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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आध्यात्मिक महोत्सव में हुए सम्मिलित

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25 दिसम्बर 2023,हरिद्वार /देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

देहरादून/ हरिद्वार, दिनांक 25 दिसम्बर,
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कनखल स्थित श्री हरिहर आश्रम में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के आचार्य पीठ पर पदस्थापन के 25 वर्ष पूर्ण होने एवं श्री दत्त जयंती के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक महोत्सव में प्रतिभाग किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के आचार्य पीठ पर पदस्थापन के 25 वर्ष पूर्ण होने के दायित्व निर्वहन कार्यकाल पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिसका मन बड़ा होता है, वही आध्यात्मिक होता है। यह कार्य छोटे मन का नहीं कर सकता है तथा जो बड़ा मन का है, वही समाज को दिशा दे सकता है!


रक्षा मंत्री ने आध्यात्मिक महोत्सव में बैंकिंग चन्द्र चटर्जी के उपन्यास आनन्द मठ का उल्लेख करते हुये कहा कि किस प्रकार से संन्यासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया था। उन्होंने कहा कि संन्यासियों का देश की सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था से हमेशा जुड़ाव रहा है तथा जब भी आवश्यकता पड़ी उन्होंने इनके उत्थान में बड़ा योगदान दिया। उसी की वजह से हम अपनी संस्कृति पर गर्व करते हैं।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राजा अपना काम ठीक से करे, इसकी समीक्षा करने का अधिकार साधु-सन्तों को ही है। उन्होंने कहा कि जब कोई सन्त बनता है तो वह सबसे पहले अहम को त्यागते हुये वयम् को अपनाता है ! इसलिये बसुधैव कुटुम्बकम की भावना को देने का श्रेय संन्यासियों को है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उल्लेख करते हुये रक्षामंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के उन्नयन एवं समृद्धि के लिये निरन्तर कार्य किये जा रहे हैं, जिनमें काशी कारीडोर, उज्जैन, अयोध्या में राम मन्दिर, केदारनाथ मन्दिर परिसर में कार्य कराया जाना आदि प्रमुख हैं।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अवधेशानंद गिरि महाराज ने तप, तपस्या तथा आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण करते हुये लाखों सन्तों को दीक्षा दी तथा देश व दुनिया में वे संस्कृति के वाहक के रूप में प्रख्यात हैं तथा उनका ज्ञान दिव्य अनुभूति देता है।
इस पवित्र अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गोस्वामी तुलसीदास जी के रामचरित मानस की पंक्ति-सन्त समागम हरि कथा तुलसी दुर्लभ होय…. का उल्लेख करते हुये दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव में सभी सन्तों आदि को नमन किया। उन्होंने जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज का उल्लेख करते हुये कहा कि उनके व्यक्तित्व में चुम्बकीय तत्व हैं, जो भी उनके सम्पर्क में आता है, तो वह उनकी ओर खींचा चला जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहां समृद्ध संत परम्परा का एक साथ दर्शन हो रहे हैं, जो वसुधैव कुटुम्बकम् को चरितार्थ कर रहा है। आचार्य जूनापीठाधीश्वर भारत को विश्व गुरू के पद पर प्रतिस्थापित करने के लिये निरन्तर प्रयासरत रहते हैं। यह उत्सव आध्यात्मिक जागरण के क्षेत्र में नई पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने ने कहा कि जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज अनेकों जन-कल्याणकारी कार्य पूरी निष्ठा व लगन से करते चले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान, राष्ट्र निर्माण में मार्गदर्शन तथा आपसे सदैव प्रेरणा मिलती रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उल्लेख करते हुये कहा कि उनके नेतृत्व में निरन्तर सांस्कृतिक उत्थान हो रहा है। अयोध्या में राम मन्दिर का निर्माण प्रगति पर है, काशी कारीडोर के साथ ही उज्जैन भव्य स्वरूप ले चुका है, केदारनाथ धाम एक नये कलेवर में निखर रहा है, बद्रीनाथ में अनेकों कार्य कराये जा रहे हैं। केदारनाथ रोपवे तथा हेमकुण्ड रोपवे का कार्य प्रगति पर है, मानस खण्ड में जितने भी मन्दिर हैं, उनका सर्किट बनाने का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आदि कैलाश तथा पार्वती कुण्ड के दर्शन भी किये। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व का परिणाम है कि आज पूरा विश्व मार्गदर्शन के लिये भारत की ओर देखता है।
सरकार द्वारा लिये गये ठोस कदमों का जिक्र करते हुये कहा कि हमारी सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून राज्य में लागू किया है, धर्मान्तरण के लिये 10 साल की सख्त सजा का प्राविधान किया गया है, देवभूमि का मूल स्वरूप बना रहे, इसके लिये काफी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गयी है, सरकारी नौकरियों में मातृशक्ति को 30 प्रतिशत का क्षैेतिज आरक्षण प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये जो कमेटी गठित की गयी थी, उसने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है, जिसे नये साल में लागू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमने उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिये विकल्प रहित संकल्प लिया है तथा आप लोगों के आशीर्वाद से उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनायेंगे।
आध्यात्मिक महोत्सव को महामण्डलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि, पूज्य स्वामी चिदानन्द मुनि, स्वामी रामदेव, सुधांशु त्रिवेदी, सुरेश चौहान आदि ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर जगत गुरू स्वामी राजराजेश्वराश्रम, निर्वाणी पीठाधश्वर, अटल पीठाधीश्वर, स्वामी अपूर्वानन्द जी महाराज, दिनेश जी, पूर्व शिक्षा मंत्री भारत सरकार, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड एवं सांसद डॉ0 रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद महेश शर्मा सहित उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट में मंत्रीगण, साधु-सन्त, आध्यात्मिक जगत से जुड़े हुये विशिष्ठजन एवं सम्बन्धित पदाधिकारी एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

