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सड़कों पर पाए जाने वाले पशुओं को मनरेगा में बनी गौ-शालाओं में रखें : स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि

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गौ-संवर्द्धन बोर्ड ने की लम्पी की जिलेवार समीक्षा
भोपाल, 29 सितंबर । मध्यप्रदेश गौ-संवर्द्धन बोर्ड कार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा कि मनरेगा के वित्तीय सहयोग से जिन गौ-शालाओं का संचालन प्रारंभ हो गया है, उनका पंजीयन करवाएँ। स्थानीय निकायों के अधिकारी सड़कों पर बेसहारा भटक रहे गौ-वंश को इन गौ-शालाओं में शिफ्ट कर देखभाल करें। ऐसे गौ-वंश के लम्पी के चपेट में आने की संभावना अधिक है।
स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने यह निर्देश गुरुवार को बोर्ड की कार्य परिषद की बैठक में दिये। उन्होंने गौ-वंश संरक्षण एवं गौ-शालाओं की वर्तमान स्थिति और लम्पी स्किन डिसीज की रोकथाम के लिये प्रदेश में गौ-शालाओं में चिकित्सकीय कार्यों की समीक्षा की। बैठक में लम्पी की जिलेवार समीक्षा करते हुए स्थानीय आवश्यकता के अनुसार रोकथाम के उपायों की रणनीति तैयार की गई।
संचालक डॉ. आरके मेहिया ने बताया कि पड़ोसी राज्यों में उद्भेद के साथ ही मध्यप्रदेश में रोकथाम के सभी उपाय शुरू कर दिये गये थे, जिससे स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। गौ-संवर्द्धन बोर्ड ने 17 जिलों में गौ-वंश के प्राथमिक उपचार और टीकाकरण के लिये एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की। सदस्यों ने अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित गौ-शालाओं में अधो-संरचनागत निर्माण कार्यों के लिये आर्थिक सहायता दिये जाने की भी अनुशंसा की।
बैठक में पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के प्रबंध संचालक डॉ. एच.एस. भदौरिया सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन, किसान-कल्याण एवं कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
मुकेश / डा. मयंक

Cow Economy of India – Jharkhand – गौ-मूत्र से आप कैसे कमा सकते हैं पैसा, झारखंड की महिलाओं का देखिए स्टार्टअप

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कैरो (लोहरदगा), [शंभू प्रसाद सोनी]। Jharkhand News झारखंड के लोहरदगा में गौ-मूत्र के कमाल से किसान मालामाल हो रहे हैं। किसानों को रासायनिक खाद में होने वाले खर्च और फसलों में कीटनाशक के छिड़काव में होने वाले महंगे खर्च से मुक्ति मिल गई है। ऐसा कैरो प्रखंड की महिलाओं द्वारा गौमूत्र से तैयार किए जा रहे खाद व कीटनाशक के कारण हुआ है। काफी संख्या में किसान अपने खेतों और फसलों के लिए इसे उपयोग में ला रहे हैं।
लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड में महिलाएं गौमूत्र से औषधीय मटका खाद व कीटनाशक तैयार कर रही हैं। जिसे क्षेत्र के किसान उनके घर से ही खरीद लेते हैं। महिलाएं घर बैठे ही महीने में 5-6 हजार की आमदनी कर रही हैं। इस कार्य को कैरो के उतका गांव निवासी छेनवा उरांव व हीरामनी उरांव, खंडा गांव में जितनी उरांव, डूमरटोली में संगीता उरांव तथा नगड़ा धुरिया टोली में संध्या उरांव कर रही हैं।

खाद और कीटनाशक के निर्माण में क्या-क्या किया जाता है उपयोग 

औषधीय मटका खाद को बनाने में 10 लीटर गौमूत्र, एक किलोग्राम गोबर, 200 ग्राम गुड़, आधा-आधा किलोग्राम नीम, करंज व सिंदुवार का पत्ता का इस्तेमाल किया जाता है। महिलाएं बताती हैं कि इस खाद व कीटनाशक से फसल को काफी लाभ मिलता है। क्षेत्र के किसान महिलाओं के घर से औषधीय मटका खाद व कीटनाशक को खरीद कर ले जाते हैं। इस कार्य से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। औषधीय खाद व कीटनाशक का खेतों में इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है, इसके अलावे रासायनिक खादों का उपयोग कम हो रहा है।

महिलाएं कैसे बनाती हैं कीटनाशक

कैरो प्रखंड के चार गांवों में एलजीएसएस के सहयोग से महिलाएं समूह बनाकर औषधीय खाद व कीटनाशक तैयार कर रही हैं। प्रखंड के उतका, डूमरटोली, नगड़ा व खंडा गांव में खाद बनाया जाता है। इसे बनाने की विधि काफी आसान है। दस लीटर गौमूत्र में एक किलोग्राम गोबर, दो सौ ग्राम गुड़ व आधा-आधा किलोग्राम करंज, सिंदुवार व नीम के पत्ते मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। सभी सामग्रियों को मिलाकर इसे एक समय सीमा तक छोड़ दिया जाता है। जब कीटनाशक तैयार हो जाता है तो इसे किसान खरीद कर ले जाते हैं।

महिलाओं को महीने में 5-6 हजार की हो रही है आमदनी

कैरो प्रखंड के विभिन्न गांवों में दर्जन भर से अधिक महिलाएं औषधीय खाद व कीटनाशक तैयार कर रही हैं। जिसे किसान खरीद कर अपने खेतों में डालते हैं। इस कीटनाशक से फसलों में कीट-पतंग नहीं लगते हैं। इसे तैयार करने का काफी आसान तरीका है। कैरो के उतका, खंडा, डूमरटोली व नगड़ा गांव में दर्जन भर से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि खाद व कीटनाशक बेचकर महीने में 5-6 हजार की आमदनी हो जाती है। हालांकि अभी बहुत किसान इससे अनभिज्ञ हैं, उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि इसका उपयोग करें।

जैविक खेती पर भी किसानों को प्रेरित कर रही हैं महिलाएं

लोहरदगा जिला कृषि पदाधिकारी शिवपूजन राम का कहना है कि कैरो प्रखंड के किसानों को महिलाएं जैविक खेती करने के लिए भी प्रेरित करने का कार्य कर रही हैं। औषधीय मटका खाद व कीटनाशक खरीदने वाले किसानों को महिलाएं जैविक खेती करने के तरीकों को बताती हैं। जैविक खेती में धान, मकई, मडुवा सहित अन्य फसल किसान कर सकते हैं।
महिलाएं किसानों को बताती हैं कि जैविक खेती करने से फसलों को कीड़ा लगने का खतरा नहीं रहता है। साथ ही जैविक खेती की उपज को खाने से किसी भी प्रकार की शरीर में हानि नहीं होती है। जैविक खेती से फसलों का उपज भी बेहतर होता है। रासायनिक खेती से वर्तमान में कई बीमारियों की चपेट में लोग पड़ रहे हैं।
जैविक खेती पर कृषि विभाग जोर दे रही है। अगर महिलाएं इस प्रकार की कार्य कर रहीं तो काफी सराहनीय है। आने वाले भविष्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ वायु प्रदूषण में भी नियंत्रण होगा। रासायनिक कीटनाशक और खाद का प्रयोग करने से बीमारियां काफी बढ़ रही हैं।

 

Edited By: Sanjay Kumar ( साभार )

बाल विवाह’ रोकने के लिए कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन ने स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं का किया सम्‍मेलन

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मुंबई। महाराष्‍ट्र एक ऐसा राज्‍य, जिसकी राजधानी मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। ये वही मुंबई है, जिसे सपने पूरे करने वाला शहर कहा जाता है। इन सबके बाद भी महाराष्‍ट्र में बाल विवाह की कुरीति प्रचलन में है। भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार महाराष्‍ट्र में 11,60,655 लोगों का बाल विवाह हुआ है। यह पूरे देश के बाल विवाह का करीब 10 प्रतिशत है। बाल विवाह के मामले में राज्‍य की स्थिति काफी खराब है। बाल विवाह के मामलों में महाराष्‍ट्र का देशभर के 29 राज्‍यों में चौथा स्‍थान है। यह दिखाता है कि राज्‍य में ‘बाल विवाह’ की समस्‍या कितनी विकराल है।
नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा स्‍थापित कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन(केएससीएफ) द्वारा यहां आयोजित ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान में जुटी स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं ने महाराष्‍ट्र की इस स्थिति पर चिंता जाहिर की और सरकार से अपील की कि ‘बाल विवाह’ रोकने के लिए कानून का सख्‍ती से पालन करवाया जाए ताकि अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो और ‘बाल विवाह’ की सामाजिक बुराई को खत्‍म किया जा सके। इस संबंध में केएससीएफ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के साथ मिलकर मुंबई में एक सम्‍मेलन का आयोजन किया। इसमें ‘बाल विवाह’ के पूर्ण खात्‍मे को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।
राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण-5 के ताजा आंकड़े भी साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तस्‍दीक करते हैं। इसके अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिनका बाल विवाह हुआ है। वहीं, राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो(एनसीआरबी) के अनुसार महाराष्‍ट्र में साल 2019 में 20, साल 2020 में 50 और साल 2021 में 82 बाल विवाह के मामले दर्ज किए गए। इससे साफ है कि ‘बाल विवाह’ जैसी सामाजिक बुराई के प्रति लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं। सम्‍मेलन में इस स्थिति पर चिंता जाहिर की गई। साथ ही इस अवसर पर जनता, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से बाल विवाह के मामलों में गंभीरता बरतने व सख्‍त से सख्‍त कदम उठाने की अपील की गई। इस बात पर सहमति जताई गई कि सख्‍त कानूनी कार्रवाई से ही बाल विवाह को रोका जा सकता है।
सम्‍मेलन में बाल विवाह रोकने के लिए कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें प्रमुख रूप से बाल विवाह के मामले में अनिवार्य एफआईआर दर्ज करने, बाल विवाह को जुवेनाइल जस्टिस एक्‍ट और पॉक्‍सो एक्‍ट से जोड़ने पर विमर्श हुआ।
इसका मकसद कानून तोड़ने वालों को सख्‍त से सख्‍त सजा दिलाना है। साथ ही देश के हर जिले में बाल विवाह रोकने वाले अधिकारी(सीएमपीओ) की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई। इन अधिकारियों को बाल विवाह रोकने के लिए उचित प्रशिक्षण देने और उन्‍हें अभिभावकों को इसके खिलाफ प्रोत्‍साहन देने की भी बात कही गई।
इस मौके पर राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष सुसीबेन शाह, महिला एवं बाल विकास की कमिश्‍नर आर. विमला, मुंबई चाइल्‍ड वेलफेयर कमेटी के अध्‍यक्ष मिलिंद बिदवई, जिला कानूनी सेवा प्राधिकार के सचिव आरडी पाटिल केएससीएफ के सलाहकार बोर्ड के सदस्‍य योगेश दुबे और कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक राकेश सेंगर समेत अनेक गणमान्‍य हस्तियां मौजूद रहीं।
राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष सुसीबेन शाह ने कहा, ‘बाल विवाह हमारे समाज में एक परंपरा के तौर पर प्रचलित है। इसको खत्‍म करने के लिए जागरूकता का प्रसार करना होगा। साथ ही अभिभावकों को भी इस बुराई के प्रति सचेत करना होगा। सरकारी एजेंसियों व नागरिक संगठनों को भी बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।’ हाईकोर्ट जिला कानूनी सेवा प्राधिकार के सचिव आरडी पाटिल ने कहा, ‘बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जरूरी है कि कानूनों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाई जाए।’ महिला एवं बाल विकास की कमिश्‍नर आर. विमला ने बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा, ‘हम समस्‍या को जानते हैं लेकिन हमें समाधान की ओर देखना होगा। महिलाओं के संगठनों का उपयोग करना होगा, किशोरी योजना जैसी सरकारी योजनाओं का इस्‍तेमाल कर लड़कियों को सक्षम बनाना होगा। जागरूकता कार्यक्रमों में पुरुषों को भी जोड़ना होगा।’
मुंबई चाइल्‍ड वेलफेयर कमेटी के अध्‍यक्ष मिलिंद बिदवई ने कहा, ‘यह समस्‍या खासकर जनजातियों में काफी है। हमें लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना होगा और सभी बच्‍चों को स्‍कूल भेजना होगा।’ केएससीएफ के सलाहकार बोर्ड के सदस्‍य योगेश दुबे ने कहा, ‘महाराष्‍ट्र की धरती सावित्रीबाई फुले की है, जिन्‍होंने महिलाओं और उनकी शिक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। बाल विवाह के मामले में देश में दूसरा स्‍थान होना काफी चिंताजनक है। जिस तरह सभी लोग बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं, ठीक उसी तरह हमें भी मिलकर बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा।’
बाल विवाह से बच्‍चों के खराब होते जीवन पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक राकेश सेंगर ने कहा,  ‘बाल विवाह सामाजिक बुराई है और इसे बच्‍चों के प्रति सबसे गंभीर अपराध के रूप में ही लिया जाना चाहिए। बाल विवाह बच्‍चों के शारीरिक व मानसिक विकास को खत्‍म कर देता है। इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।’ उन्‍होंने कहा, ‘उनका संगठन कैलाश सत्‍यार्थी के नेतृत्‍व में सरकार, सुरक्षा एजेंसियों एवं नागरिक संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि राजस्‍थान को बाल विवाह मुक्‍त किया जा सके।’

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार कृषि और खाद्य प्रणालियों के समक्ष स्थिरता संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए तत्‍पर है – तोमर

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New Delhi – ( GBB) – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह बाली (इंडोनेशिया)  ने आज बाली (इंडोनेशिया) में जी-20 की बैठक में विभिन्न सत्रों में भारत का पक्ष रखते हुए उद्बोधन दिया। इस दौरान श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार कृषि और खाद्य प्रणालियों के समक्ष स्थिरता संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए तत्‍पर है और इनके समाधान के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि छोटे व सीमांत किसानों के फायदे लिए भारत सरकार कटिबद्ध है और उनके कल्याण के लिए अनेक बड़ी योजनाएं चलाई जा रही है।

जी-20 की बैठक में अनुकूल व सतत कृषि एवं खाद्य प्रणालियों का निर्माण विषय पर श्री तोमर ने कहा कि भारत किसानों को आदान, प्रौद्योगिकी व बाजारों तक उनकी पहुंच में सुधार करके वर्तमान व भावी संकटों के प्रति सक्षम बनाने के लिए कटिबद्ध है। भारत अपने किसानों की आर्थिक अनुकूलता बढ़ाने के लिए छोटे व सीमांत किसानों को समूहों में एकजुट, कृषि अवसंरचना में निवेश व दुनिया में बड़ा फसल बीमा कार्यक्रम शुरू करने, कृषि-स्टार्टअप को बढ़ावा देने और कृषि के डिजिटलीकरण को सुविधाजनक बनाने जैसी विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रहा है। भारत ने जलवायु अनुकूल कृषि परियोजना में राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार शुरू किया है, जिसका उद्देश्य जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों के कार्यान्वयन और विभिन्न फसलों की जलवायु अनुकूल किस्मों के विकास के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाना है।

श्री तोमर ने कहा कि विषम जलवायु परिस्थितियों के प्रति मिलेट की सहन-क्षमता के साथ-साथ उनके पोषण संबंधी लाभों को देखते हुए भारत मिलेट की खेती को बढ़ावा दे रहा है।

मिलेट के इन गुणों को मान्यता देते हुए संयुक्त राष्ट्र ने भारत के प्रस्ताव पर वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष घोषित किया है। उन्होंने, खाद्य विविधता प्रदान करने व कम संसाधनों में उगाए जा सकने वाले मिलेट की खपत को बढ़ावा देने की पहल के लिए सभी के समर्थन और सक्रिय भागीदारी का अनुरोध किया। श्री तोमर ने कहा कि अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भारत बड़े पैमाने पर जैविक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे रहा हैं। श्री तोमर ने कहा कि आने वाली चुनौतियों को देखते हुए यह जरूरी है कि कृषि उत्पादन निरंतर रूप से बढ़ाने, खाद्य नुकसान कम करने, वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिए सभी मिल-जुलकर काम करें, ताकि हमारे छोटे और सीमांत किसानों को पर्याप्त आय सुनिश्चित की जा सकें। हमें मिलकर पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करना होगा, उभरती प्रौद्योगिकियों और सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को मजबूत करना होगा तथा कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने के लिए एक सक्षम नीतिगत वातावरण बनाना होगा।

सभी के लिए भोजन की उपलब्धता व सस्ता भोजन सुनिश्चित करने के लिए खुले, संभावित और पारदर्शी कृषि व्यापार को बढ़ावा देना, विषयक सत्र में श्री तोमर ने कहा कि कृषि व्यापार में भारत आज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एक समय था जब भारत खाद्यान्न आयातक था लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र का सतत विकास होने के कारण भारत कृषि उत्पादों के शुद्ध निर्यातक के रूप में तेजी से उभरा है और पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कृषि उत्पादों में व्यापार अधिशेष बनाए रखा है।

कोरोना महामारी से उत्पन्न लाजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 में भारत से कृषि व संबद्ध उत्पादों का निर्यात जारी रहा, जिसमें गत वर्ष की तुलना में 18% की बड़ी वृद्धि दर्ज हुई।

वैश्विक महामारी के दौरान 2021-22 में भारत का कृषि निर्यात 50.21 बिलियन अमरीकी डालर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। श्री तोमर ने कहा कि भारत की कृषि और खाद्य आपूर्ति प्रणालियों में न केवल आत्मनिर्भरता आई है, अपितु भारत का योगदान महामारी की शुरूआत से ही अन्य राष्ट्रों के बीच असाधारण रहा और भारत ने अन्य देशों को खाद्यान्न भेजकर संकट के इस समय में हरसंभव सहायता की। इस प्रकार भारत ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ महामारी के समय में हुई क्षति की पूर्ति करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया है।

श्री तोमर ने कहा कि हमें बड़े राष्ट्रों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं का समाधान भी खोजना चाहिए, जो बड़ी आबादी का भरण-पोषण करते हैं और उनकी नीतियों एवं कार्यक्रमों में भारत जैसे विकासशील देशों की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के मामले को समझना चाहिए। इसमें नीतियों में आश्वासित कीमतों पर किसानों से खाद्यान्न की खरीद, अनिश्चितता दूर करने व बिचौलियों द्वारा हेरफेर रोकने वाले पीडीएस सिस्टम के जरिये भंडारण व आपूर्ति करने, किसानों के लिए उपज बढ़ाने व मंडी में लाने और भारतीयों के लिए सस्ता भोजन तथा इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ तंत्र उपलब्ध करना शामिल हैं।

विकासशील देशों को उपकरणों, प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञों की सहायता दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें विश्व के अन्य कमजोर क्षेत्रों की खाद्य सुरक्षा में योगदान देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर होकर पर्याप्त भोजन उत्पादन करने की जानकारी हो सके।

पोषण के प्रति संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बढ़ाने, नई प्रौद्योगिकियों की शुरूआत करने, उर्वरकों के कुशल उपयोग को बढ़ाने व सतत खाद्य व पोषण सुरक्षा में निवेश के माध्यम से खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने के कार्यक्रमों से विश्व का भरण-पोषण करने वाले छोटे-सीमांत किसानों के लिए अधिक आजीविका प्रदान में सहायता मिलेगी। विश्वभर में खाद्य सुरक्षा, उपलब्धता और वहनीयता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है, जिसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कृषि व्यापार सभी देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसानों के लिए समान अवसर प्रदान करें।

ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की आजीविका में सुधार के लिए डिजिटल कृषि के माध्यम से अभिनव कृषि-उद्यमिता, विषयक सत्र को भी श्री तोमर ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य मूल्य श्रृंखला में डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में सुधार सम-सामयिक मुद्दा है। भारत में कृषि व खाद्य क्षेत्र में मोबाइल प्रौद्योगिकियों, रिमोट-सेंसिंग सेवाओं और डिस्ट्रीब्यूटेड कंप्यूटिंग के प्रसार के कारण छोटे भूमिधारकों की सूचना, आदान, बाजार, वित्त व प्रशिक्षण तक पहुंच में पहले से ही सुधार हो रहा है।

 ‘चौथी औद्योगिक क्रांति’ कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक परिणाम लाने की दिशा में अग्रसर है। ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग में कृषक परिवारों की आय में वृद्धि के लिए एक सक्षम वातावरण तैयार करने की अपार संभावनाएं हैं।

भारत किसानों की निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करने के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अपना रहा है, ताकि वे कथित जोखिमों व परिवर्तनशीलता का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम हों। भारत सुसंगत डिजिटल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की ओर अग्रसर है एवं किसानों की आय बढ़ाने व जीवन स्तर ऊंचा उठाने तथा योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के उद्देश्य से एग्रीस्टैक बनाने की प्रक्रिया में है।

उन्होंने एग्रीस्टैक को अपने उभरते स्टार्टअप- उद्यमियों व अन्य लोगों के साथ साझा करने का प्रस्ताव रखा ताकि किसानों के लिए खेती में आसानी लाने सार्वजनिक व निजी दोनों क्षेत्रों को लाभ मिले। भारत इस संबंध में दुनिया को, और खासकर विकासशील और अल्प विकसित देशों में अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है।

श्री तोमर ने किसानों की शिकायतों का निवारण करने और कृषि व योजनाओं पर उनकी भाषा में फोन पर तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए स्थापित ‘किसान कॉल सेंटर’ का उदाहरण भी दिया। साथ ही, राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) की  जानकारी दी, जो किसानों को उपज के लिए लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में सुविधा प्रदान करता है।

श्री तोमर ने समापन-सत्र में कहा कि भारत प्राचीन काल से प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने के मूल्यों की वकालत करता रहा है और व्यक्तिगत व्यवहारों को ग्‍लोबल क्‍लाइमेट एक्‍शन नरेटिव में मोर्चे पर लाने के लिए ‘मिशन लाइफ’ शुरू किया गया है। मिशन लाइफ जलवायु के आसपास के सामाजिक मानदंडों को प्रभावित करने के लिए सामाजिक नेटवर्क की सार्म्थय का लाभ उठाने की योजना बनाता है।

मिशन की योजना व्यक्तियों का वैश्विक नेटवर्क बनाने और पोषण करने की है, अर्थात् ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ (पी 3), जिनके पास पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनाने और बढ़ावा देने के लिए साझा प्रतिबद्धता होगी। पी 3 समुदाय के माध्यम से मिशन एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहता है जो पर्यावरण के अनुकूल व्यवहारों को आत्मनिर्भर बनाने और सुदृढ़ करने में सक्षम होगा।

उन्होंने कहा कि जी-20 देशों को सतत पद्धतियों के विविध क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा। हमें जी-20 देशों व दुनियाभर में खेती को आसान बनाने के लिए उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना चाहिए तथा छोटे व सीमांत किसानों, विशेष रूप से विकासशील देशों के किसानों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भाग लेने में मदद करना चाहिए।

स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर निर्मित समाधानों के साथ औपचारिक विज्ञान-आधारित ज्ञान को एकीकृत करने के प्रयास भी किए जाने चाहिए, ताकि जलवायु संबंधी जोखिमों के लिए ग्रामीण आबादी की कमजोरियों को कम किया जा सकें और सतत आय उत्पन्न की जा सकें, जिससे कि परिवार स्तर पर गरीबी को कम किया जा सके और भूखमरी की स्थिति कहीं भी नहीं हों। श्री तोमर ने कहा कि वर्तमान में भारत का अधिकांश विकास कार्यसूची के सतत विकास लक्ष्यों में प्रतिबिंबित होता है।

भारत अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए एसडीजी के स्थानीयकरण की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल नेतृत्व में देश ने पिछले 8 वर्षों में बड़ी प्रगति की है, साथ ही सभी प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे भारत आकर देश में जो सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है, उसे स्वयं देखें।

Adani Group के शेयर टूटे तो अरबपतियों की लिस्ट में चौथे स्थान पर लुढ़क गए गौतम अडानी

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File Photo

Gautam Adani Latest News: आर्थिक मंदी की चपेट में आने के संभावित खतरे से सहमे घरेलू शेयर में गिरावट का असर  अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी की दौलत पर भी पड़ा है। दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में अब वह दूसरे से चौथे स्थान पर आ गए हैं।  फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर लिस्ट में अडानी के ऊपर जेफ बेजोस, बर्नार्ड अर्नाल्ट और एलन मस्क हैं।

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट और अमेरिकी शेयर बाजारों में बुधवार को हुई उछाल से अडानी बिलेनियर लिस्ट में पिछड़ गए। बता दें बुधवार को घरेलू शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 509 अंक लुढ़ककर दो माह के निचले स्तर 56598 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 149 अंक टूटकर 17 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 16858.60 अंक पर आ गया। जबकि, अमेरिका का प्रमुख संवेदी सूचकांक डाऊ जोंस 1.88 फीसद या 548 अंक ऊपर 29683 के स्तर पर बंद हुआ।

अडानी ग्रुप के शेयर टूटे

बुधवार को अडानी ग्रुप के शेयर अडानी इंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट, अडानी पावर, अडानी विल्मर, अडानी ग्रीन गिरावट के साथ बंद हुए। इससे फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर लिस्ट में अडानी टॉप लूजर रहे। वह ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स अडानी तीसरे स्थान पर पहुंच हैं। बुधवार को टॉप 10 अरबपतियों अडानी ही एक मात्र ऐसे शख्स थे, जिनकी संपत्ति में 1.85 अरब डॉलर की कमी हुई।

गौतम अडानी टॉप लूजर 

फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर इंडेक्स में बुधवार को गौतम अडानी टॉप लूजर रहे। उनकी संपत्ति 1.4 अरब डॉलर घटकर 136.5 अरब डॉलर रह गई।  जबकि बर्नार्ड अर्नाल्ट (कुल संपत्ति 142.9  अरब डॉलर) की संपत्ति में 2.1 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और वह फिर दूसरे स्थान पर पहुंच गए। फोर्ब्स की लिस्ट में पहले नंबर पर 263.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एलन मस्क हैं। बुधवार को उन्होंने 3.4 अरब डॉलर कमाए।

‘आप आज सैनिटरी पैड मांग रही हो, कल आप कंडोम मांगोगी – एमडी हरजोत कौर

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एमडी हरजोत कौर

बिहार महिला विकास निगम की प्रबंध निर्देशिका का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। एक कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्राओं ने सैनिटरी पैड मुफ्त में उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एमडी  हरजोत कौर ने कहा, ‘आप आज सैनिटरी पैड मांग रही हो, कल आप कंडोम मांगोगी।’ वीडियो में स्कूली छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन मुफ्त में देने की मांग करते हुए देखा जा सकता है ताकि उन्हें जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़े।

एक स्कूली छात्रा ने सवाल किया, “सरकार बहुत सारा मुफ्त सामान दे रही है। क्या हमें 20-30 रुपये के सैनिटरी पैड नहीं दे सकती है?”

आईएएस अधिकारी हरजोत कौर ने लड़की के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “क्या मांगों का कोई अंत है? कल आप कहेंगे कि सरकार जींस और खूबसूरत जूते दे सकती है। जब परिवार नियोजन की बात आती है, तो आपको मुफ्त कंडोम भी चाहिए।” हरजोत कौर ने कहा, “आपको सरकार से चीजें लेने की आवश्यकता क्यों है? यह सोच गलत है।”

लड़कियों ने उनके दावों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार वोट के लिए चुनाव के दौरान बहुत कुछ करने का वादा करती है। इसपर हरजोत कारू ने कहा, “वोट मत दो। बन जाओ पाकिस्तान।”

हरजोत कौर ने बाद में एक बयान जारी कर कहा, “मैं महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के सबसे मुखर चैंपियनों में से एक के रूप में जानी जाती हूं। डब्ल्यूसीडीसी द्वारा जिन शरारती तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वे अब मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।”

विहिप दुर्गा वाहिनी मातृ शक्ति ने किया शस्त्र पूजन कार्यक्रम

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देवघर। प्रतिनिधि , शारदीय नवरात्र के अवसर पर बुधवार को विश्व हिन्दू परिषद् दुर्गा वाहिनी मातृ शक्ति जिला इकाई देवघर द्वारा जिला मातृ शक्ति प्रमुख भारती..शारदीय नवरात्र के अवसर पर बुधवार को विश्व हिन्दू परिषद् दुर्गा वाहिनी मातृ शक्ति जिला इकाई देवघर द्वारा जिला मातृ शक्ति प्रमुख भारती रानी तिवारी के अगुवाई में बीएड कॉलेज विलियम्स टाउन स्थित पूजा भवन में शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस संबंध में जिला मातृ शक्ति प्रमुख ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर ही दुर्गा वाहिनी का अवतरण हुआ है। इसलिए प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के अवसर पर शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

शस्त्र पूजन कार्यक्रम पूरे नवरात्रि तक जिले के विभिन्न पूजन स्थल पर आयोजित किए जाने का कार्यक्रम है।

इस दौरान शस्त्र और शक्ति दोनों का पूजन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया जाता है। इस अवसर पर विहिप जिला कार्याध्यक्ष डॉ. गोपाल जी शरण, जिला मंत्री बिक्रम सिंह, बजरंग दल जिला संयोजक अभिषेक मिश्रा, जिला सह मंत्री राकेश बर्णवाल, जिला गौ रक्षा प्रमुख संजय देव, शिवनाथ राव, मातृ शक्ति प्रमुख भारती रानी तिवारी, सह प्रमुख पूनम कुमारी, सुनैना, कंचन, प्रवीणा, विंदा, सुभद्रा, शुभम कश्यप सहित अन्य मातृ शक्ति और दुर्गा वाहिनी की सदस्य उपस्थित थी।

घायल पशुओं के लिए एम्बुलेंस खरीदने को अनुमति मिली

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जयपुर, 29 सितंबर । राज्य सरकार ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास (एमएलए लेड) योजना की दिशा-निर्देशिका में बदलाव करते हुए विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम से बीमार और घायल पशुओं के लिए एम्बुलेंस खरीदने को अनुमति प्रदान कर दिया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी कर यह मंजूरी प्रदान की है।
पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि जिले में बीमार एवं घायल पशुओं के लिए जिले के कोई विधायक अपने कोटे की राशि से पशु एम्बुलेंस खरीदने का प्रस्ताव सम्बन्धित जिला परिषद (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) को भेज सकेंगे। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए बताया कि इससे प्रदेशभर के पशुपालकों को लाभ मिलेगा। उन्होंने गौ वंश की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील कदम से गौवंशीय पशुओं में फैल रहे लम्पी स्किन रोग के नियंत्रण में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार गौवंशीय पशुओं को इस बीमारी से बचाने के लिए पूर्ण सजगता एवं संवेदनशीलता के साथ हर संभव प्रयास कर रही है।

हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर हजारों बेसहारा पशु घूम रहें हैं

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कुल्लू, 29 सितंबर । हिमाचल प्रदेश में आज सड़कों पर हजारों बेसहारा पशु घूम रहें हैं लेकिन सरकार आज भी बेसहारा पशुओं के लिए गंभीर नहीं हैं। अगर जल्द ही इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो भारतीय किसान संघ इस बारे सरकार का विरोध करेगा।
कुल्लू में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय किसान संघ की राष्ट्रीय महिला प्रमुख मंजू दीक्षित ने कहा कि आज किसानों का भी बेसहारा पशुओं के कारण नुकसान हो रहा है और सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा आखिर किसान क्यों भुगते। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो किसान व बेसहारा पशुओं को साथ लेकर किसान संघ आंदोलन करेगा। मंजू दीक्षित ने कहा कि प्रदेश सरकार के द्वारा बेसहारा पशुओं के लिए गो अभ्यारण व गौ सदन बनाने की भी बात कही गई। लेकिन वह बात भी आज धरातल पर नहीं दिख रही है। ऐसे में बेसहारा पशुओं के लिए जल्द से जल्द सरकार योजनाओं को लागू करें। वही देश भर के किसानों को भी आज फसल का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है उस दिशा में भी भारतीय किसान संघ लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने कहा हिमाचल प्रदेश की अगर बात करें तो यहां पर सेब का समर्थन मूल्य भी कम है। मंजू दीक्षित का कहना है कि कश्मीर में सेब का समर्थन मूल्य 65 से ₹70 प्रति किलो तक रखा गया है और बी ग्रेड के सेब को भी वहां पर अच्छे दाम मिलते है। ऐसे में हिमाचल के सेब को भी कश्मीर की तर्ज पर सेब का समर्थन मूल्य दिया जाना चाहिए। ताकि बागवानों की आर्थिकी मजबूत हो सके।
मंजू दीक्षित ने कहा कि आज के समय में फसलों की लागत बढ़ गई है और उसके बाद मंडियों में किसान को उचित समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते देश भर में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। भारतीय किसान संघ सरकार से मांग करता है कि किसानों की फसलों पर जो लागत आती है उससे अधिक मूल्य किसानों को दिया जाना चाहिए। ताकि किसान कर्ज में डूब कर आत्महत्या न करें।

‘न्यूकमर्स’ के लिए एकजुट हुए भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के 23 प्रमुख फिल्ममेकर

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बॉलीवुड में अपनी पहचान कायम करने की दिशा में संघर्षरत नवोदित प्रतिभाओं को प्रकाश में लाने के उद्देश्य से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के 23 प्रमुख फिल्ममेकर एक साथ आये हैं और संयुक्त रूप से प्रस्तावित योजनाओं के साथ शुरू की गई इस अनूठी पहल को नाम दिया है ‘न्यूकमर्स’।
राजकुमार हिरानी, ​​रोहित शेट्टी, सुकुमार, आशुतोष गोवारिकर, कबीर खान, इम्तियाज अली, गौरी शिंदे और आर बाल्की, आनंद एल राय, अनीस बज्मी, एआर मुरुगदास, अश्विनी अय्यर तिवारी और नीतीश तिवारी, राम माधवानी, अली अब्बास जफर, सिद्धार्थ आनंद, राज और डीके, अभिषेक शर्मा, मृगदीप सिंह लांबा, अमित शर्मा, जगन शक्ति, विष्णुवर्धन जैसे प्रतिष्ठित फिल्ममेकर्स की एक टीम न्यू टैलेंट को मेंटर और लॉन्च करने के लिए बनाया गया है।
फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी की चेयरपर्सन और वायकॉम 18 की सीईओ ज्योति देशपांडे के साथ मिलकर ‘न्यूकमर्स’ की परिकल्पना करने वाले निर्माता महावीर जैन ने कहा, ” हम साथ मिलकर अपना कल बनाने के लिए काम करेंगे।”
बॉलीवुड में फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी के द्वारा संचालित ‘न्यूकमर्स’ को नवोदित प्रतिभाओं के हित में सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि नए अभिनेताओं, लेखकों, निर्देशकों, संगीत प्रतिभाओं और तकनीशियनों की एक विस्तृत श्रृंखला को एक मंच प्रदान करने का यह प्रयास बॉलीवुड की दिशा और दशा बदलने में कारगर साबित होगा।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय