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श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देश के सभी श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं ।

श्री अमित शाह ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि देश के सभी श्रमिक जनों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में बनीं ये संहिताएँ श्रम कानूनों के इतिहास का सबसे बड़ा रिफॉर्म है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समाजिक सुरक्षा, महिला श्रमिकों को समान अवसर की गारंटी तथा गिग और असंगठित श्रमिकों को कानूनी पहचान देने वाली ये संहिताएँ श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाएँगी। साथ ही, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को भी गति देकर दुनिया के श्रम कानूनों के लिए रोल मॉडल बनेंगी। इन ऐतिहासिक संहिताओं के लिए मोदी जी का आभार।

हरित सागर और अमृत मिशन के अनुरूप, डेटा-आधारित जल प्रबंधन में क्रांति लाने की दिशा में कदम

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भारत को मिला एआई-पावर्ड जलाशय प्रबंधन का नया समाधान – क्लियरबोट का स्मार्ट रोबोट बेड़ा

मुंबई। भारत की सतत और तकनीक आधारित जलाशय पुर्नजीवन निश्चय को मजबूत करते हुए, बेंगलुरु स्थित क्लियर रोबोटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 25 एआई-संचालित स्वायत्त “क्लियरबोट्स” का पहला बेड़ा लॉन्च किया है, जो भारत के हरित सागर और अटल मिशन फॉर रीजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) के उद्देश्यों के अनुरूप है।

ये उन्नत इलेक्ट्रिक, मानव रहित समुद्री रोबोट जल निकायों के प्रबंधन में परिवर्तन लाने के लिए बनाए गए हैं, जो पारंपरिक प्रतिक्रियात्मक सफाई तरीकों से आगे बढ़ते हुए, डेटा-आधारित पर्यावरणीय निगरानी और सुधार को सक्षम करते हैं, जिससे यह कार्य तीन गुना अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन जाता है।

वर्तमान में कई प्रमुख सरकारी परियोजनाओं में लागू किए गए ये अगली पीढ़ी के क्लियरबोट्स समुद्री कार्यों की सुरक्षा, दक्षता और बुद्धिमत्ता को बढ़ा रहे हैं। ये तैरता कचरा, जलकुंभी और अवांछित खरपतवार हटाने के साथ-साथ बाथिमेट्रिक सर्वे, ड्राफ्ट सर्वे और रियल-टाइम पानी की गुणवत्ता जांच भी करते हैं—वह भी बिना किसी निकास के और बिना मानव जीवन को जोखिम में डाले।

भारत के कई सरकारी निकाय—जैसे कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (मुंबई), बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी), गया नगर निगम, अडूर नगरपालिका और मेघालय सरकार के तहत काम करने वाली मेघालयन एज लिमिटेड —ने सतत जलमार्ग प्रबंधन के लिए क्लियर रोबोटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड. के साथ हाथ मिलाया है। मुंबई क्षेत्र में कंपनी राम एनवायरो एंड इन्फ्रा एलएलपी के साथ साझेदारी करके व्यापक समर्थन प्रदान करती है।

मुंबई के जेएनपीए में क्लियरबोट क्लास 3 ने अक्टूबर 2024 से 6.5 टन से अधिक कचरा हटाया है, जिससे भारत के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में समुद्री कचरा प्रबंधन में सुधार हुआ है।

बीएमसी ने गेटवे ऑफ इंडिया और बधवार पार्क, कफ परेड में क्लास 3 की दो इकाइयाँ तैनात की हैं, जो समुद्री तटों को साफ और टिकाऊ बनाए रखने में मदद कर रही हैं।

ओएनजीसी ने क्लास 2 क्लियरबोट खरीदा और बाद में इसे ठाणे नगर निगम को दान किया, जहाँ यह शहर के कचरा प्रबंधन अभियान के तहत नियमित झील सफाई में उपयोग किया जा रहा है।

बिहार के गया में, पितृपक्ष मेले के दौरान एक क्लियरबोट क्लास 2 ने सिर्फ 15 दिनों में 5.5 टन कचरा हटाया, जिससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ध्यान आकर्षित हुआ और उन्होंने स्थल पर पहुँचकर इस पोत को कार्य करते हुए देखा।

दक्षिण भारत में, अडूर (केरल) में अमृत मिशन के तहत क्लियरबोट एलीगेटर ने 44 दिनों में 14,164 वर्गमीटर क्षेत्र में फैली अफ्रीकी खरपतवारों को हटाया, जो प्रतिदिन लगभग 500 वर्गमीटर औसत है।

