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गौ हत्या और तस्करी करने वाले 4 कसाई गिरफ्तार

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Bhopal. भोपाल। बिलखिरिया थाना इलाके में गोवंश का वध करने के मामले में मंगलवार को चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने उनका जुलूस निकालते हुए उनके खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई की है। इनमें से तीन को पूछताछ के लिए एक दिन के रिमांड पर भी लिया है। इस मामले में फरार एक आरोपित की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। पुलिस अधीक्षक देहात प्रमोद कुमार सिन्हा के मुताबिक अमझारा के जंगल में एक साथ आधा दर्जन गायों की हत्याकर उनका मांस बेचने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान जहांगीराबाद में आम वाली मस्जिद के पास रहने वाले मो असलम, इस्लामपुरा तलैया निवासी अर्सलान कुरैशी, जिंसी चौराहा के पास रहने वाले मो सादिक एवं अमझरा निवासी नररुद्दीन के रूप में हुई।

इन्होंने जंगल में चरने गई गायों की हत्या करने के बाद मांस अजहर की लोडिंग पिकअप में भरकर बेचने के लिए भेज दिया था। अजहर की तलाश की जा रही है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त चाकू, बका के अलावा मृत गायों के सींग, कान का हिस्सा आदि भी बरामद किया है। आरोपित असलम, सादिक और अरसलान के खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई भी की गई है। पुलिस ने आरोपितों का इलाके में जुलूस भी निकाला। गिरफ्तार आरोपितों में से अर्सलान और सादिक रायसेन जिले के सलामतपुर में भी गोकशी की वारदात कर चुके हैं। उनके खिलाफ सलामतपुर थाने मे केस भी दर्ज है।

राजस्थान: जिले में गौ माता की सेवार्थ गौसवामणी का हुआ आयोजन

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राजस्थान: विक्रम संवत २०८१ आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (१४ जूलाई २०२४) को महावीर प्रसाद बंसल मीरा देवी बंसल निवासी डाबला बिहार हाल निवासी रायपुर छत्तीसगढ़ के द्वारा गौ माता की सेवार्थ गौसवामणी का आयोजन किया गया।

विस्तार

राजस्थान: विक्रम संवत २०८१ आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (१४ जूलाई २०२४) को महावीर प्रसाद बंसल मीरा देवी बंसल निवासी डाबला बिहार हाल निवासी रायपुर छत्तीसगढ़ के द्वारा गौ माता की सेवार्थ गौसवामणी का आयोजन किया गया।

विदित रहे महावीर मीरा देवी कमल खड़का वालों के मौसा मौसी हैं।कमल गौ सेवा के प्रति समर्पित हैं और सदैव सभी को गौ माता की सेवा के लिए प्रेरित करते रहते हैं उन्होंने भी गौशाला में सहयोग दिया है व गौसवामणी आयोजित करवाई है।विदित रहे बंसल परिवार गौ माता की सेवा के प्रति तथा सनातन धर्म के प्रति बहुत ही आस्थावान है और गौसेवा व धार्मिक कार्य में सदैव योगदान देता रहता है।

हम समस्त गौ सेवक आपका हार्दिक अभिनंदन करते हैं। ईश्वर व गौ माता की कृपा से आप व पूरा बंसल परिवार सदैव हंसता मुस्कुराता हुआ आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करें। सभी स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें। आप सभी को इस पृथ्वी पर समस्त सुख प्राप्त हो आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो यही हम समस्त गो सेवकों की ईश्वर से प्रार्थना है।

