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गोमाता की रक्षा के लिए जान दे देंगे -सीएम योगी आदित्यनाथ

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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान सामने आया है. सीएम योगी ने गोकशी करने वालों को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि यूपी में गोकशी करने की सोची तो जहन्नुम के द्वार खोल देंगे. इतना ही नहीं सीएम योगी ने ये भी कहा कि गोमाता की रक्षा के लिए जान दे देंगे.

ज्योतिष पारिवारिक, व्यक्तिगत बाधाओं के निवारणार्थ अचूक सफल प्रयोग

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(ब्रह्मर्षि वैद्य पंडित नारायण शर्मा कौशिक- विनायक फीचर्स)

काली हल्दी कृष्ण हरिद्रा- काली हल्दी सेवन करने योग्य नहीं है, लेकिन बहुआयामी उपयोगार्थ प्रयुक्त होती है। अनेक प्रकार के दुष्प्रभावों का शमन करने में इसका उपयोग किया जाता है, जो कि जीवन में व्यावहारिक होता है।
प्रयोग नं. 1 : अदृश्य बाधा नाशक तांत्रिक प्रयोग :-

आप काली हल्दी के 7, 9 या 11 दाने (टुकड़े) बनायें। उन्हें धागे में पिरोकर धूप, गुग्गुल या लोबान में धूप करके पहन लेवें। जो व्यक्ति ऐसी माला को गले या भुजा में धारण करता है, वह ग्रह पीड़ा, बाहरी दोष, अदृश्य छाया, टोने-टोटके और नजर आदि से बच सकता है। यानी उक्त बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह कार्य रवि पुष्य, गुरु पुष्य या अन्य शुभ समय में करें।

प्रयोग नं.- 2 : धनदायक- धन अभिवृद्धि तांत्रिक प्रयोग :-

गुरु पुष्य योग में काली हल्दी को सिन्दूर और धूप देकर लाल वस्त्र में लपेटकर एक-दो मुद्राओं सहित बक्से में रख देवें। इसके प्रभाव से आय के साधन बढ़ेंगे। काम, धंधे की अभिवृद्धि तथा पुराने रुके हुए धन की प्राप्ति का योग बनता है।
प्रयोग नं. 3 : सौन्दर्य साधना प्रयोग :-

काली हल्दी का चूर्ण दूध में छानकर चेहरे और शरीर पर लेप करें तो सौंदर्य में वृद्धि होती है। दूध की प्राप्ति न हो तो पानी और मीठा तेल भी प्रयोग में लिया जा सकता है। यह प्रयोग एक माह तक करें।
प्रयोग नं. 4 : मानसिक परेशानी एवं उन्माद निवारणार्थ प्रयोग :-

किसी भी शुभ दिवस पर पंसारी से काली हल्दी लेकर आवें, उसे शुद्ध जल में भिगोकर शुद्ध गीले कपड़े से पोंछकर कटोरी में रखें और लोबान या धूप की धूनी देकर शुद्ध कर लें फिर कपड़े में लपेटकर रख दें। जरूरत पडऩे पर इसका एक माशा चूर्ण ताजे पानी के साथ सेवन करायें तथा एक छोटा-सा टुकड़ा काटकर उसे धागे में पिरोकर रोगी के गले या भुजा में बांध दें। इससे उन्माद, मिर्गी, पागलपन, भ्रांति, अनिद्रा जैसे मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।
प्रयोग नं. 5 : वशीकरण प्रयोग-

चन्दन की भांति ही काली हल्दी का टीका भी लगाया जा सकता है। यह टीका सम्मोहनकारी होता है। टीके के बीच में अपनी कनिष्ठा अंगुली का रक्त लगाने से अधिक प्रभावशाली बनता है।

प्रयोग नं. 6 : मंत्र साधना प्रयोग तंत्र साधना नियमानुसार करें।
मंत्र : ऊँ श्रीं हीं क्लीं श्रीं लक्ष्म्यै नम:॥ श्री गणेशाय नम:॥ ऊँ हीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मीं श्री पद्यावत्यै नम: नम:॥ महालक्ष्मी-महाकाली-महादेवी महेश्वरी। महामूर्ति महामाया महाधर्मेश्वरी अर्हं। मुक्तमाला धरा मया महामेधा महोदरी॥ महाजन्ती जगत्माता महामुद्योतिनी अर्हं॥

विधि- महाशक्ति भगवती महालक्ष्मी के ये षोडष नाम युक्त स्त्रोत का जो साधक नित्य पाठ करता है, उस पर लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहकर भण्डार भरपूर रखती है। 1108 दिन तक यह पूजन करें तो विशेष कृपा भी बन जाती है, जो चमत्कारिक होती है।