मेघालय में उमियम झील पर, मेघालयन एज लिमिटेड और स्मार्ट विलेज मूवमेंट (एसवीएम) के तहत, क्लियरबोट क्लास 3 ने मई 2024 से अब तक 44 टन से अधिक कचरा हटाया है, जिससे पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और पर्यटन की संभावनाएँ बढ़ी हैं।

क्लियरबोट का इलेक्ट्रिक, शून्य-उत्सर्जन बेड़ा तीन प्रकार के पोतों से बना है—एलीगेटर, क्लास 2 और क्लास 3—हर मॉडल को विभिन्न प्रकार के सफाई और सर्वेक्षण कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

क्लियरबोट एलीगेटर, जो बेड़े का सबसे बड़ा मॉडल है, प्रतिदिन 500 वर्गमीटर तक पानी साफ कर सकता है और एक बार में लगभग एक टन जलकुंभी और खरपतवार इकट्ठा कर सकता है।

कॉम्पैक्ट क्लास 2 पोत संकरी और उथली जलधाराओं के लिए बनाया गया है और एक मिशन में 150 किलोग्राम तक भार ले जा सकता है। क्लास 3 मॉडल अधिकतम परिचालन सीमा के लिए तैयार किया गया है और अपनी मजबूत बनावट के कारण यह खुले जल में, तेज धाराओं में और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में प्रभावी रूप से कार्य कर सकता है।

क्लास 2 और क्लास 3 दोनों आठ घंटे तक संचालित हो सकते हैं और इनमें स्वायत्त नेविगेशन, ऑन-बोर्ड कैमरे, रियल-टाइम मैपिंग और अवरोध पहचान प्रणाली शामिल है, जो मिशनों को सुरक्षित और प्रभावी बनाती है।

सभी क्लियरबोट पोत पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं और विभिन्न प्रकार के समुद्री सर्वेक्षणों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। एआई-आधारित मिशन योजना और रिपोर्टिंग प्रणाली उन्हें उपयोग में सरल बनाती है और इन्हें मामूली अभ्यास के साथ ही नगरपालिका और बंदरगाह प्राधिकरणों द्वारा अपनाया जा सकता है।

एकीकृत प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन पानी के नीचे का डेटा एकत्र करती है, जो प्रभावी बंदरगाह और जल प्रबंधन के लिए आवश्यक है—जैसे नौवहन चार्ट अपडेट करना, समुद्र तल में बदलाव की निगरानी करना और पानी के नीचे की संरचनाओं का निरीक्षण करना। इसके अलावा, ऑन-बोर्ड सेंसर प्रदूषक, घुलित ऑक्सीजन, सैलिनिटी, तापमान और pH जैसे प्रमुख पानी की गुणवत्ता संकेतकों को निरंतर मापते हैं। यह प्रदूषण की शुरुआती पहचान में मदद करता है और डेटा-आधारित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देता है। क्लियरबोट की पारदर्शी और बुद्धिमान प्रदूषण निगरानी प्रणाली फिलीपींस में भी पायलट आधार पर लागू की जा रही है, जो दुनिया भर में स्वच्छ और स्मार्ट समुद्री संचालन को आगे बढ़ाने की इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

क्लियरबोट के पोत उन्नत पर्यावरणीय सेंसरों और एकीकृत ऑटोनॉमस मरीन सर्वे सिस्टम (एएमएसएस) से लैस हैं, जो उन्हें कचरा संग्रह से आगे की भूमिकाओं के लिए सक्षम बनाते हैं। सेंसर लगातार पानी की गुणवत्ता जैसे प्रदूषक, घुलित ऑक्सीजन, लवणता, तापमान और pH स्तर की निगरानी करते हैं, जिससे प्रदूषण की शुरुआती पहचान और सूचित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है। वहीं, एएमएसएस उच्च-रिज़ॉल्यूशन पानी के नीचे का डेटा कैप्चर करता है, ताकि नौवहन चार्ट अपडेट किए जा सकें और समुद्र तल में बदलाव की निगरानी की जा सके, जिससे सुरक्षित नौवहन और अधिक कुशल ड्रेजिंग संचालन सुनिश्चित होता है।