चरित्रवान माता-पिता ही सुसंस्कृत संतान बनाते हैं*    

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(द्वारका प्रसाद चैतन्य – विनायक फीचर्स)
अंग्रेजी में कहावत- ‘दि चाइल्ड इज ऐज ओल्ड ऐज हिज एनसेस्टर्स’ अर्थात् बच्चा उतना पुराना होता है जितना उसके पूर्वज। एक बार संत ईसा के पास आई एक स्त्री ने प्रश्न किया- बच्चे की शिक्षा-दीक्षा कब से प्रारंभ की जानी चाहिए? ईसा ने उत्तर दिया- गर्भ में आने के 100 वर्ष पहले से। स्त्री भौंचक्की रह गई पर सत्य वही है, जिसकी ओर ईसा ने इंगित किया। सौ वर्ष पूर्व जिस बच्चे का अस्तित्व नहीं होता, उसकी जड़ तो निश्चित ही होती है, चाहे वह उसके बाबा हों या परबाबा। उनकी मन:स्थिति, उनके आचार, उनकी संस्कृति पिता पर आई और माता-पिता के विचार, उनके रहन-सहन, आहार-विहार से ही बच्चे का निर्माण होता है। कल जिस बच्चे को जन्म लेना है, उसकी भूमिका हम अपने में लिखा करते हैं। यदि यह प्रस्तावना ही उत्कृष्ट न हुई तो बच्चा कैसे श्रेष्ठ बनेगा? भगवान राम जैसे महापुरुष का जन्म रघु, अज और दिलीप आदि पितामहों के तप की परिणति थी, तो योगेश्वर कृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के कई जन्मों की तपश्चर्या का पुण्यफल था। अठारह पुराणों के रचयिता व्यास का आविर्भाव तब हुआ था, जब उनकी पांच पितामह पीढिय़ों ने घोर तप किया था। हमारे बच्चे श्रेष्ठ,सद्गुणी बनें, इसके लिए मातृत्व और पितृत्व को गंभीर अर्थ में लिए बिना काम नहीं चलेगा।
महाभारत के समय की घटना है। द्रोणाचार्य ने पांडवों के वध के लिए चक्रव्यूह की रचना की। उस दिन चक्रव्यूह का रहस्य जानने वाले एकमात्र अर्जुन को कौरव बहुत दूर तक भटका ले गए। इधर पांडवों के पास चक्रव्यूह भेदन का आमंत्रण भेज दिया। जब सारी सभा सन्नाटे में थी, तब 16 वर्षीय राजकुमार अभिमन्यु खड़े हुए और बोले- ‘मैं चक्रव्यूह भेदन करना जानता हूं।‘ युधिष्ठिर ने साश्चर्य प्रश्न किया- ‘तात! मैंने तो तुम्हें कभी भी चक्रव्यूह सीखते नहीं देखा, और न ही सुना।‘  अभिमन्यु ने कहा- ‘जब मैं अपनी मां सुभद्रा के पेट में था। मां को जब प्रसव पीड़ा प्रारंभ हुई, तब मेरे पिता अर्जुन पास ही थे। मां का ध्यान दर्द की ओर से बंटाने के लिए उन्होंने चक्रव्यहू के भेदन की क्रिया बतानी प्रारंभ की। छह द्वारों के भेदन की क्रिया बताने तक मेरी मां ध्यान से सुनती रहीं और गर्भ में बैठा हुआ मैं उसे सीखता चला गया पर सातवें और अंतिम युद्ध की बात बताने से पूर्व ही मां को निद्रा आ गई, उन्हीं के साथ में भी विस्मृति में चला गया। उसके बाद मेरा जन्म हो गया। छह द्वार तो मैं आसानी से तोड़ लूंगा। सातवें में सहायतार्थ आप सब पहुंच जाएंगे तो उसे भी तोड़ लूंगा।‘
यह घटना उस सत्य की ओर संकेत करती है कि पुत्र गर्भ में आए उससे पूर्व ही माता-पिता को अपनी शारीरिक और मानसिक तैयारी प्रारंभ कर देनी चाहिए। वर्षों पहले अमेरिका में जन्मे एक बालक की बड़ी चर्चा चली। इस बालक की आंख में ‘जे’ और ‘डी’ की आकृति उभरी हुई थी। वैज्ञानिकों ने उसकी बहुत जांच की पर कारण न जान पाए। आखिर इस गुत्थी को मनोवैज्ञानिक ने सुलझाया। युवती ने उन्हें बताया कि मैं अपने विद्याध्ययन काल से ही जान डिक्सन की विद्वता से प्रभावित रही हूं। मेरी सदा से यह इच्छा रही है कि मेरी जो संतान हो वह जान डिक्सन की तरह ही विद्वान हो। मैंने अपनी यह इच्छा कभी किसी को बताई तो नहीं पर जब भी इस बात की याद आती, मैं अक्सर दीवार या कापी पर जे.डी. अक्षर लिखकर अपनी स्मृति को गहरा करती रही हूं। उन्होंने अपने अध्ययनकाल की कई कॉपियां और पुस्तकें भी दिखाईं, जिनमें जे.डी. लिखा मिला।
हमारे पूर्वज इन तथ्यों  से पूर्ण परिचित थे, तभी उन्होंने न केवल ऐसी जीवन-व्यवस्था निर्मित की थी, जिससे जाति स्वत: ही श्रेष्ठ आचरण वाली संतान देती चली जाती है। गर्भाधान को उन्होंने षोड्स संस्कारों में से एक संस्कार माना था और उसे पूर्ण पवित्रता के साथ संपन्न करने की प्रथा प्रचलित की थी। बालक का निर्माण माता-पिता भावभरे वातावरण में किया करते थे और जैसी आवश्यकता होती थी, उस तरह की संतान समाज को दे देते थे। सती मदालसा ने अपने तीनों पुत्रों विक्रांत, सुबाहु और अरिदमन को जो शिक्षा-दीक्षा और संस्कार दिए, वे पारमार्थिक और पारलौकिक थे। फलत: उन तीनों ने ही प्रौढ़ावस्था में पहुंचने से पूर्व ही संन्यास धारण कर अपना सारा जीवन लोकमंगल में लगा दिया। वह कहा करती थीं- हे पुत्र! तू अपनी जननी मदालसा के शब्द सुन। तू शुद्ध है, बुद्ध है, निरंजन है, संसार की माया से रहित है। यह संसार स्वप्न मात्र है। उठ, जाग्रत हो, मोहनिद्रा का परित्याग कर। तू सच्चिदानंद आत्मा है, अपने स्वरूप का ज्ञान प्राप्त कर।
महारानी की शिक्षा से महाराज ऋतुध्वज बहुत चिंतित हुए। उन्होंने मदालसा से कहा कि यदि ऐसा ही रहा तो राज-काज कौन संभालेगा? इस बार जो पुत्र हुआ, उसे मदालसा ने राजनीति की शिक्षा दी और कहा-‘हे तात! तुम राज्य करो। अपने मित्रों को आनंदित करो, सज्जन पुरुषों की रक्षा करना, यज्ञ करना, गौ और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए युद्ध अनिवार्य हो तो युद्ध करना, भले ही रणभूमि में तुम मृत्यु को प्राप्त हो।‘
ये उदाहरण इस बात के प्रतीक हैं कि बालक माता-पिता के शारीरिक और मानसिक सांचे और ढांचे में ढले, समाज एवं संस्कृति द्वारा संस्कारित मिट्टी के पुतले होते हैं। जैसे माता-पिता होंगे, वैसी ही संतान होगी। राम वन गए, तब की घटना है। राम ने लक्ष्मण के चरित्र की परीक्षा लेनी चाही। उन्होंने प्रश्न किया- ‘हे लक्ष्मण! सुंदर पुष्प, पके हुए फल और मदमस्त यौवन देखकर ऐसा कौन है, जिसका मन विचलित न हो जाए?’ इस पर लक्ष्मण ने उत्तर दिया- ‘आर्य श्रेष्ठ! जिसके पिता का आचरण सदैव से पवित्र रहा हो, जिसकी माता पतिव्रता रही हो, उनके रज-वीर्य से उत्पन्न बालकों के मन कभी चंचल नहीं हुआ करते।‘
लक्ष्मण का यह उपेदश माता-पिता को यह सोचने के लिए विवश करता है कि यदि श्रेष्ठ संतान की आवश्यकता है तो उसे ढालने के लिए अपना चरित्र सांचे की तरह बनाना चाहिए।
संस्कारों की पूर्व सूत्रधार माता ही है। वह जिस तरह के संकल्प और विचार बच्चे में पैदा करती है, वैसी ही उसमें ग्रहणशीलता और आविर्भाव हो जाता है और बाद में उसी तरह के तत्व वह संसार में ढूंढ़कर अपने संस्कारजन्य गुणों का अभिवर्द्धन करता है। संस्कारवान माताएं बच्चों के चरित्र की नींव बाल्यावस्था में डालती हैं।
संतान के रूप में जीवात्मा का अवतरण और उसकी विकास-यात्रा में योग देना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पिता गर्भधारण में केवल सहयोग प्रदान करता है, बाद में उस गर्भ को पकाने का कार्य माता ही करती है, इसलिए पिता की अपेक्षा माता का उत्तरदायित्व अधिक है। बिना उचित ज्ञान और स्थिति की जानकारी हुए माता इस कत्र्तव्य का भलीभांति पालन कर सकती है, यह असंभव है। अतएव महिलाओं को यह ज्ञान होना नितांत आवश्यक है कि संतान कामवासना का परिणाम नहीं है, काम तो मात्र एक प्रेरक तत्व है, जो एक आत्मा के अवतरण के लिए माता-पिता को प्रेरित करता है।
गर्भावस्था में बच्चा अपनी माता के केवल प्रकट आचरण से ही प्रभावित नहीं होता, उससे तो बहुत हल्का असर बालक की मनोभूमि पर पड़ता है, अधिकांश प्रभाव तो मानसिक भावनाओं और विचारणाओं का होता है। (विनायक फीचर्स)