प्रयोग नं. 7 : श्वेतार्क गणपति के अद्भुत प्रयोग :-

श्वेतार्क गणपति का तांत्रिक प्रयोग मूल श्वेतार्क गणपति प्रतिमा से किया जाता है। शुद्धता से श्वेतार्क गणपति की स्थापना करें। फिर पूजा हेतु श्वेतार्क गणपति को शुद्ध जल से स्नान करावें, धोएं और लाल कपड़े पर स्थापित करें। पूजा में लाल चन्दन, अक्षत, लाल पुष्प, सिन्दूर का प्रयोग किया जाता है। धूप-दीप देकर नैवेद्य के साथ कोई सिक्का अर्पित करें फिर गणेशजी का निम्नलिखित मंत्रों में से किसी भी एक मंत्र द्वारा जप करके सिद्धि करें।

मंत्र :- 1. ऊँ गं गणपतये नम:, 2. ऊँ ग्लैं गणपतये नम:, 3. श्री गणेशाय नम:, 4. ऊँ भालचन्द्राय नम:, 5. ऊँ एकदन्ताय नम:, 6. ऊँ लम्बोदराय नम:।

उपयोग एवं लाभ- घर की दरिद्रता का विनाश होता है। मांगलिक कार्य की बाधा हो तो सफलता मिलती है। जीवन में उन्नति होती है। ग्रह बाधा एवं शत्रुता का शमन होता है। सौभाग्य प्राप्त होता है। विशेष लाभ हेतु श्री गणेशोपासना करके यज्ञादि करना चाहिए। (विनायक फीचर्स)

सही मायने में बिजनेसमैन ही देश का भाग्य विधाता होता है

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अगर कोई नौकरी हमेशा ‘नौकर’ बने रहने के लिए कराता है तो वह जीवन भर नौकरी ही करेगा और जो नौकरी बिजनेसमेन बनने के लिए करता है वह बिजनेसमेन बन कर दूसरे को नौकरी देगाl अतः मालिक बनो, नौकर नहींl
नौकरी चाहे सरकारी हो या प्राइवेट ‘नौकर तो नौकर’ ही कहलाएगा l

सुनने में आता हैं कि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है l मेरा मानना है कि बेरोजगारी नहीं देश में ‘नौकर’ बनने की होड़ मची हुई हैl यदि बिजनेसमैन बनने की होड़ मच जाए तो समझो बेरोजगारी ख़त्मl
Comfort Zone से निकल कर Hard Zone में प्रवेश करोl जीवन में रिस्क लेना सीखोl नौकर (Employee) से मालिक (employer) बनने की सोचो l

धीरूभाई अम्बानी ने पेट्रोल पंप में नौकरी करते समय बिजनेसमैन बनने का सपना देखा और उन्होंने बिजनेस का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दियाl ऐसे बहुत सारे उदाहरण आपके आसपास मिल जाएंगे l

पूरी दुनिया में मारवाड़ी समुदाय ने व्यापारी के रूप में एक अच्छी साख बनाई हैl
मारवाड़ी व्यापारी ने प्रदेश में जाकर कैसे अपने व्यापार की शुरुआत की:- नाम मात्र की पूंजी से या उधार में माल लेकर उसे बेचा तथा अपना उचित मुनाफा रख कर अपने महाजन को उधारी चुका दीl मारवाड़ी व्यापारी ने माल बेच कर जो मुनाफा कमाया उस मुनाफे में से अपने घर के आवश्यक ख़र्चे को रख कर बाकी बचे मुनाफे को अपने व्यपार में लगा दिया इस तरह से अपनी मेहनत, इमानदारी एवं सूझबूझ से एक बड़ा व्यापारी बन गया l आज की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियां नौकर पैदा कर रही हैंl l

सही मायने में देश को बिजनेसमैन ही चलाता है l बिजनेसमैन न हो तो मंत्रियों के भत्ते और सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाहें कहां से आएंगी l सबसे ज्यादा टैक्स व्यापारी देता है जिससे देश चलता है l

आपदा विपदा के समय एक बिजनेसमैन समाज एवं देश के लिए दिल खोल कर दान देता है और जरूरतमंद लोगों की सहायता करता है l
अतः सही मायने में बिजनेसमैन ही देश का भाग्य विधाता होता हैl
पूरन चंद्र शर्मा (पत्रकार)
मोबाइल : 98320 66383

