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फायर एंड सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो के उद्घाटन पर मंत्री अनिल भाईदास पाटिल सहित चार हजार से अधिक प्रतिभागी की उपस्थिति

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मुंबई। फायर एंड सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो (FSIE) के उद्घाटन दिवस में 4,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और उद्योग में नवीनतम नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम की सह-मेजबानी नोवा एग्जीबिशन और कॉन्फ्रेंस और फायर एंड सेफ्टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSAI) द्वारा की गई, जिसमें सरकारी अधिकारियों, उद्योग के नेताओं और विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाया गया।

एक्सपो की भव्य उद्घाटन के अवसर पर महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री अनिल भाईदास पाटिल की उपस्थिति रही। श्री पाटिल की उपस्थिति ने पूरे देश में अग्नि, सुरक्षा और सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, उद्घाटन सत्र को सजाने वाले गणमान्य व्यक्तियों में MIDC के मुख्य अग्नि अधिकारी और सलाहकार और MFS के निदेशक संतोष वारिक, मुंबई फायर ब्रिगेड के मुख्य अग्नि अधिकारी रविंद्र अंबुलगेकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजमल नाहर, FSAI के अध्यक्ष सुरेश मेनन और FSIE के निदेशक सिद्धार्थ साराफ शामिल थे।


इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को संबोधित करते हुए, महाराष्ट्र फायर सर्विसेज ने IIT गांधीनगर के सहयोग से 20 से अधिक राज्यों के अग्नि अधिकारियों के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की, जिसमें सुरक्षा कर्मी, नौकरशाह, सलाहकार और अन्य उद्योग हितधारक शामिल थे। कार्यशाला में ईवी आग से उत्पन्न चुनौतियों और रोकथाम और शमन रणनीतियों पर चर्चा की गई।
एक्सपो में एक व्यापक सुरक्षा सम्मेलन भी शामिल था, जिसमें जोखिम शमन में नवीनतम रुझानों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई।
160 से अधिक प्रमुख ब्रांडों ने अपने नवीनतम उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करते हुए, एक्सपो ने उद्योग की प्रगति का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया। अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और विविध प्रस्तावों के साथ, फायर एंड सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो ने खुद को उद्योग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित किया है। इस कार्यक्रम ने नवीनतम प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया, ज्ञान साझा करने को बढ़ावा दिया और प्रमुख हितधारकों के बीच नेटवर्किंग के अवसरों की सुविधा प्रदान की।

गौशाला संस्थाओं को स्वावलंबी बनाएं: डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह ,गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने शुभकामनाएं दीं

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समस्त महाजन का अंतरराष्ट्रीय सेमिनार 23 अगस्त से….
गौशाला संस्थाओं को स्वावलंबी बनाएं: डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह

हाइलाइट्स:
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> भारत सरकार के एनिमल वेल्फेर बोर्ड के सहयोग से समस्त महाजन द्वारा 23 से 25 अगस्त तक धर्मज (गुजरात) और पिंडवाड़ा(राजस्थान) तक ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’का डॉ. गिरिशभाई शाह के मार्गदर्शन में आयोजन
> अजीत प्रसाद महापात्र, गोपाल आर्य, नवल किशोरजी, सुनील विदवंश, गुजरात के कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल, भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय,एनिमल वेल्फेर बोर्ड के विभिन्न राज्यों के गौ सेवा आयोग और राज्य एनिमल वेल्फेर बोर्ड आदि के अधिकारी, पदाधिकारी शामिल होंगे।
> गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने शुभकामनाएं दीं
> विभिन्न राज्यों के लगभग 500 गौशाला-पांजरापोलो -जीवदया संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
> गुजरात और राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण पर आंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

 ( गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने शुभकामनाएं दीं ) 

