्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्सपॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रुपये प्रति हार्सपॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से बिजली मिल रही है। साथ ही 10 हार्सपॉवर तक के मीटरयुक्त स्थाई कृषि पंप कनेक्शन एवं अस्थाई मीटर्ड एवं अनमीटर्ड कृषि पंप कनेक्शनों को भी मासिक नियत प्रभार एवं ऊर्जा प्रभार में रियायत दी गई है। इस योजना से लगभग 26 लाख कृषि उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। वितरण कंपनियों को वर्ष 2022-23 में 12995 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। वर्ष 2023-24 में 11520 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया गया है।
किसानों के हित में 1 हेक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्सपावर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को निःशुल्क बिजली दी जा रही है। इसकी प्रतिपूर्ति के लिये राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को वर्ष 2022-23 में 4997 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई एवं वर्ष 2023-24 में इसके लिये 5775 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया गया है। इससे लगभग 9.36 लाख कृषि उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है।
कृषक/कृषकों के समूहों स्थायी कृषि पंप कनेक्शन देने मांग को देखते हुए “मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना” लागू की गई है। कृषक/कृषकों के समूह के 3 एच.पी. या अधिक क्षमता के स्थायी पंप कनेक्शन के लिये वितरण कंपनी द्वारा 200 मीटर दूरी तक 11 के.व्ही. लाइन का विस्तार एवं वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किया जायेगा। अधोसंरचना विकास लागत की केवल 50 प्रतिशत राशि का वहन संबंधित कृषक/कृषकों के समूह करेंगे। यह योजना 2 वर्षों तक प्रभावशील रहेगी। प्रथम वर्ष में योजनांतर्गत 10,000 पंप कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस)
विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण विद्युत पूर्ति के उद्देश्य से परिणाम आधारित वितरण क्षेत्र योजना रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) लागू की गई है। योजना का उद्देश्य वितरण कंपनियों की समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करना तथा बिजली की प्रतियूनिट लागत तथा राजस्व के अंतर को समाप्त करना है।
योजना में केंद्र सरकार द्वारा प्रीपेड मीटर एवं सिस्टम मीटरिंग कार्य के लिये 15 प्रतिशत राशि तथा विद्युत् अधोसंरचना के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों के लिये 60 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में विद्युत वितरण कंपनियों को देने का प्रावधान है।
इस योजना को वर्ष 2025-26 तक पूरा किया जाना है। योजना में प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग एवं सिस्टम मीटरिंग वितरण हानियों में कमी के लिये प्रस्तावित कार्य एवं प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के कार्य शामिल है। राज्य सरकार ने लगभग 24,170 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को स्वीकृति दी है। लगभग 2.64 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित हो गये हैं एवं वितरण हानियों में कमी के लिए अधोसंरचना निर्माण के लिये लगभग रुपये 7794 करोड़ के कार्यादेश जारी हो गये हैं। इसमें से लगभग रूपये 875 करोड़ के कार्य किये जा चुके हैं।
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश-2023 के अंतर्गत भविष्य की विद्युत मांग की आपूर्ति करने के लिये पारेषण प्रणाली के विस्तार के लिये टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक निविदाओं के माध्यम से अति उच्चदाब उपकेन्द्रों एवं उससे संबंधित लाइनों के निर्माण कार्य को शामिल किया गया है। टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धा बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से राज्य में 1 नग 400 के.व्ही., 7 नग 220 के.व्ही. तथा 27 नग 132 के.व्ही. उपकेन्द्रों तथा संबद्ध पारेषण लाइनों का निर्माण होगा। अब तक 10 उपकेन्द्रों तथा संबंद्ध पारेषण लाइनों के कार्य पूरे किये जा चुके है।
उपभोक्ता सेवाओं में सुधार 
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिये केन्द्रीयकृत कॉल सेंटरों (1912) को क्रियाशील कर उनकी क्षमता बढ़ाई गई है। शिकायतों के निराकरण के बाद उपभोक्ता संतुष्टि के लिये फीडबैक व्यवस्था का भी प्रावधान है। असंतुष्ट उपभोक्ताओं से मैदानी अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत सम्पर्क कर, उनकी समस्या का निराकरण किया जाता है। नये कनेक्शन, संयोजित भार में वृ‌द्धि/कमी, टैरिफ श्रेणी में परिवर्तन, नाम परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं ऑनलाइन दी जा रही है। उच्च एवं निम्न दाब के नये कनेक्शन के लिये आवेदन नाम/भार और उपयोग परिवर्तन, प्रोफाईल में परिवर्तन, बिल भुगतान एवं शिकायत, सेल्फ फोटो रीडिंग, मीटर स्थान परिवर्तन एवं स्थाई विच्छेदन के लिये कंपनियों द्वारा स्मार्ट बिजली एप उपयोग में ला रहे हैं।
