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कृषि विकास योजना -रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

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New Delhi – 6th Feb 2024-  सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) नामक एक उप-योजना के माध्यम से 2019-2020 से प्राकृतिक खेती को रसायन मुक्त खेती के रूप में बढ़ावा दे रही है। देश भर में बीपीकेपी के तहत 8 राज्यों में प्राकृतिक खेती के लिए अब तक 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मंजूरी दी गई है और 70.13 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। गंगा कॉरिडोर के किनारे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 1.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को भी मंजूरी दी गई है। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने और प्राकृतिक खेती की पहुंच बढ़ाने के लिए, सरकार ने बीपीकेपी को बढ़ाकर एक अलग और स्वतंत्र योजना के रूप में प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएनएफ) तैयार किया है।

किसानों के लाभ के लिए, भारत सरकार कृषि के क्षेत्र में ड्रोन को बढ़ावा दे रही है जो उन्नत प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने, दक्षता में सुधार करने, फसल की उपज बढ़ाने और संचालन की लागत को कम करने में मदद करेगा।
सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत ड्रोन की खरीद की लागत के 100 प्रतिशत की दर से अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति ड्रोन की खरीद और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), राज्य और अन्य केंद्र सरकार के कृषि संस्थानों/विभागों और कृषि गतिविधियों में लगे हुए भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के अधीन संस्थानों द्वारा किसानों के खेतों पर प्रदर्शन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को किसानों के खेतों पर इसके प्रदर्शन के लिए किसान ड्रोन की लागत का 75 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है। इन कार्यान्वयन एजेंसियों को 6000 रुपये प्रति हेक्टेयर का आकस्मिक व्यय प्रदान किया जाता है जो ड्रोन खरीदना नहीं चाहते हैं लेकिन कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), हाई-टेक हब, ड्रोन निर्माताओं और स्टार्ट-अप से प्रदर्शन के लिए ड्रोन किराए पर लेंगे। ड्रोन प्रदर्शनों के लिए ड्रोन खरीदने वाली कार्यान्वयन एजेंसियों का आकस्मिक व्यय 3000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सीमित है। किसानों को किराये के आधार पर ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए, किसानों, एफपीओ और ग्रामीण उद्यमियों की सहकारी समिति के तहत सीएचसी द्वारा ड्रोन की खरीद के लिए 40% की दर से अधिकतम 4.00 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सीएचसी स्थापित करने वाले कृषि स्नातक ड्रोन की लागत का 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 5.00 लाख रुपये प्रति ड्रोन तक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं। व्यक्तिगत स्वामित्व के आधार पर ड्रोन की खरीद के लिए लघु और सीमांत, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और उत्तर-पूर्वी राज्य के किसानों को लागत का 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 5.00 लाख रुपये तक और अन्य किसानों को 40 प्रतिशत की दर से अधिकतम 4.00 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
एसएमएएम के तहत, किसान ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए 141.39 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है, जिसमें किसान ड्रोन की खरीद और 100 केवीके, 75 आईसीएआर संस्थानों और 25 एसएयू के माध्यम से किसानों के खेतों पर उनके प्रदर्शनों के आयोजन के लिए आईसीएआर को जारी किए गए 52.50 करोड़ रुपये शामिल हैं। किसानों को सब्सिडी पर 461 किसान ड्रोन की आपूर्ति और किसानों को ड्रोन सेवाएं प्रदान करने के लिए 1585 किसान ड्रोन सीएचसी की स्थापना के लिए राज्य सरकारों को धन उपलब्ध कराया गया है। देश भर में आईसीएआर के 193 संस्थानों द्वारा 263 एग्री-ड्रोन खरीदे गए हैं। इन संस्थानों के 260 कर्मियों ने ड्रोन पायलट प्रशिक्षण लिया है। कृषि में ड्रोन के फायदों के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से, इन संस्थानों ने 16,471 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करते हुए पोषक तत्वों, उर्वरकों, रसायनों (कीट और कीटनाशक) अनुप्रयोगों पर 15,075 ड्रोन प्रदर्शन किए हैं।
सरकार ने हाल ही में 1261 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना “नमो ड्रोन दीदी” को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना का लक्ष्य कृषि प्रयोजन (उर्वरकों और कीटनाशकों के अनुप्रयोग) के लिए किसानों को किराये की सेवाएं प्रदान करने के लिए 15000 चयनित महिला एसएचजी को ड्रोन प्रदान करना है। कुल 15,000 ड्रोनों में से, पहले 500 ड्रोन 2023-24 में लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (एलएफसी) द्वारा खरीदे जाएंगे, जो चयनित एसएचजी को वितरण के लिए अपने आंतरिक संसाधनों का उपयोग करेंगे। इस योजना के तहत, 2024-25 और 2025-26 के दौरान शेष 14500 ड्रोन प्रदान किए जाएंगे और महिला एसएचजी को खरीद के लिए ड्रोन की लागत का 80 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में और उपकरण/सहायक शुल्क के लिए 8.0 लाख रुपये तक दिये जाएंगे। एसएचजी के क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) राष्ट्रीय कृषि इन्फ्रा फाइनेंसिंग सुविधा (एआईएफ) के तहत ऋण के रूप में शेष राशि (खरीद की कुल लागत घटाकर सब्सिडी) बढ़ा सकते हैं। सीएलएफ को एआईएफ ऋण पर 3 प्रतिशत की दर से ब्याज छूट प्रदान की जाएगी। यह योजना किसानों के लाभ के लिए बेहतर दक्षता, फसल की पैदावार बढ़ाने और संचालन की कम लागत के लिए कृषि में उन्नत प्रौद्योगिकी को शामिल करने में मदद करेगी। यह योजना एसएचजी को स्थायी व्यवसाय और आजीविका सहायता भी प्रदान करेगी और वे प्रति वर्ष कम से कम 1.0 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम होंगे।
जैसा कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा सूचित किया गया है, उन्होंने पायलट आधार पर पूर्ण वाटरशेड और जनजातीय विकास परियोजनाओं में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती के माध्यम से कृषि-पारिस्थितिकी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए वाटरशेड और जनजातीय विकास निधि के तहत जीवा कार्यक्रम शुरू किया है। संयोग से, जिन गैर सरकारी संगठनों ने वाटरशेड और जनजातीय विकास परियोजनाओं को लागू किया है, वे जीवा कृषि-पारिस्थितिकी कार्यक्रम (प्राकृतिक खेती) की कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में कार्य कर रहे हैं।
यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Mainpuri UP News – पैसेंजर ट्रेन से गांव मोहनपुर के पास गोवंश टकराया चालक ने ट्रेन पर पाया काबू