क्लियर रोबोटिक्स के सीईओ सिद्धांत गुप्ता ने कहा, “जेएनपीए, बीएमसी और अन्य प्राधिकरणों के साथ हमारी साझेदारियाँ सिर्फ सफाई संचालन से आगे बढ़कर भारत में समुद्री शासन को नई दिशा देने का प्रयास हैं। 25 क्लियरबोट्स के पहले बेड़े को अपनाया जाना यह साबित करता है कि भारत को अपने महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा के लिए स्वदेशी, स्केलेबल एआई समाधानों की अत्यधिक आवश्यकता है। इस सहयोग के माध्यम से, हम देश के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक नया राष्ट्रीय मानदंड स्थापित कर रहे हैं।”

क्लियर रोबोटिक्स के सीटीओ उत्कर्ष गोयल ने कहा, “क्लियरबोट्स की असली शक्ति उस रियल-टाइम पर्यावरणीय डेटा में है जो वे उत्पन्न करते हैं—बाथिमेट्रिक मैपिंग से लेकर विस्तृत पानी की गुणवत्ता गहरी समझ तक। यह बंदरगाहों और शहरी प्रबंधन को प्रतिक्रियात्मक सफाई से आगे बढ़ाकर सक्रिय, डेटा-आधारित हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है। महत्वपूर्ण रूप से, यह तकनीक खतरनाक सर्वेक्षण और सफाई कार्यों को स्वचालित करके समुद्री संचालन को तीन गुना अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रही है।”

जब भारत अपने सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत कर रहा है, ऐसे में क्लियरबोट जैसे इनोवेटर के साथ साझेदारी देश में जल निकायों की निगरानी और पुनर्स्थापन को नई दिशा दे रही है, जिससे देश भर में अधिक स्मार्ट, स्वच्छ और हरित समुद्री संचालन का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

कृषि मंत्री से मिले डॉ. अखिल जैन

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कृषि मंत्री राम विचार नेताम से मनोहर गौशाला के ट्रस्टी और जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार के मानद प्रतिनिधि डॉ. अखिल जैन (पदम डाकलिया) ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने साधना के लिए गोबर से निर्मित सूर्य उपासना पात्र , गोबर की वैदिक माला, फसल अमृत, मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड, गाय एक वरदान पुस्तक, जैन दुपट्टा आदरपूर्वक भेंट की। कृषि मंत्री ने मनोहर गौशाला में होने वाले रिसर्च और बनने वाले उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. जैन का गौ संरक्षण, जैविक खेती, भारतीय परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता सच में प्रेरणादायी है।

गौ-सेवा से सुधरेंगे कैदी तिहाड़ जेल में गौशाला

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पश्चिमी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में अब कैदियों के साथ गायों को भी आश्रय मिलेगा। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने राज्य के गृह मंत्री आशीष सूद और जेल महानिदेशक एसबीके सिंह की मौजूदगी में जेल नंबर 7 में गौशाला का उद्घाटन किया।

नई गौशाला में फिलहाल 10 साहीवाल गायें हैं। हालाँकि नई गौशाला आकार और क्षमता में छोटी है, लेकिन 250 एकड़ के तिहाड़ परिसर में बड़ी गौशालाएँ खोलने की संभावना तलाशने का काम जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। सरकार को उम्मीद है कि इससे सड़कों पर आवारा गायों को आश्रय देने वाली गौशालाओं की कमी दूर होगी।

जेल प्रशासन का मानना है कि गौशाला न केवल गायों को आश्रय प्रदान करेगी, बल्कि उनके संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गौवंश की सेवा से कैदियों के मन से नकारात्मकता दूर होगी और करुणा का भाव जागृत होगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप गाय जैसे पालतू जानवर की सेवा करते हैं, तो इस सेवा के दौरान जो करुणा जागृत होती है, वह आपके भीतर नैतिकता भी जगाती है और तनाव को दूर करती है। उपराज्यपाल ने गौशाला के आर्थिक लाभों के बारे में भी बताया। आशीष सूद ने कहा कि जिन कैदियों से मिलने वाला कोई नहीं है, उनके लिए गाय का स्पर्श और सेवा मानसिक शांति प्रदान करती है। यह एक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध चिकित्सा पद्धति है।

तीन अन्य सुविधाओं का उद्घाटन

जेल मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में तीन डिजिटल पहलों का उद्घाटन किया गया। इसमें एक इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली शामिल है। इस सुविधा से सभी को दवाइयाँ, राशन और कपड़े रीयल-टाइम उपलब्ध होंगे। स्टॉक खत्म होने से पहले सभी को समय पर अलर्ट प्राप्त होंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि एक जेल में किसी वस्तु का अतिरिक्त स्टॉक है और दूसरी जेल में खत्म हो रहा है, तो वे दूसरी जेल के स्टॉक का उपयोग कर सकेंगे।

इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। उद्घाटन की गई दूसरी पहल को एनजीओ पोर्टल कहा जाता है। देश भर के एनजीओ इस पोर्टल पर मुफ्त पंजीकरण कर सकेंगे और कैदियों के पुनर्वास के लिए अपनी गतिविधियों को अपलोड कर सकेंगे। इससे जेलों और एनजीओ के बीच सहयोग बढ़ेगा। एक अन्य पहल के तहत टीजे उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री भी शुरू की गई है।

‘अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट’ ने महाराष्ट्र के उद्यमियों में किया नई ऊर्जा, नया विज़न और नई दिशा निर्माण

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लोनावला। मुंबई के समीप लोनावला में हाल ही में आयोजित चार दिवसीय भव्य कार्यशाला ‘अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट’ ने महाराष्ट्र के उद्यमियों में नई ऊर्जा, नया विज़न और नई दिशा निर्माण किया।

इस परिवर्तनकारी कार्यक्रम का नेतृत्व बिज़नेस कोच व अध्यात्मिक मार्गदर्शक देविदास श्रावण नाइकरे ने किया। उनका संदेश था कि बिज़नेस का असली उद्देश्य सिर्फ प्रॉफिट नहीं, बल्कि समाज को आगे ले जाना है।

वर्कशॉप में उद्यमियों को विभिन्न विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया।
जिसमें बिज़नेस चक्र मॉडल, माइंडसेट री-प्रोग्रामिंग व मेडिटेशन, टीम नेतृत्व एवं परफॉर्मन्स स्ट्रक्चर, ब्रांडिंग, ऑटोमेशन और बिज़नेस सिस्टम्स, रेवेन्यू ग्रोथ फ्रेमवर्क, स्पिरिचुअल लीडरशिप और स्थिरता, जैसे भिन्न भिन्न एवं अर्थपूर्ण विषयों का समावेश रहा।

कार्यक्रम के समापन समारोह में महाराष्ट्र के चयनित टॉप उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने और उद्यमियों का हौसला बुलंद करने करने के लिए बॉलीवुड अभिनेता अली खान और शाहबाज खान को श्रवण देवीदास नाईकरे ने विशेष रूप से लोनावाला आमंत्रित किया।

अभिनेता अली खान ने कहा कि यह अवॉर्ड आपकी सफलता का नहीं, बल्कि आपके इरादों और सेवा-भाव का सम्मान है।

शाहबाज खान ने कहा कि उद्यमी सिर्फ अपने परिवार का नहीं, बल्कि समाज का भविष्य बनाते हैं।

पूरे कार्यक्रम का सार एक ही था —“सच्चा नेतृत्व वह है जो दूसरों के रास्ते रोशन करे।

होम्योपैथी के फार्माकोपिया आयोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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भारतीय औषधि एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग (पीसीआईएमएंडएच) ने आज आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) द्वारा वित्त पोषित क्षेत्रीय कच्चे औषधि भंडार (आरआरडीआर) – गंगा मैदानी क्षेत्र परियोजना के अंतर्गत “एएसयूएंडएच के फार्माकोपियाल मापदंडों” पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

पीसीआईएमएंडएच के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह ने अपने स्वागत भाषण में प्रतिभागियों को आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (एएसयूएंडएच) औषधियों के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में आयोग द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों और हाल की कोशिशों के बारे में जानकारी दी।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, एनएमपीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच ने एएसयू एंड एच प्रणालियों की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में प्राकृतिक औषधियों की गुणवत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आरआरडीआर विकसित करने में पीसीआईएम एंड एच द्वारा की गई प्रगति की सराहना की और बताया कि एनएमपीबी, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के सहयोग से, एएसयू एंड एच औषधियों के लिए भारतीय निर्देशक द्रव्य विकसित कर रहा है। उन्होंने क्यूआर-कोड सक्षम डेटाबेस के साथ विषयगत औषधीय पादप उद्यान स्थापित करने के लिए पीसीआईएम एंड एच की भी सराहना की।

डीआरडीआर के पूर्व एसोसिएट निदेशक डॉ. राजेंद्र सिंह ने एएसयूएंडएच दवाओं की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति को रेखांकित किया और फार्माकोपियल और फार्मूलरी मानकों की स्थापना में पीसीआईएमएंडएच की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।

