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पीएम विश्वकर्मा योजना पर सोनीपत (हरियाणा) में जागरूकता कार्यक्रम

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के करनाल स्थित एमएसएमई-विकास कार्यालय  द्वारा 27 दिसंबर, 2023 को जीवीएम गर्ल्स कॉलेज, मुरथल रोड, सोनीपत में पीएम विश्वकर्मा योजना पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सोनीपत जिले की राई विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री मोहनलाल बड़ौली थे।

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कार्यक्रम का शुभारंभ श्री संजीव चावला निदेशक एमएसएमई डीएफओ करनाल ने सभी अतिथियों के स्वागत से किया और एक वीडियो के माध्यम से पीएम विश्वकर्मा योजना के बारे में चर्चा करते हुए इस योजना के विभिन्न घटकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्‍होंने ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय की पंजीकरण प्रक्रिया और ऑन-बोर्डिंग के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों के समग्र विकास के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता के बारे में जानकारी उपलब्‍ध करना है। इस योजना के तीन स्तंभ हैं – सम्मानसामर्थ्‍य और समृद्धि

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इस कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि राई विधानसभा क्षेत्र से विधायक श्री मोहन लाल बडौली ने अपने भाषण के दौरान कहा कि हरियाणा राज्य के सभी कारीगरों को योजना के तहत पंजीकरण कराकर लाभ उठाना चाहिए।

एमएसएमई मंत्रालय की ओर से अपर विकास आयुक्त डॉ. इशिता गांगुली त्रिपाठी ने बताया कि यह योजना 17 सितंबर, 2023 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत कारीगरों को 15000 रुपये तक के कीमत की टूल किट दी जाएगी और 5 प्रतिशत ब्याज पर बिना गारंटी के 3 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ-साथ 500 रुपये प्रतिदिन का दैनिक भत्ता, मुफ्त कौशल प्रशिक्षण, विपणन सहायता, प्रमाण पत्र तथा कारीगर पहचान पत्र प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह जानकारी देते हुए  प्रसन्नता व्यक्त की कि कुल नामांकन में महिलाओं की भागीदारी 55 प्रतिशत है। उन्‍होंने सभी से आत्मनिर्भर बनने और अपना स्वयं का उद्यम स्थापित करने के लिए इस योजना का लाभ उठाने का अनुरोध किया।

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इस कार्यक्रम को श्री राकेश कादयान, नगर परियोजना अधिकारी (शहरी स्थानीय निकाय) सोनीपत और श्री परमवीर सैनी एवं श्री दिनेश स्वामी ने जिला प्रशासन की ओर से संबोधित किया। इस कार्यक्रम के दौरान सीएससी सेंटर की ओर से 10 स्टॉल लगाए गए। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, राजमिस्त्री, नाई, धोबी, दर्जी जैसी 18 विभिन्न श्रेणियों के कारीगरों का मौके पर ही पंजीकरण किया गया और उन्हें पीएम विश्वकर्मा के तहत दिए जाने वाले लाभों के बारे में जानकारी दी गई।

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संयुक्त निदेशक श्री वीपी सिंह वालिया, जिला एमएसएमई केंद्र, सोनीपत द्वारा धन्यवाद प्रस्‍ताव दिया गया। इस कार्यक्रम में श्री सौरभ अरोड़ा, सहायक निदेशक, श्री सतपाल, सहायक निदेशक, श्री केसी मीना, सहायक निदेशक, श्री एमके वर्मा, सहायक निदेशक, श्री बलबीर सिंह, सहायक निदेशक, श्रीमती रचना त्रिपाठी, सहायक निदेशक, श्रीमती मीनू बाला धीमान, सहायक निदेशक और श्री हरपाल सिंह, सहायक निदेशक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में लगभग 300 कारीगरों ने भी भाग लिया।

 

प्रधानमंत्री का 30 दिसंबर को अयोध्या दौरा – 11,100 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और होगा शिलान्यास

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Highlights 

प्रधानमंत्री अयोध्या में नागरिक सुविधाओं के सुधार और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 11,100 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे

प्रधानमंत्री अयोध्या हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे; आसन्‍न श्री राम मंदिर की वास्तुकला को दर्शाने वाले टर्मिनल भवन के अग्र-भाग का भी उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री द्वारा दो नई अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने के क्रम में देश में अमृत भारत ट्रेनों का परिचालन आरंभ हो जाएगा

प्रधानमंत्री छह नई वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे

आसन्‍न श्री राम मंदिर तक पहुंच बढ़ाने के लिए, प्रधानमंत्री अयोध्या में चार नव विकसित, चौड़ी और सौन्‍दर्यपूर्ण सड़कों का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री अयोध्या में 2180 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित की जा रही ग्रीनफील्ड टाउनशिप की आधारशिला रखेंगे

प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में 4600 करोड़ रुपये से अधिक की अन्य विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे

New Delhi –  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 30 दिसंबर, 2023 को उत्तर प्रदेश में अयोध्या का दौरा करेंगे।
लगभग 11:15 बजे, प्रधानमंत्री पुनर्विकसित अयोध्या रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे तथा नई अमृत भारत ट्रेनों और वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। वे कई अन्य रेलवे परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। दोपहर लगभग 12:15 बजे प्रधानमंत्री नवनिर्मित अयोध्या एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। दोपहर लगभग एक बजे प्रधानमंत्री एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहां वे राज्य में 15,700 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। ये सभी परियोजनाएं राष्‍ट्र के लिए बहुत महत्‍व रखती हैं। इनमें अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 11,100 करोड़ रुपये की परियोजनाएं और पूरे उत्तर प्रदेश में अन्य परियोजनाओं से संबंधित लगभग 4600 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं।
प्रधानमंत्री की परिकल्‍पना अयोध्या में आधुनिक विश्वस्तरीय अवसंचरना का विकास करना, कनेक्टिविटी में सुधार करना और शहर के समृद्ध इतिहास व विरासत के अनुरूप नागरिक सुविधाओं का कायाकल्‍प करना है। इस परिकल्‍पना को साकार रूप देने के लिए शहर में एक नए हवाई अड्डे, नए पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन, नव पुनर्विकसित, चौड़ी और सौन्‍दर्यपूर्ण सड़कों तथा अन्य नागरिक अवसंरचना का उद्घाटन किया जा रहा है। इसके अलावा, कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, जो अयोध्या और उसके आसपास नागरिक सुविधाओं के सौंदर्यीकरण और सुधार में योगदान देगी।

अयोध्या हवाई अड्डा

अत्याधुनिक हवाई अड्डे के पहले चरण को 1450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल 6500 वर्गमीटर होगा, जो सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की सेवा के लिए सुसज्जित होगा। टर्मिनल भवन का अग्रभाग अयोध्या के आसन्‍न श्रीराम मंदिर की वास्तुकला को दर्शाता है। टर्मिनल भवन के अंदरूनी हिस्सों को भगवान श्रीराम के जीवन को दर्शाने वाली स्थानीय कला, पेंटिंग और भित्तिचित्रों से सजाया गया है। अयोध्या हवाई अड्डे का टर्मिनल भवन विभिन्न सुविधाओं से सुसज्जित है, जैसे इन्सुलेशन छत प्रणाली, एलईडी प्रकाश व्यवस्था, वर्षा जल संचयन, फव्वारे के साथ भूनिर्माण, जल उपचार संयंत्र, सीवेज उपचार संयंत्र, सौर ऊर्जा संयंत्र तथा ऐसी कई अन्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं। ये सभी सुविधाएं गृह – 5 स्टार रेटिंग के अनुरूप होंगी। हवाई अड्डे से क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे पर्यटन, व्यावसायिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन

पुनर्विकसित अयोध्या रेलवे स्टेशन का पहला चरण – जिसे अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है – 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। तीन मंजिला आधुनिक रेलवे स्टेशन की इमारत लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा, पूजा-अर्चना की सामग्री की दुकानों, क्लॉक रूम, चाइल्ड केयर रूम, वेटिंग हॉल जैसी सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। स्टेशन भवन ‘सभी के लिए सुलभ’ और ‘आईजीबीसी प्रमाणित ग्रीन स्टेशन भवन’ होगा।

अमृत भारत ट्रेनेंवंदे भारत ट्रेनें और अन्य रेल परियोजनाएं

अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश में सुपरफास्ट यात्री ट्रेनों की एक नई श्रेणी – अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। अमृत भारत ट्रेन गैर वातानुकूलित डिब्बों वाली एक एलएचबी पुश पुल ट्रेन है। बेहतर गति के लिए इस ट्रेन के दोनों छोरों पर इंजन लगे हैं। यह रेल यात्रियों के लिए सुंदर और आकर्षक डिजाइन वाली सीटें, बेहतर सामान रैक, उपयुक्त मोबाइल होल्डर के साथ मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, एलईडी लाइट, सीसीटीवी, सार्वजनिक सूचना प्रणाली जैसी बेहतर सुविधाएं प्रदान करती है। प्रधानमंत्री छह नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री दो नई अमृत भारत ट्रेनों अर्थात दरभंगा-अयोध्या-आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस और मालदा टाउन-सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनस (बेंगलुरु) अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे।

प्रधानमंत्री छह नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें श्री माता वैष्णो देवी कटरा-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस; अमृतसर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस; कोयंबटूर-बैंगलोर कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस; मैंगलोर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस; जालना-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस और अयोध्या-आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।

प्रधानमंत्री क्षेत्र में रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 2300 करोड़ रुपये की तीन रेलवे परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। परियोजनाओं में रूमा चकेरी-चंदेरी तीसरी लाइन परियोजना शामिल है; जौनपुर-अयोध्या-बाराबंकी दोहरीकरण परियोजना के जौनपुर-तुलसी नगर, अकबरपुर-अयोध्या, सोहावल-पटरंगा और सफदरगंज-रसौली खंड; और मल्हौर-डालीगंज रेलवे खंड का दोहरीकरण और विद्युतीकरण परियोजना शामिल है।

अयोध्या में नागरिक अवसंरचना में सुधार

आसन्‍न श्री राम मंदिर तक पहुंच बढ़ाने के लिए, प्रधानमंत्री अयोध्या में चार नव पुनर्विकसित, चौड़ी और सौन्‍दर्यपूर्ण सड़कों – रामपथ, भक्तिपथ, धर्मपथ और श्री राम जन्मभूमि पथ का उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री कई परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे, जो नागरिक अवसंरचना को मजबूत करेंगी तथा अयोध्या और उसके आसपास सार्वजनिक स्थानों को सुंदर बनाएंगी। इन उद्घाटन परियोजनाओं में राजर्षि दशरथ स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय; अयोध्या-सुल्तानपुर रोड-हवाई अड्डे को जोड़ने वाली चार-लेन सड़क; एनएच-27 बाईपास महोबरा बाजार होते हुए टेढ़ी बाजार श्री राम जन्मभूमि तक फोर-लेन सड़क; शहर भर में कई सुंदर सड़कें और अयोध्या बाईपास; एनएच-330ए का जगदीशपुर-फ़ैज़ाबाद खंड; महोली-बड़ागांव-ड्योढ़ी मार्ग और जसरपुर-भाऊपुर-गंगारामन-सुरेशनगर मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण; पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर बड़ी बुआ रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी; ग्राम पिखरौली में ठोस अपशिष्ट उपचार संयंत्र; और डॉ. ब्रजकिशोर होम्योपैथिक कॉलेज और अस्पताल में नई इमारतें और कक्षाएं, सहित अन्य शामिल है। प्रधानमंत्री ‘मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना’ के कार्य व पांच पार्किंग और वाणिज्यिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों का भी उद्घाटन करेंगे।

अयोध्या में नई परियोजनाओं का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे, जो अयोध्या में नागरिक सुविधाओं के सुधार में मदद करेंगी और साथ ही शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करेंगी। इनमें अयोध्या में चार ऐतिहासिक प्रवेश द्वारों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण; गुप्तार घाट और राजघाट के बीच नए कंक्रीट घाट और पूर्व-निर्मित घाटों का जीर्णोद्धार; नया घाट से लक्ष्मण घाट तक पर्यटक सुविधाओं का विकास एवं सौन्दर्यीकरण; राम की पैड़ी पर दीपोत्सव और अन्य मेलों के लिए आगंतुक गैलरी का निर्माण; राम की पैड़ी से राजघाट और राजघाट से राम मंदिर तक तीर्थ पथ का सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण शामिल है।

प्रधानमंत्री अयोध्या में 2180 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाली ग्रीनफील्ड टाउनशिप और लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाली वशिष्ठ कुंज आवासीय योजना की आधारशिला रखेंगे।

प्रधानमंत्री एनएच-28 (नया एनएच -27) लखनऊ-अयोध्या खंड की आधारशिला भी रखेंगे; मौजूदा अयोध्या बाईपास एनएच-28 (नया एनएच -27) का सुदृढ़ीकरण और संशोधन; अयोध्या में सीआईपीईटी केन्द्र की स्थापना तथा नगर निगम अयोध्या एवं अयोध्या विकास प्राधिकरण कार्यालय का निर्माण कार्य।

उत्तर प्रदेश भर में अन्य परियोजनाएँ

सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे। इनमें गोसाईं की बाजार बाईपास-वाराणसी (घाघरा ब्रिज-वाराणसी) (एनएच-233) का चार-लेन चौड़ीकरण शामिल है। इसके अलावा अन्‍य परियोजनाओं में एनएच-730 के खुटार से लखीमपुर खंड का सुदृढ़ीकरण और उन्नयन; अमेठी जिले के त्रिशुंडी में एलपीजी संयंत्र की क्षमता वृद्धि; पंखा में 30 एमएलडी और जाजमऊ, कानपुर में 130 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट; उन्नाव जिले में नालियों को ठीक करना और मोड़ना तथा सीवेज उपचार कार्य; और कानपुर के जाजमऊ में टेनरी क्लस्टर के लिए सीईटीपी शामिल है।

नए साल की पूर्वसंध्या पर यात्रा: छुट्टियों के मौसम से पहले नए साल की पूर्वसंध्या पर घूमने की जगहें खोजें

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जैसे-जैसे नए साल की पूर्वसंध्या करीब आती है, लंबे सप्ताहांत के साथ, यात्रियों के लिए नई जगहों का पता लगाने और शहर की हलचल से आराम पाने का यह एक शानदार समय है
 सिक्किम की सुरम्य प्राकृतिक सुंदरता के बीच, आपकी आत्मा को पुनर्जीवित करने के लिए यहां कुछ शानदार अनुभव देने  वाले रास्ते हैं।  वैकल्पिक रूप से, यदि आप प्रकृति और हरे-भरे परिवेश से प्यार करते हैं, तो तुंगी एक आदर्श विकल्प प्रदान करता है।  यदि आप पहाड़ों और पक्षियों की धुनों के बीच रोमांच की तलाश में हैं, जो रोमांच चाहने वाली इच्छाओं को पूरा करने के लिए एकदम सही सेटिंग प्रदान करता है।

अपनी आगामी छुट्टियों के लिए नीचे सुझाए गए गंतव्यों की सूची देखें

क्लब महिंद्रा का ले विंटुना गंगटोक: गंगटोक में क्लब महिंद्रा का ले विंटुना रिसॉर्ट सिक्किम की सुरम्य प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित है। इस आश्चर्यजनक गंतव्य के लिए अपनी यात्रा की योजना बनाते समय, आप आस-पास के पर्यटक आकर्षणों का पता लगा सकते हैं और नए अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।  ले विंटुना गंगटोक गंगटोक के सबसे प्रीमियम रिसॉर्ट्स में से एक है, जो विलासिता, शांति और खुशी का एक आदर्श मिश्रण पेश करता है।  यहां घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से फरवरी तक है।  रिज़ॉर्ट शीर्ष स्तर का आतिथ्य और आपके और आपके प्रियजनों के लिए डिज़ाइन की गई इनडोर और आउटडोर गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है, जो इसे प्रकृति की गोद में विश्राम और कायाकल्प के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।  इसमें उत्कृष्ट इनडोर सेटिंग, आश्चर्यजनक परिवेश, नदी के किनारे का स्थान, आधुनिक सुविधाएं और स्थानीय सिक्किमी व्यंजनों सहित विविध पाक व्यंजन शामिल हैं।  आप मल्टी कुजीन   रेस्तरां करी में सिक्किम की थाली, विभिन्न प्रकार की पकौड़ी, ताज़ी नदी मछली, शेफ के विशिष्ट व्यंजन और अन्य विदेशी स्वादों का स्वाद ले सकते हैं।

क्लब महिंद्रा का तुंगी: क्या आप शहर की हलचल से दूर एक स्वप्निल छुट्टी की तलाश में हैं?  लोनावाला शहर के पास ऊंचे इलाके में क्लब महिंद्रा तुंगी है, जो रोमांचक गतिविधियों और आसपास के परिदृश्य के लुभावने दृश्यों से भरी छुट्टियां प्रदान करता है।  यह सुरम्य स्थान आगंतुकों को अपने परिवेश की शांति में पूरी तरह से डूबने की अनुमति देकर एक आरामदायक और प्रेरणादायक अवकाश प्रदान करता है।  अपने दिन की शुरुआत आश्चर्यजनक दृश्य वाले शांत बगीचे में एक आरामदायक योग या ध्यान सत्र के साथ करें, अनंत पूल में आराम करें, या हैप्पी हब में गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं। तुंगी विभिन्न प्रकार के आउटडोर रोमांच प्रदान करता है, जिसमें रस्सी गतिविधियाँ, एटीवी सवारी, सफारी, बंजी ट्रैम्पोलिन, क्रिकेट और बहुत कुछ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य एक सुखद पारिवारिक छुट्टी सुनिश्चित करना है।

प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं बच्चे और बुजुर्ग

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प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं बच्चे और बुजुर्ग
सुभाष आनंद – विभूति फीचर्स

पंजाब के किसानों द्वारा धान की पराली को आग लगाने के कारण प्रदूषण बढऩे लगा है। इसी कारण पंजाब के बड़े-
बड़े शहरों और कस्बों में बच्चों के फेफड़े कमजोर हो रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों में बढ़ते प्रदूषण के लिए सांस लेने में
बहुत तकलीफ हो रही है,इससे फेफड़ों की कार्य क्षमता लगातार कमजोर हो रही है। शरीर में आक्सीजन का स्तर
सामान्य से कुछ कम होने के कारण प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती जा रही है। पिछले दिनों पंजाब के शिशु रोग
विशेषज्ञों की एक बैठक में डाक्टरों ने कहा कि जिस प्रकार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहहा है,उससे चौंकाने वाले तथ्य
सामने आ रहे हैं।

फिरोजपुर सिविल अस्पताल और मैडीकल कालेज फरीदकोट मे ंतैनात शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बाल
रोग विभाग की अस्थमा क्लीनिक में सांस से जुड़ी बीमारियों से पीडि़त बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसमें 5 वर्ष
से 16 वर्ष तक के बच्चों के आंकड़ों को शामिल किया गया है।

अस्थमा से पीडि़त लोगों को सांस लेने में बहुत मुश्किल पेश आ रही है। 30 फीसदी बच्चों में रक्त जांच करने के
पश्चात पाया गया है कि प्रदूषण से शरीर में आक्सीजन का स्तर सामान्य से कम मिला,इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता
भी कम हो रही है।

मौसम परिवर्तन के कारण बच्चे सर्दी जुकाम बुखार एवं दूसरी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। एलर्जी से पीडि़त लोग
भी ओपीडी में आ रहे हैं।

बच्चों में निमोनिया भी हो रहा है,शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि 50 फीसदी से अधिकतर बच्चों में सांस लेने में
तकलीफ की समस्या है। बार-बार बच्चों के बीमार होने के कारण उम्र के हिसाब से बच्चों का शरीरिक विकास नहीं हो
रहा है। शारीरिक रूप से कमजोर बच्चे स्कूल में भारी बैग उठाने से थकान महसूस करते हैं,खेलते खेलते उन बच्चों का
दम फूलने लगता है। सीढिय़ां चढ़ते समय उनकी सांस फूलने की समस्या उभर कर सामने आती है।

एंटी बायोटिक दवाईयां हो रही है बेअसर- पंजाब के अधिकतर बाल रोग विशेषज्ञों का एक मत कहना है कि बच्चों में
ज्यों ज्यों फेफड़ों की बीमारी हो रही है,इसमें एंटीबायोटिक्स दवाईयां असर नहीं कर रही। प्रदूषण की समस्या से
निपटने के लिए कार्य योजना बनाना सरकारों की ड्यूटी है। स्कूल बच्चों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराए।

डा. शील सेठी का कहना है कि कुछ चिंताजनक हैं, इसमें बच्चों का शीघ्र थकान महसूस करना, सांस फूलना तथा
सामान्य बीमारियों में दवाईयां प्रभावहीन होना है, डाक्टरों ने तो वृद्धों को सुबह की सैर न करने की भी सलाह दी
है,क्योंकि किसान रात्रि के समय परालियों को आग लगाते हैं,जिससे वायु प्रदूषित हो जाता है। (विभूति फीचर्स)

तुलसी में बड़े-बड़े गुन – हमारे ग्रंथों में वर्णित एक अनोखा और अद्भुत पौधा है।

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रवीन्द्रनाथ शुक्ल – विभूति फीचर्स

तुलसी हमारे ग्रंथों में वर्णित एक अनोखा और अद्भुत पौधा है। इसमें लगभग सभी रोगों को दूर करने की विलक्षण
शक्ति होती है। तुलसी शब्द का अर्थ ही तीनों प्रकार के अर्थात्- दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का संहार करने वाला
है। तुलसी का पौधा भारत के अतिरिक्त ईरान, बर्मा, लंका, अफ्रीका, अरब, ब्राजील, यूरोप, चीन, जापान, आस्ट्रेलिया
तथा मलाया आदि देशों में भी पाया जाता है।

तुलसी का पौधा साधारणत: एक से तीन फुट ऊंचा होता है। कभी-कभी काफी मोटाई के साथ इसकी ऊंचाई छह फीट
तक देखी गई है। तुलसी के इस प्रकार के मोटे पौधे प्राय: तुलसी की माला बनाने के काम में आते हैं। तुलसी की पत्ती
गोलाई लिए लंबी होती है। जिसकी शाखाओं के सिरों पर बालें निकलती हैं। जिन्हें तुलसी के फूलों की मंजरी कहते हैं।
तुलसी की मंजरियों में ही तुलसी के बीज होते हैं तुलसी के फूल साल भर खिलते रहते हैं। तुलसी का पौधा साधारणत:
मार्च से जून तक लगाया जाता है। सितंबर और अक्टूबर में इसमें पुष्प लगने आरंभ होते हैं और जाड़े के दिनों में इसके
बीज पकते हैं। तुलसी के नाम हैं- बृंदा, बहुमंजरी, वैष्णवी, सुरसा, ग्राम्या, सुलभा, देवदुंदुभी, सुगंधा, गंधहारिणी,
अमृता, पत्रपुष्पा, श्यामा, रामा, गौरी, सुरबसल्लरी, विष्णुवल्लभा, सुरभि, शुलहानी। यह दो प्रकार की होती है एक
सफेद और दूसरी काली।

कुछ लोगों के ख्याल से सफेद तुलसी की अपेक्षा काली तुलसी में अधिक गुण पाए जाते हैं। लेकिन भावप्रकाश के
अनुसार काली व सफेद दोनों प्रकार की तुलसी के गुण समान होते हैं- शुक्ला कृष्णा च तुलसी गुणैस्तुल्या प्रकीर्तिता।
तुलसी की देशविभेद से कितनी ही जातियां होती हैं। जिसमें बबुई तुलसी, रामतुलसी, वन तुलसी मुख्य हैं। तुलसी में
स्वास्थ्यवर्धक गंध होती है। जहां तुलसी के पौधे अधिकता से होते हैं वहां की वायु तुलसी की इस गंध की वजह से
शुद्ध और साफ रहती है। इसी कारण भारत के हिन्दू घर में कम से कम तुलसी का एक पौधा रोपना जरूरी समझते
थे। जो एक धार्मिक परंपरा बन गई है।

जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वह घर तीर्थ के समान पवित्र होता है तथा उस घर में (रोग रूपी) यमदूत नहीं
आते। कारण, तुलसी की पत्तियों के संपर्क से वायु शुद्ध होती है और जब मनुष्य ऐसी शुद्ध हवा में सांस लेता है तो
शरीर के प्रत्येक कोष पर बड़ा ही कल्याणकारी प्रभाव पड़ता है। जिसके फलस्वरूप शरीर का रक्त शुद्ध हो जाता है,
फेफड़े निरोग बनते हैं तथा शरीर के सभी स्थूल व सूक्ष्म अवयव स्वस्थ और शक्तिशाली बनकर रोग को पास फटकने
नहीं देते। यही कारण है कि प्राचीन भारत में रोगियों को तुलसी के जंगल या बगीचे में रखने की प्रथा थी। क्योंकि
तुलसी की सुगंध वाली वायु से दसों दिशाएं और चारों भूतग्राम अर्थात आकाश, वायु, जल और पृथ्वी शुद्ध हो जाते हैं
यथा- तुलसी गंधमादाय यत्र गच्छति मारुत। दिशो दश पुनात्याशु भूतग्रामांश्चतुर्विधान्।।

तुलसी के निकट बैठकर प्राणायाम करने से तुलसी की रोगनाशक सुगंधित वायु शरीर में प्रविष्ट होकर रोग के समस्त
कीटाणुओं को नाश कर देती है, जिससे शरीर बलवान, वीर्यवान और मन प्रसन्न बनता है। सौंदर्य, तेज तथा ओज की
वृद्धि होती है। यह बात प्रयोगों से सिद्ध हो चुकी है कि तुलसी की गंधयुक्त वायु में मच्छरों का प्रवेश नहीं होता।
इसीलिए इसमें मलेरिया के कीटाणु नाश को प्राप्त हो जाते हैं। मच्छर ही नहीं, सभी प्रकार के दुखदायी जीवजंतु जैसे
भुनगा, खटमल, झींगुर यहां तक कि सर्प भी तुलसी की गंध से भाग जाते हैं। इसीलिए तुलसी का एक नाम
अपेतराक्षसी भी मशहूर है। जिसका अर्थ है राक्षसरूपी रोग के कीटाणुओं को मार भगाने वाला। कपड़े-लत्तों के बाक्स में
तुलसी की कुछ पत्तियां रख छोडऩे से कपड़ों में कीड़े आदि नहीं लगते और न ही चूहे काटते हैं।

तुलसी की कुछ पत्तियां साधारण जल में डाल देने से वह सारा का सारा जल तुलसी की पत्तियों की गंध से सुवासित
होकर तुलसीदल के समान गुणकारी हो जाता है। यदि किसी जगह का पानी दूषित हो, जिससे स्वास्थ्य हानि पहुंचने
की संभावना हो, उस पानी को दोषमुक्त करने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते छोड़ देने चाहिए। ऐसा करने से वह पानी
कभी नुकसान नहीं करेगा। इसके अतिरिक्त तुलसी के कुछ पत्तों को कुछ देर तक जल में रखकर उन्हें एक घूंट उसी
जल के साथ रोज सुबह स्नानादि से निबट कर सेवन करने से कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। इससे बल और
तेज बढ़ता है और मेधा-स्मरणशक्ति तेज होती है। संभवत: प्राचीन ऋषियों ने इसी कारण विष्णुपूजन के बाद
तुलसीदल सहित चरणामृत पान करने की परिपाटी निकाली थी जो आज भी प्रचलित है। वायु और जल की तरह
तुलसी की स्वास्थ्यवर्धक गंध से प्रभावित होकर तुलसी के नीचे एवं आसपास की मिट्टी भी विशुद्ध और तुलसी के
समान गुणकारी हो जाती है। (विभूति फीचर्स)

छत्तीसगढ़ में आया गौ तस्करी का बड़ा मामला

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Cow Smuggling In Korba: कोरबा। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पाथा मे स्थानीय ग्रामीण और गौ सेवकों ने गौ तस्करी करते हुए एक पिकअप गाड़ी कों पकड़ा है. तस्करी की जा रही 12 गाय भरी गई थी. 2 पिकअप वाहन और 1 कार में तस्कर आए थे जिनमे से 1 पिकअप वाहन को बहादुरी के साथ गौ सेवकों द्वारा पकड़ा गया.

रात के अंधेरे का फायदा उठाकर सभी तस्कर दूसरे पिकअप वाहन और कार में भागने में सफल हो गए. तस्करी में शामिल तीनों वाहन झारखण्ड पासिंग के है. इसकी सूचना तत्काल पुलिस को भी दी गई.

दरअसल ग्राम पाथा के ग्रामीणों ने आधी रात को झारखंड पासिंग की 3 गाड़ियों के क्षेत्र में बेवजह घूमते देखा. ग्रामीणों ने संदेह के आधार पर गौ सेवकों कों सुचना दी, सूचना पर गौ सेवक ग्राम पाथा पहुंचे और वाहनों को पकडने का प्रयास किया.

धारदार हथियार लिए थे तस्कर
इस दौरान ग्रामीणों और गौ सेवकों ने देखा की 10 से 15 की संख्या में आए गौ तस्करों के पास धारदार हथियार हैं. बावजूद गौ सेवकों ने बहादुरी के साथ उन्हें रोकने का प्रयास किया. गौ सेवकों को देखकर गौ तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर गाय से भरी 1 पिकअप को छोड़ अपनी जान बचाकर तस्करी में शामिल दूसरे पिकअप और 1 कार में भाग निकले.