सिनेफलक पर उभरती अदाकारा याशिका बसेरा

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धारावाहिक ‘बंधन कच्चे धागों का’ में काम करने के बाद अभिनेत्री याशिका बसेरा इन दिनों बॉलीवुड में चर्चा का विषय बनी हुई है और खास बात यह है कि सिनेफलक पर उभरती अदाकारा याशिका बसेरा अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के बेटे मिमोह चक्रवर्ती के आगामी फिल्म ‘मिशन मांझी’ में सेकंड लीड किरदार के लिए चुन ली गई हैं। इसके अलावा अभिनेत्री, मॉडल और इंफ्लूएंसर याशिका बसेरा की एक फिल्म और दो वेबसीरिज जल्द ही आने वाली है। सबसे पहले याशिका ने सहारा वन के शो ‘जय जय बजरंगबली’ में काम किया है।
याशिका ने धारावाहिक ‘बातें कुछ अनकही सी’ में मुख्य भूमिका निभाई है। वह गाँव के बाहुबली और बड़े परिवार की बेटी है जिसको किसी दूसरे जाति के लड़के से प्रेम हो जाता है। इस धारावाहिक में अपने प्रेम को पाने के जद्दोजहद की कहानी है। धारावाहिक ‘बंधन कच्चे धागों का’ में भी इन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है, यह भाई-बहन के निश्छल प्रेम की कहानी है। याशिका ने म्यूजिक वीडियो ‘नवाबे इश्क’ में काम किया है जो यूट्यूब पर उपलब्ध है। वह शब्बीर अहमद के तीन म्यूजिक वीडियो की भी शूटिंग कर चुकी हैं जो रिलीज होने वाली है।
इन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्म ‘एन थोरी’ में आइटम सॉन्ग किया है। बीबा, बावरी, पोलो टीशर्ट जैसे कई ब्रांड्स के ऐड फिल्मों में भी वह काम कर चुकी हैं। याशिका बसेरा को म्यूजिक सुनने का बेहद शौक है साथ ही ट्रेवलिंग और कुकिंग इन्हें पसंद है। याशिका निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्मों में का हिस्सा बनना चाहती है।  सलमान खान की ‘हम साथ साथ हैं’ जैसी फिल्में इन्हें पसन्द हैं। राजस्थान की मूल निवासी अभिनेत्री याशिका बसेरा काफी समय से मायानगरी मुंबई में काम कर रही हैं।
बचपन से इन्हें अभिनय का शौक था और यही शौक इन्हें मायानगरी की ओर ले आया। याशिका का कहना है कि आप कड़ी मेहनत करते रहो और खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम बना कर रहो। जहाँ आपको कुछ सीखने को मिले उसका अनुसरण करो क्योंकि आपको जितनी जानकारी और अनुभव होगा वह आपको आगे बढ़ने में सहायक सिद्ध होगा।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

पानी नहीं तो वोट नहीं’ – महाराष्ट्र के सांगली गांव में पानी बना चुनावी मुद्दा

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महाराष्ट्र में पानी की कमी के चलते सांगली और सतारा जिलों में लोगों की हालात बदतर होती जा रही हैं. केवल 15 दिनों में गांव में केवल 1 पानी का टैंकर आ रहा है. इसी की वजह से अब गांव के लोगों ने ऐलान किया कि अगर गांव में पानी नहीं होगा तो वोट भी नहीं दिया जाएगा. सांगली गांव के लोग पानी की किल्लत से इतना ज्यादा परेशान है कि गांव में पानी की चोरियां तक होने लगी है. इसी के चलते कुछ दिन पहले सांगली और सतारा जिलों में नहरों के किनारे धारा 144 लगा दी गई है. जिससे की पानी की चोरियो को रोका जा सके.

पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली और सतारा जिलों के गांव में जल संकट इतना बढ़ गया है कि 22 गांवों में 15 दिनों के अंदर केवल एक बार टैंकर से पानी लाया जा रहा है. पानी की कमी के कारण किसी भी प्रकार से खेती नहीं की जा रही यहां बच्चों के लिए स्कूल जाना मुश्किल हो गया है क्योंकि स्कूल में पानी उपलब्ध नहीं है.

नेता वोट के लिए आते हैं, चुनाव को जीतने के बाद यहां भटकते भी नहीं

स्थानीय निवासी ने बताया, ‘हमें 15 दिनों के बाद पानी मिल रहा है. हम खाट के नीचे बर्तन रखकर नहाते हैं और जो पानी बचता है उससे कपड़े धोते हैं. हमें प्रतिदिन 20 रुपये देकर पीने का पानी मिलता है. स्थिति यह है कि जब से हमारी शादी हुई है और हम इस गांव में आए हैं, तब से नेता वोट के लिए आते हैं, लेकिन चुनाव के बाद वे यहां भटकते नहीं हैं.’

टीबीओ टेक लिमिटेड का आईपीओ 8 मई 2024 को खुलेगा 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : टीबीओ टेक लिमिटेड  बुधवार, 08 मई, 2024 को इक्विटी शेयरों की प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश के लिए बोलियां खोलेगा। यह ऑफर शुक्रवार 10 मई, 2024 को बंद हो जाएगा। एंकर निवेशक बोली की तारीख मंगलवार 07 मई, 2024 को होगी।
ऑफर का प्राइस बैंड ₹ 875 से ₹ ​​920 प्रति इक्विटी शेयर तय किया गया है। न्यूनतम 16 इक्विटी शेयरों के लिए और उसके बाद 16 इक्विटी शेयरों के गुणकों में (“मूल्य बैंड”) बोली लगाई जा सकती है।
इस ऑफर में कुल मिलाकर ₹ 4,000.00 मिलियन [₹ 400.00 करोड़] (“ताज़ा अंक”) के इक्विटी शेयरों का ताज़ा इश्यू और 12,508,797 इक्विटी शेयरों तक के कुछ शेयरधारकों द्वारा बिक्री का प्रस्ताव (“बिक्री का प्रस्ताव”, और साथ में) शामिल है।

