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बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख को पहले दी जमानत, फिर लगा दी रोक

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख को पहले दी जमानत, फिर 10 मिनट बाद ही लगा दी रोक

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को भ्रष्टाचार के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को पहले तो जमानत दे दी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही इसपर रोक लगा दी।

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की जेल से बाहर निकलने की उम्मीद एक बार फिर से टूट गई। इस बार जमानत भी मिल गई लेकिन CBI की आखिरी दलील ने 10 मिनट के भीतर खेल पलट कर रख दिया। दरअसल, देशमुख को बेल मिलने के बाद सीबीआई ने हाईकोर्ट के सामने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही जिसके बाद अदालत ने उन्हें अनुमति दे दी और इस संदर्भ में खुद के आदेश पर 10 दिनों के लिए रोक लगा दी। बता दें कि देशमुख लगभग 13 महीनों से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। देशमुख एक ही आरोप से उत्पन्न दो जांचों में उलझे हुए हैं – एक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार के अपराध के लिए और दूसरा प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए। हालांकि देशमुख को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 4 अक्तूबर को जमानत दे दी थी। लेकिन सीबीआई वाले मामले में, विशेष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और उसी को देशमुख ने उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी।

देशमुख के वकील ने दिए ये तर्क
वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी और देशमुख की ओर से पेश अधिवक्ता अनिकेत निकम ने तर्क दिया कि चूंकि दोनों मामले जुड़े हुए हैं और चूंकि देशमुख को ईडी मामले में जमानत दी गई थी, इसलिए उन्हें सीबीआई मामले में जमानत दी जानी चाहिए। चौधरी ने तर्क दिया कि देशमुख ने कथित रूप से एक अपराध करने के लिए एक वर्ष से अधिक समय व्यतीत किया है इसलिए अब उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। वहीं अधिवक्ता अनिकेत निकम ने कहा कि हमने अदालत में स्वास्थ्य के आधार पर बहस की। उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा था और हमने अदालत के समक्ष उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड पेश किए। लेकिन सीबीआई ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। जिसके बाद अदालत ने उन्हें अनुमति दे दी और इस संदर्भ में 10 दिनों के लिए आदेश पर रोक लगा दी।

सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने किया जमानत का विरोध
वहीं सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मंत्री उच्चतम स्तर के भ्रष्टाचार में शामिल थे जिसने राज्य में शासन को प्रभावित किया। सिंह ने यह भी तर्क दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दी गई जमानत विधेय अपराध (इस मामले में, भ्रष्टाचार मामले) में जमानत देने का आधार नहीं हो सकती है। सिंह ने बताया कि देशमुख को सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने और डिफॉल्ट जमानत की मांग करने वाली याचिकाओं में राहत देने से इनकार कर दिया गया था। सिंह ने यह आशंका भी जताई कि एक प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते देशमुख मामले में लंबित जांच में हस्तक्षेप कर सकते हैं।

बोरवेल में मरते मासूम

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मध्य प्रदेश के बैतूल में बोरवेल के गड्ढे में गिरे 8 साल के तन्मय को 80 घंटे चले रेस्क्यू आपरेशन के बावजूद बचाया नहीं जा सका। बीती 6 दिसबंर की शाम को तन्मय 400 फीट गहरे बोरवेल के गड्ढे में गिर गया था। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद भी देशभर बच्चे लगातार बोरवेल में गिर रहे हैं। प्रशासन और लोगों की लापरवाही की वजह से बच्चे मौत में मुंह में समा रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि देश में ट्यूबवेल और बोरवेल के गड्ढे आखिर कब तक खुले छोड़े जाते रहेंगे और कब तब इसमें मासूम फंसते रहेंगे। हादसे आखिर कब तक होते रहेंगे? इसका जवाब कोई देना नहीं चाहता है।

बैतूल के इस हादसे ने 2006 की उस घटना को ताजा कर दिया है जब हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले के एक गांव में चार साल का प्रिंस एक 60 फीट गहरी बोरवेल में जा गिरा था। उस समय भारतीय सेना ने आगे आकर रेस्क्यू का जिम्मा संभाला था और 50 घंटे बाद प्रिंस का सफल रेस्क्यू किया गया। प्रिंस की तो ऐसी किस्मत रही कि वो पचास घंटे फंसे रहने के बाद भी जिंदा बाहर निकाल लिया गया। लेकिन बैतूल के तन्मय के साथ ऐसा नहीं हो पाया। प्रिंस के रेस्क्यू ऑपरेशन के दृश्य टीवी चैनलों पर लाइव दिखाये जाने के बाद देश—दुनिया का ध्यान ऐसी घटनाओं की ओर गया था। और उम्मीद जताई गई थी कि भविष्य में फिर कभी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

