देहरादून,27 फरवरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा में बहुआयामी बजट प्रस्तुत किया !
तृतीय अन्नदाता योजना – मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भाइयों के लिए बजट राशि को बढ़ाया गया है। वर्ष 2024-25 में कुल 2415 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। इसमें दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना, मिशन एप्पल, किसान पेंशन, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर विशेष ध्यान रखा गया है।
गौशाला को संचालित करने के लिए सिर्फ़ सरकार पर आश्रित नहीं रहकर स्वयं के संसाधनों से स्वावलंबन की ओर बढ़ेँ :दिनेशगिरी
गौशाला को संचालित करने के लिए सिर्फ़ सरकार पर आश्रित नहीं रहकर स्वयं के संसाधनों से स्वावलंबन की ओर बढ़ेँ :दिनेशगिरी
डॉ. आर बी चौधरी एवम हरनारायण सोनी
ओसिया (राजस्थान):पिंजरापोल गौशाला सांगानेर जयपुर में राजस्थान गोसेवा समिति कार्यकारिणी की बैठक संरक्षक महंत हीरापुरी महाराज, अध्यक्ष महंत दिनेशगिरी महाराज, उपाध्यक्ष रघुनाथ भारती महाराज सिणधरी, गोविंद बल्लभदास महाराज श्रीपति धाम नंदनवन, भुवनेशगिरी महाराज,रतनदास महाराज सहित कई संत महात्माओं,कार्यकारिणी सदस्यों एवं प्रदेशभर से आये गणमान्यो की उपस्थिति में संपन्न हुई।
प्रदेश महामंत्री रघुनाथसिंह राजपुरोहित ने बताया कि बैठक में गाय को राज्य धरोहर घोषित करने, 12 महीना अनुदान, अनुदान राशि बढ़ाने, गौशालाओं को भूमि आवंटन, पेयजल सुविधा, चारा उत्पादन के लिए विद्युत कनेक्शन को प्राथमिकता, गो तस्करी रोकने के लिए सख्त कानून, औरण भूमि एवं परस्थिति जन्य क्षेत्र को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित करने पर विभाग को आपत्ति पेश करने सहित गौशालाओं की विभिन्न समस्याओं एवं समाधान के विषय में विस्तृत चर्चा करते हुए दिनेश गिरी महाराज ने कहा कि गौशालाओं को सब कुछ सरकार पर आश्रित नहीं रहकर स्वयं के संसाधनों से भी स्वावलंबन की दिशा में बढ़ना चाहिए ।
इस बैठक में गौशालाओं की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र ही प्रदेश भर की गौशालाओं का अधिवेशन रखने का प्रस्ताव रखा। सुझाव प्रेषित करते हुए जोधपुर जिला अध्यक्ष हरनारायण सोनी ने कहा कि केवल चारा खिला देने मात्र से हमारा गौ सेवा का लक्ष्य पूरा नहीं होता हमें गौशालाओं में आश्रित गोवंश को सम्मान के साथ उनकी पूरी आयु तक जीने का अवसर प्रदान करते हुए प्रत्येक गोवंश को सूखे चारे के साथ 1 किलो पोस्टिक आहार अवश्य देना चाहिए। सनराइज संस्थान के अतुल अग्रवाल ने पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए गौशाला में लगी 300 प्रकार की जड़ी बूटियों के बारे में बताया और इन्हें अधिक से अधिक लगाकर उपयोग करने, गोबर का आधुनिक तरीकों से खेती में उपयोग करने के लिए कहा व रासायनिक खेती के खतरे से आगाह किया।
इस अवसर पर पिंजरापॉल गौशाला प्रबंधक राधेश्याम विजयवर्गीय, सूर्यवीरसिंह मथुरा, प्रदेशमंत्री हीराराम गोदारा, करणसिंह नारवा,जिला अध्यक्ष हरनारायण सोनी,सुखराम दाड़मी सहित राजस्थान की कई गौशालाओं के प्रतिनिधियों ने उपस्थित रहकर अपने अपने सुझाव रखे।
पारंपरिक प्रथाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ता मध्यप्रदेश
बेफिक्र कमलनाथ, दिग्विजय और जीतू पटवारी
(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)
देश के पूर्वी हिस्से से पश्चिम तक निकल रही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की न्याय यात्रा मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक हो, इसे लेकर कांग्रेस के नेता पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं।राहुल गांधी की यात्रा के जरिए सभी नेताओं के साथ ही संगठन ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों से फिलहाल दूरी बनाए रखी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह सहित अन्य नेता लोकसभा चुनाव को लेकर इतने बेफिक्र क्यों हैं ? इन नेताओं की लोकसभा चुनाव को लेकर इतनी बेरूखी है कि चुनाव सिर पर होने के बाद भी कांग्रेस के सभी नेता राहुल गांधी की यात्रा की तैयारियों में ज्यादा व्यस्त है। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी की यात्रा तीन मार्च को आने की संभावना है और सात मार्च तक राहुल गांधी यहां के आठ लोकसभा क्षेत्रों से गुजरेंगे। प्रदेश के 29 लोकसभा क्षेत्रों में से अभी भाजपा के 28 सांसद हैं, जबकि एक मात्र सीट छिंदवाड़ा पर कांग्रेस का कब्जा है।
*भाजपा का गढ़ और दिग्विजय का प्रभाव*
राहुल गांधी मध्य प्रदेश में मुरैना जिले से प्रवेश करेंगे। यह सीट भाजपा के खाते में हैं, यहां से नरेंद्र सिंह तोमर सांसद थे, वे केंद्र में मंत्री भी रहे, लेकिन भाजपा ने उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाया और अब वे मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हैं। यह सीट लंबे अरसे से भाजपा के खाते में रही है। यह सीट पिछले 27 सालों से भाजपा के कब्जे में हैं। यानी राहुल गांधी जिस लोकसभा क्षेत्र से मध्य प्रदेश में प्रवेश करेंगे वह भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसी तरह ग्वालियर में माधवराव सिंधिया के बाद से कांग्रेस लोकसभा चुनाव में संघर्ष ही करती रही है। यह सीट भी पिछले तीन चुनाव से कांग्रेस लगातार हार रही है। राहुल गांधी की यात्रा ग्वालियर के बाद गुना-शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र से होकर गुजरेगी। इस सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया अब तक लोकसभा का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े हैं। अब यह सीट भी कांग्रेस के पास नहीं बची है। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का सबसे मजबूत आधार मानी जाने वाली राजगढ़ लोकसभा सीट आती है। राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में दिग्विजय सिंह का खासा प्रभाव माना जाता है। लेकिन यहां पर भी दो चुनाव कांग्रेस लगातार हार चुकी है। यहां पर वर्ष 2009 में कांग्रेस जीती थी, इसके बाद से यह सीट भी कांग्रेस के हाथ से निकल गई। इसी क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी की यात्रा देवास-शाजापुर लोकसभा क्षेत्र, फिर उज्जैन, धार, झाबुआ लोकसभा क्षेत्र से गुजरेगी। इन सभी लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा के सांसद हैं।
*फिर भी लोकसभा चुनाव की तैयारियों से दूर कांग्रेस*
भाजपा के मजबूत गढ़ में बदल रहे मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों में कांग्रेस, भाजपा से लगातार पिछड़ती जा रही है। भाजपा में जहां युद्ध स्तर पर चुनाव की तैयारी की जा रही है। केंद्र से लेकर प्रदेश और मंडल स्तर के नेता और पदाधिकारी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं कांग्रेस इन दिनों अपने नेता राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बैठक कर रही है। जब लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने का वक्त प्रदेश में होगा, उस वक्त पूरी कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार राहुल गांधी की यात्रा में शामिल रहेंगे। प्रदेश भर के कार्यकर्ता और नेता यहां पर आएंगे। करीब सात दिन तक कांग्रेस चंद लोकसभा क्षेत्रों में सिमट जाएंगी।
*मिशन 29 को कितना रोक सकेगी कांग्रेस*
मध्य प्रदेश में इस बार भाजपा सभी लोकसभा सीट जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पिछले चुनाव में वह 29 में से 28 सीटों पर जीती थी। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ छिंदवाड़ा से कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। इस बार जहां भाजपा के पास मिशन 29 को पूरा करने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस के सामने भाजपा के इस मिशन को रोकने की चुनौती है। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भाजपा तो दिन रात एक कर काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस की तैयारी भाजपा के मुकाबले में कमतर ही लग रही है।
*कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने को कोई नेता नहीं तैयार*
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जबरदस्त हार के बाद प्रदेश कांग्रेस के कोई भी दिग्गज नेता और संगठन के मुखिया अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने का काम भी नहीं कर रहे हैं। हालात यह हो चुके हैं कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने दो महीने के कार्यकाल में प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों का दौरा तक नहीं कर पाएं हैं। वे भोपाल और इंदौर में ही ज्यादा सक्रिय हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दिल्ली में ज्यादा वक्त बीता रहे हैं। प्रदेश में ये आ भी रहे हैं तो कमलनाथ छिंदवाड़ा तक सीमित रह रहे हैं, वहीं दिग्विजय सिंह राजगढ़ लोकसभा में ही सिमट गए हैं। ये दोनों नेता भी विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अपने-अपने क्षेत्रों से बाहर दौरा करने के लिए नहीं निकले हैं। इन तीनों नेताओं की बेरुखी के चलते कांग्रेस के अधिकांश कार्यकर्ता अब तक विधानसभा चुनाव की हार से बाहर ही नहीं निकल पाएं हैं। यही हाल मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र भंवर सिंह का है।वे भी मध्यप्रदेश कम ही आते हैं।ऐसे में भाजपा के मिशन 29 को रोकने में कांग्रेस और उसके नेता कितने सफल होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएंगा।(विनायक फीचर्स)लेखक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं।
वंचितों और रोगियों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं परोपकारी अक्षय सोनकांबले
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की आरोग्यनिधि सेवा संस्था के कर्मठ एवं समाजसेवक अक्षय दयानंद सोनकांबले मुंबई में गोरेगांव पूर्व संतोष नगर के रहवासी हैं, इनका जन्म और शिक्षा मुम्बई में हुआ है। परोपकारी स्वभाव के अक्षय सांताक्रुज, विलेपार्ले, अंधेरी, जोगेश्वरी, गोरेगांव के आसपास के क्षेत्र में जितने भी जरूरतमंद लोग हैं उनका दिल खोलकर सहायता करते हैं। मुम्बई ही नहीं सुदूर क्षेत्रों के लोगों तक भी वे अपनी सहायता पहुंचाते हैं। यह काम अक्षय पिछले सात आठ सालों से कर रहे हैं और अभी तक लगभग बारह सौ से अधिक लोगों तक वह सहायता पहुंचा चुके हैं। वह आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों तक अन्न और फल सब्जियां पहुंचाकर, रुग्ण और असहाय लोगों को स्वास्थ्य चिकित्सा मुहैया कराकर, छोटे बच्चों को कपड़े और उनकी शिक्षा की आवश्यक वस्तुएं प्रदान कर सहायता करते हैं। आदिवासी बस्तियों में प्रत्येक रविवार को भोजन या खिचड़ी बांट कर उनकी सहायता करते हैं। इसके लिए वह स्थानीय लोगों की मदद भी लेते हैं और साथ में सम्मिलित होकर स्वयं भी भोजन ग्रहण करते हैं। इन सभी कार्यो में उनके परिवार का भरपूर सहयोग उन्हें मिलता है। अक्षय के भीतर यह सेवा और परोपकार की भावना का उदय उन्हें उनके पिता दयानंद सोनकाम्बले से मिला है। अक्षय अपने पिता को अपना आयडल मानते हैं। उन्हीं की तरह परोपकार और सेवा करना चाहते हैं। अक्षय बताते हैं कि जब से वह इस जनसेवा अभियान से जुड़े हैं तब से उनकी आर्थिक सहायता केवल उनके पिता ने ही कि है और वे अक्षय को कहते हैं कि जितना भी हो सके वह मदद करेंगे किसी अन्य से आर्थिक मदद या पैसे ना लें। यदि कोई सेवा हेतु आर्थिक मदद देता भी है तो यह धन केवल सेवा के लिए प्रयोग करें अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं। अक्षय के पिता एक मध्यमवर्गीय कामगार व्यक्ति हैं किंतु परोपकारी कार्यों हेतु वे सदैव तत्पर रहते हैं तथा अपने सामर्थ्य अनुसार वंचितों की सहायता में लगे रहते हैं।

अक्षय अपने पिता का अनुसरण करते हैं। अक्षय अपने बारे में बताते हैं कि उनके अंदर लोगों के लिए सहयोग की भावना का उदय तब हुआ जब वे सातवीं या आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। उस समय उनकी माँ के कानों में तेज दर्द और चक्कर की शिकायत थी। उनके पिता सुबह उनकी माँ को लेकर अस्पताल जाते और वापस लौटते हुए शाम या रात हो जाती थी। यह देख अक्षय यह सोचते कि आखिर सरकारी अस्पताल में इतना समय क्यों लग जाता है। फिर जब वे एक बार अपनी माँ को जोगेश्वरी स्थित क्रोमा अस्पताल (बालासाहेब ठाकरे हॉस्पिटल) लेकर गए तो वहां पहुंचते ही उनकी माँ को चक्कर आ गया। माँ की हालत देख अक्षय ने वार्डबॉय से अपनी माँ के लिए कुर्सी मांगी तब वार्डबॉय ने उन्हें अनदेखा कर दिया। तभी वहां सफाई कर्मचारी एक महिला ने कुर्सी का इंतजाम कर उन्हें दिया। इलाज कराने के बाद अक्षय पुनः वार्डबॉय से मिले और पूछा कि आपने सहायता क्यों नहीं की तो इस पर वॉर्डबॉय ने तीखा तंज कसते कहा कि आपकी माँ क्या झांसी की रानी है यदि सुविधा चाहिए तो प्राइवेट अस्पताल जाओ यहाँ क्यों आते हो। वॉर्डबॉय की बात अक्षय को बहुत बुरी लगी और उसने सोचा कि वह किसी और को ऐसी तकलीफ से नहीं गुजरने देंगे। फिर वह अपना जन्मदिन मनाने ‘दया अनाथाश्रम’ गए वहाँ उन्होंने अन्नदान किया और उनका हाल पूछा तभी कुछ बीमार लोगों ने अपनी व्यथा बताई और यह भी बताया कि बीएमसी अस्पतालों में इलाज के लिए जाने पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है लंबी लाइन लगाना पड़ता है। जिसका अस्पताल में पहचान हो, उसी का सही इलाज हो पाता है। उनकी यह बात सुन अक्षय को लगा कि लोग बीएमसी को लेकर जो बोल रहे हैं वह सही नहीं है और वहीं से अक्षय ने ठान लिया कि सरकारी अस्पताल में अब गरीब और जरूरतमंदों को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए अक्षय पूरी जी जान से जुड़े, लोगों से संपर्क बनाया, सारी जानकारियां हासिल की, नेता, एनजीओ, नगरपालिका अधिकारियों, खासदार आदि से संपर्क किया, ताकि बीमार व्यक्तियों के लिए बीएमसी में इलाज करवाना आसान हो जाये और सरकारी अस्पतालों को लेकर लोगों में जो धारणा बनी है वह दूर हो और सभी रोगियों को आसानी से सहायता मिल सके। अक्षय ने सबसे पहले एक लकवाग्रस्त व्यक्ति की सहायता की और वहीं से जनसेवा का काम जो शुरू हुआ वह आज तक चल रहा है और इस सेवा चैन को अक्षय दूर दराज के लोगों तक लेकर जाना चाहते हैं। वह बीमार व्यक्ति को सरकारी अस्पताल में उचित डॉक्टर से मिलाना, बीमारी के लिए उन्हें सरकारी सहायता की जानकारी देना, जरूरतमंदों को एनजीओ या सरकार की ओर से सहायता दिलाना, कम लागत में इलाज की व्यवस्था, कैन्सर मरीजों को कीमो और दवा प्राप्त करने हेतु कम लागत में इलाज प्राप्त करने के उपाय बताना जैसे सेवाभाव का कार्य करते हैं।
अक्षय कहते हैं कि अधिकांश लोगों को डॉक्टर और सरकारी सुविधाओं का ज्ञान ही नहीं है। सरकारी अस्पताल में कम लागत में ऑपरेशन, एमआरआई, सोनोग्राफी, एक्सरे और खून जांच आदि हो जाती है फिर भी लोग धैर्य नहीं रखते और अधिक लागत में अपना इलाज और जांच कराते हैं। वह सदा लोगों की सहायता के लिए तत्पर हैं और किसी भी बीमार व्यक्ति को इलाज हेतु आर्थिक सहायता चाहिए तो वह किसी बीएमसी अस्पताल में कम मेहनत और कम लागत में सहायता पहुंचाएंगे। जो आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं उनकी आर्थिक मदद भी करेंगे। अक्षय यह कार्य सेवा भाव
से करते हैं, आय साधन के लिए नहीं। उनका कहना है कि जो तकलीफ़ उन्होंने सही वह किसी और को भोगना ना पड़े।
– गायत्री साहू
बिजनेसमैन डॉ निकेश जैन माधानी के पिता की स्वास्थ्य संबंधी हालचाल लेने पहुंचे शिवसेना नेता व प्रवक्ता आनंद दुबे और सुनील चौबे
मुंबई। बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी व्यापारिक व सामाजिक क्षेत्रों में अच्छी पकड़ रखते हैं। साथ ही वह राजनीतिक एवं मीडिया से भी जुड़े हैं। उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता व प्रवक्ता आनंद दुबे 26 फरवरी को निकेश के घर जाकर उनके पिता से भेंट किए और स्वास्थ्य संबंधी हालचाल लिया। निकेश और उनके पिता ने गुलदस्ता देकर आनंद दुबे और सुनील चौबे का स्वागत किया।
अभी 25 फरवरी को ही बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी मुंबई के सहारा स्टार होटल में इंडियन गोल्डन अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
आपको बता दें कि हाल ही में डॉ निकेश जैन माधानी को भारत सरकार की युवा मामले एवं खेल मंत्रालय युवा मामले विभाग, नेहरू युवा केन्द्र संगठन द्वारा सम्मान मिला। वहीं निकेश जैन को रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि माधानी फाइनेंस, माधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, माधानी ट्रेडिंग कंपनी, माधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।
– संतोष साहू
इंडियन गोल्डन अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए डॉ निकेश जैन माधानी
मुंबई। 25 फरवरी के दिन बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को मुंबई के सहारा स्टार होटल में इंडियन गोल्डन अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया। जोइल इंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बिग बॉस रियलिटी शो के कंटेस्टेंट एवं यूटूबर और इनफ्लुएंसर को मुख्य अतिथि डॉ निकेश जैन माधानी के हाथों सम्मानित किया गया।
आपको बता दें कि हाल ही में डॉ निकेश जैन माधानी को भारत सरकार की युवा मामले एवं खेल मंत्रालय युवा मामले विभाग, नेहरू युवा केन्द्र संगठन द्वारा सम्मान मिला। वहीं निकेश जैन को रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि माधानी फाइनेंस, माधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, माधानी ट्रेडिंग कंपनी, माधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।
सीसीएल का अपना पहला मुकाबला नहीं बचा पाए भारत राइजिंग के भोजपुरी दबंग्स
अभी पिछले साल के ख़िताबी मुकाबले के घाव ताजा ही थे कि सीसीएल के दसवें संस्करण से भारत राइजिंग के भोजपुरी दबंग्स के लिए पहले मुकाबले से भी अच्छी ख़बर नहीं आई है। दुबई के शारजाह में खेले जा रहे पहले मुकाबले में मनोज तिवारी के नेतृत्व में भोजपुरी दबंग्स गत चैम्पियन तेलुगु वारियर्स से यह मुकाबला 8 रनों से हार गई है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए तेलुगु वारियर्स ने अपनी पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 94 रन बनाए। जवाब में मनोज तिवारी 38 रनों (रिटार्यड हर्ट) और आदित्य ओझा की 43 रनों की उपयोगी पारियों की बदौलत भारत राइजिंग वाले भोजपुरी दबंग्स ने अपनी पहली पारी में चार विकेट के नुकसान पर 103 रन बना डाले और इस तरह से तेलुगु वारियर्स पर 9 रनों की बढ़त बना लिया था। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में बढ़त लेकर अपने इस प्रदर्शन से भोजपुरी दबंग्स का खेमा उत्साहित था क्योंकि इन्हें पहली पारी के आधार पर जो 9 रनों की बढ़त मिल गई थी, लेकिन भोजपुरी दबंग्स की यह खुशी अधिक देर तक कायम नहीं रह सकी, क्योंकि अब तेलुगु वारियर्स ने अपनी दूसरी पारी में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 118 रन बना दिया और फिर भोजपुरी दबंग्स पर दबाव बनाते हुए उनके सामने जीत के लिए 110 रनों का भारी भरकम टारगेट सेट कर दिया। 10 ओवर में 110 रनों के टारगेट के दबाव में भोजपुरी दबंग्स की शुरुआत बेहद खराब हुई। जहां भोजपुरी दबंग्स के लिए दूसरी पारी की शुरुआत में विकेट जल्दी गिर जाने के कारण ही भारी गड़बड़ हो गई। भारत राइजिंग भोजपुरी दबंग्स के दो विकेट 5 रनों के अंदर निकल जाने के बाद पारी सम्भालने में लगे आदित्य ओझा नाबाद 46 रन और असगर खान नाबाद 40 रन ने मोर्चा संभाल लिया था। लेकिन भारी टारगेट और कम ओवर के दबाव के आगे इनकी मेहनत भी बेकार गई , और भोजपुरी दबंग्स अपनी दूसरी पारी में कुल 2 विकेट के नुकसान पर 101 रन ही बना पाई , और अपना पहला मुकाबला 8 रनों से हार गई। वहीं तेलुगु वारियर्स की तरफ से आज अश्विन बाबू ने शानदार ऑल राउंडर खेल दिखाते हुए इस मैच में अर्धशतक लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गेंदबाजी करते हुए अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण दो विकेट भी चटकाए।
भारत राइजिंग के राहुल मिश्रा बताते हैं कि सीसीएल एक मात्र क्रिकेट का ऐसा संस्करण है जिसमें 20 ओवर के मैच में ही दोनों टीमो को 10-10 ओवर्स की दो इनिंग्स खेलने का मौका मिलता है। क्रिकेट का यह प्रारूप अपनेआप में बेहद रोमांचक और मनोरंजन से भरपूर रहता है जहां आप अपने फिल्मी सितारों को एक दूसरे के साथ और एक दूसरे के खिलाफ क्रिकेट के मैदान में प्रतिस्पर्धा करते हुए देखते हैं । आज भोजपुरी दबंग्स के साथ तेलुगु वारियर्स के मुकाबले में भी दो संस्कृतियों का मिलन था। जहां एक तरफ शुद्ध देशी वातावरण में रहने वाले अपनी देशज भाषा और खान पान के लिए मशहूर भारत राइजिंग वाली भोजपुरी दबंग्स की टीम थी, जिसके ऑनर भी भोजपुरी से प्रेम करने वाले कनिष्क शील, सुशील मलिक, सुशील शर्मा,और राहुल मिश्रा हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राचीन भारत की समृद्ध परम्पराओं को पुनर्जीवित करने वाली तेनालीरामन की धरती के योद्धा तेलुगु वारियर्स के रूप में आज मैदान में थे। गत साल और इस तरह से 4 बार सीसीएल का खिताब जीत चुके तेलुगु वारियर्स ने अपने पिछले साल भी ख़िताबी मुकाबले में भोजपुरी दबंग्स को हराकर ये ट्रॉफी जीते थे। दुबई में हुए इस हाई वोल्टेज सीसीएल मैच में भोजपुरी दबंग्स को चीयर करने के लिए इनकी महिला ब्रांड एम्बेसडर पाखी हेगड़े, आम्रपाली दुबे, शुभी शर्मा, नीलम गिरी, माही खान, रक्षा गुप्ता मौजूद रहीं।
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दीपक नौंगाई अकेला
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