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हरियाणा में गऊ तस्कर गिरफ्तार

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हरियाणा । कंटेनर में सवार गौ तस्करों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में जमकर पथराव हुआ और दो तीन राउंड फायरिंग हुई। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी बाल बाल बच गए। पुलिस ने घेराबंदी कर दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि तीन चार अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। पुलिस ने कैंटर में भरकर ले जायी जा रही सात गायों को मुक्त करा लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गांव आलमपुर, धौज निवासी आमीन पुत्र हकीम और साबिर पुत्र सौकत के रूप में हुई है। पुलिस अन्य तस्करों की तलाश कर रही है। धौज थाने के एसई जोगिंदर सिंह ने लिखाई एफआईआर में कहा है कि शनिवार की रात वह अपनी टीम के साथ गश्त पर थे।

भोर में करीब चार बजे मुखबिर खास ने सूचना दी कि गांव आलमपुर निवासी आमीन और साबिर आइशर कैंटर में गायों को भरकर काटने के लिए पाली धौज होते हुए मेवात जा रहे हैं। सूचना पर गांव मोहब्बताबाद पुलिया पर नाकाबन्दी शुरू की गई। वहां गौरक्षक दल के सदस्य पवन बैंसला, व नवीन तंवर भी पहुंच गए।

कुछ देर बाद ही एक आइशर कैंटर गांव पाली की तरफ से आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने जब उसे रुकने का इशारा किया तो चालक रूकने के बजाय स्पीड तेज कर दिया। पीछे गाड़ी में बैठे अन्य तस्करों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया और फायरिंग झोंक दी। गनीमत रही कि पुलिसकर्मी बच गए। पुलिस ने नाके पर लोहे का कांटा लगा रखा था।

तस्करों की गाड़ी कांटे पर चढ़ने के कारण उसके चारों टायर फट गये और गाडी में बैठे तस्कर उतरकर भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा कर चालक आमीन और हेल्पर साबिर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ करने पर आरोपियों ने बताया कि उनके साथ साकिर पुत्र कल्लू निवासी गांव धौज,नासिर पुत्र मुबीन, इरफान उर्फ गेंडा पुत्र रमजानी व आमीर पुत्र महमूदा निवासीगण गांव आलमपुर,राकेश उर्फ भोंदू, सज्जा, युसुफ, ईक्कर निवासी गांव फिरोजपुर नमक जिला मेवात भाग निकले हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है।

झाँसी के वृहद गौ संरक्षण केन्द्र

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झाँसी : अन्ना पशुओं को आश्रय देने के लिये जहाँ योगी सरकार गम्भीरता दिखा रही है, वहीं पशुपालन विभाग ने झाँसी में मॉडल गौ संरक्षण केन्द्र स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिये 4 स्थानों को चिह्नित किया गया है, जहाँ स्थायी वृहद गौ संरक्षण केन्द्र बनेंगे। इन्हें मॉडल के रूप में तैयार किया जायेगा। जिले में अन्ना पशु बहुत बड़ी समस्या है


वर्ष 2019 की पशु गणना में 37,431 गौवंश आवारा माने गये थे। इनके संरक्षण के लिये जिले में 246 गौशालाएं बनाई गयीं। इसमें नगर निगम द्वारा बिजौली में कान्हा उपवन, हँसारी व लहरगिर्द में काँजी हाउस तथा पशुपालन विभाग द्वारा सुकुवाँ व लुहरगाँव घाट में गौवंश वन विहार नाम से बड़ी गौशालाएं हैं, जबकि अन्य जगह पर छोटी गौशालाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद अन्ना पशुओं को उचित संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।

इस समस्या को दूर करने के लिये पशुपालन विभाग ने बामौर के गौती में 4.50 हेक्टेयर, गुरसराय के गुढ़ा में 4.50 हेक्टेयर, धवारी में 8.50 हेक्टेयर एवं बंगरा के पठगुवाँ में 2.76 हेक्टेयर स्थान चिह्नित की है। इसमें धवारी 2,500 गौवंश रखने की व्यवस्था की जायेगी, जबकि अन्य गौ संरक्षण केन्द्र इससे कम संख्या वाले होंगे। प्रत्येक गौ संरक्षण केन्द्र पर 1.20 करोड़ रुपये की लागत आँकी गयी है। इन वृहद गौ संरक्षण केन्द्रों पर भूसा गोदाम, स्टोर रूम, पेयजल के लिये बोरिग, सुरक्षा के लिये जालीदार तार वाली फेसिंग तथा चारा उत्पादन की व्यवस्था की जायेगी।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का डंका:पहली बार हिंदी में भी जारी होंगी UN की सूचनाएं,