पीसीआईएमएंडएच की प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (फार्माकोग्नॉसी) डॉ. ए. जयंती ने गंगा मैदानी आरआरडीआर परियोजना के अंतर्गत गतिविधियों का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पीसीआईएमएंडएच वर्तमान में अपने भंडार में 523 प्रामाणिक कच्ची औषधियों के नमूने और एएसयूएंडएच औषधियों की 218 प्रजातियों के लगभग 1,000 हर्बेरियम नमूने संरक्षित कर रहा है।

कार्यक्रम में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें दिल्ली के जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय, गाजियाबाद के  राज कुमार गोयल प्रौद्योगिकी संस्थान, जीएस आयुर्वेद कॉलेज, संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी, नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), ग्रेटर नोएडा से बैक्सन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, आईएमएस गाजियाबाद आदि संस्थानों ने प्रतिनिधित्व किया ।

तकनीकी सत्रों में आरआरडीआर परियोजना के सलाहकार डॉ. मुकेश कुमार द्वारा “औषधीय पौधों की वर्गीकरण संबंधी पहचान”; पीसीआईएम एंड एच के पीएसओ डॉ. ए. जयंती द्वारा “फार्माकोग्नॉस्टिक मापदंडों द्वारा प्राकृतिक दवाओं की पहचान”; पीसीआईएम एंड एच के पीएसओ डॉ. एससी वर्मा द्वारा “पारंपरिक दवाओं का गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता मूल्यांकन”; और माइक्रोबायोलॉजी के एसओ डॉ. एम. रमेश द्वारा “एएसयू एंड एच दवाओं का माइक्रोबियल विश्लेषण” पर विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल थे।

तकनीकी सत्रों के बाद, प्रतिभागियों को फार्माकोग्नॉसी, रसायन विज्ञान और सूक्ष्म जीव विज्ञान प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया और एएसयूएंडएच औषधियों के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण में प्रयुक्त प्रमुख उपकरणों का प्रदर्शन भी दिखाया गया। हर्बल गार्डन, क्षेत्रीय कच्ची औषधि भंडार और बीज बैंक का भी अवलोकन कराया गया।

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वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जयंती – खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

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(डॉ. राघवेंद्र शर्मा-विनायक फीचर्स)

​भारत के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि युगों-युगों तक प्रेरणा के स्रोत बने रहते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के, ‘मनु’ से ‘महारानी’ और फिर ‘वीरांगना’ बनने तक का सफर, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसे हर भारतीय गर्व से याद करता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला में अपने जीवन की आहुति दे देने वाली इस असाधारण महिला का जीवन, शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का जीवंत उदाहरण है।
​रानी लक्ष्मीबाई का जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी ‘हड़प नीति’ और अन्य कुटिल चालों से भारतीय रियासतों को निगल रही थी। एक साधारण पृष्ठभूमि से आकर, शास्त्रों के साथ शस्त्रों की शिक्षा ग्रहण करने वाली मणिकर्णिका (मनु) का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर से हुआ और वह ‘लक्ष्मीबाई’ बन गईं। झांसी की रानी के रूप में उन्होंने केवल राज-काज ही नहीं संभाला, बल्कि उस समय की रूढ़िवादी सामाजिक बेड़ियों को भी तोड़कर घुड़सवारी, तलवारबाजी और सैन्य प्रशिक्षण में अपनी निपुणता सिद्ध की।

​ स्वाभिमान का शंखनाद
रानी के जीवन का निर्णायक मोड़ तब आया जब राजा गंगाधर राव के निधन के बाद, लॉर्ड डलहौज़ी ने दत्तक पुत्र दामोदर राव को झाँसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने की घोषणा की। यहीं से एक रानी का वीरांगना के रूप में उदय हुआ। रानी लक्ष्मीबाई ने गर्जना की, “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी!” यह केवल एक वाक्य नहीं था, बल्कि भारतीय स्वाभिमान का वह शंखनाद था, जिसने सोए हुए राष्ट्र को जगाया।
​ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध उनकी अडिगता और विरोध ने उन्हें उस महासंग्राम का केंद्रीय चेहरा बना दिया, जिसने भारत में अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी। रानी ने एक ऐसी सेना का गठन किया जिसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध किया। झलकारी बाई जैसी उनकी सहयोगी ने नारी शक्ति और निष्ठा का नया मानदंड स्थापित किया।
​रणक्षेत्र में अद्वितीय पराक्रम

