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कांग्रेस की एकमात्र सांसद द्वारा गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग अब हो रहा है सोशल मीडिया पर वायरल

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कांग्रेस की एकमात्र सांसद द्वारा गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग अब हो रहा है सोशल मीडिया पर वायरल
भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं अंतरराष्ट्रीय गोसंरक्षण की संस्था समस्त महाजन प्रमुख डॉ. गिरीश जी शाह ने संसद की प्रशंसा की

अहमदाबाद/नई दिल्ली/चेन्नई;8 अगस्त 2024 : डॉ आर बी चौधरी की रिपोर्ट
सोमवार , 5 अगस्त 2024 को कांग्रेस की एक सांसद में लोकसभा में गोसंरक्षण संवर्धन के मुद्दे को उठाकर सनसनी फैला दी क्योंकि यह मामला भारतीय जनता पार्टी की ओर से नहीं बल्कि कांग्रेस की ओर से रखा गया और धर्मपत्त की चर्चा करते हुए गौर संरक्षण को देश की संस्कृति का हिस्सा बनने के लिए गौ हत्या निषेध के कानून लाने की बात कही। सांसद के इस माग की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। आरएसएस की पत्रिका पांचजन्य ने भी प्रमुख समाचार के रूप में प्रकाशित किया है। भारतीय जीव जन कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं गौसंरक्षण संवर्धन के लिए तकरीबन 50 करोड़ की बजट खर्च करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था समस्त महाजन के मैनेजिंग दृष्टि डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह ने सांसद के इस अतुलनीय प्रयास की सराहना की है और देश में गौ हत्या निषेध के लिए केंद्रीय कानून लाने के लिए एक श्रेष्ठ कदम बताया है।

यहां जानना जरूरी है कि गोसंरक्षण संवर्धन तथा गौ हत्या निषेध के राष्ट्रीय कानून की बात करने वाली शख्सियत आखिर है कौन ? गुजरात के बनासकांठा से कांग्रेस की एकमात्र सांसद हैं- गेनीबेन ठाकोर । वह इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में गुजरात की बनासकांठा लोकसभा सीट से जीती थीं। उल्लेखनीय है कि ठाकोर अपने कुछ फैसलों को लेकर पहले भी चर्चे में रही हैं। उन्होंने संसद में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की है। ठाकोर ने गाय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की और कहा कि गौहत्या पर प्रतिबंध लगे यह उनकी मांग है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि गाय का दूध बहुत ही गुणकारी होता है और गौ माता से मिलने वाले हर उत्पाद जीवन रक्षक तथा प्रकृति रक्षक होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गेनीबेन ठाकोर ने गाय के गोबर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती में गाय के गोबर की जरूरत होती है। कांग्रेस सांसद का भाषण तेजी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कांग्रेस सांसद लोकसभा में बात कर रही थीं। लोकसभा में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पदयात्रा का जिक्र करते हुए यह मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में शंकराचार्य की तरफ से उनकी इस मांग की प्रशंसा की गई है।

यह बता दें कि वहीं कांग्रेस की इस मांग को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से भी सराहा गया। उनकी तरफ से एक्स हैंडल: https://x.com/jyotirmathah/status/1820447104462188940 पर लिखा गया, “परमाराध्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज की प्रेरणा से गोभक्त आदरणीय गेनीबेन ठाकोर ने आज संसद में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की बात उठाई। सांसद ने शङ्कराचार्य जी की पद यात्रा का उल्लेख भी किया। ”

अपने भाषण के दौरान गेनीबेन ठाकोर ने कहा, “केंद्र सरकार के पशुपालन और डेरी मंत्रालय विभाग नियंत्रण अंतर्गत जो भी माग है, उसकी चर्चा के लिए एक मौका मिला इस लिए राहुल गांधी का आभार व्यक्त करती हूं। इस विभाग में 7137.68 करोड़ आवंटित किये गए हैं उसमें इजाफा किया जाए।

गेनीबेन ठाकोर ने सदन में कहा, “मैं गौ माता के बारे में बात करना चाहती हूं। मैं मांग करती हूं कि देश के साधु संतो और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अवीमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज पदयात्रा कर के गौ माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने के लिए सरकार समक्ष मांग कर रहे हैं। गौ माता को राष्ट्र का दर्जा मिले और गौ वंश के उपर जो अत्याचार हो रहा है उसके उपर प्रतिबंधित कोई कानून लागू हो मैं मांग कर रही हूं।”

कांग्रेस सांसद ने देश के साधु, संतों, महंतों और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने पदयात्रा की और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पशुओं की खरीद और इंश्योरेंस पर जीएसटी लगाया गया है, जिसे हटाने की जरूरत है। गेनीबेन ठाकोर गौरतलब है कि गेनीबेन ठाकोर ने गुजरात से लोकसभा की एक मात्र सांसद हैं।

लोकप्रिय गायक सुरेश वाडकर ने अपने जन्मदिन पर लॉन्च किया रेडियो प्रोग्राम “ऐ ज़िंदगी गले लगा ले”

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मुंबई। सुप्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर ने अपने जन्मदिन के अवसर पर स्टूडियो रीफ्यूल द्वारा प्रोड्यूस किए जा रहे नए रेडियो प्रोग्राम “ऐ ज़िंदगी गले लगा ले” के लॉन्च की घोषणा की।

उनके जन्मदिन पर एक पार्टी का आयोजन कर प्रीतिभोज भी रखा गया था। जन्मदिवस समारोह में सुरेश अपनी पत्नी पद्मा वाडकर के साथ उपस्थित रहे और अतिथियों तथा मीडिया के बीच अपने कुछ गीतों को गाकर समा बांधा। कार्यक्रम में शो के एंकर कुमार, स्टूडियो रीफ्यूल के सीईओ इंडिया चैप्टर सचिन तैलंग और सीईओ दुबई चैप्टर रमन छिब्बर भी उपस्थित थे।


