दमोह: हिन्दू धर्म में गाय को गौ माता कहकर संबोधित किया जाता है, जिसमें 33 कोटि देवी देवताओं का वास माना गया है. कहा जाता है यदि व्यक्ति अलग-अलग देवी देवता की भक्ति करने की बजाए 1 गाय की निस्वार्थ भाव से सेवा करता है तो 33 कोटि देवी देवताओं का आशीर्वाद उसके परिवार पर बना रहता है.

दमोह जिले में ऐसा ही एक यादव परिवार है, जो जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर जरुआ गांव का रहने वाला है. इस परिवार के प्रत्येक व्यक्ति ने निस्वार्थ भाव से गौ सेवा के लिए जीने का संकल्प लिया है. परिवार के एक नौजवान हल्ले भाई यादव बीते 10-15 सालों से बिना किसी सरकारी सहायता के करीब 100 गायों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते आ रहे हैं.

हल्ले भाई यादव का पूरा परिवार गौ भक्त
दरअसल, हल्ले भाई के पिता हल्लू यादव जिनकी उम्र करीब 59 से 60 साल है. उन्होंने गौ सेवा भाव की शुरुआत की थी. उनके दोनों बेटे ने भी सेवा भाव को आगे बढ़ाया. हल्ले ने बताया कि बरसात के दिनों में गायों को चराने की जिम्मेदारी बड़े भाई और पिता की होती है. वहीं, गर्मियों के दिनों में गायों की देखरेख का जिम्मा उन्हें सौंप दिया जाता है. इस इलाके में मवेशियों से लेकर आम जनता के लिए भी पेयजल की बहुत समस्या है. चूंकि जिस राजस्व की जमीन पर हल्ले भाई का परिवार अन्न उगाता है, उसके नजदीक से एक नाला निकला हुआ है. जिसमें बने कुंड में साल भर पानी बना रहता है. जहां सारे मवेशी एक एक कर पानी पीते हैं.

घर का एक-एक पैसा गौ सेवा में
हल्ले भाई यादव ने बताया कि उनके पास निजी जमीन नहीं है, कुछ जमीन जो राजस्व विभाग की है, उसी पर फसलों की बुवाई कर लेते हैं. इससे भूसा का इंतजाम हो जाता है. इसके अलावा गांव में जिन खेतों में कृषि कार्य नहीं होता, उन खेतों में उगने वाली खरपतवार, हरी घास की रखवाली कर लेते हैं, जिसे काटकर जमा कर लेते हैं. इसके अलावा जो गायों के गोबर से जैविक खाद बनती है, उसे किसानों को बेचकर कुछ पैसे मिल जाते हैं. इन सभी उपायों को अपनाकर जो भी जमा पूंजी इकट्ठा होती है, सभी की सभी गौ माता की सेवा में लगा देते हैं. वर्तमान समय में करीब 5 गाय दुधारू है और 10 बैल हैं.

Report By अर्पित बड़कुल News 18

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