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श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए चीन की ‘कर्ज नीति’ जिम्मेदार, अमेरिकी थिंक टैंक ने किया सतर्क

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वाशिंगटन, एएनआइ। श्रीलंका में गहराते आर्थिक संकट के बीच एक अमेरिकी थिंक टैंक ने कहा है कि द्वीपीय राष्ट्र को अपनी अर्थव्यस्था को बचाने के लिए फिर से विचार करने की जरूरत है, जो चीनी कर्ज के जाल में उलझती जा रही है। वाशिंगटन स्थित ग्लोबल स्ट्रैट व्यू ने अपने विश्लेषण में कहा कि श्रीलंका का वित्तीय संकट, मानवीय संकट की ओर बढ़ रहा है और आखिरकार देश को दिवालियापन की तरफ धकेल देगा। कई विश्लेषकों का मानना है कि देश के वित्तीय संकट के लिए प्रारंभिक तौर पर चीन की कर्ज के जाल में फांसने वाली नीति जिम्मेदार है।

विदेशी कर्ज का बोझ सात अरब डालर के पार

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका का विदेशी कर्ज वर्ष 2014 (जीडीपी का 30 प्रतिशत) के बाद धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू हुआ और वर्ष 2019 में सकल घरेलू उत्पाद का 41.3 प्रतिशत हो गया। द्वीपीय राष्ट्र के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेजी से गिरावट आ रही है और अब सिर्फ 1.6 अरब डालर रह गई है। इससे महज कुछ हफ्तों तक बेहद जरूरी सामग्री का आयात किया जा सकता है। द्वीपीय राष्ट्र पर विदेशी कर्ज का बोझ सात अरब डालर को पार कर गया है, इनमें जनवरी में 50 करोड़ डालर व जुलाई में एक अरब डालर के बांड का भुगतान शामिल है।

श्रीलंका में बढ़ी महंगाई

श्रीलंका में नवंबर 2021 में महंगाई दर 9.9 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में 12.1 फीसद हो गई। इस अवधि में खाद्य सामग्री 22 प्रतिशत महंगी हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी संकट से गुजर रहे द्वीपीय राष्ट्र के आयातकों को अत्यावश्यक सामग्री के कार्गो कंटेनरों के लिए भुगतान करने में परेशानी हो रही है, जबकि निर्माताओं तक कच्ची सामग्री भी नहीं पहुंच पा रही है।

बीआरआइ ने भी किया श्रीलंका को खस्ताहाल

ग्लोबल स्ट्रैट व्यू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था की खस्ताहाली के लिए चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ) भी जिम्मेदार है। चीन द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं के कारण श्रीलंका कर्ज के जाल में फंसता चला गया। चीन को दुनिया के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाली बीआरआइ परियोजना के तहत ड्रैगन विभिन्न देशों को बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए कर्ज उपलब्ध करा रहा है। हंबनटोटा पोर्ट परियोजना का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, श्रीलंका का चौथा सबसे बड़ा कर्जदाता बन गया है।

मात्र गाय का दूध ही नन्ने बच्चे को पिलाया जाता

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हे इंसान, अगर तू सच्चा इंसान है, हिन्दू, मुस्लिम सिख ईसाई, पारसी या और कोई – इस धरती माँ के किसी भी हिस्से में रहता है, कोई भी भाषा बोलता है, मांसाहारी है या शाकाहारी ! कहीं न कहीं किसी भी अवस्था में गाय का दूध जरूर पीता है ! बचपन में माँ के स्तनों से दूध प्रचूर मात्रा में न मिलने के कारण, बच्चे को जल्दी हजम होने वाला गाय के दूध से ही पाला जाता है ! बड़े होने पर उसे चाय, काफी, मिल्क शेख, ठंडाई में भी दूध की जरूरत पड़ती है ! गांधी जी ने जन्मभर बकरी का दूध पीया है, आज तक किसी राजनेता, धर्मगुरु, संत महात्मा ने बकरी को माँ का दर्जा नहीं दिया ! भैंस का दूध, गाय का दूध, बकरी का दूध यहां तक भेद का दूध और ऊँट तक का दूध इंसान इस्तेमाल करता है !