बोरवेल में गिरने पर बहुत ही कम बार ऐसा हुआ है कि किसी को जिंदा बचाया गया हो क्योंकि बोरवेल में ऑक्सीजन की कमी के चलते अंदर फंसे बच्चे का दम घुट जाता है वही बचाने की प्रक्रिया बेहद मुश्किल और लंबी चलने वाली होती है। ऐसा कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे ऐसे हादसों में होने वाली मौतों की संख्या का सही-सही पता चल सके लेकिन जैसी हमारी व्यवस्थाएं हैं और जिस तरह का हमारा तंत्र है, उसके मद्देनजर यह अवश्य कहा जा सकता है कि बार-बार होते ऐसे हादसों पर आंसू बहाना ही हमारी नियति है।

जानकारी के अनुसार देश में तेजी से गिरते भू-जल स्तर के चलते टयूबेल को चालू रखने के लिए कई बार उन्हें एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ता है। और जिस जगह से टयूबेल को हटाया जाता है, वहां लापरवाही के चलते बोरवेल खुला छोड़ दिया जाता है। तमाम हादसों के बावजूद न तो आम आदमी में जागरूकता आई है और न ही प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की फुर्सत है।

बोरवेलों में बच्चों के गिरने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2010 में ऐसी हादसों पर संज्ञान लिया था और कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। 2013 में सर्वोच्च अदालत ने बोरवेल से जुड़े कई दिशा-निर्देशों में सुधार करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। लेकिन नियमों की अवहेलना करना हमारी आदतों में शुमार हो गया है।

ऐसे हादसे बड़े ही दुखदाई होते हैं लेकिन उससे भी ज्यादा दुखदाई बात यह है कि हम जरा सी कोशिश उसे इन हादसों को टाल सकते हैं लेकिन फिर भी लापरवाही और मूर्खता के चलते थोड़ी भी सावधानी नहीं बरतते। जानकारों के अनुसार, बोरवेल की खुदाई से पहले खुदाई वाली जगह पर चेतावनी बोर्ड लगाया जाना और उसके खतरे के बारे में लोगों को सचेत किया जाना जरूरी है।। इसके अलावा ऐसी जगह को कंटीले तारों से घेरने और उसके आसपास कंक्रीट की दीवार खड़ी करने के अलावा गड्ढ़ों के मुंह को लोहे के ढ़क्कन से ढ़कना भी अनिवार्य है। लेकिन सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए गड्ढ़े खोदना और खुदाई के बाद उन्हें खुला छोड़ देने का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।

हर घटना से सीखने की बात होती है पर घटना दर घटना होती रहती है और मासूम मौत के कुएं में गिरते रहते हैं। मौत के ऐसे गड्ढे कब भरे जायेंगे जिम्मेदार इसका जवाब नहीं दे पा रहा हैं। आखिर कब तक मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ होता रहेगा? (युवराज)

प्रधानमंत्री ने नागपुर और बिलासपुर के बीच छठी वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई

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प्रधानमंत्री ने 11.12.2022 को नागपुर और बिलासपुर के बीच छठी वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई
प्रधानमंत्री ने नागपुर और अजनी रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का शिलान्यास किया
 नागपुर-इटारसी तीसरी लाइन परियोजना के कोहली-नरखेड़ खंड (49.74 किमी) एवं 12000 एचपी डब्ल्यूएजी-12 क्लास माल इंजनों के लिए सरकारी रखरखाव डिपो, अजनी को राष्ट्र को समर्पित किया*
 अत्यंत आकर्षक रंगीन ढंग से सजाए गए नागपुर स्टेशन पर जनता के उत्साह के बीच  नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ने आज दिनाँक 11.12.2022 को नागपुर रेलवे स्टेशन से नागपुर और बिलासपुर के बीच देश की छठी वंदे भारत एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया,उन्होंने नागपुर औऱ अजनी स्टेशन के पुनर्विकास का शिलान्यास , 12000 HP WAG-12 माल इंजनों के लिए समर्पित सरकारी रखरखाव डिपो, अजनी,  नागपुर-इटारसी तीसरी लाइन परियोजना का कोहली-नरखेड़ खंड (49.74 किमी) का  ई-पट्टिका से अनावरण करके राष्ट्र को समर्पित किया।
भगत सिंह कोश्यारी, महाराष्ट्र के राज्यपाल,  एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र के  मुख्यमंत्री, श्री नितिन गडकरी, माननीय केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, रावसाहेब दादाराव पाटिल दानवे, माननीय केंद्रीय रेल, कोयला और खान राज्य मंत्री,  देवेंद्र फडणवीस , महाराष्ट्र के माननीय उपमुख्यमंत्री, डॉ. भारती पवार, माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री,  वी.के. त्रिपाठी, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड, अनिल कुमार लाहोटी, महाप्रबंधक, मध्य रेल, श्रीमती ऋचा खरे, मंडल रेल प्रबंधक, नागपुर मंडल, मध्य रेल और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को मंच पर गणमान्य व्यक्तियों द्वारा एक पेंटिंग भेंट की गई। यह पेंटिंग उसी एंगल से एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी  बिजय बिस्वाल द्वारा बनाई गई है, जहां ऑरेंज सिटी नागपुर से छठी वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई गई थी।  50×30 इंच के कैनवास पर ऐक्रेलिक से एक महिला को प्लेटफार्म पर संतरे ले जाते हुए चित्रित किया गया है।
 महाराष्ट्र राज्य की शीतकालीन राजधानी नागपुर इस वंदे भारत एक्सप्रेस द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर और छत्तीसगढ़ राज्य के एक महत्वपूर्ण शहर बिलासपुर से जुड़ रहा है।  भारतीय रेल पहले से ही 5 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चला रहा है।  वंदे भारत एक्सप्रेस 2.0 यात्रियों को यात्रा अनुभव और कवच तकनीक सहित उन्नत अत्याधुनिक संरक्षा फीचर्स के साथ यात्रियों को प्रदान करने वाली असंख्य बेहतर सुविधाएं प्रदान करता है।  वंदे भारत ट्रेन में एक्जीक्यूटिव क्लास के डिब्बों में 180 डिग्री घूमने वाली सीटों की अतिरिक्त सुविधा के साथ रिक्लाइनिंग सीटें प्रदान की गई हैं।  प्रत्येक कोच 32” स्क्रीन से सुसज्जित है जो यात्री सूचना और इंफोटेनमेंट प्रदान करता है।  दिव्यांगों के अनुकूल वॉशरूम और ब्रेल अक्षरों में सीट नंबर के साथ सीट हैंडल भी उपलब्ध कराए गए हैं।  वायलेट (यूवी) लैंप के साथ उच्च दक्षता कंप्रेसर के माध्यम से बेहतर गर्मी वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग नियंत्रण टच फ्री सुविधाओं के साथ वैक्यूम शौचालय, सभी विद्युत कक्षों और शौचालयों में एयरोसोल आधारित आग का पता लगाने और दमन प्रणाली के साथ बेहतर अग्नि सुरक्षा उपाय।  वंदे भारत ट्रेन-जिसे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, पेराम्बूर, चेन्नई में स्वदेशी रूप से निर्मित किया गया है- भारतीय इंजीनियरों की क्षमता का प्रमाण है और मेक इन इंडिया पहल की पराकाष्ठा है।  यह माननीय प्रधानमंत्री के आत्म निर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
 20825 वन्दे भारत एक्सप्रेस दिनांक 12.12.2022 से प्रतिदिन शनिवार को छोड़कर बिलासपुर से  06.45 बजे प्रस्थान कर उसी दिन 12.15 बजे नागपुर पहुंचेगी।
 20826 वन्दे भारत एक्सप्रेस दिनांक 12.12.2022 से शनिवार को छोड़कर नागपुर से प्रतिदिन 14.05 बजे प्रस्थान कर उसी दिन 19.35 बजे बिलासपुर पहुंचेगी।
 ट्रेन में एसी चेयर कार और एक्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा होगी और यह नागपुर और बिलासपुर के बीच रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, गोंदिया स्टेशनों पर रुकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर और अजनी रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाओं (क्रमशः 589.22 करोड़ रुपये और 359.82 करोड़ रुपये की लागत) का शिलान्यास और 12000 एचपी डब्ल्यूएजी-12 श्रेणी के माल इंजनों के लिए समर्पित सरकारी रखरखाव डिपो, अजनी , लागत रु.110 करोड़) और नागपुर-इटारसी तीसरी लाइन परियोजना का कोहली-नरखेड़ खंड का (लागत रु.453 करोड़) नागपुर में ई -पट्टिकाओं का अनावरण करके राष्ट्र को समर्पित किया।

कृष्णा चौहान फाउंडेशन द्वारा चौथे बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2022 का शानदार आयोजन

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संगीतकार इस्माइल दरबार, संगीतकार दिलीप सेन, बी एन तिवारी, रमेश गोयल, अनिल नागराथ, योगेश लखानी, दीपा नारायण सहित कई हस्तियों को मिला सम्मान

