Home Blog Page 13

मऊ में गो तस्करों की गाड़ी पलटी

0

सौरभ राय, मऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गोवंश संवर्धन और उनके विकास के लिए हर संभव प्रयास करती दिख रही है। गौ संरक्षण के लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, जिससे पशुपालकों की रुचि गौसेवा के प्रति बढ़े। गौ तस्करी पर लगाम लगाने के लिए भी उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार अभियान चलाकर गौ तस्करों पर नकेल कसने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जनपद मऊ में गौ तस्करी के लिए जा रही एक पिकअप गाड़ी मोड़ने के दौरान गहरी खाई में पलट गई। जिससे एक गोवंश की मौके पर ही मृत्यु हो गई। ग्रामीणों द्वारा शोर मचाने पर गौ तस्कर गाड़ी को छोड़कर मौके से फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से गायों को सुरक्षित गौशाला पहुंचाया।

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आज सुबह करीब 5 बजे जनपद मऊ के मधुबन थाने के अहिरौली गांव के समीप गोवंश से भरी पिकअप अनियंत्रित होकर पलट गई। स्थानीय लोगों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हम लोग सड़क के किनारे भोर में टहल रहे थे। तभी अचानक से मधुबन की तरफ से आ रही एक पिकअप गाड़ी जो गोवंश से भरी थी, ड्राइवर द्वारा बैक करने के दौरान पलट गई। जिसके बाद ग्रामीणों ने जब शोर मचाना शुरू किया तो गो तस्कर गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।

लोगों ने पुलिस को सूचना दी

स्थानियों ने पुलिस को मामले की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने ग्रामीणों की मदद से जेसीबी के द्वारा जब पिकअप को सही कराया तो मौके पर एक गोवंश मृत अवस्था में पाई गई। जबकि कुछ घायल गोवंश को पुलिस ने ग्रामीणों के मदद से स्थानीय गौशाले में पहुंचाया जहां पशु चिकित्सकों के द्वारा घायल गोवंश का उपचार किया गया।

डेन्यूब प्रॉपर्टीज़ ने दुबई में एक प्रीमियम बिज़नेस टावर ‘शाहरुखज़ बाय डेन्यूब’ किया लॉन्च

0

 

मुंबई। एक अनोखे वैश्विक पहल के तहत, डेन्यूब प्रॉपर्टीज़ ने बॉलीवुड मेगास्टार शाहरुख खान के नाम पर एक प्रीमियम कमर्शियल टावर ‘शाहरुखज़ बाय डेन्यूब’ के लॉन्च की घोषणा की है। यह घोषणा
शाहरुख खान और डेन्यूब समूह के संस्थापक और अध्यक्ष रिज़वान साजन के बीच एक ऐतिहासिक सहयोग का प्रतीक है जिन्होंने अपनी-अपनी दुनिया में महत्वाकांक्षा और सफलता को नई परिभाषा दी है।

दुबई में शेख जायद रोड पर भव्य रूप से स्थापित, यह 55-मंजिला टावर दुबई के सबसे प्रतिष्ठित व्यावसायिक स्थलों में से एक बनने के लिए तैयार है – एक ऐसा स्थल जो साम्राज्य निर्माताओं, नवप्रवर्तकों और दूरदर्शी लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह टावर शाहरुख खान और डेन्यूब दोनों के 33 वर्षों के उत्कृष्टता का जश्न मनाता है, जो सुगमता, पुनर्निर्माण और सफलता की निरंतर खोज के उनके साझा मूल्यों का प्रतीक है।

यह घोषणा मुंबई में हयात होटल में आयोजित एक इवेंट में शाहरुख खान और रिज़वान साजन की उपस्थिति में की गई। इस लॉन्च में सैकड़ों मेहमानों ने शिरकत की, जिनमें प्रमुख प्रभावशाली व्यक्ति, व्यावसायिक नेता, निवेशक, रचनाकार और मीडिया हस्तियाँ शामिल थीं, जिसने इसे साल के सबसे प्रसिद्ध रियल एस्टेट अनावरणों में से एक बना दिया।