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक उल्लेखनीय पहल करते हुए बहुभाषावाद पर भारत द्वारा पेश प्रस्ताव को पारित किया है।  इसमें संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हिंदी व अन्य भाषाओं को भी बढ़ावा देने का पहली बार जिक्र किया गया है। 

शुक्रवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र हिंदी भाषा सहित आधिकारिक और गैर-आधिकारिक भाषाओं में महत्वपूर्ण संचार और संदेशों का प्रसार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस साल पहली बार प्रस्ताव में हिंदी भाषा का उल्लेख है। इस संकल्प में पहली बार बांग्ला और उर्दू का भी उल्लेख है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बहुभाषावाद को संयुक्त राष्ट्र के मूलभूत मूल्यों के रूप में मान्यता दी गई है। तिरुमूर्ति ने बहुभाषावाद व हिंदी को प्राथमिकता देने के लिए यूएन महासचिव के प्रति आभार प्रकट किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत 2018 से यूएन के वैश्विक संचार विभाग (डीजीसी) के साथ साझेदारी कर रहा है। यूएन के समाचार  और मल्टीमीडिया सामग्री को हिंदी में प्रसारित करने व मुख्यधारा में लाने के लिए अतिरिक्त राशि दे रहा है।

‘हिंदी @ यूएन’ परियोजना 2018 में शुरू की गई:

तिरुमूर्ति ने आगे कहा कि यूएन में हिंदी को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत 2018 में ‘हिंदी @ यूएन’ परियोजना आरंभ की गई। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक सूचनाएं हिंदी में देने को बढ़ावा देना और दुनियाभर के करोड़ों हिंदी भाषी लोगों के बीच वैश्विक मुद्दों के बारे में अधिक जागरूकता लाना है। इस संदर्भ में उन्होंने एक फरवरी, 1946 को यूएन महासभा के पहले सत्र में अपनाए गए सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 13(1) का जिक्र किया।

इसमें कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र अपने उद्देश्यों को तब तक प्राप्त नहीं कर सकता जब तक कि दुनिया के लोगों को इसके उद्देश्यों और गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी न हो। संयुक्त राष्ट्र में बहुभाषावाद को सही मायने में अपनाना अनिवार्य है। भारत इस उद्देश्य को प्राप्त करने में संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करेगा।

संयुक्त राष्ट्र में अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश ये छह आधिकारिक भाषाएं हैं। जबकि, अंग्रेजी और फ्रेंच संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की कामकाजी भाषाएं हैं।

पाकिस्तान में शिया और चीन में वीगर मुसलमानों पर जब जुल्म होता है तो क्यों मौन रहते हैं ये अरब देश?

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पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा प्रवक्ताओं की कथित टिप्पणी से उपजा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ‘जुमे की नमाज’ के दिन कई राज्यों में हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की खामोशी को अर्थपूर्ण बताते हैं, एक्सीडेंटल नहीं। वे कहते हैं, ऐसे गंभीर मसले पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या विदेश मंत्री को बयान देना चाहिए था।

पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी के मुताबिक, कुछ देश ‘दुष्प्रचार’ का हिस्सा बन जाते हैं। चीन में वीगर मुसलमानों पर जुल्म होता है तो अरब देश नहीं बोलते, पाकिस्तान में शिया मुसलमान निशाने पर हैं तो भी ये देश मौन रहते हैं। विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा, आज जिहादी मुस्लिम नेतृत्व, जानबूझ कर मुस्लिम समुदाय को हिंसा और अधर्म के पथ पर ले जा रहा है। ऐसे तत्वों के साथ सख्ती से निपटना चाहिए।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक मीडिया समूह के साथ बातचीत में कहा, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विदेश मंत्री, ये ऐसे लोग हैं, जिनसे पैगंबर जैसे संजीदगी वाले मुद्दे पर बयान की उम्मीद की जाती है। इस माहौल में प्रधानमंत्री की खामोशी का क्या मतलब हुआ। यही कि वे इससे असहमत नहीं हैं, कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है। उन्होंने कहा, विदेश मंत्री का बयान अभी तक इसलिए नहीं आया, क्योंकि उन्हें भी तो कहीं से मंजूरी लेनी होती है। अंसारी ने एक सवाल के जवाब में कहा, ये बात ठीक है कि अरब देश, चीन में वीगर मुसलमानों पर किए जा रहे कथित ज़ुल्मों पर चुप रहते हैं। पाकिस्तान में शिया मुसलमानों पर जब अत्याचार की खबरें आती हैं तो इस्लामिक राष्ट्र मौन साध लेते हैं। भारत में पैगंबर पर टिप्पणी मामले में वे बोले, ये बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, इस पर वे देश चुप नहीं रह सकते थे।