किसी राजनेता, धर्माधिकारी, संत महात्मा ने गाय के अलावा किसी को माँ का दर्जा नहीं दिया ! क्यों ? कहते हैं जब देव – दानवों ने समुद्र मंथन किया था और १४ रत्न समुद्र से निकले थे, उन रत्नों में एक रत्न काम धेनु नाम की गाय भी शामिल थी ! रामायण की एक कथा के अनुसार सत्यनारायण विष्णु भगवान् ने यह कामधेनु गाय महर्षि वशिष्ट जी (जो बाद में भगवान् राम के परिवार के सम्मानीय पुरोहित हुए ) को दे दी थी ! ये गाय महर्षि वशिष्ट जी को पत्नी सहित सारे आश्रम वासियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराती थी ! उन दिनों अयोध्या नरेश विश्वामित्र हुआ करते थे ! उन्हें आखेट खेलने का बड़ा शौक था ! एक बार वे अपनी सैना के साथ जंगल में आखेट को गए, रात होगई, जंगल घना था, भटकते हुए वे महर्षि वशिष्ट जी के आश्रम में पंहुच गए ! आश्रम में महर्षि वशिष्ट जी ने पत्नी सहित अयोध्यापति महाराज विश्वामित्र जी का स्वागत किया और सारे सैनिकों सहित विश्वामित्र जी को खान-पान और सोने तक का बेहतरीन इंतजाम करके दिखा दिया ! अगली सुबह महाराज विश्वमित्र जी ने ब्रह्मऋषि का धन्यवाद किया, साथ ही यह भी पूछ लिया की ‘आश्रम में आपने इतने सारे लोगों की उनकी हैसियत के मुताबिक़ शाकाहारी पौष्टिक,भोजन और रात को सोने की इतनी उच्च कोटि की व्यवस्था कैसे की ? महर्षि वशिष्ट जी ने सारा श्रेय कामधेनु को दे दिया ! सम्राट विश्वामित्र जी के मन में खोट आगया, उनहोंने सोचा, “इतने उच्च कोटि की सर्वगुण संपन्न कामधेनु गाय यहां आश्रम में शोभा नहीं दे रही है, इसे तो अयोध्या नरेश के निजी गौशाला की शोभा बढ़ानी चाहिए” .

प्रकट में उन्होंने महर्षि वशिष्ट जी से कहा, “ऋषिवर, आश्रम में ये देवलोक की गाय शोभाहीन होगई है, इसकी असली जगह अयोध्या नरेश के गौशाला में है, आप इसे मुझे दे दीजिये और बदले में जितना धन, सोना चांदी चाहिए, ले लीजिए ” ! लेकिन वशिष्ट जी ने गाय देने से इंकार कर दिया ! विश्वामित्र जी ने भी कामधेनु गाय को जबरन उठाने की ठान ली और अपनी पूरी सैनिक शक्ति गाय को अपनी राजधानी ले जाने के लिए लगा दी ! महाराजा के इस कुकृत से कामधेनु गाय ने रूष्ट होकर जितने सैनिक थे उतने ही रूप बनाकर सारे सैनिकों को घायल कर धरती पर गिरा दिया ! महाराज विश्वामित्र इस अप्रत्याशित हार से आहत हुए और बिना कामधेनु गाय के ही अपने घायल सैनिकों के साथ अयोध्या लौट गए ! राजधानी लौटते ही उनहोंने अपना राजपाट अपने पुत्र को सौंप दिया और स्वयं भगवा वस्त्र धारण करके वे ब्रह्म ऋषि बनने के लिए तपस्या करने के लिए जंगल में चले गए ! यह केवल कहानी ही नहीं है, बल्कि पौराणिक कथाओं में अंकित है ! मां के दूध के बाद बच्चे की पाचन शक्ति को दुरुस्त करने के लिए मात्र गाय का दूध ही नन्ने बच्चे को पिलाया जाता है !

