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प्राकृतिक खेती के लिए गौमूत्र एकत्रित कर रहीं महिलाएं

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जैविक कीटनाशक बनाने में गौमूत्र का सबसे अधिक उपयोग होता है। जिन किसानों के पास गौ वंशीय मवेशी नहीं हैं उन्हें गौ मूत्र नहीं मिल पा रहा था। इसीलिए कुछ ग्रामीणों को गौ मूत्र संग्रहित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। हमारे प्रयास के शुरुआती दिनों में ही अच्छे परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं।
ज्ञानेंद्र तिवारी, फील्ड क्वार्डिनेटर समर्थन
प्राकृतिक खेती ,जैविक कीटनाशक और उर्वरक के गांव में ही निर्माण के लिए किसानों की कार्यशाला और प्रशिक्षण के कार्यक्रम दिसंबर माह में प्रस्तावित हैं। सरकार की ओर से भी किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहि करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. पीएन त्रिपाठी, वरिष्ट कृषि वैज्ञानिक व प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र पन्ना
इस सीजन में करीब ५०० किसानों द्वारा ६०० हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसे प्रमोट करने के लिए किसानों को प्रशिक्षत किया जाएगा। सरकार की ओर से किसानों को प्रति गौवंशीय मवेशी पालन के लिए ९०० रुपए देने की भी घोषणा की गई है।
केपी सुमन, उप संचालक कृषि

पन्ना. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रयास भले ही अभी तक जमी पर नहीं दिख रहे हों लेकिन सामाजिक संगठनों के सहयोग से रहुनियां, पलथरा और बिलहा सहित आसपास के गांव के किसानों ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। गांवों के दो दर्जन से भी अधिक किसान घरों में ही जैविक खाद तैयार करने के बाद कीटनाशक भी तैयार कर रहे हैं। जिसके लिए उन्हें बड़ी मात्रा में गौ मूत्र की जरूरत पड़ रही है। इसी को देखते हुए सामाजिक संस्था के समझाइश और प्रोत्साहन पर किसानों ने गौ मूत्र का संग्रह भी शुरू कर दिया है। जिन किसानों के घरों में मवेशी नहीं है उन्हें नाम मात्र की कीमत पर गांव के लोग ही अब गौमूत्र उपलब्ध कराएंगे।

ग्राम बिलहा की राजाबाई पटेल, बिलख्ुारा की कीर्तन देवी और पुष्पा पटेल ने बताया हम लोगों को घरों में ही जैविक कीटनाशक तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया था। जिससे २५-३० किसान गांव में ही कीटनाशक तैयार कर रहे हैं। जैविक कीटनाशक तैयार करने में सबसे अधिक गौमूत्र का ही उपयोग होता है। इसलिए जिन किसानों के घरों में मवेशी नहीं हैं उन्हें मौमूत्र देने के लिए गांव के लोगों ने समर्थन संस्था की समझाइश के बाद गौ मूत्र का संग्रह भी करना शुरू कर दिया है। महज तीन-चार दिनों में ही किसानों ने करीब डेढ़ सौ लीटर गौमूत्र एकत्रित कर लिया है। जिन किसानों को इसकी जरूरत है उन्हें नाम मात्र की कीमत पर गौमूत्र दिया जा रहा है। इससे किसानों को घरों में ही जैविक खाद तैयार करने में परेशानी नहीं होगी। साथ ही किसानों को अतिरिक्त आय का एक बड़ा साधन भी मिल जाएगा।

प्राकृतिक खेती के लिए छोड़ा एक-एक खेत
विक्रमपुर की राधारानी, बिलख्ुारा की कीर्तन देवी, पलथरा के गुलाब सिंह और शिव सिंह ने बताया, प्राकृतिक तरीके से खेती करने के लिए आसपास के गांव के दो दर्जन से अधिक किसानों ने अपने-अपने एक-एक खेत छोड़ दिए हैं। इनमें खेती करने के लिए गोबर की खाद का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही इसमें पूरी फसल सामाजिक संस्था के कार्यकर्ताओं की देख रेख में की जाएगी। कीटनाकश के रूप में जैविक रूप से बनाए गए कीटनाशक अग्नियास्त्र, जीवामृत सहित अन्य जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जा रहा है।