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित स्वयंसेवी संस्था समस्त महाजन के तत्वावधान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबोधित करते हुए भारत सरकार के पशु कल्याण विषय के सलाहकार मित्तल खेतानी डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह की ओर से संबोधित करते हुए कहा कि समूचे देश में लावारिस पशुओं की बहुत बड़ी समस्या है जिसके लिए देश भर में गौशाला का विकास करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बनाने के लिए समस्त महाजन समर्पित है और तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन कर रहा है।
भारत सरकार के भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस विषय पर विशेष विवरण देते हुए बताया कि डॉ गिरीश जयंती लाल शाह भारतीय जीवन कल्याण रोड के मार्गदर्शन में एनिमल वेलफेर बोर्ड के सहयोग से समस्त महाजन ने 23 से 25 अगस्त 2024 (शुक्रवार- शनिवार -रविवार) तक धर्मज (गुजरात) और पिंडवाड़ा (राजस्थान) तक ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ का आयोजन किया हैं। यह यात्रा गौशालाओं, पांजरापोलो के बारे में जानने-समझने और अबोल जीवों को शाता देने के लिए की गई है।
उन्होंने आगे बताया कि आज वैश्विक स्तर पर जल, जन, जमीन, जंगल, जानवरों की सेवा में कार्यरत सभी समाजों की गतिविधियों में मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, बचाव कार्य, गौशालाओं और पांजरापोलो को सहायता प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, आत्मनिर्भर कृषि, जल भंडारण शामिल हैं। जीवदया रथ, भोजन रथ, सामाजिक उत्थान, विशेषकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तत्काल सहायता, पशु वध और बलि की रोकथाम, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीवन रक्षा, गौसेवा, मानव सेवा सहित विभिन्न सेवाएँ शामिल हैं।
डॉ गिरीश जयंती लाल शाह के उद्देश्यों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, गौ सेवा गतिविधि के अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक अजीत प्रसाद महापात्रा, अखिल भारतीय पर्यावरण गितिविधि संयोजक गोपाल आर्य, अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक नवल किशोरजी, अखिल भारतीय गौसेवा क्षेत्र संयोजक सुनील विदवंश, गुजरात के कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल, पशुपालन मंत्रालय, भारत सरकार, एनिमल वेल्फेर बोर्ड ,विभिन्न राज्यों के गौ सेवा आयोग और राज्य एनिमल वेल्फेर बोर्ड आदि के अधिकारी, पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। विभिन्न राज्यों की लगभग 500 गौशालाओं-पंजारापोलो-जीवदया संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। गुजरात के जीवदयाप्रेमी मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने इस संबंध में अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं।
अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के बारे में कहा कि 23 अगस्त 2024 को यात्रा के दौरान 146 एकड़ भूमि पर घास उगाकर गांव के पशुधन का भरण-पोषण कैसे किया जाए, 6000 पशुओं को ग्राम पंचायत से मूल मूल्य पर घास मिलेगी, हर साल रु. 50 लाख की आय आदि तथा 17000 इमली, आँवला तथा आम के वृक्षों की मुलाकात तथा अहमदाबाद में सायं 5 बजे से 9 बजे तक 700 गिर गाये जहां निवास करती है ऐसी बंसी गिर गौशाला की मुलाकात, गौशाला में एक शैक्षणिक कक्षा का आयोजन किया गया है । 24 अगस्त सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक वीरमगाम में 4 तालाब, 5000 पेड़, 2700 पशुओं तथा 1200 एकड़ गौचर भूमि का दौरा और दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक गुजरात में बनासकांठा जिले के भाभर में 11000 गायों के साथ वैज्ञानिक मॉडल से बनी जलाराम गौशाला का दौरा, 25 अगस्त सुबह 9 बजे से राजस्थान आबू रोड के पास 12 बजे तक पावापुरी में 6000 गायों वाली गौशाला और 1 लाख पेड़ों की सुंदर व्यवस्था का दौरा और पिंडवाड़ा में वैज्ञानिक ढंग से निर्मित सुविधाजनक गौशाला का निरीक्षण करने की भी योजना है। जिसमें गुजरात और राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किये जायेंगे।
इसके साथ ही गौशालाओं को स्वावलंबन की ओर परिवर्तित करना, गौ-आधारित संस्कृति की पुनर्स्थापना, पशु-विकास, गौ-आधारित कृषि-स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर जन-जागरूकता, गौ-पालन, जीवदया के संबंध में विभिन्न कानूनों का निर्माण तथा मौजूदा कानून का कड़ाई से कार्यान्वयन करना, गाय संस्कृति को बढ़ावा देना, गौशाला-पंजरापोलों की बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करना, जानवरों और पक्षियों का स्वास्थ्य संरक्षण, रासायणिक कीटनाशकों के उपयोग पर प्रतिबंध, भारत में 6.50 लाख ग्राम गौचरों का विकास, देशी वृक्षों का रोपण बढ़ाना, जल संरक्षण, भावना और विज्ञान का एकीकरण, मनुष्यों में पक्षियों, पशुओं के प्रति अधिक दया पैदा करना, वर्षा जल संचयन, स्वच्छ दूध उत्पादों की उपलब्धता, फसल सुरक्षा के लिए अहिंसक स्वदेशी उपचार, शाकाहारी प्रसार के मुद्दों सहित सभी मुद्दों पर परिणामलक्षी तरीके से चर्चा की जाएगी।
यात्रा में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क रु. 1000 जिसमें तीन दिनों का आवास और भोजन शामिल है। सभी को अपने वाहन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। संस्था द्वारा की जानीवाली बस की व्यवस्था का लाभ लेना है तो रु. 1000/- अलग से भुगतान करना होगा। बस बड़ौदा या अहमदाबाद से चलेगी। इन दोनों राशियों का भुगतान अलग-अलग करना होगा।गायें हमेशा से भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं। ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ एक ऐतिहासिक प्रयास है जिसमें गाय-केंद्रित और गाय-आधारित उद्योगों से जुड़े सभी क्षेत्रों के सैकड़ों लोग भाग लेंगे। इस ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ में गाय के पंचगव्य से बने शैंपू, साबुन और गोमूत्र से बने सौंदर्य प्रसाधन, औषधि सहित गाय आधारित उत्पादों के बारे में ज्ञान और समझ प्रदान की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार के एनिमल वेलफेर बोर्ड के सदस्य डॉ. गिरीश शाह (मो. 98200 20976), भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय के मानद सलाहकार समिति सदस्य मित्तल खेताणी (मो. 98242 21999), देवेन्द्र जैन (मो. 98251 29111), डॉ. आर. बी. चौधरी (मो. 861 083 7079) का संपर्क करने की बिनती है।

पुण्य श्लोका महारानी अहिल्याबाई होल्कर

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(शिवप्रकाश-विभूति फीचर्स)