भैंस या बकरी का दूध नन्ने दुधमुंहे बच्चे को नहीं पिलाया जाता ! गांधी जी केवल बकरी का ही दूध पीते थे आम जनता भैंस का दूध पीती है लेकिन कोइ “भैंस माता या बकरी माता नहीं कहता” ! गौ माता का लालन पालन मात्र एक धर्म या जाति विशेष के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता ! समाचारों और टी वी चैंनलों में दिखाया जाता है, रामदेव बाबा के आश्रम में बहुत सारी गाएं पाली जाती हैं और शुद्ध दूध और गाय का घी जनता तक पहुंचाया जाता है ! बहुत सारे मुस्लिम धर्मालम्बी परिवार भी गाय पालते हैं और उनकी देख भाल और सेवा ठीक ऐसे ही की जाती है जैसे हिन्दू करते हैं ! पाठकों को शायद याद होगा, भारतीय राजनीति में सबसे पहले कांग्रेस ने अपना चुनाव चिन्ह दो बैलों की जोड़ी ली थी, भारत कृषि प्रधान देश है, इस प्रकार ये चिन्ह जनता की आस्थाओं से जुड़ा हुआ था, नरेंद्र देव, जय प्रकाश नारायण, डाक्टर राम मनोहर लोहिया.

उन दिनों प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े थे जिनका चुनाव चिन्ह वरगद का पेड़ था ! लेकिन हर बार कांग्रेस की बैलों की जोड़ी ही जीत हासिल करती थी ! १९६७ में कांग्रेस में बिखराव हुआ, पुरानी कांग्रेस और नयी कांग्रेस बनी, इंद्रा गांधी ने नयी कांग्रेस खड़ी की और चुनाव चिन्ह गाय-बछिया को अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह गाय संग नन्नी बछिया को लिया !! ये चिन्ह भी आम जनता की आस्थावों से जुड़ा रहा ! कांग्रेस में फिर से बिखराव हुआ, बड़े बड़े कांग्रेस के ओल्ड फोल्ड नेता, चौधरी चरणसिंह, मोरारजी देसाई, लिंजगलप्पा जैसे नेता प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठने का ख़्वाब देखते देखते लुढ़कने लगे तो उन्होंने, प्रधान मंत्री की कांग्रेस पद को एक परिवार की निजी सम्पति बनाने के लिए इंद्रागाँधी के मनसूबे पर ही सवालिया चिन्ह लगा दिया !

अब के इंद्रागाँधी जी को चुनाव चिन्ह मिला ‘हाथ’ “थप्पड़” और ये थप्पड़ आज भी विद्यमान है ! देश में एमरजेंसी लगी, १९७७ के चुनाव में इंद्रा जी की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा, मोरारजी देसाई प्रधान मंत्री बने, लेकिन दो साल के अंदर चौधरी चरणसिंह जी ने अपना दावा ठोक दिया प्रधान मंत्री की कुर्सी पर हक़ जमाने के लिए ! वे पीएम तो बने पर केवल कार्यवाहक, उन्हें संसद में हार का सामना करना पड़ा, संसद को भंग करना पड़ा और १९८० के चुनाव में इंद्रा गांधी फिर सत्ता में आगयी ! आस्थाओं से जुड़ी “गौ माता” !! पूजा के स्थान को स्वच्छ और पवित्र करने के लिए गौ मूत्र और गौ गोबर से लिपाई की जाती है ! गौमूत्र कही अंदरूनी बीमारियों में रामवाण का काम करती है ! देश में ही नहीं विदेशों में भी बहुत से मुसलिम भाई गाय को बड़ा स्थान देते हैं ! देश में बहुत सारे आश्रम चल रहे हैं, जहां गौशालाओं में बहुत सारी गायें पाली जाती हैं ! गाय को माता का दर्जा देने वाले सच्ची आस्था के साथ इन आश्रमों में खुले दिल से चन्दा देते हैं ! हम दूर क्यों जांय हरिद्वार में रामदेव जी के आश्रम में जांय और देखें की वहां गौशाला में बहुत सारी गायों की देख-भाल और सुरक्षा की जाती है ! गज धन और वाजिधन एक राजा द्वारा दूसरे पड़ोसी राजा से आत्म रक्षा का साधन जुटाता है लेकिन ‘गौधन सम्राट से लेकर आम जनता को मानसिक, शारीरिक रोगों से मुक्ति देता है ! ये धार्मिक आस्थाओं से भी जुड़ा हुआ है ! मन्त्रों में गाय के दूध से बना आचमन शुद्ध माना जाता है ! गाय के दूध से बनी खीर का मजा ही कुछ और है ! दूध के अलावा घी, मट्ठा, गर्मियों में लू से बचाता है ! गौ माता सर्व श्रेष्ट है, पूजनीय है – “गौ माता की जय “” हरेंद्र

