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सलमान खान की फिल्म के बिना अधूरी है यह ईद, फैंस कर रहे हैं सिल्वर स्क्रीन पर सुपरस्टार की मौजूदगी को मिस

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सलमान खान इंडियन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक सबसे बड़ा नाम है। ये मेगास्टार अपनी ऑन-स्क्रीन लार्जर देन लाइफ प्रेजेंस, बेमिसाल करिश्मा, स्वैग और एटीट्यूड की वजह से देश भर में बड़े फैन बेस को एंजॉय करते हैं। जब उन्होंने अपनी ऑन-स्क्रीन लेजर देन लाइफ इमेज से दर्शकों को चकित किया है, बता दें कि उनका ऑफ-स्क्रीन परसोना भी उतना ही जादुई है।

साल 2009 से सलमान खान ने वांटेड, दबंग, बॉडीगार्ड, एक था टाइगर, किक, बजरंगी भाईजान, सुल्तान, भारत और पिछले साल की रिलीज किसी का भाई किसी की जान जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से फैंस और दर्शकों को नवाजा है। कई रिकॉर्ड तोड़ने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्मों के साथ ईद पर, सलमान खान ने अपने आप को इस त्योहार के साथ जुदा कर दिया है। हर साल फैंस और दर्शक सुपरस्टार की फिल्म को ईद पर देखने के इंतजार करते हैं। लेकिन इस साल अलग है क्योंकि सुपरस्टार की कोई ईद रिलीज नहीं है।

ईद पर सलमान खान की फिल्मों की कमी बिना किसी शक उनके फैंस को खल रही है। इसने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है क्योंकि फैंस इस ईद पर सलमान खान की फिल्मों को मिस कर रहे हैं।

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जहां एक तरफ फैंस और दर्शक ईद पर सलमान खान की फिल्म को मिस कर रहे हैं, वहीं सुपरस्टार ने अपनी अगली ईद रिलीज के तौर पर एक बड़े बजट की फिल्म की घोषणा कर दी है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए डायनामिक प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला और गजनी फेम डायरेक्टर एआर मुरुगादॉस के साथ हाथ मिलाया है। घोषणा के बाद से ही दर्शक उन्हें ईद 2025 में स्क्रीन पर धमाल मचाते हुए देखने का इंतजार कर रहे हैं।

इस बीच, सलमान खान आने वाले साल में कुछ रोमांचक फिल्मों में नजर आएंगे, जिनकी घोषणा जल्द ही की जाएगी।

आयुष्मान खुराना ने चंडीगढ़ में ट्रांसजेंडर समुदाय को सशक्त बनाने के लिए सौंपी फूड ट्रक की चाबियाँ 

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बॉलीवुड स्टार, युवा आइकन और भारत में यूनिसेफ के राष्ट्रीय राजदूत, आयुष्मान खुराना फिल्मों, सोशल मीडिया और प्रमुख राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों पर अपने काम के माध्यम से मानवाधिकारों के मुखर समर्थक रहे हैं।

प्रतिभाशाली अभिनेता-कलाकार अब चंडीगढ़ में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को कौशल बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने में मदद कर रहे हैं। आयुष्मान ने समुदाय के लिए फ़ूड ट्रक बनाने में निवेश किया है ताकि उन्हें अपना खुद का व्यवसाय चलाने के लिए सशक्त बनाया जा सके। इस फ़ूड ट्रक को ‘स्वीकार’ कहा जा रहा है, जो आज के समाज में समुदाय के लिए स्वीकृति के महत्व पर एक प्रासंगिक विचार है।

आयुष्मान ने चंडीगढ़ के जीरकपुर में ट्रांसजेंडर समुदाय को स्वीकार फूड ट्रक की चाबियां सौंपी।

इस बारे में बात करते हुए, आयुष्मान कहते हैं, “मेरे लिए, आत्मनिर्भरता मानव अधिकारों की रक्षा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। राष्ट्र निर्माण के लिए समावेशिता की आवश्यकता है, इसके लिए इस देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। हम सभी इसमें योगदान दे सकते हैं। मैंने हमेशा महसूस किया है कि व्यक्तियों को समुदायों को सशक्त बनाने में सक्रिय रूप से भाग लेने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक लोग आत्मनिर्भर बन सकें। यह मेरे देश के लिए, मेरे साथी नागरिकों के लिए अपना योगदान देने का मेरा तरीका है।”

पंजाब विश्वविद्यालय के पहले ट्रांसजेंडर छात्र और राज्य में समुदाय के लिए सक्रिय आवाज धनंजय चौहान को फ़ूड ट्रक की चाबियां सौंपी गईं। वह कहती हैं, “किसी देश की प्रगति की परिभाषा इस बात से मापी जा सकती है कि हर समुदाय कितना सशक्त, कितना आत्मनिर्भर और कितना सुरक्षित महसूस करता है। आयुष्मान हमेशा से भारत के LGBTQIA+ समुदाय के सच्चे समर्थक रहे हैं। उन्होंने ऐसा अपने सिनेमा के ब्रांड के साथ-साथ अपने जीवन जीने के तरीके या सोशल मीडिया पर खुद को संचालित करने के तरीके के माध्यम से किया है। चंडीगढ़ उनका घर है. इसलिए, यह वास्तव में विशेष है कि वह यहां ट्रांसजेंडर समुदाय की सहायता के लिए आगे आए हैं।”

धनंजय आगे कहते हैं, “मुझे दृढ़ता से लगता है कि हमें समाज से किसी विशेष चीज़ की ज़रूरत नहीं है। हमें केवल उन्हें देखने, हमें सुनने और हमें स्वीकार करने की ज़रूरत है। हम में से बहुत से लोग शिक्षित, मेहनती हैं, और हमें खुद को साबित करने के लिए बस काम के अवसरों की आवश्यकता है। आयुष्मान ने हमारी आकांक्षाओं को पंख दिए हैं और हर कदम पर हमें प्रोत्साहित किया है। हम इसे पूरा करने जा रहे हैं।”

दंगल टीवी के शो दालचीनी की मायरा मेहरा का साहसिक सीक्वेंस, चंडीगढ़ में ठंडे पानी में किया शूट

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रवि दुबे और सरगुन मेहता द्वारा निर्मित, दंगल टीवी के शो दालचीनी ने दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। रोहित चौधरी (तेज) और मायरा मेहरा (फलक, दालचीनी) अभिनीत दालचीनी, महान ऊंचाइयों पर पहुंच गई है, और रोहित और मायरा घरेलू नाम बन गए हैं। दर्शकों ने शो और इसके पात्रों के लिए बहुत प्यार और सराहना दिखाई है।

दालचीनी फलक की कहानी बताती है, जो एक छोटे शहर की एक युवा महिला है, जो औपचारिक शिक्षा की कमी के बावजूद, खाना पकाने के लिए अपना प्यार और आदत पाती है। हालाँकि, उसकी राह कठिनाइयों से रहित नहीं है, और फिर भी उसे अपनी सास राजरानी, जो खुद एक कुशल शेफ है, के साथ एक ख़राब रिश्ते का प्रबंधन करना पड़ता है। जटिलताएँ और तनाव तब बढ़ जाता है जब दो महिलाएँ, जिनके व्यक्तित्व और खाना पकाने की क्षमताएँ काफी भिन्न होती हैं, एक साथ मिलती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि डालचिनी अपनी सास के साथ इस बिगड़े हुए समीकरण से कैसे निपटती है!

मायरा मेहरा दंगल टीवी के शो दालचीनी में फलक (दालचीनी) की भूमिका निभाती हैं। मायरा मेहरा ने पहले स्टार प्लस के शो पंड्या स्टोर में प्रेरणा की भूमिका निभाई थी। दर्शक मायरा मेहरा और रोहित चौधरी को उनके शो दालचीनी के लिए खूब वाहवाही और सराहना मिल रही है। मायरा मेहरा, जिन्हें दालचीनी के नाम से भी जाना जाता है, एक घरेलू नाम बन गई हैं। मायरा मेहरा ने हाल ही में अपने शो दालचीनी के लिए एक साहसिक सीक्वेंस दिखाया, जहां उनका किरदार दालचीनी पानी में फंसी हुई है। इस सीक्वेंस को चंडीगढ़ में ठंडे तापमान में शूट किया गया था और अपनी कला में निपुण होने के नाते, मायरा मेहरा ने कड़ी मेहनत के साथ इस सीक्वेंस को पूरा किया। हम वास्तव में अपनी कला के प्रति उनके समर्पण और प्रतिबद्धता को पसंद करते हैं।