पुण्यश्लोका महारानी अहिल्याबाई होल्कर, का जीवन सादगीपूर्ण एवं शासन शैली संवेदनशील, सहज, धर्मनिष्ठ, न्यायप्रिय एवं लोक कल्याणकारी थीं। इन्हीं गुणों के कारण उनकी प्रजा उन्हें सदैव लोकमाता के रूप में देखती थी। उनके अप्रतिम गुणों को देखकर ब्रिटिश इतिहासकार जॉन केयस ने उन्हें “दार्शनिक रानी” ( The Philosopher Queen) की उपाधि दी ।
अहिल्याबाई पिता मंकोजीराव शिंदे एवं माता सुशीलाबाई के परिवार में 31 मई 1725 को जन्मी थीं। उनका जन्मस्थान चौंडी (अहमदनगर, महाराष्ट्र) था, जो अब अहिल्यानगर के नाम से ही परिवर्तित हो गया है। धनगर जाति में जन्म लेने के बाद भी उनकी प्रतिभा को पहचानकर पेशवा बाजीराव एवं मल्हारराव होल्कर दोनों के परस्पर परामर्श के उपरान्त अहिल्याबाई का विवाह मल्हारराव ने अपने पुत्र खंडेराव के साथ संपन्न कराया । युद्ध में वीरगति प्राप्त होने के कारण उनको पति वियोग सहना पड़ा । अपने जीवन काल में उन्होंने श्वसुर मल्हार राव होल्कर, नवासे ( पुत्री के पुत्र) एवं पुत्री सभी की असमय मृत्यु को देखा। इसी असहय वेदना को सहते- सहते वे स्वयं भी 70 वर्ष की उम्र में 1795 में संसार छोड़कर चली गई।

पति की मृत्यु के पश्चात अपने श्वसुर के आग्रह पर उन्होंने राजकाज सम्हालना प्रारंभ किया। उनका शासन प्रजावत्सल, न्यायप्रिय, सुशासन का प्रतीक था। धर्म के प्रति भक्ति के कारण उन्होंने अपनी राजधानी इंदौर से परिवर्तित कर पवित्र नदी नर्मदा के किनारे महेश्वर में स्थानांतरित की । उनका महेश्वर में राजधानी स्थानान्तरित करने का उद्देश्य था कि राज्य संचालन के साथ-साथ वह माँ नर्मदा की सेवा एवं आराधना कर सकें । माँ नर्मदा के किनारे उनका महल एक सर्वस्व त्यागी सन्यासिनी का महल था । जिसमें उन्होंने अपनी आयु के 28 वर्ष व्यतीत किए थे।

देश की सरकारें वर्तमान समय में अपनी आर्थिक नीतियों के केंद्र में समाज के जिस पिछड़े वर्ग के उत्थान एवं लघु उद्योग केंद्रित नीतियों का विचार करती हैं, आज से लगभग 300 वर्ष पूर्व महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस दूरदृष्टि का परिचय देते हुए 1745 में एक राजज्ञा द्वारा बुनकर, सुतार, कारीगरों से महेश्वर में निवास करने का आग्रह किया । आर्थिक विकास की दिशा में उनके द्वारा की गई अनेक पहल में से एक महेश्वर में निर्मित साड़ी आज भी संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है , जिसे महेश्वरी साड़ी के नाम से जाना जाता है । इस उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए वह स्वयं भी वहाँ निर्मित वस्त्र पहनती थी एवं देश- विदेश से आने वाले महानुभावों को भेंट स्वरूप इन्हीं वस्त्रों को प्रदान भी करती थीं । प्राकृतिक आपदा में किसानों का सहयोग, सेना के आवागमन से होने वाली फसलों की क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी उन्होंने की थी । आत्मनिर्भरता के साथ-साथ शिक्षा का केंद्र महेश्वर बने इसके लिए विद्वानों, धर्माचार्यों को बुलाकर संस्कृत पाठशाला प्रारंभ करने का कार्य भी उनके द्वारा हुआ।

मल्हारराव के युद्ध अभियानों पर जाने के उपरांत महारानी अहिल्याबाई राज्य का संचालन भी कुशलता के साथ करती थीं। पत्राचार के माध्यम से मल्हार राव को अपने राज्य के समाचार भेजना एवं प्रत्युत्तर में राज्य संचालन के लिए सुझाव लेना यह उनकी नियमित प्रक्रिया थी । सेवा एवं रसद सामग्री का प्रबंध, कर वसूली आदि की व्यवस्था बड़ी निपुणता के साथ उन्होंने की थी ।

महारानी स्त्री होने के बाद भी न केवल राज्य संचालन में निपुण बल्कि एक कुशल योद्धा भी थीं। बचपन में ही सैन्य शिक्षा, घुड़सवारी, शस्त्र संचालन उन्होंने सीखा था । राघोवा के आक्रमण के समय अपने राज्य की रक्षा के लिए कूटनीति का परिचय देते हुए उन्होंने पुराने संबंधों के आधार पर सिंधिया, भोंसले, गायकवाड आदि का सहयोग माँगा । राघोवा को उचित दंड देने के लिए 500 महिलाओं की सैन्य टुकड़ी को प्रशिक्षित भी किया । राघोवा को उनके द्वारा लिखा पत्र आज भी उनकी कूटनीतिक दूरदर्शिता को प्रकट करता है, जिसमें उन्होंने लिखा कि “आप मुझे अबला समझकर राज्य हड़पने के लिए यहां आए हैं लेकिन मेरी शक्ति आपको युद्ध क्षेत्र में ज्ञात होगी । मैं महिला सेना के साथ आपका मुकाबला करूंगी।यदि मैं युद्ध में पराजित हो गई तब मेरी हंसी और आपकी प्रशंसा कोई नहीं करेगा और यदि आप युद्ध में हार गए तो आप कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे ।” केवल राघोवा ही नहीं अपने राज्य की सीमाओं पर राजस्थान की ओर से मिलने वाली चुनौती का भी उन्होंने साहस के साथ सामना कर शत्रु को कुचलने का कार्य किया । सेना का संचालन, सैनिकों की चिकित्सा आदि भी उन्होंने कुशलता के साथ की । नाना फड़नवीस ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था कि “अब तक देवी अहिल्याबाई की धार्मिकता की प्रशंसा तो हम सुनते आए हैं मगर हम नहीं जानते थे कि वह बहादुर भी हैं अपने शत्रुओं के दांत खट्टे कर सकती हैं।”