गोशालाओं के निर्माण से संरक्षित हो सकेंगे छुट्टा गोवंश

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अमरोहा। दूसरी किस्त के अभाव में तीन गोशालाओं का निर्माण अटक गया है। करीब छह माह पहले तीनों गोशालाओं के निर्माण का काम शुरू किया गया था। यूपी कंस्ट्रक्शन एंड लेबर डेवलपमेंट फेडरेशन लिमिटेड (यूपीसीएलडीएफ) द्वारा तीनों गोशालाओं का निर्माण किया जा रहा है।

गोसंरक्षण अभियान के अंतर्गत जिले में तीन गोशालाओं का निर्माण कराया रहा है। बीते साल सितंबर माह में रहमापुर माफी, मउमयचक एवं चंदनपुर कोटा गोशाला के निर्माण की शुरुआत की गई थी। प्रत्येक गोशाला के निर्माण के लिए एक करोड़ साठ लाख रुपये की राशि खर्च की जानी थी। शासन द्वारा पहली किस्त के रूप में तीनों गोशालाओं के निर्माण के लिए 80-80 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की गई थी। जोकि कार्यदायी संस्था द्वारा खर्च कर दी गई है। लेकिन इसके बाद शासन द्वारा दूसरी किस्त कार्यदायी संस्था को जारी नहीं किए जाने से काम अधर में लटक गया है। कार्यदायी संस्था द्वारा उपभोग प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद भी किस्त जारी नहीं की गई है।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. खुशीराम ने बताया कि गोशालाओं के निर्माण के लिए दूसरी किस्त के लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। जल्द ही दूसरी किस्त प्राप्त होने के बाद गोशालाओं का रुका हुआ काम शुरू हो जाएगा।

गोशालाओं के निर्माण से संरक्षित हो सकेंगे छुट्टा गोवंश

तीनों गोशालाओं के निर्माण से छुट्टा गोवंशों के संरक्षण में राहत मिल सकेगी। जिले में फिलहाल लगभग 19 गोशालाओं में लगभग पांच हजार से अधिक गोवंशों को संरक्षित किया गया है। तीन गोशालाओं के निर्माण का काम पूरा होने के बाद गोवंशों के सरंक्षित करने में राहत मिल सकेगी। प्रत्येक गोशाला में करीब 250 से 300 गोवंश संरक्षित हो सकेंगे।

इश्कबाज, नागिन टीशो के डीओपी राजू गौली को मंदाकिनी ने दादा साहब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवॉर्ड से किया सम्मानित 

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मुंबई। बड़ा पर्दा हो या छोटा पर्दा, पर्दे पर दिखने वाले कलाकारों को पहचान तो मिल जाती है लेकिन कैमरे के पीछे काम करने वालों को वह शोहरत नहीं मिल पाती जिसके वे हकदार होते हैं। निर्देशक के विजन को बेहतरीन रूप देने वाले सिनेमैटोग्राफर राजू गौली हैं, जिनके नाम सबसे ज्यादा भारतीय टीवी शो के डीओपी होने का रिकॉर्ड है। जी हां, जमाई राजा, नागिन, इश्कबाज, कुंडली भाग्य जैसे कई सुपरहिट शो के डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी रह चुके राजू गौली शॉट को और खूबसूरत और प्रभावी बनाने के लिए खूब मेहनत करते हैं। वह लगातार कुछ नया करने की कोशिश करते हैं और उनकी यही खूबी उन्हें दूसरों से अलग करती है। दो दशक से भी ज्यादा समय से टीवी इंडस्ट्री में काम कर रहे राजू के नाम 50 से ज्यादा सफल टीवी शो और कई अवॉर्ड दर्ज हैं। हाल ही में उन्हें मुंबई के सहारा स्टार होटल में आयोजित एक भव्य समारोह में दिग्गज अभिनेत्री मंदाकिनी द्वारा दादा साहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवॉर्ड्स 2024 से सम्मानित किया गया, जो उनके लिए बेहद गर्व का क्षण था।
मुंबई के छोटे से शहर से ताल्लुक रखने वाले राजू गौली सिनेमैटोग्राफर के तौर पर अपने सपनों को पूरा करने मुंबई आए थे, यहां काफी संघर्ष के बाद उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल किया। उन्होंने वहां जाकर अमेरिका और कनाडा के प्रोडक्शन हाउस के लिए शूटिंग भी की।
राजू गौली की खासियत यह है कि वह हर दिन सोचते हैं कि आज की शूटिंग में उन्हें क्या नया करना है, क्या बेहतर कर सकते हैं। वह अपने निर्देशक और उनकी टीम के साथ सीन और शॉट्स को लेकर काफी चर्चा करते हैं। वह हमेशा एक सामान्य सीन में भी कुछ एक्स्ट्रा जोड़ने की कोशिश करते हैं। उनका मानना ​​है कि प्लानिंग बहुत जरूरी है क्योंकि यह प्लानिंग और सोच बहुत काम आती है और यह स्क्रीन पर नजर आती है।
वह खुद को बहुत खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें दिन-रात अपने पैशन को पूरा करने का मौका मिलता है।