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 मैनपुरी। मंगलवार की शाम फर्रुखाबाद टूंडला पैसेंजर ट्रेन से गांव मोहनपुर के पास गोवंश टकरा गया। चालक ने किसी प्रकार से ट्रेन पर काबू पाया। मौके पर करीब 10 मिनट तक ट्रेन रुकी रही। उच्चाधिकारियों को जानकारी के बाद ट्रेन आगे के लिए रवाना हुई।
जिले में बड़ी संख्या में गोवंश छुट्टा घूम रहा है। जो आए दिन हादसों को आमंत्रण दे रहा है। सोमवार की रात कोहरे के चलते बिछवां क्षेत्र में गोवंश को बचाने के प्रयास में ट्रक पलट गया जिसमें चालक की मौत हो गई। वहीं मंगलवार की शाम फर्रुखाबाद से टूंडला जा रही पैसेंजर ट्रेन से एक गोवंश टकरा गया। इस दौरान चालक की समझदारी से हादसा तो टल गया। लेकिन यदि चालक लापरवाही करता तो हादसा भी हो सकता था। गोवंश के टकराने के कारण करीब 10 मिनट तक गांव मोहनपुर के पास ट्रेन रुकी रही। चालक और परिचालक ने मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी।
मोहनपुर के पास फर्रुखाबाद-टूंडला पैसेंजर से गोवंश टकरा गया था। इससे ट्रेन थोड़ी देर के लिए रुकी रही। किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं हुई है। छुट्टा गोवंश के कारण आए दिन इस प्रकार की घटनाएं होती रहती हैं। एचएस मीणा, स्टेशन अधीक्षक मैनपुरी

कृषि विज्ञान केन्द्र सीतापुर द्वारा विकास खण्ड,केसरीगंज में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रषिक्षण का आयोजन

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6 फरवरी 2024, सीतापुर: उत्तर प्रदेश: सीमांत किसानो को अपनाना होगा गौ आधारित प्राकृतिक खेती – कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया सीतापुर द्वारा विकास खण्ड लहरपुर के केसरीगंज में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रषिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा0 दया शंकर श्रीवास्तव ने प्राकृतिक खेती पर जानकारी देते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती प्रकृति के पुर्नचक्रण व पर्यावरण पुर्नस्थापन के लिए आज की स्थिति को देखते हुए अत्यंत आवश्यक है, प्राकृतिक पद्धति का आशय प्राकृतिक विज्ञान से है जिसमे प्राकृतिक संसाधनों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन किया जा सके। वर्तमान स्थिति में प्राकृतिक खेती अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह खेती उत्पादन की लागत को न्यूनतम करता है। इसमें किसी भी प्रकार के रसायनिक उर्वरको एवं कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिये प्राकृतिक कृषि बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है साथ ही जल की खपत को न्यूनतम किया जा सकता है।
प्राकृतिक खेती में किसी भी प्रकार का रसायनिक व अन्य अवयव नही डालना है, केवल देशी गाय की सहायता से आप इस खेती को कर सकते हैं प्राकृतिक खेती में कीट व बीमारियों से बचाव फसल सुरक्षा के लिए नीमास्त्र, ब्रह्मस्त्र, अग्नेयास्त्र व दशपर्णी अर्क आदि का प्रयोग किया जाता हैं।
केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक श्री सचिन प्रताप तोमर ने प्राकृतिक कृषि मुख्य रूप से 4 स्तंभों पर आधारित है जीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग एवं वाफासा आदि हैं। जीवामृत गाय के गोबर और मूत्र, गुड़, दालों के आटे, पानी और उपजाऊ खेत की मिट्टी का किण्वित मिश्रण द्वारा तैयार किया जाता हैं। बीजामृत देसी गाय के गोबर और मूत्र, पानी, उपजाऊ खेत मिट्टी और चूने का मिश्रण एवं मल्चिंग, या सूखे भूसे या गिरे हुए पत्तों की एक परत के साथ पौधों को ढंकना, मिट्टी की नमी को संरक्षित करने और जड़ों के आसपास के तापमान को 25-32 डिग्री सेल्सियस पर रखता है।
केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती पर जानकारर देते हुए बताया कि प्राकृतिक खेतों को बढ़ावा देने का मुख्य कारण किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले नुकसानों से बचाना है। यदि किसान दो से तीन एकड़ जमीन पर गेहूं और अन्य फसलों का उत्पादन करेगा तो स्वयं को बीमारियों से बचाकर रख सकता है। क्योंकि रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से कैंसर, हृदयरोग, दमा आदि गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। इनसे लोगों को बचाने के लिए सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्रयास कर रही है। प्रषिक्षण कार्यक्रम में कुल 56 कृषकों ने प्रतिभाग किया।

