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प्रथम सत्र विशेष – सात दिवसीय. ” गऊ ग्राम महोत्सव ” The Festival Of Cow का आयोजन संपन्न , महाराष्ट्र के राज्य पाल के हाथों उद्घाटन , और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक के हाथों समापन

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मुंबई , राष्ट्रीय समाचारपत्र गऊ भारत भारती के तत्वाधान में आयोजित “गऊ ग्राम महोत्सव” The Festival Of Cow के भव्य आयोजन का समापन दिनाँक १८ अक्टूबर को उत्तरप्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक,कृपा शंकर सिंह , राधे गुरु माँ , इस्कॉन के प्रमुख देवकीनंदन दास जी , विधायक प्रकाश सुर्वे , विनोद शेलार , मनोभाव त्रिपाठी , चिराग गुप्ता , टल्ली बाबा , संजीव गुप्ता और अन्य महानुभाव की : उपस्थिति में संपन्न हुआ।

ज्ञात हो कि दिनाँक १२ अक्टूबर को “गऊ ग्राम महोत्सव” The Festival Of Cow का उद्घाटन महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने मंत्रोच्चार व रणभेरी के प्रफ्फुलित वातावरण में किया इसका उद्घघाटन किया था। और समापन उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक जी के हाथो संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के आयोजन में विशेष तौर पर ” राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ” ,जीव जंतु कल्याण बोर्ड , ( पशुपालन और डेयरी विभाग भारत सरकार ) महाराष्ट्र सरकार (पशुपालन और डेयरी विभाग ) का विशेष सहयोग रहा। विभाग के मुख्य सचिव श्री जगदीश गुप्ता जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

पहले दिन उद्घाटन भाषण में राज्यपाल कोश्यारी जी ने अपने उद्बबोधन में गाय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक या गोवंश की उपयोगिता को लेकर श्रोताओं से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने रासायनिक खादों की अपेक्षा जैविक खादों के अधिक प्रयोग पर भी बल दिया! वर्तमान में गौ व गोवंश के प्रति सभी लोगों की जागरूकता व दिलचस्पी बढ़ रही है उन्होंने इस दिशा में कार्यरत निरंतर विभिन्न प्रकल्पों के तहत स्वयंसेवी संस्थाओं व गौशालाओं की भूमिका की सराहना की। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा कार्यक्रम के मुख्य संयोजक एवं संपादक संजय “अमान “के प्रयासों की न सिर्फ सराहना की बल्कि लोगों से भी गौ तथा गोवंश पर आधारित उत्पादों व उत्पादकों को भी प्रेरित करने हेतु उनके प्रयोग की अपील की। इस अवसर पर रुचि कत्थक क्लासेस मुद्रा उड़ीसी एवं अन्य संगठनों के द्वारा प्रस्तुत नृत्य का मंचन करने पर राज्यपाल ने सभी कलाकारों को पुरस्कृत कर पारितोषिक की घोषणा भी की। जबकि केंद्रीय पशुपालन ,दुग्ध व मत्त्स्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला जी ने अपने वीडियो संदेश में राज्यपाल एवं आमंत्रित अतिथियों का स्वागत करते हुए देश की अर्थब्यवस्था में गौ की जरूरत को आवश्यक बताया।

कार्यक्रम के पहले शत्र में अन्य मुख्य अतिथियों में आर आर काबेल के महेंद्र भाई काबरा ,संतोष सहाणे ,गौ वैज्ञानिक महेंद्र गर्ग , जी एंड वी के विनय गोपाल सिंह , एकता मंच के प्रशांत काशिद , समस्त महाजन के प्रमुख ट्रस्टी गिरीश भाई शाह , अहिंशाधाम के ट्रस्ट्री महेंद्र भाई संगोई , हरेश भाई वोरा , देवकीनंदन जिंदल जी , आदि समाज के प्रमुख हस्तियां मौजूद रही। इन ७ दिनों में अन्य अतिथियों में शिवसेना के सांसद गजानंद कीर्तिकर , विधायक सुनील प्रभु , आदि प्रमुख लोगो का ताँता लगा रहा।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अपनी परम्परा के अनुसार ” गऊ भारत भारती ” द्वारा कुछ सामाजिक , गौसेवक , और प्रशासनिक अधिकारीयों को ” गऊ भारत भारती ” का सर्वोत्तम सम्मान माननीय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी के हाथो प्रदान किया गया। इस वर्ष २०२२ के सर्वोत्तम सम्मान पाने वालो में से प्रमुख आरआर काबेल के श्री महेंद्र भाई काबरा , डॉ.सुजाता सक्सेना निदेशक ICAR CIRCOT मुंबई , डॉ.अशोक कुमार भरिमाला , सीनियर वैज्ञानिक ICAR CIRCOT मुंबई , विनय गोपाल सिंह , हनुमंत पोपट गोसावी , योगेंद्र सिंह कछवे , डॉ. सोमनाथ माने , मुकेश अकरुन पवार , डॉ.धीरज कनखरे (देशी गाय संशोधन केंद्र , कृषि महाविद्यालय पुणे ) संतोष ठिकेकर , अहिंसाधाम के ट्रस्टी हरेश भाई वोरा , सुनील शेठी, आदि को राज्यपाल महोदय के हाथो सम्मान पूर्वक प्रदान किया गया।

प्रथम उद्घाटन सत्र में मंच पर विराजमान कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक श्री महेंद्र भाई काबरा का स्वागत संतोष सहाणे ,नगरसेवक ज्ञानमूर्ति शर्मा ने किया तो प्रधान संपादक और मुख्य आयोजक संजय अमान और समाचारपत्र के संरक्षक रामकुमार पाल ने माननीय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का स्वागत शाल , सम्मान चिन्ह दे कर किया।

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक संजय अमान ने अपने प्रस्तावना उद्धबोधन में जैविक प्रयोग व वर्तमान में गोवंश के प्रति जागरूकता के प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया इस।12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय महोत्सव में राजनीति, सामाजिक, फिल्म ,क्रीड़ा आदि क्षेत्रों से संबंधित महानुभाव विशेष रूप में उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त , इस्कॉन , गायत्री परिवार , चिन्मया मिशन ,आर्ट ऑफ़ लिविंग ,ब्रह्माकुमारी, जैसी देश की प्रमुख संस्थाओ ने अपनी अपनी प्रमुख भूमिकाएं निभाई।

कार्यक्रम के संचालक एवं उद्घघोषक संजय बलोदी” प्रखर” सहित आयोजन समिति के मुख्य प्रतिनिधियों में श्री रामकुमार कुमार पाल , संतोष शहाणे, महेंद्र भाई काबरा ,,एडवोकेट ज्ञान मूर्ति शर्मा, कपिल कियावत व विनय सिंह जी ने इस “गौ ग्राम महोत्सव” को सफल बनाने हेतु अपनी विशेष भूमिका एवं कर्तव्यों का निर्वहन किया !

आयोजन समिति के सभी सदस्यों ने भविष्य में भी इसी प्रकार के आयोजन भारत के विभिन्न राज्यों में आयोजित करने की इच्छाएं व संभावनाएं व्यक्त की और कहा कि इस और हमारा प्रयास जारी रहेगा। और अंत में स्थानिक पूर्व पार्षद ज्ञान मूर्ति शर्मा द्वारा आयोजन में भाग लेने वाले सभी सदस्यों एवं आमंत्रित अतिथियों का अभिवादन एवं धन्यवाद किया गया।

 

पशु पालक भाई एवं गोशाला प्रबंधक ध्यान दे , अक्टूबर माह चल रहा है, अन्त कृमि नाशक दवा अवश्य दे

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गाय, भैंस के पेट में पलने वाले अदृश्य आंतरिक परजीवी जेसै फीताकृमि, गोलकृमि,लिवर
फ्लयूक इत्यादि दुधारू पशुओं का प्रति ब्यांत 100 लीटर तक अथवा प्रतिदिन आधा से 1.0 लीटर दूध उत्पादन कम कर देते हैं । तथा दूध उत्पादकता में 5 प्रतिशत तक की कमी हो जाती हैं।
यही नहीं आन्तरिक कृमि मादा गो पशुओं की प्रजनन क्षमता/गयाभिन होने की क्षमता भी 14 से 17 प्रतिशत तक कम कर देते है। देशी पशुओं में कम दूध उत्पादन तथा कम होती प्रजनन क्षमता मुख्य कारण भी नियमित अंतराल पर कृमि नाशक दवा नहीं देना ही प्रतीत होता है।
साधारणतया जुलाई, अगस्त माह में बरसाती पानी एवं बरसाती घांस,हरा चारा आदि खाना पीना पड़ता है जिनके साथ बरसाती कीड़े भी पशु के पेट में जाकर अपना डेरा जमा कर खून चूसना शुरू कर देते हैं। इनको समाप्त करने के लिए अक्टूबर माह में दवा दी जानी चाहिए।इसी प्रकार से नवम्बर, दिसंबर, जनवरी माह में रिजका,बरसीम, सरसों जैसे हरे चारे खिलाएं जाते हैं,इनके साथ भी विभिन्न प्रकार के कृमि पशु के पेट में चले जाते हैं। इनके निदान के लिए फरवरी माह में दवा दी जानी चाहिए। माह मई, जून में पशु के पेट में पल रहे कृमियों का ब्रीडिंग सीजन होता है इसलिए जून माह में भी दवा दी जानी चाहिए।
इस प्रकार से मवेशियों को पेट के कीड़ों से मुक्त रखने के लिए फरवरी, जून एवं अक्टूबर माह में प्रति व्यस्क पशु अन्तः कृमि नाशक दवा एलबेंडाजोल या आईवरमेक्टीन या आक्सीकलोजेनाईड 100 एम एल दवा या अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार कोई भी एक दवा दलिया, गुड में लाकर लड्डू बनाकर दे देते हैं तो दूध उत्पादन में होने वाले उपरोक्त अदृश्य नुकसान से बच सकते हैं। अतः समस्त गाय ,भेंस ,बछड़ों को समय-समय पर अन्त कृमि नाशक दवा अवश्य देवें। ‌
पशु शरीर पर पलने वाले ब्राह्य कृमि चिंचडे, जूं एवं पिस्सू इत्यादि भी काफी नुकसान पंहुचाते है। पशुओं को इनसे भी बचाये रखना आवश्यक है। एक चिंचडा प्रति दिन 1.5 एम एल खून चूस जाता है। बाजार में प्रचलित ब्यूटोक्स दवा को एक लीटर पानी में 5.0 एम एल मिला कर या कोई अन्य दवा का पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार पशु शरीर पर पोंछा लगाना या छिड़काव करना चाहिए। बची हुई दवा को पशु शाला में भी छिड़क देना चाहिए।
सभी पशुओं को उनकी इच्छा अनुसार सेंधा या साधारण नमक भी नियमित रूप से बिना नागा के पीने के पानी में या अलग से चारे की ठान में या प्लास्टिक के आधे कटे ड्रम में भरकर पशु के सामने रख कर उपलब्ध कराते रहें। साधारण तया प्रति व्यस्क मवेशी 30 से 35 ग्राम नमक प्रति दिन अवश्य ही देना चाहिए।
‌‌ ‌- डॉ महेंद्र गर्ग ‌ पशु पालन वैज्ञानिक,
सेवानिवृत्त प्रोफेसर, कृषि विश्वविद्यालय ,कोटा
सलाहकार,बायोगेस यूआईटी, कोटा
पूर्व सलाहकार, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग,नई दिल्ली

राजश्री प्रोडक्शन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘ऊंचाई’ का ट्रेलर जारी

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भारतीय सिनेमा के आठ दिग्गज कलाकारों के अभिनय से सजी राजश्री प्रोडक्शन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘ऊंचाई’ का ट्रेलर, जुहू पीवीआर थियेटर, मुम्बई में आयोजित एक भव्य समारोह में जारी कर दिया गया। इस अवसर पर फिल्म की कास्ट व क्रू में शामिल सभी सदस्य मौजूद थे।अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, बोमन ईरानी, नीना गुप्ता, सारिका और परिणीति चोपड़ा अभिनीत इस फिल्म में, डैनी डेंगज़ोम्पा और नफ़ीसा अली सोढ़ी भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

सूरज बड़जात्या के कुशल निर्देशन की झलक ट्रेलर में साफ दिखाई देती है। फिल्म की मूल कहानी दोस्ती पर आधारित है, जिसमें इमोशन, प्यार और इंस्पिरेशन देखने को मिलती है।

फिल्म की टैगलाइन ‘दोस्ती ही उनकी प्रेरणा है’ है और ये बात फिल्म के ट्रेलर में साफ नजर आती है। ट्रेलर से पता चलता है कि अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, बोमन ईरानी और डैनी डेंगज़ोम्पा लंबे समय से दोस्त हैं। राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म निर्माण शैली से जुड़ी परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए निर्देशक  निर्देशक सूरज बड़जात्या ने इस फिल्म के माध्यम से कुछ अलग हटकर संदेश देने का प्रयास किया है कि जहाँ रिश्तेदारी काम नहीं आती है वहाँ यारीदारी काम आती है। फिल्म के माध्यम से यह भी बताने का प्रयास किया गया है कि जब कोई इंसान अपने परिवार के सदस्यों से दूर किसी जगह पर रहता है तो उसके इर्दगिर्द रहने वाले ही उसके अपने होते हैं और विपरीत परिस्थितियों में काम आते हैं।

15 अगस्त 1947 को स्व ताराचंद बड़जात्या द्वारा स्थापित राजश्री प्रोडक्शन पिछले 75 सालों से फिल्म निर्माण व वितरण के क्षेत्र में क्रियाशील है और राजश्री प्रोडक्शन के 75वें साल के मौके पर खास कर आज़ादी के अमृत महोत्सव के कालखंड में फिल्म ‘ऊंचाई’ 11.11.22 को रिलीज हो रही है।

कमल कुमार बड़जात्या, स्वर्गीय राजकुमार बड़जात्या और अजित कुमार बड़जात्या द्वारा निर्मित, ‘ऊंचाई’ राजश्री प्रोडक्शन की 60वीं फिल्म है। इस फिल्म से निर्देशक सूरज बड़जात्या 7 सालों बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। राजश्री प्रोडक्शन ने महावीर जैन फिल्म्स के महावीर जैन और बाउंडलेस मीडिया की नताशा मालपानी ओसवाल के साथ फिल्म का निर्माण किया है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

गौ तस्करी का बड़ा खुलासा, 10 ट्रकों को किया गया जब्त

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Gobindpur:  कोयलांचल धनबाद के रास्ते गौ तस्करी के धंधे में जुड़े सिंडिकेट नित्य नए-नए हथकंडे अपना कर तस्करी में जुटे हैं. इस दफा पुलिस इन पर भारी पड़ी है. ऐसे में तस्करी के नए-नए तरीकों का खुलासे होने होने लगा है. ताजा घटनाक्रम में गोविंदपुर- साहिबगंज मार्ग पर लटानी के निकट पूर्वी टुंडी थाना प्रभारी कुलदीप राज टोप्पो के नेतृत्व में गोवंशीय पशुओं से लदी 10 ट्रकों को जब्त किया गया है. जब्त ट्रकों में तकरीबन डेढ़ सौ के आसपास गाय और उनके बच्चे तस्करी के माध्यम से बंगाल भेजे जा रहे थे. मौके पर पुलिस ने 3 ड्राइवर समेत दर्जन भर करोबारियों को भी हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है. बता दें कि अभी पिछले दिनों ही बाघमारा थाना क्षेत्र में छह पिक अप वैन में लोड मवेशी पकड़े गए थे, जिसमें गो-वंशीय पशु और बछड़े बेतरतीब तरीके से लोड किए गए थे.

इसके अलावा स्कॉर्पियो और कंटेनर से भी गौ तस्करी का खुलासा हो चुका है, जिन रास्ते में सख्ती बढ़ती है. तस्कर उस रास्ते को छोड़कर दूसरे रास्ते को अपनाते हैं और अपने गुर्गों के माध्यम से झारखंड की उन वाहनों को स्कॉट कर के पास कराते हैं. फिलवक्त जब्त किए गए पशुओं को कौवाबांध स्थित खटालों में जिम्मेनामा पर सौंपने की तैयारी भी चल रही है.

गौ प्रेमी ने अपने घर में ही बना दी गौशाला, रोटी रिक्शा बैंक मुहिम की मदद से 40 गायों की कर रहे सेवा

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सड़कों पर आवारा घूमती गायों को देखकर एक गौ प्रेमी ने घर पर ही गौठान बना दिया और नाम रख दिया ‘हमर गौठान’. दरअसल, कोरिया जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में रहने वाले अनुराग दुबे गौ सेवा का पर्याय बन चुके हैं. कहने को तो अनुराग जहां रहते हैं, वह उनका घर है, लेकिन वहां उनके परिवार के सदस्यों के साथ कई गाय और बछड़े भी रहते हैं. पिछले दस वर्षों से उनका घर पूरी तरह गौशाला बन चुका है.

छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार द्वारा गौवंशो के लिए शुरू की गई ‘गौठान योजना’ के बाद, अनुराग ने अपनी गौशाला का नाम हमर गौठान रख दिया. अनुराग की गौशाला में उनकी केवल एक गाय है, लेकिन घर से लेकर बाल आश्रम तक एक दर्जन से अधिक गौवंश ऐसे हैं, जो सड़कों पर लावारिस घूम रहे थे और पर्याप्त आहार न मिलने के चलते कमजोर हो गए थे. इसके अलावा, सड़क हादसे में घायल हो चुके गौवंशों को भी अनुराग घर लाकर उनकी पूरे भाव से सेवा कर रहे हैं.

चलाई ‘रिक्शा रोटी बैंक’ मुहिम
जिलेभर में अनुराग दुबे को गौ सेवक के रूप में जाना जाता है. जहां कहीं भी गौवंशों के सड़क पर घायल होने, नाली या गड्ढे में फंस जाने की सूचना उन्हें मिलती है, वह मौके पर पहुंचकर उसे बचाने की पूरी कोशिश करते हैं. गौ सेवक अनुराग दुबे द्वारा कई सालों से बैकुण्ठपुर में ‘रोटी रिक्शा बैंक’ नामक मुहिम भी चलाई जा रही है. इसकी मदद से वह शहर में रोजाना रिक्शा लेकर घरों के सामने से निकलते हैं और रोटी का संग्रह करते हैं. इसके बाद यह रोटी अनुराग दुबे अपने हाथों से गौवंशों को खिलाते हैं.

जानवरों के लिए खाने की व्यवस्था को लेकर अनुराग ने तीन साल पहले रोटी बैंक की शुरुआत की थी. इसके जरिए अलग-अलग मोहल्लों से रोटी कलेक्ट की जाती है और जानवरों को खिलाई जाती है. अनुराग बताते हैं कि इस काम में महीने भर में 25 हजार का खर्च आता है, जो वो खुद वहन करते हैं. अनुराग जानवरों के बीच रहकर उनकी तकलीफों को भी समझने लगे हैं. उनका कहना है कि ये बेजुबान जानवर तकलीफों को बयां नहीं कर सकते, इसलिए इनको समझना पड़ता है. वे बताते हैं कि जानवरों की आंखों में देखने से समझ आता है कि उन्हें कितनी तकलीफ है.

घायल असहाय जानवरों का सहारा हैं अनुराग
अनुराग का कहना है कि सड़कों पर जानवर घायल अवस्था में पड़े होते हैं, लेकिन कोई इनकी ओर ध्यान नहीं देता. जब भी उन्हें पता चलता है कि कोई जानवर घायल है, वे उसे अपने घर ले आते हैं और उसकी देखभाल करते हैं. उन्होंने कई जानवरों को घायल अवस्था से ठीक किया है. बेजुबानों का सहारा बनकर कंपकपाती ठंड में गायों के लिए अलाव की व्यवस्था भी कराई है.

गौशाला के लिए सरकार से जमीन की मांग
गौ सेवक अनुराग दुबे ने बताया कि उन्होंने गौशाला का नाम ‘हमर गौठान’ रखा है. लगभग 11 साल से वह गौ सेवा से जुड़े हुए हैं. तब से उनके घर में गौवंशों का आवास रहा है. ऊपर खुद का निवास है और नीचे गौशाला बनाई है, जहां 40-45 गौवंश रहते हैं. उन्होंने बताया कि सरकार से उन्होंने कोई मदद नहीं ली है. गौवंशों का पैरा, भूसा, पानी, दवा का जो भी खर्च है, अनुराग खुद ही उठाते हैं. अनुराग दुबे की सरकार से यह मांग है कि गौशाला के लिए बढ़िया सी जमीन उपलब्ध कराएं, क्योंकि अब घर में जगह बची ही नहीं है.

गौ कथा का भंडारे के साथ समापन

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गरमपानी। बेतालघाट ब्लॉक के भद्रगड़ी धाम में पिछले सात दिनों से चल रही गो कथा का मंगलवार को समापन हो गया। व्यास पंडित चंद्रशेखर त्रिपाठी ने सुंदर कथा प्रवचन व भजन से सभी क्षेत्र के लोगों को गो कथा का आनंद लिया। इस कार्यक्रम के दैरान बेतालघाट निवासी राहुल अरोरा द्वारा 700 से अधिक महिलाओं को कंबल वितरण किया गया। 300 से अधिक पुरुषों शाल वितरण कर सम्मानित किया गया, वहीं इस कार्यक्रम के भंडारे में 1500 अधिक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया गया। कार्यक्रम में भावन अरोरा, तारा सिंह भंडारी, रमेश तिवाड़ी, प्रताप सिंह बोहरा, बालम सिंह बोहरा, शंकर जोशी, जीत सिंह बोहरा, भुवन नेगी, चम्पा जलाल, माया बोहरा, नेहा भंडारी, मुन्नी बोहरा, अनीता बोहरा, खषटी जोशी, गीता जोशी आदि सभी लोग उपस्थित रहे।

आतंक के खिलाफ विश्व को होना होगा एकजुट

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 90वीं इंटरपोल महासभा को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समय भारत और इंटरपोल दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत 2022 में आजादी के 75 साल मना रहा है। यह हमारी संस्कृति, लोगों और उपलब्धियों का उत्सव है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि आतंक के खिलाफ विश्व को एकजुट होना होगा। इंटरपोल महासभा की बैठक में 195 इंटरपोल सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं। इसमें मंत्री, देशों के पुलिस प्रमुख, राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो के प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इंटरपोल महासभा की बैठक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए 2 प्रतिनिधिमंडल भी आए हैं। इसमें पाकिस्तान समेत 195 इंटरपोल सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं।

INTERPOL General Assembly में पीएम के संबोधन की खास बातें

 

– पीएम मोदी ने कहा कि विविधता और लोकतंत्र को कायम रखने में भारत दुनिया के लिए एक केस स्टडी है। पिछले 99 सालों में इंटरपोल ने 195 देशों में विश्व स्तर पर पुलिस संगठनों को जोड़ा है। यह कानूनी ढांचे में मतभेदों के बावजूद है।

 

– पीएम मोदी ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में बहादुर लोगों को भेजने में शीर्ष योगदानकर्ताओं में से एक है। अपनी आजादी से पहले भी हमने दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए बलिदान दिया है। भारतीय पुलिस बल 900 से अधिक राष्ट्रीय और 10,000 राज्य कानूनों को लागू करता है।

केदारनाथ में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, छह लोगों की मौत की सूचना, रेस्‍क्‍यू शुरू

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रुद्रप्रयाग : Kedarnath Helicopter Crash : केदारनाथ में एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। हादसे में छह लोगों की मौत की सूचना आ रही है।
हेलीकॉप्‍टर में छह लोग सवार थे। हादसा गौरीकुंड के पास हुआ है। हेलीकॉप्‍टर आर्यन कंपनी का बताया जा रहा है। रेस्‍क्‍यू में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम लगी हुई है।
केदारनाथ में घना कोहरा

#WATCH | Uttarakhand: A helicopter carrying Kedarnath pilgrims from Phata crashes, casualties feared; administration team left for the spot for relief and rescue work. Further details awaited pic.twitter.com/sDf4x1udlJ

वहीं इस घटना में राहत बचाव के लिए टीमें रवाना हो गई हैं। बताया जा रहा है कि केदारनाथ में घना कोहरा लगा हुआ है। तो इस कारण हेलीकॉप्‍टर हादसे का शिकार हो सकता है।
2019 में भी केदारनाथ में क्रैश हुआ था हेलीकॉप्‍टर
वर्ष 2019 में भी केदारनाथ में हेलीकॉप्‍टर क्रैश हुआ था। केदारनाथ से यात्रियों को लेकर फाटा के लिए उड़ान भरते समय हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आने से पायलट को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी और इस दौरान हेलीकॉप्‍टर क्रैश हो गया था।
हेलीकॉप्टर के लैंडिंग करते समय पीछे का हिस्सा जमीन से टकराने के कारण यह दुर्घटना हुई थी। हेलीकॉप्टर के पायलट समेत छह यात्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।
2013 में आपदा राहत बचाव के दौरान तीन हेलीकॉप्टर हुए थे क्रैश
केदारनाथ में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की ये पहली घटना नहीं है। साल 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान भी रेस्क्यू करते हुए वायु सेना के एमआइ-17 हेलीकॉप्टर समेत तीन हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुुए थे। इन दुर्घटनाओं में 23 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी।

Cow Economy – महिला सशक्तिकरण: पशुपालन के माध्यम से

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डॉ प्रगति पटेलडॉ आदित्य मिश्राडॉ आनंद जैनडॉ दीपिका डी सीजरडॉ पूर्णिमा सिंहडॉ अनिल गट्टानीडॉ संजू मंडल एवं डॉ महावेश हिरा खान ,पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, जबलपुर

 – Dr . Rajesh Singh 

भारत एक कृषि प्रधान देश है और पशुपालन क्षेत्र इसका एक अभिन्न अंग है। पशुधन को आम तौर पर ग्रामीण आजीविका के लिए एक प्रमुख संपत्ति माना जाता है। ग्रामीण महिलाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही, वे एक उत्पादक की भूमिका भी निभाती हैं।

महिलाओ का योगदान पशुपालन क्षेत्र में सराहनीय है। गरीब परिवारों में पशुपालन आय का एक प्रमुख स्रोत है, जो विशेषकर गरीब एवं भूमिहीन महिलाओं को आय का साधन उपलब्ध कराता है। महिलाएं घर का सब कार्य करते हुए भी गाय, बकरी, भेड़ ,सूअर ,मुर्गी बत्तख, खरगोश पालन आदि का कार्य आसानी से कर सकती हैं। महिलाओं में निर्णय कौशल का विकास करके एवं उन्हें पशुपालन के तौर पर पहचान देकर उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास का रास्ता आसान किया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा एवं पारिवारिक विकास में महिलाओं में तकनीकी कौशल का विकास करके एवं आय के साधनों में वृद्धि करके खाद्य सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है। पशुपालन में नवीन तकनीकों का विकास करने की आवश्यकता है जिनकी जरूरत महिलाओं को है जो उनके कार्य के बोझ को कम करें, उत्पादकता में वृद्धि करें एवं अधिक आय का साधन मुहैया कराएं।

महिलाएं पशुपालन के विभिन्न कार्यों जैसे पशुओं की देखभाल एवं खानपान, उत्पादों की बिक्री आदि में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। पशुओं के स्वामित्व विशेषकर बकरी, भेड़, मुर्गी आदि पर महिलाओं का अधिकतर अधिकार होता है। इसके विपरीत जमीन, पूंजी एवं ज्ञान के मामलों में पुरुषों का वर्चस्व होता है। अतः महिला सशक्तिकरण एक व्यवहारिक आवश्यकता है जिससे कि उनकी पहुंच तकनीकों और ज्ञान के क्षेत्र में अधिक सुगम हो सके। इसके दूरगामी प्रभाव के रूप में उनकी सामाजिक अवस्था में सकारात्मक सुधार होगा। आर्थिक सामाजिक व्यवस्था, संस्थानिक एवं नीतिगत फैसले भी कार्यकलापों एवं जिम्मेदारियों को प्रभावित करते हैं। विभिन्न कार्यों में स्त्री पुरुष की भागीदारी एवं संसाधनों का स्वामित्व विभिन्न समाज एवं क्षेत्र में अलग अलग होता है। सामाजिक, नीतिगत एवं संस्थानिक व्यवस्थाएं अक्सर महिलाओं के उत्थान में बाधा उत्पन्न करती हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। इन बाधाओं को यदि दूर कर दिया जाए तो महिलाएं पशुपालन द्वारा आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकेंगी।

महिलाओ की पशुपालन में भूमिका:

भारत में पशुधन उत्पादन काफी हद तक महिलाओं के हाथों में है। वास्तव में पशुपालन नारीकृत हो रहा है। पशुओं की खेती की अधिकांश गतिविधियाँ जैसे चारा संग्रह, पानी और स्वास्थ्य देखभाल, प्रबंधन, दूध देने और घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन महिलाओं द्वारा किया जाता है। उनकी काफी भागीदारी और योगदान के बावजूद, महत्वपूर्ण लैंगिक असमानताएँ, प्रौद्योगिकी, ऋण, सूचना, इनपुट और सेवाओं की जानकारी न होने की बजह से महिलाये काफी समयस्याओ का सामना कर रही हैं। पशुधन उत्पादों की तेजी से बढ़ती मांग महिलाओं के सशक्तीकरण के अवसर पैदा करती है। लगभग 70 मिलियन ग्रामीण परिवार पशुधन के मालिक हैं। पशुधन क्षेत्र के सतत विकास से महिलाओं का अधिक समावेशी विकास और सशक्तिकरण होगा। एक पशुधन उत्पादन प्रणाली के भीतर महिलाओं की विशिष्ट भूमिका एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होती है, और पुरुषों और महिलाओं के बीच पशुधन के स्वामित्व का वितरण सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारकों से दृढ़ता से संबंधित है। महिलाएं आमतौर पर दूध देने, प्रसंस्करण और दूध उत्पादों को बेचने, चारा और पानी उपलब्ध कराने, नवजात मेमनों और बीमार जानवरों की देखभाल करने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

पशुपालन के क्षेत्र में स्त्री एवं पुरुष की आवश्यकता एवं रूचि अलग-अलग होती है। इस क्षेत्र में वे अवसर एवं समस्याओं का निराकरण अलग अलग तरीके से करते हैं। पशु एवं पशु उत्पादों की बिक्री तकनीकी जानकारी हासिल करना, सूखा, बाढ़, बीमारियों से लड़ने के तरीके इत्यादि में स्त्री पुरुष का व्यवहार समान नहीं होता है। पशुपालन में महिला सशक्तिकरण निम्नलिखित तथ्यों पर निर्भर करता है:

पशु उत्पादन के प्रकारपशु उत्पादन की विभिन्न प्रणालियों में स्त्री की भागीदारी अलग-अलग होती है। पशुओं की नस्ल, कृषि पशुपालन के संबंध खानपान व्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता एवं उपलब्धता, गोचर भूमि की उपलब्धता आदि भी पशुपालन व्यवस्था में स्त्री पुरुष के योगदान का अध्ययन करते समय हमें सामाजिक व्यवस्था रहन-सहन के तरीके विभिन्न पारिवारिक गतिविधियों मौसमी विस्थापन आदि का भी ध्यान रखना चाहिए। जिन परिवारों में महिलाएं बकरी भेड़ की देखभाल करती हैं उन्हें बच्चे भी अक्सर अपना योगदान देते हैं। छोटे स्तर पर मुर्गी पालन भी ग्रामीण महिलाओं के लिए आय एवं रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है जिससे परिवार के सदस्यों को पौष्टिक भोजन जैसे मांस और अंडे की आपूर्ति होती है।

Chhindwara – गौ-ग्रास निकालने की परंपरा को लुप्त और सुप्त न होने दें : स्वामी अखिलेश्वारनंद गिरी

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भारत वर्ष में गौ पालन की परंपरा अति प्राचीन है। इसको बनाए रखना हम सभी का पुनीत दायित्व है। गौ-वंश के लिये गौ-ग्रास निकालना अति आवश्यक है। गौ-ग्रास निकालने की परंपरा को लुप्त और सुप्त नहीं होने देना है। मध्यप्रदेश गौ संवर्द्धन बोर्ड कार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वारनंद गिरी ने यह बात आज छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम उमरी खुर्द में माँ भगवती गौ-शाला ‘श्री राम वाटिका’ निर्माण का शुभारंभ करते हुए कही। वाटिका में विभिन्न तरह के औषधीय, फलदार, छायादार, गृह-नक्षत्रों पर आधारित वृक्षों की वाटिका निर्मित की जाएगी।
गौसेवा और गौवंश की रक्षा सदैव प्रासंगिक
स्वामी श्री गिरी ने इस अवसर पर आयोजित ‘गौ संगोष्ठी’ को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-वंश कभी भी अनार्थिक और अनुपयोगी नही होता है। इस तथ्य और सत्य को ध्यान में रखकर ही गौ-सेवा की भावना जनसामान्य में जाग्रत करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। गौ-सेवा और गौवंश रक्षा सदैव प्रसांगिक है। इस संगोष्ठी में पार्ण्डुना के और ग्राम उमरी खुर्द के गौ-पालक, गौ-सेवक, किसान और गायत्री पीठ से जुड़े हुए लोगों ने भाग लिया।