उद्योगों के लिए छूट
ग्रामीण फीडरों के माध्यम से आपूर्ति प्राप्त करने वाले उच्चदाब उपभोक्ता के नियत प्रभार में 5 प्रतिशत की छूट और न्यूनतम खपत में 20 प्रतिशत छूट उपलब्ध है। ओपन एक्सेस खपत में कमी कर वितरण कंपनी से बिजली क्रय करने पर बढ़ी हुई खपत पर 1 रुपये प्रति यूनिट की छूट और कैप्टिव प्लांट से खपत में कमी कर वितरण कंपनी से बिजली क्रय करने पर बढ़ी हुई खपत पर 2 रुपये प्रति यूनिट की छूट मिलेगी।(विभूति फीचर्स)

गौ तस्करी में शामिल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में : आमानाका क्षेत्र में पकड़ी गई थी गौ वंशों से भरी ट्रेलर

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आमानाका क्षेत्र में पिछले दिनों गौ तस्करी की खबर सामने आई थी । दरअसल, आमानाका क्षेत्र में गौ रक्षकों ने गौ वंशों से भरी एक ट्रेलर पकड़ी थी । ट्रेलर में गौ वंशों को ठूस ठूसकर भरा गया था, जिसके चलते 11 गौ वंशों की जान भी चली गई थी । इस मामले पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई देखने को मिली है । पुलिस की टीम ने घटना में शामिल दो अंतर्राजीय आरोपी के साथ कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है । आरोपियों के विरूद्ध थाना आमानाका में अपराध क्रमांक 83/2024 धारा 283, 420, 467, 468, 471 भा.द.वि. एवं पशु परिवाहन नियम की धारा 47 (ए), 54(1), 54(2), 54(3) तथा पषुओं के प्रति क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 के धारा 11 तथा छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिक्षण अधिनियम 2004 कि धारा 4, 6, 7, 9, 10, 11 का अपराध पंजीबद्ध किया जा चुका है ।
आरोपियों के पता तलाश के क्रम में द्वारा कृषक पशुओं के मालिकों की जानकारी एकत्र कर पशु मालिकों से पूछताछ करने पर जानकारी प्राप्त हुई की थाना आरंग क्षेत्र के कुछ पशु मालिकों द्वारा पशुओं को मंदिर हसौद ग्राम कुकरा निवासी खेमचंद साहू को बिक्री किया गया है। जिस पर टीम के सदस्यों द्वारा खेमचंद साहू की पतासाजी कर पकड़कर कड़ाई से पूछताछ करने पर उसके द्वारा धमतरी सिहावा ग्राम पाईभाठ निवासी ओंकार कुर्रे को 24 पशु बिक्री करना बताया गया। जिस पर टीम के सदस्यों को धमतरी सिहावा रवाना किया गया। टीम के सदस्यों द्वारा धमतरी सिहावा पहुंचकर ओंकर कुर्रे की पतासाजी कर पकड़ा गया।
प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर ओंकर कुर्रे से कड़ाई से पूछताछ करने पर उसके द्वारा बताया गया कि वह स्थानिय स्तर पर पशुओ को खरीद कर महासमुंद के भटूंण्डा बाजार जिला-नूआपाड़ा उड़ीसा में हैदाराबाद निवासी ईब्राहिम कुरैशी एवं उसके साथियों को बेचना बताया। जिस पर तकनिकी विश्लेषण के माध्यम से ईब्राहिम को लोकेट करने के प्रयास किये जा रहे थे इसी दौरान टीम के सदस्यों को ईब्राहिम को उड़ीसा के नवरंगपुर में लोकेट किया गया। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष टीम गठन कर टीम के सदस्यों को नवरंगपुर उड़ीसा हेतु रवाना किया गया। टीम के सदस्यों द्वारा नवरंगपुर उड़ीसा पहुंच कर ईब्राहिम कुरैशी की पतासाजी करते हुए ईब्राहिम कुरैशी एवं उसके अन्य साथी शाहनवाज को पकड़ा गया। उनसे पूछताछ तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अन्य आरोपियों सानू कुरैशी एवं आमीर रजा को भी पकड़ा गया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर ईब्राहिम कुरैशी के द्वारा खमेचंद साहू, ओंकर कुर्रे, शहबाज, सानू कुरैशी एवं आमीर रजा के साथ मिलकर उक्त घटना को अंजाम देना बताया गया। जिस पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त ट्रक वाहन एवं पायलेटिंग में प्रयुक्त चारपहिया क्रेटा वाहन सी जी/04/एम पी/6846 को जप्त करने के साथ-साथ ट्रक में सवार 83 पशुओं में से 72 जिवित पाई गई जिन्हें सुरक्षार्थ जरवाय, कबीरनगर स्थित गौशाला में रखा गया है एवं 11 मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया जाकर दफनाया गया है।
गिरफ्तार आरोपी
01. सानू कुरैशी पिता सलीम निवासी रायपुर।
02. आमीर रजा पिता शेख अमीन निवासी रायपुर।
03. ईब्राहिम कुरैशी पिता मुख्तार निवासी हैदाराबाद।
04. शाहनवाज पिता शफीक खान निवासी उत्तर प्रदेश।
05. ओंकार कुर्रे पिता राम स्वरूप कुर्रे निवासी सिहावा धमतरी।
06. खेमचंद कुर्रे पिता खिलाव निवासी मंदिर हसौद रायपुर।