मुजफ्फरनगर – सबसे बड़ा अत्याधुनिक गाय आश्रय स्थापित

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मुजफ्फरनगर, 6 फरवरी (आईएएनएस)। मुजफ्फरनगर में सड़कों या खेतों पर आवारा मवेशियों के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के तुगलपुर कम्हेड़ा गांव में सोलानी नदी के किनारे सबसे बड़ा अत्याधुनिक गाय आश्रय स्थापित किया गया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री संजीव बालियान ने इसका शुभारंभ करते हुए कहा कि 64 करोड़ रुपए के अनुमानित बजट में 20 एकड़ भूमि में फैले इस अभ्यारण्य में 5,000 से अधिक आवारा पशुओं को रखने की क्षमता होगी।

मंत्री बालियान ने कहा, गौ अभ्यारण्य का निर्माण आठ महीने के रिकार्ड समय में पूरा किया गया और मुजफ्फरनगर की सड़कों या खेतों से आवारा मवेशियों को फरवरी के माह के अन्त तक यहां लाया जाएगा। परियोजना के लिए जिला स्तर पर एक संचालन समिति बनाई गई है जो गौ अभ्यारण्य का संचालन करेंगी। उन्होंने आगे कहा, गौशाला परिसर में जानवरों के लिए एक आधुनिक श्मशान घाट, एक बायोगैस संयंत्र, एक बड़ी पानी की टंकी और चारा इकट्ठा करने के लिए एक गोदाम बनाया गया है।
मंत्री बालियान ने कहा कि 10 एकड़ जमीन में फार्मर ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा जिसमें भारत सरकार की मैत्री योजना के अंतर्गत आर्टिफिशियल, सेमिनेशन, फास्टेड और वैक्सीनेशन की तीन महीने की ट्रेनिंग युवाओं को दी जाएगी। साथ ही 500 लोगों को रोजगार भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में यह पहली गौ अभ्यारण्य है। अगर यह परियोजना कामयाब रही तो अन्य जनपदों में भी इसे साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौ अभ्यारण्य परियोजना से जनपद के काफी लोग जुड़ रहे हैं, इसमें जिले के बिजनेस मैन, व्यापारी और औधोगिक क्षेत्र के लोग आगे बढ़कर आए हैं। साथ ही किसानों को भी इस परियोजना से जोड़ा जाएगा। मंत्री ने कहा, यह अभ्यारण्य आवारा पशुओं से संबंधित कुछ मुद्दों को हल करेगा। जल्द ही सड़कों और खेतों पर जो आवारा मवेशियों यहां लाया जाएगा।

 

शमा सिकंदर ने पहली बार लगाए शास्त्रीय संगीत पर ठुमके लगाए

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अनिल बेदाग, अनिल बेदाग
शमा सिकंदर भारतीय फिल्म जगत की सबसे खूबसूरत और बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक है। वह उनके लुक्स और उनके एक्टिंग के लिए जानी जाती है। सोशल मीडिया पर उनके काफी चाहनेवाले है। शमा सिकंदर के बारे में एक बात है जो बहुत काम लोग जानते है और वह है, शास्त्रीय संगीत पर थिरकने की उनकी कला। जी हाँ उन्होंने हाल ही में एक ईवेंट में अपनी इस टैलेंट को पहली बार लोगों के सामने प्रदर्शित किया।
    शमा सिकंदर को जयपुर में एक लाइव शो के दौरान, पहली बार मंच पर शास्त्रीय संगीत पर थिरकते हुए देखा गया था और उन्होंने अपने इस अद्भुत प्रदर्शन से लोगों का दिल जीत लिया। इस परफ़ॉर्मेंस के उनको लहंगा चोली अवतार में देखा गया और इस लुक मैं वह ‘अनारकली’ की तरह लग रही थी। उन्होंने ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपने इस लाइव परफ़ॉर्मेंस की कुछ तस्वीरें साझा कीं और लिखा, “एक कलाकार यही चाहता है कि दर्शक उनके साथ उनके प्रदर्शन का आनंद लें और उसकी सराहना करें… जयपुर में मेरे आखिरी स्टेज शो में मेरा यही अनुभव था, ऐसी उत्साही भीड़ को देखना और “वन्स मोर” सुनना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य था। क्या शानदार पल का अनुभव हुआ। आपकी सराहना और प्यार के लिए आप सभी का आभार! आप मेरे चेहरे पर खुशी देख सकते है।
इस शानदार नृत्य प्रदर्शन के साथ, शमा सिकंदर ने लोगों को संदेश दिया की आप आगर कुछ अच्छा जानते हो कर सकते हो तो लोगों के सामने लाओ। इसे सिर्फ अपने तक सीमित मत रखो। जयपुर में इस तरह के शानदार परफ़ॉर्मेंस के लिए शमा को बधाई और अब इसके बाद उम्मीद है की नजदीक के भविष्य में शमा की ओर से ऐसे और भी लाइव प्रदर्शन हमें देखने को मिलेंगे। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।