महारानी अहिल्याबाई का शासन कठोर एवं न्यायप्रिय शासन था । उन्होंने जाति-पांति, ऊँच – नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर चोरों के भय से जनता को मुक्ति प्रदान करने वाले नौजवान से अपनी पुत्री का विवाह किया । गरीब एवं कमजोर लोगों की सेवा में वह हमेशा तत्पर रहती थी। पति की मृत्यु के पश्चात् पति की संपत्ति पर पूर्ण अधिकार की व्यवस्था एवं स्त्री को दत्तक लेने का अधिकार देना यह उनके महिला सशक्तिकरण के उदाहरण हैं । उनके राज्य में रहने वाले भीलों (जनजाति) को अपराध मुक्त करने के लिए कृषि के औजार उपलब्ध कराकर सशक्त करने का कार्य उन्होंने किया। अपराध करने पर कठोर दंड एवं समस्याओं का त्वरित समाधान यह उनके शासन की विशेषता थी । पक्षपात रहित सभी को समान न्याय उनके शासन में था । इसके लिए अपने सेनापति के पुत्र को भी अपराध करने पर उन्होंने जेल में डलवा दिया था। प्रजा को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय एवं न्यायाधीशों की नियुक्ति उन्होंने की थी। अपने राज्य कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील एवं आत्मीयतापूर्ण व्यवहार, युद्ध में वीरगति पाने वाले सैनिक परिवारों के कल्याण की व्यवस्था को राज्य कोष से करने का प्रबंध उन्होंने किया था। अपने प्रति कठोर जीवन जीते हुए, प्रजा का पुत्र की तरह पालन, लोक कल्याण की योजनाएं एवं न्यायप्रियता के कारण उनको लोकमाता की उपाधि मिली ।

राज्य संचालन में अनेक गुण होने के बाद भी उनका शासन मूलतः धर्म अधिष्ठित शासन था । जहां उनके व्यक्तिगत जीवन में सेवा, त्याग -तपस्या एवं दान का महत्व था वहीं उन्होंने मंदिरों के जीर्णोद्धार, उनकी स्थायी आर्थिक व्यवस्था, यात्रियों के लिए विश्राम स्थल एवं अन्न क्षेत्र स्थापित कराए। अपना राज्य भगवान शिव को समर्पित कर वह उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन चलातीं थी। हिमालय में स्थित भगवान बद्रीनाथ, केदारनाथ , दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारिका से लेकर पूर्व में जगन्नाथ पुरी तक उनके द्वारा चलाए सेवा कार्य आज भी प्रसिद्ध है । तीर्थ स्थानों पर गंगाजल भिजवाने की व्यवस्था देश को एक सूत्र में बांधती दिखाई देती है । काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार सहित देश के लगभग समस्त तीर्थक्षेत्रों के विकास, हरिद्वार के गंगा घाटों सहित देश भर की नदियों के किनारे सैकड़ो स्थानों पर उन्होंने पक्के घाटों का निर्माण कराकर तीर्थ यात्रियों के लिए उचित स्नान की व्यवस्था करायी। समस्त अगणित धार्मिक कार्य वह अपने भाग में प्राप्त संपत्ति के द्वारा कराती थी । वह दीन- दुखी, गरीबों के लिए समर्पित निष्ठावान कर्मयोगी थी।

दक्षिण के प्रसिद्ध इतिहासकार रायबहादुर चिंतामणि विनायक वैद्य ने महारानी के संदर्भ में लिखा है कि वह लोकोत्तर स्त्री अपने अनेक गुणों के कारण महाराष्ट्र के लिए ही नहीं वरन् समूची मानवजाति के लिए भूषण रूप हुई है । इंदौर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अपने उद्बोधन में कहा था कि “मैं देवी अहिल्याबाई को भी नमन करता हूं उनका पुण्य स्मरण करता हूं। देवी अहिल्याबाई ने शासन संचालन में छोटी-छोटी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी, उनके जीवन का एक-एक अध्याय इतना प्रेरक होता है कि आने वाली पीढ़ियों को उनसे सीख मिलती रहेगी । लोकमाता महारानी अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेकर उनकी 300 वीं जयंती के अवसर पर हम उनके दिखाये मार्ग का अनुसरण करते हुए एकात्म, समृद्ध, समरस एवं शक्तिशाली भारत का निर्माण करें तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए विश्व कल्याण करने का संकल्प लें । महारानी अहिल्याबाई होल्कर को उनकी 300वीं जन्म-जयंती पर यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेखक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री हैं। (विभूति फीचर्स)

फिल्म संगीत के नींव के पत्थर हैं अनूप बोरलिया

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(डॉ.मुकेश कबीर-विनायक फीचर्स)

किसी फिल्म के बनने में जितना योगदान पर्दे पर दिखने वाले कलाकारों का होता है उससे कहीं अधिक योगदान पर्दे के पीछे काम करने वालों का होता है।ठीक उसी तरह जैसे किसी भवन निर्माण की आंतरिक साज सज्जा तो हमें दिखाई देती है लेकिन नींव के पत्थर और भवन तराशने वाले कारीगरों का योगदान हमें दिखाई नहीं देता। पर्दे के पीछे काम करने वालों का फिल्म संगीत में भी बहुत बड़ा योगदान होता है।कुछ कलाकर फिल्म संगीत में वही भूमिका निभाते हैं जो माला में धागा निभाता है,वह बाहर से दिखाई तो नहीं देता लेकिन माला का सारा वजूद धागे पर ही टिका होता है, ऐसा ही एक नाम है फिल्म संगीतकार अनूप सिंह बोरलिया का जिन्होंने कई फिल्मी गीतों में ढोलक वादक और परकनिष्ट (जो कई वाद्य यंत्रों को बजाने में कुशल होता है)की भूमिका निभाई है।

