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करंट से चिपककर 2 गौवंश की हुई मौत

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, कार्यवाही नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन, वर्ष भर में सैकड़ों गौवंश की करंट लगने से हो चुकी है मौत

मुरैना:- थाना कोतवाली क्षेत्र के दत्तपुरा और पीपल वाली माता मंदिर चौराहे पर गौवंश की करंट से चिपककर मौत हो गई। सूचना मिलते ही गौसेवक महेश राठौर व अभिषेक गौड़ मौके पर पहुंचे और दत्तपुरा से गौवंश को उठवाकर नगर निगम भेजा फिर गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह अपनी टीम के साथ पीपल वाली माता के पास पहुंचे और गौवंश को बुलडोजर मशीन से उठवाकर बिजली घर लेकर पहुंचे जहां बिजली विभाग का घेराव किया और नारेबाजी की जिसके बाद बिजली विभाग के उपमहाप्रबंध यशपाल सचदेवा आए और गौसेवकों से बात की लेकिन बात नहीं बनी फिर महाप्रबंधक राकेश मौर्य से गौसेवकों की बातचीत हुई जिन्होंने आश्वाशन दिया कि जल्द ही ट्रांसफार्मरों को जालियों से सुरक्षित करेंगे।
गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह ने कहा कि जल्द कार्यवाही नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा व पहले भी कई बार कई जगह सैकड़ों गौवंश की करंट से चिपककर मौत हो चुकी है लेकिन प्रशाशन गहरी नींद में सोया हुआ है नगर निगम की भी बड़ी लापरवाही है क्योंकि जहां ट्रांसफार्मर रखे है वहीं कचरे के डंपिंग स्टॉप बनाए है जिससे गौवंश कचरा खाते हैं और करंट से चिपककर मर जाते है। घेराव करने वालो में गौ रक्षा दल के प्रदेश महामंत्री रुद्रप्रताप सिंह,पवन गुर्जर,महेश राठौर,अक्षय गौड़,गौतम,संजय बजरंगी,आलोक आदि मौजूद रहे

गोपाष्टमी के दिन गाय को क्या खिलाएं?

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गोपाष्टमी का त्यौहार गाय माता के प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान को दर्शाता है क्योंकि हिंदू धर्म में गाय को ‘गौ माता’ कहा जाता है और उसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व के दिन भगवान श्री कृष्ण ने पहली बार गौ-चारण लीला शुरू की थी। इसलिए इस पवित्र दिन पर गायों की सेवा और उन्हें कुछ खास चीजें खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और जीवन से दरिद्रता दूर होती है। गोपाष्टमी के अवसर पर गौ माता को विशेष रूप से खिलाने वाली ये 5 चीजें आपके जीवन में सकारात्मकता और शुभता ला सकती हैं। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।

गोपाष्टमी के दिन गाय को क्या खिलाएं?

गाय को हरा चारा, खासकर हरी मटर खिलाना सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गाय को हरा चारा खिलाने से बुध ग्रह मजबूत होता है जिससे बुद्धि, व्यापार और वाणी में वृद्धि होती है। यह बच्चों के जीवन में खुशहाली और तरक्की सुनिश्चित करने के लिए भी एक अच्छा उपाय है।गोपाष्टमी के दिन गाय को गुड़ खिलाने का विशेष महत्व है। गुड़ खिलाने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति को समाज में यश, मान-सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। यह आपकी किस्मत को चमकाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने में भी मदद करता है।

गौ माता को रोटी, विशेषकर घी लगी रोटी या उबले हुए चावल में मीठा मिलाकर खिलाने से घर में धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। यह उपाय आपके परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाता है और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है।

अगर आप अपने धन में वृद्धि चाहते हैं, तो 1 साबुत हल्दी और 5 सफेद कौड़ियों को गाय के माथे से छूकर अपने घर के पूजा स्थान या तिजोरी में रख लें। हालांकि, कौड़ी सीधे खिलाई नहीं जाती बल्कि उसे छूकर गाय माता का आशीर्वाद लिया जाता है।