मिर्ग में राज बब्बर, अनूप सोनी, सतीश कौशिक के साथ काम कर रोमांचित हैं श्वेताभ सिंह

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9 फरवरी 2024 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी मिर्ग

मुम्बई। निर्देशक तरुण शर्मा की फिल्म ‘मिर्ग’ 9 फरवरी को सिनेमाघरों पर दस्तक देने वाली है। फिल्म में राज बब्बर, सतीश कौशिक, श्वेताभ सिंह और अनूप सोनी मुख्य भूमिका में है। फिल्म के निर्देशक और स्टार कास्ट से हुई बातचीत में उन्होंने फिल्म से जुड़ी रोचक जानकारियां साझा की।
निर्देशक तरुण शर्मा ने बताया कि यह उनकी बतौर निर्देशक पहली फिल्म है लेकिन इससे पहले उन्होंने सहायक निर्देशक के तौर पर कई बड़ी फिल्मों में काम किया है। फिल्म का नाम ‘मिर्ग’ रखने के पीछे की कहानी बताई की मिरग तेंदुए प्रजाति का जानवर है जो हिमांचल की पहाड़ियों पर मिलने वाला दुर्लभ किस्म का जानवर है। जिसकी खूबी यह है कि वह स्वयं को आसानी से छुपा सकता है। इसकी पूँछ लंबी होती है और यह दूसरे तेंदुओं से तेज, शातिर, चालक और बहरूपिया होता है। फिल्म का मुख्य किरदार भी एक साधारण इंसान से जिंदगी की मुश्किलें झेलता हुआ मिर्ग की तरह बन जाता है। तरुण ने बताया कि उनकी फिल्म में अभिनेता राज बब्बर का अलग किरदार दिखाने की कोशिश की है। वैसे राज बब्बर ने फिल्मों में भिन्न भिन्न किरदार निभाए हैं, इस बार उनके किरदार के साथ कुछ एक्सट्रीम करने की कोशिश की गई है। फिल्म के मुख्य अभिनेता श्वेताभ सिंह है यह उनकी डेब्यू फिल्म है जिसमें यह अनिल की भूमिका निभा रहे हैं।
श्वेताभ अपने किरदार के बारे में बताते है कि वह एक सरल इंसान है, लेकिन जहाँ वह काम करते हैं उस जगह उन्हें महसूस होता है कि वह गुलामों जैसी जिंदगी जीने के लिए नहीं बने उनके जीवन में फिर बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। फिल्म के सभी किरदार ग्रे शेड में है जिन्हें जज करना मुश्किल है कि यह अच्छा कर रहा है या बुरा। फिल्म में दिवंगत अभिनेता सतीश कौशिक भी अपनी पुरानी इमेज को छोड़ कर फिल्म में हथियार उठाते दिखेंगे। यह सतीश कौशिक की पहली और अंतिम फिल्म है जिसमें उनका किरदार बंदूकों के साथ खेल रहा है। श्वेताभ ने बताया कि सतीश के साथ अभिनय करना उनके लिए बेहतरीन अनुभव रहा।
अभिनेता अनूप सोनी ने भी अपने किरदार और फिल्म के बारे में विस्तार से बताया। इस फिल्म में वह राज बब्बर के हितैषी बने हैं और उन्हीं की बातों को मानते हैं। इस किरदार में, ना कुछ पाने का लालच है ना ही अपने आप को बेहतर बनाने की कोई इच्छा। संतोषी मन है और अपने मालिक का अंधभक्त। इस फिल्म में अनूप सोनी का किरदार उनके द्वारा निभाये अभी तक के किरदारों से अलग है। एक ही जैसी भूमिका करते हुए उनकी छवि एक किरदार में बंध गई थी, वह अपने पुरानी छवि से अलग करना चाहते हैं इसके लिए उन्हे कई अच्छे प्रोजेक्ट को ना कहना भी पड़ा। जिसके लिए अभिनय से एक ब्रेक लेना पड़ा। यह उनके लिए एक कठिन फैसला रहा। उनके आगामी प्रोजेक्ट में दो वेब सीरीज़ ‘फ़ॉर योर आईज ओनली’ और ‘लल्ला’ है और एक हिंदी फिल्म ‘कबीर’ है जिसमें वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
फिल्म ‘मिर्ग’ एक रिवेंज ड्रामा है। जिसमें सस्पेंस बना रहता है कि आखिर शिकार कौन है और शिकारी कौन है? फिल्म का संगीत फिल्म को गति प्रदान करने वाला है। निर्देशक के किरदार की अपनी वास्तविकता और स्वाभाविकता को बनाये रखने का प्रयास किया है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है जो कि बहुत ही मनोरंजक और दिलचस्प है।
फिल्म मिर्ग को यूके स्थित स्टूडियो आरए द्वारा वित्तीय सहयोग प्राप्त है। और इस फिल्म के निर्माता ऋषि आनंद, नामा प्रोडक्शंस (श्वेताभ सिंह) और वनशॉट फिल्म्स (तरुण शर्मा) हैं। मिर्ग फिल्म की शूटिंग हिमाचल प्रदेश के ऊना, हमीरपुर, गोविंद सागर झील और जंगलों में की गई है।