राम तेरी गंगा मैली से शुरू हुआ अनूप जी का सफर आज भी जारी है,इन्होंने इस दौरान हिना,आशिकी,साजन, बंटी और बबली जैसी अनेक फिल्मों के अलावा महान धारावाहिक रामायण में भी ढोलक वादन किया है। फिल्म संगीत के मामले में अनूप जी आज देश के सर्वश्रेष्ठ परकनिष्ट हैं जो ढोलक के साथ ही ढपली, मटकी, घुंघरू, मादल और विदेशी लोक वाद्य एंकलुंग भी बजाते हैं।इनकी इसी खूबी के कारण बड़े बड़े संगीतकारों ने इनको हमेशा अपने साथ रखा है, फिर चाहे रविंद्र जैन हों या लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की महान जोड़ी, अनूप जी के बिना रिकॉर्डिंग नहीं करते थे। रविंद्र जैन के साथ तो उनका वैसा ही रिश्ता रहा जैसा सुर के साथ ताल का होता है, दोनों हमेशा साथ रहे, रविन्द्र जैन तो रियाज भी अनूप जी के साथ ही करते थे और लता जी जैसी महान गायिका भी रिहर्सल और रिकॉर्डिंग में अनूप जी के साथ गाती थीं।रविंद्र जी के मशहूर गीत राम तेरी गंगा मैली हो गई और सुन साहिबा सुन पर वह थाप अनूप जी ने ही दी है,जिस पर मंदाकिनी नाची हैं। अनूप जी उन चंद संगीतकारों में से एक हैं जो फिल्म संगीत और क्लासिकल दोनों के महारथी हैं, फिल्मों में उन्होंने जहां रविंद्र जैन, लक्ष्मी कांत-प्यारेलाल, आदेश श्रीवास्तव, अनु मलिक,अजय अतुल जैसे अनेक बड़े संगीतकारों को रिदम दी तो वहीं उन्होंने क्लासिकल के मशहूर तालवाद्य कचहरी में भी अहम भूमिका निभाई जिसका संयोजन प्रसिद्ध पखावज वादक अखिलेश गुंदेचा करते हैं,बचपन के इन दोनों मित्रों की तालवाद्य कचहरी शास्त्रीय संगीत जगत में बहुत प्रतिष्ठित है ।

अनूप जी चार दशक फिल्मनगरी में रहने के बाद आजकल ज्यादा वक्त अपने गृह नगर उज्जैन में बिताते हैं जहां उनका उद्देश्य ताल वाद्य में एक नई पौध तैयार करना है । वे अपने स्टूडेंट्स को ढोलक,तबला, ढपली, मादल,घुंघरू सभी वाद्य सिखाते हैं। अनूप जी एचएमवी के लिए पुराने फिल्मी गीतों का ताल संयोजन भी कर चुके हैं जिनके कैसेट्स और सीडी बहुत पॉपुलर हुए ,पुराने फिल्मी गीतों पर अपने स्टूडेंट्स के साथ नई ताल देकर अनूप जी जो रील अपलोड करते हैं वह सोशल मीडिया पर लाखों की संख्या में देखी जाती हैं।

अनूप जी अथाह ज्ञान के सागर हैं।उन्होंने बहुत बड़े बड़े संगीतकारों के साथ काम किया है ,उन्हें फिल्म संगीत की वे सारी बारीकियां मालूम हैं जो संगीत को मधुर और कर्णप्रिय बनाती हैं।आजकल के बड़े बड़े संगीतकार भी ये बारीकियां अपने संगीत में उपयोग नहीं कर पाते इसीलिए अनूप जी के पास सीखने वालों की भीड़ रहती है। अनूप जी को पिछले वर्ष श्री श्री रविशंकर के फाउंडेशन द्वारा कला सारथी सम्मान भी दिया जा चुका है जो प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने दिया था। अनूप बारोलिया संगीत नाटक अकादमी से भी अनुबंधित गुरु हैं।वे यहां अकादमी द्वारा छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को लोक वाद्यों की शिक्षा देते हैं।

मध्यप्रदेश की धरती ने फिल्म संगीत में लता जी ,किशोर कुमार और प्रदीप जी जैसे महान संगीतकार दिए हैं उसी कड़ी में बेशक अनूप जी का नाम भी लिया जा सकता है क्योंकि अनूप बोरलिया जी का योगदान इन महान कलाकारों से बिल्कुल कम नही है बस फर्क यही है कि अनूप जी ने जो भी किया परदे के पीछे किया लेकिन साधना तो साधना है इसलिए सरकार और कलाकार दोनों को अनूप जी जैसे कला साधकों का सम्मान जरूर करना चाहिए क्योंकि गाना कितना भी खूबसूरत हो ताल के बिना अधूरा होता है और फिल्म संगीत के उसी अधूरेपन को पूर्ण करने वाले साधक का नाम है अनूप सिंह बोरलिया।

अनूप बोरलिया की फिल्में

राम तेरी गंगा मैली,हिना,आशिकी, साजन,राम लखन, खलनायक, विवाह, खुदा गवाह, लम्हे, बंटी और बबली,चंद्रमुखी (मराठी) और महान धारावाहिक रामायण, श्रीकृष्णा।(लेखक गीतकार हैं)(विनायक फीचर्स)