बनने जा रही हैं दुल्हन, तो इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए ट्राई करें ये स्पेशल फेस पैक

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Face Pack For Instant Glow: शादी (Marriage) का दिन हर लड़की के लिए बेहद खास होता है. उस दिन वो दुनिया की सबसे सुंदर दुल्हन (Bride) दिखना चाहती है और इसके लिए वो हर जतन करती है. महंगे से महंगा पार्लर, लहंगा, ज्वैलरी सब कुछ बुक करती है. लेकिन कई बार इसके बावजूद भी चेहरे पर नेचुरल ग्लो की कमी रह जाती है. ऐसे में अगर आप चाहें तो नैचुरल इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए घर में बने ये स्पेशल फेस पैक (Face pack) ट्राई कर सकती हैं. ये फेस पैक एकदम हर्बल हैं और इनके साइड इफेक्ट्स होने का डर भी आपको नहीं होगा. इतना ही नहीं इन फेस पैक को बनाना और इस्तेमाल करना भी बहुत ही आसान है. तो आइये जानते हैं कि इन फेस पैक को किस तरह से बनाया और इस्तेमाल किया जा सकता है.

चंदन-केसर फेस पैक

चंदन-केसर फेस पैक बनाने के लिए आप दो-तीन बड़ा चम्मच कच्चा दूध लें. इसमें एक चुटकी केसर मिक्स कर के करीब पंद्रह मिनट के लिए रख दें. जिससे केसर का असर दूध में आ सके. इसके बाद इस दूध और केसर के मिक्सचर में दो चम्मच चंदन पाउडर मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें.

इसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे और अपनी गर्दन पर अच्छी तरह से अप्लाई करें. इसके बाद इस पैक को करीब बीस मिनट लगा रहने दें, फिर सादे पानी से धो लें.

बादाम-दूध फेस पैक

बादाम-दूध फेस पैक बनाने के लिए सबसे पहले सात-आठ बादाम को करीब चार बड़े चम्मच दूध में रात भर के लिए भिगोकर रख दें. सुबह बादाम को दूध के साथ बारीक पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. इसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह से लगायें और करीब बीस मिनट के लिए ऐसे ही लगा रहने दें. इसके बाद दो मिनट गोलाई में मसाज करके सादे पानी से साफ़ कर लें.

अंडर-19 वर्ल्ड कपः भारत पांचवी बार बना चैंपियन

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पहले राज बावा और रवि कुमार की जबरदस्त गेंदबाज़ी और फिर उपकप्तान शेख़ रशीद, ऑलराउंडर राज बाबा और निशांत सिंधु की दमदार बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ने अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को चार विकेट से हराकर पांचवी बार ट्रॉफ़ी जीत ली है.

इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 189 रन बनाए. इसके जवाब में भारतीय उपकप्तान रशीद और निशांत सिंधु की अर्धशतकीय पारियों की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को चार विकेट से हराया. इसके साथ ही इंग्लैंड का 24 साल बाद अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने का ख़्वाब पूरा न हो सका और यश ढुल पांचवे ऐसे भारतीय कप्तान बन गए जिन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप की ट्रॉफ़ी पर भारत का नाम अंकित कर दिया. यश ढुल से पहले विराट कोहली, मोहम्मद कैफ, उन्मुक्त चंद और पृथ्वी शॉ भी भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत चुके हैं. सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए फ़ाइनल में इंग्लैंड की तरह ही भारतीय पारी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही और पहला विकेट शून्य पर गिर गया.

पाकिस्तान और चीन को क़रीब आने से रोकना है – राहुल गांधी

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले हफ़्ते लोकसभा में कहा था कि मोदी सरकार ने चीन और पाकिस्तान को साथ लाकर सबसे बड़ा अपराध किया है.

