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महिला दरोगा की हत्या, गौ तस्करों ने वाहन से कुचला

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झारखंड की राजधानी रांची में पशु तस्करों द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान महिला दरोगा को को वैन से कुचलने की शर्मनाक घटना सामने आई। खबर के अनुसार झारखण्ड की राजधानी रांची में एक महिला दरोगा को एक पिकअप वैन ने कुचल (Lady Cop Murder In Jharkhand) दिया। मौके पर ही दरोगा की मौत हो गई। इस बेहद शर्मनाक घटना की  बीजीपी ने कड़ी निंदा की है और कहा ‘राज्य की क्या दुर्दशा हो गई है।

 

हरियाणा के नूंह के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी वारदात की  घटना सामने आई है। झारखंड में अपराधियों के हौसले काफी बुलंद हो गए अपराधी आए दिन पुलिस कर्मियों को अपना निशाना बना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आजा एक महिला दरोगा को एक बहन द्वारा कुचल दिया गया जिसके बाद मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट की मानें तो कहा जा रहा है कि महिला एसआई सुबह करीब 3 बजे वाहन चेकिंग अभियान पर थी। उसी दौरान उसे सूचना मिली थी एक वैन में गोवंश पशु लेकर आ रहे हैं जिसे रोकने के लिए इशारा किया गया लेकिन पशु तस्कर एसआई को कुचलते हुए फरार हो गया।

 

घटना में मृत पाई गई महिला दरोगा की पहचान संध्या टोपनो के रूप  हुई है। वह इस समय मामला तुपुदाना थाना क्षेत्र एसआई पद पर पदस्थापित थी। वह 2018 बैच की एसआई ऑफिसर थी, जिसका बड़ी बेरहमी से ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई।

 

 

आजादी का अमृत महोत्सव – भारत की कहानी मीनाक्षी लेखी की जुबानी

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New Delhi – संस्कृति और विदेश राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने आज “भारत की कहानी, मीनाक्षी लेखी की जुबानी” नामक पॉडकास्ट सीरीज़ का 50वां एपिसोड पूरा कर लिया है।

श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत “भारत की कहानी, मीनाक्षी लेखी की जुबानी” नामक पॉडकास्ट सीरीज़ की शुरुआत की थी, जिसमें भारत के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कहानियां 75 दिनों की अवधि में सुनाई जा रही हैं, जो 75वें स्वतंत्रता दिवस पर पूरी होंगी।

ये पॉडकास्ट 01 जून, 2022 को शुरू किया गया था और केंद्रीय मंत्री इसमें रोज़ भारत के अलग अलग कोने के अलग-अलग गुमनाम नायकों की एक नई कहानी सुनाती हैं।

इन 75 कहानियों को अमृत महोत्सव की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ स्पॉटिफाई, गूगल पॉडकास्ट, साउंडक्लाउड और खबरी जैसे प्लेटफॉर्म पर उनके आधिकारिक हैंडल पर उपलब्ध करवाया जा रहा है।

अब तक जो कड़ियां आई हैं उनमें नीरा आर्य जैसे गुमनाम नायकों की कहानियां हैं जो भारत की पहली महिला जासूस थीं। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की रक्षा के लिए पूरा दम लगा दिया था। उनके अलावा झलकारी बाई, रानी अब्बक्का, अहिल्या बाई होल्कर और खुदीराम बोस जैसे नायकों की कहानियां शामिल हैं।

ये पहल बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इतने दशकों से ये माना जाता रहा है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सिर्फ कुछ ही लोगों का योगदान रहा है।

ये पॉडकास्ट सीरीज़ इन्हीं गुमनाम नायकों के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालने की एक पहल है जो भारत के लिए जिए और मर गए।

जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा था कि 21वीं सदी का भारत आजादी का अमृत महोत्सव के माध्यम से 20वीं सदी में की गई भूलों को सुधार रहा है। ये पहल इस आजादी का अमृत महोत्सव में उन अनसुने और अज्ञात नायकों के जीवन को सेलिब्रेट करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप ही है।

इस सीरीज़ के माध्यम से केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी इन गुमनाम नायकों के योगदान और कहानियों को सामने लाना चाहती हैं ताकि आने वाली पीढ़ी उनके नाम और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को न भूलें।

ये पॉडकास्ट सीरीज़ ऐसी अनूठी कहानियों का एक डिजिटल भंडार निर्मित करती है जो हमेशा हमारे तमाम नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शन करने वाला प्रकाश साबित होगी, खासकर उन छात्रों के लिए जो इन बहादुरों के जीवन से प्रेरणा ले सकते हैं।

साल 2022 का अत्यधिक महत्व है क्योंकि इस साल भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर रहा है। ये देश आजादी का अमृत महोत्सव को राष्ट्र और उसके लोगों की उपलब्धियों के उत्सव के रूप में मना रहा है।

गौ आधारित खेती से लागत हुई आधी

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20 जुलाई 2022, बड़वानी । गौ आधारित खेती से लागत हुई आधी – अंग्रेजी दवाइयों के सेवन से मनुष्य की प्रवृत्ति उसके अधीन हो गई जबकि देसी आयुर्वेदिक दवाइयों के उपयोग से मनुष्य को कम बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही स्थिति आज खेती की हो गई, यह कहना है ग्राम मंडवाड़ के प्रगतिशील कृषक श्री बाबूलाल काग का। वह अपनी 40 एकड़ भूमि पर गौ आधारित खेती (पशुओं से प्राप्त गोमूत्र गोबर का उपयोग) करते हैं। 60 वर्षीय सातवीं तक शिक्षित श्री काग 15 वर्ष की आयु से खेती कर रहे हैं।

आपने पिछले 3 वर्षों से गौ आधारित खेती अपनाई। श्री काग कहते हैं कि जब तक रसायनिक उर्वरकों का उपयोग करते थे खेती घाटे का सौदा रही,जब से पशुओं के साथ खेती करना प्रारंभ की, तब से खेती हमारे लिए फायदे का सौदा बन गई है। इनके खेतों पर अधिकतर अंतरवर्तीय फसल देखी जा सकती है। जिसमें गन्ने के साथ हल्दी, पपीता, गेहूं अन्य फसलें लगाते हैं। 4 एकड़ में अमरूद के 1500 वृक्ष 1 साल में चार लाख की आमदनी देते हैं इन वृक्षों के बीच भी फसल लगाई जाती है। हल्दी, मेथी दाना, गन्ना फसलों की अच्छी गुणवत्ता होने से गांव से ही आसानी से विक्रय हो जाती है। 35 पशुओं की गौशाला के साथ गौ आधारित खेती करने में उपज की गुणवत्ता बढ़ी साथ ही खर्चों में कटौती भी हुई है। अन्य जानकारी कृषक श्री काग के मो.: 9893988639 पर ले सकते हैं।

छत्तीसगढ़- 4 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा गौमूत्र

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गोधन न्याय योजना से पशुपालक ग्रामीणों से करीब दो सालों में 150 करोड़ से अधिक की गोबर खरीदी की गई, वहीं 143 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है

रायपुर. छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गोबर के बाद अब गौमूत्र की खरीदी की शुरुआत होने वाली है। गौमूत्र चार रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा। जानकारी के अनुसार राज्य में गौमूत्र की खरीदी की शुरुआत 28 जुलाई हरेली तिहार के मौके से होगी। प्रथम चरण में प्रत्येक जिले के दो चयनित स्वावलंबी गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी की जाएगी। गौठान प्रबंध समिति पशुपालक से गौ-मूत्र क्रय करने हेतु स्थानीय स्तर पर दर निर्धारित कर सकेगी। क्रय गौ-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह की मदद से जीवामृत एवं कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। चयनित समूहों को पशु चिकित्सा विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
गौ-मूत्र की खरीदी राज्य में जैविक खेती के प्रयासों को और आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। इसी को ध्यान में रखकर राज्य में गौ-मूत्र की खरीदी शुरू की जा रही है, इससे पशुपालकों को गौ-मूत्र बेचने से जहां एक ओर अतिरिक्त आय होगी, वहीं दूसरी ओर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जीवामृत, गौ-मूत्र की कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किए जाने से समूहों को रोजगार और आय का एक और जरिया मिलेगा। कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य में गौ-मूत्र क्रय के लिए न्यूनतम राशि चार रुपए प्रति लीटर प्रस्तावित की गई है।

गोधन न्याय योजना: राज्य में जैविक खेती को मिला बढ़ावा
आपको बताते चले दो साल पहले 20 जुलाई 2020 को राज्य में हरेली पर्व के दिन से ही गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में गोबर की खरीदी की शुरुआत की गई थी। गोबर से गौठानों में अब तक 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर प्लस कम्पोस्ट महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित किए जा चुके हैं, जिसके चलते राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। वहीं इस योजना के तहत पशुपालक ग्रामीणों से लगभग दो सालों में 150 करोड़ से अधिक की गोबर खरीदी की गई है, जिसका सीधा फायदा ग्रामीण पशुपालकों को मिला है। क्रय गोबर से वर्मी खाद का निर्माण एवं विक्रय से महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को 143 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। जीवामृत और गौ-मूत्र की कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे कृषि में लागत कम होगी। खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी।

  • कलेक्टरों को गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
    गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली ने सभी कलेक्टरों को गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि गौ-मूत्र का क्रय गौठान प्रबंधन समिति स्वयं के बैंक खातों में उपलब्ध गोधन न्याय योजना अंतर्गत प्राप्त की राशि से करेगी। उन्होंने कलेक्टरों को अपने-अपने जिले के दो स्वावलंबी गौठानों, स्व-सहायता समूह का चयन करने, गौठान प्रबंध समिति तथा स्व-सहायता समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण देने के साथ ही गौ-मूत्र परीक्षण संबंधी किट एवं उत्पाद भण्डारण हेतु आवश्यक व्यवस्था करने को कहा है।

गौमूत्र से होने वाले फायदे…

  • आयुर्वेद के अनुसार, गौमूत्र विष नाशक, जीवाणु नाशक और जल्द ही पचने वाला होता है। इसमें नाइट्रोजन, कॉपर, फॉस्‍फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम, यूरिक एसिड, क्लोराइड और सोडियम पाया जाता है।
  • गौमूत्र दर्दनिवारक, पेट के रोग, स्किन प्रॉब्लम , श्वास रोग (दमा), आंतों से जुड़ी बीमारियां, पीलिया, आंखों से संबंधित बीमारियां, अतिसार (दस्त) आदि के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में तीनों दोषों की गड़बड़ी की वजह से बीमारियां फैलती हैं, लेकिन गौमूत्र पीने से बीमारियां दूर हो जाती हैं।
  • दिमागी टेंशन की वजह से नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन गौमूत्र पीने से दिमाग और दिल दोनों को ही ताकत मिलती है और उन्हें किसी भी तरह की कोई बीमारी नहीं होती।
  • शरीर में पाए जाने वाले विभिन्न विषैले पदार्थों को बाहर निकालने के लिए गौमूत्र पीना बहुत लाभदायक है
  • शारीरिक कमजोरी और मोटापा दूर करने के लिए भी गौमूत्र का सेवन लाभकारी होता है।

‘कार्तिकेय 2’ के हिंदी टीजर को वृंदावन के इस्कॉन में किया गया लॉन्च

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पीपल मीडिया फैक्ट्री और अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स की नवीनतम प्रस्तुति के रूप में फिल्म ‘कार्तिकेय’ अपनी सीक्वेल के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच धमाल मचाने के लिए तैयार है। यह एक ऐसी मैग्नम ओपस है जिसकी बहुत अच्छी तरह से रिसर्च की गई है, एंटरटेंनमेंट से भरपूर कहानी है। फिल्म के विजुअल्स के साथ इसकी कहानी भी इमोशन्स से भरी हुई है।
‘कार्तिकेय’ ने इस बार पहले से कहीं ज्यादा बेहतर अंदाज में वापसी की है। इस बार यह मनुस्मृति श्लोक के साथ आ रहा है, “धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा न धर्मो हतो’वधूत” – जिसका अर्थ है “न्याय, अभिशप्त, अभिशाप; और न्याय, संरक्षित, संरक्षित; इसलिए न्याय को अभिशप्त नहीं किया जाना चाहिए, ऐसा न हो कि भयभीत न्याय हमें नष्ट कर दे।” हाल ही में ‘कार्तिकेय 2’ के टीज़र को वृंदावन के इस्कॉन टैंपल में लॉन्च किया गया था ताकि फिल्म के प्रोमोशन्स के शूरू होने से पहले भगवान श्री कृष्णा का आशीर्वाद लिया जा सके। सुपरनैचुरल मिस्ट्री थ्रिलर 2014 में आई फिल्म ‘कार्तिकेय’ के सीक्वेल को चंदू मोंडेती ने लिखा और निर्देशित किया है। वहीं फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन टीजी विश्व प्रसाद और अभिषेक अग्रवाल का है। इस फिल्म में लीड एक्टर निखिल सिद्धार्थ के साथ अनुपमा परमेश्वरन, श्रीनिवास रेड्डी, विवा हर्षा और आदित्य मेनन जैसे एक्टर्स नजर आएंगे। फिल्म की कोरियोग्राफी कार्तिक घट्टामनेनी ने की है और म्यूजिक काला भैरव ने दिया हैं। इस अपकमिंग तेलुगु फिल्म को दो भाषाओं में डब किया गया है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

बुलंदशहर: पुलिस मुठभेड़ में 25 हजार का इनामी गौ तस्कर घायल, गिरफ्तार

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बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस को 25 हजार के ईनामी गौ तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक(एसएसपी) श्लोक कुमार ने शनिवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नगर कोतवाली थानाक्षेत्र की पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में कुख्यात गौतस्कर तस्लीम गोली लगने से घायल हो गया और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

थाना पुलिस पुलिस वलीपुरा नहर के पास बैरियर लगाकर वाहनों की जांच कर रही थी उसी समय एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध वहां आए और पुलिस को देख कर वापस भागने लगे पुलिस के पीछा करने पर बाइक सवारों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली लगने से एक संदिग्ध घायल हो गया उसका दूसरा साथी फायरिंग करता हुआ मौके से भाग निकला।

एसएसपी ने बताया कि घायल की शिनाख्त तस्लीम निवासी रसूलपुर थाना गुलावठी के रूप में हुई जो इलाके का कुख्यात गौ तस्कर हैं, उसके विरुद्ध कई मुकदमे दर्ज है। गुलाबठी थाने में दर्ज हत्या की चेष्टा के एक मामले में वांछित चल रहा है और उसकी गिरफ्तारी पर 25000 रूपये का इनाम घोषित है। उसके पास से एक 315 बोर का अवैध तमंचा कारतूस और गोकशी के औजार बरामद किये गये।
पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल भी कब्जे में ली है घायल को इलाज के पुलिस अभिरक्षा में चिकित्सालय में भर्ती कराया है उसके फरार साथी की पुलिस तलाश कर रही है।

प्रधानमंत्री 18 जुलाई को एनआईआईओ सेमिनार ‘स्वावलंबन’ को संबोधित करेंगे

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New Delhi – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 18 जुलाई, 2022 को शाम 4:30 बजे डॉ अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में एनआईआईओ (नौसेना नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन) सेमिनार ‘स्वावलंबन’ को संबोधित करेंगे।

आत्मनिर्भर भारत का एक प्रमुख घटक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। इस प्रयास को आगे बढ़ाने के क्रम में प्रधानमंत्री कार्यक्रम के दौरान ‘स्प्रिंट चैलेंज’ का अनावरण करेंगे, जिसका उद्देश्य भारतीय नौसेना में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के एक भाग के रूप में, एनआईआईओ ने रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) के साथ मिलकर भारतीय नौसेना में कम से कम 75 नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों/उत्पादों को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस सहयोगी परियोजना का नाम स्प्रिंट (आईडेक्स, एनआईआईओ और टीडीएसी के माध्यम से आर एंड डी में उत्कृष्टता को समर्थन देना) है।

सेमिनार का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारतीय उद्योग और शिक्षाजगत को इस कार्यक्रम से जोड़ना है। दो दिवसीय सेमिनार (18-19 जुलाई) उद्योगजगत, शिक्षाजगत, सेना और सरकार के प्रतिनिधियों को रक्षा क्षेत्र के लिए विचार-विमर्श करने और सिफारिशों देने के लिए एक साझा प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। नवाचार, स्वदेशीकरण, आयुध और विमानन विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। सेमिनार के दूसरे दिन सरकार के सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में आउटरीच पर चर्चा की जाएगी।

अब पूरा हिन्दुस्तान यूपी के प्रति बड़े अच्छे भाव से देख रहा है, आपको आनंद हो रहा है कि नहीं हो रहा है? – पीएम मोदी

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Bundelkhand Express News: पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शनिवार को जालौन (Jaluan) में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway) का उद्घाटन किया. वह सुबह ही विशेष विमान से कानपुर (Kanpur) एयरपोर्ट पहुंचे जहां सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उनका स्वागत किया था. इसके बाद वह जालौन के लिए रवाना हो गए. बता दें कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पीएम मोदी की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है जिसका शिलान्यास उन्होंने ही दो साल पहले किया था.

2020 में पीएम मोदी ने किया था शिलान्यास

पीएम नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2020 में एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था जिसे फरवरी 2023 में पूरा किया जाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोरोना संकट के बावजूद इसे 8 महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है. एक्सप्रेसवे के निर्माण से सरकार और इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों में उत्साह है वहीं विपक्ष विशेषकर समाजवादी पार्टी लगातार हमलावर रही है.

दौरे से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम

उधर, पीएम मोदी के दौरे से पहले सुरक्षा चाक-चौबंद की गई. पीएसी पुलिस और अर्धसैनिक बलों को संवेदनशील इलाकों पर तैनात किया गया . शीर्ष पुलिस अधिकारी सीसीटीवी और पीटीजेड कैमरे के जरिए निगरानी रख रहे थे. उल्लेखनीय है कि जून में पीएम मोदी के कानपुर दौरे के दिन हिंसक घटनाएं हुई थीं और इसके बाद से ही ज्यादा सतर्कता बरती गई है. ऐसे में कानपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियों को अंजाम दिया और अराजक तत्व किसी तरह की अप्रिय घटना को अंजाम न दे पाएं, इसके लिए भी सभी जरूरी तैयारी की गई.

296 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की यह है खासियत

296 किलोमीटर के दायरे में फैले एक्सप्रेसवे से अब दिल्ली से चित्रकूट जाने का समय लगभग आधा हो जाएगा. पहले जहां 12 से 14 घंटे लगते थे वहीं यह दूरी अब 6 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. बताया जाता है कि इस एक्सप्रेसवे की जमीन खरीदने में 2200 करोड़ रुपये लगे थे और निर्माण 14,850 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. एक्सप्रेसवे की दूसरी खासियत यह है कि इस पर 15 से ज्यादा फ्लाईओवर, 10 से अधिक बड़े पुल, 250 से अधिक छोटे पुल, 6 टोल प्लाजा और चार रेलवे पुल मौजूद हैं.

प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

भारत, हर साल करोड़ों रुपए के खिलौने, दुनिया के दूसरे देशों से मंगाता रहा है। अब बताइए छोटे-छोटे बच्चों के लिए छोटे-छोटे खिलोने ये भी बाहर से लाए जाते थे। जबकि भारत में खिलौने बनाना तो पारिवारिक और पारंपरिक उद्योग रहा है, पारिवारिक व्यवसाय रहा है। उसे देखते हुए मैंने भारत में खिलौना उद्योग को नए सिरे से काम करने का आग्रह किया था। लोगों से भी भारतीय खिलौनों को खरीदने की अपील की थी। इतने कम समय में सरकार के स्तर पर जो काम करने जरूरी था, वो भी हमने किया। इन सबका नतीजा ये निकला कि आज और हर हिन्दुसतानी को गर्व होगा, मेरे देश के लोग सच्ची बात को कैसे दिल से ले लेते हैं इसका ये उदाहरण है। इस सबका नतीजा ये निकला कि आज विदेश से आने वाले खिलौनों की संख्या बहुत बड़ी मात्रा में कम हो आई है। मैं देशवासियों का आभार व्यक्त करता हूं। इतना ही नहीं, भारत से अब बड़ी संख्या में खिलौने, विदेश भी जाने लगे हैं। इसका लाभ किसे मिला है? खिलौने बनाने वाले हमारे ज्यादातर साथी गरीब परिवार हैं, दलित परिवार हैं, पिछड़े परिवार हैं, आदिवासी परिवार हैं। हमारी महिलाएं खिलौने बनाने के काम में जुड़ी रहती हैं। इस उद्योग से हमारे इन सब लोगों को लाभ हुआ है। झांसी, चित्रकूट, बुंदेलखंड में तो खिलौनों की बड़ी समृद्ध परंपरा रही है। इन्हें भी डबल इंजन की सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है।

एक समय था जब माना जाता था कि यातायात के आधुनिक साधनों पर पहला अधिकार सिर्फ बड़े – बड़े शहरों का ही है। मुंबई हो, चेन्नई हो, कोलकाता हो, बैंगलुरू हो, हैदराबाद हो, दिल्ली हो सबकुछ उनकों ही मिले। लेकिन अब सरकार की बदली है, मिजाज भी बदला है और ये मोदी है, ये योगी है, अब उस पुरानी सोच को छोड़कर उसे पीछे रखकर हम एक नए तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।

साल 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी के जो काम शुरू हुए, उनमें बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों को भी उतनी ही प्राथमिकता दी गई है। ये बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, औरैया और इटावा से होकर गुजर रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ के साथ ही बाराबंकी, अमेठी, सुलतानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से गुजर रहा है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, अंबेडकरनगर, संत कबीरनगर और आजमगढ़ को जोड़ता है। गंगा एक्सप्रेसवे- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ने का काम करेगा।

दिखता है कितनी बड़ी ताकत पैदा हो रही है। उत्तर प्रदेश का हर कोना नए सपनों को लेकर के, लए संकल्पों को लेकर के अब तेज गति से दौड़ने के लिए तैयार हो चुका है, और यही तो सबका साथ है, सबका विकास है। ना कोई पीछे छूटे, सब मिलकर आगे बढ़ें, इसी दिशा में डबल इंजन की सरकार  लगातार काम कर रही है। यूपी के छोटे-छोटे जिले हवाई सेवा से जुड़ें, इसके लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है।

बीते कुछ समय में प्रयागराज, गाजियाबाद में नए एयरपोर्ट टर्मिनल बनाए गए, कुशीनगर में नए एयरपोर्ट के साथ ही नोएडा के जेवर में एक और इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर काम चल रहा है। भविष्य में यूपी के कई और शहरों को, वहां भी हवाई रूट से जोड़ने की कोशिश हो रही है। ऐसी सुविधाओं से पर्यटन उद्योग को भी बहुत बल मिलता है। और मैं जब आज यहां मंच पर आ रहा था तो उससे पहले मैं इस बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का प्रेजेंटेशन देख रहा था एक मॉडयूल लगाया वो देख रहा था, और मैंने देखा कि इस एक्सप्रेसवे के बगल में जो-जो स्थान हैं वहां पर कई सारे किले हैं, सिर्फ झांसी का एक किला है ऐसा नहीं, कई सारे किले हैं।

आपमें से जो विदेश कि दुनिया जानते हैं उनको मालुम होगा, यूरोप के कई देश ऐसे हैं जहां पर किले देखने का एक बहुत बड़ा टूरिज्म उद्योग चलता है और दुनिया के लोग पुराने किले देखने के लिए आते हैं। आज बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने के बाद मैं योगी जी की सरकार को कहुंगा कि आप भी इन किलों को देखने के लिए एक शानदार सर्किट टूरिज्म बनाइये, दुनियाभर के टूरिस्ट यहां आए और मेरे बुंदेलखंड की इस ताकत को देखें। इतना ही नहीं मैं आज योगी जी से आग्रह एक और करुंगा, आप उत्तरप्रदेश के नौजवानों के लिए इस बार जब ठंड की सीजन शुरू हा जाए, मौसम ठंडी का शुरू हो जाए तो किले चढ़ने की स्पर्धा आयोजित किजिए और परंपरागत रास्ते से नहीं कठिन से कठिन रास्ता तय कीजिए और नौजवान को बुलाइये कौन जल्दी से जल्दी चढ़ता है, कौन किले पर सवार होता है।

आप देखने उत्तर प्रदेश के हजारों नौजवान इस स्पर्धा में जुड़ने के लिए आ जायेंगे और उसके कारण बुंदेलखंड में लोग आएंगे, रात को मुकाम करेंगे, कुछ खर्चा करेंगे, रोजी-रोटी के लिए बहुत बड़ी ताकत खड़ी हो जाएगी। साथियों, एक एक्सप्रेसवे कितने प्रकार के कामों को अवसर का जन्म दे देता है।

डबल इंजन की सरकार में आज यूपी, जिस तरह आधुनिक हो रहा है, ये वाकई अभूतपूर्व है। जिस यूपी में जरा याद रखना दोस्तों मैं जो कह रहा हूं। याद रखोगे? याद रखोगे? जरा हाथ ऊपर करके बताओ याद रखोगे? पक्का याद रखोगे? बार-बार लोगों को बताओगे? तो याद रखिये जिस यूपी में सरयू नहर परियोजना को पूरा होने में 40 साल लगे,  जिस यूपी में गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट 30 साल से बंद पड़ा था, जिस यूपी में अर्जुन डैम परियोजना को पूरा होने में 12 साल लगे, जिस यूपी में अमेठी रायफल कारखाना सिर्फ एक बोर्ड लगाकर के पड़ा हुआ था। जिस यूपी में रायबरेली रेल कोच फैक्ट्री डिब्बे नहीं बनाती थी,  सिर्फ डिब्बों का रंग-रौगन करके काम चला रही थी, उस यूपी में अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतनी गंभीरता से काम हो रहा है, कि उसने अच्छे-अच्छे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है दोस्तो। पूरे देश में अब यूपी की पहचान बदल रही है। आपको गर्व होता है कि नहीं होता है? आज यूपी का नाम रोशन हो रहा है आपको गर्व हो रहा है कि नहीं हो रहा है? अब पूरा हिन्दुस्तान यूपी के प्रति बड़े अच्छे भाव से देख रहा है, आपको आनंद हो रहा है कि नहीं हो रहा है?

पीएम के नेतृत्व में सामूहिक प्रयासों से लाखों किसानों की दोगुनी से अधिक हुई आय: श्री तोमर

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New Delhi – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश में कृषि क्षेत्र व किसानों का तेजी से विकास हो रहा है। किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर केंद्र व राज्य सरकारों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) सहित सभी के सामूहिक प्रयासों से असंख्य किसानों ने आय दोगुना या इससे ज्यादा करने में सफलता हासिल की है। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में, आय बढ़ने वाले लाखों किसानों में से 75 हजार किसानों का संकलन कर एक ई-प्रकाशन तैयार किया गया है। साथ ही Doubling Farmers Income पर राज्यवार संक्षिप्त प्रकाशन भी तैयार किया गया है। इनका विमोचन कृषि मंत्री श्री तोमर ने इस अवसर पर किया। ई-प्रकाशन आईसीएआर वेबसाइट पर उपलब्ध है। आईसीएआर के 94वें स्थापना दिवस पर श्री तोमर ने वैज्ञानिकों व किसानों को पुरस्कार भी वितरित किए।

आईसीएआर पूसा परिसर, दिल्ली में आयोजित समारोह में श्री तोमर ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि आईसीएआर ने गत वर्ष तय किया था कि आजादी के अमृत महोत्सव में ऐसे 75 हजार किसानों से चर्चा कर उनकी सफलता का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिनकी आय दोगुनी या इससे ज्यादा बढ़ी है। सफल किसानों का यह संकलन देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। श्री तोमर ने आईसीएआर के अन्य प्रकाशनों का भी विमोचन किया। श्री तोमर ने कहा कि आईसीएआर को स्थापना दिवस संकल्प दिवस के रूप में मनाना चाहिए। इस अवसर पर वर्षभर के संकल्प लिए जाएं और अगले स्थापना दिवस तक इन्हें पूरा करना चाहिए।

श्री तोमर ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि ऐसा क्षेत्र है, जिसमें निरंतर काम करने की जरूरत है, नित-नई चुनौतियों का समाधान करने की जरूरत है। वर्तमान में चुनौती पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ने की भी है। प्रधानमंत्री की कोशिश है कि गांव, गरीब-किसानों के जीवन में बदलाव आएं, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में अधोसंरचनाएं विकसित हो, जीवन सुगम हो व कृषि मुनाफे में परिवर्तित हो, इसके लिए बहुआयामी प्रयत्न किए हैं। नए रोजगार सृजित करने के लिए योजनाएं लागू कर फंडिंग की जा रही है। लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है, कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

“पढ़ा-लिखा व्यक्ति जब खेती में आता है तो योग्यता व अनुभव के साथ तकनीक को जोड़ने से रोजगार के इतने अवसर पैदा किए जा सकते हैं, जिससे कि रोजगार की समस्या का समधान हो सकता है,” उन्होंने कहा।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आईसीएआर की स्थापना को 93 साल हो गए हैं। “वर्ष 1929 में स्थापना से लेकर आज तक इसके द्वारा लगभग 5,800 बीज-किस्में जारी की गई हैं, वहीं इनमें से लगभग दो हजार किस्में तो वर्ष 2014 से अभी तक 8 वर्षों में ही रिलीज की गई है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इनमें बागवानी, जलवायु अनुकूल व फोर्टिफाइड किस्मों की बीज-किस्में भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन की स्थिति आ रही है तो वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता का विषय यही है, इस दिशा में रोडमैप बनाकर आगे बढ़ना, देश को परिणाम देना है ताकि भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात की भी और अच्छी स्थिति बन सकें, इसमें सभी केवीके और आईसीएआर के संस्थानों के अन्य वैज्ञानिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है,” उन्होंने कहा।

श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन पर नई शिक्षा नीति का उदय हुआ, अब स्कूली शिक्षा में कृषि पाठ्यक्रम का समावेश किया जा रहा है। “कृषि शिक्षा संस्थान नई शिक्षा नीति को कैसे अंगीकार करें, यह काम आगे बढ़कर आईसीएआर ने किया है, इसका सद्परिणाम आगे देखने को मिलेगा,” उन्होंने कहा।

श्री तोमर ने कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में काम करने सहित दलहन, तिलहन, कपास उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी आईसीएआर व केवीके को संकल्पबद्ध होकर प्रयास करने को कहा। इससे पहले देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ किसानों से कृषि मंत्री ने आनलाइन संवाद किया। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, म.प्र., गुजरात आदि के किसानों से कृषि मंत्री की चर्चा में यह बात उभरी कि सरकारी योजनाओं, संस्थागत सहयोग से इनकी आय बढ़ रही हैं, जीवन स्तर सुधर रहा है।

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला ने आईसीएआर के उपलब्धिपूर्ण इतिहास के दस्तावेजीकरण का सुझाव दिया। उन्होंने पोषक तत्व बढ़ाने वाली फसलों की नई बीज किस्में विकसित करने के लिए आईसीएआर की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में हो रहे नवाचारों की ओर अनुसंधान केंद्रों का ध्यान जाना चाहिए। साथ ही इसे लेकर उत्कृष्ट कार्य करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष अगले साल भारत की अगुवाई में मनाया जाएगा। इसके मद्देनजर मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने पर आईसीएआर को फोकस करना चाहिए।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि विकास में किसानों के साथ ही आईसीएआर के वैज्ञानिकों का बहुत योगदान है। पीएम के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें सुविधाएं-समर्थन देने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम कर रही है। कृषि का बजट 8 वर्ष पूर्व करीब 22 हजार करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 1.32 लाख करोड़ रु. कर दिया गया है। पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में हर साल 3 किश्तों में 6,000 रु. किसानों के बैंक खातों में दिए जा रहे हैं, वहीं एफपीओ के माध्यम से छोटे किसानों की दिक्कतें दूर की जा रही हैं। नए 10 हजार एफपीओ मील का पत्थर साबित होंगे और इनके जरिये देश ही नहीं बल्कि विश्व के किसी भी कोने में किसान अपने उत्पाद आसानी से बेच सकेंगे।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद ने कहा कि श्री तोमर ने जो संकल्प की बात की वह अपने आप में महत्वपूर्ण है।  हर इन्स्टीट्यूट को अपना संकल्प बनाना चाहिए ताकि वो सबका संकल्प बन जाये। ICAR  ने KVK  को मानकर जो भी उपलब्धि हासिल की है वो लोगों को भागीदार बना कर की है। पिछले 75 साल में ग्रीन  रेव्यूलूशन का इंजन जेनेटिक इंप्रूवमेंट से हुआ है । भारत सरकार बड़ी जिम्मेदारी के साथ दो रास्तों  पर चल रही है। एक हैं –  ट्रेडिशनल पद्धति। दूसरा – साइंस/ विज्ञान।

संगठनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए व्यक्तिगत कर्मचारियों और टीमों को प्रोत्साहित करने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए और उन्हें नौकरी से संतुष्टि के अपने स्तर में सुधार के अलावा अधिक कुशल, उत्तरदायी और उत्पादक बनाने के लिए, मंत्री ने 4 प्रमुख श्रेणियों में 15 पुरस्कार प्रदान किए। श्रेणियों में कृषि संस्थानों के लिए उत्कृष्टता का राष्ट्रीय पुरस्कार, कृषि अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, कृषि प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और किसानों द्वारा नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं।

इस वर्ष, आईसीएआर ने 15 विभिन्न पुरस्कारों के तहत 92 पुरस्कार विजेताओं का चयन किया, जिनमें 4 संस्थान, 1 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, 4 कृषि विज्ञान केंद्र, 67 वैज्ञानिक और 11 किसान शामिल थे, जिनमें से 8 महिला वैज्ञानिक और किसान थे।

कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने भी संबोधित किया। उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डा. ए.के. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। सहायक महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने आभार माना। महाराष्ट्र के सांसद डा. अनिल बोंडे, आईसीएआर के अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक व प्रगतिशील किसान भी मौजूद थे। देश के 731 केवीके और आईसीएआर के संस्थानों में भी स्थापना दिवस पर कार्यक्रम हुए, जिनमें हजारों किसानों के साथ स्थानीय सांसद-विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की।

 

जगदीप धनखड़ जिन्हें NDA ने बनाया उपराष्ट्रपति उम्‍मीदवार

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भाजपा संसदीय बोर्ड ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राजस्थान मूल के जगदीप धनखड़ को उप-राष्ट्रपति का प्रत्याशी बनाने पर सहमति जताई है। शनिवार को इसका एलान शनिवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया। जगदीश धनखड़ (NDA VP candidate Jagdeep Dhankhar) अब एनडीए के उप-राष्ट्रपति के प्रत्याशी होंगे। जानिये जगदीश धनखड़ का कैसा रहा है सियासी सफर…

सीएम ममता बनर्जी के मुखर आलोचक

जगदीप धनखड़ वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। 2019 में बीजेपी ने उनको पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया। तब से लेकर अब तक उनकी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से ठनती रही। पिछले महीने उदयपुर के प्रताप गौरव केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल जगदीप धनखड़ शामिल हुए और उन्होंने कहा था कि ‘पश्चिम बंगाल में कानून का नहीं, शासक का राज है

बंगाल में हुई हिंसा पर मुखर रुख

जगदीप धनखड़ ने कहा था- चुनाव के बाद जो हिंसा का तांडव मैंने देखा, वो बयां नहीं कर सकता। मैंने मौतें देखीं, मार-काट देखी। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में वोट देने की कीमत मौत हो सकती है। ये मैंने खुद देखा है। मैंने बंगाल की अवाम की पीड़ा महसूस की है।

स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में हुई

राजस्थान के छोटे से गांव से निकले धनखड़, सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के छात्र रहे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजस्थान के शेखावाटी अंचल के झुंझुनूं जिले के एक सुदूर गांव किठाना के रहने वाले हैं। किसान परिवार में जन्मे धनखड़ ने की स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में हुई। भौतिकी में स्नातक करने के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से विधि स्नातक किया और वकालात करने लगे।

अग्रणी वकीलों में शुमार

जगदीप धनखड़ राजस्थान के ही नहीं, वरन देश के अग्रणी वकीलों में शुमार रहे हैं। बार कौंसिल आफ राजस्थान के विभिन्न पदों पर रहने वाले धनखड़ ने साल 1989 में राजनीति में प्रवेश किया। पहली बार झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से भाजपा से सांसद निर्वाचित हुए। 1990 में वह देश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री बने। इसके बाद अजमेर जिले की किशनगढ़ से वह विधायक निर्वाचित हुए।

जाट समाज के मुखर नेता

भाजपा ने साल 2019 में जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया था। जाट समाज से आने वाले धनखड़ के दो और भाई हैं, जिनमें से एक कांग्रेस के नेता है, जबकि दूसरे बिजनेस मैन।

ममता बनर्जी से हमेशा ठनी रहती

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहते हुए जगदीप धनखड़ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कभी नहीं बनी। उन्होंने कहा था कि ‘बंगाल में कानून का नहीं, शासक का राज है। जो किसी भी तरह से प्रजातांत्रिक मापदंडों से मेल नहीं खाता है। राज्यपाल के रूप में धनखड़ ने ममता बनर्जी के कई फैसलों को पलट दिया। कुछ दिनों पहले बीजेपी के खिलाफ जेहाद वाले बयान को लेकर धनखड़ और ममता बनर्जी के बीच जमकर वाद विवाद हुआ।

बच्चों को दिया था संदेश

उदयपुर के प्रताप गौरव केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बच्चों को संदेश देते हुए कहा था कि आप सभी को भारत के संविधान की प्रस्तावना अवश्य पढ़नी चाहिए। इससे उन्हें राष्ट्रीयता समझ आ जाएगी।