कंतारा चैप्टर 1′ में दमदार एक्शन सीक्वेंस होंगे शामिल

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                           होम्बले फिल्म्स के बैनर तले बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कंतारा चैप्टर 1’ का फर्स्ट-लुक टीज़र जारी किए जाने के बाद इस फिल्म का चौथा शेड्यूल बहुत जल्द ही शुरू होने वाला है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस शेड्यूल में बड़े पैमाने पर एक्शन सीक्वेंस शूट किए जाएंगे, जिससे सिनेदर्शकों को फिल्म के विज़ुअल और सिनेमैटिक अनुभव का दिव्य आनंद लेने का मौका मिलेगा। वैसे पूर्व में जारी फर्स्ट-लुक टीज़र में अभिनेता ऋषभ शेट्टी एक थ्रिलिंग और इंटेंस अवतार में दिखाई दे रहे हैं। इस फिल्म के टीजर को मिले व्यूज को लेकर मेकर्स काफी उत्साहित हैं। विदित हो कि ‘कंतारा चैप्टर 1’ के पूर्व फिल्म ‘कंतारा’ 2022 के 70वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट’ का अवॉर्ड हासिल कर चुकी है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

21वीं पशुधन गणना को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित

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पशुपालन और डेयरी विभाग ने हिमाचल प्रदेश के राज्य स्तर और जिला स्तर के नोडल अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के लिए सॉफ्टवेयर और नस्लों पर आधारित 21वीं पशुधन गणना का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया

भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन और डेयरी विभाग और मेजबान राज्य हिमाचल प्रदेश ने “हिमाचल प्रदेश” के राज्य स्तर और जिला स्तर के नोडल अधिकारियों (एसएनओ/डीएनओ) तथा पर्यवेक्षकों के लिए सॉफ्टवेयर (मोबाइल और वेब एप्लीकेशन/डैशबोर्ड) और नस्लों पर आधारित 21वीं पशुधन गणना को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया। हिमाचल प्रदेश के शिमला में आज कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में राज्य स्तर और जिला स्तर के नोडल अधिकारियों (एसएनओ/डीएनओ) और पर्यवेक्षकों को 21वीं पशुधन गणना के संचालन के लिए नए लॉन्च किए गए मोबाइल और वेब एप्लीकेशन पर प्रशिक्षित किया गया। 21वीं पशुधन गणना सितंबर-दिसंबर 2024 के दौरान निर्धारित है।

मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्री चंद्र कुमार, हिमाचल प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग के सचिव श्री राकेश कंवर ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारत सरकार के पशुपालन   सांख्यिकी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निदेशक श्री वी पी सिंह, आईसीएआर-एनबीएजीआर के निदेशक डॉ.  बी पी मिश्रा और हिमाचल प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा भी उपस्थित थे।

राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलन के साथ समारोह की शुरुआत हुई।  इस समारोह को इन प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया और पशुधन गणना के संचालन के लिए जिला और राज्य स्तर के नोडल कार्यालयों के सफल प्रशिक्षण की दिशा में एक सहयोगी प्रयास के लिए मंच तैयार किया।

श्री चंद्र कुमार ने अपने संबोधन में इस कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला, सटीक और कुशल डेटा संग्रह के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने 21वीं पशुधन गणना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया, जो पशुपालन क्षेत्र की भविष्य की नीतियों और कार्यक्रमों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उनसे पशुधन गणना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम तकनीकों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

श्री राकेश कंवर ने प्रयोगशाला में व्यापक प्रशिक्षण के साथ-साथ जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के उद्योग और खाद्य सुरक्षा के लिए पशुधन क्षेत्र के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने पशुधन गणना की सावधानीपूर्वक योजना बनाने और क्रियान्वयन का आह्वान किया तथा इस बात पर बल दिया कि एकत्रित आंकड़े भविष्य की पहलों को आकार देने और क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यशाला में पशुपालन सांख्यिकी प्रभाग द्वारा 21वीं पशुधन गणना के संक्षिप्त विवरण के साथ कई सत्र आयोजित किए गए। जिसके बाद डॉ. बी. पी. मिश्रा और आईसीएआर- राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) की टीम ने पशुधन गणना में शामिल की जाने वाली प्रजातियों की नस्लों के विवरण पर विस्तृत प्रस्तुति दी। नस्ल की सटीक पहचान के महत्व पर जोर दिया गया, जो पशुधन क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्रमों में इस्तेमाल किए जाने वाले सटीक आंकड़े तैयार करने और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के राष्ट्रीय संकेतक संरचना (एनआईएफ) के लिए महत्वपूर्ण है।

अपने संबोधन में श्री वी.पी. सिंह ने पशुधन क्षेत्र में टिकाऊ प्रणालियों को आपस में जोड़े जाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पशुधन गणना के बाद प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण और तार्किक इस्तेमाल भविष्य की विभागीय नीतियों को तैयार करने और कार्यक्रमों को लागू करने के साथ- साथ पशुपालन के क्षेत्र में पशुपालकों के लाभ के लिए नई योजनाएं बनाने और रोजगार पैदा करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

श्री प्रदीप कुमार ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पूरे भारत में दूध उत्पादन में सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने पर प्रकाश डाला।  उन्होंने कहा कि पशुधन किस प्रकार किसानों के वित्तीय सशक्तिकरण में योगदान देता है तथा उनकी नकदी आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करता है। उन्होंने पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों, जैसे कि सेक्स-सॉर्टेड वीर्य के उपयोग के बारे में भी बात की। उन्होंने सभी राज्यों से आए प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें सफल प्रशिक्षण सत्र की शुभकामनाएं दीं।