– गायत्री साहू

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् – तीन दिवसीय  विशाल क्षेत्रीय किसान मेले का आयोजन कर रहा है

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वाराणसी स्थित भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् – भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान 03 से 05 फरवरी  2024 तक शहंशाहपुर परिसर में तीन दिवसीय  विशाल क्षेत्रीय किसान मेले का आयोजन कर रहा है। इस मेले में उत्तर प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक भी उपस्थित रहेंगे।

संस्थान के निदेशक डॉ तुषार कान्ति बेहेरा ने बताया कि उन्नत कृषि उपायों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य एवं कृषक समृद्धि पर आयोजित होने वाले इस मेले में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सब्जियों की उन्नत खेती, पालीहाउस, हाई टेक नर्सरी, जैविक खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, कृषि यंत्रीकरण, ड्रोन, कीट एवं रोग प्रबंधन जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किये जायेंगे, जिसमें देशभर से आये कृषि विशेषज्ञ किसानों के साथ संवाद किया जाएगा।

यह मेला एसोसिएशन फॉर प्रमोशन ऑफ़ इनोवेशन इन वेजिटेबल्स, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, राज्य सरकार, सरकारी एवं निजी प्रतिष्ठानों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। मेले में मुख्य आकर्षण सब्जी प्रदर्शनी एवं विभिन्न प्रतिष्ठानों द्वारा कृषि उत्पादों/ यंत्रों का प्रदर्शन एवं विक्रय है। राज्य और केंद्र सरकार, विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि-व्यवसाय संस्थानों और अनेक कंपनियों के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और 6 अलग-अलग राज्यों के 5 हज़ार से अधिक किसान तीन दिनों तक आयोजित होने वाले इस मेले में भाग ले रहे हैं।

डॉ बेहेरा ने बताया कि 2022-23 में देश में रिकॉर्ड 330 मिलियन टन खाद्यान एवं 350 मिलियन टन बागवानी उत्पादन हुआ। आज देश ना केवल खाद्य उत्पादन में आत्म निर्भर है बल्कि हम विदेशों में कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रहे हैं। इस सफलता की गाथा में किसानों, नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों एवं अनेक हितधारकों का महत्वपूर्ण योगदान शामिल है। भविष्य में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए जलवायु परिवर्तन, भंडारण, विपणन, प्रसंस्करण एवं कृषि से स्वरोजगार जैसी मुद्दों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

देश में व्यवस्थित सब्जी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 1999 में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) की स्थापना वाराणसी में हुई। भारत में पूरी तरह सब्जी अनुसंधान पर समर्पित यह अकेला संस्थान है जहां सब्जी की नई उन्नतशील किस्में, उनकी सस्य प्रोद्योगिकी एवं कीट तथा बीमारियों के प्रभावकारी नियंत्रण के लिए अनुसंधान कार्य किया जा रहा है। संस्थान द्वारा अब तक सब्जियों की 76 मुक्त परागित तथा 12 संकर किस्मों का विकास किया जा चुका है। इसके साथ-साथ सब्जियों की अनुमोदित किस्मों के बीज का उत्पादन भी किया जा रहा है l संस्थान द्वारा विकसित इन तकनीकों को अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, किसान गोष्ठी, प्रशिक्षण, किसान मेला आदि के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है। यह किसान मेला इसी दिशा में किया गया एक सार्थक प्रयास है। निदेशक डॉ बेहेरा ने संस्थान के निकटतम गाँवों के किसानों का आवाहन किया है कि वे अधिकतम संख्या में सम्मिलित होकर मेले में आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों के माध्यम से उन्नत कृषि की जानकारी हासिल करें।