लॉन्च के अवसर पर शाहरुख खान ने कहा, “दुबई में एक ऐतिहासिक स्थल का नाम मेरे नाम पर रखना मेरे लिए बेहद विनम्र और दिल को छू लेने वाला अनुभव है। दुबई हमेशा से मेरे लिए एक खास जगह रहा है – एक ऐसा शहर जो सपनों, महत्वाकांक्षाओं और संभावनाओं का जश्न मनाता है। शाहरुखज़ बाय डेन्यूब इस बात का प्रतीक है कि विश्वास और कड़ी मेहनत आपको कितनी दूर तक ले जा सकती है। मुझे डेन्यूब के साथ जुड़कर गर्व महसूस हो रहा है, एक ऐसा ब्रांड जो आकांक्षा और उत्कृष्टता की इसी भावना को दर्शाता है।”
डेन्यूब समूह के संस्थापक और अध्यक्ष रिज़वान साजन ने कहा कि
शाहरुख खान और मैंने 33 साल पहले एक साझा सपने के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। शाहरुख खान ने सपनों को नियति में बदल दिया, एक ऐसा दर्शन जो डेन्यूब में हमारी यात्रा को दर्शाता है। ‘शाहरुखज़ बाय डेन्यूब’ विनम्र शुरुआत और अथक महत्वाकांक्षा की इन दो कहानियों को जोड़ता है—दृष्टि, मूल्य और बड़े सपने देखने की शक्ति के वैश्विक प्रतीक के रूप में उभरता है।

शाहरुखज़ बाय डेन्यूब 10 लाख वर्ग फुट से ज़्यादा के निर्मित क्षेत्र में फैला एक प्रतिष्ठित विकास है, जो विलासिता, नवाचार और स्टार पावर का मिश्रण प्रदान करता है। केवल 475,000 अमेरिकी डॉलर / 4.2 करोड़ रुपये से शुरू होने वाली कीमतों के साथ, यह ऐतिहासिक परियोजना दुबई में प्रीमियम रियल एस्टेट के लिए एक नया मानक स्थापित करती है, जिसमें विश्व स्तरीय डिज़ाइन को बॉलीवुड के बादशाह से प्रेरित एक पते के साथ जोड़ा गया है। यह प्रीमियम बिज़नेस टावर 40 से ज़्यादा विश्वस्तरीय सुविधाएँ प्रदान करेगा, जिनमें स्काई पूल, एयर टैक्सियों के लिए हेलीपैड, वैलेट सेवाएँ और विशिष्ट बिज़नेस लाउंज शामिल हैं – ये सभी सुविधाएँ उत्पादकता और प्रतिष्ठा को नई परिभाषा देने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इसकी रणनीतिक लोकेशन बुर्ज खलीफ़ा और दुबई हवाई अड्डे जैसे दुबई के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों से बेजोड़ निकटता प्रदान करती है।

कंटेनर ने तीन गाय को रौंदा

0

संवाद न्यूज एजेंसी

सेलाकुई। देहरादून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस बैरियर के पास तेज रफ्तार कंटेनर पेड़ से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इसकी चपेट में आने से एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गाय घायल हो गईं। गो रक्षक दल के कार्यकर्ताओं ने घायल गायों को गोशाला पहुंचाया। पुलिस ने कंटेनर को थाने में खड़ा करवा दिया है।
घटना बृहस्पतिवार देर रात 12:35 बजे ही है। पुलिस बैरियर के पास कंटेनर अनियंत्रित होकर पीपल के पेड़ से टकरा गया। पेड़ के पास तीन गाय खड़ी थी। वह भी वाहन की चपेट में आ गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पेड़ से मोटी-मोटी टहनियां नीचे गिर गई। गनीमत यह रही कोई व्यक्ति टहनियों की चपेट में नहीं आया। सूचना पर गो रक्षक दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। एक गाय की मौत हो चुकी थी और दो गाय बुरी तरह से घायल थीं। टीम ने पहले घायल गायों को उपचार के लिए गोशाला भिजवाया। उसके बाद मृत गाय के शव को जेसीबी से सड़क से हटाया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कंटेनर को अपने कब्जे में ले लिया। गो रक्षक दल के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर गिरी टहनियां भी हटाईं। थाना प्रभारी पीडी भट्ट ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की तैयारी तेज

0

नासिक: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है जिससे नासिक एक प्रमुख पर्यटन एवं तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा। फडणवीस ने 5,757 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। फडणवीस ने कई परियोजनाओं का भूमिपूजन करने के बाद कहा कि ये सभी कार्य पारदर्शी तरीके से किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 12 साल में एक बार आयोजित होने वाले इस पर्व के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।

कब से कब तक चलेगा यह आयोजन?

भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद एक रैली में सीएम फडणवीस ने कहा, ‘‘हमने योजना बनाई है कि ये सभी कार्य कम से कम 25 वर्षों तक टिके रहें और नासिक तथा त्र्यंबकेश्वर की सूरत बदल दें। इससे नासिक एक प्रमुख पर्यटन और तीर्थस्थल बन जाएगा। राज्य सरकार इन कार्यों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए अच्छा मुआवजा देगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह कुंभ विशेष है और यह 75 साल बाद ‘त्रिखंड योग’ के दौरान पड़ रहा है। इसलिए, यह 28 महीने तक जारी रहेगा। यह 31 अक्टूबर 2026 को शुरू होगा और 24 जुलाई 2028 तक जारी रहेगा। दुनिया भर से लोग प्रयागराज कुंभ में पहुंचे थे और नासिक कुंभ भी इस परंपरा का एक हिस्सा है।’’

20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले कार्यों को मंजूरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले कार्यों को मंजूरी दी है जिनमें से 5,757 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ‘भूमिपूजन’ आज किया गया। फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कुंभ मेले के प्रभारी राज्य मंत्री गिरीश महाजन तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कहा कि राज्य में सबसे बड़े जिला परिषद भवन का भी उद्घाटन यहां किया गया है।

शिंदे ने क्या कहा?

सीएम ने पंचवटी में रामकुंड क्षेत्र का भी दौरा किया और प्रस्तावित 99.14 करोड़ रुपये के रामकाल पथ के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर शिंदे ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेला सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं होगा, बल्कि यह भारत को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा। बाद में फडणवीस और शिंदे ने भगवान कालाराम मंदिर में प्रार्थना की। इसके अलावा एक अन्य घटनाक्रम में, पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिरीष कोटवाल तथा अन्य लोग राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए। (भाषा इनपुट्स के साथ)

हिंदू भारत का प्राण -सरसंघचालक मोहन भागवत

0

जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जयपुर में संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू भारत का प्राण है, इसलिए भारत को तोड़ने की कोशिश करने वाले लोग हिंदुओं को तोड़ना चाहते हैं। आज ड्रग्स का जाल फैलाया जा रहा है। इसके पीछे जो ताकतें हैं वो भारत को दुर्बल बनाना चाहती हैं। उन्होंने ये भी कहा कि सद्भावना भारत का स्वभाव है। नियम और तर्क के आधार पर समस्याएं ठीक नहीं हो सकती, इसके लिए सद्भावना चाहिए और हमें यही काम करना है। उन्होंने कहा कि स्वार्थ भावना यह दुनिया का स्वभाव है। स्वार्थ भावना के आधार पर दुनिया को सुखी करने का प्रयास 2 हजार साल से चल रहा है और विफल हो रहा है क्योंकि स्वार्थ सबका भला नहीं कर सकता। जिसमें ताकत है वो अपना स्वार्थ साध लेता है, उसके मन में कोई संवेदना नहीं रहती। स्वार्थ तो परस्पर विरोधी होता ही है।

सरसंघचालक ने हिंदुओं को चेताया

बता दें कि सरसंघचालक मोहन भागवत ने मालवीय नगर स्थित पाथेय कण संस्थान के नारद सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ”समाज को बचाना है तो उसका प्रबोधन करना आवश्यक है। कुछ शक्तियां ऐसी हैं जो भारत को आगे बढ़ना नहीं देना चाहती हैं। हिंदू भारत का प्राण है, इसलिए भारत को तोड़ने का प्रयास करने वाले हिंदुओं को तोड़ना चाहते हैं।”

”पंच परिवर्तन” पर क्या बोले भागवत?