झाँसी के किले पर जनरल ह्यूरोज़ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना के आक्रमण का रानी ने जिस अद्भुत साहस से सामना किया, वह आज भी रोमांच भर देता है। भारी संख्या बल और आधुनिक हथियारों से लैस अंग्रेजों के सामने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ डटे रहना, रानी की अदम्य इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। किले से बाल-पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बांधकर, घोड़े पर सवार होकर उनका निकलना, साहस और मातृत्व की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
​झाँसी से निकलकर, कालपी और ग्वालियर तक उन्होंने विद्रोही ताकतों का नेतृत्व किया। तात्या टोपे जैसे महान योद्धाओं के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। ग्वालियर में, वीरगति प्राप्त करने से ठीक पहले, रानी ने अपने अंतिम युद्ध में जो शौर्य दिखाया, उसने जनरल ह्यूरोज़ को भी कहने पर मजबूर कर दिया कि “विद्रोहियों में वह अकेली मर्द थी।” मात्र 29 वर्ष की अल्पायु में 18 जून 1858 को उनका बलिदान हुआ, लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया।

​विरासत और प्रेरणा
​ रानी लक्ष्मीबाई का जीवन और उनका बलिदान, भारतीय इतिहास की एक अमिट छाप है। वह न केवल स्वतंत्रता संग्राम की नायिका हैं, बल्कि वह हर उस भारतीय महिला के लिए प्रतीक हैं जिसने अपनी पहचान, अधिकार और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया है। उनकी गाथा हमें सिखाती है कि नेतृत्व लिंग या उम्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि साहस, संकल्प और न्याय के प्रति समर्पण से आता है।
​उनकी स्मृति में ‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’ दिए जाते हैं, जो महिला सशक्तिकरण और असाधारण वीरता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करते हैं। यह पुरस्कार हमें याद दिलाते हैं कि रानी की आत्मा आज भी उन महिलाओं में जीवित है जो अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाती हैं और अपने अधिकारों के लिए लड़ती हैं।
​आज जब राष्ट्र एक सशक्त और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है, हमें रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। हमें उनके निर्भीक स्वभाव, दूरदर्शिता, और राष्ट्रप्रेम को अपने आचरण में उतारना चाहिए। उनका यह आदर्श कि, “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है,” हमें आज भी हर प्रकार के शोषण और अन्याय के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देता है।
​सच ही कहा गया है-
​बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
​वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का शौर्य हमेशा हमें याद दिलाएगा कि मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उनका नाम अमर है। (विनायक फीचर्स)

गोपालन एक सबसे बड़ा व्यवसाय बनते जा रहा है

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गोपालन एक सबसे बड़ा व्यवसाय बनते जा रहा है. खासकर युवाओं में यह ट्रेंड सबसे अधिक चल रहा है. ऐसे में जब भी लोग गाय खरीदने जाते हैं. वह एक बार जरूर पूछते हैं कि यह कितने ब्यान है कि और यह कितना दूध देती है. इस हिसाब से भी गाय का दाम तय होता है.
लेकिन कभी आपने सोचा है की गाय कितने ब्यान तक दूध बढ़ा सकती है. यह एक बड़ा ही महत्वपूर्ण बात है गाय की खरीदारी में. अगर गाय एक ब्यान की है तो क्या अगले बार बच्चे को जन्म देने के बाद भी इतना ही दूध करेगी या इससे दूध और बढ़ाएगी.
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक राजेश कुमार ने लोकल 18 से बताया कि देखिए गोपालन एक मुनाफे दायक व्यवसाय है. उन्होंने बताया कि अगर गाय पहली ब्यान में 10 लीटर कर रही है और आप उसको खाना सही से देते हैं तो जरूर अगले ब्यान में वह 14 लीटर जाएगी. उन्होंने बताया कि 3 ब्यान तक गाय की क्षमता है कि वह दूध बढ़ा सकती है. तीसरे ब्यान में अगर 20 लीटर दूध करेगी तो उसके बाद वह सब दिन 20 लीटर तक रह जायेगी. क्योकि दूध देने वाला हरेक इस तीसरे ब्यान तक खुल जाती है. इसलिए तीसरे ब्यान के बाद गाय दूध नहीं बढ़ाती है. इसलिए जो दाम गाय का दो ब्यान तक मिलता है उसके बाद वह दाम नहीं मिल पाता है.
उन्होंने यह भी बताया कि एक बात हमेशा ध्यान में रखे कि अगर आप गाय को एक समान खाना हमेशा दे रहे हैं तो आप गाय पालन में फ्लोफ नहीं कीजियेगा. ये गाय पालन करने वाले सभी किसानों को ध्यान देना चाहिए कि अब दूध नहीं कर रही है तो उसका भोजन कम कर दें नहीं. आप उसको उस समय भी वही भोजन देते रहें. उसके बाद आपको रिजल्ट हर हमेशा अच्छा मिलेगा. गाय का चारा अगर ठीक है तो वह लंबे समय तक दूध भी देती है और आगे दूध बढ़ाती भी रहती है.