गोपाष्टमी के दिन गौ माता की पूजा के बाद उन्हें पंचामृत अर्पित करना या पंचामृत से बनी किसी चीज का भोग लगाना शुभ माना जाता है। यह उपाय सभी तरह के पापों से मुक्ति दिलाता है और आपके मन तथा शरीर को पवित्र करता है।

गोपाष्टमी पर इस विधि से करें गौ माता की पूजा

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Gopashtami Puja Vidhi at Home: हर साल गोपाष्टमी का त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल गोपाष्टमी का त्योहार 30 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण और गौ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और साथ में प्रिय भोग भी अर्पित किए जाते हैं। गोपाष्टमी पर्व को लेकर एक मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण और बलराम को गायों को चराने के लिए पहली बार भेजा गया था। इस दिन से ही श्री कृष्ण ने गोचारण लीला शुरू की थी।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गौ माता और श्री कृष्ण की उपासना करने से जातक को आशीर्वाद प्राप्त होता है और साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। यह त्योहार मुख्य रूप से वृंदावन, ब्रज और मथुरा में उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए जानते है कि गोपाष्टमी पर गौ पूजा कैसे करें और इसके क्या नियम हैं।

Gau Puja Vidhi: गोपाष्टमी पूजा एवं सेवा विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, उसके बाद गौ माता को स्नान करवाएं।
  2. पूजा स्थल को गोबर, फूलों, दीपक और रंगोली से सजाएं।
  3. मंदिर में गौ माता और श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. फिर गौ माता के माथे पर रोली और चन्दन लगाएं, पुष्प अर्पित करें।
  5. उनके खुरों पर हल्दी और तेल लगाकर आरती करें।
  6. इसके बाद गाय की परिक्रमा भी करें।
  7. “गोपाल गोविंद जय जय” और “गोमाता की जय” मंत्र का जाप करें।
  8. गाय को हरी घास, चारा और गुड़ खिलाएं।

Ghar Par Gau Puja Kaise Karen: जानें कैसे करें पूजा

  • अगर आपके घर पर गाय नहीं है, तो आप मंदिर में गौ माता की प्रतिमा स्थापित करके पूजा-पाठ करें।
  • गौशाला जाकर गाय की सेवा कर सकते हैं।
  • गौशाला में गायों को भोजन करा सकते हैं, दान दे सकते हैं और उनकी देखभाल भी कर सकते हैं।
  • अपनी क्षमतानुसार गौसेवा करें, इससे श्री कृष्ण भी प्रसन्न होंगे।
  • अगर गोशाला नहीं है, तो आपके आस-पास इलाके में आपको कई आवारा गाय दिख जाएंगी। आप उनकी भी सेवा कर सकते हैं।

Gau Seva: गौ सेवा के लाभ

मान्यता है कि गोपाष्टमी पर की गई गौ सेवा से पापों से मुक्ति मिलती है। इससे परिवार में शांति, आर्थिक सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह दिन विशेष विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है, जिनके जीवन में कई बाधाएं आती हैं और मानसिक तनाव रहता है। जो भी साधक सच्चे मन से गौ माता की सेवा करता है, उसे श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पिछले तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे उत्तराखंड

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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धामी सरकार के प्रयास ला रहे हैं रंग

पर्यटन- तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए जारी पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयास रंग लाने लगे हैं, बीते तीन साल उत्तराखंड में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। इससे होम स्टे, होटल, ढाबा संचालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों से लेकर परिवहन कारोबारियों तक की आजीविका को सहारा मिला है।
प्रदेश सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड में पर्यटन- तीर्थाटन लगातार बढ़ रहा है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में बीते तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड का पर्यटन अब बहुआयामी हो चला है, पर्यटक बड़े शहरों और चुनिंदा हिल स्टेशन तक ही सीमित नहीं बल्कि दूर दराज के छोटे छोटे पर्यटक स्थलों तक भी पहुंच रहे हैं। इसी के साथ राफ्टिंग, ट्रैकिंग, बंजी जम्पिंग, पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में भी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों की भी भागीदारी बढ़ी है। इससे पर्यटन का लाभ प्रदेश के लाखों लोगों तक प्रत्यक्ष तौर पर पहुंच रहा है, इसमें होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे संचालक, परिवहन कारोबारी, महिला स्वयं सहायता समूह शामिल है। प्रदेश में इस समय छह हजार अधिक होम स्टे संचालक सीधे तौर पर बढी हुई पर्यटन गतिविधियों के सीधे लाभार्थी बनकर उभरे हैं।

तीर्थाटन भी बूम पर
प्रदेश मेँ तीर्थाटन गतिविधियां भी काफी बढ़ गई है। इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में ही तीर्थयात्रियों की संख्या 50 लाख को छू रही है। केदारनाथ, यमुनोत्री पैदल मार्ग पर इस साल 4300 से अधिक घोड़े – खच्चर संचालकों ने अपनी सेवाएं दी। प्रदेश सरकार अब शीतकालीन यात्रा को भी बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा से भी पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र में तीथार्टन, पर्यटन तेजी से बढ़ा है।

पयर्टन उत्तराखंड की आर्थिकी आधार है। पर्यटन- तीर्थाटन का लाभ सीधे तौर पर स्थानीय लोगों को मिलता है। इसलिए सरकार वर्षभर पर्यटन – तीर्थाटन गतिविधियों को जारी रखने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों से उत्तराखंड में तीर्थाटन- पर्यटन को बल मिला है।

अनाथालय खोलने की इच्छा रखती है अभिनेत्री हेमा सैनी

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अभिनेत्री हेमा सैनी इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘खेल पासपोर्ट का’ को लेकर चर्चा में हैं। सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता हेरंब त्रिवेदी की प्रेग्नेंट पत्नी का बेहद प्रभावशाली किरदार निभाया है। फिल्म के निर्माता और निर्देशक अर्जुन राज हैं।

हेमा सैनी इससे पहले कई हिंदी, हिमाचली और पंजाबी म्यूज़िक वीडियो सांग्स में नजर आ चुकी हैं। उनका पंजाबी सांग ‘बलिए’ दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था।

हेमा सैनी खुद को सुपरस्टार सलमान खान की बहुत बड़ी प्रशंसक बताती हैं। वह कहती हैं कि लगभग दस साल पहले जब उन्होंने पहली बार सलमान खान को देखा, तभी से वह उनकी मुरीद हो गईं और बॉलीवुड में आने की प्रेरणा भी उन्हें सलमान से ही मिली। हेमा का सपना है कि वह सलमान खान के साथ ऑनस्क्रीन काम करें। उनका कहना है कि सलमान खान की फिल्मों ‘लव’ और ‘जीत’ में अभिनेत्री रेवती और करिश्मा कपूर के किरदारों को वह दोबारा निभाना चाहेंगी, बस हीरो सलमान खान ही हों। वह बिग बॉस का हर सीजन सिर्फ सलमान खान की वजह से देखती हैं।

हेमा का मानना है कि ज़िंदगी को खुलकर जीना चाहिए, क्योंकि “एक ही तो लाइफ है, इसे ऐसे जियो जैसे ये आख़िरी पल हो।”

वह कहती हैं कि उन्हें सादगी से भरे किरदार करना पसंद है, लेकिन एक अभिनेत्री के तौर पर वह पर्दे पर हर किरदार को जीवंत करना चाहती हैं और किसी एक ही छवि में नहीं बंधना चाहतीं। उनका कहना है कि किरदार बड़ा हो या छोटा, बस दमदार होना चाहिए। वह बताती हैं कि अगर मौका मिले तो वह रॉ एजेंट जैसा रोल करना सबसे ज़्यादा पसंद करेंगी।

हेमा को क्राइम, सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों और वेब सीरीज़ का जॉनर पसंद है। अभिनय के साथ-साथ वह समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं। वह कहती हैं कि जब वह अपने करियर में एक मुकाम हासिल कर लेंगी, तब एक अनाथालय खोलना चाहेंगी। फिलहाल भी वह राजस्थान के अनाथालयों में जाकर बच्चों की मदद करती हैं।

वर्तमान में हेमा सैनी अपने नए प्रोजेक्ट्स और फिल्मों पर ध्यान दे रही हैं। आत्मविश्वास, सादगी और मेहनत से भरपूर हेमा सैनी अपनी अदाकारी से बॉलीवुड में एक अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की भाव दृष्टि

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(विवेक रंजन श्रीवास्तव- विनायक फीचर्स)

संस्कृत साहित्य के आदि स्रोत के रचयिता, महाकाव्य परंपरा के प्रवर्तक, करुणा रस के जन्मदाता महर्षि वाल्मीकि की भाव दृष्टि भारतीय काव्य चेतना का मूलाधार है। जब एक क्रौंच जोड़े के वियोग में व्याकुल होकर उनके हृदय से स्वत: स्फुरित हुआ मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगम:शाश्वती: समा:। यत्क्रौं चमिथुनादेकमवधी: काममोहितम्॥
तब केवल एक श्लोक का जन्म नहीं हुआ, बल्कि संपूर्ण भारतीय काव्य परंपरा का उद्गम हुआ। यह श्लोक उनकी भाव दृष्टि का प्रतीक है, जहाँ करुणा, न्याय और सौंदर्य का अद्भुत संगम है।
महर्षि वाल्मीकि की भाव दृष्टि का केंद्रीय तत्व करुणा है। रामायण का प्रारंभ ही करुणा से होता है। एक निरीह पक्षी की हत्या देखकर उन का हृदय द्रवित हो उठा। यह करुणा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण जीव जगत के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाती है। रामायण में सीता के वनवास, भरत की विरह व्यथा, उर्मिला का मौन त्याग, शबरी की भक्ति, और जटायु का आत्मबलिदान, सभी प्रसंगों में करुणा रस की अविरल धारा प्रवाहित होती है। महर्षि वाल्मीकि ने दिखाया कि करुणा दुर्बलता नहीं, बल्कि मानवता का सर्वोच्च गुण है।
श्रीराम का रावण के प्रति युद्ध के बाद का व्यवहार, विभीषण के प्रति सम्मान, और यहाँ तक कि शत्रुओं के प्रति भी मानवीय दृष्टिकोण, महर्षि वाल्मीकि की करुणामय भाव दृष्टि को प्रकट करता है।
महर्षि वाल्मीकि की दृष्टि में धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन का व्यावहारिक दर्शन है।श्री राम उनके लिए मर्यादा पुरुषोत्तम मनुष्य हैं, न कि निर्दोष देवता। महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम को मानवीय दुर्बलताओं और संघर्षों के साथ प्रस्तुत किया। सीता निर्वासन का प्रसंग इस बात का प्रमाण है कि महर्षि वाल्मीकि ने राजधर्म और व्यक्तिगत धर्म के बीच के द्वंद्व को ईमानदारी से चित्रित किया। उनकी भाव दृष्टि में धर्म का अर्थ है सत्य, न्याय, करुणा और कर्तव्य का समन्वय है। दशरथ की भूल, कैकेयी का मोह और अहंकार, राम का आज्ञाकारी पुत्र होना , लक्ष्मण का भ्रातृ प्रेम, सभी पात्रों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि ने दिखाया कि धर्म सदैव सरल नहीं होता, वह जटिल परिस्थितियों में कठिन निर्णय माँगता है।
महर्षि वाल्मीकि की भाव दृष्टि में स्त्री का स्थान अत्यंत गरिमामय है। सीता केवल पतिव्रता नारी नहीं, बल्कि स्वाभिमानी, साहसी और निर्णायक व्यक्तित्व की धनी हैं। अग्नि परीक्षा के बाद भी जब राम ने उन्हें त्यागा, तो सीता ने अपना आत्मसम्मान बनाए रखा और अंतत: धरती में समा गईं। यह उनकी स्वतंत्र इच्छा का प्रतीक है। कैकेयी को महर्षि वाल्मीकि ने खलनायिका के रूप में नहीं, बल्कि एक जटिल मनोविज्ञान वाली स्त्री के रूप में चित्रित किया। मंथरा के माध्यम से उन्होंने दिखाया कि कैसे ईष्र्या और असुरक्षा मनुष्य को गलत रास्ते पर ले जाती है। शबरी, अहिल्या, तारा, मंदोदरी, सभी स्त्री पात्रों को महर्षि वाल्मीकि ने गहन मानवीय संवेदना के मनोविज्ञान के साथ रचा है।
वाल्मीकि की भाव दृष्टि में प्रकृति केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक सजीव पात्र है। चित्रकूट, पंचवटी, किष्किंधा, लंका, प्रत्येक स्थान का वर्णन इतना जीवंत है कि पाठक स्वयं को वहाँ अनुभव करता है। ऋतु वर्णन, वन वर्णन, नदी वर्णन, सभी में वाल्मीकि का सूक्ष्म निरीक्षण और गहन प्रकृति प्रेम प्रकट होता है। प्रकृति उनके काव्य में मनुष्य के भावों का प्रतिबिंब भी है। राम के वनवास में प्रकृति उदास है, युद्ध के समय उग्र है, और मिलन के क्षणों में प्रफुल्लित है। यह सौंदर्य बोध और प्रकृति के साथ तादात्म्य वाल्मीकि की अद्वितीय भाव दृष्टि का परिचायक है।
वाल्मीकि ने मानवीय संबंधों को अद्भुत गहराई और सूक्ष्मता से चित्रित किया है। राम और लक्ष्मण का भ्रातृ प्रेम, राम और भरत का आदर्श संबंध, राम और सीता का दांपत्य, राम और हनुमान की स्वामी सेवक भक्ति का विलक्षण वर्णन, सुग्रीव और बालि का द्वंद्व, प्रत्येक संबंध में वाल्मीकि ने मानवीय भावनाओं की जटिलता को उकेरा है। विशेष रूप से भरत का चरित्र वाल्मीकि की मनोवैज्ञानिक दृष्टि का उत्कृष्ट उदाहरण है। सिंहासन पर राम की चरण पादुका रखकर भरत का राज्य करना, त्याग और भक्ति की पराकाष्ठा है। उर्मिला का मौन त्याग, जो महाकाव्य में प्रत्यक्ष रूप से वर्णित नहीं है, फिर भी उस दृश्य की उपस्थिति महत्वपूर्ण है।
वाल्मीकि की भाव सृजनात्मक क्षमता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने रावण को एकआयामी खलनायक नहीं बनाया। रावण विद्वान, पराक्रमी, शिव भक्त और महान राजा है। उसकी एक कमजोरी, काम वासना, उसके पतन का कारण बनती है। वाल्मीकि ने दिखाया कि हर व्यक्ति में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। विभीषण के माध्यम से वाल्मीकि ने बताया कि धर्म के लिए अपने परिवार का भी विरोध करना पड़ सकता है। इंद्रजीत, कुंभकर्ण, सभी पात्रों को मानवीय गरिमा के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह समग्र मानवीय दृष्टि वाल्मीकि को महानतम बनाती है।
वाल्मीकि की रामायण में भक्ति और ज्ञान का अद्भुत समन्वय है। राम केवल शक्तिशाली योद्धा नहीं, बल्कि ज्ञानी और विवेकशील हैं। हनुमान की भक्ति में ज्ञान और बल का संयोग है। जटायु का आत्मबलिदान भक्ति की पराकाष्ठा है। वाल्मीकि ने दिखाया कि सच्ची भक्ति अंधविश्वास नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और कर्तव्य पालन है। उनकी दृष्टि में भक्ति और कर्म, ज्ञान और प्रेम, सभी का संतुलित स्थान है।
वाल्मीकि की भाव पूर्ण दृष्टि में सामाजिक और राजनीतिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती है। राजधर्म, प्रजा पालन, न्याय व्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था, सभी पर उनके विचार शाश्वत बन पड़े हैं। राम का वनवास पिता की आज्ञा का सम्मान है, भले ही वह स्वयं दशरथ के लिए व्यक्तिगत रूप से कितना कष्टदायक हो। शबरी और निषादराज गुह के माध्यम से वाल्मीकि ने समाज के अपेक्षाकृत विपन्न वर्गों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। यह उनकी व्यापक सामाजिक भाव दृष्टि का परिचायक है। वाल्मीकि की दृष्टि उनके काव्य शिल्प में भी प्रतिबिंबित होती है। श्लोक रचना, अलंकार, उपमा, रूपक, सभी में स्वाभाविकता है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहमय और हृदयस्पर्शी है। वे कहीं भी कृत्रिमता का आश्रय नहीं लेते। युद्ध वर्णन में वीर रस, विरह प्रसंगों में करुण रस, प्रकृति वर्णन में शांत रस, सभी रसों का स्वाभाविक संचार उनके काव्य में है। यह काव्य शिल्प और भाव सौंदर्य का अद्भुत समन्वय वाल्मीकि को आदि कवि बनाता है। उन्होंने काव्य धारा के स्त्रोत से जो अविरल धारा उत्खनित की है वह निरंतर भी रही है।
महर्षि वाल्मीकि की भाव दृष्टि केवल एक काल या समाज तक सीमित नहीं है, वह शाश्वत और सार्वभौमिक है। वह केवल संस्कृत भाषा की पूंजी नहीं, वह ऐसी चेतना है जो अभिव्यक्ति है, इसीलिए हिंदी सहित प्रत्येक भाषा का मूल आधार बनी । उनकी करुणा, मानवीयता, धर्म बोध, प्रकृति प्रेम, और समग्र जीवन दृष्टि आज भी प्रासंगिक है। शाश्वत है महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से न केवल एक महाकाव्य रचा, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति, एक दर्शन और एक आदर्श का समग्र संस्कार प्रस्तुत किया। एक संस्कृति की रचना की है। उनकी भाव दृष्टि हमें सिखाती है कि जीवन में संघर्ष, द्वंद्व और कठिनाइयां अनिवार्य हैं, लेकिन करुणा, धर्म, और मानवीयता के साथ इन्हें पार किया जा सकता है। वाल्मीकि सच्चे अर्थों में आदि कवि हैं क्योंकि उन्होंने काव्य को केवल शब्द विन्यास नहीं, बल्कि हृदय की अभिव्यक्ति, जीवन का दर्पण और मानवता का संदेश बनाया।
आज जब संसार हिंसा, द्वेष और असहिष्णुता से जूझ रहा है, महर्षि वाल्मीकि की करुणामय भाव दृष्टि एक प्रकाश स्तंभ की तरह हमारा मार्गदर्शन कर सकती है। उनका संदेश सरल है। मनुष्य बनो, संवेदनशील बनो, धर्म का पालन करो, और सभी प्राणियों के प्रति करुणाभाव रखो। यही सच्ची मानवता है, यही जीवन का सार है। उनकी रचना से महर्षि वाल्मीकि किसी वर्ग मात्र के आराध्य नहीं वे मानव मात्र के वैश्विक नायक के स्वरूप में प्रतिष्ठित किए जाने चाहिए। (विनायक फीचर्स)

मत्स्य पालन विभाग अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपों में मछुआरों के प्रशिक्षण को सशक्त करेगा

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 मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग (डीओएफ) के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज मुंबई में एक हाइब्रिड समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) और केंद्रीय मत्स्य नौवहन एवं अभियांत्रिकी प्रशिक्षण संस्थान (सिफनेट) द्वारा अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपों में किए गए प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा करना था।

अपने संबोधन में डॉ. लिखी ने प्रभावशाली और एकजुट परिणाम देने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सहयोगी योजना और अधीनस्थ कार्यालयों के बीच तालमेल के महत्व पर ज़ोर दिया। डॉ. लिखी ने भारत के समुद्री मत्स्य पालन विकास में, विशेष रूप से टूना मत्स्य पालन क्षेत्र में, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने सुसंगत परिणाम देने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सहयोगात्मक योजना और अधीनस्थ कार्यालयों के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया जिससे वे आधुनिक मछली पकड़ने की तकनीकों और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन प्रौद्योगिकियों (पोस्ट-हार्वेस्ट हैंडलिंग टेक्नोलॉजीज) को अपनाने में सक्षम हो सकें। डॉ. लिखी ने आगे सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों के अत्यधिक प्रेरित और कुशल मछुआरों को साशिमी-ग्रेड टूना हैंडलिंग, प्रसंस्करण और कोल्ड चेन संरक्षण तकनीकों में उन्नत विदेशी प्रशिक्षण के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने और भारतीय समुद्री उत्पादों की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।  उन्होंने दूरदराज के द्वीपीय क्षेत्रों में समुद्री क्षमता को सुदृढ़ करने में एफएसआई और सिफनेट की रणनीतिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

समीक्षा बैठक के दौरान लक्षद्वीप और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में चल रही गतिविधियों और आउटरीच पहलों पर एफएसआई और सिफनेट द्वारा विस्तृत प्रस्तुतियाँ भी दी गईं। समीक्षा के दौरान विशेष पाठ्यक्रमों, व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षेत्र-स्तरीय प्रदर्शनों, स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका में सुधार लाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी प्रसार गतिविधियों आदि के माध्यम से मछुआरों और मत्स्य पालन कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। समीक्षा बैठक में एनएफडीबी, आईसीएआर, एमपीईडीए, नाबार्ड, एनसीडीसी और महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ द्वीपीय प्रशासन और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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गोशाला में बीमार गाय को प्रवेश पर विवाद:

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सरदारशहर : सरदारशहर के बीकानेर रोड स्थित हरा-चारा केंद्र गोशाला में रविवार रात एक बीमार गाय को प्रवेश न देने पर विवाद हो गया। कान्हा जीव रक्षक ग्रुप के सदस्य बीमार गाय को लेकर गोशाला पहुंचे थे। गोशाला प्रशासन ने लंपी रोग फैलने की आशंका जताते हुए गाय को अंदर लेने से मना कर दिया। इस पर ग्रुप के सदस्य गोशाला के बाहर धरने पर बैठ गए।

सूचना मिलने पर विकास मंच अध्यक्ष राजेंद्रसिंह राजपुरोहित भी मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। राजेंद्रसिंह ने चेतावनी दी कि यदि बीमार गाय को गोशाला में नहीं लिया गया तो वे हाईवे जाम करेंगे। गोभक्तों ने निजी डॉक्टर बुलाकर गाय का इलाज भी करवाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रात करीब 11 बजे गोशाला समिति अध्यक्ष गिरधारीलाल पारीक, नायब तहसीलदार प्रहलादराय पारीक और पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा।

गोशाला अध्यक्ष गिरधारीलाल पारीक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में लंपी रोग फैल रहा है, इसलिए बाहर से बीमार गायों को लेने में सावधानी बरती जा रही है ताकि गोशाला की अन्य गायें संक्रमित न हों। नायब तहसीलदार प्रहलादराय पारीक ने आश्वासन दिया कि गोशाला की समस्याओं और गोभक्तों की शिकायतों को एसडीएम के सामने रखा जाएगा। सोमवार को एसडीएम, तहसीलदार और गोशाला समिति के बीच बैठक कर स्थायी समाधान निकाला जाएगा।

पुष्कर मेले में – जयपुर के युवा पशुपालक की स्टॉल आकर्षण का केंद्र

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Pushkar mela 2025: पुष्कर पशु मेले में इस बार भी जयपुर से आए युवा पशुपालक अभिनव तिवारी अपनी अनोखी गायों के साथ चर्चा में हैं. पिछले 6 साल से भाग ले रहे अभिनव तिवारी पुष्कर मेले में हर साल कुछ नया लेकर आते हैं. पुष्कर मेले में उनका स्टॉल इस साल भी चर्चा का विषय बना हुआ है. उनके पास मौजूद गायों की ऊंचाई सिर्फ 28 इंच से 34 इंच तक है, जो इन्हें सामान्य गायों से अलग बनाती है. इनका शरीर भले छोटा हो, लेकिन स्वभाव, दूध की गुणवत्ता और देखभाल की आदतें देसी गायों जैसी ही हैं. वे कहते हैं कि ये गायें विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित हैं, क्योंकि इनका आकार छोटा और स्वभाव शांत होता है.

बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं दर्शक

दर्शक बड़ी संख्या में उनकी प्रदर्शनी देखने पहुंच रहे हैं और इन अद्भुत छोटे आकार के पशुओं को देखकर हैरान हो रहे हैं. इनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है और लोग इनकी पालन-पोषण पद्धति के बारे में जानकारी लेने के लिए तिवारी के स्टॉल पर रुकते हैं.

छोटे कद के घोड़े भी बने आकर्षण

इस बार उन्होंने अपनी छोटे कद की गायों के साथ-साथ हॉर्स (छोटे घोड़े) की प्रदर्शनी भी लगाई है. यह भी पशुप्रेमियों के लिए नया आकर्षण हैं. उनका कहना है कि जैसे छोटे कद की गायों की मांग देशभर में बढ़ रही है, वैसे ही अब मिनी हॉर्स की भी लोकप्रियता बढ़ रही है. अभिनव का लक्ष्य है कि देश में छोटे आकार के पशुओं के संरक्षण और पहचान को बढ़ावा मिले, ताकि पशुपालन को नया स्वरूप और रोजगार का अवसर मिल सके.

Gau Seva Dham Hospital: देवी चित्रलेखा की देख-रेख में गोपाष्टमी की तैयारियां

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Gau Seva Dham Hospital: गौ सेवा धाम होडल जिला पलवल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगामी गोपाष्टमी एवं अक्षत महोत्सव 2025 के कार्यक्रम की रूपरेखा की घोषणा की गई। यह आयोजन 29 अक्टूबर 2025 को देवी चित्रलेखा की देख-रेख में तथा पूज्य श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) के दिव्य सान्निध्य में संपन्न होगा। प्रेस वार्ता में गौ सेवा धाम हॉस्पिटल की संचालिका देवी चित्रलेखा  ने बताया कि इस बार का महोत्सव गौ सेवा, सनातन एकता और जनसेवा का अद्भुत संगम होगा।

मुख्य आकर्षण एवं कार्यक्रम की विशेषताएं: कार्यक्रम का आयोजन गौ सेवा धाम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, एनएच-2, होडल परिसर में किया जाएगा। कार्यक्रम का समय सुबह 9 बजे दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। महोत्सव के दौरान गौ महाभोज का आयोजन होगा, जिसमें हजारों गायों के साथ आसपास की गौशालाएं भी लाभान्वित होंगी। गौ सेवा धाम परिसर में पंचगव्य उत्पादों जैसे धूप, साबुन, औषधि, अर्क और जैविक सामग्री के निर्माण की झलक भी दर्शकों को दिखाई जाएगी।

भक्तों एवं आगंतुकों के लिए गाय के घी से बने प्रसाद का वितरण किया जाएगा। आयोजन में विभिन्न समाजों, संतों, महंतों और सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। इस बार कार्यक्रम को पर्यावरण-सुरक्षित एवं प्लास्टिक मुक्त आयोजन के रूप में आयोजित किया जाएगा।

गौ सेवा धाम के कार्य एवं प्रगति: गौ सेवा धाम हॉस्पिटल में अब तक हजारों गौवंशों का उपचार, पुनर्वास और देखभाल की जा चुकी है। देवी जी ने बताया कि पिछली गोपाष्टमी पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जिस 8 मंजिला गौ हॉस्पिटल बिल्डिंग का भूमि पूजन किया गया था, उसका निर्माण कार्य तेज़ी से प्रगति पर है। निकट भविष्य में यहां आधुनिक पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, आयुर्वेदिक पंचगव्य उत्पाद इकाई तथा गौ आधारित स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

आगामी योजनाएं: पूज्य श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नवंबर 2025 में सनातन हिंदू एकता पदयात्रा (दिल्ली से वृंदावन) प्रारंभ की जाएगी, जो सनातन संस्कृति, धर्म और गौ संरक्षण का सशक्त संदेश देगी। ट्रस्ट युवाओं, महिला मंडलों और स्वयंसेवी संगठनों को भी इस मिशन से जोड़ने की दिशा में कार्यरत है।

गौ सेवा धाम का संदेश: गौ ही धर्म, गौ ही संस्कृति और गौ ही जीवन की आधारशिला है।

प्रेस वार्ता में मौजूद रहे होडल के विधायक हरेंद्र रामरतन ने गौ सेवा धाम परिवार की तरफ से सभी समाजसेवियों, संतों और श्रद्धालुओं से 29 अक्टूबर को होडल पहुंचने और महोत्सव को सफल बनाने का आह्वान किया।