मोहन भागवत ने कहा कि पंच परिवर्तन का कार्यक्रम हमने दिया है। बहुत सरल कार्यक्रम है। यह समरसता, पर्यावरण, कुटुम्ब प्रबोधन, जागरण और नागरिक कर्तव्य का कार्यक्रम है। परिवार में आत्मीयता होती है तो ड्रग और लव जिहाद जैसी बातें हमेशा दूर रहती हैं। हमें पर्यावरण के लिए छोटी-छोटी बातें करनी हैं, पानी बचाओ, सिंगल यूज प्लास्टिक हटाओ और पेड़ लगाओ।

आचरण को लेकर दी ये सलाह

उन्होंने कहा कि सद्भावना के आधार पर ये बातें समाज के आचरण में लानी हैं, यह तब आएंगी जब पहले हम इसे अपने आचरण में लाएंगे। सब में सम्मान, प्रेम और आदर रहेगा तो सारे संकट समाप्त हो जाएंगे। जान लें कि इस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल, प्रदेश के विभिन्न समाजों के पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

संस्कृति, परंपरा और आस्था की रक्षा करने वालों को सम्मानित करने का दिन है जनजाति गौरव दिवस

0

(निखिलेश महेश्वरी -विभूति फीचर्स)

भारत का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय आंदोलन एक दीर्घ और प्रेरणादायी यात्रा रही है, जिसमें हर आयु वर्ग के युवा, महिला, बुजुर्ग और बच्चों ने सक्रिय भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक और अटक से कटक तक, हर जाति और समुदाय ने “राष्ट्र प्रथम” की भावना को आत्मसात करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इस राष्ट्रीय आंदोलन में भारत की जनजातियाँ भी कभी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने सदैव अपने साहस, पराक्रम और अदम्य बलिदान से राष्ट्र की मर्यादा और स्वाभिमान की रक्षा की ।

प्राचीन युग से लेकर मुग़ल और अंग्रेज़ काल तक, जनजातीय समाज ने अपने स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया । हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ पुंजा भील के नेतृत्व में बारह हज़ार भील सैनिकों ने वीरता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया । उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर सदा-सदा के लिए अमरता हो गए ।

गोंडवाना की वीरांगना रानी दुर्गावती ने मुग़लों से युद्ध करते हुए अपने राज्य और आत्मसम्मान के लिए बलिदान दिया । उनका जीवन भारतीय नारी शक्ति के लिए साहस और त्याग का प्रतीक बन गया। इसी प्रकार भोपाल की रानी कमलापति ने अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए हँसते-हँसते प्राण त्याग दिए। उनका जीवन आत्मसम्मान और पराक्रम की अमर कहानी है ।

ब्रिटिश शासनकाल में भी जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता की ज्योति को जलाए रखा। मणिपुर की रानी माँ गाईडिल्यु ने मात्र 13 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँक दिया था। उन्होंने अपने क्षेत्र में हो रहे धर्मांतरण का विरोध और नागा समाज में स्वाभिमान की चेतना को जगाया था । उनका जीवन देशभक्ति, त्याग और साहस का अद्वितीय उदाहरण है ।

मध्य भारत की भूमि जनजातीय वीरों की वीरता से अंकित है। 1857 की क्रांति के समय जब संपूर्ण देश स्वतंत्रता की ज्वाला में दहक रहा था, तब मध्यप्रदेश के जनजातीय नायक भी इस संग्राम में अग्रसर हुए ।

बड़वानी के भीमा नायक ने तात्या टोपे को नर्मदा पार कराने में सहयोग दिया और अंबापानी के युद्ध में अंग्रेजों के विरुद्ध वीरता के साथ लड़े । अंग्रेजों ने उन्हें पकड़कर अंडमान की जेल भेज दिया । इसी काल में खाज्या नायक ने सात सौ भीलों की एक संगठित सेना बनाकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध मोर्चा खोला । रघुनाथ सिंह भिलाला और सीताराम कँवर ने भी निमाड़ क्षेत्र में विद्रोह कर क्रांति की अलख जगाई ।
निमाड़ के लोगों में चर्चित “मामा टंट्या भील” का नाम इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित है । उन्होंने अंग्रेजों के अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई और गरीबों की सहायता की। अंग्रेज उन्हें “भारतीय रॉबिन हुड” कहते थे । 1889 में फाँसी के फंदे पर चढ़ते हुए उन्होंने भारत माता की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए ।