तुलसीदास की दोहावली में लोकजीवन के नीति तत्वों का निरुपण

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डॉ. परमानंद तिवारी-
भारतीय संस्कृति अनेकानेक झंझावातों से गुजरती हुई इस अवस्था को प्राप्त हुई है। कई लोगों ने ‘स्वान्त: सुखाय’ की संकल्पना पर आधारित रघुनाथ गाथा को लोक आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक संरचना का तात्कालिक संविधान कहा है। तुलसी की रचनाओं का आधार लोक कल्याण ही था। इसमें सभी वर्गों यहां तक कि सम्पूर्ण संसार को ही ‘सियराम मय सब जग जानी’ की विनत भावना से काव्य को दिशा दी गई है। तुलसी सम्पूर्ण काव्य राममय है। यह राम की भक्ति उनके कथ्य में शुचिता सदाशयता और समर्पण की भावना भर देती है।
हमारी संस्कृति में सनातन मूल्यों के साथ राम का चरित्र सदैव मंगलकारी माना गया है। रामकथा को मानवीय मूल्यों से सम्पर्क कर तुलसी सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना के संवाहक बन गए हैं। तुलसीदास की लोकप्रियता का कारण यह है कि उन्होंने अपनी कविता में अपने देखे हुए जीवन का बहुत गहरा चित्रण किया है। उन्होंने राम के व्यक्तित्व को युगानुरूप वर्णित किया। उन्होंने राम की संघर्ष कथा को अपने युग के अनुरूप बनाया, जिसमें तत्कालीन समाज का स्वरूप उसके आलोक में सहज ही समाहित हो गया। रामचरित मानस में तुलसी ने अपने पूर्व के कवियों की भांति राम को नहीं देखा, बल्कि राम के चरित्र के केन्द्रीय तत्वों को बिना किसी हस्तक्षेप के नये स्वरूप में प्रस्तुत किया।
उनकी सभी रचनाओं का केन्द्रीय भाव रामभक्ति, राम का चरित्र, उनकी अलौकिक सत्ता, उनके चमत्कार ‘नाना पुराण निगमागम सम्मतं’से मेल खाते हैं। तुलसी के राम जिस लोक में प्रतिष्ठित किए गए हैं। वह 15वीं, 16वीं सदी का हमारा भारत देश रहा है, जो विभिन्न प्रकार की विषमताओं से ग्रस्त था। इस विषमताग्रस्त समाज को कलियुग के माध्यम से चित्रित किया गया है, जहां समाज में अनेकानेक विद्रूपताएं विद्यमान थी, दैहिक, दैविक, भौतिक तीन तापों दु:खों के साथ गरीबी, भुखमरी, अकाल, महामारी, बेकारी आदि का वर्णन है। समाज में कपट फरेब अन्यायी राजा, दुर्जन, सज्जन, आडम्बरी साधु और अनय अनीति सब कुछ दिखायी देते है। तमाम प्राकृतिक संरचनाएं नद निर्झर, सरिता, पर्वत, कंदरायें, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे जैव विविधता का सुन्दर स्वरूप भी काव्य में दिखाई देता है।
राम बाललीला राज दरबार वैभव वनवास प्रसंग कोल किरात वनजीवन से परिचय और सबके प्रति अगाध प्रेम अनेक प्रसंग जिसमें कई अन्य स्थलों में विविध पात्रों का यथास्थान वर्णन है, जिससे लोगों को प्रेरणा, शिक्षा तथा जीवन की दिशा प्राप्त होती है।
तुलसीदासजी की रचना संसार का हर मोती अपने स्वरूप और उपादेयता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, यहां पर उनके काव्य दोहावली में लोक जीवन के साथ नीति तत्वों को तलाशना और उसकी प्रासंगिकता को समय के बदलाव के साथ परखना है। आज से लगभग 500 वर्ष पुरानी रचना में कितनी कालजयी शक्ति है कि उसके भाव उसकी अर्थवत्ता काल के प्रवाह के साथ भी न तो कहीं धूमिल हुई और न उसके संदर्भों में कोई बदलाव आया। समाज में प्रचलित विभिन्न संदर्भों में दोहावली के दोहों का उल्लेख होना उसकी लोक दृष्टि का बोधक है। संग महिमा को किस प्रकार रेखांकित किया गया है। तुलसी भलो सुसंग से पोच कुसंगति सोइ। नाउ किन्नरी तीर असि लोह विलोकहु लोइ। अच्छी संगति से मनुष्य अच्छा और बुरी संगति से बुरा होता है। देखिये जो लोहा नाव में लगने से पार उतारता है। सितार में लगने से मधुर संगीत सुनाकर सुख देने वाला होता है, वही लोहा तलवार और तीर में लगने से जीवों के लिए प्राणघातक हो जाता है। इसी तरह बड़ों की संगति से मनुष्य (सम्मान्य) बड़ा  और छोटों की संगति से नाम छोटा हो जाता है। मनुष्य के जीवन में विवेक की बहुत आवश्यकता है, क्योंकि विधाता में ‘जड़ चेतन गुण दोष मय विश्व कीन्ह करतार।’
संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि वारि विकार।
ईश्वर ने इस संसार में जड़ चेतन और गुण दोष बनाए हैं॥
परन्तु संत रूपी हंस दूध में सम्पृक्त जल को त्यागकर मात्र गुणरूपी दूध को ही ग्रहण करते हैं। संसार में सभी प्राणियों को मिलने वाले लाभ-हानि का प्रयोजन भी उसके भाग्य पर निर्भर करता है जैसे बादल तो बरसकर समस्त संसार को प्रसन्न करता है, जिससे सबके ताप और दु:ख दूर होते हैं, लेकिन इसके बावजूद जवासा का पौधा सूख जाता है तो बादल का कोई दोष नहीं है।
बरसि विस्व हरषित करत हरत ताप अघ प्यास।
तुलसी दोष न जलद को जल जरै जवास॥
तुलसीदास जी ने जीवन को बहुत समीप से समझा और जिया है। उन्होंने कहा है कि मित्रता तो सच्ची वही है जो विपत्ति में काम आये- कुदिन हितू सो हित सुदिन हित अनहित किन होई। ससि छवि हर रवि सदन तऊ, मित्र कहत सब कोई॥
मनुष्य सामाजिक प्राणी है। उसका सम्पूर्ण जीवन व्यवहार समाज में ही संचालित होता है। तुलसी जीवन का कल्याण चाहते हैं, इसीलिए वह लौकिक और पारलौकिक दोनों दृष्टियों से कल्याण की कामना करते हैं। उनके दोहावली में मानस की इस घोषणा की भांति- कीरति मनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब करतित होई। का हर पल ध्यान रखते हैं। ऐसा कोई पक्ष नहीं है, जिसका लोक पक्ष समाज के लिए हितकारी न हो। ऐसे कई प्रसंग हैं, जिसमें तुलसी लोक को कभी भी नहीं भूलते। यह उदाहरण अत्यन्त रोचक है। जिसका अर्थ कपट अन्तत: खुल ही जाता है। चरन चोंच लोचन रंगौ चली मराली चाल। छीर नीर विवरन समय बक उघरत तेंहि काल॥ बगुला चाहे हंस की तरह भी चलने लगे परन्तु जिस समय दूध और जल को अलग करने का अवसर आता है उसकी पोल खुल ही जाती है।
जिस कलियुग का वर्णन तुलसी ने अनेक विसंगतियों से युक्त बताया है। उस युग अर्थात वर्तमान संदर्भ में कपट की प्रधानता देखने को मिलती है। ‘हृदय कपट पर वेष धरि बचन कहहिं गढि़ छोलि। अबके लोग मयूर ज्यों क्योंकि लिए दिल खोलि।
हर मनुष्य के जीवन में कई ऐसी चीजें होती हैं, जिन पर अपवाद स्वरूप सत्संग का प्रभाव भी नहीं पड़ता। यह स्वभाव प्रधानता का पक्ष है। नीच निचाई नहि तजै सज्जन हूं के संग। तुलसी चन्दन विटप वसि विष नहीं तजत भुजंग। इसी तरह कहा गया है कि सज्जन अपनी सज्जनता एवं दुष्ट’ दुष्टïता का त्याग नहीं कर पाते। भलो भलाईहिं पै लहइ, लहइ निचाइहिं नीचु। सुधा सराहिअ अमरता गरल सराहिअ मीचु॥’
इस संसार में समय जैसी पूंजी नहीं है और अवसर जैसा धन खो जाने पर फिर पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं बचता। यह लोक जीवन में नीति का ऐसा पक्ष है, जो सर्वत्र हमारी लोकोक्तियों तक में निहित है। यथा ‘अवसर कौड़ी जो चुकै बहुरि दिए का लाख। दुइजन चंदा देखिये उदौ कहा भरि पाख॥
दोहावली में जीवन का ऐसा कोई भाग नहीं है जो अछूता है। कवि ने अपनी लेखनी विविध पक्षों पर चलाई है। यह संसार स्वार्थ की खदान है। यहां अपने-अपने हित के लिए सभी जागरूक हैं संसार में हित करने वालों की संख्या कम है। तुलसी जग जीवन अहित कतहुं कोउ हित जानि। शोषक भानु कृसानु महिं पवन एक धन दानि॥’ आशय यह कि जगत में जीवों का अहित करने वाले बहुत हैं किन्तु हित करने वाले बिरले ही होते हैं। सूर्य अग्नि जल पृथ्वी पवन सभी जल को सुखाने वाले हैं। देने वाला तो एक बादल है।