दंगल टीवी के शो दालचीनी की मायरा मेहरा उर्फ दालचीनी बताती हैं, “पानी का सीक्वेंस चंडीगढ़ में ठंडे तापमान में शूट किया गया था; यह पहली बार है जब मैंने यहां सर्दियों का अनुभव किया है। यह एक साहसिक अनुभव था। मुझे फिर भी पानी से डर लगता है।” कलाकारों के रूप में, हमें स्टंट करने होते हैं, और मुझे उन्हें करने में आनंद आया। इसे और अधिक यथार्थवादी बनाने के लिए, जो पानी इस्तेमाल किया गया वह ठंडे तापमान को ध्यान में रखते हुए गर्म था। सुरक्षा उपाय प्रदान किए गए थे, और यह एक अलग अनुभव था। शो दालचीनी के माध्यम से, मुझे अपने डर पर काबू पाने का मौका मिला है। बचपन से ही मेरी एक अभिनेता बनने की इच्छा रही है। मैं जो करता हूं उससे संतुष्ट महसूस करता हूं, और मेरे लिए तीन जादुई शब्द होंगे: लाइट, कैमरा, एक्शन। मुझे अपने प्रशंसकों से जो प्यार और सराहना मिली, उसके लिए धन्यवाद; वे मेरे सुख-दुख में मेरे साथ रहे हैं। मैं आपके प्यार के लिए आभारी और धन्य हूं!”

रवि दुबे और सरगुन मेहता द्वारा निर्मित, दालचीनी रात 9.30 बजे दंगल टीवी पर प्रसारित होता है, सोमवार से शनिवार तक।

Cows Economy – दूधवाले’ की करोड़पति बनने की कहानी

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नई दिल्‍ली: अमन जैन ने बहुत कम समय में सफलता हासिल की है। IIIT हैदराबाद से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद ही उनकी कामयाबी का सफर शुरू हो गया था। उन्‍हें अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट ज्‍वाइन करने का ऑफर मिला। हालांकि, इसके बजाय उन्‍होंने IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई करने को तवज्‍जो दी। उनका यह फैसला बिल्‍कुल सही साबित हुआ। इससे बिजनेस को लेकर उनकी समझ का दायरा कई गुना बढ़ गया। आज वह एक सफल स्‍टार्टअप के संस्‍थापक हैं। इस स्‍टार्टअप कंपनी का नाम Doodhvale है। आइए, यहां अमन और उनके स्‍टार्टअप की सफलता के बारे में जानते हैं।

‘दूधवाले’ की नींव रखने से पहले अमन ने छह साल से अधिक समय तक OYO में अलग-अलग पदों पर काम किया। यह अनुभव उन्‍हें अपना स्‍टार्टअप शुरू करने में बहुत काम आया। OYO में अपने कार्यकाल के दौरान उन्‍होंने OYO टाउनहाउस की स्थापना और OYO विजार्ड लॉयल्टी प्रोग्राम के सफल शुभारंभ जैसी महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया। इससे उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्‍टर के साथ कंज्‍यूमर प्र‍िफरेंस की गहरी जानकारी मिली।

दिल्ली ट्रांसफर होने पर क्‍वालिटी डेयरी प्रोडक्‍ट्स को खोजने में हुई मशक्‍कत ने अमन को Doodhvale को शुरू करने का आइडिया दिया। उन्‍होंने पाया कि डेयरी उत्‍पादों में शुद्धता की कमी है। लोग पैसे खर्च करने के बाद भी शुद्ध प्रोडक्‍ट नहीं पा रहे हैं। अमन और उनकी टीम ने शुद्ध डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए मिशन के तौर पर काम शुरू किया।

डेयरी उद्योग में कई चुनौतियां हैं। उत्पादों का खराब होना और लॉजिस्टिक्स के चैलेंज उनमें सबसे प्रमुख हैं। इन चुनौतियों के बावजूद अमन और उनकी टीम ताजा और शुद्ध डेयरी उत्पादों को कुशलतापूर्वक वितरित करने की अपनी प्रतिबद्धता में अडिग रही। इस साल ‘दूधवाले’ की 80% से अधिक ग्रोथ उनके समर्पण और रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाने के लिए काफी है।

ताजा और शुद्ध डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की दूधवाले की प्रतिबद्धता उपभोक्ताओं को पसंद आई है। गुणवत्ता, विश्वसनीयता और ग्राहक संतुष्टि पर कंपनी के जोर ने उसे मजबूत ग्राहक आधार बनाने में मदद की। 30 करोड़ के टर्नओवर के साथ ‘दूधवाले’ डेयरी उद्योग में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरी है। यह स्‍टार्टअप कंपनी स्‍थापित ब्रांडों को चुनौती दे रही है। साथ ही नए स्‍टैंडर्ड सेट कर रही है।

Report By Amit Shukla NBT

नालासोपारा पश्चिम में ढाई हजार वर्ष पुराने बौद्ध स्तूप के दर्शन के लिए पहुंचे बीएसएस के सैकड़ों लोग

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पालघर। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर नालासोपारा पश्चिम में तथागत बुद्ध स्तूप पर सैकड़ों की संख्या में बहुजन सुधारवादी संघ (बीएसएस BSS) संस्था के लोग दर्शन के लिए पहुंचे। दर्शन के लिए पहुंचे समाजसेवक डॉ सी आर सरोज ने जानकारी देते हुए बताया कि नालासोपारा स्थित बुद्ध स्तूप ढाई हजार वर्ष पुराना है यहां पर भगवान तथागत स्वयं आये थे, उस समय नालासोपारा बन्दरगाह होने के कारण यह एक व्यापारिक स्थान था। यहां पर बाबासाहेब अम्बेडकर भी आते थे दर्शन के लिए जिस पेड़ की छांव में बैठते थे वह आम का पेड़ आज भी मौजूद है।

BSS संस्था के लोगों ने उत्तर प्रदेश से अपने अध्यक्ष देवेंद्र यादव को भी बुलाया था। संस्था एक मिशन चला रहा है जो भारत के 85% लोग शुद्र हैं उनके हक अधिकार के लिए उन्हें जगाने का कार्य कर रहा है।
देवेंद्र यादव ने सबसे पहले बुद्ध वंदना, और संविधान शपथ दिलाने के बाद अपने वक्तव्य में कहा कि देश में मात्र दो मॉडल का तंत्र काम कर रहा है।
देवेंद्र यादव ने बताया धर्मतन्त्र का जो मॉडल है उसका अपना ‘भगवा’ झण्डा है, ‘मनुस्मृति’ उसका संविधान है, ‘मठ, मन्दिर, आश्रम’ उसके संविधान की प्रशासनिक संस्थाएं हैं।
‘ईश्वर’ इस मॉडल का खूँटा है, जिसके साथ ‘आस्था’ रूपी रस्सी से जनता को बांध दिया जाता है। ‘असत्य’ इसका ‘दर्शन’ है। ‘विषमता’ इसकी ‘विचारधारा’ है। ‘जन्म आधारित पितृसत्तात्मक चातुरवर्णीय’ इसका ‘प्रबंधन’ है। ‘भक्ति’ इसका मार्ग है। इस तरह धर्मतंत्र के अनुसार ‘15% सवर्ण’ (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) मालिक हैं तो ‘85% शूद्र'(obc/sc/st/mino.) उसके गुलाम हैं।
देवेंद्र यादव ने कहा कि धर्मतंत्र को ब्राह्मणों ने इस तरह परिभाषित किया है कि विषमता परतंत्रता शत्रुता अन्याय के अनैतिक सिद्धांतों को अपना कर ब्राह्मणों ने, ब्राह्मणों द्वारा, ब्राह्मणों के लिए बनाई गई यह जन्म आधारित पितृसत्तात्मक चातुरवर्णीय विषमतावादी व्यवस्था है।” अर्थात ब्राह्मण के हाथ में धर्मतन्त्र की कमान बाकि सबका शोषण और सबका अपमान !
ब्राह्मण अपने इस विषमता के मॉडल को सनातन धर्म या हिन्दू धर्म के नाम से प्रचारित करता है तथा इसे ईश्वर द्वारा रचित व्यवस्था बताकर और धार्मिक आस्था का वास्ता देकर अपने नेतृत्व में समाज को संगठित रखता है। ऐसे में ईश्वरीय आस्था से बंधे हुए लोग धर्मतन्त्र की प्रशासनिक संस्थाऐं मठ, मन्दिर, आश्रम की तरफ बिन बुलाए नाक रगड़ते हुए पहुँच जाते हैं, फिर वहाँ इन संस्थाओं के मालिक ब्राह्मण के चरणों में जाकर गिर जाते हैं। ऐसे गिरे हुए लोगों को ब्राह्मण हिन्दू कहता है और उन पर मनुस्मृति के नियमों को थोप देता है, अब यह कहने की जरूरत नही है कि धर्मतन्त्र की व्यवस्था में ब्राह्मण श्रेष्ठ है और बाकी सारे नीच, यह एक प्रशासनिक व्यवस्था है जो भी इस व्यवस्था की आस्था मान्यता परम्परा संस्कार त्योहार व्रत आदि से अपना सम्बन्ध रखेगा उसका वर्ण/जाति स्वभाविक तौर पर अपने आप तय हो जाता है अब आप लाख कोशिश कर लीजिए, भले ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का फायदा उठाकर CM, PM बन जाइए लेकिन धर्मतन्त्र की व्यवस्था में आप नीच ही माने जायेंगे। उन्होंने भूतपूर्व मुख्यमंत्री का उदाहरण दिया अखिलेश यादव के घर का शुद्धिकरण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
धर्मतन्त्र का यह षड्यंत्र इतना बारीक है जो आम शूद्रों को समझ नही आता है यदि शूद्रों में से कुछ मुठ्ठीभर शूद्रों को समझ भी आ जाता है तो ये मनुवादी ब्राह्मण इन्हें नास्तिक, कम्युनिष्ट, अर्बन नक्सल, अम्बेडकरवादी, खालिस्तानी, पाकिस्तानी समर्थक, हिन्दू धर्म विरोधी आदि बताकर पहचान देकर अपने ही शूद्र भाइयों से अलग थलग कर देते हैं तथा अन्य धर्मों का डर दिखाकर जाति में बंटे हुए ना समझ बहुसंख्यक शूद्रों को अपने धार्मिक आस्था के दायरे में संघठित रखकर उनका निरन्तर नेतृत्व करते हैं।
लोकतंत्र का जो दूसरा मॉडल है इसका भी अपना ‘तिरंगा’ झण्डा है, ‘भारत का संविधान’ इसका संविधान है, ‘राष्ट्रपति, संसद, सरकारी विभाग’ इसके संविधान की प्रशासनिक संस्थाएं हैं।
‘उत्तरदायित्व’ लोकतंत्र का खूँटा है जिस पर सवाल उठाना जनता का ‘अधिकार’ है। ‘समता’ इसकी ‘विचारधारा’ है, ‘सत्य’ इसका ‘दर्शन’ है। ‘ध्यान’ इसका ‘मार्ग’ है। ‘कर्म आधारित चतुरवर्गीय’ इसका ‘प्रबंधन’ है। अर्थात हम अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर अपने वर्ग को बदल सकते हैं। लोकतांत्रिक कानून की नजर में हम केवल भारतीय है तथा धर्म हमारी निजी प्रेक्टिस है। जनता लोकतंत्र की ताकत है जो इसे अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण में रखती है जनता के सारे हित इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए इसकी रक्षा करना जनता का नैतिक दायित्व है।
लोकतंत्र को इस तरह परिभाषित किया जा सकता है कि समता स्वतंत्रता बन्धुता न्याय के नैतिक सिद्धान्तों को अपना कर लोगों ने, लोगों द्वारा, लोगों के लिए बनाई गई यह कर्म आधारित समतावादी चतुरवर्गीय व्यवस्था है। अर्थात जनता के हाथ में लोकतंत्र की कमान सबको अवसर और सबको सम्मान देता है।
धर्मतन्त्र और लोकतंत्र आज देश की जनता के पास दो मॉडल है, धर्मतन्त्र देश की जनता को मन्दिर की तरफ ले जाता है तो लोकतंत्र स्कूल की तरफ। ये दोनों तंत्र एक दूसरे के दुश्मन है, इनमें से आज नही तो कल एक की मौत निश्चित है। ऐसे में यदि धर्मतन्त्र की मौत और लोकतंत्र की जीत हो जाती है तो 85% बहुजन शूद्र को सम्मान और स्कूल का कलम मिलेगा, इसके विपरीत यदि लोकतन्त्र की मौत और धर्मतन्त्र की जीत हो जाती है तो 85% बहुजन शूद्र को मिलेगा अपमान और मन्दिर का घण्टा। अब निर्णय 85% बहुजन शूद्र (obc/sc/st) को करना है उन्हें सम्मान और स्कूल की कलम चाहिए या अपमान और मन्दिर का घण्टा ?
उपरोक्त लोकतांत्रिक बिंदुओं को जब लोकतन्त्र के समर्थक अपने सामाजिक जीवन में व्यवहारिक तौर पर अपनायेंगे तब समाज का लोकतांत्रिक चरित्र निर्माण होगा। जब समाज का लोकतांत्रिक चरित्र निर्माण होगा तब संविधान की किताब पर छपा हुआ लोकतांत्रिक चरित्र व्यवहारिक रूप लेकर सही मायने में देश में लोकतन्त्र को स्थापित करेगा। अर्थात यदि हमें धर्मतन्त्र के बजाय लोकतन्त्र को स्थापित करना है तो हमें अपना धार्मिक चरित्र बदलकर लोकतांत्रिक चरित्र बनाना होगा। देवेंद्र यादव ने बखूबी विश्लेषण करके लोगो को समझाया उसके बाद अन्य लोगों ने भी अपने विचार दिए।
उत्तर प्रदेश से रामचंद्र यादव, ओपी बैरवा, नरेश जाधव, सिद्धार्थ बर्वे, भगवान काम्बले, डॉ. सी.आर. सरोज, कुसुम निसाद, सधीर कुमार, रामसागर, फूला ताई जाधव, रमेश गौतम ने सभा का संचालन किया। इस अवसर पर दीनानाथ मौर्या, संगीता मौर्या, अशोक निषाद, डॉ. रमेश यादव, अमित यादव, रेलवे अधिकारी मीना, चन्द्रभान पाल, शिवजी पाल, जयकुमार, रवि प्रजापति, वाल्के सर आदि मुख्य लोग उपस्थित थे।

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच का पुस्तक लोकार्पण के साथ डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति एवं देवेंद्र पाण्डेय स्मृति सम्मान समारोह संपन्न

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नवी मुंबई। अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की ओर से आयोजित पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह 22 मार्च 2024 की शाम सानपाड़ा स्थित शिकारा होटल के सभागृह में गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार पवन तिवारी ने की। मुख्य अतिथि रहे महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सदस्य अरविंद राही तथा विशेष अतिथि के रूप में कवयित्री सीमा त्रिवेदी, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, आर के पब्लिकेशन के निदेशक रामकुमार त्रिपाठी एवं लघुकथाकार सेवा सदन प्रसाद, नगरसेवक सयाली शिंदे, समाजसेविका उषादत्त, समाजसेवक गोकुलधाम से सुभाष अग्रवाल की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन अश्वनी पांडेय एवं कुमार जैन ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ अनीता मेहरा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अलका पांडेय के प्रथम उपन्यास अनुराग का अवसाद का लोकार्पण हुआ।
पुस्तक के संदर्भ में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पवन तिवारी ने कहा कि अलका पांडे के उपन्यास की केंद्रीय पात्र एक स्त्री है। जो प्रेम और प्रतिरोध करना दोनों जानती है। एक स्त्री जब तक प्रेम करती है तब तक राधा दिखाई देती है और जब प्रतिरोध करती है तो दुर्गा के स्वरूप में दिखाई देती है। यही इस उपन्यास का मूल है। उपन्यास का कथ्य और उसका शिल्प मोहक है जो पाठक को बांधे रखता है। कथा में आगे क्या होगा इसके लिए उत्सुकता जगाये रखता है। इस उपन्यास में लेखकीय अनुभव और परिपक्वता दिखाई पड़ती है। वर्तमान समय में विवाहेत्तर प्रेम और उसमें निहित विद्रुपताओं का बड़ा ही स्पष्ट रूप इस उपन्यास में दिखाई पड़ता है। इस उपन्यास के लिए अलका पांडेय को अनेक बधाई एवं शुभकामनाएं। कार्यक्रम का दूसरा सत्र डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति सम्मान एवं देवेंद्र पांडेय स्मृति सम्मान का था। इस वर्ष वरिष्ठ कवि डॉ अरुण प्रकाश अनुरागी एवं वरिष्ठ कवयित्री अलका शरर को डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति साहित्य भूषण सम्मान प्रदान किया गया। देवेंद्र पांडे स्मृति समाज भूषण सम्मान विकास आर. अग्रवाल को दिया गया।
डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति साहित्य गौरव सम्मान वरिष्ठ कवि रामस्वरूप साहू, नीरज ठाकुर मदन गोपाल अकिंचन, डॉ मनोज गोयल, राजेंद्र वामन कटकरे, ओम प्रकाश पांडेय, शारदा प्रसाद दुबे एवं विजय भटनागर, अलका गोयल, चम्पा सिंह को प्रदान किया गया। इसके पश्चात अंतिम सत्र में कविता पाठ हुआ। कविता पाठ करने वाले कवियों में अश्विनी पाण्डेय, सत्यभामा सिंह, अन्नपूर्णा गुप्ता, बिट्टू जैन, त्रिलोचन सिंह अरोरा, दिलीप ठक्कर, शोभा ठक्कर, अलका पांडेय, सीमा त्रिवेदी, मंजू गुप्ता, नीलम गुप्ता, डॉ अंजू शर्मा, चंद्रिका व्यास, जे पी सिंह, ओम प्रकाश सिंह प्रमुख रहे। कार्यक्रम के अंत में अलका पांडेय ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

मंत्री रेखा ने महादेव का पूजन और गौ सेवा कर मनाई होली

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देहरादून, 25 मार्च । कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बाबा बनखण्डी नाथ मंदिर, बरेली में महादेव का पूजन और गौसेवा कर होली मनाई।

इस अवसर मंत्री रेखा आर्या के साथ पति गिरधारी लाल साहू पुत्री वैष्णवी के साथ महादेव का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही गौ सेवा कर होली मनाई। मंत्री ने अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष होली सभी राम भक्तों के लिए स्पेशल है क्योंकि भगवान राम 500 सालों के अंतराल के बाद रंगों का त्योहार मना रहे हैं। साथ ही यह होली भगवान राम के प्रत्येक भक्त के लिए विशेष है। वहीं इस दौरान समस्त प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि व खुशहाली की कामना की।

गौ भक्त बाप-बेटे निस्वार्थ भाव से करते हैं गायों की सेवा

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दमोह: हिन्दू धर्म में गाय को गौ माता कहकर संबोधित किया जाता है, जिसमें 33 कोटि देवी देवताओं का वास माना गया है. कहा जाता है यदि व्यक्ति अलग-अलग देवी देवता की भक्ति करने की बजाए 1 गाय की निस्वार्थ भाव से सेवा करता है तो 33 कोटि देवी देवताओं का आशीर्वाद उसके परिवार पर बना रहता है.

दमोह जिले में ऐसा ही एक यादव परिवार है, जो जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर जरुआ गांव का रहने वाला है. इस परिवार के प्रत्येक व्यक्ति ने निस्वार्थ भाव से गौ सेवा के लिए जीने का संकल्प लिया है. परिवार के एक नौजवान हल्ले भाई यादव बीते 10-15 सालों से बिना किसी सरकारी सहायता के करीब 100 गायों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते आ रहे हैं.

हल्ले भाई यादव का पूरा परिवार गौ भक्त
दरअसल, हल्ले भाई के पिता हल्लू यादव जिनकी उम्र करीब 59 से 60 साल है. उन्होंने गौ सेवा भाव की शुरुआत की थी. उनके दोनों बेटे ने भी सेवा भाव को आगे बढ़ाया. हल्ले ने बताया कि बरसात के दिनों में गायों को चराने की जिम्मेदारी बड़े भाई और पिता की होती है. वहीं, गर्मियों के दिनों में गायों की देखरेख का जिम्मा उन्हें सौंप दिया जाता है. इस इलाके में मवेशियों से लेकर आम जनता के लिए भी पेयजल की बहुत समस्या है. चूंकि जिस राजस्व की जमीन पर हल्ले भाई का परिवार अन्न उगाता है, उसके नजदीक से एक नाला निकला हुआ है. जिसमें बने कुंड में साल भर पानी बना रहता है. जहां सारे मवेशी एक एक कर पानी पीते हैं.

घर का एक-एक पैसा गौ सेवा में
हल्ले भाई यादव ने बताया कि उनके पास निजी जमीन नहीं है, कुछ जमीन जो राजस्व विभाग की है, उसी पर फसलों की बुवाई कर लेते हैं. इससे भूसा का इंतजाम हो जाता है. इसके अलावा गांव में जिन खेतों में कृषि कार्य नहीं होता, उन खेतों में उगने वाली खरपतवार, हरी घास की रखवाली कर लेते हैं, जिसे काटकर जमा कर लेते हैं. इसके अलावा जो गायों के गोबर से जैविक खाद बनती है, उसे किसानों को बेचकर कुछ पैसे मिल जाते हैं. इन सभी उपायों को अपनाकर जो भी जमा पूंजी इकट्ठा होती है, सभी की सभी गौ माता की सेवा में लगा देते हैं. वर्तमान समय में करीब 5 गाय दुधारू है और 10 बैल हैं.

Report By अर्पित बड़कुल News 18

Lok Sabha Election 2024 – महाराष्ट्र में महायुति के साथ चुनाव लड़ेगी RSP

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Maharashtra Lok Sabha Election 2024: ( पीटीआई- भाषाराष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) के प्रमुख महादेव जानकर ने रविवार (24 मार्च) को महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ के साथ बने रहने की प्रतिबद्धता जताई. महादेव जानकर ने कुछ दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की थी और पवार ने उन्हें माढा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए कहा था.

महादेव जानकर ने अपने रुख में तब बदलाव किया, जब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (शिवसेना), उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (बीजेपी) और अजित पवार (एनसीपी) ने उनसे मुलाकात की. इससे पहले महादेव जानकर ने बुधवार को शरद पवार से मुलाकात के बाद बीजेपी पर उन्हें विश्वास में लिए बिना माढा लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित करने पर नाराजगी व्यक्त की थी. महादेव जानकर ने पत्रकारों से कहा था कि चर्चा सकारात्मक रही.

जानकर की पार्टी को मिलेगी एक सीट
सीएम शिंदे, अजित पवार और फडणवीस की महादेव जानकर से मुलाकात के बाद रविवार (24 मार्च) को एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के मामले में काफी प्रगति कर रहा है और इसलिए जानकर ‘महायुति’ के साथ बने रहेंगे. बयान में कहा गया है कि बैठक में निर्णय लिया गया कि जानकर की पार्टी को एक संसदीय सीट आवंटित की जाएगी.

आरएसपी नेता ने कहा कि वह लोकसभा चुनाव में महायुति उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे. अपनी पहली सूची में महाराष्ट्र से 20 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने वाली बीजेपी ने माढा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से रंजीत सिंह नाइक निंबालकर को फिर से उम्मीदवार बनाया है. साल 2014 में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ बारामती लोकसभा सीट से महादेव जानकर ने चुनाव लड़ा था.

धनगर समुदाय में जानकर की अच्छी पकड़
महादेव जानकर का पश्चिमी महाराष्ट्र में धनगर समुदाय के बीच अच्छा प्रभाव है. माढा लोकसभा सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इस सीट से पहला चुनाव 2009 में शरद पवार ने जीता था. साल 2014 में, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अविभाजित) ने इस सीट को बरकरार रखा था और विजयसिंह मोहिते-पाटिल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार सदाभाऊ खोत को हराया था.

बॉलीवुड फ‍िल्‍म अभ‍िनेत्री कंगना रनौत को लोकसभा टिकट

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BJP Candidates 5th List 2024: भारतीय जनता पार्टी ने रव‍िवार (24 मार्च) को लोकसभा चुनाव  के ल‍िए कैंड‍िडेट्स की पांचवीं ल‍िस्‍ट जारी कर दी है. इसमें बॉलीवुड फ‍िल्‍म अभ‍िनेत्री कंगना रनौत को भी ट‍िकट दी गई है. बीजेपी ने उनको मंडी लोकसभा टिकट सीट से चुनावी मैदान में उतारा है.

कंगना रनौत ने ट‍िकट म‍िलने के बाद सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट शेयर करते हुए खुशी जताई है. कंगना ने कहा कि मेरे प्‍यारे भारत और अपनी पार्टी भारतीय जनता, भारतीय जनता पार्टी को मैं हमेशा बि‍ना शर्त के समर्थन करती रही हूं. आज बीजेपी के शीर्ष नेतृत्‍व में मुझे मेरे जन्‍मस्‍थान ह‍िमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से उम्‍मीदवार घोषित क‍िया है. मैं, इस प्‍यार और व‍िश्‍वास को जताते के ल‍िए बीजेपी हाईकमान के प्रत‍ि आभार व्‍यक्‍त करती हूं.

Kangana Ranaut: 'बीजेपी से हमेशा समर्थन मिला', मंडी से लोकसभा टिकट मिलने के बाद क्या बोलीं कंगना रनौत

उन्‍होंने यह भी कहा कि मैं आध‍िकार‍िक तौर पर पार्टी में शामिल होकर सम्मानित और उत्साहित महसूस कर रही हूं. मैं एक कर्मठ कार्यकर्ता और भरोसमंद लोक सेवक बनने का प्रयास करूंगी.

बीजेपी ने 111 उम्‍मीदवारों को क‍िया ऐलान  

बीजेपी की ओर से रव‍िवार को कुल 111 सीटों पर उम्‍मीदवारों के नामों का ऐलान क‍िया गया है. इस ल‍िस्‍ट में पश्चिम बंगाल के तमलुक सीट से जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय को भी उम्मीदवार बनाया गया है ज‍िन्‍होंने कुछ दिन पहले ही हाई कोर्ट से इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वाइन की थी.

My beloved Bharat and Bhartiya Janta’s own party, Bharatiya Janta party ( BJP) has always had my unconditional support, today the national leadership of BJP has announced me as their Loksabha candidate from my birth place Himachal Pradesh, Mandi (constituency) I abide by the high…

इसके अलावा कैंड‍िडेट्स की ल‍िस्‍ट जारी होने से कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शाम‍िल हुए कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद नवीन ज‍िंदल को भी ट‍िकट द‍िया गया है. बीजेपी ने उनको कुरुक्षेत्र से ही चुनावी मैदान में उतारा है. कई और बड़े नाम और खास चेहरों को भी ल‍िस्‍ट में शाम‍िल क‍िया गया है. आंध्र प्रदेश की राजमुंदरी सीट से पूर्व केंद्रीय राज्‍यमंत्री डी पुरंदेश्वरी को भी ट‍िकट द‍िया गया है.