कार्यशाला में भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग की सॉफ्टवेयर टीम द्वारा  21वीं पशुधन गणना के सॉफ्टवेयर के तरीकों और लाइव एप्लीकेशन पर विस्तृत सत्र शामिल थे। इसमें राज्य और जिला स्तर के नोडल अधिकारियों के लिए मोबाइल एप्लीकेशन और डैशबोर्ड सॉफ्टवेयर पर प्रशिक्षण दिया गया। ये नोडल अधिकारी अपने-अपने जिला मुख्यालयों पर पशुधन गणनाकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण आयोजित करेंगे।

हिमाचल प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों के प्रति उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया और इस उम्मीद के साथ समापन किया कि पशुधन गणना अभियान सफल होगा।


बंद कंटेनर में ठूंस-ठूंस कर ले जाए जा रहे थे 31 गोवंश, 30 की मौत

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Karauli News:  राजस्थान के करौली जिले के टोडाभीम थाना पुलिस ने गौ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने मंगलवार तड़के सुबह 4.30 बजे हिंडौन से गायों से भरा एक कंटेनर ट्रक जब्त किया है. जिसे फुलवाड़ा स्थित गौशाला में लाया गया है. यहां कंटेनर ट्रक की तलाशी लेने के बाद जो दृश्य सामने आया उससे पुलिस भी चिंतित हो गई. उसमें सवार 31 गायें मृत पाई गईं. जिसमें से सिर्फ 1 की जान बची है. जिसके बाद थाना पुलिस ने तुरंत हिंडौन पशु चिकित्सालय से डॉक्टरों की टीम गौशाला में भेजी.

 गौवंशों से भरा एक पेड़ के सहारे था खड़ा

मामले को लेकर टोडाभीम थाने के एएसआई बनेसिंह ने बताया कि बीते सोमवार रात करीब डेढ़ बजे उन्हें सूचना मिली कि एक ट्रक गोवंश से भरा हुआ सुनसान जगह पर खड़ा हुआ  है.  सूचना देने वाले ने उन्हें फोन पर बताया गया कि जिले के बालाजी घाटी पर गोवंश से भरा एक ट्रक घाटी की दीवार से टकराकर पेड़ के सहारे खड़ा है. यह सूचना मिलने के बाद वे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे.

वाहन चालक मौके पर से था फरार

इस बीच पुलिस के साथ मथुरा और भरतपुर से कुछ गौ-सेवक भी ट्रक का पीछा करते हुए वहां पहुंच गए. मौके पर पहुंची पुलिस ने जब पेड़ से टकराए ट्रक की जांच की तो पता चला कि हादसे के तुरंत बाद ही चालक मौके से फरार हो गया था. इसके बाद गौ-सेवकों की मदद से कंटेनर ट्रक को हिंडौन के फुलवाड़ा स्थित गौशाला पहुंचाया गया.

30 गैवंश कंटेनर में ठूंसे पड़े मिले मृत

इसके बाद थाने में जांच के दौरान कंटेनर में 30 मवेशी मृत अवस्था में मिले. जिसके बाद पुलिस अधिकारी ने जिला पशु अस्पताल के डॉक्टर को जांच के लिए बुलाया. जांच के बाद डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि सभी मवेशियों की मौत दम घुटने से हुई है. इन्हें ट्रैक्टर ट्रॉली और जेसीबी के जरिए तेली की पंसेरी ले जाकर जमीन में दफना दिया गया. पुलिस ने बताया कि ट्रक नंबर के आधार पर मालिक की तलाश की जाएगी. फिलहाल घटना को अंजाम देने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. और मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी है.

त्तर प्रदेश गौरक्षा दल ने चलाया अभियान घायल पीड़ित गोवंश उपचार

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उत्तर प्रदेश गौरक्षा दल ने चलाया अभियान घायल पीड़ित गोवंश उपचार के लिए 24 घंटे तैयार 19/08/2024 रक्षाबंधन के दिन गौबांस के उपचार करने में लगे गौरक्षक जनपद बरेली से फर्रुखाबाद 112 किलोमीटर पहुंचा गौ सेवक गौ माता का उपचार करने के लिए विशाल सक्सेना शिव मौर्य स्थानिया व्यक्ति शिवम् अवस्थी अंकित अवस्थी के सहयोग से हुआ उपचार .

डॉ. मीहिर कुलकर्णी निर्मित और देव गिल अभिनीत फिल्म “अहो विक्रमार्का” का टीजर हुआ रिलीज

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मुम्बई। फिल्म निर्माता डॉ. मीहिर कुलकर्णी की फिल्म “अहो विक्रमार्का” 30 अगस्त 2024 को 5 भाषाओं में पैन इंडिया रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म का टीज़र और मोशन पोस्टर 21 अगस्त 2024 को जी7 मल्टीप्लेक्स बांद्रा, मुम्बई में लॉन्च किया गया।

एक बहादुर और दृढ़निश्चयी पुलिसकर्मी की वीरतापूर्ण कहानी को इस फिल्म के माध्यम से दर्शक देख सकते हैं। यह फिल्म मराठी, तेलगु, हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम और बंगाली में सिनेमाघरों में रिलीज होगी।