संसार में मनुष्यों को आचरण और स्वभाव के अनुसार सज्जन और दुर्जन दो श्रेणियों में रखा गया है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि जिन कार्यों को सज्जन लोग करते हैं, वह उनके जीवन का अपरिहार्य अंग है। वहीं ऐसे कार्य दुर्जनों के लिए त्याज्य हैं। पुण्य प्रीति प्रति प्राप्तिउ परमारथ पथ पांच। लहहिं सुजन परिंहरहिं खल सुनहुं सिखावन सांच॥ दोहे में यह बताया गया है कि पुण्य प्रेम प्रतिष्ठा प्राप्ति (लौकिक लाभ) और परमार्थ का पथ इन पांचों को सज्जन ग्रहण करते हैं और दुष्टï त्याग देते हैं इस सही शिक्षा को सुनिए। जीवन का हर मोड़ सीधा मंजिल की ओर नहीं जाता। कहीं गतिरोध तो कहीं टकराव स्वाभाविक है और मनुष्य परिस्थितियों के अनुसार अपना निर्वाह करता है। कई बार समाज में अनायास ही लोग मित्र, शत्रु बन जाते हैं। जिन्हें लोक दृष्टि से तीन स्वरूपों में रखा गया है।
उत्तम मध्यम नीच गति पाहन सिकता पानि।
प्रीति परीक्षा तिहुन की बैर वितिक्र जानि।
समाज में पाये जाने वाले पुरुषों के प्रेम और बैर की तीन स्थितियां देखी गई हैं, जिनमें उत्तम, मध्यम, नीच की गति क्रमश: पत्थर, बालू और जल के सदृश है। उत्तम पुरुष की मैत्री पत्थर पर लकीर, मध्यम की मैत्री बालू पर लकीर किसी हवा के झोंके तक बची रहती है, जबकि जल की लकीर की भांति दुर्जनों की मैत्री होती है। ठीक इसके विपरीत उत्तम आदमी का बैर जल की लकीर, मध्यम का बालू की लकीर और नीच का बैर पत्थर की लकीर की भांति चिरस्थायी होता है। इसलिए ऐसे लोगों से बैर और प्रीति करते समय ध्यान रखना चाहिये। यह कथन लोक जीवन का महत्वपूर्ण तथ्य है। हमारा समाज आज जिस आतंक का सामना कर रहा है तुलसीदास जी ने लड़ाई और आपसी कलह को बहुत ही बुरा बताया है-
कलह न जानब छोट करि कलह कठिन परिनाम॥
लगत अगिनि लघु नीच गृह जरत धनिक धन धाम॥’
इस संसार में कलह को कभी भी छोटा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि इसके परिणाम बहुत भयंकर होते हैं। गरीब की छोटी-सी झोपड़ी में यदि आग लगती है तो उससे बड़े-बड़े धनिकों के भी धन, धाम जल जाते हैं। मनुष्य को अपने हित अहित का ध्यान रखना चाहिए समय पर कष्ट सह लेने को तुलसी हितकारी मानते हैं, देखिए- ‘लोक रीति फूटि सहहिं आंजी सहइ न कोई। तुलसी जो आंजी सहइ सो आंधरो न होइ।’
इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में ऐसी भी परिस्थिति आती है, जब उसे क्रोध आ सकता है। तुलसीदास जी ने क्रोध को रोककर क्षमा को उपयोगी निरूपित किया है। क्रोध अत्यन्त हानिकारक है। कौरव पाण्डव जानिए क्रोध क्षमा के सीम। ‘पांचहि मारिन सौ सके सयौं संधारे भीम।’ कौरवों को क्रोध और पाण्डवों को क्षमा की सीमा समझना चाहिए परन्तु क्रोध के कारण सौ कौरव पांच पाण्डवों को नहीं मार सके इधर अकेले भीम ने सभी सौ कौरवों का संहार कर दिया।
ऐसे अनेकानेक प्रसंग हैं, जिसमें जीवन के विविध पक्ष जिनका लोक स्वरूप है, जिनका जीवन से सीधा संवाद और हमारी सामाजिक संरचना से सरोकार है, जिसमें तुलसीदास जी ने अपनी कलम चलाई है, कबीर की तरह ही ये सभी तथ्य ‘कागद की लेखी नहीं आजीवन आंखिन की देखी’ भोगे हुए प्रतीत होते हैं। मनुष्य जीवन की जिन सच्चाइयों को देखता या जीता है, वह उसका भुक्तभोगी होता है। यह उसका कड़वा और सच्चा अनुभव है-
इस प्रकार दोहावली में नीति है, भक्ति है, प्रेरणा है, शिक्षा लोक जीवन से सरोकार है, जिसमें मानव जीवन के विविध प्रसंगों को अवसरानुकूल उद्घृत किया गया है। दोहावली में निरंतर युगों तक के लिए प्रेरक तत्व विद्यमान हैं। यह तुलसी की कालजयी कृति है। (विनायक फीचर्स)