सन् 1857 में जब पूरे देश में स्वतंत्रता की ज्वाला भड़की, तब जबलपुर के गोंड राजा शंकरशाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध जन-जागरण का अभियान प्रारंभ किया । राष्ट्रप्रेम से प्रेरित इन दोनों वीरों ने अपने राज्य में क्रांति की अलख जगाई । अंग्रेजों ने षड्यंत्र रचने के आरोप में उन्हें 14 सितंबर 1858 को गिरफ्तार कर लिया ओर चार दिन तक कठोर यातनाएँ देने के बाद 18 सितंबर 1858 को जबलपुर कोतवाली के सामने तोप के मुँह से बाँधकर उड़ा दिया । वीर योद्धा पिता-पुत्र देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर सदा-सदा के लिए अमर हो गए ।
पूर्वी भारत के वीर तिलका माँझी ने 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध छेड़ा । उन्होंने वर्षों तक अंग्रेजों को चुनौती दी। अंततः पकड़े जाने पर जनता में दहशत पैदा करने के लिए अंग्रेजों ने उन्हें चार घोड़ों से बाँधकर घसीटते हुए भागलपुर में ले जाकर फाँसी दे दी। उनका बलिदान स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक अध्याय में स्वर्णाक्षरों से अंकित है ।
झारखंड के जनजातीय क्षेत्र में अंग्रेज़ शासनकाल के दौरान ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर धर्मांतरण किया जा रहा था। इस अन्यायपूर्ण कार्य का बिरसा मुंडा ने दृढ़ता से विरोध किया। उन्होंने जनजाति समाज में जागृति लाने का कार्य किया और स्वाभिमान व धर्मरक्षा का आंदोलन खड़ा किया । उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और आस्था की रक्षा के लिए खड़ा हुआ । अपने साहस, सेवा और नेतृत्व के कारण वे जन-जन के प्रिय बने और “धरती आबा” अर्थात् “धरती पिता” या “बिरसा भगवान” के रूप में पूजे जाने लगे। ऐसे स्वाधीनता सेनानी और धर्मरक्षक योद्धा का जीवन आज भी गरीब, वंचित और जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा और आदर्श है ।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे असंख्य ज्ञात-अज्ञात जनजातीय वीरों ने भारत माता की बलिवेदी पर हँसते-हँसते अपने प्राण न्यौछावर किए। किंतु दुर्भाग्यवश आज की युवा पीढ़ी को इन महापुरुषों के बारे में बहुत कम बताया गया है । यह हमारे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है ।
वर्तमान भारत सरकार ने इन क्रांतिवीरों के योगदान को सम्मानित करने का ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 10 नवंबर 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 15 नवंबर, बिरसा मुंडा जी के जन्मदिवस को ‘जनजाति गौरव दिवस’ के रूप में घोषित किया। यह दिवस केवल बिरसा मुंडा जी को ही नहीं, बल्कि उन सभी ज्ञात-अज्ञात जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी ।

वर्ष 2025, बिरसा मुंडा के जन्म का 150वाँ वर्ष है । यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि हमें इन प्रेरणादायी चरित्रों को समाज के समक्ष पुनः प्रस्तुत करना चाहिए । आइए, हम उनके जीवन से यह सीखें कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति ने अंग्रेजी सत्ता, धर्मांतरण और पूँजीवाद के विरुद्ध खड़े होकर समाज को संगठित किया और अपने शौर्य, पराक्रम, सेवा तथा धर्मनिष्ठा से “बिरसा मुंडा” से “बिरसा भगवान” बन गए ।

आज हमारा दायित्व है कि हम इन महान राष्ट्रवीरों के आदर्शों को आत्मसात करें, उनके जीवन से प्रेरणा लें और आने वाली पीढ़ियों को उस गौरवशाली इतिहास से परिचित कराएँ । यही उन बलिदानी आत्माओं के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जब भारत की युवा पीढ़ी इन जनजातीय वीरों की गाथाओं से परिचित होगी, तभी “विकसित भारत,