राहुल गांधी ने कहा था, ”भारत की विदेश नीति में एक सबसे बड़ा लक्ष्य रहता था कि पाकिस्तान और चीन को क़रीब आने से रोकना है, लेकिन इस सरकार ने दोनों को साथ ला दिया है. भारत के लोगों के ख़िलाफ़ इस सरकार ने ऐसा कर सबसे बड़ा अपराध किया है.” राहुल गांधी की इस टिप्पणी का जवाब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तत्काल ट्विटर पर दिया था.

एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा था, ”राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया है कि हमारी सरकार ने पाकिस्तान और चीन को साथ कर दिया. इतिहास की सच्चाइयां ये हैं- 1963 में पाकिस्तान ने चीन को शाक्सगम घाटी सौंपी. चीन ने पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर से होते हुए 1970 के दशक में काराकोरम हाइवे बनाया. 1970 के दशक में ही दोनों देश परमाणु सहयोग को लेकर भी क़रीब आए. 2013 में चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर शुरू हुआ. ऐसे में आप ख़ुद से पूछिए कि क्या चीन और पाकिस्तान तब दूर थे?”

कई विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने को लेकर पाकिस्तान और चीन के क़रीब आने की बात कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने का ज़िक्र करने से परहेज़ किया.

कइयों का ये भी कहना है कि राहुल गांधी ये नहीं कह सकते कि मोदी सरकार में चीन और पाकिस्तान क़रीब आए, लेकिन ये बिल्कुल सच है कि देश की कोई भी सरकार दोनों देशों को क़रीब आने से रोकने में सफल नहीं रही है.

इमरान-जिनपिंग का संयुक्त बयान

इमरान ख़ान ने जब रविवार को बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की और दोनों ने साझा बयान जारी किया तो यही लगा कि चीन-पाकिस्तान की क़रीबी लगातार बढ़ रही है और जानकारों के मुताबिक़, यह भारत के लिए चुनौती है. चीन और पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वे कश्मीर में किसी भी एकतरफ़ा कार्रवाई का विरोध करते हैं क्योंकि इससे कश्मीर मुद्दा जटिल हो जाता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के दौरे पर हैं. रविवार को इमरान ख़ान की मुलाक़ात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई थी.

बीजिंग में हुई इस मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया. इस बयान में कहा गया है, ”दोनों देशों ने अपनी चिंताओं और अहम हितों से जुड़े मुद्दों पर एक दूसरे को मदद देने की बात दोहराई है. इस बात को भी रेखांकित किया गया कि दोनों देशों के बीच मज़बूत रक्षा सहयोग इस इलाक़े में शांति और स्थिरता के लिए बेहद अहम है.”

पाकिस्तान में बानी सीनेटर दलित हिन्दू लड़की कृष्णा कुमारी कोहली है चर्चा में

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पाकिस्तानी मीडिया में वहाँ की हिन्दू सीनेटर कृष्णा कुमारी कोहली सुर्खियों में हैं. पाकिस्तानी मीडिया में इन्हें दलित हिन्दू सीनेटर बताया जा रहा है.

कोहली पाकिस्तान की विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सीनेटर हैं. वह 2018 में पीपीपी के टिकट से पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक रिज़र्व सीट जीती थीं. शुक्रवार को पाकिस्तान की सीनेट के अध्यक्ष की कुर्सी पर कृष्णा कुमारी कोहली थीं और उन्हीं की अध्यक्षता में भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर एक प्रस्ताव पास किया गया. भारत की संसद में भी कई बार होता है कि लोकसभा अध्यक्ष की ग़ैर-मौजूदगी में किसी सांसद को अध्यक्ष के आसन की ज़िम्मेदारी दी जाती है. शुक्रवार को पाकिस्तानी सीनेट में अध्यक्ष के आसन पर कोहली थीं और यह ख़बर पाकिस्तानी मीडिया में छाई हुई है.

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है, ”हिन्दू सीनेटर की अध्यक्षता में पाकिस्तान की सीनेट ने शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया. सीनेट ने पाँच अगस्त 2019 के भारत की मोदी सरकार के उस क़दम को ख़ारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म कर दिया गया था.”