देहरादून के कांजी हाउस में गायों की मौत के बाद निकालीं आंखे

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Uttarakhand News: उत्तराखंड में एक तरफ पशुशाला के लिए पशु मंत्री के द्वारा लगातार अच्छी व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं. दूसरी तरफ उत्तराखंड के अंदर देहरादून जो कि प्रदेश की राजधानी है, वहां पर गोवंशीय पशुओं की हालत बदतर होती जा रही है. इसके बाद उत्तराखंड के अंदर बवाल मच गया है. राजधानी देहरादून के कांजी हाउस में एक बार फिर दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है. जहां पर कई गाय मृत मिली हैं, जिनकी आंखें तक निकली हुई नजर आ रही है. वहीं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के द्वारा कांजी हाउस का निरीक्षण किया गया, जहां पर भारी अनियमित को देखकर उन्होंने संचालकों पर कठोर कार्रवाई करने की बात कही है. नगर आयुक्त का कहना है कि जो भी गौशाला संचालक है उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने बताया कि गौवंश के संरक्षण को लेकर लगातार काम किया जा रहा है, लेकिन कांजी हाउस देहरादून में जिस प्रकार का कारनामा दिल दहलाने वाला है. वहीं पूरे मामले पर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है. गोवंश पशुओं की हालत इतनी खराब थी कि उनकी तस्वीरें तक नहीं ली जा सकतीं. जो लोग इन पशुओं को बचाने का दावा करते हैं, उनके सामने इन पशुओं की हालत इस कदर खराब थी उसके बावजूद भी इनका इलाज ठीक से नहीं मिल पाया. इस सब को देखने के बाद वन्य जीव प्रेमियों में आक्रोश देखने को मिल रहा है.

पुलिस ने दर्ज किया केस

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि कांजी हाउस संचालकों का भी दायित्व बनता है कि यदि गाय बीमार हैं तो उसके लिए डॉक्टर को बुलाया जाए. इसकी सूचना नगर निगम को दी जाए लेकिन संचालकों के द्वारा ऐसा कोई भी काम नहीं किया गया जिसे प्रतीत होता है कि गाय की मौत उनकी लापरवाही के द्वारा हुई है. भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो उन्होंने मामले में पुलिस में भी मुकदमा दर्ज कराया है. वहीं नगर आयुक्त का कहना है जो भी गौशाला संचालक हैं, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले में पुलिस ने बजरंग दल के पदाधिकारियों को किया गिरफ्तार

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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, इस संगठन के सदस्यों पर कथित तौर पर दुर्भावना के तहत गायों के कंकाल कुछ स्थानों पर रखने के आरोप में कार्रवाई की गई है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 16 और 28 जनवरी को छजलैट थाना क्षेत्र में पाए गए गाय के कंकालों के मामले में बजरंग दल के मुरादाबाद ज़िला प्रमुख समेत चार लोगों की गिरफ़्तारी हुई है.

उत्तर प्रदेश: मुरादाबाद में बजरंग दल का जिला प्रमुख सुमित उर्फ मोनू विश्नोई ‘बजरंगी’ 3 साथियों समेत गोकशी के मामले में पकड़ा गया है। मोनू विश्नोई ने ये साजिश छजलैट के एसएचओ को हटवाने के लिए रची थी। लेकिन पुलिस के इलेक्ट्रानिक सर्विलांस में वो धरा गया। उसके दो साथी अभी भी फरार हैं। SSP ने दोनों की गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया है। सुमित उर्फ मोनू विश्नोई मुरादाबाद जिले के छजलैट थाना प्रभारी पर मनचाहे काम कराने के लिए प्रेशर बना रहा था। एसएचओ के इंकार कर देने पर उसने उसे हटवाने की ठान ली थी। मोनू ने प्लानिंग के तहत छजलैट क्षेत्र में 15 दिन के भीतर 2 स्थानों पर गायों के अवशेष फिंकवाए थे।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: मुरादाबाद में बजरंग दल का जिला प्रमुख सुमित उर्फ मोनू विश्नोई ‘बजरंगी’ 3 साथियों समेत गोकशी के मामले में पकड़ा गया है। मोनू विश्नोई ने ये साजिश छजलैट के एसएचओ को हटवाने के लिए रची थी। लेकिन पुलिस के इलेक्ट्रानिक सर्विलांस में वो धरा गया। उसके दो साथी अभी भी फरार हैं। SSP ने दोनों की गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया है। सुमित उर्फ मोनू विश्नोई मुरादाबाद जिले के छजलैट थाना प्रभारी पर मनचाहे काम कराने के लिए प्रेशर बना रहा था। एसएचओ के इंकार कर देने पर उसने उसे हटवाने की ठान ली थी। मोनू ने प्लानिंग के तहत छजलैट क्षेत्र में 15 दिन के भीतर 2 स्थानों पर गायों के अवशेष फिंकवाए थे।

मोनू ने कांवड़ पथ पर भी गाय कटवाकर उसके अवशेष फिंकवाए थे। इसके बाद वो थाना क्षेत्र में गोकशी की घटनाएं बढ़ने का हवाला देकर बजरंग दल कार्यकर्ताओं के साथ छजलैट थाने पर धरना प्रदर्शन करने भी पहुंच गया था। वो लगतार यही मांग कर रहा था कि गोकशी रोकने में नाकाम छजलैट के थाना प्रभारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।