गौ सेवकों ने पकड़ा वाहन
गाय से भरी 1 पिकअप वाहन को गौ सेवकों ने पकड़ लिया. पकड़े गए पिकअप से 12 गाय बरामद किया गया. इसकी सूचना गौ सेवकों ने डायल 112 कों दी और पिकअप समेत गायों कों ट्रेक्टर कि मदद से बांगो थाना लाया गया.

2 गायों की हो गई है मात
बरामद गायों में 2 गायों की मौत हो चुकी थी. क्योंकि तस्करी किए जा रहे गायों को बडी बेरहमी से रस्सी से पैर और गले कों बांधा गया था. बचे गायों को गौ सेवकों ने पिकअप से उतारकर उनके पैर और गले से रस्सी काटी और पशु चिकित्सकों कों बुलाकर उनका इलाज कराया.

पुलिस ने कहा कार्रवाई की बात
पुलिस ने मामले कों गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी और जल्दी ही गौ तस्करों और पिकअप मालिक पर कार्रवाई कि बात कही है.

Health – हाई ब्लड प्रेशर से बचाव

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डॉ. राजेन्द्र मनचंदा – विभूति फीचर्स
हाई ब्लड प्रेशर एक रोग है। यह रोग युवा, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी को हो जाता है। परंतु अधिकतर इस रोग का शिकार
बूढ़े ही होते हैं। शुरू में ही इसका निरीक्षण न हो सकने पर यह रोग हृदय, मस्तिष्क धमनियों व रक्त वाहिनियों
किडनी को प्रभावित कर देता है।
घातक प्रभाव: हाई ब्लड प्रेशर के शरीर के ऊपर बहुत घातक प्रभाव पड़ते हैं जैसे-
1. हृदय और रक्त संचार: जब रोगी को वर्षों तक यह रोग रहता है तो हृदय को शरीर के कोने-कोने में रक्त पहुंचाने के
लिए बहुत जोर लगाना पड़ता है, जिससे उसकी शक्ति का अत्यधिक हृास हो जाता है तथा जिसके कारण हृदय
धमनियां, सूक्ष्म धमनिया फैल जाती हैं। हृदय का बायां वेन्ट्रीकल तो विशेष रूप से अधिक बड़ा हो जाता है। सूक्ष्म
धमनियों की दीवारें रक्त के बहाव और जोर से धक्का लगने के कारण कमजोर हो जाती हैं। यह दीवारें फटकर उनमें
से रक्त बहने लग जाता है और कभी-कभी इनकी भीतरी नली सुकड़कर बिल्कुल बंद हो जाती है।
2. मस्तिष्क: काफी समय तक रक्त दबाव अधिक रहने से मस्तिष्क बुरी तरह रोगग्रस्त हो जाता है, जिस कारण
लकवा, जीभ पक्षाघात हो जाने से बोलने की शक्ति समाप्त हो जाती है। आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है और
कई बार रोगी अंधा भी हो जाता है।
मस्तिष्क की धमनी फट जाने से मस्तिष्क से रक्तस्राव होने लग जाता है। इस रोग से गुर्दों में रक्त से विषैले और
अनावश्यक पदार्थ निकलने में असमर्थ हो जाते हैं। जिसके कारण विषैले अंश और संक्रमण रक्त में मिलकर विषैले
प्रभाव फैलाते हैं, जिससे मृत्यु हो जाती है।
कारण : जिन मनुष्यों की आंतों में गंदी वायु और विषैले पदार्थ रक्त में मिल जाते हैं, वहां हाई ब्लड प्रेशर का रोग हो
जाता है।
डिप्रेशन: (मानसिक तनाव), चिंता, चिड़चिड़ापन अधिक समय तक मानसिक कार्य करते रहना, शारीरिक परिश्रम न
करना, इस रोग का बहुत बड़ा कारण है। मधुमेह जोड़ों की शोध व दर्द से भी यह रोग हो जाता है।
पिट्यूटी, थायराइड और एड्रोनल ग्लेण्डो के दोष और खराबी से भी यह रोग हो जाता है। पिट्यूटी या एड्रोनल में अधिक
हारमोन पैदा होने लग जाने से भी रक्तचाप बढ़ जाता है।
कुछ लोग जो रात-दिन बैठे रहे है, मोटर कारों में सफर करते हैं, सैर करना और चलना फिरना छोड़ देते हैं और जो दूध, घी, मांस, चर्बी वाले भोजन अधिक खाते हैं, उनको भी हाई ब्लड प्रेशर का रोग हो जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर के रोगी का भोजन: मनुष्य प्रकृति से जितना दूर होता जा रहा है, अपने आप को सभ्य समझने लग
गया है और स्वाद के लिए अप्राकृतिक भोजन खाने लग गया है। इस कारण यह रेाग बढ़ता जा रहा है। यदि रोगी
उचित भोजन न करें तो कीमती से कीमती दवाएं खाने से भी रोग दूर नहंीं होगा। आप अपने भोजन में परिवर्तन
करके और उचित प्रकार के भोजन खाकर इस रोग से बच सकते हैं।
1. नमक: जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर का रोग है। वह नमक खाना बंद कर दें या बहुत ही कम मात्रा में खायें।
2. घी, मक्खन, चिकनाई: हाई ब्लड प्रेशर वाले रोगी को दूध, घी, मक्खन, मांस, पनीर बिल्कुल बंद कर देना चाहिए,
क्योंकि चिकनाई धमनियों में जमते रहने से वह अंदर से कठोर और तंग हो जाती है। इनसे धमनियों में कोलेस्ट्राल
अधिक जम जाता है। हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए चिकनाई विष के समान है। इस रोग के रोगी के लिए चाय,
तम्बाकू, सिगरेट, शराब मसाले वाले भोजन करना बहुत हानिकारक है।
हाई ब्लड प्रेशर के रोगी को रोटी, डबल रोटी, दालें, क्रीम निकला दूध व पनीर, हरी सब्जियां व इनके पत्ते इत्यादि खाना
इस रोग के लिए बहुत लाभकारी है। चिकनाई की कमी को पूरा करने तथा शरीर को ताकत देने के लिए रोगी को तिल
या सूरजमुखी के फूलों के बीजों का तेल सब्जियों में डालकर दिया जा सकता है।
बचाव
1. अपने आप को मोटा होने से बचायें, अपना वजन सामान्य से अधिक न बढऩे दें। शरीर में चर्बी अधिक हो जाने से
हाई ब्लड प्रेशर, हृदय फैल सकता है।
2. शराब, तम्बाकू, सिगरेट पीना छोड़ दें।
3. जो रोगी बार-बार बीमार हो जाते हैं और सिर दर्द, सिर चकराना आदि बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं, उन्हें किसी
योग्य डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
4. रात-दिन काम न करें। क्रोध, जोश, चिंता आदि पर अपना नियंत्रण रखें।
5. सांसारिक चिंताएं भूलकर समीप के शांत वातावरण बाग, पार्क में सैर करें।
6. रात-दिन बैठे रहना और शारीरिक परिश्रम व सैर न करने वालों को यह रोग हो जाता है।
7. मांस, घी, मक्खन, दूध, वनस्पति घी, तले हुआ भोजन ज्यादा न खाएं।
8. अगर कारण तथा बचाव को ध्यान में रखते हुए हम नियमानुसार सावधानी रखें तो इस भयानक रोग से बच सकते
हैं। (विभूति फीचर्स)

अपर मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार श्रीमती राधा रतूड़ी ने शीत लहर के सम्बन्ध में प्रशासन तैयारियों का लिया जायजा

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28 दिसम्बर 2023,गुरुवार ,देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखंड प्रदेश

राज्य में ट्रैकिंग के लिए आने वाले पर्यटकों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शासन-प्रशासन की तैयारियां शुरू

ACS श्रीमती राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड में ट्रैकिंग एजेंसियों व कम्पनियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था को पुख्ता करने के निर्देश दिए

तत्काल एक प्रभावी ट्रैकिंग पॉलिसी एवं एसओपी बनाने की हिदायत

डीएफओ को ट्रैकिंग के लिए आने वाले पर्यटकों की जानकारी जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के साथ अनिवार्यतः सांझा करने के निर्देश

देहरादून ,28 दिसम्बर ,राज्य में ट्रैकिंग के लिए आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को गम्भीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड में ट्रैकिंग एजेंसियों व कम्पनियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था को पुख्ता करने, प्रदेश में एक प्रभावी ट्रैकिंग पॉलिसी या एसओपी बनाने के साथ ही डीएफओ को ट्रैकिंग के लिए आने वाले पर्यटकों की जानकारी जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के साथ अनिवार्यतः सांझा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी इस सम्बन्ध में डीएफओ, पर्यटन विभाग तथा ईको टूरिज्म से समन्वय करने के निर्देश दिए हैं। श्रीमती राधा रतूड़ी ने स्पष्ट किया है कि समय पर ट्रैकिंग एसओपी प्रभावी न होने की दशा में प्रदेश में आने वाले ट्रैकर्स की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही की घटना के लिए वन विभाग को सीधे तौर पर उत्तरदायी ठहराया जाएगा एवं कार्यवाही की जाएगी। एसीएस ने वन विभाग को सख्त हिदायत दी है कि ट्रैकिंग एजेंसियों के लिए भी एक ठोस एसओपी के साथ ही ट्रैकर्स के लिए पुख्ता सुरक्षा मापदण्ड, बीमा, प्रशिक्षित गाइड्स, स्नो इक्वपमेन्ट्स, हेल्थ सर्टिफिकेट, बेसिक मेडिसिन की तत्काल व्यवस्था को लागू किया जाए।

सचिवालय में प्रदेश में शीत लहर के सम्बन्ध में प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने विशेषरूप से निर्माणधीन स्थलों में रहने वाले जरूरतमंदों श्रमिकों के शीत लहर से बचाव एवं राहत के लिए श्रम विभाग को तत्काल सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। घने कोहरे के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के दृष्टिगत एसीएस ने हरिद्वार तथा उधमसिंह नगर जिलों में ट्रैफिक एवं पुलिस विभाग कों विशेषरूप से अलर्ट मोड पर रहने की हिदायत दी है। इसके साथ ही उन्होंने फायर डिपार्टमेंट को आग की घटनाओं को रोकने के लिए सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। जरूरतमंदों की मदद के लिए दान किये जाने वाले गर्म कपड़ों को एकत्रित एवं वितरित करने के लिए एसीएस श्रीमती रतूड़ी ने एक पोर्टल बनाने के भी निर्देश आज की बैठक में दिए हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव द्वारा लोक निर्माण विभाग को सड़कों की कनेक्टिविटी बनाए रखने, जेसीबी की व्यवस्था करने, सड़कों से पाला हटाने के लिए परम्परागत उपायों के साथ नए समाधानों पर कार्य करने निर्देश दिए गए। इस दौरान सभी जनपदों को सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था एवं कम्बलों के वितरण, अस्थाई रैनबसेरो में बिजली, पानी, बिस्तर एवं साफ-सफाई की व्यवस्था करने, इस सम्बन्ध में पृथक से नोडल अधिकारी नामित करने, सभी जनपदों में खाद्य आपूर्ति, पेयजल एवं ईधन की जनवरी माह के अन्त तक के लिये पर्याप्त मात्रा में भंडारण करने, चिकित्सा स्वास्थ्य हेतु आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सचिव डा0 रंजीत कुमार सिन्हा सहित सम्बन्धित विभिन्न विभागो के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बेटी-ब्वारयूं कु कौथिग“ आयोजन में मुख्यमंत्री धामी ने दिया टिहरी को 415 करोड़ रुपये की योजनाओं का तोहफा

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26 दिसम्बर 2023,मंगलवार,नई टिहरी /देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

 

निवेश के तहत टिहरी में हुए 3900 करोड़ के एमओयू में से 2400 करोड़ की ग्राउंडिंग का भी किया शुभारंभ।

देहरादून,26 दिसम्बर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नई टिहरी स्थित प्रताप इंटर कॉलेज बौराड़ी में आयोजित “बेटी-ब्वारयूं कु कौथिग“ में बतौर मुख्यअतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 415 करोड़ की 160 विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिनमें 201 करोड़ की 44 योजनाओं का लोकार्पण तथा 214 करोड़ की 116 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद के महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों हस्तशिल्प और हस्तकला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं जॉन्दरा(पत्थर की हस्तचालित चक्की ) चलाकर महिलाओं को प्रोत्साहित भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इन्वेस्टर्स समिट के दौरान टिहरी में हुए 3900 करोड़ के एमओयू में से 2400 करोड़ की ग्राउंडिंग का भी शुभारंभ किया।
यही नहीं उन्होंने जनपद में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सम्मानित कर स्कूली छात्र-छात्राओं को 2025 तक ड्रग्स फ्री देवभूमि बनाने की भी शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने बेटी ब्वारयूँ कु कौथिग की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मातृशक्ति के बिना राष्ट्र का विकास संभव नहीं है, उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति का योगदान अमूल्य है।
डबल इंजन की सरकार के कार्य उत्तराखंड में विकास के रूप में स्पष्ट नज़र आ रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र का विकास करना है प्रदेशभर की महिला उद्यमियों ने पारंपरिक उत्पादों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी तथा स्टॉल लगाकर ये बता दिया है कि प्रदेश के विकास में महिलाओं का योगदान किसी से भी कम नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश महिला विकास से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व की बात कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो काम देशभर में हो रहे हैं वे नए भारत की शानदार तस्वीर को प्रस्तुत करते हैं। आज गांव-गांव में महिलाओं को घर, शौचालय, गैस, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और दूसरी आवश्यक जरूरतों पर भी सरकार पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में लगभग 70 लाख स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लगभग 8 करोड़ बहनें जुड़ी है। उत्तराखंड में भी महिला स्वयं सहायता समूहों की बहनों ने प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया है, जिसका जीता जागता उदाहरण आज के कार्यक्रम में उनके द्वारा प्रदर्शित उत्पादों की प्रदर्शनी है। प्रदेश में मातृशक्ति के सम्मान में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ ही मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, लखपति दीदी योजना, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी योजना, नंदा गौरा मातृवंदना योजना और महिला पोषण अभियान जैसी योजनाएं प्रारंभ की हैं।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रभारी मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा कई विकास योजनाएं चल रही हैं। महिला स्वयं सहायता समूह को आत्मनिर्भर बनाने हेतु 5 लाख तक ब्याज रहित ऋण दिया जा रहा है। देवभूमि को वैडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सभी को “बेटी-ब्वारयूं कु कौथिग“ की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है।

इस मौके पर विधायक टिहरी किशोर उपाध्याय, धनोल्टी से प्रीतम सिंह, घनसाली से शक्तिलाल शाह, देवप्रयाग से विनोद कण्डारी, ज़िला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोना सजवाण, उपाध्यक्ष बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति श्री ज्योति प्रसाद गैरोला, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडेय सहित कई गणमान्य आयोजन में सम्मिलित थे. !

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कलिंगा पट्टिनम का दौरा किया

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New Delhi – मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने खारे पानी वाली झींगा मछली किसानों की बुनियादी समस्याओं को समझने के लिए आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कलिंगा पट्टिनम का दौरा किया और वहां झींगा मछली किसानों से बातचीत की।

डॉ. अभिलक्ष लिखी ने झींगा मछली किसानों से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि बड़े और गुणवत्ता वाली झींगा मछली के उत्पादन के लिए बायो-फ्लॉक प्रौद्योगिकी के साथ 4-चरणीय खेती की नई प्रौद्योगिकी अपनाई जा रही है। स्थापित इस नवाचार और उन्नत संवंर्धित प्रणाली में उच्च जैव-सुरक्षित स्थितियों में पूरी तरह से पंक्तिबद्ध तालाबों के साथ-साथ ऑटो फीडर, केंद्रीय जल निकासी/कीचड़ हटाने, आईओटी आधारित जल मापदंडों की निगरानी जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जो उच्च भंडारण घनत्व और कम संवर्धित क्षेत्र से बढ़ी हुई उत्पादकता को लक्षित करने के लिए उच्च-घनत्व गहन कृषि प्रणाली का प्रबंधन करता है।

श्रीकाकुलम जिला भारत में शीर्ष झींगा मछली उत्पादक जिलों में से एक है। यह जिला झींगा मछली की सर्वोत्तम गुणवत्ता बनाए रखने में लगातार सक्षम बना रहा है, क्योंकि पूरा संवर्धित क्षेत्र अन्य इलाकों की तुलना में ऊंचाई में विकसित किया गया है। इस जिले का अन्य देशों को भारत के झींगा मछली निर्यात में एक बड़ा योगदानहै।

कलिंगा पट्टिनम में वर्तमान झींगा मछली संवर्धनक्षेत्र 1000 एकड़ से अधिक है और कई फीड कंपनियों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। सभी फार्म उच्च जैव सुरक्षित परिस्थितियों में श्रीकाकुलम सागर तट के पास स्थित हैं। इन फार्मों से प्रति वर्ष लगभग 40,000 टन झींगा मछली, जिनका औसत वजन (प्रति झींगा मछली) 20 ग्राम है, पैदा की जाती है और इससे लगभग 10,000 करोड़ रुपये की वार्षिक कमाई होती है। इन फार्मों ने लगभग 600 किसानों को रोजगार दिया है और लगभग 5000 लोग अपनी आजीविका के लिए सीधे इन फार्मों पर काम करते हैं।

प्रमुख फार्मों में से एक फार्म ओवजन्या एक्वेटिक्स है, जो आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के गारा मंडल के टोनंगी गांव में स्थितहै,जिसका स्वामित्व प्रगतिशील किसान श्री दतला वेंकट लक्ष्मीपति राजू के पास है,जो1000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लस्टर खेती का काम करते हैं, जिसमें श्रीकाकुलम जिले और इस जिले के आसपास