उत्तर प्रदेश – गौ-तस्कर गिरोह का पर्दाफाश

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पुलिस और अंतरजनपदीय गौ-तस्कर गिरोह के सदस्यों के बीच शनिवार देर रात भीषण मुठभेड़ हो गई। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब स्वाट टीम (SWAT), जंगीपुर और बिरनो थाना की संयुक्त पुलिस बल ने गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर गौ तस्करों का पीछा किया और जंगीपुर थाना क्षेत्र के देवकठिया मोड़ के पास उन्हें घेर लिया। अधिकारियों ने बताया कि खुद को चारों ओर से घिरा हुआ देख तस्करों ने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीन गौ तस्करों को गोली लग गई और वे घायल हो गए। मुठभेड़ के बाद कुल छह गौ तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुठभेड़ के दौरान घायल हुए तीन तस्करों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी निगरानी की जा रही है। डीएसपी पश्चिमी सुचित्रा कुमारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पकड़े गए छह गौ तस्करों के पास से भारी मात्रा में अवैध सामान बरामद हुआ है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन अवैध तमंचे, कई जिंदा और खोखा कारतूस, एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप वाहन जब्त किया है। इसके अलावा, तस्करों के पास से छह गोवंश (गाय) भी बरामद किए गए हैं, जिन्हें वे अवैध तस्करी के लिए ले जा रहे थे। इस गिरोह में शामिल सभी सदस्य आसपास के कई जिलों में गौ तस्करी को लेकर सक्रिय थे।

जंगीपुर और बिरनो थाना की पुलिस और स्वाट टीम की इस संयुक्त कार्रवाई को अंतरजनपदीय गौ-तस्कर गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये तस्कर विभिन्न जिलों से गोवंश की तस्करी करते थे और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचते थे। पकड़े गए तस्करों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके नेटवर्क की जानकारी हासिल करने के लिए गहन पूछताछ की जा रही है। इस ऑपरेशन ने पुलिस की सामूहिक कार्रवाई क्षमता को दर्शाता है और यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठित अपराध और अवैध तस्करी के खिलाफ पुलिस बल पूरी तरह से सक्रिय और तैयार है।

हर घर सुरक्षित 2025 अभियान के अंतर्गत गोदरेज ने लॉन्च किया ‘एक्सिडेंटल इन्विटेशन’ पहल

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स्मार्ट होम ग्रोथ को 20% तक बढ़ाने के लिए नियो डिजिटल लॉक्स रेंज को पेश किया

मुंबई। गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के प्रमुख व्यवसाय लॉक्स एंड आर्किटेक्चरल सॉल्यूशंस (LAS) ने अपने फ्लैगशिप अभियान हर घर सुरक्षित के 9 वे साल का में प्रवेश करते हुए इसके बड़े विस्तार की घोषणा की। यह विस्तार LAS की तेजी से बढ़ते स्मार्ट होम सेगमेंट में आक्रामक एंट्री को दर्शाता है, जहां कंपनी डिजिटल लॉक्स के मजबूत पोर्टफोलियो के साथ डबल-डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। भारत के मास-प्रिमियम उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट सुरक्षा समाधान को लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से ब्रांड ‘मेड इन इंडिया’ डिजिटल लॉक्स की अपनी रेंज में डिज़ाइन और कीमत, दोनों में नवाचार पर केंद्रित है।