यह फिल्म मीहिर कुलकर्णी, आरती गिल और अश्विनी कुमार मिश्रा द्वारा प्रोड्यूस की गई है और फिल्म के संगीतकार रवि बसरूर हैं।
महाराष्ट्र का बेटा और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय दिग्गज अभिनेता देव गिल अब महाराष्ट्र के दिलों पर राज करने आ रहे हैं।
अभिनेता देव गिल और एस एस राजामौली फिल्म्स के एसोसिएट निर्देशक पेटा त्रिकोटी द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म का टीज़र जबरदस्त है।
उल्लेखनीय है कि इस फिल्म के प्रोड्यूसर डॉ. मीहिर कुलकर्णी प्रसिद्ध समाजसेवी और परोपकारी व्यक्ति हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के बालेगांव को गोद लिया है। परोपकार और सामुदायिक विकास के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए ग्रेविटी ग्रुप के दूरदर्शी अध्यक्ष डॉ. मीहिर कुलकर्णी ने महाराष्ट्र के वैजापुर में बालेगांव के सूखा प्रभावित क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर गोद ले लिया है। भारत के सबसे युवा उद्यमियों में से एक डॉ. मीहिर कुलकर्णी अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। मीहिर कुलकर्णी को उनके परोपकारी प्रयासों के लिए मान्यता मिली है और उन्हें राजस्थान विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हुई है। प्राइड ऑफ महाराष्ट्र जैसे कई पुरस्कार उनके प्रभावशाली योगदान के प्रमाण हैं। अब वह फिल्म निर्माता के रूप में इतना बड़ा प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं जिसके टीज़र ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है।

– संतोष साहू

नेस्को में ताइवान एक्सीलेंस की प्रदर्शनी “ऑटोमेशन एक्सपो 2024” में फैक्‍ट्री ऑटोमेशन के नए-नए प्रोडक्‍ट्स का प्रदर्शन

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मुंबई। मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में 21 से 24 अगस्त तक आयोजित ताइवान एक्सीलेंस की प्रदर्शनी ऑटोमेशन एक्सपो 2024 ने लोगों का ध्यान फिर अपनी ओर आकर्षित किया है। इस वर्ष ताइवान एक्सीलेंस के पवेलियन में मशीनरी, ऑटोमेशन, इक्विपमेंट एंड कंपोनेंट्स, इंडस्ट्रियल पीसी और आईओटी डिवाइसेज के क्षेत्र में फैक्ट्री ऑटोमेशन की नवीनतम प्रगति का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस इवेंट में प्रोडक्‍ट लॉन्‍च सेशन “टुगेदर फॉर ऑटोमेशन एक्सीलेंस” रखा गया था। यहां एडवांटेक, हाईविन, जंबो लेज़र, मीन वेल और प्लैनेट जैसे टॉप ब्रांड्स ने अपने सबसे नए प्रॉडक्ट्स को लॉन्च किया। इसमें मुख्य रूप से मॉड्यूलर टीपीसी सीरीज़, पर्यावरण-अनुकूल समाधान, रोबोटिक ऑटोमेशन के क्षेत्र में हुई प्रगति और अत्याधुनिक बिजली आपूर्ति के उपकरण शामिल थे। इन कंपनियों के विशेषज्ञों ने मेहमानों के साथ बातचीत की और उन्हें यह समझाया कि स्मार्ट ऑटोमेशन किस तरह निर्माण प्रक्रिया में क्रांति ला सकता है और स्मार्ट फैक्ट्रियां बना सकता है।

ताइवान ने डिजिटल और स्थिर निर्माण के प्रति मुख्य रूप से अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। ताइवान आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक जनरल होमर चांग ने भारत की ऑटोमेशन की चुनौतियों का मुकाबला करने में ताइवान की भूमिका पर जोर दिया।
चांग ने कहा, “ताइवान के ऑटोमेशन और मशीनरी सोल्यूशन, डिजिटलाइजेशन, कस्टमाइजेशन के साथ किफायत का एक आदर्श मिश्रण पेश करते हैं। एआई, रोबोटिक विजन और आईओटी को शामिल करके, हमारी कंपनियां इंटेलिजेंट तरीके से मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोसेस को बढ़ावा देती हैं। हमें विश्वास है कि भारत के औद्योगिक बदलाव के लिए ताइवान एक रणनीतिक साझेदार हो सकता है।”

भारत में ताइवान के प्रॉडक्ट्स के निर्यात में हो रही बढ़ोतरी से ताइवान और भारत के बीच मजबूत आर्थिक संबंध नजर आते हैं। जनवरी से मई 2024 तक ताइवान के भारत को निर्यात में दो अंकों की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई और यह 28.1% तक पहुंच गया। इसी अवधि में, केवल चिप का निर्यात 49.4% बढ़ा, जो ताइवान के भारत को कुल निर्यात का 36% से अधिक हिस्सा है। इससे उन्नत तकनीक के लिए ताइवान पर बढ़ती निर्भरता का पता चलता है।

इस वर्ष ताइवान एक्सीलेंस के पवेलियन में ताइवान के प्रमुख ब्रांड्स के प्रॉडक्ट्स का प्रदर्शन किया गया। इनमें एएईओएन, एडवांटेक, सी एंड टी, हाइविन, आईसीपी, डीएएस, कानफॉन, केएसएस, मेन ड्राइव, मीनवेल, प्लैनेट, सिंटेक (लीनटेक, जंबो लेजर) टेकमैन रोबोट, टोयो रोबोट, यूनिटेक और विनमेट शामिल हैं। ताइवान ने भारत के फलते-फूलते निर्माण क्षेत्र के साथ साझेदारी करने और नए-नए आविष्‍कार करने के प्रति अपने समर्पण का प्रदर्शन किया। जब भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता जा रहा है, ऐसे समय में ताइवान और भारत के बीच साझेदारी आपसी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करने का वादा करती है।

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