सुरेश वाडकर ने फिल्म “सदमा” के सदाबहार गीत “ऐ ज़िंदगी गले लगा ले” के बारे में बात की। उन्होंने इस गीत की रिकॉर्डिंग और इसकी स्थायी लोकप्रियता के बारे में चर्चा की।
इस प्रसिद्ध गीत से प्रेरित होकर सुरेश वाडकर पहली बार रेडियो में कदम रख रहे हैं और इस नई यात्रा को लेकर वे बेहद उत्साहित हैं। यह रेडियो शो, जो दीवाली तक आएगा, एक संगीतमय यात्रा होगी जिसमें सुरेश वाडकर अपनी यादों से कुछ अनसुनी कहानियां साझा करेंगे।
एंकर कुमार ने बताया कि इस शो में सुरेश वाडकर अपने जीवन, गायन कैरियर, गीतों की रिकॉर्डिंग और म्यूजिकल शो से जुड़े खट्टे-मीठे अनुभवों को सुनाएंगे। वे संगीत उद्योग से जुड़े दिलचस्प किस्से भी साझा करेंगे।
लॉन्च इवेंट में सुरेश वाडकर ने अपने हिट गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सुरेश वाडकर आजीवासन संगीत विद्यालय चलाते हैं, जहां वे छात्रों को गायन का प्रशिक्षण देते हैं।
7 अगस्त 1955 को जन्मे सुरेश ईश्वर वाडकर ने अनेक ब्लॉकबस्टर गीत जैसे कि “मेघा रे मेघा रे, भंवरे ने खिलाया फूल, मैं हूं प्रेम रोगी, तुमसे मिलकर ऐसा लगा, सपने में मिलती है” को अपने सुमधुर स्वर में गाया है। रेडियो शो “ऐ ज़िंदगी गले लगा ले” के लिए उनके प्रशंसक, संगीत प्रेमी और सिनेप्रेमी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
कुमार और सुरेश वाडकर ने अपने नए शो “ऐ ज़िंदगी गले लगा ले” के साथ भारतीय संगीत के मधुर और सांस्कृतिक रूप को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है।

पहले वह कांग्रेस की सांसद थीं अब 100 करोड़ सनातन धर्मियों की नेता हैं, गेनीबेन ठाकरे से खुश हुए अविमुक्तेश्वरानंद

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गुजरात के बनासकांठा से कांग्रेस सांसद गेनीबेन ठाकोर ने सदन में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को उठाया वहीं उन्होंने अपने भाषण के दौरान गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पद यात्रा का भी जिक्र किया. वहीं अब शंकराचार्य की तरफ से उनकी इस मांग की प्रशंसा की गई है।

वहीं कांग्रेस की इस मांग को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से भी सराहा गया. उनकी तरफ से एक्स हैंडल पर लिखा गया, “परमाराध्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी महाराज की प्रेरणा से गोभक्त आदरणीय गेनीबेन ठाकोर ने आज संसद में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की बात उठाई. शङ्कराचार्य जी की पद यात्रा का उल्लेख भी किया.”

अहमदाबाद: गुजरात में कांग्रेस की इकलौती लोकसभा सदस्य गेनीबेन ठाकोर द्वारा लोकसभा में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने का मुद्दा उठाने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रसन्नता व्यक्त की है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि गेनीबेन ने चुनावों से पहले जो वादा किया था। उसे पूरा किया है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि उन्होंने अपनी पार्टी लाइन से हटकर गाय को को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग लोकसभा में उठाई है। ऐसे में वह अब सिर्फ अपने क्षेत्र की नहीं बल्कि अब भारत के 100 करोड़ सनातन धर्मियों की नेता बन गई हैं।

उठाई अविमुक्तेश्वरानंद की मांग
2024 लोकसभा चुनावों में गेनीबेन ठाकोर गुजरात की बनासकांठा सीट से जीती थी। 2014 और 2019 में कांग्रेस पार्टी को गुजरात में एक भी सीट नहीं मिली थी। 2024 में कांग्रेस के खाते में बनासकांठी की सीट आई थी। गेनीबेन ठाकोर ने पांच अगस्त को लोकसभा में यह मुद्दा उठाया था। इसके साथ गेनीबेन ठाकोर ने पशुपालन और गौ-रक्षा को मुद्दा उठाया था। तब उन्होंने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मांग का उल्लेख लोकसभा में किया था। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए पदयात्रा की थी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गुजराती चैनल जमावट से बातचीत में कहा कि गेनीबेन ने साबित किया कि आखिर कोई तो हैं जो गौमाता की आवाज उठा सकता है।

18 प्रतिशत GST हटाने की मांग
गेनीबेन ठाकोर ने लोकसभा में कहा था कि पशुपालक गाय और दूसरे पशुओं की सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस लेते हैं। इस पर से 18 प्रतिशत जीएसटी को हटाया जाना चाहिए। गेनीबेन ठाकाेर ने कहा था कि कत्लखाने चलाने वालों से फंड लेने वालों के नाम भी सार्वजनिक किए जाएं। इसके अलावा गेनीबेन ठाकोर ने कहा था कि गायों और दूसरों पशुओं के लिए जो गोचर (चरागाह) की जमीनें थीं। उन्हें उद्योगपतियों को दे दिया गया है। इसके चलते पशुपालकों और वन प्राणियाें को दिक्कत हो रही है।

 

*गोप्रतिष्ठा पर्व के रूप में मनाया गया ज्योतिर्मठ के 55वें शंकराचार्य का 55वां प्राकट्योत्सव*

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नई दिल्ली, : ज्योतिर्मठ के 55वें शंकराचार्य का 55वां प्राकट्योत्सव इस वर्ष गोप्रतिष्ठा पर्व के रूप में मनाया गया। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में यह भव्य आयोजन दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चला

इस महोत्सव में सभी गोसांसद उपस्थित रहें। प्रातः मंगल ध्वनि के साथ इस पवित्र कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया राघवाचार्य जी महाराज और देश भर से 300 संत महंथ भी इस शुभ अवसर पर सम्मिलित हुए। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने पत्र लिख कर शंकराचार्य जी को जन्म दिवस की बधाई दी किसान नेता नरेश टिकैत भी उपस्थित रहे। इसी प्रकार देश भर के कई वर्तमान विधायक सांसद तथा पूर्व विधाय सांसद और मंत्री उपस्थित रहे।अनूप जलोटा ने अपने स्वर संगीत से कार्यक्रम को और भी सुंदर बनाया .

तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में जन्मोत्सव का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर कवर्धा की रत्ना देवी जी शंकराचार्य जी को रजत सिंहासन भेंट किय रेसलर द ग्रेट खली की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी खास बनाया  शंकराचार्य जी का स्वागत हरियाणवी नृत्य एवं कश्मीरी नृत्य से किया गया जो इस महोत्सव में सांस्कृतिक रंग को बिखेरा। तुलादान की अनोखी परंपरा के तहत शंकराचार्य जी को रबड़ी से तौला गया, जो इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। यह आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है और समाज में एकता, भक्ति और सेवा का संदेश फैलाएगा। अंत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया .

भारत सरकार से हमे अपेक्षा है नवम्बर तक गोमाता की प्रतिष्ठा करे- ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदजी

परमाराध्य परमाधीश ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामिश्री: १००८ अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीजी महाराज के 55 वे वर्द्धन्ति महोत्सव में दिल्लीके तालकटोरा स्टेडियम में में बड़े ही हर्षोल्लास एवं आनंद सहित उनके शिष्यों, भक्तो एवं अनुयायियों द्वारा एक भव्य आयोजन के अंतर्गत हजारों की संख्या में साधुसंतो, महंतो, गोसाँसदो, गोभक्तों मनाया ।

ज्योतिष्पीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीजी आद्य शंकराचार्य प्रस्थापित चार पीठोंमें से उत्तरामनाय ज्योतिष्पीठ के 55 वे प्रामाणित शंकराचार्यजी है ।सितंबर’2022 में द्विपीठाधीश जगद्गुरु शंकराचार्य अनंतश्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के ब्रह्मलीन होने के उपरांत उनके आदेशानुसार ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिषिक्त हुए।

स्वामिश्रीका आविर्भाव प्रतापगढ़ के ब्राह्मणपुर गांव के ब्राह्मणकुल रत्न सद्गृहस्थ पं. रामसुमेर पाण्डेय और पूजनीया अनारा देवी के श्रावण शुक्ल द्वितीया दुंदुभि संवत्सर 2026 ( तदनुसार दिनांक 15/08/1969) शुक्रवार को हुआ।

गंगानदी को राष्ट्रनदी घोषित करवाने, 12 दिनों का पराक व्रत , रामसेतू संरक्षण, वाराणसी में पौराणिक मंदिरों की रक्षा, ज्ञानवापी में से प्राप्त शिवलिंग की सुरक्षा एवं भोग पूजन के लिए निर्जल उपवास, सनातन हिन्दू धर्म के अनेको कार्य आप द्वारा हुए ।

ज्योतिष्पीठाधीश्वर वर्तमान में गोमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा अभियानकी ज्योति है, आत्मा है। इस अभियान के अंतर्गत गोवर्धन से दिल्ली संसद भवन की पैदल यात्रा आपने नंगे पाँव की, और अपना स्वर बुलंद करते हुए भारत सरकार से अनुरोध किया कि वेदलक्षणा गाय को भारत के राष्ट्रमाता के पद पर प्रतिष्ठित कर गोहत्या के कलंक से भारत को मुक्त करें। गाय एवं गोवंश को सुरक्षित करे। पंचदिवसीय गोसंसद के माध्यम से उन्होंने अध्यक्ष रूप से धर्मादेश पारित किया है और गोरक्षा हेतु एक विधेयक पारित करवाया। उस विधेयक आज प्रादुर्भाव दिवस पर लोकार्पण किया जिसे देश की कैबिनेट को भेजा जाएगा।

इस भव्य महोत्सव में विशेष अतिथि के रूप में पूज्य राघवाचार्य परमहंसजी महाराज उपस्तिथ रहे।

काशी विद्वत परिषद व दिल्ली विद्वत परिषद द्वारा ज्योतिष्पीठ शंकराचार्यजी का माल्यार्पण से स्वागत हुआ।

चारधाम के प्रतिनिधिने शंकराचार्यजी प्रसाद समर्पित किया

भिन्न भिन्न विद्वानों एवं संतों ने शुभेच्छा संदेश देकर शंकराचार्यजी का अभिवादन अभिनंदन किया।

श्री राकेश अस्थाना, श्री नरेश टिकैत, एडवोकेट पी एन मिश्रा , पूर्व सीबीआई चीफ नागेश्वरजी राव, ब्रिजमोहन अग्रवाल, सुनील बजाजजी, अनिल बलोनी जी, इत्यादि ने भी अपने शब्द पुष्प शंकराचार्यजी के चरणों मे अर्पित किए।

गुजरात बनांसकंठा की सांसद
श्रीमती गेनिबेन ठाकुर जिन्होंने चुनाव से पूर्व गोमाता की बात संसद में रखने को अपने वचन को निभाते हुए को 5 ऑगस्ट को भारतकी संसद में शंकराचार्यजी के रामा गो प्रतिष्ठा अभियान एवं संतोकी गोरक्षा आंदोलन एवं पदयात्रा संसदमें रखा था उन्होंने शंकराचार्यजी के आशीर्वाद लिए ।

शंकराचार्यजी उद्बोधन

◆यतिचक्र चूड़ामणि धर्मसम्राट करपात्रीजी महाराज के प्रागट्य दिवस पर गोमाता प्रतिष्ठा पर्व के रूप में मनाया जाए

◆ प्रतिष्ठा बिना धन बेकार हो जाता है
◆ धन और मान दो कमाने की चीजें है
◆ उत्तम प्रकृति वाले लोग केवल मान की इच्छा करते है
◆इष्टापूर्त और दान करके मनुष्य प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहता
◆ अकीर्ति मृत्यु से भी बदतर है
◆निरंतर किसी के घर जाने से मान घट जाता है
◆हमारे पूर्वज जो करते है उसी को करना चाहिए
◆गो के सम्मान को भूल गए तो कहीं ऐसा न हो कि माँ को छोड़ दे, बिना माँ का बेटा अनाथ हो जाता है
◆ कानून बनने से अपराध सम्पूर्णतः भले न रुके, पर नियंत्रित होता है, डर लगता है।
◆ पशु सूचि से हटने के बाद राष्ट्रमाता के साथ व्यवहार बदल जाएगा
◆ गाय के लिये पशु शब्द का बोधक नही रहना चाहिए
◆ सनातन धर्म वृषभ रूप से प्रगट होता है। वृषभ की माता गाय है। धर्म पालन से हमने वृषभ को अंगीकार किया है, इसलिए हमारी माता गोमाता है।

अन्य कार्यक्रम

शंकराचार्यजी का तुलादान हुआ। जिसमें भिन्न भिन्न 7 द्रव्य से हुआ। रबड़ी, फल, अन्न, आदि आदि।

अनूप जलोटा ने भजन प्रस्तुत किए । ध ग्रेट खली ने भी शंकराचार्यजी के आशीर्वाद लिए।

हजारो की संख्या में भक्तजनों ने प्रसाद पाया।

 

एल्युमंस ने इंडियन मेरिटाइम यूनिवर्सिर्टी के अक्षय निधि पोर्टफोलियो के लिए 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का दिया आश्वासन

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मुंबई। इंडियन मेरिटाइम विश्वविद्यालय ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन रिक्रिएशन सेंटर में एक एल्युमीनाई और इंडस्ट्री मीट आयोजित की, जिसमें इसके पूर्व छात्रों और मेरिटाइम इंडस्ट्री के नेताओं ने भाग लिया। यह बैठक दो रणनीतिक सहयोगों की घोषणा के साथ विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई जो इसकी शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाएगी।

पहला प्रमुख आकर्षण आर के मेहरोत्रा होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड फ़ोरसाइट ग्रुप की सहायक कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना था। समूह की स्थापना आईएमयू के पूर्व छात्र सीबीई डॉ. आर के मेहरोत्रा (पूर्व डीएमईटी कोलकाता) द्वारा की गई थी, जो निवेश करने के लिए तैयार हैं। अक्षय निधि पोर्टफोलियो के लिए USD1.5 मिलियन और विश्वविद्यालय के कोलकाता परिसर में डॉ. आर के मेहरोत्रा समुद्री उत्कृष्टता केंद्र की इमारत की स्थापना के लिए 0.72 मिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश करने के लिए तैयार है। केंद्र समुद्री क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान अध्ययन और नवाचार में क्षमताओं को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। आईएमयू की कुलपति डॉ मालिनी वी शंकर और फोरसाइट ग्रुप के निदेशक, शिपिंग और उपाध्यक्ष अमूल्य मोहापात्रा ने एक शुभ शुरुआत करते हुए समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया।


दूसरा मुख्य आकर्षण इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन इंजीनियर्स, इंडिया [आईएमई(आई)] के साथ एक एमओए पर हस्ताक्षर करना था, जिसमें दो जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) को ₹18 लाख का प्रायोजन स्थापित किया गया, जो आईएमयू में शोध अध्ययन करेंगे। इस प्रायोजन से समुद्री क्षेत्र में अनुसंधान रुचि बढ़ने की उम्मीद है। जेआरएफ विश्वविद्यालय के साथ अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई भी कर सकेंगे। कई उद्योग-प्रासंगिक अनुसंधान परियोजनाएं IME(i) और IMU द्वारा संयुक्त रूप से तय की जाएंगी। एमओए पर डॉ. मालिनी शंकर, कुलपति आईएमयू और राजीव नैयर अध्यक्ष आईएमई(आई) ने हस्ताक्षर किए।
आरकेएमएचएल के समूह प्रबंध निदेशक आर के मेहरोत्रा ने साझेदारी के बारे में अपना उत्साह व्यक्त किया और कहा कि मैं मेरिटाइम एरिया में अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने के मिशन में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय का समर्थन करने के लिए उत्साहित हूं। उत्कृष्टता केंद्र नवाचार को बढ़ावा देने और छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए बेहतर अवसर पैदा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अपने मातृसंथा को वापस लौटाने में योगदान देना मेरा मिशन था।” उन्होंने अन्य पूर्व छात्रों से समुद्री शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता की खोज में आईएमयू के साथ हाथ मिलाने का आग्रह किया।
सहयोग पर टिप्पणी करते हुए, इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन इंजीनियर्स, भारत के अध्यक्ष, राजीव नैयर ने कहा कि IME(i) हमेशा समुद्री क्षेत्र में वैज्ञानिक विकास को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहा है और भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के साथ हमारी साझेदारी हमारी प्रतिबद्धता के विस्तार के रूप में कार्य करती है। इस सहयोग के साथ, हम समुद्री शोधकर्ताओं की अगली पीढ़ी का समर्थन करने, उनके विकास और प्रगति के लिए अधिक अवसर खोलने का प्रयास कर रहे हैं।”
इन उल्लेखनीय उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए, भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ मालिनी वी शंकर ने टिप्पणी की, “प्रेस कॉन्फ्रेंस हमारे लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम था, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में शैक्षिक और अनुसंधान परिणामों को आगे बढ़ाने के हमारे दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। हम उत्कृष्टता केंद्र के विकास के लिए आरकेएमएचएल समूह के साथ साझेदारी करने के लिए उत्साहित और आभारी हैं और आईएमई (आई) के साथ हमारे संयुक्त उद्यम के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं का एक उभरता हुआ नेटवर्क बनाने की आशा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रयास 2030 के समुद्री भारत विजन और 2047 के समुद्री अमृत काल विजन के साथ जुड़े हुए हैं।
इस कार्यक्रम में उद्योग और पूर्व छात्रों की नेटवर्किंग भी देखी गई। कैप्टन किशोर सुंदरेसन, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, आईएमयू ने विशेष रूप से समुद्री यात्रा अधिकारियों के लिए डिज़ाइन किए गए ऑनलाइन एमबीए (समुद्री प्रबंधन) कार्यक्रम पर उद्योग के उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। आईएमयू का समुद्र सुरभि अभियान भी चर्चा का हिस्सा था। विश्वविद्यालय ने इस मंच की ओर ध्यान आकर्षित किया जिसके माध्यम से पूर्व छात्र और उद्योग हितधारक विश्वविद्यालय के विभिन्न आयोजनों और पहलों में योगदान कर सकते हैं और आईटी लाभ प्राप्त कर सकते हैं और अपने सीएसआर बजट के लिए एक अच्छा कारण बन सकते हैं।

कांजी हाउस के एक कमरे में कैद14गायों की मौत

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Chhattisgarh – बलौदाबाजार जिले में लवन तहसील के मरदा गांव में 14 गायों की लाश मिली है। इन सभी को कांजी हाउस के एक कमरे में कैद कर रखा गया था। 4 दिनों से चारा-पानी भी नहीं दिया। इसी के चलते बारी-बारी सबने दम तोड़ दिया। मवेशियों की सामूहिक मौत का खुलासा तब हुआ, जब लाशें सड़ने लगी। इलाके में लगातार बढ़ती बदबू की पतासाजी करते गांव के कुछ लोग जब कांजी हाउस पहुंचे तो अंदर का नजारा देखकर दंग रह गए।
8 दिन पहले पकड़ा था सभी गायों को
छुट्टा मवेशी फसलों को नुकसान न पहुंचाएं इसलिए गांव में इनकी देखरेख के लिए एक समिति बनाई गई है। इसी समिति ने करीब 8 दिन पहले गांव के अलग-अलग इलाकों से 14 गायों को पकड़कर कांजीहाउस लाया था। यहां तीन कमरे हैं। इसके बावजूद समिति ने सभी गायों को एक ही कमरे में ठूंस-ठूंसकर भर दिया।
फिर बाहर से ताला भी लगा दिया गया। गायों को चारा-पानी देना तो दूर, समिति ने दरवाजे का ताला तक नहीं खोला। गायों की डिकंपोज होती लाश देखकर वेटनरी डॉक्टरों का अनुमान है कि इन सभी की मौत 4 दिन पहले हुई होगी। ये कमरा कितना छोटा है! इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि गुरुवार को जब गांव के लोगों ने कांजी हाउस का बंद कमरा खोला तो यहां मरी हुई गाय एक के ऊपर एक लदी पड़ी थीं।

लोगों में नाराजगी

इस नजारे को देखकर गांव के लोगों में समिति की लापरवाही को लेकर खासी नाराजगी भी है। लोगों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के साथ ही गांव में छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए बेहतर इंतजाम करने की मांग भी शासन-प्रशासन से की है।
गांव के कुछ युवाओं ने कांजी हाऊस में मृत गायों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मामले की भनक लगते ही कलेक्टर दीपक सोनी ने जांच दल गठित करते हुए टीम को तत्काल मौके पर भेजा। शुक्रवार सुबह एसडीएम अमित गुप्ता के नेतृत्व में गांव पहुंचे जांच दल में तहसीलदार, पुलिस प्रशासन और पशु विभाग के अफसर शामिल थे।
जांच टीम ने गांववालों का ब्यान लिया। पंचनामा किया। इसके बाद मवेशियों की गिनती की। गिनती में 14 मवेशी मृत पाए गए। सभी मवेशियों को काऊ केचर में डालकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। सभी मवेशियों को गढ्ढा खोदकर दफन कर दिया गया है।
बलौदाबाजार एसडीएम अमित गुप्ता ने कहा कि मरदा के प्राइवेट बाड़े में 15-20 गायो की मौत होने की जानकारी मिली थी। मौके पर तहसीलदार, थाना प्रभारी, पशु चिकित्सा विभाग और सीईओ को भेजा था। उनके द्वारा जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे।
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि किसानों ने अपनी फसलें बचाने मवेशियों को बाड़े में रखा था। ये मवेशी मृत पाए गए। इसे लेकर एसडीएम को जरूरी निर्देश दिए हैं। जिम्मेदारों पर एफआईआर के लिए कहा था।

4 पर एफआईआर

जांच के बाद राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने समिति से जुड़े लोगों से पूछताछ की। इसके बाद तीन लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मामले में 4 आरोपियों की गिरफ्तार कर शुक्रवार को ही न्यायालय में पेश करते हुए सभी को जेल भेज दिया है। मामले में सुशील कुमार साहू (50), तेरस राम साहू (60), लक्ष्मी प्रसाद यादव (54), राकेश कुमार जांगडे (49) पर कार्रवाई की गई है।
तहसीलदार निवेश कोरेटी ने बातया कि मृत मवेशियों की संख्या 14 है, जिन्हें गढ्ढा खोदकर दफन किया गया है। दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है।

प्रकृति का रौद्र रुप मानव के मनमाने आचरण का परिणाम*

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(मनोज कुमार अग्रवाल -विनायक फीचर्स)

हिमाचल के शिमला, कुल्लू ,किन्नौर ,उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून ,चमोली में बादल फटने  की घटनाओं में करीब 25 से अधिक लोगों की मौत हो गई है जबकि एक सौ लोग लापता हैं वहीं केरल के वायनाड जिले में बीते 30 जुलाई मंगलवार को मेप्पाडी के पास विभिन्न पहाड़ी इलाकों में प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया है, वहां आए भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है । इस प्राकृतिक आपदा के कारण चार गांवों का नामोनिशान खत्म हो गया है। अब तक 291 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 लोग लापता हैं। यह आंकड़ा अभी और भी अधिक बढ़ सकता है। वहीं भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सेना का राहत व बचाव कार्य जारी है।देश के सबसे समृद्ध एवं प्राकृतिक विरासत में मिली जैव विविधता वाले राज्य केरल को ईश्वर का अपना घर कहा जाता है जो प्रकृति के उपहार साल भर हरे रहने वाले पत्तों और विविधता से भरपूर जंगल और साफ समुद्र तटों और पश्चिमी घाट के शानदार परिदृश्यों से धन्य है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के अवतार ऋषि परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी से केरल का निर्माण किया था। केरल एक समय पानी से भर गया था तो ऋषि परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी को पानी में फेंक दिया था जिससे पानी कम हो गया और जो भूमि बनी उसी पर आधुनिक केरल स्थापित है। राज्य में पद्मनाभन मंदिर से लेकर सबरीमाला मंदिर तक अनेक आस्था के केन्द्र हैं जिससे केरल भगवान के अपने देश के रूप में लोकप्रिय है। दुर्भाग्य से भगवान के घर में कुदरत के कहर की आपदा  टूट पड़ी है। अपने खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर वायनाड पर ऐसी प्राकृतिक आपदा आई जिसमें चार गांवों का अस्तित्व खत्म हो गया है। मौत का आंकड़ा तीन सौ के पास पहुंच रहा है जबकि सैकड़ों लोगों का अभी अता-पता नहीं है। वायनाड में मंगलवार तड़के पहाड़ से बहकर आए सैलाब ने हाहाकार मचा दिया। इस आपदा ने 11 साल पहले उत्तराखंड के केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा की दुखद यादें ताजा कर दी । जो रात में सोया था उसे उठने तक का मौका नहीं मिला और सुबह मलबे में मिली उनकी लाशें। चारों तरफ बर्बादी को देखकर हर किसी का दिल दहल उठा।

एनडीआरएफ, सेना और अन्य एजेंसियों द्वारा समन्वित व्यापक बचाव अभियान ने सुनिश्चित किया कि वायनाड जिले के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से 1,500 से अधिक लोगों को बचाया गया है। सीएम विजयन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि”दो दिवसीय बचाव अभियान में 1,592 लोगों को बचाया गया। इतने कम समय में इतने लोगों को बचाने के लिए समन्वित और व्यापक अभियान की यह उपलब्धि है.”। उन्होंने कहा कि पहले चरण में आपदा के आसपास के इलाकों के 68 परिवारों के 206 लोगों को तीन शिविरों में शिफ्ट किया गया, इसमें 75 पुरुष, 88 महिलाएं और 43 बच्चे शामिल हैं।भूस्खलन के बाद चल रहे बचाव अभियान में फंसे हुए 1,386 लोगों को बचाया गया।उन्होंने कहा, ‘इसमें 528 पुरुष, 559 महिलाएं और 299 बच्चे शामिल हैं, जिन्हें सात शिविरों में भेजा गया है। दो सौ एक लोगों को बचाकर अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से 90 का अभी इलाज चल रहा है।’ विजयन ने कहा कि वायनाड जिले में 82 राहत शिविरों में फिलहाल 8,017 लोग रह रहे हैं इनमें 19 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। मेप्पाडी में आठ शिविर हैं, जहां 421 परिवारों के 1,486 लोग रह रहे हैं।

इस भारतीय सेना ने वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान तेज कर दिया है। मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान के तहत भारतीय सेना ने वायनाड में विनाशकारी भूस्खलनों के बाद फंसे लोगों को बचाने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है।  चिकित्सा कर्मचारियों सहित लगभग 500 कर्मियों को तैनात किया गया है।
मिली रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 3 हजार लोगों को रेस्क्यू किया गया है। भारी बारिश के बीच कीचड़, चट्टानों और पेड़ों के बड़े-बड़े टुकड़ों की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस आपदा में जो पुल ढह गया था उसे सेना के जवान फिर से बनाने में जुटे हैं जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आ सके। उम्मीद है कि जल्द ही चूरलमाला को मुंडक्कई से जोड़ने वाला 190 फीट का यह पुल बनकर तैयार हो जाएगा।

वायनाड से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वह उस तबाही की कहानी बयां कर रही हैं जिसने केरल ही नहीं बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। दरअसल, सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात वायनाड में जबरदस्त बारिश आफत बन गई। रात एक बजे से 5 बजे के बीच तीन बार लैंडस्लाइड हुई और इससे पहाड़ के नीचे चेलियार नदी के कैचमेंट में बसे चार खूबसूरत गांव चूरलमाला, अट्टामाला, नूलपुझा और मुंडक्कई में तबाही आ गई।बड़े-बड़े पत्थर और मलबे में गांव के गांव चपेट में आ गए।कुछ ही देर में सैकड़ों घर मलबे का ढेर बन गए।सैलाब के रास्ते में जो आया बहता चला गया। पेड़ तक जड़ से उखड़ते चले गये।बड़े-बड़े पत्थर और मलबे में गांव के गांव चपेट में आ गए। कुछ ही देर में सैकड़ों घर मलबे का ढेर बन गए।आधी रात के बाद तबाही का वो मंजर कितना खतरनाक रहा होगा इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस जगह मंदिर हुआ करते थे वो अब सपाट हो चुकी है। मलबे से अब तक 291 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं, अभी भी लैंडस्लाइड वाले इलाकों में लोगों के फंसे होने की खबर है। इन चारों गांव में ज्यादातर चाय बागान के मजदूर रहते हैं। करीब 22 हजार की आबादी है।रात एक बजे जब पहली बार लैंडस्लाइड हुई तब लोग अपने घरों में सो रहे थे।किसी को बचने या भागने तक का मौका नहीं मिला।
इस आपदा से पहले केरल में अगस्त 2018 में आई प्राकृतिक आपदा में भी 483 लोगों की मौत हो गई थी। इस आपदा को राज्य में ‘सदी की बाढ़’ कहा गया था। इस त्रासदी में भी ना सिर्फ सैकड़ों लोगों की जान गईं थी बल्कि संपत्ति और आजीविका भी नष्ट हो गई थी। केंद्र सरकार ने 2018 की बाढ़ को ‘डिजास्टर ऑफ सीरियस नेचर’ घोषित किया था। इस हादसे के बाद 4 लाख परिवारों के 15 लाख से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों में पुनर्वासित किया गया था। कुल 57,000 हेक्टेयर कृषि फसलें नष्ट हो गईं थीं।

वायनाड में आई प्राकृतिक आपदा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि वायनाड की भौगोलिक पारिस्थितिकी को तो पहले से ही बेहद संवेदनशील माना जाता है। पश्चिमी घाट के नजदीक होने की वजह से वहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है। पश्चिमी घाट में तीव्र ढलान है और मानसून में भारी बारिश से मिट्टी ढीली और गीली हो जाती है। यह स्थिति प्राकृतिक रूप से पैदा होती है। इसे तत्काल रोका जाना तो मुश्किल है। इसके लिए एहतियाती उपाय ही किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि मानवीय हस्तक्षेप ने बारिश के प्रभाव को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। घटते हुए जंगल, लगातार हो रहे निर्माण और कम पौधारोपण होने की वजह से आपदाएं बढ़ रही हैं। रबर के पेड़ की जड़ें मिट्टी को एक साथ नहीं रख सकतीं, जबकि अन्य पेड़ मिट्टी के खिसकने की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं या पकड़ सकते हैं। पर्यावरणविदों का यह भी कहना है कि केरल से खाड़ी देशों और अन्य देशों में काम करने गए लोगों ने जब धन अपने परिवारों को भेजना शुरू किया तो धीरे-धीरे खेती कम होने लगी। पेड़-पौधे कटने लगे। प्रकृति का अंधाधुंध मनमाना दोहन किया गया है ।हरे भरे जंगल की जगह बड़े आलीशान बंगले, कोठी, फार्म हाउस खड़े हो गए और खेत खलिहान की भूमि में कॉटेज और रिजोर्ट्स बन गए। इस सबका नतीजा है कि मानसून का पैटर्न भी तेजी से अनियमित हुआ है। केरल से लेकर महाराष्ट्र तक पश्चिमी घाट पर भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं।कुछ लोग केरल की पुण्य धरा पर इस क्षेत्र में परिवर्तित डैमोग्राफी व बड़े पैमाने पर गौकशी को इस आपदा के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। प्रकृति से छेड़छाड़ मानव के मनमाने आचरण का हिस्सा बन गयी है हम संसार के मूल स्वरूप में बदलाव कर अपने अनुसार स्वरूप देना चाहते हैं जो प्रकृति को कतई स्वीकार नहीं है यह तमाम आपदाएं मानव और प्रकृति के टकराव की गवाह बन रहीं हैं। देर सवेर हमें प्रकृति के नैसर्गिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लेना होगा अन्यथा तबाही के मंजर आते रहेंगे। (विनायक फीचर्स)

गौ सांसद का दूसरा दिन पूर्ण

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आज भी 50 गौ संसदों ने लिया शपथ

New Delhi – छतरपुर तेरा पंथ दिल्ली में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगत् गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी की अध्यक्षता में आज 50 गौ सांसदों ने शपथ ग्रहण किया, पूरे भारत से आये गौ सांसदों ने गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के विल पर आज खुली चर्चा की , आकर्षण जी महाराज, ओम प्रकाश शर्म, जोगी राज गुजरात, कृष्ण गोपाल पाठक, वैद्यनाथ विश्वनाथ, देवकीनंदन पुरोहित, सुभाष मल्होत्रा, सत्यनारायण वाराणसी, क़ीमती भगत , ओम प्रकाश शर्मा, दयाशंकर महाराज, दिनेश तिवारी, जसवंत सिंह राठौड़, महेंद्र भार्गव, कार्तिक तोमर, आदेश झा, अजय भतेले, अनुराग चौधरी, अविशेख आगरा, प्रह्लाद मीणा, महेश आहूजा, देवराज, ताराचंद कोठारी, सहित अनेकों गौ सांसदों ने सदन में अनेकों सुझाव दिये गोपाल मणि ने अपने उद्वोधन में कहा की गौ पशु नहीं माता है जिसका उल्लेख भारत के सभी पौराणिक ग्रंथों में उल्लिखित है ।

पूज्यनीय शंकराचार्य जी ने गौ संसद में उन सभी प्रस्तावों को स्वीकार किया साथ ही स्वतंत्रता तिथि सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को तिरंगा फहराकर वंदेमातरम् गान किया शंकराचार्य जी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार भी उपस्थित रहे

गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह बने मुरैना श्योपुर लोकसभा से गौ सांसद

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गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा अभियान के अन्तर्गत दिल्ली में पंचदिवसीय द्वितीय गौ-संसद मे पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज व गोपाल मणि महाराज जी ने गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह को शपथ दिलाई’

गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने तथा गौहत्या मुक्त भारत बनाने हेतु संपूर्ण भारत में चलाए जा रहे महाभियान के अंतर्गत देश की राजधानी दिल्ली में द्वितीय गो संसद हो रही है। संसद मे मुरैना के गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह भी सम्मलित हुए और उन्हे मुरैना श्योपुर लोकसभा से गौ सांसद नियुक्त किया गया और गौ-संसद मे पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज की अध्यक्षता मे गोपाल मणि महाराज जी ने गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह को शपथ दिलाई सनातन धर्म में गाय को पशु नहीं अपितु माता की प्रतिष्ठा दी गई है जिसकी महिमा वेद, उपनिषद, पुराणों सहित समस्त शास्त्रों में गायी गई है और यही सनातन धर्मी हिंदुओ की पवित्र भावना है, आस्था है। इसी धार्मिक आस्था हेतु संविधान एवं कानून में गाय को पशु सूची के अपमान से हटाकर माता की प्रतिष्ठा दिलाने के लिए यह अभियान निरन्तर जारी है जिसके लिए राज्य सूची से हटाकर इसे केंद्रीय विधि की सूची में डालने की मांग हो रही है।
भारत की राजधानी दिल्ली जहां भारत की संसद कानून बनाती वहां गौमाता की पुकार को नजदीक से सुनाने के लिए गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा अभियान के क्रम में इस वर्ष द्वितीय रामा गो संसद भारत की राजधानी दिल्ली में दिनांक 2 अगस्त से 6 अगस्त तक रखी जा रही है। इस गौ संसद में देश भर के अनेकों प्रतिष्ठित संत , 543 गो सासंद सहित सेकडो लोग प्रतिभाग कर रहे है ।

गोवंश की मौतों पर गौ-सेवक का छलका दर्द

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Road Accident: बारिश के कारण देर रात मवेशी सड़क पर बैठ जाते हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है. खरीफ फसल लगने की वजह से गांव के पशुपालक भी मवेशियों को शहर की दिशा में या हाईवे की ओर खदेड़ देते हैं. इसके चलते इस तरह के हादसे हो रहे हैं. हाईवे पर आवारा मवेशियों के झुंड से रोजाना ही हादसे हो रहे हैं. कोरिया में 10 दिन में 12 से ज्यादा गौवंशों की मौत हो चुकी है.
Cow Death in Road Accident: कोरिया जिले में हाईवे (Highway) पर बैठे मवेशियों से दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. ग्राम भाड़ी में तेज रफ्तार वाहन ने हाईवे पर बैठै गौवंशों को रौंद दिया. इस सड़क हादसे (Road Accident) में 5 गायों की मौके पर मौत हो गई. वहीं 5 गंभीर रूप से घायल हैं. अज्ञात ट्रक ड्राइवर ने उन पर ट्रक चढ़ा दिया था. हादसे में 2 गायों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं कुछ घायल होकर तड़पती रहीं और कुछ देर में दम तोड़ दिया. जानकारी मिलते ही शहर के गौ-सेवक (Gau Sevak) युवा मौके पर पहुंचे और घायल मवेशियों का इलाज कराया. मृत मवेशियों को सड़क से हटाकर शुक्रवार को उन्हें दफन किया गया. शहर में नगर पालिका (Nagar Palika) की टीम मवेशियों को सड़क से हटाने का कार्य कर रही है, लेकिन शहर से बाहर मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं. खासकर आउटर में ऐसी स्थिति बनी रहती है.
बारिश में खतरा ज्यादा
बारिश के कारण देर रात मवेशी सड़क पर बैठ जाते हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है. खरीफ फसल लगने की वजह से गांव के पशुपालक भी मवेशियों को शहर की दिशा में या हाईवे की ओर खदेड़ देते हैं. इसके चलते इस तरह के हादसे हो रहे हैं. हाईवे पर आवारा मवेशियों के झुंड से रोजाना ही हादसे हो रहे हैं. कोरिया में 10 दिन में 12 से ज्यादा गौवंशों की मौत हो चुकी है.
गौ-सेवक का ऐसे छलका दर्द
शहर के गौ-सेवक अनुराग दुबे ने कहा कि भाड़ी में देर रात हादसे में 5 गौवंशों की मौत की घटना विचलित करने वाली है. 5 गौवंश घायल हैं, जिनका इलाज पशु चिकित्सा विभाग द्वारा किया जा रहा है. पशुपालकों की लापरवाही के कारण 2 महीने में जिले में 50 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है, लेकिन घटना को लेकर न तो किसान-पशुपालकों को चिंता है और न ही पंचायत व प्रशासन द्वारा पशुपालकों पर कार्रवाई हो रही है. मृत गौवंशों का अंतिम संस्कार ग्राम भाड़ी में किया गया. आए दिन इस तरह के हादसे बढ़ रहे हैं.
जिम्मेदारों का क्या कहना है?
जनपद पंचायत बैकुंठपुर के सीईओ ए पन्ना ने कहा कि हाईवे से पशुओं को हटाने के लिए अभियान चला रहे हैं. पंचायतों को भी इसे लेकर निर्देश दिया गया है. लगातार कार्रवाई के बावजूद कई बार घुमंतू पशु हाईवे पर आ जा रहे हैं. हादसे की जानकारी मिली है, प्रयास करेंगे कि आगे हादसा न हो.