डिजिटल लॉक्स कैटेगरी में गोदरेज ने 36% CAGR के साथ उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और बाजार में अग्रणी स्थिति बनाए रखी है।
हर घर सुरक्षित पहल, जो गोदरेज का प्रमुख होम सेफ्टी अवेयरनेस प्रोग्राम है, की लॉन्चिंग के अवसर पर ब्रांड ने ‘एक्सिडेंटल इन्विटेशन ऐप’ पेश किया। यह एक अद्वितीय और शक्तिशाली डिजिटल पहल है, जिसे नागरिकों को सोशल मीडिया पर ओवरशेयरिंग से जुड़े घरेलू सुरक्षा जोखिमों के प्रति जागरूक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मेटा के साथ साझेदारी में विकसित, यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को एक पर्सनलाइज़्ड ‘एक्सीडेंटल इन्विटेशन स्कोर’ प्रदान करता है, जो बताता है कि उनकी ऑनलाइन शेयरिंग आदतों से उनके घर की सुरक्षा पर कितना खतरा मंडरा सकता है। इसके साथ ही, यह प्लेटफॉर्म व्यक्तिगत सुरक्षा ज़रूरतों के अनुरूप विशेषज्ञ-निर्मित सुरक्षा समाधान भी उपलब्ध कराता है। यह कैंपेन पूरी तरह से एआई-संचालित है, जिसमें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों पर आधारित प्रभावशाली फिल्में शामिल हैं। आज के अति-जुड़े डिजिटल युग में, वास्तविक सुरक्षा केवल दरवाज़ों पर ताले लगाने से नहीं, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही दुनिया में सजग और ज़िम्मेदार व्यवहार अपनाने से शुरू होती है। यह पहल लोगों को यह महत्वपूर्ण संदेश देती है कि डिजिटल सतर्कता ही आपके घर का नया सुरक्षा कवच है।

भारत में सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराध पिछले पांच वर्षों में लगभग तीन गुना हो चुके हैं। साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा न सिर्फ सुरक्षा के लिए, बल्कि सुविधा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है। इसी के तहत गोदरेज ने कई किफायती डिजिटल लॉक्स पेश किए हैं। नई नियो डिजिटल लॉक्स रेंज आधुनिक भारतीय घरों के लिए इंटेलिजेंट सुरक्षा का अगला चरण है। अत्याधुनिक तकनीक, आकर्षक डिज़ाइन और किफायत का संयोजन करते हुए यह रेंज इन-बिल्ट वीडियो डोर फोन, वाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, मल्टीपल एक्सेस मोड, एंटी-थेफ्ट अलार्म और इमरजेंसी पावर बैकअप जैसे फीचर्स के साथ आती है। 8,999 रुपये से शुरू होने वाली कीमतों के साथ नियो रेंज उन शहरी उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करती है जो सुविधा, सुरक्षा और स्टाइल को एक साथ चाहते हैं।

इस अवसर पर श्याम मोटवानी (बिजनेस हेड, एलएएस, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप) ने कहा, “पिछले आठ वर्षों से हर घर सुरक्षित ने होम सेफ्टी को संयुक्त जिम्मेदारी के रूप में स्थापित किया है। एक्सीडेंटल इन्विटेशन ऐप के माध्यम से हम इस मिशन को डिजिटल दुनिया तक विस्तारित कर रहे हैं। नियो डिजिटल लॉक्स रेंज का लॉन्च आधुनिक भारतीय घरों के लिए बुद्धिमान सुरक्षा को नए सिरे से परिभाषित करने और स्मार्ट होम कैटेगरी में हमारी ग्रोथ को तेज करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
हम अपनी प्रमुख पहल ‘हर घर सुरक्षित’ के माध्यम से होम सेफ्टी में क्रांति ला रहे हैं। अब तक 1.7 लाख से अधिक होम सेफ्टी चेक-अप पूरे किए जा चुके हैं, जिसमें अकेले वित्त वर्ष 2026 में 21,000+ चेक-अप शामिल हैं। यह पहल स्मार्ट सुरक्षा समाधानों के प्रति जागरूकता और उन्हें अपनाने को लगातार बढ़ावा दे रही है। इस प्रयास से हमें वर्ष-दर-वर्ष डबल-डिजिट ग्रोथ मिली है और पिछले वर्ष डिजिटल सुरक्षा समाधानों को अपनाने में 30% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डिजिटल लॉक्स कैटेगरी से बढ़ते राजस्व योगदान के साथ, यह सफलता घरेलू सुरक्षा क्षेत्र में गोदरेज की नेतृत्वकारी स्थिति और सशक्त बिज़नेस परफॉर्मेंस को स्पष्ट रूप से मजबूत करती है। नियो डिजिटल लॉक्स रेंज का लॉन्च इस कैटेगरी की ग्रोथ को और तेज करेगा तथा भारत के तेजी से बढ़ते स्मार्ट होम मार्केट में गोदरेज की हिस्सेदारी बढ़ाएगा।

ऐप लिंक – https://accidental-invitation.in/
फिल्म लिंक –
• https://youtu.be/xFCQ4RNDL9c
• https://youtu.be/eu8tks9EHQg
• https://youtu.be/_aR4xoSMEAs