मुम्बई। कृष्णा चौहान फाउंडेशन द्वारा बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड – 2022 के चौथा सीजन का आयोजन 10 दिसम्बर 2022 को किया गया। भारतीय फिल्मों और उसकी तरक्की में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को आयोजक कृष्णा चौहान ने इस पुरस्कार से सम्मानित किया।
ब्राइट आउटडोर मीडिया के सीएमडी डॉ योगेश लखानी, संगीतकार दिलीप सेन, देवदास और हम दिल दे चुके सनम फेम संगीतकार इस्माइल दरबार, बी एन तिवारी, रमेश गोयल, बीरबल, विजेंद्र गोयल, नाफ़े खान, देव मेनारिया, पुनीत सहित कई हस्तियां इस अवार्ड समारोह में सम्मिलित हुए।
डॉ योगेश लखानी, संगीतकार दिलीप सेन, बी एन तिवारी, रमेश गोयल, बीरबल, विजेंद्र गोयल, नाफ़े खान, देव मेनारिया, पुनीत ने दीप प्रज्वलित किया। शो में सिया काले ने डांस किया और भारती छाबड़िया ने एंकरिंग की।
समारोह में सिंगर संध्या पवार, विजय कश्यप, तृप्ति शुक्ला, निकेश ताराचंद, ज्योति झिंज्ञानी, बीरबल खोसला, के के गोस्वामी, पुनीत कुमार वोरा, जान्हवी राठौड़, डॉ भारती छाबड़िया को अवार्ड प्रदान किया गया।
ऐश्वर्या सिंह, दीपा नारायण, रंजन कुमार सिंह (टीवी डायरेक्टर), आर राजपाल, सिंगर राजू टांक, चंद्रप्रकाश, आसमा कपाड़िया, राजेन्द्र, उपेंद्र पंडित, महताब आलम, दिनेश कुमार, नसीर तगाले, दिलीप पटेल, देवेंद्र खन्ना, प्रमोद शर्मा, दीपक साहू, मंगेश, रत्न जी, रेहान शेख, गणेश पाण्डेय, पीके गुप्ता, केवल कुमार, तेजेन्द्र सिंह सहित कई लोगों को सम्मानित किया गया।
मंच पर संगीतकार दिलीप सेन ने कृष्णा चौहान की भारी प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि कृष्णा चौहान न केवल एक फ़िल्म निर्देशक एवं समाज सेवक हैं बल्कि अवार्ड्स फंक्शन करने के मामले में सबसे अधिक चर्चा में रहते हैं। वह केसीएफ के अंतर्गत बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड, बॉलीवुड आइकोनिक एवॉर्ड, लीजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और महात्मा गांधी रत्न अवार्ड का आयोजन पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं।
4 मई 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर कृष्णा चौहान ने लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड 2022 का भव्य आयोजन किया था।
अब चौथे बॉलीवुड लीजेंड अवार्ड 2022 का आयोजन 10 दिसम्बर को मेयर हॉल अंधेरी मुम्बई में किया।
नए वर्ष में कृष्णा चौहान अपनी अगली हॉरर थ्रिलर फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
आपको बता दें कि कृष्णा चौहान का हिंदी अल्बम ‘ज़िक्र तेरा’ हाल ही में रिलीज हुआ है और उनकी हिंदी फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ अगले माह फ्लोर पर जाने वाली है, जिसके संगीतकार दिलीप सेन हैं।

​​खुद को गाय-भैंस समझकर घास चरते हैं लोग

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​​खुद को गाय-भैंस समझकर घास चरते हैं लोग, दुनिया की सबसे अजीब बीमारी

सर्दी-खांसी, बुखार, सिर दर्द, कमर दर्द और न जाने ऐसी कितनी ही बीमारियां हैं, जिनके बारे में आप झट से बता देंगे. लेकिन एक ऐसी अनोखी बीमारी है, जिसे दुनिया की सबसे मिस्टीरियस या यू कहें कि अजीब बीमारी कहा जाता है. इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति किसी गाय या भैंस की तरह व्यवहार करने लगता है. जब ये बीमारी किसी इंसान को होती है तो वो गाय या भैंस की तरह घास तक चरने लगता है. बड़ी अनोखी बीमारी है ये और महिला या पुरुष किसी को भी हो सकती है.