पाकिस्तान की सत्ताधारी तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के सीनेटर फ़ैसल जावेद ख़ान ने ट्वीट कर कहा है, ”एक हिन्दू ने पाकिस्तानी सीनेट में कश्मीर पर एक सत्र की अध्यक्षता की. सीनेट के चेयरमैन ने हमारी सहकर्मी कृष्णा कुमार कोहली को यह सम्मान दिया. पाकिस्तान ने भारत को कश्मीर को लेकर एक मज़बूत संदेश दिया है. पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के लिए खड़ा है जबकि भारत अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ है.” पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने भी इसे लेकर ट्वीट किया. उन्होंने कहा, ”थार, सिंध, पाकिस्तान से पीपीपी सीनटेर कृष्णा कोहली ने कश्मीर एकजुटता पर सीनेट सत्र की अध्यक्षता की. यह वह पाकिस्तान है, जिसका पीपीपी प्रतिनिधित्व करता है, देशभक्ति, समानता और बहुलतावाद वाला पाकिस्तान.”

ख़ुद को ये सम्मान दिए जाने को लेकर कृष्णा कोहली ने ट्वीट किया, ”कश्मीर एकजुटता दिवस के मौक़े पर भारत के अवैध कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए सीनेट सत्र की अध्यक्षता करना बहुत सम्मान की बात है. पाकिस्तान की संसद का सदस्य बनने का मौक़ा देने के लिए पाकिस्तान की संसद और अध्यक्ष बिलावल भुट्टो को धन्यवाद.”

सोशल मीडिया यूज़र अयाज़ गुल ने सीनेट अध्यक्ष का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, ”अल्पसंख्यक हिंदू दलित समुदाय से पाकिस्तान की महिला सीनेटर कृष्णा कुमारी कोहली सीनेट सत्र की अध्यक्षता करती हुईं.”

Paytm की डरावनी कहानी

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पेटीएम के शेयर यानी पेटीएम चलानेवाली कंपनी वन नाइन्टी सेवन कम्युनिकेशंस लिमिटेड के शेयर पहले ही दिन जैसे धड़ाम से गिरे, वो कोई अनहोनी नहीं थी.

कंपनी के कामकाज़, कंपनी के मुनाफ़े और घाटे, कंपनी जिस कारोबार में है, उसमें लगातार बढ़ते मुक़ाबले के साथ कंपनी के अनिश्चित भविष्य की आशंकाएं देखते हुए तमाम जानकार यह चेतावनी दे चुके थे कि पेटीएम में पैसा लगाना शायद ठीक नहीं होगा.

शेयर बाज़ार की रवायत है कि ख़ासकर बड़ी कंपनियों के बारे में आसानी से कोई बुरा नहीं बोलना चाहता है. इसलिए किसी ने सीधे-सीधे यह तो नहीं कहा कि इसमें पैसा मत लगाइए, लेकिन पर्याप्त संकेत दे दिए थे कि अगर आप यहाँ पैसा न लगाएं तो ठीक रहेगा. आइपीओ से पहले आने वाली रिपोर्टों में इसे अवॉयड या स्किप की रेटिंग कहा जाता है.

कुछ लोग इन्वेस्ट फोर लॉन्ग टर्म भी कहते हैं. हालांकि ऐसा कहने वाले यह भी बता देते हैं कंपनी का कारोबार बहुत अच्छा है इसलिए लंबे समय की सलाह दे रहे हैं या फिर इसलिए क्योंकि कंपनी हाल फ़िलहाल तो बहुत अच्छा नहीं कर रही, इसलिए हो सकता है कि आप काफ़ी लंबे समय तक यह शेयर रखें तो फ़ायदा हो जाए. अब यह भी कोई बताने की बात नहीं है.

गाजे-बाजों के साथ निकाली गई गौमाता की शव यात्रा

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जब माता तुल्य गौ को मन गया है तो एक खबर हम आपको बताने जा रहे हैं जहाँ गौ माता का लोगों ने पुत्र के रूप में अंतिम संस्कार किया खबर मध्यप्रदेश से है जहाँ एक गौ माता की शव यात्रा को पूरे विधि विधान से निकला गया

