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भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ

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गाय देश में हमेशा से ही एक संवेनदशील मुद्दा रहा है और इस पर राजनीति होती रही है। मगर जिस समाज में गाय को पूजा जाता है, उसके लिए आस्था अगर कहने भर की हो, दिल से नहीं और वहां इसके लिए कोई कानून नहीं, मन में सच्चा दर्द नहीं हो तो वह कैसा समाज ?  हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय को गौ माता भी कहा जाता है। गौ माता के पूजन के बारे में वेदशास्त्रों, धर्मग्रंथों में क्या कहा गया है। इसलिए अगर किसी के हाथों गाय की हत्या हो जाती है तो यह घोर पाप माना जाता है।  फिर आज गाय की इतनी दुर्दशा हो रही है। जिसकी हम कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। गाय को रखने वाले लोग स्वार्थी हो गए हैं जब तक गाय दूध देती है। तब तक तो लोग उसे अपने पास रखते हैं और उसके बाद उसका दूध निकाल कर सड़कों पर आवारा रूप से छोड़ देते हैं।

लेकिन देश में कहीं भी उन गायों के लिए कोई प्रवाधान नहीं है, जिन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। नतीजन वे अक्सर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाती हैं। कई बार वे पोलिथीन खा जाती हैं, जिससे गंभीर रूप से बीमार हो जाती हैं। गोशालाओं की दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। अक्सर ही गोशालाओं में भूख से गायों के मरने की खबरें आती रहती हैं। गायों की देखभाल करने के लिए बनाई गई  गोशालाओं की दुर्दशा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके चारे और स्वास्थ्य का का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। जो गाय दूध देने के काबिल नहीं रहतीं, उन्हें कुछ लोग सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी सजा का प्रावधान होना चाहिए। गाय को लावारिस सड़क पर छोड़ देना भी सही नहीं है। अगर लावारिस गाय दुर्घटना का शिकार होकर मर जाए तो उसे भी गोवध ही माना जाना चाहिए। गाय महज एक जानवर नहीं है। यह भारतीय समाज के लिए आस्था भी है। कुछ लोग गोवध करके इस आस्था पर चोट करते हैं, जो नहीं होनी चाहिए। गाय के प्रति ये दोहरी नीति समझ से परे है। बहरहाल, गोवंश बचाया ही जाना चाहिए।

भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं। क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज तथाकथित गौभगत और गाय के नाम पर लूटकर खाने वाले चाहे वो कोई भी हो लगभग गायब है। (इक्का-दुक्का को छोड़कर)  मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए। क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियां फेल रही है। एक शाम गायों के नाम पर करोड़ों रुपए लेने वाले और गायो के ठेकेदार बागङबिल्ले सब कहा छुप गए? गायों की हो रही है दुर्दशा गाय रो-रो कर पूछ रही है, कहां गए वह गौ सेवक? कहां गई वह राजनीतिक पार्टियां जो मेरे नाम पर सरकार बना ली। कहां गए हो चंदा इकट्ठा करने वाले जो मेरे नाम पर करोड़ों रुपए कमा गए? कहां आज किसान की दुर्दशा हो रही है, उसका पालतू पशु गाय मर रही है लेकिन उसके बस की बात नहीं है।

चुनावी वादों से जितना नुकसान किसान के इस पशुधन गाय का हुआ है शायद ही किसी अन्य पशु का हुआ हो। करोड़ों रुपयों के बजट भी गाय के अच्छे दिन नहीं ला सके।  गौमाता की दुर्दशा का अंदाजा गौशालाओ व सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाओं में गाय की अकाल मृत्यु से लगाया जा सकता है। आज हालात ये है कि इस मूक पशु के संरक्षण की ज़िम्मेदारी लेने को कोई सरकार कोई संगठन तैयार नही, गाय सिर्फ राजनीति के नारों मे जरूर ज़िंदा है। सरकार चाहे तो सड़को, राजमार्गो व गली मोहल्लों में भूख-प्यास व बीमारियों से मरती गायों का ज़िला स्तर पर चारागाह व सरकारी भूमि मे संरक्षण कर सकती है, जँहा गोबर व गौमूत्र से जैविक खाद व जैविक कीटनाशक बनाए जा सकते हैं। सरकार गौमूत्र, वर्मी कम्पोस्ट व वर्मीवाश का उत्पादन कर सस्ती दरों पर किसानों को उपलब्ध करा सकती है।

गोबर व गौमूत्र मे सभी प्रकार के 16 पोषक तत्व, एमिनो एसिड्स, कार्बनिक पदार्थ, ह्यूमस व पर्याप्त नाईट्रोजन पाई जाती है जो कि फसलों के उत्पादन के लिए किसी वरदान से कम नही है। जीवामृत, घन जीवामृत, व अन्य जैविक तरल खाद भी गोबर और गौमूत्र से ही तैयार होती है। अगर सरकार इस व्यवस्था पर ध्यान दे और कार्य करे तो ये उत्पाद लघु व सीमांत किसानों को सस्ती दर पर सरकारी किसान केंद्रों व केवीके से उपलब्ध कराया जा सकता है। इस व्यवस्था से जैविक खेती के रकबे को भी बढ़ाया जा सकता है जिसके लिए राज्य व केंद्र सरकार वर्षो से प्रयासरत है । इससे रासायनिक दवा, कीटनाशक ओर रासायनिक खाद के खर्चे को भी कम किया जा सकता है और किसानो को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के साथ साथ आत्महत्या से भी बचाया जा सकता है ।

सरकारों ने सिर्फ कागजों में लीपापोती की धरातल पर कुछ नहीं किया। सब कुछ भगवान भरोसे है। गाय के नाम पर राजनीति चलती रहती है मगर जमीनी हकीकत यह है कि अक्सर मुद्दे उठाए जाते हैं लेकिन उसकी समस्याओं का निराकरण कभी नहीं होता। अगर देश में जिसने भी आज तक गाय नाम से कुछ न कुछ कमाया है, वो एक-एक गाय बचाने का जिम्मा ले तो गाय इस दुर्दशा से बच सकती है।

‘पहली बारिश में’ भीगे आसिम रियाज़ और निशा गुरगैन, आत्मा म्यूजिक से रिलीज हुआ वीडियो 

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मुम्बई। बिग बॉस फेम आसिम रियाज़ और सोशल मीडिया स्टार निशा गुरगैन की जोड़ी वाला नया गाना ‘पहली बारिश में’ आत्मा म्युज़िक द्वारा रिलीज कर दिया गया है जिसे श्रोताओं और दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह दिलों में हलचल मचा देने वाला सांग है और सभी युवाओं को यह गाना आकर्षित कर रहा है।
इस खूबसूरत गीत के निर्माता वसीम कुरैशी ने आसिम और निशा की तारीफ करते हुए बताया कि आसिम रियाज आज लाखों दिलों की धड़कन हैं और निशा सोशल मीडिया स्टार का दर्जा रखती हैं। मगर काम के प्रति दोनों बेहद संजीदा और काफी प्रोफेशनल हैं। इनकी बहुत ही प्यारी सी बॉन्डिंग सच्चे प्यार और इसकी आत्मा को पेश करती है। गाना बेशक आपको रोमांस के गहरे समंदर में डुबो देगा।
आत्मा म्युज़िक का वीडियो “पहली बारिश में” को एक स्टोरी और नरेशन के अनुसार शूट किया गया है।


सांग में एक प्रेमिका अपने प्रेमी की एक झलक पाने के लिए बेचैन है।
बता दें कि आत्मा म्यूजिक कुरैशी प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मुम्बई का एक पार्ट है और यह नई प्रतिभाओं को प्रोमोट करने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है। आत्मा म्युज़िक सबसे तेजी से बढ़ने वाला म्यूजिक लेबल है। इसका नया रोमांटिक म्युज़िक वीडियो ‘पहली बारिश में’ पहली बारिश के जादू और इसके साथ आने वाले प्यार और रोमांस के जादू को पेश करता है। गाने में सुंदर हिल स्टेशन और हरियाली के बैकग्राउंड में आसिम रियाज़ और निशा गुरगैन के बीच पनपते प्यार को दिखाया गया है।
काशी कश्यप ने इस गीत को कम्पोज़ किया है और भानु पंडित और मुकेश मिश्रा ने इसके बोल लिखे हैं। इस गीत का संगीत भानु पंडित ने दिया है।
गाने में आसिम रियाज़ और निशा की केमिस्ट्री का जादू दिख रहा है, जिसे नदीम अख्तर द्वारा निर्देशित किया गया है।
इस गीत को सुमित भल्ला और अनिता भट्ट ने दिल की गहराई से गाया है और इस का मेलोडियस संगीत दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
‘पहली बारिश में’ अलबम आत्मा म्युज़िक की प्रस्तुति है, और वसीम कुरैशी व गितेश चंद्राकर द्वारा निर्मित है। इसके सह-निर्माता अयूब कुरैशी, अख्तर खान, सचिन बेलदार, विकास तिवारी, डॉ. अनिल उपाध्याय, रवि प्रियांशु, अज़ान कुरैशी, मुहाफ़िज़ कुरैशी हैं। वहीं करण रमानी कंपनी के सीओओ हैं।

गौ सेवा करने वाले पर संकट, अफसरों पर बिफरे बजरंगी

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इंदौर। सड़कों पर नजर आने लगे आवारा पशुओं को लेकर नगर निगम सख्त हो गया है। बाड़े तोडऩे की कार्रवाई शुरू कर दी गई, जिस पर बजरंगी तिलमिला गए हैं। चेतावनी दी है कि जो दूध का व्यवसाय कर रहा है और सड़क पर गाय छोड़ रहा है, उस पर तोडफ़ोड़ करें, हमें आपत्ति नहीं पर घर में गाय पालकर सेवा करने वालों पर कार्रवाई की तो हम सड़क पर उतर आएंगे।
कल नगर निगम ने ह्मित नगर और कंडिलपुरा पर दो बाड़ों को तोडऩे की कार्रवाई की। इसके अलावा नगर निगम आयु€त प्रतिभा पाल ने कोंदवाड़ा सहित अन्य अधीनस्थों को बोल दिया है कि शहर में फिर से पशुओं के बाड़े तैयार हो रहे हैं। सड़कों पर आवारा पशु नजर आ रहे हैं। जांच कर सूची बनाएं और कार्रवाई करें। उसके बाद में निगम का अमला फिर से सक्रिय हो गया और जांच कर रहा है।
ऐसे घरों में भी पहुंच गया है, जहां पर हिंदू मान्यताओं के हिसाब से गाय की सेवा करने के लिए उसे पाला गया। उनको भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। ये बात बजरंगियों तक पहुंची। इस पर बजरंग दल के विभाग संयोजक तन्नू शर्मा व राजेश ङ्क्षबजवे ने निगम को चेतावनी दी है और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से आग्रह किया है कि वे निगम कर्मचारियों पर अंकुश लगाएं, जो निगम की छवि भी खराब कर रहे हैं। दल गौ सेवकों के समर्थन में खड़ा रहेगा। गौरतलब है कि पूर्व में भी कई बार बजरंग दल के कार्यकर्ता गौ रक्षा के मामले में खुलकर सामने आ चुके है। उस दौरान विवाद की स्थिति बन गई थी।

देश और समाज के लिए कृषि क्षेत्र का सशक्तिकरण अहम – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

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New Delhi  – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज नई दिल्ली में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) पर परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर, श्री तोमर ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि इससे दूसरे क्षेत्रों को भी मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल कृषि क्षेत्र में विकास के लिए आदर्श मॉडल हो सकता है और पीपीपी परियोजनाओं में आय बढ़ाकर किसानों को लाभान्वित करने पर जोर दिया जाना चाहिए।
श्री तोमर ने कहा कि देश और समाज के लिए कृषि क्षेत्र का सशक्तिकरण खासा अहम है। उन्होंने कहा, “यदि सरकार अकेले ही सभी कार्य करे तो यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है; बेहतर काम सिर्फ जन भागीदारी के साथ ही किए जा सकते हैं। किसी भी क्षेत्र की प्रगति के लिए, सरकार सभी को अच्छा सहयोग दे सकती है।”
श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पिछले आठ वर्षों के कार्यकाल में 1,500 से अधिक निरर्थक कानूनों को समाप्त कर व्यवस्था को सरल बनाया है, जिससे आम आदमी का जीवन आसान हो गया है। उन्होंने कहा, “आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर और पीएम मोदी के आदर्शों से प्रेरित होकर, हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि फिक्की जैसे संगठन देश के हित में और क्या कर सकते हैं? अगर सोच और नजरिया बदलेगा तो बदलाव आएगा। हर किसी का लक्ष्य सही है, लेकिन ऐसे विचारों को अमल में लाना जरूरी है। पीपीपी एक आदर्श मॉडल है जो सभी को लाभान्वित करता है, संबंधित क्षेत्र में प्रगति होती है और देश का समग्र विकास होता है।”
श्री तोमर ने कहा कि व्यापार और उद्योग क्षेत्र मजबूत और संगठित है, उनके पास हर साधन है, वे कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन दे सकते हैं। इस दिशा में सरकार एक लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड, 10,000 कृषक उत्पाद संगठनों (एफपीओ) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी विभिन्न योजनाके माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। सरकार कृषक संगठन बनाने, उन्हें सशक्त बनाने, नई तकनीक उपलब्ध कराने, लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने और वैश्विक मानकों के अनुरूप उपज की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार की पहलों के द्वारा किसानों को प्रोत्साहन दिया गया है और नतीजे अब आपके सामने हैं। यह संतोष की बात है कि पीएम की किसानों की आय दोगुनी करने की प्रतिबद्धता अब उन तक पहुंच चुकी है और फिक्की जैसे संगठन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं।”
श्री तोमर ने उम्मीद व्यक्त की कि कृषि क्षेत्र में वृद्धि हासिल करने के लिए हर कोई प्रयास करेगा और किसानों के लिए इसे ज्यादा लाभकारी बनाएगा। उन्होंने कहा, “यदि कृषि मजबूत है, तो देश मुश्किल हालात में भी खड़ा रह सकता है।”
इस अवसर पर बोलते हुए, सचिव (ए एंड एफडब्ल्यू) श्री मनोज आहूजा ने कहा कि सरकार को कृषि क्षेत्र में निवेश को सुविधाजनक बनाने में एक उत्प्रेरक भूमिका निभानी चाहिए। निजी क्षेत्र और गैर सरकारी संगठनों को एक साथ आना चाहिए और कृषि क्षेत्र की परियोजनाओं में सरकार के साथ साझेदारी करनी चाहिए, जिससे उनका प्रभाव खासा बढ़ जाएगा।
फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री शुभ्रकांत पांडा ने इस बात पर भरोसा जताया कि आज शुरू हुई कृषि में पीपीपी के लिए पीएमयू पहल से निजी क्षेत्र के निवेश के दोहन और सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के उपयोग से कृषि में बड़े स्तर की पीपीपी परियोजनाओं में तेजी आएगी।

इस अवसर पर अपर सचिव (ए एंड एफडब्ल्यू) श्री अभिलक्ष लिखी और डीए एंड एफडब्ल्यू एवं फिक्की के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही राज्यों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी ऑनलाइन शामिल हुए।
कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए कृषि में निवेश और कृषि में सकल पूंजी निर्माण में बढ़ोतरी अहम है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की विभिन्न पहलों के रूप में सार्वजनिक निवेश के संयोजन के कृषि क्षेत्र में गुणक प्रभाव हो सकते हैं। सरकार पैदावार में सुधार, हानि को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में पीपीपी पहल को प्रोत्साहित करने के लिए उत्सुक है। पीपीपी पहल से कृषि में निजी पूंजी में बढ़ोतरी होगी, सार्वजनिक निवेश का लाभ मिलेगा और इस क्षेत्र में गतिशील और मूल्य वर्धित विकास की साझा दृष्टि के साथ केंद्र और राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र और किसान एक साथ आएंगे। पीपीपी पहल से किसानों को लाभ पहुंचाने और उनके प्रभाव में सुधार करने के लिए विभिन्न योजनाओं को एक साथ लाया जाएगा।
इस पीपीपी पहल का मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त मूल्य तैयार करके छोटे किसानों की आय बढ़ाना है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद जैसे इनपुट, बाजार से जोड़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और मूल्य वर्धन शामिल है। पीपीपी पहलों से कृषि प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, जलवायु अनुकूल फसलों में अनुसंधान को बढ़ावा देने, कृषि और ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और कृषि निर्यात में वृद्धि की भी उम्मीद है। इसका एक विशेष उद्देश्य राज्यों को उनके संबंधित कृषि-जलवायु क्षेत्रों की पूरी क्षमता और कृषि-उत्पादों की व्यापक विविधता का दोहन करने और उत्पादकों को घरेलू और निर्यात बाजारों के साथ बेहतर एकीकृत करने में सहायता करना है।
इस पृष्ठभूमि में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और फिक्की ने कृषि में पीपीपी पहलों के विकास की इस संयुक्त पहल का ऐलान किया है।

 

रायगढ़-संबलपुरी गौठान से गायों की शिफ्टिंग का मामला गरमाया

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रायगढ़, संबलपुरी गौठान से बुधवार की रात तकरीबन 350 गायों को लैलूंगा शिफ्ट करने का मामला गरमाता जा रहा है क्योंकि गौठान संचालन समिति का यह आरोप है कि उन्हें बिना सूचना दिए अचानक यह कार्य किया गया ।इसमें से 140 से160 गाय वापस आ चुकी है ,लेकिन बाकी की गायें अब तक लैलूंगा गौठान में पहुंची ही नहीं है तो आख़िर बाकी की गायें गई कहाँ?
वहीं नगर निगम कर्मचारी मुन्ना ओझा व प्रदीप तिवारी का कहना है कि कलेक्टर रानू साहू,निगम कमिश्नर संबित मिश्रा और लैलूंगा सीईओ के आदेश से यह शिफ्टिंग की गई है।इसलिए समिति संचालक शिव कुमार साहू द्वारा कलेक्टर,जिला प्रशासन, नगर निगम आयुक्त,चक्रधर थाना,पुलिस अधीक्षक, पशु विभाग को इसकी जनकारी पत्र और मौखिक रूप से दिया गया है। गोठान का संचालन नगर निगम रायगढ़ द्वारा गौ माता मित्र समिति को दिया गया है। इसमें शासकीय और निगम के तरफ किसी प्रकार की आर्थिक अनुदान तक नहीं दी जा रही है और गो मूत्र तक की खरीददारी नहीं की जा रही है। लिहाज़ा समिति द्वारा गायों के चारे की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पा रही है। निगम की मानें तो संबलपुरी गौठान में व्यवस्था ही नहीं है इसलिए गायों को शिफ्ट किया गया है।
इस संबंध में चक्रधरनगर थाने पहुंचे गौ समिति के सदस्यों द्वारा की गई लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। थाना प्रभारी का यह कहना है कि यह शिफ्टिंग सहमति पत्र,अधिकारियों के निर्देश पर की गई है।लिहाज़ा इस कार्य पर एफआईआर नहीं की जा सकती।
गुरुवार को नगर निगम में गौ सेवा से जुड़े लोग,जनप्रतिनिधि व गौ माता मित्र समिति की अध्यक्ष पूनम द्विवेदी अपने साथियों के साथ पहुंचे। जहां महापौर जानकी काट्जू से आधी रात बिना सूचना दिए गायों को शिफ्ट करने की वजह और निकाली गई सभी गायों की जानकारी मांगी गई ।कहा गया कि जल्द ही सभी गायों वर्तमान स्थिति के बारे में उन्हें लिखित में जवाब दिया जाए। जिस पर महापौर द्वारा आश्वस्त किया गया कि उन्हें जल्द ही इस बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस संबंध में महापौर जानकी काट्जू ने हिंदुस्थान समाचार को बताया कि संचालन समिति द्वारा कई बार पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था में कमी की बात की गई है, लिहाज़ा संबलपुरी गौठान से सभी गायों को लैलूंगा में शिफ्ट किया गया है।अगर गायें लैलूंगा नहीं पहुंची हैं तो इस संबंध में सारी जानकारी प्राप्त कर सूचित किया जाएगा और यह भी पता लगाया जाएगा कि मामला पशु तस्करी से जुड़ा हुआ तो नहीं।
बहरहाल ये जवाब फ़िलहाल किसी के पास नहीं है कि आखिर वो गायें गई कहाँ?यदि उनको लैलूंगा शिफ्ट किया जा रहा था तो 150 गायें जंगलों से वापस कैसे आ गईं?निगम कमिश्नर के पास भी इस संबंध में पूछे गये सवालों का कोई जवाब नहीं था। विगत माह भी 46 गायों के शिफ्टिंग की जानकारी सामने आ रही है जिनका अब तक कोई अता -पता नहीं मिल सका है।

गाय को दूध देने तक गौशाला में रखते हैं एक बार जब वह दूध देना बंद कर देती है, तो वे उसे सड़कों पर छोड़ देते हैं -गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत

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Controversial Statement of Gujarat Governor Acharya Devvrat: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के हिंदुओं को ढोंगी बताने वाले बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने यह बयान बुधवार को नर्मदा जिले के पोइचा गांव में ‘जैविक खेती’ के विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए दिया. राज्य के दो प्रमुख समाचार पत्रों ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत को बयान का उल्लेख किया. जिसमें उन्होंने कहा, लोग ‘जय गौ माता’ का जाप करते हैं. वे गाय को दूध देने तक गौशाला में रखते हैं. एक बार जब वह दूध देना बंद कर देती है, तो वे उसे सड़कों पर छोड़ देते हैं. इसलिए मैं कहता हूं कि हिंदू नंबर 1 के ढोंगी हैं. हिंदू धर्म और गाय आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन यहां लोग स्वार्थ के लिए ‘जय गौ माता’ का जाप करते हैं.
जैविक खेती अपनाकर पशुओं दे सकते हैं जीवन
उन्होंने आगे कहा, लोग भगवान से प्रार्थना करने के लिए मंदिरों, मस्जिदों, चर्च, गुरुद्वारा जाते हैं, ताकि भगवान उन्हें आशीर्वाद दें. मैं कहता हूं कि अगर आप जैविक खेती की ओर बढ़ते हैं, तो भगवान आपसे ऐसे ही प्रसन्न हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि मैं वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ कह रहा हूं कि रासायनिक खाद के प्रयोग से आप पशुओं को मार रहे हैं. यदि आप जैविक खेती अपनाते हैं, तो इससे आप पशुओं को जीवन देंगे.
प्राकृतिक कृषि में पीएचडी कार्यक्रम की शुरुआत
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रविवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबिलिटी (IIS) में गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा प्राकृतिक कृषि में पीएचडी कार्यक्रम की शुरुआत की। गुजरात विश्वविद्यालय में बीएससी, एमएससी, पीएचडी के अलावा अब प्राकृतिक कृषि में भी पढ़ाई की जा सकती है. प्राकृतिक खेती में पीएचडी कार्यक्रम किसी राज्य विश्वविद्यालय में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम होगा। इसमें पर्यावरण प्रबंधन, नवाचार, उद्यमिता, कृषि उद्यमिता, कृषि व्यवसाय, मूल्य श्रृंखला प्रबंधन शामिल है.

लंपी संक्रमण से लाखों की संख्या में दम तोड़ रही गौ माताओं की रक्षा करने में असफल गहलोत सरकार

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धौलपुर,  । भारतीय जनता पार्टी धौलपुर द्वारा राजस्थान में गौ माता पर कहर बरपा रहे लंपी संक्रमण से लाखों की संख्या में दम तोड़ रही गौ माताओं की रक्षा करने में असफल गहलोत सरकार को जागरूक करने के लिए जिला अध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा के नेतृत्व में गुरुवार को जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया। मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में राज्य सरकार पर लंपी बीमारी के प्रति घोर उदासीनता बरतने के आरोप लगाए गए हैं।
भाजपा जिला अध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा ने कहा कि लंपी संक्रमण को लेकर राजस्थान की कांग्रेस सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। सरकार की संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है।सरकार की लापरवाही के चलते लाखों की संख्या में गौ माताएं दम तोड़ रही हैं। राजस्थान में स्लॉटर हाउस जैसे हालात और दृश्य बने हुए हैं। धौलपुर जिला भी संक्रमण की चपेट से अछूता नहीं है।
ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुरूप धौलपुर में भी 361 गाय संक्रमण का शिकार हुई हैं। हम राजस्थान की सोई हुई संवेदनहीन सरकार हो ज्ञापन के माध्यम से जागृत करना चाहते हैं कि जल्द से जल्द गौ माता की रक्षा के लिए टीकाकरण अभियान तेज किया जाए तथा पशु चिकित्सकों की कमी को पूरा किया जाए। साथ ही जिन गरीब किसानों की गौ माता की इस संक्रमण से दर्दनाक मौत हुई हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इस मौके पर भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य विशंभर दयाल शर्मा, पूर्व विधायक एवं जिला महामंत्री सुखराम कोली,नेता प्रतिपक्ष कुक्कू शर्मा, जिला उपाध्यक्ष राजीव रस्तोगी, महामंत्री सत्येन्द्र पराशर, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष भूपेंद्र घुरैया, जिला मीडिया प्रभारी मुकेश सक्सेना एवं आईटी प्रभारी हरेंद्र राव सहित अन्य पार्टी कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

बरेली: 83 गौ-तस्करों के विरूद्ध गुण्डा एक्ट की कार्रवाई की गई

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बरेली,  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एवं पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के कुशल पर्यवेक्षण में ग्रामीण क्षेत्र के थानों पर पिछले 08 माह में 30 गौ-तस्करों के विरूद्ध गैंगस्टर एक्ट के अन्तर्गत 07 अभियोग पंजीकृत किए गए। 14 गौ-तस्करों की हिस्ट्रीशीट खोली गई है, 83 गौ-तस्करों के विरूद्ध गुण्डा एक्ट की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा 219 गौ-तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

एक पशु तस्कर रहीश पुत्र सददीक नि० कुवरगढा कस्बा सेथल थाना हाफिजगंज बरेली को पशु-तस्कर माफिया घोषित कराया गया है। जिसकी 30 लाख की सम्पत्ति गैंगस्टर एक्ट के अन्तर्गत जब्त कराने की कार्रवाई की गई है। बुधवार को गौ-तस्करों के विरूद्ध चलाये गये अभियान में 10 गौ-तस्करों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें से 07 थाना बहेडी, 01 थाना देवरनिया एवं 02 थाना भोजीपुरा के द्वारा हाल ही में घटित गौकशी की घटनाओं में संलिप्त अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी तथा केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरषोत्तम रुपाला करेंगे गऊ ग्राम महोत्सव the Festival of Cow का उद्घाटन

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मुंबई – मुंबई से प्रकाशित समाचार पत्र ”गऊ भारत भारती ” के द्वारा गऊ ग्राम महोत्सव the Festival of Cow का आयोजन गोरेगाँव पूर्व संमित्र ग्राउंड चाफेकर चौक के पास किया गया है यह ७ दिनों तक चलने वाला भव्य कार्यक्रम है जिसमें काऊ बेस इकोनॉमी , अर्थव्यवस्था (Economy) को खड़ा करने के लिए भारतीय गौवंश से उत्पन्न विभिन्न प्रकार के प्रॉडक्ट(उत्पादों ) की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इस अवसर पर विविध प्रकार के गीत- संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे ।
कार्यक्रम के आयोजक संजय अमान अनुसार – ” भारत के सभी गऊ आधारित उत्पादन को बनाने वाले,गऊ माता वैज्ञानिकता के प्रचार – प्रसार में जुड़े लोग , उन सभी के लिए यह एक साँझा मंच है जहा हम भारत वर्ष के सभी गौ भक्तों और गऊ आधारित प्रॉडक्ट बनाने वालों को आमंत्रित कर रहे हैं । साथ में भारत सरकार के पशुपालन व डेरी मंत्रालय के सभी लाभकारी योजनाओं को भी इस मंच से प्रसारित कर रहे हैं । माननीय भारत के प्रधानमंत्री के उस सपने को साकार करने हेतु भी हम स्टार्टअप , वोकल फोर लोकल को बढ़ावा देने के लिए भी हम इस कार्यक्रम में ऐसी संस्थाओं को आमंत्रित कर रहे हैं जो मागर्दर्शन करेंगे।
भारत सरकार से जुड़ी वित्तीय संस्थाए भी हैं जो स्टार्टअप , वोकल फोर लोकल जैसी योजनाओं को वित्तीय सहायता कैसे मिलेगी मागर्दर्शन करेंगी। ब्रांडिंग और मार्केटिंग ,विज्ञापन से जुडी संस्थाएं भी हैं जो गऊ आधारित प्रॉडक्ट की मांग कैसे बढ़ाया जाएं वह उस पर अपने विचार और कार्यक्रम स्थल पर जनसम्पर्क करेंगी।
कार्यक्रम के आयोजक संजय अमान ने आगे बताया कि – ” इस कार्यक्रम में आमंत्रित गऊ वैज्ञानिक , गऊ एक्सपर्ट , कृषि वैज्ञानिक , अपने अपने विचार रखेंगे जो सुबह के समय सेमीनार के माध्यम से होगा। सेमीनार के माध्यम से भारतीय गौवंश पर संशोधन , जैविक खेती , मिट्टी की उर्वरता इत्यादि विषयों पर परिचर्चा भी शामिल है। कार्यक्रम में युवा को जोड़ने के लिए स्कूल , कॉलेज के छात्रों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहभागिता करवाई जा रही है जैसे निबंध , कला , प्रतियोगिता इत्यादि।

ज्ञात हो कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन दिनाँक १२ अक्टूबर को महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी और केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरषोत्तम रुपाला जी करेंगे। अन्य आमंत्रित अतिथियों में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फंडवीस ,मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ , उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा , और अन्य महानुभाव को आंमत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम के आयोजन में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग , जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार का भी मार्गदर्शन प्राप्त है।
इस कार्यक्रम के आयोजन समिति में मुख्यतः रामकुमार पाल ,संतोष सहाने, ज्ञानमूर्ति शर्मा , कपिल कियावत ,विनोद कोठारी अजय यादव ,राजेश मेहता,विशाल भगत प्रमुख है। कार्यक्रम के संरक्षक विजय खुराना , चिराग गुप्ता , महेंद्र संगोई , अमरजीत मिश्र , अजय कौल , आरयू सिंह है।जबकि आयोजन के प्रमुख सलाहकार संजय बलोदी ”प्रखर द्वारा मंच संचालन किया जाएगा .

उद्धव ठाकरे को जेलर ने नहीं दी संजय राऊत से मिलने की अनुमति

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मुंबई, 7 सितंबर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को जेल में बंद राज्यसभा के सदस्य संजय राऊत से मिलने की अनुमति आर्थर रोड जेल प्रशासन ने नहीं दी। जेल प्रशासन ने उद्धव ठाकरे को इस संबंध में कोर्ट से अनुमति लेने के लिए कहा है। इससे पहले जेल प्रशासन अन्य शिवसेना नेताओं को संजय राऊत से मिलने नहीं दिया था।
शिवसेना सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे आर्थर रोड में जाकर शिवसेना नेता संजय राऊत से मुलाकात करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने शिवसेना की ओर से आर्थर रोड जेल प्रशासन को पत्र भेजा था। बुधवार को आर्थर रोड जेल प्रशासन ने उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर कहा कि जेल में कैदियों को सिर्फ उनके रिश्तेदारों से तय समय में मिलने की अनुमति दी जाती है। रिश्तेदारों से अतिरिक्त अगर कोई किसी भी कैदी से मिलना चाहता है तो उसे कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ती है। जेल प्रशासन ने जेल नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे को कोर्ट में इस बाबत अनुमति मांगनी चाहिए।
दरअसल संजय राऊत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोरेगांव में पत्राचाल घोटाला मामले में मनी लॉड्रिंग के तहत गिरफ्तार किया है। इस मामले में राऊत इस समय 19 सितंबर तक न्यायिक कस्टडी में हैं और उन्हें मुंबई के आर्थर रोड जेल में रखा गया है। संजय राऊत से मिलने का प्रयास इससे पहले शिवसेना के सांसदों ने किया था, जिसे जेल प्रशासन नामंजूर कर चुका है।