बीमारी का नाम क्या है?
इस बीमारी का नाम है ​बोएंथ्रोपी (Boanthropy). इसे साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर कहा जाता है. इस बीमारी को दुर्लभ बीमारियों की लिस्ट में रखा गया है. इससे पीड़ित व्यक्ति हाथ और पैर जमीन पर रखकर गाय या भैंस की तरह चलने लगता है. उसे लगता है कि वह इन्हीं में से कोई जीव है और उनकी तरह घास खाने की कोशिश करता है. कई मामलों में ये भी देखा गया है कि ​बोएंथ्रोपी हो जाने पर व्यक्ति गाय या भैंस की तरह रंभाता भी है.

ये बीमारी होती क्यों है?
इसके बारे में अभी कई तरह की रिसर्च चल रही है. हालांकि, शुरुआती जो रिसर्च हैं उनमें पाया गया है कि जब व्यक्ति Delusional state यानी भ्रम की अवस्था में होता है तो वह ​बोएंथ्रोपी का शिकार हो सकता है. ये सम्मोहन के जरिए भी हो सकता है. हालांकि, यह बीमारी अभी तक बहुत ज्यादा लोगों को नहीं हुई है, लेकिन जिसके हुई उसके खतरनाक परिणाम सामने आए हैं. कई बार सपनों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाने से भी ये बीमारी हो सकती है. अगर कभी आपको अपने आसपास कोई व्यक्ति मिले, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाने की सलाह दें. इस बीमारी से ग्रसित होने पर मनोचिकित्सक काफी हद तक मददगार हो सकते हैं.

इस बीमारी सबसे दुर्भाग्यपूर्ण मामला
​बोएंथ्रोपी का सबसे खतरनाक मामला नेबूकग्नेजर (Nebuchadnezzar) नाम के राजा को हुई थी. वह नव-बेबीलोनियन साम्राज्य के पावरफुल राजा थे. वो राजा गाय की तरह बर्ताव करते थे और घास चरा करते थे. गूगल पर उनकी काफी सारी तस्वीरें मौजूद हैं.

खसरे के प्रभाव को रोकने को नवी मुंबई मनपा का टीकाकरण पर जोर

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खसरे के प्रभाव को रोकने को नवी मुंबई मनपा का सर्वेक्षण और टीकाकरण पर जोर

नवी मुंबई। विभिन्न शहरों में खसरे के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए नमुम्पा नियमित टीकाकरण कार्यबल की विशेष बैठक में महानगरपािलका आयुक्त राजेश नार्वेकर द्वारा अनुमोदित किया गया है िक यदि खसरे का कोई नया मामला सामने आता है तो उस क्षेत्र में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खसरा रूबेला टीके की 1 अतिरिक्त डोज और 6 माह से 9 माह तक के बच्चों को एमआर टीके की जीरो डोज देने का निर्णय लिया गया। इसके अनुसार जुहूगांव, सीबीडी बेलापुर, करावे, पावणे इन चार प्राथमिक स्वास्थय केंद्र परिसर में अतिरिक्त डोज व जीरो डोज िदया गया। इसमें पावने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के 19 बूथों पर 1596 अतिरिक्त डोज, जुहूगांव शहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के 17 बूथों पर 60 शून्य डोज और 1405 अतिरिक्त डोज दी गई। इसी प्रकार करावे नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र के 20 बूथों पर 59 जीरो डोज एवं 1025 अतिरिक्त डोज तथा सीबीडी बेलापुर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र के 27 बूथों पर 59 जीरो डोज एवं 1162 अतिरिक्त डोज दिये गये। टीकाकरण का दूसरा चरण पांच दिसंबर से नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जुहूगांव, सीबीडी बेलापुर, करावे, पावने खैरने के क्षेत्र में टीकाकरण का अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया है और
इसमें 8755 अतिरिक्त डोज और 224 जीरो डोज दी गई है। इसी तरह नागरिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खैरणे के क्षेत्र में 5 से 9 दिसंबर तक 9 माह से 5 वर्ष तक के 6406 बच्चों के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 43 बूथों की योजना बनाई गई है।

सुक्खू ने मुख्यमंत्री, अग्निहोत्री ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली

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विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सुक्खू के साथ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे मुकेश अग्निहोत्री ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शिमला के रिज मैदान पर शपथ ग्रहण समारोह हुआ।

राज्यपाल ने दिलाई शपथ
शिमला के रिज मैदान पर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने प्रदेश के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। मुकेश अग्निहोत्री ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ग्रहण की।
वीरभद्र सिंह को पुष्प अर्पित किए
सुखविंद्र सिंह सुक्खू की माता संसार देई, कांग्रेस सह प्रभारी संजय दत्त, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी मंच पर पहुंच गए हैं। प्रतिभा सिंह को राहुल गांधी ने मंच पर गले लगाया। छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह को राहुल गांधी और बहन प्रियंका गांधी ने पुष्प अर्पित किए।
रिज मैदान पर पहुंचे सुक्खू, मुकेश
सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने राजधानी शिमला के रिज मैदान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने मंच से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। लोगों ने मुख्यमंत्री जिंदाबाद, सुखविंद्र सिंह सुक्खू जिंदाबाद के नारे लगाए। मुकेश अग्निहोत्री भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ग्रहण करने रिज मैदान पर पहुंच गए हैं।
हमने वादा किया था, कांग्रेस को वापस लाएंगे
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व सांसद प्रतिभा सिंह ने राहुल गांधी से कहा कि हमने वादा किया था कि हम हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को वापस लाएंगे। राहुल गांधी ने इसके लिए प्रतिभा सिंह को बधाई दी।
हम सभी खुश हैं, इन्होंने बहुत मेहनत की है: प्रियंका गांधी

मनोनीत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए हिमाचल प्रदेश आने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “हम बहुत खुश हैं, इन्होंने बहुत मेहनत की है।

गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित हुई बाइक

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गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित हुई बाइक

फिरोजाबाद। जसराना में एटा शिकोहाबाद के पचवा चौराहे के पास गाय को बचाने के प्रयास में बाइक अनियंत्रित होकर राहगीर से टकरा गई। बाइक सवार एवं राहगीर गंभीर रुप से घायल हो गए। मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए भेजा। राहगीर की हालत गंभीर बनी हुई है।

थाना जसराना के गांव अतुर्रा निवासी चिंटू अपनी बाइक से जसराना की तरफ आ रहा था। पचवा चौराहे के पास गाय को बचाने के प्रयास में बाइक अनियंत्रित हो गई। अनियंत्रित होकर बाइक सड़क किनारे चल रहे सुदामा पुत्र विश्राम सिंह निवासी शीशपुरी थाना जसराना से जा भिड़ी। बाइक की टक्कर लगने से जहां सुदामा गंभीर रुप से घायल हो गया वहीं चिंटू को भी चोट लग गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। जानकारी मिलने पर कोतवाल आजादपाल सिंह मय पुलिस फोर्स के मौके पर पहुंचे और घायलों को उपचार के लिए भेजा। सुदामा की हालत गंभीर बनी हुई है।

गाय की इन टॉप 5 नस्लों से बढ़ेगी किसानों की आय

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गाय की इन टॉप 5 नस्लों से बढ़ेगी किसानों की आय

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं। कई किसान खेती के साथ पशुपालन करके अपनी आय बढ़ा रहे हैं। इसके लिए सरकार की ओर से भी गाय, भैंस पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज सरकार देश में जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए सरकार देसी गाय पालन के लिए सहायता प्रदान कर रही है। सरकार की ओर से किसानों को गाय पालन पर 900 रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। ऐसे में किसान गाय पालन करके काफी अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

गाय पालन से दो प्रकार से पैसा कमाया जा सकता है। पहला- गाय का दूध और उससे बने उत्पाद जैसे घी, दही, छाछ, पनीर आदि बेचकर अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। दूसरा- गाय के गोबर और गौमूत्र को जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों का रायायनिक खाद पर होने वाला खर्च बचेगा जो एक तरह से आपके लिए इनकम ही होगी। इस तरह किसान भाई गाय पालकर उसके दूध, गोबर और गोमूत्र से काफी अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। अब प्रश्न उठता है कि गाय पालन के लिए किस नस्ल का चयन किया जाए ताकि अधिक मुनाफा मिल सके। तो आज हम ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको गाय पालन के लिए अधिक मुनाफा देने वाली गाय की उन चुनिंदा 5 नस्लों के बारे की जानकारी दे रहे हैं, जो आपकी इनकम को बढ़ा सकती हैं। तो आइए जानतें हैं इन 5 नस्लों की खासियत, दूध देने की क्षमता और कीमत की पूरी जानकारी।

1- गिर गाय (Gyr Cattle)

यह गाय भारतीय मूल की देसी नस्ल की गाय है। गिर गाय (Gir cow) की एक ऐसी खास नस्ल है जो अधिक दूध देने के लिए जानी जाती है। इस नस्ल का मूल स्थान गुजरात के दक्षिण काठियावाड़ के गिर जंगलों को माना जाता है। इसी कारण से इस गाय का नाम गिर पड़ा है। इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे- गुजराती, काठियावाड़ी, सूरती, सोरठी, देसन आदि। इस नस्ल की गाय का शरीर लाल रंग का होता है। इसके शरीर पर गहरे लाल या चॉकलेटी रंग के धब्बे पाए जाते हैं। ये आकार में अन्य देसी गायों की तुलना में बड़ी होती है। इस नस्ल की गाय के कान लम्बे एवं नीचे की तरफ लटके होते हैं। यह गाय विभिन्न जलवायु एवं गर्म क्षेत्रों में भी आसानी से रह सकती है।

गिर गाय की कीमत और दूध की मात्रा

ये गाय ब्यात में 1200 से 1800 किलोग्राम तक दूध देती है। यदि प्रतिदिन दूध की मात्रा देखी जाए तो ये गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती है। इसकी भारतीय बाजार में कीमत 20 हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक होती है। बता दें कि गिर गाय की कीमत दूध देने की क्षमता, गाय की उम्र और उसके स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।

2- साहीवाल गाय (Sahiwal Cattle)

साहीवाल नस्ल की गाय भी देसी नस्ल की गाय है। इसका मूल उद्‌गम पाकिस्तान माना जाता है, लेकिन ये भारत में काफी पाली जाती है। ये भी अच्छी दूध उत्पादन क्षमता के लिए पहचानी जाती है। इसका शरीर गहरा, चमड़ी ढीली होती है इसका सिर और सींग छोटे होते हैं। इसका शरीर लंबा और गठिला होता है। इसका रंग लाल और गहरे भूरे रंग का होता है। इस गाय की सबसे बड़ी खासियत ये है इन गायों में गर्मी सहने की अच्छी क्षमता होती है और ये स्वभाव से भी अच्छी होती है। इसलिए साहीवाल गाय का पालन कम लागत पर किया जा सकता है।

साहीवाल गाय की कीमत और दूध की मात्रा

साहीवाल गाय से 10 से 16 लीटर  तक दूध प्राप्त किया जा सकता है। यह अपने एक दुग्धकाल के दौरान औसतन करीब 2227 लीटर दूध दे सकती है। इसके दूध में वसा की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। अब इसकी कीमत की बात करें तो साहीवाल गाय की कीमत करीब 70 से 75 हजार रुपय से शुरू होती है। गाय की कीमत उसके दूध की मात्रा और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।

3 – लाल सिंधी गाय (Red Sindhi Cattle)

इस गाय के शरीर का रंग गहरा लाला होता है। इसकी ऊंचाई मध्यम होती है। इसका सिर चौड़ा और मोटे सींग होते हैं। इसकी पूंछ लंबी होती है और टांगे छोटी होती है। इसकी त्वचा ढीली होती है। यह नस्ल सभी प्रकार की जलवायु और मौसम को सहन करने की क्षमता रखती है। इस नस्ल की खास बात ये हैं कि इस नस्ल को बीमारी कम लगती है। इस गाय का लाल नाम सिंधी इसलिए है कि इस नस्ल की गाय का जिला पहले सिंध था जो अब पाकिस्तान में है। इस गाय को कई और नामों से भी जाना जाता है जैसे- रेड कराची, सिंधी और माही इसके अन्य नाम हैं।

लाल सिंधी गाय की कीमत और दूध की मात्रा

यह गाय प्रति ब्यांत में औसतन 1600 लीटर दूध देती है। दूध में 5.0 प्रतिशत वसा की मात्रा होती है। इसकी नस्ल की गाय की कीमत 15 हजार से लेकर 80 हजार रुपए तक होती है। इसकी कीमत इसके दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।

4- कांकरेज गाय (Kankrej Cattle)

गाय की कांकरेज नस्ल गुजरात के बनासकांठा जिले की नस्ल है। यह गाय आकार में बड़ी होती है। इसके सींग लंबे होते हैं। इसका चेहरा छोटा और नाक थोड़ा ऊपर उठा हुआ है। इसके कान बड़े और लटके हुए होते हैं। कांकरेज गाय हलके भूरे से लेकर सलेटी के रंग में पाए जाते हैं। इनके शरीर के बाल छोटे और मुलायम होते है। इस नस्ल की सबसे बड़ी खासियत ये हैं कि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है। यह उच्च तापमान को आसानी से सहन कर लेती है।

कांकरेज गाय की कीमत और दूध की मात्रा

कांकरेज गाय की दूध देने की क्षमता भी अच्छी होती है। इस नस्ल की गाय प्रतिदिन 8 से 10 लीटर तक होती है। ये साल भर में 1750 लीटर तक दूध दे सकती है। इस नसल की गाय एक ब्यांत में औसतन 1800 किलो दूध देती है। इसके दूध में 4.8% वसा की मात्रा होती है। ये गाय अपने एक दुग्ध काल में औसतन 1738 किलोग्राम और अधिकतम 1800 किलो दूध दे सकती है। कांकरेज गाय की बाजार में कीमत एक लाख रुपए के आसपास होती है।

5 – थारपारकर गाय (Tharparkar Cattle)

थारपारकर नस्ल को सर्वश्रेष्ठ भारतीय गायों की नस्लों के रूप में पहचाना जाता है। इस नस्ल की गाय का रंग सफेद या धूसर होता है। इसकी पीठ के ऊपर हल्के सलेटी रंग की धारियां होती हैं। इसका सिर मध्यम आकार का और माथा चौड़ा होता है। इसके मोटे और मध्यम आकार के होते हैं। इसके कान चौड़े होते हैं। इसकी पूंछ पतली और लंबी होती है। ये गाय मुख्यत: राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर में पाई जाती है। इस गाय का उत्पत्ति स्थान बाडमेर का मालाणी क्षेत्र माना जाता है। इसलिए इसे यहां मालाणी नस्ल के नाम से भी जाना जाता है।

थारपारकर गाय की कीमत और दूध की मात्रा

इस नस्ल की गाय की दूध उत्पादन क्षमता भी अच्छी होती है। ये गाय प्रति ब्यांत काल के दौरान औसतन 1600-2500 लीटर देती है। नस्ल सुधार के बाद अब ये गाय 12 से लेकर 15 लीटर दूध प्रतिदिन दे रही हैं। इसके दूध में 4.88 प्रतिशत तक वसा की मात्रा पाई जाती है। भारतीय बाजार में थारपारकर गाय की कीमत 40 से 50 हजार रुपए तक होती है।

कुत्ते को पकड़ कर मार रहा था शख्स, गाय ने सींग से मारकर लिया बदला

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कुत्ते के कान को पकड़ कर मार रहा था शख्स, तभी गाय ने सींग से मारकर लिया बदला

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कुत्ते को एक शख्स मार रहा है. बेचारा बेजुबान जानवर चुपचाप दर्द झेल रहा है. उस समय कई लोग मौजूद रहते हैं, मगर कोई भी उस शख्स को रोकने की कोशिश नहीं करता है. तभी एक गाय की नज़र उस शख्स पर पड़ती है.

इस धरती पर इंसान अपने आप को शक्तिशाली समझते हैं. देखा जाए तो हैं भी. लेकिन हमें ये बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए कि धरती पर हक सिर्फ़ इंसानों का ही नहीं है. इंसानों के अलावा कई जीव-जंतु-पक्षी और जानवर रहते हैं. हमें सभी का ख्याल रखना है. मगर कुछ लोग अपनी गंदी हरकतों से मानवता को शर्मसार कर देते हैं. पिछले साल अक्टूबर में एक वीडियो वायरल हुआ था. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक शख्स एक कुत्ते के दोनों कानों को पकड़ कर उसे बेरहमी से माने की कोशिश कर रहा है. वहां कई इंसान मौजूद रहते हैं, मगर कोई भी उस कुत्ते की मदद नहीं करता है. वहीं पास में खड़ी गाय को गुस्सा आ जाती है. वो बिना देर किए हुए शख्स पर हमला कर देती है और नीचे गिराकर सींग से मारती है.

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कुत्ते को एक शख्स मार रहा है. बेचारा बेजुबान जानवर चुपचाप दर्द झेल रहा है. उस समय कई लोग मौजूद रहते हैं, मगर कोई भी उस शख्स को रोकने की कोशिश नहीं करता है. तभी एक गाय की नज़र उस शख्स पर पड़ती है और वो तुरंत कुत्ते का बदला ले लेती है. अपनी सींग से वो शख्स को गिरा देती है और पटक कर मारती है.

वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कुत्ते को एक शख्स मार रहा है. बेचारा बेजुबान जानवर चुपचाप दर्द झेल रहा है. उस समय कई लोग मौजूद रहते हैं, मगर कोई भी उस शख्स को रोकने की कोशिश नहीं करता है. तभी एक गाय की नज़र उस शख्स पर पड़ती है और वो तुरंत कुत्ते का बदला ले लेती है. अपनी सींग से वो शख्स को गिरा देती है और पटक कर मारती है.                                          ये वीडियो आईएफएस अधिकारी सुशांत नंदा ने 2021 में शेयर किया था. हालांकि ये वीडियो 1 साल पुराना है, मगर अभी भी प्रासंगिक है. हमें ऐसे दुष्ट लोगों को रोकना चाहिए. ऐसे लोगों के कारण जानवर और पक्षी परेशान होते हैं. इनमें दया नाम की कोई चीज़ नहीं है. मानवता के खातिर हमें ऐसे लोगों को रोकना होगा.