हिन्दू धर्म में गौ को माता माना गया है, गौ को पूजा जाता है, पुराणों में धर्म को भी गौ रूप में दर्शाया गया है, भगवान श्रीकृष्ण गाय की सेवा अपने हाथों से करते थे और इनका निवास भी गोलोक बताया गया है। इतना ही नहीं गाय को कामधेनु के रूप में सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला भी बताया गया है। हिंदू धर्म में गाय के इस महत्व के पीछे कई कारण हैं जिनका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की थी तो सबसे पहले गाय को ही पृथ्वी पर भेजा था। सभी जानवरों में मात्र गाय ही ऐसा जानवर है जो मां शब्द का उच्चारण करता है, इसलिए माना जाता है कि मां शब्द की उत्पत्ति भी गौवंश से हुई है।

जब माता तुल्य गौ को मन गया है तो एक खबर हम आपको बताने जा रहे हैं जहाँ गौ माता का लोगों ने पुत्र के रूप में अंतिम संस्कार किया खबर मध्यप्रदेश से है जहाँ एक गौ माता की शव यात्रा को पूरे विधि विधान से निकला गया। घटना दमोह जिले के हटा की है। यहाँ हाथी के नाम से यह गाय प्रसिद्ध थी। इसकी जानकारी मिलते ही शहर के लोग इकट्ठे हो गए और उन सभी ने मिलकर पूरे रीति-रिवाज के साथ गाय की शव यात्रा निकाली।

सुरभि गौशाला के गौ सेवक अंशुल तिवारी कहते हैं कि यह गया करीब डेढ़ साल पहले सड़की पर पड़ी मिली थी। बीमारी के कारण पूरी तरह से उसका शरीर जर्जर हो गया था। लेकिन बाद हटा भूतेश्वर महादेव मंदिर में चलाई जा रही गौशाला में उसे लाया गया। गौशाला में लाने के बाद उसका इलाज शुरू कर दिया गया। करीब एक हफ्ते के इलाज के बाद आखिरकार गाय स्वस्थ हुई।

लेकिन फिर भी कोई उसे लेने के लिए नहीं आया। गौशाला में गाय का बहुत ही अच्छे तरीके से ख्याल रखा जाता था, जिस कारण से जल्द ही वह हट्टी-कट्टी भी हो गई। इसी कारण से लोगों ने उसे ‘हाथी’ कहना शुरू कर दिया। गाय इतनी सीधी थी कि गौशाला में अगर किसी गाय की मौत हो जाती थी तो वो उसके बछड़ों को अपना दूध पिलाती थी। इसके अलावा छोटे बच्चे तक उसके थन में मुँह लगाकर दूध पी लेते थे।

अपने इसी सीधेपन के कारण वो सभी के लिए चहेती बनी हुई थी। हाल ही में ‘हाथी’ बीमार हो गई थी, जिसके बाद अब उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद गौसेवकों ने उसकी शव यात्रा निकालने का निर्णय लिया। इसके तहत उसके शव का श्रृंगार कर उसे लाल चुनरी और फूल-माला से सजाया गया और बैंड बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस मौके पर लोगों ने गौमाता के जयकारे लगाए।

सिने एंड टी वी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन ने जोनल मीट में कोविड योद्धाओं को पुरस्कृत किया 

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में क्रियाशील कलाकारों के हितार्थ 1958 से सतत अग्रसर संस्था सिने एंड टी वी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) ने पिछले दिनों जोनल मीट में अपने कोरोना योद्धाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया, जिन्होंने संकट में अन्य सदस्यों को सहायता दिया और सहायता देने के क्रम में शामिल रहे, अन्य सदस्यों को खाद्य राशन और दवाएं वितरित कीं, जिन्होंने विश्वव्यापी कोरोना महामारी के समय आर्थिक शारीरिक व मानसिक परेशानियों का सामना किया।

कुल 68 कोरोना योद्धाओं ने पुरस्कृत किये जाने के क्रम में जोनल टीम के सदस्यों के साथ अपने संघर्षों की कहानियां साझा कीं और बताया कि कैसे सिंटा ने अपने प्रत्येक सदस्य के माध्यम से कोरोना काल को झेलने में  उनकी मदद की। कोरोना योद्धाओं में घनश्याम श्रीवास्तव, प्रेमचंद सिंह, प्रभात कुमार पांडे, सोनिया त्रेडिया, मनोज कुमार यादव, दीपक दत्ताराम मोरे, सत्यजीत राजपूत, विवेक श्रीवास्तव, टीना घई, गोपाल कुमार वर्मा, संजू के बनर्जी, कमलेश कुमार सिंह, सुल्तान अहमद वारसी,  सौरभ सुमन, लैला पांडा, अशोक चव्हाण, त्रिलोक चंद्र सिंह, पंकज कुमार, अरुण कुमार सिंह, मोहम्मद फरीद खान, रंजीत चौधरी, हेतल परमार, मनोज कुमार श्रीवास्तव, गीतांजलि मिश्रा, प्रकाश झा, बृजेश करनवाल, चयन त्रिवेदी, अक्षर सिंह, अभिजीत  लहरी, कुंदन कुमार, नूपुर अलंकार, धीरज मिगलानी, श्रुति भट्टाचार्य, दिनेश पांडे, संजय भाटिया, अमित बहल, अयूब खान, अब्दुल राशिद मेहता, मनोज जोशी, दीपक काजीर केजरीवाल, जितेन मुखी, आशा पारीक, योगेश कुमार भारद्वाज, कमल सौरभ,  चैताली सरकार, राज मल्होत्रा, तृप्ति दवे, जितेंद्र सिंह साबू, श्याम लाल, ललित कुमार अग्रवाल, सोनल परेश बोरखतारिया, शशिकांत नामदेव शिंदे, रौनक अली, प्रसाद लिमये, सुलेमान शेख और राजेश कनौजिया। प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाने के क्रम में सिंटा की कार्यकारिणी सदस्य टीना घई, अयूब खान, जया भट्टाचार्य, दीपक काजीर केजरीवाल, रवि झंकल, हेतल परमार, जितेन मुखी ने भी संक्षिप्त भाषण दिया और सदस्यों को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।

 सिने एंड टी वी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम गोखले, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज जोशी, माननीय महासचिव अमित बहल ने जोनल टीम के प्रयासों की सराहना की और वीडियो कॉल के माध्यम से प्रशस्ति पत्र प्राप्तकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं। विदित हो कि घनश्याम श्रीवास्तव जोनल संरचना के मुख्य संयोजक हैं। सिने एंड टी वी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन की जोनल संरचना के तहत आउटरीच कमेटी भी है जिसका एकमात्र उद्देश्य एक संयुक्त मंच बनाना है जिससे सिंटा के सदस्य सिंटा के अन्य सदस्यों के साथ जुड़ सकें जो एक दूसरे के करीब रहते हैं। वरिष्ठ सदस्यों के हितों पर नजर रखने के लिए नियमित रूप से उनसे मुलाकात की जाती है। कुछ सदस्य नियमित रूप से जरूरतमंद सदस्यों के पास जाते हैं।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेसियों को दौड़ाके भगाया

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मुंबई भाजपा कार्यालय पर मोर्चा निकालना कांग्रेसियों को भारी पड़ गया। पेगासस मामले को लेकर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने यह मोर्चा निकाला था। भाजपा कार्यकर्ता आत्मरक्षा हेतु ‘जैसे को तैसा’ जवाब देने को तैयार थे। भाजपा की ओर से ‘जो जिस भाषा में समझेगा, उसे उसी भाषा में समझाने’ की तैयारी देखते ही यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की हिम्मत जवाब दे गई और सभी वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘दाऊद की औलादों को जूते मारो’ नारे लगाते हुए कांग्रेसियों को दौड़ा दौड़ाके भगाया।

मुंबई भाजपा अध्यक्ष व विधायक श्री. मंगल प्रभात लोढ़ा, विधान परिषद सदस्य श्री. प्रसाद लाड, विधायक श्री. कालिदास कोलंबकर, मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष श्री. आचार्य पवन त्रिपाठी, युवा मोर्चा मुंबई अध्यक्ष श्री. तजिंदर सिंह तिवाना, महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती शीतल गंभीर सहित पार्टी के सैकड़ों की संख्या में भाजपा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर रहे यूथ कांग्रेस के लोगों को दौड़ा दौड़ाके भगाया। मुंबई भाजपा अध्यक्ष व विधायक श्री.मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता भारत माता में विश्वास करता है। भाजपा कार्यालय पर अंगुली उठानेवाले दाऊद और टीपू सुल्तान के पुजारी विधेयक झिशान सिद्दीकी पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो भाजपा के कार्यकर्ता सबक सिखायेंगे।