पंजाबी सिनेमा मिया – बीवी राजी तो क्या करेंगे पाजी

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पंजाबी सिनेमा विविध रुचि और शैलियों को पूरा करते हुए ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इस
रोमांचक परिदृश्य के बीच, एक नई पेशकश पूरे क्षेत्र के दर्शकों को हंसाने का वादा करती है। डॉ.
अनिल के मेहता द्वारा निर्मित ;मियां बीवी राजी तो क्या करेंगे पाजी  एक म्यूजिकल कॉमेडी है,
जिसका निर्देशन प्रतिभाशाली हैरी एवम् मेहता कर रहे है। इस फिल्म का हाल ही में मुंबई में भव्य
मुहूर्त समारोह हुआ, जिसने एक हंगामेदार सिनेमाई अनुभव का मंच तैयार किया।

स्टार से सजे इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लॉरेंस डिसूजा और अभय सिन्हा सहित सम्मानित
अतिथियों की उपस्थिति देखी गई, जिन्होंने अपने आशीर्वाद से इस अवसर की शोभा बढ़ाई।
पंजाबी सिनेमा के प्रिय स्टार, प्रीतम प्यारे ने अपने प्रशंसकों की फ़ौज की खुशी के लिए एक
विशेष रूप से उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे कार्यक्रम में और भी उत्साह बढ़ गया।

इस हंसी से भरपूर फिल्म के शीर्ष पर लेखक और निर्देशक हैरी मेहता हैं, जिनकी पारिवारिक
रिश्तों की बारीकियों को पकड़ने की क्षमता दर्शकों के दिलों को छू लेगी। अनिल के मेहता के
निर्माण कौशल द्वारा समर्थित, फिल्म में प्रतिभाशाली युवराज हंस और चुलबुली शहनाज सहर
के नेतृत्व में एक शानदार कलाकारों की टोली है, जो पर्दे पर एक मनमोहक केमिस्ट्री का मंच
तैयार करती है।

मुहूर्त समारोह ने फिल्म की आधारभूत कहानी की एक झलक पेश की, जो एक आधुनिक
पंजाबी परिवार के परीक्षणों और कष्टों के इर्द-गिर्द घूमती है। अपने भरोसेमंद विषयों और

विनोदी अंदाज के साथ, मियां बीवी राजी तो क्या करेंगे पाजी का उद्देश्य पूरे क्षेत्र के परिवारों के
वास्तविक जीवन के अनुभवों को दर्शाना है, जो दर्शकों के साथ हसी के माध्यम से गहरे स्तर पर
जुड़ता है।

प्रसिद्ध छायाकार आर. पार्थसारथी को फिल्म के जीवंत दृश्यों को कैद करने का जिम्मा सौंपा
गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हर फ्रेम आंखों के लिए एक उत्सव हो। फिल्म का
साउंडट्रैक, जो किसी भी म्यूजिकल कॉमेडी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पैर हिलाने वाले गानों
और मधुर संगीत का एक मनमोहक मिश्रण होने का वादा करता है, जो समग्र मनोरंजन को और
बढ़ाता है।

चूंकि पंजाबी फिल्म उद्योग विविधता लाने और व्यापक दर्शकों को पूरा करने के लिए निरंतर
काम कर रहा है, मियां बीवी राजी तो क्या करेंगे पाजी इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
और हंसी और दिल को छू लेने वाली कहानियों के माध्यम से दर्शकों को मोहित करने की क्षमता
का प्रमाण है।

प्रतिभाशाली कलाकारों की एक टीम, एक अनुभवी रचनात्मक टीम और एक आधारभूत
कहानी जो जनता के साथ जुड़ती है, के साथ यह म्यूजिकल कॉमेडी उन दर्शकों के लिए जरूरी
देखने वाली फिल्म बनने के लिए तैयार है जो दैनिक जीवन के तनावों से राहत चाहते हैं। जैसे-
जैसे उत्साह बढ़ता है, सिनेप्रेमी फिल्म की रिलीज़ की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो
एक सर्वोत्कृष्ट पंजाबी परिवार के जीवन के उमंग भरे सफर की उम्मीद कर रहे हैं।