छत्तीसगढ़ – गौ वंश के अवैध परिवहन पर सरकार ने सख्ती दिखाई

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रायपुर। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी गौ वंश के अवैध परिवहन पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। इस संबंध में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आज ही आदेश जारी किया है। जिसके अनुसार सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर परिवहन अवैध होगी।

गौ तस्करी अब गैर जमानती अपराध माना जाएगा। अवैध परिवहन पाए जाने पर सात साल तक की सजा और पचास हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश के जिस रूट पर अवैध परिवहन पाया जाता है वहां के एसपी और थाना प्रभारी का सीआरभी खराब होगा।

आदेश में कहा गया है कि ⁠अवैध परिवहन करने वालों पर ही बर्डन ऑफ प्रूफ की जिम्मेदारी होगी। ⁠परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ी में फलैक्स लगाने की अनिवार्यता होगी। अवैध परिवहन में इस्तेमाल गाड़ी राजसात की जाएगी। वाहन मालिकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। गौ वंश के अवैध परिवहन को रोकने जिला स्तर पर एक राजपत्रित अधिकारी की नियुक्ति होगी। ये नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। अवैध परिवहन के पुराने प्रकरणों को जिलेवार एकत्रित किया जाएगा. आदतन अपराधियों को ट्रैक किया जाएगा. उन रास्तों पर भी निगरानी कड़ी होगी, जहां से अवैध परिवहन किया जाता रहा है.

ये हैं प्रमुख प्रावधान
पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 अनुसार पशुओं को मारने, ठोकर मारेगा, उस पर अत्यधिक सवारी करेगा, अत्यधिक बोझ लादेगा या किसी यान में ऐसे रीति से ले जाएगा, जिससे उसे यातना पहुंचती है या उसे परिरूद्ध करेगा, पर्याप्त खाना, जल या आश्रय नहीं देगा, उनके विरुद्ध दांडिक कार्यवाही किए जाने का प्रावधान किया गया है।
गौवंश एवं दुधारू पशुओं की तस्करी एवं वध की घटनाओं के रोकथाम के लिए आसूचना तंत्र विकसित किया जाएगा।
गौवंश का वध व वध किए जाने का प्रयास किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुसंगत धाराओं में अपराध दर्ज कर अभियुक्तों की पहचान स्थापित करते हुए कार्यवाही की जाएगी।
गौवंश एवं दुधारू पशुओं को अवैध परिवहन (तस्करी) के दौरान जब्त करने पर नियमानुसार संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए गौशाला कांजी हाउस या संबंधित संस्था को सुपुर्दगी में दिया जाएगा।
पशु वध शालाओं के विरुद्ध जिला मजिस्ट्रेट के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।
गौवंश का परिवहन सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निर्धारित प्रारूप में अनुज्ञापत्र के बिना परिवहन न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
अनुज्ञापत्र धारक वाहनों में मवेशी के परिवहन करते समय पृथक से ऐसे वाहनों पर फ्लैक्स/बैनर लगाकर चिन्हाकिंत किया जाएगा कि ऐसे वाहन में गौवंश का परिवहन किया जा रहा है।
अवैध रूप से गौवंश परिवहन करने वाले वाहनों को राजसात किया जाएगा एवं वाहन मालिक पर भी आपराधिक दाण्डिक कार्यवाही किया जाएगा
प्रकरण में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
आरोपी, संदिग्ध, गवाह व मुखबीर से सघन पूछताछ करते हुए सूचना एकत्रित किया जाएगा।
विगत वर्षों में हुई घटनाओं की जानकारी संकलित व सूचीबद्ध करते हुए तस्करी के रूट, संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित करते हुए विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी।
जिला/थाना स्तर पर गौवध तथा गौवंश की तस्करी की घटनाओं में संलिप्त व्यक्तियों को चिन्हित कर इनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष रूप से अवैध परिवहन (तस्करी) रोकने संवेदनशील क्षेत्रों में स्थैतिक सर्विलेंस पाइंट स्थापित की जाएगी।
तस्करी में प्रयोग होने वाले संभावित मार्गों पर निरंतर पेट्रोलिंग की जाएगी।
अभियुक्तों द्वारा अवैध तस्करी से अर्जित सम्पत्ति को चिन्हित करते हुए नियमानुसार जब्ती/कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
विगत वर्षों की घटनाओं में संलिप्त अभियुक्तों की सूची तैयार कर आदतन अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी।
अपराध में संलिप्त सह-अभियुक्तों व सहयोगियों को चिहिन्त कर उन पर सतत् निगरानी रखी जाएगी।
उक्त प्रकरणों में अपराध विवेचना के साथ वित्तीय जांच एवं मनीट्रेल का भी पता लगाया जाएगा।
उक्त घटनाओं की रोकथाम के लिए अन्य विधि प्रवर्तक एजेंसी व राज्यों के साथ भी जानकारी साझा की जाएगी।
जिला स्तर पर गौवंश के वध तथा गौवंश व दुधारू पशुओं की तस्करी (अवैध परिवहन) से संबंधित समस्त लम्बित प्रकरणों की सूची तैयार कर इनका समुचित पर्यवेक्षण/मानिटरिंग करते हुए शीघ्र कार्यवाही पूर्ण कराकर निराकरण किया जाए।
दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा किया जाकर विवेचना की कमियों की पूर्ति के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए।
न्यायालय में विचाराधीन मामलों की अभियोजन में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, जिससे अभियुक्तों की जमानत का लाभ न मिल सके तथा अभियुक्त को अभियोजित किया जा सके।
जिला स्तर पर एक राजपत्रित अधिकारी को उक्त घटनाओं की रोकथाम व पर्यवेक्षण करने नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी व इसकी जानकारी सभी थानों/जिला स्तर/सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि उक्त घटनाओं के संबंध में जानकारी नोडल अधिकारी को प्रदान की जा सके।
यदि किसी पुलिस अधिकारी/कर्मचारी की गौवंश के वध, गौवंश व दुधारू पशुओं की तस्करी (अवैध परिवहन) की कार्यवाही में किसी प्रकार की शिथिलता व संलिप्तता पायी जाती है तो उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.

स्टंटमैन से निर्देशक बने जेम्स जॉन बरला की हिंदी फिल्म “रॉकी दी स्लेव” 26 जुलाई 2024 को होगी सिनेमाघरों में रिलीज़

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अक्षय कुमार की फिल्म इंटरनेशनल खिलाड़ी, और सनी देओल की फिल्म बॉर्डर, ज़िद्दी सहित दर्जनों फिल्मो में स्टंटमैन के रूप में जान जोखिम में डाल कर एक्शन करने वाले जेम्स जॉन बरला अब फिल्म डायरेक्टर बन गए हैं। स्टंटमैन के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत करने के बाद एक्शन डायरेक्टर फिर लेखक निर्देशक बने जेम्स जॉन बरला की हिंदी फिल्म “रॉकी दी स्लेव” 26 जुलाई 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है और यह फिल्म भी जबरदस्त और रियल एक्शन से भरपूर है।

हजारीबाग (झारखंड) से 80 के दशक में मुम्बई आए जेम्स जॉन बरला की जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्म की स्टोरी से कम नही है। 14 वर्ष की छोटी सी उम्र में वे झारखंड से मुंबई आ गए थे। उन्होंने मायानगरी में बहुत कठिन संघर्ष किया फुटपाथ पर भी समय बिताया लेकिन हिम्मत नहीं हारी। तमाम परेशानियों का उन्होंने एक योद्धा की तरह सामना किया और बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। हालांकि स्टंटमैन के रूप में उन्होंने जान हथेली पर रखकर शॉट्स दिए और वह भी उस दौर में जब इस तरह के खतरनाक सीक्वेंस के लिए सुरक्षा उपाय बहुत कम थे। जब एक्शन डायरेक्टर उन्हें बहु मंजिला बिल्डिंग से कूदने के लिए कहते तो जेम्स प्रभु का नाम लेकर निर्भीकता पूर्वक कूद जाते थे। हां कांच टूटने के सीन के दौरान कई बार वह चोटिल हुए। जेम्स ने सुपरस्टार अक्षय कुमार का आभार जताया कि उनके प्रयास से स्टंटमैन को इंश्योरेंस पॉलिसी मिल सका है।
स्टार एंजेल फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनी फिल्म रॉकी द स्लेव की निर्मात्री शोभा बरला हैं। फिल्म में शक्ति कपूर, दलीप ताहिल, सुदेश बेरी, मुश्ताक खान, प्रदीप काबरा जैसे कलाकारों ने अभिनय किया है। रॉकी का टाइटल रोल ईसा ने निभाया है जबकि रॉकी के बचपन के रोल में रिचर्ड बरला नज़र आएंगे, वहीं इस फिल्म की हिरोइन लेजली त्रिपाठी हैं।
फिल्म के निर्देशक और एक्शन डायरेक्टर जेम्स जॉन बरला ने बताया कि उन्होंने ही इस फिल्म की कहानी लिखी है। दरअसल यह फिल्म गुलामी की मानसिकता रखने वालों के विरुद्ध एक आवाज है कि आप किसी को ज्यादा दिनों तक गुलाम या स्लेव बनाकर नहीं रख सकते जब वह जागता है तो फिर रॉकी जैसा तूफान सामने आता है जो बड़ी तबाही मचाता है।


फिल्म की प्रोड्यूसर शोभा बरला ने कहा कि रॉकी द स्लेव दरअसल एक मनोरंजक सिनेमा है जिसमें अच्छी कहानी भी है, खतरनाक एक्शन भी है, ड्रामा भी है, रोमांस और सस्पेंस भी है। फिल्म की शूटिंग मुम्बई के स्टूडियो और कुछ जगहों पर की गई है।
फिल्म के निर्देशक एवं एक्शन डायरेक्टर जेम्स जॉन बरला ने बताया कि रॉकी द स्लेव के निर्माण में सभी कलाकारों और तकनीशियनों ने कड़ी मेहनत की है। हमें आशा है कि एक्शन फिल्मों के दीवाने दर्शकों को यह फिल्म पसंद आयेगी। फिल्म में चार अलग अलग सिचुएशन के गाने हैं। एक आइटम सॉन्ग ममता शर्मा ने गाया है जबकि फ़िल्म का टाइटल सॉन्ग अमेरिका के सिंगर अजिताभ रंजन (एजे रंजन) ने गाया है। एक लोरी अल्का याग्निक ने गाई है वहीं ऋतु पाठक की आवाज में एक रोमांटिक गीत है।
फिल्म का प्रचार वनअप रिलेशन्स द्वारा किया जा रहा है।

श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने डॉ. निकेश जैन माधानी को गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान से किया सम्मानित

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मुंबई: गाय की महिमा और संरक्षण पर आधारित दुनिया का पहला समाचार पत्र गऊ भारत भारती’ की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में “गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2024” पुरस्कार समारोह का आयोजन 14 जुलाई 2024 को मुक्ति कल्चरल हब, अंधेरी पश्चिम, मुंबई में संजय शर्मा अमान द्वारा आयोजित किया गया।

इस समारोह में श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज आशीर्वाद देने पहुंचे और उन्होंने अतिथियों और कई गणमान्य लोगों को सम्मानित भी किया। सभागार में उपस्थित अतिथियों की भीड़ में से अपने प्रवचन के दौरान महाराज ने डॉ. निकेश जैन माधानी को बुलाया और आशीर्वाद दिया। महाराज स्वयं उन्हें देखकर प्रसन्न हुए क्योंकि डॉ निकेश जैन ने गले में बहुत सारा सोना पहना हुआ था जिसे देख स्वामी ने गोकुल की पहचान बताया।
डॉ. निकेश जैन मंच पर महाराज के आशीर्वचन सुनकर अभिभूत हो गए।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माधवी लता (भाजपा नेता, हैदराबाद), मुक्ति हॉल की संस्थापक व फिल्म निर्मात्री स्मिता ठाकरे, निर्माता निर्देशक प्रेम सागर, भाजपा नेता और समाजसेवी राम कुमार पाल, शेखर मुंदड़ा, प्रिंसिपल अजय कौल, प्रशांत काशिद, महेंद्र संगोई, गिरीश जयंतीलाल शाह, बिमल भूटा, सुनील सेठी, चिराग गुप्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, पत्रकार वागीश सारस्वत और मॉडल एक्ट्रेस एवं राजस्थान सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर सीमा मीना सहित कई गौ सेवक और गौ संरक्षकों की विशेष उपस्थिति रही।

– संतोष साहू

शरवरी ने शुरू की अल्फा के लिए जबरदस्त तैयारी

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मुंबई। बॉलीवुड की उभरती स्टार शरवरी जल्द ही अपनी अगली फिल्म ‘अल्फा’ की शूटिंग शुरू करने वाली हैं, जो कि YRF स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा है। इस फिल्म में वे सुपरस्टार आलिया भट्ट के साथ काम कर रही हैं। ‘अल्फा’ की शूटिंग शुरू करने से कुछ दिन पहले, शरवरी ने सोशल मीडिया पर अपनी जबरदस्त फिटनेस गोल्स देते हुए फोटो शेयर किया है।

शरवरी ने अपने फैंस और इंटरनेट पर लोगों से आग्रह किया कि वे कभी भी सोमवार का वर्कआउट मिस न करें, और इसके लिए उन्होंने अपनी कुछ शानदार तस्वीरें साझा की हैं, जिसमें वे बेहद फिट और तंदुरुस्त दिख रही हैं।

शरवरी की पोस्ट यहाँ देखें: https://www.instagram.com/p/C9bo32rt8c9/?igsh=aG41dDVtbTFvbW5i

शरवरी जल्द ही निखिल आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वेदा़’ और फिर आदित्य चोपड़ा की ‘अल्फा’ में दिखाई देंगी। ‘अल्फा’ का निर्देशन YRF के युवा और प्रशंसित निर्देशक शिव रवैल कर रहे हैं, जिन्होंने ‘द रेलवे मेन’ से ख्याति प्राप्त की है।

गोदरेज ने लॉन्च किया गुडनाइट लिक्विड वेपोराइजर में भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित मच्छर भगाने वाला मॉलिक्यूल

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मुंबई। भारत देश ने मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) के वैज्ञानिकों ने अपने साझेदार के साथ मिलकर ‘रेनोफ्लुथ्रिन’ विकसित किया है। यह भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित और पेटेंट किया गया मॉलिक्यूल है जो मच्छर नियंत्रण के लिए सबसे प्रभावी लिक्विड वेपोराइजर फॉर्मूलेशन बनाता है।

रेनोफ्लुथ्रिन से बने फॉर्मूलेशन भारत में वर्तमान में उपलब्ध लिक्विड वेपोराइजर फॉर्मेट में किसी भी अन्य पंजीकृत फॉर्मूलेशन की तुलना में मच्छरों के खिलाफ दोगुना प्रभावी है। घरेलू कीटनाशकों की श्रेणी में अग्रणी जीसीपीएल अपने नए गुडनाइट फ्लैश लिक्विड वेपोराइजर में रेनोफ्लुथ्रिन फॉर्मूलेशन पेश कर रहा है, जो भारत का सबसे प्रभावशाली लिक्विड वेपोराइजर है।
हर दशक में मच्छरों से लड़ने के लिए नए मॉलिक्यूल फॉर्मूलेशन की जरूरत पड़ती है। पिछले इनोवेशन के 15 साल से ज्यादा समय बीतने के बाद, भारत में बड़ी संख्या में लोग मच्छरों को भगाने के लिए अगरबत्ती जैसे हाइली पोटेंट रिप्लेंट फॉर्मेट आजमाने लगे हैं, इनमें अपंजीकृत और अवैध चीनी विकसित मॉलिक्यूल का इस्तेमाल किया जाता है। इसने विभिन्न चैनलों से भारत में अपंजीकृत और अवैध चीनी पोटेंट रिप्लेंट मॉलिक्यूल की आमद को भी बढ़ावा दिया है।
जीसीपीएल ने हमेशा सुरक्षित और प्रभावी नए मॉलिक्यूल फॉर्मूलेशन लॉन्च करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। जीसीपीएल और उसके साझेदार ने ‘रेनोफ्लुथ्रिन’ और इसके फॉर्मूलेशन को विकसित करने के लिए 10 साल से ज़्यादा समय तक शोध और विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया। एक साझेदार द्वारा पेटेंट किए जाने के बाद, जीसीपीएल के पास मध्यम अवधि तक भारत में इस मॉलिक्यूल के विशेष उपयोग के अधिकार हैं।
इस मॉलिक्यूल की सफलता पर टिप्पणी करते हुए गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) के एमडी और सीईओ सुधीर सीतापति ने कहा कि इनोवेशन की 127 साल की विरासत के साथ गोदरेज ने भारत में कई घरेलू नवाचार पेश किए हैं। विशेष रूप से, हमने अगरबत्ती जैसे मच्छर भगाने वाले उत्पादों का व्यापक उपयोग देखा है, जिसमें विभिन्न चैनलों से भारत में प्रवेश करने वाले अपंजीकृत और अवैध चीनी मॉलिक्यूल शामिल हैं। रेनोफ्लुथ्रिन भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित मच्छर भगाने वाला मॉलिक्यूल है जो लोगों को अवैध मॉलिक्यूल वाले उत्पादों का उपयोग करने से रोकेगा। यह इनोवेशन भारत को आत्मनिर्भर बनाता है क्योंकि अब हमें अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मॉलिक्यूल का आयात नहीं करना पड़ेगा। रेनोफ्लुथ्रिन सबसे अधिक पाए जाने वाले मच्छरों जैसे एनोफिलीज, एडीज और क्यूलेक्स आदि के खिलाफ प्रभावी है।
बाल रोग विशेषज्ञ और भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (आइएपी) के वरिष्ठ सदस्य डॉ. समीर दलवई ने कहा, “मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियां न केवल गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करती हैं, बल्कि इनका इलाज जेब पर भी बड़ा बोझ है। इसलिए, मच्छरों के खिलाफ जबरदस्त सुरक्षा होना जरूरी है। इन बीमारियों से निपटने के लिए उपाय सुझाते समय मैं प्रभावकारिता, सुरक्षा और दीर्घकालिक विश्वसनीयता को प्राथमिकता देता हूं। रेनोफ्लुथ्रिन जैसे नए मॉलिक्यूल की शुरूआत मच्छर जनित बीमारियों को रोकने में मदद करेगी। रेनोफ्लुथ्रिन मलेरिया और डेंगू के लिए जिम्मेदार आम मच्छर प्रजातियों को लक्षित करते हुए कई स्तर पर सुरक्षा देता है। इसका तुरंत प्रभाव और सुरक्षा मच्छरों की आबादी घटाने और इनसे होने वाली बीमारियों के संचरण को कम करने में एक दुर्जेय उपकरण बनाती है।
गुडनाइट द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि 63% भारतीय अपने परिवार को मच्छरों से बचाने के लिए लिक्विड वेपोराइजर को अपनी पहली पसंद मानते हैं। ऐसे में जीसीपीएल ने गुडनाइट फ्लैश लिक्विड वेपोराइजर में क्रांतिकारी मॉलिक्यूल रेनोफ्लुथ्रिन को शामिल किया है। नया लिक्विड वेपोराइजर मच्छरों को 2 गुना तेजी से भगाएगा और बंद होने के बाद भी 2 घंटे तक काम करेगा। सुधीर सीतापति ने आगे कहा,जीसीपीएल को मध्यम अवधि में इस पेटेंटेड रेनोफ्लुथ्रिन अणु का उपयोग करने का स्पेशल राइट मिले हैं। यह गुडनाइट फ्लैश लिक्विड वेपोराइजर फॉर्मूलेशन को बाजार में उपलब्ध किसी भी अन्य फॉर्मूलेशन की तुलना में 2 गुना अधिक प्रभावी है। हालांकि रेनोफ्लुथ्रिन अभी भारत में ही इस्तेमाल होगा लेकिन हमें लगता है कि हमारे परिचालन वाले अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस मॉलिक्यूल के लिए काफी संभावनाएं हैं।
गुडनाइट फ्लैश की पूरी पैक (रीफिल + वेपोराइजर मशीन) की कीमत लगभग 100 रुपए है, जिसमें रीफिल केवल 85 रुपये प्रति पैक पर उपलब्ध है। देश भर के शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध है।

विधायक क्षितिज ठाकुर के जन्मदिन पर बहुजन विकास वैद्यकीय अघाड़ी इलेक्ट्रो होमियोपैथी द्वारा निःशुल्क दवाई वितरण

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नालासोपारा। वसई विरार के युवा आमदार क्षितिज ठाकुर के जन्मदिवस पर बहुजन विकास वैद्यकीय आघाड़ी और इलेक्ट्रो होम्योपैथी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में फ्री डायबिटीज चेकअप और फ्री इलेक्ट्रो होम्योपैथी मेडिसिन का वितरण किया गया। जिसमें इलेक्ट्रो होम्योपैथी के कई चिकित्सकों ने अपनी सेवा प्रदान की। इस कार्यक्रम का संचालन और व्यवस्थापन बहुजन विकास वैद्यकीय आघाड़ी के संयोजक डॉ आई के सिंह चौहान और इलेक्ट्रो होम्योपैथी फाउंडेशन और बहुजन विकास वैद्यकीय आघाड़ी के पालघर जिला अध्यक्ष डॉ यू बी सरोज द्वारा किया गया तथा डाइबीटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर एक्सपर्ट डॉ जेएस यादव योगाचार्य द्वारा जांच और औषधि वितरण की व्यवस्था की गई। जिसमें सीनियर इलेक्ट्रो होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ संजय सिंह, डॉ अरुण सिंह का मार्गदर्शन रहा तथा अन्य डॉ कुंदन सिंह, डॉ सी एस यादव, डॉ एस आर यादव, डॉ नितेश विश्वकर्मा, डॉ रमेश शुक्ला, डॉ महिन्द्रा, डॉ आनंद चक्रवर्ती, डॉ सतीश शर्मा ने सहयोग करके कार्यक्रम को सफल बनाया।इसके साथ ही संतोष भवन के नगरसेवक सचिन देसाई का भी बहुत सहयोग रहा। वे खुद उपस्थित रहकर फ्री इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा शिविर की गतिविधियों में हाथ बटाकर सहयोग किया। इसके साथ पूरा चिकित्सक मंडल अपने विधायक क्षितिज ठाकुर से मिलने पहुंचा जहां पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी गई।उन्होंने भी चिकित्सकों का बड़े ही आत्मीयता से सम्मान किया और चिकित्सक मंडल उनको जन्मदिन की बधाई और शुभकामना दी।

वहीं इस पूरे कार्यक्रम की जानकारी विधायक के पिता हितेंद्र ठाकुर (अप्पा) को दी गई, वह भी बड़े आत्मीयता से मिलकर खुशी जाहिर की, और सभी डॉक्टर को इसी तरह से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सकों को कहीं कोई परेशानी हो तो हमसे मिलें, हम समस्या का समाधान करेंगे।

गौरीशंकर चौबे ने की शताब्दी हॉस्पिटल में आईसीयू बेड बढ़ाने की मांग

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दिंडोशी विधानसभा के नागरिकों की मांग पर द्वारकामाई चैरिटी संस्था ने की पहल

मुम्बई उपनगर की लगभग 15 लाख जनसंख्या के अनुपात में नगण्य है आईसीयू बेड की संख्या

मुम्बई। दिंडोशी विधानसभा के नागरिकों की मांग और उपनगर की जरूरतों के आधार पर द्वारकामाई चैरिटी संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरीशंकर चौबे ने शासन-प्रशासन को लिखित पत्र देकर कांदिवली पश्चिम स्थित डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर (शताब्दी) हॉस्पिटल में आईसीयू बेड की संख्या 500 से 1000 तक बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि केवल मुम्बई उपनगर की जनसंख्या लगभग 15 लाख के करीब पहुंच गई है और जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस जनसंख्या के अनुपात में आईसीयू बेड की संख्या नगण्य है।


बता दें कि मुम्बई उपनगर के गरीब मरीजों के लिए कांदिवली में शताब्दी हॉस्पिटल ही एकमात्र विकल्प है। गौर करने वाली बात यह है कि पालघर जिला के वसई-विरार और मीरा-भायंदर के निवासी भी सबसे पहले इसी अस्पताल में अपना इलाज करवाने आते हैं लेकिन आईसीयू बेड की उपलब्धता के अभाव में उन्हें कूपर, नायर, केईम जैसे बड़े हॉस्पिटलों में भेज दिया जाता है।
श्री चौबे ने पत्रकारों को बताया कि वह जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री और सम्बन्धित विभाग अधिकारियों से भेंट कर इस विषय पर उनका ध्यान आकृष्ट करेंगे।