एमसीडी चुनाव: आप ने गौशालाओं के पुनर्वास के लिए अभियान चलाने का किया वादा

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एमसीडी चुनाव: आप ने गौशालाओं, आवारा कुत्तों को गोद लेने, बंदरों के पुनर्वास के लिए अभियान चलाने का किया वादा।
दिल्ली। गाय आश्रयों की स्थापना, स्ट्रीट डॉग्स को गोद लेने के लिए अभियान चलाना, बंदरों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास करना – कुछ ऐसे कदम हैं जिन्हें आप एमसीडी में सत्ता में आने पर उठाने का इरादा रखती है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस महीने की शुरुआत में 4 दिसंबर को होने वाले एमसीडी चुनावों के लिए पार्टी द्वारा 10 गारंटी देने की शुरुआत की थी और उनमें से एक दिल्ली की सड़कों को आवारा पशुओं के खतरे से मुक्त करने से संबंधित थी। इसके रोडमैप के बारे में बात करते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वे कुत्तों की भारतीय नस्लों को अपनाने के लिए ‘बी इंडियन, एडॉप्ट इंडियन’ अभियान शुरू करेंगे। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “हम एनजीओ को आवारा कुत्तों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और हम उन कुत्तों को पालने का खर्च उठाएंगे। व्यक्तियों को भी आगे आने और भारतीय नस्लों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।” ग्रेटर कैलाश विधायक ने कहा कि बंदरों का आतंक एक और बड़ा मुद्दा है.
“दक्षिणी दिल्ली के लगभग सभी इलाकों में लोग बंदरों से परेशान हैं, जो नहाने के लिए पानी की टंकियों में घुस जाते हैं, घरों में घुस आते हैं, फ्रिज खोलकर खाने का सामान ले जाते हैं और यहां तक ​​कि छोटे बच्चों पर हमला कर देते है। अगर हम एमसीडी में सत्ता में आते हैं तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास किया जाए। ऐसा ही एक प्राकृतिक आवास असोला में है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि कैसे आवारा गायों को अक्सर डंपयार्ड के आसपास कचरा खाते हुए देखा जाता है। उन्होंने कहा, “उनकी जगह नहीं है। उन्हें हरा चारा खिलाया जाना चाहिए और इसके लिए हम आधुनिक तकनीक से गौशालाएं स्थापित करेंगे ताकि उनकी देखभाल की जा सके।”

गौ संवर्धन बोर्ड ने सरकार से मांगा था 300 करोड़ का बजट , बजट घटाती जा रही है शिवराज सरकार

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Jabalpur News: मध्य प्रदेश में गौ सेवा का मुद्दा सिर्फ वोट लेने तक ही सीमित रह गया है. हाल के बरसों में मध्य प्रदेश में दो बार सरकार तो बदल गई, लेकिन गायों की हालत नहीं बदली है.आज भी गौवंश को सड़कों पर घूमता हुआ और गौशालाओं में मरता हुआ देखा जा सकता है. गौवंश के संरक्षण और रक्षा के लिए सरकार की बनाई गई तमाम नीतियां फेल होती नजर आ रही हैं. हालात यह बन गए हैं कि बजट का एक तिहाई हिस्सा भी गौ सेवा के लिए नहीं मिल पाया है. आइए जानते है कि क्या है इसके पीछे की वजह.

मध्य प्रदेश में गायों की रक्षा और संरक्षण के लिए शिवराज सरकार ने वादे तो बहुत किए, लेकिन ये वादे जमीन पर नजर नहीं आए. मध्य प्रदेश गौपालन और पशु संवर्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज भी राज्य में गौमाता की उपेक्षा से दुखी हैं. उनका मानना है कि सरकार गौशाला चलाने में असफल हो गई है. इसी वजह से अब प्रदेश की गौशालाओं को एनजीओ के हाथों सौंपना शुरू कर दिया गया है. हालांकि,अखिलेश्वरानंद महाराज का कहना है कि गौशाला चलाना सरकार का काम नहीं है. गौशालाओं को अब तक ग्राम पंचायतें चला रही थीं, लेकिन अब इन्हें एनजीओ के हवाले किया जा रहा है.

तीन हजार गौशालाओं का होना है निर्माण
आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में तकरीबन 24 हजार ग्राम पंचायतें हैं. इनमें 3000 गौशालाओं का निर्माण होना है. स्वामी अखिलेश्वरानंद के मुताबिक फिलहाल बन चुकी 1700 गौशालाओं में से 627 गौशालाएं एनजीओ के हवाले कर दी गई हैं. बाकी गौशालाओं को भी जल्द ही एनजीओ को सौंप दिया जाएगा.

गौ संवर्धन बोर्ड ने सरकार से मांगा था 300 करोड़ का बजट
इतना ही नहीं सरकार ने गौवंश के लिए जो बजट मंजूर किया था, उसका भी महज एक तिहाई हिस्सा ही गाय तक पहुंच पाया है.आंकड़ों के मुताबिक गौवंश के लिए मध्यप्रदेश प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड द्वारा सरकार से 300 करोड़ के बजट की मांग रखी गई थी. सरकार ने पहले 211 करोड रुपए की सहमति दी थी. इसके बाद भी सरकारी स्तर पर गफलत की गई. अंत में 190 करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत हुई, लेकिन अब तक सिर्फ 90 करोड़ की राशि ही मिल पाई है. गायों के संरक्षण के लिए अनुदान भी मांगा गया लेकिन उसमें भी आम जनता तो छोड़िए जनप्रतिनिधियों ने भी भागीदारी नहीं निभाई. नतीजा आज भी कई गौशाला अनुदान के लिए तरस रही हैं.

गौशालाओं में तीन लाख गौ वंश 

स्वामी खिलेश्वरानंद गिरि महाराज का कहना है कि हमारे पास गौशालाओं में तीन लाख गौ वंश हैं. इन्हें 20 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से आहार का बजट दिया जाता है. यह व्यवस्था कमलनाथ सरकार ने लागू की थी, जिसे जारी रखा गया है. उन्होंने कहा कि पूर्व में मंडी बोर्ड से भी पैसा मिलता था. जिसे कमलनाथ सरकार ने बन्द कर दिया गया था. जिसे अब पुनः लेने के प्रयास किया जा रहा है.

 9 दिसम्बर को सिने प्राइम पर रिलीज होगी साहिल आनंद, वेदिका भंडारी स्टारर वेब सीरीज ‘एल लग गये’ 