समर्थ भारत” का स्वप्न साकार होगा।

(विभूति फीचर्स) (लेखक विद्या भारती मध्य भारत प्रान्त के प्रांत संगठन मंत्री हैं।)

हमने जो कहा उसे कर दिखाया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

0

14 नवंबर 2025, इंदौर: किसानों के लिए सम्मान और समृद्धि का प्रतीक बनी भावान्तर योजना: मुख्यमंत्री डॉ. यादव –  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर भुगतान, अन्नदाता के उत्थान का पर्याय है। अन्नदाता को दी गई एमएसपी की गारंटी की पूर्ति करते हुए सोयाबीन भावांतर योजना में 1 लाख 33 हजार किसानों के खाते में 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को देवास से प्रदेश के 1.33 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर योजना के अंतर्गत 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित करने के बाद विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे।कार्यक्रम में विधायक डॉ. राजेश सोनकर, विधायक श्री मनोज चौधरी ,विधायक श्री मुरली भंवरा, महापौर श्रीमती गीता अग्रवाल, किसान संघ के अध्यक्ष श्री जयपाल सिंह चावड़ा सहित जनप्रतिनिधि , बड़ी संख्या में अन्नदाता भाई और लाड़ली बहनें उपस्थित  थीं ।

हमने जो कहा उसे कर दिखाया – मुख्यमंत्री ने  डॉ यादव ने  कहा कि किसानों के खातों में   राशि  अंतरित  होना इस बात का प्रमाण है कि हमने जो कहा उसे कर दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में अनेक किसान हितैषी योजनाएं संचालित की जा रही है। मध्य प्रदेश किसानों को उपज का उचित लाभ दिलवाने के लिए भावांतर योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। पिछले साल सोयाबीन का भाव 4800 रुपए था, इस बार किसानों को 500 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ देकर 5300 रुपए से अधिक कीमत पर सोयाबीन खरीदा जा रहा है। भावान्तर योजना के लिए प्रदेश में 9 लाख से अधिक किसानों ने सोयाबीन बेचने के लिए पंजीयन किया। आज 1.33 लाख किसानों के खाते में राशि भेजी गई है। हमारी सरकार ने योजना की शुरुआत करने के 15 दिन में ही किसानों से किया वादा पूरा किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवास से प्रदेश के 1.33 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर योजना के अंतर्गत 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित करने के बाद विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे।कार्यक्रम में विधायक डॉ. राजेश सोनकर, विधायक श्री मनोज चौधरी ,विधायक श्री मुरली भंवरा, महापौर श्रीमती गीता अग्रवाल, किसान संघ के अध्यक्ष श्री जयपाल सिंह चावड़ा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में अन्नदाता भाई और लाड़ली बहनें उपस्थित  थीं ।

220 से अधिक मुख्य और 80 उप मंडियों में की जा रही खरीदी – डॉ. यादव ने देवास जिले के सर्वांगीण विकास के लिए 183.25 करोड़ लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। साथ ही हितग्राहियों को जैविक खेती, कृषि यंत्र एवं पीएमएफएमई सहित विभिन्न योजनाओं में हितलाभ वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि यंत्रों एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाली प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना पंजीकृत किसान 15 जनवरी तक अपनी सोयाबीन मंडियों में बेच सकेंगे। पूरे प्रदेश में 220 से अधिक मुख्य मंडियों और 80 उप मंडियों में खरीदी की जा रही है। रेट पारदर्शी तरीके से तय हो रहे हैं, सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर है, किसान का डाटा अपने आप दिख रहा है, पैसा सीधे ऑनलाइन खाते में पहुंचने की व्यवस्था की गई है और हर कदम पर रियल टाइम एंट्री और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए भावांतर कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। भावांतर योजना लागू होने से फसल बेचने में किसानों को होने वाली कई परेशानियां दूर हो गई हैं।

खेत उपकरण

नरवाई  समस्या का निदान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए धरती पुत्र किसान और सीमा पर जवान, दोनों समान सम्मान का भाव रखते हैं। धरती पुत्र किसानों से देश की विशेष पहचान बनी है। किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार खेती के साथ-साथ गोपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए पंजीयन कराएं और 4 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान का लाभ उठाएं। प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है। योजना में अगर कोई किसान 40 लाख रुपए लागत का डेयरी व्यवसाय शुरू करता है तो राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए नरवाई की समस्या खत्म करने की दिशा में कदम उठाते हुए प्रदेश में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शुभारंभ किया गया है।

कोदो-कुटकी पर 1000 रुपए प्रति क्विंटल बोनस – मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मोटा अनाज ‘श्रीअन्न’ खरीदने के लिए मंडला, बालाघाट, जबलपुर सहित 11 जिलों के लिए किसानों को कोदो-कुटकी पर 1000 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया है। धान और गेहूं उत्पादक किसानों को भी बोनस का लाभ मिला है, चरणबद्ध रूप से गेहूं की कीमतें बढ़ाई जा रही है।

देवास जिले में भावांतर योजना के लिए सबसे अधिक हुआ पंजीयन – कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मध्य प्रदेश किसानों के लिए भावांतर योजना संचालित करने वाला देश का इकलौता राज्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में किसान हितैषी सरकार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के देवास पहुँचने पर रोड-शो में किसान मोर्चा के पदाधिकारियों और किसानों सहित नागरिकों ने भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन करते हुए किसानों को भावांतर योजना में मिले लाभ की बधाई दी।

गौ माता खुशहाल, तो देश खुशहाल!” – श्याम बिहारी गुप्ता

0

इटावा :  जसवंतनगर  आज का दिन सिरहौल स्थित गौ-आधारित नेचुरल कृषि फार्म के लिए गौरव और प्रेरणा का पुंज लेकर आया! फार्म की प्राकृतिक खेती की अलख और देसी गायों के संरक्षण की मुहिम को गौ सेवा आयोग उत्तर प्रदेश के माननीय अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता जी का स्नेहमय आगमन प्राप्त हुआ।

गुप्ता जी ने फार्म का विस्तृत भ्रमण किया और यहाँ चल रहे अभिनव कार्यों को देखकर गहरी संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व और देसी गौवंश के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए, जो किसानों के लिए नई राहें खोलेंगे।
उन्होंने कहा:
“यदि हमारी गौ माता खुशहाल है, तो किसान और देश — दोनों समृद्ध रहेंगे।”
उनके इस सशक्त वाक्य ने पूरे माहौल में नई ऊर्जा का संचार कर दिया। यह स्पष्ट है कि गौ-सेवा को राष्ट्र की समृद्धि का आधार मानने वाले गुप्ता जी के विचार ने किसानों में अपनी पारंपरिक जड़ों की ओर लौटने का नया उत्साह भर दिया है।

इस दौरान, नेचुरल खेती के प्रशिक्षण में जुटे मास्टर ट्रेनर (एनएमएनएफ) श्री अरविंद प्रताप सिंह परिहार ने माननीय अध्यक्ष महोदय को फार्म की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं और चल रहे सफल गौ-आधारित प्रयोगों की विस्तार से जानकारी दी। गुप्ता जी ने परिहार जी के प्रयासों की सराहना की और फार्म की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की।
यह दौरा सिरहौल फार्म के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने न केवल उनके कार्यों को पहचान दी है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक खेती और गौ-संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में भी प्रेरित किया है।

रिपोर्टर : देवेन्द्र सिंह

अश्विनी वैष्णव ने भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की

0

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने जनजातीय गौरव पखवाड़ा के समारोह के तहत आज, नई दिल्ली स्थित रेल भवन में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की

जनजातीय नायकों की वीरता, दूरदर्शिता और योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए, जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 1 से 15 नवंबर 2025 तक पूरे देश में मनाया जा रहा है। पखवाड़े भर चलने वाला यह उत्सव भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष भर मनाए जाने वाले जनजातीय गौरव वर्ष का हिस्सा है। भगवान बिरसा मुंडा भारत के सबसे सम्मानित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे और औपनिवेशिक उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध के एक चिरस्थायी प्रतीक थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के आदिवासी समुदायों के बलिदान, संस्कृति और विरासत का सम्मान करने और उनके साहस एवं राष्ट्र-निर्माण की कहानियों को राष्ट्रीय चेतना में लाने के लिए जनजातीय गौरव वर्ष मनाने की घोषणा की थी। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत सरकार ने प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भगवान बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत भावी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे।

सुखद यादों का सुनहरा एहसास है मायका

0

 

(डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद-विनायक फीचर्स)

मायका… कहते हैं कि माँ के होने से मायका होता है, माँ नहीं तो मायका भी नहीं। मायका सिर्फ एक घर का नाम नहीं,यह एक ऐसा एहसास है, जिसका ज़िक्र आते ही बेटी की आँखें नम हो जाती हैं। यह वह दुनिया है जहाँ उसकी जड़ें होती हैं, जहाँ उसका बचपन पला-बढ़ा, जहाँ उसकी पहली हँसी, पहली शरारतें, पहले सपने और पहले एहसास आकार लेते हैं। मायका वह कोमल सा बगीचा है जिसकी मिट्टी में हर बेटी की ज़िंदगी की पहली ख़ुशबू बसती है। घर की दहलीज़ पर माँ की पुकार, पिता की शांत-सी छाया, भाई-बहनों की मीठी तकरार,सब मिलकर मायके को एक अनमोल एहसास बना देते हैं, एक ऐसा एहसास जो उम्र के किसी भी मोड़ पर दिल को सुकून देता है। चाहे दुनिया कितनी ही बदल जाए, मायके की रसोई की महक, आँगन में रखी पुरानी चारपाई, या वह कमरा जहाँ बैठकर बेटी ने ख़्वाबों के रंग भरे,ये सब यादों की शम्मा बनकर ज़िंदगी भर रोशनी देते रहते हैं।
शादी के बाद मायके का अर्थ और भी गहरा हो जाता है। लड़की नए रिश्तों और ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए जब मायके की दहलीज़ पर लौटती है तो माँ की गोद में सिर रखकर उसका मन पलक झपकते ही हल्का हो जाता है। मायका उसके लिए एहसासों का वह दवाखाना बन जाता है जहाँ न किसी सफाई की ज़रूरत होती है, न किसी दिखावे की सिर्फ अपनापन, सिर्फ प्रेम।
तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मायका भावनात्मक सहारा भी है और मानसिक सुकून का माध्यम भी। कठिनाइयों, उलझनों और थकान के बीच मायके का एक फ़ोन कॉल भी बेटी को यह भरोसा दे देता है कि “तुम अकेली नहीं हो।” माँ-बाप का घर उसके लिए हमेशा वह ताक़त रहता है जहाँ वह फिर से खुद को पा सकती है।
समय के साथ बेटियाँ दूर चली जाती हैं, पर मायका कभी दूर नहीं होता। यह उसे तब भी सँभालता है जब जीवन की राहों में वह डगमगा जाती है, और तब भी साथ देता है जब वह नई ऊँचाइयाँ छू रही होती है। इसलिए मायका सिर्फ एक घर नहीं एक भावनात्मक धरोहर, एक सहज सुरक्षा, एक ऐसा रिश्ता है जिसे शब्दों में बाँधना मुश्किल है।
आज यह लेख लिखते वक़्त मेरी भी आँखें भीग गईं। मेरा मायका है, मगर माँ नहीं… वालिद साहब नहीं। भाई, भाभियाँ, भतीजे-भतीजियाँ सब हैं, फिर भी माँ की कमी बेपनाह खलती है। जब माँ थीं, हर दूसरे महीने उनसे मिलने चली जाती थी। लेकिन अब जब वो नहीं हैं, एक साल होने को आया,मैं अपने मायके नहीं गई।
सच ही कहा है मायका माँ से ही होता है। उसके जैसी मुहब्बत कोई नहीं कर सकता, न उसकी जगह कोई ले सकता है। रब से बस यही दुआ है कि हर बेटी की माँ सलामत रहे, और उसका मायका हमेशा महफ़ूज़ रहे। (विनायक फीचर्स)