माँ भारती के अमर सपूत सदैव देते रहेंगे प्रेरणा.. -पुष्कर सिंह धामी

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25 दिसम्बर 2023,सोमवार,देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखंड प्रदेश

देहरादून,25 दिसम्बर, आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचकर जम्मू कश्मीर में माँ भारती की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले कोटद्वार निवासी राइफलमैन गौतम कुमार और चमोली के वीरेन्द्र सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले हमारे इन शहीदों को देश हमेशा याद रखेगा। राज्य सरकार प्रति क्षण सैनिक परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने शहीद गौतम कुमार और वीरेन्द्र सिंह के परिजनों से बात कर ढांढस बंधाया। दिवंगत आत्माओं की शांति और दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की मुख्यमंत्री ने ईश्वर से कामना की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र रक्षा के लिए हमारे जवानों द्वारा दिया गया बलिदान सदैव हम सभी को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड से चयनित 1376 नर्सिंग अधिकारियों को मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान किये नियुक्ति पत्र

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चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड से चयनित 1376 नर्सिंग अधिकारियों को मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान किये नियुक्ति पत्र

24 दिसम्बर 2023,रविवार, देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

 

नर्सिंग अधिकारी राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को देंगे मजबूती

देहरादून,24 दिसम्बर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित, मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। कार्यक्रम के दौरान चयनित 1376 अभ्यर्थियों में से 200 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किये। शेष सभी अभ्यर्थियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किये गये हैं।

मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले नर्सिंग अधिकारियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि चयनित सभी नर्सिंग अधिकारी लगन व कड़ी मेहनत के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और राज्य के विकास व जनसेवा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारी का दायित्व बहुत महत्वपूर्ण है। ग्राउंड लेवल पर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मुद्दों पर जनता को शिक्षित करने का दायित्व भी नर्सिंग अधिकारियों पर है। आपातकालीन स्थितियों में आपकी तत्परता और उत्कृष्टता लोगों के लिए जीवन रक्षा का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक कार्य किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ’आयुष्मान’ भारत योजना’ प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित हुई है। राज्य में सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले,इसके लिए राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड अटल आयुष्मान योजना से लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है। ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवाएं सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई हैं। सरकार जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चला रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए ’’जननी सुरक्षा योजना’’ संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देते हुए मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा भारत को क्षय मुक्त बनाने के लिए 2025 का लक्ष्य के सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा 2024 तक उत्तराखण्ड को क्षय मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें भी नर्सिंग अधिकारियों की अहम भूमिका होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दो-दो वैक्सीनों द्वारा देश की जनता की ही नहीं बल्कि अन्य देशों की भी मदद की। हमें अभी भी कोरोना के प्रति सावधानी रखनी है और लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाए रखने हेतु कार्य करना है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को 13 वर्ष के उपरांत 1376 नर्सिंग अधिकारी मिले हैं। उन्होंने कहा कि सभी चयनित नर्सिंग अधिकारियों के पहले पांच साल राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में सेवायें देनी होगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को जेआरडी टाटा मेमोरियल अवार्ड से नवाजा गया है। यह अवार्ड 42 स्वास्थ्य सूचकांकों में बेहतर प्रदर्शन पर राज्य को मिला। उन्होंने कहा कि टाटा रिसर्च सेंटर के सर्वे के अनुसार उत्तराखण्ड में क्रिटिकल मरीजों के लिए हवाई सेवा उपलब्ध कराने, अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना, 276 प्रकार की निःशुल्क जांच और 90 प्रतिशत से अधिक संस्थागत प्रसव कराने का सराहनीय प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, खजानदास, श्रीमती सविता कपूर, राजकुमार पोरी, ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, कुलपति उत्तराखण्ड चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रो. हेमचन्द्र, महानिदेशक स्वास्थ्य, डॉ. विनीता शाह एवं स्वास्थ्य विभाग सम्बंधित अधिकारी उपस्थित थे।

आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत के सशक्त कानून*   

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आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत के सशक्त कानून*                                                                                                                                                                                              *विष्णुदत्त शर्मा – विनायक फीचर्स* 
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने संसद के दोनों सदनों में आपराधिक न्यायिक प्रणाली में सुधार के तीन विधेयक प्रस्तुत किये एवं दोनों सदनों में यह विधेयक ध्वनिमत से पारित होने के पश्चात् एक नए युग की शुरुआत हो गयी है।
*भारत में अब भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 जो आईपीसी, 1860 को प्रतिस्थापित करेगा*
*भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 जो सीआरपीसी, 1898 को प्रतिस्थापित करेगा*
*भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 जो साक्ष्य अधिनियम, 1872 को प्रतिस्थापित करेगा।*
इन विधेयकों की शुरूआत ऐसे समय में हुई है जब विश्व तेजी से तकनीकी प्रगति, सामाजिक परिवर्तन और विकसित हो रहे वैश्विक मानकों को देख रहा है। ब्रिटिश काल के दौरान बनाए गए मौजूदा कानूनों कि अक्सर पुराने होने और  समकालीन जरूरतों के अनुरूप नहीं होने के कारण आलोचना की जाती रही है। नए कानून 21वीं सदी के साथ कानूनी प्रणाली को संरेखित करने की मोदी सरकार कि मंशा को दर्शाते हैं, जिसमें नागरिक-केंद्रित कानूनी संरचनाओं, लिंग तटस्थता, डिजिटल परिवर्तन और सजा के बजाय न्याय पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया गया है। इन परिवर्तनकारी कानूनी सुधारों का उद्देश्य भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को नया आकार देना, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय के कुशल प्रशासन को सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व एव हमारे केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के दृढ़ संकल्प शक्ति का परिणाम था कि सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा के बाद इन कानूनों को लाया गया है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से देश के नाम अपने सम्बोधन में कहा था कि “ …ये समय गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर, अपनी विरासत पर गर्व करने का है“ और आजादी के अमृतकाल में भारत ने संकल्प लिया है कि उन सभी गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति पाना है। वास्तव में भारत की प्राचीन सभ्यता में अपराधियों को दंड देने के बजाय पीड़ित को न्याय देने का प्रचलन था किन्तु औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों ने अपनी सत्ता स्थायी रखने के उद्देश्य से भय प्रस्थापित करने हेतु दंड को प्राधान्य दिया था।
इन कानूनों के प्रमुख प्रावधानों में राजद्रोह को निरस्त कर देशद्रोह को स्थापित करना, मॉब लिंचिंग के खिलाफ एक नया प्रावधान, नाबालिगों के बलात्कार के लिए मृत्युदंड, आतंकवाद की परिभाषा और छोटे अपराधों के लिए पहली बार सामुदायिक सेवा को दंड के रूप में सम्मिलित किया है। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, हत्या और राज्य के खिलाफ अपराधों को प्राथमिकता दी गई है। अलगाववादी गतिविधियों या भारत की संप्रभुता और एकता को खतरे में डालने वाले कृत्यों पर नए अपराध जोड़े गए हैं। मुख्यतः यह विधेयक मानव केंद्रित न्याय प्रणाली सुनिश्चित करने का कार्य करेंगे और अब लोगां को “तारीख पर तारीख“ से मुक्ति मिलेगी। यह नए कानून भारतीय आत्मा से ओत-प्रोत हैं और इनका उद्देश्य संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और न्याय प्रदान करना है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयकों की शुरूआत भारत की कानूनी प्रणाली के लिए अत्यधिक महत्व रखती है जिससे निम्नलिखित संकल्प पूर्ति का लक्ष्य है :
*आधुनिकीकरणः*  यह कानून औपनिवेशिक विरासत से प्रस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे प्रावधान प्रस्तुत करते हैं जो समकालीन सामाजिक मूल्यों और तकनीकी प्रगति को दर्शाते हैं। डिजिटल अपराधों और साक्ष्यों को मान्यता देकर, नए कानून 21 वीं सदी की वास्तविकताओं को दर्शाते हैं, जिससे भारत की कानूनी प्रणाली का आधुनिकीकरण होता है।
*दक्षताः* कानूनी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देकर, इन कानूनों का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की दक्षता को बढ़ाना, देरी को कम करना और त्वरित न्याय को सुनिश्चित करना है।
*नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोणः* नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और जीवन में सुगमता सुनिश्चित करने पर जोर देने के साथ ही इनका लक्ष्य दंड से न्याय पर लक्ष्य केंद्रित करना है।
वैश्विक मानकों के अनुरूपः यह आपराधिक न्यायिक प्रणाली के सुधार भारत की कानूनी प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम क़ानूनी प्रथाओं के अनुरूप हैं। गौरतलब है आपराधिक न्यायिक प्रणाली में सुधार की यह प्रक्रिया वर्ष 2019 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में गृह मंत्रालय द्वारा शरू की गई जिसमें विभिन्न हितधारकों से इस संदर्भ में सुझाव मांगे गए। गृह मंत्री जी ने सितम्बर 2019 में सभी राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों/प्रशासकों को पत्र लिखा था। जनवरी 2020 में भारत के मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, बार काउंसिलों और विधि विश्वविद्यालयों और दिसम्बर 2021 में संसद सदस्यों से भी सुझाव मांगे गए। बीपीआरडी ने सभी आईपीएस अधिकारियों से सुझाव मांगे। मार्च 2020 को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के कुलपति की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की गई जिसे कुल 3200 सुझाव प्राप्त हुए थे।
साथ ही 18 राज्यों, 06 संघ राज्य क्षेत्रों, भारत के सर्वोच्च न्यायालय, 16 उच्च न्यायालयों, 27 न्यायिक अकादमियों-विधि विश्वविद्यालयां,  पुलिस बलों ने भी अपने सुझाव दिए है। गृह मंत्री अमित शाह जी ने 158 व्यक्तिगत बैठकें की, तत्पश्चात इन सुझावों पर गृह मंत्रालय में गहन विचार-विमर्श किया गया और इसी के परिणाम स्वरूप यह तीन कानून बने हैं। हम यह कह सकते हैं कि सरकार ने व्यापक चर्चा उपरांत जनआकांक्षाओं का सम्मान कर इन कानूनों को लाया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार पिछले साढ़े 9वर्षों में, हमारी संस्थाओं और प्रणालीगत कानूनों को पुनर्जीवित करने के मिशन पर कार्य रही है, जो 19 वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन और उनके प्रतिनिधियों द्वारा हमारे प्राचीन सभ्यतागत सोच विचार  को ब्रिटिश शासन के अधीन एवं राज्य चलाने के उद्देश्य से बनाये गए थे। निश्चित रूप से यह नए कानून हमारी कानूनी आत्मनिर्भरता के युग की शुरुआत है एवं इन कानूनों के पारित होने का सुखद अनुभव वास्तव में हमें दासता से मुक्ति का बोध कराता है। *( विनायक फीचर्स )*
 *- लेखक मध्य प्रदेश भाजपा  के  अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य हैं।*

मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने की धामी सरकार ने अपर मुख्य सचिव वाली समिति को दी जिम्मेदारी

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23 दिसम्बर 2023,शनिवार, देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मानक निर्धारित करने हेतु समिति गठित

मूल निवास प्रमाण पत्र पर सरकार का बड़ा फैसला

देहरादून,23 दिसम्बर, शनिवार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य के व्यापक हित में पूर्व में गठित भू-कानून समिति की अनुशंसा पर कार्यवाही हेतु शासनादेश सं. 2232 दिनांक 22 दिसम्बर, 2023 द्वारा उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति राज्य सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले भू-कानून के प्रारूप के साथ ही साथ मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में मानकों का निर्धारण करने के संबंध में भी अपनी संस्तुति शासन को उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री धामी द्वारा प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद उसी वर्ष अगस्त माह में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति को राज्य में औद्योगिक विकास कार्यों हेतु भूमि की आवश्यकता तथा राज्य में उपलब्ध भूमि के संरक्षण के मध्य संतुलन को ध्यान में रख कर विकास कार्य प्रभावित न हों, इसको दृष्टिगत रखते हुए विचार – विमर्श कर अपनी संस्तुति सरकार को उपलब्ध कराने को कहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में गठित समिति द्वारा राज्य के हितबद्ध पक्षकारों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित कर गहन विचार -विमर्श कर लगभग 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। इसके अलावा समिति ने सभी जिलाधिकारियों से प्रदेश में अब तक दी गई भूमि क्रय की स्वीकृतियों का विवरण मांग कर उनका परीक्षण भी किया। समिति ने अपनी संस्तुतियों में ऐसे बिंदुओं को सम्मिलित किया है जिससे राज्य में विकास के लिए निवेश बढ़े और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो। साथ ही भूमि का अनावश्यक दुरूपयोग रोकने की भी समिति ने अनुशंसा की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा – मेरे लिये राज्य हित सर्वोपरि है।

राज्यवासियों ने जिस संकल्प के साथ राज्य निर्माण का सपना देखा है उसको पूर्ण करने के लिये वे निरंतर प्रयासरत है। राज्यवासियों का राज्य हित से जुड़ा भू-कानून हो या मूल निवास प्रमाण पत्र का विषय इस दिशा मे राज्य सरकार संजीदगी के साथ राज्यवासियों के साथ है। इसी के दृष्टिगत इन विषयों पर सम्यक रूप से विचार विमर्श कर अपनी सुस्पष्ट संस्तुति राज्य सरकार को उपलब्ध कराने के लिये ही अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। जिसमें विषय विशेषज्ञ के रूप में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। उक्त समिति भू-क़ानून को लागू करने के प्रारूप के साथ ही मूल निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने हेतु मानकों के निर्धारण का कार्य भी करेगी।

पवित्र धार्मिक स्थलों पर वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग।

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अंकित मिश्रा
मुंबई। भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष अर्जुन गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एवं केंद्रीय रेल राज्य मंत्री राव साहेब दानवे पाटिल को पत्र लिखकर मांग किया है कि मुंबई से वाराणसी,अयोध्या और मथुरा इन तीनों पवित्र स्थलों पर वंदे भारत ट्रेन चलाई जानी चाहिए।
अर्जुन गुप्ता ने पत्र में लिखा है कि मुंबई में उत्तर भारत के लोग कई पीढ़ियों से बसे हैं। मुंबई से काशी मथुरा एवं अयोध्या के लिए एक-एक वंदे भारत ट्रेन रोज नहीं तो कम से कम सप्ताह में एक बार चलाई जानी चाहिए। वंदे भारत ट्रेन चलाने से मुंबईकरों का बहुत ही फायदा होगा।

मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिंद्रा पर पत्नी को पीटने का आरोप

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नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में अंतर्राष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिंद्रा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। यह केस उनकी दूसरी पत्नी के भाई की शिकायत पर दर्ज किया गया है। इस शिकायत में मोटिवेशनल स्पीकर के चमक- दमक वाले चेहरे के पीछे का पहलू सामने आया है। आरोप है कि विवेक बिंद्रा ने पत्नी यानिका को कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा। यानिका को कमरे में बंद कर गाली- गलौच की। उसके बाल खींचे। चेहरा नोचा। मोबाइल तोड़ दिया। पिटाई से यानिका के कान का पर्दा फट गया। विवेक बिंद्रा के खिलाफ नोएडा में एफआईआर दर्ज कराया गया है। एफआईआर के मुताबिक, 6 दिसंबर को विवेक बिंद्रा की यानिका से शादी हुई थी। मारपीट की घटना 8 दिसंबर की बताई जा रही है। इसके बाद यानिका को दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

यानिका के भाई वैभव क्वात्रा ने विवेक के खिलाफ 14 दिसंबर को सेक्टर- 126 थाने में केस दर्ज कराया। हालांकि, यह मामला शुक्रवार की शाम सामने आया। इसके साथ ही विवेक बिंद्रा का वीडियो भी सामने आया है, इसमें वह सोसायटी के गेट पर पत्नी के साथ नोकझोंक करते दिख रहे हैं। वीडियो सामने आते ही वायरल होने लगा। विवेक बिंद्रा एक बड़े बिजनेस के सीईओ हैं। उनकी कंपनी का नाम बड़ा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड है। यह कंपनी लोगों को इंटरप्रेन्योरशिप और व्यापारिक लोगों को ट्रेनिंग और सलाह देती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कंपनी का टर्नओवर करीब 50 करोड़ का है। ऑफिशियल डेटा अब तक सामने नहीं आ पाया है। उनके यूट्यूब पर 21.4 मिलियन यानी करीब दो करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं।

क्या है पूरा विवाद?

विवेक बिंद्रा पर गंभीर आरोप लगा है। दरअसल, मां से बहस करने से रोकने पर पत्नी को पीटने का आरोप मोटिवेशनल स्पीकर पर लगा है। गाजियाबाद के चंदर नगर के रहने वाले वैभव क्वात्रा ने विवेक बिंद्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने अपने बहनोई विवेक बिंद्रा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वैभव ने दर्ज कराए गए एफआईआर में आरोप लगाया है कि मेरी बहन यानिका की शादी 6 दिसंबर को विवेक बिंद्रा के साथ ललित मानगर होटल में हुई थी। विवेक इस समय नोएडा के सेक्टर- 94 स्थित सुपरनोवा वेस्ट रेजीडेंसी में रहते हैं। शादी के दो दिन बाद 8 दिसंबर की सुबह 3:00 बजे विवेक अपनी मां प्रभा से किसी बहस कर रहे थे। पत्नी यानिका दोनों के बीच आ गई। यानिका ने बीच- बचाव की कोशिश की। पति विवेक को समझाना शुरू किया। इस पर विवेक पत्नी पर भड़क गए।

एफआईआर के अनुसार, विवेक ने पत्नी यानिका को कमरे में बंद कर दिया। उसके साथ गाली- गलौच की। उसके साथ मारपीट की। उसका मोबाइल तोड़ दिया। विवेक ने यानिका के बाल नोच लिए। एफआईआर में कहा गया है कि विवेक ने यानिका की ऐसी पिटाई की, जिससे उसके पूरे शरीर पर घाव हो गया। वैभव ने शिकायत में कहा है कि यानिका के सिर में घाव की वजह से उसे चक्कर आ रहा है। कान से सुनाई नहीं दे रहा है। इलाज के लिए कड़कड़डूमा स्थित कैलाश दीपक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वैभव ने अपनी शिकायत में कहा है कि गंभीर स्थिति में यानिका ने अपनी बहन को फोन किया। उसे अपनी स्थिति के बारे में बताया। इसके बाद वैभव अपनी बहन के साथ यानिका के घर पहुंचे। उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल उसे लेकर अस्पताल गए। वहां उसे भर्ती कराया गया। अस्पताल में लगातार उसका इलाज चल रहा है। वैभव ने कहा कि मेरी बहन इस मारपीट की घटना से पूरी तरह टूट चुकी है। वह मानसिक रूप से काफी परेशान है। किसी से भी अधिक बातचीत नहीं कर रही है।

पहली पत्नी से भी कोर्ट में चल रहा मामला

विवेक बिंद्रा मोटिवेशनल स्पीच और सलाहों से कंपनियों को खड़ी करने की सलाह तो देते हैं, लेकिन अपने परिवार को खड़ा करने में वे कामयाब नहीं रहे हैं। उनकी पहली पत्नी गीतिका सबरवाल से भी उनका विवाद चल रहा है। दोनों के बीच का विवाद कोर्ट में विचाराधीन है। फरीदाबाद के ओमेक्स हाईट्स सोसायटी में रहने वाली गीतिका बिंद्रा ने फरीदाबाद सेंट्रल थाना में पति के विवाद के बाद शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में कहा गया था कि पति विवेक बिंद्रा के साथ उनका कई सालों से विवाद चल रहा है। गीतिका ने विवेक से खुद की जान को खतरा बताया था। कोर्ट में उनके बीच तलाक का केस चल रहा है, इस केस में उन्होंने विवेक बिंद्रा से गुजारा- भत्ता की भी मांग की है। उन दोनों का एक बेटा भी है। पहली पत्नी से विवाद के बाद विवेक ने यानिका से दूसरी शादी की।

41 साल की उम्र में शादी

विवेक बिंद्रा ने 41 साल की उम्र में शादी की। शादी के महज कुछ ही दिनों बाद उन पर केस दर्ज हो गया। हालांकि, पत्नी से मारपीट की घटना को शादी के महज दो दिन बाद की बताई जा रही है। मोटिवेशनल स्पीकर पर पत्नी के साथ बर्बरता का आरोप लगा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं। इन वीडियो में महिला की कलाई पर मारपीट के निशान दिख रहे हैं। एनबीटी ऑनलाइन इन वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। हालांकि, पत्नी यानिका के भाई के एफआईआर ने उनकी ओर से की गई बर्बरता को सामने ला दिया है। यानिका के भाई वैभव ने दर्ज कराए गए केस पर पुलिस से विवेक के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की है।

संदीप महेश्वरी से हुआ है विवाद

विवेक बिंद्रा का विवादों से पुराना नाता है। कई बार वे अपने बयानों से विवाद में फंस चुके हैं। मोरबी टाइल्स विवाद इसी में से एक है। इस विवाद में उन्होंने मोरबी टाइल्स पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, विवाद गहराने के बाद उन्हें अपना वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाना पड़ा। पिछले दिनों उनका मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर संदीप महेश्वरी से विवाद गहरा गया। दोनों ने वीडियो बनाकर एक- दूसरे पर खुलेआम आरोप लगाए। यह मामला सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बना हुआ है।

सम्मिश्रण के लिए कोयला आयात 44.28 प्रतिशत घटा

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कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम; अप्रैल-नवंबर 2023 के दौरान घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन में 8.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई

लगभग 4.7 प्रतिशत की वार्षिक बिजली मांग में वृद्धि के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है। विशेष रूप से, देश में अप्रैल से नवंबर 2023 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बिजली उत्पादन में 7.71 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अप्रैल-नवंबर 23 के दौरान कोयला आधारित बिजली उत्पादन में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 11.19 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जिसका कारण तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि, देश के उत्तरी क्षेत्र में मानसून में देरी और कोविड के बाद पूर्ण वाणिज्यिक गतिविधियों का फिर से शुरू होना रहा।

नवंबर 2023 तक घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन 779.1 बिलियन यूनिट (बीयू) तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में उत्पन्न 718.83 बिलियन यूनिट (बीयू) से 8.38 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

बिजली की बढ़ती मांग के फलस्वरूप सम्मिश्रण के लिए कोयले का आयात नवंबर, 2023 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि में 27.21 मीट्रिक टन से 44.28 प्रतिशत कम होकर 15.16 (एमटी) हो गया है। यह कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता और समग्र कोयला आयात को कम करने के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार कोयला उत्पादन को और बढ़ाने के अपने प्रयासों में लगी हुई है, जिसका लक्ष्य उपलब्धता बढ़ाना और आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रह सके।

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नवीकरणीय ऊर्जा की ओर सहज परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं

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New Delhi – केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत मंत्री ने बताया कि भारत ने नवंबर, 2021 में आयोजित जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के पक्षों के सम्मेलन (कॉप 26) के 26वें सत्र में अपने 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य को हासिल करने की घोषणा की। भारत का अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 50 प्रतिशत संचयी विद्युत स्थापित क्षमता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो धीरे-धीरे जीवाश्म-ईंधन-उत्पन्न ऊर्जा स्रोतों से नवीकरणीय स्रोतों में परिवर्तित हो रहा है।

देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं:

  • भारत को हरित हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया गया।
  • उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम), रूफटॉप सोलर चरण II, 12000 मेगावाट सीपीएसयू योजना चरण II जैसी योजनाएं।
  • बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स को भूमि और ट्रांसमिशन प्रदान करने के लिए अल्ट्रा मेगा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क की स्थापना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछाना और नई सब-स्टेशन क्षमता बनाना।
  • 30 जून 2025 तक चालू होने वाली परियोजनाओं के लिए सौर और पवन ऊर्जा की अंतर-राज्य बिक्री के लिए अंतर राज्य ट्रांसमिशन सिस्टम (आईएसटीएस) शुल्क की छूट।
  • वित्तीय वर्ष 2023-24 से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा 50 गीगावॉट/वर्ष की नवीकरणीय ऊर्जा बिजली बोलियों के लिए निर्धारित गति मार्ग की अधिसूचना जारी की जाएगी।
  • ग्रिड कनेक्टेड सोलर पीवी और पवन परियोजनाओं से बिजली की खरीद के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के लिए मानक बोली दिशानिर्देश।
  • सौर फोटोवोल्टिक प्रणाली/उपकरणों की तैनाती के लिए मानकों की अधिसूचना।
  • सरकार ने आदेश जारी किए हैं कि नवीकरणीय ऊर्जा जनरेटरों को वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) या अग्रिम भुगतान के आधार पर बिजली भेजी जाएगी।
  • हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस नियम 2022 के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की अधिसूचना।
  • विद्युत (विलंब भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियम (एलपीएस नियम) की अधिसूचना।
  • स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देना।
  • एक्सचेंजों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा बिजली की बिक्री की सुविधा के लिए ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (जीटीएएम)।
  • 2029-30 तक वितरण कंपनियों सहित नामित उपभोक्ताओं द्वारा गैर-जीवाश्म संसाधनों की खपत का न्यूनतम हिस्सा निर्दिष्ट करना।

