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करुणामयी और स्वाभिमानी थीं सिंधिया घराने की राजमाता माधवी राजे

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(राकेश अचल -विभूति फीचर्स)

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां श्रीमती माधवी राजे सिंधिया नहीं रहीं। वे लम्बे अरसे से अस्वस्थ थीं। एक लम्बे अरसे से सार्वजनिक जीवन से दूर अपने परिवार में रमीं रहने वाली श्रीमती माधवी राजे सिंधिया अपने यशस्वी खानदान की अंतिम विधिक महारानी थीं ,उन्हें क़ानूनन सिंधिया राजघराने के राज चिन्हों और प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए महारानी रहने का सुख केवल पांच साल ही मिल सक। 1971 में भारत सरकार ने देश के तमाम राजघरानों के साथ सिंधिया राजघराने के सभी विशेषाधिकार और प्रतीक चिन्ह छीन लिए थे।

श्रीमती माधवी राजे सिंधिया 8 मई 1966 को नेपाल से सिंधिया घराने की महारानी बनकर आयीं थीं। उनका विवाह सिंधिया घराने के अंतिम राज प्रमुख श्री माधवराव सिंधिया से हुआ था। उस समय राजमाता की पदवी श्रीमती विजयाराजे सिंधिया के पास थी। माधवी राजे नेपाल के कास्की और लामजुंग के महाराजा शमशेर जंग बहादुर राणा की पुत्री थीं। विवाह से पहले उनका नाम किरण राज लक्ष्मी देवी था। सिंधिया परिवार का हिस्सा बनते ही उनका नाम किरण से माधवी राजे हो गया। श्रीमती माधवी राजे की पहली संतान चित्रांगदा राजे थीं। उनका जन्म 1967 में हुआ,उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया 1971 में जन्मे।

परम्परा ने श्रीमती माधवी राजे सिंधिया को राजमाता उसी दिन बना दिया था जिस दिन उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया का विवाह हुआ था ,लेकिन वैधानिक रूप से वे राजमाता नहीं बन पायीं थी। राजमाता के रूप में जो सम्मान उनकी सास श्रीमती विजया राजे सिंधिया को हासिल हुआ था ,वो भी उन्हें शायद हासिल नहीं हुआ। इसकी वजह ये है कि वे अपनी सास की तरह न तो जनता से बहुत हिलीमिली थीं और न उनकी सार्वजनिक जीवन में बहुत ज्यादा उपस्थिति थी ,हालाँकि उनके विवाह के पांच साल बाद ही माधवीराजे के पति माधवराव सिंधिया राजनीति में उतर आए थे। माधवराव सिंधिया ने 1971,1977 और 1980 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता था।

राजघराने की परम्पराओं से बंधी श्रीमती माधवी राजे ने पहली बार राजमहल की सीढ़ियां लांघने का साहस 1985 में तब दिखाया जब उनके पति माधवराव सिंधिया ग्वालियर से भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। मुझे खूब याद है कि उस चुनाव में श्रीमती माधवी राजे सिंधिया ने अपने पति के लिए कंधे से कन्धा मिलाकर चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया था। वे छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं में भाषण देने जातीं थीं। एक सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन घायल तथा कुछ और लोग पूरे चुनाव में माधवी राजे सिंधिया की सभाओं और जनसम्पर्क कार्यक्रमों की रूप रेखा बनाते थे।

श्रीमती माधवी राजे का ग्वालियर से मोह तब तक ज्यादा था जब तक उनके पति जीवित रहे । 2002 में माधवराव सिंधिया के आकस्मिक निधन के बाद श्रीमती माधवी राजे का राजनीति से मोह भंग हो गया । उन्होंने अपने आपको अपने परिवार बहू,बेटे और नाती-पोतों तक सीमित कर लिया। उनका ग्वालियर आना भी पहले के मुकाबले बहुत कम हो गया था। लेकिन वे अपने पति के समर्थकों को नाम से पहचानती और पुकारती थीं। वे बहुत स्वाभिमानी और करुणामयी थी। उन्होंने अपने पति के निधन के बाद अपने बेटे को राजनीति में स्थापित होते देखकर ही सुखानुभूति कर ली लेकिन वे कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए चुनाव प्रचार करतीं नहीं दिखाई दीं। कुछ महल की मर्यादा और कुछ परिस्थितियां उन्हें एकाकी बनाती चली गयी।

अन्तिम समय में उनके बहू,बेटे और नाती महाआर्यमन ने उनका भरपूर ख्याल रखा। उनकी कमी ग्वालियर को खलेगी,क्योंकि उनके जाने के बाद ग्वालियर की एक पूरी पीढ़ी का महल में कोई अपना कहने वाला नहीं रहा। श्रीमती माधवी राजे सिंधिया और राजमाता विजयाराजे सिंधिया में कोई समानता नहीं थी लेकिन वे महल की गरिमा को आजीवन बनाये रखने में कामयाब रहीं यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।उनकी एक अन्य उपलब्धि यह भी थी कि वे कभी किसी विवाद में भी नहीं उलझी।(विनायक फीचर्स)

जो भी सरकार आएगी गाय की हत्या करवाएगी : अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

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अलवर. ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अब हमारा सरकारों से मोहभंग हो चुका है. हम जान गए हैं कि कोई भी सरकार और किसी भी नाम से आए और कोई भेष चोला धारण कर आए, वह गाय की हत्या करवाएगी. इसलिए हमने नेताओं और पार्टियों से मोहभंग कर लिया है. अब हम मतदाताओं को संकल्पित करा रहे हैं, यदि 33 करोड़ लोग गाय के लिए संकल्प करें तो गोरक्षा हो जाएगी. शंकराचार्य सरस्वती मंगलवार को अलवर के दो दिवसीय प्रवास के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे.

जगदगुरू शंकराचाय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को बहुत उंचा स्थान दिया गया, उस स्थान तक कोई नहीं ठहरता. गाय पूजनीय है और 33 करोड़ देवी-देवताओं की निवास स्थली है, लेकिन पूजनीय गाय की निरंतर हत्या कर मांस का व्यापार किया जा रहा है. यह हिन्दुओं के लिए कलंक है. आजादी के बाद से ही पूर्वज गाय की हत्या पर रोक लगाने की मांग करते रहे, लेकिन 75 साल में केन्द्र में आई किसी भी सरकार ने गोहत्या पर रोक की मांग को पूरा नहीं किया.

उन्होंने कहा कि अब देश में अमत महोत्सव मनाया जा रहा है. अमृत कोई दूसरी चीज नहीं, बल्कि गाय का दूध माना गया है. जिस गाय द्वारा अमृत दूध दिया जाता है उस गाय को काटा जा रहा है और अमृत महोत्सव मनाया जाए, ये बड़ी विडम्बना है. इसको देखकर हमारे मन में आया कि अब नहीं तो कभी नहीं, अब लोगों को गोरक्षा के लिए खडा होकर गाय को बचाना होगा.

गाय को राष्टीय पशु घोषित नहीं करने के कारण अब सरकारों से मोहभंग हो चुका है. इस अभियान को सभी जगह समर्थन मिल रहा है. लोग दाहिनी मुट्ठी बांधकर संकल्प कर रहे हैं. देश में जल्द ही 33 करोड़ लोग संकल्पित मतदाता बन जाएंगे और गाय की हत्या पर रोक लग सकेगी. गाय बीफ पर सब्सिडी दिए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि जो जैसा करेगा वैसा भरेगा. जिसको नहीं मारना चाहिए, उसे मार रहे हैं और मांस का व्यापार कर रहे हैं, इसका फल भी उन्हें ही भोगना पड़ेगा.

जगदगुरू शंकराचार्य ने कहा कि हिन्दू एक दर्शन है, जिसमें किसी की मत्यु होती और शरीर छूटता है, फिर यमराज के दरबार में खडा होना पड़ता है. वहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पद नहीं चलता कि हम बड़े पद पर रह कर आए हैं. वहां कोई प्रोटोकाॅल नहीं मिलता, वहां कर्म देखे जाते हैं, यदि अच्छे कर्म करके आया होगा तो स्वर्ग मिलेगा और यदि बुरे कर्म करके आया होगा तो कठोर नर्कों में जाने कितने सालों के लिए डाल दिया जाएगा. नील गाय की हत्या के कानून पर उन्होंने का कि कौनसी सरकार क्या कर रही है. यह सरकारों का मामला है, लेकिन हमारा मतलब गाय की हत्या पर रोक से है.

गौशाला बेरी में गौ भक्तों द्वारा किया गया गोसवामणी का आयोजन

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बेरी : स्व. बनवारी लाल मील की चतुर्थ पुण्यतिथि पर आज बाबा त्रिवेणी दास गौशाला बेरी में उनकी याद में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी चतुर्थ पुण्यतिथि पर गोसवामणी का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्वर्गीय बनवारी लाल मील के परिवार के सभी सदस्य उनके भाई पुत्र महिलाएं मित्र मंडली और गौ भक्त गोसवामणी कार्यक्रम के समय मौजूद रहे और गायों को मीठा दलिया गुड़ फल आदि खिलायें आए हुए सभी गौ भक्तों का गौशाला व्यवस्थापक बनवारी लाल जांगिड़ ने आभार व्यक्त किया

मुंबई के शिवाजी पार्क में 17 मई को रखी PM मोदी की रैली

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मुंबई: महाराष्ट्र में अब सिर्फ 13 लोकसभा सीटों का चुनाव शेष बचा है। इसमें मुंबई की छह लोकसभा सीटें शामिल हैं। मुंबई समेत ठाणे, कल्याण, पालघर और भिवंडी सीटों पर भगवा लहराने के लिए बीजेपी ने बड़ी तैयारी की है। बीजेपी ने चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17 मई को शिवाजी पार्क में रैली रखी है। बीजेपी इस रैली में दो बड़े दांव खेलने की तैयारी कर रही है। इस रैली में जहां महायुति की तरफ से आखिरी शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा तो वहीं इस रैली में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे पीएम मोदी के साथ मंच साझा करेंगे।

महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिवाजी पार्क रैली को लेकर राज ठाकरे को आमंत्रित किया है। दोनों नेताओं की मीटिंग के बाद यह चर्चा है कि राज ठाकरे पीएम मोदी के साथ शिवाजी पार्क की रैली में मंच पर नजर आ सकते हैं। गुड़ी पड़वा के मौके पर राज ठाकरे ने 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया था। राज ठाकरे ने तब पीएम मोदी की खुलकर तारीफ भी की। इससे पहले नई दिल्ली में राज ठाकरे की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई थी। मनसे द्वारा बीजेपी को समर्थन दिए जाने के बाद राज्य में पार्टी के कार्यकर्ता महायुति के उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। अभी तक राज ठाकरे किसी भी सभा में नजर नहीं आए हैं। बीजेपी की कोशिश है राज ठाकरे को शिवाजी पार्क की रैली में एक मंच पर लाकर हिंदू वोटों को एकजुट किया जाए।

महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखकर बावनकुले और राज ठाकरे की बीच बैठक के बाद मुंबई की राजनीति गरमा गई है। महाविकास आघाड़ी खासकार उद्धव गुट की इस डेवलपमेंट पर खास नजर है, तो वहीं बीजेपी की कोशिश है कि अगर राज ठाकरे शिवाजी पार्क की रैली में पीएम मोदी के साथ आते हैं तो मराठी वोटों में अच्छा संदेश जाएगी। बीजेपी मुंबई की सभी छह सीटों को जीतने के लिए शिवाजी पार्क की रैली को मास्टर स्ट्रोक बनाना चाहती है। अगर राज ठाकरे खुलकर पीएम मोदी के साथ मंच साझा करते हैं और अपने अंदाज में रैली को संबोधित करते हैं तो उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना को नुकसान हो सकता है। शिवसेना यूबीटी मुंबई की चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है

अगर मैं हिंदू-मुसलमान करूंगा तो मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी से लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना नामांकन दाखिल किया. इसके बाद न्यूज 18 को दिए अपने एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि “अगर मैं हिंदू-मुसलमान करूंगा तो मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा.” इसके अलावा भी अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने हिंदू और मुसलमान को लेकर की जाने वाली राजनीति पर खुलकर बात की और कहा कि वह कभी भी वह कभी हिंदू और मुसलमान को नहीं बांटेंगे.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  • पीएम मोदी ने बताया कि उनका बचपन मुस्लिम परिवारों के बीच ही बीता है. उन्होंने कहा, “मेरे बहुत सारे मुस्लिम दोस्त हैं और 2002 के बाद मेरी छवि को खराब करने की कोशिश की गई है. हमारे आस-पड़ोस में मुस्लिम परिवार रहा करते थे. ईद के मौके पर हम घर पर खाना भी नहीं बनाते थे क्योंकि हमारे आस-पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम पड़ोसियों के यहां से ही खाना आया करता था. यहां तक कि मुहर्रम पर हमें ताज़िया करना भी सिखाया गया था.”
  • पीएम मोदी ने बताया कि 2002 के बाद उनकी छवि को खराब करने का प्रयास किया गया. उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में मानेक चॉक नाम की जगह पर उन्होंने एक सर्वे कराया था. जहां सभी व्यापारकर्ता मुस्लिम हैं और खरीददार हिंदू हैं. वहां उन्होंने कुछ लोगों को सर्वे के लिए भेजा था. उस वक्त जब किसी ने उनके बारे में कुछ गलत कहा तो दुकानदार ने उसे रोक दिया और कहा कि मोदी के खिलाफ एक शब्द भी न कहें. हमारे बच्चे मोदी की वजह से ही स्कूल जा रहे हैं. उस वक्त लगभग 90 प्रतिशत दुकानदारों ने यही बात कही थी.
  • अधिक बच्चों को जन्म देने वाले बयान के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं हैरान हूं. मुझे समझ नहीं आता है कि जब मैं लोगों से यह अपील करता हूं कि वो अधिक बच्चे न करें तो लोग ऐसा क्यों समझते हैं कि मैं मुस्लिमों की बात कर रहा हूं. गरीब हिंदू परिवारों में भी यह समस्या है. वो अपने बच्चों को जरूरी शिक्षा देने के सक्षम नहीं हैं. मैंने कभी भी हिंदू या मुस्लिम का नाम नहीं लिया है. मैंने केवल अपील की है कि आप उतने ही बच्चे करें, जितनों का आप पालन पोषण कर सकते हैं.”
  • पीएम मोदी ने मुस्लिम वोट बैंक के बारे में बात करते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि मेरे देश के लोग मेरे लिए वोट करेंगे. जिस दिन मैं हिंदू-मुस्लिम करना शुरू कर दूंगा उस दिन मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं करूंगा. मैं कभी भी हिंदू-मुस्लिम बंटवारा नहीं करूंगा और यह मेरा वादा है.”
  • नरेंद्र मोदी ने कहा, “मेरा मंत्र सबका साथ सबका विकास है. मैं वोट बैंक के लिए काम नहीं करता हूं. अगर मुझे कुछ गलत लगता है तो मैं कहता हूं कि यह गलत है.”

Video -Tragic accident due to falling of hoarding in Ghatkopar

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आज नामांकन करेंगे पीएम मोदी, पुष्य नक्षत्र में दाखिल करेंगे पर्चा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव से अनुमति लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में नामांकन करेंगे। वह वाराणसी से तीसरी बार भाजपा प्रत्याशी बनाए गए हैं। तीसरी बार नामांकन भी करेंगे। वे गंगा सप्तमी के साथ ही पुष्य नक्षत्र में 11 बजे के बाद नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। नामांकन के पहले प्रधानमंत्री मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे पीएम दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा को नमन कर पूजन सकते हैं। यहीं स्नान भी करेंगे। यहां क्रूज से नमो घाट तक जाना भी प्रस्तावित है। फिर काल भैरव मंदिर जाकर वहां फिर नामांकन करने कलेक्ट्रेट जाएंगे।

नामांकन के बाद रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। मंगलवार को गंगा सप्तमी और नक्षत्र राज पुष्य का संयोग है। इसके साथ रवि योग ग्रहों की अच्छी स्थितियों का निर्माण कर रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कोई भी कार्य करने से अभिष्ट की सिद्धि होती है। पुष्य नक्षत्र में यदि किसी काम को किया जाए तो उसमें कार्य सिद्धि तय मानी जाती है। ऐसा माना जा रहा है कि पीएम इस विशेष संयोग में ही अपना नामांकन करेंगे।

पीएम के नामांकन में शामिल होंगे 12 मुख्यमंत्री
भाजपा नेताओं के अनुसार पीएम के नामांकन में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा 12 मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे, राजस्थान के सीएम भजन लाल शर्मा, असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा, हरियाणा के नायब सिंह सैनी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा शामिल होंगे। साथ में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी नामांकन में शामिल होंगे। एनडीए के प्रमुख घटक राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, लोजपा प्रमुख चिराग पासवान, अपना दल एस की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल, सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद आदि मौजूद रहेंगे।

नामांकन से पहले काशी में पीएम मोदी ने किया रोड शो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामांकन से पहले सोमवार की शाम बीएचयू गेट के सामने स्थित महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रोड शो की शुरुआत की। बीएचयू से बाबा काशी विश्वनाथ तक आठ किलोमीटर के रोड शो में करीब पांच लाख लोग आए। भाजपा का दावा है कि यह अब तक सबसे सफलता रोड शो रहा, जो 2:30 घंटे में पूरा हुआ। मार्ग पर जगह-जगह सर्व समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

मदनपुरा में मुस्लिम महिलाओं ने हर-हर मोदी के नारे लगाते हुए पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। लंका से अस्सी तक कई मंचों से आरती और शंखनाद कर प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया। कहीं ढोल-नगाड़े बजे तो कहीं वाद्य यंत्र अपना राग छेड़ रहे थे। जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, लोकगीत हो रहे थे। बटुक, सन्यासियों ने मंत्रोच्चार के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। प्रधानमंत्री को देखने के लिए छोटे-छोटे बच्चे बैरिकेडिंग की जाली से झांक रहे थे तो कई महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर खड़ी थीं। रोड शो के दौरान रथ पर प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी मौजूद रहे।

‘काशी विशेष है…’

प्रधानमंत्री ने रोड शो की शुरुआत से पहले एक्स पर पोस्ट किया कि काशी विशेष है…। यहां के लोगों की गर्मजोशी और स्नेह अविश्वसनीय है। इसके साथ ही उन्होंने हाथ जोड़ने का इमोजी और अपने रोड शो के प्रसारण का लाइव लिंक शेयर किया।

पूर्व दिशा की ओर घूमकर किए गंगा को नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर घूमकर उन्होंने जीवनदायिनी गंगा को दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने चारों तरफ मौजूद भाजपा समर्थकों का हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

रविदास गेट के समीप गले में डाला बनारसी गमछा
प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र आते हैं तो बनारसी रंग में रंग जाते हैं। लंका से प्रधानमंत्री का रोड शो जब आगे बढ़ा तब वह रविदास गेट के समीप पहुंचे तो उन्होंने अपने गले में बनारसी गमछा डाल लिया। यह देखते ही रविदास गेट के समीप मौजूद उत्साही भीड़ हर-हर महादेव… और घर-घर मोदी… का उद्घोष करने लगी।

मुस्लिम बहुल इलाकों में दिखा उत्साह
प्रधानमंत्री के रोड शो का काफिला शिवाला और मदनपुरा जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों से गुजरा तो लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सड़क के दोनों तरफ और घर की बालकनी, खिड़कियों और छतों से लोग हाथ हिलाकर प्रधानमंत्री का अभिवादन कर रहे थे। प्रधानमंत्री भी सभी का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी का निधन

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पटना. बिहार के उपमुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार मोदी पिछले कुछ महीने से कैंसर से लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन उम्मीद थी कि वो कमबैक करेंगे. वो एक फाइटर आदमी थे, लेकिन जब उनके करीबी से पता चला कि बीमारी चौथे स्टेज में है, उनके वापसी की रही सही उम्मीद भी धुंधली हो गई. लोकसभा चुनाव की घोषणा के कुछ हफ्ते पहले ही उनसे मिलने की तीव्र इच्छा हुई. मैं उनसे बिना समय लिए ही मिलने जा पहुंचा. मैं चाहता था कि साथ में कॉफी पिएंगे और बिहार पर बातें करेंगे.

घंटों तक उनके पास बैठा रहा. जाते-जाते उन्होंने संसद में दिए गए भाषण का संग्रह मेरे हवाले किया और आग्रह किया कि इसको पूरा पढ़िएगा. 2020 में पटना आने के बाद अगर किसी विषय को लेकर उधेड़बुन में पड़ता, तो उनसे सीधा संपर्क करता. बिहार से जुड़े मामलों के वो बड़े जानकार थे. सुशील मोदी आर्थिक विषयों के जानकार थे और जीएसटी काउंसिल की सहजता से अध्यक्षता करते रहे थे.

आज की पीढ़ी में जितने बड़े नेता हैं, सबको सुशील मोदी से कुछ-न-कुछ सीखने को मिला. छात्र आंदोलन से निकले नेता सुशील मोदी नीतीश कुमार के साथी तो थे ही साथ-साथ दोनों की जुगलबंदी भी कमाल की थी. सुशील मोदी राजनीति में अपमानजनक और अनुचित के पक्षधर नहीं थे. नीतीश कुमार का बीजेपी गठबंधन से कई बार अलगाव हुआ, लेकिन वो नीतीश की मर्यादित आलोचना ही करते रहे.

ये परस्पर सम्मान नीतीश कुमार की तरफ से भी था. वो भी सुशील मोदी का उतना ही सम्मान करते रहे. सुशील मोदी निजी स्तर पर यारों के यार थे. अगर किसी की मदद करनी है तो वो आपको खड़े मिलते थे. चाहे स्थिति कितनी भी विषम हो. उन्होंने हजारों लोगों की जिंदगी को छुआ. उनको संबल दिया. ऐसे नेता विरले ही मिलते हैं.

मुंबई में आंधी-तूफान ने मचाया कत्लेआम, होर्डिंग गिरने से 12 की मौत

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मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब घाटकोपर में होर्डिंग गिरने की वजह से दर्दनाक हादसा हो गया और कई लोग काल की गाल में समा गए. मुंबई के घाटकोपर इलाके में धूल भरी आंधी और बारिश के दौरान एक पेट्रोल पंप पर 100 फुट लंबा अवैध विज्ञापन होर्डिंग गिर गया, जिसमें मरने वालों की संख्या 12 हो गई है, जबकि 70 से अधिक घायल हुए हैं. बीएमसी ने बताया कि घाटकोपर होर्डिंग हादसे में मरने वालों की संख्या 12 हो गई है. 43 घायलों का अब भी इलाज जारी है, जबकि 31 घायलों को डिस्चार्ज कर दिया गया है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने होर्डिंग गिरने के कारण लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मुंबई के घाटकोपर क्षेत्र में होर्डिंग गिरने से अनेक लोगों के हताहत होने का समाचार अत्यंत दुखद है. मैं शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त करती हूं. मैं घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं तथा राहत और बचाव कार्य की सफलता की कामना करती हूं.’

एक अधिकारी ने बताया कि घाटकोपर इलाके में एक पेट्रोल पंप पर होर्डिंग गिरने से 12 लोगों की मौत हो जाने के बाद मुंबई पुलिस ने ‘ईगो मीडिया’ के मालिक और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मालिक भावेश भिंडे और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 304 (गैर इरादतन हत्या), 338 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालकर गंभीर चोट पहुंचाना) और 337 (जल्दबाजी या लापरवाही से काम करके किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने देर शाम घाटकोपर में होर्डिंग गिरने की घटना के बाद घटनास्थल का दौरा किया और मुंबई शहर में सभी होर्डिंग के ढांचों की लेखा परीक्षा का आदेश दिया. उन्होंने होर्डिंग गिरने से मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की. नगर निकाय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की एक टीम उस स्थान पर पहुंच गई है जहां होर्डिंग गिरा था और तलाश एवं बचाव अभियान जारी है.

अभय सिन्हा कान्स 2024 में इंपा के प्रतिनिधिमंडल का करेंगे नेतृत्व

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पहली बार कान्स में इंपा के बूथ का उद्घाटन होगा

मुंबई। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इंपा) के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा के सबसे भव्य अवसर 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 में इंपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। अभय सिन्हा कांस के इंडियन पवेलियन में 15 मई 2024 को सुबह 11.15 बजे पैलैस-1, बूथ नंबर 24.0 इंपा बूथ के उद्घाटन में भाग लेंगे। इंपा के इतिहास में यह पहली बार होगा कि इंपा के पास कान्स में सदस्य निर्माता की फिल्मों के प्रचार के लिए एक बूथ होगा। इस मौके पर इंपा के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा, सिनीयर वाइस प्रेसिडेंट सुषमा शिरोमणि, वाईस प्रेसिडेंट अतुल पी. पटेल और एफ एम सी के जनरल सेक्रेटरी निशांत उज्ज्वल के साथ एच.ई. जावेद अशरफ (फ्रांस गणराज्य और मोनाको की रियासत में भारत के राजदूत), संजय जाजू (सचिव, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार), मैरिएन बोर्गो (फ्रांसीसी अभिनेत्री), राजपाल यादव (भारतीय अभिनेता) और पोलिश अभिनेत्री नतालिया जानोजेक भी भाग लेंगी। अभय सिन्हा 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारतीय रचनात्मक फिल्मों की स्क्रीनिंग में भी हिस्सा लेंगे।