16 जनवरी को कांवड़ पथ पर मिले थे गाय के अवशेष
मुरादाबाद में हरिद्वार हाईवे पर अगवानपुर से कांठ तक कांवड़ पथ बना है। कांवड़ के दिनों में कांवड़िए इस पथ का इस्तेमाल करते हैं। 16 जनवरी को कांवड़ पथ पर छजलैट थाना क्षेत्र में समदपुर चौराहे के पास एक गाय का सिर और खाल पड़ी मिली थी। सूचना देने वाले ने पुलिस को बताया था कि वो 10 मिनट पहले उस रास्ते से गुजरा तो कुछ नहीं था लेकिन 10 मिनट बाद वहां गाय के अवशेष पड़े मिले। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके मामले की छानबीन शुरू कर दी। लेकिन पड़ताल में मौके पर गोकशी होने के कोई अवशेष नहीं मिले। छानबीन में पता चला कि किसी दूसरे स्थान से अवशेष लाकर कांवड़ पथ पर डाले गए हैं।

29 जनवरी को फिर कटी गाय,मौके पर लोअर में मिला पर्स 
29 जनवरी को छजलैट थाने के गांव चेतरामपुर के जंगल में फिर से गाय के अवशेष पड़े मिले। पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उन्हें मौके पर गाय की कटी हुई गर्दन, पशु काटने के उपकरण और एक लोअर घटनास्थल पर पड़ा मिला। लोअर की जेब में एक पर्स था। कुछ पैसे भी रखे थे। इसमें एक फोटो और डायरी भी पुलिस को मिली थी। डायरी पर महमूद और अजहर के नाम और मोबाइल नंबर थे। फोटो की शिनाख्त करने पर फोटो महमूद पुत्र मकसूद निवासी चेतरामपुर थाना छजलैट मुरादाबाद का निकला। पुलिस ने इस घटना का भी मुकदमा दर्ज करके मामले की छानबीन शुरू कर दी।

छजलैट एसओ को हटाने के लिए बजरंग दल का प्रदर्शन इन दो घटनाओं के सामने आने के बाद बजरंग दल के जिला प्रमुख सुमित उर्फ मोनू विश्नोई ने 30 जनवरी को छजलैट एसओ को हटाने के लिए छजलैट थाने का घेराव कर धरना प्रदर्शन किया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं के साथ छजलैट थाने पर धरना देने पहुंचे मोनू विश्नोई ने तत्काल छजलैट थाना प्रभारी को सस्पेंड करने की मांग की। प्रदर्शन करने वाले बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने कहा कि छजलैट क्षेत्र में गोकशी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसलिए छजलैट के थाना प्रभारी को सस्पेंड किया जाए।

SSP ने गठित की उच्च स्तरीय टीम 
जिले में 15 दिन के भीतर एक ही थाना क्षेत्र में 2 स्थानों पर गाय के अवशेष मिलने की घटना को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी हेमराज मीणा ने एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में उच्च स्तरीय टीम का गठन किया। घटनाओं के खुलासे के लिए सर्विलांस सेल को भी लगाया। पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों के जरिए भी छानबीन शुरू कर दी। दोनों घटनाएं गोकशी की घटनाओं से एकदम अलग थीं। इसलिए इनके पीछे किसी की साजिश होने की आशंका में भी पुलिस काम कर रही थी। अब आपको बताते हैं कि पुलिस ने इस साजिश का राजफाश कैसे किया

लोअर में मिले मोबाइल नंबरों से जुड़ती गईं कड़ियां 
29 जनवरी की घटना में पुलिस को घटनास्थल से मिले लोअर में महमूद निवासी चेतरामपुर थाना छजलैट का फोटो और मोबाइल नंबर मिला था। पुलिस ने महमूद को थाने बुलाकर पूछताछ की तो उसने बताया कि उसकी अपने ही गांव के शाहबुद्दीन पुत्र मुज्जफर हुसैन से रंजिश चल रही है। दरअसल कुछ वक्त पूर्व शाहबुद्दीन के भाई रूकसाद की मृत्यु हो गई थी। शाहबूददीन अपने भाई रूकसाद की मौत के लिए महमूद और उसके परिवार को जिम्मेदार मानता था। कुछ दिन पहले शाहबुद्दीन ने महमूद से उसका मोबाइल नंबर लिया था। उसने पूर्व में हुए झगड़े में उसे धमकी भी दी थी कि वह उसे किसी मामले में फंसा देगा।

शाहबुद्दीन बोला- बजरंग दल नेता के कहने पर काटी गाय 
शाहबुद्दीन ने पुलिस को बताया कि बजरंग दल के जिला प्रमुख मोनू विश्नोई ने उससे कहा था कि तुम गाय के अवशेष रखने के बाद हमें बता देना। इसके बाद हम इस सूचना पर पुलिस पर दबाव बनाकर तुम्हारे विपक्षी महमूद उर्फ मोटा व अजहर को गोकशी के मुकदमे में जेल भिजवा देंगे। राजीव चौधरी द्वारा गौवंश का खाल व सिर रखने के लिए नईम निवासी सिकरी को 2000 रुपये का प्रलोभन भी दिया गया था।

जंगल में घूम रही गाय को काटकर कांवड़ पथ पर फेंका था शाहबुद्दीन ने पुलिस को बताया, मैंने और मेरे भाई जमशेद तथा नईम ने इन तीनों के कहने प एक घुमंतू गाय को मारकर 16 को गाय का सिर और खाल लाकर समदपुर से मानपुर को जाने वाले रास्ते पर कांवड़ पथ पर रख दिया था। इसके बाद कॉल करके तीनों को बता भी दिया था। लेकिन जैसा इनके साथ हमारा तय हुआ था वैसा न होकर पुलिस द्वारा इस घटना में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।