चुकानी पड़ सकती है दीर्घकालिक कीमत

इस मसले पर स्वराज इंडिया के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने अपने एक लेख में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम बिरादरी से हम उम्मीदें नहीं बांध सकते। मुश्किलों के भंवर में फंसे हिंदुस्तानी मुसलमानों के हितैषी के रूप में हम इस बात की अनदेखी नहीं कर सकते कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे इस समर्थन की एक दीर्घकालिक कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। आज मोदी सरकार को अपने दो प्रवक्ताओं की वजह से वैश्विक स्तर पर किरकिरी झेलनी पड़ रही है। यादव ने लिखा है, जो देश पैगंबर विवाद में बवाल मचा रहे हैं, उनमें से ज्यादातर मुस्लिम देशों का अपने अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवहार ठीक नहीं रहा है। उन देशों में धार्मिक स्वतंत्रता का रिकार्ड खराब रहा है।

इसके बावजूद वे देश भारत से माफी मांगने की बात कर रहे हैं, तो इसमें उनका ढीठपन नजर आता है। चीन में वीगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर पाकिस्तान कितनी बार बोला है, न के बराबर। हालांकि पैगंबर विवाद के बीच कूदने में पाकिस्तान ने देर नहीं लगाई। हामिद अंसारी ने कहा, पैगंबर विवाद एकाएक नहीं हुआ। ये एक सिलसिलेवार कड़ी थी। केंद्र सरकार ने उसे समय रहते रोका नहीं, क्योंकि वह सरकार की नीति का हिस्सा हो सकता है। सरकार को कूटनीति के जरिए यह मामला हल करना चाहिए था।

सुनियोजित ‘दुष्प्रचार’ का हिस्सा बन रहे हैं कुछ देश

पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी ने बताया, इस मुद्दे को कुछ इस्लामिक देश बेवजह तूल दे रहे हैं। ऐसा नजर आता है कि वे किसी सुनियोजित ‘दुष्प्रचार’ का हिस्सा बन रहे हैं। किसी के बहकावे में आकर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास हो रहा है। विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने शनिवार को अपने बयान में कहा, आज मुसलमानों के बीच रह रहे कुछ जिहादी लोग, पूरे समुदाय को हिंसा के रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। यह न तो समाज के हित में है और न ही देश के हित में। जो तत्व देश के शांतिपूर्ण और समावेशी लोकाचार को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि भारत अपने संविधान के तहत काम करता है न कि शरिया आपराधिक कानून के तहत। जिन लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें यह ध्यान में रखना चाहिए कि वे इस मामले में जज नहीं हो सकते हैं।

प्रथम बुलेट ट्रेन 2026 तक गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के मध्य चलने की संभावना

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केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार (6 जून) को कहा, “सरकार 2026 तक गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के मध्य भारत की पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य बना रही है क्योंकि इस दिशा में अच्छी प्रगति देखने को मिल रही है।”

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट में अश्विनी वैष्णव के हवाले से कहा गया, “अहमदाबाद और मुंबई के मध्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में अच्छी प्रगति हुई है और कार्य तेज़ गति से किया जा रहा है।”

रेल मंत्री ने सूरत में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति का निरीक्षण करने के बाद यह बात कही।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हम 2026 में सूरत और बिलिमोरा के मध्य पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य रख रहे हैं। प्रगति बहुत अच्छी है और हमें उस समय तक ट्रेन चलने का भरोसा है।”

बिलिमोरा दक्षिण गुजरात के नवसारी जिले का एक शहर है और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग के 12 स्टेशनों में से एक है।

मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन ट्रैक के लिए 61 किलोमीटर दूर तक खंभों का निर्माण किया गया और करीब 150 किलोमीटर लंबे रूट पर एक साथ काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन का काम 2024 तक पूरा होने की संभावना है।

सूरत के अतिरिक्त तीन और स्टेशनों वापी, बिलिमोरा और भरूच का भी कार्य ज़ोरों पर है और इसके 2024 तक पूरा होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि हर माह करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए करीब 300 खंभे खड़े किए जा रहे हैं।

भाजपा ने राज्यसभा की छह में से तीन सीटें जीतीं, महा विकास अघाड़ी को लगा झटका

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महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन को बड़ा झटका देते हुए भाजपा ने शनिवार को राज्यसभा की छह में से तीन सीटें जीत लीं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन ने मतगणना में 8 घंटे की देरी पर सवाल उठाया।

भाजपा के विजेताओं में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, राज्य के पूर्व मंत्री अनिल बोंडे और धनंजय महादिक सम्मिलित हैं। उधर, शिवसेना के संजय राउत, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल और कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी भी जीते।

284 वैध मतों में से गोयल को 48, बोंडे को 48, महादिक को 41.56, राउत को 41, प्रतापगढ़ी को 44 और पटेल को 43 वोट मिले।

मुकाबला छठवीं सीट के लिए कांटे का था। इसके लिए भाजपा ने पूर्व सांसद धनंजय महादिक को उतारा था और शिवसेना के उम्मीदवार संजय पवार थे, जो हार गए थे।

भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया, “चुनाव सिर्फ लड़ाई के लिए नहीं बल्कि जीत के लिए लड़ा जाता है। जय महाराष्ट्र।”

भाजपा और शिवसेना दोनों ने क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाते हुए और वोटों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया।

पोल पैनल ने महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी को शिवसेना विधायक सुहास कांडे द्वारा डाले गए वोट को खारिज करने का निर्देश दिया। इसके बाद सुबह 1 बजे के बाद मतगणना शुरू हुई। पहला परिणाम दो घंटे में आया।

चौंकाने वाले झटके के बाद कांग्रेस नेताओं ने सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी में समन्वय में खामियाँ स्वीकार कीं। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने संवाददाताओं से कहा, “यह अध्ययन का विषय है कि क्या गलत हुआ।”

उन्होंने कहा, “भाजपा मतगणना को रोकने और एक वोट को अमान्य करने में चालाक थी। हमें विश्वास था कि हमारे चारों उम्मीदवार आराम से जीत जाएँगे।”

राउत ने चौथे उम्मीदवार की हार के लिए पोल पैनल को ज़िम्मेदार ठहराया।

गौ मांस बेचने वालो के खिलाफ हो सख्त से सख्त कार्रवाई : युवराज यश प्रताप सिंह जूदेव

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Yuvraj Yash Pratap Singh Judev

जशपुर : जशपुर कीर्तन भवन के सामने बांग्लादेशियों के द्वारा गौ मांस बेचने के मामले में जशपुर राजघराने के युवराज यश प्रताप सिंह जूदेव ने कड़ी आपत्ति प्रकट की है। उन्होंने कहा कि जशपुर में असामाजिक तत्वों के द्वारा ऐसा कृत्य व हिन्दू धर्म की आस्था पर ठेस पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है इन सबको सबसे पहले जशपुर से बाहर खदेड़ा जाए।

जूदेव ने कहा मैं जिला प्रशासन के साथ प्रदेश सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि इन सभी गौ मांस बेचने वाले आरोपियों के ऊपर तत्काल सख्त से सख्त कार्रवाई हो एवं जिस जमीन पर बैठकर यह इस प्रकार का अनैतिक कार्य करने में जुटे हैं उन सभी जमीनों का सीमांकन कर जांच कराई जाए क्योंकि यह किसी व्यक्ति की निजी जमीन है तो इस पर तत्काल जांच की जाए एवं आरोपियों के ऊपर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि हम जशपुर जिले में लगातार इस प्रकार के अनैतिक कार्य एवं असामाजिक तत्वों के द्वारा लगातार हिंदू धर्म के ऊपर प्रहार किये जा रहे हैं। अभी हाल ही में कुछ दिन पूर्व जशपुर के भागलपुर पूर्णा नगर में वट सावित्री पूजा के दिन महिलाओं के सामने मुस्लिम समुदाय के एक युवक के द्वारा मूत्र फेंका गया था, यह हमारे देश के लिए कतई सही नहीं है। इस पर भी प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन औऱ छत्तीसगढ़ शासन को तत्काल इस पर कार्रवाई कर दोषियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।

गौमाता की सेवा से 14 पीढिय़ों का उद्धार संभव

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सूरत. गौ पुत्र मित्र मंडल द्वारा आयोजित सिटीलाइट स्थित अग्रसेन भवन के पंचवटी हॉल मे आयोजित पांच दिवसीय श्रीदिव्य गौ कृपा कथा के दूसरे दिन गुरुवार को साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती ने कहा कि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि गौ माता की सेवा से 14 पीढिय़ों का उद्धार किया जा सकता है।

मनुष्य को कोई समस्या है तो गौ, गुरु और गोविंद तीनों के अलावा किसी और को नहीं बताए। इनके अलावा किसी को बताएंगे तो उपहास का ही शिकार होएंगे और गौ, गुरु और गोविंद को बताएंगे तो उसका समाधान अवश्य होगा। कथा में उन्होंने आगे बताया कि मेेहमान घर मे आते ही लोगों को सरदर्द होने लग जाता है और उसे निकालने का जुगत लगाने लगते है। बहन-बेटी भी आए तो भी वह कैसे जल्दी से निकले, ऐसी जुगत लगाते हैं।

आज लोगों में आपस मे प्रेम नही रहा, पहले तकलीफ आराम में लोग एक-दूसरे को पूछते थे मगर आज के इस समय में एक-दूसरे को पूछते तक नही हैं।

चौरासी लाख यौनियों में मनुष्य ही मुस्कुरा सकते है फिर भी वह नही मुस्कुराता है सो मनुष्य को अवश्य मुस्कुराना चाहिए। प्लास्टिक थैलियां अपने काम में लेते है और उसे अपने फेंक देते है यानि प्रकृति को दे देते है तो प्रकृति वही अपने वापस लौटा देती है सो प्लास्टिक, गन्दगी न दें और पेड़-पौधे लगाए और प्रकृति को बचाए।

कथा में आगे बताया कि राजा दिलीप के कोई संतान नहीं थी, उन्होंने कई हवन आदि कराए पर कोई फायदा नही हुआ। आखिर उन्होंने संत से पूछा तो उन्हें बताया कि राजन आपने गौ माता कामधेनू का पाप किया है याने एक बार कल्पवृक्ष के नीचे गौ माता कामधेनू को प्रणाम नही किया था, उसी का श्राप है और इसका उपाय है कि उनकी पुत्री नन्दिनी की सेवा से ही संतान प्राप्ति हो सकती है।

राजा दिलीप ने गौ माता नन्दिनी की सच्चे दिल से सेवा की तो उनको रघु जैसी संतान की प्राप्ति हूई जिससे रघुकुल जैसे कुल की स्थापना हुई। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गौभक्त मौजूद थे।

गौ तस्करी मामले में अणुव्रत मंडल की मुश्किलें बढ़ीं

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कोलकाता,। पश्चिम बंगाल के सीमाई क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर मवेशियों की तस्करी के मामले में मैराथन पूछताछ के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बीरभूम जिले के तृणमूल अध्यक्ष अणुव्रत मंडल के अंगरक्षक को गिरफ्तार कर लिया है। उसका नाम सहगल हुसैन है । गुरुवार देर शाम पांच घंटे तक पूछताछ के बाद उसे सीबीआई ने गिरफ्तार किया।

आरोप है कि गौ तस्करी से हासिल हुए बेहिसाब रुपये की वजह से सहगल की संपत्ति आय से अधिक है और इसी बावत उसके बयानों में विसंगतियां होने की वजह से उसे गिरफ्तार किया गया है। गुरुवार दोपहर अधिवक्ता संजीव दां को साथ लेकर सहगल निजाम पैलेस स्थित सीबीआई के दफ्तर में गया था। सीबीआई सूत्रों ने शुक्रवार को बताया है कि अधिवक्ता की मौजूदगी में उससे पूछताछ हुई है और आय से अधिक संपत्ति के बारे में कोई पुख्ता दस्तावेज वह नहीं दिखा पाया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अब खबर है कि अणुव्रत मंडल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सूत्रों अनुसार शुक्रवार को उसे आसनसोल के विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसके नाम पर कई अकाउंट हैं। इस सप्ताह मंगलवार को भी उससे पूछताछ हुई थी। उसके पहले उससे पांच बार पूछताछ हो चुकी थी। पिछले सप्ताह सीबीआई ने मुर्शिदाबाद के डोमकल स्थित उसके घर पर भी तलाशी अभियान चलाया था। करीब 15 घंटे तक छापेमारी हुई थी।

सीबीआई सूत्रों अनुसार सहगल केवल एक जरिया था और असली बाजीगर अणुव्रत मंडल ही हैं। बीरभूम जिले में मंडल की सहमति के बगैर उसका अंगरक्षक मवेशियों की तस्करी में मदद नहीं सकता था। इसलिए अब अणुव्रत मंडल के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। हिरासत में ही उसके बॉडीगार्ड से लगातार पूछताछ होगी और उसके बयान के आधार पर अणुव्रत मंडल की भी गिरफ्तारी हो सकती है।

मवेशी तस्करी मामले में अणुव्रत मंडल से भी दो बार पूछताछ हो चुकी है। बीएसएफ के पूर्व अधिकारी सतीश कुमार, इनामुल हक इस मामले में सीबीआई की गिरफ्त में हैं और उनसे भी पूछताछ हो चुकी है। आरोप लगे हैं कि तस्करी का सारा कारोबार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी तृणमूल युवा के महासचिव विनय मिश्रा की देखरेख में होता था। वह फिलहाल फरार है और प्रशांत महासागर के द्वीप वानअतु पर रह रहा है। इसी मामले में अभिषेक से भी केंद्रीय एजेंसी पूछताछ कर चुकी है।

गाय ही एक ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन लेती और छोड़ती है:

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को एक फैसले में कहा कि वैज्ञानिक मानते हैं कि गाय ही एक ऐसा पशु हें जो ऑक्सीजन लेती और छोड़ती है। इसके अलावा गाय के दूध, उससे तैयार दही, घी, मूत्र और गोबर से तैयार पंचगव्य कई असाध्य रोगों में लाभकारी है। न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने याचिकाकर्ता जावेद की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। जावेद पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर वादी खिलेंद्र सिंह की गाय चुराई और उसकी हत्या कर दी।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा, ‘‘हिंदू धर्म के अनुसार, गाय में 33 कोटि देवी देवताओं का वास है। ऋगवेद में गाय को अघन्या, यजुर्वेद में गौर अनुपमेय और अथर्वेद में संपत्तियों का घर कहा गया है। भगवान कृष्ण को सारा ज्ञान गौचरणों से ही प्राप्त हुआ।’’ अदालत ने कहा, “ईसा मसीह ने एक गाय या बैल को मारना मनुष्य को मारने के समान बताया है। बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि चाहे मुझे मार डालो, लेकिन गाय पर हाथ ना उठाओ। पंडित मदन मोहन मालवीय ने संपूर्ण गो हत्या का निषेध करने की वकालत की थी। भगवान बुद्ध गायों को मनुष्य का मित्र बताते हैं. वहीं जैनियों ने गाय को स्वर्ग कहा है।”

कोर्ट ने कहा, “भारतीय संविधान के निर्माण के समय संविधान सभा के कई सदस्यों ने गोरक्षा को मौलिक अधिकारों के रूप में शामिल करने की बात कही थी। हिंदू सदियों से गाय की पूजा करते आ रहे हैं। यह बात गैर हिंदू भी समझते हैं और यही कारण है कि गैर हिंदू नेताओं ने मुगलकाल में हिंदू भावनाओं की कद्र करते हुए गोवध का पुरजोर विरोध किया था।”

अदालत ने कहा कि देश की मुस्लिम लीडरशिप भी हमेशा से गोहत्या पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने का पक्षधर रही है। ख्वाजा हसन निजामी ने एक आंदोलन चलाया था और उन्होंने एक किताब- ‘तार्क ए गाओ कशी’ लिखी जिसमें उन्होंने गोहत्या नहीं करने की बात लिखी थी। सम्राट अकबर, हुमायूं और बाबर ने अपनी सल्तनत में गो हत्या पर रोक लगाने की अपील की थी।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि जब गाय का कल्याण होगा, तभी इस देश का कल्याण होगा और कभी-कभी यह देखकर बहुत कष्ट होता है कि गाय के संरक्षण और संवर्धन की बात करने वाले ही गाय के भक्षक बन जाते हैं।