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मुम्बई। लॉकडाउन के बैकड्रॉप पर बनी एक रोचक वेब सीरीज ‘एल लग गये’ 9 दिसम्बर को सिने प्राइम पर रिलीज होने के लिए तैयार है। टीवी स्टार साहिल आनंद, वेदिका भंडारी, इमरान नजीर खान, कर्मवीर चौधरी, नीलम भानुशाली के अभिनय से सजी वेब सीरीज ‘एल..लग गये’ का जब से ट्रेलर आउट हुआ है, इस सीरीज को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह और उत्सुकता नजर आ रही है।
ओटीटी प्लेटफार्म सिने प्राइम पर यह यूनिक सब्जेक्ट वाली वेब सीरीज 9 दिसम्बर 2022 को रिलीज होने जा रही है। बता दें कि इस वेब सीरीज को मुम्बई के अलावा आगरा और जयपुर में काफी प्रोमोट किया गया है, वहां लोगों का रिएक्शन देखने लायक रहा।
इस सीरीज में टीवी के बड़े स्टार नजर आने वाले हैं, वेदिका भंडारी जहां वेब सीरीज ‘इंदोरी इश्क़’ एवं टीवी धारावाहिक ‘वो अपना सा’ और ‘कसम तेरे प्यार की’ में नजर आ चुकी हैं। वहीं रोडीज़ फेम एक्टर साहिल आनंद भी यह वेब सीरीज करके काफी उत्साहित हैं। इस वेब सीरीज में उनकी प्रेमिका से शादी हो रही होती है तभी लॉकडाउन लग जाता है अब उसके बाद क्या क्या होता है उसके लिए आपको ‘एल लग गये’ सीरीज देखनी पड़ेगी।
सिने प्राइम की ये वेब सीरीज ‘एल लग गये’ की कहानी और इसका प्रस्तुतिकरण दर्शकों को खूब मनोरंजन देने वाला है। वेदिका और साहिल आनंद की केमिस्ट्री अमेजिंग है। इमरान नजीर खान का रोल भी बेहद मज़ेदार है।
‘एल लग गये’ कॉमेडी और फैमिली ड्रामा का बखूबी मिश्रण है। इस फैमिली एंटरटेनर के एक्टर इमरान नजीर खान का कहना है कि मेरे दोस्त की शादी हो रही होती है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से मैं डांस पे चांस मार लेता हूँ और मैं अपने फ्रेंड की साली के साथ अपनी सेटिंग करने लग जाता हूँ।
वेब सीरीज ‘एल..लग गये’ में साहिल आनंद, वेदिका भंडारी, इमरान नज़ीर खान, आयशा कपूर, हिमांशु गोकानी, कर्मवीर चौधरी, निशात शीरीं, नीलम भानुशाली, शैलेंद्र मिश्रा, गरिमा मौर्या, उर्मिला शर्मा, अभिषेक खन्ना, उमेश बाजपेई, तनवीर जायन, विशाल कतरानी, कुमकुम दास सहित कई अदाकारों ने एक्टिंग की है। इसके निर्माता सिने प्राइम और को प्रोड्यूसर महेश मिश्रा, तरुण बिष्ट, गणेश मांजरेकर व निर्देशक राजेन्द्र राठौड़ हैं।

वीपी सिंह को भारतरत्न देने की माँग

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आधुनिक काल के गौतम बुद्ध थे वी पी सिंह – लौटनराम निषाद

लखनऊ: पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मण्डल कमीशन की सिफारिश के अनुसार ओबीसी को 27 प्रतिशत कोटा सरकारी सेवाओं व उपक्रमों में देकर पिछडों की तस्वीर व तक़दीर बदल दिए. उनकी 14वीं पुण्यतिथि पर याद करते हुए भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. लौटनराम निषाद ने कहा कि सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेकर आधुनिक काल के गौतम बुद्ध बन गए. उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि उन्होंने जिनके लिए अपनी प्रधानमंत्री की कुर्सी को लात मार दिए वे पिछड़े भी उनके साथ खड़े नहीं हुए. सवर्णों के लिए खलनायक व अछूत जरूर बन गए.
निषाद ने कहा कि आज देश के प्रधानमंत्री मोदी जी अपने को पिछड़ी जाति का होने पर गर्व करते हैं. वे भी वीपी सिंह की मंडलवादी राजनीति के कारण ही बन पाए हैं. वीपी सिंह क्षत्रिय होते भी कुर्सी की परवाह न करते हुए 52 प्रतिशत वंचित वर्ग को न्याय देने किये चुनाव घोषणा पत्र के वादे को पूरा कर भारतीय राजनीति की नई इबारत लिख दिए. उन्होंने कहा कि वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी जी मे अपने को ओबीसी होने का एहसास होगा तो पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की को भारतरत्न देने की सिफारिश करेंगे और संसद परिसर में वीपी सिंह ,बीपी मण्डल व अर्जुन सिंह की प्रतिमा स्थापित कराएंगे.
निषाद कहा कि वीपी सिंह व अर्जुन सिंह ने असली क्षत्रिय होने का परिचय देते हुए नौकरियों व केन्द्रीय तथा उच्च शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिए।मण्डल कमीशन की सिफारिश लागू करते हुए कहा कि हमने माँ के पेट से बच्चे को बाहर निकाल दिया है. अब किसी की औकात नहीं कि बच्चे को माँ के पेट में डाल दे. उन्होंने असलियत उजागर करते हुए कहा था कि-तितलियों के जन्म के लिए केंचुए को मरना पड़ता है और हमने गोल के लिए पिच पर गेंद को किक मार दिया है. भले ही मेरा पैर टूट गया. वर्तमान में पूरे देश की राजनीति मण्डल के ही इर्द-गिर्द घूम रही है.
निषाद ने कहा कि बीपी मण्डल बिहार के पहले शूद्र मुख्यमंत्री थे. वे देश के पहले ही आम चुनाव (1952) में मधेपुरा से बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए थे. तब मंडल कांग्रेसी हुआ करते थे लेकिन 1965 में पिछड़ी जातियों के खिलाफ पुलिसिया अत्याचार को मुद्दा बनाकर पार्टी छोड़ दी और सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। काफी राजनीतिक कलाबाजियों के बाद वह 1 फरवरी, 1968 को बिहार के मुख्यमंत्री बने थे.
उन्हीं दिनों बरौनी रिफाइनरी से रिसकर तेल गंगा नदी में पहुंच गया और आग लग गयी. तब बिहार विधान सभा में पंडित बिनोदानंद झा ने कहा था ”शूद्र मुख्यमंत्री बना है तो गंगा में आग ही लगेगी. ”भारत सरकार द्वारा गठित दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्षता बी.पी. मंडल ने ही की थी. इसलिए आयोग को मंडल कमीशन के नाम से भी जाना जाता है. मंडल कमीशन की कई सिफारिशों में से एक अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण देना भी था. प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने रिपोर्ट की सिफारिश को लागू कर दिया. उस फैसले के बाद से आज तक आरक्षण भारतीय राजनीति की धुरी बना हुआ है. आज मण्डल की ही देन रही कि भाजपा से कल्याण सिंह, उमा भारती, बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री बने और वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री हैं. झारखण्ड, छत्तीसगढ़ व राजस्थान की सरकार ने ओबीसी आरक्षण विस्तारीकरण के लिए विधेयक पारित किया है.

मैराथन के ब्रांड एंबेसडर के रूप में आयरनमैन हार्दिक पाटिल को भूली नगर पालिका

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मैराथन के ब्रांड एंबेसडर के रूप में आयरनमैन हार्दिक पाटिल को भूली नगर पालिका

विरार। इस वर्ष की मैराथन के लिए नगर निगम ने राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता, ओलंपिक फाइनलिस्ट अविनाश साबले को इस आयोजन का ब्रांड एंबेसडर चुना है। हालांकि अविनाश साबले के चयन का फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन नगर निगम को विरार के बेटे आयरनमैन हार्दिक पाटिल पर भी विचार करना चाहिए था। वसई में विभिन्न खेलों में कई स्थानीय धावक और प्रसिद्ध खिलाड़ी भी हैं। खिलाड़ियों ने खेद व्यक्त किया है कि नगर पालिका को उनके बारे में सोचना चाहिए था। विरार के रहने वाले हार्दिक पाटिल ने हाल ही में 17वें कैलिफोर्निया आयरनमैन 2022 को सफलतापूर्वक पूरा किया है। हार्दिक पाटिल ने पिछले महीने नीदरलैंड के एम्स्टर्डम में पहली बार आयोजित टीसीएस फुल मैराथन प्रतियोगिता भी पूरी की है। हार्दिक का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में चार बार, वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया में चार बार और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में तीन बार दर्ज हो चुका है। हार्दिक अब तक शिकागो, न्यूयॉर्क, टोक्यो, बोस्टन, लंदन, न्यूजीलैंड, मैक्सिको, डेनमार्क, ताइवान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में प्रतियोगिताओं को पूरा कर चुके हैं। इन रिकॉर्ड्स के साथ ही वह भारत के दूसरे आयरनमैन बन गए हैं। उनका यह रिकॉर्ड का ग्राफ वसई-विरार के लिए गौरव की बात है। अगर इस तरह की प्रतियोगिता का ब्रांड एंबेसडर कोई वैश्विक विजेता और कोई स्थानीय भूमिपुत्र होता तो काबिले तारीफ होता।लेकिन जब इस प्रतियोगिता का 10वां संस्करण हो रहा है तो कुछ खिलाड़ियों ने खेद व्यक्त किया है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि विश्व स्तर पर वसई-विरार का नाम ऊंचा करने वाले प्रतियोगियों को नगर पालिका भूल जाए।
हालांकि नगर पालिका का कहना है कि वसई-विरार खेल प्रतियोगिता व मैराथन प्रतियोगिता का उद्देश्य स्थानीय खिलाडिय़ों की प्रतिभा को निखारना है, लेकिन नगर पालिका को ऐसी प्रतियोगिताओं के दौरान कुछ विश्व रिकार्ड प्रतियोगियों को भूल जाना चाहिए, ऐसे में नगर पालिका के खेल प्रेम की आलोचना हो रही है।
वसई विरार नगर निगम के आयुक्त अनिल कुमार पवार ने जानकारी दी कि अधिकारियों को न केवल धावकों बल्कि अपने खेल में दक्ष स्थानीय एथलीटों के नाम, मोबाइल नंबर एकत्र करने के लिए कहा गया है। उन्हें इस मैराथन में भाग लेने के लिए आमंत्रित या सम्मानित किया जा सकता है। अगर किसी को ऐसे खिलाड़ियों के नाम और मोबाइल नंबर पता हों तो कृपया मुझे भेजें या संपर्क करें।

ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2022 का सिटीजन परसेप्शन सर्वे का उद्देश्य

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वसई विरार

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स लॉन्च किया और 2018 में विकसित किया गया था और उसके बाद 2019 और 2022 में संशोधन किया गया था. ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2022 को वर्ष 2022 में विकसित किया गया था और इसे चार स्तंभों अर्थात् गुणवत्तापूर्ण जीवन, आर्थिक सामर्थ्य, स्थिरता और नागरिक धारणा सर्वेक्षण (सीपीएस) में परिमाणित किया गया है। इसका उद्देश्य शहरों को शहरी नियोजन और प्रबंधन के लिए ‘परिणाम आधारित’ उद्देश्यों की ओर ले जाना और शहरों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा आयोजित करना भी है।ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स, 2022 शहरों को उनकी ताकत, कमजोरियों, चुनौतियों और अवसरों का 360° आकलन करने में मदद कर सकता है।इस तरह के मूल्यांकन के माध्यम से प्राप्त जानकारी नई योजनाओं को तैयार करने और जरूरत के प्रासंगिक क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देने में मदद कर सकती है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़ी है।ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स (ईओएलआई) में वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की पिछली रैंकिंग ईओएलआई-2018 में, वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन 116 शहरों में से 20वें स्थान पर था जबकि 2019 में यह 117 शहरों में 39वें स्थान पर था। शहर का आकलन करने के लिए, आवास शहरी मामलों के मंत्रालय ने ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स (ईओएलआई) मूल्यांकन के चौथे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सिटीजन परसेप्शन सर्वे (सीपीएस) लॉन्च किया है।

सीपीएस का उद्देश्य शहर में रहने की गुणवत्ता के बारे में नागरिकों की प्रतिक्रिया प्राप्त करना है।

सीपीएस के माध्यम से नागरिकों से प्राप्त फीडबैक से प्रशासन को शहरी प्रशासन के साथ-साथ शहरी नियोजन में सुधार करने और नागरिकों के लिए बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

सर्वे में क्या शामिल है? यह सर्वे ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स पर आधारित है।

इस सर्वेक्षण में आम जनता से प्राप्त फीडबैक का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन की निगरानी और सुधार करने और विभिन्न क्षेत्रों में नियोजन को सुगम बनाने और अंतराल को भरने के लिए किया जाएगा। इस सर्वेक्षण में विभिन्न क्षेत्रों से कुल 17 प्रश्नों को शामिल किया गया है।

ये प्रश्न निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित हैं।

किफायती आवास, स्थिर बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाएं, सस्ती शिक्षा और इसकी गुणवत्ता, रोजगार के अवसर, हवा की पर्यावरणीय गुणवत्ता। पर्यावरण स्वच्छता मनोरंजक सुविधाओं की उपलब्धता आपातकालीन सेवा सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था परिवहन की उपलब्धता ● किफायती जीवन सर्वेक्षण में कैसे भाग लें?

 शहर में उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं के बारे में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करने के लिए नागरिकों को वेबसाइट https://eo12022.org/citizenfeedback पर जाना चाहिए। केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रणाली पर संबंधित राज्य, शहर और भाषा का चयन किया जा सकता है फीडबैक जमा करने के समय नागरिकों से शहर कोड 802785 को अपडेट करने की अपेक्षा की जाती है. सर्वेक्षण में भागीदारी की अवधि: नागरिक 1 नवंबर 2022 से 23 दिसंबर 2022 तक अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकते हैं। नागरिकों से अपील:  वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन स्थानीय नागरिकों से सिटीजन परसेप्शन सर्वे में भाग लेने की अपील करता है ताकि नगर निगम को प्रशासनिक योजना में उत्पन्न होने वाली कमियों पर काम करने और नागरिकों की जरूरतों को जानने में मदद मिल सके।

 मुख्य कार्यालय विरार वसई – विरार शहर महानगरपालिका

बांदा में अराजक तत्वों ने गौवंश के जबड़े को विस्फोटक लगाकर उड़ाया, इलाज के बाद हुई मौत

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बांदा. यूपी के बांदा में अराजक तत्वों के द्वारा एक गोवंश के जबड़े में विस्फोटक पदार्थ लगाकर उसका जबड़ा उड़ाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्काल पशु चिकित्सक को बुलाकर गाय का प्राथमिक उपचार कर उसे गौशाला में भेज दिया गया, जहां बाद में गोवंश की दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना को लेकर गौ सेवकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है. गुस्साए लोगों ने पुलिस प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

ज्ञात हो कि ये घटना नगर कोतवाली क्षेत्र के जीआईसी कॉलेज मैदान की है जहां कल रात कुछ अराजक तत्वों ने एक गोवंश के जबड़े में विस्फोटक लगाकर उसका जबड़ा उड़ा दिया. जिसकी वजह से गोवंश बुरी तरह जख्मी हो गई थी. स्थानीय लोगों ने जब गोवंश को देखा तो इसकी सूचना पुलिस और गौ रक्षा समिति को दी. पुलिस और सुरक्षा समिति के अध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर पशु चिकित्सक को बुलाया और घायल गोवंश का प्राथमिक उपचार करा कर उसे गौशाला भेज दिया लेकिन बाद में गाय की दर्दनाक मौत हो गई. इस शर्मनाक घटना से हिंदुओं में रोष व्याप्त हो गया और उन्होंने प्रशासन से दोषियों को सजा देने की मांग की है.

गौ माता के लिए मंदिर के लिए आधी रात को द्वारकाधीश का खुला कपाट

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गुजरात का द्वारका। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी। 23 नवंबर 2022 की आधी रात को यहाँ द्वारकाधीश मंदिर के कपाट खुल गए। क्योंकि अपने मालिक के साथ 450 किलोमीटर की दूरी पैदल नाप 25 गाय दर्शन को पहुँचे। रिपोर्टों की माने तो ऐसा पहली बार हुआ है, जब आधी रात को मंदिर का कपाट खोला गया। गायों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था भी शायद पहली बार हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार इन गायों को लेकर महादेव देसाई कच्छ से द्वारका तक आए थे। ऐसा उन्होंने अपनी मन्नत पूरी होने के बाद की। उन्होंने गायों के लंपी रोग से ठीक होने की मन्नत माँगी थी। लंपी वायरस ने गुजरात, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तबाही मचा रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस वायरस से 60 हजार से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है।

महादेव देसाई की गायों ने द्वारका पहुँचकर सबसे पहले भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए। मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद मालिक के साथ-साथ गायों ने भी प्रसाद खाया। वहाँ मौजूद लोगों ने गायों के लिए पानी के साथ-साथ चारे की भी व्यवस्था की।

कच्छ में रहने वाले महादेव देसाई की गोशाला की 25 गाय करीब दो महीने पहले लंपी वायरस से ग्रस्त हो गई थीं। अपनी गायों को इस हालत में देख महादेव ने भगवान द्वारकाधीश से मन्नत माँगी थी कि यदि वे ठीक हो गईं तो वे इन गायों के साथ उनका दर्शन करेंगे।

वैसे तो महादेव बुधवार (23 नवंबर 2022) दिन में ही गायों के साथ द्वारका पहुँच गए थे। लेकिन दिन में द्वारकाधीश भगवान के दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ होती है। ऐसे में अगर मंदिर तक गायों को प्रवेश दिया जाता तो व्यवस्था बिगड़ सकती थी। इसलिए मंदिर समिति ने बैठक कर फैसला किया कि रात 12 बजे गायों के दर्शन के लिए कपाट खोले जाएँगे।

महादेव का कहना है कि जब गाय लंपी वायरस से ग्रसित हो गईं तो उन्होंने भगवान द्वारकाधीश से मन्नत माँगी और सब कुछ उन पर छोड़कर गायों के इलाज में लग गए। उन्होंने कहा, “कुछ दिन बाद ही गायें ठीक होने लगीं। करीब 20 दिन बाद सभी 25 गायें पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। इतना ही नहीं, गोशाला की दूसरी गायों में भी लंपी वायरस का संक्रमण नहीं फैला। इनके पूरी तरह स्वस्थ हो जाने के बाद मैं इन्हें लेकर पैदल ही कच्छ से द्वारका के लिए रवाना हो गया।”

( AapIndia )

जहाँगीर आर्ट गैलरी में मुंबई, पुणे और बंगलौर के 7 समकालीन चित्रकारों की पेंटिंग की समूह प्रदर्शनी

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मुम्बई। 7 समकालीन चित्रकार उल्हास रायकर, बी. जी. नारायण राव, बी. श्रीदेवी राव, माचा गंगादास, हंसा सेवानी, सीता सुधाकर और बसवराज अरागी द्वारा चित्रों की समूह प्रदर्शनी जहांगीर आर्ट गैलरी में सुसज्जित किया गया है। 21 से 27 नवंबर, 2022 तक सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे के बीच इस प्रदर्शनी को लोग देखकर उत्सुक हो रहे हैं। इस प्रदर्शनी में यथार्थवादी, अर्ध यथार्थवादी, आलंकारिक आध्यात्मिक और सार शैलियों में तेल, ऐक्रेलिक, मिक्स मीडिया, वॉटर कलर आदि कैनवास और पेपर आदि में एक सामान्य मंच पर प्रस्तुत विभिन्न कार्य भाग लेने वाले कलाकार की व्यक्तिगत शैलियों और धारणाओं को एक साथ प्रदर्शित करते हैं। अद्वितीय कला कार्यों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने की सच्ची इच्छा के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों से चित्रकार इस प्रदर्शनी में उपस्थित होते हैं।