कोयला मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए इनपुट के आधार पर, नवीकरणीय ऊर्जा में सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

i. कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल): सीआईएल और उसकी सहायक कंपनियों पर प्रति वर्ष 4600 मिलियन यूनिट का वर्तमान भार है। सीआईएल का इरादा वित्त वर्ष 2025-26 में 3000 मेगावाट की सौर परियोजनाएं स्थापित करके नेट जीरो ऊर्जा कंपनी बनने का है।

ii. एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल): एनएलसीआईएल ने पहले ही 1431.06 मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित कर ली है, जिसमें से 11.06 मेगावाट (ग्राउंड माउंटेड-10 मेगावाट और रूफ टॉप-1.06 मेगावाट) का उपयोग स्वयं की खपत के लिए किया गया है और शेष 1,420 मेगावाट को ग्रिड जोड़ा गया है। 2030 तक एनएलसीआईएल द्वारा कुल 6,031.06 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित किए जाने की उम्मीद है।

iii. सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल): एससीसीएल ने एससीसीएल के 9 स्थानों पर 224 मेगावाट के सौर संयंत्र स्थापित किए हैं और 2023-24 के अंत तक 5 और स्थानों पर शेष 76 मेगावाट स्थापित करेगा। इसके अलावा, नेट जीरो कंपनी बनने के लिए 2024-25 के दौरान एससीसीएल द्वारा 232 मेगावाट आरई क्षमता स्थापित की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, झारखंड राज्य के शमन और अनुकूलन प्रयासों को मजबूत करने के लिए राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर जलवायु परिवर्तन पर झारखंड कार्य योजना लागू कर रहा है।

यह जानकारी केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत मंत्री श्री आर.के. सिंह ने 21 दिसंबर, 2023 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है।

भूख से व्याकुल गौमाता, हरे चारे की जगह दे रहे सिर्फ सूखा भूसा पराली

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गौर, बस्ती। उत्तर प्रदेश जनपद बस्ती के विकासखंड गौर में गौशाला के लिए सरकार द्वारा भारी भरकम बजट भी पास किया जाता है, लेकिन वही जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायत गौर के गौशाला में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है. आलम यह है कि मवेशियों को भरपेट चारा नहीं नसीब हो रहा है. सूखे भूसे और पराली से ही उनके पेट को भरा जा रहा है. ठंड से बचाने के लिए जानवरों के लिए नाममात्र की व्यवस्था की गई है। लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसमें पशुओं को बांध दिया गया है।

वही गौर विकास खंड के ग्राम पंचायत गौर में बनाई गई अस्थाई गौशाला में भी मवेशियों के लिए हरे चारे की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है. मवेशी सुखा भूसा खाने को मजबूर है। ग्राम पंचायत गौर गौशाला की जमीनी स्तर पर रियलिटी चेक किया गया तो पता चला कि गौशाला में मवेशियों को हरा चारा तक नहीं नसीब हो रहा है पीने के लिए जो पानी भरा गया था वह काफी दिनों से बदला नहीं गया है। पानी के टैंक में नीचे कूड़ा कचरा भरा था छाया के लिए टिन शेड लगाई गई है। गौशाला में चारो तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है. ठंड से बचने के लिए नाम मात्र की व्यवस्था की गई है।

छुट्टा गौवंशों के संरक्षण के लिए सरकार के आदेश पर बस्ती में 56 गौ आश्रय स्थल संचालित हैं, लेकिन इस आश्रय स्थलों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है. जिले के गौर विकासखंड में गौर ग्राम सभा में संचालित गौ आश्रय स्थल का जब रियलिटी चेक किया गया तो वहां आश्रय स्थल पर गौवंशों की देखभाल करने वाले सुबह – शाम ही आते हैं। यहां पर गौ-आश्रय स्थल पर गोवंश बंधे हुए मिले, लेकिन उनके सामने हरा चारा कभी देखने को नहीं मिला। वहीं गौर ग्राम पंचायत के सचिव प्रशांत कुमार पांडे ने बताया कि गौशाला में हरा चारा और दाने का व्यवस्था भी किया गया है।

कर्मचारी पवन कुमार ने बताया कि हरा चारा, दाना कुछ नहीं मिलता और समय से वेतन भी नहीं मिलता। गौशाला में कुल 20 पशु है। उन्होंने कहा कि प्रधान जी कभी-कभी आते हैं। और ग्राम पंचायत सचिव जल्दी दिखाई नहीं देते है। जब भी कोई बात होती है तो फोन से बात किया करते हैं। इसके अलावा प्रधान की तरफ से ही लोग आते हैं हरा चारा, दाना कभी नहीं आया, वर्तमान में सूखा भूसा, पराली ही परोसी जा रही है। ठंड से बचाने के लिए जानवरों के लिए नाममात्र की व्यवस्था की गई है।