प्लान काम नहीं किया तो बोले एक बार फिर गोकशी करो शाहबुद्दीन ने पुलिस को बताया कि कांवड़ पथ पर गाय के अवशेष रखने के मामले में उसके दुश्मन जेल नहीं गए तो उसने बजरंग दल नेता से नाराजगी जाहिर की। इसके बाद 23 जनवरी को मानपुर खानपुर निवासी रमन चौधरी हमसे मिला और आश्वासन दिया कि एक बार फिर से गोकशी करो तो इस बार हम पुलिस पर दबाव बनाएंगे। उसने हमें मोनू विश्नोई और राजीव चौधरी से भी मिलवाय

विश्वविख्यात कथा वाचक श्री मोरारी बापू ने म्यूज़िकल सीरीज ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ का किया विमोचन

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विश्वविख्यात कथा वाचक श्री मोरारी बापू ने म्यूज़िकल सीरीज ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ का किया विमोचन
                    शेमारू शेमारू एंटरटेनमेंट लिमिटेड की संगीतमयी प्रस्तुति ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ का विमोचन‌ पिछले दिनों मुंबई में आयोजित एक भव्य समारोह में विश्वविख्यात कथा वाचक श्री मोरारी बापू ने किया। अपने जीवन को रामायण व सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर देने वाले और पिछले 60 सालों से अधिक समय से राम कथा का वाचन करते आ रहे श्री मोरारी बापू के द्वारा इस म्यूज़िकल सीरीज का विमोचन किया जाना म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए एक सुखद संदेश है। ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ नामक यह  धार्मिक व दिव्य प्रस्तुति लोकप्रिय पारंपरिक गीतों और नये कलाकारों के गीतों से सजी एक विशिष्ट श्रृंखला है।
इसमें जाने-माने गायक सुरेश वाडकर की आवाज़ के अलावा सचिन पिलगांवकर के स्वर भी सुनाई देंगे जिन्होंने पहली बार भक्ति से परिपूर्ण गीतों को अपनी आवाज़ दी है। उल्लेखनीय है कि इस म्यूज़िकल सीरीज़ में अन्वेशा, दीपक पंडित, गोविंद प्रसन्न सरस्वती साधो बैंड, पृथ्वी गंधर्व, अवधेंदू शर्मा, जेजे विक जैसे कलाकारों की उम्दा कलाकारी भी देखने को मिलेगी। ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ पूरी तरह से विष्णु के सातवें अवतार के रूप में अपनी मान्यता रखने वाले मर्यादा पुरूषोत्तम राम को समर्पित श्रृंखला है जिनकी कहानी रामायण में चौपाइयों के माध्यम से प्रस्तुत की गयीं है। श्री राम हर तरह की सीमाओं से परे हैं और उनकी दिव्यता का स्वरूप वैश्विक है। शेमारू की नवीनतम प्रस्तुति ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ वैश्विक स्तर पर प्रभु राम के प्रभाव को रेखांकित करती है। राम लला के जन्म बधाई गीत से लेकर राम-सीता के विवाह, रघुनन्दन सुप्रभातम से लेकर शाम की अयोध्या आरती, संक्षिप्त गीत रामायण से लेकर श्री राम स्तुति तक ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ राम भक्तों के लिए एक अनोखी भेंट है जो हर किसी को पसंद आएगी। यह मधुर संगीतमयी श्रृंखला शेमारू भक्ति नामक यूट्यूब चैनल के अलावा अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। आस्था से परिपूर्ण कंटेट के लिए शेमारू भक्ति नामक चैनल यूट्यूब पर एक बढ़िया स्थान है जिसके 11 करोड़ से ज़्यादा सब्क्राइबर्स हैं।
इसपर मौजूद कंटेट काफ़ी समृद्ध है जिसे दुनिया भर के लोग ख़ूब पसंद करते हैं। शेमारू भक्ति द्वारा निर्मित ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ ‌का मूल मक़सद लोक कथाओं और शास्त्र सम्मत मंत्रों को आधुनिक संगीत का स्वरूप देकर आध्यात्मिकता के माध्यम से सभी उम्र के लोगों को आपस में जोड़ना है। बकौल शेमारू एंटरटेनमेंट लिमिटेड के प्रमुख (नॉन-बॉलीवुड कैटगरी) अर्पित मांकड़ ‘शेमारू भक्ति’ हमेशा से ही अध्यात्म संबंधी कंटेट को हमेशा अनूठे अंदाज़ में पेश करता आया है ताकि दुनिया भर के लोग सीधे पर इससे जुड़ाव महसूस कर सकें। ‘श्री राम भक्ति उत्सव’ म्यूज़िकल सीरीज़ भी हमारा एक ऐसा ही अनोखा प्रयास है ताकि अध्यात्म को संगीत से जोड़कर हम भक्तों और उनके आराध्य राम को और भी करीब ला सकें।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय