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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लालजी प्रसाद को सौंपा योगी आदित्यनाथ का डॉ अंबेडकर अवार्ड

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मुम्बई। भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुंबई के श्री षणमुखानंद ऑडिटॉरीयम में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम भारतरत्न डॉ. अंबेडकर अवार्ड को मंच पर उपस्थित यूपी के मंत्री डॉ लालजी प्रसाद निर्मल के सुपुर्द किया।इस अवार्ड को डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने लखनऊ से मुम्बई आकर ग्रहण किया।
बुद्धांजलि रिसर्च फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे रामनाथ कोविंद ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में गुंडाराज ख़त्म करके प्रदेश को भयमुक्त बनाने का काम किया है। वहीं भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि योगी आदित्यनाथ हमारे मित्र हैं और उत्तर प्रदेश में गुंडे, माफिया आज उनके नाम से थर थर कांप रहे हैं।
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि योगी जी ने उत्तर प्रदेश के सरकारी महकमों में डॉ. अंबेडकर की फ़ोटो लगाने का आदेश देकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है।
बुद्धांजलि फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष और कार्यक्रम के आयोजक कैलाश मासूम ने कहा कि योगी आदित्यनाथ को भारत रत्न डॉ. अंबेडकर अवार्ड देकर हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। योगी सरकार दलितों, पिछड़ों और वंचितों के हितों को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है, सबको साथ लेकर चल रही है।
इस अवसर पर फ़िल्म अभिनेता प्रेम चोपड़ा, उदित नारायण और राजपाल यादव सहित देश के अन्य क्षेत्रों से आयी प्रतिभाओं को भी 13वें भारत रत्न डॉ. अंबेडकर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित हुए कुमार शानू

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संगीतकार दिलीप सेन, गायिका ऋतु पाठक, अली खान, सुनील पाल, एसीपी संजय पाटिल, बी एन तिवारी, भुज फिल्म के निर्देशक अभिषेक दुधैया, अमिताभ बच्चन के मेकअपमैन दीपक सावंत, ब्राइट आउटडोर मीडिया को मिला अवार्ड

मुम्बई। गुरुवार 4 मई 2023 को ‘लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड 2023’ का भव्य आयोजन चौथी बार मुम्बई महानगर के उपनगर अंधेरी पश्चिम स्थित मेयर हॉल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। केसीएफ प्रस्तुत इस पुरस्कार समारोह में उन हस्तियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने फिल्मी दुनिया मे अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है साथ ही समाज सेवा के लिए अमूल्य योगदान दिया है। कृष्णा चौहान द्वारा आयोजित इस अवार्ड समारोह में बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक कुमार शानू, संगीतकार दिलीप सेन, सिंगर ऋतु पाठक, अभिनेता अली खान, कॉमेडियन अभिनेता सुनील पाल, एसीपी संजय पाटिल, निर्देशक बी एन तिवारी, अमिताभ बच्चन के मेकअपमैन दीपक सावंत, ब्राइट आउटडोर मीडिया के प्रतिनिधि, अभिनेता रमेश गोयल, अजय देवगन की फिल्म भुज के निर्देशक अभिषेक दुधैया, हरियाणवी सिंगर डी सी मदाना, रैपर हितेश्वर, सुंदरी ठाकुर, शीरीं फरीद और एंकर डॉ भारती छाबड़िया की गरिमामयी उपस्थिति रही साथ ये सभी लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित हुए।

समारोह में बेस्ट पब्लिसिटी डिज़ाइनर का अवार्ड आर राजपाल को दिया गया। सिंगर मंगेश ने अपनी गायकी से कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई। सिंगर राजू टांक भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित हुए। सिया काले और ज्योति ने स्टेज पर अपनी प्रस्तुति दी तत्पश्चात दोनों को भी ट्रॉफी प्रदान किया गया।
अपनी कला और व्यक्तित्व का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए समाज को नई राह दिखाने वालों को यह सम्मान प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर केक काटकर आयोजक कृष्णा चौहान ने अपना जन्मदिन मनाया। मुख्य अतिथि कुमार शानू ने उन्हें केक खिलाकर हैप्पी बर्थडे कहा और ऐसे अवार्ड समारोह के आयोजन के लिए कृष्णा चौहान के प्रयासों की सराहना की।
इस अवार्ड समारोह के सीजन 4 की आशातीत सफलता को लेकर कृष्णा चौहान बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने सभी अवार्डी और अतिथियों का आभार जताया।


साथ ही अनिल अरोड़ा, टेलीविजन निर्देशक रंजन कुमार सिंह, ऎक्टर संदीप बोस और अभिनेता राजकुमार कनौजिया को भी लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड ससम्मान प्रदान किया गया।
इस समारोह में समाज सेवकों, बिज़नेसमैन, फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ साथ कई पत्रकार व फोटोग्राफर को भी सम्मानित किया गया।
बता दें कि कृष्णा चौहान अपनी अगली हॉरर थ्रिलर फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग भी जल्द शुरू करने जा रहे हैं। इस फिल्म में प्रसिद्ध संगीतकार दिलीप सेन संगीत देंगे।

– संतोष साहू

विधायक सुनील राणे द्वारा बोरीवली में भव्य खादी महोत्सव – 2 का उद्घाटन

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बोरिवली में खादी ग्रामोद्योग के 5000 स्कवायर फुट के स्टोर की घोषणा

बोरिवली में जल्द होगा अत्याधुनिक सुविधाओं वाला आर्ट गैलरी

मुंबई। अथर्व स्कूल फैशन और आर्ट्स तथा मुंबई खादी व्हिलेज इंडस्ट्रीज असोसिएशन ट्रस्ट (कोरा केंद्र) की तरफ से बोरीवली पश्चिम में कोरा केंद्र मैदान में भव्य खादी महोत्सव – 2 का उद्घाटन बोरिवली के विधायक सुनील राणे की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। तीन दिवसीय बोरिवली खादी महोत्सव में 6 और 7 मई को प्रदर्शनी के साथ ही फैशन शो का आयोजन शाम 7 बजे किया जाएगा।


खादी महोत्सव – 2 के आयोजन की परिकल्पना अथर्व फाउंडेशन के अध्यक्ष और बोरीवली के विधायक सुनील राणे ने की है। खादी महोत्सव में भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए स्थानीय डिजाइनर फैशन परिधानों पर काम कर रहे हैं। इस खादी महोत्सव के डिजाइनर विभिन्न भारतीय संस्कृतियों और परंपराओं का एक अनूठा उत्सव और प्रदर्शन होगा। खादी और फैशन से जुड़ी विभिन्न प्रदर्शनियों के लिए 100 से अधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इस महोत्सव में खादी स्वतंत्रता पूर्व समय में सामाजिक परिवर्तन का एक उपकरण है और आधुनिक समय में पुनरुत्थान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। और हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों की मामूली पोशाक के कारण, खादी फैशन का प्रतीक बन गई है।


खादी महोत्सव -2 के आयोजन के बारे में सुनील राणे ने कहा कि मैं देश के कोने से आए विभिन्न कला प्रेमियों और व्यवसायियों का स्वागत करता हूँ। इस आयोजन का उद्देश्य खादी उद्योग और हाथ से बुने हुए कपड़ों को बढ़ावा देना और स्थानीय फैशन डिजाइनरों को मुख्यधारा में लाना है। इस खादी फैशन शो के माध्यम से भारत की संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करना है। इस अवसर पर मैं दो प्रमुख घोषणायें करता हूँ कि बोरिवली में जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाओं वाला आर्ट गैलरी की शुरूआत होगा और खादी ग्रामोद्योग के 5000 स्कवायर फुट का स्टोर शुरू किया जाएगा। फैशन शोकेस खादी की आधुनिकता के साथ हमारी संस्कृति और विरासत को प्रस्तुत करता है।
बोरीवली में पिछले साल का खादी महोत्सव मुंबई और उपनगरों के लोगों के सहभाग और उत्साह के कारण सफल रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के सपने को साकार करने के लिए इस वर्ष खादी महोत्सव का आयोजन करके भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को संरक्षित करने का संकल्प किया गया है।

दो दिन में 17 गाय कटी मिलने पर बजरंगदल का प्रदर्शन, गौ तस्करी की आशंका

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के एटा जिले के दो पड़ोसी गांवों में पिछले दो दिनों में 17 गायों की हत्या किए जाने का मामला सामने आया है. पुलिस ने कहा कि उन्हें इसके पीछे 15-20 लोगों के समूह पर संदेह है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि गायें पास में स्थित एक सरकारी गोशाला की थीं. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार (2 मई) की सुबह पावस गांव में सात और बुधवार (3 मई) सुबह लखमीपुर गांव में 10 गायों के शव मिले हैं.

पुलिस ने यह भी कहा कि तीन लोगों डेयरी कर्मचारी हृदेश (50 वर्ष), उनके बेटे शिवम चौहान (19 वर्ष) और गौरव सोलंकी (24 वर्ष) को बुधवार सुबह गाय के कथित हत्यारों द्वारा पीटा गया, जब वे उस रास्ते से गुजर रहे थे, जिस स्थान पर गायों की हत्या हुई थी.

अखबार के अनुसार, तीन लोगों में से एक को मामूली चोटें आईं, दो का अस्पतालों में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

सर्किल ऑफिसर (एटा सिटी) विक्रान द्विवेदी ने कहा कि तीन चश्मदीदों के मुताबिक, गोकशी के पीछे 15 से 20 लोगों का एक समूह था.

द्विवेदी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘घटनाएं पावस ग्राम पंचायत के तहत हुईं, जिसमें दो गांव हैं – पवास और लखमीपुर. वहां सरकार द्वारा संचालित गोशाला है. इन गायों को गोशाला से लाया गया था. पहले दिन (मंगलवार सुबह) पावस में 7 और बुधवार सुबह लखमीपुर में 10 गायों के शव मिले.’

एसएचओ (कोतवाली देहात) सुनील कुमार के मुताबिक, तीनों प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा पिटाई किए जाने के बाद शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो गए थे.

उन्होंने कहा, ‘हमें संदेह है कि संबंधित समूह गाय की तस्करी में शामिल है. इस क्षेत्र में मुख्य रूप से हिंदू आबादी है.’

पुलिस ने कहा कि कोतवाली (देहात) में आईपीसी की धारा 395 (डकैती), 397 (लूटपाट या डकैती, हत्या या गंभीर चोट पहुंचाने की कोशिश) और यूपी गोहत्या रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत दो मामले दर्ज किए गए हैं.

बजरंगदल ने किया प्रदर्शन

जैसे ही इस घटना की जानकारी बजरंगदल और विहिप के सदस्यों को हुई उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। और उन्होंने गौहत्यारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। पुलिसवालों ने कहा कि आईपीसी की धारा 395 के तहत डकैती और 394 के तहत गाय का वध करने पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

‘अनवुमन’ फिल्म में सशक्त किरदार निभायी हैं कनक गर्ग

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बॉलीवुड में परिवर्तन का दौर आ गया है। अब नए और अनोखे कांसेप्ट पर फिल्मों का निर्माण हो रहा है जो हृदयस्पर्शी और सत्यता की निकटता लिए होते हैं, ऐसी ही एक फिल्म बनी है जिसका नाम है ‘अनवुमन’। इस फिल्म में समाज की कुछ वीभत्स मानसिकता को दर्शाया है। समाज आज भी समलैंगिक विवाह को अपना नहीं पा रहा है। ‘अनवुमन’ फिल्म का मुख्य केंद्र एक ट्रांसजेंडर की प्रेम कहानी है। जिसे कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।


इस फिल्म की अभिनेत्री कनक गर्ग हैं जिन्होंने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया है। उनसे खास बातचीत में उन्होंने फिल्म से जुड़े कुछ रोमांचित पलों से पर्दा उठाया और फिल्म से उनका जुड़ाव कैसे हुआ इस बात को बताया है। कनक की यह पहली फिल्म है लेकिन वह रंगमंच से जुड़ी हुई है। वह अपने स्कूल लाइफ से ही रंगमंच में अभिनय करना शुरू कर दी थीं। उनकी पसंदीदा अभिनेत्रियां स्मिता पाटिल और नंदिता दास हैं जो सशक्त भूमिका के लिए पहचानी जाती हैं। वह फिल्म के बारे में बताती है कि यह एक ट्रांसजेंडर की कहानी है जो कि लड़कियों की तरह जीवन जी रही थी। बिहार के निर्धन परिवार में रही और शोषित भी हुई। उसे बेच दिया गया और राजस्थान के एक परिवार ने उसे खरीद कर अपने बेटे से उसकी शादी करवा दी क्योंकि उसके बेटे के लिए लड़की नहीं मिल पा रही थी। शादी के दिन ही उसके पति को पता चल जाता है कि वह एक लड़की नहीं है ट्रांसजेंडर है और यहाँ से उसके दुखों का सफर शुरू हो जाता है लेकिन साथ रहते हुए उसे उसके पति से प्यार हो जाता है। इसमें इंटरसेक्स को दर्शाया गया है और यह भी दिखाया गया है कि समाज कैसे प्यार को लिंग के आधार पर ही देखता है प्रेम की पराकाष्ठा को नहीं समझता क्योंकि प्रेम लिंग को नही देखता प्यार तो प्यार ही होता है। इस पूरे कहानी को बड़ी खूबसूरती से निर्देशक पल्लवी रॉय ने दर्शाया है। कनक ने बताया कि कैसे पल्लवी ने फिल्म में दर्शाए गए सीन को बारीकी से समझा कर फिल्मांकन किया है। फिल्मांकन से पूर्व ही सारी बारीकियों से वह अवगत थी और अपने कलाकारों को पूरा कांसेप्ट सही ढंग से समझाया।


मुख्य अभिनेत्री के रूप में अनवुमेन फिल्म कैसे मिला इसके बारे में कनक ने बताया कि फिल्म ऑडिशन के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने अपना वीडियो ऑडिशन टीम को भेजा मगर टीम की ओर से कोई रेस्पॉन्स नहीं आया। टीम ने किसी दूसरे कलाकार को फिल्म के लिए कास्ट कर लिया लेकिन दो महीनों बाद उनको पुनः ऑडिशन के लिए कहा गया और उनको स्क्रिप्ट दिया गया। स्क्रिप्ट अनुसार उन्होंने ऑडिशन की वीडियो क्लिप बनाई और टीम को भेज दिया और अंततः कई कड़ियों के बाद उनका चयन हो गया। वीडियो मीटिंग के द्वारा ही उनको फिल्म की संकल्पना बताई गई और फिल्म निर्माण शुरू हुआ। फिल्म की कहानी से प्रेरित होकर वह आठ घंटों तक राजस्थानी लिबास में ही रहा करती थी। फिलहाल वह अपने अभिनय कला को निखारने के लिए ट्रेनिंग भी ले रही हैं।

– संतोष साहू

सुल्तानपुर का नाम कुशभवनपुर करने की मांग

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श्री महाराष्ट्र रामलीला मंडल ने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल को सौंपा ज्ञापन

मुंबई। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले का नाम बदल कर कुशभवनपुर करने की मांग तेज होती जा रही है। पौराणिक मान्यतानुसार गोमती नदी के तट पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के ज्येष्ठ पुत्र कुश द्वारा कुशभवनपुर नाम का नगर बसाया गया था। खिलजी वंश के सुल्तानों ने छलपूर्वक जंग जीतने के बाद इस नगर को सुल्तानपुर के नाम से बसा दिया। दावा है कि सुल्तानपुर (कुशभवनपुर) को लेकर वर्ष 1903 में प्रकाशित सुलतानपुर गजेटियर में भी इसका जिक्र है। कुशभवनपुर को अपने प्राचीन नाम से न केवल संबोधित किया जाय बल्कि प्रशासकीय स्तर पर भी शीघ्र औपचारिकता पूरी की जाय, ऐसी मांग वाला ज्ञापन एक प्रतिनिधि मंडल ने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल को सौंपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस संदर्भ में उचित कार्यवाही हेतु निवेदन किया।
ज्ञात हो कि एमएमआर अर्थात् मुंबई और आसपास के जिलों में कुशभवनपुर के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। कुशभवनपुर से जुड़े श्री महाराष्ट्र रामलीला मंडल के महामंत्री सुरेश मिश्र ने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल को एक पत्र सौंपा, जिसमें मिश्र की मांग है कि मुगल काल में हिंदुस्तानी सभ्यता को दर्शाने वाले कई ऐतिहासिक नामों को बदलकर उनके महत्व और पहचान को मिटाने का प्रयास किया गया था और मुगल सभ्यता से जुड़े नामों को हम पर जबरन थोपा गया। अब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से हिंदुस्तानी सभ्यता के खोए हुए सम्मान को पुनर्स्थापित करने की शुरुआत हो चुकी है। फैजाबाद को अयोध्या, इलाहाबाद को प्रयागराज और मुगलसराय को पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम दिया गया है। इसी तरह से अब सुल्तानपुर का नाम भी बदल कर कुशभवनपुर किए जाने की आवश्यकता है, जिससे हमारी भावी पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को जान सके और उसका संरक्षण हो सके। प्रदेश के जिन मूल नामों और पहचान को मिटाने का प्रयास मुगल शासन काल के दौरान हुआ, अब पुनः उन मूल नामों और पहचान को स्थापित करने का यही स्वर्णिम अवसर है।
वहीं, रामलीला मंडल के अध्यक्ष अशोक पांडेय और कोषाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने कहा है कि प्रेम शुक्ल हिंदुस्तानी संस्कृति, भावनाओं और ज्ञान का पक्ष बड़ी ही दृढ़ता के साथ प्रस्तुत करते हैं। कुशभवनपुर की माटी के लाल प्रेम शुक्ल वर्षों से मुंबई से जुड़े हुए हैं। हमें विश्वास है कि प्रेम शुक्ल सुल्तानपुर का नाम बदल कर कुशभवनपुर रखने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे और इस जिले को खोई हुई ऐतिहासिक पहचान पुनः प्राप्त होगी।

साइबर क्राइम का महाठग गिरफ़्तार , मुंबई पुलिस का बड़ा कारनामा

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मुंबई: बांगुर नगर पुलिस ने साइबर क्राइम से जुड़े एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जिसका लिंक चीन से है। इस गिरोह के पांच आरोपियों को पुलिस ने कोलकाता, मुंबई और विशाखापत्तनम से गिरफ्तार किया है। ये आरोपी मुंबई पुलिस के 50 से अधिक पुलिस अधिकारियों के नाम और उनके फोटो का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दिया करते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड हैदराबाद का श्रीनिवास राव (49) है। वह 3-4 साल से रोजाना करोड़ों रुपयों की साइबर ठगी करता था, लेकिन पुलिस के रेडार पर नहीं आया है। पुलिस के मुताबिक वह हर दिन तीन से पांच करोड़ रूपये कमाता था। 12वीं तक पढ़े राव के 40 खातों में जमा 1.50 करोड़ रुपये पुलिस ने फ्रीज कर दिए हैं। आरोप है कि भारत में जुटाई गई साइबर ‌फ्रॉड की रकम को राव चीन भेजता था। वहां वह चीनी बैंकों में यह पैसों जमा करता था और चीनी साइबर क्रिमिनल के संपर्क में भी था।

फर्जी केसों में फंसाने की धमकी
डीसीपी अजय कुमार बंसल के अनुसार, काफी दिनों से साइबर क्राइम से संबंधित शिकायतें मिल रही थीं कि पुलिस अधिकारी लोगों को कॉल कर उनके पार्सल में मादक पदार्थ होने की बात कहता है। इसलिए पार्सल को वेरिफाई करने लिए उन्हें किसी थाने में बुलाया जाता है। चूंकि, लोग पुलिस का नाम और उनका फोटो देखकर डर जाते थे। इसलिए वे सामने वाले को असली पुलिस समझकर उनकी बात पर भरोसा कर उन्हें केस से बचने के लिए पैसे दे देते थे। आरोपी लोगों को फंसाने के लिए स्काइप और वॉट्सऐप कॉल का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस की छवि हो रही थी खराब
डीसीपी बंसल के अनुसार, इस मॉडस ऑपरेंडी के जरिए ठगी करने वाले इस गिरोह के खिलाफ पुणे, दिल्ली, बेंगलुरु, एनसीआर, मुंबई साइबर व पिंपरी-चिंचवड आदि जगहों पर केस दर्ज हैं। चूंकि, इन सभी केसों में मुंबई पुलिस की छवि खराब हो रही थी, इसलिए इस सिंडिकेट को क्रैक करना जरूरी था ताकि लोग पुलिस पर भरोसा कर सकें।

प्रमोद महाजन पुण्यतिथि विशेष – जीवित होते तो प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होते

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” संगठनात्मक कुशल कारीगर शक्तिशाली शक्तिमान,तेजस्वी प्रभावशाली प्रतापीओजयुक्त ,जोश पैदा करने वाला सरल स्वभावी, हिंदुत्व के प्रखर वक्ता ऊर्जावान प्रमोद जी महाजन की १७वीं पुण्य तिथि है। ” 

” प्रमोद व्यंकटेश महाजन (अंग्रेज़ी: Pramod Vyankatesh Mahajan, जन्म: 30 अक्टूबर, 1949 – मृत्यु: 3 मई, 2006) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। प्रमोद महाजन भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक थे। प्रमोद महाजन अपने गृहराज्य महाराष्ट्र और भारत के पश्चिमी क्षेत्र में काफ़ी लोकप्रिय थे। ” 

खैर यदि आज वह जीवित होते तो प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होते।

प्रमोद महाजन कहने को तो भारतीय जनता पार्टी के महासचिव थे लेकिन वे पार्टी के सबसे हाईप्रोफ़ाइल नेताओं में से एक थे। 56 वर्ष के प्रमोद महाजन भाजपा की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में सबसे सक्रिय थे ही, देश भर में पार्टी के सबसे जाने पहचाने चेहरे भी थे। प्रमोद भाजपा के सबसे बड़े आयोजनकर्ता थे और पार्टी के लिए चंदा जुटाने में माहिर नेता माने जाते थे। प्रमोद महाजन को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार पार्टी का लक्ष्मण कहा था। ये और बात है कि उसी समय वाजपेयी ने लालकृष्ण आडवाणी को पार्टी का राम बताया था। और उसी समय से चर्चा चल पड़ी कि प्रमोद महाजन कभी भी पार्टी के अध्यक्ष बन सकते हैं। हालांकि ख़ुद प्रमोद महाजन वाजपेयी के उस बयान का अर्थ इस तरह नहीं लगाना चाहते थे। अपनी मौत से पहले राज्यसभा के सदस्य प्रमोद महाजन की कार्यभूमि मुंबई ही रही है और यहीं से वे लोकसभा सदस्य रहे।

प्रमोद महाजन एक लंबी राजनीतिक यात्रा तय करने वालों नेताओं में थे। विज्ञान के बाद राजनीति शास्त्र की पढ़ाई करने वाले महाजन ने पत्रकारिता की पढ़ाई भी की। उनकी राजनीतिक यात्रा का पहला बड़ा पड़ाव 1986 में आया जब उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अपने इसी कार्यकाल में उन्होंने राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। और यह राजनीति के दिलचस्प मोड़ ही रहे कि उन्हीं राजनाथ की अध्यक्षता में वह पार्टी के महासचिव का पद संभाल रहे थे। लेकिन इस बीच उन्होंने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक सलाहकार से लेकर संचार मंत्री और संसदीय कार्यमंत्री तक कई ज़िम्मेदारियाँ निभाईं। 2004 में समय से पहले चुनाव करवाने के फ़ैसले में प्रमोद महाजन की अहम भूमिका थी ही, इसके बाद भाजपा के हाईटेक प्रचार कार्य की बागडोर उन्हीं के हाथों में थी। बाद में जब कहा गया कि हाईटेक प्रचार और ‘इंडिया शाइनिंग’ जैसे नारों से पार्टी और एनडीए को नुक़सान हुआ तो हार का ठीकरा प्रमोद महाजन के सिर ही फूटा।

आज से 17 साल पहले मुंबई के वर्ली में एक ऐसी घटना घटी, जो इत‍िहास के पन्नों में दर्ज हो गई। ये घटना थी कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन का कत्‍ल। ये कत्‍ल क‍िसी और ने नहीं बल्‍क‍ि प्रमोद महाजन के छोटे भाई प्रवीण महाजन ने कि‍या था। ‘इतिहास में आज’ में हम आपको इस हाईप्रोफाइल हत्‍याकांड के बारे में बता रहे हैं .

कौन थे प्रमोद महाजन ?

प्रमोद महाजन 30 अक्टूबर 1949 को तेलंगाना के महबूबनगर में जन्‍मे थे। स्‍कूल में पढ़ाई के दौरान ही वह संघ से जुड़ गए थे। उन्‍होंने पुणे के रानाडे इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की। लेक‍िन, इसमें कुछ खास मौका न म‍िलने के बाद एक कॉलेज में अंग्रेजी के शि‍क्षक बन गए। पिता पेशे से शि‍क्षक थे। प्रमोद करीब 22 वर्ष के ही थे, जब उनके स‍िर से प‍िता का साया उठ गया था।

1974 में प्रमोद को बनाया गया संघ प्रचारक

प्रमोद की शुरू से ही राजनीति में द‍िलचस्‍पी थे। वे अक्‍सर राजनीत‍िक बहसों में ह‍िस्‍सा ल‍िया करते थे। साल 1974 में कॉलेज में पढ़ाना बंद कर द‍िया। संघ से जुड़ने के बाद आरएसएस के मराठी अखबार ‘तरुण भारत’ के साथ काम शुरू क‍िया और उप संपादक बन गए। इसके बाद वह पूरी तरह से संघ के ल‍िए काम करने लगे। साल 1974 में उन्‍हें संघ प्रचारक बनाया गया।

लगातार तीन बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे प्रमोद

आपातकाल के दौरान प्रमोद ने आरएसएस के ल‍िए जमकर काम करते हुए इंद‍िरा व‍िरोध मार्च भी न‍िकाला। संघ के प्रत‍ि उनकी कर्तव्‍यन‍िष्‍ठा और सक्रियता को देखते हुए उन्‍हें बीजेपी में शामि‍ल कर ल‍िया गया। यहीं से उनके राज‍नीत‍िक सफर की शुरुआत हुई। साल 1983 से 1985 तक प्रमोद महाजन बीजेपी के अखिल भारतीय सचिव थे। इसके बाद 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। साल 1984 में प्रमोद महाजन ने लोकसभा चुनाव लड़ा। हालांकि, इस चुनाव में उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा। वे लगातार तीन बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे।

बीजेपी ने भेजा राज्‍यसभा

साल 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता पर काब‍िज हुए। प्रमोद महाजन अपना पहला लोकसभा चुनाव जीते और उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया। लेकि‍न यह सरकार महज 13 दिन ही चल सकी। 1998 में एक बार फि‍र चुनाव हुए, बीजेपी ने सत्ता में फि‍र से वापसी की, लेकि‍न प्रमोद हार गए। उन्हें राज्यसभा भेजा गया। राजनीति में प्रमोद महाजन वो नाम थे, जो कम समय में तेजी से शीर्ष पर पहुंचे। अटल के पीएम बनने से लेकर आडवाणी की रथयात्रा और महाराष्ट्र में शिवसेना से गठबंधन तक प्रमोद महाजन का जिक्र जरूर होता है। वे अटल और आडवानी के बेहद करीबी नेता थे।

3 मई 2006 छोटे भाई ने ही कर दी थी प्रमोद की हत्‍या

22 अप्रैल 2006 को प्रमोद महाजन मुंबई में वर्ली स्थित अपने आवास पर मौजूद थे। उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन उनसे मिलने पहुंचे। र‍िपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों भाइयों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई। गुस्‍से में आकर छोटे भाई प्रवीण ने रिवॉल्वर से प्रमोद पर फायर कर द‍िया। प्रमोद महाजन को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 3 मई 2006 को उनकी मौत हो गई।

” उत्तर मध्य मुंबई की सांसद पूनम महाजन ने अपने पिता को याद करते हुए ट्वीट करते हुए लिखा

मैँ कतरा हो कर भी तूफ़ाँ से जंग लेता हूँ, मुझे बचाना समंदर की जिम्मेदारी है.

मेरा आसमान, मेरा समंदर, मेरे बाबा ! ”

‘मिलेंगे जन्नत में’ : सच्ची घटना से प्रेरित संवेदनशील शॉर्ट फिल्म

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मुम्बई। सिनेमा को समाज का दर्पण कहा जाता है। समाज में घटती कई घटनाओं व रिवाजों को कहानी में पिरोकर रुपहले पर्दे पर प्रस्तुत किया जाता है। लेखक से निर्देशक बने समीर इकबाल पटेल ने मुस्लिम समाज की एक मान्यता पर शॉर्ट फिल्म बनायी है और तीस मिनट की अवधि वाली इस शॉर्ट फिल्म का नाम है ‘मिलेंगे जन्नत में’।
‘भाभी जी घर पर हैं’, ‘ये चंदा कानून है’ आदि हास्य धारावाहिकों में अपनी लेखनी का कमाल दर्शाने वाले समीर इकबाल पटेल अब गंभीर व भावनात्मक विषय पर यह शॉर्ट फिल्म लेकर आये हैं और इसकी कहानी की प्रेरणा उन्हें अपनी ही जिंदगी में घटी एक घटना से मिली।
मुस्लिम संप्रदाय में महिलाओं को कब्रिस्तान में दाखिल होने की इजाज़त नहीं है। इस रिवाज पर यह शॉर्ट फिल्म बनाने का ख्याल कैसे आया? इस बारे में समीर कहते हैं कि पिछले साल जुलाई माह में मेरी मां का इंतेकाल हुआ था और उनके जनाजे में मेरी बहन भी शामिल हुई थी। वह कब्रिस्तान के दरवाजे पर रुक गयी और अंदर नहीं आयी। उसने वहीं से सुपुर्द-ए-खाक की रस्म को अंजाम होते देखा और फातिया पढ़ अपनी मां को विदाई दी। मां की कब्र पर फूल चढ़ाने के लिये मैं कुछ दिनों तक कब्रिस्तान जाता रहा और वहां अक्सर महिलाओं को कब्रिस्तान के बाहर खड़ी रहकर अपने निकट जनों को विदा करते देखा। एक रोज मेरी नजर वहां लगे एक बोर्ड पर गयी जिस पर महिलाओं को कब्रिस्तान के अंदर दाखिल न होने का संदेश था। यह देख मेरे दिल में सवाल उठा कि महिलाओं को कब्रिस्तान के अंदर दाखिल होने की इजाजत क्यों नहीं है। इसका जवाब पाने के लिये मैं कई मौलवियों से मिला और धार्मिक किताबों में उसका उत्तर जानना चाहा पर कहीं कोई जवाब नहीं मिला। मेरे एक रिश्तेदार सउदी अरब में रहते हैं। उनके जरिए भी इसका जवाब खोजने का यत्न किया गया पर कहीं कोई संतोषकारक जवाब नहीं मिला। हां, मिले वो तर्क जो कि अविश्वसनीय थे और कुछ तो हास्यास्पद भी। फिर ख्याल आया कि क्यों न इस सवाल को फिल्म के माध्यम से समाज के समक्ष रखा जाए और मैंने कहानी पर काम करना शुरू किया और जब निर्माता दीपक जयलवल को फिल्म के विषय वस्तु के बारे में पता चला तो वे फिल्म का निर्माण करने को तैयार हो गये।


इस शॉर्ट फिल्म में नामी अभिनेता बृजेंद्र काला द्वारा सुलेमान की भूमिका निभायी गयी है और क़ब्र खोदना इसका पेशा है। फिल्म में एक ऐसी बेटी की कहानी पेश की गयी है जो कब्रिस्तान के गेट पर खड़ी रहकर अपनी मृतक मां की अंतिम विधि देखती है। बेटी शाहीन की यह भूमिका रिवा अरोरा द्वारा निभायी गयी है। रिवा पूर्व में फिल्म ‘मोम’ में अभिनय कर चुकी है और ‘उरी’ में नन्ही सुहानी की भूमिका में वह दर्शकों की आँखें नम कर गयी थी।
फिल्म की शूटिंग के लिये जब समीर ने एक कब्रिस्तान के कर्ताधर्ता से बातचीत की तो उन्हें इजाज़त मिल गयी पर बाद में इजाज़त वापस ले ली गयी। नतीजतन कब्रिस्तान का सेट खड़ा कर शूटिंग की गयी। समीर जब फिल्म के विषय को लेकर रिसर्च कर रहे थे तब यह पता चला कि पाकिस्तान समेत कई इस्लामिक देशों में महिलाओं को कब्रिस्तान के अंदर दाखिल होने की इजाज़त है। भारत व सउदी अरब में उन्हें इजाज़त नहीं है। भारत में शिया मुस्लिम में इजाज़त है पर सुन्नी संप्रदाय की महिलाएं कब्रिस्तान में दाखिल नहीं हो सकती।
फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ व ‘द ताश्कंद फाइल्स’ के कैमरामैन उदयसिंह मोहिते की फोटोग्राफी से सजी यह फिल्म ओटीटी पर प्रदर्शित होगी और चूंकि फिल्म के विषय में अंतरराष्ट्रीय अपील है सो यह सब टाइटल के तहत कई विदेशी भाषाओं में भी प्रस्तुत होगी।
समीर का मानना है कि इस फिल्म के तहत उन्होंने प्रचलित रिवाज़ को लेकर सवाल उठाया है। फिल्म में किरदारों का भावनात्मक प्रस्तुतिकरण किया गया है और किरदारों को नाटकियता से दूर रखा गया है, उनका यह भी मानना है कि गर कोई उन्हें फिल्म के विषय को लेकर सवाल करता है तो वे जवाब देने को तैयार हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म का विषय राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन सकता है और इतना तो जरुर कहना होगा कि इस फिल्म के तहत समीर ने लाखों मुस्लिम महिलाओं के दिल की बात कही है।

साउथ स्टार श्रीनिवास बेलमकोंडा की हिंदी फिल्म ‘छत्रपति’ का ट्रेलर जारी

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पेन स्टूडियोज के डॉ. जयंतीलाल गढ़ा द्वारा निर्मित फिल्म ‘छत्रपति’ का ट्रेलर जारी कर दिया गया है। एसएस राजामौली की तेलुगु ब्लॉकबस्टर ‘छत्रपति’ के इस ऑफिशियल हिंदी रीमेक का निर्देशन वीवी विनायक ने किया है। ये फिल्म तेलुगु सुपरस्टार श्रीनिवास बेलमकोंडा के बॉलीवुड में डेब्यू को चिह्नित करती है।

फिल्म को काफी बड़े स्केल पर बनाया गया है और इसे एसएस राजामौली के पिता और अनुभवी लेखक वी. विजयेंद्र प्रसाद ने लिखा हैं जिन्हें ‘आरआरआर’, ‘बाहुबली’ सीरीज और ‘बजरंगी भाईजा

न’ जैसी फिल्मों में उनके उल्लेखनीय काम के लिए जाना जाता है।  फिल्म के ट्रेलर में दर्शकों के लिए हाई-ऑक्टेन एक्शन के साथ एंटरटेनमेंट की डबल डोज उपलब्ध है। इस फिल्म में बेतरीन विजुअल्स से लेकर जोरदार स्टंट,श्रीनिवास बेलमकोंडा और नुसरत भरुचा के बीच की केमिस्ट्री, कोरियोग्राफी, धमाकेदार म्यूजिक, दिलचस्प कहानी तक सब कुछ एकदम परफेक्ट लग रहा है, जिसकी झकल इसके ट्रेलर में भी खूब नजर आई है। 12 मई को देश भर में रिलीज़ होने वाली इस फिल्म में भाग्यश्री, शरद केलकर और करण सिंह छाबरा की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय